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दूसरों के कुकर्म ढोने के लिए नहीं मिला था जनादेश – नीतीश

जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद पार्टी के खुला अधिवेशन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आक्रामक तेवर में दिखे। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी से निर्णायक दूरी बना चुके शरद यादव को पार्टी तोड़ने की चुनौती देते हुए बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनादेश बिहार में न्याय के साथ विकास के लिए था, न कि पिछलग्गू बनकर दूसरों के कुकर्म ढोने के लिए। उन्हें और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि हमने जनादेश का अपमान किया, वे पहले जनता के मिजाज को जान लें। उन्होंने कहा, ‘बिहार में महागठबंधन को जनादेश भ्रष्टाचार या परिवारवाद का समर्थन करने के लिए नहीं मिला था। महागठबंधन में जो हालात पैदा हो गए थे, उसमें 20 महीने तक सरकार चली, यह बड़ी बात है।’

जनादेश का अपमान किए जाने के आरोप का जवाब देते हुए कहा नीतीश कुमार ने कहा कि महागठबंधन तोड़ने का निर्णय दल का निर्णय है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, ‘कुछ लोग जो बात करते हैं जनादेश की, हम पूछना चाहते हैं कि किस लिए जनादेश मिला था। वह जनादेश बिहार के विकास के लिए मिला था या परिवार के विकास के लिए?’ आगे उन्होंने कहा, ‘आरजेडी के सत्ता में आते ही लोगों के बीच भय पैदा हो गया था। महागठबंधन टूटने के बाद वह भय समाप्त हो गया है। सत्ता से बाहर आते ही आरजेडी के लोग तरह-तरह की हरकतें कर रहे हैं, लेकिन जनता सब देख रही है।’

शरद यादव पर तंज कसते हुए नीतीश ने कहा कि जिनको भाजपा के वोट से राज्यसभा में पहुंचाया, वो आज हमारे खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने चुनौती दी कि शरद जेडीयू को तोड़कर दिखाएं। उन्होंने कहा, पार्टी को तोड़ने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यदि उनके पास बहुमत है तो वे साबित करें। जेडीयू के टूट की किसी प्रकार की खबर को निराधार बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में कहीं टूट नहीं है। सभी विधायक, विधानपरिषद सदस्य, राज्य समितियां साथ हैं।

कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार ने बिहार में आई बाढ़ को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि इस वर्ष पानी में प्रवाह तेज है। राज्य के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। उन्होंने सभी से बाढ़ पीड़ितों को मदद करने की अपील की और कहा कि सरकार मदद के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा, आपदा प्रभावित लोगों को राज्य के खजाने पर पहला हक है। इसी के साथ नीतीश ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए केन्द्र सरकार का आभार भी जताया और कहा कि दोनों जगह एक ही गठबंधन की सरकार है। अब तेजी से बिहार का विकास होगा।

चलते-चलते बता दें कि पटना में हुई आज की बैठक में कार्यकारिणी की स्वीकृति के बाद जेडीयू के एनडीए में शामिल होने की विधिवत घोषणा हो गई। जहां तक शरद यादव पर अंतिम निर्णय लेने की बात है, उनकी ‘वरिष्ठता’ और ‘कद’ को देखते हुए पार्टी 27 अगस्त को प्रस्तावित आरजेडी की रैली में उनके शामिल होने तक की प्रतीक्षा कर सकती है। हालांकि नीतीश की बैठक के बरक्स शरद ने भी कल पटना में ‘जन अदालत’ का आयोजन किया, लेकिन अली अनवर, अरुण श्रीवास्तव, रमई राम सरीखे चेहरों के अलावे कोई और बड़ा चेहरा वहां मौजूद नहीं था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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जलमग्न हुआ बिहार, 16 जिलों में हाहाकार

