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बिहार में बनी विश्व रिकॉर्ड से 15 गुना बड़ी मानव-श्रृंखला

बिहार ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। यह तीसरी बार है जब बिहार में मानव-श्रृंखला का आयोजन किया गया। पिछली बार की तरह इस बार भी बिहार ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। जल-जीवन-हरियाली और नशामुक्ति के समर्थन एवं बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरोध में इस बार 5 करोड़ 16 लाख 71 हजार 389 बिहारवासियों ने 18,034 किलोमीटर लंबी मानव-श्रृंखला बनाई। इस श्रृंखला की भव्यता और विशालता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बिहार की मानव-श्रृंखला 1155 किलोमीटर के विश्व रिकॉर्ड से 15 गुना बड़ी है। इस तरह बिहार ने अपना ही रिकॉर्ड और बेहतर करते हुए विश्व रिकॉर्ड को तीसरी बार तोड़ा।
बता दें कि इस ऐतिहासिक मानव-श्रृंखला का शुभारंभ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान से गुब्बारा उड़ाकर किया। मानव-श्रृंखला के लिए हुए इस मुख्य आयोजन में मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारुण रशीद सहित कई वरिष्ठ मंत्री, सांसद एवं आला अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर जलपुरुष एवं मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित श्री राजेन्द्र सिंह एवं यूएनआईपी के इंडिया कंट्री हेड अतुल बगई गांधी मैदान में विशेष तौर पर मौजूद रहे।
मानव-श्रृंखला को लेकर पूरे बिहार में उत्सव-सा माहौल रहा। हालांकि इसके लिए दिन के 11.30 से 12.00 बजे का समय निर्धारित था लेकिन उत्साह का आलम यह था कि लोग 10 बजे से ही कतार में लगने के लिए घरों से निकलने लगे। यहां तक कि बिहार के विभिन्न जेलो के 43445 कैदी भी जेलकर्मियों के साथ इस श्रृंखला में शामिल हुए। मानव-श्रृंखला की फोटोग्राफी के लिए 07 हैलीकॉप्टर और 100 से अधिक ड्रोन लगाए गए थे। इस श्रृंखला पर देश और दुनिया की नजरें टिकी थीं। इसके साथ ही दो प्रतिष्ठित रिकॉर्ड बुक – इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स – की टीमें भी इसे परखने के लिए बिहार में जमी थीं।
मानव-श्रृंखला के इस विराट आयोजन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहारवासियों को उनके अभूतपूर्व समर्थन के लिए “हृदय से धन्यवाद” देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन एवं अन्य सामाजिक सुधार के अभियानों के प्रति जागरुकता फैलाने में यह मानव-श्रृंखला मील का पत्थर साबित होगी। बिहार प्रदेश जदयू के अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिक मानव-श्रृंखला बनाकर बिहार ने पूरे विश्व को संदेश दिया है। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) आरसीपी सिंह ने कहा कि इस अभूतपूर्व मानव-श्रृंखला का आयोजन कर बिहारवासियों ने राज्य को नया गौरव दिया है।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri along with senior citizens of Madhepura taking part in Jal-Jeevan-Hariyali Manav-Shrinkhala at Bhupendra Chowk, Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri along with senior citizens of Madhepura taking part in Jal-Jeevan-Hariyali Manav-Shrinkhala at Bhupendra Chowk, Madhepura.

वहीं मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने मुख्यमंत्री को उनके जल-जीवन-हरियाली यात्रा के दौरान शुभकामना व्यक्त करते हुए यही कहा था कि आपका यह कार्यक्रम  एक दिन “वैश्विक क्रांति” का मार्ग प्रशस्त करेगा….. जैसा कि बिहार वासियों की  बढ़ती हुई सहभागिता से स्पष्ट नजर आने लगा है।‘मधेपुरा अबतक’ भी इस मौके पर बिहारवासियों को हार्दिक बधाई और साधुवाद देता है।

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2020 की उम्मीदें : खुद से चलेंगी कारें

