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शांत रहने की इच्छा न पालें, इच्छाओं को ही शांत करें- बीके रंजू

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केन्द्र मधेपुरा में आज श्रद्धालुओं के द्वारा बीके रंजू की अध्यक्षता में स्नेह मिलन समारोह का आयोजन किया गया जिसमें ब्रह्माकुमारी संस्थान की यज्ञमाता मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती की 54वीं पुण्य तिथि का सहजतापूर्वक आयोजन किया गया।

माल्यार्पण, पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया समाजसेवी साहित्यकार प्रो.(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने। इन कार्यक्रमों में संयुक्त रूप से सम्मिलित रहे डॉ अजय कुमार, भाई ओम प्रकाश, विनय वर्धन, किशोर भाई, जानकी बहन, दुर्गा बहन, विजय वर्धन..  .  सहित अध्यक्षता कर रही ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी। मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती की याद में सबों ने 2 मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

बता दें कि आयोजन की अध्यक्षता कर रही राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी रंजू ने 54वें स्मृति दिवस के उपलक्ष में मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहा कि उनकी मीठी पालना, कुशल प्रशासन एवं मधुर शिक्षाएं सदैव हमें प्रेरणा देती रहेंगी। बीके रंजू ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान की स्थापना के कार्यों में तीव्रता लाते हुए सर्वाधिक मनोयोग से संपन्न करती रही और 24 जून 1965 को हमें अलविदा कह कर दुनिया छोड़ गई।

यह भी कि जहाँ मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने अपने अंतर्मन से मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए तथा उनकी बातों को स्मरण करते हुए कहा कि जीवन में सदा सच्चाई कायम रखें और सफाई को अपने दिनचर्या में शामिल कर निरंतर गतिशील रखें….. सदा खुश रहें और सदैव औरों के बीच खुशियाँ बांटते रहें। डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि इच्छाओं का परित्याग ही स्वस्थ जीवन जीने का एकमात्र सहज मार्ग है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में इंस्पेक्टर संजीव कुमार, प्रो.सतीश कुमार सिंह, डॉ.विनोद कुमार, बैजनाथ यादव, रंजीत कुमार आदि श्रद्धालुओं का सहयोग सराहनीय रहा है। ब्रह्माकुमार भाई किशोर ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। अंत में प्रसाद वितरण के बाद अध्यक्षा बीके रंजू ने कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

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सही में दिव्यांग वे ही हैं जिन्हें कुछ कर गुजरने की हिम्मत नहीं है- कुलपति

कोसी अंचल के पूर्णिया जिले के बड़हरा कोठी प्रखंडान्तर्गत एक गाँव है- मगुरजान | उस गाँव की दिव्यांग बेटी का नाम है- रूपम | माँ चाँदनी देवी एवं पिताश्री बहादुर साह की (जन्म से ही दोनों हाथों से विकलांग) बेटी रूपम गाँव के बच्चों को पढ़ते-लिखते और स्कूल जाते देखकर हमेशा यही सोचा करती कि वह भी पढेगी….. अवश्य पढेगी और पढ़-लिखकर गरीब तथा लाचार व बेबस बच्चों को अच्छी शिक्षा देगी |

बता दें कि जन्मजात दिव्यांग रूपम ने पाँव को ही हाथ बना लिया और हाथों की जगह पैर से ही कलम पकड़ ली | जी हाँ, शुरू में रूपम को काफी परेशानियाँ हुई, लेकिन उसके हौसले एवं पढ़ने की ललक के सामने कोई अवरोध उसके मार्ग को अवरुद्ध नहीं कर सका | उसने 2014-16 सत्र में हिन्दी से एमए कर ली |

यह भी जानिए कि जन्म से ही दोनों हाथों से दिव्यांग रूपम जब विगत शुक्रवार को भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित Examination Hall पहुंची तो उसके हौसले को देखकर पीएचडी ऐडमिशन टेस्ट देने आये सभी 886 परीक्षार्थियों सहित सारे वीक्षक भी हैरान ही नहीं हुए बल्कि पैरों से कलम पकड़कर सुंदर व स्पष्ट लिखावट लिखने वाली रूपम को देखकर दंग रह गये |

VC Dr.A.K.Ray with officers inspecting Pre-Ph.D Exam at North Campus BNMU Madhepura.

