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पार्टी का आधार बढ़ाने को अभियान छेड़ेगा जदयू व्यावसायिक प्रकोष्ठ

जदयू व्यावसायिक प्रकोष्ठ ने पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। प्रकोष्ठ के पटना महानगर, पटना ग्रामीण और बाढ़ इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधानपार्षद सह प्रकोष्ठ के संयोजक श्री ललन सर्राफ थे, जबकि जदयू के प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य तथा मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में व्यावसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री अरविन्द कुमार निराला उर्फ सिन्दूरिया, कोषाध्यक्ष श्री नीलू मशकरा, महासचिव श्री गणेश कानू, श्री नगीना चौरसिया, श्रीमती बेबी मंडल, पटना ग्रामीण के जिलाध्यक्ष श्री माणिक लाल, पटना महानगर के प्रभारी श्री उपेन्द्र विभूति एवं श्री अमरदीप पप्पू, श्री रीतेश कुमार, श्री रणजीत गुप्ता, श्री राजेश गुप्ता, श्री मिथिलेश कुमार, मो. अली समेत तीनों जिला इकाई के सैकडों सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित थे। इस मौके पर लगभग 250 लोगों ने जदयू की सदस्यता लेते हुए जदयू की नीतियों और दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के आदर्शों पर चलने की शपथ ली।
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में श्री ललन सर्राफ ने कहा कि जदयू के प्रति निष्ठा रखने वाले हर साथी को समझना होगा कि हमारी पार्टी और हमारे नेता कैसे औरों से अलग हैं। उन्होंने कहा कि गांधी, जेपी, लोहिया, अंबेडकर और कर्पूरी के विचारों को आज कोई मूर्त रूप दे रहा है तो वे श्री नीतीश कुमार हैं। उन्होंने पार्टी से जुड़ने वाले सभी नए सदस्यों का स्वागत करते हुए ‘बढ़ता बिहार, नीतीश कुमार’ का नारा भी बुलंद किया।

JDU Media Cell President Dr. Amardeep Adreesing the Meeting
JDU Media Cell President Dr. Amardeep addressing the Meeting.

डॉ. नवीन कुमार आर्य ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि श्री नीतीश कुमार जैसे नेता युगों में पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि वैसे साथियों को प्रकोष्ठ के संगठन की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए जो स्वयं को पूर्ण रूप से दल के प्रति समर्पित कर सकें।
मीडिया प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने विस्तार से दल की नीतियों और मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों की चर्चा की और वर्तमान समय में पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने प्रदेश, जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक संगठन को और मजबूत करने की बात कही। इस दौरान तय किया गया कि हर बूथ पर समर्पित साथियों की टोली तैयार की जाएगी जिससे 2019 और 2020 के चुनाव में व्यावसायिक प्रकोष्ठ बड़ी भूमिका निभा सके। इस दौरान श्री ललन सर्राफ ने कहा कि छोटे-बड़े विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोगों को जदयू से जोड़ने का ये सिलसिला अनवरत चलता रहेगा।

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12 अगस्त को इतिहास रचेगा मधेपुरा: जदयू

