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मधेपुरा बनेगा बाल विवाह व दहेज मुक्त जिला- डीएम

मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने अपने समस्त अधिकारियों-पदाधिकारियों के साथ दोनों अनुमंडलों मधेपुरा सदर एवं उदाकिशुनगंज में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में बाल विवाह व दहेज प्रथा उन्मूलन हेतु अपने-अपने अनुमंडल के सभी प्रखंड क्षेत्रों के पंचायतों के पूर्व व वर्तमान सभी प्रकार के जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि दहेज प्रथा कानूनी जुर्म ही नहीं बल्कि सामाजिक बुराई भी है | मो.सोहैल ने इन कुरीतियों को समाज के लिए अभिशाप बताते हुए कहा कि महज कानून से ये दोनों खत्म होने वाला नहीं है बल्कि इसके लिए सबों को जागरुक होना सर्वाधिक जरूरी है |

बता दें कि दोनों अनुमंडलों के कार्यशालाओं को अलग-अलग संबोधित करते हुए डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने यही कहा कि इनसे मुक्ति पाने के लिए पंचायत प्रतिनिधिगण अपने-अपने क्षेत्रों में बालिका शिक्षा को बढ़ावा दे तथा शिक्षा पूरी होने यानि 21 वर्ष से अधिक उम्र होने के बाद ही बालिकाओं को पारिवारिक जिम्मेवारी देने की बातें बताएं |

आगे इस्लाम में भी दहेज को अपराध बताते हुए डीएम मो.सोहैल ने कार्यशाला में उपस्थित पदाधिकारियों, पंचायत जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों को आधे दर्जन से अधिक बहुमूल्य टिप्स देते हुए यही कहा-

  1. बाल विवाह व दहेज उन्मूलन को लेकर वार्ड, पंचायत, प्रखंड, अनुमंडल व जिला स्तर पर निगरानी समिति का गठन किया जायेगा |
  2. प्रत्येक स्तर पर छह सदस्यीय निगरानी समिति गठित की जायेगी |
  3. बाल विवाह और दहेज प्रथा को लेकर निगरानी समिति की सूचना पर प्रशासन त्वरित कार्यवाई करेगी ||
  4. स्कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए क्रमशः बालसखा व बालसखी बने, जो कहीं भी जाकर लोगों को नशाबंदी, बाल विवाह व दहेज प्रथा को लेकर जागरूक करे जिसके लिए बाल सखाओं को एक सौ नम्बर अतिरिक्त मिलेगा ||
  5. जिले में शुरू किये गये “बन्धन ऐप” को मोबाइल पर डाउनलोड करने वाले को ₹100 मिलेगा |
  6. अब तक बाल विवाह व दहेज को लेकर जिले के 46,000 बच्चों ने घोषणा पत्र दिया है |
  7. केशव कन्या उच्च विद्यालय की करीब 300 छात्राओं ने शादी की उम्र कम से कम 21 वर्ष निर्धारित करने को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया है, क्योंकि उच्च शिक्षा पूरी होने में कम से कम 21 वर्ष लग ही जाते हैं |

यह भी जानिए कि जहाँ भूपेन्द्र कला भवन मधेपुरा के कार्यशाला में उपस्थित एसपी विकास कुमार, डीडीसी मुकेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला, डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल सहित पंचायत प्रतिनिधि स्वदेश कुमार, मनोज साह, अरुण कुमार यादव, अनिल अनल, राज किशोर यादव आदि ने कहा कि बाल विवाह व दहेज प्रथा जैसे सामाजिक बुराइयों को सामाजिक जागृति से ही खत्म किया जा सकता है वहीं उदाकिशुनगंज के कार्यशाला में एसडीएम एसजेड हसन, कार्यपालक दण्डाधिकरी अनिल कुमार, सीआई निजामुल हक आदि पदाधिकारीगण सहित समाजसेवी जय प्रकाश सिंह, विकास चंद्र यादव आदि ने सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति पाने के लिए सामाजिक चेतना जागृत करने की जरूरत पर बल दिया |

अंत में डीएम मो.सोहैल ने कहा कि विगत वर्ष 21 जनवरी को नशाबंदी को लेकर किये गये मानव श्रृंखला में अपने जिले को सूबे में प्रथम पंक्ति में जगह मिली थी……… इस बार प्रथम स्थान पाने के लिए हम सबों का प्रयास जारी रहेगा……!!

