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भारत में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या हुई 94 लाख के पार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजे आंकड़े के अनुसार देश में कोरोना संक्रमिततों  की संख्या बढ़कर हो गई है 94 लाख 31 हजार तथा मरने वालों की संख्या अब तक 1 लाख 37 हजार 140 हो गई है।

बता दें कि अब तक पूरे देश में 88 लाख 47 हजार कोरोना संक्रमित लोगों ने कोरोना को मात देकर ठीक हो चुके हैं। जानिए कि पिछले 24 घंटे में कुल 45 हजार 333 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हुए हैं।

यह भी जानिए कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार देश में 29 नवंबर तक कोरोना वायरस के लिए कुल 14 करोड़ सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं। पिछले 24 घंटे में कोरोना से देश में 496 मरीज की मौत हो चुकी है। इनमें लगभग 71 फ़ीसदी मामले 8 राज्यों व केंद्र शासित राज्यों जिनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, बंगाल, हरियाणा, पंजाब, केरल, यूपी और राजस्थान शामिल हैं। दिल्ली में जहां 89 मरीजों की मौतें हुई है वहीं महाराष्ट्र में 88 की। नवंबर महीने में प्रतिदिन कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या 600 पार नहीं कर पाई है जबकि पूरे देश में अब तक मृतकों की संख्या 1 लाख 36 हजार 696 हो गई है।

चलते-चलते बिहार में भी कोरोना की स्थिति जान लीजिए। रविवार को बिहार में 606 नये कोरोना संक्रमितों की पहचान की गई है और इलाज के दौरान 6 की मौत हो गई। इसके साथ ही सूबे बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2 लाख 35 हजार 159 एवं मृतकों की संख्या बढ़कर 1259 हो गई है। बिहार में अब तक 1 करोड़ 45 लाख 47 हजार 988 सैंपल की कोरोना जाँच पूरी की जा चुकी है।

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कोरोना को लेकर दिसंबर- 2020 के लिए दिशा-निर्देश

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने पुनः तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर माह दिसंबर-2020 के लिए राज्यों के वास्ते दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों में राज्यों से कोरोना के कहर की रोकथाम के उपायों का कड़ाई से पालन करने, कांट्रेक्ट ट्रेसिंग, टैस्टिंग एवं भीड़ को नियंत्रित करने को कहा गया है।

बता दें कि इस दिशा-निर्देश में राज्यों को रात्रिकालीन कर्फ्यू लागू करने तथा खेल, मनोरंजन, धार्मिक एवं सामाजिक समारोहों में लोगों की उपस्थिति को 200 से कम रखने का अधिकार प्रदान किया गया है। परंतु, लॉकडाउन लगाने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी लेनी होगी जैसे पूर्व में ली जाती थी। जानिए कि यह दिशानिर्देश 1 दिसंबर से 31 दिसंबर तक के लिए फिलहाल लागू किया गया है

यह भी बता दें कि कंटेंनमेंट जोन के अंदर केवल आवश्यक सेवाओं की ही इजाजत होगी जबकि कंटेंनमेंट जोन के बाहर सभी तरह की छूटें जो वर्तमान में दी जा रही हैं, वही दी जाती रहेंगी। बताया गया है कि 2 गज की दूरी और मास्क पहनना अभी भी है जरूरी।

चलते-चलते जानिए कि भारत सरकार ने दिसंबर माह के लिए सतर्कता, निगरानी, रोकथाम एवं सावधानी को लेकर दिशा-निर्देश जारी करते हुए यही कहा है कि निर्देश का मुख्य उद्देश्य कोविड-19 के खिलाफ मुकाबले में मिली कामयाबी को कायम रखना है। इस हेतु स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। कई राज्यों ने तो रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाना आरंभ कर दिया है। पंजाब में भी 10:00 बजे रात्रि से 5:00 बजे सुबह तक रात्रिकालीन कर्फ्यू 1 दिसंबर से लगाया जाएगा। नियम तोड़ने वालों को ₹1000 का दंड चुकाने होंगे।

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छठ महापर्व सांप्रदायिकता के बंधन को तोड़ता है- डॉ.मधेपुरी

