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भारतीय संविधान ही भारत की आत्मा है

26 नवंबर को समस्त भारत की स्कूल-कॉलेज से लेकर गाँव-शहर के सभी संस्थानों में चाहे वह सरकारी हो या गैर सरकारी….. संस्था के प्रधानों द्वारा छात्र-छात्राओं से लेकर सभी कर्मियों को संविधान की शपथ दिलाई गई। संविधान दिवस को पंचायत, अनुमंडल, जिला और प्रदेश तथा देश स्तर के रहनुमाओं द्वारा सर्वाधिक धूमधाम से मनाया गया। सबों ने देश की एकता एवं अखंडता की शपथ खाई और दूसरों को शपथ दिलाई भी। बच्चे, नौजवान एवं सभी नर-नारियों ने यही शपथ ली-

“हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण, प्रभुत्व संपन्न समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी संविधान सभा में 26 नवंबर एतत् द्वारा संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मप्रित करते हैं।”

शपथ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मधेपुरा के युवा व ऊर्जावान जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला एवं जांबाज एसपी संजय कुमार ने कहा कि भारत के संविधान को विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है जिसे तैयार करने में 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन लगे थे। इसे बनाने में इस जिले के संविधान सभा सदस्य कमलेश्वरी प्रसाद यादव (चतरा) से लेकर… सर सच्चिदानंद सिन्हा….. डॉ.राजेंद्र प्रसाद… डॉ.भीमराव अंबेडकर…. आदि का योगदान सदा स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान हमें अधिकार के साथ-साथ कर्तव्य का भी बोध कराता है। हमारे संविधान में समस्याओं का निदान भी सन्निहित है। इस 70वें संविधान दिवस पर हमें मूल कर्तव्यों का पालन सख्ती के साथ करना चाहिए….. तभी भारत विकसित राष्ट्र बनेगा।

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उद्धव सरकार में एनसीपी का उपमुख्यमंत्री, विस अध्यक्ष कांग्रेस का

महाराष्ट्र में बुधवार को शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच सरकार बनाने को लेकर अहम बैठक हुई। ‘महा विकास अघाड़ी’ की इस बैठक में महामंथन के बाद तीनों दलों ने साझा रूप से फैसला किया कि महाराष्ट्र में एक ही उपमुख्यमंत्री होगा जो कि एनसीपी का होगा, जबकि कांग्रेस को विधानसभा अध्यक्ष का पद दिया जाएगा। कांग्रेस की ओर से इस बैठक में अहमद पटेल और मल्लिकार्जुन खड़गे जबकि शिवसेना से पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी की ओर से पार्टी अध्‍यक्ष और नई सरकार के सूत्रधार शरद पवार मौजूद रहे।

गौरतलब है कि इससे पहले ऐसी खबरें आ रही थीं कि महाराष्ट्र में दो उपमुख्यमंत्री हो सकते हैं, लेकिन इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद उन अटकलों पर विराम लग गया। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में मंत्री पद का फार्मूला भी तय कर लिया गया। इस फार्मूले के अनुसार उद्धव मंत्रिमंडल में 15 मंत्री शिवसेना के, उपमुख्यमंत्री समेत 15 मंत्री एनसीपी के और 13 मंत्री कांग्रेस के हो सकते हैं। वैसे गुरुवार शाम शिवाजी पार्क में होने वाले शपथग्रहण समारोह में कितने मंत्री शपथ लेंगे यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। बहुत संभव है कि तीनों दलों से एक या दो मंत्री शपथ लें।

उधर शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए नेताओं को निमंत्रण भेजने का सिलसिला जारी है। उद्धव ठाकरे के पुत्र और नवनिर्वाचित विधायक आदित्य ठाकरे ने दिल्ली आकर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में आने का निमंत्रण दिया। आदित्य ने सोनिया गांधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाकात कर उन्हें महाराष्ट्र के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया। शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए और जिन प्रमुख नेताओं को आमंत्रण पत्र भेजा गया है उनमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और द्रमुक नेता एमके स्टालिन प्रमुख हैं।

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बिहार की बेटी शिवांगी नौसेना में बनी देश की पहली महिला पायलट

