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जानें, नीरव मोदी का ये घोटाला कितना बड़ा है!

इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया – जरिया जो भी रहा हो, नीरव मोदी को आप जान जरूर गए होंगे। अरबपति हीरा व्यापारी नीरव मोदी, जिसने देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर 11 हजार 300 करोड़ का घोटाला कर डाला। यह देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला बताया जा रहा है।

बहरहाल, 11 हजार 300 करोड़ बहुत बड़ी रकम है, इतनी बड़ी कि एक सामान्य क्या विशिष्ट कोटि में आने वाला भारतीय भी अपनी पूरी उम्र में ऐसी रकम के बारे में सोचने या लिखने तक की हिमाकत नहीं कर सकता। धनपतियों की किंवदंती बन चुके टाटा, बिड़ला या अंबानी भी इस रकम के बारे में बहुत सोच-संभल कर कुछ बोलेंगे। ऐसे में ये जानना सचमुच दिलचस्प होगा कि असल में ये रकम कितनी बड़ी है? चलिए, जानने की कोशिश करते हैं।

जैसा कि आप जानते हैं, इसी महीने संसद में पेश हुए मोदी सरकार के आखिरी पूर्ण बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश के लिए एक बड़े तोहफे की घोषणा की। यह तोहफा ‘मोदी केयर’ के नाम से चर्चा में है। इसके तहत सरकार देश के 10 करोड़ परिवार यानि 50 करोड़ लोगों को 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा देगी। इसे दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम कहा जा रहा है और बजट में इसके लिए 2 हजार करोड़ रुपये का आवंटन भी किया गया है।

आपको बता दें कि आर्थिक मामलों के जानकारों ने जब यह संदेह जताया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 2 हजार करोड़ रुपये का फंड पर्याप्त नहीं है तो सरकार की ओर से कहा गया कि यह आरंभिक आवंटन है और जरूरत के हिसाब से और फंड की व्यवस्था की जाएगी। ‘मोदीकेयर’ पर कुल खर्च कितना आएगा, यह आंकड़ा हालांकि अभी स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन बकौल नीति आयोग 50 करोड़ लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस देने में करीब 11 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसका वहन केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे। इसका मतलब यह है कि नीरव मोदी के घोटाले की रकम और सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना ‘मोदीकेयर’ पर संभावित खर्च की राशि बराबर है। वैसे पीएनबी घोटाले का मोदी सरकार की इस योजना पर शायद ही कोई असर पड़े, लेकिन यह तुलना घोटाले की गंभीरता को तो जाहिर करता ही है।

जब बात चली ही है तो कुछ अन्य खर्चों को भी जानें, जिनसे इस घोटाले की तुलना दिलचस्प होगी। मसलन, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी को बजट भाषण में 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को जोड़ने वाले भारत नेट प्रॉजेक्ट की चर्चा करते हुए ऐलान किया था कि सरकार टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए 10,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसी तरह लाखों लोगों को रोजगार देने वाले मछली पालन और पशुपालन व्यवसाय के लिए भी केन्द्रीय बजट में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उधर उत्तर प्रदेश में गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना तहत पक्का मकान दिलाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्ष 2018-19 के बजट में 11,500 करोड रुपये का प्रावधान किया है।

अब शायद आपको अंदाजा हो रहा होगा कि नीरव मोदी के घोटाले की रकम वास्तव में कितनी बड़ी है। लेकिन हद तो यह है कि यहां भारत में उसको लेकर हाहाकार मचा हुआ है, और उधर वो मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक न्यूयॉर्क में दुनिया के सबसे बड़े होटलों में शुमार एक होटल के आरामगाह में ऐश कर रहा है..! आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी, कुछ करें ऐसे ‘मोदियों’ का..!!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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शिवलिंग का वैज्ञानिक रहस्य

