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हिन्दू शादी केरल की एक मस्जिद में हुई संपन्न और बनी मिसाल

एक तरफ बिहार में 19 जनवरी को बिहार के सीएम नीतीश कुमार के जल-जीवन-हरियाली मिशन को वैश्विक आंदोलन बनाने हेतु 18000 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाकर मिसाल कायम की जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसी दिन उसी समय (11:30 से 12 बजे के बीच) केरल की एक मस्जिद में हिन्दू शादी संपन्न हुई और बनी मिसाल। मस्जिद में अजान की जगह गूंज रही थी हिन्दू लड़की की शादी की शहनाई।

बता दें कि चेरुवल्ली मुस्लिम जमात मस्जिद परिसर में शरतशशि और अंजू की हिन्दू रीति-रिवाज से संपन्न हुई शादी का जिम्मा उठाया था मुस्लिम जमात समिति ने। समिति के सचिव नजीमुद्दीन ने मीडिया को यह जानकारी दी-

“22 वर्षीय दुल्हन अंजू के पिता अशोकन का एक वर्ष पूर्व निधन हो गया था… परिवार इतना सक्षम नहीं था कि वह शादी का खर्च उठा सकता। समिति ने 10 तोला सोना तथा दो लाख रुपये के उपहार देने हेतु प्रस्ताव पारित किया था और एक हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था भी की थी।”

चलते-चलते यह भी बता दें कि शरत-अंजू की शादी का कार्ड सोशल मीडिया पर सर्वाधिक वायरल हुआ। शादी के कार्ड में जमात समिति ने यह अंकित करवा दिया था कि वह परिवार के अनुरोध पर मस्जिद पर हिन्दू शादी का आयोजन कर रहा है तथा इस अवसर पर सभी समुदाय के लोगों को विवाहोत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित भी किया गया था। धार्मिक भाईचारे की अद्वितीय मिसाल।

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बिहार में बनी विश्व रिकॉर्ड से 15 गुना बड़ी मानव-श्रृंखला

बिहार ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। यह तीसरी बार है जब बिहार में मानव-श्रृंखला का आयोजन किया गया। पिछली बार की तरह इस बार भी बिहार ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। जल-जीवन-हरियाली और नशामुक्ति के समर्थन एवं बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरोध में इस बार 5 करोड़ 16 लाख 71 हजार 389 बिहारवासियों ने 18,034 किलोमीटर लंबी मानव-श्रृंखला बनाई। इस श्रृंखला की भव्यता और विशालता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बिहार की मानव-श्रृंखला 1155 किलोमीटर के विश्व रिकॉर्ड से 15 गुना बड़ी है। इस तरह बिहार ने अपना ही रिकॉर्ड और बेहतर करते हुए विश्व रिकॉर्ड को तीसरी बार तोड़ा।
बता दें कि इस ऐतिहासिक मानव-श्रृंखला का शुभारंभ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान से गुब्बारा उड़ाकर किया। मानव-श्रृंखला के लिए हुए इस मुख्य आयोजन में मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारुण रशीद सहित कई वरिष्ठ मंत्री, सांसद एवं आला अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर जलपुरुष एवं मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित श्री राजेन्द्र सिंह एवं यूएनआईपी के इंडिया कंट्री हेड अतुल बगई गांधी मैदान में विशेष तौर पर मौजूद रहे।
मानव-श्रृंखला को लेकर पूरे बिहार में उत्सव-सा माहौल रहा। हालांकि इसके लिए दिन के 11.30 से 12.00 बजे का समय निर्धारित था लेकिन उत्साह का आलम यह था कि लोग 10 बजे से ही कतार में लगने के लिए घरों से निकलने लगे। यहां तक कि बिहार के विभिन्न जेलो के 43445 कैदी भी जेलकर्मियों के साथ इस श्रृंखला में शामिल हुए। मानव-श्रृंखला की फोटोग्राफी के लिए 07 हैलीकॉप्टर और 100 से अधिक ड्रोन लगाए गए थे। इस श्रृंखला पर देश और दुनिया की नजरें टिकी थीं। इसके साथ ही दो प्रतिष्ठित रिकॉर्ड बुक – इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स – की टीमें भी इसे परखने के लिए बिहार में जमी थीं।
मानव-श्रृंखला के इस विराट आयोजन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहारवासियों को उनके अभूतपूर्व समर्थन के लिए “हृदय से धन्यवाद” देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन एवं अन्य सामाजिक सुधार के अभियानों के प्रति जागरुकता फैलाने में यह मानव-श्रृंखला मील का पत्थर साबित होगी। बिहार प्रदेश जदयू के अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिक मानव-श्रृंखला बनाकर बिहार ने पूरे विश्व को संदेश दिया है। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) आरसीपी सिंह ने कहा कि इस अभूतपूर्व मानव-श्रृंखला का आयोजन कर बिहारवासियों ने राज्य को नया गौरव दिया है।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri along with senior citizens of Madhepura taking part in Jal-Jeevan-Hariyali Manav-Shrinkhala at Bhupendra Chowk, Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri along with senior citizens of Madhepura taking part in Jal-Jeevan-Hariyali Manav-Shrinkhala at Bhupendra Chowk, Madhepura.

