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पंचतत्व में विलीन हुए अटल

भारतरत्न, कविहृदय जननेता, देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शुक्रवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गए। दिल्ली के स्मृति स्थल पर राष्ट्र ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। उनकी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने उन्हें मुखाग्नि दी। उससे पहले नातिन निहारिका ने उनके पार्थिव शरीर पर से तिरंगा ग्रहण किया। बेटी, नातिन और परिवार के लोग ही नहीं स्मृति स्थल पर मौजूद ऐसा कोई नहीं था जिसकी आंखों में आंसू ना हो। अटल थे ही कुछ ऐसे। सियासत की दुनिया का उन्हें ‘अजातशत्रु’ कहा जाता था क्योंकि उन्होंने हमेशा दोस्त बनाए, दुश्मन उनका कोई नहीं था।

Leaders at Smriti-Sthal
Leaders at Smriti-Sthal

मुखाग्नि देने से पूर्व स्मृति स्थल पर तीनों सेनाओं की ओर से अटल जी को अंतिम सलामी दी गई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वाजपेयी के पुराने साथी रहे लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, संघ प्रमुख मोहन भागवत, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सपा नेता मुलायम सिंह यादव समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं सभी विपक्षी दलों के नेता अंतिम विदाई देने मौजूद रहे। पड़ोसी देशों की ओर से भूटान नरेश जिग्मे नामग्याल वांग्चुक, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और वाजपेयी के मित्र रहे हामिद करजई भी श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के विदेश मंत्री और पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने भी इस मौके पर उपस्थिति दर्ज की।

इससे पहले वाजपेयी की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। वाजपेयी की अंतिम यात्रा में भाजपा मुख्यालय से उनके पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे वाहन के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पैदल चल रहे थे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और विजय रूपाणी, शिवराज चौहान, योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडणवीस समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी वाहन के पीछे चल रहे थे। अटल जी के अंतिम दर्शन के लिए 7 किलोमीटर लंबे मार्ग पर उमस भरी गर्मी के बावजूद हजारों हजार की संख्या में लोग उमड़े चले आ रहे थे। ‘अटल बिहारी अमर रहे’ जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।

अटल जी का शरीर भले ही अब इस दुनिया में नहीं है पर उनके अटल विचार, सिद्धांत और नैतिक मूल्य हमेशा देशवासियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। अटल ने कविता के जरिए पहले ही अपने अंतिम सफर का जिक्र करते हुए कहा था, ‘मौत की उम्र क्या है? दो पल भी नहीं, जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?’ अपनी ऐसी ही पंक्तियों, सम्मोहित कर देने वाले भाषणों और अनगिनत अवदानों की बदौलत युगों-युगों तक याद किए जाते रहेंगे हम सबके अटल जी। उन्हें हृदय की सम्पूर्ण श्रद्धा अर्पित करते हुए सादर नमन..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप’

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लौटकर आइएगा अटलजी..!

भारत के अनमोल रत्न, देश के सार्वकालिक महान व्यक्तित्वों में एक, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। देश भर की दुआएं काम ना आईं। कल हमलोगों ने राष्ट्रीय उत्सव मनाया और आज नियति ने सवा सौ करोड़ भारतवासियों को राष्ट्रीय शोक दे दिया। अटल जी पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे और 11 जून को तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें एम्स लाया गया था। दो दिनों से वे वेंटिलेटर पर थे और आज 94 वर्ष की उम्र में शाम 5 बजकर 5 मिनट पर यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।

किसी बड़े व्यक्ति के जाने पर आमतौर कहने का चलन है कि ये ‘अपूरणीय क्षति’ है, पर अटल बिहारी वाजपेयी नाम के शख्स के जाने से बनी रिक्तता सचमुच कभी नहीं भरी जा सकती। भारत के मानचित्र पर जैसे हिमालय जैसा दूसरा संबल नहीं हो सकता, हमारी अंजुलि में जैसे गंगा जैसा दूसरा जल नहीं हो सकता, वैसे ही इस वसुंधरा पर दूसरा अटल नहीं हो सकता। संवेदना से ओतप्रोत कवि, विचारों से लबालब बेजोड़ वक्ता, विनम्रता और शालीनता की प्रतिमूर्ति, नेताओं की भीड़ में अद्वितीय स्टेट्समैन जिसकी भव्यता ना तो किसी पार्टी में समा सकती थी ना प्रधानमंत्री जैसे पद में – काजल की कोठरी कही जाने वाली राजनीति में जैसे तमाम अच्छी चीजें उन्होंने समेट रखी हो अपने भीतर।

