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तीसरी बार सीएम के हाथों पुरस्कृत हुए डीएम मो.सोहैल

सबों को पता है कि सूबे बिहार में कुल 38 जिले हैं जिनमें से मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भाप्रसे) सहित कुल 9 जिले के जिलाधिकारी और डीडीसी को उनके बेहतर कार्यों के लिए भारतीय सिविल सेवा दिवस (21 अप्रैल, शनिवार) के दिन राजधानी पटना में सम्मानित किया गया- सूबे के सीएम नीतीश कुमार द्वारा | वही सीएम जो देश-विदेश में विकास पुरुष के रूप में ख्याति अर्जित कर चुके हैं |

बता दें कि सिविल सेवा दिवस के अवसर पर राजधानी पटना में सामान्य प्रशासन विभाग के बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसायटी द्वारा “संवाद” नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसके मुख्य अतिथि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कर्मठ हाथों से सूबे के नौ चुनिंदे जिलाधिकारी एवं डीडीसी को सम्मानित किया गया |

यह भी जानिए कि वे चुनिंदे डीएम एवं डीडीसी निम्न जिले के हैं जिन्हें प्रधान सचिव आमिर सुबहानी (IAS) द्वारा पत्र भेजकर आमंत्रित किया गया था | वे जिले हैं- मधेपुरा, किशनगंज, शेखपुरा, नालंदा, समस्तीपुर, पटना, जहानाबाद, रोहतास और दरभंगा |

यह भी बता दें कि बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, बिहार लोक शिकायत अधिकार अधिनियम एवं सात निश्चय योजनाओं के कार्यान्वयन में सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियाँ हासिल करने वाले चुनिंदा इन नौ जिलों के डीएम, डीडीसी को CM Nitish Kumar ने सम्मानित करके सूबे में कार्यरत समस्त सिविल सेवाओं के अधिकारियों के बीच उनकी पहचान को ऊंचाई देने का काम किया है |

यह भी जानिए कि जिले के विकास को समर्पित डीएम मो.सोहैल यहां की सभी योजनाओं की प्रगति का जायजा प्रतिदिन लेते हैं | सरकारी योजनाएँ, चाहे सूबे की सरकार की हो या केंद्रीय सरकार की- डीएम अपने व्यक्तिगत कार्यों को भले ही भूल जाय, परंतु छोटी-बड़ी सभी सरकारी योजनाओं की निगरानी मिनट-टू-मिनट करना नहीं भूलते | वे जांच की क्रॉस चेकिंग भी विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से करा ही लेते हैं |

मधेपुरा के मशहूर समाजसेवी साहित्यकार और भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि यदि भारत के कुल 712 जिलों के जिलाधिकारियों में से आधे जिलाधिकारी भी अगर डायनेमिक डीएम मो.सोहैल की तरह ही जिले के विकास के लिए समर्पित हो जायें तो अभी भी गांधीयन मिसाइलमैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा 2020 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जो सपना देखा गया था वो पूरा हो सकता है !

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जापान दौरे से बिहार की संभावनाओं को नई उड़ान दे रहे नीतीश

मंगलवार को अपने जापान दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहार राज्य प्रोत्साहन संगोष्ठी को संबोधित किया, एम्बेसी ऑफ इंडिया, टोक्यो में मिथिला पेंटिंग की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और इंडियन पार्लियामेंट्रियन फ्रेंडशिप लीग की बैठक में अध्यक्ष श्री होसादा हिरोयूकी के हाथों सम्मानित हुए। इससे पूर्व सोमवार को वे जापान के प्रधानमंत्री श्री शिंजो अवे, विदेश मंत्री श्री तारो कोनो, विदेश राज्य मंत्री श्री कजायुकी नकाने और जापान में भारत के राजदूत श्री सुजान चिनौय से मिले और वहां के बिहारी प्रवासियों के साथ भी थोड़ा वक्त बिताया।

