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बढ़ते अनलॉक के साथ कोरोना ने भारत की टेंशन बढ़ा दी

जानलेवा कोरोना वायरस के चलते भारत में पिछले 24 घंटे में 19 हजार 1 सौ 48 संक्रमित नए केस मिले जबकि 435 लोगों की मौत हो गई। सरकारी आंकड़े के अनुसार देश में अब तक कोरोना मरीजों की कुल संख्या 5 लाख 66 हजार 840 पार करने वाली है तथा अब तक इस कोरोना वायरस ने कुल 17 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली है।

यह भी बता दें कि देश में जहां 2 लाख 26 हजार 947 केस एक्टिव है वहीं ठीक होने वाले मरीजों की कुल संख्या 3.5लाख है। आगे 1 जुलाई से शुरू होने वाले अनलॉक-2 के बाद कोरोना विशेषज्ञों की मानें तो कोविड-19 के मामले बढ़ने की आशंका है।

जानिए कि चीन के वुहान शहर से 6  महीना पहले निकलकर सारी दुनिया में आतंक मचा दिया है और दुनिया के लगभग सभी देशों की एक करोड़ से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। अब तो सावधानियों को नकारने के चलते प्रतिदिन लगभग एक लाख 150,000 यानि डेढ़ लाख लोग इसकी चपेट में आते जा रहे हैं।

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संसार के सभी देशों ने मनाया आज 6वाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

2020 में कोविड-19 के चलते अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम डिसाइड की गई है- “Yoga For Health…. Yoga From Home.”

तभी तो पीएम ने अपने संदेश में कहा कि “योगा विद फैमिली एंड योगा एट होम” को सभी भारतीय ही नहीं, समस्त संसार अपनाएं। पीएम मोदी ने गीता को उद्धृत करते हुए कहा कि कर्म की कुशलता ही योग का मंत्र है। योग के द्वारा हम सर्वाधिक कर्मयोगी बन सकते हैं तथा विपरीत परिस्थितियों में भी पॉजिटिव सोच रख सकते हैं।

बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की पहल की थी। तब से भारत समेत दुनिया के सभी देश 21 जून 2015 से यह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है। इस बार सारा विश्व 6वाँ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कोरोना के कारण घर के अंदर अपने फैमिली केेेे साथ मना रहा है।

यह भी जानिए कि योग को घर-घर तक पहुंचाने वाले योग ऋषि स्वामी रामदेेेेव इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हमें क्या संदेश देते हैं-

योग के द्वारा जीवन का रूपांतरण होता है। योग से चेतना जागृत होती है। योग को जीवन की दिनचर्या में डालने के पश्चात सभी बच्चे जब शरीर से बलवान, मस्तिष्क से प्रज्ञावान बनेंगे तभी भारत महान बनेगा। योग सदा जोड़ता है- इंसान को इंसान से। मन की एकाग्रता के लिए योग जरूरी है। योग से संतुलन बना रहता है- शरीर का संतुलन, मन का संतुलन और संपूर्ण जीवन का संतुलन। संतुलन ही योग है और यह बिगड़ जाए तो खड़ा सामने रोग है।

 

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हमारे जवान मारते-मारते शहीद हुए, व्यर्थ नहीं जाएगा बलिदान- पीएम मोदी

चीन द्वारा लद्दाख जिले के गलवान घाटी में किए गए कायरता पूर्ण हमले में शहीद हुए 20 भारतीय जवानों के लिए प्रधानमंत्री ने देशवासियों से यही कहा-

“हमारे जवान चीनियों को मारते-मारते शहीद हुए हैं, उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। मैं देश को इस बात के लिए आश्वस्त करता हूं। हमारे लिए देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि है। भारत शांति चाहता है, लेकिन माकूल जवाब देने का सामर्थ भी रखता है।”

बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वाधिक मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान कहा कि शहीद जवानों पर देश को गर्व है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि प्रधानमंत्री ने 130 करोड़ भारतवासियों से यही कहा कि भारत अपने स्वाभिमान एवं हर एक इंच जमीन की रक्षा करेगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा-

“गलवान घाटी में शहीद हुए भारतीय जवानों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं तथा जवानों के परिवार को भरोसा दिलाता हूं कि देश आपके साथ है….., स्थिति कुछ भी हो हर हाल में देश आपके साथ खड़ा है।”

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विश्व रक्तदान दिवस- 2020

14 जून को विश्व रक्तदान दिवस या विश्व रक्तदाता दिवस यानि वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जाता है। वर्ल्ड ब्लड डोनर डे का मुख्य उद्देश्य रक्तदान को बढ़ावा देना है।