आज जबकि राजनीति पर विश्वसनीयता का संकट आन पड़ा है, ‘सांकेतिक’ ही सही अटलजी की मौजूदगी की बेहद जरूरत थी हमें। बहरहाल, पूरा देश शोकाकुल है आज। राजनेताओं से लेकर तमाम क्षेत्रों के दिग्गज उन्हें भाव-विह्वल श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “उनका जाना पिता का साया सिर से उठने जैसा है।” बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “देश ने सबसे बड़े राजनीतिक शख्सियत, प्रखर वक्ता, लेखक, चिंतक, अभिभावक एवं करिश्माई व्यक्तित्व को खो दिया।” उनके निधन को लेकर सात दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। कई राज्यों ने भी राजकीय शोक और अवकाश की घोषणा की है। बिहार में सात दिनों के राजकीय शोक और शुक्रवार 16 अगस्त के अवकाश की घोषणा की गई है।

अटलजी का पार्थिव शरीर कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर रातभर रखा जाएगा। सुबह 9 बजे पार्थिव देह भाजपा मुख्यालय ले जाई जाएगी। दोपहर 1 बजे अंतिम यात्रा शुरू होगी, जो राजघाट तक जाएगी। वहां महात्मा गांधी के स्मृति स्थल के नजदीक 4 बजे अटलजी का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटलजी की अस्थियां प्रदेश की सभी नदियों में प्रवाहित की जाएंगी।

25 दिसंबर 1924 को जन्मे अटलजी 10 बार लोकसभा के सदस्य, दो बार राज्यसभा के सदस्य और तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। उनके प्रशंसक भारत ही नहीं दुनिया के हर कोने में मिल जाएंगे। उन जैसे नेता सदियों में होते हैं और इतिहास के पन्नों पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। अटलजी, श्रद्धांजलि शब्द छोटा है आपके लिए, श्रद्धा का पूरा घट ही अर्पित करता हूँ आपको… बस अपना कहा पूरा करिएगा – मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं? – लौटकर आइएगा अटलजी..!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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एक बार फिर तिरंगे संग तिरंगा हुआ मधेपुरा

मधेपुरा जिले में 72वें स्वतंत्रता दिवस को पूरे उत्साह के साथ समारोह पूर्वक मनाया गया। बता दें कि मधेपुरा में नवनिर्मित डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के नाम वाले पार्क में समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने 72वें स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार  राष्ट्रीय ध्वजोत्तोलन करने के बाद उपस्थित स्कूली बच्चे-बच्चियों एवं बुजुर्गों के बीच अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि सबसे पहले 1905 ई. में यह तिरंगा कलकत्ता के ग्रीन पार्क में पी.वेंकैया नामक व्यक्ति द्वारा फहराया गया था और 1906 ई. में भीकाजी कामा नामक एक साहसी पारसी महिला द्वारा जर्मनी में फहराया गया था।

For the first time on the occasion of 72nd Independence Day, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri showing victory sign along with girl-students after National Flag hoisting at Dr.A.P.J.Abdul Kalam Park, Madhepura .
For the first time on the occasion of 72nd Independence Day, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri showing victory sign along with girl-students after National Flag hoisting at Dr.A.P.J.Abdul Kalam Park, Madhepura .