“बढ़ता बिहार, नीतीश कुमार” के नारे के साथ जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व संसदीय दल के नेता श्री आरसीपी सिंह 12 अगस्त को मधेपुरा आ रहे हैं। यहाँ उनके नेतृत्व में होने जा रहे के भव्य रोड शो एवं अतिपिछड़ा सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए मधेपुरा जदयू जिला कार्यकारिणी एवं तैयारी समिति की बैठक स्थानीय जीवन सदन में हुई। जदयू की इस महत्वपूर्ण बैठक में लोकसभा एवं राज्यसभा के पूर्व सदस्य व बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. आरके यादव रवि, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, विधानपार्षद श्री ललन सर्राफ, विधायक श्री निरंजन कुमार मेहता, मधेपुरा के संगठन प्रभारी श्री भगवान चौधरी, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप, प्रवक्ता श्री निखिल मंडल समेत सैकड़ों पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। मधेपुरा जिला जदयू के अध्यक्ष प्रो. बिजेन्द्र नारायण यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जदयू के सभी 28 प्रकोष्ठों के जिला अध्यक्ष तथा कार्यकारिणी के सभी सम्मानित सदस्य मौजूद रहे।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि समाजवाद की धरती मधेपुरा ने पूर्व में कई कीर्तिमान रचे हैं और देश और समाज को नई राह दिखाने का काम किया है। 12 अगस्त को मधेपुरा एक बार फिर इतिहास रचेगा और श्री आरसीपी सिंह के नेतृत्व में होने जा रहे रोड शो और अतिपिछड़ा सम्मेलन को यादगार बनाकर बिहार और देश की राजनीति को नई दिशा देने का काम करेगा। वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि बिहार के यशस्वी व लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का कोई विकल्प नहीं है और उनके नेतृत्व में 2019 व 2020 के चुनाव में एनडीए को शानदार जीत मिलेगी।
गौरतलब है कि श्री आरसीपी सिंह 26 जून से लगातार बिहार के विभिन्न जिलों में रोड शो व अतिपिछड़ा सम्मेलन कर रहे हैं और अब तक उन्होंने कुल 22 जिलों की यात्रा पूरी कर ली है। उनके रोड शो व अतिपिछड़ा सम्मेलन का उद्देश्य मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के द्वारा किए गए अनगिनत जनकल्याणकारी कार्यों व शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाह-बंदी जैसे सामाजिक सरोकार से जुड़े अभियानों को जन-जन तक पहुँचाना है। उनके कार्यक्रम को मिल रही सफलता ने जदयू कार्यकर्ताओं में जैसे नई ऊर्जा भर दी है।
बहरहाल, बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार श्री आरसीपी सिंह का रोड शो भागवत चौक से शुरू होगा, जहाँ जिले भर के कार्यकर्ता सैकड़ों गाड़ियों और गाजे-बाजे के साथ उनका स्वागत करेंगे, और फिर मधेपुरा जिला के सभी विधानसभाओं से गुजरते हुए उनका काफिला आलमनगर पहुँचेगा जहाँ बिरेन्द्र कला भवन में वे अतिपिछड़ा सम्मेलन को संबोधित करेंगे। रोड शो के दौरान जगह-जगह हजारों कार्यकर्ता उनका स्वागत करेंगे। चलते-चलते बता दें कि लगातार आठ घंटे तक चली इस बैठक के दौरान भोज की भी सुंदर व्यवस्था की गई थी।

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मकर-संक्रान्ति: कड़ाके की ठंड में भोज की गरमाहट

बिहार की राजनीति में मकर संक्रान्ति खास मायने रखती है। इस दिन आयोजित चूड़ा-दही भोज में कड़ाके की ठंड के बावजूद राजनीतिक तापमान बढ़ा रहता है और आपसी संबधों को एक नया आयाम मिलता है। आप खुद ही देख लें। पिछले साल मकर संक्रान्ति में जेडीयू और आरजेडी महागठबंधन के साथी के तौर पर एक साथ थे। आरजेडी ने लगातार दो दिनों का भोज आयोजित किया था और उस भोज में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को दही का टीका लगाकर ‘राजतिलक’ लगाने की घोषणा की थी। लेकिन, आज के बदले हालात में लालू-नीतीश की राहें जुदा हैं। उधर 2013 के बाद जेडीयू और भाजपा एक बार फिर एक-दूसरे के भोज में मौजूद हैं।

बदले हालात में और अपने नेता के जेल में होने के कारण इस साल आरजेडी की ओर से कोई भोज नहीं था। दूसरी ओर जेडीयू, लोजपा और भाजपा के द्वारा भोज का आयोजन किया गया। 15 जनवरी को रालोसपा ने भी भोज का आयोजन किया है।

जेडीयू की ओर से हमेशा की तरह प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने भोज का आयोजन किया। इस भोज में लगभग 15 हजार लोग जुटे। एनडीए की तमाम बड़ी हस्तियों ने यहां अपनी उपस्थिति दर्ज की। इनमें जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, जेडीयू संसदीय दल के नेता व महासचिव आरसीपी सिंह, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान व उनके पुत्र चिराग पासवान, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मंगल पांडेय प्रमुख हैं। जेडीयू के भोज में शामिल प्रमुख लोगों में एक चौंकाने वाला नाम महागठबंधन सरकार में शिक्षामंत्री व कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी का है। हालांकि बकौल चौधरी वे बशिष्ठ नारायण सिंह से अपने ‘व्यक्तिगत’ संबंधों के कारण भोज में शामिल हुए, लेकिन ‘कयास’ लगाने वाले इससे सहमत होंगे, ऐसा नहीं लगता।

