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और राहुल ने ली मोदी की सही वक्त पर सही चुटकी

वैसे तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी प्रारंभ से प्रधानमंत्री मोदी नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को लेकर आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मौकों पर उनकी ‘टाइमिंग’ और ‘पंच’ सटीक नहीं रहे। पर इधर कुछ दिनों से उन्होंने जैसी परिपक्वता दिखाई है, वह वाकई काबिले तारीफ है। कहना गलत न होगा कि उन्होंने अब मौके पर चौका लगाना सीख लिया है। अब ताजा उदाहरण ही लीजिए। राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर चुटकी भरे अंदाज में हमला बोला है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान के समर्थन में किए गए ट्वीट पर मोदी की चुटकी ली है। चलिए जानते हैं कि मामला क्या है?

दरअसल, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा एक अमेरिकी परिवार को हक्कानी नेटवर्क के चंगुल से छुड़ाने के बाद ट्रंप ने इस बाबत पाकिस्तान की तारीफ करते हुए ट्वीट किया था। ट्रंप के इस ट्वीट –  Starting to develop a much better relationship with Pakistan and its leaders. I want to thank them for their cooperation on many fronts. – के जवाब में राहुल ने ट्वीट करते हुए लिखा – जल्दी कीजिए मोदीजी, लगता है राष्ट्रपति ट्रंप को एक और झप्पी की जरूरत है (Modiji quick; Modiji, quick; looks like President Trump needs another hug)।

बता दें कि अमेरिका काफी समय से पाकिस्तान को आतंक का समर्थन करने के लिए फटकार लगाता रहा है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ते मतभेद को भारत की कूटनीतिक जीत के तौर पर भी देखा जा रहा था। इसी साल जून में पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात हुई थी, जिसमें उन्होंने भारत को अपना ‘सच्चा साथी’ बताया था। खबरें है कि अब भारत के अधिकारी इस बात का इंतजार कर रहे हैं पाक को लेकर अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी? बहरहाल, राहुल ने सही समय पर सही निशाना तो साध लिया ही है।

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“बिहार पर सरस्वती की कृपा है, लक्ष्मी की भी होगी”: मोदी

कभी ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ कही जाने वाली पटना यूनिवर्सिटी के 100 साल पूरे होने पर बिहार की राजधानी एक यादगार समारोह की साक्षी बनी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राज्यपाल सत्यपाल मलिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान, रविशंकर प्रसाद, उपेन्द्र कुशवाहा और अश्विनी चौबे एवं कुलपति रासबिहारी सिंह समेत कई महत्वपूर्ण हस्तियों और वर्तमान व पूर्व शिक्षकों व छात्रों ने शिरकत की।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से पटना यूनिवर्सिटी को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग की। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पटना यूनिवर्सिटी को एक कदम और आगे ले जाना चाहूंगा। विश्व की टॉप 500 यूनिवर्सिटी में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है, इसलिए 20 यूनिवर्सिटी (10 सरकारी और 10 प्राइवेट) को 10 हजार करोड़ रुपये देने की योजना है। इसका फैसला प्रदर्शन के आधार पर होगा। उनका इशारा इस यूनिवर्सिटी को इसका पुराना गौरव वापस दिलाते हुए इसे उस प्रतियोगिता के लायक बनाने की ओर था।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले के कई प्रधानमंत्री मेरे लिए अच्छा काम छोड़ गए। ऐसा ही अच्छा काम करने का मौका उन्हें आज मिला। पटना यूनिवर्सिटी ने देश को कई नामचीन चेहरे दिए। अगर आप पीढ़ियों के बारे में बताते हैं तो इंसान को बोइए। मैं मां सरस्वती और लक्ष्मी दोनों को साथ-साथ चला रहा हूं। बिहार के पास सरस्वती की कृपा है। बिहार पर लक्ष्मी की कृपा भी हो सकती है। इसमें केन्द्र पूरी तरह प्रदेश सरकार का सहयोग करेगा। हमें बिहार को 2022 तक समृद्ध राज्य बनाना है। गौरतलब है कि मोदी पटना विश्वविद्यालय आने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं।

पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी दिवस कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री के आग्रह पर प्रधानमंत्री नवनिर्मित पटना म्यूजियम पहुंचे, जहां उन्होंने म्यूजियम में रखी एक-एक चीज को बड़े चाव से देखा और सबके बारे में जानकारी ली। स्वयं मुख्यमंत्री ‘गाइड’ की भूमिका में रहे। इसके बाद वे मोकामा पहुंचे और बिहार को करीब चार हजार करोड़ रुपये की सौगात दी। यहां उन्होंने राष्ट्रीय हाईवे से जुड़े 3031 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट और 738.04 करोड़ रुपये के तीन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया।

