पृष्ठ : बिहार अबतक

फरवरी में होगा सभी प्रमंडलों में सम्मेलन करेगी जदयू

फरवरी में जदयू सभी प्रमंडलों में भव्य सम्मेलन का आयोजन करेगी जिसमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल होंगे। जदयू के इस प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन में संबंधित प्रमंडल के पार्टी के सभी सांसद, मंत्री, विधायक, विधानपार्षद, प्रदेश पदाधिकारी, प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, सभी सक्रिय साथी एवं नीतीश कुमार की नीतियों एवं आदर्शों में आस्था रखने वाले लोग मौजूद रहेंगे।

बता दें कि जदयू के प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन की शुरुआत शनिवार 9 फरवरी 2019 को तिरहुत प्रमंडल से होगी। इसके उपरान्त रविवार 17 फरवरी को दरभंगा प्रमंडल, शनिवार 23 फरवरी को कोसी प्रमंडल, रविवार 24 फरवरी को पूर्णिया प्रमंडल, सोमवार 25 फरवरी को भागलपुर प्रमंडल, मंगलवार 26 फरवरी को मुंगेर प्रमंडल, बुधवार 27 फरवरी को मगध प्रमंडल एवं गुरुवार 28 फरवरी को सारण प्रमंडल में सम्मेलन का आयोजन होगा।

अभी जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कुछ ही दिन शेष हैं, जदयू के इन सम्मेलनो का महत्व और भी बढ़ जाता है। प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने इन सम्मेलनों को ऐतिहासिक बनाने के लिए दल के सभी साथियों को अभी से जुट जाने को कहा है। उन्होंने इस संदर्भ में जारी अपने बयान में कहा है कि पार्टी की कोशिश है कि आगामी लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार की सभी 40 सीटों पर एनडीए की जीत हो।

गौरतलब है कि पिछले लगभग एक वर्ष से पंचायत, प्रखंड, जिला व प्रदेश स्तर पर लगातार कार्यक्रम कर जदयू ने जिस तरह जमीन से जुड़ने और आमलोगों के बीच जाने का प्रयास किया है वह अपने आप में अभूतपूर्व है। चाहे सभी जिलों में जदयू का अतिपिछड़ा सम्मेलन और रोड शो हो, जिला व प्रमंडल स्तर पर दलित-महादिलत सम्मेलन हो, सभी जिलों में अल्पसंख्यक कार्यकर्ता सम्मेलन एवं महिला समागम हो या फिर विभिन्न प्रकोष्ठों द्वारा चलाया जा रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम और सभी संगठन प्रभारियों का पंचायत, प्रखंड व जिला स्तर पर लगातार बैठकों का दौर, जदयू ने हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं और समाज-सुधार अभियानों को जन-जन तक पहुँचाने की प्रशंसनीय कोशिश की है।

