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आखिरी ओवर की अंतिम गेंद पर अविस्मरणीय जीत

एशिया कप का फाइनल मुकाबला वैसा ही रहा जैसे मुकाबलों के कारण क्रिकेट के प्रति लोगों की दीवानगी दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। भारत और बांग्लादेश के बीच खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में भारत ने अंतिम गेंद पर बाजी मारी, लेकिन अपेक्षाकृत कमजोर समझी जाने वाली बांग्लादेश की टीम ने भी अपने जुझारू खेल से खेलप्रेमियों का दिल जीतने में कोई कसर ना छोड़ी।

भारत को सातवीं बार एशिया कप जीतने के लिए 223 रनों की दरकार थी। आखिरी दो ओवर में तो उसे केवल 9 रन चाहिए थे, लेकिन 49वें ओवर में केवल 3 रन ही बने। इस तरह आखिरी ओवर में 6 रनों की जरूरत थी। महमूदुल्लाह के इस ओवर की पहली गेंद पर कुलदीप यादव ने एक और दूसरी पर केदार जाधव ने एक रन लिया। तीसरी गेंद पर कुलदीप ने दो रन लिए, लेकिन अगली गेंद पर रन नहीं बन सका। इसके बाद 5वीं और छठी गेंद पर एक एक रन लेकर कुलदीप और केदार ने भारत को जबरदस्त जुझारूपन का प्रदर्शन करने वाली बांग्लादेशी टीम पर जीत दिलाई।

दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारत के लिए कप्तान रोहित शर्मा ने 55 गेंद में 3 चौकों और 3 छक्कों के साथ 48 रन बनाए। दिनेश कार्तिक ने 37 और महेंद्र सिंह धोनी ने 36 रन का योगदान दिया। चोट लगने के कारण कुछ देर मैदान छोड़कर जाने वाले केदार ने नाबाद 23 रन बनाए।

इससे पहले खिलाड़ियों की चोट से जूझ रही बांग्लादेशी टीम ने अच्छा आगाज किया। लिटन दास ने 117 गेंद में 121 रन बनाकर बांग्लादेश को अच्छी शुरुआत दी, लेकिन बाद के बल्लेबाज लय कायम नहीं रख सके। दास और मेहदी हसन मिराज (32) ने पहले विकेट के लिए 120 रन जोड़े। ऐसा लगने लगा था कि बांग्लादेश बड़ा स्कोर बनाएगा, लेकिन इसके बाद 10 विकेट 102 रन के भीतर गिर गए और पूरी पारी 48.3 ओवर में सिमट गई। चाइनामैन कुलदीप ने 45 रन देकर 3 विकेट लिए, जबकि केदार ने 9 ओवर में 41 रन देकर दो विकेट चटकाए।

चलते-चलते बता दें कि इस पूरे टूर्नामेंट में भारत अजेय रहा और सोने पर सुहागा ये कि चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को उसने इस टूर्नामेंट में दो बार हराया।

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भारत में कम हुई गरीबी, स्थिति फिर भी भयावह

गरीबी कम करने की दिशा में भारत ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। संयुक्त राष्ट्र के द्वारा गरीबी को लेकर दी गई जानकारी के अनुसार साल 2005-06 से लेकर 2015-16 के बीच गरीबी दर घटकर आधी रह गई है। गरीबी दर पहले 55 फीसदी थी जो इन दस वर्षों में 28 फीसदी पर आ गई। संख्या के हिसाब से देखें तो साल 2005-06 में देश में गरीबों की तादाद 63.5 करोड़ थी, जो 2015-16 तक घटकर 36.4 करोड़ रह गई। इस आंकड़े का एक दिलचस्प पहलू यह है कि इस अवधि में कुल 27.1 करोड़ लोग गरीबी के दलदल से बाहर निकले हैं और यह आंकड़ा इंडोनेशिया की कुल आबादी से भी ज्यादा है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक इस एक दशक में भारत में तेजी से कम हो रही गरीबी का अहम ट्रेंड यह रहा कि समाज के सबसे गरीब तबके की स्थिति में खासा सुधार हुआ है। खासकर मुस्लिम, दलित और एसटी कैटिगरी के लोगों ने इस दौरान सबसे ज्यादा विकास किया। गरीबी को दूर करने की दिशा में किए जा रहे अपने प्रयत्नों के कारण ताजा मानव विकास सूचकांक में भारत 189 देशों में एक स्थान ऊपर चढ़कर 130वें स्थान पर पहुंच गया है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि ऊपर के सारे आंकड़े हमें आश्वस्त करते हैं, लेकिन हम इस सच से हरगिज मुंह नहीं चुरा सकते कि अब भी हमारे देश में 36 करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी रूप में गरीबी झेल रहे हैं। हमें पता होना चाहिए कि भारत में अब भी दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब रहते हैं और यह संख्या अमेरिका की आबादी से ज्यादा है।

