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अगले साल टोक्यो ओलंपिक में मोबाइल मस्जिद की होगी व्यवस्था

पहला एशियाई शहर होगा जापान की राजधानी टोक्यो जिसे दूसरी बार ओलंपिक खेल आयोजित करने का मौका पुनः 2020 में मिला है | इससे पहले टोक्यो में ओलंपिक खेल वर्ष 1964 में आयोजित किया गया था | हालांकि पूर्व में वर्ष 1940 में भी टोक्यो को यह अवसर मिला था परंतु दूसरे विश्व युद्ध की वजह से खेल रद्द हो गया था |

बता दें कि ओलंपिक खेल के दरमियान बाहर से आने वाले मुस्लिम खिलाड़ियों एवं दर्शकों को नमाज अता करने में परेशानी न हो…… इसके मद्देनजर इस बार के ओलंपिक खेल में टोक्यो में मोबाइल मस्जिदें शुरू की गई है |

यह भी जानिए कि टोक्यो की ‘स्पोर्ट्स एंड कल्चर इवेंट कंपनी’ द्वारा निर्मित इस मोबाइल मस्जिद में 50 लोग नमाज पढ़ सकेंगे | इसमें नमाजियों के हाथ धोने तथा नमाज पढ़ने के लिए बिछाने वाले मैट्स की भी व्यवस्था की गई है |

बकौल कंपनी बड़े ट्रकों को कन्वर्ट करने के बाद रिमोट कंट्रोल से चलने वाली मस्जिदें बनाई गई है | स्टेडियम के बाहर खड़ी की जाने वाली इस मस्जिद के पीछे का हिस्सा रिमोट कंट्रोल से ऊपर उठ जाता है और एक सीढ़ी निकल आती है……. साथ ही सामने एक गेट खुल जाता है | इसके अंदर साढ़े पाँच सौ स्क्वायर फीट का हॉल बन जाता है। इस हॉल में एक साथ 50 से ज्यादा लोग नमाज अता कर सकेंगे।

चलते-चलते यह भी बता दें कि टोक्यो में मात्र 4 मस्जिदें हैं जिससे बाहर से आने वाले मुस्लिमों को नमाज पढ़ने में हमेशा से दिक्कतें होती रही है | ऐसी मोबाइल मस्जिदें उन्हें राहत देंगी | ध्यातव्य है कि संपूर्ण जापान में लगभग 60 मस्जिदें हैं जिसमें पहली मस्जिद जापान के काबे शहर में 1935 में ही बनवाई गई थी और इंडोनेशिया के बाद मोबाइल मस्जिद का प्रयोग करने वाला दूसरा देश अब कदाचित जापान होगा |

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जदयू अध्यक्ष पद पर दोबारा निर्विरोध निर्वाचित हुए नीतीश

जदयू के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार 6 अक्टूबर 2019 को लगातार दूसरी बार निर्विरोध जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किए गए। जदयू के राष्ट्रीय चुनाव पदाधिकारी अनिल हेगड़े ने 7, जंतर मंतर स्थित जदयू के केन्द्रीय कार्यालय में उनके निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की और उनके अध्यक्ष निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया, जिसे उनके प्रतिनिधि व बिहार विधान परिषद में पार्टी के मुख्य सचेतक संजय गांधी ने प्राप्त किया।

इस मौके पर जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा, राष्ट्रीय महासचिव अफाक अहमद, राष्ट्रीय सचिव राज सिंह मान, दिल्ली जदयू के अध्यक्ष दयानंद राय, युवा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार, बिहार के राज्य निर्वाचन पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह समेत दर्जनों नेता व पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

गौरतलब है कि 4 अक्टूबर 2019 को नीतीश कुमार की ओर से उनके प्रतिनिधि संजय गांधी ने नामांकन दाखिल किया था। किसी और ने इस पद के लिए नामांकन नहीं किया। 6 अक्टूबर को 3 बजे तक नाम वापसी का समय निर्धारित था। समय सीमा समाप्त होते ही अनिल हेगड़े ने नीतीश कुमार के निर्विरोध चुने जाने की घोषणा कर दी। उन्होंने उनके दूसरे कार्यकाल में जदयू के और मजबूत होने और इसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने की उम्मीद जताई।

बता दें कि शरद यादव का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वर्ष 2016 में पहली बार नीतीश कुमार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। इस पद पर उनके पुन: निर्वाचित होने की विधिवत घोषणा 30 अक्टूबर 2019 को दिल्ली के रफी मार्ग स्थित मावलंकर हॉल में राष्ट्रीय परिषद की बैठक में होगी। उनका दूसरा कार्यकाल 2022 तक का होगा।