भारत के कुछ पर्व-त्यौहार ऐसे हैं जिनमें सांप्रदायिकता के बंधन टूटते नजर आते हैं। ईद और छठ जैसे महापर्व की भी यही खासियत है। क्या हिंदू क्या मुस्लिम, सबकी आस्था ईद के चांद की तरह छठ के भगवान सूर्य की ओर झुक जाती है। गणेश चतुर्थी यानि चौर-चंदा में हिंदुओं द्वारा चांद देखने और पूजा करने की ओर का झुकाव भी तो इस बंधन को तोड़ता हुआ दिखता है। बापू के गांव में दुर्गा पूजा हो या मुहर्रम, सभी मिलकर मनाते हैं। एकता की खुशबू से सराबोर है बापू का गांव। गांव में नहीं दिखती धर्म की दीवार ! हिंदू-मुस्लिम मिलकर मनाते यह छठ का महात्योहार। इस व्रत के प्रति मुसलमानों की भी अगाध श्रद्धा देखी जाती है। कई गांव में तो  सौ  वर्षों से छठ व्रत करते आ रहे हैं वे।

बता दें कि यदि ऐसा नहीं होता तो पटना सिटी में हिंदू परिवारों के इस महापर्व छठ को इस कोरोना काल में अच्छी तरह संपन्न कराने में मुस्लिम महिलाओं द्वारा घाट की सफाई नहीं की जाती। जानिए कि यहां के आदर्श घाट पर मुस्लिम समुदाय की महिलाओं का झुंड लगातार कई सालों से छठ जैसे महापर्व के मौके पर सफाई करती आ रही है ताकि छठ व्रती महिलाओं को इस बाबत कोई परेशानी नहीं हो।

यह भी जानिए कि छठ हो या ईद, मुहर्रम हो या दुर्गा पूजा….. इन  पर्वों में हिंदू-मुस्लिम नहीं होता है साहब, वो तो सिर्फ नेताओं के चुनावों में ही होता है…. वरना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अपने भजन में यह कभी नहीं बोलते- ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सम्मति दे भगवान…… या फिर संपूर्ण भारतीय डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम अपने पिता के साथ  मस्जिद में नमाज पढ़ने के बाद रामेश्वरम के शिव मंदिर की परिक्रमा हर रोज नहीं किया करते….. या फिर भारत रत्न डॉ.कलाम के अत्यंत करीबी रहे एवं छठ महापर्व को सांप्रदायिकता का बंधन तोड़ने वाला बताते रहने वाले डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी का दृष्टिकोण इस प्रकार के पवित्र सोच की चर्चा कभी नहीं करता-

होली-ईद मनाओ मिलकर,

कभी रंग को भंग करो मत ।

भारत की सुंदरतम छवि को,

मधेपुरी बदरंग करो मत ।।

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सातवीं बार बिहार के सीएम बने नीतीश कुमार

नीतीश की सातवीं शपथ के लिए सारा बिहार कर रहा था 4:00 बजे का इंतजार। बिहार के राजभवन में संध्या 4:30 बजे सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार। उन्हें मुख्यमंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई महामहिम राज्यपाल फागू चौहान ने।

बता दें कि राजभवन में एक  ओर मंचासीन दिखे शपथ दिलाने वाले महामहिम राज्यपाल और  सातवीं बार सीएम के पद की शपथ लेनेे वाले नीतीश कुमार। दूसरी ओर सामनेे की प्रथम पंक्ति में मौजूद दिखे- गृृृह मंत्री  अमित शाह, जेपी नड्डा, भूपेन्द्र यादव, वशिष्ठ नारायण सिंह, सुशील कुमार मोदी, आरसीपी सिंह, नरेंद्र नारायण यादव, डॉ.अमरदीप यादव….  आदि विशिष्ट जनों के साथ-साथ शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रीगण।

यह भी बता दें कि कार्यक्रम आरंभ होने से पूर्व राष्ट्रगान की धुन के साथ सभी अपने-अपने स्थान पर खड़े हो गए। धुन समाप्ति के साथ ही नीतीश कुमार को सीएम के पद एवं गोपनीयता की शपथ राज्यपाल फागू चौहान ने दिलाई। दो उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद एवं रेणु देवी ने शपथ ग्रहण करने के बाद नीतीश कुमार की बाईं ओर मंचासीन हुए और बाद में शपथ ग्रहण करने वाले सभी मंत्रियों सहित पूर्व में विधानसभा अध्यक्ष रह चुके विजय कुमार चौधरी एवं अपने अनुभव से बिहार को रोशन करने वाले बिजली मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को उठकर सम्मान देते देखे गए सीएम एवं डिप्टी सीएम द्वय।

