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बिहार के 40वें महामहिम राज्यपाल बने फागू चौहान

चार नये गवर्नर के पदस्थापन और दो के स्थानांतरण की विज्ञप्ति जारी हुई राष्ट्रपति भवन से। जिन चारों राज्यों में नये राज्यपालों की नियुक्तियाँ की गई, वे हैं – बिहार, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और नागालैंड।

बता दें कि जहाँ बिहार के 40वें राज्यपाल बनेंगे पिछड़ों के शीर्ष नेताओं में गिने जाने वाले 71 वर्षीय फागू चौहान, वहीं पश्चिम बंगाल के गवर्नर नियुक्त किये गये हैं हरियाणा के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील 68 वर्षीय जगदीप धनकड़।

यह भी बता दें कि जहाँ त्रिपुरा के राज्यपाल बनाये गये पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस, वहीं नागालैंड का गवर्नर बनाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा उप सलाहकार आर.एन.रवि।

यह भी जानिए कि बिहार में बतौर 331 दिन गवर्नर रहकर जिनने कई बड़ी लकीरें खींची उसी लालजी टंडन का स्थानांतरण मध्य प्रदेश किया गया हैं….. जहाँ की राज्यपाल 77 वर्षीय आनंदी बेन पटेल को उत्तर प्रदेश के गवर्नर की जिम्मेदारी दी गई है।

नई पहल जो लालजी टंडन ने अपने सालभर से भी कम कार्यकाल में की , वे हैं- (1) राजभवन में संविधान दिवस का आयोजन (2) शंकराचार्य व मंडन मिश्र की तर्ज पर शास्त्रार्थ का आयोजन (3) राजभवन में उद्यान प्रदर्शनी का आयोजन (4) विश्वविद्यालयों को गाँवों को गोद लेने के लिए प्रेरित करना (5) संगीतज्ञों को सम्मान दिलाने की पहल और (6) चांसलर्स अवार्ड की शुरुआत की पहल….. जो प्रक्रियाधीन है।

अब देखना यह है कि यूपी के मऊ जनपद की घोसी विधान सभा सीट पर विभिन्न पार्टियों से 6 बार विधायक रह चुके तथा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन रह चुके फागू चौहान बिहार जैसे पिछड़े परंतु विकासोन्नमुखी राज्य के व्यापक सुधार हेतु क्या-क्या करते हैं……..?

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नहीं रहे रामचंद्र पासवान

लोजपा के वरिष्ठ नेता, समस्तीपुर के सांसद व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के सबसे छोटे भाई रामचन्द्र पासवान नहीं रहे। रविवार को दोपहर 1.24 पर उन्होंने नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। अभी कुछ दिन पहले हार्ट अटैक के बाद उन्हें हॉस्पिटल लाया गया था, लेकिन तब शायद कोई नहीं जानता था कि वे अब यहां से कभी नहीं लौटेंगे। अपने पीछे वे पत्नी सुनैयना कुमारी के साथ दो बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं।

मात्र 57 वर्षीय रामचंद्र पासवान के असामयिक निधन से जैसे शोक की लहर दौड़ गई हो। ऐसा कोई राजनीतिक दल नहीं, जिसने उनके लिए शोक न जताया हो। स्वभाव से बड़े हंसमुख और मिलनसार रामचंद्र पासवान राजनीति के साथ ही सामाजिक कार्यों में भी समान रूप से सक्रिय थे। बड़े भाई रामविलास पासवान द्वारा स्थापित दलित सेना के प्रमुख के रूप में उन्होंने दशकों तक अहम भूमिका निभाई और अपने अग्रज के बेहद मजबूत कांधा के तौर पर रहे। बिहार की राजनीति में रामविलास पासवान, पशुपति कुमार पारस और रामचंद्र पासवान की जैसी तिकड़ी रही और अपनी एकजुटता से इस तिकड़ी ने जैसी सफलता हासिल की, वैसा उदाहरण कोई दूसरा नहीं।

रामचंद्र पसवान मूल रूप से खगड़िया जिला के अलौली प्रखंड अंतर्गत शहरबन्नी गांव के रहने वाले थे। जामुन दास एवं सिया देवी के पुत्र रामचंद्र पासवान ने मैट्रिक तक की शिक्षा ग्रहण की थी। 1999 में रोसड़ा से वे पहली बार संसद के लिए चुने गए थे। इस बार समस्तीपुर से ढाई लाख मतों से अधिक के अंतर से जीतकर वे चौथी बार संसद पहुँचे थे।

रामचंद्र पासवान देश के उन चुनिंदा सांसदों में से रहे हैं, जिनकी औसत उपस्थिति संसद में अस्सी प्रतिशत से अधिक रही है। वे संसद की विभिन्न कमेटियों के सदस्य रहे। लोकसभा सदस्य के रुप में मिलने वाले सांसद निधि का वे शत-प्रतिशत खर्च करते थे। उनके लगभग सभी कार्यकाल में उनके सांसद निधि का खर्च शत-प्रतिशत रहा है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे क्षेत्र के विकास के प्रति कितने तत्पर थे।

बताया जाता है कि इस बार एनडीए के नेताओं के द्वारा रामचंद्र पासवान को अपना क्षेत्र बदलने के लिए दबाव बनाया गया था, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। उनका कहना था कि जीत और हार तो लगी रहती है। यदि हमने काम किया है तो लोग हमें जरूर वोट देंगे। काम नहीं किया गया होगा तो वोट नहीं करेंगे, लेकिन लड़ूंगा समस्तीपुर से ही। इसके बाद वे समस्तीपुर से चुनाव लड़े और भारी अंतर से जीते भी। पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