क्या आप शिवलिंग का वैज्ञानिक रहस्य जानते हैं? या आप बता सकते हैं कि शिवलिंग पर जल और बेलपत्र क्यों चढ़ाते हैं? चलिए, जानने की कोशिश करते हैं। आप शिवलिंग के वैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारंभ में ही चौंक जाएंगे जब ये जानेंगे कि वास्तव में शिवलिंग एक प्रकार के न्यूक्लियर रिएक्टर हैं। जी हाँ, शिवलिंग और न्यूक्लियर रिएक्टर में काफी समानताएं हैं। आप गौर से देखें तो दोनों की संरचनाएं एक-सी हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो दोनों ही कहीं-न-कहीं उर्जा से संबंधित हैं। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि शिवलिंग पर लगातार जल प्रवाहित करने का नियम है। देश में, ज्यादातर शिवलिंग वहीं पाए जाते हैं जहां जल का भंडार हो, जैसे नदी, तालाब, झील इत्यादि। आप खंगाल कर देख लें, विश्व के सारे न्यूक्लियर प्लांट भी पानी (समुद्र) के पास ही हैं।

अब आगे बढ़ें। शिवलिंग की संरचना बेलनाकार होती है और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के रिएक्टर की संरचना भी बेलनाकार ही है। अगली खास बात यह कि न्यूक्लियर रिएक्टर को ठंडा रखने के लिये जो जल का इस्तेमाल किया जाता है उस जल को किसी और प्रयोग में नहीं लाया जाता। उसी तरह शिवलिंग पर जो जल चढ़ाया जाता है उसको भी प्रसाद के रूप में ग्रहण नहीं किया जाता है।

अरे रुकिए, बात अभी पूरी हुई कहाँ है! आगे सुनें। जैसा कि हम सभी जानते हैं, शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है। जहां से जल निष्कासित हो रहा है, उसको लांघा भी नहीं जाता है। ऐसी मान्यता है कि वह जल आवेशित (चार्ज) होता है। उसी तरह से जिस तरह से न्यूक्लियर रिएक्टर से निकले हुए जल को भी दूर ऱखा जाता है।

अब यह भी जानें कि शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और आक क्यों चढ़ाते हैं। ऐसा इसलिए कि सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है। शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्यूक्लियर रिएक्टर ही हैं तभी उनपर जल चढ़ाया जाता है, ताकि वो शांत रहे। महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे बिल्वपत्र, आक, धतूरा, गुड़हल आदि सभी न्यूक्लियर एनर्जी सोखने वाले हैं। एक बात और, शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है तभी जल निकासी नलिका को लांघने का नियम आप कहीं नहीं पाएंगे।

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उमा ने ‘असमय’ क्यों की ये घोषणा?

पिछले तीन दशकों में जिन कुछ नेताओं ने भाजपा की पहचान और स्थान बनने में बड़ी भूमिका निभाई है, उनमें एक नाम अत्यंत मुखर फायर ब्रांड नेता और वर्तमान केन्द्रीय मंत्री उमा भारती का भी है, इसमें कोई दो राय नहीं। पर ना जाने अचनाक क्या हुआ कि उमा भारती ने अपनी उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा, ‘अब मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगी, मगर पार्टी के लिए काम करती रहूंगी।’ ‘संन्यासिन’ का सक्रिय राजनीति से अचानक इस तरह ‘संन्यास’ समझ से परे है! खास तौर पर तब जबकि मध्यप्रदेश के चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। कहीं ये पश्चिम बंगाल और राजस्थान के उपचुनावों में भाजपा को मिली हार का आफ्टर इफेक्ट तो नहीं?

बहरहाल, उमा का कहना है कि वह दो बार सांसद रही हैं और पार्टी के लिए काफी काम किया है, उसी के चलते इतनी कम उम्र में उनका शरीर जवाब देने लगा है। कमर और घुटनों में दर्द के चलते चलने-फिरने में परेशानी होती है। हालांकि पार्टी के लिए वह प्रचार करती रहेंगी। राम मंदिर के सवाल पर उन्होंने कहा कि न्यायालय अपना फैसला सुना चुका है, लिहाजा आपसी सहमति से राम मंदिर का निर्माण हो जाना चाहिए।

बता दें कि उमा भारती खजुराहो, भोपाल के बाद वर्तमान में झांसी से सांसद हैं। वह बड़ा मलेहरा और चरखारी से विधायक रह चुकी हैं। उमा भारती बुंदेलखंड की बड़ी प्रभावशाली नेता और पूरे देश में हिंदूवादी नेता के तौर पर अपनी पहचान रखती हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उमा भारती के इस ऐलान को लेकर राजनीति के गलियारे में कई तरह के कयास लगने लगे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस स्थिति से कैसे निबटती है!

