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बीमार जेटली का हाल जानने दिल्ली पहुँचे नीतीश

पूर्व केन्द्रीय मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली गंभीर रूप से बीमार हैं और 9 अगस्त से दिल्ली स्थित एम्स में उनका इलाज चल रहा है। खबरों के मुताबिक उनकी स्थिति लगातार चिन्ताजनक बनी हुई है। शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें देखने दिल्ली पहुँचे और उनका हालचाल लेकर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
नीतीश कुमार काफी देर तक एम्स में रुके। उन्होंने वहां डॉक्टरों से भी बात की। बताया जाता है कि शनिवार को जेटली जी को डॉक्टरों ने वेंटिलेटर से हटाकर ईसीएमओ (एक्सट्रा कॉर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजिनेशन) पर शिफ्ट कर दिया है। ईसीएमओ पर मरीज को तभी रखा जाता है जब दिल और फेफड़े ठीक से काम नहीं करते और वेंटीलेटर का भी फायदा नहीं होता। इससे मरीज के शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाई जाती है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अरुण जेटली से बेहद आत्मीय संबंध रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बाद अरुण जेटली भाजपा के उन गिनेचुने नेताओं में रहे हैं जिनसे नीतीश कुमार की काफी निकटता रही है।
चलते-चलते बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक भोजपुर और बिहटा जाने वाले थे जहाँ उन्हें कई योजनाओं का शिलान्यास करना था। लेकिन अरुण जेटली की नाजुक हालत देख उन्होंने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए और दिल्ली जाने का फैसला ले लिया।

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66वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: ‘अंधाधुन’, ‘बधाई हो’ और ‘उरी’ की धूम

66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा शुक्रवार को कर दी गई। इसमें फीचर फिल्म की श्रेणी में 31 और नॉन फीचर फिल्म की श्रेणी में 23 पुरस्कार दिए गए। इस बार के पुरस्कार समारोह में हिन्दी फिल्मों ‘अंधाधुन’, ‘बधाई हो’, ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘पद्मावत’ और ‘पैडमैन’ की धूम रही। आयुष्मान खुराना और तब्बू की फिल्म ‘अंधाधुन’ को इस साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। आयुष्मान की ही ‘बधाई हो’ ने सर्वश्रेष्ठ चर्चित फिल्म का पुरस्कार जीता। उधर ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (विक्की कौशल), सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (आदित्य धर), सर्वश्रेष्ठ साउंड डिजाइन और बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक का पुरस्कार अपने नाम किया। वहीं दर्शकों द्वारा खूब सराही गई अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म ‘पैडमैन’ ने अपेक्षा के अनुरूप सामाजिक विषयों पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता।
आयुष्मान खुराना के लिए इस बार के पुरस्कारों में दोहरी खुशी छिपी थी। उनकी फिल्म ‘अंधाधुन’ ने केवल सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फिल्म का ही पुरस्कार नहीं जीता बल्कि इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी मिला। उन्हें यह पुरस्कार ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ के विक्की कौशल के साथ संयुक्त रूप से मिला। वहीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दक्षिण भारतीय अभिनेत्री कीर्ति सुरेश को तेलुगु फिल्म ‘महानती’ के लिए दिया गया। सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मराठी फिल्म ‘चुम्बक’ के लिए स्वानंद किरकिरे को, जबकि सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार फिल्म हिन्दी फिल्म ‘बधाई हो’ के लिए सुरेखा सीकरी को मिला।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक संजय लीला भंसाली को 66वें फिल्म पुरस्कार से विशेष उपलब्धि हासिल हुई। इस बार उन्होंने अपनी फिल्म ‘पद्मावत’ के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार जीता। वहीं फिल्म के गाने ‘घूमर’ के लिए कृति महेश और ज्योति तोमर को सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफर चुना गया। बेस्ट प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार भी ‘पद्मावत’ के नाम रहा। अरिजीत सिंह ने इस फिल्म के गाने ‘बिन्ते दिल’ के लिए यह पुरस्कार जीता।
अन्य पुरस्कारों में बेस्ट एक्शन डायरेक्टर का पुरस्कार कन्नड़ फिल्म ‘केजीएफ’ के लिए प्रशांत नील ने हासिल किया। उधर बेस्ट फिल्म क्रिटिक का पुरस्कार ब्लेस जॉनी और अनंत विजय को मिला। क्षेत्रीय फिल्मों की बात करें तो ‘बारम’ को सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म, ‘महानती’ को सर्वश्रेष्ठ तेलुगु फिल्म, ‘एक जे छीलो राजा’ को सर्वश्रेष्ठ बंगला फिल्म, ‘हरजीता’ को सर्वश्रेष्ठ पंजाबी फिल्म, ‘हामिद’ को सर्वश्रेष्ठ उर्दू फिल्म, ‘रेवा’ को सर्वश्रेष्ठ गुजराती फिल्म, ‘भोंगा’ को सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म और ‘टर्टल’ को सर्वश्रेष्ठ राजस्थानी फिल्म का पुरस्कार मिला। उत्तराखंड ने मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का पुरस्कार जीता।
चलते-चलते बता दें कि इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल अप्रैल में होती है, लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव की वजह से पुरस्कार की घोषणा देर से हुई।

