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अमीर देशों की सूची में भारत को छठा स्थान

दुनिया के सबसे अमीर देशों की सूची में भारत को छठा स्थान मिला है, जबकि अमेरिका शीर्ष स्थान पर काबिज है। न्यू वर्ल्ड वेल्थ 2017 की इस रिपोर्ट में भारत की कुल संपत्ति 8,230 अरब डॉलर और अमेरिका की कुल संपत्ति 64,584 अरब डॉलर बताई गई है। अमेरिका के बाद 24,803 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ चीन दूसरे और 19,522 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ जापान तीसरे स्थान पर है। बता दें कि कुल संपत्ति से मतलब हर देश/शहर में रहने वाले सभी व्यक्तियों की निजी संपत्ति से है। इसमें उनकी देनदारियों को घटाकर सभी संपत्तियां (प्रॉपर्टी, नकदी, शेयर, कारोबारी हिस्सेदारी) शामिल की जाती हैं। ध्यान रहे कि इस रिपोर्ट के आंकड़ों से सरकारी धन को बाहर रखा गया है।
बहरहाल, न्यू वर्ल्ड वेल्थ की इस सूची में ब्रिटेन चौथे स्थान (9,919 अरब डॉलर), जर्मनी पांचवें (9,660 अरब डॉलर), फ्रांस सातवें (6,649 अरब डॉलर), कनाडा आठवें (6,393 अरब डॉलर), ऑस्ट्रेलिया नौवें (6,142 अरब डॉलर) और इटली दसवें (4,276 अरब डॉलर) स्थान पर है। खास बात यह कि इन दिग्गज देशों के बीच भारत को 2017 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला संपत्ति बाजार बताया गया है। देश की कुल संपत्ति 2016 में 6,584 अरब डॉलर थी जो 2017 में 25% वृद्धि के साथ बढ़कर 8,230 अरब डॉलर हो गई है।
बकौल न्यू वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट, पिछले दशक (2007-2017) में भारत की कुल संपत्ति में 160% का उछाल आया है। 2007 में हमारी संपत्ति 3,165 अरब डॉलर थी जो 2017 में बढ़कर 8,230 अरब डॉलर हो गई है। करोड़पतियों की संख्या के लिहाज से बात करें तो भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है। यहां 20,730 करोड़पति हैं। जबकि अरबपतियों के लिहाज से देश का स्थान अमेरिका और चीन के बाद विश्व में तीसरा है। यहां 119 अरबपति हैं।

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सऊदी अरब ने दिया योग को खेल का दर्जा

एक ओर जहां भारत में योग और धर्म को लेकर अनावश्यक विवाद छिड़ा है, वहीं दूसरी ओर इस्लामिक देश सऊदी अरब में योग को एक खेल के तौर पर आधिकारिक मान्यता मिल गई है। जी हाँ, सऊदी अरब की ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने स्पोर्ट्स ऐक्टिविटीज के तौर योग सिखाने को आधिकारिक मान्यता दे दी है। सऊदी अरब में अब लाइसेंस लेकर योग सिखाया जा सकेगा।

इस संदर्भ में एक बेहद खास बात यह रही कि रूढ़िवादी माने जाने वाले सऊदी में योग को खेल के तौर पर मान्यता दिलाने का श्रेय नोफ मारवई नाम की महिला को जाता है। बता दें कि नोफ को सऊदी अरब की पहली योग प्रशिक्षक का दर्जा भी मिल गया है। देखा जाय तो वो इसकी सच्ची हकदार थीं। उन्होंने सऊदी में योग को खेल के तौर पर मान्यता दिलाने के लिए लंबे समय तक अभियान चलाया था।

अरब योगा फाउंडेशन की फाउंडर नोफ ने इस बाबत अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि “योग जिसका मतलब जोड़ होता है, यह शरीर से मन के मिलन, भावनाओं और आत्मा के मिलन का अभ्यास है। यह एक देश से होते हुए वैश्विक स्तर पर पहुंचते हुए सऊदी अरब भी पहुंच चुका है। इसने कट्टपंथी विचारधारा के बंधनों को तोड़ दिया है।” अपने पोस्ट में उन्होंने भारत सरकार और वाणिज्य दूतावास को ‘असीमित सहायता’ के लिए धन्यवाद भी दिया है।

चलते-चलते बता दें कि 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग को वैश्विक तौर पर स्वीकृति मिली थी और 21 जून को हर साल विश्व भर में योग दिवस मनाया जाता है। आज जरूरत इस बात की है कि हर देश में नोफ जैसे हौसले वाले लोग हों ताकि योग का परचम पूरे विश्व में एक समान फैले।