बिहार के मुजफ्फरपुर की बेटी सब -लेफ्टिनेंट शिवांगी इस वर्ष के अंत तक नौसेना में देश की पहली महिला पायलट बनेगी। ग्रामीण परिवेश में एक स्कूल टीचर के घर जन्मी शिवांगी ने 2010 में मुजफ्फरपुर के डीएवी स्कूल से CBSE की परीक्षा पास की। साइंस स्ट्रीम में 12वीं करने के बाद शिवांगी सिक्किम-मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की। एमटेक में दाखिले के बाद SSB परीक्षा के जरिये नौसेना में सब-लेफ्टिनेंट के रूप में चयनित हुई।

बता दें कि फिलहाल शिवांगी कोच्चि में “Flying Fish” की ट्रेनिंग ले रही है। ट्रेनिंग पूरी होते ही एक समारोह आयोजित कर शिवांगी को बैज लगाया जाएगा। बैज लगाने के बाद शिवांगी नौसेना (NAVY) में देश की पहली महिला पायलट बनेगी।

यह भी बता दें कि किसी भी क्षेत्र में पीछे रहना बिहार की जिस बेटी शिवांगी को मंजूर नहीं था चंद दिनों के बाद उसी बेटी के सपनों को पंख लगने जा रहा है। वहां का बच्चा-बच्चा जानता है कि शिवांगी बचपन से ही हर बाधा को चुनौती के रूप में लेती थी।

चलते-चलते यह भी जान लें कि शिवांगी के पिता हरिभूषण सिंह फतेहाबाद गांव (प्रखंड- पारु) के निवासी हैं जो वर्तमान में यमुना बालिका उच्च विद्यालय में एचएम हैं। साथ ही यह भी कि पठन-पाठन के साथ-साथ एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में दिलचस्पी रखने वाली शिवांगी मुजफ्फरपुर शहर में भगवानपुर इलाके के सर गणेश दत्त मोहल्ले की रहने वाली है जो ट्रेनिंग के दरमियान कॉकपिट के अंदर एक तेज सीखने वाली तथा उड़ान भरने में प्रवीण शिवांगी अपने इंस्ट्रक्टर लेफ्टिनेंट कमांडर राहुल यादव को अपने अव्वल हुनर से संतुष्ट कर देती है।

 

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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का निधन

भारतीय चुनावी व्यवस्था में शुचिता और पारदर्शिता लाने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का रविवार, 10 नवंबर 2019 को रात के करीब 9.30 बजे चेन्नई स्थित अपने घर में निधन हो गया। 86 वर्षीय शेषन पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने 1990 से 1996 के बीच चुनाव आयोग की कमान संभाली थी और अपनी निर्भीक कार्यशैली और अहम फैसलों से भारतीय चुनावी राजनीति की दिशा को निर्णायक मोड़ दिया था।
टीएन शेषन, जिनका पूरा नाम तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन था, तमिलनाडु कैडर के 1955 बैच के आईएएस ऑफिसर थे। उन्होंने 10वें चुनाव आयुक्त के तौर पर देश को अपनी सेवाएं दी थीं। उन्हीं के कार्यकाल में चुनावों में मतदाता पहचान पत्र के इस्तेमाल की शुरुआत हुई, लोगों ने आचार संहिता का मतलब समझा, पर्यवेक्षकों को काम की आजादी और वोटरों को सुरक्षा मिली, हौसला बढ़ा तो लोकतंत्र में भरोसा भी बढ़ा और चुनाव आयोग की शक्ति और सार्थकता से पूरा देश वाकिफ हुआ। उन्हें रेमन मैग्सेसे अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।
एक वक्त ऐसा था जब देश भर के नेता टीएन शेषन से खौफ खाते थे। शांतिपूर्ण मतदान के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश-बिहार में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करवा कर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त करवाए थे। 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए तो उन्होंने चुनाव की तारीखों को चार बार आगे बढ़ा दिया था। शेषन थोड़ी-सी गड़बड़ होने पर भी चुनाव रद्द कर दिया करते थे। चुनाव-प्रचार को लेकर भी वे जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते। बड़े-से-बड़े नेता को भी चुनाव-प्रचार की सीमा खत्म होने पर वे सभा नहीं करने दिया करते। अधिकारियों के प्रति भी वे काफी सख्त थे। कर्तव्य-पालन में कोई चूक उन्हें बर्दाश्त नहीं हुआ करती।
बता दें कि टीएन शेषन का जन्म 15 दिसंबर 1932 को केरल के पलक्कड़ जिले के थिरुनेल्लई में हुआ था। पलक्कड़ से स्कूल की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से फिजिक्स में ग्रैजुएशन किया। मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में उन्होंने तीन साल डेमॉन्स्ट्रेटर के तौर पर भी काम किया और साथ ही साथ आईएस की तैयारी भी करते रहे। आईएएस की परीक्षा पास करने के उपरांत वे एक फेलोशिप पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पढ़ाई करने चले गए, जहां उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की। 1989 में वे देश के 18वें कैबिनेट सचिव बने। मुख्य चुनाव आयुक्त का दायित्व उन्हें प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के कार्यकाल में मिला था।
देशसेवा, कर्तव्यपरायणता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बेमिसाल प्रतीक टीएन शेषन को ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि..!

