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“बिहार पर सरस्वती की कृपा है, लक्ष्मी की भी होगी”: मोदी

कभी ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ कही जाने वाली पटना यूनिवर्सिटी के 100 साल पूरे होने पर बिहार की राजधानी एक यादगार समारोह की साक्षी बनी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राज्यपाल सत्यपाल मलिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान, रविशंकर प्रसाद, उपेन्द्र कुशवाहा और अश्विनी चौबे एवं कुलपति रासबिहारी सिंह समेत कई महत्वपूर्ण हस्तियों और वर्तमान व पूर्व शिक्षकों व छात्रों ने शिरकत की।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से पटना यूनिवर्सिटी को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग की। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पटना यूनिवर्सिटी को एक कदम और आगे ले जाना चाहूंगा। विश्व की टॉप 500 यूनिवर्सिटी में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है, इसलिए 20 यूनिवर्सिटी (10 सरकारी और 10 प्राइवेट) को 10 हजार करोड़ रुपये देने की योजना है। इसका फैसला प्रदर्शन के आधार पर होगा। उनका इशारा इस यूनिवर्सिटी को इसका पुराना गौरव वापस दिलाते हुए इसे उस प्रतियोगिता के लायक बनाने की ओर था।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले के कई प्रधानमंत्री मेरे लिए अच्छा काम छोड़ गए। ऐसा ही अच्छा काम करने का मौका उन्हें आज मिला। पटना यूनिवर्सिटी ने देश को कई नामचीन चेहरे दिए। अगर आप पीढ़ियों के बारे में बताते हैं तो इंसान को बोइए। मैं मां सरस्वती और लक्ष्मी दोनों को साथ-साथ चला रहा हूं। बिहार के पास सरस्वती की कृपा है। बिहार पर लक्ष्मी की कृपा भी हो सकती है। इसमें केन्द्र पूरी तरह प्रदेश सरकार का सहयोग करेगा। हमें बिहार को 2022 तक समृद्ध राज्य बनाना है। गौरतलब है कि मोदी पटना विश्वविद्यालय आने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं।

पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी दिवस कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री के आग्रह पर प्रधानमंत्री नवनिर्मित पटना म्यूजियम पहुंचे, जहां उन्होंने म्यूजियम में रखी एक-एक चीज को बड़े चाव से देखा और सबके बारे में जानकारी ली। स्वयं मुख्यमंत्री ‘गाइड’ की भूमिका में रहे। इसके बाद वे मोकामा पहुंचे और बिहार को करीब चार हजार करोड़ रुपये की सौगात दी। यहां उन्होंने राष्ट्रीय हाईवे से जुड़े 3031 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट और 738.04 करोड़ रुपये के तीन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया।

मोकामा में अपने संबोधन के प्रारंभ में स्थानीय भाषा में लोगों का अभिवादन कर प्रधानमंत्री ने सबका दिल जीत लिया। यही नहीं, उन्होंने यहां के पौराणिक-ऐतिहासिक गौरव की चर्चा भी की और राष्ट्रकवि दिनकर को याद करते हुए उनकी कविता का भी पाठ किया। और हां, मोदी ने पटना यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में इस विश्वविद्यालय व बिहार की तो मोकामा में नीतीश कुमार की दिल खोलकर तारीफ की।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

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यही ‘भीड़’ आप जैसों को नेता बनाती है, चौबेजी !

बिहार से बाहर बड़े शहरों में रोजगार के लिए जाकर बसने वाले बिहारियों के लिए ‘बिहारी’ संबोधन का प्रयोग कई बार उन्हें ‘देहाती’, ‘असभ्य’ या ‘विकास के दौर में पिछड़ा’ जताने और बताने के लिए किया जाता है। हालांकि इधर कुछ वर्षों में यह प्रवृत्ति कम हुई है। लेकिन जब बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाले, जिनके कंधों पर राज्य के गौरव का भार होता है, इस संबोधन का अमर्यादित प्रयोग करें तो क्या कहेंगे आप? जी हां, केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कुछ ऐसा ही कर दिया है। मोदी कैबिनेट में स्वास्थ्य राज्यमंत्री चौबे ने खुली सभा में कहा कि बिहार के लोगों से एम्स में भीड़ बढ़ रही है। स्वाभाविक है कि ऐसे बयान के बाद उनकी आलोचना हो और सियासत का पारा गर्म हो जाए। राजद और कांग्रेस इस बयान के लिए चौबे से बिहार के लोगों से माफी मांगने को कह रहे हैं, तो जेडीयू उन्हें ऐसे बयानों से बचने की सलाह दे रही है।