आपको बता दें कि भारत में रहने वाले कुल गरीबों के आधे से भी ज्यादा यानि 19.6 करोड़ लोग केवल चार राज्यों – बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश – में रहते हैं, जबकि दिल्ली, केरल और गोवा में इनकी संख्या सबसे कम है। इन आंकड़ों की एक भयानक तस्वीर यह भी है कि 41 फीसदी भारतीय बच्चे या 10 साल से कम उम्र के हर 5 में से 2 बच्चे हर तरह से गरीब हैं। वहीं, वयस्कों यानि 18-60 साल उम्र वर्ग के लोगों में लगभग एक चौथाई (24 फीसदी) गरीब हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार की बेटी श्रेयसी को मिलेगा अर्जुन पुरस्कार

बिहार के लिए गौरव का पल। ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप की डबल ट्रैप शूटिंग स्पर्धा मे गोल्ड मेडल जीत कर बिहार का नाम रोशन करने वाली अंतर्राष्ट्रीय शूटर श्रेयसी सिंह को केन्द्र सरकार ने अर्जुन पुरस्कार देने की घोषणा की है। श्रेयसी को यह पुरस्कार 25 सितंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रदान करेंगे।

गौरतलब है कि श्रेयसी सिंह बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर की रहनेवाली हैं। वो पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बांका के पूर्व सांसद स्वर्गीय दिग्विजय सिंह तथा बांका की निवर्तमान सांसद पुतुल कुमारी की बेटी हैं। दिल्ली के हंसराज कॉलेज से स्नातक और तुगलकाबाद से शूटिंग का अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण लेने वाली श्रेयसी सिंह का अगला लक्ष्य ओलंपिक है। वो अब ओलंपिक की शूटिंग स्पर्द्धा में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना चाहती हैं।

अर्जुन पुरस्कार के लिए श्रेयसी के चुने जाने पर पूरे बिहार में खुशी और गर्व का माहौल है। इस बेहद खास मौके पर श्रेयसी की मां व पूर्व सांसद पुतुल कुमारी ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आज उसके पिता (स्व. दिग्विजय सिंह) हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वे जहां कहीं भी हैं, उन्हें इस बात की खुशी होगी कि उनका सपना आज पूरा हुआ।

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खिलाड़ियों के लिए हर राज्य में शुरू होंगी कई योजनाएं

जो हिमाचल प्रदेश पहले केवल एक लाख रूपये देता था खिलाड़ियों को वहीं अब ओलंपिक मेडल पाने वाले को मिलेंगे दो करोड़ की राशि यानी हिमाचल प्रदेश ने एशियाड के गोल्ड मेडलिस्ट की प्राइज मनी 200 गुना बढ़ाई है |

मध्य प्रदेश सरकार अब प्रत्येक साल 10 खिलाड़ियों को योग्यता के अनुसार नौकरी देगी | इस योजना को लागू करने हेतु बजट को बढ़ाकर 212 करोड़ किया गया है |

बता दें कि विभिन्न राज्यों में दी जाने वाली प्राइज मनी में ढेर सारी भिन्नताएं हैं | खिलाड़ियों से लेकर कोच तक सभी इस बारे में अपनी-अपनी बातें रखी हैं |

