पृष्ठ : मधेपुरा अबतक

डॉ.महावीर की 24वीं पुण्य तिथि पर सर्वप्रथम माल्यार्पण व पुष्पांजलि किया उद्घाटनकर्ता कुलपति डॉ.द्विवेदी व मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी ने

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर पदासीन रहते हुए डॉ.महावीर प्रसाद यादव ने 13 अगस्त 1997 के दिन दुनिया को अलविदा कहा था। उनकी प्रतिमा पर सर्वप्रथम माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कुलपति प्रो.(डॉ.)ज्ञानांजय द्विवेदी एवं मुख्य अतिथि प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी सहित बीएन मुस्टा के महासचिव व सीनेेेटर प्रो.(डॉ.)नरेश कुमार, FA एससी दास, स्नातकोत्तर जंतु विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार, कुलसचिव डॉ.कपिलदेव प्रसाद, विकास पदाधिकारी डाॅ.ललन अद्री, नवीन कुमार, पीआरओ सुधांशु शेखर, एनएसएस पदाधिकारी डॉ.अभय कुमार, डीन आरकेपी रमण, डॉ.शंकर कुमार मिश्रा आदि अन्य विश्वविद्यालय कर्मियों ने।

फिलहाल कोरोना के कहर के कारण सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए कम से कम समय में विश्वविद्यालय के एक शैक्षिक हाल में अतिथियों का स्वागत किया गया। डाॅ.महावीर बाबू के प्रति सबों ने दो-दो मिनट में अपने उद्गार व्यक्त किए। वित्त परामर्शी एससी दास, डीन आरके रमण एवं  कुलसचिव डॉ.कपिलदेव प्रसाद ने अपने संस्मरण सुनाए।

From LtoR VC Dr.Gyananjay Dwivedi, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri & Registrar Dr.Kapildev Prasad at BNMU.
(From L to R) VC Dr.Gyananjay Dwivedi, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri & Registrar Dr.Kapildev Prasad at BNMU.

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने डॉ.महावीर बाबू के साथ बिताए 25 वर्षों को समेटते हुए बस यही कहा-

अच्छी पुस्तकें गुरुओं के गुरु हुआ करती हैं। गुरु के दर्शन से भाव बदल जाते हैं, स्वभाव बदल जाते हैं और खुद के अंदर खुदा के दर्शन होने लगते हैं तथा हर किसी के अंतर्मन में प्रकाश का प्रादुर्भाव होने लगता है।

इसके अलावा डॉ.मधेपुरी ने वर्षवार महावीर बाबू के विधायक, शिक्षा मंत्री, प्रति कुलपति, सांसद और अंतिम बीएनएमयू के कुलपति बनने सहित शेक्सपियर, डेल कार्नेगी, टालस्टाय आदि को कोट करते हुए उन्हें टीपी कॉलेज का विश्वकर्मा कहकर  श्रोताओं की तालियां भी बटोरी।

संक्षिप्त उद्घाटन भाषण के क्रम में कुलपति प्रो.(डॉ.)ज्ञानांजय द्विवेदी ने दिवंगत कुलपति डॉ.महावीर प्रसाद यादव को निष्काम कर्मयोगी बताते हुए उपस्थित विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों से यही कहा कि उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम सब अपने-अपने हिस्से का आवंटित काम तो मनोयोग से पूरा करते रहें। डॉ.द्विवेदी ने मंच संचालक प्रो.(डॉ.)नरेश कुमार से कहा कि तीन व्यक्तियों की एक कमिटी बना लें जो विश्वविद्यालय से जुड़े महापुरुषों के बाबत ऐसी दुर्लभ जानकारियां प्राप्त करने हेतु डॉ.मधेपुरी जैसे विद्वान को आमंत्रित कर विभिन्न अवसरों पर कार्यक्रम आयोजित करती रहे।