इस बीच नीतीश कुमार के लिए बधाईयों की झड़ी लग गई है। बिहार समेत देश भर से उनके लिए बधाईयां आ रही हैं, जिनमें बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का शुभकामना-संदेश विशेष रूप से उल्लेखनीय है। मोदी ने उन्हें शुभकामना देते हुए लिखा है कि “उन्होंने (नीतीश कुमार ने) बिहार में न्याय के साथ विकास की राजनीति को नई ऊँचाई दी और आपदा की चुनौतियों को भी जनता की सेवा के अवसर में बदलने का हुनर साबित किया। नीतीश जी के दोबारा पार्टी के शीर्ष पद पर निर्विरोध चुने जाने से एनडीए मजबूत होगा।” कहने की जरूरत नहीं कि जदयू और भाजपा के रिश्तों में आजकल अक्सर दिख जाने वाली ‘तनातनी’ के बीच ये संदेश खासा मायने रखता है।

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जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने किया नामांकन

जनता दल (यूनाइटेड) के सांगठनिक चुनाव के अंतिम चरण में शुक्रवार, 4 अक्टूबर को नई दिल्ली के 7, जंतर मंतर स्थित जदयू के केन्द्रीय कार्यालय में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल किया गया। नीतीश कुमार की ओर से उनके प्रतिनिधि विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी ने जदयू के राष्ट्रीय निर्वाचन पदाधिकारी अनिल हेगड़े के समक्ष कुल चार सेटों में नामांकन दाखिल किया।
इस मौके पर राष्ट्रीय महासचिव अफाक अहमद खान, दिल्ली प्रदेश जदयू के अध्यक्ष दयानंद सिंह, युवा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार एवं बिहार के राज्य निर्वाचन पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह समेत दर्जनों नेता व पदाधिकारी मौजूद रहे।
ध्यातव्य है कि 4 अक्टूबर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन का आखिरी दिन था। शनिवार 5 अक्टूबर का दिन स्क्रूटनी के लिए निर्धारित है, जबकि रविवार 6 अक्टूबर का दिन नाम वापसी के लिए तय है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की विधिवत घोषणा राष्ट्रीय परिषद की बैठक में होगी। ज्ञात हो कि राष्ट्रीय परिषद की बैठक 19 एवं 20 अक्टूबर को राजगीर में होनी थी जिसे बिहार में हो रहे विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर स्थगित कर दिया गया है। अब राष्ट्रीय परिषद की बैठक 30 अक्टूबर को दिल्ली में होने की संभावना है।

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गांधी विचार समागम और जल-जीवन-हरियाली अभियान का शुभारंभ