सम्बंधित खबरें


मुख्यमंत्री ने किया सहरसा विद्युत उपकेन्द्र का शिलान्यास

शनिवार, 19 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड के सिंहौल में 300 करोड़ की लागत से बनने वाले 400/220/132 केवी विद्युत उपकेंद्र का शिलान्यास किया। दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करने के बाद अपने संबोधन में सर्वप्रथम केन्द्रीय विद्युत और नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह को सहरसा में पावर ग्रिड निर्माण करवाने के लिए बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में बिजली के क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर काम किया गया है। जहां वर्ष 2005 में 24 लाख उपभोक्ता थे और मात्र सात सौ मेगावाट बिजली की खपत थी, वहीं वर्ष 2017 में 4,535 मेगावाट बिजली की खपत हुई और अभी 5,139 मेगावाट बिजली की खपत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 2012 के भाषण के दौरान मैंने कहा था कि अगर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कराउंगा तो वर्ष 2015 के चुनाव में वोट मांगने नहीं जाऊॅगा। तब से बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए। 2015 में सात निश्चय के अंतर्गत हर घर तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य को समय से पूर्व ही 25 अक्टूबर 2018 को प्राप्त कर लिया गया। अब हर इच्छुक व्यक्ति जिसने बिजली का कनेक्शन लेना चाहा, उन तक बिजली पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना पर काम कर रही है और केन्द्र सरकार के सहयोग से हमें इस लक्ष्य को प्राप्त करने में और सहुलियत हुई। समय से पूर्व लक्ष्य प्राप्ति के लिए उन्होंने राज्य सरकार के ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव के योगदान की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि 31 दिसंबर 2019 तक सभी जर्जर तारों को बदलने का नया लक्ष्य रखा गया है। हर किसान के खेतों तक सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये 31 दिसंबर 2019 तक अलग कृषि फीडर के निर्माण का भी लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगले तीन साल में बिहार में सभी बिजली कनेक्शन प्रीपेड हो जाएगा। इससे लोगों को बिल भुगतान में सुविधा होगी। बिजली बिल में गड़बड़ी संबंधी शिकायतों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक बिल आने पर लोक शिकायत निवारण कानून के तहत शिकायत करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम काम के आधार पर वोट मांगते हैं, न्याय के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। हर तबके और हर इलाके के विकास में लगे हैं। बिहार की जनता जब तक मौका देगी हमारी प्रतिबद्धता बिहार की जनता के प्रति एवं काम के प्रति रहेगी। उन्होंने कहा कि बिजली के आने से अंधेरा, भूत का डर खत्म हो गया है और ढिबरी और लालटेन की उपयोगिता समाप्त हो गयी है।

कार्यक्रम को केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, लघु जल संसाधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव, एससी-एसटी कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव, सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, प्रधान सचिव ऊर्जा प्रत्यय अमृत एवं अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक पावर ग्रिड आईएस झा ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू, विधायक डॉ. अब्दुल गफूर, विधायक रत्नेश सदा, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, नॉर्थ बिहार कॉरपोरेशन के एमडी संदीप कुमार, कोसी प्रमंडल की आयुक्त सफीना एन., मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, सहरसा की जिलाधिकारी शैलजा शर्मा, पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सहित अन्य अधिकारीगण, पावर ग्रिड इंडिया लिमिटेड के अधिकारीगण, अभियंतागण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

चलते-चलते बता दें कि सहरसा विद्युत उपकेन्द्र 300 करोड़ रूपये की लागत से 36 माह में बनकर तैयार होगा। इसके अलावा राज्य सरकार इसके संचरण के लिए रिंग नेटवर्क के निर्माण में 354 करोड़ 45 लाख रुपए खर्च करेगी। यह भी जानें कि केन्द्र सरकार द्वारा बिहार में तीन पावर ग्रिड का शिलान्यास किया गया है। बकौल मुख्यमंत्री इससे बिजली आपूर्ति में काफी सहूलियत होगी और बढ़ी हुई बिजली की आवश्कताओं को पूरा किया जा सकेगा। लोगों को पूरी गुणवत्ता के साथ बिजली मिलेगी। बात जहां तक कोसी की है, यह सुखद संयोग है कि केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री और राज्य सरकार के विद्युत मंत्री दोनों इसी कोसी क्षेत्र के हैं। इससे इस क्षेत्र में ऊर्जा संबंधी समस्याओं का समाधान और आसानी से हो सकेगा।

सम्बंधित खबरें


तो इस बात पर रामविलास का घेराव करेंगे तेजप्रताप ?

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नाम लिये बगैर उन्हें कथित रूप से अंगूठाछाप करार देने संबंधी केन्द्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के बयान पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व लालू-राबड़ी के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने उन्हें आड़े हाथों लिया और इस मामले में उनका घेराव करने की बात कही।
गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी सरकार के सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने के निर्णय को आरजेडी ने गलत करार दिया था, जिसके बाद पासवान ने शुक्रवार को राबड़ी देवी का नाम लिए बिना कथित रूप से कहा था कि बिहार में कोई भी अनपढ़ (अंगूठाछाप) मुख्यमंत्री बन जाता है। इस पर तेजप्रताप ने कहा, “रामविलासजी को इस तरह का अपशब्द एक महिला को लेकर बोलना शोभा नहीं देता।”
तेजप्रताप ने नाराजगी जाहिर करते हुए ट्वीट के जरिए भी रामविलास पर प्रहार किया और कहा, ‘‘नारी जन्म देती है, ममता देती है और माफ भी कर देती है लेकिन इतिहास साक्षी है कि नारी का अपमान करने वाले बड़े-बड़े रावण और दुर्योधन भी नहीं बचे तो इन मौकापरस्त नेताओं की क्या औकात है।’’
बहरहाल, एक पुत्र के रूप में तेजप्रताप की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन क्या राबड़ी देवी अनपढ़ नहीं थीं? और क्या उनका मुख्यमंत्री बनना लोकतंत्र के साथ मजाक नहीं था? उसी लोकतंत्र के साथ जिसकी आरजोडी वाले इन दिनों दुहाई दे रहे हैं?

