पृष्ठ : दुनिया अबतक

पेरियार ई वी रामासामी की 142वीं जयंती डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा में मनाई

कोरोना के कोहराम के दरमियान ‘घर में रहें, सुरक्षित रहें’ के संदेश को जीवन का संबल बनाते हुए डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी सरीखे समाजसेवी-साहित्यकार द्वारा निज निवास ‘वृंदावन’ में पेरियार ई वी रामासामी की 142वीं जयंती मनाई गई।

डॉ.मधेपुरी ने आॅनलाइन श्रोताओं को अपने संबोधन में यही कहा कि पेरियार को हिंदू धर्म का ‘वाल्टेयर’ तथा एशिया महाद्वीप का ‘सुकरात’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि पेरियार ई वी रामासामी का जन्म 17 सितंबर, 1879 ईसवी को हुआ था एवं उनकी मृत्यु 24 दिसंबर, 1973 को हुई थी। बहुजनों का वह अप्रतिम योद्धा, त्यागी एवं संघर्षशील मसीहा ताजिंदगी ब्राह्मणवादी व्यवस्था के विरुद्ध विद्रोही चेतना के प्रखर नायक बने रहे।

पेरियार रामासामी का मानना था कि ईश्वरवाद से ही पुरोहितवाद का जन्म होता है और पुरोहित ईश्वर की आड़ में समाज का शोषण करता है। पेरियार की मान्यता थी कि जाति व्यवस्था जहां ब्राह्मणों की सबसे बड़ी ताकत है वहीं शूद्रों की सबसे बड़ी कमजोरी। पेरियार की इसी सोच ने मरते दम तक ब्राह्मणों की मान्यताओं एवं परंपराओं से समाज को दूर रहने की सलाहियत दी।

अंत में डॉ.मधेपुरी  ने सुनाया पेरियार का यह संदेश- “सभी मनुष्य समान रूप से पैदा होते हैं तो फिर अकेले ब्राह्मण ऊँच और अन्यों को नीच कैसे ठहराया जा सकता है। धार्मिक ग्रंथों को यह कहकर नकार दिया कि ये सारे काल्पनिक ग्रंथ हैं जो एक वर्ग को श्रेष्ठ एवं शेष समाज को नीच साबित करने के लिए लिखे गए हैं।”

सम्बंधित खबरें


राष्ट्रीय एकता के लिए भारतीय रेल, खेल, सरदार पटेल और हिन्दी जरूरी- डॉ.मधेपुरी

विगत वर्षों में प्रत्येक 14 सितंबर को हिन्दी दिवस विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के साथ-साथ समाहरणालयों में समारोह पूर्वक मनाया जाता रहा, परंतु 2020 का हिन्दी दिवस समारोह कोरोना के कहर के कारण फीका रहा। 70 वर्ष पुराने कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कोरोना के कारण इस बार निज निवास ‘वृंदावन’ में ही ऑनलाइन हिन्दी दिवस समारोह मनाया।

बता दें कि डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने संक्षेप में हिन्दी एवं हिन्दी दिवस के संबंध में विभिन्न प्रकार की जानकारियां देते हुए कहा-।

भारत को समेट कर रखने में भारतीय रेल, भारतीय खेल और सरदार पटेल का विशेष योगदान है, परंतु इससे भी अधिक योगदान है हिन्दी की, जिसमें भारत की एकता और अखंडता को बरकरार रखने की शक्ति है। यदि हिन्दी नहीं होती तो भारत एक नहीं होता…। अब हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा का गौरव पाने में अधिक देर नहीं लगेगी बशर्ते कि हम भारतीय को अंग्रेजी के प्रति बढ़ रहे मोह-भ्रम को भंग करना होगा। मोह-भ्रम को भंग करना इसलिए जरूरी है कि चीन, जापान और जर्मनी आदि जैसे उन्नत देशों को अपनी-अपनी राष्ट्रभाषा है। वे अंग्रेजी के मोह-भ्रम में कभी नहीं पड़े। डॉ.लोहिया जर्मन भाषा सीखने के बाद ही जर्मनी में पीएच.डी. की डिग्री ली थी।