गौरतलब है कि हमेशा चर्चा में रहने वाले जेडीयू के भोज के लिए भागलपुर से कतरनी व पश्चिमी चंपारण से मर्चा चूड़ा मंगवाया गया था, जबकि तिलकुट की व्यवस्था गया से की गई थी। इनके साथ-साथ भूरा-चीनी तथा आलू-गोभी-मटर की लजीज सब्जी की व्‍यवस्‍था भी थी। दही का इंतजाम ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ सुधा डेयरी से किया गया था।

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन तीनों भोजों में शिरकत की। बशिष्ठ नारायण सिंह के आवास पर आयोजित भोज में शामिल होने के बाद वे लोजपा कार्यालय गए। वहां लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने पहली बार मकर संक्रांति भोज का आयोजन किया था। जबकि भाजपा की ओर से एमएलसी रजनीश कुमार के आवास पर भोज का आयोजन था। स्वाभाविक तौर पर इन दोनों जगहों पर भी नेताओं का जुटान हुआ।

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 ‘मैं भी हूं नीतीश कुमार’ से गूंज उठा 1 अणे मार्ग

1 अणे मार्ग के नेक संवाद कक्ष में जेडीयू के 22 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के सातवें दिन मधेपुरा, सहरसा, सुपौल और खगड़िया से आए लगभग 1200 कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) एवं राज्यसभा में जेडीयू संसदीय दल के नेता श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि हमारे नेता श्री नीतीश कुमार सिर्फ वोट की राजनीति नहीं करते। और अच्छे, और बेहतर बिहार के लिए दिन-रात लगे रहना उन्हें अलग पहचान देता है। श्री सिंह के अलावे राज्यसभा सदस्य श्री हरिवंश, विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय, डॉ. अमरदीप, श्री सुनील कुमार, विधानपार्षद प्रो. रणवीर नंदन, विधानपार्षद श्री नीरज कुमार एवं डॉ. सुहेली मेहता ने भी कार्यकर्ताओं से अलग-अलग विषयों पर संवाद किया।

इस मौके पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाह पर रोक जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि पार्टी के हर कार्यकर्ता को अपने नेता के इन संकल्पों को घर-घर पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चलना होगा। उन्होंने चारों जिलों से आए कार्यकर्ताओं से कहा कि श्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर 21 जनवरी 2018 को दहेजप्रथा और बालविवाह के विरोध में मानव-श्रृंखला का आह्वान किया है और इस बार पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ देना है।

इस अवसर पर पार्टी की विचारधारा पर बोलते हुए राज्यसभा सदस्य श्री हरिवंश ने कहा कि वर्तमान में जेपी आंदोलन के एकमात्र नैतिक चेहरा श्री नीतीश कुमार हैं। उन्होंने कहा कि जेडीयू में सामान्य आदमी भी उतने ही हिस्सेदार हैं, जितने अन्य लोग। वहीं सामाजिक सद्भाव विषय पर बोलते हुए विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय ने कहा कि श्री नीतीश कुमार समाज के सभी समुदायों को साथ लेकर चलने में यकीन करते हैं और यही वो चीज है जो टिकाऊ विकास को सुनिश्चित करती है।