बता दें कि केन्द्रीय मंत्री और बक्सर से सांसद अश्विनी चौबे ने यह बात एक कार्यक्रम में कही जब बिहार के लोगों पर चर्चा हो रही थी। उन्होंने कहा था कि बिहार के लोगों की वजह से दिल्ली के एम्स में भीड़ बढ़ गई है। बिहार के लोग छोटी सी बीमारी को लेकर भी एम्स पहुंच जाते हैं।

इस बयान के मीडिया में आने के बाद आरजेडी के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने सोमवार को कहा कि सत्ता में बैठे लोग सत्ता के नशे में मदहोश हो गए हैं। लोगों को यह अधिकार है कि वह कहीं भी इलाज करा सकें। चौबे का यह बयान संविधान के खिलाफ है और उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर निकाल देना चाहिए।

आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में अश्विनी चौबे को मानसिक रूप से कमजारे बताते हुए कहा कि बीजेपी ने हमेशा ही बिहार और बिहार के लोगों का अपमान किया है। इस बयान के लिए चौबे और बीजेपी को बिहार के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने प्रधानमंत्री से ऐसे मंत्री को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है।

इस बीच जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने चौबे को ऐसे बयानों से बचने की नसीहत देते हुए कहा कि दिल्ली के एम्स में बिहार के ही ज्यादा चिकित्सक हैं। बिहार के लोग हर जगह हैं, ऐसे में बिहार के लोग कहीं भी इलाज कराने जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने चौबे का बचाव करते हुए यह भी कहा कि मंत्री के बयान को इस तरह से लेना चाहिए कि बिहार में कई बीमारियों के इलाज की समुचित व्यवस्था होने के बावजूद भी लोग दिल्ली इलाज कराने जाते हैं, जिससे यहां के लोगों को बचना चाहिए। उधर वरिष्ठ भाजपा नेता व बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी स्वाभाविक तौर पर उनका बचाव किया और कहा कि उनका मकसद पटना एम्स को बेहतर करने से था। यदि पटना में ही सारी सुविधाएं मिलने लगेगी तो लोगों को बाहर जाने की जरूरत ही नहीं होगी।

अब चौबे ने यह बयान चाहे जिस भाव से दिया हो, यहां की जनता को ‘भीड़’ कहने की भूल तो उनसे हो ही गई है। उन जैसे नेता भला ये कैसे भूल सकते हैं कि यही ‘भीड़’ उन्हें ‘भीड़’ से बाहर निकालकर नेता बनाती है, उन्हें सारे पद और अधिकार दिलाती है और बदले में बस थोड़ा-सा सम्मान चाहती है। हद तो तब हो जाती है जब वही नेता उन्हें भीड़ बताने तक से गुरेज नहीं करते..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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अब सभी बिजली उपभोक्ताओं के लिए होगा प्रीपेड मीटर- ऊर्जा मंत्री

बिहार के ऊर्जावान बिजली मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने यह घोषणा की कि जिस प्रकार प्रीपेड मोबाइल में पैसे कटते हैं, उसी प्रकार प्रीपेड बिजली मीटर में जितनी बिजली की खपत होगी उतनी ही राशि कटती जायेगी | राज्य के कर्मठ ऊर्जा मंत्री ने बिहारवासियों से कहा कि इस कार्यक्रम से जहाँ एक ओर बिजली का दुरुपयोग रुकेगा वहीं दूसरी ओर बिजली बचाने के लिए उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी | साथ ही राज्य के सभी सेक्टरों को निर्बाधरुप से बिजली मिलती रहेगी चाहे वो औद्योगिक क्षेत्र हो या कृषि क्षेत्र अथवा अन्य कोई भी क्षेत्र क्यों न हो |