चलते-चलते यह भी बता दें कि जब रूपम अपने पैरों से कलम थाम कर नॉर्थ केंपस के परीक्षा भवन में Pre-PhD टेस्ट के सारे सवालों का जवाब लिख रही थी तो जानकारी पाते ही कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, प्रति कुलपति डॉ.फारुख अली, डीन सोशल साइंस डॉ.शिव मुनि यादव आदि विश्वविद्यालय पदाधिकारीगण भी खुद को नहीं रोक पाये और उसके हौसले को सलाम करते हुए सबों ने यही कहा कि दिव्यांग होते हुए भी उच्च शिक्षा पाने के प्रति रूपम का उत्साह व अंतर्मन का संकल्प सराहनीय है….. रूपम जैसे संकल्पी लोग ही समाज के लिए उदाहरण बनते हैं | विश्वविद्यालय के सभी आलाधिकारी से लेकर पदाधिकारी तक रूपम के उज्जवल भविष्य की कामनाएं की |

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चमकी बुखार और लू से निपटने को तत्पर है सरकार

बिहार चमकी बुखार (एईएस) और हिट वेव की आपदा एक साथ झेल रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस संदर्भ में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय समेत स्वास्थ्य विभाग के सभी आला अधिकारी मौजूद रहे। मंगलवार को हालात का जायजा लेने के लिए वे मुजफ्फरपुर जा रहे हैं। बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर में अब तक चमकी बुखार से 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। बिहार सरकार इस स्वास्थ्य आपदा से जूझ ही रही थी कि बिहार में लू का कहर भी शुरू हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक प्रचंड गर्मी और लू से बिहार में अब तक 78 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें से 35 मौतें सिर्फ गया में हुई हैं, जबकि 47 लोग औरंगाबाद में मरे हैं।

बिहार में  एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) यानि चमकी बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल अस्पताल में 375 बच्चे एडमिट हैं। चमकी बुखार से पीड़ित मासूमों की सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में हुई हैं। वहीं चमकी बुखार की आंच अब मोतिहारी तक पहुंच गई है, जहां एक बच्ची बुखार से पीड़ित है।

लू की बात करें तो बिहार के गया में अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज में लू के कारण मरने वालों की संख्या 35 तक पहुंच चुकी है। इनमें से 28 की इलाज के दौरान मौत हो गई तो सात को मृत हालात में ही लाया गया था। वहीं 106 मरीजों का फिलहाल इलाज चल रहा है।

गौरतलब है कि बिहार में गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। गया में गर्मी को लेकर धारा 144 लागू कर दी गई है। वहीं भीषण गर्मी के कारण 22 जून तक बिहार के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इससे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों आपदा के सभी मृतकों के परिजनों को तत्काल चार-चार लाख रुपए अनुग्रह अनुदान देने और इन विपदाओं से जूझ रहे सभी लोगों के लिए हरसंभव चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था करने का निर्देश दे चुके हैं।

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मधेपुरा में मेधा की कमी नहीं

मधेपुरा में ना तो मेधा की कमी रही है और ना ही समाज सेवा में अपना बहुत कुछ न्योछावर करने वालों की कमी | यहाँ एक ओर जहाँ पटना उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति के रूप में जस्टिस आरपी मंडल, जस्टिस एससी मुखर्जी व जस्टिस के.के.मंडल ने मधेपुरा का परचम लहराया है वहीं चिकित्सा के क्षेत्र में सर्जन डॉ.अमरेंद्र कुमार यादव, डॉ.मनीष मंडल व डॉ.अरविंद सर्राफ आदि ने आमजन की सेवा में बहुत कुछ न्योछावर किया है |

बता दें कि 1981 ई. में तत्कालीन मुख्यमंत्री (बिहार) डॉ.जगन्नाथ मिश्र द्वारा मधेपुरा को जिला बनाये जाने के बाद सर्वप्रथम जिस जीवन सर्राफ के नाम वाले ‘जीवन सदन’ की दो कोठरियों में मधेपुरा के जिला कार्यालय का प्रथम डीएम श्री एसपी सेठ द्वारा कार्यारंभ किया गया था उसी जीवन सर्राफ के पौत्र शिवप्रसाद सर्राफ के घर में उनके पुत्र आनंद सर्राफ के प्रतिभावान बेटे ऋषि सर्राफ द्वारा समस्त भारत के लिए आयोजित किये गये JEE Advance परीक्षा में प्रशंसनीय रैंक हासिल कर मधेपुरा जिला को पुनः गौरवान्वित किया गया है |

