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राहुल ने कहा, मोदीजी को ‘प्यार’ से हराएंगे गुजरात में

अभी राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली भी नहीं और उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। अपने राजनीतिक करियर में शायद पहली बार उन्होंने बिना किसी दुविधा के, बड़ी मजबूती के साथ और इतने सधे हुए अंदाज में किसी चुनाव में अपनी जीत का दावा किया है। जी हां, रविवार को गुजरात के कलोल में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने कहा, ‘मोदी जी, हम गुजरात में आपको प्यार से, बिना गुस्से के हराने जा रहे हैं।’

पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के प्रधानमंत्री मोदी पर दिये बयान के बाद कांग्रेस की हुई आलोचना पर राहुल ने एक बार फिर कहा कि मैं प्रधानमंत्री के पद का सम्मान करता हूं और मोदी जी भले ही मेरे लिए कुछ भी कहें लेकिन मैं उनके खिलाफ एक भी गलत शब्द नहीं कहूंगा’।

गुजरात में पिछले तीन महीनों से जारी चुनाव अभियान का जिक्र करते हुए राहुल ने आम लोगों से कहा ‘मैं जब तक जिंदा हूं तब तक आपके उस प्यार को भूलने वाला नहीं हूं जो आपने पिछले तीन महीनों में दिखाया है।’ राहुल ने लोगों से कहा ‘आपको मेरी जरूरत जब भी हो, सिर्फ मुझे बुलाओ, आदेश दो और मैं करके दिखाऊंगा।’ राहुल ने कहा ‘आपने मेरे साथ रिश्ता बना लिया है, ये जिंदगी का रिश्ता है, कभी नहीं टूटेगा।’ वहीं अपनी रैली के दौरान राहुल ने कई बार भाजपा और राज्य सरकार के विकास मॉडल पर भी निशाना साधा।

गौरतलब है कि राहुल पिछले कई दिनों से गुजरात के प्रवास पर हैं और लगातार तमाम विधानसभा क्षेत्रों में जनता के बीच जाकर चुनाव में खड़े अपने प्रत्याशियों का प्रचार कर रहे हैं। कांग्रेस इस बार गुजरात को लेकर खासा उत्साहित है और अगर वहां पार्टी की जीत होती है तो कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पारी शुरू कर रहे राहुल की इससे अच्छी शुरुआत नहीं हो सकती।

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गुजरात में छठी बार भाजपा सरकार !

गुजरात चुनाव को लेकर की गई बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भविष्यवाणी सच होती दिख रही है। जी हां, इंडिया टीवी-वीएमआर (वोटर्समूड रिसर्च) के सर्वे के मुताबिक गुजरात में फिर से भाजपा की बहुमत वाली सरकार बनती नजर आ रही है। ओपिनियन पोल के मुताबिक 182 सदस्यों वाले गुजरात विधानसभा में भाजपा को 111 सीटें मिलेंगी, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की झोली में कुल 68 सीटें जा सकती हैं। अन्य दलों के खाते में तीन सीटें जाने का अनुमान है।

बता दें कि 2012 के गुजरात विधान सभा चुनाव में बीजेपी को 116 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस को 60 और अन्य को 6 सीटें मिली थीं। इस बार भी परिणाम इसी के इर्द-गिर्द रहने का अनुमान है। सर्वे में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि भाजपा गुजरात में छठी बार सरकार बनाएगी। सर्वे के मुताबिक भाजपा को कुल 45 प्रतिशत वोट मिलने के आसार हैं, जबकि कांग्रेस को 40 प्रतिशत और अन्य दलों को 15 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है।