आगे डॉ.मधेपुरी ने समाजवादी चिंतक व मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल द्वारा हिन्दी के संबंध में भारतीय संसद में व्यक्त किए गए विचार को संदेश स्वरूप उद्धृत करते हुए कहा-

अध्यक्ष महोदय ! मैं हिन्दी के लिए पागल नहीं हूं, परंतु भारत में अंग्रेजी को बनाए रखने की कोशिश भारतीय जनक्रांति के साथ विश्वासघात है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि हिन्दी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। दुनिया भर में 65 करोड़ लोगों की मातृ भाषा है हिन्दी। दुनिया में हर पांच में से एक आदमी हिन्दी में इंटरनेट का उपयोग करता है। विश्व में हिन्दी ही वैसी समृद्ध भाषा है जिसमें शब्दों का वही उच्चारण होता है, जो लिखा जाता है। वर्ष 1953 में पहली बार 14 सितंबर को “हिन्दी दिवस” का आयोजन हुआ था। तभी से यह सिलसिला बना हुआ है। इस दिन हिन्दी भाषा की स्थिति और विकास पर मंथन-चिंतन किया जाता है। भारत में फिलहाल 77% से भी ज्यादा लोग हिन्दी बोलते हैं

सम्बंधित खबरें


इंटरनेशनल लिटरेसी डे- 2020

प्रत्येक वर्ष संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने की शुरुआत 26 अक्टूबर 1966 को हुई थी । यह कार्यक्रम शिक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने हेतु किया जाता है। सर्वप्रथम ईरान के तेहरान में दुनिया से निरक्षरता को खत्म करने के लिए दुनिया भर में एक अभियान चलाने पर चर्चा की गई थी। इस वर्ष वैश्विक कोविड-19 महामारी के खतरे के अनुरूप यह “साक्षरता  शिक्षण और कोविड-19 संकट और उसके बाद” विषय पर केंद्रित किया गया। फलस्वरूप इस वर्ष इस वैश्विक संकट के मौके पर ‘शिक्षकों की भूमिका और बदली शिक्षा पद्धति’ पर जोर दिया गया और आगे भी दिया जाता रहेगा।

बता दें कि कोरोना काल में विश्व साक्षरता दिवस को सफल बनाने हेतु फिलहाल टीवी, रेडियो एवं इंटरनेट के जरिए शिक्षा के काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस साल साक्षरता दिवस के दिन संयुक्त राष्ट्र ने शिक्षा के मुद्दे पर कई प्रकार के ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया है। इसका उद्देश्य यही है कि लोग साक्षर होकर अपने आने वाले कल को बेहतर बना सके तथा  अंधेरी गलियों में उजियारा ला सके।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहां साक्षरता के मामले में देश का शीर्ष राज्य है केरल… जहां 96.2% लोग  साक्षर हैं, वहीं आंध्र प्रदेश इस मामले में सबसे निचले पायदान पर है जहां की साक्षरता दर 66.4% है। जानिए कि ब्रिटिश हुकूमत के समय देश में सिर्फ 12% लोग ही साक्षर थे।

सम्बंधित खबरें


ग्लोबल टीचर अवार्डी भारतीय अध्यापकों ने बताया- कैसी हो भविष्य की टीचिंग

वैश्विक आधुनिक शिक्षा जगत के नोबेल कहे जाने वाले ग्लोबल टीचर अवार्ड हेतु लगभग डेढ़ सौ देशों के 12 हजार टीचर्स में शाॅर्ट लिस्ट किए गए शीर्ष 50 शिक्षकों में जिन तीन भारतीय शिक्षकों ने अपना स्थान सुरक्षित किया, वे तीनों है-

1.रंजीत सिंह दिसाले, सरकारी स्कूल टीचर, सोलापुर (महाराष्ट्र)

2.विनीता गर्ग, दिल्ली की कंप्यूटर टीचर, और

3.शुभोजित पायने, अजमेर (राजस्थान)

