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केन्द्र सरकार के तीन साल: जेडीयू के सात सवाल

बिहार की महागठबंधन सरकार में शामिल जेडीयू ने केन्द्र की वर्तमान एनडीए सरकार के तीन साल पूरा होने पर नरेन्द्र मोदी सरकार से आज सात सवाल किए। पटना स्थित जेडीयू के प्रदेश कार्यालय में पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह एवं नीरज कुमार ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि 2 करोड़ नौकरियों का वादा करने वाली केन्द्र सरकार 20 हजार नौकरी भी नहीं दे पा रही है। उन्होंने पूछा कि अनूसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछडी जातियों की भर्ती में 90 प्रतिशत की कमी आई और मात्र 8,436 भर्तियां हुईं, क्या इसे पिछड़ा विरोधी न कहा जाए?

जेडीयू के प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि देश के युवाओं को हसीन सपने दिखने वाले लोग रिक्त स्थानों पर भी भर्तियां नहीं कर रहे है? कुल सरकारी नौकरी में 89 प्रतिशत की कटौती करते हैं, ऐसे में क्या इन्हें युवा विरोधी सरकार कहना गलत होगा? जेडीयू ने आरोप लगाया कि छह महीने में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में सिर्फ 12,000 नौकरियां पैदा हुई हैं, जबकि इस सेक्टर के लिए मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया का अभियान चलाया गया। इस पर केन्द्र सरकार का क्या कहना है?
आईटी क्षेत्र एवं अन्य निजी क्षेत्र मे भारी छटनी चल रही है और तकरीबन 10 लाख लोगों को निकाले जाने की संभावना है, कटौती को रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने क्या कदम उठाये हैं? जेडीयू के प्रवक्ताओं ने कहा कि उनकी पार्टी ये सवाल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं पूछ रही है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण से जुड़ा सवाल है। बेरोजगार युवाओं से कैसे राष्ट्र निर्माण करेंगे? कैसे बनेगा भारत विश्व शक्ति, अगर हमारे देश के युवाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा?

जेडीयू के प्रवक्ताओं ने यह भी पूछा कि क्या बीजेपी कार्यकर्ताओं के बच्चों को सरकारी मिल रही है? उन्हें ये सवाल केन्द्र सरकार से करना चाहिए कि क्या बीजेपी के सपनों में सिर्फ पूंजीपतियों को ही जगह मिलेगी? बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए जेडीयू नेताओं ने कहा कि साल 2009 में 12.56 लाख लोगों को रोजगार मिला था और साल 2015 में यह आंकड़ा 1.35 लाख रह गया। पिछले चार साल से हर दिन 550 नौकरियां गायब होती चली जा रही है। इस हिसाब से 2050 तक भारत में 70 लाख नौकरियों की कमी हो जाएगी। बहरहाल, इन तीखे सवालों का भाजपा व केन्द्र सरकार क्या जवाब देती है, यह देखना सचमुच दिलचस्प होगा।

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जीएसटी के तहत अनाज और दूध टैक्समुक्त होंगे

पूरे देश के लिए अच्छी ख़बर। जीएसटी (गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स) के तहत अधिकतर वस्तुओं की टैक्स दरों को लेकर केन्द्र और राज्यों के बीच सहमति बन गई है। श्रीनगर में गुरुवार को शुरू हुई दो दिवसीय जीएसटी काउंसिल की बैठक में रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स रेट घटाने का फैसला लिया गया। नए टैक्स सिस्टम के तहत कई जरूरी चीजों की कीमतें कम हो सकती हैं। अनाज और दूध को टैक्समुक्त कर दिया गया है। प्रोसेस्ड फूड भी सस्ते हो जाएंगे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मिठाई, खाद्य तेल, चीनी, चायपत्ती, कॉफी और कोयले को 5% टैक्स स्लैब में रखा गया है। हेयर ऑइल, टूथ पेस्ट और साबुन पर 18% टैक्स लगाया जाएगा। अभी इन पर 28% टैक्स लगता है। कोयले और मसालों पर भी 5% टैक्स लगेगा। एंटरटेनमेंट, होटल और रेस्टोरेंट में खाने पर 18% टैक्स लगेगा।