जानिए कि मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री सहित कुल 15 मंत्रियों ने शपथ ली। सात बीजेपी कोटे से तथा पांच जदयू कोटे से मंत्री बने। उसी में एक हम पार्टी से और एक वीआईपी से मंत्री बनाए गए। आज जिन 15 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, वे हैं- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, अशोक चौधरी, मेवालाल चौधरी, शीला कुमारी, संतोष सुमन, मुकेश सहनी, मंगल पांडे, अमरेंद्र प्रताप सिंह, रामप्रीत पासवान, जीवेश मिश्रा और रामसूरत राय। अंत में शपथ ग्रहण समारोह की समाप्ति की घोषणा के साथ राष्ट्रगान की धुन पर सभी ससम्मान खड़े हुए दिखे।

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नया बिहार बनाने के लिए कल सीएम पद की शपथ लेंगे- सातवीं बार, नीतीश कुमार !!

बिहार में विधानसभा- 2020 का चुनाव संपन्न हुआ। एनडीए को 125, महागठबंधन को 110 एवं अन्य के खाते में 8 सीटें गई। एनडीए के चारों घटक दलों- जेडीयू, भाजपा, वीआईपी और हम के प्रतिनिधिगण महामहिम राज्यपाल फागू चौहान से आज मिले। एनडीए विधान मंडल द्वारा चयनित नेता नीतीश कुमार ने 125 विधायकों की सहमति पत्र के साथ राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया। कल ‘भैया दूज’ के दिन शाम 4:00 बजे बाद नीतीश कुमार….. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे…. सातवीं बार !!

बता दें कि आज संध्या 4:00 से पहले नीतीश कुमार के आवास पर भाजपा के दिग्गज नेता भूपेन्द्र यादव एवं  देवेंद्र फडणवीस व अन्य दो-दो बार मिले। इस मिलन में चर्चाएं हुई कि कैबिनेट कितना बड़ा होगा… मंत्री कौन-कौन बनेंगे तथा डिप्टी सीएम का पद सुशील मोदी की जगह किन्हीं और को दी जाएगी या वही रहेंगे।

यह भी बता दें कि पूर्व में कभी भी केंद्र से कोई पर्यवेक्षक सरकार गठन के समय नहीं आते थे। पहली बार केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भाजपा नेतृत्व द्वारा बिहार भेजा गया। एनडीए पर्यवेक्षक के रूप में राजनाथ सिंह ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की ताजपोशी का ऐलान तो कर दिया, परंतु डिप्टी सीएम पर चुप्पी साध ली। पूछे जाने पर नीतीश कुमार और सुशील मोदी भी चुप रहे जबकि दोनों के अंदर से यही आवाज निकलती रही———-  ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे।

जानिए कि एनडीए की बैठक में नीतीश कुमार ने खुद मुख्यमंत्री नहीं बनने की बात कही और भाजपा को ही मुख्यमंत्री चुनने को कहा, परंतु राजनाथ सिंह, भूपेन्द्र यादव आदि के कहने पर सीएम बनना स्वीकार किया। पुनः ऐसा लगने लगा है कि सुशील मोदी की जगह दो डिप्टी सीएम बनाए जाएंगे। एक होंगे- भाजपा विधानमंडल के नेता तार किशोर प्रसाद एवं दूसरी होंगी उपनेता श्रीमती रेणु देवी। एक महिला को डिप्टी सीएम बनाने के बाबत यह चर्चा होने लगी है कि इस चुनाव में एनडीए को आधी आबादी का सर्वाधिक मत मिला है, इसलिए प्रथम महिला डिप्टी सीएम के रूप में रेणु देवी को चुने जाने की जोरदार चर्चा हो रही है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस चर्चा को सुनकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए यही कहा कि एनडीए सरकार के होम करते हाथों को जलने से बचानेवाली आधी आबादी को डिप्टी सीएम का पद दिया जाना सर्वाधिक उचित कदम है….. इसके लिए नमो-नीतीश की जितनी सराहना की जाए, वह कम है।

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भारत के प्रथम प्रधानमंत्री चाचा नेहरू की ऐसी उपेक्षा क्यों ?- डॉ.मधेपुरी

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दरमियान 23 वर्षों तक ब्रिटिश शासन में कारागृह की यातनाएं सहने वाले एवं भारत की बेहतरी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन (14 नवंबर) पर ऐसी उपेक्षा क्यों ? भारत को आजादी दिलाने में सर्वाधिक कुर्बानियां देने वाले चाचा नेहरू को सम्मान देने में भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को इतना मुश्किल क्यों हो रहा है ?