यह भी बता दें कि उपभोक्ताओं द्वारा निरंतर की जा रही शिकायत कि नियमित रूप से समय पर बिजली बिल नहीं दिये जाते हैं- जिसके फलस्वरूप बिल भुगतान नहीं किये जाने की समस्याओं को दूर करने हेतु राज्य सरकार की रीढ़ माने जानेवाले ऊर्जामंत्री  द्वारा यह कदम उठाया गया है | ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के सात निश्चयों के तहत हर घर को बिजली देने की योजनान्तर्गत 15 से 20% घरों में बिजली नहीं पहुंच पायी है- उसे 2018 के मार्च तक पहुँचा दिया जायेगा |

यह भी जानिए कि दीपावली के बाद राज्य के हर पंचायत में कनेक्शन-करेक्शन अभियान की शुरुआत होगी | इस अभियान में बिजली के प्रीपेड मीटर कनेक्शन एवं अन्य करेक्शन ऑन स्पॉट दूर कर दिया जायगा | बिल देने का झंझट समाप्त होगा और उपभोक्ताओं के मोबाइल पर ही हमेशा बिल आ जायेगा | बिल का भुगतान भी उपभोक्ता ऑनलाइन करते रहेंगे……. तथा विविध प्रकार की परेशानियों से बचते रहेंगे |

अंत में ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र यादव ने मधेपुराअबतक को बताया कि इस योजना से राज्य के रेवेन्यू का ग्राफ तो बढ़ेगा ही बढ़ेगा, साथ ही लोगों द्वारा अलग से बिल देने का झंझट व परेशानी भी समाप्त हो जायेगा | उन्होंने यह भी कहा कि एग्रीकल्चर फीडर के लिए वर्ल्ड बैंक से ऋण मुहैया करा लिया गया है जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा इसी वर्ष नवंबर माह में होने जा रहा है | और आगे बरौनी, कांटी, नवीनगर सहित कजरा-पीरपैंती के सभी यूनिटों व सोलर पावर प्रोजेक्टस मिलाकर बिहार को 6000 मेगावाट बिजली देने की क्षमता होगी और तब बिहारवासियों को चौबीसों घंटे बिजली मिलती रहेगी |

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राय के बड़े बोल, नए उत्साह में भाजपा

बिहार भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद भाजपा नए उत्साह में दिख रही है। बैठक के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव में आरजेडी का सूपड़ा साफ हो जाएगा। 2019 में लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी एक सीट भी नहीं जीत पाएगी।

गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने लोजपा, रालोसपा और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के साथ मिलकर बिहार की 40 में से 31 सीटें जीत ली थीं जबकि तब जेडीयू ने अकेले चुनाव लड़ा था। इस बार नीतीश कुमार भाजपा के साथ हैं। राय ने लालू पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार, झूठ, पिछड़ों की पीठ में छूरा मारने वाले और केंद्र में मंत्री तथा मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए बेनामी संपत्ति इकठ्ठा करने वाले आज ‘सत्यमेव जयते’ ट्वीट कर रहे हैं।
इस मौके पर राय ने पिछडा वर्ग आयोग के पुनर्गठन करने के लिये पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की तारीफ की। राय ने कहा कि यह पिछड़ों को अधिक भागीदारी सुनिश्चित कराने की ओर एक बडा कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछड़ा वर्ग में क्रीमीलेयर की सीमा 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख तक की। साथ ही पहली बार पिछडा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिये 123वां संविधान संशोधन लाकर साबित किया है कि पिछडों की शुभचिंतक भाजपा ही है।

चलते-चलते बता दें कि भाजपा ने कई दावेदारों के होने के बावजूद अप्रत्याशित रूप से प्रदेश भाजपा की कमान नित्यानंद राय को दी थी। राय को इतनी अहम जिम्मेदारी देने के मूल में स्पष्ट रणनीति थी कि उनकी मदद से भाजपा यादव वोटबैंक में सेंध लगा सकेगी। हालांकि अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से अब तक राय ने तीखे तेवर नहीं अपनाए थे, लेकिन प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद वे अलग अंदाज में दिखे। कहने की जरूरत नहीं कि भाजपा ने 2019 की तैयारी अभी से शुरू कर दी है।

