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नीति आयोग की बैठक में छाए रहे बिहार और नीतीश कुमार

राजधानी दिल्‍ली में रविवार को संपन्‍न नीति आयोग के गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बिहार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छाए रहे। मुख्यमंत्री ने इस बैठक में बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग एक बार फिर पुरजोर तरीके से रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग के शासी परिषद की चौथी बैठक में अपनी मांग दोहराते हुए उन्होंने विकास के मानकों के साथ-साथ मानव विकास से संबंधित सूचकांक में बिहार के पिछड़ेपन का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही उन्होंने सात निश्चय के तहत चल रहे कार्यक्रमों तथा सामाजिक अभियान के अंतर्गत शराबबंदी, दहेज उन्मूलन व बाल विवाह के खिलाफ चल रहे अभियान के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यदि अंतर क्षेत्रीय एवं अंतरराज्यीय विकास के स्तर में भिन्नता से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा की जाए तो पाया जाएगा कि कई राज्य विकास के मापदंड, जैसे प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, सांस्थिक वित्त एवं मानव विकास सूचकांकों पर राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे हैं। ऐसी स्थिति में तर्कसंगत आर्थिक रणनीति वही होगी जो ऐसे निवेश और अंतरण की पद्धति को प्रोत्साहित करे जिससे पिछड़े राज्यों को एक निर्धारित समय सीमा में विकास के राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने में मदद मिले।

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के पक्ष में प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि इससे केंद्र प्रायोजित योजनाओं के केंद्रांश में वृद्धि होगी और राज्य को अपने संसाधनों का उपयोग, विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिलेगा। वहीं केंद्रीय जीएसटी में अनुमान्य प्रतिपूर्ति मिलने से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही उन्होंने बीआरजीएफ के लंबित 1651.29 करोड़ के शीघ्र भुगतान की मांग भी गवर्निंग काउंसिल के सामने रखी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में चल रहे सात निश्चय कार्यक्रम के साथ-साथ चल रहे पूर्ण शराबबंदी, दहेजबंदी, बाल विवाहबंदी जैसे सामाजिक अभियानों की चर्चा भी की और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे इन कार्यक्रमों के लिए नीति आयोग के समर्थन व अतिरिक्त संसाधन की मांग की। आगे सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों को सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता का उल्लेख राष्ट्रीय दृष्टि पत्र 2030 में स्पष्ट रूप से किया जाना चाहिए।

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एम्स में हैं वाजपेयी, चल रहा है डायलिसिस

पिछले कुछ वर्षों से अस्वस्थ चल रहे हरदिल अजीज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एम्स में हैं। एम्स अस्पपाल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार उन्हें सोमवार को यूरिन इन्फेक्शन और किडनी संबंधी परेशानी के चलते एम्स में भर्ती कराया गया है और यहां उनका डायलिसिस चल रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री को अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, यह अभी तय नहीं है। बताया जा रहा है कि मंगलवार सुबह 9 बजे एम्स की ओर से मेडिकल बुलेटिन जारी होगा। उसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा।

सोमवार शाम को वाजपेयी के स्वास्थ्य की जानकारी लेने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, पार्टी के वरिष्ठ नेता व वाजपेयी के अनन्य सहयोगी लालकृष्ण आडवाणी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा, प्रकाश जावड़ेकर समेत कई बड़े नेता एम्स पहुंचे। एम्स में वाजपेयी का हालचाल जानने के बाद केन्द्रीय मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने पत्रकारों को बताया, ‘वह (वाजपेयी) ठीक हैं और चिंता करने की जरूरत नहीं है।’ वहीं, भाजपा नेता विजय गोयल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री का यूरिन इन्फेक्शन का इलाज चल रहा है और उम्मीद है कि वह (वाजपेयी) मंगलवार को घर जा सकेंगे।