बता दें कि संसार में पहली बार वर्ष 2004 के 14 जून को “विश्व रक्तदान दिवस” मनाया गया था। इसकी शुरुआत डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) द्वारा पहली बार की गई थी।

जानिए कि डब्ल्यूएचओ को यह पता था कि ब्लड ग्रुप खोजने का श्रेय जिस नोबेल पुरस्कार विजेता कार्ल लैंडस्टेनर को जाता है उनका जन्मदिन है 14 जून। और यही कारण है कि डब्ल्यूएचओ द्वारा विश्व रक्तदान दिवस प्रतिवर्ष 14 जून को आयोजित किया जाने लगा, मनाया जाने लगा। यह भी जान लेना उचित होगा कि ब्लड ग्रुप की खोज के लिए कार्ल लैंडस्टेनर को 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

विश्व रक्तदाता दिवस- 2020 का थीम है- Safe Blood Save Lives यानि सुरक्षित रक्त, बचाए जीवन। दूसरा यह कि “रक्त दें और दुनिया को एक सेहतमंद जगह बनाएं”। यह भी कि रक्तदान वही व्यक्ति करें जो 18 वर्ष से अधिक और 50 वर्ष के बीच हो तथा उसका वजन 50 किलोग्राम से अधिक हो। रक्तदान करने से हार्ट अटैक का खतरा कम होता है।

मधेपुरा में समिधा ग्रुप, प्रांगण ग्रुप एवं सृजन दर्पण ग्रुप आदि के युवाओं द्वारा प्रतिवर्ष रक्तदान किया जाता है। इस वर्ष भी इन संगठनों के अतिरिक्त अन्य लोगों ने भी रक्तदान किया है।

 

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“विश्व बाल श्रम निषेध दिवस” पूरी दुनिया हर साल 12 जून को मनाती है

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून को मनाए जाने का उद्देश्य क्या है ? अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ द्वारा 2002 के 12 जून से इस दिन को मनाए जाने का उद्देश्य यही है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम ना कराकर उन्हें शिक्षा दिलाने के लिए जागरूक करना है।

बता दें कि प्रतिवर्ष 12 जून के दिन इस विश्व दिवस पर बाल श्रमिकों की दुर्दशा को उजागर करने हेतु नियुक्ताओं, सरकारों, श्रमिक संगठनों सहित दुनिया भर के लाखों लोगों को जागरूक किया जाता है। ऐसा इसलिए कि इसे मिटाने या इसके खिलाफ लड़ने के तरीके खोजे जा सके।

यह भी जानिए कि चंद रुपयों के लिए कम उम्र के बच्चों को तस्करी एवं वेश्यावृत्ति जैसी अवैध गतिविधियों के लिए मजबूर किया जाता है। इसी वजह से आम लोगों को बाल श्रम की समस्या के बारे में जागरूक करने तथा उनकी मदद करने के लिए इस दिवस को विगत 18 वर्षों से मनाया जाता है।

इस वर्ष “विश्व बाल श्रम निषेध दिवस” की थीम “कोरोना वायरस के दौर में बच्चों को बचाना” है। बच्चों के द्वारा कराए गए बाल श्रम एवं चाइल्ड ट्रैफिकिंग पर काम करने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने भारतीय बच्चों के शोषण के सभी रूपों को समाप्त करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करने की दिशा में काम करना सरकार से लेकर सामाजिक संगठनों के लिए जरूरी बताया है।

 

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अमेरिका में रहने वाले 40 हजार भारतीय… भारत लौटने को बेताब

कोरोना के तांडव के चलते संसार के सभी देशों में तहलका मचा हुआ है। अमेरिका जैसा सुपर पावर भी बुरी तरह कोरोना की चपेट में आ गया है। लाखों लोगों ने कोरोना वायरस के चलते मौत को गले लगा लिया है। अब तक दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना के उपचार हेतु दवाई तलाशने में ही लगे हैं।

बता दें कि कोरोना से बचने के लिए दुनिया के सर्वाधिक देशों में सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने के लिए लाॅक डाउन शुरू कर दिया गया है। फैक्ट्रियां बंद कर दी गई हैं। रेलगाड़ियों से लेकर हवाई जहाजों तक बंद किए गए। आवश्यक दुकानों को छोड़ सभी दुकानों को भी बंद किए गए। मंदिर से लेकर मस्जिद तक लॉक डाउन में बंद किए गए। बिहार के 25 लाख में से लगभग 15 लाख मजदूर देश के महानगरों से अपने-अपने घर लौट गए। कितने तो पैदल ही हजार-हजार किलोमीटर चलते हुए घर पहुंचे हैं।