कार्यकर्ताओं के आधुनिक संचार माध्यमों से लैस होने की जरूरत पर बल देते हुए डॉ. अमरदीप ने कहा कि पार्टी इस दिशा में दिन-रात काम कर रही है और नए साल में पार्टी का अत्याधुनिक वेब पोर्टल लॉन्च हो रहा है, जिस पर अन्य सुविधाओं के साथ पार्टी की वेब मैगजीन भी उपलब्ध होगी। डॉ. अमरदीप ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दो उद्देश्य हैं – पहला, पार्टी के विचारों और नीतियों से स्वयं को तराशना और दूसरा स्वयं में श्री नीतीश कुमार को तलाशना। बता दें कि इस अवसर पर सुनाई गई उनकी कविता ‘मैं भी हूं नीतीश कुमार’ सुनकर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। कार्यकर्ताओं की मांग पर उन्हें अपनी ये कविता कई बार सुनानी पड़ी। ज्यादातर कार्यकर्ता उनकी कविता नोट करते देखे गए। यहीं नहीं लोगों ने उनके साथ ‘मैं भी हूं नीतीश कुमार’ का नारा भी बुलन्द किया।

कार्यक्रम में मौजूद अन्य विशिष्ट लोगों में विधानपार्षद श्री संजय कुमार सिंह (गांधीजी), विधानपार्षद श्री ललन सर्राफ, विधायक श्री निरंजन कुमार मेहता, पूर्व मंत्री श्री करुणेश्वर सिंह, पार्टी के मुख्यालय प्रभारी व महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य, श्री अनिल कुमार, पार्टी प्रवक्ता श्री राजीव रंजन प्रसाद, श्री निखिल मंडल, श्री अरविन्द निषाद, पंचायती राज प्रकोष्ठ की अध्यक्ष श्रीमती श्वेता विश्वास एवं विधि प्रकोष्ठ की प्रधान महासचिव सुश्री अंजुम आरा प्रमुख हैं। चारों जिलों के अध्यक्ष भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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सभी लोकसभा और विधानसभा में संगठन को करें मजबूत: नीतीश

रविवार को जेडीयू राज्य कार्यकारिणी की बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास, 1 अणे मार्ग, पटना में प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, राष्ट्रीय महासचिव सह राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह समेत पार्टी के अधिकांश पदाधिकारी, मंत्री, विधायक, विधानपार्षद, जिलाध्यक्ष, विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्य सम्मिलित हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने संगठन की मजबूती पर बल देते हुए कहा कि हमें सभी 40 लोकसभा और 243 विधानसभा में अपने संगठन को मजबूत बनाना है। इसमें कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए। हम मजबूत रहेंगे तभी अपने साथी दल का भी सहयोग कर सकते हैं। नीतीश ने सक्रिय रहने के लिए निरंतर बैठक व संवाद को जरूरी बताया और जोर देकर कहा कि जमीनी हकीकत को जाने बिना कुछ नहीं किया जा सकता। पार्टी के स्वाभाव व संरचना को समझकर ही अपनी कारगर भूमिका निभाई जा सकती है। अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी, दहेजबंदी, 18 वर्ष से कम के दिव्यांगो को पेंशन जैसे कार्य के विचार उनके मन में लोगों के बीच लगातार रहते हुए ही आए।

नीतीश कुमार ने कहा कि हमारा रास्ता औरों से अलग है, वो समाज-सुधार का रास्ता है, इसलिए कठिन है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के विरुद्ध मानव-श्रृंखला में जो हमारे साथ खड़े थे, आज वो भी इसकी आलोचना कर रहे हैं। लेकिन चाहे जिस भी गठबंधन में क्यों ना रहे हों, हमने अपने विचारों से अब तक ना समझौता किया है, ना आगे करेंगे। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने संबोधन में पार्टी चुनाव चिह्न को लेकर हुए विवाद को अनावश्यक बताते हुए कहा कि पार्टी मूल रूप से एकजुट है।

सात निश्चय कार्यक्रम की चर्चा करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि इसे केन्द्र ने भी एडॉप्ट किया है। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि ऐसी कितनी ही चीजें हैं जो आगे भी एडॉप्ट की जाएंगी। नीतीश ने दहेजप्रथा एवं बालविवाह के विरोध में आगामी 21 जनवरी को प्रस्तावित मानव-श्रृंखला की सफलता के लिए सबका आह्वान भी किया।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई में सरकारी स्तर पर शराबबंदी, दहेजबंदी, बाल विवाह का विरोध जैसे जो कार्यक्रम किए जा रहे हैं, पार्टी ने ना केवल उसका पूर्ण अनुसरण किया है, बल्कि हर स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं व आमलोगों तक विचारों के इस अमृत को पहुंचाने का काम भी किया है। हाल में सम्पन्न हुए जिला सम्मेलन में महिलाओं की अच्छी उपस्थिति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार की पहल रंग ला रही है। महिलाएं, जो कल तक खिड़कियों से झांका करती थीं, हमारे नेता ने उनके लिए दरवाजा खोलने का काम किया है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्षी दलों की भूमिका पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि वे वैचारिक दिवालियापन के शिकार हैं। जल्द ही वो समय आएगा जब जेडीयू द्वारा उठाए गए मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केन्द्र में होंगे।