इससे पहले एम्स अस्पताल की ओर से बताया गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री को नियमित जांच के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर है। अस्पताल की ओर से जारी बयान के अनुसार एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया के नेतृत्व में अनुभवी डॉक्टरों की टीम 93 वर्षीय नेता के स्वास्थ्य की जांच कर रही है। बता दें कि डॉक्टर गुलेरिया पिछले तीन दशकों से उनके निजी डॉक्टर हैं।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य खराब होने के साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन से दूर होते चले गए और पिछले कुछ सालों से वह अपने घर पर ही हैं। भाजपा के संस्थापकों में शामिल वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे। वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। इसमें शायद ही किसी को दो राय हो कि उनका सम्मान दलगत सीमाओं से ऊपर है। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व अगली कई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। भारतीय राजनीति के इस अद्भुत प्रतिमान के स्वस्थ व दीर्घायु होने के लिए आज पूरा देश प्रार्थनारत है। उनके लिए हमारी भी मंगलकामनाएं।

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सारे रास्ते बंद, अब बंगला खाली करेंगे शरद

वरिष्ठ नेता शरद यादव अपनी राज्यसभा सदस्यता को लेकर हारी हुई लड़ाई लड़ रहे थे, ये लगभग सबको पता था। क्यों लड़ रहे थे, कई प्रश्नचिह्नों के साथ ही सही, यह भी सब जानते हैं। खैर, होनी को टालने की जितनी कोशिश की जा सकती थी, वो सारी कोशिशें की गईं, पर जो होना चाहिए था, वही हुआ। राज्य सभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित शरद यादव को अंतत: सुप्रीम कोर्ट से भी निराशा हाथ लगी और ना केवल उन्हें मिल रहे वेतन और भत्ते पर रोक लग गई, बल्कि अब सरकारी बंगला भी उन्हें खाली करना होगा।

जी हाँ, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान तकनीकी तौर पर यह आदेश दिया है कि न्यायालय अपने स्तर पर आवास खाली किए जाने को लेकर कोई निर्देश जारी नहीं करेगा पर इस मसले को उस स्तर पर देखा जाएगा जो इसके लिए जवाबदेह है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस विषय को राज्यसभा के सभापति के स्तर पर देखा जाएगा। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट तौर पर लिखा है कि इस मामले में जो ऑथिरिटी है, वह कानून के हिसाब से पूरी कार्रवाई करें।

गौरतलब है कि विगत चार दिसंबर को शरद यादव को राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। शरद यादव ने अपने को अयोग्य घोषित किए जाने के इस निर्णय को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दे रखी है। उनके वकील ने इसी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि हाईकोर्ट में उनकी जो याचिका लंबित है उसके निपटारे तक उन्हें राज्य सभा सदस्य के रूप में आवंटित बंगले में रहने दिया जाए। पर उन्हें निराशा हाथ लगी।

बहरहाल, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी करते हुए शरद यादव के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को संशोधित कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जब तक उनकी याचिका हाई कोर्ट में लंबित है तब तक उनके वेतन- भत्ते को बंद नहीं किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने वेतन व भत्ते पर तो साफ शब्दों में रोक लगाई ही, बंगले को लेकर भी कानूनी कार्रवाई का निर्देश दे दिया। चलते-चलते बता दें कि जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में जदयू संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को चुनौती देते सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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नीट 2018 में बिहार की कल्पना को पूरे देश में पहला स्थान

कल आर्यभट्ट से लेकर आज आनंद कुमार तक की मातृभूमि बिहार सचमुच प्रतिभा की खान है। बिहार की यह गौरवशाली कड़ी आगे भी कायम रहेगी, राज्य के 11 करोड़ से भी ज्यादा लोगों के इस विश्वास को आज एक बार फिर बल मिला। और ऐसा सम्भव हुआ बिहार के शिवहर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय की छात्रा कल्पना कुमारी की बदौलत। जी हाँ, असाधारण प्रतिभा की धनी इस छात्रा ने केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में देश भर में पहला स्थान पाया है। इसमें भी बड़ी बात यह कि बिहार की इस बेटी के अंकों का प्रतिशत 99.99 है।