यह भी जानिए कि अब हिमाचल प्रदेश सहित पाँच राज्यों – हिमाचल, छत्तीसगढ़, पंजाब, झारखंड, दिल्ली में नई स्पोर्ट्स पॉलिसी की बातें कही गई हैं | यूँ कई राज्यों में खेल बजट कम होने के कारण बड़े बदलाव शीघ्र संभव नहीं है |

जानिए कि जहाँ हरियाणा की बजट 394 करोड़ है वहीं हिमाचल का बजट मात्र 24 करोड़ | तभी तो हरियाणा के खिलाड़ियों ने एशियाड में सबसे ज्यादा मेडल जीते हैं |

ज्यादा से ज्यादा मेडल जीतने के लिए खिलाड़ियों को खेलने की सुविधाएं, अच्छे अनुभवी कोच एवं प्राइज मनी में वृद्धि के साथ-साथ समाज एवं सरकार की सोच में समरूपता होनी चाहिए | देश का सम्मान और स्वाभिमान सर्वोपरि होना चाहिए |

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हिन्दी दिवस को आप कितना जानते हैं ?

आज दुनिया भर में भारत की पहचान जितनी अपनी सांस्कृतिक विविधताओं और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए है, उतना ही इसे हिन्दी के लिए भी पहचाना जाता है। किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष भारत आएं और उन्हें भारत से निकटता प्रदर्शित करने के लिए कोई एक शब्द या वाक्य बोलना हो तो वो हिन्दी का होता है और दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनी के लिए भारत के बाजार में अपनी पैठ बनाने के लिए हिन्दी का सहारा लेना अनिवार्य-सा है। कारण स्पष्ट है कि हमारे देश में 77% लोग हिन्दी लिखते, पढ़ते, बोलते और समझते हैं।
भारत की अनेकता में एकता का स्वर हिन्दी के माध्यम से जैसे आज गूंजता है वैसे ही 1947 से पहले भी गूंजा करता था। यही कारण है कि 1946 में स्वतंत्र भारत के संविधान के लिए बनी समिति के सामने जब राष्ट्र की भाषा का सवाल खड़ा हुआ तब संविधान निर्माताओं के लिए हिन्दी ही सबसे बेहतर विकल्प थी। यह अलग बात है कि हिन्दी को सम्पूर्ण राष्ट्र की भाषा बनाए जाने को लेकर कुछ लोग विरोध में भी थे। इसलिए हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा दे दिया गया। खैर, जिस दिन देश को राजभाषा का दर्जा दिया गया था वो 14 सितंबर 1949 का था और इस दिन को हम आज हिन्दी दिवस के रूप में मनाते हैं।
गौरतलब है कि पहली बार राजभाषा घोषित किए जाने के 4 साल बाद यानि 14 सितंबर 1953 को हिन्दी दिवस मनाया गया था। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यह फैसला किया था। इस दिन विभिन्न सरकारी संस्थानों में हिन्दी को लेकर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लेकिन यहां यह जानना दिलचस्प होगा कि भारत में जहां 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है वहीं दुनिया भर में हिन्दी दिवस मनाने की तारीख अलग है और वो तारीख है 10 जनवरी।
दरअसल, दुनिया भर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए विश्व हिन्दी सम्मेलन का हर साल आयोजन किया जाता है। पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित किया गया था जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस दिन के महत्व को ध्यान में रखते हुए 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दुनिया भर में 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाने की घोषणा की थी। इस दिन विदेशों में भारतीय दूतावास विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

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विपक्षी दलों का शक्ति-परीक्षण है भारत बंद

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और कमजोर होते रुपये के खिलाफ कांग्रेस ने सोमवार को भारत बंद का आह्वान किया है। कैलास मानसरोवर की यात्रा पर गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अनुपस्थिति में खुद सोनिया गांधी मोर्चा संभालेंगी। दिल्ली में सोनिया गांधी की अगुआई में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर सुबह 8 बजे से धरने पर बैठेंगे। पार्टी ने कार्यकर्ताओं से बंद के दौरान शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा न करने की अपील की है। कांग्रेस का दावा है कि 21 विपक्षी दलों और कई व्यापार संगठनों ने बंद को समर्थन दिया है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने नरेंद्र मोदी सरकार पर पिछले 52 महीनों में देश की जनता से 11 लाख करोड़ रुपये ‘लूट’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार नहीं बल्कि ‘मुनाफाखोर कंपनी’ चला रहे हैं। कांग्रेस की मांग है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए जिससे इसकी कीमतें 15 से 18 रुपये प्रति लीटर गिर सकती हैं।