दल के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह ने आगामी कार्यक्रमों के लिए पार्टी का रोडमैप और कैलेंडर प्रस्तुत किया और संगठन द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षात्मक चर्चा की। उन्होंने जानकारी दी कि पार्टी ने दो लाख सक्रिय सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें डेढ़ लाख सक्रिय सदस्य बनाए जा चुके हैं। राज्य, जिला, प्रखंड एवं बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं के सशक्तिकरण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी, लोहिया, जेपी जैसे हमारे नायकों ने जो सपना देखा था उसे हमारे नेता नीतीश कुमार पूरा कर रहे हैं। लोकशाही को मजबूत करने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। चाहे जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम हो, चाहे राइट टू पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेसल एक्ट हो, चाहे सात निश्चय कार्यक्रम, उन्होंने कई प्रतिमान स्थापित किए हैं, जिनसे हमारे हर स्तर के कार्यकर्ताओं को ना केवल वाकिफ होना चाहिए बल्कि आमलोगों को भी इससे अवगत कराना चाहिए।

बैठक में 1 दिसंबर से पार्टी के प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी घोषणा की गई जिसके तहत दस हजार मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जिनका कार्य पार्टी को ग्रासरूट स्तर के कार्यकर्ताओं को जागरुक कर सशक्त करना होगा। राज्य कार्यकारिणी की इस बैठक में विभिन्न जिलों व  प्रकोष्ठों के अध्यक्ष व कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों ने भी अपनी बातें रखीं और नेतृत्व ने उनके सुझावों को अत्यंत गंभीरता से सुना।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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फिर चुनाव आयोग पहुंचा जेडीयू का प्रतिनिधिमंडल

जेडीयू का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को चुनाव आयोग से मिला और शरद खेमे द्वारा दायर याचिका को जल्द खारिज करने का आग्रह किया। राज्यसभा में जेडीयू के नेता आरसीपी सिंह, प्रधान महासचिव केसी त्यागी, महासचिव संजय झा एवं बिहार सरकार में मंत्री ललन सिंह वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात चुनाव के मद्देनजर शरद खेमे की याचिका पर जल्द फैसला लेकर उसे खारिज करने का चुनाव आयोग से आग्रह किया। गौरतलब है कि शरद खेमे ने जदयू और उसके चुनाव चिह्न पर दावा करते हुए चुनाव आयोग में ज्ञापन सौंप रखा है।

प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि गुजरात में 9 नवंबर से नामांकन शुरू है और उससे पहले हमें पार्टी के प्रत्याशी तय करने हैं और उन्हें पार्टी सिंबल आवंटित करना है। जबकि शरद यादव केवल चुनाव आयोग का समय बर्बाद करना चाहते हैं।

बकौल प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है जेडीयू नीतीश कुमार की है। नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर राजगीर में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मुहर लगी थी। उस बैठक में शरद यादव भी मौजूद थे। अब शरद यादव कुछ अलग ही दावा कर रहे हैं।

चलते-चलते बता दें कि इस बीच शरद खेमे द्वारा ज्ञापन के साथ दिए गए तीन सौ से अधिक शपथ पत्रों की जांच चुनाव आयोग ने शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग ने 31 अक्टूबर तक इन शपथ पत्रों की मूल प्रति जमा करने कहा है।

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सुनिए, चोट खाए शरद ने क्या कहा ?

