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बिहार में बनी विश्व रिकॉर्ड से 15 गुना बड़ी मानव-श्रृंखला

बिहार ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। यह तीसरी बार है जब बिहार में मानव-श्रृंखला का आयोजन किया गया। पिछली बार की तरह इस बार भी बिहार ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। जल-जीवन-हरियाली और नशामुक्ति के समर्थन एवं बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरोध में इस बार 5 करोड़ 16 लाख 71 हजार 389 बिहारवासियों ने 18,034 किलोमीटर लंबी मानव-श्रृंखला बनाई। इस श्रृंखला की भव्यता और विशालता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बिहार की मानव-श्रृंखला 1155 किलोमीटर के विश्व रिकॉर्ड से 15 गुना बड़ी है। इस तरह बिहार ने अपना ही रिकॉर्ड और बेहतर करते हुए विश्व रिकॉर्ड को तीसरी बार तोड़ा।
बता दें कि इस ऐतिहासिक मानव-श्रृंखला का शुभारंभ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान से गुब्बारा उड़ाकर किया। मानव-श्रृंखला के लिए हुए इस मुख्य आयोजन में मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारुण रशीद सहित कई वरिष्ठ मंत्री, सांसद एवं आला अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर जलपुरुष एवं मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित श्री राजेन्द्र सिंह एवं यूएनआईपी के इंडिया कंट्री हेड अतुल बगई गांधी मैदान में विशेष तौर पर मौजूद रहे।
मानव-श्रृंखला को लेकर पूरे बिहार में उत्सव-सा माहौल रहा। हालांकि इसके लिए दिन के 11.30 से 12.00 बजे का समय निर्धारित था लेकिन उत्साह का आलम यह था कि लोग 10 बजे से ही कतार में लगने के लिए घरों से निकलने लगे। यहां तक कि बिहार के विभिन्न जेलो के 43445 कैदी भी जेलकर्मियों के साथ इस श्रृंखला में शामिल हुए। मानव-श्रृंखला की फोटोग्राफी के लिए 07 हैलीकॉप्टर और 100 से अधिक ड्रोन लगाए गए थे। इस श्रृंखला पर देश और दुनिया की नजरें टिकी थीं। इसके साथ ही दो प्रतिष्ठित रिकॉर्ड बुक – इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स – की टीमें भी इसे परखने के लिए बिहार में जमी थीं।
मानव-श्रृंखला के इस विराट आयोजन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहारवासियों को उनके अभूतपूर्व समर्थन के लिए “हृदय से धन्यवाद” देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन एवं अन्य सामाजिक सुधार के अभियानों के प्रति जागरुकता फैलाने में यह मानव-श्रृंखला मील का पत्थर साबित होगी। बिहार प्रदेश जदयू के अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिक मानव-श्रृंखला बनाकर बिहार ने पूरे विश्व को संदेश दिया है। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) आरसीपी सिंह ने कहा कि इस अभूतपूर्व मानव-श्रृंखला का आयोजन कर बिहारवासियों ने राज्य को नया गौरव दिया है।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri along with senior citizens of Madhepura taking part in Jal-Jeevan-Hariyali Manav-Shrinkhala at Bhupendra Chowk, Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri along with senior citizens of Madhepura taking part in Jal-Jeevan-Hariyali Manav-Shrinkhala at Bhupendra Chowk, Madhepura.

वहीं मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने मुख्यमंत्री को उनके जल-जीवन-हरियाली यात्रा के दौरान शुभकामना व्यक्त करते हुए यही कहा था कि आपका यह कार्यक्रम  एक दिन “वैश्विक क्रांति” का मार्ग प्रशस्त करेगा….. जैसा कि बिहार वासियों की  बढ़ती हुई सहभागिता से स्पष्ट नजर आने लगा है।‘मधेपुरा अबतक’ भी इस मौके पर बिहारवासियों को हार्दिक बधाई और साधुवाद देता है।

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पुलवामा के सीआरपीएफ कैंप में शहीदों के आंगन की मिट्टी सदा महका करेगी

बेंगलुरु का एक शख्स है उमेश गोपीनाथ जाधव। उमेश जाधव एक संगीत शिक्षक है। बच्चों को संगीत सिखाने वाले गोपीनाथ जाधव अब पुलवामा के सीआरपीएफ कैंप में शहीदों के आंगन से मिट्टी ला-लाकर भारत का मानचित्र बनाएंगे। सभी शहीदों के परिवार वालों से मिलेंगे भी।

बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सभी जवानों के घर-आंगन की मिट्टी वहीं अपनी खुशबू बिखेरेगी जहां विगत 14 फरवरी 2019 को उनकी शहादत हुई थी। शहीदों के आंगन की मिट्टी इकट्ठा करने में लगे गोपीनाथ जाधव का 9 अप्रैल 2019 से ही सफर शुरू हो चुका है। वे 29 राज्यों सहित सात केंद्र शासित प्रदेशों में भी जाएंगे और देश की मिट्टी की अहमियत दुनिया के लोगों तक पहुंचाएंगे।

यह भी बता दें कि गोपीनाथ जाधव बेंगलुरु से केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र होते हुए भोपाल से आगे निकलते रहे और चंद रोज कबल गोपीनाथ ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के गाँव हरपुर, टोला- बेलडीहा शहीद लाल पंकज त्रिपाठी के आंगन की मिट्टी एकत्र की। अब तक 23 राज्यों की 27 शहीदों के आंगन की मिट्टी एकत्र कर चुके हैं गोपीनाथ। शेष 13 शहीदों के आंगन की मिट्टी लाकर वह संगीत शिक्षक उमेश गोपीनाथ जाधव भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक “मानचित्र” बनाकर पुलवामा के सीआरपीएफ कैंप को शहीदों की शहादत भरे सुगंध से भर देगा।

Pulwama Martyrs.
Pulwama Martyrs.

चलते-चलते बता दें कि पुलवामा हमले के बाद वहां सीआरपीएफ कैंप में जाकर उमेश ने कसम खाई थी कि इन चालीसो शहीदों के आंगन की मिट्टी लाने और उनके परिजनों से मिलने उनके घर पर जाएंगे….. पुलवामा में उनकी याद में स्मारक बनाएंगे। यह भी कि लगभग 50 हजार  किलोमीटर की यात्रा पूरी करने हेतु गोपीनाथ जाधव ने अलग-अलग गाड़ियों के पुर्जों को मिलाकर अपनी एक गाड़ी तैयार की और उस गाड़ी पर तिरंगा, सेना की वर्दी तथा देशभक्ति के मैसेज अंकित कराए।

पुनश्च उन्हीं दिनों अति संवेदनशील समाजसेवी- साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर यह निवेदन किया था कि उन चालीसों पुलवामा शहीदों के परिजनों के बैंक अकाउंट को पब्लिक किया जाए ताकि देश के संवेदनशील करोड़ों लोग एक-एक रुपए देंगे तो उन्हें बच्चों की पढ़ाई आदि के लिए हाथ नहीं फैलाना पड़े- के जवाब में गृह मंत्री ने यही लिखा- “आपकी भावना का कद्र करते हुए बैठक में इस पर गहन चिंतन-मंथन किया गया। बैंक अकाउंट को पब्लिक करने के खतरे को ध्यान में रखते हुए समिति आपको आश्वस्त करती है कि शहीदों के परिजनों को सरकार इतनी राशि दी है कि उन्हें अब हाथ फैलाने की नौबत नहीं आएगी।”

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16,351 किलोमीटर लंबी होगी मानव-श्रृंखला