क्षेत्रवार विस्तार में जाएं तो इंडिया टीवी के ओपिनियन पोल के मुताबिक सौराष्ट्र-कच्छ की कुल 54 सीटों पर भाजपा को 44 प्रतिशत और कांग्रेस को 41 प्रतिशत वोट मिलने के आसार हैं। मध्य गुजरात में भाजपा को 46 प्रतिशत और कांग्रेस को 40 प्रतिशत जबकि अन्य को 14 प्रतिशत वोट मिलने के आसार हैं। दक्षिण गुजरात की 35 सीटों पर भाजपा को कुल 46 प्रतिशत और कांग्रेस को 39 प्रतिशत वोट मिलने के आसार हैं। उत्तर गुजरात के सात जिलों की 53 सीटों पर भाजपा को कुल 45 प्रतिशत जबकि कांग्रेस को 42 प्रतिशत वोट मिलने के आसार हैं। अन्य को 13 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं।

चलते-चलते बता दें कि गुजरात में पिछले 22 सालों से भाजपा की सरकार है और अगर यह ओपिनियन पोल सही होता है तो भाजपा वहां अपने शासन का तीन दशक पूरा करने के करीब होगी।

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पूरे राजकीय सम्मान के साथ शशि कपूर का अंतिम संस्कार

पद्म भूषण एवं दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अपने जमाने के मशहूर अभिनेता शशि कपूर का मंगलवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ मुंबई में अंतिम संस्कार हुआ। सोमवार को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली थी। अभिनेता, निर्माता और निर्देशक शशि कपूर 79 बरस के थे और बीते कुछ समय से वे किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे।

थिएटर और फिल्म जगत के बड़े नाम पृथ्वीराज कपूर के यहां शशि कपूर का जन्म 18 मार्च, 1938 को हुआ था। पिता के मार्गदर्शन में शशि चार साल की उम्र में रंगमंच पर आ गए थे। उन्होंने कई हिंदी और अंग्रेज़ी फिल्मों में काम किया था। उनकी ‘जब जब फूल खिले’ (1965), ‘वक्त’ (1964), ‘अभिनेत्री’ (1970), ‘दीवार’ (1975), ‘त्रिशूल’ (1978), ‘हसीना मान जाएगी’ (1968) जैसी फ़िल्में आज भी पसंद के साथ देखी जाती हैं।

शशि कपूर के निधन की खबर जैसे ही सामने आई उनके चाहने वाले सदमे में चले गए। लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने प्रिय अभिनेता को श्रद्धांजलि दी। सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से शशि कपूर के फैंस के मैसेज सोशल मीडिया पर अपलोड होने लगे। शशि कपूर को श्रद्धांजलि देते हुए मुंबई पुलिस ने भी उन्हें याद किया और अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से शशि कपूर के लिए कुछ ऐसा लिखा कि देखते ही देखते लोगों का दिल जीत लिया।

दरअसल मंगलवार को शशि कपूर के अंतिम संस्कार से पहले मुंबई पुलिस ने ट्वीट करते हुए लिखा- अच्छे और बुरे के बीच की यह दीवार सदियों तक यूं ही खड़ी रहेगी। मुंबई पुलिस ने अपने इस ट्वीट में शशि कपूर की एक तस्वीर भी पोस्ट की जो उनकी सुपरहिट फिल्म ‘दीवार’ की है। इस फिल्म में शशि कपूर ने इंस्पेक्टर रवि वर्मा का किरदार निभाया था। इस तस्वीर पर मुंबई पुलिस ने लिखा- रवि वर्मा की याद में, पर्दे पर एक सच्चे पुलिसवाले का बेंचमार्क। इस शानदार, सदाबहार अभिनेता को बहुत सही और सच्ची श्रद्धांजलि है ये।

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और अब 85 भाषाओं में गाना गाएगी 12 साल की यह लड़की