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सभी लोकसभा और विधानसभा में संगठन को करें मजबूत: नीतीश

रविवार को जेडीयू राज्य कार्यकारिणी की बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास, 1 अणे मार्ग, पटना में प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, राष्ट्रीय महासचिव सह राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह समेत पार्टी के अधिकांश पदाधिकारी, मंत्री, विधायक, विधानपार्षद, जिलाध्यक्ष, विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्य सम्मिलित हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने संगठन की मजबूती पर बल देते हुए कहा कि हमें सभी 40 लोकसभा और 243 विधानसभा में अपने संगठन को मजबूत बनाना है। इसमें कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए। हम मजबूत रहेंगे तभी अपने साथी दल का भी सहयोग कर सकते हैं। नीतीश ने सक्रिय रहने के लिए निरंतर बैठक व संवाद को जरूरी बताया और जोर देकर कहा कि जमीनी हकीकत को जाने बिना कुछ नहीं किया जा सकता। पार्टी के स्वाभाव व संरचना को समझकर ही अपनी कारगर भूमिका निभाई जा सकती है। अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी, दहेजबंदी, 18 वर्ष से कम के दिव्यांगो को पेंशन जैसे कार्य के विचार उनके मन में लोगों के बीच लगातार रहते हुए ही आए।

नीतीश कुमार ने कहा कि हमारा रास्ता औरों से अलग है, वो समाज-सुधार का रास्ता है, इसलिए कठिन है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के विरुद्ध मानव-श्रृंखला में जो हमारे साथ खड़े थे, आज वो भी इसकी आलोचना कर रहे हैं। लेकिन चाहे जिस भी गठबंधन में क्यों ना रहे हों, हमने अपने विचारों से अब तक ना समझौता किया है, ना आगे करेंगे। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने संबोधन में पार्टी चुनाव चिह्न को लेकर हुए विवाद को अनावश्यक बताते हुए कहा कि पार्टी मूल रूप से एकजुट है।

सात निश्चय कार्यक्रम की चर्चा करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि इसे केन्द्र ने भी एडॉप्ट किया है। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि ऐसी कितनी ही चीजें हैं जो आगे भी एडॉप्ट की जाएंगी। नीतीश ने दहेजप्रथा एवं बालविवाह के विरोध में आगामी 21 जनवरी को प्रस्तावित मानव-श्रृंखला की सफलता के लिए सबका आह्वान भी किया।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई में सरकारी स्तर पर शराबबंदी, दहेजबंदी, बाल विवाह का विरोध जैसे जो कार्यक्रम किए जा रहे हैं, पार्टी ने ना केवल उसका पूर्ण अनुसरण किया है, बल्कि हर स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं व आमलोगों तक विचारों के इस अमृत को पहुंचाने का काम भी किया है। हाल में सम्पन्न हुए जिला सम्मेलन में महिलाओं की अच्छी उपस्थिति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार की पहल रंग ला रही है। महिलाएं, जो कल तक खिड़कियों से झांका करती थीं, हमारे नेता ने उनके लिए दरवाजा खोलने का काम किया है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्षी दलों की भूमिका पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि वे वैचारिक दिवालियापन के शिकार हैं। जल्द ही वो समय आएगा जब जेडीयू द्वारा उठाए गए मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केन्द्र में होंगे।

दल के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह ने आगामी कार्यक्रमों के लिए पार्टी का रोडमैप और कैलेंडर प्रस्तुत किया और संगठन द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षात्मक चर्चा की। उन्होंने जानकारी दी कि पार्टी ने दो लाख सक्रिय सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें डेढ़ लाख सक्रिय सदस्य बनाए जा चुके हैं। राज्य, जिला, प्रखंड एवं बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं के सशक्तिकरण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी, लोहिया, जेपी जैसे हमारे नायकों ने जो सपना देखा था उसे हमारे नेता नीतीश कुमार पूरा कर रहे हैं। लोकशाही को मजबूत करने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। चाहे जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम हो, चाहे राइट टू पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेसल एक्ट हो, चाहे सात निश्चय कार्यक्रम, उन्होंने कई प्रतिमान स्थापित किए हैं, जिनसे हमारे हर स्तर के कार्यकर्ताओं को ना केवल वाकिफ होना चाहिए बल्कि आमलोगों को भी इससे अवगत कराना चाहिए।

