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आलोचना को ऊँचाई देने वाले ‘नामवर’ नहीं रहे

अपनी प्रगतिशील सोच से साहित्य को नया आयाम देने वाले नामवर सिंह नहीं रहे। डॉ. नामवर सिंह के रूप में न केवल हिन्दी साहित्य ने बल्कि सम्पूर्ण भारतीय साहित्य ने एक बहुत बड़ा और विश्वसनीय चेहरा खो दिया। मंगलवार देर रात 92 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली और इसके साथ ही हिन्दी साहित्य के ‘नामवर युग’ का अंत हो गया। एक चलती-फिरती ‘संस्था’ जिनसे कई पीढ़ियों ने साहित्य की सही और सच्ची समझ हासिल की, बहुत बड़ी रिक्तता छोड़ हमसे रुख़सत हो गई। पिछले दिनों नामवर जी दिल्ली के अपने घर में गिर गए थे जिसके बाद उनके सिर में चोट लगी और उनको एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया था।
नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1926 को वाराणसी के जीयनपुर गांव में हुआ था। उन्होंने अपने लेखन की शुरुआत कविता से की और 1941 में उनकी पहली कविता ‘क्षत्रिय मित्र’ में छपी। 1951 में उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एमए किया और फिर वहीं हिन्दी के व्याख्याता नियुक्त हुए। इसके बाद उन्होंने सागर विश्वविद्यालय में भी अध्यापन किया। लेकिन सबसे लंबे समय – 1974-1987 – तक वे दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रहे। यहां से सेवानिवृत्त होने के कुछ वर्षों बाद उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा का चांसलर बनाया गया।
डॉ. नामवर सिंह ने हिन्दी साहित्य खासकर आलोचना को कई कालजयी कृतियां दीं जिनमें ‘कविता के नए प्रतिमान’ विशेष रूप से चर्चित है। ‘हिन्दी के विकास में अपभ्रंश का योगदान’, ‘पृथ्वीराज रासो: भाषा और साहित्य’, ‘आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियां’, ‘छायावाद’, ‘इतिहास और आलोचना’, ‘कहानी: नई कहानी’, ‘दूसरी परंपरा की खोज’, ‘हिन्दी का गद्यपर्व’, ‘वाद विवाद संवाद’, ‘आलोचक के मुख से’, ‘बकलम खुद’ आदि उनकी अन्य महत्वपूर्ण कृतियां हैं। उनकी जितनी प्रतिष्ठा इन पुस्तकों को लेकर थी उतना ही सम्मान उन्हें प्रखर वक्ता के तौर पर हासिल था और इन सबके ऊपर थी उनकी बेबाकी और साफगोई। कुल मिलाकर, उन्होंने हिन्दी साहित्य, खासकर आलोचना की विधा को जो ऊँचाई दी और जैसा सम्मान दिलाया उसकी कोई सानी नहीं।
साहित्य अकादमी समेत कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित नामवर सिंह नि:संदेह हिन्दी के सार्वकालिक महान साहित्यकारों में अग्रगण्य हैं। उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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शहीदों को अंतिम विदाई देने उमड़ा देश !

शहीदों को अंतिम विदाई देने उमड़ा देश !

यादों का संदेश…. फिर भी….. रह गया कुछ शेष !!

पुलवामा आतंकी हमले में हुए भारत माता के सभी 44 शहीद सपूतों के सजदे में झुके संपूर्ण देश के आक्रोश में होने के बावजूद भी जहाँ पीएम नरेन्द्र मोदी ने उन बहादुर सैनिकों और उन्हें जन्म देने वाली माताओं को सलाम करते हुए यही कहा- “आज उन शहीदों के परिवार के साथ संपूर्ण देश खड़ा है….” वहीं इस हमले में सीआरपीएफ के जवान बिहार निवासी हवलदार संजय कुमार सिन्हा एवं सिपाही रतन कुमार ठाकुर द्वारा देश की सुरक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वालों के परिजनों को बिहार सरकार की ओर से सीएम नीतीश कुमार ने 36-36 लाख रुपए देने की घोषणा की है।

बता दें कि शहीदों की विदाई में उमड़ा जनसैलाब ! पूरा देश एकजुट ! आतंक पर वार के लिए सभी दल तैयार ! सारा देश सीआरपीएफ जवानों की शहादत से दु:खी और कुछ भी कर गुजरने को तैयार…. !!

Dr.Madhepuri
Dr. Bhupendra Madhepuri .