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नहीं रहीं सुषमा स्वराज

दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री, भारत की पूर्व विदेश मंत्री व भाजपा की अत्यंत सम्मानित नेत्री, जिनकी प्रतिष्ठा दलगत सीमाओं से ऊपर थी, सुषमा स्वराज का मंगलवार रात निधन हो गया। रात 9 से 10 बजे के बीच दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें दिल्ली स्थित एम्स ले जाया गया, जहां से उनका लौटना नहीं हो पाया और अपने व्यक्तित्व और वक्तृता के लिए विशिष्ट पहचान रखने वाली सुषमा जी 67 साल की उम्र में इस दुनिया से रुखसत हो गईं।

अजीब संयोग देखिए कि अपनी मृत्यु के महज कुछ घंटे पहले ही सुषमा जी ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने पर बधाई दी थी। अपने इस आखिरी ट्वीट में उन्होंने लिखा था – प्रधानमंत्री जी, आपका हार्दिक अभिनन्दन। मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी। इस ट्वीट के कुछ घंटे बाद ही देश ने जाना कि वे नहीं रहीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने उनके निधन पर शोक जताते हुए बिल्कुल सही कहा कि ‘भारतीय राजनीति का एक गौरवशाली अध्याय खत्म हो गया। एक ऐसी नेता जिन्होंने जनसेवा और गरीबों का जीवन संवारने के लिए अपनी जिंदगी समर्पित कर दी, उनके निधन पर भारत दुखी है। सुषमा स्वराज जी अपनी तरह की इकलौती नेता थीं, वे करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा की स्रोत थीं।’

अद्भुत वक्ता और विदुषी के रूप में पहचान बनाने वाली सुषमा स्वराज मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री थीं। वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी मंत्री रही थीं। 1977 में वे हरियाणा सरकार में मंत्री बनी थीं और सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया था।

16वीं लोकसभा में सुषमा स्वराज मध्य प्रदेश के विदिशा से सांसद चुनी गई थीं। इस बार के चुनाव में उन्होंने खराब स्वास्थ्य की वजह से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। पिछली सरकार में विदेश मंत्री रहते हुए सोशल मीडिया पर शिकायतों को सुनने और उनका त्वरित निपटारा करने के कारण उनकी लोकप्रियता में और इजाफा हुआ था। विचारों की स्पष्टता, व्यक्तित्व की गरिमा और सांस्कारिक भव्यता के कारण वे हमेशा याद की जाएंगी। उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।

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राज्यसभा से भी पास हुआ तीन तलाक बिल

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक को अपराध बनाने वाला बिल – मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक – पास हो गया। कई दलों के वॉकआउट करने या अनुपस्थित रहने की वजह से राज्यसभा में बिल का रास्ता आसान हो गया था। दरअसल जेडीयू, एआईएडीएमके, बीएसपी और टीआरएस जैसे बड़े दलों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। एआईएडीएमके और जेडीयू जैसे दलों के वॉकआउट और बीजेडी के समर्थन से बिल पास कराने में सत्ताधारी दल को बड़ी मदद मिली। तीन साल की सजा और जुर्माने के प्रावधान वाले इस बिल को लोकसभा से 26 जुलाई को ही मंजूरी मिल चुकी है।