अब जबकि चुनाव आयोग ने साफ कर दिया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला दल ही असली जेडीयू है और उनकी राज्यसभा सदस्यता जाने में औपचारिकता भर शेष है, फिर भी शरद यादव यह मानने को तैयार नहीं कि पार्टी के भीतर की लड़ाई वे हार चुके हैं। हां, उन्होंने इतना जरूर कहा कि हम पहाड़ से लड़ रहे हैं तो यह सोच कर ही लड़ रहे हैं कि चोट लगेगी ही।

दरअसल, जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता पर मंडराते संकट पर अपना पक्ष रख रहे थे। कल चुनाव आयोग द्वारा पार्टी पर शरद गुट के दावे पर संज्ञान नहीं लेने और राज्यसभा का नोटिस मिलने के बाद अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि इन पहलुओं को उनके वकील देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे देश की साझी विरासत पर आधारित संविधान की लड़ाई बचाने की बड़ी लड़ाई के लिए निकल पड़े हैं। बकौल शरद राज्यसभा की सदस्यता बचाना छोटी बात है, उनकी लड़ाई साझी विरासत बचाने की है। सिद्धांत के लिए वे पहले भी संसद की सदस्यता से दो बार इस्तीफा दे चुके हैं।

भविष्य की रणनीति के बारे में शरद ने कहा कि 17 सितंबर को पार्टी कार्यकारिणी और 8 अक्टूबर को राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद जेडीयू बड़े रूप में सामने आएगी। हालांकि कैसे आएगी, इस पर फिलहाल वे कुछ बताने की स्थिति में नहीं। आगे नीतीश पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री मित्र ने खुद राजद प्रमुख लालू प्रसाद से जब महागठबंधन बनाने की पहल की थी, तब भी वह भ्रष्टाचार के आरोपों से बाहर नहीं थे। जबकि महागठबंधन की सरकार बनने के बाद अचानक शुचिता के नाम पर गठजोड़ तोड़ दिया। यह बिहार के 11 करोड़ मतदाताओं के साथ धोखा है। हमने सिद्धांत के आधार पर ही इसका विरोध किया।

समाजवाद के इस पुराने नेता ने आगे की लड़ाई साझी विरासत के मंच से लड़ने की बात कही। वे लड़ेंगे भी, क्योंकि वे शुरू से धूल झाड़कर फिर से खड़े होने वालों में रहे हैं। लेकिन क्या तमाम आरोपों और मुकदमों से घिरे लालू और उनके परिवार की ‘बैसाखी’ से उनके ‘सिद्धांत’ को कोई गुरेज नहीं है? क्या वे प्रकारान्तर से यह कहना चाहते हैं कि लालू पुत्रों का ‘मॉल’ और मीसा का ‘फॉर्म हाउस’ गरीबों को ‘सामाजिक न्याय’ दिलाने के लिए है? या फिर यह मान लिया जाए कि भारतीय राजनीति में अब भ्रष्टाचार कोई मुद्दा ही नहीं?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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क्यों टूट रही है बिहार कांग्रेस ?

कुछ अपनी कमजोरी, कुछ क्षेत्रीय दलों का उभार, कुछ परिस्थितियों का दोष और बाकी अच्छे दिन का नारा देकर बहुत अच्छे दौर से गुजर रही भाजपा की बेजोड़ रणनीति – कुल मिलाकर कांग्रेस पस्तहाल है। केन्द्र में उसकी स्थिति सबको पता है। वहां तो मोदीयुग चल ही रहा है। हां, बिहार में महागठबंधन बनने के बाद जब उसे 27 सीटें मिलीं, तब जरूर लगा था कि मुरझाती कांग्रेस में फिर हरियाली आ जाएगी। थोड़ी आई भी। पर नीतीश ने महागठबंधन क्या छोड़ा, कांग्रेस की वो हरियाली अब जाने को है। जी हां, सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के 27 विधायकों में से 14 विधायकों ने अलग औपचारिक समूह बना लिया है और कहा जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में वे जेडीयू में शामिल हो जाएंगे। इस समूह को बस इंतजार है पार्टी के चार और विधायकों के अपने गुट में आने का, ताकि टूट के लिए जरूरी दो तिहाई आंकड़े का इंतजाम हो जाए और पार्टी से अलग होकर भी उनकी सदस्यता बची रहे।