अंत में विश्वविद्यालय की गतिविधियों में सर्वाधिक समय देने वाले प्रो.(डॉ.)नरेश कुमार ने डॉ.ललन सहनी सहित कुछ अन्य कर्मियों से उद्गार व्यक्त करने हेतु समय नहीं दे पाने के लिए क्षमा मांगते हुए सबों को धन्यवाद ज्ञापित किया और कार्यक्रम समापन की घोषणा भी की।

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सुपुर्द-ए-खाक हुए मशहूर शायर राहत इंदौरी

रविवार 9 अगस्त की रात में राहत इंदौरी को खांसी, बुखार और घबराहट होने पर उन्हें कोविड हॉस्पिटल अरविंदो में भर्ती किया गया, जहां देर रात कोरोना की पुष्टि हुई और यह भी कि शुगर बढ़ी हुई थी। मंगलवार सुबह तक सेहत में सुधार होने लगा, परंतु अचानक उन्हें दोपहर में हार्ट अटैक आया। सीपीआर देने के बावजूद भी 2 घंटे बाद उन्हें दूसरा अटैक आया और राहत इंदौरी को बचाया नहीं जा सका। 70 साल की उम्र में मंगलवार 11 अगस्त की शाम लगभग 5:00 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। लगे हाथ उन्हें 10:30 बजे रात को इंदौर में ही सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

बता दें कि साइन बोर्ड पेंटर से करियर की शुरुआत करने वाले राहत इंदौरी उर्दू के प्रोफेसर भी रहे। उनकी शायरी के बढ़ते प्रभाव ने उन्हें बॉलीवुड तक खींच लाया। उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्मी गाने लिखे। फिल्म इश्क, तमन्ना, जुर्म, मुन्ना भाई एमबीबीएस, खुद्दार जैसी फिल्मों के लिए अनेक सुपरहिट गाने लिखे जिन्हें लोग हमेशा गुनगुनाते चलते हैं। उन्हें उनकी ये पंक्तियां हमेशा जिंदा रखेंगी-

मैं जब मर जाऊं, मेरी अलग पहचान लिख देना

लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना

चलते-चलते यह भी बता दें कि ऐसे मशहूर शायर राहत इंदौरी के अचानक दुनिया को अलविदा कहने के बाद कवि, साहित्यकार व शायरों का शोकाकुल होना स्वाभाविक है। कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने इस भयावह कोरोना काल में अपने सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से अनुरोध किया कि अपने स्तर से ऐसे मशहूर शायर को श्रद्धांजलि दी जाए। सम्मेलन के सचिव डॉ.मधेपुरी ने अपनी चंद पंक्तियां श्रद्धांजलि स्वरूप ऐसे मशहूर शायर राहत इंदौरी को समर्पित की-

कहाँ जन्मे सुनो हम नहीं जानते,

कब मरेंगे कहाँ हम नहीं जानते

काम करना है रुकना नहीं है यहाँ,

कब छुटेगा जहाँ हम नहीं जानते

 

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सीएम नीतीश ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की, पीएम को बाढ़ प्रबंधन की जानकारियां दी

प्रधानमंत्री मोदी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीएम नीतीश ने बाढ़ समीक्षा बैठक में भाग लिया। जिसमें 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा बाढ़ की स्थिति से पीएम को अवगत कराया गया। बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री से कांफ्रेंसिंग के जरिए पूर्व से लेकर अद्यतन बाढ़ की स्थिति की विस्तृत चर्चा की गई। सीएम ने कहा कि उत्तर बिहार बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित है और सितंबर तक बाढ़ के उतार-चढ़ाव की आशंका बनी रहती है।