सोमवार के बंद को समाजवादी पार्टी, डीएमके, एनसीपी, आरएलडी, जेडीएस, आरजेडी समेत लगभग सभी विपक्षी दलों ने समर्थन का ऐलान किया है। वाम दलों एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने भी कांग्रेस के बंद को समर्थन का ऐलान किया है। वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी की टीएमसी ने बंद से खुद को दूर रखा है। टीएमसी नेता पार्थ चटर्जी ने कहा कि जिस मुद्दे पर बंद बुलाया गया है, उसे हमारा समर्थन है लेकिन पार्टी किसी भी तरह के बंद या हड़ताल के खिलाफ है। वहीं एनडीए की सहयोगी शिवसेना ने जहां बंद को समर्थन की कांग्रेस की अपील ठुकरा दी है, वहीं बीजू जनता दल ने तटस्थ रुख अपनाया है। बीजेडी प्रवक्ता समीर रंजन दास ने कहा, ‘हम भारत बंद का न तो समर्थन कर रहे हैं और न ही विरोध।’

बहरहाल, कहना गलत ना होगा कि कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस भारत बंद को सफल बनाने के लिए एड़ी-चोटी का पसीना एक कर देंगे। उन्हें पता है कि ये बंद एक तरह से उनकी ताकत और एकता दोनों का शक्ति-परीक्षण है।

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‘अजेय भाजपा’ के नारे के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

भारतीय जनता पार्टी ने 2019 की चुनावी तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है। इसके लिए भाजपा संगठन चुनावों को टालते हुए आम चुनाव में मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में ही लड़ने का फैसला ले सकती है। बता दें कि अमित शाह का तीन साल का कार्यकाल अगले साल जनवरी में ही समाप्त हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक संगठन चुनाव को लोकसभा चुनाव के बाद कराए जाने के प्रस्ताव पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में मुहर लग सकती है। माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव मार्च या अप्रैल में हो सकते हैं। ऐसे में भाजपा नई टीम के साथ चुनाव में नहीं उतरना चाहती। इसलिए उसने मौजूदा टीम को ही बनाए रखने का फैसला लिया है।

बहरहाल, शनिवार सुबह भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की शुरुआत हुई। इस बैठक में पार्टी ने ‘अजेय भाजपा’ का नारा दिया है। बैठक का उद्घाटन करते हुए अमित शाह ने कहा कि हम 2019 में स्पष्ट बहुमत के साथ जीत हासिल करेंगे। अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद हो रही इस पहली महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत भाजपा के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी तथा सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष शामिल हैं।

बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 की जीत का फॉर्म्युला पेश किया। अपने भाषण में उन्होंने साफ कर दिया कि इस बार पार्टी नरेंद्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व और मजबूत संगठन के अलावा गांव, गरीब, किसान, दलित, ओबीसी, आदिवासी और विपक्षी विभाजन की बदौलत जीत हासिल करेगी। शाह ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे इस बार दिवाली से पहले ही गांवों में जाकर मोदी सरकार की उपलब्धियों को पेश करते हुए दिवाली मनाकर संदेश दें कि किस तरह से मोदी सरकार की उपलब्धियों से देश जगमगा रहा है। उन्होंने विपक्षी महागठबंधन को ज्यादा तरजीह न देते हुए कहा कि यह झूठ पर आधारित महागठबंधन है और इसका कोई असर नहीं होने वाला है।

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भारत का यह प्रथम विमान जैव ईंधन ले भरी उड़ान…….!!