बिहार पर प्रकृति का कहर जारी है। राज्य में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। सैकड़ों गांव जलमग्न हो चुके हैं। 16 जिलों में 1 करोड़ से ज्यादा लोग इसकी त्रासदी झेल रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 119 तो अन्य स्रोतों से 230 लोगों के मारे जाने की ख़बर है। गुरुवार को पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा के कई नए इलाकों में पानी आने से दहशत फैल गई। मधेपुरा में सर्वाधिक प्रभावित आलमनगर और चौसा प्रखंड के अलावा छह और प्रखंड इसकी चपेट में आ गए। जिले में भलुआही के पास एनएच 106 की सड़क लगभग 25 फीट कट जाने से यातायात ठप हो गया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अब बाढ़ का पानी सहरसा जिले में भी फैल गया है। उधर कटिहार के नए इलाकों में सदर प्रखंड के भसना, मनसाही और कोढ़ा प्रखंड के कुछ हिस्सों में भी पानी फैलने लगा है। वहीं पूर्णिया जिले में बायसी अनुमंडल के बाद अब पानी बनमनखी और धमदाहा क्षेत्र में बढ़ रहा है। बनमनखी प्रखंड  की 10 पंचायतें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। गुरुवार से वहां एनएच 107 पर वाहनों का परिचालन भी बाधित हो गया है। अररिया की हालत तो और भी बदतर है। इस जिले में हताहत लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है और अब तक 20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है।

इन जिलों के अतिरिक्त सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर भी बाढ़ से बेहाल हैं। मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में अब तक 94 लोगों की मौत हो चुकी है। वैसे गोपालगंज, वैशाली और छपरा में जहां नए इलाके बाढ़ के पानी से घिरे, वहीं कुछ प्रभावित जिलों में पानी के धीरे-धीरे उतरने की ख़बर भी है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार को गोपालगंज, बगहा, बेतिया, रक्सौल और मोतिहारी के बाढ़ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को तमाम जरूरी निर्देश दिए। बता दें कि बाढ़ प्रभावित तमाम जिलों में एनडीआरएफ की 27 टीमों के 1110 जवान अपनी 114 नौकाओं, एसडीआरएफ की 16 टीमों के 446 जवान 92 नौकाओं और सेना के 630 जवान 70 नौकाओं के साथ राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के साथ चिकित्सकों का चलंत दस्ता भी प्रभावित इलाकों में लगा हुआ है। राहत शिविर बड़े पैमाने पर बनाए गए हैं और इनमें कुल 3.19 लाख लोगों को भोजन कराया जा रहा है। राहत शिविरों के अतिरिक्त 1112 जगहों पर बाढ़ पीड़ितों के लिए कम्यूनिटी किचेन भी शुरू किया गया है। हालांकि बाढ़ ने अपने पांव जिस कदर फैला लिए हैं, उसे देखते हुए इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।

चलते-चलते एक अच्छी ख़बर। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में बाढ़ का तांडव कम होगा। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के मुताबिक भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से मिले पूर्वानुमान के अनुसार अगले सात दिनों तक उत्तर बिहार के जिलों में बारिश के आसार नहीं हैं। हां, कुछ जगहों पर छिटपुट बारिश जरूर हो सकती है। दक्षिण बिहार के जिलों के बारे में भी यही पूर्वानुमान है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि बाढ़ से जूझ रहे लोग थोड़ी चैन की सांस ले पाएंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार को बहुत जल्द विशेष पैकेज की सौगात!

राजनीति की उठापटक अपनी जगह है और राज्य व देश का हित अपनी जगह। उसे हर हाल में अक्षुण्ण रखना चाहिए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी सोच के कारण महागठबंधन छोड़ने और एनडीए के साथ सरकार बनाने का बड़ा निर्णय लिया था। उनके उस निर्णय का सुखद परिणाम अब सामने आने जा रहा है। जी हां, बिहार को बहुत जल्द केन्द्र से 1.25 लाख करोड़ का विशेष पैकेज मिलने जा रहा है। बता दें कि इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव के समय की थी, लेकिन भाजपा की करारी हार के बाद विशेष पैकेज की बात ठंडे बस्ते में चली गई थी।