कहने की जरूरत नहीं कि केन्द्र की मोदी सरकार के लिए यह बिल प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका था। इसे पास कराने के लिए भाजपा कोई कसर नहीं रखना चाहती थी। आज भी उसने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया था। दरअसल 242 सदस्यों वाली राज्यसभा में भाजपा के 78 और कांग्रेस के 48 सांसद हैं। बिल को पास कराने के लिए एनडीए को 121 सदस्यों का समर्थन चाहिए था। ऐसी स्थिति में अन्य दलों के सांसदों की अनुपस्थिति से ही सरकार की राह आसान हो सकती थी। ऐसे में एआईएडीएमके के 11, जेडीयू के 6, टीआरएस के 6, बीएसपी के 4 और पीडीपी के 2 सांसद की अनुस्थिति से भाजपा की स्थिति मजबूत हो गई। सपा के भी कुछ सांसद वोटिंग में शामिल नहीं हुए।

बहरहाल, राज्यसभा में इस बिल पर लगभग साढ़े चार घंटे बहस चली। इस दौरान विपक्ष ने बिल को सिलेक्ट कमिटी को भेजने का प्रस्ताव रखा। लेकिन यह प्रस्ताव 100/84 से गिर गया। इसके बाद विधेयक के लिए वोटिंग कराई गई जिसमें इसके पक्ष में 99, जबकि विपक्ष में 84 वोट पड़े। इस तरह राज्यसभा में आसानी से यह बिल पास हो गया।

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समस्त भारत को नई ऊर्जा से भर दिया है चन्द्रयान- 2

इसरो द्वारा 22 जुलाई (सोमवार 2:43 बजे दोपहर) को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से चन्द्रयान-2 की सफल लाँचिंग के गवाह बने महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा दोनों सदनों के सदस्यगण सहित समस्त भारतवासी। आज 130 करोड़ भारतीय नर-नारियों की उम्मीदों को चाँद के ऐतिहासिक सफर पर निकले चन्द्रयान-2 ने पंख लगा दिया है।

इस चंद्रयान-2 मिशन में 5 हज़ार महिला वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसरो के इतिहास में पहली बार चंद्रयान-2 मिशन में परियोजना निदेशक एवं मिशन डायरेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दो महिलाओं बी.मुथैया एवं रितु करिधाल को सौंपी गई है। सही मायने में भारत को नारी शक्ति ने ही बना दिया है अंतरिक्ष विज्ञान की हस्ती। जहाँ नासा में अबतक 15% महिलाओं ने ही ग्रहीय अभियानों में योगदान दिया है वहीं इसरो के अभियानों में लगभग 30% महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बता दें कि भारतरत्न डॉ.कलाम के करीबी रह चुके भौतिकी के प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के अनुसार कभी इसरो-प्रमुख रह चुके गाँधीयन मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम ने 2008 में चंद्रयान-1 की लांचिंग से चन्द घंटे पहले यही कहा था-

“चन्द्रयान के जरिये चंद्रमा पर की गई खोज समस्त भारत के युवा, वैज्ञानिकों एवं बच्चों को नई ऊर्जा से भर देगी….. बाहरी दुनिया की खोज में यह चन्द्रयान-1 शुरुआत भर है”

आज इसी इसरो के वर्तमान प्रमुख एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव के.सिवन की टीम द्वारा 2020 की पहली छमाही के अंतर्गत चाँद के बाद सूरज मिशन की तैयारी आदित्य एल-1 के जरिये शुरू की जाएगी। जानिए की आदित्य एल-1 द्वारा सूरज के कोरोना यानि बाहरी परत का अध्ययन किया जाएगा जो कई हजार किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इसरो प्रमुख के.सिवन ने पिछले महीने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मधेपुरा अबतक से यही कहा था-