सूत्रों के मुताबिक छोटी कारों पर 28% टैक्स के अलावा सेस लगाया जाएगा। लग्जरी कारों पर टैक्स के अलावा 15% सेस जोड़ा जाएगा। एसी और फ्रिज को भी 28% टैक्स दायरे में रखा गया है। हालांकि अभी इन पर 30-31% टैक्स लगता है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि “किसी भी वस्तु पर टैक्स की बढ़ोतरी नहीं की गई है। कई चीजों पर टैक्स की दरें कम हो जाएंगी। विचार यह है कि जीएसटी का असर महंगाई बढ़ाने वाला ना हो।” राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने बताया कि 1211 वस्तुओं में से 7% को छूट के दायरे में रखा गया है, जबकि 14% वस्तुओं को 5%  टैक्स के दायरे में, 17% वस्तुओं को 12% टैक्स के दायरें में और 43% वस्तुओं को 18% टैक्स के दायरे में रखा गया है। शेष 19% वस्तुओं पर 28% टैक्स देना होगा। सोने (गोल्ड) के शौकीनों को बता दें कि उस पर टैक्स स्लैब का फैसला शुक्रवार को होगा। सर्विस टैक्स की दरें भी दूसरे दिन ही तय की जाएंगी।

वैसे अभी तक जीएसटी काउंसिल के जिन फैसलों की जानकारी मिली है, वे देशवासियों को बड़ी राहत देने वाले हैं। इसके लिए केन्द्र सरकार बधाई की पात्र है। वहीं, इसके लिए बिहार सरकार को भी साधुवाद मिलना चाहिए क्योंकि बिहार विधानमंडल ने इस बिल को ध्वनिमत से पारित कर भेजा था और तमाम राजनैतिक विरोध के बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसके पक्ष में मजबूती से खड़े रहे थे।

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हिंसक हुई आरजेडी-भाजपा की लड़ाई

पटना में आरजेडी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई है। भाजपा ने आरजेडी के खिलाफ पार्टी कार्यालय पर हमला करने का आरोप लगाया तो आरजेडी ने पार्टी के शांति मार्च के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा मारपीट की बात कही है। दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर थाने में मामला दर्ज कराया है। गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े 22 ठिकानों पर मंगलवार को आयकर विभाग के छापे पड़े थे। इसके 24 घंटे बाद ही पटना में उसकी राजनीतिक प्रतिक्रिया भाजपा कार्यालय के सामने दिखाई पड़ी।

बहरहाल, भाजपा का कहना है कि आरजेडी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कार्यालय पर हिंसक हमला किया, जिसमें पार्टी के कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। पार्टी के प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने जानकारी दी कि पार्टी की ओर से कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई है और दल का प्रतिनिधिमंडल डीजीपी से मिला है।

उधर आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा का आरोप है कि बीते दिनों भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी के लगातार आ रहे बयान के विरोध में युवा राजद के कार्यकर्ताओं ने शांति मार्च निकला था। इसी दौरान भाजपावालों ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री ने लालू परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाए वह भाजपा और आरजेडी के बीच टकराव का मुद्दा बन गया है।

इन सारे घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद को तटस्थ दिखाने की कोशिश की है। जाहिर है कि सुशील कुमार मोदी के एक के बाद एक कई आरोप, आयकर विभाग के छापे, फिर लालू का ट्वीट कि भाजपा को नए पार्टनर मुबारक हों और अब आरजेडी-भाजपा के बीच हिंसक टकराव से राज्य का सियासी तापमान बढ़ता जा रहा है। वैसे बताते चलें कि इस पूरे मामले में भले ही दोनों पक्षों ने एफआईआर लिखा दी हो, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जिला प्रशासन ने भी दावा किया है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

 

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लालू से जुड़े 22 ठिकानों पर आयकर का छापा