जानिए कि 5 साल पूर्व टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन ने कहा था कि टोटल एक्सेस ब्रांड एक ऐसी कार पेश करेगी जो बिना ड्राइवर के खुद ही चलेगी… जो अब सच होने जा रहा है। सच में, वर्ष 2020 में कई प्रकार की तकनीकी बदलाव धरती पर लोगों के जीवन को आसान बना देगा। सड़कों पर जो खुद से चलने वाली कार नजर आएंगी वहीं आम लोगों को 5G तकनीक से इंटरनेट की तेज गति मिलेगी।

बता दें कि जहाँ खुद से चलने वाली कार की कीमत कितनी होगी उसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है वहीं टेस्ला भी वर्ष 2020 में दुनिया के कई चुनिंदा शहरों में स्वचालित रोबोट टैक्सी लॉन्च करेगी। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क का कहना है कि 1 वर्ष बाद सड़कों पर 10 लाख से ज्यादा रोबोट टैक्सियों दिखाई देंगी। जून 2020 तक टेस्ला का ऑटोनॉमस सिस्टम इतना विकसित हो जाएगा कि ड्राइवरों को सड़क पर माथापच्ची करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

चलते -चलते यह भी बता दें कि इस वर्ष दुनिया के कई देशों में 5G नेटवर्क का दायरा बहुत बढ़ेगा। इसमें 3 घंटे की एचडी फिल्म कुछ सेकंड में डाउनलोड हो सकेगी। एक ओर जहाँ भारतीय मोबाइल ऑपरेटर 5G को अपनाने की तैयारी में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर प्रमुख मोबाइल कंपनियां 5G हैंडसेट लॉन्च करने में जुटी है।

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जहाँ चाह…. वहाँ राह को साबित कर दिखाया भारतीय मूल की ब्रिटिश डॉक्टर भाषा मुखर्जी

कोलकाता में पिता दुर्गादास मुखर्जी एवं माता मधुमिता मुखर्जी के घर 1996 ई. में एक बच्ची ने जन्म ग्रहण किया जिसका नाम माता-पिता ने रखा भाषा मुखर्जी। यह मुखर्जी परिवार बेटी भाषा मुखर्जी और बेटा आर्य मुखर्जी के साथ 2004 में कोलकाता से इंग्लैंड के स्विंडन चले गए। वहां जाकर भारतीय मूल की भाषा मुखर्जी पेशे से डॉक्टर बन गई और बन गई पांच भाषाओं की ज्ञाता भी।

बता दें कि फिलहाल लंदन के डरबी में रह रही 23 वर्षीय डॉ.भाषा मुखर्जी 2019 में मिस इंग्लैंड प्रतियोगिता जीतकर मिस वर्ल्ड 2019 में ही टॉप 40 में स्थान बना डाली। कई प्रकार की चिकित्सीय डिग्री प्राप्त डॉ.भाषा मुखर्जी का IQ लेवल 146 है।

लगभग 8 वर्षीय भाषा जब कोलकाता की स्कूल में पढ़ती थी तो कुछ बच्चे उन्हें ‘अगली बेबी’ यानी बदसूरत बच्ची कह कर पुकारा करते, तब भाषा अपनी ग्रूमिंग, मेकअप और डाइट पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगी थी।

मिस इंग्लैंड प्रतियोगिता जीतने के बाद डॉ.भाषा मुखर्जी लड़कियों को खासकर यह संदेश देती है-

प्रायः लोग यह सोचते हैं कि सौंदर्य प्रतियोगिताएं जीतने वाली लड़कियाँ बुद्धू होती हैं लेकिन हम सबको ईश्वर ने किसी-ना-किसी अच्छे मकसद से यहाँ भेजा है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि खुद को फिल्मी कीड़ा मानने वाली तथा अपनी पढ़ाई व ब्यूटी कॉन्टेस्ट के बीच संतुलन बनाकर रखने वाली भाषा मुखर्जी ने मिस वर्ल्ड के किताब में स्थान पाने के बाद ही लिंकनशायर, बोस्टन के पिलग्रिम हॉस्पिटल में जूनियर डॉक्टर के रूप में ज्वाइन कर लिया। भाषा ने युवाओं को बुजुर्गों की सेवा में कुछ समय देने के निमित्त “जेनरेशन ब्रिज प्रोजेक्ट 2017” का श्रीगणेश भी किया है। भाषा ने जहाँ चाह-वहाँ राह को साबित कर दिखाया है।