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ सभाकक्ष में जल-जीवन-हरियाली अभियान, शराबबंदी एवं नशामुक्ति के पक्ष में तथा बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ 19 जनवरी 2020 को पूर्वाह्न 11.30 बजे से मध्याह्न 12 बजे तक बनने वाली मानव-श्रृंखला के निर्माण की तैयारियों की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों में प्रमंडलीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उपमहानिरीक्षक, जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक भी जुड़े हुए थे।
इस मौके पर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने मानव-श्रृंखला की तैयारियों के संबंध में एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। 19 जनवरी को कुल 16,351 किलोमीटर की अनुमानित लंबाई की मानव-श्रृंखला बनेगी, जिसमें 5,052 किलोमीटर मुख्य मार्ग की लंबाई होगी और 11,299 किलोमीटर उपमार्ग की लंबाई होगी। मानव-श्रृंखला में अनुमानित प्रतिभागियों की संख्या लगभग दो हजार व्यक्ति प्रति किलोमीटर की दर से 3 करोड़ 27 लाख संख्या होगी तथा प्रत्येक वार्ड में सौ लोगों के हिसाब से एक करोड़ लोगों की संख्या होगी यानि कुल 4 करोड़ 27 लाख लोगों के मानव-श्रृंखला में शामिल होने की संभावना है।
बता दें कि पटना में गांधी मैदान से मानव-श्रृंखला के प्रस्थान बिन्दु की तैयारी की गई है। गांधी मैदान से चारों दिशाओं में मानव-श्रृंखला का प्रस्थान होगा, जो एक-दूसरे से जुड़ते हुए राज्य के सभी जिले आपस में श्रृंखलाबद्ध होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गांधी मैदान में ही मानव-श्रृंखला का हिस्सा बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि यह मानव-श्रृंखला लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरुकता को प्रदर्शित करेगी। जलवायु में हो रहे परिवर्तन के प्रति लोग अपनी सजगता दिखाने के लिए एकजुट होकर मानव-श्रृंखला बना रहे हैं। गरीब राज्य और इतनी घनी आबादी होने के बावजूद यहां मानव-श्रृंखला बनाना बड़ी बात है। यह मानव-श्रृंखला पर्यावरण के लिहाज से बहुत बड़ा रिकॉर्ड साबित होगा।
बैठक में शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय सहित तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे।

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मानवता को जीवित रखने के लिए नीतीश के जल-जीवन-हरियाली जैसे अभियान से संपूर्ण विश्व को जोड़ना आवश्यक- डॉ.मधेपुरी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस “जल-जीवन-हरियाली” अभियान को लेकर 19 जनवरी 2020 को आयोजित होने वाली ऐतिहासिक मानव श्रृंखला की सफलता के लिए तैयारी बैठकें जोर पकड़ती जा रही हैं। पंचायत से लेकर प्रखंड और जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक लंबी मानव श्रृंखला हेतु पूर्वाभ्यास की तैयारियां चतुर्दिक देखी जा रही है। कोसी के तीनों जिलों- मधेपुरा… सहरसा… सुपौल… के अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने पांचवी कक्षा से ऊपर की छात्र-छात्राओं से लेकर शिक्षक-शिक्षिकाओं, कलाजत्था, साक्षरता कर्मियों एवं सेविकाओं- सहायिकाओं सहित सभी कोटि के पंचायत प्रतिनिधियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को ‘जल-जीवन-हरियाली’ को एक मिशन के रूप में लेने का आह्वान किया है। मानव श्रृंखला का उद्देश्य लोगों को ‘जल-जीवन-हरियाली’ सरीखे अभियान के प्रति जागरूक करना है।

बता दें कि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा स्कूली बच्चों एवं शिक्षक व शिक्षिकाओं के बीच में जा-जाकर यह कहते सुना जा रहा है कि मानव जाति को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री के इस ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान से समाज को जोड़ना है, संपूर्ण विश्व को जोड़ना है। डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने स्कूली बच्चों एवं बुजुर्गों से कहा कि आगामी 19 जनवरी को 11:30 बजे से 12:00 बजे तक मानव श्रृंखला के लिए समय का निर्धारण किया गया है। डॉ.मधेपुरी ने ग्रामीण लोगों से अपील की कि मानव श्रृंखला हेतु निर्धारित किए गए मार्ग पर समय से पहुंचने हेतु घर से एक घंटा पूर्व ही प्रस्थान करें।

चलते-चलते यह भी बता दें कि स्कूलों में जाकर डॉ.मधेपुरी बच्चों के बीच यही कहते हुए सुने जाते रहे कि जल है तो जीवन है। और जीवन के चारों और हरियाली ही हरियाली होगी तो चतुर्दिक खुशहाली होगी….. यानि खुशहाली बरकरार रखने के लिए जल को बचाना है और हरियाली को निरंतर बढ़ाते रहना है।

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2020 की उम्मीदें : खुद से चलेंगी कारें

जानिए कि 5 साल पूर्व टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन ने कहा था कि टोटल एक्सेस ब्रांड एक ऐसी कार पेश करेगी जो बिना ड्राइवर के खुद ही चलेगी… जो अब सच होने जा रहा है। सच में, वर्ष 2020 में कई प्रकार की तकनीकी बदलाव धरती पर लोगों के जीवन को आसान बना देगा। सड़कों पर जो खुद से चलने वाली कार नजर आएंगी वहीं आम लोगों को 5G तकनीक से इंटरनेट की तेज गति मिलेगी।