बता दें कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क से सटे बी.एन.मंडल स्टेडियम में जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला (भाप्रसे) द्वारा झंडोत्तोलन किया गया।  वहीं बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय में विद्वान कुलपति डॉ. (प्रो.) अवध किशोर राय द्वारा, टीपी कॉलेज में प्रधानाचार्य डॉ.के.पी.यादव द्वारा एवं किरण पब्लिक स्कूल में निदेशक अमन प्रकाश द्वारा 72वां  स्वतंत्रता दिवस  पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। कुलपति ने अपने सारगर्भित संबोधन में ज्ञान की विस्तृत चर्चाएं करते हुए कहा कि आगे किसी विशेष अवसर पर विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे प्रत्येक विधा के वैसे छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा जो प्रदेश एवं देश के स्तर पर इस विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेंगे।

अन्य वर्षो की भांति इस वर्ष भी समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने समाजवादियों के रहवर मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल के नामवाले भूपेन्द्र चौक पर डॉ.आलोक कुमार, डॉ.लल्लन प्रसाद अद्री, संतकुमार, आनंद सहित शांति मध्य विद्यालय की छात्राओं एवं विद्यालय प्रधान श्रीमती लता देवी की टीम के बीच राष्ट्रीय ध्वजोत्तोलन किया और कहा कि सैकड़ों वर्षो तक हमारे पुरखों ने कुर्बानियां दी तब हमें 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली और हम आजाद भारत में तिरंगा लहराते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, भूपेन्द्र नारायण मंडल, डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम जैसे कुछ लोग तो ऋषि का जीवन जीते हुए अपना सब कुछ देश के लिए न्योछावर कर दिया……. बच्चों ! उनकी जय करो…… उनके आचरण को जीवन में उतारो….. तथा सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह जलना सीखो।

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हम इस धरती को जीने योग्य कैसे बनाएं…..?- डॉ.मधेपुरी

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस में सायंस ब्लॉक के पीछे महावीर वाटिका शिलान्यास कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता विद्वान कुलपति डॉ.ए.के.राय, मुख्य अतिथि कुलसचिव कर्नल नीरज कुमार, अध्यक्षता कर रहे डॉ.अरुण कुमार मिश्रा, विशिष्ट अतिथि डॉ.शिवनारायण यादव एवं बीएन मुस्टा के महासचिव, सीनेटर व कार्यक्रम संचालक डॉ.नरेश कुमार की उपस्थिति में मधेपुरा के कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने आज का सबसे बड़ा वैश्विक सवाल खड़ा करते हुए यही कहा कि इस धरती को हम लोग जीने योग्य कैसे बनाएं….?

Honourable Vice-Chancellor Dr.Awadh Kishor Ray, Samajsevi Dr.Madhepuri, Registrar Colonel Neeraj Kumar, Principal Dr.S.N.Yadav, Convenor Dr.Naresh Kumar & others inaugurating the function of Mahavi Vatika Shilanayas Samaroh at North Campus BNMU Madhepura.
Honourable Vice-Chancellor Dr.Awadh Kishor Ray, Samajsevi Dr.Madhepuri, Registrar Colonel Neeraj Kumar, Principal Dr.S.N.Yadav, Convenor Dr.Naresh Kumar & others inaugurating the function of Mahavir Vatika Shilanayas Samaroh at North Campus BNMU Madhepura.

बता दे कि कुलपति डॉ.राय के संरक्षण एवं महासचिव डॉ.नरेश कुमार के संचालन में आयोजित “माय बर्थ- माय अर्थ” की भरपूर सराहना करते हुए डॉ.मधेपुरी ने कहा कि धरती को रहने योग्य बनाने के लिए प्रकृति-पर्यावरण को बचाना जरूरी है। माननीय कुलपति सहित अन्य दान दाताओं के पद चिन्हों का अनुसरण करते हुए डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मानव जीवन को लंबी आयु देने के लिए एक वृक्ष अपने जीवन में करोड़ों रुपए का ऑक्सीजन देता है। वैसे जीवनदाायी वृक्षों की सुरक्षा हेतु बनाए गए “वृक्ष सुरक्षा कोष” में डॉ.मधेपुरी नेे तक्षण ₹5000/- प्रदान किये।