बोर्ड के आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित नतीजे के अनुसार कल्पना को 720 में से 691 अंक मिले हैं। होनहार कल्पना ने फिजिक्स में कुल 180 में से 171 अंक स्कोर किए, जबकि कैमेस्ट्री में उन्हें 180 में से 160 और बायोलॉजी में 360 में से 360 अंक हासिल हुए। वहीं दूसरे स्थान पर तेलंगाना के रोहन पुरोहित रहे। तीसरा स्थान दिल्ली के हिमांशु शर्मा को मिला।

गौरतलब है कि पूरे देश में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में प्रेवश पाने के लिए इस साल 6 मई को नीट का आयोजन किया गया था। देश के 136 शहरों के 2255 केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में 13,26,725 उम्मीदवारों ने भाग लिया था। इनमें 5,80,648 पुरुष उम्मीदवार और 7,46,076 महिला उम्मीदवार शामिल थे जबकि इनके अलावा एक ट्रांसजेंडर ने भी नीट की परीक्षा दी थी। बता दें कि इस परीक्षा के माध्यम से 66 हजार एमबीबीएस व डेंटल सीटों के लिए चयन किया जाना है।

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अगर आपने अब तक नहीं देखी है, तो जरूर देखें ‘राज़ी’

सिर्फ स्वयं तक सिमटते समय में भी देशप्रेम का जज्बा रखने वालों के लिए किसी खूबसूरत तोहफा से कम नहीं है मेघना गुलजार के लाजवाब निर्देशन और आलिया भट्ट के यादगार अभिनय से सजी फिल्म ‘राज़ी’। रिटायर्ड नेवी अफसर हरिंदर सिक्का के उपन्यास ‘सहमत कॉलिंग’ पर आधारित यह फिल्म 1971 के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच बन रहे जंग के हालात के बीच भारत की एक बेटी की कहानी कहती है, जो एक अंडरकवर एजेंट है और अपने देश के लिए बहू बनकर पाकिस्तान जाती है।

फिल्म की कहानी शुरू होती है कश्मीर के हिदायत खान (रजत कपूर) और उनकी पत्नी बेगम तेजी (सोनी राजदान) के साथ। दोनों की बेटी सहमत (आलिया भट्ट) है, जो दिल्ली में पढ़ाई कर रही है। भारत के जासूसी ट्रेनिंग हेड खालिद मीर (जयदीप अहलावत) हिदायत के बेहद करीबी दोस्त हैं। हिदायत का काम खुफिया जानकारियों को देश के हित के लिए सही समय पर सही जगह पर पहुंचाना है। फिल्म में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय का जिक्र किया गया है। सहमत अपने पिता हिदायत खान के कहने पर पाकिस्तान के एक फौजी परिवार में शादी करती है और वहां भारत की जासूस बनकर जाती है। सहमत की शादी होती है इकबाल (विकी कौशल) से, जो पाकिस्तानी आर्मी में ऊंचे दर्जे का ऑफिसर है।

सहमत के पाकिस्तान पहुँचने के बाद फिल्म के हर सीन में आप बस यही सोचेंगे कि आगे क्या होने वाला है। कुल मिलाकर इसके बाद सहमत अपनी सूझ-बूझ और हौसले के दम पर देश के लिए खुद को कैसे पूरी तरह से लुटा देती है, इसकी कहानी कहती है ‘राज़ी’। देशभक्ति और जासूसी पर पहले भी बहुत सी फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन यह फिल्म कई मायनों में उन सबसे बेहतर है। फिल्म का क्लाइमेक्स ऐसा है कि आप के रोंगटे खड़े हो जाएंगे। फिल्म के कई डायलॉग्स और सीन्स रोने पर मजबूर कर देने वाले हैं। ‘जंगली पिक्चर्स’ और ‘धर्मा प्रोडक्सन्स’ के बैनर तले बनी इस फिल्म की एक खास बात यह भी है कि इस फिल्म में आपको पाकिस्तान की छवि अब तक आ चुकी फिल्मों से अलग दिखेगी। इस फिल्म को देखते हुए आप जरूर महसूस करेंगे कि कहीं-न-कहीं पाकिस्तानी भी हमारी-आपकी तरह मानवीय संवेदना रखते हैं।