आप एक साथ तीन-चार भाषाओं को जानने वाले कई लोगों को जानते होंगे। एक साथ पांच-छह भाषाओं को जानने वाले कुछ लोगों के बारे में भी आपको पता होगा। या फिर हो सकता है कि आपने दस-बारह भाषाओं को जानने वाले लोगों के बारे में भी सुन रखा हो। लेकिन अगर आपको कहा जाय कि कोई एक साथ 80 भाषाओं को जानता है, जानता ही नहीं, उन भाषाओं में एक साथ गाना भी गाता है तो शायद यकीन ना करें आप। जी हां, असंभव-सी लगने वाली यह बात सोलह आना सच है और यह करिश्मा जिसने किया है वह महज 12 साल की एक लड़की है। आपको और भी खुशी होगी जब आप जानेंगे कि दुबई निवासी यह लड़की भारतीय मूल की है और उसका नाम सुचेता सतीश है।

केरल से ताल्लुक रखने वाली सुचेता दुबई के इंडियन हाईस्कूल में 7वीं की छात्रा हैं। आपको बता दें कि महज एक साल में 80 भाषाओं में गाना सीखने वाली सुचेता ने अपना पहला गाना जापानी भाषा में गाया था। सुचेता के पिता जापान में त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं। बकौल सुचेता उन्हें विदेशी भाषा का गीत सीखने में दो घंटे लगते हैं। अगर गाने का उच्चारण आसान होता है, तो वह उसे और भी जल्दी सीख जाती हैं। सुचेता यह भी बताती है कि उसे सबसे ज्यादा मुश्किल फ्रेंच, जर्मन और हंगरियन भाषा सीखने में आई।

जरा ठहरिए, अगर आप सोच रहे हैं कि 80 भाषाओं में गाना गाकर सुचेता संतुष्ट है तो आप गलत हैं। 12 साल की यह लड़की अब गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी कर रही है और 29 दिसंबर को एक कंसर्ट में वह एक साथ 85 भाषाओं में गाने की कोशिश करने वाली है।

चलते-चलते आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल सबसे ज्यादा भाषाओं में गाना गाने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड आंध्र प्रदेश के केसिराजू श्रीनिवास के नाम है। श्रीनिवास ने 2008 में गांधी हिल में 76 भाषाओं में गाना गाकर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था।

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बिहार में भी नहीं दिखेगी ‘पद्मावती’

गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अब बिहार। जी हां, ‘पद्मावती’ अब बिहार में भी रिलीज नहीं की जा सकेगी। विवादों से घिरी इस फिल्म पर इस बार बिहार के संजीदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी राय रखी है। फिल्म पर देश भर में जारी घमासान के बीच नीतीश ने कहा है कि निर्देशक संजय लीला भंसाली इस पर अपना रुख साफ करें। ऐसा होने तक राज्य में फिल्म को रिलीज नहीं होने दिया जाएगा।

गौरतलब है कि जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार देश के पांचवें मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने पद्मावती-प्रकरण पर मुखर होकर अपनी बात रखी है। उनसे पहले गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुलकर अपनी राय रख चुके हैं। इन राज्यों ने यह कहते हुए फिल्म पर प्रतिबंध लगाया है कि इसमें इतिहास से छेड़छाड़ की गई है।

बहरहाल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस फिल्म की बाबत कहा कि “’पद्मावती’ पर कई लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं। फिल्म के निर्दशक को इस पर अपना रुख साफ करना चाहिए। तब तक के लिए फिल्म बिहार में नहीं दिखाई जाएगी।” नीतीश ने इस संदर्भ में सभी पार्टियों के एक निष्कर्ष पर पहुंचने के बाद निर्णय लेने की बात कही और साथ में यह भी जोड़ा कि “रानी पद्मावती को इसमें नाचते हुए नहीं दिखाया जाना चाहिए था।” बिहार के कला, संस्कृति, खेल और युवा मामलों के मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि ने भी अपने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि फिल्म से जब तक विवादित दृश्य निकाले नहीं जाते, तब तक फिल्म राज्य में रिलीज होने नहीं दी जाएगी।