बता दें कि महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देशवासियों से कहा कि सभी को अपने विकास के लिए शिक्षा में हो रहे नए बदलावों के बारे में जानना होगा तथा बच्चों को रुचि के साथ सीखने के लिए प्रेरित करना होगा। महामहिम ने पुनः कहा कि हमारे शिक्षक डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए अपने कौशल को समयानुकूल उन्नत बनाएं।

एक ओर जहां महामहिम राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि कोरोना के कारण आए इस अचानक बदलाव के समय पारंपरिक शिक्षा के माध्यमों से हटकर डिजिटल माध्यम से पढ़ाने में सभी शिक्षक सहज नहीं हो पा रहे थे, परंतु अल्पावधि में हमारे प्राध्यापकों ने डिजिटल माध्यम का उपयोग कर विद्यार्थियों से जुड़ने के लिए कड़ी मेहनत की, वहीं शिक्षक रंजीत सिंह दिसाले द्वारा 2014 में ही बनाई क्यूआर कोड किताबों से लाॅकडाउन में 8 देशों के 16 हजार बच्चे जुड़े और रूचि के साथ पढ़े। आज की तारीख में उसे एनसीईआरटी  इस्तेमाल कर रहा है। विनीता गर्ग और शुभोजीत पायने कंप्यूटर कोडिंग जैसे कठिन व जटिल विषय को सुगम बना कर संगीत और अन्य विषयों की पढ़ाई को सरल बना दिया है।

सम्बंधित खबरें


पंचतत्व में लीन हुए पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी

भारत के 13वें राष्ट्रपति थे भारत रत्न प्रणब मुखर्जी और उनका कार्यकाल रहा था 2012 से 2017 तक। अपने कार्यकाल को बेहतर तरीके से पूरा करके फिलहाल वे दिल्ली में 10, राजाजी मार्ग में रह रहे थे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रियों व दिग्गजों ने राजाजी मार्ग स्थित उनके निवास पर उनके पार्थिक शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। दिवंगत प्रणब मुखर्जी को सभी वर्गों का सम्मान प्राप्त होता रहा। वे आम लोगों के बीच रहना पसंद करते थे। अंतिम यात्रा भी आम लोग की तरह ही संपन्न हुई। एक सजे हुए एंबुलेंस में उनके  पार्थिव शरीर को लोधी  विद्युत शवदाह गृह में ले जाकर पुत्र अभिजीत मुखर्जी द्वारा मुखाग्नि देने के बाद संस्कारित किया गया।

बता दें कि राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक रहे प्रणब मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मिराती गांव में 11 दिसंबर 1935 को जन्म ग्रहण किया था। राजनीति शास्त्र से एमए प्रणब मुखर्जी लगभग 6 वर्षों तक विद्यानगर कॉलेज में प्राध्यापक रहने के बाद 1969 में राज्यसभा के सदस्य बने और 1982 में केंद्रीय वित्त मंत्री, 1995 में विदेश मंत्री और 2004 में रक्षा मंत्री बने। उन्हें पद्म विभूषण और फिर भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

चलते-चलते यह जानिए कि जिस कोरोना के कहर ने दुनिया में कोहराम मचा रखा है उसी कोरोना में 10 अगस्त 2020 को प्रणब मुखर्जी को अपनी चपेट में ले लिया और 31 अगस्त 2020 को उन्होंने 84 वर्ष की उम्र में दिल्ली के सैन्य अस्पताल में अंतिम सांस ली… और दुनिया को अलविदा कह दिया।

सम्बंधित खबरें


90 वर्षीय मशहूर शास्त्रीय गायक पंडित जसराज ने अमेरिका में ली अंतिम साँस

भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पद्म विभूषण पंडित जसराज का अमेरिका के न्यू जर्सी वाले निजी आवास पर सोमवार (17 अगस्त) को प्रातः 5:15 पर दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया। यह जानकारी उनकी सुपुत्री दुर्गा जसराज ने सर्वप्रथम दुनिया को यही कहते हुए दी-

