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बिहार को बहुत जल्द विशेष पैकेज की सौगात!

राजनीति की उठापटक अपनी जगह है और राज्य व देश का हित अपनी जगह। उसे हर हाल में अक्षुण्ण रखना चाहिए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी सोच के कारण महागठबंधन छोड़ने और एनडीए के साथ सरकार बनाने का बड़ा निर्णय लिया था। उनके उस निर्णय का सुखद परिणाम अब सामने आने जा रहा है। जी हां, बिहार को बहुत जल्द केन्द्र से 1.25 लाख करोड़ का विशेष पैकेज मिलने जा रहा है। बता दें कि इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव के समय की थी, लेकिन भाजपा की करारी हार के बाद विशेष पैकेज की बात ठंडे बस्ते में चली गई थी।

गौरतलब है कि नीतीश ने पिछले सप्ताह ही दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें उनके वादे की याद दिलाई थी। दरअसल नीतीश अच्छी तरह जानते हैं कि एनडीए के विरुद्ध जनादेश लेने के बाद फिर उसी के साथ सरकार बनाने के निर्णय को वे तभी सही ठहरा सकते हैं जब बिहारवासियों से किया वादा वे पूरा करें। अपने हाल के निर्णय में उन्होंने राजधर्म और राज्यधर्म को महागठबंधन-धर्म पर तरजीह दी जिसे बिहार को मिलने जा रही इस सौगात से निश्चित रूप से नैतिक बल मिलेगा।

वैसे देखा जाए तो जिस दिन बिहार में जेडीयू-एनडीए की सरकार बनी, उसी दिन से विशेष पैकेज मिलने की उम्मीद बढ़ गई थी। लेकिन ये खुशखबरी इतनी जल्दी मिलेगी इसकी उम्मीद नहीं थी। इन दिनों बाढ़ की विभीषिका झेल रहे बिहार के लिए ये सचमुच राहत की ख़बर है।

चलते-चलते बता दें कि जहां मोदी-नीतीश मिलकर बिहार से किये वादे पर अमल करने जा रहे हैं वहीं जेडीयू एनडीए में शामिल होने की विधिवत घोषणा भी शीघ्र करने जा रही है। यही नहीं, जेडीयू केन्द्र सरकार में भी शामिल होगी और ख़बर यह भी है कि नीतीश एनडीए के संयोजक हो सकते हैं। भारतीय राजनीति के दो शिखरपुरुषों के एक साथ आने से बिहार के विकास का हर अवरुद्ध मार्ग खुलेगा, ऐसी आशा की जानी चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सीएम ने मधेपुरा डीएम को उनकी अनूठी पहल के लिए किया सम्मानित

बिहार और बिहार की सीमा के पार के लोगों द्वारा विकास पुरुष से सम्मानित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के ज्ञान भवन में आयोजित विश्व युवा कौशल दिवस कार्यक्रम के अवसर पर कौशल विकास कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करनेवाले सात जिलाधिकारियों एवं कुशल युवा कार्यक्रम के 10 सर्वोत्तम प्रशिक्षण केंद्रों को सम्मानित किया | मौके पर प्रशिक्षण में अव्वल रहे छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया गया |

जहां मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने कुशल युवा प्रशिक्षित छात्रों के लिए नये रोजगार के विकल्प के तौर पर जीएसटी ऑपरेटर्स बनाने की राह तैयार की है वहीं नीतीश सरकार ने इस स्कीम को मॉडल के रूप में पूरे सूबे में लागू करने का निर्णय भी ले लिया है |

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विश्व कौशल विकास दिवस पर बिहार के 38 में से जिन सात जिले के जिलाधिकारियों को सम्मानित किया, वे जिले हैं- मधेपुरा, सहरसा, कटिहार, बेगूसराय, लखीसराय, बक्सर और मधुबनी तथा सम्मानित होने वाले डीएम क्रमशः- मो.सोहैल, विनोद सिंह गुंजियाल, मिथिलेश मिश्रा, मो.नौशाद यूसुफ, सुनील कुमार, रमन कुमार एवं शीर्षत कपिल अशोक |

