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जापान के चार दिवसीय दौरे पर रवाना हुए नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चार दिन की जापान यात्रा पर रविवार को दिल्ली रवाना हो गए। वे दिल्ली से सोमवार की सुबह जापान पहुंचेंगे। वहाँ 20 फरवरी को टोक्यो और 21 फरवरी को ओसाका में निवेशकों के साथ उनकी बैठक होगी। इसके अलावा वे प्राचीन शहर क्योटो भी जाएंगे।

इस मौके पर बड़ी संख्या में जदयू के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने 1, अणे मार्ग और हवाई अड्‌डे पर जाकर मुख्यमंत्री को विदाई दी। उन्हें शुभकामना देने वालों में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य बशिष्ठ नारायण सिंह, राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सांसद संतोष कुशवाहा, मुख्य प्रवक्ता व विधानपार्षद श्री संजय सिंह, कोषाध्यक्ष व विधानपार्षद प्रो. रणवीर नंदन आदि प्रमुख हैं।

बता दें कि नीतीश कुमार के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जापान गया है, जिसमें पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पथ निर्माण प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा, भवन निर्माण प्रधान सचिव चंचल कुमार, उद्योग प्रधान सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चंद्रा, आईजी बच्चू सिंह मीणा, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल सिंह, बीआईए के अध्यक्ष केपीएस केसरी और बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष ओपी साह शामिल हैं।

गौरतलब है कि बिहार में निवेश, पटना मेट्रो, सड़क, भवन निर्माण, अन्य आधारभूत संरचना, पर्यटन, ऊर्जा, हॉस्पिटैलिटी और औद्योगिक क्षेत्र में संभावनाओं को लेकर जापान यात्रा के दौरान चर्चा होगी। उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे पर पटना से बोधगया के बीच चलाए जाने के लिए प्रस्तावित मिनी बुलेट-मेट्रो टाइप ट्रेन की चर्चा पर भी औपचारिक तौर पर मुहर लग जाएगी।

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शिवलिंग का वैज्ञानिक रहस्य

क्या आप शिवलिंग का वैज्ञानिक रहस्य जानते हैं? या आप बता सकते हैं कि शिवलिंग पर जल और बेलपत्र क्यों चढ़ाते हैं? चलिए, जानने की कोशिश करते हैं। आप शिवलिंग के वैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारंभ में ही चौंक जाएंगे जब ये जानेंगे कि वास्तव में शिवलिंग एक प्रकार के न्यूक्लियर रिएक्टर हैं। जी हाँ, शिवलिंग और न्यूक्लियर रिएक्टर में काफी समानताएं हैं। आप गौर से देखें तो दोनों की संरचनाएं एक-सी हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो दोनों ही कहीं-न-कहीं उर्जा से संबंधित हैं। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि शिवलिंग पर लगातार जल प्रवाहित करने का नियम है। देश में, ज्यादातर शिवलिंग वहीं पाए जाते हैं जहां जल का भंडार हो, जैसे नदी, तालाब, झील इत्यादि। आप खंगाल कर देख लें, विश्व के सारे न्यूक्लियर प्लांट भी पानी (समुद्र) के पास ही हैं।

अब आगे बढ़ें। शिवलिंग की संरचना बेलनाकार होती है और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के रिएक्टर की संरचना भी बेलनाकार ही है। अगली खास बात यह कि न्यूक्लियर रिएक्टर को ठंडा रखने के लिये जो जल का इस्तेमाल किया जाता है उस जल को किसी और प्रयोग में नहीं लाया जाता। उसी तरह शिवलिंग पर जो जल चढ़ाया जाता है उसको भी प्रसाद के रूप में ग्रहण नहीं किया जाता है।

अरे रुकिए, बात अभी पूरी हुई कहाँ है! आगे सुनें। जैसा कि हम सभी जानते हैं, शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है। जहां से जल निष्कासित हो रहा है, उसको लांघा भी नहीं जाता है। ऐसी मान्यता है कि वह जल आवेशित (चार्ज) होता है। उसी तरह से जिस तरह से न्यूक्लियर रिएक्टर से निकले हुए जल को भी दूर ऱखा जाता है।