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को पटना के ज्ञान भवन में शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘गांधी विचार समागम’ का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया और जल-जीवन-हरियाली अभियान का रिमोट के माध्यम से शुभारंभ किया। गौरतलब है कि ‘गांधी विचार समागम’ में विभिन्न विषयों पर गांधी जी के विचारों पर विभिन्न विद्वान वक्ताओं द्वारा 11 सत्रों में 2 से 3 अक्टूबर तक चर्चा होगी।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यदि 10 से 15 प्रतिशत नई पीढ़ी के लोगों में गांधी जी के विचारों के प्रति आकर्षण पैदा हो जाए तो समाज और देश बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने पर्यावरण के प्रति अपने विचार में कहा था कि पृथ्वी सबकी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है, लालच को नहीं। हमलोगों ने हर घर तक बिजली पहुंचाई है लेकिन लोग उसका सदुपयोग करें, दुरुपयोग नहीं। हर घर नल का जल वर्ष 2020 तक सभी जगह पहुंच जाएगा। आधी जगहों पर यह योजना पूर्ण हो चुकी है। पेयजल के दुरुपयोग से बचना होगा ताकि जल संरक्षण हो सके।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कभी सूखे की स्थिति, कभी अधिक वर्षापात की स्थिति बन रही है। हाल ही में 3-4 दिनों तक तेज वर्षा हुई जिसके कारण कई जगहों पर जलजमाव की स्थिति बनी। हमलोगों ने आज ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान की शुरुआत की है। जल-जीवन-हरियाली का मतलब है जल है, हरियाली है तभी जीवन है, चाहे जीवन मनुष्य का हो या पशु-पक्षी का। 26 अक्टूबर से प्रत्येक पंचायत से इस अभियान के अंतर्गत कोई न कोई कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। यह अभियान अगले 3 वर्षों तक चलेगा और राज्य सरकार इस पर अपने बजट से 24 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बापू ने सात सामाजिक पापों की चर्चा की है। सभी सरकारी भवनों में सात सामाजिक पापों को इस तरह से अंकित कराना चाहिए कि वे नष्ट न हों। अगर इन बातों का प्रभाव 5 से 10 प्रतिशत लोगों के मन पर भी पड़ेगा तो देश और दुनिया बदल जाएगी। गांधी जी के विचारों के प्रति हमलोग समर्पित हैं और पूर्ण दृढ़ता के साथ इसके लिए काम कर रहे हैं। पर्यावरण के प्रति उनके संदेशों को अपनाते हुए जल-जीवन-हरियाली अभियान की आज शुरुआत की गयी है। उन्होंने कहा कि गांधी विचार समागम का जो आयोजन किया गया है और उसमें चर्चा के बाद नई बातें सामने आएंगी उससे समाज को लाभ होगा। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने गांधी जी के जीवन-वृत्त पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी, आईटीएम विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलाधिपति श्री रमाशंकर सिंह एवं मुख्यमंत्री के परामर्शी श्री अंजनी कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चैधरी, शिक्षा मंत्री श्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, जल संसाधन मंत्री श्री संजय झा, मुख्य सचिव श्री दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव शिक्षा श्री आरके महाजन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, पर्यावरणविद् डॉ. वंदना शिवा, आईटीएम विश्वविद्यालय, ग्वालियर के पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर श्री जयंत सिंह तोमर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए गांधीवादी विचारक, सामाजिक कार्यकर्ता, वरीय पदाधिकारीगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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चिराग 28 नवंबर को संभालेंगे लोजपा की कमान

रामविलास पासवान लोक जनशक्ति पार्टी की कमान अपने बेटे चिराग पासवान को सौंपने जा रहे हैं। यह तो खैर पहले से तयप्राय था कि चिराग ही उनके उत्तराधिकारी होंगे, लेकिन अपने सक्रिय रहते ही रामविलास पार्टी की जिम्मेवारी विधिवत चिराग को सौंप देंगे, यह तय नहीं था। पर लोजपा सुप्रीमो ने सबको चौंकाते हुए बाकायदा इसके लिए दिन भी घोषित कर दिया है। जी हाँ, आगामी 28 नवंबर को लोजपा के स्थापना दिवस पर रामविलास पासवान बेटे चिराग पासवान को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंप देंगे। फिलहाल उन्‍हें बिहार लोजपा के प्रभारी अध्‍यक्ष का दायित्व सौंपा गया है।

बता दें कि चिराग को प्रदेश का प्रभारी अध्यक्ष बनाने से पूर्व तेजी से चले घटनाक्रम में बिहार लोजपा के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पारस ने प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर हाल ही में पार्टी की सभी कमेटियों को भंग कर दिया था और तय यह हुआ था कि दशहरा के बाद पार्टी की नई कमेटी का गठन किया जाएगा और बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान भी आरंभ होगा। ध्यातव्य है कि पारस लोजपा के स्थापना काल से ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे और संगठन का जिम्मा संभालते रहे थे। अब उन्हें दलित सेना का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। रामचंद्र पासवान के निधन के बाद से यह पद खाली था।

बहरहाल, लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान ने चिराग को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की घोषणा करते हुए कहा कि इसके पीछे यह उद्देश्य है कि युवा पीढ़ी को जितनी जल्दी हो सके पार्टी चलाने का जिम्मा सौंप दिया जाए। गौरतलब है कि चिराग ही लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं।

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पटना में होगा देश का पहला और एकमात्र डॉल्फिन रिसर्च सेंटर

देश का पहला और एकमात्र डॉल्फिन रिसर्च सेंटर पटना में बनने जा रहा है। 71 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस अत्याधुनिक रिसर्च सेंटर के भवन निर्माण का शिलान्यास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 5 अक्टूबर 2019 को विश्व डॉल्फिन दिवस पर करेंगे।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार की तरफ से रिसर्च सेंटर के निर्माण के लिए वर्ष 2013 में ही 29 करोड़ रुपये आ गए थे लेकिन भूमि संबंधी विवाद के कारण भवन का शिलान्यास नहीं हो पा रहा था। यह विवाद अब समाप्त हो गया है। इस रिसर्च सेंटर के लिए पटना विश्वविद्यालय की ओर से पटना लॉ कॉलेज के पास गंगा तट पर दो एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है, जिस पर निर्माण कार्य शुरू होगा। कहने की जरूरत नहीं कि रिसर्च सेंटर बन जाने से यहां देश-विदेश के विशेषज्ञ शोध करने के लिए आएंगे। पटना विश्वविद्यालय के छात्रों को भी डॉल्फिन पर शोध करने का मौका मिलेगा।