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“भारत के अंदर कोई भी बाबर की औलाद नहीं”: गिरिराज

अपने बयानों के कारण विवादों में, विवादों के कारण चर्चा में और चर्चा के कारण केन्द्र में बड़ा पद पाने और मंत्रिमंडल में फेरबदल के बावजूद उस पद को बनाए रखने में सफल रहने वाले गिरिराज सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस बार उन्होंने कहा है, भारत में सभी राम की संतानें हैं, यहां कोई बाबर की औलाद नहीं है। जी हाँ, राम मंदिर के संदर्भ में सवाल पूछे जाने पर केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “भारत के अंदर कोई भी बाबर की औलाद नहीं है। यहां सभी राम की संतानें हैं, राम के खानदान से हैं। अगर मैं धर्म परिवर्तन कर लूं तो क्या मेरे बच्चों के, आने वाली पीढ़ियों के पूर्वज बदल जाएंगे। वे तो हिंदू ही रहेंगे।”

गिरिराज ने आगे कहा, “राम मंदिर भारत में नहीं बनेगा तो क्या पाकिस्तान में बनेगा? राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में ही होगा और इसके लिए हिंदू-मुस्लिमों को साथ आना होगा।” यही नहीं, इसके बाद उन्होंने कहा, “मुसलमानों में भी शिया समुदाय के लोग तैयार हैं, लेकिन सुन्नी नहीं तैयार हैं। सुन्नियों को भी शिया समुदाय की तरह मान लेना चाहिए।”

गौरतलब है कि बिहार के नवादा से सांसद गिरिराज 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान नरेंद्र मोदी के विरोधियों के पाकिस्तान चले जाने संबंधी बयान के बाद खासतौर से चर्चा में आए थे। इसके बाद तो उनके विवादित बयान का जैसे सिलसिला ही चल पड़ा। कहना गलत ना होगा कि ऐसे बयान या तो वे चर्चा में बने रहने के लिए देते हैं या फिर उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता ही कुछ ऐसी है। दोनों ही लिहाज से भारत की ‘सत्याग्रही’ राजनीति और ‘समावेशी’ समाज के लिए ये चिन्ता की बात है।

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ऑस्ट्रेलिया को रौंदकर भारत ने जीता अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप

न्यूजीलैंड के बे ओवल मैदान में खेले गए अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से रौंदकर भारत ने चौथी बार वर्ल्ड चैम्पियन बनने की गौरवशाली उपलब्धि हासिल की है। भारत दुनिया का एकमात्र देश है जो चार बार विश्वविजेता बना। 2018 से पहले 2000, 2008 और 2012 में भी भारत ने वर्ल्ड कप अपने नाम किया था। इस ऐतिहासिक फाइनल मैच में भारत की ओर से मनजोत कालरा ने 102 गेंदों में 101 रनों की शानदार पारी खेली। मनजोत के साथ ही भारतीय गेंदबाजों का जलवा भी देखने लायक रहा, जिन्होंने ऑस्ट्रेलियाई पारी को 216 रनों पर ही समेट दिया। मनजोत को उनके शानदार खेल के लिए ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया। वहीं इस टूर्नामेंट में लगातार शानदार प्रदर्शन के लिए शुभमन गिल को ‘मैन ऑफ द सीरीज’ का खिताब दिया गया। शुभमन ने इस टूर्नामेंट में कुल 5 पारियां खेलीं, जिनमें उन्होंने एक शतक और 3 अर्द्धशतक समेत 372 रन बनाए। इस पूरे टूर्नामेंट की सबसे खास बात यह रही कि भारत शुरू से आखिर तक अपराजेय रहा। उसे कोई भी टीम हरा नहीं पाई।

फाइनल मुकाबले में 217 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत शानदार रही। कैप्टन पृथ्वी शॉ ने मनजोत कालरा के साथ पहले ओपनिंग विकेट के लिए 71 रन की साझेदारी की। पृथ्वी शॉ जब विल सदरलैंड की बॉल पर बोल्ड हुए तो पारी को संभालने शुभमन गिल आ गए। उन्होंने मनजोत कालरा के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 62 रन की साझेदारी की। 31 रन पर खेल रहे गिल को परम उप्पल ने बोल्ड कर दिया। यहां से भारत के विकेट कीपर बल्लेबाज हार्विक देसाई (नाबाद 47 रन) ने मनजोत के साथ भारत की विजयी लय को आगे बढ़ाया और भारत को 8 विकेट से जीत दिलाकर मैच और वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया। भारत की पारी की शुरुआत में बारिश ने खलल जरूर डाला, लेकिन कुछ देर बाद बारिश रुक गई और मैच पूरा हुआ।