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इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 में चौंकाने वाले खुलासे

टाटा ट्रस्ट के द्वारा जारी इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक आम नागरिकों को न्याय मुहैया कराने के मामले में महाराष्ट्र राज्यों की सूची में शीर्ष पर है। वहीं, केरल दूसरे, तमिलनाडु तीसरे, पंजाब चौथे और हरियाणा पांचवें स्थान पर है। ये तो हुई बड़े राज्यों की बात। छोटे राज्यों की बात करें तो एक करोड़ से कम जनसंख्या वाले राज्यों में गोवा पहले, सिक्किम दूसरे और हिमाचल प्रदेश तीसरे स्थान पर है।

बता दें कि इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 विभिन्न सरकारी संस्थाओं जैसे पुलिस, न्यायपालिका, कारागार और कानूनी सहायता पर आधारित है। टाटा ट्रस्ट ने इस रिपोर्ट को सेंटर फॉर सोशल जस्टिस, कॉमन काउज, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव समेत कई संस्थानों की मदद से तैयार किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 18,200 जज हैं और करीब 23% सीटें खाली हैं। रिपोर्ट से यह तथ्य भी सामने आया कि जेलों में क्षमता से अधिक 114% कैदी हैं जबकि इनमें से 68% कैदी अंडरट्रायल हैं।

टाटा ट्रस्ट की यह रिपोर्ट हमें बताती है कि विभिन्न संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व निम्न स्तर पर रहा है। देशभर में न्याय और कानून व्यवस्था में महिलाओं की संख्या काफी कम है। जेल कर्मचारियों में 10% महिलाएं हैं। हाईकोर्ट और लोअर कोर्ट के सभी जजों में महिला जज 26.5% हैं।

इस रिपोर्ट को जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एमबी लोकुर ने कहा कि रिपोर्ट में हमारी न्यायिक व्यवस्था में गंभीर खामियां पाई गई हैं। न्यायिक व्यवस्था के समक्ष मुख्यधारा के मुद्दों पर न्याय देने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ये मुद्दे हमारी सोसाइटी, सरकार और अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।

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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त