ध्यातव्य है कि 5 अक्टूबर 2009 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गांगेय डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। डॉल्फिन को जलीय जीव घोषित कराने का श्रेय पटना विवि के प्रोफेसर डॉ. आरके सिन्हा को जाता है। इसके लिए राजेंद्र सहनी नामक मछुआरे और उनकी टोली को भी श्रेय जाता है, जिन्होंने डॉल्फिन के रहन-सहन और खान-पान के विषय में काफी बातें उजागर की थीं। यह भी जानें कि डॉल्फिन पर देश में पहली पीएचडी डॉ. गोपाल शर्मा के नाम है। डॉ. शर्मा फिलहाल भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के बिहार प्रभारी एवं वरीय वैज्ञानिक हैं।

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केबीसी में करोड़पति बन सनोज ने किया बिहार को गौरवान्वित

बिहार के जहानाबाद निवासी सनोज राज कौन बनेगा करोड़पति सीजन 11 के पहले करोड़पति बन गए हैं। शनिवार को सनोज ने शानदार खेल दिखाते हुए 15 सवालों के सही जवाब दिए और 1 करोड़ की धनराशि अपने नाम कर ली। उन्होंने 7 करोड़ के लिए 16वां सवाल नहीं खेला, जिसका ग़लत उत्तर देने पर जीती हुई राशि घटकर 3 लाख 20 हजार रह जाती।

आपको सहज रूप से उत्सुकता हो रही होगी कि जिस सवाल ने सनोज को एक करोड़ रुपए का इनाम जिताया, वो क्या था? चलिए हम बताए देते हैं। वो सवाल था – भारत के किस मुख्य न्यायाधीश के पिता भारत के एक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे? इसका सही जवाब है – जस्टिस रंजन गोगोई। इस सवाल का जवाब देने के लिए सनोज ने अपनी आखिरी लाइफ “लाइन आस्क द एक्सपर्ट” का इस्तेमाल किया। वैसे जिस सवाल का जवाब देकर सनोज 7 करोड़ की धनराशि जीतकर इतिहास रच सकते थे, वो था – ऑस्ट्रेलियन दिग्गज बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने किस भारतीय गेंदबाज की बॉलिंग पर एक रन बनाकर सौंवा शतक पूरा किया था? इसका सही जवाब है – गोगुमल किशन चंद।

स्वभाव से सरल व मृदुभाषी और सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास रखने वाले सनोज ने हॉट सीट पर बेहद धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ एक के बाद एक सवाल का सामना किया। आईएएस बनने को इच्छुक सनोज दिल्ली में रहकर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि आईएएस के पद के साथ ही बदलाव लाने का मौका भी मिलता है। उनकी दिलचस्पी नीति निर्माण और उनके क्रियान्वयन में है। वे स्वास्थ्य और पर्यावरण के संबंध में नीतियां बनाना चाहते हैं। उनके विचारों ने महानायक अमिताभ बच्चन को खासा प्रभावित किया। उन्होंने सनोज को गले लगकर बधाई दी। उस क्षण सनोज के पिता भी उपस्थित थे। वे स्वाभाविक तौर पर गौरवान्वित और भावुक हो रहे थे।

केबीसी 11 के पहले करोड़पति बनने पर सनोज ने कहा, “मैं इस जीत पर खुश हूँ। यह मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण पल है और मैं यहां से और आगे बढ़ने का इरादा रखता हूँ। मेरा मानना है कि अपने लक्ष्यों के प्रति कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण उन्हें हासिल करने की प्रक्रिया को बहुत अधिक सुखद बना देगा। वर्तमान में मेरी खुशी अल्पकालिक है क्योंकि मैं अपनी यूपीएससी परीक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर रहा हूँ जो अगले सप्ताह शुरू हो रही है।“ बिहार को गौरवान्वित करने वाले इस मेधावी युवा को ‘मधेपुरा अबतक’ की शुभकामनाएं।