इससे पहले टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की टीम 47.2 ओवर में 216 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। ऑस्ट्रेलिया के लिए जोनाथन मेरलो ने 76 रन का योगदान दिया। उन्हें छोड़कर बाकी बल्लेबाज कुछ खास नहीं कर पाए। भारत के लिए ईशान पोरेल, कमलेश नगरकोटी, शिवा सिंह और अनुकूल रॉय ने 2-2 विकेट अपने नाम किए, जबकि शिवम मावी ने एक विकेट लिया। बल्लेबाजी के लिए अनुकूल दिख रही इस पिच पर उत्साह से भरी भारतीय टीम के लिए 216 रनों का लक्ष्य कतई मुश्किल नहीं था।

बहरहाल, टीम इंडिया के वर्ल्ड कप जीतने के बाद देश भर में जश्न का माहौल है। भारत के रणबाकुरों के लिए बधाईयों और इनामों की बारिश हो रही है। बीसीसीआई ने अंडर-19 के कोच राहुल द्रविड़ को 50 लाख का इनाम देने की घोषणा की है। कोच राहुल द्रविड़ के अलावा भारतीय टीम के हर खिलाड़ी को 30-30 लाख रूपये दिए जाएंगे। वहीं टीम के सपोर्ट स्टाफ को 20-20 लाख रूपये इनाम देने की घोषणा की गई है। मधेपुरा अबतक की ओर से टीम इंडिया अंडर-19 को ढेरों बधाई।

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बजट 2018: देश के विकास को गति देने वाला बजट

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को नरेन्द्र मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट पेश किया। आमतौर पर चुनावी वर्ष में सरकारें लोकलुभावन (पर वास्तविक तौर पर अव्यावहारिक) बजट पेश करती रही हैं, लेकिन इसके उलट वर्तमान एनडीए सरकार ने देश की मजबूती को प्राथमिकता देते हुए बजट देने का नैतिक साहस दिखाया है। खास कर कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्टर आदि क्षेत्रों में कई बड़े कदम उठाए गए हैं, जो आने वाले दिनों में देश के विकास को निश्चित तौर पर गति देंगे। चलिए जानने की कोशिश करते हैं कि क्या हैं बजट 2018 की बड़ी बातें।

सबसे पहले बात करते हैं कृषि की। इस बजट में किसानों को उनकी फसल के लागत मूल्य का डेढ़ गुना देने, सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, 2000 करोड़ की लागत से बनने वाले कृषि बाजार और नए ग्रामीण बाजार ‘ई-नैम’ का ऐलान किया गया है। इसके अलावे ‘ऑपरेशन ग्रीन’ के लिए 500 करोड़ रुपये, 42 मेगा फूड पार्क और जानवरों को पालने वालों को भी किसान क्रेडिट कार्ड देने की घोषणा की गई है। यही नहीं, जरूरतमंद किसानों के कर्ज के लिए 11000 करोड़ रुपये के फंड का प्रावधान भी किया गया है। निश्चित तौर पर ये योजनाएं देश में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में मोदी सरकार ने देश के 10 करोड़ परिवारों के लिए हर साल 5 लाख रुपए तक के मेडिक्लेम का ऐलान किया है। दुनिया की इस सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना से 50 करोड़ लोगों को लाभ पहुँचेगा। इसके अलावा देश भर में 5 लाख स्वास्थ्य सेंटर और हर तीन संसदीय क्षेत्र पर एक मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कही गई है। साथ ही अगले वित्त वर्ष में दो करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, जो देश की आम जनता के स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी है, कहने की जरूरत नहीं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी वित्तमंत्री ने कई बड़े ऐलान किए। सबसे अहम यह कि उन्होंने प्री नर्सरी से लेकर 12वीं क्लास तक को समग्र रूप से देखने की बात कही, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी तौर पर विकास हो सके। आदिवासियों के लिए नवोदय विद्यालय की तर्ज पर एकलव्य स्कूलों की स्थापना की जाएगी। सरकार प्रधानमंत्री रिसर्च फेलो स्कीम शुरू करेगी जिसमें 1000 बीटेक छात्र चुने जाएंगे और उन्हें आईआईटी से पीएचडी करने का अवसर दिया जाएगा। इसके अलावा प्लानिंग और आर्किटेक्चर स्कूल शुरू किए जाएंगे, साथ ही 18 नई आईआईटी और एनआईआईटी की स्थापना की जाएगी। मेडिकल कॉलेजों की बात हम ऊपर कह ही आए हैं।