वहीं मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने मुख्यमंत्री को उनके जल-जीवन-हरियाली यात्रा के दौरान शुभकामना व्यक्त करते हुए यही कहा था कि आपका यह कार्यक्रम  एक दिन “वैश्विक क्रांति” का मार्ग प्रशस्त करेगा….. जैसा कि बिहार वासियों की  बढ़ती हुई सहभागिता से स्पष्ट नजर आने लगा है।‘मधेपुरा अबतक’ भी इस मौके पर बिहारवासियों को हार्दिक बधाई और साधुवाद देता है।

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पुलवामा के सीआरपीएफ कैंप में शहीदों के आंगन की मिट्टी सदा महका करेगी

बेंगलुरु का एक शख्स है उमेश गोपीनाथ जाधव। उमेश जाधव एक संगीत शिक्षक है। बच्चों को संगीत सिखाने वाले गोपीनाथ जाधव अब पुलवामा के सीआरपीएफ कैंप में शहीदों के आंगन से मिट्टी ला-लाकर भारत का मानचित्र बनाएंगे। सभी शहीदों के परिवार वालों से मिलेंगे भी।

बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सभी जवानों के घर-आंगन की मिट्टी वहीं अपनी खुशबू बिखेरेगी जहां विगत 14 फरवरी 2019 को उनकी शहादत हुई थी। शहीदों के आंगन की मिट्टी इकट्ठा करने में लगे गोपीनाथ जाधव का 9 अप्रैल 2019 से ही सफर शुरू हो चुका है। वे 29 राज्यों सहित सात केंद्र शासित प्रदेशों में भी जाएंगे और देश की मिट्टी की अहमियत दुनिया के लोगों तक पहुंचाएंगे।

यह भी बता दें कि गोपीनाथ जाधव बेंगलुरु से केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र होते हुए भोपाल से आगे निकलते रहे और चंद रोज कबल गोपीनाथ ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के गाँव हरपुर, टोला- बेलडीहा शहीद लाल पंकज त्रिपाठी के आंगन की मिट्टी एकत्र की। अब तक 23 राज्यों की 27 शहीदों के आंगन की मिट्टी एकत्र कर चुके हैं गोपीनाथ। शेष 13 शहीदों के आंगन की मिट्टी लाकर वह संगीत शिक्षक उमेश गोपीनाथ जाधव भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक “मानचित्र” बनाकर पुलवामा के सीआरपीएफ कैंप को शहीदों की शहादत भरे सुगंध से भर देगा।

Pulwama Martyrs.
Pulwama Martyrs.

चलते-चलते बता दें कि पुलवामा हमले के बाद वहां सीआरपीएफ कैंप में जाकर उमेश ने कसम खाई थी कि इन चालीसो शहीदों के आंगन की मिट्टी लाने और उनके परिजनों से मिलने उनके घर पर जाएंगे….. पुलवामा में उनकी याद में स्मारक बनाएंगे। यह भी कि लगभग 50 हजार  किलोमीटर की यात्रा पूरी करने हेतु गोपीनाथ जाधव ने अलग-अलग गाड़ियों के पुर्जों को मिलाकर अपनी एक गाड़ी तैयार की और उस गाड़ी पर तिरंगा, सेना की वर्दी तथा देशभक्ति के मैसेज अंकित कराए।

