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देश में पूर्ण टीकाकरण वाले घरों पर कोरोना स्टीकर लगेगा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार जिस घर में लोगों को कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों के तहत दोनों डोज लग चुके हैं उस घर पर पूर्ण टीकाकरण वाला कोरोना स्टीकर साटा जाएगा। क्योंकि भारत सरकार सुनिश्चित करना चाहती है कि देश के हर व्यक्ति का पूर्ण टीकाकरण हो।

बता दें कि अब तक सिंगल या डबल डोज मिलाकर देश ने तेजी से 100 करोड़ कोरोना टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। परंतु, कोरोना अभी भी समाप्त नहीं हुआ है।

जानिए कि बीते चौबीस घंटों में कोरोना वायरस ने देश में 197 लोगों की जान ले ली है जिसमें 127 मौतें केवल केरल राज्य में दर्ज की गई है। चतुर्दिक चर्चा हो रही है कि हर व्यक्ति के पूर्ण टीकाकरण के लिए जन भागीदारी आवश्यक है।

चलते-चलते यह भी कि भारत सरकार ने घोषणा की है कि दोनों खुराक 100% लोगों को देना कोविड-19 टीकाकरण अभियान को पूरा करने और भारत में वैश्विक महामारी समाप्त करने के लिए जरूरी है। मौके पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि इस व्यापक अभियान को हम सभी भारतीय का समर्थन मिले तभी सरकार का “हर घर दस्तक” अभियान सफल हो पाएगा और हर घर पर पूर्ण टीकाकरण वाला कोरोना स्टीकर दूर से ही अपनी चमक बिखेड़ता हुआ दिखेगा।

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उपन्यासकार मन्नू भंडारी के निधन से साहित्य जगत मर्माहत

प्रख्यात उपन्यासकार मन्नू भंडारी के निधन का समाचार सुनते ही संपूर्ण साहित्य जगत मर्माहत हो गया। चारों ओर शोक की लहर दौड़ गई।

बता दें कि मध्य प्रदेश में जन्मी लेखिका मन्नू भंडारी ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई थी। अपने कालजई रचनाओं “आपका बंटी”, “महाभोज” आदि के लिए मशहूर मन्नू भंडारी का सोमवार को गुरुग्राम के एक अस्पताल में निधन हो गया।

जानिए कि मन्नू भंडारी को हिन्दी में उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक उपलब्धियों के लिए “दिल्ली शिखर सम्मान” एवं केके बिरला फाउंडेशन के “व्यास सम्मान” सहित कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उनके प्रसिद्ध उपन्यास “यही सच है” को 1974 में ‘रजनीगंधा’ नाम से फिल्माया गया था। यह फिल्म एक साल बाद कई फिल्म फेयर पुरस्कार भी जीते।

मौके पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि साहित्य को समृद्ध करने वाली मन्नू भंडारी द्वारा महिलाओं के अलावा कई विषयों पर लेखन की जा चुकी है। 90 की उम्र तक बदलते सामाजिक यथार्थ की कहानीकार बनी रही मन्नू भंडारी…… ताजिंदगी हिन्दी की अग्रणी लेखिका बनी रही। तभी तो मन्नू जी का लिखा आज भी समस्त साहित्यानुरागियों की नसें चटका देता है। उनकी कहानी कभी पुरानी नहीं पड़ सकती…।

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मधेपुरा से मंगल सानिध्य रखने वाले गणितज्ञ डॉ.वशिष्ठ नारायण सिंह को मरणोपरांत मिला पद्मश्री सम्मान

गणितज्ञ प्रो.(डॉ.)वशिष्ठ नारायण सिंह का मंगल सानिध्य मधेपुरा से रहा है। जहां उन्होंने मधेपुरा के भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में योगदान दिया था, वहीं पटना के साइंस कॉलेज में मधेपुरा निवासी समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से एक क्लास आगे पढ़ते थे।

जानिए कि वर्ष 1962 में जब डॉ.वशिष्ठ नारायण नेतरहाट से हायर सेकेंडरी उत्तीर्ण होकर बी.एस-सी पार्ट वन के छात्र हुआ करते थे तब डॉ.मधेपुरी पटना साइंस कॉलेज में प्री-साइंस के छात्र हुआ करते थे।