बता दें कि अमेरिका में रह रहे करीब 40 हजार  भारतीय स्वदेश वापसी के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। लगभग 5000 भारतीय लौट भी चुके हैं। शेष भारतीय अपने वतन लौटने को बेताब हैं…… वे जल्द से जल्द घर वापस आने को आतुर हैं। बकौल भारतीय राजदूत “बंदे भारत मिशन” के तहत अब तक 16 उड़ानें रवाना हो चुकी है। तीसरा घर वापसी मिशन जून 11 से जुलाई के अंत तक चलेगा। इस चरण में 35 हजार भारतीयों को भेजा जाएगा।

चलते-चलते यह भी जानें कि खाड़ी देश सऊदी अरब में फंसे 1600 भारतीयों को वापस भेजने के लिए सऊदी की एक कंपनी ने चार्टर्ड फ्लाइटें बुक कर ली है।

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टिड्डियों के आतंक से भारत परेशान

भारत में टिड्डियों के आतंक का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। राजस्थानी टिड्डियों की टोली से परेशान हो रहा है भारत के बाकी राज्यों का किसान समुदाय। अब तो टिड्डियों की टीम का खतरा शहरों तक आ पहुंचा है। दिल्ली भी इस खतरे से जूझ रहा है। कई राज्यों ने तो टिड्डियों के दल से निपटने हेतु कमर कस ली है।

बता दें कि कोरोना काल के बीच में ही अचानक टिड्डियों की टोली नई मुसीबत बनकर भारतीय किसानों की नींद उड़ाने में लग गई है। भारत के कई राज्यों में लाखों-करोड़ों की तादाद में आए टिड्डियों ने किसानों की नाक में दम कर दिया है। अब तक टिड्डियों द्वारा देश में 10 करोड़ की फसल बर्बाद की जा चुकी है। लाखों किसान भूखमरी के कगार पर खड़े होकर परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा ड्रोन की सहायता से छिड़काव किया जा रहा है। कुछ मुख्यमंत्रियों द्वारा इमरजेंसी बैठकें बुलाई जा रही हैं।

चलते-चलते यह भी जानिए कि 27 वर्षों के बाद टिड्डियों का यह आतंक किसी भी रूप में कोरोना के कहर से कम नहीं है। 1 घंटे में टिड्डियों के दल ढाई हजार लोगों का भोजन चट कर जाता है। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के 1 लाख 25 हज़ार एकड़ जमीन की फसल को बर्बाद कर दिया है। टिड्डियों ने राज्य सरकार के साथ-साथ भारत सरकार की भी नींद हराम कर दी है।

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बिहार की बेटी ज्योति ने राष्ट्रपति ट्रंप की बेटी इवांका को बनाया दीवाना

जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का…. तो फिर देखना फिजूल है बिहार की बेटियों के लिए कद आसमान का। कामयाबी का जुनून यदि अंदर विद्यमान हो तो बाहर मुश्किलों की क्या औकात रह जाती है बिहारी बेटियों के लिए। ऐसी ही बेटियों में एक 15 साल की बिहारी बेटी है ज्योति जिसने कोरोना लाॅक डाउन के दरमियान 7 दिनों में 1200 किलोमीटर का लंबा सफर (हरियाणा के गुरुग्राम से बिहार के सिरहुल्ली दरभंगा तक) अपने मजबूर पिता को साइकिल पर बिठाकर तय किया।

बता दें कि मजदूर पिता मोहन एवं माता फूलो की इस पुत्री ज्योति के ऐसे साहसिक कदम को देखते हुए भारतीय साइकिलिंग फेडरेशन ने ट्रायल के साथ-साथ सम्मानित करने के लिए भी उन्हें दिल्ली बुलाया है। ज्योति के इस साहसिक कदम के लिए नवभारत टाइम्स ने भी उनसे संपर्क किया है। अब तो ज्योति की मदद के लिए कई हाथ उठने लगे हैं।

यह भी जानिए कि विश्व के शक्तिशाली राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने बिहार की इस बेटी की जमकर सराहना की। जहां दरभंगा पहुंचने पर ज्योति को ₹20000 देकर पुरस्कृत करते हुए यह भी कहा गया कि उसकी पढ़ाई का खर्चा भी लोग उठाएंगे वहीं लगे हाथ दिल्ली से साइकिल पर रेस लगाने हेतु फोन आया और यह भी कहा गया ज्योति को दिल्ली में ही रखेंगे और वही पढ़ाएंगे लिखाएंगे।

चलते चलते यह भी कि ज्योति साइकिल पर रेस लगाना चाहती है… वह पढ़ना भी चाहती है और ऐसे साहसिक कदम उठाने के लिए चारों ओर लगातार हो रही तारीफ की जानकारी पाकर ज्योति बिहार की बेटियों से यही कहना चाहती है- मैंने सपने में भी कभी नहीं सोची थी कि ऐसा दिन आएगा।