अब यह भी जानें कि शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और आक क्यों चढ़ाते हैं। ऐसा इसलिए कि सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है। शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्यूक्लियर रिएक्टर ही हैं तभी उनपर जल चढ़ाया जाता है, ताकि वो शांत रहे। महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे बिल्वपत्र, आक, धतूरा, गुड़हल आदि सभी न्यूक्लियर एनर्जी सोखने वाले हैं। एक बात और, शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है तभी जल निकासी नलिका को लांघने का नियम आप कहीं नहीं पाएंगे।

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भभुआ के कारण दांव पर राजद-कांग्रेस का रिश्ता

भाजपा विधायक आनंद भूषण पांडेय के निधन से खाली हुई सीट को लेकर राजद और कांग्रेस का रिश्ता दांव पर है। एक ओर जहां राजद इस सीट पर अपने उम्‍मीदवार खड़ा करने को पूरी तरह तैयार है तो दूसरी ओर कांग्रेस भी यहां उम्‍मीदवार उतारने की जिद पर अड़ी है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह का कहना है कि उऩकी पार्टी यहां अपनी ताकत दिखायेगी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी तो यहां तक कहते हैं कि राजद अगर भुभआ देने को राजी नहीं हुआ तो कांग्रेस उपचुनाव वाली तीनों सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। उधर राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव भभुआ पर कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहते हैं कि सामाजिक समीकरण और पकड़ के हिसाब से राजद का यहां मजबूत आधार है। साथ ही भोला कांग्रेस से मतभेद दूर कर लेने का दावा भी करते हैं।

बता दें कि 1990 के पहले भभुआ कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन बाद में राजद ने यहां कब्जा जमा लिया। हालांकि 2005 फरवरी के बाद से राजद भी कांग्रेस की तरह यहां लगातार पिछड़ता चला गया और मुख्य मुकाबले से भी गायब हो गया। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए 2005 के अक्टूबर में हुए चुनाव में बसपा ने यहां अपनी उपस्थिति दर्ज की। यही कारण है कि मायावती की निगाह भी इस पर जमी हुई है। बिहार में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भरत बिंद का दावा है कि पार्टी आलाकमान ने उन्हें चुनाव लडऩे की इजाजत दे दी है।

बहरहाल, भभुआ विधानसभा सीट को लेकर राजद, कांग्रेस और बसपा में मची इस होड़ से एनडीए के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता के सपने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बिहार में महागठबंधन के बिखरने के बाद लालू प्रसाद यादव ने दावा किया था कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय मोर्चा बनाने के लिए वे मायावती, मुलायम और ममता बनर्जी को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की पहल करेंगे। देखा जाय तो भभुआ में लालू के इस दावे की भी परख होनी है।

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एक जान बचाने के लिए कोसी को अब मिली 7 करोड़ की राशि

मधेपुरा-सहरसा-सुपौल व पूर्णिया यानि कोसी-सीमांचल क्षेत्र में 142 मानव रहित रेल फाटकों को मानवसहित फाटक बनाकर एक-एक कीमती जान बचाने के लिए 7 करोड़ की राशि रेल मंत्रालय ने अब दिया है जबकि कितनी बेशकीमती जानें जा चुकी हैं |

बता दें कि जहाँ सहरसा-फारबिसगंज के बीच कुल 82 मानवरहित रेल फाटकों को मानव सहित करने के लिए दो करोड़ की राशि दी गयी है वहीं सकरी-निर्मली के बीच कुल 16 अनमैंड फाटक समाप्ति के लिए दो करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है |

यह भी बता दें कि बनमनखी-बिहारीगंज के बीच 22 मानवरहित फाटक समाप्ति के लिए जहाँ दो करोड़ का प्रावधान किया गया है वहीं बनमनखी-पूर्णिया के बीच उतने ही मानवरहित यानि 22 फ़ाटक को मानवसहित बनाने के लिए एक करोड़ का आवंटन दिया गया है |