“सूरज का कोरोना पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर है…. जिसके बाहरी परत का अध्ययन करना इसलिए जरूरी है कि जलवायु परिवर्तन पर इसका बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। आदित्य एल-1 के जरिए कोरोना के अलावे सूर्य के बाह्यमंडल एवं वर्णमंडल के भिन्न-भिन्न प्रकार के विश्लेषणों का भी पता लगाया जा सकता है।”

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‘एमी’ की कहानी

बिना हाथ-पैर की पैदा हुई एमी से उसके माता-पिता ने तुरंत अपना संबंध विच्छेद कर लिया और जिस अस्पताल में एमी जन्म ग्रहण की थी उस अस्पताल के स्टाफ से कहा कि एमी को एक कमरे में बंद कर दें और खाने-पीने के लिए कुछ नहीं दें….. ऐसे भी होते हैं माँ-बाप !

बता दें कि आज की तारीख में एमी 37 वर्ष की है। वह जीवन से निराश सभी हाथ-पैर वालों के बीच जाकर…… मोटिवेशनल स्पीकर बन…. लोगों को हमेशा प्रेरित करती है। एमी क्या नहीं करती है….. ये वो सब कर लेती है जिसे सेल्फ-डिपेंडेंट कहा जाता है।

जानिए कि जब एमी को उसके अपने माता-पिता ने छोड़ दिया था तब किसी संवेदनशील परिवार ने उसे गोद ले लिया। एमी बड़ी होने पर अपनी शारीरिक कमजोरी को ही अपनी ताकत बना लिया और आज वह अपना यूट्यूब चैनल “हाउ इज शी डू इट” भी चलाती है।

यह भी बता दें कि एमी कुकिंग से लेकर सिलाई तथा फोटोग्राफी से लेकर डिजाइनिंग तक कर रही है। वह अपने मुंह, ठोढ़ी और कंधे की मदद से तस्वीरें भी खींचती है। एमी खुद की वीडियो भी बनाती है जिस पर लोग हर तरह के कमेंट करते हैं। परंतु, वह सिर्फ पॉजिटिव कमेंटस पर ही ध्यान देती है। नेगेटिव कमेंट पर ध्यान देने को एमी समय की बर्बादी मानती है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि एमी सिलाई सीखने को अपने सबसे बड़ी उपलब्धि मानती है। एमी हैंडबैग बनाकर ऑनलाइन बेचती है। वह अपने वर्तमान पेरेंट्स को गॉडफादर मानती है जो उसे कभी एहसास तक नहीं होने दिया की वह किसी से कम है।

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भारतीय गाँवों में शास्त्रीय संगीत का दिलचस्प शतकीय समारोह

भारत की सारी सभ्यताओं में संगीत सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। शास्त्रीय संगीत ध्वनि प्रधान होता है, शब्द प्रधान नहीं। इसमें महत्व ध्वनि के उतार-चढ़ाव का होता है….. न कि शब्द और उसके अर्थ का। ऐसे क्लासिकल म्यूजिक को नहीं समझने के कारण ही अनेक लोग ऊब जाते हैं जिसका कारण लोगों में जानकारी की कमी होती है…… न कि संगीत साधक की कमजोरी।

बता दें कि भारत के गाँवों में भी शास्त्रीय संगीत की समझ एवं उसमें गहरी रुचि रखने वाले ग्रामीणों की संख्या कम नहीं है। एक ओर जहाँ जालंधर शहर में हरिवल्लभ शास्त्रीय संगीत समारोह 144 वर्षों से, आंध्र प्रदेश में पंडित त्यागराज शास्त्रीय संगीत महोत्सव 119 वर्षों से तथा मध्यप्रदेश में तानसेन संगीत समारोह 94 वर्षों से टूटी कड़ियों के साथ जारी है वहीं दूसरी ओर इन साधन संपन्न महानगरों से दूर मध्य प्रदेश के दमोह जिले का निपट देहाती गाँव “बकायन” विगत 125 वर्षों से शास्त्रीय संगीत का अनवरत आयोजन कर रहा है।