आयकर विभाग ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी बेटी राज्यसभा सांसद मीसा भारती से जुड़े कथित बेनामी लैंड डील मामले में दिल्ली-एनसीआर में छापेमारी की है। ख़बरों के मुताबिक 1000 करोड़ रुपये की लैंड डील के मामले में 22 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए हैं। बताया जा रहा है कि छापे की कार्रवाई आज सुबह 8.30 बजे से ही चल रही है। ये छापे उन कंपनियों और लोगों के यहां मारे गए हैं जो लैंड डील के मामले में लालू से जुड़े हैं। गौरतलब है कि आज ही चेन्नई में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ती चिदंबरम के घर भी सीबीआई ने छापे मारे हैं।

बता दें कि अंग्रेजी न्यूज़ चैनल टाइम्स नाउ ने हाल ही में अपने खुलासे में दावा किया था कि दिल्ली में लालू की बेटी और उनके दामाद ने यूपीए सरकार के दौरान करोड़ों की जमीन मुखौटा कंपनियों के जरिए बहुत ही कम दाम में खरीदी थी। चैनल के मुताबिक यह काम इन कंपनियों के शेयर खरीदने और बेचने की आड़ में किया गया था। आरोपों के घेरे में लालू की सबसे बड़ी बेटी मीसा और दामाद शैलेश कुमार हैं। चैनल की मानें तो जिस कंपनी के जरिए यह कथित स्कैम किया गया, उसका रजिस्टर्ड पता लालू का सरकारी आवास था। आरजेडी ने इस खुलासे को ‘सुपारी पत्रकारिता’ करार दिया था।

बहरहाल, आयकर विभाग की छापेमारी के बाद बिहार में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। यह अजीब ‘संयोग’ है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल ही कहा था कि अगर इस मामले में विपक्ष के पास कोई प्रूफ है तो वो जांच करा ले, और आज सुबह छापेमारी की कार्रवाई शुरू हो गई। बिहार भाजपा के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने इस ‘संयोग’ का राजनीतिक लाभ लेने में जरा भी देर नहीं कि और कहा कि यह कार्रवाई नीतीश के कहने पर हुई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री व भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने भी कहा कि नीतीश कुमार ने कल ही कहा था कि लालू परिवार की अवैध संपत्तियों के आरोपों में अगर सच्चाई हो तो केन्द्र सरकार इसकी जांच करा ले। तो केन्द्र सरकार ने इस पर कार्रवाई कर दी है। मुझे उम्मीद है कि नीतीश कुमार ये नहीं कहेंगे कि ये छापेमारी बदले की भावना से की गई है।

उधर जदयू नेता पवन वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले ही कहा है कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी से समझौता नहीं करेंगे। जहां तक गठबंधन का प्रश्न है, हमने गठबंधन राजद पार्टी से की थी, न कि लालू यादव से। इस मामले के बाद भी महागठबंधन पर कोई असर नहीं होगा। वहीं पार्टी महासचिव श्याम रजक ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। इस मामले में ज्यादा बोलना ठीक नहीं। जबकि कांग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि अभी कार्रवाई चल रही है, चलने दीजिए। हम सब एक साथ हैं, जो होगा आगे देखा जाएगा।

सम्पूर्ण घटनाक्रम पर आरजेडी के वरिष्ठ नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि भाजपा पूरी योजना बनाकर लालू प्रसाद यादव की राजनैतिक हस्ती को खत्म करना चाहती है। इसके लिए पूरी कहानी गढ़ी गई है। उनका यह प्रयास सफल नहीं होगा। हम सब साथ हैं और साथ ही रहेंगे।

चलते-चलते बता दें कि छापेमारी की ख़बर आते ही लालू के पटना स्थित आवास पर उनके करीबियों का आना शुरू हो गया, जबकि बाहर एकदम सन्नाटा पसरा हुआ है। बताया जा रहा है कि इस बीच लालू अपने करीबियों से मंत्रणा करने के साथ-साथ कानूनविदों से भी सलाह ले रहे हैं।

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लालू ने दी मोदी को लोकसभा भंग कर चुनाव कराने की चुनौती