पुनश्च उन्हीं दिनों अति संवेदनशील समाजसेवी- साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर यह निवेदन किया था कि उन चालीसों पुलवामा शहीदों के परिजनों के बैंक अकाउंट को पब्लिक किया जाए ताकि देश के संवेदनशील करोड़ों लोग एक-एक रुपए देंगे तो उन्हें बच्चों की पढ़ाई आदि के लिए हाथ नहीं फैलाना पड़े- के जवाब में गृह मंत्री ने यही लिखा- “आपकी भावना का कद्र करते हुए बैठक में इस पर गहन चिंतन-मंथन किया गया। बैंक अकाउंट को पब्लिक करने के खतरे को ध्यान में रखते हुए समिति आपको आश्वस्त करती है कि शहीदों के परिजनों को सरकार इतनी राशि दी है कि उन्हें अब हाथ फैलाने की नौबत नहीं आएगी।”

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2020 की उम्मीदें : खुद से चलेंगी कारें

जानिए कि 5 साल पूर्व टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन ने कहा था कि टोटल एक्सेस ब्रांड एक ऐसी कार पेश करेगी जो बिना ड्राइवर के खुद ही चलेगी… जो अब सच होने जा रहा है। सच में, वर्ष 2020 में कई प्रकार की तकनीकी बदलाव धरती पर लोगों के जीवन को आसान बना देगा। सड़कों पर जो खुद से चलने वाली कार नजर आएंगी वहीं आम लोगों को 5G तकनीक से इंटरनेट की तेज गति मिलेगी।

बता दें कि जहाँ खुद से चलने वाली कार की कीमत कितनी होगी उसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है वहीं टेस्ला भी वर्ष 2020 में दुनिया के कई चुनिंदा शहरों में स्वचालित रोबोट टैक्सी लॉन्च करेगी। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क का कहना है कि 1 वर्ष बाद सड़कों पर 10 लाख से ज्यादा रोबोट टैक्सियों दिखाई देंगी। जून 2020 तक टेस्ला का ऑटोनॉमस सिस्टम इतना विकसित हो जाएगा कि ड्राइवरों को सड़क पर माथापच्ची करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

चलते -चलते यह भी बता दें कि इस वर्ष दुनिया के कई देशों में 5G नेटवर्क का दायरा बहुत बढ़ेगा। इसमें 3 घंटे की एचडी फिल्म कुछ सेकंड में डाउनलोड हो सकेगी। एक ओर जहाँ भारतीय मोबाइल ऑपरेटर 5G को अपनाने की तैयारी में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर प्रमुख मोबाइल कंपनियां 5G हैंडसेट लॉन्च करने में जुटी है।

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शादी, बच्चे या फिर रिटायरमेंट के बाद भी महिलाओं में यदि जुनून हो तो अवसर मौजूद होते हैं

जरा सोचो भारत की बेटियों ! महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनके प्रति पूर्वाग्रस्त होकर उन्हें कमतर आंकना है। अगर आपमें जुनून हो तो कोई भी आपको अपने सपने पूरे करने से नहीं रोक सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण है- आईसीसी मैच के रेफरी-पैनल में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर जीएस लक्ष्मी।

बता दें कि आंध्र प्रदेश में जन्मी जीएस लक्ष्मी (गांडिकोटा सर्व लक्ष्मी) लाइमलाइट में तब आई जब वह आईसीसी की पुरुष वनडे मैच की पहली महिला रैफरी बनी। यूँ तो आंध्र महिला, बिहार महिला….. रेल महिला समेत कई टूर्नामेंट खेली है। वह तेज गेंदबाज और बल्लेबाज के रूप में खेलती रही है। वर्ष 1999 में भारतीय टीम के इंग्लैंड दौरे के लिए चयनित भी हुई थी लक्ष्मी, परंतु देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का लक्ष्मी का ख्वाब पूरा नहीं हो सका था।