आधारभूत संरचना की बात करें तो इस क्षेत्र में यह बजट अत्यन्त कारगर होगा। इसमें 16 नए इंटरनेशनल लेवल के एयरपोर्ट तैयार करने की बात कही गई है, जिसके बाद देश में एयरपोर्टों की संख्या 124 हो जाएगी। इसके अलावा 600 रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण की योजना बनाई गई है और गांवों में 1 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि 2022 तक हर गरीब के पास अपना घर हो।

अब बात युवाओं की। जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में कहा करते हैं, इस देश की 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है। इन युवाओं को सरकार ने स्वाभाविक तौर पर अपनी प्राथमिकताओं में जगह दी है। नए वित्तीय वर्ष में 70 लाख नौकरियों का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 50 लाख युवाओं को नौकरी के लिए ट्रेनिंग भी सरकार ही देगी। साथ ही व्यापार शुरू करने के लिए भी केन्द्र सरकार ने मुद्रा योजना के तहत 3 लाख करोड़ रुपये ऋण देने का लक्ष्य तय किया है। यही नहीं, हर जिले में स्किल सेंटर खोले जाएंगे और 2.5 लाख गांवों में ब्रॉडबैंड को बढ़ावा दिया जाएगा। ये सभी योजनाएं देश के युवाओं के लिए सीधे रोजगार का माध्यम बनेंगी।

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अमीर देशों की सूची में भारत को छठा स्थान

दुनिया के सबसे अमीर देशों की सूची में भारत को छठा स्थान मिला है, जबकि अमेरिका शीर्ष स्थान पर काबिज है। न्यू वर्ल्ड वेल्थ 2017 की इस रिपोर्ट में भारत की कुल संपत्ति 8,230 अरब डॉलर और अमेरिका की कुल संपत्ति 64,584 अरब डॉलर बताई गई है। अमेरिका के बाद 24,803 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ चीन दूसरे और 19,522 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ जापान तीसरे स्थान पर है। बता दें कि कुल संपत्ति से मतलब हर देश/शहर में रहने वाले सभी व्यक्तियों की निजी संपत्ति से है। इसमें उनकी देनदारियों को घटाकर सभी संपत्तियां (प्रॉपर्टी, नकदी, शेयर, कारोबारी हिस्सेदारी) शामिल की जाती हैं। ध्यान रहे कि इस रिपोर्ट के आंकड़ों से सरकारी धन को बाहर रखा गया है।
बहरहाल, न्यू वर्ल्ड वेल्थ की इस सूची में ब्रिटेन चौथे स्थान (9,919 अरब डॉलर), जर्मनी पांचवें (9,660 अरब डॉलर), फ्रांस सातवें (6,649 अरब डॉलर), कनाडा आठवें (6,393 अरब डॉलर), ऑस्ट्रेलिया नौवें (6,142 अरब डॉलर) और इटली दसवें (4,276 अरब डॉलर) स्थान पर है। खास बात यह कि इन दिग्गज देशों के बीच भारत को 2017 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला संपत्ति बाजार बताया गया है। देश की कुल संपत्ति 2016 में 6,584 अरब डॉलर थी जो 2017 में 25% वृद्धि के साथ बढ़कर 8,230 अरब डॉलर हो गई है।
बकौल न्यू वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट, पिछले दशक (2007-2017) में भारत की कुल संपत्ति में 160% का उछाल आया है। 2007 में हमारी संपत्ति 3,165 अरब डॉलर थी जो 2017 में बढ़कर 8,230 अरब डॉलर हो गई है। करोड़पतियों की संख्या के लिहाज से बात करें तो भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है। यहां 20,730 करोड़पति हैं। जबकि अरबपतियों के लिहाज से देश का स्थान अमेरिका और चीन के बाद विश्व में तीसरा है। यहां 119 अरबपति हैं।

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ऑक्सफोर्ड ने ‘आधार’ को चुना वर्ष का हिन्दी शब्द