गौरतलब है कि नीतीश ने पिछले सप्ताह ही दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें उनके वादे की याद दिलाई थी। दरअसल नीतीश अच्छी तरह जानते हैं कि एनडीए के विरुद्ध जनादेश लेने के बाद फिर उसी के साथ सरकार बनाने के निर्णय को वे तभी सही ठहरा सकते हैं जब बिहारवासियों से किया वादा वे पूरा करें। अपने हाल के निर्णय में उन्होंने राजधर्म और राज्यधर्म को महागठबंधन-धर्म पर तरजीह दी जिसे बिहार को मिलने जा रही इस सौगात से निश्चित रूप से नैतिक बल मिलेगा।

वैसे देखा जाए तो जिस दिन बिहार में जेडीयू-एनडीए की सरकार बनी, उसी दिन से विशेष पैकेज मिलने की उम्मीद बढ़ गई थी। लेकिन ये खुशखबरी इतनी जल्दी मिलेगी इसकी उम्मीद नहीं थी। इन दिनों बाढ़ की विभीषिका झेल रहे बिहार के लिए ये सचमुच राहत की ख़बर है।

चलते-चलते बता दें कि जहां मोदी-नीतीश मिलकर बिहार से किये वादे पर अमल करने जा रहे हैं वहीं जेडीयू एनडीए में शामिल होने की विधिवत घोषणा भी शीघ्र करने जा रही है। यही नहीं, जेडीयू केन्द्र सरकार में भी शामिल होगी और ख़बर यह भी है कि नीतीश एनडीए के संयोजक हो सकते हैं। भारतीय राजनीति के दो शिखरपुरुषों के एक साथ आने से बिहार के विकास का हर अवरुद्ध मार्ग खुलेगा, ऐसी आशा की जानी चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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रमई, अर्जुन, विजय वर्मा समेत 21 नेता जेडीयू से निकाले गए

पूर्व अध्यक्ष शरद यादव के रुख से उपजा जेडीयू का घमासान अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी लाईन से अलग बगावती सुर अलाप रहे शरद के 21 करीबी नेताओं को जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इन नेताओं में पूर्व मंत्री रमई राम, सीतामढ़ी के पूर्व सांसद अर्जुन राय और मधेपुरा के पूर्व विधानपार्षद विजय वर्मा शामिल हैं। गौरतलब है कि ये सारे नेता शरद की तीन दिवसीय संवाद यात्रा में उनके साथ देखे गए थे। इससे पूर्व शरद समर्थक राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव और राज्यसभा सांसद अली अनवर पर पार्टी कार्रवाई कर चुकी है। शरद यादव को भी राज्य सभा में जेडीयू के नेता पद से हटाया जा चुका है। अब पार्टी से उनकी विधिवत विदाई की केवल औपचारिकता ही शेष है।

बहरहाल, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने आज जिन 21 नेताओं को जेडीयू की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया, उनके नाम इस प्रकार हैं: रमई राम (पूर्व मंत्री), अर्जुन राय (पूर्व सांसद, सीतामढ़ी), राजकिशोर सिन्हा (पूर्व विधायक, वैशाली), विजय वर्मा (पूर्व स.वि.प.), धनिकलाल मुखिया (जिलाध्यक्ष, सहरसा), सियाराम यादव (पूर्व जिलाध्यक्ष, मधेपुरा), बिन्देश्वरी सिंह (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, श्रमिक प्रकोष्ठ), इसराईल मंसूरी (राज्य परिषद सदस्य, मुजफ्फरपुर), मिथिलेश कुशवाहा (तकनीकी प्रकोष्ठ), निरंजन राय (जिला परिषद सदस्य, मुजफ्फरपुर), देवकांत राय (दरभंगा), टिन्कू कसेरा (व्यावसायिक प्रकोष्ठ), जयकुमार सिंह (प्रखंड अध्यक्ष, सोनबरसा), धीरेन्द्र यादव (प्रखंड अध्यक्ष, कहरा), उदयचंद्र साहा (व्यावसायिक प्रकोष्ठ), बिरेन्द्र आजाद (प्रखंड अध्यक्ष, बिहारीगंज), सुरेश यादव (प्रखंड अध्यक्ष, सतर कटैया), विजेन्द्र यादव (प्रखंड अध्यक्ष, सौर बाजार), रमण सिंह (किसान प्रकोष्ठ, मधेपुरा), कमल दास (मधेपुरा नगर परिषद) एवं देवेन्द्र साह (जिला परिषद उपाध्यक्ष, सीतामढ़ी)।