यह भी जानिये कि जहाँ कोसी-सीमांचल में अब 7 करोड़ से 142 फाटक मानवसहित होगा वहीं इस क्षेत्र में अब लगभग 563 करोड़ की राशि से रेल मंत्रालय द्वारा 15 परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाया जाएगा | इन 15 परियोजनाओं में बनमनखी-बिहारीगंज आमान परिवर्तन, सरायगढ़ में रेल महासेतु निर्माण, सहरसा-फारबिसगंज-सकरी-लौकहा-निर्मली तक 400 करोड़ मात्र की राशि से ब्रॉडगेज, सुपौल-अररिया नई रेल लाइन के साथ-साथ बिहारीगंज-कुरसेला नई रेल लाइन एवं मानसी-सहरसा-पूर्णिया रेल खंड में सिग्नल दूर संचार संबंधी ऑप्टिक फाइबर केबल कार्य के लिए 50 लाख की राशि स्वीकृत की गई है |

फिलहाल मधेपुरा विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री को 18 करोड़ और 127 किलोमीटर नई रेल लाइन के कार्यारंभ के लिए दो करोड़ 10 लाख के अतिरिक्त जोगबनी-विराटनगर, अररिया-गलगलिया, खगड़िया-कुशेश्वर स्थान, दरभंगा-कुशेश्वर स्थान रेल लाइन निर्माण हेतु कार्यारम्भ के लिए 61 करोड़ की राशि आवंटित कर दी गई है | देर से ही सही, मधेपुरा से सिंघेश्वर स्थान होते हुए वीरपुर यानि नेपाल की सीमा तक भारतीय रेल आज नहीं तो कल अवश्य पहुंचेगी |

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न्याय यात्रा पर तेजस्वी

लालू की अनुपस्थिति में राजद की कमान संभाल रहे तेजस्वी प्रसाद यादव शुक्रवार को न्याय यात्रा पर निकले। पूर्व उपमुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने कहा कि अनंत हेगड़े संविधान और मोहन भागवत आरक्षण को खत्म करने की बात करते हैं। इन सभी लोगों के खिलाफ हमारी न्याय यात्रा है। न्याय यात्रा के लिए तैयार किए गए विशेष रथ में सवार होकर निकलने के पूर्व तेजस्वी मीडिया से मुखातिब थे।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान तेजस्वी ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लचर है। बकौल तेजस्वी, केंद्र व राज्य सरकार के पास एक ही काम बचा है – लालू परिवार को फंसाओ, उन्हें खत्म करो। उन्होंने भाजपा नेता व केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से 2014 के चुनाव घोषणा पत्र में विवादित जमीन का जिक्र नहीं करने पर इस्तीफे की मांग की और तंज कसते हुए कहा कि हमसे परेशान हैं, तो हमें भी पाकिस्तान भिजवा दें।

बता दें कि तेजस्वी अपनी मां पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी एवं बड़े भाई व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव का आशीर्वाद लेकर संविधान बचाओ न्याय यात्रा के लिए निकले। दस सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आवास पर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचंद्र पूर्वे ने भी उन्हें आशीष दिया। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि करोड़ों लोगों की दुआएं तेजस्वी के साथ है। वे सभी की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे और धर्मनिरपेक्षता व सामाजिक न्याय की धारा को मजबूत करेंगे।

बहरहाल, प्रथम चरण की पांच दिवसीय यात्रा के दौरान तेजस्वी सीमांचल के चार जिलों कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज एवं अररिया में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। यात्रा का पहला पड़ाव कटिहार है।