बकौल मुख्यमंत्री राज्य के 16 जिलों के 125 प्रखंडों के 2232 पंचायतों के 74 लाख 20 हजार से ज्यादा लोग बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। उनकी सहायता और बचाव के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। बाढ़ क्षेत्र में एनडीआरएफ की 23 एसडीआरएफ की 17 टीमें  अहर्निश काम पर लगी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं राहत शिविरों की व्यवस्था का जायजा लिया है। वहां लोगों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और मास्क, सेनीटाइजर के साथ-साथ  कोरोना संक्रमण की जांच भी कराई जा रही है। कुल 1267 सामुदायिक रसोई केंद्रों पर प्रतिदिन लगभग 10 लाख बाढ़ प्रभावित लोग भोजन करते हैं। सीएम ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का एरियल सर्वे उन्होंने स्वयं किया है तथा आलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए हैं। सभी संबंधित विभाग पूरी तरह से अलर्ट है क्योंकि भविष्य में भी बाढ़ की आशंका बनी हुई है। अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के बाढ़ पीड़ितों को क्या-क्या तथा किस रूप में सहायता-सहयोग मुहैया कराते हैं।

 

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वृक्षारोपण ही पृथ्वी को अब हर विनाश से बचाएगा- डॉ.मधेपुरी

कोरोना लॉकडाउन के बावजूद सभी संस्थानों एवं जिले के कोने -कोने में ‘पृथ्वी दिवस’ पर पौधरोपण का आयोजन किया जा रहा है। लोग पौधरोपण में सवेरे से इस कदर व्यस्त हैं कि कोरोना को भी भूल गए हैं। जल-जीवन-हरियाली की महत्ता को जानने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा को अमलीजामा पहनाने हेतु एक करोड़ वृक्षारोपण करने की ओर युवाओं ने कदम बढ़ा दिया है। क्योंकि युवाओं को पता है कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से धरती पर बारिश का अभाव, गर्मी का बढ़ता प्रभाव तथा औषधीय वनस्पतियों का मिलना दुर्लभ हो गया है। इसके अलावे निराश्रित वन प्राणी जैसे अजगर, चीते, हिरन आदि के गांव में घुसने की घटनाएं आम हो गई है।

बकौल समाजसेवी- साहित्यकार प्रो.(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी….  वृक्ष हमारे शिक्षक हैं, सहयोगी हैं और हमारे सच्चे साथी भी हैं। वृक्ष हमेशा पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाता है तथा जल-प्रदूषण को भी नियंत्रित करता है। यूएसए के स्कूलों में वृक्षों की संख्या कम रहने के कारण वहां के बच्चों को स्किन-कैंसर अधिक होने लगा है।

Samajsevi-Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri watering sapling on the occasion of World Earth Day at his residence Vrindavan, Madhepura.

डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने यह भी कहा कि ये पेड़-पौधे ही हैं जो हमें जीवनदायी ऑक्सीजन सदा प्रदान करते हैं और धरती को भी जीने योग्य बनाते हैं। गांधीयन मिसाइल मैन भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम उड़ीसा के जंगल में रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन हेतु जमीन सर्च करने के दौरान एक पेड़ को बचाने के लिए अपने जूनियर वैज्ञानिकों के साथ बिल्कुल खाली जगह खोजने में घंटों पसीने बहाते रहे थे। डॉ.कलाम जानते थे कि ये पेड़-पौधे हमें जीवनदायी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं तथा पशु-पक्षी को आवासीय सुविधाएं भी देते हैं और साथ-साथ सभी प्रकार के हानिकारक गैसों यथा अमोनिया, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि को अपने  पत्तों द्वारा अवशोषित भी करते हैं।

बता दें कि डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि वायु-प्रदूषण एवं जल-प्रदूषण मानव जीवन को विनाश की ओर ले जाता है। इस विनाश से मानव को बचाने का एक ही उपाय है ‘वृक्षारोपण’।  एक स्वस्थ वृक्ष अपनी पूरी जिंदगी में 17 लाख रुपए कीमत का ऑक्सीजन हमें देता है। नीम, पीपल और तुलसी सर्वाधिक आक्सीजन हमें देता ही है फिर भी फलदार वृक्ष लगाना भी हर दृष्टिकोण से लाभदायक ही है।