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पद्म पुरस्कारों के लिए खेल मंत्रालय के भेजे सभी 9 नाम बेटियों के

भारतीय खेल मंत्रालय ने पद्म पुरस्कारों के लिए 9 नाम प्रस्तावित किए हैं और दिलचस्प बात यह कि ये सभी नाम बेटियों के हैं। देश को गौरवान्वित करने वाली इन 9 महिला खिलाड़ियों में बॉक्सर मैरी कॉम और और बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के नाम शामिल हैं। मैरी कॉम का नाम पद्म विभूषण के लिए जबकि पीवी सिंधु का नाम पद्म भूषण के लिए भेजा गया है। शेष 7 नाम पद्म श्री के लिए भेजे गए हैं।

गौरतलब है भारतीय खेल इतिहास में पहली बार किसी महिला एथलीट को देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण देने की सिफारिश की गई है। वैसे भी इस सम्मान के लिए छह बार की वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर एमसी मैरीकॉम से बेहतर नाम हो भी क्या सकता था। वर्तमान में राज्यसभा की सदस्य मैरी कॉम 2012 के लंदन ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुकी हैं। उन्हें 2013 में पद्म भूषण और 2006 में पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है।

इसी तरह वर्ल्ड चैंपियन बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु का नाम पद्म भूषण के प्रस्तावित किया गया है, जो कि देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। सिंधु का नाम इस सम्मान के लिए 2017 में भी भेजा गया था, लेकिन वह फाइनल सूची में जगह नहीं बना पाईं। उन्हें 2015 में पद्म श्री मिला था। रियो ओलिंपिक्स में सिल्वर मेडल जीतने वालीं सिंधु ने हाल ही में वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया है, वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।

मैरी कॉम और सिंधु के अलावा अन्य 7 महिला खिलाड़ियों के नाम पद्म श्री के लिए प्रस्तावित है। ये खिलाड़ी हैं – कुश्ती खिलाड़ी विनेश फोगाट, टेबल टेनिस स्टार मनिका बत्रा, महिला क्रिकेट टीम की टी20 कप्तान हरमनप्रीत कौर, हॉकी कैप्टन रानी रामपाल, पूर्व शूटर सुमा शिरुर और पर्वातारोही जुड़वा बहनें ताशी और नुंगशी मलिक।

प्रस्तावित सभी नामों को गृह मंत्रालय के पद्म अवार्ड कमिटी को भेजा गया है। अवार्ड के लिए चयनित नामों की घोषणा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी 2020 को की जाएगी।

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सचमुच बेमिसाल थे राम जेठमलानी

भारतीय कानून जगत के ‘भीष्म पितामह’ कहे जाने वाले दिग्गज वकील, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और मौजूदा समय में बिहार से राजद के राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में निधन हो गया। जेठमलानी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और इलाजरत थे। उनके परिवार में उनके बेटे महेश जेठमलानी हैं, जो स्वयं जाने-माने वकील हैं, और एक बेटी हैं जो अमेरिका में रहती हैं।
अपने बेबाक बयानों और दिलचस्प शख्सियत के कारण जेठमलानी कोर्ट में ही नहीं, राजनीतिक गलियारों में भी खासे लोकप्रिय रहे। वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 14 सितंबर 1923 को जन्मे जेठमलानी ने महज 17 साल की उम्र में एलएलबी की डिग्री ली और पाकिस्तान में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। बॉम्बे वे एक शरणार्थी के तौर पर पहुँचे और फिर वहां नए सिरे से अपनी ज़िन्दगी शुरू की। यहां पहली बार वे नानावटी केस से चर्चा में आए और इसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
विलक्षण प्रतिभा के धनी और बेहद परिश्रमी राम जेठमलानी हमेशा जीतने के लिए लड़ते थे और उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि लोग क्या कहेंगे। उनकी ऊर्जा युवा वकीलों को भी शर्माने के लिए मजबूर कर दिया करती। उनमें यह अद्भुत साहस था कि वे बहुत अलोकप्रिय केस को भी हाथ में लिया करते। उन्होंने इन्दिरा गांधी और आगे चलकर राजीव गांधी के हत्यारे का केस लड़ा और संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु का बचाव किया जबकि आम जन की भावना इसके खिलाफ थी। इसी तरह उन्होंने जेसिका लाल मर्डर केस में मनु शर्मा का बचाव किया, स्टॉक मार्केट केस में हर्षद मेहता और केतन पारेख का बचाव किया और अपनी आलोचनाओं से बिल्कुल बेपरवाह रहे। उन्होंने अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान, जयललिता, लालू प्रसाद यादव, अमित शाह, अरविन्द केजरीवाल, जगनमोहन रेड्डी, बीएस येदियुरप्पा, कनिमोई, संजय दत्त, बाबा रामदेव और आसाराम बापू के केस भी लड़े।
जेठमलानी के नाम देश में सबसे कम और सबसे अधिक उम्र के वकील होने का नायाब रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने 19 साल की उम्र में वकालत शुरू की और लगातार 77 साल तक इस पेशे में रहे। ज़िन्दगी उन्होंने अपनी शर्तों पर जी और अपने बनाए उसूलों पर चले। 2017 में अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि 76 साल से प्रैक्टिस कर रहा हूँ, पर कोई आदर्श नहीं मिला। वे दूसरों का मूल्यांकन भी उसी आधार पर किया करते जिन मूल्यों में वे खुद यकीन रखते। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने जनता की भलाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम किए।
बता दें कि साल 2010 में राम जेठमलानी को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था। छठी और सातवीं लोकसभा में उन्होंने भाजपा के टिकट पर मुंबई से चुनाव जीता था। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे कानून मंत्री और शहरी विकास मंत्री रहे और साल 2004 में वाजपेयी के ही खिलाफ उन्होंने लखनऊ सीट से चुनाव भी लड़ा था।
कुल मिलाकर, इस बेमिसाल शख्सियत को किसी एक लेख से या महज कुछ पन्नों में जान लेना और जानकर समझ लेना मुमकिन नहीं। उन्हें समझने के लिए कई-कई बार और कई-कई तरीके से देखना होगा। फिलहाल इतना ही। उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।