भारत की एक निजी विमानन कंपनी ‘स्पाइसजेट’ ने देश की पहली “जैव जेट ईंधन’ से चलने वाली फ्लाइट का सफल परिचालन किया | इस सफल परीक्षण उड़ान के साथ ही भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जहाँ विमानों को उड़ाने में जैव ईंधन का प्रयोग होने लगा है | अब भारत उन चुनिंदा देशों के ‘क्लब’ में शामिल हो गया जिसके पास यह क्षमता है |

बता दें कि इस कंपनी द्वारा निर्मित बंबार्डियर क्यू-400 विमान ने जैव ईंधन का इस्तेमाल करते हुए 43 मिनट में देहरादून से दिल्ली तक की उडान भरी | एयरलाइंस ने बताया कि इस उड़ान में भारत ने पहली बार जैव जेट ईंधन का आंशिक रूप से उपयोग किया- जिसमें 75% एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) तथा 25% ही जैव जेट ईंधन (JJF) का मिश्रण था |

यह भी जानिए कि इस क्यू-400 विमान में कुल 78 सीटें होने के बावजूद इस परीक्षण उड़ान में केवल 20 लोग ही सवार हुए थे जिसमें नागर विमानन महानिदेशालय एवं स्पाइसजेट के चेयरमैन एवं एम डी अजय सिंह के साथ IIP के कुछ वैज्ञानिक भी थे |

चलते-चलते यह भी बता दें कि उत्तराखंड राज्य के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जहाँ इस परीक्षण विमान को जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर फ्लैग ऑफ किया वहीं से दिल्ली पहुंचने पर अगवानी हेतु हवाई अड्डे पर पूर्व से पहुंचे हुए थे- भारत सरकार के मंत्री द्वय नितिन गडकरी एवं सुरेश प्रभु के अतिरिक्त कुछ वैज्ञानिक भी |

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‘सवर्ण सेना’ का भारत बंद और कुछ जरूरी सवाल

एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध और गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की मांग को लेकर गुरुवार को आहूत भारत बंद का असर बिहार समेत कई राज्यों में देखा गया। क्या आपने सोचा कि बिना किसी राजनीतिक समर्थन या प्रचार के बंद का इतना व्यापक असर कैसे हुआ? इसका आह्वान करने वाला संगठन ‘सवर्ण सेना’ असल में क्‍या है, उसका नेटवर्क कितना बड़ा है और वह कैसे काम करता है?
सबसे पहले तो यह जानें कि तथाकथित तौर पर सवर्ण हितों की रक्षा के लिए गठित ‘सवर्ण सेना’ का सीधा कनेक्शन बिहार से है। जी हाँ, इसका गठन बिहार के जहानाबाद के रहने वाले भागवत शर्मा ने किया है। भागवत फिलहाल अरुणाचल प्रदेश के सेंट्रल यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर हैं और गरीब सवर्णों के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि एससी-एसटी एक्ट में सुधार हो क्योंकि इस कानून के तहत बड़े पैमाने पर फर्जी मुकदमे होते हैं।
बकौल भागवत शर्मा उन्‍होंने सवर्णों के मुद्दों को उठाने के लिए 2017 में सवर्ण सेना बनाई। उनके दावे के मुताबिक आज दो साल बाद इस सेना में 50 हजार से अधिक सदस्य हैं। महज दो सालों में यह संगठन देश भर में फैल गया है और बड़ी बात यह कि इसका प्रचार-प्रसार केवल सोशल मीडिया के माध्‍यम से हो रहा है। भारत बंद का प्रचार भी सवर्ण सेना ने सोशल मीडिया पर ही किया। भागवत शर्मा कहते हैं कि आज के युग में वॉट्सएप और फेसबुक के माध्‍यम से कम समय में अधिक लोगों तक पहुंचना संभव है। साथ में यह भी कि आगे वे देश व समाज से जुड़े अन्‍य मुद्दे भी उठाएंगे।
बहरहाल, आगे वास्तव में क्या होगा यह तो समय बताएगा, फिलहाल यह प्रश्न विचारणीय जरूर है कि कल जो कुछ हुआ वो सोशल मीडिया की सफलता है या सूचना के नए माध्यमों की बेहिसाब बढ़ती ताकत का संकेत, जिसके अनियंत्रित होने से देश और समाज का बड़ा नुकसान संभव है? एक बात और, एक ‘व्यक्ति’ के विचार अगर व्यापक हित में हों तब भी क्या ‘संस्था’ के अभाव में उन विचारों को सही स्वरूप और सार्थक परिणति देना क्या संभव है?