‘पद्मावती’ को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री का यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के मुख्यमंत्री से फिल्म के खिलाफ माहौल नहीं बनाने को कहा था। गौरतलब है कि ‘पद्मावती’ की रिलीज के लिए पहले एक दिसंबर की तारीख तय की गई थी, जो फिलहाल अनिश्चित काल के लिए स्थगित होती दिख रही है। 190 करोड़ की लागत से बनी संजय लीला भंसाली की इस फिल्म में दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मावती की भूमिका निभाई है, जबकि शाहिद कपूर महारावल रतन सिंह और रणवीर सिंह अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका में हैं।

 

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और 2 रन पर पूरी टीम आउट !

क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। पर क्या ये अनिश्चितता इस हद तक भी हो सकती है कि पूरी टीम, और वो भी राज्य स्तर की मान्यताप्राप्त टीम, महज 2 रन पर आउट हो जाए? सुनकर आप दांतों तले उंगली दबा लें, मगर ये सच है। क्रिकेट के मैदान का ये अजीबोगरीब रिकॉर्ड बीसीसीआई महिला अंडर 19 क्रिकेट मैच के दौरान बना। केरल के खिलाफ अंडर 19 वनडे लीग मैच खेलते हुए नगालैंड की टीम महज 2… जी हां केवल 2 रन बनाकर आउट हो गई।

मजे की बात यह कि नगालैंड की टीम के दोनों रन पारी के शुरुआती पांच ओवर में बने, जबकि टीम ने खेले पूरे 17 ओवर। यानि अंतिम 12 ओवर में एक भी रन नहीं बना। अरे रुकिए जनाब, अभी बात पूरी कहां हुई। अभी आपने ये कहां जाना कि इन 2 रनों में भी 1 रन अतिरिक्त (वाइड) के तौर पर टीम के खाते में जुड़ा और शेष 1 रन से खाता सिर्फ 1 ही खिलाड़ी – सलामी जोड़ी के रूप में उतरी मुस्कान –  का खुला। बाकी 9 बल्लेबाजों का खाता तक नहीं खुला और टीम का रनरेट 0.12 रहा। उधर केरल की ओर से कप्तान मिन्नू मानी ने 4 विकेट झटके, जबकि सौरभी को 2 और सांद्रा सुरेन और बीबी सेबेस्टियन को 1-1 सफलता हाथ लगी।

और जब लक्ष्य का पीछा करने की बात आई, केरल की ओर से बेहद साधारण लक्ष्य का पीछा करते हुए सलामी बल्लेबाज अंशू ने पारी की पहली ही गेंद पर चौका लगाकर टीम को जीत दिला दी। ये ऐसी जीत थी, जिसकी कल्पना खुद केरल भी नहीं कर सकती थी। और हां अपनी इस जीत के साथ केरल की टीम ने सबसे कम गेंद में लक्ष्य हासिल करने का नेपाल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। नेपाल ने वर्ष 2006 में म्यांमार के खिलाफ मैच में लक्ष्‍य तक पहुंचने के लिए केवल दो गेंदें ली थीं।

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यूं उड़ाया ‘शत्रु’ ने मोदी के मंत्रियों का मजाक

भाजपा नेता और बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा अपनी पार्टी के लिए बीते दिनों की बात होते जा रहे हैं। इधर पार्टी के किसी कार्यक्रम, किसी अभियान में न तो वे शिरकत करते हैं और न ही पार्टी फोरम पर उनकी जरूरत ही महसूस की जाती है। लेकिन वे ठहरे ‘शॉटगन’। अपनी ओर लोगों का ध्यान खींचना उन्हें खूब आता है। ‘खामोश’ उनका प्रिय डायलॉग जरूर है, लेकिन खामोश रहना उनकी फितरत में नहीं। जब भी उन्हें मौका मिलता है, अपनी पार्टी का मजाक तक उड़ाने से वे बाज नहीं आते। पर इस बार तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूरी कैबिनेट को ही निशाने पर ले लिया है। जी हां, गुरुवार को मोदी के मंत्रियों का मजाक उड़ाते हुए उन्होंने कहा, “कैबिनेट के 90 प्रतिशत मंत्रियों को कोई नहीं जानता, जबकि बचे हुए 10 प्रतिशत मंत्रियों की कोई इज्जत नहीं करता”।