बता दें कि जहाँ खुद से चलने वाली कार की कीमत कितनी होगी उसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है वहीं टेस्ला भी वर्ष 2020 में दुनिया के कई चुनिंदा शहरों में स्वचालित रोबोट टैक्सी लॉन्च करेगी। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क का कहना है कि 1 वर्ष बाद सड़कों पर 10 लाख से ज्यादा रोबोट टैक्सियों दिखाई देंगी। जून 2020 तक टेस्ला का ऑटोनॉमस सिस्टम इतना विकसित हो जाएगा कि ड्राइवरों को सड़क पर माथापच्ची करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

चलते -चलते यह भी बता दें कि इस वर्ष दुनिया के कई देशों में 5G नेटवर्क का दायरा बहुत बढ़ेगा। इसमें 3 घंटे की एचडी फिल्म कुछ सेकंड में डाउनलोड हो सकेगी। एक ओर जहाँ भारतीय मोबाइल ऑपरेटर 5G को अपनाने की तैयारी में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर प्रमुख मोबाइल कंपनियां 5G हैंडसेट लॉन्च करने में जुटी है।

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शादी, बच्चे या फिर रिटायरमेंट के बाद भी महिलाओं में यदि जुनून हो तो अवसर मौजूद होते हैं

जरा सोचो भारत की बेटियों ! महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनके प्रति पूर्वाग्रस्त होकर उन्हें कमतर आंकना है। अगर आपमें जुनून हो तो कोई भी आपको अपने सपने पूरे करने से नहीं रोक सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण है- आईसीसी मैच के रेफरी-पैनल में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर जीएस लक्ष्मी।

बता दें कि आंध्र प्रदेश में जन्मी जीएस लक्ष्मी (गांडिकोटा सर्व लक्ष्मी) लाइमलाइट में तब आई जब वह आईसीसी की पुरुष वनडे मैच की पहली महिला रैफरी बनी। यूँ तो आंध्र महिला, बिहार महिला….. रेल महिला समेत कई टूर्नामेंट खेली है। वह तेज गेंदबाज और बल्लेबाज के रूप में खेलती रही है। वर्ष 1999 में भारतीय टीम के इंग्लैंड दौरे के लिए चयनित भी हुई थी लक्ष्मी, परंतु देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का लक्ष्मी का ख्वाब पूरा नहीं हो सका था।

यह भी जानिए कि 2004 में अपनी 12 वर्ष की बेटी प्रणाती श्रावणी की परवरिश करते हुए और अपनी फिटनेस के साथ खेलते हुए क्रिकेट से रिटायर होने के बाद लक्ष्मी ने क्रिकेट में कोचिंग देना शुरू कर दिया। इस दौरान 4 साल बाद यानी 2008 में बीसीसीआई ने घरेलू महिला क्रिकेट में महिला रेफरी को मैच में उतारना शुरू किया तो लक्ष्मी बतौर रेफरी शामिल होने लगी। 12 वर्षों से रैफरी की भूमिका निभा रही 51 वर्षीय लक्ष्मी के लिए आगे की राह तब खुली जब बीसीसीआई ने महिलाओं को क्रिकेट अधिकारी के रूप में जोड़ने के लिए संपूर्ण भारत से मात्र 5 महिलाओं को चुना जिसमें जीएस लक्ष्मी पहली भारतीय महिला थी। कुछ समय पूर्व आईसीसी मैच रेफरी के अंतरराष्ट्रीय पैनल में शामिल होने पर लक्ष्मी चर्चा में आई। वही लक्ष्मी शारजाह के अबूधाबी के जायद स्टेडियम में हांगकांग और आयरलैंड के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में रेफरी की भूमिका निभाई। जिसे देश के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेल पाने का अफसोस अब तक सलाता रहा था। लक्ष्मी कहती है कि क्रिकेट की बदौलत ही उन्हें कॉलेज में एडमिशन मिल पाया था। वह भारत की बेटियों को यही संदेश देना चाहती है- “दुनिया में कोशिश का कोई विकल्प नहीं। दो बच्चे की मां मैरी कॉम आज एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत लेती है और ओलंपिक में जीतने का हौसला रखती है। जुनून हो तो महिलाएं कुछ भी कर सकती है चांद पर घर बसा सकती है। पर्वतारोही संतोष यादव की तरह एवरेस्ट पर तिरंगा लहरा सकती है।”