दीपावली पर फोड़े गए पटाखों और पंजाब-हरियाणा में लगातार जलाई जा रही पराली के कारण राजधानी दिल्ली और इससे सटे गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद जैसे दर्जन भर शहरों में वायु गुणवत्ता स्तर (Air Quality Index) 800 से 1000 के आसपास बना हुआ है।
गौरतलब है कि वायु गुणवत्ता मापने के लिए शहर में लगाई गई मशीनें 500 तक AQI माप सकती हैं, जबकि रविवार सुबह दिल्ली और आसपास के शहरों में AQI 1200 के पार चले जाने के कारण मशीनें तक जवाब दे गईं। ऐसे में स्थिति भयावह हो चली है। आँखों में जलन और सांस संबंधी दिक्कतें आम हो गई हैं। खासकर बच्चे और बुजुर्ग इससे ज्यादा प्रभावित हैं। एहतियातन दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 5 नवंबर तक सारे स्कूल बंद कर दिए गए हैं। खराब मौसम और स्मॉग के कारण वायु सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
उधर केन्द्र सरकार लगातार प्रदूषण से बने हालात पर नजर बनाए हुए है। प्रदूषण के लिए जिम्मेदार तमाम कारकों मसलन निर्माण कार्यों, कूड़ा जलाने और पराली जलाने पर सख्ती की तैयारी की जा रही है। प्रदूषण से निपटने के लिए 300 टीमें लगातार काम कर रही हैं। राज्य सरकारों को प्रदूषण में कमी लाने के लिए सारे संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।
सरकारी स्तर पर जो भी प्रयास हो रहे हैं, वे अपनी जगह हैं; जरूरत इस बात की है कि इस विकट स्थिति के लिए हम सबको आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेनी होगी और कुछ संकल्प लेने होंगे ताकि हम अपनी प्रकृति और परिवेश की रक्षा कर सकें। बिहार सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किया गया जल-जीवन-हरियाली अभियान वास्तव में इन्हीं भयावह स्थितियों से निपटने और हमारी भावी संततियों को सुरक्षित रखने की कोशिश है। देखा जाए तो ऐसे अभियान की जरूरत पूरे देश में है।

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सम्पूर्ण समाजवादी महापर्व है छठ

शुचिता, स्वच्छता और समर्पण का महापर्व है छठ। घर-घर में महिलाएं अपने परिवार व बच्चों की कुशलता की कामना लेकर पूरी निष्ठा से करती हैं इस व्रत को। कुछ घरों में तो पुरुष भी रखते हैं यह व्रत। गौर करने की बात है कि छठ ही एकमात्र पर्व है जिसमें बिना किसी कर्मकांड या पंडितों की सहायता के ही श्रद्धालु व्रती चार दिनों तक चलने वाला व्रत करते हैं।
लोकआस्था का यह महापर्व छठ सामाजिक एकता का अद्वितीय प्रतीक है। तभी तो बिहार के कटिहार, नालंदा आदि जिलों के कुछ मुस्लिम परिवार भी वर्षों से इस व्रत को करते आ रहे हैं। भला क्यों नहीं, सूर्यदेव सबसे जुड़े जो हैं और साथ ही जोड़ते भी हैं सबको। बिना किसी भेद-भाव के विभिन्न घाटों पर सभी एक साथ मिलकर सूर्य देव को प्रणाम करते हैं। सभी जानते और मानते हैं कि सूर्य से ही जीवन है और सूर्य से ही प्रकृति और पर्यावरण का अस्तित्व संभव है। तभी तो इस महापर्व में डूबते सूर्य की भी पूजा समान श्रद्धा से होती है।
धार्मिक आस्था से जुड़े महापर्व छठ का आर्थिक पक्ष भी है। जी हाँ, हमें जानना चाहिए कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जीवित रखने में इस पर्व का बड़ा योगदान रहा है। यदि बाजार में इस पर्व में उपयोग में लाई जाने वाली चीजों पर नज़र डालें तो 90 से 95 प्रतिशत सामान गांवों के छोटे-छोटे किसानों के खेत से या फिर कास्तकारों के हाथों के हुनर से बनकर आते हैं। इस पर्व में इस्तेमाल होने वाली चीजों – हल्दी, अदरख, केला, अमरूद, अल्हुआ, सुथनी आदि – का करोड़ों का कारोबार हो जाता है। मधेपुरा की ही बात करें तो केवल इस जिले में ही हल्दी-अदरख का कारोबार तीन से चार करोड़ तक पहुँच जाता है। छठ पूजन की अन्य सामग्रियों को जोड़ दें तो जिले का कुल कारोबार 90 से 95 करोड़ तक पहुँच जाता है। कहने की जरूरत नहीं कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कितनी मजबूती मिलती है।
कुल मिलाकर कहना गलत न होगा कि समाज के हर वर्ग को एक समान लाभ और महत्व देने वाला यह पर्व समाजवाद की सच्ची परिभाषा प्रस्तुत करता है। इस तरह से सम्पूर्ण समाजवादी महापर्व है छठ।

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क्या कहते हैं बिहार में उपचुनाव के परिणाम ?