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राबड़ी ने बुलाई राजद की आपात बैठक

राष्ट्रीय जनता दल के इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है जब किसी बड़े निर्णय के लिए राबड़ी देवी ने बैठक बुलाई हो और उस बैठक में पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव न हों और न ही उनके उत्तराधिकारी के तौर पर स्वीकारे जा चुके तेजस्वी यादव हों। जी हां, राबड़ी देवी ने बुधवार को राजद की आपात बैठक बुलाई, जिसके राजनीति के गलियारों में कई मायने निकाले जा रहे हैं। बता दें कि लालू और तेजस्वी फिलहाल दिल्ली में हैं। सीबीआई ने 5 एवं 6 अक्टूबर को उनसे पूछताछ के लिए समन जारी कर रखा है। सीबीआई ने इससे पहले भी दो बार समन जारी किया था, लेकिन पिता-पुत्र ने दोनों ही बार तिथियों को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया।

बहरहाल, राबड़ी द्वारा बुलाई गई आपात बैठक में पार्टी के संगठन चुनाव को निर्धारित समय से 14 महीने पहले कराने का फैसला लिया गया। गौरतलब है कि राजद का संगठनात्मक चुनाव प्रत्येक तीन साल पर होता है और तय समय के मुताबिक इसे जनवरी 2019 में होना चाहिए था। लेकिन इस बात की प्रबल संभावना है कि इसी आसपास लोकसभा चुनाव भी हो जाएं। ऐसा होने पर नई कमिटियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा। यही कारण है कि पार्टी सभी मोर्चों पर स्वयं को समय रहते चुस्त-दुरुस्त कर लेना चाहती है।

राबड़ी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि 20 नवंबर को राष्ट्रीय परिषद की बैठक आयोजित की जाएगी। इसी दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी होगा, जिसमें लालू प्रसाद यादव की फिर से ताजपोशी तय है। नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद खुला अधिवेशन होगा।

बता दें कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पूर्व 23 अक्टूबर को प्रखंड अध्यक्षों का चुनाव, 30 अक्टूबर को जिला अध्यक्षों का चुनाव और 4 से से 7 नवंबर के बीच प्रदेश अध्यक्ष, राज्य कार्यकारिणी के सदस्य तथा राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चुनाव होगा। इन सभी चुनावों से पहले सघन सदस्यता अभियान चलाया जाएगा, जिसकी शुरुआत गुरुवार से होगी।

यह भी जानें कि इन संगठनात्मक चुनावों के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह को राष्ट्रीय निर्वाचन पदाधिकारी बनाया गया है और प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन को राष्ट्रीय सहायक निर्वाचन पदाधिकारी की जिम्मेवारी दी गई है, जबकि प्रदेश में चुनाव की जिम्मेवारी तनवीर हसन की होगी।

 

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शराबबंदी के बाद बाल विवाह और दहेज के विरुद्ध शंखनाद

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 148वीं जयंती के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़े अभियान का शंखनाद किया। बिहार में शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के बाद नीतीश ने समाज को घुन की तरह खा रही इन दो कुरीतियों पर जिस तरह चोट की है, वह उन्हें राजनेताओं की भीड़ में निश्चित तौर पर एक अलग स्थान का हकदार बनाती है। देखा जाय तो बापू को इससे बड़ी श्रद्धांजलि हो भी क्या सकती थी!