फिल्म के कलाकारों की बात करें तो आलिया ने फिल्म में जान डाल दी है। हर वक्त मौत के साये के बीच रहने के खौफ को उन्होंने बखूबी अपने अभिनय में उतारा है। इससे पहले ‘हाईवे’ और ‘उड़ता पंजाब’ से उन्होंने खुद को साबित किया था और अब ‘राज़ी’ से उन्होंने अपने अभिनय का एक नया बेंचमार्क तैयार कर दिया है। 2012 में ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से शुरू कर राजी तक आते-आते वो सचमुच परिपक्व हो चुकी हैं। विक्की कौशल और बाकी कलाकारों ने भी अपना रोल बखूबी निभाया है। शंकर एहसान लॉय का म्यूजिक फिल्म से पूरा इंसाफ करता है। फिल्म का गाना ‘दिलबरो’ आपके दिल-दिमाग पर अमिट छाप छोड़ता है। फिल्म की स्क्रिप्ट और सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म की संप्रेषणीयता को बढ़ाकर इसे और बेहतर बनाती है। कुल मिलाकर फिल्म को जो सफलता और चर्चा मिली है, वह उसे पूरी तरह डिजर्व करती है। अगर आपने अब तक यह फिल्म नहीं देखी है तो जरूर देखें, सिफारिश है हमारी।

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केपीएस से लेकर केन्द्र तक बेटियों ने उड़ान भरी…..!

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) नई दिल्ली ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट घोषित कर दिए | जहाँ अखिल भारतीय रैंकिंग में चार में से तीन बेटियों- रिमझिम अग्रवाल (बिजनौर), नंदिनी गर्ग (शामली), श्री लक्ष्मी (कोच्चि) एवं एक बेटे प्रखर मित्तल (गुड़गांव) ने 500 में से 499 अंक हासिल कर देश में टॉप किया वहीं 498 अंक लाकर 7 परीक्षार्थी दूसरे स्थान पर रहे तथा 497 अंक लाकर 14 परीक्षार्थी तीसरे स्थान पर |

जानिए कि इस वर्ष लगभग 16 लाख 25 हज़ार परीक्षार्थियों के लिए देश व विदेश सहित लगभग साढ़े चार हजार परीक्षा केन्द्र बनाए गये, जिसमें 14 लाख के लगभग छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए | हाँ ! जहाँ तक पास होने की बात है- छात्राएं 88.67 फीसदी एवं छात्र 86.70 फीसदी उत्तीर्ण हुए |

यह भी बता दें कि तिरुवनंतपुरम जोन 99.6 फ़ीसदी रिजल्ट के साथ प्रथम, चेन्नई जोन 97.37% रिजल्ट के साथ द्वितीय तथा अजमेर जोन 91.86% रिजल्ट के साथ तृतीय स्थान पर रहा | आपको दिल्ली जोन के ‘Pass प्रतिशत’ जानने की जिज्ञासा अवश्य होती होगी | तो लीजिए देश की राजधानी दिल्ली जोन का Pass प्रतिशत रिजल्ट है- 78.62% जो पिछले साल की तुलना में ‘ना’ के बराबर बढ़त दर्ज करायी है |

यहाँ पटना जोन में बिहार-झारखंड आता है और जिसमें कुल 1,61,078 परीक्षार्थियों को सफलता मिली और 22,367 परीक्षार्थी फेल हुए, वहीं खगोल के रोहित राज एवं धनबाद की मैत्री शांडिल्य 99.2% अंक लाकर दोनों के  दोनों स्टेट बिहार और झारखंड में टॉपर हुए | पटना जोन में झारखंड से बेहतर रिजल्ट रहा बिहार का |

अब कोसी कमिश्नरी के तीनों जिलों मधेपुरा, सहरसा और सुपौल के बाबत जानने की जिज्ञासा आपके मन में उमड़-घुमड़ रही होगी…. तो जानिए कि जहाँ जिला मधेपुरा का टॉपर 97.2% अंक के साथ रहा शिवम, वहीं सहरसा का टॉपर 97.2% अंक के साथ रहा अंकित और सुपौल के टॉपर अभिषेक को प्राप्त हुआ 95.06% अंक जबकि मधेपुरा के किरण पब्लिक स्कूल की छात्रा शिवांगी 95.60% अंक लाने के बावजूद मधेपुरा जिले के सकेंड टॉपर ही रही | मधेपुरा जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय (सुखासन) के छात्र शिवम को शिवांगी से 0.60% कम अंक प्राप्त करने पर ही स्कूल टाॅॅॅपर होने का अवसर मिल गया |

शिवांगी जैसी हर बेटी बने स्वाभिमान पिता का, उस बेटी की जय हो……. उस स्कूल की जय हो !