बिहार में हुए उपचुनाव में एनडीए की अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं आए। उसे उम्मीद थी कि इस बार भी लोकसभा चुनाव जैसे परिणाम ही मिलेंगे, लेकिन स्पष्ट तौर पर इन चुनावों में बड़े नेता और बड़े नारों की जगह स्थानीय मुद्दे और समीकरण अधिक हावी रहे। विधानसभा की पांच सीटों में से जदयू ने चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सफलता केवल नाथनगर में मिली। आरजेडी ने भी चार सीटों पर अपने उम्मीदवार दिए थे, जिनमें बेलहर और सिमरी बख्तियारपुर के रूप में दो सीटें जीतने में वह सफल रही। वहीं, एक-एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार करणजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह और हैदराबाद के सांसद ओवैसी की पार्टी एमआईएमआईएम के कमरूल होदा ने जीत हासिल की। उधर समस्तीपुर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में लोजपा उम्मीदवार प्रिंस राज ने कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार को 1,02,090 वोटों से मात दी।
नाथनगर विधानसभा क्षेत्र में जदयू के लक्ष्मीकांत मंडल ने आरजेडी की राबिया खातून को 5131 वोट से हराया। वहीं, सिमरी बख्तियारपुर सीट से आरजेडी के जफर आलम ने जदयू के डॉ. अरुण कुमार को 15505 वोट से और बेलहर में आरजेडी के रामदेव यादव ने जदयू के लालधारी यादव को 19231 वोट से हराया। उधर दरौंदा में भाजपा के बागी उम्मीदवार करणजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह ने जदयू के अजय कुमार सिंह को 27279 वोट से शिकस्त दी, जबकि किशनगंज में एमआईएमआईएम के कमरूल होदा ने भाजपा की स्वीटी सिंह को 10204 वोट से मात दी। ओवैसी की पार्टी का बिहार में सीट हासिल करना बिहार में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है।
बहरहाल, इन चुनावों में आए परिणाम भले ही एनडीए के अनुकूल न रहे हों, लेकिन बिहार में एनडीए के सर्वमान्य और सबसे बड़े चेहरे नीतीश कुमार के मनोबल पर कोई असर पड़ता नहीं दिखता। इन नतीजों के बाद उन्होंने कहा कि “जनता मालिक होती है। मैं पहले भी कह चुका हूँ। जब भी उपचुनाव में हम कम सीटों पर जीतते हैं तो चुनाव में ज्यादा सीटें जीतते हैं। यह पहले से होता रहा है। अगले चुनाव में हमारी बड़ी जीत होगी।”
नीतीश कुमार के आत्मविश्वास की दाद देनी होगी। लेकिन 2020 के लिए उन्हें अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करना होगा और बाकी दल भी उपचुनाव के नतीजों के आधार पर जोड़-तोड़ में लग चुके होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं।

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महाराष्ट्र की पहली नेत्रहीन महिला प्रांजल पाटिल बनी आईएएस

जब 2016 में प्रांजल ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में 773वीं रैंक हासिल की तो उन्हें भारतीय रेल सर्विस में नौकरी करने का प्रस्ताव मिला, परंतु दृष्टि बाधित होने पर उन्हें नौकरी नहीं मिला भारतीय रेल में |

बता दें कि प्रांजल रेल विभाग के इस निर्णय से बेहद निराश हुई, परंतु वह हार मानने की जगह दोबारा संघर्षपूर्ण प्रयास करने लगी | प्रांजल पुनः UPSC की परीक्षा की तैयारी में जुट गई | अपने लक्ष्य के साथ वह प्रांजल खड़ी रही और अड़़ी रही | इस बार वह 124वीं रैंक लेकर प्रशिक्षणोंपरांत एर्नाकुलम सहायक कलेक्टर के पद पर नियुक्त हुई |

केरल कैडर की प्रांजल पाटिल उपजिलाधिकारी के पदभार संभालते हुए घोषणा की कि वह एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करना चाहती है जिसमें हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के अवसर मिले | महाराष्ट्र के उल्लास नगर  में जन्मी 28 वर्षीया प्रांजल ने एक वाक्य में अपना संदेश दुनिया को यूँ दिया-