जापान के प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान नीतीश कुमार ने बिहार में मिनी बुलेट ट्रेन के साथ ही कई अन्य बिन्दुओं पर भी चर्चा की, जिनमें पर्यटन, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण आदि प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने जापान सरकार से बिहार में हाई स्पीड रेल लिंक के निर्माण के संबंध में तकनीकी सहयोग देने की अपेक्षा भी जताई।

बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान इंटरनैशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीके) के माध्यम से पटना को गया, बोधगया, राजगीर और नालंदा से जोड़ने का काम चल रहा है, जिसे वैशाली तक बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इससे इसकी प्रासंगिकता और बढ़ेगी और लोगों को सभी बौद्ध स्थलों की यात्रा करने में सुविधा होगी। साथ ही दोनों देशों के बीच पर्यटन की संभावना को और बल मिलेगा।

नीतीश कुमार ने जापान के विदेश मंत्री तारो कोनो से भी मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने विदेश मंत्री से बिहार से जापान के बीच सीधी विमान सेवा के संचालन के संबंध में विस्तृत बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे जापान और बिहार के आपसी संबंध और मजबूत होंगे एवं दोनों देशों के पर्यटक यात्रा कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त उन्होंने बिहार को औद्योगिक केन्द्र बनाने की बात की और कहा कि इससे बिहार के मेधावी और मेहनती युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। कहने की जरूरत नहीं कि अपने जापान दौरे से बिहार की संभावनाओं को नई उड़ान दे रहे हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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जापान के चार दिवसीय दौरे पर रवाना हुए नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चार दिन की जापान यात्रा पर रविवार को दिल्ली रवाना हो गए। वे दिल्ली से सोमवार की सुबह जापान पहुंचेंगे। वहाँ 20 फरवरी को टोक्यो और 21 फरवरी को ओसाका में निवेशकों के साथ उनकी बैठक होगी। इसके अलावा वे प्राचीन शहर क्योटो भी जाएंगे।

इस मौके पर बड़ी संख्या में जदयू के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने 1, अणे मार्ग और हवाई अड्‌डे पर जाकर मुख्यमंत्री को विदाई दी। उन्हें शुभकामना देने वालों में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य बशिष्ठ नारायण सिंह, राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सांसद संतोष कुशवाहा, मुख्य प्रवक्ता व विधानपार्षद श्री संजय सिंह, कोषाध्यक्ष व विधानपार्षद प्रो. रणवीर नंदन आदि प्रमुख हैं।

बता दें कि नीतीश कुमार के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जापान गया है, जिसमें पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पथ निर्माण प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा, भवन निर्माण प्रधान सचिव चंचल कुमार, उद्योग प्रधान सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चंद्रा, आईजी बच्चू सिंह मीणा, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल सिंह, बीआईए के अध्यक्ष केपीएस केसरी और बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष ओपी साह शामिल हैं।

गौरतलब है कि बिहार में निवेश, पटना मेट्रो, सड़क, भवन निर्माण, अन्य आधारभूत संरचना, पर्यटन, ऊर्जा, हॉस्पिटैलिटी और औद्योगिक क्षेत्र में संभावनाओं को लेकर जापान यात्रा के दौरान चर्चा होगी। उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे पर पटना से बोधगया के बीच चलाए जाने के लिए प्रस्तावित मिनी बुलेट-मेट्रो टाइप ट्रेन की चर्चा पर भी औपचारिक तौर पर मुहर लग जाएगी।

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पांच करोड़ लोगों ने बनाई 13668 किलोमीटर लंबी मानव-श्रृंखला