दुनिया भर में प्रतिष्ठित अंग्रेजी शब्दकोश ऑक्सफोर्ड ने पहली बार अंग्रेजी की तरह 2017 के हिंदी शब्द की घोषणा की है। ऑक्सफोर्ड ने ‘आधार’ को 2017 का हिंदी शब्द घोषित किया है। जी हां, ऑक्सफोर्ड ने राजस्थान के जयपुर में चल रहे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शनिवार, 27 जनवरी को यह घोषणा की। इस मौके पर साहित्यकार और पत्रकारिता जगत के कई दिग्गज मौजूद रहे। कार्यक्रम में हिंदी के प्रसिद्ध कवि अशोक वाजपेयी, साहित्यकार चित्रा मुद्गल और पत्रकार विनोद दुआ खास तौर से शामिल हुए।

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी की तरफ से कहा गया कि वर्ष के हिंदी शब्द का चयन करना आसान नहीं था। इसके लिए कई शब्द रखे गए थे। चयन समिति के सामने ‘नोटबंदी’, ‘स्वच्छ’, ‘योग’, ‘विकास’, ‘बाहुबली’ जैसे शब्द थे, जिनमें से ‘आधार’ को चुना गया। बता दें कि चयन समिति को पिछले वर्ष सबसे ज्यादा चलन में आए और लोगों का ध्यान खींचने वाले शब्दों में से ‘वर्ष का शब्द’ चुनना था।

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने चयन के मापदंड के बारे में कहा कि वर्ष का हिन्दी शब्द एक ऐसा शब्द या अभिव्यक्ति है जिसने पिछले 12 महीनों में बारम्बार लोगों को आकर्षित किया है। हम विशेषज्ञों के एक पैनल के साथ काम करके इस साल के कई उम्मीदवार शब्दों पर विचार करते हैं और एक ऐसा शब्द चुनते हैं जो इस साल के लोकाचार, भावनओं और पूर्वाग्रहों को प्रतिबिंबित करता है और आने वाले समय में सांस्कृतिक महत्व के एक शब्द के रूप में संभावना रखता है।

देखा जाय ‘आधार’ आज की तारीख में एकमात्र वो शब्द है जो सवा सौ करोड़ भारतीयों के जीवन से एक साथ और एक समान जुड़ा है। ‘आधार’ का आधार इतना व्यापक और गहरा है कि इसके सामने किसी और शब्द का टिकना निहायत ही कठिन था।

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बुद्ध की सोच ‘लाइट ऑफ एशिया’: राष्ट्रपति कोविंद

गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एकदिवसीय यात्रा पर बिहार के राजगीर में थे। मौका था अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय व इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय धर्म धम्म सम्मेलन के उद्घाटन का और उनके साथ मौजूद थे बिहार के राज्यपाल सत्य पाल मलिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलक मारापना सहित कई गणमान्य।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि 21वीं सदी में भी भगवान बुद्ध के विचार हमें प्रेरित कर रहे हैं। सही मायने में बुद्ध की सोच ‘लाइट ऑफ एशिया’ है। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान में दुनिया की आधी से अधिक आबादी ऐसी जगहों पर रह रही है जो भगवान बुद्ध के ज्ञान से प्रभावित है और उस ज्ञान से लगातार प्रेरित हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि धर्म धम्म परंपरा यह कहती है कि किस तरह निरंतरता से खुद को बेहतर करना है। इसकी क्या जरूरत और महत्ता है। किस तरह से हमें उच्च स्तर का ज्ञान हासिल करना है। यह ज्ञान ही है जिससे राजकुमार सिद्धार्थ भगवान बु्द्ध बने और महान योद्धा अशोक बन गए धम्म अशोका। बुद्ध के विचार हमें जीने के सिद्धांत की ओर प्रेरित करते हैं। ईमानदारी और पारदर्शिता की ओर हमें ले जाकर सह अस्तित्व की भावना को विकसित करते हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का सपना था। यह विश्वविद्यालय उनके सपनों का मूर्त रूप है। यह महावीर, बुद्ध तथा गुरुनानक की धरती है, जिन्होंने पूरे विश्व को शांति का संदेश दिया। उन्होंने वैश्विक समस्याओं के निवारण के लिए अंतररराष्ट्रीय रिजोल्यूशन सेंटर खोलने पर भी बल दिया।