बता दें कि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री के जन्म दिवस सह बाल दिवस यानि 14 नवम्बर के दिन स्थानीय प्रतिष्ठित अखबारों में ना तो नेहरु जी का बच्चों के साथ एक भी चित्र कहीं देखने को मिला और ना उनके सम्मान में लिखी एक भी पंक्ति कहीं दिखी। डॉ.मधेपुरी ने पुनः क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि यदि स्थिति इस तरह बिगड़ती चली गई तो क्या लोकतंत्र बच पाएगा ? क्या बच्चे ऐसी ही दीवाली मनाएंगे या लोकतंत्र के चारों चौखटों पर उम्मीद के दीये जलाएंगे…. ??

चलते-चलते यह भी बता दें कि बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू के अलावे मानवीय सेवाओं को ऊंचाई तक ले जाने वाले भारत रत्न मदर टेरेसा, जगदीश चंद्र बसु, होमी जहांगीर भाभा, सी वी रमण……. आदि को चौथे स्तंभ द्वारा जो सम्मान दिया जाना चाहिए उसमें निरंतर कमी ही नजर आ रही है। बकौल डॉ.मधेपुरी यह कि बच्चे जब तक अपने अतीत को नहीं जानेंगे तब तक वे ना तो अपने भविष्य को गढ़ पायेंगे और ना ही वर्तमान में एक कदम आगे बढ़ पायेंगे।

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जागीर गांव के शहीद कैप्टन आशुतोष को सैन्य व राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई- डीएम

मद्रास रेजीमेंट के शहीद कैप्टन आशुतोष के पार्थिव शरीर को लेकर दानापुर कैंट से सेना के जवान जब बुधवार को सुबह में पैतृक गांव जागीर पहुंचे तो पिता रविंद्र भारती द्वारा दी जा रही मुखाग्नि एवं तिरंगे में लिपटे शहीद को देखने हेतु नर-नारियों की भीड़ उमड़ पड़ी। अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी एवं सेना के जवानों के साथ अंतिम यात्रा निकली। सबों ने भारत माता की जय एवं शहीद आशुतोष के सर्वोच्च बलिदान के जयकारे लगाए।

बता दें कि एसपी योगेंद्र प्रसाद, एमएलए प्रो.चंद्रशेखर, एमपी दिनेश चंद्र यादव आदि की उपस्थिति में संवेदनशील जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला (IAS) ने राज्य सरकार की ओर से 11 लाख रूपये का चेक तथा सेना की ओर से 15 लाख  रुपये का चेक शहीद कैप्टन आशुतोष के परिजन को हस्तगत कराया।

यह भी कि शहीद कैप्टन आशुतोष को अंतिम विदाई देने आर्मी के कर्नल सहित जवान भी उनके जागीर गांव पहुंचे थे। कर्नल के नेतृत्व में सेना के जवान द्वारा शहीद कैप्टन के सम्मान में 39 चक्र गोलियों की सलामी दी गई। पहले  बीएमपी बटालियन के जवानों द्वारा और बाद में सेना के जवानों ने एक साथ गोलियों का तीन चक्र चलाकर सलामी दी।

यह भी जानिए कि शहीद को मुखाग्नि दिए जाने के बाद काफी देर तक डीएम व एसपी दाह संस्कार स्थल पर मौजूद रहे। फिर शहीद के पिता रविंद्र भारती को भरोसा दिलाते हुए संवेदनशील डीएम शुक्ला ने कहा- “आपका इकलौता पुत्र देश के लिए शहीद हुआ है लेकिन दूसरा पुत्र मैं भी हूँ। आशुतोष की पूर्ति तो नहीं की जा सकती, परंतु आपको कोई परेशानी नहीं आने दिया जाएगा……।”