बैठक में 1 दिसंबर से पार्टी के प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी घोषणा की गई जिसके तहत दस हजार मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जिनका कार्य पार्टी को ग्रासरूट स्तर के कार्यकर्ताओं को जागरुक कर सशक्त करना होगा। राज्य कार्यकारिणी की इस बैठक में विभिन्न जिलों व  प्रकोष्ठों के अध्यक्ष व कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों ने भी अपनी बातें रखीं और नेतृत्व ने उनके सुझावों को अत्यंत गंभीरता से सुना।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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शराबबंदी के बाद बाल विवाह और दहेज के विरुद्ध शंखनाद

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 148वीं जयंती के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़े अभियान का शंखनाद किया। बिहार में शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के बाद नीतीश ने समाज को घुन की तरह खा रही इन दो कुरीतियों पर जिस तरह चोट की है, वह उन्हें राजनेताओं की भीड़ में निश्चित तौर पर एक अलग स्थान का हकदार बनाती है। देखा जाय तो बापू को इससे बड़ी श्रद्धांजलि हो भी क्या सकती थी!

गौरतलब है कि बाल विवाह के खिलाफ कड़े कानून होने के बावजूद यह बिहार में काफी प्रचलित है। खासकर राज्य के ग्रामीण इलाकों में यह कुप्रथा बहुत बड़े स्तर पर फैली हुई है। आंकड़ों की मानें तो कुछ वर्ष पहले तक बिहार में होने वाले कुल विवाह में से करीब 69 प्रतिशत बाल विवाह होते थे। हालांकि हाल ही में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य संरक्षण-4 में खुलासा हुआ है कि लड़कियों की शिक्षा पर जोर देने के कारण पिछले 10 सालों में यह आंकड़ा घटा है। फिर भी इस कुरीति को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए अभी काफी कुछ किए जाने की जरूरत थी। जहां तक दहेज प्रथा का प्रश्न है, उसके लिए तो आंकड़ों की भी जरूरत नहीं। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो बिहार क्या देश भर में शायद ही कोई माता-पिता हों जिन्हें दहेज के अजगर ने डंसा न हो। हर साल हजारों बेटियां दहेज के कारण न जाने कितने अत्याचार सहती हैं, उनमें से कई तो जिन्दा जला दी जाती हैं। ऐसे में बिहार में इन दोनों कुरीतियों के विरुद्ध शुरू की गई ये पहल निश्चित तौर बदलाव की ओर बढ़ाया गया एक बड़ा कदम है।

सोमवार को राजधानी पटना स्थित गांधी मैदान के समीप नवनिर्मित बापू सभागार से महाअभियान का आगाज करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों को शपथ दिलाई कि बिहार को बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों से मुक्त कराने की प्रतिज्ञा लें। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस अभियान को राजनीतिक चश्मे से न देखें। राजनीति अपनी जगह पर है और वह होती रहेगी। यह सामाजिक अभियान है। इस अभियान में पूरी एकजुटता से शामिल हों। उन्होंने ऐलान किया कि अगले वर्ष 21 जनवरी को बाल विवाह और दहेज विरोधी अभियान के समर्थन में पूरे प्रदेश में मानव श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ कानून काफी पहले से है। उसका हम मुस्तैदी से अनुपालन कराएंगे लेकिन इसके लिए जनभावना का साथ होना भी जरूरी है। उन्होंने लोगों के साथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि इसकी बदौलत बहुत जल्द बिहार की तस्वीर बदलेगी और हम देश और दुनिया के लिए उदाहरण बन सकेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश ने क्यों की अपनी मृत्यु की बात ?