चलते-चलते यह कहना बेहद जरूरी प्रतीत होता है कि हाल के दिनों में बिहार की बौद्धिक-सांस्कृतिक सक्रियता जिस तरह बढ़ी है, वह नीतीश कुमार जैसे विचारशील और संस्कारयुक्त अगुआ के बिना मुमकिन ना थी। ऐसी तमाम गतिविधियों के लिए वे और उनकी सरकार साधुवाद के पात्र हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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यह केवल नीतीश का नहीं, 11 करोड़ बिहारियों का सम्मान

सोमवार को जम्मू के जोरावर सिंह ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री व जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को प्रथम ‘मुफ्ती अवार्ड फॉर प्रोबिटी इन पॉलिटिक्स एंड पब्लिक लाइफ’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली जेएंडके पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (जेकेपीडीपी) की ओर से पार्टी के संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे मुफ्ती मुहम्मद सईद की स्मृति में दिया गया। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एएन वोहरा के हाथों मिले इस पुरस्कार को नीतीश कुमार ने वहां की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, भारतीय मूल के ब्रिटिश अर्थशास्त्री व नेता लॉर्ड मेघनाद देसाई, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एवं जेडीयू नेता संजय झा समेत कई गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में ग्रहण किया।

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस पुरस्कार की बाबत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे अपने पत्र में कहा है कि “मैं पूरी ईमानदारी से यह बात कह रही हूं कि राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन की शुचिता के मामले में देश में आपसे बेहतर कोई नहीं जिसे इस सम्मान से नवाजा जाए।” उनकी यह टिप्पणी ना केवल नीतीश कुमार के लिए बल्कि 11 करोड़ बिहारियों के लिए सम्मान की बात है। इस टिप्पणी का महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है जब ठीक इसी समय राज्य के एक बड़े नेता को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा मिली हो और एक दलविशेष द्वारा उस सजा को ‘शहादत’ की तरह पेश करने की कोशिश की जा रही हो।

महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में नीतीश कुमार के जम्मू-कश्मीर कनेक्शन की भी याद दिलाई। उन्होंने लिखा, मुझे याद है कि आपने रेल मंत्री के रूप में घाटी के लिए पहल की थी और बारामूला तथा अनंतनाग के लिए रेल लाइन का शिलान्यास किया था। ध्यान दिला दें कि केन्द्र में वीपी सिंह सरकार के दौरान मुफ्ती मोहम्मद सईद और नीतीश कुमार ने साथ काम किया था।

बहरहाल, बिहार में न्याय के साथ विकास के अपने संकल्प को शतप्रतिशत समर्पण और तन्मयता से जमीन पर उतारने में जुटे नीतीश कुमार ने गुड गवर्नेंस का एक नया मानक स्थापित किया है। इसके साथ ही बिहार में चलाए जा रहे शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाहबंदी और कन्या-सुरक्षा जैसे समाज-सुधार अभियानों ने उनके व्यक्तित्व को ‘राजनीतिक संत’ जैसा आयाम दे दिया है। आज वो निर्विवाद रूप से राजनीतिक शुचिता के शिखर और उसके पर्याय हैं। इस सम्मान के लिए उनके चयन ने बिहार की छवि को एक नई ऊँचाई प्रदान की है।

नीतीश कुमार को यह सम्मान मिलना साबित करता है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बिहार में आज संभावना देखी जा रही है। गठबंधन सरकार की जटिल परिस्थितियों और विपक्ष के तौर पर ठीक ‘कंट्रास्ट’ से जूझते हुए भी नीतीश कुमार का राज्य के लिए एक के बाद उपलब्धियां हासिल करना और उसे संभावना के साथ ही सराहना के योग्य बनाना उनके कद को और बढ़ा देता है। कभी जातिवाद, अपराध और भ्रष्टाचार के अंधेरे में सफर करने वाला बिहार आज भोर की किरण देख रहा है। हाल के दिनों में शराबबंदी की सफलता ने राज्यवासियों में यह आत्मविश्वास भर दिया है कि नीतीश कुमार जैसा नेतृत्वकर्ता हो तो असंभव दिखना वाला लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। अब जरूरत बात की है कि इस माहौल को गतिमान रखा जाए और ‘पॉजिटिव एप्रोच’ के साथ सरकार, समाज और मीडिया एक साथ कदम बढ़ाए।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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