सम्बंधित खबरें


चूड़ा-दही भोज के बहाने मीठी और मजबूत राजनीति

बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा-दही भोज के बहाने एनडीए ने अपनी एकजुटता का परिचय दिया। गौरतलब है कि इस दिन एनडीए के तीनों घटक दलों के द्वारा चूड़ा-दही भोज का आयोजन होता है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह पिछले 21 वर्षों से मकर संक्रांति के दिन चूड़ा-दही भोज देते आ रहे हैं और धीरे-धीरे यह पूरी पार्टी का आयोजन हो गया है। अब तो आलम यह है कि इस दिन भोज में दस हजार से भी ज्यादा लोग जुटते हैं। वहीं, लोजपा की ओर से उसके प्रदेश कार्यालय में चूड़ा-दही भोज का आयोजन होता है तो भाजपा की ओर से विधानपार्षद रजनीश कुमार भोज देते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन तीनों आयोजनों में शामिल होते हैं और स्वाभाविक तौर पर शुरुआत जदयू के भोज से करते हैं।

सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोपहर लगभग एक बजे बशिष्ठ नारायण सिंह के हार्डिंग रोड स्थित आवास पहुँचे जहां बिहार के हर कोने से आए हजारों कार्यकर्ता और नेता उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। उनके आगमन पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने सर्वप्रथम बुके से उनका स्वागत किया। नीतीश कुमार ने इस मौके पर केवल तिलकुट का स्वाद लिया। जदयू के इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केन्द्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह, विधानसभा अध्य़क्ष विजय चौधरी, विधान परिषद के उपाध्यक्ष हारून रशीद, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद नित्यानंद राय, सांसद रामनाथ ठाकुर, कहकशां परवीन, कौशलेन्द्र कुमार, चिराग पासवान, राष्ट्रीय महासचिव व विधायक श्याम रजक, विधानपार्षद व पूर्व मंत्री अशोक चौधरी, विधानपार्षद संजय गांधी, नीरज कुमार, रणवीर नंदन, विधायक दुलाल चंद्र गोस्वामी, मुख्य प्रवक्ता संजय कुमार सिंह, प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य व अनिल कुमार, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

लोजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित दही चूड़ा के भोज में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष एवं एनडीए के अन्य नेताओं के साथ ही राज्यपाल लालजी टंडन भी शामिल हुए। लोजपा प्रमुख व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने वहां मुख्यमंत्री को गले लगाकर मकर संक्रांति की बधाई दी। लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष व मंत्री पशुपति कुमार पारस एवं सांसद व लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान समेत पार्टी के तमाम नेता मौजूद रहे। उधर भाजपा के विधानपार्षद रजनीश कुमार के जवाहरलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर भी चूड़ा-दही भोज का आयोजन हुआ जिसमें मुख्यमंत्री समेत कई नेता सम्मिलित हुए। मेजबान रजनीश कुमार ने बुके भेंटकर मुख्यमंत्री का अभिनन्दन किया। नीतीश कुमार तीनों आयोजनों में एक समान गर्मजोशी से शामिल हुए और बिहार व देश के सभी लोगों के लिए अपनी मंगलकामना व्यक्त की।

सम्बंधित खबरें


बिहार में दो विश्व धरोहर हैं- नालंदा विश्वविद्यालय और बोधगया मंदिर

यूँ तो बिहार में विरासतों की भरमार है…. आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया द्वारा सूचीबद्ध 110 साइटें हैं बिहार में…. जिनमें से दो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है… वे दोनों हैं- बोधगया का महाबोधि मंदिर और नालंदा विश्वविद्यालय का भग्नावशेष। इन दोनों के अतिरिक्त बिहार में दर्जनों ऐसी साइटें हैं जिन्हें विश्व विरासत स्थलों में शामिल किया जा सकता है।