हाँ ! इसके अतिरिक्त इस कार्यक्रम की देख-रेख करनेवाली कंपनी एम.के.सी.एल. के सीईओ विवेक सावंत, दीघा घाट ITI के उप-प्राचार्य के रूप में राहुल कुमार तथा घोघरडीहा के सर्वोत्तम प्राचार्य के रूप में अतुल रंजन को भी विकास पुरुष नीतीश कुमार के हाथों सम्मानित होने का अवसर प्राप्त हुआ |

यह भी जानिए की जन निजी सहभागिता के तहत चलाये जा रहे विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सर्वश्रेष्ठ मुंगेर संस्थान को मुख्यमंत्री द्वारा एक लाख का पुरस्कार दिया गया | साथ ही विज्ञान भवन में जो प्रदर्शनी लगाई गई उसे भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सहयोगी मंत्रियों राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (योजना विकास मंत्री), मंजू वर्मा (समाज कल्याण मंत्री), महेश्वर हजारी (नगर विकास मंत्री) एवं विजय प्रकाश (श्रम संसाधन मंत्री) आदि के साथ घूम-घूमकर देखा और सराहना करते हुए अपना-अपना विचार व्यक्त किया |

इसी क्रम में श्रम संसाधन सचिव दीपक कुमार ने भावोद्गार व्यक्त करते हुए यही कहा कि मात्र 7 महीने में  सूबे में कौशल विकास केंद्रों की संख्या 48 से बढ़कर 1136 हो गई है और नामांकित प्रशिक्षणार्थियों की संख्या 1978 से बढ़कर एक लाख तेरह हज़ार हो गई है | अब तक मात्र 40 प्रखंड ऐसे बचे हैं जहां कौशल विकास केंद्र अपना दस्तक नहीं दे पाया है |

अंत में यह कि राज्य सरकार द्वारा डीएम को सम्मानित किये जाने पर शहरवासियों ने खुशी जतायी है | समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं शिक्षाविद प्रो.श्यामल किशोर यादव ने विभिन्न क्षेत्रों में जिले के विकास के लिए डीएम मो.सोहैल के कार्यों की सराहना की और शुभकामनाएं दी |

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और नीतीश ने किसानों का दिल जीत लिया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजधानी पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन के अशोक कन्वेंशन सेंटर में किसान समागम का उद्घाटन किया। इस समागम का आयोजन कृषि विभाग ने राज्य के लिए तीसरा कृषि रोड मैप 2017-2022 तैयार करने के लिए किया था। बता दें कि पहला कृषि रोड मैप 2008-2012 और दूसरा कृषि रोड मैप 2012-2017 के लिए तैयार किया गया था।

शुक्रवार से शुरू हुए इस किसान समागम में राज्य के सभी जिलों से आए कृषि से संबंधित 534, पशुपालन से 75, मत्स्य से 25, वन व पर्यावरण से 25, सहकारिता से 25 एवं गन्ना से 15 किसानों द्वारा दिए गए सुझावों पर तीसरा कृषि रोड मैप तैयार किया जाएगा। रोड मैप तैयार कर लिए जाने के बाद बिहार में बीज हब की स्थापना की जाएगी ताकि किसानों को बीजों की समस्या से निजात मिल सके और राज्य में अबाध गति से कृषि का विकास हो।

किसान समागम का खास आकर्षण रहा दोपहर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीब 1400 किसानों के साथ जमीन पर बैठकर खाना। नीतीश ने कृषि विभाग को इसकी व्यवस्था करने का विशेष निर्देश दिया था। राज्य भर से आए किसानों पर इसका सकारात्मक असर भी तुरत देखने को मिला। नीतीश के इस कदम से उत्साहित जमुई के एक किसान ने कहा कि एक तरफ सरकारें किसानों पर गोलियां चलवा रही हैं और दूसरी ओर नीतीश किसानों के बीच बैठकर भोजन कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम में जुटे किसानों ने खुलकर अपनी बातें कहीं और मुख्यमंत्री उन्हें डूब कर सुनते रहे। अच्छी बात यह कि उन्होंने कृषि योजनाओं की खूबियों और खामियों दोनों को समभाव से सुना। किसानों ने जहां खूबियों को रेखांकित किया, वहीं कमियों की ओर भी इशारा किया। माहौल एकदम दोस्ताना था। यहां तक कि मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ हंसी-ठिठोली भी की। मुख्यमंत्री के साथ इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, मंत्री जय कुमार सिंह, आलोक मेहता और अवधेश सिंह तथा तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार मॉडल अपना कर चीन से आगे बढ़ेगा भारत : नीतीश