बता दें कि गणितज्ञ रामानुजन कहलाने वाले एकमात्र छात्र वशिष्ठ के लिए कुलपति डॉ.जॉर्ज जैकब एवं पटना साइंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ.नासु नागेंद्र नाथ ने बी.एस-सी गणित की परीक्षा लेकर उन्हें कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी भेज दिया, जहां उन्होंने गणितज्ञ डॉ.केली के सानिध्य में रहकर काम किया।

यह भी कि जब 1973 में वैवाहिक बंधन में बंधे तो अचानक दुनिया भैंचक हो गई यह जानकर कि गणितज्ञ वशिष्ठ रांची मेंटल हॉस्पिटल में इलाजरत हैं। जब गणित की दुनिया का वह चमकता सितारा गुमनामी की जिंदगी जीने को विवश हो गया तब मधेपुरा वकालत खाना में डॉ.मधेपुरी ने लोक अभियोजक शिवनेश्वरी प्रसाद की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाकर उस महान गणितज्ञ को आर्थिक मदद करने का निर्णय लिया। परंतु, एक दिन बाद कर्पूरी सरकार ने घोषणा कर दी कि डाॅ.वशिष्ठ नारायण का सारा खर्च सरकार वहन करेगी।

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बिहार के प्रमोद को ‘खेलरत्न’ से सम्मानित किया राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने

महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने खेल जगत में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रपति भवन के ‘दरबार हाल’ में समारोह पूर्वक सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में टोक्यो पैरालंपिक में बिहार के वैशाली निवासी प्रमोद भगत को भी बैडमिंटन के स्वर्ण पदक विजेता होने पर मेजर ध्यान चंद खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा गया। राष्ट्रपति द्वारा जैवलिन थ्रो के विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा सहित भारत 12 खिलाड़ियों को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

बता दें कि इसी कार्यक्रम में पैरालंपिक के ऊंची कूद में टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी शरद कुमार सहित 35 खिलाड़ियों को राष्ट्रपति द्वारा ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहां खेलरत्न पुरस्कार में पुरस्कार राशि 25 लाख दी गई… वहीं अर्जुन पुरस्कार में 15 लाख रूपये की पुरस्कार राशि दी गई है। इसके अलावे सम्मान पत्र आदि देकर भी सम्मानित किया गया। यूं तो यह सम्मान हर साल 29 अगस्त को मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर आयोजित किया जाता है, परंतु उस समय टोक्यो ओलंपिक एवं पैरालंपिक खेल होने के कारण यह समारोह विलंब से आयोजित किया गया।

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अब शरीर के किसी भाग पर मौजूद हुआ कोरोना वायरस तो नैनो तकनीक वाले रिस्ट बैंड का बजने लगेगा अलार्म

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका से भयभीत भारतीय युवा विज्ञानी डॉ.रेनु चोइथरानी का दावा है कि देश में इस तरह का पहला नम्नोमेष है जिसे भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने प्रमाणित किया है। इस बैंड को तैयार करने में करीब डेढ़ वर्ष का समय और लगभग ढाई हजार रुपये का खर्च आया है।

बता दें कि इस रिस्ट बैंड में बायो सेंसर लगे हैं, जो कि कोरोना वायरस के सभी वेरिएंट की पहचान कर लेते हैं। बैंड में लगी लाल एलईडी जलने के साथ-साथ अलार्म भी बजने लगता है।

चलते-चलते यह भी जान लीजिए कि शरीर का तापमान मापने हेतु इस बैंड में थर्मल सेंसर भी लगाए गए हैं, जिसे जिसमें मोबाइल नंबर फिट करने पर शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होते ही आपातकालीन नंबर पर मैसेज आ जाता है।

 

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योग पर जारी हुए कई डाक टिकटें

प्रत्येक व्यक्ति ब्रह्मांड का अंश है। वह योग और प्राणायाम को अपनाकर निरोगी जीवन जी सकता है। स्वास्थ्य के लिए योग आवश्यक है। व्यक्ति को प्रत्येक दिवस का शुभारंभ योग से करना चाहिए। प्रत्येक दिवस को विश्व योग दिवस मानकर योग करने वाला ही स्वस्थ रह सकता है।