सुलझे सोच के नेक इंसान मुख्य अतिथि कुलसचिव कर्नल नीरज कुमार ने कहा कि आज वैश्विक विचार सामने आ रहा है कि सृष्टि को बचाने के लिए प्रकृति-पर्यावरण को बचाना नितांत आवश्यक है। कर्नल नीरज ने स्नातकोत्तर विभागों के शिक्षकों सहित सभी विभागाध्यक्षों को संबोधित करते हुए कहा कि हम में से प्रत्येक कम-से-कम 10 वृक्ष लगाएं और उसकी देखभाल भी करें। कुलसचिव नीरज द्वारा अपनी 7 बीघे जमीन पर पौधे लगाए जाने की बातों को सुनते ही हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

यह भी जानिए कि अपने उद्घाटन भाषण में माननीय कुलपति डॉ.राय ने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस तरह मधेपुरा राजनीति के क्षेत्र में प्रदेश और देश को राह दिखाने का काम किया है उसी तरह हमारे यहाँ की “माय बर्थ-माय अर्थ” की राह पर महामहिम कुलाधिपति सह राज्यपाल सतपाल मलिक द्वारा बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में “हर परिसर हरा परिसर” का अभियान चलाया जा रहा है जिसमें बीएनएमयू की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

व्यवहारिक पक्षों को उजागर करते हुए कुलपति डॉ.राय ने कहा कि वृक्ष जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत हमारा साथ देता है। वृक्ष के बिना हमारा जीना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने यहाँ एक “जैव विविधता केंद्र” स्थापित किए जाने की जरूरत बताते हुए कहा कि हमेशा सरकार की ओर देखना सही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है।

इस अवसर पर आर्ट्स-सायंस व कॉमर्स के विभागाध्यक्षों सहित शिक्षकों की उपस्थिति रही जिनमें प्रमुख रूप से मौजूद रहे- डॉ.निखिल प्रसाद झा, डॉ.एच.एल.एस. जौहरी, डॉ.सीताराम शर्मा, डॉ.अरुण कुमार, डॉ.रामचंद्र मंडल, डॉ.बैजनाथ शाह, डॉ.विमल सागर, डॉ.प्रज्ञा प्रसाद, डॉ.मोहित घोष, डॉ.सुधांशु शेखर, डॉ.रीता सिंह, डॉ.विमला कुमारी आदि। अंत में वनस्पति विज्ञान के एचओडी डॉ.बलराम सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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मधेपुरा के शिक्षालयों में अब महापुरुषों की पुस्तकें होंगी- डीईओ उग्रेस

मधेपुरा के जिला शिक्षा पदाधिकारी उग्रेस प्रसाद मंडल ने मधेपुरा अबतक को बताया कि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजनान्तर्गत सरकार ने मिडिल स्कूल को 10 हजार, हाई स्कूल को 25 हजार एवं कॉलेजों को 50 हजार रुपए दी जाने वाली पुस्तक की राशि तय कर दी है। इसके लिए नूतन सिंह MLC ने जिले के 64 स्कूल व कॉलेजों को पुस्तक की राशि आवंटित कर दी है।

बता दें कि शुक्रवार 10 अगस्त को डीईओ उग्रेस प्रसाद मंडल ने चिन्हित स्कूल व कॉलेज के शिक्षक, एचएम व प्रधान के साथ बैठक किया। बैठक में डीईओ ने सबों से पुस्तक से जुड़ी सारे संबंधित विषयों पर जानकारी ली तथा यहाँ तक जानना चाहा कि उनके स्कूल के छात्र किस तरह की पुस्तकों में रुचि रखते हैं। अंत में डीईओ ने कहा कि सरकार द्वारा तय निर्देशानुसार महान विभूतियों, महापुरुषों एवं परिवार कल्याण के अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पुस्तकों की आपूर्ति भी की जाएगी।