इन दिनों चौतरफा आरोपों से घिरे और हाल ही में चारा घोटाले पर आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश से परेशान आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती दी है कि लोकसभा भंग कर फिर से आम चुनाव कराएं। लालू ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार पिछले तीन साल में सभी मोर्चों पर विफल साबित हुई है। फायदा आमजन को नहीं, सिर्फ भाजपा और आरएसएस को हुआ है। लालू ने रविवार को कहा, ‘मोदी लोकसभा भंग करें और कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ नए सिरे से आम चुनाव कराएं, क्योंकि उनकी सरकार 2014 के आम चुनाव से पहले किए गए वादे पूरे करने में विफल रही है।’

लालू ने यह मांग भी की है कि नरेन्द्र मोदी जनता को अपने उस वादे का जवाब दें, जिसमें उन्होंने हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हर साल दो करोड़ लोगों को नौकरियां देने के उनके वादे का क्या हुआ? भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बताए कि मई, 2014 से अब तक कितने लोगों को नौकरियां दी गईं?’

पूर्व रेलमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार को इस बारे में भी आधिकारिक आंकड़ा पेश करना चाहिए कि तीन साल में विदेशी बैंकों में जमा कितना काला धन देश में वापस लाया गया। लालू ने कहा, ‘भाजपा के हाथों में देश सुरक्षित नहीं है, क्योंकि यह पार्टी किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहने के लिए समाज को बांटने और विभिन्न समुदायों के बीच नफरत पैदा करने में लगी है। सबका साथ, सबका विकास वाले इस जुमले की हकीकत वही जानता है, जिस पर बीतता है।’ बकौल लालू भाजपा देश के संघीय ढांचे को खत्म करने पर आमादा है। यह पार्टी क्षेत्रीय दलों को खत्म करने की हर कोशिश कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

बहरहाल, इन दिनों लालू के दोनों तेज और बेटी मीसा पर कई आरोप लगे हैं। स्वयं लालू पर रघुनाथ झा व कांति सिंह से ‘गिफ्ट’ लेकर केन्द्र में मंत्री बनाने के आरोप लगे। सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले के मामले में दर्ज सभी केस में उन पर मुकदमा चलाने का आदेश दिया वो अलग। नीतीश उनसे अपने संबंधों पर पुनर्विचार कर सकते हैं, ये चर्चा भी हवा में है। बावजूद इन सबके लालू द्वारा विजयरथ पर सवार प्रधानमंत्री को चुनौती साहस से भी आगे ‘दुस्साहस’ की श्रेणी में रखी जाने लायक बात है। कहना गलत न होगा कि ये चुनौती अपने समर्थकों को ‘हताशा’ से बचाने की कवायद से अधिक कुछ नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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सरहदों से नहीं बदलता ‘मदर्स डे’ का सार

माँ – वो शब्द जिसे परिभाषित करने में दुनिया की सारी भाषाओं के सारे शब्द और साहित्य व कला की सारी विधाएं खर्च हो जाएं, फिर भी परिभाषा अधूरी रह जाए। संसार का साक्षात ईश्वर, सृष्टि का पर्याय, हमारे अस्तित्व का पहला अध्याय होती है मां। दुनिया के हर बच्चे के लिए सबसे खास, सबसे प्यारा, सबसे गहरा, सबसे नि:स्वार्थ रिश्ता। सच तो यह है कि हमारे जीवन के सारे दिन मां से और मां के  होते हैं, फिर भी मां को सम्मानित करने के लिए एक खास दिन को दुनिया ने ‘मदर्स डे’ का नाम दिया, जो भारत में मई माह के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। लेकिन यह जानना दिलचस्प होगा कि अलग-अलग देशों में इस दिन को मनाने की तारीख और इसकी शुरुआत की कहानी भी अलग-अलग है। तो आईये, मदर्स डे के इतिहास में झांकें, इस दिन को सम्पूर्णता में देखें।