बता दें कि महाबोधि मंदिर 27 जून 2002 को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में सूचीबद्ध किया गया था। जानिए कि विश्व धरोहर के रूप में सूचीबद्ध होने के बाद से बोधगया आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है…… क्योंकि महाबोधि मंदिर का प्राचीन स्वरूप अशोक कालीन माना जाता है जिसके जीर्णोद्धार के समय गर्भगृह में अशोक कालीन ईंटे मिली थी। कहा जाता है कि वर्तमान मंदिर चीनी यात्री ह्वेनसांग के भारत आगमन से पूर्व ही बन चुका था।

यह भी जानिए कि बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय 15 जुलाई 2016 को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है। विश्व धरोहर में शामिल होने वाला यह बिहार का दूसरा और भारत का 33वां धरोहर है। बता दें कि इसके विकास,सुरक्षा व संरक्षण की जिम्मेवारी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और बिहार सरकार की है।

पुरातात्विक और साहित्यिक साक्ष्यों के आधार पर माना जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. के आसपास हुई…. जिसकी स्थापना गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी। पाल शासकों ने इसे संरक्षण दिया था। 476 ई. में बिहार में ही जन्मे विश्व विख्यात खगोलविद् एवं गणितज्ञ आर्यभट्ट विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। इतना ही नहीं, जब संसार अज्ञानता के समंदर में भटक रहा था तब आर्यभट्ट का गणितीय विमल ज्ञान प्रकाश सात समंदर पार रोशनी बिखेरता हुआ पहुुँच गया था। आर्यभट्ट भी हमारा विश्व धरोहर ही है जिनके बाबत आइंस्टाइन ने टिप्पणी की है- “दुनिया आर्यभट्ट का आभारी है जिन्होंने संसार को गणितीय ज्ञान दिया जिसके बगैर कोई भी वैज्ञानिक खोज नामुमकिन होता।”

सम्बंधित खबरें


झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज की लालू की जमानत याचिका

चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनकी जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह लगभग दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान लालू के वकील कपिल सिब्बल ने उनकी बीमारियों और उम्र का हवाला देते हुए जमानत की अपील की थी जिसका सीबीआई के वकील ने विरोध किया था।
लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि देवघर, चाईबासा एवं दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में उन्हें इससे पहले भी जमानत दी जा चुकी है, इसलिए उन्हें फिर से जमानत की सुविधा प्रदान की जाए। कपिल सिब्बल ने लालू प्रसाद यादव की बीमारियों से संबंधित सर्टिफिकेट भी पेश किए और कोर्ट को बताया कि लालू प्लेटलेट्स की कमी, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय, किडनी और डिप्रेशन समेत कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। लेकिन कोर्ट ने तमाम दलीलों को दरकिनार करते हुए आरजेडी सुप्रीमो की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी केस में 23 दिसंबर 2017 को दोषी करार देने के बाद से जेल में हैं। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें पहले रिम्स और फिर दिल्ली एम्स में भर्ती किया गया। कोर्ट ने उन्हें इलाज के लिए छह सप्ताह की जमानत दी थी। इसके बाद उन्हें 30 अगस्त को सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था।
बहरहाल, लालू प्रसाद यादव को जमानत नहीं मिलने से आरजेडी खेमे में निराशा का माहौल है। उनके बाहर आने से न केवल पार्टी को मजबूती मिलती बल्कि महागठबंधन के प्रयासों को भी बल मिलता। उनकी अनुपस्थिति में तेजस्वी पार्टी की नैया कैसे पार लगाते हैं, यह देखने की बात होगी।

सम्बंधित खबरें


पासवान को हवाई अड्डे पर नहीं मिला वीआईपी प्रोटोकॉल !