यह भी जानिए कि 2004 में अपनी 12 वर्ष की बेटी प्रणाती श्रावणी की परवरिश करते हुए और अपनी फिटनेस के साथ खेलते हुए क्रिकेट से रिटायर होने के बाद लक्ष्मी ने क्रिकेट में कोचिंग देना शुरू कर दिया। इस दौरान 4 साल बाद यानी 2008 में बीसीसीआई ने घरेलू महिला क्रिकेट में महिला रेफरी को मैच में उतारना शुरू किया तो लक्ष्मी बतौर रेफरी शामिल होने लगी। 12 वर्षों से रैफरी की भूमिका निभा रही 51 वर्षीय लक्ष्मी के लिए आगे की राह तब खुली जब बीसीसीआई ने महिलाओं को क्रिकेट अधिकारी के रूप में जोड़ने के लिए संपूर्ण भारत से मात्र 5 महिलाओं को चुना जिसमें जीएस लक्ष्मी पहली भारतीय महिला थी। कुछ समय पूर्व आईसीसी मैच रेफरी के अंतरराष्ट्रीय पैनल में शामिल होने पर लक्ष्मी चर्चा में आई। वही लक्ष्मी शारजाह के अबूधाबी के जायद स्टेडियम में हांगकांग और आयरलैंड के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में रेफरी की भूमिका निभाई। जिसे देश के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेल पाने का अफसोस अब तक सलाता रहा था। लक्ष्मी कहती है कि क्रिकेट की बदौलत ही उन्हें कॉलेज में एडमिशन मिल पाया था। वह भारत की बेटियों को यही संदेश देना चाहती है- “दुनिया में कोशिश का कोई विकल्प नहीं। दो बच्चे की मां मैरी कॉम आज एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत लेती है और ओलंपिक में जीतने का हौसला रखती है। जुनून हो तो महिलाएं कुछ भी कर सकती है चांद पर घर बसा सकती है। पर्वतारोही संतोष यादव की तरह एवरेस्ट पर तिरंगा लहरा सकती है।”

 

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यूपीएससी में हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं की शानदार वापसी

देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली यूपीएससी की परीक्षा में पिछले साल हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं ने शानदार वापसी की है। पिछले तीस साल में पहली बार आधे से अधिक परीक्षार्थी इन भाषाओं से हैं। जी हाँ, यह बात संघ लोक सेवा आयोग की ओर से जारी सालाना आंकड़ों से सामने आई है। इसे इस परीक्षा में हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं की वापसी का ट्रेंड माना जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में छात्रों के बीच न केवल हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं को माध्यम के रूप में रखने का चलन बढ़ा है बल्कि इन भाषाओं को छात्र वैकल्पिक विषय के रूप में भी रख रहे हैं और अच्छी सफलता हासिल कर रहे हैं। पिछले साल सिविल सेवा परीक्षा में सफल हुए 812 प्रतियोगियों में 485 ने हिन्दी या क्षेत्रीय भाषा के माध्यम से सफलता पाई। यह कुल प्रतियोगियों का लगभग 60 प्रतिशत है। 2017 में 1056 में 533 प्रतियोगियों ने हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं में सफलता पाई थी।
बता दें कि चार साल पहले यूपीएसीसी की तरफ से संचालित सिविल सर्विस परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा में सी-सैट पेपर को लेकर छात्रों का उग्र आंदोलन हुआ था। इसमें आरोप लगा था कि हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं के छात्रों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। परिणाम में इस आरोप के संकेत मिलते थे। क्षेत्रीय और हिंदीभाषी छात्र इस पेपर को हटाने की मांग पर दो साल तक आंदोलन करते रहे। संसद तक में यह मामला जोरदार तरीके से उठा था। सरकार लंबे समय तक इस मुद्दे पर उलझन की स्थिति में रही। आखिरकार छात्रों की मांगों के सामने सरकार को झुकना पड़ा। उसके बाद से ही हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं से परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई और परिणाम का नया ट्रेंड शुरू हुआ।

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जनरल बिपिन रावत ने संभाला देश के पहले सीडीएस का पद

नए साल के पहले दिन जनरल बिपिन रावत के रूप में देश को पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) मिला। 31 दिसंबर को सेना प्रमुख के पद से रिटायर हुए जनरल रावत ने 1 जनवरी को सीडीएस के रूप में पदभार संभाला। उन्हें तीनों सेनाओं की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इससे पहले उन्होंने दिल्ली के वॉर मेमोरियल जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। बता दें कि करीब दो दशक से इस पद को लेकर मंथन चल रहा था, अब जाकर सरकार ने इसका गठन किया।
पदभार संभालने के बाद जनरल रावत ने कहा कि सीडीएस का काम तीनों सेनाओं को एक साथ करना होगा। हम इसी ओर आगे बढ़ेंगे। अब आगे की कार्रवाई टीम वर्क के जरिए होगी, सीडीएस सिर्फ सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि 1+1+1 के जोड़ को वे 3 नहीं, 5 या 7 बनाने की कोशिश करेंगे। जो भी संसाधन हैं, उस पर काम करते हुए आगे बढ़ेंगे।
गौरतलब है कि 31 दिसंबर को ही केन्द्र सरकार की ओर से सैन्य विभाग का ऐलान किया गया था, जिसकी अगुआई सीडीएस करेंगे। इस विभाग के अंतर्गत तीनों सेना का काम होगा। सीडीएस का मुख्य कार्य तीनों सेनाओं के बीच तालमेल स्थापित करना होगा। सरकार की ओर से 24 दिसंबर को सीडीएस के पद, उसके विशेषाधिकार और कर्तव्यों का ऐलान किया गया था। सीडीएस चार सितारा से सुसज्जित होंगे और उनका कार्यकाल तीन साल का होगा।
चलते-चलते बता दें कि जनरल बिपिन रावत 16 दिसंबर 1978 को 11 गोरखा रायफल्स की पांचवीं बटालियन में नियुक्त हुए थे। 1 जनवरी 2017 को उन्होंने थल सेना प्रमुख का कार्यभार संभाला था। सीडीएस के रूप में उनका कार्यकाल 31 मार्च 2023 तक होगा।