दु:ख की इस घड़ी में यह भी जान लें कि संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उद्घोषणा- “शहीदों के परिजनों के साथ आज सारा देश खड़ा है” पर मधेपुरा अबतक से गंभीरतापूर्वक चर्चा की और इसके माध्यम से देश के गृहमंत्री एवं रक्षामंत्री से उन्होंने विनम्र अनुरोध किया है कि वे पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सभी शहीदों के परिजनों के बैंक खाते का नंबर देश के करोड़ों-करोड़ संवेदनशील देशवासियों की जानकारी में दें ताकि भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम सरीखे करोड़ों संवेदनशील भारतीय 44 शहीदों के परिजनों के खाते में 1-1 रूपये डाल सकें तो करोड़ों रुपये हो जाएंगे….. उन्हें बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर शादी-विवाह या अन्य जरूरतों के लिए कभी विवश नहीं होना पड़ेगा…… और तभी सही मायने में दुनिया को “शहीदों के परिजनों के साथ संपूर्ण भारत खड़ा” दिखेगा।

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प्रधानमंत्री ने की परिक्रमा तो गृहमंत्री ने दिया कंधा

पुलवामा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों के पार्थिव शरीर शुक्रवार को श्रीनगर से दिल्ली लाए गए। इस दौरान पालम एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और तीनों सेना के प्रमुखों के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान केन्द्रीय राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने इस दौरान हाथ जोड़कर शहीदों के शवों की परिक्रमा भी की। परिक्रमा का ये क्षण बड़ा ही भावुक कर देने वाला था। पूरा देश उस समय मानो परिक्रमारत था।

Home Minister Rajnath Singh carrying coffin of slain CRPF Soldier killed in Pulwama Attack.
Home Minister Rajnath Singh carrying coffin of slain CRPF Soldier killed in Pulwama Attack.

बहरहाल, खबर है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सभी केन्द्रीय मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मंत्रियों को निर्देश दिया है वे अपने राज्यों के शहीदों के अंतिम संस्कार में हिस्सा लें और उनके परिवारों की हर संभव मदद करें। इससे पहले शहीद जवानों को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़गाम में श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने शहीद के शव को कंधा भी दिया। यह एक तरह से सवा सौ करोड़ भारतीयों की भावना की अभिव्यक्ति थी।
बता दें कि केन्द्र सरकार ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे से संसद की लाइब्रेरी में होगी। माना जा रहा है कि सरकार सभी राजनीतिक दलों को हमले के बारे में पूरी जानकारी देगी और आगे की रणनीति पर भी चर्चा की जा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी (सीसीएस) की बैठक में सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला लिया गया था।
सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार इस हमले के बाद उठाए जाने वाले किसी भी कदम से पहले विपक्षी दलों को भी विश्वास में लेना चाहती है। इसके अलावा यह संदेश देने की भी कोशिश की जाएगी कि संकट की इस घड़ी में सभी पार्टियां साथ हैं। सरकार की कोशिश है कि विपक्ष को विश्वास में लेने के बाद कोई भी कदम उठाना आसान होगा। वैसे चलते-चलते बता दें कि केन्द्र में सरकार की सहयोगी पार्टी शिवसेना इस मुद्दे पर संसद का संयुक्त सत्र बुलाने की मांग कर चुकी है।

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अब जापान की बुलेट ट्रेनें भी मिथिला पेंटिंग्स से शीघ्र सजेंगी

प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग मधुबनी की चहारदीवारी को लांघकर….. भारतीय सरहद को पार करते हुए अंतरराष्ट्रीय आकाश में उड़ान भरने लगी है। एक समय था जब मधुबनी पेंटिंग से मधुबनी स्टेशन को ही सजा-सजाकर दर्शनीय बनाया गया था। बाद में संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के डब्बों पर बनी मधुबनी की मिथिला पेंटिंग्स दिल्ली के लोगों सहित विदेशियों को भी भाने लगा…. और अब तो जापान की बुलेट ट्रेनें भी मिथिला पेंटिंग से जल्द ही सजने जा रही हैं।