बता दें कि शत्रुघ्न ने अभी दो दिन पहले ‘पद्मावती’ फिल्म के मुद्दे पर बॉलीवुड की नामी हस्तियों को  कठघरे में खड़ा करते हुए सूचना प्रसारण मंत्री और प्रधानमंत्री को लेकर भी सवाल उठाए थे। मंगलवार को उन्होंने कहा था कि अमिताभ बच्चन, आमिर खान, शाहरुख खान, सूचना और प्रसारण मंत्री के साथ इस पर हमारे सबसे लोकप्रिय पीएम चुप किसलिए हैं? उन्होंने ट्वीट किया, “जैसा कि ‘पद्मावती’ ज्वलंत मुद्दा बन गई है। लोग पूछ रहे हैं कि महानायक अमिताभ बच्चन, बेहद बहुमुखी आमिर खान और सबसे मशहूर शाहरुख खान के पास बोलने के लिए इस पर कुछ नहीं है। कैसे हमारी सूचना और प्रसारण मंत्री या फिर सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री (अमेरिकन थिंक टैंक पोल पीईडब्ल्यू के मुताबिक) इस पर मौन क्यों धारण किए हुए हैं। हाई टाइम!”

शत्रुघ्न यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि जहां तक उनकी बात है, तो वे इस मसले पर महान फिल्मकार और प्रोड्यूसर संजय लीला भंसाली के चुप्पी तोड़ने के बाद बोलेंगे। वे सिर्फ तब बोलेंगे, जब उन्हें बोलना होगा और वे फिल्मकार की अभिरुचियों के साथ मामले की संवेदनशीलता, राजपूतों की वीरता और निष्ठा को ध्यान में रखकर बोलेंगे।”

बहरहाल, जैसे ही सोशल मीडिया पर मोदी के मंत्रियों को लेकर शत्रुघ्न की तल्ख टिप्पणी आई, लोगों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। कई टि्वटर यूजर्स इस पर उल्टा उन्हीं का मजाक उड़ाते दिखे। उनमें से एक ने कहा, “आपने कितनी इज्जत दी। जिस पार्टी ने बढ़ाया, उसी को अपशब्द कहे।” तो दूसरे ने उनकी टिप्पणी का कारण उनकी कुंठा को बताया। कहा, “शुक्र है कि वह मंत्री नहीं हैं, वरना वे कहां फिट होते? कुंठा में।” वहीं, एक यूजर ने पूछा कि वे भाजपा छोड़ क्यों नहीं देते? तो किसी ने उनके लिए सिर्फ ‘खामोश’ शब्द का इस्तेमाल किया। पर शत्रु तो ‘शत्रु’ ठहरे, वे भला क्यों किसी से कुछ सुनें? क्यों खामोश रहें??

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राहुल के नेतृत्व को तैयार कांग्रेस

जैसी कि उम्मीद थी, कांग्रेस अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी की ताजपोशी का दिन तय हो गया। सोमवार सुबह सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के सांगठनिक चुनावों और राहुल के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी को लेकर चर्चा हुई। बैठक के ठीक बाद अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की विधिवत घोषणा कर दी गई।

बता दें कि अध्यक्ष पद के लिए अधिसूचना 1 दिसंबर को जारी होगी, जबकि 11 दिसंबर नाम वापसी का आखिरी दिन होगा। अगर राहुल के अलावा कोई और उम्मीदवार हुआ तो 16 दिसंबर को मतदान होगा और वोटों की गिनती 19 दिसंबर को होगी। ऐसे में राहुल के अध्यक्ष बनने का ऐलान 19 दिसंबर को होगा। हालांकि राजनीति के थोड़े जानकार भी जानते हैं कि राहुल की उम्मीदवारी को कोई चुनौती नहीं मिलने जा रही और वे 11 दिसंबर को ही कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएंगे।