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गोवा से गुजरात तक के 15 भारतीय बने ब्रिटेन के संसद सदस्य

ब्रिटेन के संसदीय चुनाव में भारतीय मूल के 15 भारतवंशियों में से आधे-आधे वहाँ की दोनों पार्टियों (कंजरवेटिव और लेबर) से जीत दर्ज कर हाउस ऑफ कॉमंस पहुंचे। इनमें से कुछ के माता-पिता संसार के अन्य देशों से होते हुए ब्रिटेन पहुंचे और कुछ सीधे भारत से आकर ब्रिटेन में रहने लगे और वहीं के ही नागरिक बन गए।

बता दें कि इन 15 भारतीय मूल के ब्रिटिश पार्लियामेंट के लिए जीते हुए सदस्यों में अधिकांश बैंकर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और वकील हैं। चर्चानुसार यह माना जा रहा है कि नई ब्रिटिश सरकार में तीन भारतवंशी सांसद मंत्री भी बन सकते हैं।

यह भी बता दें कि इन तीनों में एक प्रमुख नाम है प्रीति पटेल, जो विगत सरकार में ब्रिटेन की गृह मंत्री रह चुकी हैं। थेरेसा सरकार में गृह मंत्री रही प्रीति पटेल युगांडा-भारतीय परिवार में जन्मी जबकि प्रति पटेल की दादी-दादा गुजरात के तारापुर में रहते थे…… पिता युगांडा पहुंचे और फिर वहां से ब्रिटेन आ गए। शेष दो मंत्री बनने वाले हैं- अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री रह चुके आलोक शर्मा एवं रेवेन्यू डिपार्टमेंट के चीफ सेक्रेटरी रहे पंजाब मूल के ऋषि सुनाक।

चलते-चलते यह भी जान लें कि इन 15 भारतीयों में चार पहली बार हाउस ऑफ कॉमंस पहुंचे हैं। और शेष हैं- क्लेयर कुटिन्हो (गोवा), सुएला ब्रेवरमैन (गोवा), वैलेरी वाज (गोवा), शैलेश वारा (गुजरात), आलोक शर्मा (आगरा) और नवेंदु मिश्रा (कानपुर) सहित…… भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों पर जन्मे इन ब्रिटिश सांसदों के नाम हैं- गगन मोहिंद्रा, मुनीरा विल्सन, वीरेंद्र शर्मा, तमनजीत सिंह, सीमा मल्होत्रा, प्रीति कौर गिल एवं लीजा नंदी।

 

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आठ वर्षीय भारत की बेटी लिसिप्रिया ने जलवायु शिखर सम्मेलन में की धरती को बचाने की अपील

भारतीय स्टेट मणिपुर की 8 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में सीओपी 25 जलवायु शिखर सम्मेलन में पधारे वैश्विक नेताओं से अपनी धरती तथा उन जैसे मासूमों के भविष्य को बचाने हेतु तुरंत कदम उठाने की गुहार लगाई। महज 8 वर्ष की उम्र में भारत की इस बेटी ने अपनी चिंताओं से दुनिया को झकझोर दिया।

बता दें कि नन्ही पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया ने जलवायु शिखर सम्मेलन में आए पर्यावरणविदों से यही कहा- “मैं (लिसिप्रिया कंगुजम) यहाँ उपस्थित वैश्विक नेताओं से यही कहने आई हूँ कि यह एक संकल्पी कदम उठाने का वक्त है क्योंकि यह वास्तविक क्लाइमेट इमरजेंसी है।”

इतनी छोटी उम्र में इतने अहम मसले पर बात रखने के कारण लिसिप्रिया स्पेन के सारे अखबारों की सुर्खियों में बनी रहीं। लिसिप्रिया के पिताश्री के.के.सिंह ने कहा कि मेरी बेटी की बातों को सुनकर कोई यह अनुमान नहीं लगा पाया कि वह महज 8 साल की है। आगे उन्होंने कहा कि महज 6 साल की उम्र में मेरी बेटी को मंगोलिया में आयोजित 2018 की आपदा मसले पर हुए मंत्री स्तरीय शिखर सम्मेलन में बोलने का अवसर मिला तो लिसिप्रिया ने अंत में यही कहा कि जब बच्चों को अपने माता-पिता से बिछुड़ते देखती हूँ तो मैं रो पड़ती हूँ।