गौरतलब है कि बाल विवाह के खिलाफ कड़े कानून होने के बावजूद यह बिहार में काफी प्रचलित है। खासकर राज्य के ग्रामीण इलाकों में यह कुप्रथा बहुत बड़े स्तर पर फैली हुई है। आंकड़ों की मानें तो कुछ वर्ष पहले तक बिहार में होने वाले कुल विवाह में से करीब 69 प्रतिशत बाल विवाह होते थे। हालांकि हाल ही में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य संरक्षण-4 में खुलासा हुआ है कि लड़कियों की शिक्षा पर जोर देने के कारण पिछले 10 सालों में यह आंकड़ा घटा है। फिर भी इस कुरीति को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए अभी काफी कुछ किए जाने की जरूरत थी। जहां तक दहेज प्रथा का प्रश्न है, उसके लिए तो आंकड़ों की भी जरूरत नहीं। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो बिहार क्या देश भर में शायद ही कोई माता-पिता हों जिन्हें दहेज के अजगर ने डंसा न हो। हर साल हजारों बेटियां दहेज के कारण न जाने कितने अत्याचार सहती हैं, उनमें से कई तो जिन्दा जला दी जाती हैं। ऐसे में बिहार में इन दोनों कुरीतियों के विरुद्ध शुरू की गई ये पहल निश्चित तौर बदलाव की ओर बढ़ाया गया एक बड़ा कदम है।

सोमवार को राजधानी पटना स्थित गांधी मैदान के समीप नवनिर्मित बापू सभागार से महाअभियान का आगाज करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों को शपथ दिलाई कि बिहार को बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों से मुक्त कराने की प्रतिज्ञा लें। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस अभियान को राजनीतिक चश्मे से न देखें। राजनीति अपनी जगह पर है और वह होती रहेगी। यह सामाजिक अभियान है। इस अभियान में पूरी एकजुटता से शामिल हों। उन्होंने ऐलान किया कि अगले वर्ष 21 जनवरी को बाल विवाह और दहेज विरोधी अभियान के समर्थन में पूरे प्रदेश में मानव श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ कानून काफी पहले से है। उसका हम मुस्तैदी से अनुपालन कराएंगे लेकिन इसके लिए जनभावना का साथ होना भी जरूरी है। उन्होंने लोगों के साथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि इसकी बदौलत बहुत जल्द बिहार की तस्वीर बदलेगी और हम देश और दुनिया के लिए उदाहरण बन सकेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सत्यपाल मलिक बिहार के नए राज्यपाल, गंगा प्रसाद को मिला मेघालय

विजया दशमी के दिन पांच राज्यों को नए राज्यपाल मिले। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस दिन बिहार, तमिलनाडु, असम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के राज्यपाल एवं अंडमान और निकोबार के उपराज्यपाल की नियुक्ति की। भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष रहे सत्यपाल मलिक बिहार के नए राज्यपाल होंगे, जबकि बनवारी लाल पुरोहित को तमिलनाडु जगदीश मुखी को असम और ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बीडी मिश्रा को अरुणाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। वहीं बिहार का राज्यपाल रहते हुए राष्ट्रपति के पद तक पहुंचने वाले कोविंद ने इन नियुक्तियों में बिहार का विशेष ख्याल रखते हुए बिहार भाजपा के पुराने नेता गंगा प्रसाद चौरसिया को मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया है। इन पांच राज्यों के राज्यपाल के अतिरिक्त केन्द्रशासित अंडमान और निकोबार के उपराज्यपाल के तौर पर राष्ट्रपति ने एडमिरल (सेवानिवृत्त) देवेन्द्र कुमार जोशी को मौका दिया है।

गौरतलब है कि बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही यहां राज्यपाल का पद रिक्त था। कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी को बिहार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। नए राज्यपाल सत्यपाल मलिक इससे पूर्व केन्द्रीय संसदीय और पर्यटन राज्यमंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। बीएससी और एलएलबी की डिग्री लेने वाले मलिक 1980-84 और 1986-89 तक राज्यसभा के सांसद और 1989-90 में लोकसभा के सांसद रहे हैं।

उधर मेघालय के राज्यपाल बनाए गए गंगा प्रसाद चौरसिया शुरू से जनसंघ के सदस्य रहे हैं। 1994 में वे पहली बार बिहार विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए और कुल 18 सालों तक परिषद के सदस्य रहे। वे बिहार भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे बिहार राज्य आर्य प्रतिनिधि सभा, बिहार राज्य खाद्यान्न व्यवसायी संघ. अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन और अखिल भारतीय चौरसिया महासभा जैसे संगठनों में भी सक्रिय रहते आए हैं।