हम सपरिवार प्रार्थना करते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण स्वर्ग के द्वार पर पिताश्री का स्वागत करें जहां वे अपना पसंदीदा भजन ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ उन्हें समर्पित करें।

बता दें कि 28 जनवरी 1930 को हरियाणा (हिसार) में जन्मे तथा 2020 के 28 जनवरी को अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले पंडित जसराज ने अपनी आखिरी प्रस्तुति 9 अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर पर फेसबुक लाइव के जरिए वाराणसी के संकट मोचन हनुमान मंदिर के लिए दी थी। उन्होंने न केवल भारत में बल्कि कनाडा और अमेरिका में भी शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ अर्ध-शास्त्रीय स्वरों के माध्यम से कुछ नामी शिष्यों को भी तैयार किया। कोरोना लॉकडाउन के चलते वे फिलहाल अमेरिका में ही अपनी पुत्री दुर्गा जसराज के पास रह रहे थे।

यह भी जानिए कि उनके समस्त प्रदर्शनों को एल्बम और फिल्म साउंडट्रैक के रूप में उनके शिष्यों ने तैयार किया है, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने तो विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार पंडित जसराज के सम्मान में खोजे गए एक नए ग्रह का नाम ही “पंडित जसराज” नाम दे डाला है।

ऐसे विश्व विख्यात भारतीय संगीतकार के निधन का समाचार सुनते ही मधेपुरा जिले के संगीत गुरुओं एवं उनके शिष्यों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। जिले के संगीत व कला प्रेमियों के लिए विभिन्न राजकीय आयोजनों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने हेतु जिला प्रशासन द्वारा लगातार संयोजक/अध्यक्ष चयनित किए जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार व संगीत्यानुरागी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी  द्वारा इस कोरोना काल में वैसे विश्वविख्यात पंडित जसराज को श्रद्धांजलि देने हेतु शोक सभा आयोजित करने के एवज में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत तबला वादक प्रो.योगेंद्र नारायण यादव, प्रो.रीता कुमारी, प्रो.अरुण कुमार बच्चन, प्रो.संजय परमार, शशि प्रभा, रेखा यादव, पुष्पलता, सुनीत साना, चिरामणी यादव, लाला भूपेन्द्र, डॉ.रवि रंजन सहित शिवाली सरीखे नन्हे-मुन्ने कलाकारों को भी शोकोदगार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया गया।

सम्बंधित खबरें


बाल्य काल से ही कवींद्र रवींद्र को प्रकृति से अगाध प्रेम था- डॉ.मधेपुरी

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा महाकवि रवींद्रनाथ टैगोर की 81वीं पुण्यतिथि मनाई गई। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने की और संचालन सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने किया।

विषय प्रवेश करते हुए अध्यक्ष श्री शलभ ने कहा कि कवींद्र रवींद्र बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नई जान फूंकने वाले युगदृष्टा थे। वे एकमात्र कवि थे जिनकी दो रचनाएं दो देशों भारत के लिए “जन गण मन….” और बांग्लादेश के लिए “आमार सोनार बांग्ला….” प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी है। साहित्य की सभी विधाओं में उन्होंने रचना की।

अपने लाइव प्रसारण में बोलते हुए सम्मेलन के संरक्षक, मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति व पूर्व सांसद डॉ.आरके यादव रवि ने कहा कि टैगोर और गांधी के बीच राष्ट्रीयता और मानवता को लेकर हमेशा वैचारिक मतभेद रहा। जहां महात्मा गांधी पहले पायदान पर राष्ट्रवाद को रखते थे वहीं टैगोर मानवता को राष्ट्रवाद से अधिक महत्व देते थे। डॉ.रवि ने यह भी कहा कि कवींद्र रवींद्र मानवीय चेतना के सशक्त स्वर थे, हैं और रहेंगे भी।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri paying homage to Ravindra Nath Tagor on 81st punyatithi at Vrindavan Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri paying homage to Ravindra Nath Tagore on 81st Punyatithi at Vrindavan Madhepura.