मदर्स डे का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना है। प्राचीन ग्रीक और रोमन इतिहास में मदर्स डे को मनाने के कई साक्ष्य हैं। पुराने समय में ग्रीस में मां को सम्मान देने के लिए पूजा का रिवाज था। कहा जाता है कि स्य्बेले ग्रीक देवताओं की मां थीं और उनके सम्मान में यह दिन त्योहार के रूप में मनाया जाता था। उधर एशिया माइनर के आसपास और रोम में इसे वसंत ऋतु के करीब ‘इदेस ऑफ मार्च’ यानि मां को सम्मान देने के पर्व के रूप में 15 से 18 मार्च तक मनाया जाता था।

यूरोप और ब्रिटेन में मां के प्रति सम्मान दर्शाने की कई परंपराएं प्रचलित हैं। उसी के अंतर्गत एक खास रविवार को मातृत्व और माताओं को सम्मानित किया जाता था, जिसे ‘मदरिंग संडे’ कहा जाता था। इंग्लैंड में 17वीं शताब्दी में 40 दिनों के उपवास के बाद चौथे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता था। इस दौरान चर्च में प्रार्थना के बाद छोटे बच्चे फूल या उपहार लेकर अपने-अपने घर जाते थे। इस दिन सम्मानस्वरूप मां को घर का कोई काम नहीं करने दिया जाता था।

दक्षिण अमेरिकी देश बोलिविया में मदर्स डे 27 मई को मनाया जाता है। यहां मदर्स डे का मतलब कोरोनिल्ला युद्ध को स्मरण करना है। दरअसल 27 मई 1812 को यहां के कोचाबाम्बा शहर में युद्ध हुआ। कई महिलाओं का स्पेनिश सेना द्वारा कत्ल कर दिया गया। ये सभी महिलाएं सैनिक होने के साथ-साथ मां भी थीं। इसीलिए 8 नवंबर 1927 को यहां एक कानून पारित किया गया कि यह दिन मदर्स डे के रूप में मनाया जाएगा।

चीन में भी मदर्स डे काफी लोकप्रिय है। इस दिन वहां उपहार के रूप में गुलनार के फूल खूब बिकते हैं। चीन में 1997 में यह दिन गरीब माताओं की, खासकर उन गरीब माताओं की जो ग्रामीण क्षेत्रों जैसे पश्चिम चीन में रहती हैं, की मदद के लिए निश्चित किया गया था।

जापान में मदर्स डे शोवा युग (1926-1989) में महारानी कोजुन (सम्राट अकिहितो की मां) के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता था। अब इस दिन को लोग वहां अपनी मां के लिए ही मनाते हैं। इसी तरह थाईलैंड में भी रानी के जन्मदिन की तारीख को मदर्स डे की तारीख में बदल दिया गया।

बहाना चाहे जो हो, आज मदर्स डे दुनिया के अधिकांश देशों में मनाया जाता है। जैसे कई कैथोलिक देशों में वर्जिन मेरी डे को तो इस्लामिक देशों में पैगंबर मुहम्मद की बेटी फातिमा के जन्मदिन को मदर्स डे के रूप में मनाया जाता है। कुछ देश 8 मार्च यानि वुमेंस डे को ही मदर्स डे की तरह मनाते हैं, लेकिन मनाते जरूर हैं। कई देशों में तो मदर्स डे पर अपनी मां का विधिवत सम्मान नहीं करना अपराध की श्रेणी में आता है।

अमेरिका में मदर्स डे की शुरुआत 1870 में जूलिया वार्ड होवे ने की थी। उनका मानना था कि महिलाओं या माताओं को राजनीतिक स्तर पर अपने समाज को आकार देने का सम्पूर्ण दायित्व मिलना चाहिए। आगे चलकर 1912 में मदर्स डे इंटरनेशनल एसोसिएशन बना और एना जॉर्विस (वर्जीनिया) ने मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे घोषित किया। गौरतलब है कि जॉर्विस शादीशुदा नहीं थीं और न ही उनका कोई बच्चा था। उन्होंने अपनी मां एना मैरी रविस जॉर्विस की मृत्यु के बाद उनके प्रति अपना प्यार और सम्मान जताने के लिए इस दिन की शुरुआत की थी। भारत में भी मई के दूसरे रविवार को ही मदर्स डे मनाया जाता है। वैसे यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी के जन्मदिन को भी मदर्स डे के तौर पर मनाने के उदाहरण देखे जा सकते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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वित्तरहित शिक्षक के संरक्षक डॉ.संजीव ने ली शपथ !