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का साथ देने एक बार फिर पूरा बिहार उमड़ पड़ा और करोड़ों बिहारवासियों ने दहेज और बालविवाह से मुक्ति का पवित्र संकल्प लिया। रविवार को दोपहर 12 से 12.30 बजे के बीच राज्य के आम हों खास नागरिक, बच्चे हों या बूढ़े, पुरुष हों या महिलाएं, सभी एक समान उत्साह से भरे हुए नजर आए। दैनिक जागरण के मुताबिक श्री नीतीश कुमार के आह्वान पर इस बार 13668 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला में करीब पांच करोड़ लोग शामिल हुए और इस तरह बिहार विश्व की सबसे लंबी मानव श्रृंखला का साक्षी बना। बता दें कि इससे पहले भी यह कीर्तिमान बिहार के ही नाम था। शराबबंदी के लिए बनी मानव-श्रृंखला में 2016 में इसी 21 जनवरी के दिन लगभग 4 करोड़ लोग जुटे थे। ध्यातव्य है कि पिछली बार सड़कों पर ही श्रृंखला बनाई गई थी। इस बार यह लोगों पर छोड़ा गया था। लोगों ने गांव-कस्बे-मोहल्ले में जहां चाहा वहां श्रृंखला बनाई।

मानव-श्रृंखला की शुरुआत श्री नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान में गुब्बारा छोड़कर की। श्रृंखला बनाने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह और दहेज के खिलाफ पहले से ही कानून हैं, लेकिन ये कुरीतियां फैलती जा रही हैं। इसलिए हम बापू के जन्मदिवस 2 अक्टबूर से इसके विरोध में अनवरत अभियान चला रहे हैं। आगे भी यह कार्यक्रम जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि लोगों में बाल विवाह व दहेज के खिलाफ जागरुकता आ रही है। उनके संकल्प का प्रकटीकरण सार्वजनिक तौर पर भी होना चाहिए। इसलिए इस मानव-श्रृंखला का आयोजन किया गया।

जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष श्री बशिष्ठ नारायण सिंह ने मानव-श्रृंखला को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि श्री नीतीश कुमार ने राजनीति को जिस तरह समाज से जोड़ा है, वह अनोखा है और उसका असर मानव-श्रृंखला के लिए घर से बाहर निकलने वाली बिहार की करोड़ों जनता की आंखों में देखा जा सकता है। वर्तमान समय में पूरे देश में दूसरा कोई ऐसा राजनेता नहीं, जिसने समाज-सुधार को अपना एजेंडा बनाया हो। बिहार की जनता ने अपने नेता के आह्वान पर एक बार फिर जैसा उत्साह दिखाया है, उससे उनके संकल्प को और बल मिलेगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के साथ गांधी मैदान में विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी, पथनिर्माण मंत्री श्री नंदकिशोर यादव, कृषिमंत्री श्री प्रेम कुमार समेत कई वरिष्ठ नेता व नागरिक मानव-श्रृंखला का हिस्सा बने। वहीं ईको पार्क के निकट स्ट्रैंड रोड पर बनी मानव-श्रृंखला में जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष श्री बशिष्ठ नारायण सिंह के नेतृत्व में विधान परिषद के पूर्व सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह, विधानपार्षद व जेडीयू बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. रामवचन राय, विधानपार्षद व पार्टी के मुख्य सचेतक श्री संजय कुमार सिंह (गांधीजी), विधानपार्षद व कोषाध्यक्ष डॉ. रणवीर नंदन, विधानपार्षद व मुख्य प्रवक्ता श्री संजय सिंह, विधानपार्षद श्री ललन सर्राफ एवं जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप समेत हजारों कार्यकर्ता व नेता शामिल हुए।

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मकर-संक्रान्ति: कड़ाके की ठंड में भोज की गरमाहट

बिहार की राजनीति में मकर संक्रान्ति खास मायने रखती है। इस दिन आयोजित चूड़ा-दही भोज में कड़ाके की ठंड के बावजूद राजनीतिक तापमान बढ़ा रहता है और आपसी संबधों को एक नया आयाम मिलता है। आप खुद ही देख लें। पिछले साल मकर संक्रान्ति में जेडीयू और आरजेडी महागठबंधन के साथी के तौर पर एक साथ थे। आरजेडी ने लगातार दो दिनों का भोज आयोजित किया था और उस भोज में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को दही का टीका लगाकर ‘राजतिलक’ लगाने की घोषणा की थी। लेकिन, आज के बदले हालात में लालू-नीतीश की राहें जुदा हैं। उधर 2013 के बाद जेडीयू और भाजपा एक बार फिर एक-दूसरे के भोज में मौजूद हैं।