कई सौगातों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज सुपौल में हैं। यहां कोसी क्लब स्थित सभा स्थल से उन्होंने रिमोट द्वारा 44 योजनाओं का उद्घाटन एवं 88 नई योजनाओं का शिलान्यास किया। इसके उपरान्त विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार का विकास मॉडल पूरे देश में अपनाया जाना चाहिए। बिहार मॉडल अपनाने से देश चीन से भी आगे बढ़ेगा।

शराबबंदी की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हम समाज बदलने के संकल्प के साथ काम करते हैं। शराबबंदी पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और साथ ही शराबबंदी के बाद ऐसा ही सशक्त अभियान चलाकर समाज से बालविवाह और दहेजप्रथा को भी खत्म किया जाएगा।

कार्यक्रम में मौजूद बिहार सरकार के मंत्री जय कुमार सिंह ने सही ही कहा कि मुख्यमंत्री अभी सोशल रिफॉर्मर की भूमिका में हैं। वहीं, मंत्री अब्दुल गफूर ने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन पर तेजी से काम हो रहा है और राज्य में विकास की कई योजनाएं चल रही हैं। कार्यक्रम में उपस्थित बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आज जिन योजनाओं का उद्घाटन किया है वे मील का पत्थर साबित होंगी। जबकि जलसंसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने कहा कि बाढ़ के पूर्वानुमान का मुख्य कार्यालय कौशिकी भवन में बनाया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने आज ही वीरपुर में 54 करोड़ की लागत से नवनिर्मित कौशिकी भवन का उद्घाटन किया है।

बता दें कि उपरोक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि थे बिजेन्द्र प्रसाद यादव। वहीं विशिष्ट अतिथि थे बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति मो. हारुन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. अब्दुल गफूर। कार्यक्रम में आमंत्रित अन्य महत्वपूर्ण लोगों में सुपौल की सांसद रंजीत रंजन, छातापुर के विधायक नीरज कुमार सिंह, पिपरा के विधायक यदुवंश कुमार यादव, निर्मली के विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, त्रिवेणीगंज की विधायक वीणा भारती तथा सदस्य विधान परिषद नूतन सिंह, संजीव कुमार सिंह एवं डॉ. एनके यादव सहित कई गणमान्य जनप्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें से अधिकांश की उपस्थिति कार्यक्रम में देखी गई। विभिन्न महकमों के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी तो थी ही।

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बिहार में शराबबंदी के बाद दहेजबंदी का बिगुल

शराबबंदी की सफलता से उत्साहित बिहार की नीतीश सरकार अब समाज-सुधार का एक और बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। खास बात यह कि इस सुधार की प्रेरणा-स्रोत भी शराबबंदी की तरह महिलाएं हैं और शोषण व पीड़ा से उनकी मुक्ति ही इसका केन्द्रीय उद्देश्य है। जी हां, इस बार सरकार जिस कुरीति के विरुद्ध बिगुल फूंकने जा रही है, वो है सदियों से हमारे समाज को डंसती आ रही दहेज की प्रथा। इसी के साथ बालविवाह के खिलाफ भी लड़ाई तेज होगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाज कल्याण विभाग के कामकाज की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरुद्ध बड़े जागरूकता अभियान की योजना बनाएं।

गौरतलब है कि पिछले सोमवार को महिलाओं के लिए विशेष रूप से आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में एक युवती ने मुख्यमंत्री को यह परामर्श दिया था कि वह शराबबंदी की तरह ही दहेजबंदी का अभियान चलाएं। वहीं एक युवती ने बालविवाह को लेकर सलाह दी थी कि ऐसा कानून बनना चाहिए कि जब तक लड़की की पढ़ाई पूरी न हो जाए तब तक उनकी शादी नहीं हो। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महत्वपूर्ण बात है कि अब महिलाएं इन मुद्दों को लेकर मुखर हैं। उन्होंने दहेज और बालविवाह के विरुद्ध चलाए जाने वाले अभियान को कारगर और प्रभावी बनाने के लिए निर्देश दिया कि प्रस्तावित कैंपेन में समाज कल्याण विभाग स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास विभाग को भी साथ ले।