मोकामा में अपने संबोधन के प्रारंभ में स्थानीय भाषा में लोगों का अभिवादन कर प्रधानमंत्री ने सबका दिल जीत लिया। यही नहीं, उन्होंने यहां के पौराणिक-ऐतिहासिक गौरव की चर्चा भी की और राष्ट्रकवि दिनकर को याद करते हुए उनकी कविता का भी पाठ किया। और हां, मोदी ने पटना यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में इस विश्वविद्यालय व बिहार की तो मोकामा में नीतीश कुमार की दिल खोलकर तारीफ की।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

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यही ‘भीड़’ आप जैसों को नेता बनाती है, चौबेजी !

बिहार से बाहर बड़े शहरों में रोजगार के लिए जाकर बसने वाले बिहारियों के लिए ‘बिहारी’ संबोधन का प्रयोग कई बार उन्हें ‘देहाती’, ‘असभ्य’ या ‘विकास के दौर में पिछड़ा’ जताने और बताने के लिए किया जाता है। हालांकि इधर कुछ वर्षों में यह प्रवृत्ति कम हुई है। लेकिन जब बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाले, जिनके कंधों पर राज्य के गौरव का भार होता है, इस संबोधन का अमर्यादित प्रयोग करें तो क्या कहेंगे आप? जी हां, केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कुछ ऐसा ही कर दिया है। मोदी कैबिनेट में स्वास्थ्य राज्यमंत्री चौबे ने खुली सभा में कहा कि बिहार के लोगों से एम्स में भीड़ बढ़ रही है। स्वाभाविक है कि ऐसे बयान के बाद उनकी आलोचना हो और सियासत का पारा गर्म हो जाए। राजद और कांग्रेस इस बयान के लिए चौबे से बिहार के लोगों से माफी मांगने को कह रहे हैं, तो जेडीयू उन्हें ऐसे बयानों से बचने की सलाह दे रही है।

बता दें कि केन्द्रीय मंत्री और बक्सर से सांसद अश्विनी चौबे ने यह बात एक कार्यक्रम में कही जब बिहार के लोगों पर चर्चा हो रही थी। उन्होंने कहा था कि बिहार के लोगों की वजह से दिल्ली के एम्स में भीड़ बढ़ गई है। बिहार के लोग छोटी सी बीमारी को लेकर भी एम्स पहुंच जाते हैं।

इस बयान के मीडिया में आने के बाद आरजेडी के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने सोमवार को कहा कि सत्ता में बैठे लोग सत्ता के नशे में मदहोश हो गए हैं। लोगों को यह अधिकार है कि वह कहीं भी इलाज करा सकें। चौबे का यह बयान संविधान के खिलाफ है और उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर निकाल देना चाहिए।

आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में अश्विनी चौबे को मानसिक रूप से कमजारे बताते हुए कहा कि बीजेपी ने हमेशा ही बिहार और बिहार के लोगों का अपमान किया है। इस बयान के लिए चौबे और बीजेपी को बिहार के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने प्रधानमंत्री से ऐसे मंत्री को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है।

इस बीच जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने चौबे को ऐसे बयानों से बचने की नसीहत देते हुए कहा कि दिल्ली के एम्स में बिहार के ही ज्यादा चिकित्सक हैं। बिहार के लोग हर जगह हैं, ऐसे में बिहार के लोग कहीं भी इलाज कराने जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने चौबे का बचाव करते हुए यह भी कहा कि मंत्री के बयान को इस तरह से लेना चाहिए कि बिहार में कई बीमारियों के इलाज की समुचित व्यवस्था होने के बावजूद भी लोग दिल्ली इलाज कराने जाते हैं, जिससे यहां के लोगों को बचना चाहिए। उधर वरिष्ठ भाजपा नेता व बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी स्वाभाविक तौर पर उनका बचाव किया और कहा कि उनका मकसद पटना एम्स को बेहतर करने से था। यदि पटना में ही सारी सुविधाएं मिलने लगेगी तो लोगों को बाहर जाने की जरूरत ही नहीं होगी।