यह भी जानिए कि बकायन गाँव में इस वर्ष के जन जलसे का 125वाँ शास्त्रीय संगीत समारोह 16-17 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) को होने जा रहा है। इस आयोजन में पहली बार राष्ट्रीय नाट्य अकादमी एवं अन्य सांस्कृतिक केंद्रों के जुड़ने से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के क्लासिकल कलाकारों के आने की सूचनाएं मिलने लगी हैंं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि बकायन का मृदंगाचार्य नाना साहेब पानसे स्मृति समारोह इस मायने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। यह आयोजन निपट देहात में होता है जहाँ के ग्रामीण भी गजब के श्रोता हैं। वे बड़े-बड़े विकट शास्त्रीय संगीतज्ञों को दो दिनों तक सुनने के लिए दिन-रात जुटे रहते हैं। कुछ श्रोतागण जहाँ 5-10 किलोमीटर दूर से पैदल चलकर क्लासिकल म्यूजिक का रसास्वादन करने आते हैं वहीं कुछ विकट श्रोतागण दो दिनों तक अपनी दुकानें बंद कर पहुंच जाते हैं….. यहाँ तक कि क्लासिकल कत्थक की प्रस्तुति देखने गाँव की पढ़-अपढ़ महिलाओं का भी तांता लग जाता है।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को देश का बही-खाता (बजट) पेश किया

भारत सरकार की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को देश का बही-खाता (बजट) पेश किया। बजट में सीतारमण ने अमीरों को झटका, मध्यमवर्ग को थोड़ी राहत और गरीबों, किसानों व महिलाओं को विशेष लाभ देने की कोशिश की है।

बता दें कि जहाँ वित्त मंत्री निर्मला ने विशेष रूप से दो विषयों पर जोर दिया है- पहला यही कि ईज आफ डूइंग बिजनेस को बेहतर करने के लिए कदम उठाए गए हैं तथा दूसरा यह कि इज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने के उपाय किये गए हैं- वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को देश को समृद्ध करने वाला, जन-जन को समर्थ करने वाला तथा विकास को गति देने वाला कहा है।

यह भी जानिए कि इस बजट में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने की चर्चा करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि जिनके पास पैन कार्ड नहीं है वो पैन कार्ड की जगह आधार कार्ड दे सकते हैं। साथ ही पर्यावरण को दृष्टि में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों पर पूर्व से लग रही 12 फ़ीसदी जीएसटी को घटाकर 5 फ़ीसदी करने की घोषणा वित्त मंत्री ने बजट में की है।

चलते-चलते यह भी कि वित्त मंत्री निर्मला के माता-पिता एवं उनकी पत्रकार पुत्री भी उनका पहला बजट भाषण सुनने संसद पहुंची थी। लाल रंग के मखमली कपड़े में लिपटे हुए बहीखाते को हाथों में लिए तथा मैरून रंग की साड़ी पहने पहली महिला वित्त मंत्री सीतारमण ने बजट पेश करने के दरमियान कभी चाणक्य नीति ” दृढ निश्चय से कार्य करेें तो कार्य पूरा होता है” या कभी मशहूर शायर मंजूर हाशमी का शेर “यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है….. हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है” पढ़ा। शेर पढ़ते ही मौजूद सांसदों ने मेच थपथपाई जिससे पूरा सदन गूंज उठा…. पूरे दो-ढाई घंटे के बजट भाषण में “नारी तू नारायणी” पर जमकर मेज थपथपाई गई….. मिनट-दो मिनट पर मेज थपथपाई जाती रही।

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बहुत कठिन है पूरे देश को पानी उपलब्ध कराना

गाँव से लेकर शहरों तक संपूर्ण भारत में घटता जा रहा है पानी और रिसता जा रहा है विकास। पानी का अभाव कितना गहरा है और पानी से उत्पादन पर कितना गहरा असर पड़ रहा है, वह बताने की नहीं, केवल महसूस में की जरूरत है।