इसके लिए जिले के 30 मिडिल स्कूल एवं 20 हाई स्कूल के साथ-साथ 14 कॉलेजों का भी चयन किया गया है। बैठक द्वारा चयनित पुस्तकों की सूची जिला योजना विभाग को सौंप दी जायेगी। अंत में बैठक में उपस्थित माध्यमिक के डीपीओ नारद प्रसाद द्विवेदी, बीईओ डाॅ.यदुवंश यादव आदि के साथ-साथ शिक्षक पंकज कुमार, वरीय कार्यालय सहायक श्रीमती कंचन कुमारी व समीर कुमार की उपस्थिति में एमएलसी फंड से स्कूल-कॉलेजों को पुस्तक दी जाने वाली राशि आवंटित करने हेतु उपस्थित जनों ने एमएलसी नूतन सिंह को हृदय से साधुवाद ज्ञापित किया।

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बी.पी.मंडल को मिले भारतरत्न- डॉ.मधेपुरी

मंडल विचार मंच एवं भारत साहित्य संगम के तत्वावधान में 9 अगस्त को प्रो.श्यामल किशोर यादव की अध्यक्षता में संकल्प दिवस मनाया गया। इस मौके पर उपस्थित मंडल के लोगों ने एक स्वर से सामाजिक न्याय के पुरोधा सह सामाजिक वैज्ञानिक बी.पी.मंडल को भारतरत्न से सम्मानित किए जाने की मांग की।

इस अवसर पर समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने अपने संबोधन में भारतरत्न डॉ.कलाम एवं भारतरत्न मदर टेरेसा के बीच हुई चर्चाओं को विस्तार देते हुए डॉ.कलाम की वाणी को यूँ उद्धृत किया- हे ईश्वर ! अभी मदर को धरती पर रहने दो, क्योंकि जिसे धरती पर अपना घर नहीं…… मदर का हृदय उसका घर है।

आगे डॉ.मधेपुरी ने कहा कि बी.पी. मंडल का भी हृदय उतना ही विशाल रहा है तभी तो उन्होंने भारत के सभी धर्मों की 3743 जातियों में जो जहाँ सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े मिले उन्हें सूचीबद्ध कर विशेष अवसर (27%आरक्षण) देकर विकास की मुख्यधारा में लाने की अनुशंसा अपने रिपोर्ट में की। अस्तु बी.पी.मंडल को भारतरत्न अवश्य मिले।

जहाँ अपने संबोधन के अंत में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि संविधान के प्रावधानों में लुक-छिप कर संशोधन करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संविधान में संशोधन का काम अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए वहीं मंडल विचार के प्रो.श्यामल किशोर यादव एवं साहित्य संगम के संस्थापक डॉ.अमोल राय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरक्षित वर्ग की सीमा निर्धारित कानून को सरकार पूर्ववत बनाये रखने के लिए समुचित पहल करे।

मौके पर गुरुओं के गुरु रहे सुकवि सत्यनारायण पोद्दार ‘सत्य’ द्वारा रचित ग्रंथ “वज्रपात” का विमोचन साहित्यकारों- डॉ.मधेपुरी, प्रो.श्यामल किशोर, डॉ.अमोल राय, डॉ.इंद्र नारायण, डॉ.विनय कुमार चौधरी, सियाराम यादव मयंक, प्राचार्य डॉ.एस.पी.यादव द्वारा उनके सुपुत्र विश्वविद्यालय प्रोफेसर डॉ.समरेंद्र नारायण आर्य सहित अन्य पारिवारिक सदस्यों की उपस्थिति में किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित करने के बाद उनकी तस्वीर पर पुष्पांजलि द्वारा किया गया फिर स्थानीय गायक रोशन कुमार द्वारा गाये गये स्वागत गान एवं संगीतज्ञ गांधी कुमार द्वारा साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के मंडल गीत बी.पी.वंदना की प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। लगे हाथ सृजन दर्पण के अध्यक्ष ओमप्रकाश एवं सचिव बिकास कुमार के निर्देशन में “मंडल मसीहा की आवाज” लघु नाटक का मंचन भी किया गया। मौके पर प्रमंडलीय शिक्षक संघ के सचिव परमेश्वरी प्रसाद यादव, मोहन मंडल, स्वदेश कुमार, राजेश मेहता, संजीव मेहता. योगी जनक सहित अधिवक्ता हरेंद्र नारायण आर्य, अंजनी कुमार, विदुषी डॉ.रेखा आर्या, डॉ.शैलेंद्र, कुमारी नूतन, प्रभाकर पोद्दार, राजेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।