चलते-चलते यह भी बता दें कि मंगोलिया से लौटने के बाद लिसिप्रिया ने अपने पिता के सहयोग से “The Child Movement” नामक संगठन कायम किया तथा जलवायु परिवर्तन मसले पर अपने जुनून के चलते उसने गत फरवरी महीने से स्कूल जाना भी छोड़ दी। लिसिप्रिया अभी तक जलवायु परिवर्तन मसले को लेकर 21 देशों का दौरा कर चुकी है। दुनिया की सबसे कम उम्र वाली भारतीय पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम को भिन्न-भिन्न देशों के सम्मेलन में भाग लेने हेतु वहाँ की सरकार द्वारा यात्रा का खर्च वहन किया जाता है।

यह भी कि वर्ल्ड चिल्ड्रन पीस प्राइज एवं डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम चिल्ड्रन अवार्ड प्राप्त लिसिप्रिया कंगुजम जैसी नन्हीं बेटी को भारत का नाम रोशन करते रहने के लिए डॉ.कलाम के करीबी समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कोटि-कोटि शुभकामनाएं व्यक्त की है।

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कनाडा की कैबिनेट में भारतीय मूल के चार मंत्री

कनाडा की कैबिनेट में पहली बार एक हिंदू महिला को स्थान दिया गया है। 47 वर्षीय प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 37 मंत्रियों वाली अपनी जिस कैबिनेट की घोषणा की है, उसमें अनिता इंदिरा आनंद को भी जगह मिली है। उन्हें सार्वजनिक सेवा और खरीद विभाग दिया गया है। यही नहीं, उनके अलावा ट्रूडो की कैबिनेट में भारतीय मूल के तीन अन्य लोगों – नवदीप बैंस (42), बरदीश छग्गर (39) और हरजीत सज्जन (49) – को भी जगह मिली है। ये सभी सिख हैं और पिछली सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

गौरतलब है कि अनिता इंदिरा आनंद टोरंटो विश्वविद्यालय में कानून की पूर्व प्रोफेसर रह चुकी हैं और ओंटारियो में ओकविले का प्रतिनिधित्व करती हैं। वो अक्टूबर में हुए संघीय चुनाव में 338 सीटों वाले हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए पहली बार चुनी गईं। कनाडा के दो नवनिर्वाचित मंत्रियों में वो एक हैं। शेष तीन मंत्रियों में से हरजीत सज्जन वैंकूवर के पूर्व पुलिस जासूस और फोर्सेस में लेफ्टिनेंट-कर्नल थे। वो ट्रूडो की कैबिनेट में राष्ट्रीय रक्षा मंत्री हैं। उधर नवदीप बैंस को नवाचार, विज्ञान और उद्योग मंत्री नामित किया गया है, जबकि बरदीश छग्गर, जिन्होंने पिछली संसद में सरकार के सदन के नेता के रूप में कार्य किया था, अब विविधता और समावेश विभाग संभालेंगे। युवा मामलों को भी वही देखेंगे। भारतीय मूल के लोगों को इतने महत्वपूर्ण दायित्वों से नवाजना भारतीयों के लिए गौरव की बात है।

कनाडा के युवा प्रधानमंत्री ट्रूडो ने सचमुच युवा टीम चुनी है। अपनी टीम को लेकर वो खासा आश्वस्त दिखते हैं। उन्होंने ट्वीट भी किया है, ‘‘नई मजबूत और कुशल टीम। आगे बहुत काम है, और हम कनाडा को आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।’’ उनकी इस टीम की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें महिलाओं को पुरुषों के बराबर भागीदारी मिली है। इस टीम में 15 पुरुष और इतने ही महिला मंत्री हैं। ट्रूडो और उनकी टीम को हमारी शुभकामनाएं।

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पर्यावरण की रक्षा के लिए दुनिया एकजुट होने लगी है