कहने की जरूरत नहीं कि जेडीयू के वर्तमान व पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष की तनातनी अब सतह पर आ गई है। दोनों ही नेताओं ने इधर खुलकर एक-दूसरे के विरुद्ध टिप्पणी की है। नीतीश कुमार ने जहां शरद को लेकर कहा कि पार्टी अपना फैसला ले चुकी है, वे कोई भी कदम उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। वहीं, शरद यादव ने नीतीश पर टिप्पणी की कि जेडीयू सिर्फ उनकी पार्टी नहीं है, यह मेरी भी पार्टी है। और तो और, शरद खेमा अब अपने ‘असली’ जेडीयू होने का दावा भी कर रहा है। ऐसी स्थिति में बहुत संभव है कि 19 अगस्त को पटना में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले ही शरद यादव की विदाई की औपचारिकता पूरी कर दी जाए।

 

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क्यों और कैसे मनाएं जन्माष्टमी ?

कल जन्माष्टमी है। यानि विष्णु के समस्त अवतारों में पूर्वावतार कहे जाने श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव। समस्त गुणों का आगर होने के साथ-साथ कृष्ण की सबसे अनोखी बात यह है कि उनके भक्त उन्हें जिस रूप में पूजते हैं वे उनके साथ उसी रूप में हो लेते हैं। एकमात्र वही हैं जिन्हें कोई पुत्र के रूप में, कोई सखा के रूप में, कोई सारथि के रूप में, कोई गुरु के रूप में तो कोई प्रेमी और यहां तक कि पति के रूप में चाहता और पूजता है और वो उस भक्त के प्रेम को उसी रूप में स्वीकार कर लेते हैं। यही कारण है कि भक्तों का जैसा तादात्म्य श्रीकृष्ण के साथ है वैसा किन्हीं अन्य देवता के साथ नहीं।

पौराणिक धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वी को पापियों से मुक्त करने हेतु श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। उनका अवतरण देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा में हुआ और एक मान्यता के मुताबिक यह दिव्य घटना 5 हजार 243 वर्ष पूर्व हुई।

जन्माष्टमी का त्योहार भारत सहित पूरे विश्व में वर्णनातीत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन कहीं रंगों की होली होती है तो कहीं डांडिया का उत्सव, कहीं दही-हांडी फोड़ने की उमंग होती है तो कहीं भगवान कृष्ण की मोहक छवियों की झांकी। मंदिरों की रौनक इस दिन देखते ही बनती है। भगवान कृष्ण को इस दिन विशेष तौर पर सजाए गए झूले पर झुलाया जाता है और साथ ही कृष्ण रासलीलाओँ का आयोजन होता है।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत का पालन करने से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है। बताया जाता है कि इस दिन व्रत रखने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है, लक्ष्मी स्थिर होती है और सारे बिगड़ते काम बन जाते हैं। और हां, याद रखें कि इस दिन आपकी पूजा तभी पूर्ण होगी जब कृष्ण का नाम लेने के साथ ही आप देवकी, वासुदेव, नंद, यशोदा, राधा और लक्ष्मी का नाम भी श्रद्धापूर्वक लें। माना जाता है कि ये सभी कृष्ण के व्यक्तित्व के अनिवार्य अंग हैं और इन सबके बिना न तो उनकी पूजा पूरी होती है और न ही स्वीकार।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

 

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अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस

‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से 12 अगस्त यानि अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। ये संयोग है कि हमारे राष्ट्रीय युवा दिवस की तिथि भी 12 ही है, लेकिन महीना जनवरी है। 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद, जिन्हें विश्व-इतिहास में युवा-शक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी, का जन्मदिवस है। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को राष्ट्र-निर्माण की धुरी माना था और जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 17 दिसंबर 1999 को प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने की घोषणा की थी, तब भी उसका उद्देश्य यही बताना था कि युवाओं के बिना कोई भी राष्ट्र अपने विकास का लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता।

गौरतलब है कि पिछले साल मनाए गए विश्व युवा दिवस का विषय था – “लक्ष्य 2030: गरीबी उन्मूलन और सतत खपत और उत्पादन हासिल करना।” कहने की जरूरत नहीं कि 2030 तक इस लक्ष्य को तभी हासिल किया जा सकता है जब युवा इसके लिए अग्रणी भूमिका निभाएं। ये अत्यंत दुख व आश्चर्य का विषय है कि आज एक ओर हम मंगल तक पहुंच गए हैं, दूसरी ओर आज भी गरीबी और भूख भारत समेत पूरे विश्व की, खासकर तीसरी दुनिया कहे जाने वाले देशों की, सबसे बड़ी समस्या है। एक अर्थ में यह समस्या वैश्विक आतंकवाद से भी बड़ी है। भूख से लड़े और उससे जीते बिना हम आतंकवाद से क्या पड़ पाएंगे? सच तो यह है कि जिस दिन सबके पेट में रोटी बराबर पहुंचने लग जाएगी उस दिन आतंकवाद की समस्या ही मिट जाएगी।

जिस तरह स्वस्थ शरीर में स्वस्थ आत्मा का निवास होता है, उसी तरह स्वस्थ युवाओं में ही स्वस्थ राष्ट्र और विश्व का बीज पनप सकता है। चाहे स्वास्थ्य शरीर का हो, मन और मस्तिष्क का हो, विचार और संस्कार का हो, या फिर विकास के किसी भी क्षेत्र और दुनिया के किसी भी कार्य-व्यापार का हो। भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस सत्य तो भलीभांति जानते हैं। उनका शायद ही कोई भाषण हो, जिसमें वे युवाओं का आह्वान न करते हों और देश के सर्वांगीण विकास के लिए उनकी सहभागिता को अनिवार्य न बताते हों।

‘मधेपुरा अबतक’ सभी युवाओं का आह्वान करता है और कहना चाहता है कि वे जहां हैं, जिस क्षेत्र में हैं, वहां से इस देश के निमित्त अपना योगदान दे सकते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे खेतों में काम कर रहे हैं या विज्ञान की प्रयोगशाला में बैठे हैं, देश की सीमा की रखवाली कर रहे हैं या खेल के मैदान में पसीना बहा रहा रहे हैं, कोई साहित्य, चित्र या प्रतिमा गढ़ रहे हैं या आने वाले चुनावों में खड़े होने की तैयारी कर रहे हैं। वे जहां हैं, वहां अपना सर्वोत्तम दें।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप’

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जेडीयू से विदाई की कगार पर शरद यादव

नीतीश कुमार के महागठबंधन छोड़ने और एनडीए के साथ सरकार बनाने के फैसले के खिलाफ शरद यादव खुलकर सामने आ गए हैं। जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष बिहार में महागठबंधन टूटने से नाखुश तो पहले से थे, लेकिन वक्त की नजाकत देख उन्होंने चुप्पी साध रखी थी। पर अब उनकी चुप्पी टूट चुकी है और ‘जो’ कुछ उनके भीतर चल रहा था, ‘वो’ बाहर आ गया है।

गौरतलब है कि शरद यादव इन दिनों तीन दिनों की बिहार यात्रा पर हैं। कल दौरे के पहले दिन पटना पहुंचने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने नीतीश कुमार पर बिहार की जनता को ‘धोखा’ देने का आरोप लगाया और कहा कि वे यह जानने आए हैं कि जनता की इस पर क्या राय है। साथ ही उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे अब भी महागठबंधन के साथ हैं। शरद यादव के इस रुख के बाद जेडीयू द्वारा उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तयप्राय हो गई है।