बदले हालात में और अपने नेता के जेल में होने के कारण इस साल आरजेडी की ओर से कोई भोज नहीं था। दूसरी ओर जेडीयू, लोजपा और भाजपा के द्वारा भोज का आयोजन किया गया। 15 जनवरी को रालोसपा ने भी भोज का आयोजन किया है।

जेडीयू की ओर से हमेशा की तरह प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने भोज का आयोजन किया। इस भोज में लगभग 15 हजार लोग जुटे। एनडीए की तमाम बड़ी हस्तियों ने यहां अपनी उपस्थिति दर्ज की। इनमें जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, जेडीयू संसदीय दल के नेता व महासचिव आरसीपी सिंह, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान व उनके पुत्र चिराग पासवान, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मंगल पांडेय प्रमुख हैं। जेडीयू के भोज में शामिल प्रमुख लोगों में एक चौंकाने वाला नाम महागठबंधन सरकार में शिक्षामंत्री व कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी का है। हालांकि बकौल चौधरी वे बशिष्ठ नारायण सिंह से अपने ‘व्यक्तिगत’ संबंधों के कारण भोज में शामिल हुए, लेकिन ‘कयास’ लगाने वाले इससे सहमत होंगे, ऐसा नहीं लगता।

गौरतलब है कि हमेशा चर्चा में रहने वाले जेडीयू के भोज के लिए भागलपुर से कतरनी व पश्चिमी चंपारण से मर्चा चूड़ा मंगवाया गया था, जबकि तिलकुट की व्यवस्था गया से की गई थी। इनके साथ-साथ भूरा-चीनी तथा आलू-गोभी-मटर की लजीज सब्जी की व्‍यवस्‍था भी थी। दही का इंतजाम ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ सुधा डेयरी से किया गया था।

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन तीनों भोजों में शिरकत की। बशिष्ठ नारायण सिंह के आवास पर आयोजित भोज में शामिल होने के बाद वे लोजपा कार्यालय गए। वहां लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने पहली बार मकर संक्रांति भोज का आयोजन किया था। जबकि भाजपा की ओर से एमएलसी रजनीश कुमार के आवास पर भोज का आयोजन था। स्वाभाविक तौर पर इन दोनों जगहों पर भी नेताओं का जुटान हुआ।

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बुद्ध की सोच ‘लाइट ऑफ एशिया’: राष्ट्रपति कोविंद

गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एकदिवसीय यात्रा पर बिहार के राजगीर में थे। मौका था अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय व इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय धर्म धम्म सम्मेलन के उद्घाटन का और उनके साथ मौजूद थे बिहार के राज्यपाल सत्य पाल मलिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलक मारापना सहित कई गणमान्य।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि 21वीं सदी में भी भगवान बुद्ध के विचार हमें प्रेरित कर रहे हैं। सही मायने में बुद्ध की सोच ‘लाइट ऑफ एशिया’ है। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान में दुनिया की आधी से अधिक आबादी ऐसी जगहों पर रह रही है जो भगवान बुद्ध के ज्ञान से प्रभावित है और उस ज्ञान से लगातार प्रेरित हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि धर्म धम्म परंपरा यह कहती है कि किस तरह निरंतरता से खुद को बेहतर करना है। इसकी क्या जरूरत और महत्ता है। किस तरह से हमें उच्च स्तर का ज्ञान हासिल करना है। यह ज्ञान ही है जिससे राजकुमार सिद्धार्थ भगवान बु्द्ध बने और महान योद्धा अशोक बन गए धम्म अशोका। बुद्ध के विचार हमें जीने के सिद्धांत की ओर प्रेरित करते हैं। ईमानदारी और पारदर्शिता की ओर हमें ले जाकर सह अस्तित्व की भावना को विकसित करते हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का सपना था। यह विश्वविद्यालय उनके सपनों का मूर्त रूप है। यह महावीर, बुद्ध तथा गुरुनानक की धरती है, जिन्होंने पूरे विश्व को शांति का संदेश दिया। उन्होंने वैश्विक समस्याओं के निवारण के लिए अंतररराष्ट्रीय रिजोल्यूशन सेंटर खोलने पर भी बल दिया।