आज जबकि पार्टियां प्राईवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाई जा रही हैं, ऐसे में किसी राजनीतिक पार्टी के शीर्ष नेता के परिवार से किसी का राजनीति में न रहना और उस नेता का अपने न रहने की स्थिति में पार्टी के अस्तित्व की चिन्ता करना सचमुच बड़ी बात है। ये चिन्ता बताती है कि वह नेता पद, पावर और परिवार के लिए नहीं, उन विचारों और मुद्दों के लिए परेशान है, जिसे अपनी पार्टी के माध्यम से वो मुकाम तक पहुंचाना चाहता है। यहां बात की जा रही है, बिहार के लोकप्रिय मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की, जिन्होंने रविवार को हुई राज्य कार्यकारिणी की बैठक में यह कहकर सबको चौंका दिया कि “अगर कल को मेरी मृत्यु हो जाती है, तो पार्टी का क्या होगा?”

बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अपने अब तक के राजनीतिक जीवन में नीतीश कुमार ने हजारों सभाएं और बैठकें की हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब उन्होंने इस तरह की बात कही हो। जब इस बारे में नीतीश से पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा तो उन्होंने जवाब दिया कि कौन जानता है कल क्या होगा? हालांकि आगे उन्होंने जोड़ा कि अरे ऐसे ही मुंह से निकल गया, कुछ खास नहीं।

यहां गौर करने की जरूरत है कि नीतीश कुमार हमेशा अपनी बातों को बड़े ही व्यावहारिक और तार्किक तरीके से रखने के लिए जाने जाते हैं। अब अगर उन्होंने अगर ऐसी चिन्ता जाहिर की है तो यह भी अकारण नहीं है। शायद वे ऐसा कहकर नेताओं और कार्यकर्ताओं को याद दिलाने चाहते हैं कि उन्होंने पार्टी के लिए कितनी मेहनत की है ताकि उसी अनुपात में पार्टी के बाकी लोग भी अपनी भूमिका निभाएं। अगर वो पार्टी के लोगों को जेडीयू की बुनियादी विचारधारा की याद दिलाने चाहते हैं, देश और समाज के लिए उनकी प्रतिबद्धता को एक नई धार देने चाहते हैं, अपने विचार का फैलाव अपने बाद भी चाहते हैं तो यह एक सच्चे और अच्छे नेता की निशानी है।

बहरहाल, राज्य कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश ने कहा कि जब तक मैं जिन्दा हूं तब तक बिहार से शराबबंदी का निर्णय वापस नहीं लिया जा सकता। अगर किसी को मेरे निर्णय से समस्या है तो वह मुझे मार सकता है लेकिन मैं इस नियम को किसी सूरत में नहीं हटाऊंगा। यहां बता दें कि शराबबंदी के बाद नीतीश कुमार सामाजिक मुद्दों को लेकर बिहार में दो और बड़े दांव खेलने वाले हैं। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर वे दहेज प्रथा और बाल विवाह को पूरी तरह बंद करने के लिए बड़े अभियान का श्रीगणेश करेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सुनिए, चोट खाए शरद ने क्या कहा ?

अब जबकि चुनाव आयोग ने साफ कर दिया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला दल ही असली जेडीयू है और उनकी राज्यसभा सदस्यता जाने में औपचारिकता भर शेष है, फिर भी शरद यादव यह मानने को तैयार नहीं कि पार्टी के भीतर की लड़ाई वे हार चुके हैं। हां, उन्होंने इतना जरूर कहा कि हम पहाड़ से लड़ रहे हैं तो यह सोच कर ही लड़ रहे हैं कि चोट लगेगी ही।

दरअसल, जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता पर मंडराते संकट पर अपना पक्ष रख रहे थे। कल चुनाव आयोग द्वारा पार्टी पर शरद गुट के दावे पर संज्ञान नहीं लेने और राज्यसभा का नोटिस मिलने के बाद अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि इन पहलुओं को उनके वकील देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे देश की साझी विरासत पर आधारित संविधान की लड़ाई बचाने की बड़ी लड़ाई के लिए निकल पड़े हैं। बकौल शरद राज्यसभा की सदस्यता बचाना छोटी बात है, उनकी लड़ाई साझी विरासत बचाने की है। सिद्धांत के लिए वे पहले भी संसद की सदस्यता से दो बार इस्तीफा दे चुके हैं।