बता दें कि अपनी तीन दिनों की यात्रा के दौरान शरद यादव बिहार के सात जिलों – वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा और सहरसा – में दो दर्जन से ज्यादा जगहों पर जाकर जनता से ‘संवाद’ करेंगे। उनकी इस यात्रा को नीतीश कुमार व जेडीयू से उनके औपचारिक अलगाव के तौर पर देखा जा रहा है। कल हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए जुटे लोगों में ज्यादातर आरजेडी के थे और हद तो तब हो गई जब उनके जिन्दाबाद के साथ नीतीश मुर्दाबाद के नारे भी लगे। स्वाभाविक तौर पर जेडीयू ने उनके इस कार्यक्रम से अपने तमाम कार्यकर्ताओं को दूर रहने का कड़ा निर्देश दिया है।

इस बीच बिहार जेडीयू के अध्यक्ष व सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि शरद यादव की ये गतिविधियां जारी रहीं तो पार्टी निकट भविष्य में कोई भी निर्णय ले सकती है। बिहार जेडीयू ने उन पर और उनकी यात्रा में साथ दिख रहे रमई राम पर कार्रवाई की अनुशंसा भी कर दी है। इसका मतलब साफ है कि नीतीश कुमार किसी बड़े निर्णय पर पहुंच चुके हैं। इसकी झलक तभी देखने को मिल गई थी जब राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव को गुजरात के राज्यसभा चुनाव में नीतीश के निर्णय के खिलाफ जाकर पोलिंग एजेंट बहाल करने और वहां के एकमात्र जेडीयू विधायक का वोट कांग्रेस उम्मीदवार को जाने के कारण निलंबित कर दिया गया था। अरुण श्रीवास्तव शरद के कितने करीबी हैं, यह बात किसी से छिपी नहीं है।

गौर करने की बात की है कि हाल के दिनों में शरद यादव ने कई बार पार्टी लाईन से अलग स्टैंड लिया है। प्रथम दृष्टया किसी मुद्दे पर अलग राय होना गलत भी नहीं। लेकिन आश्चर्य तब होता है जब तेजस्वी के मुद्दे पर महागठबंधन छोड़ने में उन्हें जनता के साथ धोखा दिखता है लेकिन भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति को ताक पर रख देने में कोई आपत्ति नहीं है। लालू और उनके परिवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने चुप्पी साध रखी है। वो यह भी नहीं देख पा रहे कि पार्टी का एक भी विधायक उनके स्टैंड के साथ नहीं है।

एक बात और, 17 अगस्त को उन्होंने दिल्ली में विपक्षी दलों के सम्मेलन की योजना भी बना रखी है। अगर उन्हें विपक्षी दलों के समर्थन का इतना ही भरोसा है तो वे राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा क्यों नहीं दे देते? डेढ़ दर्जन पार्टियों में से कोई उन्हें चुनकर दुबारा भेज दे सकती है! पर शरद जानते हैं कि ऐसा होना कितना मुश्किल है। ऐसे में कहना गलत न होगा कि उन्होंने अपनी ‘विदाई की पटकथा’ स्वयं लिखी, ताकि पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दे और उनकी राज्यसभा की सदस्यता बची रहे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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‘जनादेश अपमान यात्रा’ पर निकले तेजस्वी

9 अगस्त से जनादेश अपमान यात्रा शुरू करने के लिए लालू के छोटे बेटे व पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव घर से निकल गए हैं। उनकी मां व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने आज आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के समक्ष तिलक लगाकर उन्हें विदा किया। तेजस्वी के साथ उनके बड़े भाई व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव भी गए हैं।

यात्रा पर निकलने से पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला और कहा कि कल तक वे संघमुक्त भारत की बात करते थे और आज आरएसएस युक्त बिहार की बात कर रहे हैं। भाजपा नेता व मौजूदा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के बारे में उन्होंने कहा कि उन पर कई मुकदमा है। ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’ रैली में वे तर्क के साथ अपनी बात रखेंगे।