संस्था के सचिव व समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि टैगोर कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार ही नहीं बल्कि उच्च कोटि के नाटककार, निबंधकार और चित्रकार भी थे। उन्हें बाल्यकाल से ही प्रकृति से अगाध प्रेम था। असाधारण सृजनशील रवींद्र नाथ को गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डॉ.मधेपुरी ने बच्चों के साथ अपने निवास (वृंदावन) पर टैगोर के तैल चित्र पर श्रद्धा पूर्वक पुष्पांजलि करते हुए यही कहा कि रवींद्र संगीत युग-युग तक बांग्ला साहित्य में सदैव ऊर्जा का संचार करता रहेगा।

प्रो.मणि भूषण वर्मा ने कहा कि उनके गीतों में आध्यात्मवाद के विभिन्न रूपों को बखूबी उकेरा गया है जिसे पढ़ने से उपनिषद की भावनाएं  परिलक्षित होती है। इस लाइव प्रसारण में डॉ.अरविंद श्रीवास्तव ने सम्मिलित हुए सभी साहित्यकारों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

सम्बंधित खबरें


कोविड-19 से 7 लाख से अधिक लोगों की मौत अब तक हो चुकी है

विश्व स्तर पर कोविड-19 से अब तक 1 करोड़ 80 लाख लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं और 7 लाख से अधिक लोगों ने मौत को गले लगाया है।

भारत में प्रतिदिन कोरोना संक्रमण के 50 हजार से ज्यादे मामले आ रहे हैं। देश में अब तक लगभग 13 लाख  लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। कल तक कोरोना वायरस के कुल पुस्ट मामले 19 लाख के आंकड़े पार कर चुके हैं तथा 40 हजार से अधिक लोग मौत के आगोश में सदा के लिए सो चुके हैं। गत 30 जुलाई से यह लगातार सातवां दिन है जब कोरोना संक्रमण के मामले प्रतिदिन 50,000 से ज्यादे आ रहे हैं।

बता दें कि बिहार में कोरोना मरीजों की कुल संख्या 68 हजार पार कर गई है। बिहार में गत 24 घंटों में कोरोना के कुल 3416 नए मरीज मिले हैं। कोरोना पॉजिटिव की सर्वाधिक संख्या जहां पटना में 603 है वहीं कटिहार में 234, पूर्वी चंपारण में 190, वैशाली में 163, समस्तीपुर में 139, मुजफ्फरपुर में 118, रोहतास में 106, नालंदा में 102, सहरसा में 101 और मधेपुरा में मात्र 44 मिले हैं। चारो और दहशत का माहौल है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि कोरोना संक्रमण ने देश की अर्थव्यवस्था को तो चौपट कर ही दिया है, ऊपर से पाकिस्तानी टीडी दल फसल को बर्बाद करके किसानों को भी बेदम कर दिया और बचा-खुचा जो था उसे आधे से अधिक भारत में बाढ़ आ कर बहा ले गई। संकट की ऐसी घड़ी में श्री राम भी अपने लिए घर नहीं बनाते, बल्कि अपनी सुविधाओं में कटौती कर प्रजा के हितार्थ अस्पताल, बांध, बैरेज आदि बनाने में लग जाते।

सम्बंधित खबरें


अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु प्रधानमंत्री द्वारा भूमि पूजन

अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के बंद ताले को देश के युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही सर्वप्रथम खोला था। नरेंद्र मोदी तो नौवाँ प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने कानून के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से श्री राम मंदिर निर्माण हेतु आज 5 अगस्त को अयोध्या में भूमि पूजन कर क्रांतिकारी इतिहास रच दिया है। इस बीच में अटल बिहारी बाजपेयी जैसे सर्वमान्य, जनप्रिय व संकल्प के धनी प्रधानमंत्री के कार्यकाल में उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के सोमनाथ से अयोध्या तक की राम-रथ-यात्रा संपूर्ण भारत को किस कदर आंदोलित किया था उसे बच्चा-बच्चा जानता है।