भविष्य की रणनीति के बारे में शरद ने कहा कि 17 सितंबर को पार्टी कार्यकारिणी और 8 अक्टूबर को राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद जेडीयू बड़े रूप में सामने आएगी। हालांकि कैसे आएगी, इस पर फिलहाल वे कुछ बताने की स्थिति में नहीं। आगे नीतीश पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री मित्र ने खुद राजद प्रमुख लालू प्रसाद से जब महागठबंधन बनाने की पहल की थी, तब भी वह भ्रष्टाचार के आरोपों से बाहर नहीं थे। जबकि महागठबंधन की सरकार बनने के बाद अचानक शुचिता के नाम पर गठजोड़ तोड़ दिया। यह बिहार के 11 करोड़ मतदाताओं के साथ धोखा है। हमने सिद्धांत के आधार पर ही इसका विरोध किया।

समाजवाद के इस पुराने नेता ने आगे की लड़ाई साझी विरासत के मंच से लड़ने की बात कही। वे लड़ेंगे भी, क्योंकि वे शुरू से धूल झाड़कर फिर से खड़े होने वालों में रहे हैं। लेकिन क्या तमाम आरोपों और मुकदमों से घिरे लालू और उनके परिवार की ‘बैसाखी’ से उनके ‘सिद्धांत’ को कोई गुरेज नहीं है? क्या वे प्रकारान्तर से यह कहना चाहते हैं कि लालू पुत्रों का ‘मॉल’ और मीसा का ‘फॉर्म हाउस’ गरीबों को ‘सामाजिक न्याय’ दिलाने के लिए है? या फिर यह मान लिया जाए कि भारतीय राजनीति में अब भ्रष्टाचार कोई मुद्दा ही नहीं?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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क्यों टूट रही है बिहार कांग्रेस ?

कुछ अपनी कमजोरी, कुछ क्षेत्रीय दलों का उभार, कुछ परिस्थितियों का दोष और बाकी अच्छे दिन का नारा देकर बहुत अच्छे दौर से गुजर रही भाजपा की बेजोड़ रणनीति – कुल मिलाकर कांग्रेस पस्तहाल है। केन्द्र में उसकी स्थिति सबको पता है। वहां तो मोदीयुग चल ही रहा है। हां, बिहार में महागठबंधन बनने के बाद जब उसे 27 सीटें मिलीं, तब जरूर लगा था कि मुरझाती कांग्रेस में फिर हरियाली आ जाएगी। थोड़ी आई भी। पर नीतीश ने महागठबंधन क्या छोड़ा, कांग्रेस की वो हरियाली अब जाने को है। जी हां, सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के 27 विधायकों में से 14 विधायकों ने अलग औपचारिक समूह बना लिया है और कहा जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में वे जेडीयू में शामिल हो जाएंगे। इस समूह को बस इंतजार है पार्टी के चार और विधायकों के अपने गुट में आने का, ताकि टूट के लिए जरूरी दो तिहाई आंकड़े का इंतजाम हो जाए और पार्टी से अलग होकर भी उनकी सदस्यता बची रहे।

गौरतलब है कि पार्टी में टूट की आशंका के मद्देनज़र कांग्रेस आलाकमान ने बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी और कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह को गुरुवार को दिल्ली बुलाया था। बताया जाता है कि इन दोनों नेताओं ने पार्टी में पक रही बगावती खिचड़ी से खुद को अनजान बताया, जिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें हर हाल में यह टूट रोकने को कहा।

बिहार कांग्रेस के भीतर चल रहा असंतोष अब भले ही सतह पर आ गया हो, इसकी शुरुआत उसी दिन हो गई थी जब पार्टी के 27 विधायकों व छह विधानपार्षदों में से केवल चार को ही सत्ता का सुख मिला। महागठबंधन सरकार में दो एमएलसी अशोक चौधरी एवं मदन मोहन झा और दो एमएलए अब्दुल जलील मस्तान एवं अवधेश कुमार को जगह मिली, जबकि बाकी लोग ‘उपेक्षा’ और ‘प्रतीक्षा’ के बीच भटकते रहे। कुछ लोगों को आस थी कि उन्हें बोर्ड और निगम में तो जगह मिल ही जाएगी, लेकिन जेडीयू के एनडीए से जुड़ जाने के बाद उनकी वो उम्मीद भी जाती रही।