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तो क्या हेली होंगी अमेरिका की अगली राष्ट्रपति ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में पहले साल के कार्यकाल पर लिखी गई एक किताब इन दिनों खूब चर्चा में है। इसमें कई ऐसे दावे किए गए हैं दो ट्रंप और उनकी सरकार को असहज कर रहे हैं। इस किताब का नाम है ‘फायर एंड फ्यूरी: इनसाइड द ट्रंप व्हाइट हाउस’, जिसे माइकल वुल्फ ने लिखा है। वुल्फ का कहना है कि ट्रंप का व्हाइट हाउस में सफर खत्म हो सकता है। बकौल वुल्फ, ‘अचानक चारो तरफ लोग कह रहे हैं, ओ मॉय गॉड! यह आदमी सच में बेशर्म है। लोगों में यह अवधारणा बन रही है और ऐसा लग रहा है कि यह ट्रंप की कुर्सी लेकर रहेगी।’

उधर राष्ट्रपति ट्रंप इस किताब को ‘झूठ का पुलिंदा’ करार दे चुके हैं। उनके वकील ने इस किताब के प्रकाशन पर रोक लगाने की कोशिश की थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। किताब में लिखा गया है, ‘व्हाइट हाउस में पदासीन एक राष्ट्रपति को जो 2016 में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं था और उसके सहयोगियों को उसकी योग्यता पर शक था।’

ट्रंप ने शुक्रवार को ट्विटर के जरिए किताब के लेखक पर निशाना साधा और उनके पूर्व सहयोगी स्टीव बेनन ने किताब के बारे में लिखा, ‘माइकल वोल्फ एक झूठा इंसान है जो अपनी किताब को बेचने के लिए झूठी कहानियां गढ़ रहा है। व्हाइट हाउस ने कहा है, ‘यह किताब झूठ से भरी है और इसमें उन लोगों के हवाले से भ्रामक तथ्य रखे गए हैं जिनकी व्हाइट हाउस तक कोई पहुंच नहीं है।

इस किताब और इसके लेखक की मानें तो भारतीय मूल की निकी हेली ट्रंप की उत्तराधिकारी बन सकती हैं। बता दें कि भारतीय मूल की हेली प्रमुख अमेरिकी शहर साउथ कैरोलिना की गवर्नर रह चुकी हैं। निकी के माता-पिता भारतीय सिख हैं, जो अमेरिका जाकर बस गए थे। वुल्फ के अनुसार, ‘ट्रंप के एक करीबी सहायक इस बात को लेकर चिंता जताते हैं कि हेली ट्रंप से कहीं ज्यादा महत्वाकांक्षी और स्मार्ट हैं।’ उधर ट्रंप के करीबी इस बात को लेकर चिंतित बताए जाते हैं कि जिस तरह से निकी हेली का प्रभाव बढ़ रहा है, आगे चलकर वह सचमुच राष्ट्रपति पद की प्रबल दावेदार बन सकती हैं। बहरहाल, यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि वुल्फ के दावों में कितना दम है!

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हमारे जैसे आठ ग्रहों वाले सौरमंडल की खोज

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने महत्वपूर्ण खोज की है। एजेंसी ने पहली बार हमारे सौरमंडल की तरह ही आठ ग्रहों वाला नया सोलर सिस्टम ढूंढ़ने का दावा किया है। नासा ने बीते गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि केप्लर टेलीस्कोप की मदद से सुदूर अंतरिक्ष में आठ ग्रहों वाला नया सौरमंडल ढूंढ़ा गया है। अमेरिकी सामाचारपत्र इंडीपेंडेंट ने यह जानकारी दी है। अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में यह महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि प्रारंभिक आकलन में यह मनुष्यों के रहने योग्य नहीं है।