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उपचुनावों का परिणाम: भाजपा के लिए खतरे की घंटी

भाजपा अभी कर्नाटक के झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि उसे एक और झटका लग गया। 11 विधानसभा और 4 लोकसभा सीटों पर हुए चुनाव में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। 4 में से केवल एक संसदीय सीट (महाराष्ट्र के पालघर) पर भाजपा उम्मीदवार की जीत हुई, जबकि 11 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में उसके खाते में केवल एक सीट आ पाई। शेष 10 सीटें विपक्षी दलों ने जीतीं। बिहार के जोकीहाट में भी एनडीए उम्मीदवार जदयू के मुर्शीद आलम को हार का सामना करना पड़ा। यहां से आरजेडी उम्मीदवार शाहनवाज आलम ने 41 हजार से भी ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की।
उधर देश की सियासत तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां की कैराना लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस सीट से विपक्ष समर्थित रालोद उम्मीदवार की जीत हुई। यहां की नूरपुर विधानसभा सीट भी भाजपा के खाते से निकलकर सपा के खाते में चली गई। इन चुनावी नतीजों के बाद सियासी चर्चा का बाजार खासा गर्म है। चर्चा हो रही है कि क्या भाजपा की लोकप्रियता और वोट प्रतिशत में गिरावट आई है? अगर हां तो क्या अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार होगी?
बहरहाल, इस संदर्भ में एबीपी न्यूज चैनल का आकलन है कि अगर वोटिंग का यही पैटर्न रहा तो भाजपा की आगे की राह मुश्किल हो सकती है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों को लें तो 2014 के आम चुनावों में एनडीए को यहां 73 सीटें मिली थीं, जबकि मात्र 5 सीट पर सपा और 2 सीट पर कांग्रेस की जीत हुई थी। बसपा और रालोद को एक भी सीट नहीं मिल सकी थी। तब एनडीए को कुल 43 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि सपा और बसपा के वोट प्रतिशत को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 42 प्रतिशत का था। उधर कांग्रेस को 12 प्रतिशत और शेष वोट अन्य के खाते में गए थे। पर हालिया चुनावों ने इस गणित को गड़बड़ा दिया है।
हाल में हुए चुनावों के पैटर्न को देख चैनल का अनुमान है कि अभी चुनाव हुए तो उत्तर प्रदेश में एनडीए के खाते में 35 प्रतिशत वोट जबकि सपा और बसपा गठजोड़ को 46 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। यानि चार सालों में भाजपा को कुल 8 प्रतिशत का नुकसान होते दिखाया गया है जबकि सपा-बसपा गठजोड़ को 4 प्रतिशत वोट का इजाफा होता दिखाया गया है। इतना ही नहीं, अगर सपा-बसपा और कांग्रेस तीनों का गठजोड़ यहां होता है तो इस गठबंधन को करीब 60 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं और 2014 में 73 सीटें जीतकर सनसनी फैला देने वाली भाजपा (एनडीए) महज 19 सीटों पर सिमट सकती है, जबकि शेष 61 सीटें विपक्षी दलों के खाते में होंगी।
सबसे अहम बात यह कि अगर विपक्षी दलों की अभी दिख रही एकता आगे भी बनी रहे तो कमोबेश यही स्थिति अन्य राज्यों में भी हो सकती है। ऐसे में भाजपा और एनडीए की आगे की रणनीति क्या होगी, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा और उससे भी अधिक उत्सुकता इस बात की रहेगी कि एनडीए में मोदी के बाद सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन परिस्थितियों में आगे क्या रुख अख्तियार करेंगे..?