अब चौबे ने यह बयान चाहे जिस भाव से दिया हो, यहां की जनता को ‘भीड़’ कहने की भूल तो उनसे हो ही गई है। उन जैसे नेता भला ये कैसे भूल सकते हैं कि यही ‘भीड़’ उन्हें ‘भीड़’ से बाहर निकालकर नेता बनाती है, उन्हें सारे पद और अधिकार दिलाती है और बदले में बस थोड़ा-सा सम्मान चाहती है। हद तो तब हो जाती है जब वही नेता उन्हें भीड़ बताने तक से गुरेज नहीं करते..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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उच्च शिक्षा में अब जर्मनी और जापान से आगे हैं भारतीय महिलाएं

इस बात पर दुनिया भर के विचारक और समाजशास्त्री अब एकमत हैं कि महिलाओं को मुख्य धारा में लाए बिना और उन्हें हर क्षेत्र में बराबरी का दर्जा दिए बिना हम विकास की मुकम्मल परिभाषा नहीं गढ़ सकते। और यह बात भी शीशे की तरह साफ है कि विकास का रास्ता शिक्षा से होकर गुजरता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि इस दिशा में हम और हमारी दुनिया कहां है। 35 देशों के संगठन आर्गनाइजेशन फॉर इकोनोमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) की लिंगभेद संबंधी हालिया वैश्विक रिपोर्ट इस पर पर्याप्त रोशनी डालती है।

ओईसीडी के अनुसार भारत समेत दुनिया भर के विकसित और बड़े विकासशील देशों में उच्च शिक्षा में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है ओईसीडी की इस रिपोर्ट के अनुसार भारतीय महिलाएं उच्च शिक्षा में जर्मनी और जापान की महिलाओं से आगे निकल गई हैं। हालांकि 35 देशों (दुनिया के सबसे विकसित और बड़े विकासशील देशों) की सूची में चीन समेत 22 देशों की महिलाएं भारत से आगे हैं।

शिक्षा में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी वाले पांच देशों की बात करें तो वे हैं- स्वीडन (69.1%) कोस्टा रिका (63.7%), स्लोवाक गणराज्य (63.5%), नार्वे (63.2%) और लातविया (63%)। वहीं, स्नातक में महिलाओं की हिस्सेदारी देखें तो वहां भले ही भारत (49.4%) चीन (51.5) से पीछे हो, लेकिन स्विट्जरलैंड (48.8), जर्मनी (48.5) और जापान (45.4) को उसने पीछे छोड़ दिया है।

ओईसीडी की रिपोर्ट नौकरी में महिलाओं के साथ बरते जा रहे लिंगभेद  को भी उजागर करती है। इस दिशा में भारत की स्थिति अत्यंत दयनीय है। आपको हैरानी होगी कि भारत के कार्यबल में 52.9 प्रतिशत जेंडर गैप है, जो दुनिया में सबसे बदतर स्थिति है। वहीं, फिनलैंड में जेंडर के आधार पर कार्यबल में सबसे कम यानि 3 प्रतिशत अंतर है। प्रबंधन स्तर की नौकरियों की बात करें तो इस स्तर पर भारत में 14.5 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी है, जबकि मध्यम आय वाली नौकरियों में जेंडर गैप 56 प्रतिशत का है।

नौकरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए हालांकि भारत में भी कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन इस क्षेत्र में अभी लंबा सफर तय करना है। विश्व-पटल पर देखें तो ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आइसलैंड, इटली, इजरायल और नॉर्वे जैसे देशों ने निजी व सरकारी नौकरियों में महिलाओं को अलग कोटा देने का प्रावधान कर रखा है। हमें भी इस दिशा ठोस कदम उठाने होंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप    

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इस साल धन की वर्षा करेगी शरद पूर्णिमा

इस साल आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानि शरद पूर्णिमा के दिन सितारे अद्भुत संयोग बना रहे हैं। ऐसा संयोग जो आप पर धन और ऐश्वर्य की वर्षा कर देगा। बस आपको करनी होगी सच्‍चे भाव से मां लक्ष्‍मी की पूजा। जी हां, मां लक्ष्मी, शास्त्रों के अनुसार जिनका जन्म शरद पूर्णिमा के दिन ही हुआ था।

शरद पूर्णिमा को लेकर मान्यता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर बैठकर भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी का भ्रमण करने आती हैं। इसलिए आसमान पर चन्द्रमा भी सोलह कलाओं से चमकता है। शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में जो भक्त भगवान विष्णु सहित देवी लक्ष्मी और उनके वाहन की पूजा करते हैं, उन्हें देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