कुल मिलाकर इन नियुक्तियों में भाजपा ने अपने लोगों को ‘वफादारी’ का इनाम दिया है। सत्यपाल मलिक और गंगा प्रसाद चौरसिया की तरह ही दिल्ली भाजपा के जगदीश मुखी भी पार्टी के पुराने वफादार रहे हैं। इसी तरह अन्य लोगों की प्रतिबद्धता भी केन्द्रासीन भाजपा के प्रति असंदिग्ध है। देखा जाय तो केन्द्र की सत्ता पर काबिज पार्टी द्वारा इस तरह ‘मलाई’ का वितरण कोई नई बात नहीं। नया बस यह है कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद के लिए (वैसे देश के प्रथम व्यक्ति का पद भी अपवाद नहीं) ‘राजनीतिक तौर पर छोटा कद’ होना अब लगभग अनिवार्य हो गया है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप  

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बिहार वासियों के लिए एक सुखद अनुभूति है ‘न्यूटन’…….!!

क्या आप जानते हैं कि फिल्म ‘न्यूटन’ के ‘आस्कर अवार्ड’ हेतु नामित होने से सम्पूर्ण बिहार क्यों आह्लादित है ? क्योंकि, बिहार का लाल जिसने किया है कमाल- वह इसी फिल्म का अभिनेता पंकज त्रिपाठी है और वह पंकज है पटना रंगमंच की उपज ! वह पंकज बिहार के गोपालगंज जिले का मूल निवासी भी है |

बता दें कि नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (एन एस डी) की डिग्री लेने के बाद पिछले एक दशक से मुम्बई की फ़िल्मी दुनिया के सुनहले रंगमंच पर अपनी दक्षता एवं अभिनय की बारीकियों से पंकज ने एक बड़ी लकीर खींची है…….. तथा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनावी पृष्ठभूमि पर हिन्दी में निर्मित राजनीतिक व्यंग फिल्म ‘न्यूटन’ में मुख्य भूमिका निभाते हुए राजकुमार राव, अंजली पाटिल एवं रघुवीर यादव आदि की महती भूमिका को भी समुचित स्थान दिया है |

यह भी जानिए कि ‘न्यूटन’ आस्कर अवार्ड की ऑफिसियल एंट्री के लिए चुनी गई 50वी. भारतीय और 30वीं हिन्दी फिल्म है | परन्तु, अब तक तीन फ़िल्में ही विदेशी भाषा केटगरी में नामांकन तक पहुँच सकी हैं- वे तीनों है, 1957 में आई फिल्म ‘मदरइंडिया’, 1988 की फिल्म ‘सलामबॉम्बे’ और 2001 की प्रसिद्ध फिल्म ‘लगान’ |

फिल्म ‘न्यूटन’ में मुख्य भूमिका निभानेवाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी तीन-चार फिल्मों की अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी बड़ी पहचान बना ली है | इतने कम वर्षों की अभिनय यात्रा में वैश्विक मंच मिल जाना ‘पंकज’ के लिए ही नहीं बल्कि बिहार वासियों के लिए भी एक सुखद अनुभूति है |

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कोसी की बेटी को पीएम मोदी करेंगे सम्मानित

धन्य हो गयी आज कोसी अंचल के सौरबाज़ार प्रखंड वाले गम्हरिया गाँव के दयानंद की बेटी ‘चन्द्रकान्ता’ की ममतामयी माँ की गोद और सम्पूर्ण घर-आँगन…… जब दयानन्द यादव के द्वार पर सहरसा जिला शिक्षा विभाग के डीपीओ, डीइओ व अन्य पदाधिकारियों ने एक साथ दस्तक दी और उत्साहित ग्रामीणों की उपस्थिति में यही कहा-