वैसे यह कहना भी गलत होगा कि ये विधायक केवल पद की लालसा में परेशान हैं। इनकी परेशानी की एक बड़ी वजह लालू प्रसाद यादव हैं। नीतीश की अनुपस्थिति में अब लालू कांग्रेस के लिए एकमात्र विकल्प हैं और यह बात उन विधायकों को आशंकित कर रही है, जिन्हें अपनी जीत के लिए अगड़ों के वोट की सख्त जरूरत है। जब तक नीतीश साथ थे उनकी ‘छवि’ अगड़ों के लालू विरोध को ‘बैलेंस’ कर देती थी, लेकिन अब वो सहारा भी जाता रहा। ऐसे में ये विधायक करें तो क्या करें।

बहरहाल, कांग्रेस नेता अभी यह कहने में जुटे हैं कि पार्टी में टूट की कोई आशंका नहीं, लेकिन राजनीति के गलियारे में यह चर्चा आम है कि इसमें अब केवल औपचारिकता ही शेष है। हालांकि पार्टी में टूट की आशंका के मद्देनज़र कांग्रेस ने ‘डैमेज कंट्रोल’ 11 अगस्त को ही शुरू कर दिया था, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया विधायकों की नाराजगी दूर करने पटना पहुंचे थे। पर अब ‘डैमेज’ ‘कंट्रोल’ से बाहर जा चुका है। बात जहां तक नीतीश कुमार की है, कांग्रेस के टूटने पर पर उनके ‘बेस’ और मनोबल दोनों में इजाफा होगा, इसमें कोई दो राय नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप      

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बिहार को बहुत जल्द विशेष पैकेज की सौगात!

राजनीति की उठापटक अपनी जगह है और राज्य व देश का हित अपनी जगह। उसे हर हाल में अक्षुण्ण रखना चाहिए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी सोच के कारण महागठबंधन छोड़ने और एनडीए के साथ सरकार बनाने का बड़ा निर्णय लिया था। उनके उस निर्णय का सुखद परिणाम अब सामने आने जा रहा है। जी हां, बिहार को बहुत जल्द केन्द्र से 1.25 लाख करोड़ का विशेष पैकेज मिलने जा रहा है। बता दें कि इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव के समय की थी, लेकिन भाजपा की करारी हार के बाद विशेष पैकेज की बात ठंडे बस्ते में चली गई थी।

गौरतलब है कि नीतीश ने पिछले सप्ताह ही दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें उनके वादे की याद दिलाई थी। दरअसल नीतीश अच्छी तरह जानते हैं कि एनडीए के विरुद्ध जनादेश लेने के बाद फिर उसी के साथ सरकार बनाने के निर्णय को वे तभी सही ठहरा सकते हैं जब बिहारवासियों से किया वादा वे पूरा करें। अपने हाल के निर्णय में उन्होंने राजधर्म और राज्यधर्म को महागठबंधन-धर्म पर तरजीह दी जिसे बिहार को मिलने जा रही इस सौगात से निश्चित रूप से नैतिक बल मिलेगा।

वैसे देखा जाए तो जिस दिन बिहार में जेडीयू-एनडीए की सरकार बनी, उसी दिन से विशेष पैकेज मिलने की उम्मीद बढ़ गई थी। लेकिन ये खुशखबरी इतनी जल्दी मिलेगी इसकी उम्मीद नहीं थी। इन दिनों बाढ़ की विभीषिका झेल रहे बिहार के लिए ये सचमुच राहत की ख़बर है।

चलते-चलते बता दें कि जहां मोदी-नीतीश मिलकर बिहार से किये वादे पर अमल करने जा रहे हैं वहीं जेडीयू एनडीए में शामिल होने की विधिवत घोषणा भी शीघ्र करने जा रही है। यही नहीं, जेडीयू केन्द्र सरकार में भी शामिल होगी और ख़बर यह भी है कि नीतीश एनडीए के संयोजक हो सकते हैं। भारतीय राजनीति के दो शिखरपुरुषों के एक साथ आने से बिहार के विकास का हर अवरुद्ध मार्ग खुलेगा, ऐसी आशा की जानी चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सीएम ने मधेपुरा डीएम को उनकी अनूठी पहल के लिए किया सम्मानित