यही नहीं, ऐसा विश्वास किया जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत टपकता है और ये किरणें हमारे लिए भाग्यवर्द्धक होती हैं। ज्योतिषशास्त्र की मानें तो पूरे वर्ष में सिर्फ इसी दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर धरती पर अपनी अद्भुत छटा बिखेरता है। यही कारण है कि लोग रात में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखकर अगले दिन सुबह उसे प्रसाद के रूप में खाते हैं।

शरद पूर्णिमा जो पहले ही इतने शुभ का कारक है, इस साल और भी शुभ होकर आया है। गौरतलब है कि इस साल शरद पूर्णिमा गुरुवार को है और गुरु धन और सुख के कारक ग्रह हैं। उस पर चन्द्रमा भी गुरु की राशि मीन में है जो एक बड़ा शुभ संयोग है। अगला संयोग यह कि देवी लक्ष्मी के जन्मदिवस पर वृद्धि और ध्रुव नामक योग बने हुए हैं जो स्थायी धन, सुख और ऐश्वर्य में वृद्धिकारक है। इस अवसर पर सर्वार्थसिद्धि योग भी बना हुआ है। ग्रहों और नक्षत्रों का यह संयोग बहुत ही शुभ है जिसमें धनलाभ संबंधी कोई भी काम करना शुभ फलदायी होगा।

यह भी जानें कि बिहार एवं बंगाल के लोग इस दिन को कोजागरा और कोजागरी लक्ष्मी पूजा के रूप में मनाते हैं। उधर पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में इस दिन कुमारी कन्याएं प्रातः स्नान करके सूर्य और चन्द्रमा की पूजा करती हैं। माना जाता है कि इससे योग्य पति मिलता है।

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शराबबंदी के बाद बाल विवाह और दहेज के विरुद्ध शंखनाद

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 148वीं जयंती के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़े अभियान का शंखनाद किया। बिहार में शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के बाद नीतीश ने समाज को घुन की तरह खा रही इन दो कुरीतियों पर जिस तरह चोट की है, वह उन्हें राजनेताओं की भीड़ में निश्चित तौर पर एक अलग स्थान का हकदार बनाती है। देखा जाय तो बापू को इससे बड़ी श्रद्धांजलि हो भी क्या सकती थी!

गौरतलब है कि बाल विवाह के खिलाफ कड़े कानून होने के बावजूद यह बिहार में काफी प्रचलित है। खासकर राज्य के ग्रामीण इलाकों में यह कुप्रथा बहुत बड़े स्तर पर फैली हुई है। आंकड़ों की मानें तो कुछ वर्ष पहले तक बिहार में होने वाले कुल विवाह में से करीब 69 प्रतिशत बाल विवाह होते थे। हालांकि हाल ही में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य संरक्षण-4 में खुलासा हुआ है कि लड़कियों की शिक्षा पर जोर देने के कारण पिछले 10 सालों में यह आंकड़ा घटा है। फिर भी इस कुरीति को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए अभी काफी कुछ किए जाने की जरूरत थी। जहां तक दहेज प्रथा का प्रश्न है, उसके लिए तो आंकड़ों की भी जरूरत नहीं। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो बिहार क्या देश भर में शायद ही कोई माता-पिता हों जिन्हें दहेज के अजगर ने डंसा न हो। हर साल हजारों बेटियां दहेज के कारण न जाने कितने अत्याचार सहती हैं, उनमें से कई तो जिन्दा जला दी जाती हैं। ऐसे में बिहार में इन दोनों कुरीतियों के विरुद्ध शुरू की गई ये पहल निश्चित तौर बदलाव की ओर बढ़ाया गया एक बड़ा कदम है।

सोमवार को राजधानी पटना स्थित गांधी मैदान के समीप नवनिर्मित बापू सभागार से महाअभियान का आगाज करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों को शपथ दिलाई कि बिहार को बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों से मुक्त कराने की प्रतिज्ञा लें। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस अभियान को राजनीतिक चश्मे से न देखें। राजनीति अपनी जगह पर है और वह होती रहेगी। यह सामाजिक अभियान है। इस अभियान में पूरी एकजुटता से शामिल हों। उन्होंने ऐलान किया कि अगले वर्ष 21 जनवरी को बाल विवाह और दहेज विरोधी अभियान के समर्थन में पूरे प्रदेश में मानव श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ कानून काफी पहले से है। उसका हम मुस्तैदी से अनुपालन कराएंगे लेकिन इसके लिए जनभावना का साथ होना भी जरूरी है। उन्होंने लोगों के साथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि इसकी बदौलत बहुत जल्द बिहार की तस्वीर बदलेगी और हम देश और दुनिया के लिए उदाहरण बन सकेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सत्यपाल मलिक बिहार के नए राज्यपाल, गंगा प्रसाद को मिला मेघालय