विगत 5 सितम्बर को “स्वच्छ संकल्प से स्वच्छ सिद्धि तक” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय निबन्ध प्रतियोगिता में मनोहर उच्च विद्यालय बैजनाथपुर की नवमी की छात्रा चन्द्रकान्ता नैना ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है | शिक्षा विभाग द्वारा 28 सितम्बर को चन्द्रकान्ता को पटना भेजा जाएगा और वहाँ से दिल्ली…….. जहाँ 2 अक्टूबर (गाँधी जयन्ती) के दिन दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के प्रधानमंत्री के हाथों उन्हें सम्मानित किया जाएगा |

यह भी जानिये कि स्वच्छता पर हुई निबन्ध प्रतियोगिता में, सीनियर और जूनियर दोनों ग्रुपों में, बिहार के बच्चे ही देशभर में अव्वल स्थान प्राप्त किये हैं | एक ओर जहाँ सीनियर ग्रुप में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीये नम्बर पर रहे बिहार, पुडुचेरी और हिमाचल प्रदेश वहीँ दूसरी ओर जूनियर ग्रुप में बिहार के भोजपुर जिले के विकास कुमार प्रथम आये तथा गोवा और हिमाचल प्रदेश को द्वितीय एवं तृतीय स्थान मिला |

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नीतीश ने क्यों की अपनी मृत्यु की बात ?

आज जबकि पार्टियां प्राईवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाई जा रही हैं, ऐसे में किसी राजनीतिक पार्टी के शीर्ष नेता के परिवार से किसी का राजनीति में न रहना और उस नेता का अपने न रहने की स्थिति में पार्टी के अस्तित्व की चिन्ता करना सचमुच बड़ी बात है। ये चिन्ता बताती है कि वह नेता पद, पावर और परिवार के लिए नहीं, उन विचारों और मुद्दों के लिए परेशान है, जिसे अपनी पार्टी के माध्यम से वो मुकाम तक पहुंचाना चाहता है। यहां बात की जा रही है, बिहार के लोकप्रिय मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की, जिन्होंने रविवार को हुई राज्य कार्यकारिणी की बैठक में यह कहकर सबको चौंका दिया कि “अगर कल को मेरी मृत्यु हो जाती है, तो पार्टी का क्या होगा?”

बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अपने अब तक के राजनीतिक जीवन में नीतीश कुमार ने हजारों सभाएं और बैठकें की हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब उन्होंने इस तरह की बात कही हो। जब इस बारे में नीतीश से पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा तो उन्होंने जवाब दिया कि कौन जानता है कल क्या होगा? हालांकि आगे उन्होंने जोड़ा कि अरे ऐसे ही मुंह से निकल गया, कुछ खास नहीं।

यहां गौर करने की जरूरत है कि नीतीश कुमार हमेशा अपनी बातों को बड़े ही व्यावहारिक और तार्किक तरीके से रखने के लिए जाने जाते हैं। अब अगर उन्होंने अगर ऐसी चिन्ता जाहिर की है तो यह भी अकारण नहीं है। शायद वे ऐसा कहकर नेताओं और कार्यकर्ताओं को याद दिलाने चाहते हैं कि उन्होंने पार्टी के लिए कितनी मेहनत की है ताकि उसी अनुपात में पार्टी के बाकी लोग भी अपनी भूमिका निभाएं। अगर वो पार्टी के लोगों को जेडीयू की बुनियादी विचारधारा की याद दिलाने चाहते हैं, देश और समाज के लिए उनकी प्रतिबद्धता को एक नई धार देने चाहते हैं, अपने विचार का फैलाव अपने बाद भी चाहते हैं तो यह एक सच्चे और अच्छे नेता की निशानी है।

बहरहाल, राज्य कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश ने कहा कि जब तक मैं जिन्दा हूं तब तक बिहार से शराबबंदी का निर्णय वापस नहीं लिया जा सकता। अगर किसी को मेरे निर्णय से समस्या है तो वह मुझे मार सकता है लेकिन मैं इस नियम को किसी सूरत में नहीं हटाऊंगा। यहां बता दें कि शराबबंदी के बाद नीतीश कुमार सामाजिक मुद्दों को लेकर बिहार में दो और बड़े दांव खेलने वाले हैं। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर वे दहेज प्रथा और बाल विवाह को पूरी तरह बंद करने के लिए बड़े अभियान का श्रीगणेश करेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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