नासा वैज्ञानिकों ने केप्लर टेलीस्कोप से भेजे गए आंकड़ों का विश्लेषण करने में गूगल की आर्टीफिशियल तकनीक की मदद लेने की बात कही है। केप्लर टेलीस्कोप सूर्य सरीखे स्टार और उसके सौरमंडल के बारे में पहले ही पता लगा चुका था। लेकिन, अब नए ग्रहों की मौजूदगी का पता चला है। ऐसे में नए सौरमंडल में कुल आठ ग्रह हो गए हैं। हमारे सौरमंडल को छोड़ कर अंतरिक्ष में आठ ग्रहों वाला यह पहला सोलर सिस्टम है। नासा ने बताया कि एआई की मदद से केप्लर द्वारा मुहैया डाटा का नए तरीके से विश्वलेषण संभव हो सका है। नए सौरमंडल में केप्लर-90आई सबसे छोटा ग्रह है। यह नया ग्रह पृथ्वी की तुलना में 30 प्रतिशत ज्यादा बड़ा है। टेक्सास यूनिवर्सिटी (ऑस्टिन) के एस्ट्रोनॉमर एंड्रयू वांडरबर्ग ने बताया कि नया ग्रह पृथ्वी से बड़ा जरूर है, लेकिन वहां कोई जाना नहीं चाहेगा। हालांकि, इसकी मदद से अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में और जानकारी जुटाने की उम्मीद जताई जा रही है।

गौरतलब है कि केप्लर टेलीस्कोप को वर्ष 2009 में अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था। तब से यह पृथ्वी स्थित नियंत्रण कक्ष को डाटा भेज रहा है। इसकी मदद से हमारे सौरमंडल के बाहर कई सोलर सिस्टम का पता लगाया जा चुका है। केप्लर टेलीस्कोप अब तक 4,034 ग्रह या उसके समान आकाशीय पिंडों का पता लगा चुका है। इनमें से 2,335 की बाहरी ग्रह के तौर पर पुष्टि की जा चुकी है। इनमें से 30 पृथ्वी के आकार के हैं।

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और अब 85 भाषाओं में गाना गाएगी 12 साल की यह लड़की

आप एक साथ तीन-चार भाषाओं को जानने वाले कई लोगों को जानते होंगे। एक साथ पांच-छह भाषाओं को जानने वाले कुछ लोगों के बारे में भी आपको पता होगा। या फिर हो सकता है कि आपने दस-बारह भाषाओं को जानने वाले लोगों के बारे में भी सुन रखा हो। लेकिन अगर आपको कहा जाय कि कोई एक साथ 80 भाषाओं को जानता है, जानता ही नहीं, उन भाषाओं में एक साथ गाना भी गाता है तो शायद यकीन ना करें आप। जी हां, असंभव-सी लगने वाली यह बात सोलह आना सच है और यह करिश्मा जिसने किया है वह महज 12 साल की एक लड़की है। आपको और भी खुशी होगी जब आप जानेंगे कि दुबई निवासी यह लड़की भारतीय मूल की है और उसका नाम सुचेता सतीश है।

केरल से ताल्लुक रखने वाली सुचेता दुबई के इंडियन हाईस्कूल में 7वीं की छात्रा हैं। आपको बता दें कि महज एक साल में 80 भाषाओं में गाना सीखने वाली सुचेता ने अपना पहला गाना जापानी भाषा में गाया था। सुचेता के पिता जापान में त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं। बकौल सुचेता उन्हें विदेशी भाषा का गीत सीखने में दो घंटे लगते हैं। अगर गाने का उच्चारण आसान होता है, तो वह उसे और भी जल्दी सीख जाती हैं। सुचेता यह भी बताती है कि उसे सबसे ज्यादा मुश्किल फ्रेंच, जर्मन और हंगरियन भाषा सीखने में आई।

जरा ठहरिए, अगर आप सोच रहे हैं कि 80 भाषाओं में गाना गाकर सुचेता संतुष्ट है तो आप गलत हैं। 12 साल की यह लड़की अब गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी कर रही है और 29 दिसंबर को एक कंसर्ट में वह एक साथ 85 भाषाओं में गाने की कोशिश करने वाली है।

चलते-चलते आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल सबसे ज्यादा भाषाओं में गाना गाने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड आंध्र प्रदेश के केसिराजू श्रीनिवास के नाम है। श्रीनिवास ने 2008 में गांधी हिल में 76 भाषाओं में गाना गाकर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था।

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मिस वर्ल्ड का जवाब उससे भी सुन्दर !