गौरतलब है इस चुनावी प्रक्रिया से पहले ही तमाम राज्यों में कांग्रेस के सदस्यों का चयन करने के लिए मतदान हो चुका है। लगभग सभी राज्यों ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी का नाम सर्वसम्मति से पारित किया है। उधर कार्यसमिति में भी सबने एक स्वर से राहुल के नेतृत्व में आस्था जताई है। कांग्रेस महासचिव अंबिका सोनी ने कहा कि गुजरात में चुनावी प्रचार की सफलता का श्रेय और नोटबंदी और जीएसटी के मुद्दे पर विपक्ष की सफल अगुवाई का श्रेय कांग्रेस उपाध्यक्ष को जाता है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के शब्द भी कुछ ऐसे ही थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने आगे बढ़कर अगुवाई की है और वे बहुत ही क्षमतावान नेता हैं। आजाद ने आगे कहा कि ये कुछ ही दिनों की बात है, जब पार्टी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा और राहुल आगे बढ़कर पार्टी का नेतृत्व करेंगे। लोकसभा में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम सब पार्टी अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी के नेतृत्व के लिए तैयार हैं।

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मिस वर्ल्ड का जवाब उससे भी सुन्दर !

1966 में रीता फारिया… भारत ही नहीं, सम्पूर्ण एशिया से बनने वाली पहली मिस वर्ल्ड… फिर 28 साल के इंतजार के बाद 1994 में ऐश्वर्या राय… इसके बाद अगले छह सालों में तीन मिस वर्ल्ड – 1997 में डायना हेडन, 1999 में युक्ता मुखी और 2000 में प्रियंका चोपड़ा… फिर 17 साल का इंतजार और अब मानुषी छिल्लर… मिस वर्ल्ड 2017… 118 देशों की सुन्दरियों में सर्वश्रेष्ठ..! भारत की बेटी ने एक बार फिर पूरी दुनिया में अपनी सुन्दरता – सिर्फ चेहरे की नहीं, सम्पूर्ण व्यक्तित्व की सुन्दरता – का लोहा मनवा लिया। चीन के सनाया में आयोजित की गई मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली मिस इंडिया मानुषी छिल्लर को मिस वर्ल्ड 2017 घोषित किया गया। इस प्रतियोगिता में दूसरे नंबर पर मिस मेक्सिको रहीं जबकि तीसरे नंबर पर मिस इंग्लैंड।

20 वर्षीया मानुषी की जीत की सबसे अहम बात यह रही कि वो ‘हेड टू हेड चैलेंज’ और ‘ब्यूटी विद पर्पस सेगमेंट’ दोनों में अव्वल रहीं। खास तौर पर अंतिम सवाल के जवाब से तो उन्होंने न केवल ज्यूरी बल्कि पूरी दुनिया का दिल जीत लिया। मानुषी से पूछा गया अंतिम सवाल था कि दुनिया में किस पेशे की सेलरी सबसे ज़्यादा होनी चाहिए और क्यों? मानुषी ने इसका बेहद खूबसूरत जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मेरी मां मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। इसलिए मैं कह सकती हूं कि मां होने की जॉब सबसे बेहतरीन है। बात केवल पैसे की नहीं है, बल्कि प्यार और सम्मान के लिहाज से, कोई भी मां सबसे ज्यादा वेतन की हकदार होती है।”