इस बैठक में नीतीश कुमार ने ‘मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना’ के सभी अवयवों की समीक्षा करने को कहा। उन्होंने कहा कि यह बात सामने आनी चाहिए कि इन योजनाओं से कितने लोगों को लाभ हुआ है। मुख्यमंत्री ने कन्या सुरक्षा योजना की बात भी कही। इसके अतिरिक्त बालविवाह प्रतिरोध अधिनियम 2006, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन, फूड सेफ्टी एंड न्यट्रिएंट, आंगनबाड़ी संचालन, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना, शताब्दी कुष्ठ कल्याण योजना, पुनर्वास गृह, बसेरा, वृद्धा आश्रम निर्माण एवं नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना पर भी चर्चा की गई। समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा, समाज कल्याण विभाग की प्रधान सचिव वंदना किनी एवं महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक एन विजयलक्ष्मी इस महत्वपूर्ण बैठक का हिस्सा रहीं।

 

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मिशन 2019 में अभी से क्यों जुटे नीतीश..?

लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल बाकी हैं लेकिन जेडीयू ने नीतीश कुमार को अभी से मैदान में उतार दिया है। पटना में पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में एक ओर अध्यक्ष के तौर पर नीतीश की ताजपोशी की गई तो दूसरी ओर गैरभाजपा दलों का एका करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया। संदेश स्पष्ट है कि नीतीश अब औपचारिक रूप से राहुल गांधी, मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी और अरविन्द केजरीवाल जैसे प्रधानमंत्री पद के दावेदार नेताओं के क्लब में शामिल हो गए।

ये स्पष्ट है कि बिहार की महागठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस गैरभाजपा विकल्प के तौर पर कभी नीतीश के नाम पर सहमत नहीं हो सकती और ना ही राजद समेत अन्य दलों ने अभी इस संबंध में अपनी राय खुलकर जाहिर की है। (हाँ, नीतीश को ‘पीएम मैटेरियल’ बताना अलग बात है।) लेकिन नीतीश और उनकी टीम जल्दी में दिख रही है। इस जल्दबाजी से उन्हें दो कारण दिख रहे हैं। पहला यह कि राष्ट्रीय स्तर पर अभी जैसा ‘मोदीमय’ माहौल है उसमें उनके विकल्प के तौर पर आक्रामक होकर आने का साहस और तैयारी किसी के पास नहीं दिख रही और इसका फायदा नीतीश और उनकी टीम उठाना चाहती है। दूसरा ये कि बिहार चुनाव के परिणाम के बाद नीतीश की जैसी करिश्माई छवि बनी है उस पर वक्त की धूल-मिट्टी पड़ने से पहले ही उसे भुना लेने की कोशिश की जा रही है।

नीतीश कुमार मंझे हुए नेता हैं और राजनीति की बिसात पर गोटियां बिठाना उन्हें खूब आता है। उन्हें पता है कि बड़े लक्ष्य के लिए केवल नारेबाजी से काम नहीं चलता, धरातल पर भी बहुत कुछ कर के दिखाना होता है। यही कारण है कि एक ओर वो संघमुक्त भारत का नारा दे रहे होते हैं तो दूसरी ओर शराबबंदी को राष्ट्रीय अभियान बनाने की बात करते हैं। महिला आरक्षण और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जैसे फैसलों को नीतीश अब राष्ट्रीय फलक पर अपने विकास मॉडल के तौर पर पेश करना चाहते हैं।

यूपी चुनाव से पहले अजित सिंह के रालोद और बाबूलाल मरांडी के जेवीएम को मिलाकर अपना ‘कैनवास’ बड़ा करने की कोशिश नीतीश के मिशन 2019 का ही हिस्सा है। यूपी में उनकी सफलता या असफलता से भारत की भावी राजनीति की तस्वीर बहुत हद तक साफ हो जाएगी, इसमें कोई दो राय नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नए अवतार में नीतीश का तीन सूत्री कार्यक्रम