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जल्द होगा बिहार, मिनी बुलेट ट्रेन पर सवार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के विकास का नया अध्याय लिखने जा रहे हैं। जी हाँ, बिहार सरकार राज्य में मिनी बुलेट-मेट्रो टाइप ट्रेन लाने की तैयारी कर रही है। यह ट्रेन पटना से बोधगया के बीच लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को जापान सरकार फंड देगी। इसके लिए बिहार सरकार और जापान सरकार के बीच औपचारिक समझौते के लिए नीतीश कुमार 18 फरवरी को चार दिनों के लिए जापान के दौरे पर जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार पटना-बोधगया के बीच 100 किलोमीटर की यात्रा में राजगीर और नालंदा स्टेशन होंगे और पूरा रूट अंडरग्राउंड होगा। इस रूट का पर्यटन के लिहाज से कितना महत्व है, यह कहने की जरूरत नहीं। पूरे विश्व के बौद्ध लोगों के लिए बोधगया सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस ट्रेन का स्वरूप मेट्रो और बुलेट की तर्ज पर बनेगा। जापान दौरे में विशेषज्ञों के साथ बातचीत कर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। कहा जा रहा है कि बिहार का यह अब तक का सबसे महंगा प्रोजेक्ट और निवेश हो सकता है।

बता दें कि नीतीश कुमार के साथ बिहार सरकार का एक हाई लेवल डेलिगेशन भी जापान के दौरे पर जा रहा है। इस बड़े प्रोजेक्ट के अलावा राज्य सरकार जापान सरकार के साथ करोड़ों रुपये के अन्य निवेश पर भी समझौता कर सकती है। माना जा रहा है कि उनके इस दौरे से बिहार एक नए युग में प्रवेश करेगा। स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी इस यात्रा को राज्य के विकास के लिए मील का एक बड़ा पत्थर बता रहे हैं। इस बेहद खास मौके पर उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं!

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इस 98 वर्षीय ‘छात्र’ को सलाम !

अगर आप में लगन और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो उम्र कतई आड़े नहीं आती। जी हाँ, आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे जब आप जानेंगे कि बिहार के राजकुमार वैश्य ने 98 साल की उम्र में स्नातकोत्तर की परीक्षा पास की। उम्र को मात देकर अनोखी उपलब्धि हासिल करने वाले वैश्य को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के राजेन्द्र नगर स्थित उनके घर जाकर अंगवस्त्र और किताबें भेंट करके सम्मानित किया।

गौरतलब है कि अद्भुत लगन के धनी राजकुमार वैश्य ने साल 2017 में नालंदा मुक्त विश्विविद्यालय से स्नातकोत्तर की परीक्षा उतीर्ण की है। मुख्यमंत्री ने राजकुमार वैश्य से मुलाकात के दौरान कहा कि उनकी बहुत दिनों से वैश्य से मिलने की इच्छा थी। संयोगवश बीते 4 फरवरी को एनआईटी पटना के एक कार्यक्रम के दौरान वैश्य के पुत्र प्रोफेसर संतोष कुमार से मुख्यमंत्री की मुलाकात हुई और मिलने का कार्यक्रम आखिर बन ही गया। यहां बताना जरूरी है कि प्रोफेसर संतोष कुमार एनआईटी पटना में मुख्यमंत्री के प्राध्यापक रह चुके हैं।

बहरहाल, 98 वर्षीय ‘छात्र’ वैश्य ने कहा कि घर में पढ़ाई का माहौल और पढ़ने का शौक मन में होने के कारण उन्होंने इस उम्र में अर्थशास्त्र से स्नातकोत्तर की परीक्षा पास की। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के लिए इस उम्र में पढ़ाई करने का संकल्प लिया। उनके इस जज्बे को ‘मधेपुरा अबतक’ का सलाम!