ये सारी बातें डॉ.मधेपुरी ने अपने वृंदावन में आज “पृथ्वी-दिवस” को सेलिब्रेट करते हुए कही तथा एक ‘आम्रपाली’ का पौधारोपण भी परिजनों की उपस्थिति में किया। उन्होंने अंत में यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए चारों ओर पौधरोपण, संकल्प तथा जागरूकता फैलाने वाली विचार गोष्ठियों का सप्ताहिक आयोजन सभी संस्थानों द्वारा निरंतर चलाते रहना चाहिए।

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मधेपुरा में बना दुनिया का सबसे शक्तिशाली विद्युत रेल इंजन WAG- 12

मधेपुरा विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री का फ्रांस की एल्सटाॅम कंपनी व भारतीय रेल के संयुक्त सहयोग तथा तत्कालीन डायनामिक डीएम मोहम्मद सोहेल की तत्परता के चलते ही निर्धारित समय से पहले निर्माण कार्य पूरा हो गया। वर्ष 2016 (मई) में भूमि पूजन और वर्ष 2018 (अप्रैल) में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मधेपुरा रेल फैक्ट्री को राष्ट्र के समर्पित किया।

बता दें कि मधेपुरा में बनने वाला दुनिया का सबसे शक्तिशाली विद्युत रेल इंजन WAG – 12 यानि Wide-gauge Ac-traction Goods, 12000 हॉर्स पावर का  3-फेज विद्युत रेल इंजन है। इस इंजन का वजन 180 टन है जो 600 टन लोड लेकर 120 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम स्पीड से चल सकता है, जो एक ट्वीन इंजन है। जबकि अभी तक भारतीय मालवाहक ट्रेन के इंजन का औसत स्पीड 25 किलोमीटर प्रति घंटा तक ही सीमित है।

यह भी बता दें कि संसार में इस इंजन के टक्कर का कोई दूसरा इंजन अबतक नहीं बना है। मधेपुरा में निर्मित यह इंजन 6000 टन सामान ढोने की क्षमता रखता है। यही जानिए कि 600  ट्रक जितना सामान ढोएगा उतना यह इंजन अकेले ढो देगा।

चलते-चलते यह भी बता दें कि भारत में सर्वाधिक आमदनी का जरिया मालवाहक ट्रेन ही है। भारत सरकार ने माल ढोने के लिए दो डीएफसी (डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) बनाया है जिस पर केवल माल गाड़ियां ही चलेंगी। इसमें एक है Eastern track जो लुधियाना से दानकुनी तक है और दूसरा Western track जो मुंबई से दादरी तक है। यह इंजन 2 किलोमीटर लंबी मालगाड़ी तक को भी खींच लेगा। मधेपुरा में बनने वाले इस इंजन में टॉयलेट भी है जबकि अब तक के किसी इंजन में टॉयलेट नहीं हुआ करता। मधेपुरा के समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी शुरू से इस प्रयास में लगे रहे हैं कि यहां से बनकर निकलने वाले इंजन पर “मधेपुरा” अंकित हो जिसके लिए रेल कारखाना के मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी आरके गुप्ता द्वारा “मधेपुरा” लिखे जाने के बाबत अखबार के माध्यम से जानकारी भी प्रेषित की जा चुकी है।

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बेकाबू हो रहा है बिहार में करोना

बिहार में कोरोना की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। बिहार में फिलहाल 75 हजार के पार हुई कोरोना संक्रमितों की संख्या जबकि सभी जिलों से सर्वाधिक मामले मिले राजधानी मुख्यालय के पटना में। बिहार में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है तभी तो विगत 24 घंटे में 4000 नए मामले सामने आए और राज्य में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या अब बढ़कर 76 हजार हो गई है।