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जी हाँ, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने अपने पोते का नाम ‘श्रीनरेन्द्र’ रखा है

इंडोनेशिया, मलयेशिया और सिंगापुर की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार शाम को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे, जहां स्वाभाविक तौर पर उनका भव्य स्वागत किया गया। बड़े ही आत्मीय माहौल में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो और प्रधानमंत्री मोदी के बीच परस्पर हित की कई बातें हुईं और कई यादगार पल बीते। पर इस दौरान दो बातें ऐसी हुईं जो प्रधानमंत्री मोदी के लिए शायद कल्पनातीत थीं। चलिए जानते हैं, क्या हैं वे दो बातें।

शुरू करते हैं उस बात से जिसे सुनकर प्रधानमंत्री मोदी का चकित होना स्वाभाविक था। हुआ यों कि स्वागत के उपरान्त अनौपचारिक बातचीत के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो ने प्रघानमंत्री मोदी को बताया कि उनके पोते का नाम प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही श्रीनरेन्द्र रखा गया है। उन्होंने कहा कि उके बड़े बेटे गिबरान राकाबुमिंग के बेटे यानि उनके पोते का का जन्म जनवरी 2016 में हुआ था, जिसका नाम उन्होंने श्रीनरेन्द्र रखा है। निश्चित तौर पर यह बात ना केवल प्रधानमंत्री मोदी के लिए बल्कि पूरे देश के लिए हर्ष और सम्मान की बात है।

यह तो हुई पहली बात। दूसरी बात भी कम चौंकाने वाली नहीं थी। दरअसल इंडोनेशिया के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित इस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए इंडोनेशिया की मशहूर सिंगर फ्रायडा लुसिआना का कार्यक्रम भी रखा गया था। लुसिआना को उनके सिंगिंग के साथ-साथ उनके चैरिटी वर्क के लिए भी जाना जाता है। लुसिआना ने इस दौरान 1954 में आई हिन्दी फिल्म ‘जागृति’ का गाना ‘साबरमति के संत’ गाया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित यह गाना वहां के कलाकार से कुछ अलग अंदाज में पर उसी सम्मान और समर्पण के साथ सुनना सचमुच एक अलग अनुभूति से भरने वाला था।

बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति से समुद्र, व्यापार और निवेश सहित विभिन्न मुद्दों पर द्विपक्षीय सहयोग के संबंध में चर्चा की। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य तीनों दक्षिण पूर्व एशियाई देशों – इंडोनेशिया, मलयेशिया और सिंगापुर – के साथ भारत के संबंध को बढ़ाना है। कहने की जरूरत नहीं कि यह उनकी एक्ट ईस्ट नीति का हिस्सा है।

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आनंद कुमार का सुपर 30 अब जापान में होगा शुरू !

संसार के सर्वाधिक बड़े शहरों में एक है जापान की राजधानी ‘टोकियो’ | टोकियो से प्रकाशित होने वाले जापान का सबसे प्रसिद्ध अखबार ‘योमिउरी शिमबन’ में भारत के सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार के ऊपर विस्तार से एक लेख छपी है | लेख में आनंद कुमार को छात्रों का रोल मॉडल बताया गया है |

बता दें कि जापानी अखबार के लेख में यह बताया गया है कि आनंद कुमार विगत 17 साल से निरंतर गरीब एवं जरूरतमंद छात्रों की हर तरह से मदद करते आ रहे हैं | आनंद सर के इस कृत्य को भारत ही नहीं देश-विदेश के लोग भी प्रशंसनीय कार्य बताते हैं | तभी तो जापानी अखबार में छपे लेख में आनंद कुमार के बारे में कहा गया है कि शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को सही-सही मार्गदर्शन देने तथा आईआईटी तक भेजने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं |

यह भी जानिए कि अखबार में छपे लेख में विज्ञान के रहस्यों का गहन अध्ययन करने वाले आनंद सर द्वारा बच्चों के भीतर की सोयी हुई ऊर्जा को जागृत कर दिया जाता है तथा उसे हाई एनर्जी लेवल तक पहुंचा दिया जाता है | बच्चों में संकल्प और जुनून के साथ आत्मविश्वास पैदा कर दिया जाता है | और दुनिया जानती है कि आत्मविश्वास किसी के भी जीवन में अद्भुत चमत्कार ला देता है |