विजया दशमी के दिन पांच राज्यों को नए राज्यपाल मिले। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस दिन बिहार, तमिलनाडु, असम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के राज्यपाल एवं अंडमान और निकोबार के उपराज्यपाल की नियुक्ति की। भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष रहे सत्यपाल मलिक बिहार के नए राज्यपाल होंगे, जबकि बनवारी लाल पुरोहित को तमिलनाडु जगदीश मुखी को असम और ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बीडी मिश्रा को अरुणाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। वहीं बिहार का राज्यपाल रहते हुए राष्ट्रपति के पद तक पहुंचने वाले कोविंद ने इन नियुक्तियों में बिहार का विशेष ख्याल रखते हुए बिहार भाजपा के पुराने नेता गंगा प्रसाद चौरसिया को मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया है। इन पांच राज्यों के राज्यपाल के अतिरिक्त केन्द्रशासित अंडमान और निकोबार के उपराज्यपाल के तौर पर राष्ट्रपति ने एडमिरल (सेवानिवृत्त) देवेन्द्र कुमार जोशी को मौका दिया है।

गौरतलब है कि बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही यहां राज्यपाल का पद रिक्त था। कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी को बिहार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। नए राज्यपाल सत्यपाल मलिक इससे पूर्व केन्द्रीय संसदीय और पर्यटन राज्यमंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। बीएससी और एलएलबी की डिग्री लेने वाले मलिक 1980-84 और 1986-89 तक राज्यसभा के सांसद और 1989-90 में लोकसभा के सांसद रहे हैं।

उधर मेघालय के राज्यपाल बनाए गए गंगा प्रसाद चौरसिया शुरू से जनसंघ के सदस्य रहे हैं। 1994 में वे पहली बार बिहार विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए और कुल 18 सालों तक परिषद के सदस्य रहे। वे बिहार भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे बिहार राज्य आर्य प्रतिनिधि सभा, बिहार राज्य खाद्यान्न व्यवसायी संघ. अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन और अखिल भारतीय चौरसिया महासभा जैसे संगठनों में भी सक्रिय रहते आए हैं।

कुल मिलाकर इन नियुक्तियों में भाजपा ने अपने लोगों को ‘वफादारी’ का इनाम दिया है। सत्यपाल मलिक और गंगा प्रसाद चौरसिया की तरह ही दिल्ली भाजपा के जगदीश मुखी भी पार्टी के पुराने वफादार रहे हैं। इसी तरह अन्य लोगों की प्रतिबद्धता भी केन्द्रासीन भाजपा के प्रति असंदिग्ध है। देखा जाय तो केन्द्र की सत्ता पर काबिज पार्टी द्वारा इस तरह ‘मलाई’ का वितरण कोई नई बात नहीं। नया बस यह है कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद के लिए (वैसे देश के प्रथम व्यक्ति का पद भी अपवाद नहीं) ‘राजनीतिक तौर पर छोटा कद’ होना अब लगभग अनिवार्य हो गया है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप  

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बिहार वासियों के लिए एक सुखद अनुभूति है ‘न्यूटन’…….!!

क्या आप जानते हैं कि फिल्म ‘न्यूटन’ के ‘आस्कर अवार्ड’ हेतु नामित होने से सम्पूर्ण बिहार क्यों आह्लादित है ? क्योंकि, बिहार का लाल जिसने किया है कमाल- वह इसी फिल्म का अभिनेता पंकज त्रिपाठी है और वह पंकज है पटना रंगमंच की उपज ! वह पंकज बिहार के गोपालगंज जिले का मूल निवासी भी है |

बता दें कि नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (एन एस डी) की डिग्री लेने के बाद पिछले एक दशक से मुम्बई की फ़िल्मी दुनिया के सुनहले रंगमंच पर अपनी दक्षता एवं अभिनय की बारीकियों से पंकज ने एक बड़ी लकीर खींची है…….. तथा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनावी पृष्ठभूमि पर हिन्दी में निर्मित राजनीतिक व्यंग फिल्म ‘न्यूटन’ में मुख्य भूमिका निभाते हुए राजकुमार राव, अंजली पाटिल एवं रघुवीर यादव आदि की महती भूमिका को भी समुचित स्थान दिया है |

