भारतीय संविधान की जब भी चर्चा होगी, मधेपुरा सदा याद आता रहेगा- डॉ.मधेपुरी

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद दिल्ली में कांस्टीट्यूएंट असेंबली यानि भारतीय संविधान सभा की बैठक बुलाई गई, जिसमें मधेपुरा जिले के चतरा-ग्राम निवासी कमलेश्वरी प्रसाद यादव भी संविधान सभा के सदस्य के रूप में उपस्थित थे। तीन विषयों में एमए ‘यादव जी’ विधायक बनकर समाजसेवी बने। अनेक विद्यालयों व महाविद्यालयों के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले यादवजी संविधान सभा के सदस्य चुने गए और अपनी विद्वता व अनुभव से संविधान निर्माण वाली बहस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे।

जानिए कि सर्वाधिक वरिष्ठ सदस्य होने के चलते डॉ.सच्चिदानंद सिन्हा को प्रोटेम अध्यक्ष बनाया गया था, जिनकी अध्यक्षता में डॉ.राजेंद्र प्रसाद स्थाई अध्यक्ष चुने गए तथा भीमराव अंबेडकर को ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया।  भारतीय संविधान के निर्माण में कुल 2 वर्ष 11 महीना 18 दिन लगे। 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो गया था- भारत का संविधान।  भारतीय संविधान में एकता, अखंडता और आम लोगों के अधिकारों… का विस्तृत वर्णन है।

कुछ समय बाद डॉ.सच्चिदानंद सिन्हा पटना में बीमार चल रहे होते हैं। प्रथम अध्यक्ष होने के नाते संविधान की मूल प्रति पर उनका भी हस्ताक्षर होना अनिवार्य था। बीमारी के कारण उनका दिल्ली पहुंचना संभव नहीं था। जब यह सुना गया कि भारतीय संविधान की मूल प्रति ट्रेन से पटना आ रहा है तो कल्पना कीजिए वहां कैसा कुतूहल रहा होगा। जिस समय रोग-शैय्या पर डॉ.सच्चिदानंद सिन्हा 13 जनवरी 1950 को भारत के नए संविधान पर हस्ताक्षर कर रहे थे तो वहां पर विशिष्ट लोगों में से एक थे- मधेपुरा जिले के प्रखर स्वतंत्रता सेनानी व बिहार के प्रथम विधि मंत्री शिवनंदन प्रसाद मंडल।

अंत में यह भी कि टीपी कॉलेज मधेपुरा के संस्थापक प्राचार्य रतन चंद व उनकी धर्मपत्नी गार्गी चंद के निकटतम संबंधी व संस्कृत के उद्भट विद्वान  डॉ.मंगलदेव शास्त्री भारत के संविधान को संस्कृत में अनुवाद कर महामहिम राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत भी हुए हैं।  बकौल, समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, उपर्युक्त तथ्यों के साथ-साथ उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान की जब कभी चर्चाएं होंगी तो मधेपुरा सदा याद आता रहेगा और मधेपुरा के लोग सदैव गौरवान्वित होते रहेंगे।

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