बता दें कि जापान से इस संबंध में भारतीय रेल मंत्रालय को सूचना आई है। जापान सरकार ने भारतीय रेल मंत्रालय से मधुबनी पेंटिंग्स के कलाकारों की टीम भेजने का आग्रह भी किया है। रेल मंत्रालय ने कलाकारों को भेजने की कवायद भी शुरू कर दी है। समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम आर.के.जैन द्वारा इस आशय की जानकारी दी गई कि प्रसिद्धि प्राप्त मिथिला पेंटिंग अब किसी परिचय की मोहताज नहीं है। तभी तो पेंटिंगें जापानी बुलेट ट्रेनों की भी शोभा बढ़ायेंगी।

यह भी बता दें कि भारतीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि पहली बार समस्तीपुर मंडल ने “बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस” को मिथिला पेंटिंग्स से सजाकर वाहवाही बटोरी थी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्रसंघ ने भी इसे सराहा था तथा ट्रेनों में उकेरी गई ‘मिथिला पेंटिंग्स’ से सर्वाधिक विदेशी प्रभावित हैं।

यह भी जानिए कि जापान इस धरती पर ऐसा देश है जहाँ “मिथिला म्यूजियम” भी है। इस म्यूजियम को बनाने का श्रेय जापान के महान संगीतकार टोकियो हासेगावा को जाता है। जापान-भारत सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने वाली संस्था के यशस्वी प्रतिनिधि हैं- हासेगावा !

चलते-चलते यह कि जापान ने मिथिला पेंटिंग की खूबसूरती देखकर इस कला से जुड़े चित्रकारों की विभिन्न टीमों को भेजने का अनुरोध भारतीय रेल मंत्रालय से किया है।

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जॉर्ज फर्नांडिस: बुझ गया भारतीय राजनीति का बेजोड़ सितारा

भारतीय राजनीति के सार्वकालिक महान शख्सियतों में शुमार जॉर्ज फर्नांडिस नहीं रहे। भारत के पूर्व रक्षामंत्री, प्रख्यात समाजवादी नेता, प्रखर वक्ता एवं समता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष जॉर्ज साहब के निधन से राजनीतिक चेतना से सम्पन्न हर व्यक्ति शोकाकुल है चाहे उसकी प्रतिबद्धता किसी भी दल के लिए क्यों न हो। बात जहाँ तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की है तो उनके लिए यह व्यक्तिगत क्षति है। जॉर्ज साहब को श्रद्धांजलि देते हुए उनका गला रूंध गया और वे रो पड़े। पटना स्थित जदयू मुख्यालय में आयोजित शोकसभा में उनके साथ पूरा जदयू परिवार मर्माहत दिखा। शोकसभा के बाद जॉर्ज साहब को श्रद्धांजलि देने व उनके अंतिम संस्कार में भाग लेने नीतीश कुमार तत्काल दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
जॉर्ज साहब के निधन की खबर मिलते हुए जदयू के पटना में उपस्थित तमाम नेता, पदाधिकारी व कार्यकर्ता पार्टी मुख्यालय में जुटने लगे। यहां आयोजित शोकसभा में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह, विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधऱी, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जयकुमार सिंह, शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी, गन्ना उद्योग मंत्री खुर्शीद आलम, विधानपार्षद व पूर्व शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय, संजय गांधी, ललन सर्राफ, राष्ट्रीय सचिव रविन्द्र सिंह, प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप समेत बड़ी संख्या में पार्टी के नेतागण एवं कार्यकर्तागण मौजूद रहे।
शोकसभा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जॉर्ज साहब के निधन से हम सभी मर्माहत हैं। उनका जो योगदान इस देश की राजनीति में रहा है और जो कुछ भी उन्होंने समाज के लिए किया है वह सदैव याद रखा जाएगा। सिद्धांत के प्रति, समाजवादी विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव रही। संसद में या रक्षा, रेल आदि मंत्रालयों में भी उनकी भूमिका भुलायी नहीं जा सकती। मुख्यमंत्री ने कहा कि जॉर्ज साहब हमलोगों के न सिर्फ नेता थे बल्कि वे अभिवावक भी थे। 1994 में उन्हीं के नेतृत्व में नई पार्टी बनी। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में जो कुछ भी सीखने का अवसर मिला और आज जो कुछ भी लोगों की सेवा करने की कोशिश करते हैं इसमें उनका ही योगदान रहा है। मैं उनके चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ।
जॉर्ज साहब के निधन पर दिल्ली स्थित जदयू के राष्ट्रीय कार्यालय में भी शोकसभा का आयोजन किया गया जिसमें राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह, सांसद रामनाथ ठाकुर, सांसद कहकशां परवीन, राष्ट्रीय महासचिव संजय झा समेत कई राष्ट्रीय पदाधिकारी, दिल्ली के प्रदेश पदाधिकारी व कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, आरसीपी सिंह व अन्य नेतागण दिल्ली के पंचशील पार्क स्थित स्व. जॉर्ज फर्नांडिस जी के आवास पर भी गए और उनके पार्थिव शरीर के दर्शन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनकी पत्नी व परिजनों से मिले। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जॉर्ज साहब के पुत्र अमेरिका में रहते हैं। अंतिम संस्कार के लिए उनकी प्रतीक्षा की जा रही है। चलते-चलते बता दें कि जॉर्ज साहब के निधन पर बिहार में दो दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया है।