जानिए कि पहले भी कोरोना वारियर्स कई डॉक्टरों की मौत कोरोना के कारण ही पटने में इलाज के दरमियान हो चुकी है। आज बिहार के आम लोगों में शोक और दहशत तब फैलने लगी जब कटिहार सदर अस्पताल के एकमात्र सर्जन डॉ.डीएन पोद्दार ने कोरोना से 20 दिनों तक जंग जारी रखा और अंत में मौत को गले लगा लिया।

यही कि बेहतर इलाज हेतु 22 जुलाई को डॉ.पोद्दार को कटिहार से पटना रेफर किया गया था। कोरोना से लड़ते हुए शुक्रवार की सुबह यानी 7 अगस्त को उन्होंने मौत को गले लगा दुनिया को अलविदा कह दिया।

चलते-चलते यह भी जानिए कि देश भर में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 21 लाख पहुंचने वाली है- जिसमें लगभग 15 लाख लोग ठीक हो चुके हैं यानि लगभग 6 लाख सक्रिय मामले हैं। देश में अब तक लगभग 43000 लोगों की मौत भी हो चुकी है- और इस हालात में मौत से बचाने की तैयारी के बजाय सरकार चुनाव की तैयारी में लगी है।

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बाल्य काल से ही कवींद्र रवींद्र को प्रकृति से अगाध प्रेम था- डॉ.मधेपुरी

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा महाकवि रवींद्रनाथ टैगोर की 81वीं पुण्यतिथि मनाई गई। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने की और संचालन सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने किया।

विषय प्रवेश करते हुए अध्यक्ष श्री शलभ ने कहा कि कवींद्र रवींद्र बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नई जान फूंकने वाले युगदृष्टा थे। वे एकमात्र कवि थे जिनकी दो रचनाएं दो देशों भारत के लिए “जन गण मन….” और बांग्लादेश के लिए “आमार सोनार बांग्ला….” प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी है। साहित्य की सभी विधाओं में उन्होंने रचना की।

अपने लाइव प्रसारण में बोलते हुए सम्मेलन के संरक्षक, मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति व पूर्व सांसद डॉ.आरके यादव रवि ने कहा कि टैगोर और गांधी के बीच राष्ट्रीयता और मानवता को लेकर हमेशा वैचारिक मतभेद रहा। जहां महात्मा गांधी पहले पायदान पर राष्ट्रवाद को रखते थे वहीं टैगोर मानवता को राष्ट्रवाद से अधिक महत्व देते थे। डॉ.रवि ने यह भी कहा कि कवींद्र रवींद्र मानवीय चेतना के सशक्त स्वर थे, हैं और रहेंगे भी।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri paying homage to Ravindra Nath Tagor on 81st punyatithi at Vrindavan Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri paying homage to Ravindra Nath Tagore on 81st Punyatithi at Vrindavan Madhepura.

संस्था के सचिव व समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि टैगोर कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार ही नहीं बल्कि उच्च कोटि के नाटककार, निबंधकार और चित्रकार भी थे। उन्हें बाल्यकाल से ही प्रकृति से अगाध प्रेम था। असाधारण सृजनशील रवींद्र नाथ को गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डॉ.मधेपुरी ने बच्चों के साथ अपने निवास (वृंदावन) पर टैगोर के तैल चित्र पर श्रद्धा पूर्वक पुष्पांजलि करते हुए यही कहा कि रवींद्र संगीत युग-युग तक बांग्ला साहित्य में सदैव ऊर्जा का संचार करता रहेगा।

प्रो.मणि भूषण वर्मा ने कहा कि उनके गीतों में आध्यात्मवाद के विभिन्न रूपों को बखूबी उकेरा गया है जिसे पढ़ने से उपनिषद की भावनाएं  परिलक्षित होती है। इस लाइव प्रसारण में डॉ.अरविंद श्रीवास्तव ने सम्मिलित हुए सभी साहित्यकारों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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कोविड-19 से 7 लाख से अधिक लोगों की मौत अब तक हो चुकी है