बिना किसी विराम के और बिना किसी थकान के मैं चलती रही…..मैंने कभी हार नहीं मानी …. बल्कि यही महसूसती रही कि जो गहराई में उतरता है…. वही मोती पाता है |

अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हुई आईएएस प्रांजल पाटिल ने यही कहा कि मुझे हरदम माता-पिता से प्रेरणाएं मिलती रही | उन्हीं की प्रेरणा से वह जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय से एमए करने के बाद एमफिल और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की | यद्यपि प्रांजल मात्र 6 साल की उम्र में नेत्रहीन हो गई जब खेल-खेल में ही प्रांजल की एक आंख में पेंसिल लग गई | यह हादसा इतना गंभीर रूप ले लिया कि कुछ ही दिनों बाद प्रांजल की दोनों आंखों की रोशनी चली गई | अचानक उजाले से अंधेरे में चली गई इस दुनिया से जूझना…… अब प्रांजल के लिए नेत्रहीन पर्वतारोही कंचन गाबा की तरह सबसे बड़ी चुनौती बन गई है |

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बिहार में उपचुनाव के लिए प्रचार थमा, 21 अक्टूबर को होगा मतदान

बिहार में विधानसभा की पांच सीटों – सिमरी बख्तियारपुर, नाथनगर, बेलहर, दरौंदा और किशनगंज – तथा एक लोकसभा सीट समस्तीपुर के लिए उपचुनाव के प्रचार का शोर शनिवार शाम को थम गया। इसके बाद रविवार को उम्मीदवार घर-घर जाकर वोट मांगेंगे। इन सभी सीटों के लिए 21 अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव आयोग ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान के लिए सुरक्षा बलों का पुख्ता इंतजाम किया गया है। बता दें कि विधानसभा की इन पांच और लोकसभा की एक सीट के लिए कुल 51 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और इन सभी सीटों के लिए कुल 3258 बूथों पर वोट डाले जाएंगे।

बिहार के इस उपचुनाव में एनडीए ने जहां इसी साल संपन्न हुए लोकसभा चुनावों की तरह एक बार फिर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है और पूरे उत्साह में दिख रहा है, वहीं महागठबंधन पिछले चुनावी सदमे से अभी तक पूरी तरह उबरा नहीं दिख रहा। 24 अक्टूबर को आने वाले परिणामों में 2020 के संकेत छिपे होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं।

बहरहाल, इन उपचुनावों में नाथनगर से जदयू के प्रत्याशी लक्ष्मीकांत मंडल हैं। उनका मुकाबला राजद की राबिया खातून और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हम के अजय कुमार राय से है। वहीं, सिमरी बख्तियारपुर से जदयू के डॉ. अरुण कुमार उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला राजद के जफर आलम और महागठबंधन में रहे मुकेश सहनी की पार्टी वीआइपी के उम्मीदवार से है। बेलहर से जदयू के उम्मीदवार लालधारी यादव हैं। उनका मुकाबला राजद के रामदेव यादव से है। दरौंदा से जदयू के उम्मीदवार अजय सिंह हैं। उनका मुकाबला राजद के उमेश सिंह से है। वहीं, किशनगंज सीट पर भाजपा उम्मीदवार स्वीटी सिंह का मुकाबला कांग्रेस की शाइदा बानो से है। समस्तीपुर लोकसभा सीट पर एनडीए की ओर से लोजपा के प्रिंसराज चुनाव मैदान में हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार से है।

चलते-चलते बता दें कि समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में सुबह सात से शाम पांच बजे तक वोटिंग होगी, जबकि एक विधानसभा कुशेश्वरस्थान में सुबह सात से शाम चार बजे तक मतदान का समय तय किया गया है। वहीं, विधानसभा उपचुनाव वाले क्षेत्रों में किशनगंज, दरौंदा, नाथनगर में सुबह सात से शाम पांच बजे तक वोटिंग होगी, जबकि, सिमरी बख्तियारपुर और बेलहर में सुबह सात से शाम चार बजे तक मतदान का समय चुनाव आयोग तय किया है।

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