बिहार और बिहार की सीमा के पार के लोगों द्वारा विकास पुरुष से सम्मानित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के ज्ञान भवन में आयोजित विश्व युवा कौशल दिवस कार्यक्रम के अवसर पर कौशल विकास कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करनेवाले सात जिलाधिकारियों एवं कुशल युवा कार्यक्रम के 10 सर्वोत्तम प्रशिक्षण केंद्रों को सम्मानित किया | मौके पर प्रशिक्षण में अव्वल रहे छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया गया |

जहां मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने कुशल युवा प्रशिक्षित छात्रों के लिए नये रोजगार के विकल्प के तौर पर जीएसटी ऑपरेटर्स बनाने की राह तैयार की है वहीं नीतीश सरकार ने इस स्कीम को मॉडल के रूप में पूरे सूबे में लागू करने का निर्णय भी ले लिया है |

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विश्व कौशल विकास दिवस पर बिहार के 38 में से जिन सात जिले के जिलाधिकारियों को सम्मानित किया, वे जिले हैं- मधेपुरा, सहरसा, कटिहार, बेगूसराय, लखीसराय, बक्सर और मधुबनी तथा सम्मानित होने वाले डीएम क्रमशः- मो.सोहैल, विनोद सिंह गुंजियाल, मिथिलेश मिश्रा, मो.नौशाद यूसुफ, सुनील कुमार, रमन कुमार एवं शीर्षत कपिल अशोक |

हाँ ! इसके अतिरिक्त इस कार्यक्रम की देख-रेख करनेवाली कंपनी एम.के.सी.एल. के सीईओ विवेक सावंत, दीघा घाट ITI के उप-प्राचार्य के रूप में राहुल कुमार तथा घोघरडीहा के सर्वोत्तम प्राचार्य के रूप में अतुल रंजन को भी विकास पुरुष नीतीश कुमार के हाथों सम्मानित होने का अवसर प्राप्त हुआ |

यह भी जानिए की जन निजी सहभागिता के तहत चलाये जा रहे विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सर्वश्रेष्ठ मुंगेर संस्थान को मुख्यमंत्री द्वारा एक लाख का पुरस्कार दिया गया | साथ ही विज्ञान भवन में जो प्रदर्शनी लगाई गई उसे भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सहयोगी मंत्रियों राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (योजना विकास मंत्री), मंजू वर्मा (समाज कल्याण मंत्री), महेश्वर हजारी (नगर विकास मंत्री) एवं विजय प्रकाश (श्रम संसाधन मंत्री) आदि के साथ घूम-घूमकर देखा और सराहना करते हुए अपना-अपना विचार व्यक्त किया |

इसी क्रम में श्रम संसाधन सचिव दीपक कुमार ने भावोद्गार व्यक्त करते हुए यही कहा कि मात्र 7 महीने में  सूबे में कौशल विकास केंद्रों की संख्या 48 से बढ़कर 1136 हो गई है और नामांकित प्रशिक्षणार्थियों की संख्या 1978 से बढ़कर एक लाख तेरह हज़ार हो गई है | अब तक मात्र 40 प्रखंड ऐसे बचे हैं जहां कौशल विकास केंद्र अपना दस्तक नहीं दे पाया है |

अंत में यह कि राज्य सरकार द्वारा डीएम को सम्मानित किये जाने पर शहरवासियों ने खुशी जतायी है | समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं शिक्षाविद प्रो.श्यामल किशोर यादव ने विभिन्न क्षेत्रों में जिले के विकास के लिए डीएम मो.सोहैल के कार्यों की सराहना की और शुभकामनाएं दी |

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और नीतीश ने किसानों का दिल जीत लिया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजधानी पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन के अशोक कन्वेंशन सेंटर में किसान समागम का उद्घाटन किया। इस समागम का आयोजन कृषि विभाग ने राज्य के लिए तीसरा कृषि रोड मैप 2017-2022 तैयार करने के लिए किया था। बता दें कि पहला कृषि रोड मैप 2008-2012 और दूसरा कृषि रोड मैप 2012-2017 के लिए तैयार किया गया था।