गौरतलब है कि पार्टी में टूट की आशंका के मद्देनज़र कांग्रेस आलाकमान ने बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी और कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह को गुरुवार को दिल्ली बुलाया था। बताया जाता है कि इन दोनों नेताओं ने पार्टी में पक रही बगावती खिचड़ी से खुद को अनजान बताया, जिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें हर हाल में यह टूट रोकने को कहा।

बिहार कांग्रेस के भीतर चल रहा असंतोष अब भले ही सतह पर आ गया हो, इसकी शुरुआत उसी दिन हो गई थी जब पार्टी के 27 विधायकों व छह विधानपार्षदों में से केवल चार को ही सत्ता का सुख मिला। महागठबंधन सरकार में दो एमएलसी अशोक चौधरी एवं मदन मोहन झा और दो एमएलए अब्दुल जलील मस्तान एवं अवधेश कुमार को जगह मिली, जबकि बाकी लोग ‘उपेक्षा’ और ‘प्रतीक्षा’ के बीच भटकते रहे। कुछ लोगों को आस थी कि उन्हें बोर्ड और निगम में तो जगह मिल ही जाएगी, लेकिन जेडीयू के एनडीए से जुड़ जाने के बाद उनकी वो उम्मीद भी जाती रही।

वैसे यह कहना भी गलत होगा कि ये विधायक केवल पद की लालसा में परेशान हैं। इनकी परेशानी की एक बड़ी वजह लालू प्रसाद यादव हैं। नीतीश की अनुपस्थिति में अब लालू कांग्रेस के लिए एकमात्र विकल्प हैं और यह बात उन विधायकों को आशंकित कर रही है, जिन्हें अपनी जीत के लिए अगड़ों के वोट की सख्त जरूरत है। जब तक नीतीश साथ थे उनकी ‘छवि’ अगड़ों के लालू विरोध को ‘बैलेंस’ कर देती थी, लेकिन अब वो सहारा भी जाता रहा। ऐसे में ये विधायक करें तो क्या करें।

बहरहाल, कांग्रेस नेता अभी यह कहने में जुटे हैं कि पार्टी में टूट की कोई आशंका नहीं, लेकिन राजनीति के गलियारे में यह चर्चा आम है कि इसमें अब केवल औपचारिकता ही शेष है। हालांकि पार्टी में टूट की आशंका के मद्देनज़र कांग्रेस ने ‘डैमेज कंट्रोल’ 11 अगस्त को ही शुरू कर दिया था, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया विधायकों की नाराजगी दूर करने पटना पहुंचे थे। पर अब ‘डैमेज’ ‘कंट्रोल’ से बाहर जा चुका है। बात जहां तक नीतीश कुमार की है, कांग्रेस के टूटने पर पर उनके ‘बेस’ और मनोबल दोनों में इजाफा होगा, इसमें कोई दो राय नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप      

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बिहार को बहुत जल्द विशेष पैकेज की सौगात!

राजनीति की उठापटक अपनी जगह है और राज्य व देश का हित अपनी जगह। उसे हर हाल में अक्षुण्ण रखना चाहिए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी सोच के कारण महागठबंधन छोड़ने और एनडीए के साथ सरकार बनाने का बड़ा निर्णय लिया था। उनके उस निर्णय का सुखद परिणाम अब सामने आने जा रहा है। जी हां, बिहार को बहुत जल्द केन्द्र से 1.25 लाख करोड़ का विशेष पैकेज मिलने जा रहा है। बता दें कि इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव के समय की थी, लेकिन भाजपा की करारी हार के बाद विशेष पैकेज की बात ठंडे बस्ते में चली गई थी।

गौरतलब है कि नीतीश ने पिछले सप्ताह ही दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें उनके वादे की याद दिलाई थी। दरअसल नीतीश अच्छी तरह जानते हैं कि एनडीए के विरुद्ध जनादेश लेने के बाद फिर उसी के साथ सरकार बनाने के निर्णय को वे तभी सही ठहरा सकते हैं जब बिहारवासियों से किया वादा वे पूरा करें। अपने हाल के निर्णय में उन्होंने राजधर्म और राज्यधर्म को महागठबंधन-धर्म पर तरजीह दी जिसे बिहार को मिलने जा रही इस सौगात से निश्चित रूप से नैतिक बल मिलेगा।