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रान्तर्गत ताज़िन्दगी शिक्षकों की सेवा करनेवाले एमएलसी डॉ.शारदा प्रसाद सिंह के नक्शे कदम पर चलते हुए इस बार हैट्रिक लगाने वाले उन्हीं के सुपुत्र डॉ.संजीव कुमार सिंह जद(यू) सहित नवनिर्वाचित अन्य तीन सदस्यों अवधेश नारायण सिंह, संजीव श्याम सिंह एवं वीरेंद्र नारायण यादव को विधान परिषद के उप भवन सभागार में 10 मई को संध्या 4:00 बजे कार्यकारी सभापति मो.हारूण रशीद ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई |

यह भी बता दें कि शपथ ग्रहण करने वाले इन चारों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों- पूर्व सभापति सह गया स्नातक से विजयी भाजपा नेता अवधेश नारायण सिंह, वहीं के शिक्षक क्षेत्र से विजयी रालोसपा के संजीव श्याम सिंह एवं सारण स्नातक क्षेत्र से विजयश्री प्राप्त वीरेंद्र नारायण यादव सहित डॉ.संजीव कुमार सिंह का कार्यकाल 9 मई 2017 से 8 मई 2023 तक का होगा यानि पूरे 6 वर्षों का कार्यकाल होगा |

यह जानिए कि नवनिर्वाचित सभी सदस्यों को परिषद के नये उपभवन में कार्यकारी सभापति मो.हारुण रशीद द्वारा शपथ दिलाई गई | शपथ ग्रहण के बाद सबों ने मंच पर उपस्थित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी सहित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव, ऊर्जा मंत्री सह मधेपुरा जिला प्रभारी मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, से हाथ मिला-मिलाकर अभिवादन स्वीकार किया गया |

बता दें कि यशस्वी पिता के यश को उर्ध्वगामी बनाये रखनेवाले डॉ.संजीव गठबंधन धर्म निभाते हुए वित्तरहित शिक्षकों के हित में निर्भीकतापूर्वक अपनी बातें रखते रहे हैं और आगे भी रखेंगे | पिताश्री के पद चिन्हों पर चलते हुए इन वित्तरहित शिक्षकों के हित में अहर्निश बौद्धिक सजगता प्रदर्शित करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे | इसलिए तो उच्चतम न्यायालय ने भी “समान कार्य के लिए समान वेतन” जैसे संघर्ष को सार्थक साबित करते हुए समर्थन दिया है |

यह भी जानिए कि चन्द रोज कबल यानी 6 मई को डॉ.संजीव ने भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के 8 अरब 52 करोड़ के बजट को अभिषद की बैठक में अपनी स्वीकृति देकर पास किया और अनुकंपाकर्मियों के भुगतान, नवनियुक्त शिक्षकों को कालेज के आंतरिक श्रोत से भुगतान सहित 73 प्रोन्नत शिक्षक-रीडरों को अंडरटेकिंग लेकर भुगतान करने पर मुहर लगा दी |

Newly Elected MLC Dr.Sanjeev Kumar Singh receiving blessings from Dr.Bhupendra Madhepuri at his residence (Vrindavan) Madhepura and discussing the problems of Vittrahit Shikshak .
Newly Elected MLC Dr.Sanjeev Kumar Singh receiving blessings from Dr.Bhupendra Madhepuri at his residence (Vrindavan) Madhepura and discussing the problems of Vittrahit Shikshak .