1966 में रीता फारिया… भारत ही नहीं, सम्पूर्ण एशिया से बनने वाली पहली मिस वर्ल्ड… फिर 28 साल के इंतजार के बाद 1994 में ऐश्वर्या राय… इसके बाद अगले छह सालों में तीन मिस वर्ल्ड – 1997 में डायना हेडन, 1999 में युक्ता मुखी और 2000 में प्रियंका चोपड़ा… फिर 17 साल का इंतजार और अब मानुषी छिल्लर… मिस वर्ल्ड 2017… 118 देशों की सुन्दरियों में सर्वश्रेष्ठ..! भारत की बेटी ने एक बार फिर पूरी दुनिया में अपनी सुन्दरता – सिर्फ चेहरे की नहीं, सम्पूर्ण व्यक्तित्व की सुन्दरता – का लोहा मनवा लिया। चीन के सनाया में आयोजित की गई मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली मिस इंडिया मानुषी छिल्लर को मिस वर्ल्ड 2017 घोषित किया गया। इस प्रतियोगिता में दूसरे नंबर पर मिस मेक्सिको रहीं जबकि तीसरे नंबर पर मिस इंग्लैंड।

20 वर्षीया मानुषी की जीत की सबसे अहम बात यह रही कि वो ‘हेड टू हेड चैलेंज’ और ‘ब्यूटी विद पर्पस सेगमेंट’ दोनों में अव्वल रहीं। खास तौर पर अंतिम सवाल के जवाब से तो उन्होंने न केवल ज्यूरी बल्कि पूरी दुनिया का दिल जीत लिया। मानुषी से पूछा गया अंतिम सवाल था कि दुनिया में किस पेशे की सेलरी सबसे ज़्यादा होनी चाहिए और क्यों? मानुषी ने इसका बेहद खूबसूरत जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मेरी मां मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। इसलिए मैं कह सकती हूं कि मां होने की जॉब सबसे बेहतरीन है। बात केवल पैसे की नहीं है, बल्कि प्यार और सम्मान के लिहाज से, कोई भी मां सबसे ज्यादा वेतन की हकदार होती है।”

67वीं मिस वर्ल्ड मानुषी के व्यक्तित्व के कई पहलू हैं। वो मेडिकल की स्टूडेंट हैं और कार्डिएक सर्जन बनना चाहती है। उन्हें पैराग्लाइडिंग, बंजी जंपिंग और स्कूबा डाइविंग जैसे स्पोर्ट्स पसंद हैं। इसके अलावा मानुषी ट्रेंड इंडियन क्लासिकल डांसर हैं और स्केचिंग और पेंटिंग भी बनाती हैं। यही नहीं, मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में जाने से पहले मानुषी समाजसेवा के कार्यों से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने महिलाओं के पीरियड के दौरान हाइजीन से संबंधित एक कैंपेन में करीब 5000 महिलाओं को जागरूक किया है।

मिस वर्ल्ड बनना मानुषी के बचपन का सपना था। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया। अब भारत की इस बेटी को अपने सपनों को विस्तार देना है। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन से उन्होंने जैसी उम्मीद बंधाई है, उसे देख कोई भी लक्ष्य उनके लिए असंभव नहीं लगता। उज्जवल भविष्य के निमित्त उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ढेर सारी शुभकामनाएं!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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लंदन में क्यों खरीदना चाहती हैं ममता टैगोर का घर ?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लंदन के उस घर को खरीदना चाहती हैं जहां विश्वकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कुछ समय के लिए समय बिताया था। वह इसे भारतीय साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाने वाले टैगोर के संग्रहालय-सह-स्मारक का रूप देना चाहती हैं। टैगोर 1912 में कुछ महीनों के लिए उत्तरी लंदन के हैम्पस्टेड हीथ स्थित हीथ विलाज में रहे थे, जहां उन्होंने अपने कविता संग्रह ‘गीतांजलि’ का अनुवाद किया था। इस घर पर अभी भी नीले रंग की एक पट्टिका लगी हुई है, जिस पर लिखा है कि यहां भारतीय कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर रहे थे।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी इन दिनों ब्रिटेन के दौरे पर हैं। इस दौरान शनिवार को उन्होंने लंदन में कार्यवाहक भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक से एक घंटे तक मुलाकात की और टैगोर से जुड़ी इस धरोहर को अपनी सरकार की ओर से खरीदने की इच्छा जताई। ममता चाहती हैं कि ऐतिहासिक महत्व वाले इस घर को टैगोर के संग्रहालय-सह-स्मारक में तब्दील कर उन्हें एक यादगार श्रद्धांजलि दी जाए। इस घर की कीमत कुछ साल पहले 2.7 मिलियन पाउंड यानि लगभग 23 करोड़ रुपए थी। बता दें कि 2015 में ममता जब लंदन गई थीं तब भी उन्होंने इस पर चर्चा की थी। अब एक बार फिर ममता ने नई उम्मीद के साथ इस मुद्दे को उठाया है।

बता दें कि टैगोर 1912 में ब्रिटेन पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने लंदन में अपनी कई कविताओं का अनुवाद किया था। उस दौर में उनके साथियों में कई ब्रिटिश कलाकार और कवि शामिल थे। इनमें डब्ल्यू बी येट्स भी शामिल थे जिन्होंने ‘गीतांजलि’ का परिचय लिखा था। यह 103 अनुवादों का संग्रह था जिसने टैगोर को 1913 में साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिलाया था। टैगोर की स्मृति को सुरक्षित और संरक्षित रखने के निमित्त अपने इस प्रयास के लिए ममता बनर्जी नि:संदेह बधाई की पात्र हैं।

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रोबोट को इंसानों से अधिक अधिकार!