हवाई अड्डे पर वीआईपी प्रोटोकॉल खत्म होने को लेकर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और फिल्म अभिनेता व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की चर्चा अभी थमी भी न थी कि अब लोजपा प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान को मिलने वाली वीआईपी प्रोटोकॉल की सुविधा समाप्त कर दिए जाने की खबर सामने आई है। दरअसल पासवान सोमवार को पूर्व केन्द्रीय मंत्री कैप्टन जयनारायण निषाद के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने आए थे और उसी दिन शाम की फ्लाइट से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। दिल्ली के लिए रवाना होने के दौरान उन्हें आम यात्री वाले गेट से हवाई अड्डे के भीतर दाखिल होते देखा गया।
गौरतलब है कि वीआईपी प्रोटोकॉल की सुविधा जिन वीआईपी लोगों को प्राप्त होती है, उनके हवाई अड्डे से निकलने का रास्ता आम यात्रियों से अलग होता है और उनके लिए वीआईपी लॉन्ज होता है जहां वे ठहरते हैं और विश्राम करते हैं। उन जगहों पर आम यात्री नहीं जा सकते हैं।
इस बाबत पूछे जाने पर पटना के जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डे के निदेशक का कहना है कि वीआईपी प्रोटोकॉल की सुविधा उपलब्ध कराने और उसे समाप्त करने में पटना हवाई अड्डे की कोई भूमिका नहीं है। इस सबंध में ब्यूरो ऑफ सिविल एवियेशन सिक्यूरिटी सुझाव भेजता है। उन्होंने कहा कि पासवान के वीआईपी प्रोटोकॉल के नवीकरण को लेकर हमें कोई नया आदेश नहीं मिला है। उधर लोजपा प्रमुख का कहना है कि वीआईपी प्रोटोकॉल समाप्त नहीं हुआ है और ये जल्द ही बहाल हो जाएगा।

सम्बंधित खबरें


200 वर्ष पूर्व बनी पटना की पेंटिंग लंदन संग्रहालय की जान

विश्व का सबसे बड़ा म्यूजियम (संग्रहालय) लंदन में है जिसका नाम है- ‘द विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम’। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान पटना के कई कलाकारों की पेंटिंग्स भी लगाई गई है उस म्यूजियम में।

बता दें कि पटना में मुहर्रम के दृश्य पर पटना के ही हिन्दू चित्रकार सेवक राम द्वारा बनाई गई पेंटिंग आज भी उस लंदन संग्रहालय की जान है। दो सौ ग्यारह साल पहले बनी मुहर्रम पर निकाले गये ताजिया जुलूस की पेंटिंग इतनी खूबसूरत है कि वह आज लंदन स्थित विश्व के सबसे बड़े डेकोरेटिव आर्ट्स एंड डिजाइन संग्रहालय ‘द विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम’ की जान बनी हुई है। मौके पर संसार के समस्त मुस्लिम देशों में बिहार की राजधानी पटना के उस हिन्दू कलाकार सेवकराम के मुहर्रम पर बनी पेंटिंग की जमकर चर्चाएं होती रहती हैं।

यह भी जानिए कि पटना में पटना सिटी स्थित दीवान मुहल्ला, लोदी कटरा और मच्छरहट्टा मुहल्ले में इस विद्या के माहिर कलाकार 18वीं शताब्दी के आरंभिक काल में हुआ करते थे। इसका विस्तार पटना, दानापुर व आरा तक था। शिवा लाल शिवा लाल की पेंटिंग्स भी ताजिए को लेकर चर्चित रही है।

आज के दिनों में जिस तरह ताजिये बनते हैं वही अंदाज 1807 में भी था। तब के इस पेंटिंग में बच्चों की मौजूदगी एवं सफेद कपड़े पहने बड़े लोगों की संख्या भी सर्वाधिक देखी जाती रही है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि 17वीं शताब्दी में स्थापित लंदन स्थित विक्टोरिया म्यूजियम में तीस लाख से भी अधिक प्रदर्श हैं जो मुख्य रूप से डेकोरेटिव आर्ट्स व डिजाइन से संबंधित हैं। पहले ताजिये के जुलूस में हिन्दुओं की सहभागिता सर्वाधिक हुआ करती जिसमें कमी होती दिखने लगी है। तब के दिनों में राजा की सहभागिता भी हाथी पर चढ़कर ताजिए के पहलाम वाले जुलूस में देखी जाती थी….।

 

 

सम्बंधित खबरें


क्या लालू को जमानत मिलेगी?