चलते-चलते यह कहना बेहद जरूरी प्रतीत होता है कि हाल के दिनों में बिहार की बौद्धिक-सांस्कृतिक सक्रियता जिस तरह बढ़ी है, वह नीतीश कुमार जैसे विचारशील और संस्कारयुक्त अगुआ के बिना मुमकिन ना थी। ऐसी तमाम गतिविधियों के लिए वे और उनकी सरकार साधुवाद के पात्र हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में खोल गए मुख्यमंत्री संभावनाओं के द्वार

समीक्षा यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बृहस्पतिवार को मधेपुरा पहुंचे। शीतलहर के बावजूद उनके लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। योजनाओं की समीक्षा के साथ ही उन्होंने जिले के लिए संभावनाओं के कई नए द्वार भी खोल दिए। सिंहेश्वर के मवेशी हाट में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने मधेपुरा को 658 करोड़ रुपए की सौगात दी और जिले के लिए 1565 योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री के साथ मंच पर मौजूद लोगों में मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, मंत्री रमेश ऋषिदेव, पूर्व सांसद व बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि, विधायक व पूर्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव, विधायक निरंजन मेहता, कमिश्नर टीएन बिंधेश्वरी, डीएम मोहम्मद सोहैल आदि प्रमुख हैं।

अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंहेश्वर के गौरीपुर पंचायत के वार्ड नं. 9 एवं 10 में ‘सात निश्चय’ के तहत हुए कार्यों को देखा। सात निश्चय से गांव और शहर के फर्क को मिटाने के अपने सपने को जमीन पर उतरता देख वे खुश नजर आए। विकास कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 250 की आबादी वाले हर टोले और गली को मुख्य सड़क से जोड़ा जाएगा। पेयजल, बिजली, शौचालय आदि की सुविधाएं वहां उपलब्ध होंगी। यही नहीं, चार साल के अंदर ये सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे खूब पढ़ें और आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि पढ़ने में अब पैसा बाधक नहीं बनेगा। 12वीं के बाद राज्य सरकार सभी बच्चे को चार लाख तक का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करा रही है। युवाओं के कौशल विकास पर पूरा फोकस किया जा रहा है। कौशल विकास मिशन के तहत कुशल युवा कार्यक्रम चलाकर युवाओं को कम्प्यूटर शिक्षा में जहां दक्ष बनाया जा रहा है, वहीं कम्यूनिकेशन स्किल और रहन-सहन को लेकर भी उनके व्यक्तित्व का विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विकास के साथ ही समाज-सुधार भी जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए आमलोगों के जागरुक होने की जरूरत है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह का आह्वान करते हुए कहा कि 21 जनवरी को दहेजप्रथा व बालविवाह के विरुद्ध बनाई जाने वाली मानव-श्रृंखला में शामिल होकर उसे ऐतिहासिक बनाएं।

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मधेपुरा बनेगा बाल विवाह व दहेज मुक्त जिला- डीएम

मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने अपने समस्त अधिकारियों-पदाधिकारियों के साथ दोनों अनुमंडलों मधेपुरा सदर एवं उदाकिशुनगंज में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में बाल विवाह व दहेज प्रथा उन्मूलन हेतु अपने-अपने अनुमंडल के सभी प्रखंड क्षेत्रों के पंचायतों के पूर्व व वर्तमान सभी प्रकार के जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि दहेज प्रथा कानूनी जुर्म ही नहीं बल्कि सामाजिक बुराई भी है | मो.सोहैल ने इन कुरीतियों को समाज के लिए अभिशाप बताते हुए कहा कि महज कानून से ये दोनों खत्म होने वाला नहीं है बल्कि इसके लिए सबों को जागरुक होना सर्वाधिक जरूरी है |

बता दें कि दोनों अनुमंडलों के कार्यशालाओं को अलग-अलग संबोधित करते हुए डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने यही कहा कि इनसे मुक्ति पाने के लिए पंचायत प्रतिनिधिगण अपने-अपने क्षेत्रों में बालिका शिक्षा को बढ़ावा दे तथा शिक्षा पूरी होने यानि 21 वर्ष से अधिक उम्र होने के बाद ही बालिकाओं को पारिवारिक जिम्मेवारी देने की बातें बताएं |

आगे इस्लाम में भी दहेज को अपराध बताते हुए डीएम मो.सोहैल ने कार्यशाला में उपस्थित पदाधिकारियों, पंचायत जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों को आधे दर्जन से अधिक बहुमूल्य टिप्स देते हुए यही कहा-

  1. बाल विवाह व दहेज उन्मूलन को लेकर वार्ड, पंचायत, प्रखंड, अनुमंडल व जिला स्तर पर निगरानी समिति का गठन किया जायेगा |
  2. प्रत्येक स्तर पर छह सदस्यीय निगरानी समिति गठित की जायेगी |
  3. बाल विवाह और दहेज प्रथा को लेकर निगरानी समिति की सूचना पर प्रशासन त्वरित कार्यवाई करेगी ||
  4. स्कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए क्रमशः बालसखा व बालसखी बने, जो कहीं भी जाकर लोगों को नशाबंदी, बाल विवाह व दहेज प्रथा को लेकर जागरूक करे जिसके लिए बाल सखाओं को एक सौ नम्बर अतिरिक्त मिलेगा ||
  5. जिले में शुरू किये गये “बन्धन ऐप” को मोबाइल पर डाउनलोड करने वाले को ₹100 मिलेगा |
  6. अब तक बाल विवाह व दहेज को लेकर जिले के 46,000 बच्चों ने घोषणा पत्र दिया है |
  7. केशव कन्या उच्च विद्यालय की करीब 300 छात्राओं ने शादी की उम्र कम से कम 21 वर्ष निर्धारित करने को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया है, क्योंकि उच्च शिक्षा पूरी होने में कम से कम 21 वर्ष लग ही जाते हैं |

यह भी जानिए कि जहाँ भूपेन्द्र कला भवन मधेपुरा के कार्यशाला में उपस्थित एसपी विकास कुमार, डीडीसी मुकेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला, डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल सहित पंचायत प्रतिनिधि स्वदेश कुमार, मनोज साह, अरुण कुमार यादव, अनिल अनल, राज किशोर यादव आदि ने कहा कि बाल विवाह व दहेज प्रथा जैसे सामाजिक बुराइयों को सामाजिक जागृति से ही खत्म किया जा सकता है वहीं उदाकिशुनगंज के कार्यशाला में एसडीएम एसजेड हसन, कार्यपालक दण्डाधिकरी अनिल कुमार, सीआई निजामुल हक आदि पदाधिकारीगण सहित समाजसेवी जय प्रकाश सिंह, विकास चंद्र यादव आदि ने सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति पाने के लिए सामाजिक चेतना जागृत करने की जरूरत पर बल दिया |

अंत में डीएम मो.सोहैल ने कहा कि विगत वर्ष 21 जनवरी को नशाबंदी को लेकर किये गये मानव श्रृंखला में अपने जिले को सूबे में प्रथम पंक्ति में जगह मिली थी……… इस बार प्रथम स्थान पाने के लिए हम सबों का प्रयास जारी रहेगा……!!