यह भी जान लें कि जिला मुख्यालय मधेपुरा नगर परिषद के वार्ड न.-20 के स्थाई निवासी पिता आनंद सर्राफ व माता श्वेता सर्राफ के प्रतिभावान पुत्र ऋषि सर्राफ ने 2019 की इंजीनियरिंग की सर्वाधिक प्रतिष्ठित परीक्षा JEE में उत्कृष्ट रैंक 89 वाँ रैंक हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है तथा पढ़नेवाले छात्रों का हौसला अफजाई किया है | ऋषि की सफलता पर संपूर्ण मधेपुरा मंत्रमुग्ध है | प्रतिभा को सम्मान देने वाले विद्वत जन ऋषि के दादा-दादी एवं माता-पिता के अलावे उसी वंश के जनसेवी एमएलसी ललन सर्राफ को भी बधाई दे रहे हैं |

चलते-चलते यह भी बता दें कि स्थानीय हॉली क्रॉस स्कूल मधेपुरा में ऋषि ने प्रारंभिक पढ़ाई पूरी कर दसवीं कक्षा की पढ़ाई DPS सिलिगुड़ी से पूरी की तथा आगे की पढ़ाई ऋषि ने हैदराबाद से की | ऋषि बचपन से ही इंजीनियर बन कर समाज में अपनी अलग पहचान बनाने की तमन्ना पाल रहा था जिसे आज उसने पंख लगा दिया है |

 

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सभी बुजुर्गों को पेंशन देने वाला बिहार बना पहला राज्य

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सचिवालय, पटना स्थित ‘संवाद’ कक्ष में वृद्धजन पेंशन योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के शुभारंभ के साथ बिहार सभी बुजुर्गों को पेंशन देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। बता दें कि बिहार में 35 से 36 लाख ऐसे लोग हैं, जिन्हें इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। इस योजना पर हर वर्ष राज्य सरकार की तरफ से 1800 करोड़ रुपए व्यय होंगे। इस योजना के तहत अभी तक दो लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से सत्यापन के बाद एक लाख 35 हजार 928 लोगों के खाते में मार्च और अप्रैल 2019 की राशि भी ट्रांसफर कर दी गई। इस योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के गरीब लोगों को प्रति माह 400 रुपए और 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को प्रतिमाह 500 रुपए मिलेंगे।

वृद्धजन पेंशन योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों को भुगतान का शुभारंभ करने के बाद नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में आगे कहा कि इस वर्ष 01 मार्च से इस योजना की शुरुआत की गई थी, जिसकी राशि का भुगतान आज से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले से गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों को वृद्धा पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा था। विधवा पेंशन, दिव्यांगजनों को पेंशन जैसी अनेक योजनाएं चलाई जा रही थीं लेकिन 60 वर्ष से ऊपर के सभी वृद्धजनों चाहे स्त्री हो या पुरुष जिन्हें केंद्र या राज्य सरकार से कोई वेतन, पेंशन, पारिवारिक पेंशन या सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त नहीं हो रहा है, उन्हें इसका लाभ देने की योजना बनाई और इसे लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे वृद्धजनों का अपने परिवार में सम्मान बढ़ेगा और उनकी कुछ जरूरतें भी पूरी होंगी। कितना अच्छा लगेगा जब बुजुर्ग इससे अपने पोता-पोती को चॉकलेट लाकर देंगे। इस योजना के माध्यम से कम से कम ऐसी खुशी तो हम उन्हें दे ही सकते हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह व्यवस्था भी कर दी है कि जो लोग माता-पिता की उपेक्षा करेंगे उनकी खैर नहीं। एसडीओ के यहां आवेदन देने से ही कार्रवाई हो जाएगी। अपील के लिए कोर्ट जाने की आवश्यकता नहीं। अब डीएम के स्तर पर तीस दिनों के अंदर फैसला हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अब दूसरे राज्य यह पूछ रहे हैं कि हमने यह निर्णय किस तरह से लिया। वे लोग भी ऐसा करना चाह रहे हैं।

कार्यक्रम में मौजूद वृद्धजनों से मुख्यमंत्री ने यह अपील की कि सभी लोगों को इस योजना के बारे में बताएं ताकि ताकि अधिक से अधिक संख्या में आवेदन भरे जा सकें। इस योजना के शुभारंभ के अवसर पर समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह भी उपस्थित थे। चलते-चलते बता दें कि लोक सेवा केंद्र और ऑनलाइन माध्यम से इस योजना के लिए आवेदन किया जा सकता है।