चम्पारण जाने के क्रम में जैसे-जैसे तेजस्वी का कारवां आगे बढ़ता गया, पार्टी समर्थकों ने हर जगह उनका स्वागत किया। यात्रा के हर पड़ाव पर तेजस्वी अपना अनुभव तस्वीरों के साथ ट्वीट करते रहे। अपने ट्वीट में उन्होंने जनता में आक्रोश होने की बात कही और नीतीश कुमार को चुनाव कराने की चुनौती दी।

बता दें कि तेजस्वी की इस यात्रा का उद्देश्य जनादेश के तथाकथित अपमान के बारे में जनता को बताना और आरजेडी की 27 अगस्त को प्रस्वावित रैली के लिए पटना बुलाना है। पर तेजस्वी से एक बात पूछे बिना नहीं रहा जाता कि आज इन सब बातों में वे जितनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं, उसका थोड़ा अंश उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों पर ‘बिन्दुवार स्पष्टीकरण’ देने में क्यों नहीं खर्च किया? अगर वो ऐसा करते तो महागठबंधन टूटने की नौबत न आती और वो खुद न सही लेकिन उनकी पार्टी सरकार में बनी रहती।

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पति-पत्नी ने शुरू किया था भाई-बहन का त्योहार

यह संसार रिश्तों से बना है और हर रिश्ते की अपनी अहमियत होती है, लेकिन भाई-बहन का रिश्ता अपने आप में अद्भुत है। यही एक रिश्ता है, जिसकी कोई एक परिभाषा गढ़ पाना मुश्किल है। सोच कर देखिए, अगर आपकी बहन आपसे बड़ी है तो उसमें मां की झलक पाएंगे आप, छोटी है तो बेटी लगेगी वह। दोस्त तो वो हर हाल में है ही। आप जो सुख-दुख कई बार माता-पिता से नहीं बांट पाते वो अपनी बहन से बांट लेते हैं। एक बहन ही है जो आपकी कमियों के लिए आपको डांटती नहीं और अपना ऐसा कोई सुख नहीं जो आपसे बांटती नहीं। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के इसी अटूट प्यार की निशानी है, जिसे सदियों से मनाया जाता रहा है। भाई-बहन के विश्वास को बनाए रखने वाला यह त्योहार श्रावण मास में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। लेकिन इसकी शुरुआत कब और क्यों हुई, इसके पीछे कई दिलचस्प कहानियां हैं। चलिए जानने की कोशिश करते हैं।

आपको जानकर हैरत होगी कि भाई-बहन के इस त्योहार की शुरुआत पति-पत्नी ने की थी। पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे। देवराज इंद्र की पत्नी शुचि ने देवताओं की हो रही हार से घबरा कर उनकी विजय के लिए तप करना शुरू कर दिया। तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने श्रावण मास में पूर्णिमा के दिन अपने पति इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इस रक्षासूत्र से देवताओं की शक्ति बढ़ गई और उन्होंने दानवों पर जीत प्राप्त की। उसी दिन से यह परंपरा शुरू हुई कि आप जिसकी भी रक्षा व उन्नति की इच्छा रखते हैं, उसे रक्षासूत्र यानि राखी बांध सकते हैं, चाहे वह किसी भी रिश्ते में क्यों न हो।

वैसे हमारे इतिहास, खासकर पौराणिक इतिहास में ऐसी कई कहानियां दर्ज हैं जो रक्षाबंधन या राखी के महत्व को दर्शाती हैं। इनमें एक कहानी महाभारत काल से भी जुड़ी है। इस कहानी के अनुसार श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध अपने चक्र से किया था। शिशुपाल का सिर काटने के बाद जब चक्र वापस लौटा तब उसे पुन: धारण करने के क्रम में कृष्ण की उंगली थोड़ी कट गई। उंगली से रक्त बहता देख पांडवों की पत्नी द्रौपदी से रहा नहीं गया और उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर कृष्ण की उंगली में बांध दिया। इस पर भावुक होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वचन दिया कि वे आजीवन उनकी साड़ी की लाज रखेंगे। आगे चलकर दु:शासन ने जब द्रौपदी का चीरहरण करना चाहा तो उन्होंने पूरी तत्परता से अपना कहा पूरा किया।