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बॉलीवुड के सर्वश्रेष्ठ फाल्के पुरस्कार पाने वाले महानायक अमिताभ हो गये बीमार

66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के वितरण हेतु आयोजित समारोह में देश के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के हाथों फिल्मी दुनिया के महानायक अमिताभ बच्चन को फिल्म उद्योग में उनके उत्कृष्ट अभिनय एवं एक से बढ़कर एक हिन्दी सिनेमा में दिए गए योगदानों के लिए सिनेमा क्षेत्र के सर्वोच्च 50वें सम्मान के रूप में “दादा साहब फाल्के पुरस्कार” दिया जाना था परंतु बीमार हो जाने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें जाने से मना कर दिया। महानायक अचानक तेज ज्वर से पीड़ित हो गए थे।

बता दें कि इस समारोह में देश की एकता एवं अखंडता को बनाए रखने वाले भारतीय सिनेमा के विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाली कई फिल्मी हस्तियों को उपराष्ट्रपति ने नेशनल अवार्ड देकर सम्मानित किया। विजेताओं को देश के युवाओं से जोड़ देते हैं यह नेशनल अवार्ड।

जानिए कि नेशनल अवार्ड पाने वाली हस्तियों में फिल्म ‘बधाई हो’ के लीड एक्टर रहे आयुष्मान खुराना एक ऐसे कलाकार हैं जिन्हें विगत 7 सालों में उनकी चार फिल्मों को नेशनल अवार्ड मिल चुका है। इस बार उन्हें यह अवार्ड फिल्म ‘अंधाधुन’ के लिए दिया गया है। बता दें कि हर पिता की तरह आयुष्मान के पिता भी बेटे को नेशनल अवार्ड मिलने की खबर सुनकर काफी इमोशनल हो गए थे। भला क्यों नहीं, नाम के साथ-साथ अवॉर्ड्स मिलना भी तो जरूरी है। नेशनल अवार्ड तो बड़ा होता ही है। रहा सवाल ऑस्कर पाने का तो वहां तक पहुंचने की भी कोशिश अमिताभ की तरह आयुष्मान करता ही रहेगा। जोश और जुनून से भरा इंसान रुकता कहीं नहीं है वह डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की तरह हमेशा आगे बढ़ता ही रहता है।

चलते-चलते बता दें कि पुरस्कार वितरण के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेडकर एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे गुजराती फिल्म ‘हेलारो’ हिन्दी फिल्म ‘पैडमैन’ ‘उरी सर्जिकल स्ट्राइक’ आदि को राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ। फाल्के पुरस्कार में 10 लाख नगद, एक स्वर्ण पदक एवम अंगवस्त्रम दिया जाएगा 29 दिसंबर को…।

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जहाँ चाह…. वहाँ राह को साबित कर दिखाया भारतीय मूल की ब्रिटिश डॉक्टर भाषा मुखर्जी

कोलकाता में पिता दुर्गादास मुखर्जी एवं माता मधुमिता मुखर्जी के घर 1996 ई. में एक बच्ची ने जन्म ग्रहण किया जिसका नाम माता-पिता ने रखा भाषा मुखर्जी। यह मुखर्जी परिवार बेटी भाषा मुखर्जी और बेटा आर्य मुखर्जी के साथ 2004 में कोलकाता से इंग्लैंड के स्विंडन चले गए। वहां जाकर भारतीय मूल की भाषा मुखर्जी पेशे से डॉक्टर बन गई और बन गई पांच भाषाओं की ज्ञाता भी।