 

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यूपीएससी में हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं की शानदार वापसी

देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली यूपीएससी की परीक्षा में पिछले साल हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं ने शानदार वापसी की है। पिछले तीस साल में पहली बार आधे से अधिक परीक्षार्थी इन भाषाओं से हैं। जी हाँ, यह बात संघ लोक सेवा आयोग की ओर से जारी सालाना आंकड़ों से सामने आई है। इसे इस परीक्षा में हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं की वापसी का ट्रेंड माना जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में छात्रों के बीच न केवल हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं को माध्यम के रूप में रखने का चलन बढ़ा है बल्कि इन भाषाओं को छात्र वैकल्पिक विषय के रूप में भी रख रहे हैं और अच्छी सफलता हासिल कर रहे हैं। पिछले साल सिविल सेवा परीक्षा में सफल हुए 812 प्रतियोगियों में 485 ने हिन्दी या क्षेत्रीय भाषा के माध्यम से सफलता पाई। यह कुल प्रतियोगियों का लगभग 60 प्रतिशत है। 2017 में 1056 में 533 प्रतियोगियों ने हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं में सफलता पाई थी।
बता दें कि चार साल पहले यूपीएसीसी की तरफ से संचालित सिविल सर्विस परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा में सी-सैट पेपर को लेकर छात्रों का उग्र आंदोलन हुआ था। इसमें आरोप लगा था कि हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं के छात्रों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। परिणाम में इस आरोप के संकेत मिलते थे। क्षेत्रीय और हिंदीभाषी छात्र इस पेपर को हटाने की मांग पर दो साल तक आंदोलन करते रहे। संसद तक में यह मामला जोरदार तरीके से उठा था। सरकार लंबे समय तक इस मुद्दे पर उलझन की स्थिति में रही। आखिरकार छात्रों की मांगों के सामने सरकार को झुकना पड़ा। उसके बाद से ही हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं से परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई और परिणाम का नया ट्रेंड शुरू हुआ।

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22-23 जनवरी 2020 को राजगीर में जदयू के 400 मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण

22-23 जनवरी 2020 को राजगीर में दल के 400 मास्टर ट्रेनरों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन होने जा रहा है, जिसका उद्घाटन जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे। राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता इस दौरान उपस्थित रहेंगे। इस शिविर में सभी क्षेत्रीय संगठन प्रभारी, जिला संगठन प्रभारी, जिलाध्यक्ष, सभी प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्ष एवं सभी विधानसभा प्रभारी भाग लेंगे।
बता दें कि 2020 चुनाव को ध्यान में रखते हुए जदयू ने अपनी सांगठनिक गतिविधियां काफी तेज कर दी हैं। बिहार के सभी बूथों पर बूथ अध्यक्ष एवं बूथ सचिव के मनोनयन को लेकर चले सफल अभियान के बाद पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार 15 दिसंबर 2019 से सभी विधानसभाओं में नवमनोनीत बूथ अध्यक्षों एवं बूथ सचिवों के सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है और सौ से ज्यादा विधानसभाओं में सम्मेलन सम्पन्न हो चुके हैं। सभी विधानसभाओं में हो रहे इस महत्वपूर्ण सांगठनिक सम्मेलन में कड़ाके की ठंड के बावजूद बूथ अध्यक्षों एवं सचिवों की लगभग शत प्रतिशत उपस्थिति देखी जा रही है। इन सम्मेलनों में क्षेत्रीय संगठन प्रभारी, जिला संगठन प्रभारी, जिलाध्यक्ष तथा प्रदेश व जिला द्वारा नामित विधानसभा प्रभारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहते हैं। स्वयं राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह भी कई जिलों के विधानसभा सम्मेलन में सम्मिलित हो चुके हैं।
जदयू सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सभी विधानसभाओं में सम्मेलन के बाद दल के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता 19 जनवरी 2020 को शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाहबंदी के साथ-साथ जल-जीवन-हरियाली अभियान के पक्ष में बनने वाली मानव-श्रृंखला को अभूतपूर्व सफलता दिलाने हेतु जुट जाएंगे।

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जदयू मीडिया सेल ने पार्टी को दिया नया आयाम: आरसीपी सिंह