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लैंडर विक्रम से संपर्क टूटा है, हमारी उम्मीदें नहीं

चंद्रमा की सतह से महज 2.1 किलोमीटर या कहें दो कदम दूर लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया, लेकिन सवा सौ करोड़ भारतीयों की उम्मीदें नहीं टूटी हैं। मून मिशन में भले ही शत प्रतिशत सफलता नहीं मिल पाई हो, लेकिन जितनी मिली है, इतिहास रच देने के लिए वो भी कम नहीं। इस अभियान के जरिये इसरो ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

बहरहाल, इसरो ने कई प्रयास के बाद मध्य रात्रि करीब दो बजे बताया कि लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया है। इसके बाद वैज्ञानिक लैंडर से दोबारा संपर्क नहीं साध पाए। इसरो का कहना है कि लैंडिंग के अंतिम क्षणों में जो डाटा मिला है, उसके अध्ययन के बाद ही संपर्क टूटने का कारण पता चल सकेगा।

इस मौके पर इसरो के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय में दम साधकर इस अभियान को लाइव देख रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भावुक कर देने वाले उन क्षणों में वैज्ञानिकों की भरपूर हौसला आफजाई की और उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “देश को अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है। वे देश की सेवा कर रहे हैं। आगे भी हमारी यात्रा जारी रहेगी। मैं पूरी तरह वैज्ञानिकों के साथ हूँ। हिम्मत बनाए रखें, जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।”

गौरतलब है कि इसरो प्रमुख के. सिवन ने 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान की लांचिंग के मौके पर कहा था कि हमारे लिए आखिरी के 15 मिनट आतंक के पल होंगे। उनकी चिंता सही साबित हुई। मंजिल बस दो कदम दूर थी, लेकिन आखिरी मौके पर जीत हाथ से फिसल गई। वैसे बता दें कि लैंडर-रोवर से संपर्क भले ही टूट गया है, लेकिन ऑर्बिटर से उम्मीदें अभी भी कायम हैं। लैंडर-रोवर को दो सितंबर को ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग किया गया था। ऑर्बिटर अब भी चांद से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर कक्षा में सफलतापूर्वक चक्कर लगा रहा है। इसरो को उससे संकेत और जरूरी डाटा प्राप्त हो रहे हैं।

चलते-चलते बस इतना कि मून मिशन में कामयाबी जल्द ही भारत के कदम चूमेगी। इस विश्वास के पीछे पहली वजह यह कि इसरो के साथ यह ख्याति जुड़ी है कि उसके लिए हर चुनौती एक अवसर होती है और दूसरी यह कि करोड़ों हाथ इस मिशन के लिए एक साथ उठकर दिन-रात दुआ कर रहे हैं।

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