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भारत के आई.पी.पी. बैंक का कारबार अहर्निश होगा आपके द्वार

मधेपुरा में भी आई.पी.पी बैंक (इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक) का शुभारंभ हो गया जिसका उद्घाटन 1 सितंबर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में किया और सारे देशवासियों ने टीवी पर उसका सीधा प्रसारण भी देखा।

मधेपुरा मुख्य डाकघर के डाकपाल राजेश कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि शहीद चुल्हाय मार्ग स्थित बी.पी.मंडल नगर भवन में IPPB (India Post Payment Bank) के पाँच ब्रांच का शुभारंभ बिहार सरकार के कला संस्कृति मंत्री श्री कृष्ण कुमार ऋषि, एससी-एसटी मंत्री डॉ.रमेश ऋषि देव, समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, डीडीसी मुकेश कुमार सहित जेडीयू के जिलाध्यक्ष प्रो.विजेंद्र नारायण यादव, भाजपा के स्वदेश कुमार, डॉ.अमोल राय, ध्यानी यादव आदि की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुई।

बता दें कि डाक सेवा के पदाधिकारीगण सर्वश्री शिवलेश सिंह, राजेश कुमार, जगदेव मंडल, संतोष कुमार चौधरी, विवेक कुमार एवं चंचल यादव आदि ने विभिन्न प्रकार की जानकारियाँ देने हेतु शुक्रवार को जागरूकता रैली निकालकर लोगों को बताया कि 31 दिसंबर तक जिले में आईपीपी बैंक की 204 शाखाएं शुरू करने की योजनाएं हैं।

ब्रांच मैनेजर शिवलेश सिंह ने कहा कि देश का सबसे बड़ा नेटवर्क होगा आईपीपी बैंक जिसका मुख्य लक्ष्य गांव के वंचितों एवं हासिये पर के लोगों को वित्तीय सुविधा से जोड़ना है। जिले में फिलहाल 500 खाते खोले जा चुके हैं जिसमें कुछ बचत खातेे हैं और कुछ चालूू खाता है।

समारोह को सर्वप्रथम मधेपुरा के भीष्म पितामह डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने संबोधित करते हुए यही कहा-

एक टाॅल फ्री फोन करने पर पोस्टमैन आपके द्वार पर दस्तक देगा। वह साथ में एक मशीन भी लाएगा जिससे वह किसी भी तरह की जमा या निकासी के लिए आपकी मदद करेगा। बिजली, गैस या पानी के बिल भुगतान करने के अलावे आप घर बैठे दूसरों के खाते में मनी ट्रांसफर भी कर सकते हैं। जीवन बीमा किस्त आदि का भी भुगतान कर सकते हैं।

जहां इस अवसर पर बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री श्री कृष्ण कुमार ऋषि ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में अब एक नई क्रांति का संचार होगा तथा यह मील का पत्थर साबित होगा वहीं एससी-एसटी मंत्री डॉ.रमेश ऋषिदेव ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से शुभारम्भ हो रही इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति भी डिजिटल मेनस्ट्रीम का हिस्सा बनेगा ही बनेगा। अनपढ़ व्यक्ति भी इस प्रणाली का उपयोग कर सकता है क्योंकि उसे खाता अथवा पिन नंबर भी याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

कार्यक्रम का श्रीगणेश अतिथियों को बुके देकर किया गया तथा मंत्रीद्वय ने दीप प्रज्वलित कर सम्मिलित रूप से उद्घाटन किया। आरंभ से अंत तक कार्यक्रम का सफल संचालन अंतर्राष्ट्रीय उद्घोषक पृथ्वीराज यदुवंशी ने किया तथा ब्रांच मैनेजर शिवलेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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