67वीं मिस वर्ल्ड मानुषी के व्यक्तित्व के कई पहलू हैं। वो मेडिकल की स्टूडेंट हैं और कार्डिएक सर्जन बनना चाहती है। उन्हें पैराग्लाइडिंग, बंजी जंपिंग और स्कूबा डाइविंग जैसे स्पोर्ट्स पसंद हैं। इसके अलावा मानुषी ट्रेंड इंडियन क्लासिकल डांसर हैं और स्केचिंग और पेंटिंग भी बनाती हैं। यही नहीं, मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में जाने से पहले मानुषी समाजसेवा के कार्यों से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने महिलाओं के पीरियड के दौरान हाइजीन से संबंधित एक कैंपेन में करीब 5000 महिलाओं को जागरूक किया है।

मिस वर्ल्ड बनना मानुषी के बचपन का सपना था। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया। अब भारत की इस बेटी को अपने सपनों को विस्तार देना है। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन से उन्होंने जैसी उम्मीद बंधाई है, उसे देख कोई भी लक्ष्य उनके लिए असंभव नहीं लगता। उज्जवल भविष्य के निमित्त उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ढेर सारी शुभकामनाएं!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नहीं रहे कुंवर नारायण

हिन्दी साहित्य को कई कालजयी कृतियां देने वाले अप्रतिम कवि कुंवर नारायण का निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। मूलरूप से फैजाबाद के रहने वाले कुंवर पिछले 51 साल से साहित्यरत थे। बुधवार को दिल्ली के सीआर पार्क में उन्होंने अंतिम सांसें लीं। यहां वे अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहते थे और पिछले कई महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे।
साहित्य, सिनेमा और संगीत में लगभग समान दखल रखने वाले कुंवर नारायण की मूल प्रतिष्ठा कवि की थी। अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ के कवियों में शामिल रहे  कुंवर ने ‘चक्रव्यूह’, ‘परिवेशः हम तुम,  ‘इन दिनों’, ‘कोई दूसरा नहीं’,  ‘आत्मजयी’, ‘वाजश्रवा के बहाने’ और ‘कुमारजीव’ जैसी अविस्मरणीय रचनाओं के रूप में हिंदी के साहित्य और समाज को एक बड़ी विरासत सौंपी है।
कुंवर नारायण को उनकी साहित्य-साधना के लिए देश के लगभग सभी महत्वपूर्ण सम्मान मिले। 1995  में उन्हें कविता संग्रह ‘कोई दूसरा नहीं’ के लिए साहित्य अकादमी सम्मान मिला तो 2005  में उऩ्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया। 2009 में उन्हें ‘पद्मभूषण’ से विभूषित किया गया। इसके अलावा कुमार आशान सम्मान,  प्रेमचंद पुरस्कार और व्यास सम्मान भी उन्हें मिले। इन सबके अलावे उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले थे।

कुंवर नारायण लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक थे। पढ़ाई के तुरंत बाद उन्होंने पुश्तैनी ऑटोमोबाइल बिजनेस में काम करना शुरू कर दिया था। पर आगे चलकर आचार्य कृपलानी,  आचार्य नरेंद्र देव और सत्यजीत रे से प्रभावित होकर साहित्य में उनकी गहरी रुचि हो गई।
कुंवर नारायण की रचनाशीलता के कई आयाम रहे। उन्होंने कई पौराणिक आख्यानों को आधुनिक और समकालीन अर्थों और संदर्भों के साथ पुनर्परिभाषित किया। इस संदर्भ में ‘आत्मजयी’,  ‘वाजश्रवा के बहाने’ जैसी रचनाओं का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। एक तरह की ‘उजली’ मनुष्यता कुंवर की कविता का मुख्य स्वर रही। आधुनिक समय के तनावों-दबावों के बीच यह कविता बड़ी सहजता से प्रेम और सहिष्णुता का पाठ रचती है। अपने कृतित्व एवं व्यक्तित्व के लिए कुंवर नारायण हमेशा याद किए जाएंगे। आधुनिक हिन्दी कविता के इस महाकवि को हमारा शत् शत् नमन।

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