रोबोट… आधुनिक विज्ञान की उपज… इंसान की बनाई हुई एक चीज जो चाहे कितनी ही उन्नत तकनीक से क्यों न बनी हो, हमारी तरह सोच और महसूस नहीं सकती। हां, उसमें ‘समझदारी’ हम स्वयं से ज्यादा जरूर भर सकते हैं। पर क्या वो ‘समझदारी’ भी कृत्रिम नहीं होगी? क्या इस रोबोट को हम इंसानों वाली जगह दे सकते हैं? शायद ऐसा सोचना भी कुदरत की तौहीन होगी। लेकिन ‘विकास’ की सही परिभाषा से भटक चुकी हमारी सभ्यता अगर उसे इंसानों से भी ऊपर की जगह और अधिकार दे दे तो क्या कहेंगे आप?

जी हां, चौंकिए नहीं। ऊपर केवल संभावना नहीं व्यक्त की गई है। बल्कि यह अभी-अभी घटित एक कड़वी सच्चाई है। इसी हफ्ते सऊदी अरब में एक महिला रोबोट को नागरिकता दी गई है। यही नहीं, इस रोबोट को उतने अधिकार दिए गए हैं, जितने खाड़ी देशों में किसी सामान्य महिला को भी नहीं मिले हैं। सोफिया नाम की यह रोबोट अपने चेहरे के हावभाव बदल सकती है और लोगों से बातचीत भी कर सकती है।

विशेष अधिकार से नवाजी गई इस महिला रोबोट को इस हफ्ते रियाद में हुई इकोनॉमिक फोरम में पहली बार पेश किया गया। इस दौरान पैनल के साथ बातचीत करते हुए सोफिया ने कहा, इस अद्भुत मौके पर मैं बेहद सम्मान और गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। यह एक ऐतिहासिक मौका है जब किसी रोबोट को नागरिक के तौर पर पहचान मिली है। कार्यक्रम में सोफिया ने पोडियम से वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया और कार्यक्रम के मॉडरेटर और पत्रकार एंड्रयू रॉस सोरकिन के सवालों के जवाब भी दिए।

बहरहाल, सोशल मीडिया पर सोफिया की ख़बर आते ही डिबेट का दौर शुरू हो गया है। लोग इस बात की आलोचना कर रहे हैं कि इस रोबोट को सऊदी अरब की महिलाओं और वहां काम करने वाले विदेशी नागरिकों से ज्यादा अधिकार दे दिए गए हैं।

बहरहाल, सऊदी की मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर एंड इन्फोर्मेशन ने रोबोट के समर्थन में ट्वीट कर बताया कि हैनसन रोबोटिक्स द्वारा बनाई यह रचना फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनीशिएटिव समिट में प्रस्तुत होगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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जिन्ना की बेटी दीना का निधन

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का मानना था कि पाकिस्तान बनने के बाद सारे मुसलमान भारत छोड़ देंगे। पर उनका यह विश्वास उस वक्त खोखला साबित हुआ जब स्वयं उनकी बेटी ने भारत छोड़ने से इनकार कर दिया। हम यहां बात कर रहे हैं जिन्ना की इकलौती संतान दीना वाडिया की, जिनका गुरुवार को न्यूयॉर्क में निधन हो गया। वह 98 वर्ष की थीं। दीना के परिवार में बेटे नुस्ली वाडिया, डायना वाडिया और पोते नेस और जहांगीर वाडिया हैं। मुंबई में वाडिया ग्रुप के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में दीना वाडिया के देहांत की पुष्टि की गई है।