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मधेपुरा जिला को 31 दिसम्बर तक ओडीएफ घोषित करें- डीएम

डीआरडीए के झल्लू बाबू सभागार में जिले के विकास योजनाओं की समीक्षात्मक बैठक की अध्यक्षता कर रहे डीएम नवदीप शुक्ला ने जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंडों के पदाधिकारियों व कर्मचारियों को शौचालय निर्माण को लेकर कई निर्देश दिए और गंभीरता पूर्वक उपस्थित अधिकारियों, पदाधिकारियों एवं इस कार्य में लगे कर्मचारियों से यही कहा कि हर हाल में जिले को 31 दिसंबर 2018 तक ओडीएफ घोषित करने में लग जाएं।

बता दें कि जिले को ओडीएफ घोषित किए जाने के अलावे मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना से बन रहे गली नाली योजना,  प्रधानमंत्री आवास योजना एवं दाखिल-खारिज सहित अन्य विभिन्न योजनाओं की समीक्षा डीएम ने गंभीरता पूर्वक की तथा पीएम आवास योजना की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अन्य सभी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने पर बल दिया।

यह भी कि डीएम नवदीप शुक्ला (भा.प्र.से.) ने मुख्यमंत्री द्वारा चलाए जा रहे बसेरा अभियान कार्य में तेजी लाने का निर्देश देते हुए सख्त हिदायत दी कि किसी भी योजना को समय से पूरा नहीं करने की लापरवाही को कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएम ने जिले के सभी सीओ को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि 8 अगस्त तक हर हाल में “दाखिल-खारिज” के कार्यों का निष्पादन करें।

अंत में सूबे में धड़ल्ले से हो रहे महिला यौन शोषण एवं उत्पीड़न के मद्देनजर जिले भर में महिला सशक्तिकरण को लेकर डीएम ने महिला उत्थान के निमित्त जिला, अनुमंडल, प्रखंड एवं पंचायत स्तर तक ‘यौन उत्पीड़न शिकायत निवारण केंद्र’ खोले जाने की घोषणा की। उस कमिटी में स्थानीय स्तर पर एक सामाजिक कार्यकर्ता को नामित किया जाएगा वहीं समाज कल्याण तथा महिला विकास का एक पदाधिकारी भी होगा।

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मधेपुरा के एथलीट गीतांजलि की राह चलें

बिहार की उड़नपरी कहलाने वाली राष्ट्रीय एथलीट एवं सूबे की राजधानी पटना के सीआईडी विभाग में कार्यरत कोसी की बेटी गीतांजलि की स्मृति में पांचवी बार आयोजित गीतांजलि स्मृति रोड रेस में भाग ले रहे सौ धावकों को समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, प्रभारी एसपी वसी अहमद, एसडीएम वृंदा लाल एवं उप प्रमुख जयकांत यादव ने सम्मिलित रूप से हरी झंडी दिखाकर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया। मालूम हो कि बिहार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों मेडल जीतने वाली धाविका गीतांजलि की असामयिक मृत्यु 6 अगस्त 2013 को पटना के कुर्जी हॉस्पिटल में हो गई थी।

बता दें कि गीतांजलि की स्मृति में लगभग 5 किलोमीटर का यह मैराथन दौड़ साहुगढ़ दुर्गा स्थान के मैदान से मधेपुरा भूपेन्द्र चौक के बीच खेल प्रशिक्षक संत कुमार की सतर्कता एवं सुरक्षा व्यवस्थानुरूप आयोजित की गई थी। लड़कियों के लिए खेदन बाबा चौक से ही यह दौड़ शुरू की गई । भले ही लड़कियों की संख्या इस बार कम थी परंतु ये जज्बाती धाविकाएं गीतांजलि को कभी मरने नहीं देंगी…..। इतनी लंबी दौड़ पूरी कर समस्त धावक-धाविकाओं ने गीतांजलि को श्रद्धांजलि दी और वे सभी गीतांजलि फाउंडेशन की ओर से पुरस्कृत भी हुए।

Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri in presence of Up-Pramukh Jaikant Yadav, Dr.Alok Kumar, Prithwiraj Yaduvanshi, Sanjeev Kumar, Anand Kumar & others giving Special Prize to "Khel Guru" Sant Kumar on the occasion of the 5th Gitanjali Memorial Road Race at Madhepura.
Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri in presence of Up-Pramukh Jaikant Yadav, Dr.Alok Kumar, Prithwiraj Yaduvanshi, Sanjeev Kumar, Anand Kumar & others giving Special Prize to “Khel Guru” Sant Kumar on the occasion of the 5th Gitanjali Memorial Road Race at Madhepura.

यह भी जानिए की गीतांजलि रोड रेस कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया समस्त सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों को तत्परता के साथ संपन्न करने/कराने में लगे रहने वाले मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने। आगे डॉ.मधेपुरी ने सर्वप्रथम गीतांजलि की तस्वीर पर पुष्पांजलि किया तथा उपस्थित धावक-धाविकाओं व गणमान्यों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज उसी को याद करता है जो अखंड जुनून के साथ समर्पित होकर समाज व राष्ट्र को कुछ देता है……. आज यदि गीतांजलि जीवित रही होती तो निश्चय ही वह ओलंपिक की उड़ान भर रही होती…. । डॉ.मधेपुरी ने अंत में यही कहा कि मधेपुरा के एथलीट गीतांजलि की राह चलें और भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की तरह अभाव में रहकर भी बड़े-बड़े सपने देखें……।

मौके पर इस कार्यक्रम की रीढ़ पृथ्वीराज यदुवंशी सहित जिला कबड्डी संघ के अध्यक्ष व उप प्रमुख जयकांत यादव एवं डॉ.आलोक कुमार द्वारा उद्गार व्यक्त किया गया और इनके अलावा सुशील कुमार, संजीव कुमार, नंद कुमार, अमरेश कुमार, समीक्षा यदुवंशी, मनीष कुमार, अमित कुमार, दिलखुश आनंद आदि द्वारा सर्वाधिक धावकों को घड़ी-जर्सी आदि देकर पुरस्कृत किया गया। उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने प्रथम स्थान पाने वाले धावक एवं धाविका सहित खेल प्रशिक्षक संत कुमार को पुरस्कार देकर मान ही नहीं किया बल्कि सहृदय होकर उन्हें सर्वाधिक सम्मान भी दिया। अंत में खेल के प्रति संत कुमार के समर्पण को देखकर डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा के समस्त खेल-प्रेमियों से अनुरोध किया कि वे आज से ही उन्हें ‘खेल गुरु’ कह कर सम्मानित करते रहेंगे…… जिसे गगनभेदी करतल ध्वनि के साथ सहमति प्रदान की गई।

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बी.पी.मंडल जन्म शताब्दी समारोह का आगाज़ 9 अगस्त से ही

सामाजिक न्याय के वैज्ञानिक बी.पी.मंडल का जन्म सौ साल पूर्व 25 अगस्त 1918 को कबीर की नगरी काशी में हुआ था। 100वें सालगिरह पर जन्मोत्सव का आगाज़ 9 अगस्त यानि क्रांति दिवस के दिन से ही करने का निर्णय लिया गया है। तैयारी समिति ने निर्णय लिया है कि भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी की अध्यक्षता में बी.पी.मंडल जन्म शताब्दी समारोह का शुभारंभ दिन के 1:45 बजेे अपराह्न से किया जाएगा।

बता दें कि कार्यक्रम का श्रीगणेश ‘मंडल गीत’ एवं सृजन दर्पण द्वारा “मंडल मसीहा की आवाज” नाटक की प्रस्तुति द्वारा किया जाएगा….। तैयारी समिति में मंडल विचार के प्रधान संपादक प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.अमोल राय, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.भागवत प्रसाद यादव सहित संयोजनकर्ता पीजी भौतिकी के डॉ.विमल सागर आदि गणमान्यों की उपस्थिति देखी गई। अध्यक्षता कर रहे डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा-