आज होने वाली जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के लिए पटना का श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल सज कर तैयार है और राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई देने वाले बैनर, पोस्टर और होर्डिंग से पूरा पटना पटा हुआ है। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में 350 डेलीगेट्स भाग लेंगे जिनके रजिस्ट्रेशन का काम कल ही पूरा कर लिया गया। इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नीतीश कुमार की ताजपोशी होगी और नए अवतार में नीतीश जेडीयू की राष्ट्रीय राजनीति का शंखनाद करेंगे।

यूँ तो इस ‘मह्त्वाकांक्षी’ बैठक में कई बातें होनी हैं लेकिन जिन तीन मुद्दों पर पार्टी की आगे की रणनीति केन्द्रित होगी, वे हैं – बिहार में सफल शराबबंदी को अन्य राज्यों तक पहुँचाना, नीतीश के संघमुक्त भारत बनाने के आह्वान को राष्ट्रीय मुद्दा बनाना और समान विचारधारा वाले ‘धर्मनिरपेक्ष’ दलों से गठबंधन कर जेडीयू को बड़े फलक पर लाना। इन तीनों मुद्दों को आप एक साथ जोड़ दें तो साफ-साफ दिखेगा कि नीतीश 2019 की तैयारी में कितनी शिद्दत से जुटे हैं।

बहरहाल, इस बैठक को मुख्य रूप से नीतीश कुमार और निवर्तमान अध्यक्ष शरद यादव संबोधित करेंगे। आज इस बात की झलक भी मिल जाएगी कि आने वाले दिनों में पार्टी अपने पूर्व अध्यक्ष से कितना ‘मार्गदर्शन’ लेगी। यूपी चुनाव के मद्देनज़र अजित सिंह के रालोद व अन्य दलों के जेडीयू में होने जा रहे विलय के बाद शरद के हिस्से में क्या आएगा ये भी देखने की बात होगी ।

देखा जाय तो पहले समता पार्टी और फिर जेडीयू के गठन से लेकर आज तक पार्टी चलती तो रही नीतीश के इशारों पर लेकिन अगुआई पहले जॉर्ज फर्नांडिस और बाद में शरद यादव ने की। अब नीतीश घोषित तौर पर ‘सर्वेसर्वा’ होंगे। अब नीतीश जिस ‘प्लेटफॉर्म’ पर होंगे उस पर उनके सारे एजेंडे के मूल में बस एक एजेंडा होगा कि 2019 की लड़ाई मोदी बनाम नीतीश के तौर पर सामने आए। अगर राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस ने तब तक बड़ी ‘करवट’ ना ली तो ये होना असंभव भी नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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केन्द्र से अधिक ‘स्मार्ट’ होने का दावा नीतीश का ‘असंयम’ या ‘आत्मविश्वास’..?

बिहार चुनाव में महागठबंधन की जीत के कई कारण गिनाए गए हैं लेकिन सच ये है कि जिस चीज ने नीतीश की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई वो है नीतीश का ‘संयम’ जिसे उन्होंने तमाम ‘वार’ झेलते हुए भी पूरे चुनाव में निभाया। दूसरी ओर शुरुआती हवा एनडीए के पक्ष में दिखने के बावजूद मोदी और उनकी टीम का ‘असंयमित’ व्यवहार उनकी हार का कारण बना। लेकिन लालू और कांग्रेस का साथ लेकर सरकार चला रहे नीतीश के संयम की डोर शायद थोड़ी ‘ढीली’ पड़ रही है..! अब ये उनका ‘असंयम’ है या ‘आत्मविश्वास’ ये तो आने वाला वक्त बताएगा, बहरहाल आज उन्होंने ये बयान दिया है कि केन्द्र केवल ‘बातों’ में स्मार्ट है, जबकि ‘हम’ काम करने में स्मार्ट हैं।

आज सीएम सचिवालय के संवाद कक्ष में विभिन्न योजनाओं की शुरुआत एवं लोकार्पण करते हुए स्मार्ट सिटी के मुद्दे पर केन्द्र को आड़े हाथ लेते हुए नीतीश ने कहा कि हमें स्मार्ट सिटी की चिन्ता नहीं है। केन्द्र सरकार प्रत्येक स्मार्ट सिटी को हर वर्ष सौ करोड़ रुपये देगी। इससे क्या होगा..? कोई शहर कितना स्मार्ट बनेगा..? पाँचवें राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत हम आठ हजार करोड़ रुपये देंगे।