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भारतरत्न से विभूषित होंगे प्रणब, नानाजी और हजारिका

केन्द्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक नानाजी देशमुख और गायक भूपेन हजारिका को भारतरत्न देने की घोषणा की है। नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को मरणोपरांत यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलेगा। बता दें कि इस बार भारतरत्न की घोषणा चार साल बाद हुई है। इससे पहले 2015 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं स्वतंत्रता सेनानी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को भारतरत्न से नवाजा गया था।

2012 से 2017 तक देश के राष्ट्रपति रहे प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में रहे हैं। उनका जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के मिराती में हुआ था। 1969 में वे राज्यसभा के सदस्य बने और आगे चलकर वित्त, रक्षा, विदेश, विधि और वाणिज्य जैसे मंत्रालयों को संभाला। उनके संसदीय अनुभव और अद्भुत कार्यकुशलता का लोहा विरोधी भी मानते हैं। वे न केवल बहुत बड़े व सम्मानित स्टेट्समैन बल्कि अपने आप में चलते-फिरते संस्थान हैं।

नानाजी देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक, समाजसेवी और भारतीय जनसंघ के नेता थे। उनका जन्म महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कडोली नामक छोटे से कस्बे में 11 अक्टूबर 1916 को हुआ था। नानाजी बाल गंगाधर तिलक की राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित होकर समाज सेवा के क्षेत्र में आए। इसके बाद संघ के सरसंघचालक डॉ. केवी हेडगेवार के संपर्क में आकर संघ के विभिन्न प्रकल्पों के जरिए पूरा जीवन राष्ट्रसेवा में लगा दिया। 27 फरवरी 2010 को 95 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 में असम के सादिया जिले में हुआ था। गायक, गीतकार और संगीतकार के रूप में उनकी अप्रतिम ख्याति है।1936 में उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था। 1977 में उन्हें पद्मश्री, 2001 में पद्मभूषण, 2012 में पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। 5 नवंबर 2011 को उनका निधन हो गया। उनकी लोकप्रियता ऐसी थी कि उनकी अंतिम यात्रा में 5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे।

चलते-चलते बता दें कि इन तीन विभूतियों से पहले 45 हस्तियों को भारतरत्न सम्मान दिया जा चुका है। अब यह संख्या 48 हो गई है।

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मुकेश अंबानी ग्लोबल थिंकर्स 2019 की सूची में शामिल

उद्योगपति मुकेश अंबानी के नाम एक गौरवपूर्ण उपलब्धि। उन्हें प्रतिष्ठित अमेरिकी पत्रिका ‘फॉरेन पॉलिसी’ ने थिंकर्स 2019 की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया है। इस सूची में अलीबाबा के संस्थापक जैक मा, अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस और आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टिन लेगार्ड जैसे नाम मौजूद हैं। गौरतलब है कि पत्रिका ने अपनी वेबसाइट पर 2019 की सूची के 100 नामों में से कुछ का ऐलान किया है। पूरी सूची 22 जनवरी को जारी की जाएगी।
बता दें कि सबसे धनी भारतीय मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक हैं और रिलायंस जिओ उनकी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ही अनुषंगी है। ‘फॉरेन पॉलिसी’ ने उनके लिए कहा, “44.3 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ मुकेश अंबानी 2018 में जैक मा को पीछे छोड़ते हुए एशिया के सबसे धनी व्यक्ति बन गए। तेल, गैस और खुदरा क्षेत्र में वर्चस्व से उन्होंने यह संपत्ति अर्जित की है लेकिन उम्मीद है कि दूरसंचार क्षेत्र की कंपनी जिओ के जरिए वह भारत पर सबसे अधिक प्रभाव डालेंगे।”
पत्रिका ने आगे कहा, “जिओ की शुरुआत के बाद छह महीने तक सेल्यूलर डाटा और वॉयस सेवा की पेशकश कर उन्होंने 10 करोड़ से अधिक ग्राहक जोड़े और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में स्मार्टफोन इंटरनेट के जरिए क्रांति कर दी।” पत्रिका में कहा गया है कि अंबानी की योजना अगले चरण में अपने डिजिटल स्पेस का इस्तेमाल करते हुए सामग्री और जीवन-शैली से जुड़ी चीजें बेचना है और अंतत: गूगल और फेसबुक को टक्कर देनी है।
चलते-चलते बता दें कि 2019 में ‘फॉरेन पॉलिसी’ पत्रिका के ग्लोबल थिंकर्स की सूची को 10 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए उसने सूची को 10 अलग-अलग श्रेणियों में बांटने का निश्चय किया है। मुकेश अंबानी को प्रौद्योगिकी से जुड़ी 10 शीर्ष शख्सियतों में स्थान दिया गया है।