फिर शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने हेतु राजधानी पटना वापस लौटने के क्रम में मधेपुरा के मंडल विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक- विकास पदाधिकारी सहित विभिन्न पदों पर सेवारत रह चुके सेवानिवृत्त फिजिक्स के यूनिवर्सिटी प्रोफेसर एवं वित्तरहित शिक्षकों के प्रति अतिसंवेदनशील डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी का शुभाशीष प्राप्त करने उनके निवास ‘वृंदावन’ गये और चाय पीने के क्रम में 10 मई को होने वाले शपथ ग्रहण की चर्चा हुई तो डॉ.मधेपुरी ने एमएलसी डॉ.संजीव को शुभ आशीर्वचन देते हुए बस इतना ही कहा- शारदा बाबू तो रिजल्ट के दूसरे ही दिन से अगले चुनाव की तैयारी हेतु शिक्षकों के हित में कार्यारम्भ कर देते थे……. आप भी उसी पथ पर चलेंगे…….. चलते ही रहेंगे……. और आगे बढ़ते ही रहेंगे….!!

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क्या ये लालू के लिए ‘निर्णायक’ झटका है?

बिहार में सबसे ज्यादा विधायक उनकी पार्टी के, दोनों बेटे सरकार में नंबर दो और तीन की हैसियत में, बेटी राज्यसभा में, पत्नी राजद विधानमंडल दल की नेता और स्वयं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ सरकार के ‘अभिवावक’ की भूमिका में, फिर भी इन दिनों बेहद परेशान हैं लालू प्रसाद यादव। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने तो पहले ही मोर्चा खोल रखा था उनके और उनके परिवार के ऊपर कि अर्णब गोस्वामी अपना ‘रिपब्लिक टीवी’ शुरू करते ही लालू-शहाबुद्दीन की बातचीत का टेप लेकर आ धमके और अब सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश, जिसमें कहा गया है कि उनके विरुद्ध आपराधिक साजिश का केस चलेगा।

गौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले से जुड़े सभी चार मामलों को अलग-अलग चलाने का आदेश दिया। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अमिताभ रॉय की पीठ ने निचली अदालत को लालू प्रसाद यादव, जगन्नाथ मिश्र व अन्य के खिलाफ नौ माह के अंदर सुनवाई पूरी करने के निर्देश दिए। पीठ ने धारा 120 बी के तहत आपराधिक साजिश के आरोप भी बरकरार रखे। इसे झारखंड हाईकोर्ट ने नवंबर 2014 में हटाने का आदेश दिया था।

इस फैसले के आते ही भाजपा ने स्वाभाविक तौर पर दिल खोलकर इसका स्वागत किया। सुशील कुमार मोदी ने तो बिना देर किए नीतीश कुमार के सामने समर्थन का ‘पासा’ तक फेंक दिया। फैसले के बाद एक न्यूज चैनल से बातचीत में मोदी ने कहा कि अगर नीतीश कुमार लालू का साथ छोड़ दें तो भाजपा जेडीयू को समर्थन देने पर विचार करेगी। दूसरी तरफ जेडीयू ने मोदी के इस बयान को गुमराह करने वाला बताया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि बिहार का जनादेश सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ है और जनता ने पूरे पांच साल के लिए महागठबंधन को चुना है।

हालांकि जेडीयू इस मामले में अभी कुछ भी बोलने में बहुत सावधानी रख रही है और यथासंभव गठबंधन धर्म का पालन कर रही है, लेकिन अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब बेनामी संपत्ति को लेकर मोदी के आरोपों की बाबत पार्टी ने कहा था कि इन आरापों पर सफाई वे लोग दें जिन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। इस पर राजद ने खासी नाखुशी जाहिर करते हुए गठबंधन धर्म की दुहाई दी थी।

सच तो यह है कि यूपी विधानसभा के बाद से ही सियासी गलियारों में ऐसी अटकलें लग रही हैं कि नीतीश और लालू का साथ एक बार फिर टूट सकता है। हालांकि जेडीयू ने हर बार इन अटकलों को खारिज किया है। पर इस बार झटका जोर से लगा है, इतनी जोर से कि नीतीश शायद डैमेज कंट्रोल न कर सकें। ऐसे में कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर अपनी छवि के प्रति शुरू से सतर्क रहे नीतीश कोई बड़ा और चौंकाने वाला निर्णय ले लें।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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घिरे लालू, सामने आया शहाबुद्दीन से बातचीत का टेप