शुक्रवार से शुरू हुए इस किसान समागम में राज्य के सभी जिलों से आए कृषि से संबंधित 534, पशुपालन से 75, मत्स्य से 25, वन व पर्यावरण से 25, सहकारिता से 25 एवं गन्ना से 15 किसानों द्वारा दिए गए सुझावों पर तीसरा कृषि रोड मैप तैयार किया जाएगा। रोड मैप तैयार कर लिए जाने के बाद बिहार में बीज हब की स्थापना की जाएगी ताकि किसानों को बीजों की समस्या से निजात मिल सके और राज्य में अबाध गति से कृषि का विकास हो।

किसान समागम का खास आकर्षण रहा दोपहर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीब 1400 किसानों के साथ जमीन पर बैठकर खाना। नीतीश ने कृषि विभाग को इसकी व्यवस्था करने का विशेष निर्देश दिया था। राज्य भर से आए किसानों पर इसका सकारात्मक असर भी तुरत देखने को मिला। नीतीश के इस कदम से उत्साहित जमुई के एक किसान ने कहा कि एक तरफ सरकारें किसानों पर गोलियां चलवा रही हैं और दूसरी ओर नीतीश किसानों के बीच बैठकर भोजन कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम में जुटे किसानों ने खुलकर अपनी बातें कहीं और मुख्यमंत्री उन्हें डूब कर सुनते रहे। अच्छी बात यह कि उन्होंने कृषि योजनाओं की खूबियों और खामियों दोनों को समभाव से सुना। किसानों ने जहां खूबियों को रेखांकित किया, वहीं कमियों की ओर भी इशारा किया। माहौल एकदम दोस्ताना था। यहां तक कि मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ हंसी-ठिठोली भी की। मुख्यमंत्री के साथ इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, मंत्री जय कुमार सिंह, आलोक मेहता और अवधेश सिंह तथा तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार मॉडल अपना कर चीन से आगे बढ़ेगा भारत : नीतीश

कई सौगातों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज सुपौल में हैं। यहां कोसी क्लब स्थित सभा स्थल से उन्होंने रिमोट द्वारा 44 योजनाओं का उद्घाटन एवं 88 नई योजनाओं का शिलान्यास किया। इसके उपरान्त विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार का विकास मॉडल पूरे देश में अपनाया जाना चाहिए। बिहार मॉडल अपनाने से देश चीन से भी आगे बढ़ेगा।

शराबबंदी की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हम समाज बदलने के संकल्प के साथ काम करते हैं। शराबबंदी पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और साथ ही शराबबंदी के बाद ऐसा ही सशक्त अभियान चलाकर समाज से बालविवाह और दहेजप्रथा को भी खत्म किया जाएगा।

कार्यक्रम में मौजूद बिहार सरकार के मंत्री जय कुमार सिंह ने सही ही कहा कि मुख्यमंत्री अभी सोशल रिफॉर्मर की भूमिका में हैं। वहीं, मंत्री अब्दुल गफूर ने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन पर तेजी से काम हो रहा है और राज्य में विकास की कई योजनाएं चल रही हैं। कार्यक्रम में उपस्थित बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आज जिन योजनाओं का उद्घाटन किया है वे मील का पत्थर साबित होंगी। जबकि जलसंसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने कहा कि बाढ़ के पूर्वानुमान का मुख्य कार्यालय कौशिकी भवन में बनाया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने आज ही वीरपुर में 54 करोड़ की लागत से नवनिर्मित कौशिकी भवन का उद्घाटन किया है।

बता दें कि उपरोक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि थे बिजेन्द्र प्रसाद यादव। वहीं विशिष्ट अतिथि थे बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति मो. हारुन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. अब्दुल गफूर। कार्यक्रम में आमंत्रित अन्य महत्वपूर्ण लोगों में सुपौल की सांसद रंजीत रंजन, छातापुर के विधायक नीरज कुमार सिंह, पिपरा के विधायक यदुवंश कुमार यादव, निर्मली के विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, त्रिवेणीगंज की विधायक वीणा भारती तथा सदस्य विधान परिषद नूतन सिंह, संजीव कुमार सिंह एवं डॉ. एनके यादव सहित कई गणमान्य जनप्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें से अधिकांश की उपस्थिति कार्यक्रम में देखी गई। विभिन्न महकमों के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी तो थी ही।

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