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“भारत के अंदर कोई भी बाबर की औलाद नहीं”: गिरिराज

अपने बयानों के कारण विवादों में, विवादों के कारण चर्चा में और चर्चा के कारण केन्द्र में बड़ा पद पाने और मंत्रिमंडल में फेरबदल के बावजूद उस पद को बनाए रखने में सफल रहने वाले गिरिराज सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस बार उन्होंने कहा है, भारत में सभी राम की संतानें हैं, यहां कोई बाबर की औलाद नहीं है। जी हाँ, राम मंदिर के संदर्भ में सवाल पूछे जाने पर केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “भारत के अंदर कोई भी बाबर की औलाद नहीं है। यहां सभी राम की संतानें हैं, राम के खानदान से हैं। अगर मैं धर्म परिवर्तन कर लूं तो क्या मेरे बच्चों के, आने वाली पीढ़ियों के पूर्वज बदल जाएंगे। वे तो हिंदू ही रहेंगे।”

गिरिराज ने आगे कहा, “राम मंदिर भारत में नहीं बनेगा तो क्या पाकिस्तान में बनेगा? राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में ही होगा और इसके लिए हिंदू-मुस्लिमों को साथ आना होगा।” यही नहीं, इसके बाद उन्होंने कहा, “मुसलमानों में भी शिया समुदाय के लोग तैयार हैं, लेकिन सुन्नी नहीं तैयार हैं। सुन्नियों को भी शिया समुदाय की तरह मान लेना चाहिए।”

गौरतलब है कि बिहार के नवादा से सांसद गिरिराज 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान नरेंद्र मोदी के विरोधियों के पाकिस्तान चले जाने संबंधी बयान के बाद खासतौर से चर्चा में आए थे। इसके बाद तो उनके विवादित बयान का जैसे सिलसिला ही चल पड़ा। कहना गलत ना होगा कि ऐसे बयान या तो वे चर्चा में बने रहने के लिए देते हैं या फिर उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता ही कुछ ऐसी है। दोनों ही लिहाज से भारत की ‘सत्याग्रही’ राजनीति और ‘समावेशी’ समाज के लिए ये चिन्ता की बात है।

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नीतीश ने कहा, तय समय पर होंगे विधानसभा चुनाव

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव के साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव कराए जाने के कयास पर विराम लगाते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव को लेकर किसी भ्रम में ना रहें। बिहार की जनता ने हमें पूरे पाँच साल के लिए चुना है, उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। चुनाव तय समय पर ही होंगे।
नीतीश ने यह बात रविवार को 1, अणे मार्ग में आयोजित पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में कही। प्रदेश अध्यक्ष श्री बशिष्ठ नारायण सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में पार्टी के नेता आरसीपी सिंह, राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक, राष्ट्रीय महासचिव संजय झा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, सांसद व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कौशलेन्द्र कुमार, विधानपार्षद व बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. रामवचन राय, विधानपार्षद व प्रदेश कोषाध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन, विधानपार्षद व पार्टी के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह (गांधीजी), मीडिया प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप, प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारी द्वय डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं अनिल कुमार सहित प्रदेश के सभी पदाधिकारी, सभी प्रकोष्ठों के अध्यक्ष एवं सभी जिलाध्यक्ष मौजूद थे।
इस मौके पर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सैद्धांतिक तौर पर हम जरूर इस बात पर सहमत हैं कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हों, लेकिन इसके लिए पहले राष्ट्रीय स्तर पर राय बननी है और संवैधानिक व्यवस्था होनी है। कई तरह की प्रक्रिया के बाद ही ऐसा संभव होगा। इस बाबत प्रदेश अध्यक्ष श्री बशिष्ठ नारायण सिंह ने भी कहा कि संगनात्मक स्तर पर हम लोकसभा एवं विधानसभा दोनों चुनावों के लिए तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि सिर्फ बिहार में विधानसभा चुनाव पहले करा दिया जाए। ऐसा हो तो पूरे देश में एक साथ हो।
चलते-चलते बता दें कि नीतीश ने अपने संबोधन में समीक्षा यात्रा के दौरान बक्सर में हुई पत्थरबाजी की घटना का जिक्र भी किया और कहा कि हमने गांधी की राह चुनी है, पत्थरों की हमें चिन्ता नहीं। जनता ने हमें सेवा के लिए सत्ता दी है और हम अपना काम पूरी मुस्तैदी से करते रहेंगे।

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डॉ.मधेपुरी ने कहा हमें अपने गणतंत्र पर गर्व है !