लंदन में बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए माताओं ने पर्यावरण की सुरक्षा के उद्देश्य से प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। फलस्वरूप दुनिया के लगभग 100 देशों ने कार फ्री डे उत्सव के रूप में मनाया। लगभग 200 सड़कों पर ट्रैफिक बंद रहा। जर्मनी और फ्रांस में लोग साइकिल पर दिखे तथा पुर्तगाल में सड़कों पर मैराथन रेस का आयोजन किया गया। कहीं-कहीं सड़कों पर योग की कक्षाएं भी आयोजित की गई।

बता दें कि वर्ष 1973 में कार फ्री डे की पहल तब हुई थी जब तेल पर संकट छाया था। परंतु वर्ष 2000 में यह वैश्विक आयोजन का रूप लेने लगा। वर्ल्ड कार फ्री नेटवर्क द्वारा इसकी शुरुआत की गई। आयोजकों का दावा है कि लगभग 1500 शहर इस साल से जुड़ चुके हैं। यूं तो रविवार यानी (22 सितंबर कार फ्री डे) को दुनिया के 100 से ज्यादा देशों के 1500 से ज्यादा शहरों में गाड़ियां चलना बंद रही…. लोग सड़कों पर लंच लेते व आराम करते नजर आए। कहीं-कहीं तो लोग सड़कों पर योग करते भी देखे गए।

यह भी बता देना उचित होगा कि लंदन में यह सबसे बड़ा कार फ्री डे माना गया क्योंकि वहां 200 से ज्यादा रास्तों पर ट्रैफिक पूरी तरह बंद रहा। सेंट्रल लंदन में भी वाहन बंद रहे। वहां के मेयर सादिक खान दिनभर साइकिल से पूरे शहर में घूमते नजर आए। टावरब्रिज पर “योग सेशन” रखा गया था। शॉपिंग सेंटर पर लोगों द्वारा पैदल चलकर खरीदारी करते देखा गया।

चलते-चलते यह भी बता दें कि फ्रांस की राजधानी पेरिस में चौथी बार कार फ्री डे का आयोजन हुआ। हाँ, कहीं-कहीं बुजुर्गों के लिए मोबिलिटी स्कूटर की छूट दी गई। बर्लीन में बुजुर्ग महिलाएं साइकिल को फूल और बैलून से सजाकर निकली। और तो और….. इसके अलावे भारत, चीन, जापान, इराक आदि में भी बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए।

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इंडोनेशिया में लगी आग से पड़ोसी देश मलेशिया के 1500 स्कूलों में छुट्टी घोषित

एक महीना पहले से इंडोनेशिया के  2 बड़े प्रांतों में आग की धुंध की वजह से स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है | इंडोनेशिया के सुमात्रा और बोर्नियो में लगभग एक महीना पहले आग लगी थी | इंडोनेशिया के बोर्नियो नेशनल पार्क तो आग से तबाह हो चुकी है | यह आग दिनों-दिन फैलती ही जा रही है | अब तक लगभग 3000 जगहों पर आग लग चुकी है | चारों तरफ धुआं का ज्यादा असर दिखाई देता है |

बता दें कि इस भयावह आग को बुझाने के लिए सेना को लगाया गया है | आग बुझाने के लिए 16,000 सैनिकों एवं 52 हेलीकॉप्टरों को लगाया गया है | आग इतना विकराल रूप धारण कर लिया है कि 6 राज्यों में तीन लाख 28 हज़ार हेक्टेयर में फैले जंगल राख हो चुके हैं जबकि हेलीकॉप्टरों से सैनिकों द्वारा लगातार कृत्रिम बारिश की जा रही है | इन हेलीकॉप्टरों द्वारा अब तक 3 करोड़ लीटर पानी और 275 टन नमक छिड़का जा चुका है |

यह भी जानिए कि पड़ोसी देश मलेशिया में दो रोज कमल जब बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी तथा गहरे धुंध की वजह से वाहनों का आवागमन अवरुद्ध होने लगा तब पूरे मलेशिया के डेढ़ हजार से ज्यादा स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई |

चलते-चलते यह भी बता दें कि इंडोनेशिया में लगी इस भीषण आग के चलते पड़ोसी देश सिंगापुर में भी धुंध छाने लगी है | मलेशिया और सिंगापुर से उड़ान भरने वाले 90 फ्लाइटों को रद्द कर दिया गया है | लोगों के बीच लगभग 200 एनजीओ द्वारा मुफ्त में फेस मास्क बांटे जा रहे हैं | अमेजन की आग की तरह यह आग भी लोगों को तबाह कर रही है |