बता दें कि 2015 में प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एक शीट जारी हुई थी जिसमें प्रतीकात्मक रूप से योग व प्राणायाम करते दर्शाया गया था। फिर 2016 में द्वितीय योग दिवस पर सूर्य नमस्कार करते हुए 12 डाक टिकटों की एक लघु शीट जारी की गई थी जिसके जरिए यह दर्शाया गया था कि योग व प्राणायाम शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि प्रत्येक वर्ष योग दिवस की थीम अलग-अलग होती है। साथ ही नयापन बनाए रखने के लिए कुछ ना कुछ नया करने मोहर लगाया जाता है।

 

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तेज रफ्तार के कारण पहली बार कई राज्यों में घायलों से अधिक मृतकों की संख्या

भारत में तेज रफ्तार वाहनों की वजह से पिछले साल हुए सड़क हादसों में 7 5 हजार 333 लोगों की मौत हो गई और 2 लाख 9 हज़ार 727 सड़क यात्री घायल हुए। सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 3 लाख 54 हजार सड़क हादसे हुए और इनमें से लगभग 60% केवल तेज रफ्तार के कारण हुए। लोगों को अपनी जान देकर इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।

बता दें कि प्रतिवर्ष सड़क हादसों में घायलों की संख्या अधिक और मरने वालों की कम होती रही है। परंतु पहली बार भारत के 3 राज्यों में घायलों से ज्यादा मृतकों की संख्या रही है-

1. उत्तर प्रदेश में कुल सड़क हादसों 28 हजार 653 हुए जिनमें 19 हजार 37 लोगों की मौत हुई और 15 हजार 982 लोग घायल हुए।

2. पंजाब में कुल सड़क हादसे 5 हजार 173 हुए जिनमें 3 हजार 916 लोगों की मृत्यु हुई और 2 हजार 881 लोग जख्मी हुए।

3. मिजोरम में 47 सड़क हादसों में 53 लोगों की मृत्यु हुई और मात्र 45 लोग घायल हुए।

चलते-चलते समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने विशेष रूप से युवजनों से कहा- If you are married, divorce speed.

 

 

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इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर बढ़ रहा मिथिलांचल का दरभंगा एयरपोर्ट

अब तक 1 वर्ष में लगभग 4 लाख 60 हजार यात्रियों ने दरभंगा एयरपोर्ट से हवाई यात्राएं की है। विगत साल की 8 नवंबर से दरभंगा एयरपोर्ट से विमान सेवा शुरू हुई। मात्र 11 महीने में देश के 63 हवाई अड्डों में दरभंगा नंबर वन पर पहुंच गया। मिथिलांचल के लोगों के लिए बड़ी सुविधाएं और कारोबार को भी मिली नई उड़ान।

जानिए कि जोनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत देश में दरभंगा सहित 63 शहरों में एयरपोर्ट खोला गया था। जिनमें यात्रियों की आमद के मुताबिक नंबर वन पर दरभंगा एयरपोर्ट जा रहा है। इस एयरपोर्ट पर रोज 2000 से 2200 यात्री आते-जाते हैं। ये नेपाल सहित बिहार के 18 जिलों के होते हैं।

चलते-चलते यह भी कि यहां पर 20 विमानों लैंड व टेकऑफ की अनुमति प्राप्त है। कारोबार में बढ़ोतरी हुई है। इस बार 36 टन शाही लीची का स्वाद मुंबई,

बेंगलूर और हैदराबाद के लोगों ने चखा है। अगले साल से दरभंगा की शान मछली, पान और मखान देश के विभिन्न हिस्सों में भेजने की योजना है। समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि जिस दरभंगा को अंग्रेजी हुकूमत (1930-40) में हवाई अड्डा, रनवे और चार जहाज था, उस दरभंगा एयरपोर्ट के लिए मैं भारत सरकार से मांग करता हूं कि आने वाले दिनों में इस एयरपोर्ट का नाम “विद्यापति इंटरनेशनल एयरपोर्ट” रखकर इसे इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। तत्काल यहां पर नाइट लैंडिंग की सुविधा मुहैया कराई जाए।

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राष्ट्रपति करेंगे नीरज चोपड़ा सहित अन्य 11 खिलाड़ियों को ‘खेलरत्न’ से पुरस्कृत