मधेपुरा के अमर स्वतंत्रता सेनानी भूपेन्द्र नारायण मंडल के नाम वाले भूपेन्द्र चौक पर प्रातः 8:00 बजे  समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने देश के शहीदों, सेनानियों एवं संविधान सभा के सदस्यों को याद किया तथा उन्हें नमन करते हुए बुद्धिजीवियों एवं स्कूली बच्चों के बीच तिरंगा लहराया | डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि आज सारा भारत 69वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा है और एक-एक भारतीय को अपने गणतंत्र पर गर्व है | बस यही है अरमान…. कि हर एक के दिल-व-दिमाग में….. जिंदा रहे हिंदुस्तान !!

और बता दें कि उसी मनीषी के नाम वाले बी.एन.मंडल स्टेडियम में मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (IAS) ने पूरी टीम के साथ 9:00 बजे स्वतंत्रता सेनानियों, ढोल-नगाड़ों से लैस स्कूली बच्चों, NCC एवं स्काउट सहित पुलिस के जवानों व गणमान्यों के बीच तिरंगे को सलामी दिया | मधेपुरा के उत्तरोत्तर विकास के लिए जनसहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए मो.सोहैल ने कहा कि बाल-विवाह , दहेज़ एवं शिक्षा व्यवस्था में समुचित सुधार और छात्र-छात्राओं द्वारा नकल का पूर्णत: परित्याग किये बिना यहाँ इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईटीआई….. आदि से लेकर विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री निर्माण का कोई औचित्य है क्या ?

Republic Day at B.N. Mandal University, Madhepura.
Republic Day at B.N. Mandal University, Madhepura.

यह भी जानिए कि उसी समाजवादी मनीषी के नाम भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के विद्वान कुलपति प्रोफेसर डॉ.अवध किशोर राय द्वारा इस अवसर पर विश्वविद्यालय कार्यालय के समीप 69वें गणतंत्र दिवस पर तिरंगे को सलामी देते हुए संदेश स्वरूप यही कहा गया कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में उन्नति करते हुए एक सबल राष्ट्र के रूप में कदम बढ़ा चुका है | डॉ.राय ने कहा कि जब हम 33 करोड़ थे तब मेरे पास घर में एक बड़ा रेडियो हुआ करता था आज जब लगभग 133 करोड़ के करीब पहूँच रहे हैं तो रेडियो और सिनेमा हॉल मूवी मेरे मुट्ठी में समा गया है……. रुपए भी ढोने से मुक्त कर दिया गया है मोबाइल ने !

Republic Day at T.P. College , Madhepura.
Republic Day at T.P. College , Madhepura.

आज सारा मधेपुरा गणतंत्र के तिरंगे के साथ लहराता रहा | टीपी कॉलेज के नवनियुक्त प्राचार्य सह सिंडिकेट सदस्य डॉ.परमानंद यादव आज इस गणतंत्र दिवस पर तिरंगे को सलामी देने के बाद समर्पण के साथ कार्य करने एवं महाविद्यालय को भारत के मानचित्र पर ले जाने का संकल्प लिया | डॉ.यादव ने सभी कुलपतियों से लेकर श्रद्धेय रतन चंद, महावीर बाबू एवं रवि बाबू सहित पूर्व के सभी प्राचार्यों के अवदानों की भी सराहना की तथा छात्रों को अपनी मेंहनत से महाविद्यालय के नाम को रोशन करने का संदेश दिया |

इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसर में शहीद चुल्हाय उद्यान, शिक्षक संघ भवन, अवकाश प्राप्त शिक्षक कल्याण संघ एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ आदि स्थानों पर भी गणतंत्र दिवस ससम्मान मनाया गया | तिरंगामय हो गया संपूर्ण मधेपुरा |

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