विश्व स्तर पर कोविड-19 से अब तक 1 करोड़ 80 लाख लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं और 7 लाख से अधिक लोगों ने मौत को गले लगाया है।

भारत में प्रतिदिन कोरोना संक्रमण के 50 हजार से ज्यादे मामले आ रहे हैं। देश में अब तक लगभग 13 लाख  लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। कल तक कोरोना वायरस के कुल पुस्ट मामले 19 लाख के आंकड़े पार कर चुके हैं तथा 40 हजार से अधिक लोग मौत के आगोश में सदा के लिए सो चुके हैं। गत 30 जुलाई से यह लगातार सातवां दिन है जब कोरोना संक्रमण के मामले प्रतिदिन 50,000 से ज्यादे आ रहे हैं।

बता दें कि बिहार में कोरोना मरीजों की कुल संख्या 68 हजार पार कर गई है। बिहार में गत 24 घंटों में कोरोना के कुल 3416 नए मरीज मिले हैं। कोरोना पॉजिटिव की सर्वाधिक संख्या जहां पटना में 603 है वहीं कटिहार में 234, पूर्वी चंपारण में 190, वैशाली में 163, समस्तीपुर में 139, मुजफ्फरपुर में 118, रोहतास में 106, नालंदा में 102, सहरसा में 101 और मधेपुरा में मात्र 44 मिले हैं। चारो और दहशत का माहौल है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि कोरोना संक्रमण ने देश की अर्थव्यवस्था को तो चौपट कर ही दिया है, ऊपर से पाकिस्तानी टीडी दल फसल को बर्बाद करके किसानों को भी बेदम कर दिया और बचा-खुचा जो था उसे आधे से अधिक भारत में बाढ़ आ कर बहा ले गई। संकट की ऐसी घड़ी में श्री राम भी अपने लिए घर नहीं बनाते, बल्कि अपनी सुविधाओं में कटौती कर प्रजा के हितार्थ अस्पताल, बांध, बैरेज आदि बनाने में लग जाते।

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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु प्रधानमंत्री द्वारा भूमि पूजन

अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के बंद ताले को देश के युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही सर्वप्रथम खोला था। नरेंद्र मोदी तो नौवाँ प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने कानून के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से श्री राम मंदिर निर्माण हेतु आज 5 अगस्त को अयोध्या में भूमि पूजन कर क्रांतिकारी इतिहास रच दिया है। इस बीच में अटल बिहारी बाजपेयी जैसे सर्वमान्य, जनप्रिय व संकल्प के धनी प्रधानमंत्री के कार्यकाल में उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के सोमनाथ से अयोध्या तक की राम-रथ-यात्रा संपूर्ण भारत को किस कदर आंदोलित किया था उसे बच्चा-बच्चा जानता है।

कोरोना के कहर से आज संपूर्ण संसार में कोहराम मचा हुआ है और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजन को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लिए सौभाग्य की बात कहते हुए यही कहा- “सदियों का इंतजार खत्म हुआ। पूरा देश रोमांचित है। आज पूरा भारत भावुक है। आज सियाराम की गूंज पूरेे विश्व में है। टेन्ट के नीचे रहे  सियाराम अब भव्य मंदिर में रहेंगे। राम भारत की मर्यादा है। राम सबके हैं, राम सब में है। यह मंदिर राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा। राम का काम करने पर चैन मिलता है।”

जहां राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा है- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम सर्वोत्तम मानवीय गुणों का स्वरुप है। राम प्रेम है, वे कभी घृणा में प्रकट नहीं हो सकते। राम करूणा है, वे कभी क्रूरता में प्रकट नहीं हो सकते और राम न्याय है, वे कभी अन्याय में प्रकट नहीं हो सकते- वहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि ये भूमि पूजन व राम मंदिर निर्माण आदि सांस्कृतिक समागम, राष्ट्रीय एकता एवं विश्व बंधुत्व का कार्यक्रम बनना चाहिए।

भाकपा माले ने आज के दिन को काला दिवस करार दिया परंतु देश के लोग जो अयोध्या नहीं पहुंचे वे क्या कहते हैं ?