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चन्दा मामा को छूने चला भारतीय चन्द्रयान- 2 का लैंडर “विक्रम”

आज 3 सितंबर  है और  दिन मंगलवार। आज से पहले यही हुआ कि चन्द्रयान-2 ने चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग की दिशा में एक और मील का पत्थर पार करने का रिकॉर्ड बना लिया है। सितंबर 2 को दोपहर दिन में आधे घंटे के दरमियान ‘विक्रम’ आर्बिटर से सही सलामत अलग हो गया और फिलहाल दोनों पांचवी कक्षा में घूम रहे हैं- चंद्रमा से जिसकी न्यूनतम दूरी 119 किलोमीटर तथा अधिकतम 127 किलोमीटर है।

बता दें कि आज यानी 3 सितंबर के बाद अगले दो दिन विक्रम अपनी कक्षा को छोटी करता जाएगा… 4 सितंबर को इसकी कक्षा में अंतिम बार बदलाव होगा…  5-6 सितंबर को लैंडर में लगे उपकरणों को मिशन डायरेक्टर बिहार के वैज्ञानिक अमिताभ की टीम द्वारा (इसरो के अध्यक्ष के.शिवन के निर्देशन में) जांच की जाएगी।

भारत ही नहीं सारा संसार 7 सितंबर को सिर ऊपर करके बिहार के वैज्ञानिक अमिताभ के कारनामे को देखता रह जाएगा जब लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा…. जबकि ऑर्बिटर अगले 1 वर्ष तक चंद्रमा की कक्षा में ही चक्कर लगाता रहेगा….. और चाँद की मैपिंग के साथ-साथ उसके बाहरी वातावरण का भी अध्ययन करता रहेगा।

चलते-चलते यह भी बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने सॉफ्ट लैंडिंग सरीखे जटिल कार्य को रूस द्वारा नकारे जाने के बाद खुद करने की ठान ली जो 6-7 सितंबर की दरमियानी भारत के लिए बेहद अहम रात होगी… लगभग 1:40 पर लैंडर विक्रम चंद्रमा पर उतरेगा तथा 5:00 बजे तड़के रोवर चाँद की सतह पर मॉर्निंग वॉक करना शुरू कर देगा और इसी के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा भारत !!!

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पीवी सिंधु की ऐतिहासिक उपलब्धि

ओलंपिक रजत पदक विजेता पीवी सिंधु ने इतिहास रच दिया। रविवार को स्विट्जरलैंड में बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप-2019 के फाइनल में उन्होंने जापान की खिलाड़ी नोजोमी ओकुहारा को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही सिंधु वर्ल्ड चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। गौरतलब है कि इससे पहले बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत के लिए महिला और पुरुष दोनों वर्गों में से किसी ने गोल्ड मेडल नहीं जीता था।
पीवी सिंधु ने नोजोमी ओकुहारा को सीधे गेमों में 21-7, 21-7 से पराजित किया। 38 मिनट तक चले इस मुकाबले को जीतने के साथ ही सिंधु ने 2017 के फाइनल में ओकुहारा से मिली हार का हिसाब बराबर कर लिया। ओकुहारा के खिलाफ सिंधु का कैरियर रिकार्ड अब 9-7 का हो गया है।
बता दें कि भारत ने इस टूर्नामेंट में अब तक तीन रजत और छह कांस्य पदक जीते थे। सिंधु इससे पहले इस टूर्नामेंट में 2017 और 2018 में लगातार दो बार फाइनल में हारी थीं। लेकिन इस बार उन्होंने इस सिलसिले को तोड़ दिया। इस टूर्नामेंट में 2013 से खेल रही सिंधु के नाम अब पांच पदक हो गए हैं। इनमें एक स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य शामिल हैं। विश्व की किसी भी महिला खिलाज़ी ने अब तक इतने पदक नहीं जीते। यह भी जानें कि फाइनल जीतने के साथ ही इस टूर्नामेंट में सिंधु द्वारा अब तक जीते मैचों की संख्या 21 हो गई है। उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से कोटिश: बधाई।

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