यह भी जानिए कि ‘न्यूटन’ आस्कर अवार्ड की ऑफिसियल एंट्री के लिए चुनी गई 50वी. भारतीय और 30वीं हिन्दी फिल्म है | परन्तु, अब तक तीन फ़िल्में ही विदेशी भाषा केटगरी में नामांकन तक पहुँच सकी हैं- वे तीनों है, 1957 में आई फिल्म ‘मदरइंडिया’, 1988 की फिल्म ‘सलामबॉम्बे’ और 2001 की प्रसिद्ध फिल्म ‘लगान’ |

फिल्म ‘न्यूटन’ में मुख्य भूमिका निभानेवाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी तीन-चार फिल्मों की अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी बड़ी पहचान बना ली है | इतने कम वर्षों की अभिनय यात्रा में वैश्विक मंच मिल जाना ‘पंकज’ के लिए ही नहीं बल्कि बिहार वासियों के लिए भी एक सुखद अनुभूति है |

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कोसी की बेटी को पीएम मोदी करेंगे सम्मानित

धन्य हो गयी आज कोसी अंचल के सौरबाज़ार प्रखंड वाले गम्हरिया गाँव के दयानंद की बेटी ‘चन्द्रकान्ता’ की ममतामयी माँ की गोद और सम्पूर्ण घर-आँगन…… जब दयानन्द यादव के द्वार पर सहरसा जिला शिक्षा विभाग के डीपीओ, डीइओ व अन्य पदाधिकारियों ने एक साथ दस्तक दी और उत्साहित ग्रामीणों की उपस्थिति में यही कहा-

विगत 5 सितम्बर को “स्वच्छ संकल्प से स्वच्छ सिद्धि तक” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय निबन्ध प्रतियोगिता में मनोहर उच्च विद्यालय बैजनाथपुर की नवमी की छात्रा चन्द्रकान्ता नैना ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है | शिक्षा विभाग द्वारा 28 सितम्बर को चन्द्रकान्ता को पटना भेजा जाएगा और वहाँ से दिल्ली…….. जहाँ 2 अक्टूबर (गाँधी जयन्ती) के दिन दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के प्रधानमंत्री के हाथों उन्हें सम्मानित किया जाएगा |

यह भी जानिये कि स्वच्छता पर हुई निबन्ध प्रतियोगिता में, सीनियर और जूनियर दोनों ग्रुपों में, बिहार के बच्चे ही देशभर में अव्वल स्थान प्राप्त किये हैं | एक ओर जहाँ सीनियर ग्रुप में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीये नम्बर पर रहे बिहार, पुडुचेरी और हिमाचल प्रदेश वहीँ दूसरी ओर जूनियर ग्रुप में बिहार के भोजपुर जिले के विकास कुमार प्रथम आये तथा गोवा और हिमाचल प्रदेश को द्वितीय एवं तृतीय स्थान मिला |

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प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू की ‘सौभाग्य योजना’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को ‘सौभाग्य योजना’ का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2019 तक बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिसा, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में हर घर में बिजली पहुंचाना है। 16320 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी योजना का स्लोगन है – “रोशन होगा हर घर, गांव हो या शहर”।

गौरतलब है कि इस योजना के तहत जिनका नाम सामाजिक-आर्थिक जनगणना में है, ऐसे लोगों को मुफ्त में बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। जिनका नाम सामाजिक-आर्थिक जनगणना में शामिल नहीं है, उन्हें 500 रु. में बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। ये 500 रु. 10 किश्तों में जमा कराए जा सकेंगे। इस योजना के तहत बिजली कनेक्शन के साथ ही एक सोलर पैक भी दिया जाएगा। इस सोलर पैक में पांच एलईडी बल्ब, एक बैट्री पावर बैंक, एक डीसी पावर प्लग और एक डीसी पंखा दिया जाएगा।

कहने की जरूरत नहीं कि इस योजना के बाद मिट्टी के तेल का विकल्प बिजली होगी। शैक्षणिक, स्वास्थ्य और संचार सेवा में सुधार होगा। जनता की सुरक्षा में भी इस योजना से सुधार होने की उम्मीद है। यही नहीं, इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और जीवन-स्तर में भी सुधार होगा। खासकर महिलाओं को रोज के कामों में बड़ी सहूलियत मिलेगी।

चलते-चलते बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में ‘सौभाग्य योजना’ का ऐलान करने के साथ ही दीनदयाल ऊर्जा भवन का उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान एवं ऊर्जा मंत्री आरके सिंह भी मौजूद थे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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