ज्योति के ऐसे साहसिक कदम के बारे में जानकारी मिलते ही समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने यही कहा- ज्योति ने यह साबित कर दिखा दिया है कि कोई जगत-जननी नारी को कमजोर नहीं समझे। नारी तो उत्साह, चेतना और प्रेरणा का संगम है। ज्योति ने आधी आबादी को अच्छी तरह संस्कारित कर दिया है… झकझोर दिया है तथा ऊंची उड़ान के लिए हौसला बुलंद कर दिया है।

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भारतीय बच्ची श्रव्या को ट्रंप ने कोविड-19 को लेकर पुरस्कृत किया

अमेरिका में कोरोना ने जो तांडव मचा रखा है वह किसी से छिपा नहीं है। अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना से निपटने के लिए अग्रिम मोर्चे पर तैनात डॉक्टरों, नर्सों एवं दमकल विभाग के कर्मचारियों को कुकीज व कार्ड भेजने वाली आंध्र प्रदेश की 10 वर्षीय श्रव्या अन्नापरेड्डी को सम्मान के साथ पुरस्कृत किया।

बता दें कि श्रव्या के माता-पिता वर्तमान में अमेरिका में ही रहने लगे हैं और श्रव्या “गर्ल स्काउट ग्रुप” की सदस्य भी है। 10 वर्षीय श्रव्या मैरीलैंड के हनोवर हिल्स एलीमेंट्री स्कूल के क्लास फोर्थ की छात्रा है।

यह भी बता दे कि श्रव्या अन्नापरेड्डी जो ‘गर्ल स्काउट’ की उन तीन बच्चियों में शामिल है जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवं अमेरिका की प्रथम महिला मिलेनिया ट्रंप ने शुक्रवार को कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए अग्रिम मोर्चे पर तैनात कोरोना वारियर्स की मदद करने हेतुु ससम्मान पुरस्कृत किया।

चलते-चलते यह भी कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि जो कोई इस कठिन समय में हमें मदद कर अपने स्नेह में बांधता है और हमें नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है उसे सम्मानित करना हमारा परम कर्तव्य है। इन लड़कियों ने कोरोना वारियर्स को कुकीज के 100 डिब्बे भेजे थे तथा हाथ से बनाकर 200 कार्ड भी स्नेह की डोरी से बांधकर भेजे थे।

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लॉक डाउन में रवीन्द्र नाथ टैगोर की 160वीं जयंती मधेपुरा में इस तरह मनी

मधेपुरा की सबसे पुरानी साहित्यिक संस्था कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन जहां कोरोना संक्रमण के कारण गुरुदेव रवीन्द्र नाथ ठाकुर की 160वीं जयंती 7 मई को आयोजित नहीं की जा सकी। सम्मेलन के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ के निदेशानुसार सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने लाॅकडाउन के दरमियान सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए अपने परिवार के सदस्यों के बीच नोबेल पुरस्कार से सम्मानित एक सशक्त कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, निबंधकार, नाटककार, चित्रकार के साथ-साथ एक महान शिक्षक रवीन्द्र नाथ टैगोर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहा-

कि 7 मई के ही दिन 1861 ई. में कोलकाता के देवेंद्र नाथ टैगोर के घर चौदहवीं संतान के रूप में एक बालक रवीन्द्र ने जन्म ग्रहण किया था। उसने 8 वर्ष से लिखना आरंभ किया। उसकी कविता 12 वर्ष में एवं लघु कथा 16 साल की उम्र में प्रकाशित हुई। वर्ष 1910 में उन्होंने गीतांजलि की रचना की जिसे 10 दिसंबर 1913 को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्व का सर्वश्रेष्ठ सम्मान “नोबेल पुरस्कार” पाने वाला पहला भारतीय बने रवीन्द्र नाथ टैगोर।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने पुनः कहा कि 3 देशों के राष्ट्रगान से गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का नाम जुड़ा है। भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन…..” और बांग्लादेश का राष्ट्रगान “आमार सोनार बांग्ला….” तो उनकी ही रचनाएं हैं। तीसरा देश श्रीलंका  जिसका राष्ट्रगीत “श्रीलंका मथा….” भी गुरुदेव की कविताओं की प्रेरणा से बना है।

चलते-चलते यह भी कि बचपन में इस नोबेल पुरस्कार विजेता को स्कूल की दीवारें बंधन जैसा लगता था जिसके कारण उन्होंने बड़े होकर शांति निकेतन की स्थापना की। आज दुनिया उसे विश्व भारती यूनिवर्सिटी के नाम से पुकारती है।

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