रक्षाबंधन से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी का ताल्लुक हमारे मध्यकालीन इतिहास से है। यह कहानी रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं से संबंधित है और उस दौर को दर्शाती है जब राजपूत शासकों और मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था। रानी कर्णावती चित्तौड़ के राजा की विधवा थीं। राजा की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने उनके राज्य पर आक्रमण कर दिया। अपने राज्य व प्रजा की रक्षा की खातिर चिन्तित रानी ने हुमायूं से मदद मांगी। उन्होंने हुमायूं को एक राखी भेजी और उनसे रक्षा की प्रार्थना की। हुमायूं ने उस राखी की मर्यादा रखी और रानी को बहन का दर्जा देते हुए उनके राज्य को सुरक्षित कर अपना दायित्व पूरा किया।

रक्षाबंधन से जुड़ी बाकी कहानियां फिर कभी। फिलहाल हमें इजाजत दें और हमारी मंगलकामनाएं स्वीकार करें। शुभ रक्षाबंधन।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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तो तेजस्वी को मिल गया शरद का ‘आशीर्वाद’!

राजनीति सचमुच अनिश्चितता का खेल है। इतना अनिश्चित कि यहां प्रतिबद्धता का पता पलक झपकते बदल जाता है और आप हक्के-बक्के रहने के अलावा कुछ नहीं कर पाते। कौन जानता था कि महज 20 महीनों में ऐसी परिस्थिति आएगी कि नीतीश को महागठबंधन छोड़ना पड़ेगा और विधानसभा में उनके साथ बैठना होगा जिनके खिलाफ उन्होंने वोट मांगा था। और कौन जानता था कि तब नीतीश के निर्णय की ‘अध्यक्षता’ कर रहे शरद यादव आज उन्हीं के खिलाफ शुरू हो रही तेजस्वी की यात्रा में शामिल होने की तैयारी कर रहे होंगे।

जी हां, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शरद यादव 8 अगस्त को पटना आएंगे और इस बात के पूरे आसार हैं कि वे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की 9 अगस्त से मोतिहारी से माधोपुर तक होने वाली यात्रा में उनका साथ देंगे। ख़बर है कि वे इस दौरान बिहार में भाजपाविरोधी दलों के साथ मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे। बताया जाता है कि नीतीश से नाराज चल रहे शरद की आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से बातचीत अन्तिम रूप ले चुकी है और तेजस्वी उनसे लगातार संपर्क बना कर चल रहे हैं।

बताया जा रहा है कि शरद यादव ‘तकनीकी’ कारणों से आरजेडी की सदस्यता ग्रहण नहीं करेंगे, लेकिन भाजपाविरोधी लड़ाई में लालू के साथ खड़े नज़र आएंगे। आरजेडी ज्वाइन करने पर उनकी राज्यसभा की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। हां, जेडीयू अगर उन्हें असंबद्ध घोषित कर दे तो उनकी यह ‘बाधा’ दूर हो जाएगी, जैसे आरजेडी द्वारा असंबद्ध मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव की सदस्यता बची हुई है।

बहरहाल, गौरतलब है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव नीतीश के विरोध व लगे हाथ ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’ रैली की तैयारी के सिलसिले में 8 अगस्त को पटना से मोतिहारी रवाना हो रहे हैं, जहां से 9 अगस्त को उनकी यात्रा विधिवत शुरू होगी। इसके लिए आरजेडी ने भारत छोड़ो आन्दोलन की 75वीं वर्षगांठ को चुना है। इस दिन भाजपाविरोधी अन्य दलों के प्रमुख नेता भी मौजूद रहेंगे।

 

 

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