कोरोना के कहर से आज संपूर्ण संसार में कोहराम मचा हुआ है और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजन को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लिए सौभाग्य की बात कहते हुए यही कहा- “सदियों का इंतजार खत्म हुआ। पूरा देश रोमांचित है। आज पूरा भारत भावुक है। आज सियाराम की गूंज पूरेे विश्व में है। टेन्ट के नीचे रहे  सियाराम अब भव्य मंदिर में रहेंगे। राम भारत की मर्यादा है। राम सबके हैं, राम सब में है। यह मंदिर राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा। राम का काम करने पर चैन मिलता है।”

जहां राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा है- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम सर्वोत्तम मानवीय गुणों का स्वरुप है। राम प्रेम है, वे कभी घृणा में प्रकट नहीं हो सकते। राम करूणा है, वे कभी क्रूरता में प्रकट नहीं हो सकते और राम न्याय है, वे कभी अन्याय में प्रकट नहीं हो सकते- वहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि ये भूमि पूजन व राम मंदिर निर्माण आदि सांस्कृतिक समागम, राष्ट्रीय एकता एवं विश्व बंधुत्व का कार्यक्रम बनना चाहिए।

भाकपा माले ने आज के दिन को काला दिवस करार दिया परंतु देश के लोग जो अयोध्या नहीं पहुंचे वे क्या कहते हैं ?

उनका कहना है कि जिन भाजपा वालों ने पुरुषोत्तम भगवान राम को टेंट से भव्य मंदिर में लाने की बात कही, आजादी के संघर्ष से इसकी तुलना की और यह भी कि राम का काम करने पर ही चैन मिलता है। जिन कांग्रेसियों ने भगवान राम के प्रेम, करुणा और न्याय की बात की और जिन कम्युनिस्टों ने आज के दिन को काला दिवस कहा-  क्या वे यही न्याय करते रहेंगे कि 35 वर्षों तक सर्विस करने वालों को पेंशन नहीं और दो दिन भी सेवक या प्रधान सेवक  के रूप में विधायक-सांसद रहने पर उनके परिजन सदा पेंशन के हकदार बने रहेंगे। वे अपने से अपना वेतन (चाहे कम्युनिस्ट ही क्यों ना हो) जब चाहें जितना चाहें बढ़ाते रहेंगे और सर्विस करने वाले राष्ट्र निर्माता नियमित या नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन और समान सुविधाओं से वंचित रखेंगे। राजा राम की तरह खुद के लिए शासक कुछ ना सोचें जो कुछ करें वह देश की जनता के लिए  न्यायपूर्वक  करें।

सम्बंधित खबरें


बढ़ते अनलॉक के साथ कोरोना ने भारत की टेंशन बढ़ा दी

जानलेवा कोरोना वायरस के चलते भारत में पिछले 24 घंटे में 19 हजार 1 सौ 48 संक्रमित नए केस मिले जबकि 435 लोगों की मौत हो गई। सरकारी आंकड़े के अनुसार देश में अब तक कोरोना मरीजों की कुल संख्या 5 लाख 66 हजार 840 पार करने वाली है तथा अब तक इस कोरोना वायरस ने कुल 17 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली है।

यह भी बता दें कि देश में जहां 2 लाख 26 हजार 947 केस एक्टिव है वहीं ठीक होने वाले मरीजों की कुल संख्या 3.5लाख है। आगे 1 जुलाई से शुरू होने वाले अनलॉक-2 के बाद कोरोना विशेषज्ञों की मानें तो कोविड-19 के मामले बढ़ने की आशंका है।

जानिए कि चीन के वुहान शहर से 6  महीना पहले निकलकर सारी दुनिया में आतंक मचा दिया है और दुनिया के लगभग सभी देशों की एक करोड़ से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। अब तो सावधानियों को नकारने के चलते प्रतिदिन लगभग एक लाख 150,000 यानि डेढ़ लाख लोग इसकी चपेट में आते जा रहे हैं।

सम्बंधित खबरें