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नीतीश हमेशा बड़ी लकीर खींचने वाले सकारात्मक सोच के व्यक्ति रहे हैं- डॉ.मधेपुरी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की तरह बड़े-बड़े सपने देखने और उसे अमलीजामा पहनाने में विश्वास करते हैं | नीतीश ने सपना देखा है कि दिल्ली एम्स की तरह बने और उसकी बराबरी करे बिहार का आईजीआईएमएस (इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान) भी |

बता दें कि नीतीश कुमार ने आईजीआईएमएस के निदेशक डॉ.एन.आर.विश्वास को विश्वास के साथ कहा- दिल्ली एम्स की तर्ज पर बनावें बिहार का आईजीआईएमएस… सिर्फ इलाज नहीं….. शोध की श्रेष्ठता पर भी ध्यान रहे….. इसमें जितनी राशि लगेगी वह राज्य सरकार देगी |

ये बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को आईजीआईएमएस परिसर में 500 बेड के अस्पताल भवन के शिलान्यास व कार्यारंभ के मौके पर प्रेस को संबोधित करते हुए बता रहे थे-

यह भवन 6 मंजिला होगा जो 2 वर्षों में बनकर तैयार होगा और इस निर्माण पर खर्च होने वाली राशि होगी लगभग 300 करोड़……. जल्द ही 1200 बेड के एक और अस्पताल भवन का निर्माण होगा तब इसकी क्षमता 2500 बेड की हो जाएगी…… वर्तमान में इसकी क्षमता 850 बेड की है |

CM Nitish Kumar is being honoured at IGIMS in cordial presence of Central Ministers and Deputy CM.
CM Nitish Kumar is being honoured at IGIMS in cordial presence of Central Ministers and Deputy CM.

मुख्यमंत्री के हवाले से यह भी कहा गया-  दिल्ली एम्स की तरह यहाँ भी मरीजों को सेवा मिले…. इसके लिए हर स्तर पर काम हो चाहे वह आधारभूत संरचना का मामला हो अथवा विशेषज्ञों व कर्मियों की नियुक्ति का ही क्यों ना हो | ऐसी व्यवस्था व इंतजाम किए जाएं कि बिहार में सभी तरह के इलाज बेहतर तरीके से हो  | बिहार वासियों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़े |

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, मंगल पांडे आदि गणमान्यों की उपस्थिति में माननीय मुख्यमंत्री को संस्थान के निदेशक डॉ.एन.आर.विश्वास ने सम्मानित किया | मौके पर जहाँ केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने कहा कि गरीबों की सेवा में सतत लगे रहने वाले पीएम और सीएम को कोटि-कोटि साधुवाद- वहीं उपमुख्यमंत्री मोदी ने आईजीआईएमएस की अपनी पहचान की चर्चा की | जहाँ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री चौबे ने चिकित्सकों से कहा कि वे रोगियों का हृदय से स्वागत करें | वही राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीजों को दवाओं का खर्च मिलेगा |

चलते-चलते यह भी कि जब मधेपुरा अबतक द्वारा भारतरत्न डॉ.कलाम के करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से इस अस्पताल निर्माण के बाबत चर्चा की गई तो डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मुख्यमंत्री ई.नीतीश कुमार सदा से ही डॉ.कलाम की तरह बड़ी लकीर खींचने वाले व बड़े-बड़े सपने देखने वाले सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति रहे हैं | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि वे बिहार के विकास के लिए बहुत कुछ किए भी हैं और आगे करने वाले भी हैं |

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अब प्रताड़ित माता-पिता डीएम कोर्ट में कर सकते हैं अपील- नीतीश

प्रताड़ना झेल रहे माता-पिता को अपनी शिकायत के लिए परिवार न्यायालय जाने से मुक्ति मिल गई है। पहले अपने बच्चे-बच्चियों व निकट संबंधियों से प्रताड़ित होने वाले माता-पिता को परिवार न्यायालय में जाना पड़ता था।

बता दें कि नीतीश सरकार ने अनुभव किया तथा कानूनविदों से राय लेने के बाद परिवार न्यायालय से अपील की सुनवाई करने का अधिकार स्थानांतरित कर जिलाधिकारी को सौंप दिया है। राज्य कैबिनेट द्वारा लिया गया यह फैसला गत मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में पारित किया गया। अब प्रताड़ित होने वाले माता-पिता व वृद्धजन प्रताड़ना को लेकर जिलाधिकारी के पास अपील कर सकते हैं।