बता दें कि आनंद सर द्वारा इन बातों को उन बच्चों में डालते ही वे सभी समय से आगे सोचने की शक्ति से भर जाते हैं, खासकर वैसे बच्चे जो अर्थ के अभाव में जीवन को अर्थहीन बनाने के रास्ते चल रहे होते हैं | वैसे ही 30 बच्चों को अपने साथ अपने घर पर रखते हैं आनंद सर और सबों को खाना बनाकर कर खिलाती थी आरंभ में उनकी माँ और अब उनकी पत्नी |

चलते-चलते यह भी बता दें कि टोकियो यूनिवर्सिटी में एक नहीं बल्कि अनेक बार सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार का व्याख्यान आयोजित किया जा चुका है | जापान के लिए आनंद सर नये नहीं रहे तभी तो उनकी सफलता की कहानी अब वहाँ की भिन्न-भिन्न मीडियाऔं द्वारा प्रकाशित किया जाने लगा है | सर्वाधिक गौरव की बात यह है कि अब जापान में भी सुपर-30 शुरू होने जा रहा है |

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देश में बनी मेघना तो बिहार में सुजल बने टॉपर !

सीबीएसई के 12वीं में 14 साल में पहली बार 500 में 499 नंबर यानी 99.8% अंक प्राप्त कर नोएडा (यू.पी) की मेघना श्रीवास्तव ने जहाँ संपूर्ण भारत में टॉप किया वहीं बिहार में सुजल राज ने 98.4% अंक लाकर प्रथम स्थान प्राप्त किया | मेघना और सुजल दोनों आर्ट्स से टॉपर बने |

यह जानना बड़ा ही दिलचस्प होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर पहले नंबर पर मेघना (99.8%), दूसरे नंबर पर गाजियाबाद की अनुष्का (99.6%) दोनों ही आर्ट्स की हैं | तीसरे नंबर पर (99.4%) यानी 497 अंक ला-लाकर 7 स्टूडेंट्स आये जिसमें 5 लड़कियाँ हैं |

बता दें कि देश स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर कुल 9 स्टूडेंट्स आये हैं जिसमें मात्र 2 लड़के हैं और 7 लड़कियाँ | ये सातों बेटियां हैं- मेघना श्रीवास्तव, अनुष्का चंद्रा, चाहत बोधराज, तनुजा कापरी, अनन्या सिंह, आस्था बंबा और सुप्रिया कौशिक | बेटे का नाम बताने से पहले- जो बेटी बनी स्वाभिमान पिता का, उस बेटी की जय हो ! नौ में केवल दो बेटे हैं- नकुल गुप्ता और क्षैतिज आनंद |

यह भी जानिए कि भारत में लगभग 12 लाख छात्रों ने परीक्षा दी जिसमें लगभग 9 लाख पास हुए और लगभग तीन लाख के आस-पास फेल | जहाँ 12 हजार से अधिक छात्रों ने 95% से ज्यादा नंबर लाया, वहीं 72 हजार से अधिक छात्रों ने 90% से ज्यादा नंबर लाया है | इस वर्ष लड़कों से 9.32% अधिक लड़कियां ही परीक्षा में उत्तीर्ण हुई हैं | इस साल उत्तीर्ण होने वाले छात्रों का प्रतिशत है- 83.01% | निजी स्कूलों के मुकाबले में सरकारी स्कूलों के छात्रों का जलवा रहा | जहाँ सरकारी स्कूलों में 84% पास हुए वहीं निजी स्कूलों में 82% के लगभग |

चलते-चलते मेघना के बारे में- न ट्यूशन लिया, न पढ़ाई के घंटे गिने और न कोचिंग की भारत की इस बेटी ने | साल भर एक जैसी पढ़ाई की | स्टडी टेबल के सामने एक ड्रीम बोर्ड लगाया था जिसपर हररोज टारगेट लिखती और उसे पूरा करने तक पढ़ती |

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