मौके पर सेना के कर्नल व मेजर सहित जिले के डीडीसी विनोद कुमार सिंह, एडीएम उपेंद्र कुमार, एसडीएम नीरज कुमार, एसडीपीओ अजय नारायण यादव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। वे तरह-तरह से शहीद कैप्टन आशुतोष की मां गीता देवी एवं बहन प्रीति-अंशु सहित अन्य परिजनों को ढाढ़स बंधाते देखे गए।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जिला मुख्यालय में शहीद पार्क का निर्माण कराकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने जिले के सभी शहीदों के नाम को पट्टिका पर दर्ज कराकर सम्मान देने का काम किया है। जिसमें शहीद के नाम के साथ-साथ उनके गांव का नाम एवं शहादत की तिथि अंकित है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि उसी शहीदी पट्टिका पर शहीद कैप्टन आशुतोष का नाम….. अंकित करा कर उन्हें सदैव सम्मान दिया जाएगा।

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देश के लिए शहीद हुए मधेपुरा के सपूत कैप्टन आशुतोष

कौन जानता था कि मधेपुरा जिले के  घैलाढ़ प्रखंड के  भतरंधा-परमानपुर, वार्ड नंबर- 17 (जागीर गांव) के रविंद्र यादव (अनुसेवक, घैलाढ़ पशु चिकित्सालय) का पुत्र कैप्टन आशुतोष शनिवार (8 नवंबर) की शाम 7:00 बजे अपने घर पापा-मम्मी से बात कर यही कहेगा कि दीपावली-छठ की छुट्टी पर घर आऊंगा और ठीक चंद घंटों बाद यानि आधी रात के बाद जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के माछिल सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तानी आतंकवादियों की घुसपैठ रोकने के दौरान हुई गोलीबारियों में जिले का वह सपूत कैप्टन आशुतोष शहीद हो जाएगा और तिरंगे में लिपटकर दिपावाली से पहले ही अपने माता-पिता सहित परिजनों के बीच आ जाएगा !

जानिए कि इस मुठभेड़ के दौरान भारत का बेशकीमती लाल 24 वर्षीय कैप्टन आशुतोष कुमार ने तीन आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। आशुतोष के शहीद होने की सूचना आधिकारिक तौर पर रविवार को शाम 6:30 बजे उनके पिता को दी गई। जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। गांव की सारी महिलाएं कैप्टन आशुतोष के माता-पिता और दो बहनों खुशबू व अंशु को ढाढ़स देने चल पड़ी और पास-पड़ोस की कुछ महिलाएं तो शहीद के परिजनों को संभालने हेतु दौड़ पड़ी, क्योंकि कैप्टन आशुतोष अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र जो था। अभी उसकी शादी भी नहीं हुई थी।

बता दें कि शहीद कैप्टन आशुतोष ने सैनिक स्कूल भुवनेश्वर (उड़ीसा) से पढ़ाई पूरी की और उसके बाद एनडीए परीक्षा उत्तीर्ण होकर इंडियन मिलिट्री एकेडमी से 2018 में लेफ्टिनेंट बटालियन-18 मद्रास में भर्ती हुए थे। 3 वर्षो के अंदर ही इन तीन आतंकवादियों को ढेर कर शहीद कैप्टन आशुतोष ने तो अपनी मां के दूध की लाज और भारत माता की इज्जत को सिर आंखों पर रखा ही, साथ ही तिरंगे की शान को भी शानदार व जानदार बनाए रखा।

चलते-चलते यह भी कि जिले के निवर्तमान डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा 2018 में उद्घाटित ‘शहीद पार्क’ में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने जिले के सभी शहीदों को सदा के लिए सम्मानित किया है, जिसमें घैलाढ़ प्रखंड के ही फुलकाहा निवासी शहीद  प्रमोद कुमार का भी नाम अंकित है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि बच्चों को सदैव प्रेरित करते रहने के लिए कैप्टन शहीद आशुतोष कुमार का नाम भी “शहीदी पट्टीका” में अंकित कराया जाएगा।

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इंदिरा गांधी ने ही भारत के लिए सर्वप्रथम मिसाइल का सपना देखा था- डॉ.मधेपुरी

31 अक्टूबर 1984 को अंतिम सांस लेने वाली आयरन लेडी या अटल जी के मुख से दुर्गावतार कहलाने वाली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ही भारत के लिए सर्वप्रथम मिसाइल का सपना देखा था। दुनिया को अलविदा कहने से 1 वर्ष पूर्व यानि वर्ष 1983 में श्रीमती गांधी ने भारत के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम से कहा था कि एक ऐसा मिसाइल बनाओ जो चीन तक पहुंच जाए यानि 5000 किलोमीटर तक का अचूक निशाना साध सके।

डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी बताते हैं कि जब तीन दशक बाद अग्नि-वी मिसाइल तैयार हुआ तब डॉ.कलाम ने कहा था-  “Credit goes to Smt. Indira Gandhi.”