यह भी जानिए कि समाज कल्याण विभाग द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को नीतीश सरकार ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक का भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम 2007 के आलोक में गठित अपील अधिकरण के अध्यक्ष अब जिला पदाधिकारी को बनाने की मंजूरी दे दी है।

कैबिनेट की बैठक समाप्ति के बाद कैबिनेट सचिव संजय कुमार एवं समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने मधेपुरा अबतक को बताया कि यह कानून पहले से ही है। इस कानून में माता-पिता एवं वरीय नागरिकों के भरण पोषण व सुरक्षा की जिम्मेदारी संतान / निकटतम संबंधी द्वारा नहीं निभाने पर अनुमंडल स्तर पर एसडीओ की अध्यक्षता में गठित ट्रिब्यूनल में आवेदन दे सकते हैं। वहां के फैसले का पालन नहीं होने पर प्रताड़ित माता-पिता को जिले के परिवार न्यायालय में अपील के लिए जाना पड़ता था। परंतु 2007 से अब तक कोई प्रताड़ित माता-पिता व वृद्धजन कोर्ट की चक्कर से भयभीत होकर ना तो अदालत जाने का साहस जुटा पाते थे और ना ही इस कानून का लाभ  उठा पाते थे…. इसे देखते हुए कानूनविदो से राय लेकर… जिलाधिकारी के पास अपील करने वाले प्रस्ताव को इसलिए मंजूरी दी गई कि डीएम के पास कोई भी वरीय नागरिक सरलता से पहुंच सकता है तथा अपनी बात रख सकता है।

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आरबीआई के निर्देश पर ऑनलाइन पैसा भेजना अब होगा नि:शुल्क

ऑनलाइन पैसे भेजने यानि लेनदेन के लिए तीन तरीकों का इस्तेमाल होता है | ये तीन तरीके हैं- (1) आरटीजीएस (2) एनईएफटी और (3) आईएमपीएस | फिलहाल उपर्युक्त दो तरीकों से पैसा भेजने के बाबत सेवा-शुल्क को समाप्त करने की स्वीकृति पर आरबीआई ने सहमति दे दी है |

बता दें कि आईएमपीएस यानि तीसरे तरीके पर आरबीआई ने चुप्पी लगा दी है | आईएमपीएस यानि इमीडिएट मनी पेमेंट सर्विस भी एक प्रणाली है- तत्काल पैसा भुगतान सेवा…… इस सेवा का शुल्क एनईएफटी से अधिक होता है | आईएमपीएस का इस्तेमाल सिर्फ दो लाख रूपये तक के लेनदेन के लिए होता है |

अब स्पष्ट रूप से यह भी जान लें कि आरबीआई ने RTGS (रियल टाइम ग्रॉस सेटेलमेंट सिस्टम) एवं NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) के जरिये पैसे भेजने पर ग्राहकों को लगने वाली शुल्क को समाप्त करने की घोषणा कर दी है | साथ ही सभी बैंकों को इसका लाभ ग्राहकों को देने को कहा है | माना जा रहा है कि आरबीआई के निर्देश पर सभी बैंक जल्द ही इन दोनों माध्यमों से पैसा भेजने पर लगने वाले शुल्क को खत्म कर देंगे |

अंत में यह भी जान लें कि तत्काल दो लाख रुपये से अधिक की राशि दूसरे खाते में भेजने के लिए RTGS का उपयोग किया जाता है और दो लाख से कम राशि भेजने के लिए NEFT का इस्तेमाल होता है | इन दोनों जरिये से पैसे के लेनदेन पर अलग-अलग बैंक अलग-अलग शुल्क लेते है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहाँ आरटीजीएस प्रणाली के तहत बड़ी राशि भेजी जाती है जिसे 30 मिनट के भीतर प्रत्येक बैंक द्वारा इस राशि को निर्देशित खाते में हस्तांतरित करना पड़ता है, वहीं दो लाख तक की राशि एनईएफटी के जरिये सोमवार से शुक्रवार तक 8:00 बजे सुबह से 7:00 बजे शाम तक एवं शनिवार को 8:00 बजे सुबह से 1:00 बजे दिन तक पैसे भेजे जा सकते हैं |

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बीएनएमयू में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा इन योगा थेरेपी कोर्स जल्द होगा चालू- कुलपति