जानिए कि भारतीय खेल इतिहास में पहली बार विभिन्न विधाओं के 11 खिलाड़ियों को ‘खेलरत्न’ सरीखे देश के सर्वोच्च खेल सम्मान से 29 अक्टूबर को सम्मानित करेंगे महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। टोक्यो ओलंपिक के जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा सहित 11 जिन खिलाड़ियों को ध्यान चंद खेल रत्न से सम्मानित किए जाएंगे, वे हैं- रवि दहिया (कुश्ती) पीआर श्रीजेश (हाॅकी), लवलीना बोरगोहेन (मुक्केबाजी), अवनी लेखरा (निशानेबाजी), मनीष नरवाल (निशानेबाजी), सुमित अंतिल (भाला फेंक), प्रमोद भगत (बैडमिंटन), कृष्णा नागर (बैडमिंटन), मिताली राज (क्रिकेट) एवं सुनील छेत्री (फुटबॉल)।

बता दें कि समिति ने अर्जुन पुरस्कार के लिए 35 खिलाड़ियों का चयन किया है, जिसमें हैं- शिखर धवन (क्रिकेटर), भाविना पटेल (पैरा टेबल टेनिस), सुहास यतीराज (पैरा बैडमिंटन), निषाद कुमार (ऊंची कूद) सहित टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हाॅकी पुरुष टीम के सभी सदस्यगण जिन्हें अर्जुन पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा। वहीं कोच के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार हेतु चयनित तीन नाम हैं- राधाकृष्ण नायर, टीपी ओसेफ एवं संदीप सांगवान।

चलते-चलते यह भी कि हर वर्ष 29 अगस्त को मेजर ध्यानचंद के जन्म दिवस (खेल दिवस) पर यह पुरस्कार दिया जाता था, परंतु इस बार टोक्यो ओलंपिक एवं पैरालंपिक खेल जुलाई-अगस्त में होने की वजह से इस कार्यक्रम के आयोजन में विलंब हो गया। याद कर लें सुनील छेत्री के रूप में पहली बार किसी फुटबॉलर को मिलेगा ‘खेल रत्न’ सरीखे सम्मान।

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स्वतंत्र भारत का पहला चुनाव, आज भी जीवित है देश का प्रथम मतदाता 105 वर्षीय श्याम सरन नेगी

यह अक्टूबर का महीना है। इसी महीने में 70 वर्ष पूर्व आजाद भारत का प्रथम चुनाव हुआ था। स्वतंत्र भारत के प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त थे आईसीएस सुकुमार सेन, जिन्होंने 1951-52 और 1957 का चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराया था। पहले चुनाव ने देश को बहुत कुछ दिखाया, सिखाया और साबित भी किया।

बता दें कि सर्वप्रथम इसी अक्टूबर महीने की 25 तारीख को 1951 की सुबह आजाद भारत में मतदान की शुरुआत हुई थी। हिमाचल प्रदेश अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने वाला पहला राज्य बना था, क्योंकि सर्द मौसम को देखते हुए यह फैसला लिया गया था। तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त ने 68 चरणों में चुनाव की योजनाएं बनाई थी।

1st voter of 1st general election Shri Shyam Sharan Negi after casting his vote in 2019 general election.
1st voter of 1st general election Shri Shyam Sharan Negi after casting his vote in 2019 general election.

जानिए कि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के कल्पा गांव निवासी स्कूल टीचर श्याम शरण नेगी को अपने गांव से अलग प्रशासन द्वारा मतदान केंद्र प्रभारी बनाया गया था। नेगी एक वोट के मूल्य को समझते थे। वे मतदान शुरू होने से 1 घंटे पहले यानि सुबह 6:00 बजे ही अपने गांव के प्राथमिक विद्यालय के मतदान केंद्र पर पहुंच गए। वहां उन्होंने अधिकारियों को अपनी स्थिति के बारे में बताया। तैनात अधिकारी ने उन्हें 6:30 बजे मतपत्र दिया और नेगी पहले मतदाता बन गए। फिर भागते हुए सुबह 7:15 बजे अपने बूथ की कमान संभालने पहुंच गए।

उन दिनों अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 तक यानि 4 महीनों में प्रथम चुनाव संपन्न हुआ था। तब देश में साक्षरता की भारी कमी थी। दो दिग्गज आचार्य जेबी कृपलानी फैजाबाद (यूपी) से एवं बाबा साहब अंबेडकर मुंबई नॉर्थ से चुनाव हार गए थे। वर्ष 1953 में आचार्य कृपलानी मधेपुरा से संसदीय उपचुनाव जीतकर मधेपुरा का प्रतिनिधित्व किए थे। मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल एवं लोक नायक जेपी ने कृपलानी जी को मधेपुरा से चुनाव लड़ने की पहल की थी।

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