उनका कहना है कि जिन भाजपा वालों ने पुरुषोत्तम भगवान राम को टेंट से भव्य मंदिर में लाने की बात कही, आजादी के संघर्ष से इसकी तुलना की और यह भी कि राम का काम करने पर ही चैन मिलता है। जिन कांग्रेसियों ने भगवान राम के प्रेम, करुणा और न्याय की बात की और जिन कम्युनिस्टों ने आज के दिन को काला दिवस कहा-  क्या वे यही न्याय करते रहेंगे कि 35 वर्षों तक सर्विस करने वालों को पेंशन नहीं और दो दिन भी सेवक या प्रधान सेवक  के रूप में विधायक-सांसद रहने पर उनके परिजन सदा पेंशन के हकदार बने रहेंगे। वे अपने से अपना वेतन (चाहे कम्युनिस्ट ही क्यों ना हो) जब चाहें जितना चाहें बढ़ाते रहेंगे और सर्विस करने वाले राष्ट्र निर्माता नियमित या नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन और समान सुविधाओं से वंचित रखेंगे। राजा राम की तरह खुद के लिए शासक कुछ ना सोचें जो कुछ करें वह देश की जनता के लिए  न्यायपूर्वक  करें।

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UPSC- 2019 के फाइनल का टॉपर है प्रदीप सिंह

भारत का सर्वाधिक प्रतिष्ठित जॉब माना जाता है आईएएस व आईपीएस आदि। इसे पाने के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन करके यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की प्रतियोगिता परीक्षा में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों को चयनित किया जाता है।

बता दें कि इस बार UPSC-2019 सिविल सेवा का फाइनल रिजल्ट आज घोषित कर दिया गया है जिसमें कुल 829 प्रतियोगियों को चयनित किया गया है। इनमें जनरल केटेगरी के 304, ओबीसी के 251, एससी कोटा के 129, ST के 61 तथा EWS के 78 प्रतियोगी चयनित किए गए हैं। यह भी जानिए कि सिविल सर्विस UPSC-2019 की लिखित मुख्य परीक्षा सितंबर 2019 में हुई जिसमें कुल 2304 उम्मीदवार सफल हुए जिनके लिए फरवरी में एवं कोरोना के कारण शेष अगस्त (2020) में हुए इंटरव्यू के आधार पर 829 प्रतियोगियों को विभिन्न कोटियों से लिए गए।

इस UPSC-2019 परीक्षा के टाॅॅॅपर हरियाणा के प्रदीप सिंह सहित सफल टॉप 10 की सूची इस प्रकार है- (1.) प्रदीप सिंह (2.)जतिन किशोर (3.) प्रतिभा वर्मा (4.)हिमांशु जैन (5.)जयदेव सीएस (6.)विशाखा यादव (7.)गणेश कुमार भास्कर (8.)अभिषेक सर्राफ (9.) रवि जैन और (10.)संजीता महापात्रा ।

चलते-चलते यह भी बता दे कि रिजल्ट में किसी तरह की समस्या को लेकर प्रतियोगी अपना आवेदन 15 दिनों के अंदर ही दे सकते हैं। यदि इससे जुड़ा कोई प्रश्न पूछना हो तो वे UPSC कैंपस में जाकर किसी भी वर्किंग डेज को सुबह 10:00 से शाम 5:00 बजे तक जानकारी हासिल कर सकते हैं अन्यथा समयानुसार 011-2338 5271 नंबर पर फोन करके भी जानकारी हासिल की जा सकती है।

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