बी.पी.मंडल कुल 632 दिनों तक कश्मीर से कन्याकुमारी एवं राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक घड़ी की सूई की तरह चलते रहे….. और उन्होंने सभी धर्मों एवं सभी वर्णों के 3743 जातियों की पहचान की जो सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों में आते हैं, जिनकी संख्या उन दिनों भारत की कुल जनसंख्या का करीब 52% हुआ करता था। परंतु, सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण सीमा 50% दिए जाने के सुझाव के तहत मंडल कमीशन ने इन समस्त 3743 जातियों (जिनमें ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ….. आदि भी हैं) के लिए 27% आरक्षण देने की अनुशंसा की थी।

डॉ मधेपुरी ने आगे कहा कि मंडल रिपोर्ट को लागू करने हेतु ढेर सारी कुर्बानियां दी गईं । प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह कैबिनेट ने अपनी कुर्सियाँ गंवा दी और शरद-लालू-नीतीश, रामविलास-रंजन-रमई…….. सहित बहुतों ने अपना सुख-चैन गँवा दिया, फिर भी मंडल रिपोर्ट हु-ब-हू लागू नहीं किया जा सका। शरद यादव का ‘मंडल-रथ’ भी देश के विभिन्न हिस्सों से गुजरता हुआ अंततः क्रीमी लेयर के कीचड़ में फंस ही गया।

आगे डाॅ.मधेपुरी ने विनम्रता पूर्वक समाजवादी चिंतक मधुलिमये को उद्धृत करते हुए कहा कि संविधान के प्रावधानों में लुक-छिपकर संशोधन करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संविधान में संशोधन करने का काम अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए।

अंत में मंडल की लौ को धीमी होने पर चिंता व्यक्त करने के बाद डॉ.मधेपुरी ने इस बाबत हाल ही में मधेपुरा आये पूर्व सांसद डॉ.रंजन प्रसाद यादव एवं उच्च शिक्षा के पूर्व निदेशक डॉ.विद्यासागर यादव की चर्चा करते हुए यही कहा-

मेरे सीने में नहीं, तेरे ही सीने में सही……

हो जहाँ भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए !!

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मधेपुरा के राजशेखर को मिला दिल्ली हिन्दी अकादमी का काव्य-सम्मान

मधेपुरा जिले के  भेलवा गाँव निवासी प्रसिद्धि प्राप्त युवा गीतकार राजशेखर को हिन्दी अकादमी का “काव्य-सम्मान” दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने दिया। इस सम्मान अर्पण समारोह की अध्यक्षता हिन्दी अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष विष्णु खरे ने की। समारोह में दिल्ली हिन्दी अकादमी के सदस्यों के साथ-साथ साहित्य से जुड़े गणमान्यों की अच्छी खासी उपस्थिति देखी गई।

बता दें कि फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ से ही अनवरत लोकप्रियता बटोरते रहे इस धरती पुत्र राजशेखर को 2017-18 के लिए हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा यह काव्य सम्मान दिया गया है। जानिए कि पूर्व में यह सम्मान उन विद्वान विभूतियों को दिए गए हैं जिन्होंने साहित्य, संस्कृति, समाज सेवा एवं पत्रकारिता आदि क्षेत्रों में अपना उल्लेखनीय योगदान दिया है।

यह भी बता दें कि मौके पर दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम इस समारोह में विशिष्ट अतिथि रहे। इस कार्यक्रम में युवा गीतकार राजशेखर को 1लाख रूपया, ताम्रपत्र, प्रशस्ति पत्र एवं शाॅल आदि देकर डिप्टी सीएम द्वारा सम्मानित किया गया।

अंत में दिल्ली सरकार की कला संस्कृति व भाषा विभाग की सचिव रिंकू दुग्गा की उपस्थिति में अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

 

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