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संसार में सबसे अधिक महिला पायलट भारत में

इधर भारत की महिलाओं में जोश व जुनून इस कदर बढ़ता जा रहा है कि शिक्षा जगत से लेकर आकाश तक उसने अपना आधिपत्य जमा रखा है। स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सर्वाधिक गोल्ड मेडल महिलाओं के गले में शोभने लगी है।

यह भी बता दें कि बाहरहाल संसार में सबसे अधिक महिला पायलट भारत में है। आप जानकर हैरत में पड़ जाएंगे कि यहां हर आठवीं फ्लाइट की कमान महिला के हाथ में ही होती है। देश के 10,000 पायलटों में 1200 महिलाएं विमान उड़ाने से फ्लाइट सुपरवाइज करने तक हर स्तर पर काम कर रही है।

एक समय था जब भारत में महिला को जहाज उड़ाते देखने के लिए महिला दिवस का इंतजार करना पड़ता था। विगत कुछ ही वर्षों में स्थिति में तेजी से परिवर्तन हुआ है। तभी तो आज भारत में 1200 महिला कमर्शियल पायलट कार्यरत है जो विश्व में सर्वाधिक है।

मुंबई एवं दिल्ली जैसे बड़े-बड़े एयरपोर्ट की बात तो छोड़िये….. पटना जैसे छोटे एयरपोर्ट पर भी हर दिन आती-जाती हवाई जहाज उड़ाती महिला पायलट दिख ही जाती है। कई बार तो पूरी की पूरी फ्लाइट क्रू में महिलायें ही होती हैं।

यह भी जानिए कि इंडिगो एयरलाइंस की कैप्टन स्वाति साहनी महीने में चार-पांच बार महिला फ्लाइंग क्रू के साथ हवाई जहाज उड़ाती है और कहती है कि बिना पुरुष सहयोगी के हम ऐसा काम कर रहे हैं…. अच्छा लगता है। वह यह भी बताती है कि देश की सबसे बड़ी विमान कम्पनी “इंडिगो एयरलाइन” में 2013 में जहाँ 69 महिला पायलट  थी वह 5 वर्षों में बढ़कर 300 के पार हो गई है।

इस अवधि में स्पाइसजेट, गो एयरवेज और जेट एयरवेज में महिला पायलटों की संख्या में प्रत्येक वर्ष 25 से 35 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। बावजूद इसके फ्लाइट ऑपरेशन के उच्च पदों पर भी तैनात हो रही हैं महिलाएं।

चलते-चलते यह भी जान लीजिए कि बिहार के मधुबनी जिले के छोटे से गांव उमरी की बेटी अद्विका का वायुसेना में पायलट के पद पर चयन हुआ है। वह बिहार की दूसरी महिला पायलट होगी….. फिलहाल हैदराबाद के डूंडीगल में ट्रेनिंग ले रही है….. फिर उड़ायेगी लड़ाकू विमान……।

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साल 2018 में बेरोजगार हुए 1.10 करोड़ भारतीय !