एक निजी टीवी चैनल द्वारा आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी के बाहुबली नेता व पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के बीच हुई बातचीत का टेप जारी होने के बाद बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है। इस बातचीत में शहाबुद्दीन लालू से सीवान के एसपी के खिलाफ शिकायत कर रहे हैं। बताया जाता है कि कथित बातचीत के दौरान शहाबुद्दीन जेल में थे।

बहरहाल, इस मामले को लेकर भाजपा सहित पूरे विपक्ष ने बिहार की महागठबंधन सरकार पर हमला बोला है। भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि इस मामले में केन्द्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने लालू पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। साथ ही कहा कि राज्यपाल को भी पूरे मामले को देखना चाहिए।

‘हम’ के अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने कहा कि इससे साबित होता है कि प्रदेश में अपराधियों के संरक्षण में सरकार चल रही है। उन्होंने इस मामले में केन्द्र के हस्तक्षेप के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।

इस पूरे प्रकरण में विपक्ष की एक मांग यह भी है कि आरजेडी शहाबुद्दीन को तत्काल पार्टी से निकाले। इस पर आरजेडी के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह ने कहा कि जेल के भीतर से शहाबुद्दीन का लालू से बातचीत करना तो गलत है, लेकिन हम शहाबुद्दीन को पार्टी से नहीं निकालेंगे। वो हमारी पार्टी के नेता हैं और रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि इस टेप से बिहार के गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।

वहीं जेडीयू ने इस मामले पर अपना तटस्थ रुख दिखाया। पार्टी महासचिव श्याम रजक ने कहा कि जारी टेप की सच्चाई जानने के बाद ही इस बारे में कोई टिप्पणी करेंगे। अभी इस बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं है। उधर पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि बिहार में सुशासन का राज है और रहेगा। ऐसी किसी भी बात को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जिससे बिहार में सुशासन की छवि खराब हो।

महागठबंधन की तीसरी पार्टी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व शिक्षामंत्री अशोक चौधरी ने भी अपने बयान में सावधानी बरती और कहा कि पहले यह देखना चाहिए कि वायरल टेप कब का है? लालू-शहाबुद्दीन की बातचीत कब की है? लालू प्रसाद ही ज्यादा बेहतर बता सकते हैं कि आखिर ये मामला क्या है ?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सुकमा के शहीदों के परिवार की मदद के लिए आगे आई बिहार सरकार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सली हमले में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों की शहादत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस हमले में बिहार के शहीद छह जवानों के परिजनों को राज्य सरकार की और से 5 लाख रुपये अनुग्रह राशि दिए जाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने शहीद हुए जवानों का अंतिम संस्कार राज्य सरकार की ओर से पूरे पुलिस सम्मान के साथ किए जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री कार्यालय से मंगलवार को जारी बयान में नीतीश ने कहा कि इन जवानों की शहादत को देश हमेशा याद रखेगा।

गौरतलब है कि सोमवार को छत्तीसगढ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस घटना में पच्चीस जवान शहीद हो गए थे, जिनमें छह जवान बिहार के थे। नक्सलियों से लड़ते हुए बिहार के जो लाल शहीद हुए, उनके नाम कृष्ण कुमार पांडेय (सासाराम), अभय कुमार लोमा (वैशाली), रंजीत कुमार (शेखपुरा), नरेश यादव (दरभंगा), सौरभ कुमार (दानापुर कैंट, पटना) और अभय मिश्र (भोजपुर) हैं।

उधर इस मामले को लेकर आरजेडी ने भाजपा को आड़े हाथों लिया है। पार्टी ने कहा कि केवल ट्विटर पर राष्ट्रवाद की बातों से काम नहीं चलने वाला है। एक्शन भी जरूरी है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार नक्सलियों और आतंकियों के खिलाफ एक्शन प्लान बनाए।

कांग्रेस ने इस घटना के लिए सीधे केन्द्रीय गृह मंत्रालय को जिम्मेदार बताया। पार्टी के नेता प्रेमचंद मिश्रा ने नक्सली हमले को लेकर गृहमंत्री को घेरा और इसे गृह मंत्रालय की बड़ी विफलता बताते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह से इस्तीफे की मांग की।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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