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सभी लोकसभा और विधानसभा में संगठन को करें मजबूत: नीतीश

रविवार को जेडीयू राज्य कार्यकारिणी की बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास, 1 अणे मार्ग, पटना में प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, राष्ट्रीय महासचिव सह राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह समेत पार्टी के अधिकांश पदाधिकारी, मंत्री, विधायक, विधानपार्षद, जिलाध्यक्ष, विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्य सम्मिलित हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने संगठन की मजबूती पर बल देते हुए कहा कि हमें सभी 40 लोकसभा और 243 विधानसभा में अपने संगठन को मजबूत बनाना है। इसमें कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए। हम मजबूत रहेंगे तभी अपने साथी दल का भी सहयोग कर सकते हैं। नीतीश ने सक्रिय रहने के लिए निरंतर बैठक व संवाद को जरूरी बताया और जोर देकर कहा कि जमीनी हकीकत को जाने बिना कुछ नहीं किया जा सकता। पार्टी के स्वाभाव व संरचना को समझकर ही अपनी कारगर भूमिका निभाई जा सकती है। अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी, दहेजबंदी, 18 वर्ष से कम के दिव्यांगो को पेंशन जैसे कार्य के विचार उनके मन में लोगों के बीच लगातार रहते हुए ही आए।

नीतीश कुमार ने कहा कि हमारा रास्ता औरों से अलग है, वो समाज-सुधार का रास्ता है, इसलिए कठिन है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के विरुद्ध मानव-श्रृंखला में जो हमारे साथ खड़े थे, आज वो भी इसकी आलोचना कर रहे हैं। लेकिन चाहे जिस भी गठबंधन में क्यों ना रहे हों, हमने अपने विचारों से अब तक ना समझौता किया है, ना आगे करेंगे। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने संबोधन में पार्टी चुनाव चिह्न को लेकर हुए विवाद को अनावश्यक बताते हुए कहा कि पार्टी मूल रूप से एकजुट है।

सात निश्चय कार्यक्रम की चर्चा करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि इसे केन्द्र ने भी एडॉप्ट किया है। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि ऐसी कितनी ही चीजें हैं जो आगे भी एडॉप्ट की जाएंगी। नीतीश ने दहेजप्रथा एवं बालविवाह के विरोध में आगामी 21 जनवरी को प्रस्तावित मानव-श्रृंखला की सफलता के लिए सबका आह्वान भी किया।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई में सरकारी स्तर पर शराबबंदी, दहेजबंदी, बाल विवाह का विरोध जैसे जो कार्यक्रम किए जा रहे हैं, पार्टी ने ना केवल उसका पूर्ण अनुसरण किया है, बल्कि हर स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं व आमलोगों तक विचारों के इस अमृत को पहुंचाने का काम भी किया है। हाल में सम्पन्न हुए जिला सम्मेलन में महिलाओं की अच्छी उपस्थिति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार की पहल रंग ला रही है। महिलाएं, जो कल तक खिड़कियों से झांका करती थीं, हमारे नेता ने उनके लिए दरवाजा खोलने का काम किया है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्षी दलों की भूमिका पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि वे वैचारिक दिवालियापन के शिकार हैं। जल्द ही वो समय आएगा जब जेडीयू द्वारा उठाए गए मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केन्द्र में होंगे।

दल के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह ने आगामी कार्यक्रमों के लिए पार्टी का रोडमैप और कैलेंडर प्रस्तुत किया और संगठन द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षात्मक चर्चा की। उन्होंने जानकारी दी कि पार्टी ने दो लाख सक्रिय सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें डेढ़ लाख सक्रिय सदस्य बनाए जा चुके हैं। राज्य, जिला, प्रखंड एवं बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं के सशक्तिकरण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी, लोहिया, जेपी जैसे हमारे नायकों ने जो सपना देखा था उसे हमारे नेता नीतीश कुमार पूरा कर रहे हैं। लोकशाही को मजबूत करने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। चाहे जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम हो, चाहे राइट टू पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेसल एक्ट हो, चाहे सात निश्चय कार्यक्रम, उन्होंने कई प्रतिमान स्थापित किए हैं, जिनसे हमारे हर स्तर के कार्यकर्ताओं को ना केवल वाकिफ होना चाहिए बल्कि आमलोगों को भी इससे अवगत कराना चाहिए।