डॉ.कलाम पर कई पुस्तकें लिखने वाले डॉ.मधेपुरी कहते हैं कि डॉ.कलाम के निर्देशन में बनाए गए अग्नि मिसाइल ने उस आयरन लेडी के सपने को पूरा किया, जिसकी एक बटन दबाते ही वह इंडियन टेरिटरी से सीधे बीजिंग और शंघाई तक पहुंच जाएगा। श्रीमती गांधी की चर्चा करते वक्त डॉ.कलाम ने उड़ीसा के सीएम बीजू पटनायक को भी श्रीमती गांधी की तरह विजनरी लीडर कहा था। वर्ष 1993 में अग्नि-वी मिसाइल के लॉन्चिंग स्टेशन निर्माण के बाबत समय लेकर जब उड़ीसा के सीएम के कार्यालय में  डॉ.कलाम पहुंचे तो देखते हैं कि पहले से ही संचिका सीएम के सामने है।

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि उड़ीसा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने डॉ.कलाम का हाथ थामते हुए यही कहा था- “मैं व्हीलर आईलैंड सहित पांच आईलैंड डीआरडीओ को देने का मन इस शर्त के साथ बना लिया हूं कि चीन द्वारा भेजे गए आमंत्रण पर जब तक मैं चीन जाऊँ तब तक आपके द्वारा बनाया गया अग्नि मिसाइल भी चीन तक पहुंच जाए।”

आज दोनों विजनरी लीडर्स पीएम इंदिरा गांधी और सीएम बीजू पटनायक को सारा देश नमन करता है और उनके विजन को सैल्यूट करता है।

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कलम की ताकत सदैव तलवार से अधिक रही है- डॉ.मधेपुरी

संसार में कलम की ताकत सदैव तलवार से अधिक रही है और दुनिया में ऐसे कई पत्रकार हुए हैं जिन्होंने अपनी कलम की ताकत से सत्ता तक की राह बदल दी- ऐसे ही पत्रकारों में एक थे- निर्भीक जुझारू पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी। ये बातें कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने उनकी 131वीं जयंती ऑनलाइन मनाये जाने के क्रम में 26 अक्टूबर को कही। डॉ.मधेपुरी ने  कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण वे इंट्रेंस तक ही पढ़ सके, परंतु अच्छी जानकारी हासिल करने के कारण 16 वर्ष की उम्र में विद्यार्थी जी ने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर पहली पुस्तक “हमारी आत्मोत्सर्गता” लिखी थी।

सम्मेलन के संरक्षक साहित्यकार व पूर्व सांसद डाॅ.रमेन्द्र  कुमार यादव रवि ने कहा कि मात्र 23 वर्ष की उम्र में गणेश शंकर विद्यार्थी ने ‘प्रताप’ अखबार की शुरुआत की और स्वतंत्रता संग्राम के दरमियान विद्यार्थी जी के जेल जाने के बाद ‘प्रताप’ का संपादन माखनलाल चतुर्वेदी एवं बालकृष्ण शर्मा नवीन जैसे बड़े-बड़े साहित्यकार करने लगे। विद्यार्थी जी सात वर्षों में पाँच बार जेल गए। डॉ.रवि ने कहा कि रायबरेली के सरदार वीरपाल सिंह ने किसानों पर गोली चलवाई और उसका पूरा ब्योरा प्रताप में छापने के कारण विद्यार्थी जी सहित अन्य पर मानहानि का मुकदमा भी हो गया जिसमें गवाह के रूप में मोतीलाल नेहरू एवं जवाहरलाल नेहरू भी पेश हुए थे।

अंत में अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने अपने ऑनलाइन संबोधन में यही कहा कि विद्यार्थी जी के लिए जेल जैसे उनका घर ही हो। अंग्रेजों के कोपभाजन होने के कारण उन्होंने सरकारी नौकरी भी छोड़ दी। जेल में लिखी डायरी के आधार पर “जेल जीवन की झलक” नाम से सीरीज छपी जो सर्वाधिक हिट रही। इस कार्यक्रम से अनेकों साहित्यकार जुड़े रहे। प्रो.मणिभूषण वर्मा ने 1931 के कानपुर दंगे को रोकने के क्रम में शहीद हुए विद्यार्थी जी को नमन किया और कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

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