बता दें कि बढ़ते जल संकट को अगर दूर नहीं किया गया तो आर्थिक विकास की रफ्तार कम होती चली जाएगी। एक ओर जहाँ जल संकट को दूर करने के लिए नरेंद्र मोदी की नई सरकार द्वारा “जलशक्ति मंत्रालय” का गठन कर 1 जुलाई से 15 जुलाई तक जनसहयोग से “जलसंरक्षण अभियान” का श्री गणेश भी कर दिया गया है वहीं दूसरी ओर नीतीश सरकार द्वारा बिहार के विभिन्न हिस्सों में गिरते भूगर्भ जल स्तर को रोकने की नई-नई कोशिशें शुरू की जा रही है…… क्योंकि औसतन 30 से 60 फुट तक पानी नीचे चला गया है…. हजारों चापाकल सूख गए हैं…. तालाब पोखर तक में पानी नहीं बचा है।

यह भी बता दें कि नीतीश सरकार के लिए खेती और किसान प्राथमिकता में है। वर्ष 2019 के अंत तक हर खेत को पानी मिलेगा। इसी साल खेती के लिए बिजली का अलग फीडर बनाने जा रही है नीतीश सरकार। इसके अलावा सोलर बिजली से 30 हजार पंपों द्वारा खेतों को पानी दिए जाने की व्यवस्था की जा रही है।

यह भी जानिए बिहार की सरकार संकल्पित है कि प्रदेश के सभी घरों को इस वर्ष के अंत तक नल का जल उपलब्ध हो जाए तथा सभी घरों को शौचालय भी हो जाए….. जबकि नीतीश सरकार संकल्पित है कि गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर तक ही बिहार खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो जाएगा। बिहार की योजना “हर घर नल का जल” अब पूरे देश में लागू करने जा रही है भारत सरकार।

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बहादुर कैप्टन अभिनंदन की मूछें राष्ट्रीय घोषित किए जाने की माँग हुई शुरू

सेना के शौर्य एवं उसकी बहादुरी को सारा देश सलाम करता रहा सिवाय कांग्रेस के कुछ नामदार नेताओं को छोड़कर। हिंदुस्तान की सेना द्वारा पाकिस्तानी सेना के विरुद्ध दिखाये गए शौर्य एवं पराक्रम के सबूत मांग-मांगकर कांग्रेस के शीर्ष पर बैठे राहुल गांधी ने अपनी बचकानी हरकतों से अपने चेहरे को जितना दागदार बना लिया उसे अब अच्छी तरह धोने में लग गए हैं…. लोकसभा में कांग्रेस के नवनियुक्त नेता श्री अधीर रंजन चौधरी।

बता दें कि बिना धैर्य खोये अधीर रंजन चौधरी ने सेना के शौर्य को सैल्यूट करते हुए कहा कि वायु सेना के जिस विंग कमांडर कैप्टन अभिनंदन वर्धमान को उनकी बहादुरी के लिए समस्त भारतवासियों ने नमन किया है उसे पुरस्कारों से लाद देना चाहिए….. अधीर रंजन ने यहां तक कह डाला कि विंग कमांडर अभिनंदन की मूछें, जो फाइटर विमान के शक्ल से मिलता जुलता है, को राष्ट्रीय मूंछ का दर्जा देकर भी पुरस्कृत किया जाना चाहिए।

आगे अधीर रंजन चौधरी ने सहजतापूर्वक यह स्वीकार किया कि भारतीय वायु सेना के इस जांबाज़ ने बालाकोट हमले के बाद पाकिस्तानी सीमा में घुसकर अपने पुराने फाइटर विमान पर सवार होकर संकल्पी मन की ताकत व बदला लेने की अतुलित बलवती भावनाओं का प्रदर्शन करते हुए दुश्मन के ताकतवर फाइटर को मार गिराया और खुद अपने चकनाचूर विमान से पैराशूट के सहारे कूदकर पाकिस्तानी सीमा में उतर गया और दुश्मनों द्वारा दी जाने वाली भीषण यातनाओं को सहते हुए देश की गोपनीयता को ईमान की तरह बचाकर रखा। श्री चौधरी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विस्तार से वायु सेना की कार्रवाई की भरपूर सराहना की और राहुल गांधी सहित कतिपय कांग्रेसियों के चेहरे पर लगे दाग को धोने की भरपूर चेष्टा भी की।

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