वैसे देखा जाए तो जिस दिन बिहार में जेडीयू-एनडीए की सरकार बनी, उसी दिन से विशेष पैकेज मिलने की उम्मीद बढ़ गई थी। लेकिन ये खुशखबरी इतनी जल्दी मिलेगी इसकी उम्मीद नहीं थी। इन दिनों बाढ़ की विभीषिका झेल रहे बिहार के लिए ये सचमुच राहत की ख़बर है।

चलते-चलते बता दें कि जहां मोदी-नीतीश मिलकर बिहार से किये वादे पर अमल करने जा रहे हैं वहीं जेडीयू एनडीए में शामिल होने की विधिवत घोषणा भी शीघ्र करने जा रही है। यही नहीं, जेडीयू केन्द्र सरकार में भी शामिल होगी और ख़बर यह भी है कि नीतीश एनडीए के संयोजक हो सकते हैं। भारतीय राजनीति के दो शिखरपुरुषों के एक साथ आने से बिहार के विकास का हर अवरुद्ध मार्ग खुलेगा, ऐसी आशा की जानी चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मिशन 2019 में अभी से क्यों जुटे नीतीश..?

लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल बाकी हैं लेकिन जेडीयू ने नीतीश कुमार को अभी से मैदान में उतार दिया है। पटना में पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में एक ओर अध्यक्ष के तौर पर नीतीश की ताजपोशी की गई तो दूसरी ओर गैरभाजपा दलों का एका करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया। संदेश स्पष्ट है कि नीतीश अब औपचारिक रूप से राहुल गांधी, मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी और अरविन्द केजरीवाल जैसे प्रधानमंत्री पद के दावेदार नेताओं के क्लब में शामिल हो गए।

ये स्पष्ट है कि बिहार की महागठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस गैरभाजपा विकल्प के तौर पर कभी नीतीश के नाम पर सहमत नहीं हो सकती और ना ही राजद समेत अन्य दलों ने अभी इस संबंध में अपनी राय खुलकर जाहिर की है। (हाँ, नीतीश को ‘पीएम मैटेरियल’ बताना अलग बात है।) लेकिन नीतीश और उनकी टीम जल्दी में दिख रही है। इस जल्दबाजी से उन्हें दो कारण दिख रहे हैं। पहला यह कि राष्ट्रीय स्तर पर अभी जैसा ‘मोदीमय’ माहौल है उसमें उनके विकल्प के तौर पर आक्रामक होकर आने का साहस और तैयारी किसी के पास नहीं दिख रही और इसका फायदा नीतीश और उनकी टीम उठाना चाहती है। दूसरा ये कि बिहार चुनाव के परिणाम के बाद नीतीश की जैसी करिश्माई छवि बनी है उस पर वक्त की धूल-मिट्टी पड़ने से पहले ही उसे भुना लेने की कोशिश की जा रही है।

नीतीश कुमार मंझे हुए नेता हैं और राजनीति की बिसात पर गोटियां बिठाना उन्हें खूब आता है। उन्हें पता है कि बड़े लक्ष्य के लिए केवल नारेबाजी से काम नहीं चलता, धरातल पर भी बहुत कुछ कर के दिखाना होता है। यही कारण है कि एक ओर वो संघमुक्त भारत का नारा दे रहे होते हैं तो दूसरी ओर शराबबंदी को राष्ट्रीय अभियान बनाने की बात करते हैं। महिला आरक्षण और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जैसे फैसलों को नीतीश अब राष्ट्रीय फलक पर अपने विकास मॉडल के तौर पर पेश करना चाहते हैं।

यूपी चुनाव से पहले अजित सिंह के रालोद और बाबूलाल मरांडी के जेवीएम को मिलाकर अपना ‘कैनवास’ बड़ा करने की कोशिश नीतीश के मिशन 2019 का ही हिस्सा है। यूपी में उनकी सफलता या असफलता से भारत की भावी राजनीति की तस्वीर बहुत हद तक साफ हो जाएगी, इसमें कोई दो राय नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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