नीतीश कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार ने सौ शहरों को स्मार्ट बनाने की बात की थी, जबकि चयन केवल बीस का ही किया गया। बिहार को छोड़ दिया गया। अब हम अपने प्रयासों से शहरों को मजबूत बनाएंगे। इसके लिए शहरी अभियंत्रण संगठन बनाया जा रहा है जो निकायों के लिए इंजीनियरिंग क्षेत्र में लाभप्रद होगा।

बिहार के मुख्यमंत्री ने अपने सात निश्चयों को मिशन मोड में पूरा करने का संकल्प जताया। उन्होंने कहा कि शहर से लेकर गांव तक हमें हर हाल में नल का पानी उपलब्ध कराना है। पेयजल योजनाओं को नगर निकायों के माध्यम से पूरा किया जाएगा। सात निश्चयों में शामिल ‘हर घर में शौचालय’ के लिए भी उन्होंने प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि केन्द्र से इसके लिए सिर्फ चार हजार रुपये दिए जाते हैं। राज्य सरकार ने इसमें अपनी ओर से आठ हजार रुपये जोड़े हैं ताकि शौचालय निर्माण में कोई कमी ना रह जाय। उन्होंने नाली निर्माण और हर घर में बिजली के मुफ्त कनेक्शन की बात भी दुहराई।

नीतीश-राज में जनप्रतिनिधि आमतौर पर ‘अफसरशाही’ से त्रस्त रहे हैं। लेकिन आज नीतीश ने कहा कि निर्णय जनप्रतिनिधि को लेना है। अफसर का काम उन्हें क्रियान्वित करना है। उन्होंने अफसरों को काम के जरिए ‘पावरफुल’ होने की नसीहत दी और कहा कि काम से ही किसी के दिल में जगह बनती है।

नीतीश काम करने के लिए जाने जाते हैं। बिहार की जनता ने उन्हें पाँचवीं बार चुना भी इसीलिए है। नीतीश जैसे ‘मैच्योर्ड’ राजनेता को अच्छी तरह पता है कि केन्द्र से ‘सकारात्मक’ संबंध के बिना किसी राज्य का ‘निर्बाध’ विकास सामान्यतया संभव नहीं है। उन्हें चाहिए कि राज्य के हित के लिए ‘राजनीति’ से ऊपर उठें और जनता के विवेक पर भरोसा करें। सूचना-क्रांति के इस युग में जनता तक सही-गलत पहुँचने में वैसे भी देर नहीं लगती। और हाँ, अपना ‘संयम’ और अपनी ‘शालीनता’ तो वो हर हाल में बना कर रखें क्योंकि ये उनकी या किसी भी सफल व्यक्ति की सबसे बड़ी ‘पूंजी’ होती है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश कुमार को पेरियार इंटरनेशनल का सोशल जस्टिस अवार्ड   

अगर आप काम करेंगे तो तय है कि आपको पहचान मिलेगी और अगर आपका काम समाज को समर्पित है तो आप वास्तव में बड़े सम्मान के हकदार हैं। हम यहाँ बात कर रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जिन्हें ‘पेरियार इंटरनेशनल’ ने सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए ‘के. वीरमणि सोशल जस्टिस अवार्ड’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। नीतीश को यह सम्मान वर्ष 2015 के लिए दिया जाएगा। बता दें कि यह पुरस्कार महान समाज सुधारक और दलित आदर्श पेरियार ई.वी. रामासामी के अनिवासी भारतीय अनुयायियों द्वारा ‘द्रविड़ कड़गम’ के अध्यक्ष व तमिलनाडु स्थित पी.एम. यूनिवर्सिटी (Periyar Maniammai University) के चांसलर डॉ. के. वीरमणि के नाम पर शुरू किया गया है।

अमेरिका स्थित ‘पेरियार इंटरनेशनल’ सामाजिक न्याय के क्षेत्र में कार्य करने वाला विश्वस्तरीय संगठन है। इस संगठन द्वारा इससे पूर्व यह सम्मान पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, एम करुणानिधि, सीताराम केसरी और मायावती जैसी 16 हस्तियों को दिया जा चुका है। चन्द्रजीत यादव, जीके मूपनार, वी. हनुमंत राव और छगन भुजबल भी यह पुरस्कार पा चुके हैं। अवार्ड समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण तमिल ने कहा कि पेरियार इंटरनेशनल नीतीश को यह सम्मान पटना में देने की योजना बना रहा है।