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के पुराने परिसर यानी साउथ कैंपस स्थित धरना स्थल का उपयोग अब प्रतिदिन सुबह 6:00 से 7:00 बजे तक योग स्थल के रूप में किया जाएगा। कुलपति डॉ.अवध किशोर राय के द्वारा वहां पर सारी व्यवस्थाएं पूरी कर दी गई हैं- यथा दरी-त्रिपाल व मेट सहित शौचालय एवं पेयजल व स्पीकर सेट आदि। अब प्रतिदिन सुबह 6:00 से 7:00 बजे तक नियमित रूप से छात्र-छात्राओं, शिक्षक, कर्मचारियों व पदाधिकारियों के लिए योग कक्षा की व्यवस्था की गई है।

बता दें कि कुलपति डॉ.ए.के.राय ने विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षक-कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों को इस योग कक्षा में नियमित रूप से शामिल होने की अपील करते हुए यही कहा-

योग मानव जीवन के लिए बेहद जरूरी है। योग से हमारा शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं नैतिक विकास होता है। योग कक्षा के नियमित चलने से आने वाले दिनों में इस विश्वविद्यालय में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। विश्वविद्यालय की ओर से विश्व योग दिवस पर 21 जून को एक आकर्षक व भव्य समारोह का आयोजन भी किया जाएगा। सभी महाविद्यालयों में विश्व योग दिवस मनाया जाएगा।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि व विश्वविद्यालय परिसंपदा पदाधिकारी डॉ.बिजेंद्र प्रसाद यादव, क्रीडा व सांस्कृतिक परिषद के संयुक्त सचिव डॉ.शंकर कुमार मिश्र, उप-कुलसचिव (वित्त) प्रो.सुभाष पोद्दार, विश्वविद्यालय योग प्रभारी पृथ्वीराज यदुवंशी, पतंजलि के जिला संयोजक व योग प्रशिक्षक एवं आरपीएम कॉलेज की एनएसएस ऑफिसर डाॅ.एन.के.निराला सहित छात्र नेता माधव कुमार, हरि कुमार, शांतनु यदुवंशी आदि ने एक स्वर से कुलपति के इस योग कक्षा उद्घाटन की सराहना करते हुए कहा कि योग कक्षा का शुभारंभ विश्वविद्यालय की सेहत के लिए सकारात्मक कदम है। सबों ने मनोविज्ञान विभाग द्वारा दिए गए प्रस्ताव- “एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा इन योगा थेरेपी कोर्स” जल्द चालू करने हेतु कुलपति की सकारात्मक सहमति को सलाम किया।

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सूबे के प्रत्येक घर में जल्द लगेंगे बिजली के स्मार्ट प्री-पेड मीटर – ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र

बिहार सरकार की रीढ़ माने जाने वाले ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने 1, अणे मार्ग में अपनी योजनाओं का प्रेजेंटेशन ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा दिलाया | अमृत प्रत्यय ने बेहतरीन प्रस्तुति दी और कहा कि सूबे के हर घर में अभियान चलाकर लगाया जाएगा बिजली का स्मार्ट प्री-पेड मीटर |

बता दें कि सूबे बिहार के ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव, सीएम के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, मुख्य सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त सुभाष शर्मा, प्रधान सचिव फाइनेंस डॉ.एस.सिद्धार्थ, प्रधान सचिव उद्योग के.के.पाठक…… मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सीएम के सचिव मनीष कुमार वर्मा, नॉर्थ व साउथ पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के एमडी क्रमशः आर.लक्ष्मण व संदीप पुदलकट्टी , मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल सिंह तथा मुख्यमंत्री सचिवालय के संयुक्त सचिव चंद्रशेखर सिंह की उपस्थिति में प्रेजेंटेशन देने के बाद कहा-

स्मार्ट प्री-पेड मीटर लग जाने से बिजली की बेवजह खपत रुकेगी …. साथ ही उपभोक्ताओं को बिजली बिल जमा करने की दिक्कतों व परेशानियों से मुक्ति मिलेगी |

यह भी बता दें कि मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के निर्देशानुसार मुख्य सचिव ने यह भी घोषणा की कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जर्जर तार को बदलने के लिए तेजी से काम पूरा करने हेतु विभागीय आदेश जारी कर दिया गया है….. साथ ही यह भी स्पष्ट तौर पर कहा गया कि कहीं भी कोई  जर्जर तार नहीं छुटे ताकि आये दिन अब जानवरों एवं मनुष्यों की ना तो जानें जाँये और ना ही सरकार को इन जानों की भरपाई हेतु खजाने खाली करने की नौबत आए |

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