भारत की 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है। कहने की जरूरत नहीं कि देश का भविष्य तय करने में इस आबादी की सबसे अहम भूमिका है। ऐसे में सोच कर देखिए कि अगर यही आबादी बेरोजगारी से बेहाल हो तो हमारी दशा और दिशा क्या होगी? विडंबना तो यह है कि इधर हाल के वर्षों में जबकि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद थी, साल 2018 में करीब 1.10 करोड़ भारतीयों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा, जिनमें से अधिकांश की उम्र 40 साल से नीचे थी।
जी हाँ, रोजगार के मामले में युवाओं के लिए पिछला साल खासा बुरा रहा। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इकोनॉमी (CMIE) की रिपोर्ट के अनुसार कमजोर समूहों से संबंधित व्यक्तियों को 2018 में नौकरी के नुकसान से सबसे ज्यादा प्रभावित होना पड़ा। इस रिपोर्ट की मानें तो देश में बेरोजगारों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। बकौल CMIE दिसंबर 2017 में जहां नौकरी कर रहे लोगों की संख्या 4.79 करोड़ थी वो दिंसबर 2018 में घटकर 3.97 करोड़ रह गई।
उपर्युक्त रिपोर्ट से पता चलता है कि शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के तबके को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है पर ग्रामीण क्षेत्र और खासकर कृषि से जुड़े लोगों की स्थिति अधिक बुरी रही। रिपोर्ट की मानें तो ग्रामीण भारत में 91 लाख लोगों की नौकरी गई जबकि शहरी भारत में 18 लाख लोगों की नौकरी चली गई। इस रिपोर्ट की एक बेहद चौंकाने वाली बात यह भी रही कि नौकरी से हाथ धोने वाले 1.10 करोड़ लोगों में महिलाओं की संख्या 88 लाख रही और पुरुषों की 22 लाख।
इस रिपोर्ट के हवाले से चलते-चलते यह भी बता दें कि भारत में साल 2018 में बेरोजगारी की दर 7.4 प्रतिशत थी। अगर भयावह तरीके से बढ़ रही इस बेरोजगारी पर समय रहते काबू ना पाया गया तो महाशक्ति बनने का भारत का सपना पूरा होना नामुमकिन होगा।

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शादी में समाजवाद की एक अनूठी परम्परा

भारत विविधताओं का देश है। विविध जातियों एवं भिन्न-भिन्न धर्मों के लोग…… अद्भुत परंपराएं….. न जाने कितने प्रकार की विचित्रताओं से भरा है यह भारत देश हमारा।

बता दें कि भारत का एक राज्य है छत्तीसगढ़- जहाँ के सुदूर वनांचल जशपुर जिले में बसी उरांव जनजाति में विवाह की एक अनूठी परंपरा है। यूँ तो संपूर्ण संसार में शादी और श्राद्ध के सैकड़ों तरीके हैं जिनमें एक अद्भुत तरीके वाली शादी यह भी है-

छत्तीसगढ़ के उरांव जनजाति में विवाह के समय दूल्हा और दुल्हन दोनों एक-दूसरे की मांग में सिंदूर भरते हैं जिसमें दंपति को वैवाहिक रिश्तों में बराबरी का एहसास होता है…… जिसे लोग शादी में समाजवाद की संज्ञा देने लगे हैं।

यह भी बता दें कि शादी का रस्म इस तरह पूरा किया जाता है- शादी के दौरान घर के आसपास स्थित बगीचे में दूल्हा आमंत्रण का इंतजार करता है और जब दुल्हन के रिश्तेदार दूल्हे को कंधे पर बैठाकर मंडप में लाते हैं तो यह रश्म पूरी की जाती है जिसमें दुल्हन के भाई की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वह बहन की अंगुली पकड़ता है और दुल्हन उसके सहारे दूल्हे को बिना देखे यानी पीछे की ओर हाथ करके सिंदूर भरती है। यदि दुल्हन का कोई भाई नहीं तो यह रस्म बहन पूरा करती है।

यह भी जानिए कि दूल्हा-दुल्हन दोनों तीन-तीन बार एक-दूसरे की मांग पर सिंदूर भरते हैं। ऐसा करते समय पंच के रूप में गांव के पांच वरिष्ठ सदस्य चादर से एक घेरा बनाते हैं। जिसमें बतौर गवाह कुछ खास रिश्तेदार बार-बार आवाज देते हैं कि एक बार और अच्छे से एक दूसरे को देख लो….. फिर सिंदूर भरना।

चलते-चलते यह भी बता दें कि हाल ही में उच्च शिक्षा प्राप्त कर विवाह बंधन में बंधे मोना प्रधान और विनय निकुंज ने बताया कि यह परंपरा उनके लिए महत्वपूर्ण है और बराबरी का रिश्ता होने का एहसास भी उन्हें होता है। इसमें अतिमहत्वपूर्ण बात यह भी है कि दूल्हा और दुल्हन दोनों साथ में सिंदूर खरीदने जाते हैं।

 

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