पटना स्थित जदयू मुख्यालय में मंगलवार, 24 दिसंबर को जदयू मीडिया सेल प्रदेश कार्यसमिति, जिला संयोजकों एवं विधानसभा प्रभारियों की संयुक्त बैठक हुई जिसके उद्घाटनकर्ता एवं मुख्य अतिथि जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) एवं राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह थे। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, विधानपार्षद ललन सर्राफ, झारखंड प्रभारी अरुण सिंह, प्रदेश महासचिव अनिल कुमार, चंदन कुमार सिंह, प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन, अंजुम आरा, प्रदेश सचिव प्रभात रंजन झा एवं राज्य कार्यकारिणी के सदस्य धनंजय शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे।
आरसीपी सिंह ने अपने संबोधन के क्रम में जदयू मीडिया सेल के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपनी स्थापना के दो वर्ष के भीतर जदयू मीडिया सेल ने अपने कार्यों से ये साबित करके दिखाया है कि जदयू पॉलिटिक्स विथ डिफरेन्स करती है। उन्होंने कहा कि मीडिया सेल ने न केवल पार्टी के कार्यक्रमों बल्कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अब मीडिया सेल के सामने 2020 की चुनौती है और उन्हें पूरा विश्वास है कि मीडिया सेल पार्टी की कसौटी पर खरा उतरेगा।

MP(RS) RCP Singh, MLC Lallan Sarraf, JDU Media Cell President Dr.Amardeep and other senior leaders of JDU being garlanded.
MP(RS) RCP Singh, MLC Lallan Sarraf, JDU Media Cell President Dr.Amardeep and other senior leaders of JDU being garlanded.

आरसीपी सिंह ने कहा कि श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने विकास के कई आयामों को देखा है। 2020 की लड़ाई 15 सलाम बनाम 15 साल की है। ‘भय’ और ‘भरोसा’ के इस फर्क को दिखाने का दायित्व मीडिया सेल के ऊपर है। उन्होंने कहा कि विरोधियों के दुष्प्रचार और अफवाह का जवाब मीडिया सेल बिहार में न्याय के साथ विकास को संभव करने वाले अपने नेता के कार्यों को बताकर और पूरी मजबूती से दे।
जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने जदयू मीडिया सेल की दो साल की यात्रा के विभिन्न पड़ावों को रेखांकित किया और सेल की उपलब्धियों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेतृत्व ने दो साल पहले उन्हें मीडिया सेल का जो पौधा सौंपा, उसमें आज ‘जल’ भी है, ‘जीवन’ भी है और ‘हरियाली’ भी। उन्होंने कहा कि पार्टी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में मीडिया सेल कोई कसर नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि 2020 में फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बने इसके लिए मीडिया सेल ने बूथ स्तर तक जाकर अपनी रणनीति बना ली है।

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नागरिकता कानून के खिलाफ बिहार बंद, नागरिक ही रहे परेशान

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ गुरुवार को बिहार सहित देश भर में प्रदर्शन हुए। वामदलों ने इस दिन बिहार बंद का आह्वान किया था जिसका कांग्रेस, रालोसपा, हम, जाप और वीआईपी ने भी समर्थन किया। इन दलों के कार्यकर्ताओं ने बंद के दौरान बिहार के कई जिलों में हंगामा और प्रदर्शन किया। कई जगह ट्रेनें रोकी गईं। बसें नहीं चलीं। सड़कें भी जाम रहीं। इससे आमलोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुछ जगहों पर मारपीट, तोड़फोड़, पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं भी देखने को मिलीं।
पटना, आरा, बक्सर, जहानाबाद, वैशाली, मुजफ्फरपुर, गया, कैमूर, सीतामढ़ी आदि जिले बंद से विशेष रूप से प्रभावित रहे। भागलपुर के नाथनगर में हिंसक झड़प हुई। सहरसा, मधेपुरा और सीमांचल में भी बंद का असर देखने को मिला। पुलिस मुख्यालय के अनुसार राज्य भर में देर शाम तक बंद के दौरान 250 लोगों को पकड़ा गया था। बता दें कि इस बंद से राजद ने खुद को अलग रखा था। राजद का बिहार बंद 21 दिसंबर को है।
बहरहाल, बिहार बंद को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बोले – कौन किसको भड़काता है, इस पर हम ध्यान नहीं देते। हमारे रहते अल्पसंख्यकों की उपेक्षा नहीं होगी। वहीं, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस बंद को फ्लॉप बताया।

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