बहुचर्चित चारा घोटाले में दोषी पाए गए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। शुक्रवार को कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब लालू को जमानत के लिए लगभग एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ेगा।

गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव का स्वास्थ्य इन दिनों ठीक नहीं है। किडनी, हृदय-रोग और डायबिटिज समेत 11 बीमारियों के चलते वे रांची स्थित रिम्स (राजेन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) में भर्ती हैं। बेहतर इलाज के लिए उन्होंने देवघर, दुमका और चाईबासा मामले में जमानत के लिए अर्जी दी थी। कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने उनकी तरफ से पक्ष रखा। लगभग डेढ़ घंटा चली बहस के दौरान सिब्बल ने लालू की जमानत की अवधि और आयु का जिक्र किया। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

बता दें कि इससे पहले 21 दिसंबर 2018 को सीबीआई के आग्रह पर लालू की जमानत याचिका पर सुनवाई टल गई थी। कोर्ट ने तब सुनवाई के लिए 4 जनवरी की तारीख तय की थी, पर सीबीआई ने जमानत पर विरोध जताया था। इधर लालू परिवार समेत पूरा आरजेडी खेमा आशान्वित है कि लालू जल्द ही जमानत पर बाहर आ जाएंगे।

सम्बंधित खबरें


मधेपुरा सीट के लिए शरद ढूंढ़ रहे पप्पू का हल

लोकतांत्रिक जनता दल बनाकर नए सिरे से अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे शरद यादव परेशान हैं इन दिनों। उनकी परेशानी की वजह है मधेपुरा लोकसभा सीट जहां से वे चुनाव लड़ना चाहते हैं। दरअसल यहां एक म्यान में दो तलवार की स्थिति आन पड़ी है उनके सामने और ये दूसरी तलवार हैं मधेपुरा के वर्तमान सांसद पप्पू यादव। महागठबंधन का उम्मीदवार बनकर शरद एनडीए से लोहा लें उससे पहले उन्हें पप्पू का हल ढूँढ़ना पड़ रहा है। प्रश्न उठता है कि पप्पू उनके लिए सीट छोड़ें क्यों? वे तो स्वयं इस जुगत में हैं कि किसी तरह महागठबंधन में उनकी इंट्री हो जाए। राजनीति के माहिर खिलाड़ी शरद जानते हैं कि अगर वे एनडीए के विरुद्ध महागठबंधन के उम्मीदवार बन जाएं और पप्पू भी वहां से खड़े हो जाएं तो मुकाबला त्रिकोणीय होगा और ऐसे में एनडीए को रोकना असंभव-सा होगा क्योंकि पप्पू यादव का भी वोट बैंक कमोबेश वही है जो आरजेडी या महागठबंधन का है।
इन सारी परिस्थितियों के बीच शरद यादव इस कोशिश में हैं कि लालू प्रसाद यादव की रजामंदी से पप्पू यादव को मधेपुरा से हटाकर सुपौल या झंझारपुर से चुनाव लड़वाया जाय। बता दें कि सुपौल से पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन कांग्रेस की मौजूदा सांसद हैं। लिहाजा, इस बात की संभावना नगण्य है कि पप्पू सुपौल से लड़ें। ऐसे में झंझारपुर उनका नया ठिकाना हो सकता है। ये सभी संसदीय क्षेत्र यादव बहुल हैं और दोनों यादव नेता इसका लाभ लेना चाहते हैं। हालांकि आरजेडी सुप्रीमो ने अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं किया है।
गौरतलब है कि पप्पू यादव पूर्णिया से तीन बार सांसद रह चुके हैं और उनके लिए पूर्णिया एक बेहतर विकल्प हो सकता था लेकिन सूत्रों के मुताबिक पप्पू स्वयं वहां से चुनाव लड़ना नहीं चाहते। इसके पीछे उनकी कुछ राजनीतिक मजबूरियां बताई जा रही हैं। चलते-चलते यह भी बता दें कि साल भर पहले लालू परिवार के खिलाफ आग उगलने वाले पप्पू इन दिनों लालू के गुण गाने में लगे हैं। इसे आरजेडी खेमे से उनकी बढ़ती नजदीकी के रूप में देखा जा रहा है और यह बात भी शरद को परेशान कर रही है।

सम्बंधित खबरें