अपने लम्बे राजनीतिक जीवन में नीतीश ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उनके कुछ निर्णयों की आलोचना भी हुई है। लेकिन न्याय के साथ विकास के लिए उन्होंने जो प्रतिबद्धता दिखाई है उसके कायल उनके विरोधी भी रहे हैं। बिहार चुनाव में महागठबंधन को मिली ऐतिहासिक सफलता ने प्रमाणित किया कि नीतीश की व्यक्तिगत छवि बिहार के तमाम राजनीतिक समीकरणों पर भारी है। बिहार जैसे जटिल सामाजिक व राजनीतिक संरचना वाले राज्य में ‘सुशासन’ की धाक जमा कर नीतीश ने ना केवल राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। नीतीश को दिया जाने वाला उपरोक्त पुरस्कार इसी बात की तस्दीक है।

बिहार और देश के हित में निरन्तर कार्य कर भविष्य में ऐसी अनेक उपलब्धियां हासिल करने के निमित्त ‘मधेपुरा अबतक’ सामाजिक न्याय के इस पुरोधा को अपनी शुभकामनाएं देता है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार के बाद ‘मिशन असम’ पर हैं नीतीश और उनके ‘चाणक्य’

बिहार में महागठबंधन की जीत में बड़ी भूमिका निभाने वाले नीतीश के चाणक्य प्रशांत किशोर ने अब असम का रुख किया है। नीतीश ने उन्हें बिहार की तरह असम में भी ‘महागठबंधन’ की सम्भावना तलाशने भेजा है। सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर पिछले सप्ताह असम में थे और उन्होंने असम की पार्टी एआईयूडीएफ के नेता बदरूद्दीन अजमल से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘लम्बी’ बातचीत कराई है।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को असम में बड़ी कामयाबी मिली थी। तब सबको चौंकाते हुए उसने वहाँ की 14 में से 7 लोकसभा सीटें जीत ली थीं। राज्य में भाजपा की बढ़ती ताकत को देख उसे रोकने लिए तमाम विरोधी दल एक होने की जरूरत महसूसने लगे थे पर किसी ‘सम्भावना’ को ठोस आकार नहीं मिल पा  रहा था। बिहार में जेडीयू-राजद-कांग्रेस महागठबंधन की सफलता से इस सम्भावना को आकार और गति देने का फार्मूला मिल गया और उस फार्मूले को जमीन पर उतारने के लिए प्रशांत किशोर जैसा रणनीतिकार भी। लिहाजा राजनीति की नब़्ज पहचानने वाले नीतीश ने अपने ‘चाणक्य’ को ‘मिशन असम’ पर भजने में जरा भी देर नहीं की।

बता दें कि जेडीयू असम में एआईयूडीएफ, असम गण परिषद और कांग्रेस के ‘महागठबंधन’ को आकार देने में लगी है। पार्टी के महासचिव केसी त्यागी का मानना है कि इन दलों के एक साथ आने पर भाजपा को रोकना बहुत आसान होगा।

असम में नीतीश की ‘चहलकदमी’ अप्रत्याशित नहीं है। उनके शपथग्रहण में देश भर के तमाम मोदीविरोधी दलों और दिग्गज नेताओं के जमावड़े ने स्पष्ट कर दिया था कि वो पाँचवीं बार बिहार की सत्ता पाकर ही रुकने वाले नहीं हैं। उनका अगला कदम मोदीविरोधी राजनीति की धुरी बन स्वयं को मोदी के विकल्प के तौर पर पेश करना होगा। असम से उन्होंने इसी की शुरुआत की है। पश्चिम बंगाल और यूपी पर भी उनकी निगाह बराबर बनी हुई है। ये देखना खासा दिलचस्प होगा कि आँकड़ों के लिहाज से केवल बिहार में राजनीतिक वज़ूद रखनेवाले एक दल का नेता क्या केवल अपनी ‘छवि’ की बदौलत मोदी के राष्ट्रीय कद और भाजपा के राष्ट्रीय नेटवर्क का मुकाबला कर पाएगा..?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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