बता दें कि फिलहाल लंदन के डरबी में रह रही 23 वर्षीय डॉ.भाषा मुखर्जी 2019 में मिस इंग्लैंड प्रतियोगिता जीतकर मिस वर्ल्ड 2019 में ही टॉप 40 में स्थान बना डाली। कई प्रकार की चिकित्सीय डिग्री प्राप्त डॉ.भाषा मुखर्जी का IQ लेवल 146 है।

लगभग 8 वर्षीय भाषा जब कोलकाता की स्कूल में पढ़ती थी तो कुछ बच्चे उन्हें ‘अगली बेबी’ यानी बदसूरत बच्ची कह कर पुकारा करते, तब भाषा अपनी ग्रूमिंग, मेकअप और डाइट पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगी थी।

मिस इंग्लैंड प्रतियोगिता जीतने के बाद डॉ.भाषा मुखर्जी लड़कियों को खासकर यह संदेश देती है-

प्रायः लोग यह सोचते हैं कि सौंदर्य प्रतियोगिताएं जीतने वाली लड़कियाँ बुद्धू होती हैं लेकिन हम सबको ईश्वर ने किसी-ना-किसी अच्छे मकसद से यहाँ भेजा है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि खुद को फिल्मी कीड़ा मानने वाली तथा अपनी पढ़ाई व ब्यूटी कॉन्टेस्ट के बीच संतुलन बनाकर रखने वाली भाषा मुखर्जी ने मिस वर्ल्ड के किताब में स्थान पाने के बाद ही लिंकनशायर, बोस्टन के पिलग्रिम हॉस्पिटल में जूनियर डॉक्टर के रूप में ज्वाइन कर लिया। भाषा ने युवाओं को बुजुर्गों की सेवा में कुछ समय देने के निमित्त “जेनरेशन ब्रिज प्रोजेक्ट 2017” का श्रीगणेश भी किया है। भाषा ने जहाँ चाह-वहाँ राह को साबित कर दिखाया है।

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गोवा से गुजरात तक के 15 भारतीय बने ब्रिटेन के संसद सदस्य

ब्रिटेन के संसदीय चुनाव में भारतीय मूल के 15 भारतवंशियों में से आधे-आधे वहाँ की दोनों पार्टियों (कंजरवेटिव और लेबर) से जीत दर्ज कर हाउस ऑफ कॉमंस पहुंचे। इनमें से कुछ के माता-पिता संसार के अन्य देशों से होते हुए ब्रिटेन पहुंचे और कुछ सीधे भारत से आकर ब्रिटेन में रहने लगे और वहीं के ही नागरिक बन गए।

बता दें कि इन 15 भारतीय मूल के ब्रिटिश पार्लियामेंट के लिए जीते हुए सदस्यों में अधिकांश बैंकर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और वकील हैं। चर्चानुसार यह माना जा रहा है कि नई ब्रिटिश सरकार में तीन भारतवंशी सांसद मंत्री भी बन सकते हैं।

यह भी बता दें कि इन तीनों में एक प्रमुख नाम है प्रीति पटेल, जो विगत सरकार में ब्रिटेन की गृह मंत्री रह चुकी हैं। थेरेसा सरकार में गृह मंत्री रही प्रीति पटेल युगांडा-भारतीय परिवार में जन्मी जबकि प्रति पटेल की दादी-दादा गुजरात के तारापुर में रहते थे…… पिता युगांडा पहुंचे और फिर वहां से ब्रिटेन आ गए। शेष दो मंत्री बनने वाले हैं- अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री रह चुके आलोक शर्मा एवं रेवेन्यू डिपार्टमेंट के चीफ सेक्रेटरी रहे पंजाब मूल के ऋषि सुनाक।

चलते-चलते यह भी जान लें कि इन 15 भारतीयों में चार पहली बार हाउस ऑफ कॉमंस पहुंचे हैं। और शेष हैं- क्लेयर कुटिन्हो (गोवा), सुएला ब्रेवरमैन (गोवा), वैलेरी वाज (गोवा), शैलेश वारा (गुजरात), आलोक शर्मा (आगरा) और नवेंदु मिश्रा (कानपुर) सहित…… भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों पर जन्मे इन ब्रिटिश सांसदों के नाम हैं- गगन मोहिंद्रा, मुनीरा विल्सन, वीरेंद्र शर्मा, तमनजीत सिंह, सीमा मल्होत्रा, प्रीति कौर गिल एवं लीजा नंदी।

 

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