बैठक में 1 दिसंबर से पार्टी के प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी घोषणा की गई जिसके तहत दस हजार मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जिनका कार्य पार्टी को ग्रासरूट स्तर के कार्यकर्ताओं को जागरुक कर सशक्त करना होगा। राज्य कार्यकारिणी की इस बैठक में विभिन्न जिलों व  प्रकोष्ठों के अध्यक्ष व कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों ने भी अपनी बातें रखीं और नेतृत्व ने उनके सुझावों को अत्यंत गंभीरता से सुना।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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शराबबंदी के बाद बाल विवाह और दहेज के विरुद्ध शंखनाद

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 148वीं जयंती के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़े अभियान का शंखनाद किया। बिहार में शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के बाद नीतीश ने समाज को घुन की तरह खा रही इन दो कुरीतियों पर जिस तरह चोट की है, वह उन्हें राजनेताओं की भीड़ में निश्चित तौर पर एक अलग स्थान का हकदार बनाती है। देखा जाय तो बापू को इससे बड़ी श्रद्धांजलि हो भी क्या सकती थी!

गौरतलब है कि बाल विवाह के खिलाफ कड़े कानून होने के बावजूद यह बिहार में काफी प्रचलित है। खासकर राज्य के ग्रामीण इलाकों में यह कुप्रथा बहुत बड़े स्तर पर फैली हुई है। आंकड़ों की मानें तो कुछ वर्ष पहले तक बिहार में होने वाले कुल विवाह में से करीब 69 प्रतिशत बाल विवाह होते थे। हालांकि हाल ही में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य संरक्षण-4 में खुलासा हुआ है कि लड़कियों की शिक्षा पर जोर देने के कारण पिछले 10 सालों में यह आंकड़ा घटा है। फिर भी इस कुरीति को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए अभी काफी कुछ किए जाने की जरूरत थी। जहां तक दहेज प्रथा का प्रश्न है, उसके लिए तो आंकड़ों की भी जरूरत नहीं। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो बिहार क्या देश भर में शायद ही कोई माता-पिता हों जिन्हें दहेज के अजगर ने डंसा न हो। हर साल हजारों बेटियां दहेज के कारण न जाने कितने अत्याचार सहती हैं, उनमें से कई तो जिन्दा जला दी जाती हैं। ऐसे में बिहार में इन दोनों कुरीतियों के विरुद्ध शुरू की गई ये पहल निश्चित तौर बदलाव की ओर बढ़ाया गया एक बड़ा कदम है।

सोमवार को राजधानी पटना स्थित गांधी मैदान के समीप नवनिर्मित बापू सभागार से महाअभियान का आगाज करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों को शपथ दिलाई कि बिहार को बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों से मुक्त कराने की प्रतिज्ञा लें। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस अभियान को राजनीतिक चश्मे से न देखें। राजनीति अपनी जगह पर है और वह होती रहेगी। यह सामाजिक अभियान है। इस अभियान में पूरी एकजुटता से शामिल हों। उन्होंने ऐलान किया कि अगले वर्ष 21 जनवरी को बाल विवाह और दहेज विरोधी अभियान के समर्थन में पूरे प्रदेश में मानव श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ कानून काफी पहले से है। उसका हम मुस्तैदी से अनुपालन कराएंगे लेकिन इसके लिए जनभावना का साथ होना भी जरूरी है। उन्होंने लोगों के साथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि इसकी बदौलत बहुत जल्द बिहार की तस्वीर बदलेगी और हम देश और दुनिया के लिए उदाहरण बन सकेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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