चेहरे से हू-ब-हू अपने पिता की तरह दिखने वाली दीना का जन्म अविभाजित भारत में 14-15 अगस्त की रात को 1919 में हुआ था। इतिहासकार स्टैनेली वॉल्पर्ट के मुताबिक, ‘दुनिया में उनका आगमन नाटकीय ढंग से हुआ था। जिन्ना और उनकी मां रति जिन्ना जब लंदन में एक थियेटर में फिल्म देख रहे थे, तब उनका जन्म हुआ था।’
गौरतलब है कि दीना वाडिया ने पारसी कारोबारी नेस वाडिया से शादी की थी और भारत विभाजन के पश्चात भारत में ही रहने का फैसला लिया था। जिन्ना इस बात से सख्त नाराज थे। जिन्ना के सहायक रहे मोहम्मद अली करीम छागला की एक किताब के मुताबिक जिन्ना ने जब अपनी बेटी से पूछा था कि भारत में हजारों मुसलमान हैं लेकिन तुम्हें एक नहीं मिला। इस पर दीना ने जवाब दिया था कि इस देश में हजारों मुस्लिम लड़कियां थीं लेकिन आपको शादी करने के लिए मेरी मां ही मिली। गौरतलब है कि दीना की मां रति भी पारसी समुदाय से आती थीं।

बहरहाल, बाद के दिनों में दीना अमेरिका में ही बस गई थीं। जहां तक पाकिस्तान से उनके ताल्लुक का प्रश्न है, अपने पिता की मौत के बाद वह पाकिस्तान गई थीं। इसके बाद 2004 में मुशर्रफ के दौर में उन्होंने पाक का दौरा किया था।

 

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नेहरा ने क्रिकेट को कहा अलविदा

बुधवार को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में खेला गया टी-20 मैच न्यूजीलैंड पर भारत की धमाकेदार जीत के साथ ही शानदार तेज गेंदबाज आशीष नेहरा के क्रिकेट को अलविदा कहने के कारण भी याद किया जाएगा। 38 वर्षीय नेहरा ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि न्यूजीलैंड के खिलाफ खिलाफ खेला जाने वाला यह मैच उनका आखिरी मैच होगा। नेहरा ने कहा था, “मेरे लिये यह अहम है कि ड्रेसिंग रुम में लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। सभी कह रहे हैं कि मैं एक-डेढ़ साल और खेल सकता था। मेरा हमेशा यह मानना रहा है कि ऐसे समय में संन्यास लेना चाहिए जब लोग ‘क्यों नहीं’ से ज्यादा यह कहें कि ‘क्यों’। मैं शिखर पर रहते हुए संन्यास लेना चाहता था।”

बहरहाल, अपने क्रिकेट करियर का समापन करने वाले इस तेज गेंदबाज को भारतीय टीम ने ट्रॉफी से नवाजा और उनके योगदान की सरहाना की। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने भी अनुभवी तेज गेंदबाज आशीष नेहरा को उनके आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच से पहले शुभकामनाएं दीं और कहा, “हर खिलाड़ी के लिए पहला और आखिरी मैच खास होता है। कई वर्षों तक भारतीय क्रिकेट में अपनी सेवाएं देने के बाद नेहरा अपने घर में विदाई के हकदार हैं।” नेहरा को खेल का महान दूत बताते हुए कपिल ने कहा, ‘आपने देश की सेवा काफी अच्छे से की।’

बता दें कि नेहरा की विदाई के मौके पर फिरोजशाह कोटला में साइट स्क्रीन के ऊपर ‘फेयरवेल आशीष नेहरा’ नाम का संदेश लिखा गया। यही नहीं, उनकी विदाई को यादगार बनाने के लिए फिरोजशाह कोटला स्टेडियम के एक छोर का नाम नेहरा के नाम पर रखा गया है। गौरतलब है कि नेहरा ने अपने 18 साल के लंबे करियर की शुरुआत फरवरी 1999 में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में की थी।

नेहरा का करियर चोटों से काफी प्रभावित रहा, लेकिन वह भारत के बेहतरीन गेंदबाजों में से एक रहे हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में उन्होंने कुल 117 टेस्ट, 120 वनडे और 26 टी-20 मैच खेले। टेस्ट में उनके नाम कुल 44, वनडे में 157 और टी-20 में 34 विकेट हैं। उन्हें डरबन में 2003 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 23 रन देकर छह विकेट लेने के लिए खास तौर पर याद किया जाता है। उन्होंने यह शानदार प्रदर्शन बीमार होने के बावजूद किया था। इस विश्व कप में जवागल श्रीनाथ, जहीर खान और नेहरा की तिकड़ी ने भारतीय टीम की सफलता में अहम रोल निभाया था। नेहरा 2011 में धोनी की कप्तानी में विश्व कप जीतने वाली टीम के भी सदस्य थे और सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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