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मैं भी पिछले जन्म में बिहारी था- ऋतिक रोशन

एक ओर जहाँ सुपर-30 के आनंद कुमार को इस सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने KBC के स्पेशल एपिसोड में बुलाकर 25 लाख जीतने का अवसर प्रदान किया वहीं दूसरी ओर बॉलीवुड के महान नायक ऋतिक रोशन ने गणितज्ञ आनंद कुमार पर सुपर-30 फिल्म बनाकर आनंद के जीवन के एक-एक पल को बखूबी जिया और किरदार भी निभाया। यह सुपर-30 फिल्म ऐसी बनी कि एक साथ दर्जनों जगहों पर चली और पहले ही दिन लगभग 11 करोड़ की कमाई की।

बता दें कि जितने भी लोग फिल्म देखने के बाद आनंद से मिले सबों ने यही कहा कि आनंद सर में और ऋतिक रोशन में कोई अंतर नहीं पाया…. वहीं ऋतिक जब आनंद सर से मिले तो पहले उनका पैर छूकर आशीर्वाद लिया और पुनः ऋतिक ने आनंद सर के भाई प्रणव से यही कहा-

अभी तक मैने वो काम किया है जो आनंद सर करते आ रहे हैं….. अब आनंद सर वो काम करें जो मैं करता आ रहा हूँ- इसी वार्तालाप के साथ दोनों ने “एक पल का जीना” गाने का सिग्नेचर स्टेप डांस शुरू कर दिया।

यह भी कि जहाँ बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने ऋतिक रोशन से मुलाकात के क्रम में फिल्म में जीवंत किरदार निभाने के लिए साधुवाद दिया वहीं ऋतिक ने इस फिल्म को Tax Free घोषित कर छात्रों में फिल्म देखने की ललक बढ़ाने हेतु सीएम नीतीश कुमार को हृदय से बधाई दी।

Anand Kumar is being honoured by Dr.Bhupendra Madhepuri, VC Dr.A.K.Ray, DM Navdeep Shukla at BN Mandal auditorium during his visit.
Anand Kumar is being honoured by Dr.Bhupendra Madhepuri, VC Dr.AK Ray, DM Navdeep Shukla at BN Mandal auditorium during his recent visit.

चलते-चलते बता दें कि गुरु पूर्णिमा के दिन ऋतिक ने आनंद सर के गुरुओं का जमकर सम्मान किया इसलिए कि आनंद ने शिक्षा के क्षेत्र में सपरिवार अपना बहुमूल्य योगदान देकर बिहार को गौरवान्वित किया है। चंद महीने कबल बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के ऑडिटोरियम में आनंद कुमार ने छात्रों की भारी भीड़ को संबोधित किया था। उस अवसर पर डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उन्हें डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पर लिखी अपनी पुस्तक “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” भेंट की थी तथा कुलपति डॉ.एके राय, डीएम नवदीप शुक्ला (आईएएस) एवं डॉ.मधेपुरी  आदि द्वारा “बाबा सिंहेश्वर धाम” का प्रतीक चिन्ह सम्मिलित रूप से ससम्मान हस्तगत कराया गया था।

अंत में यह भी कि किसी व्यक्ति के जीवन काल में ही उसके कृतित्व पर फिल्म बने, लोग देखे और सराहे…. ऐसा बिरले होता है…..। जब ऋतिक ने सुपर-30 के बच्चों में सादगी और इंटेलिजेंस के साथ-साथ पैशन व टैलेंट देखा तो सर्वाधिक भावुक होकर बोले….. मैं भी पिछले जन्म में बिहारी था।

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अपने कार्यों से बड़ी लकीर खींच रहा जदयू मीडिया सेल: बशिष्ठ

सोमवार, 15 जुलाई 2019 को बिहार प्रदेश जदयू मुख्यालय में जदयू मीडिया सेल द्वारा सदस्यता महाभियान सह प्रदेश कार्यकारिणी बैठक एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन बिहार प्रदेश जदयू के अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य बशिष्ठ नारायण सिंह ने किया। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विधानपार्षद व प्रदेश जदयू के कोषाध्यक्ष ललन सर्राफ, राष्ट्रीय सचिव व सदस्यता अभियान के प्रभारी रविन्द्र सिंह, प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन, जदयू के प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारीद्वय डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं अनिल कुमार की विशिष्ट उपस्थिति रही। मीडिया सेल के संगठन प्रभारी प्रभात रंजन झा ने बैठक के उद्देश्य से उपस्थित लोगों को अवगत कराया, जबकि संचालन मीडिया सेल के मुख्यालय प्रभारी धनंजय शर्मा ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि बदलते समय की नब्ज को पहचानना हो तो हमें आधुनिक संचार माध्यमों को समझना और अपनाना होगा। जदयू मीडिया सेल ने पार्टी को मजबूती और विस्तार देने के लिए इस दायित्व को बखूबी निभाया है। मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और उनकी टीम को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया सेल अपने कार्यों से बड़ी लकीर खींच रहा है। यह लकीर और बड़ी हो और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके, मीडिया सेल को इस पर काम करना है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को दल से जोड़ने में ऑनलाइन सदस्यता अभियान की जरूरत थी, जिसे मीडिया सेल के साथी हर बूथ तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं।
विधानपार्षद ललन सर्राफ ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों को जन-जन तक पहुँचाने में जदयू मीडिया सेल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वहीं, प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि मुद्दों को समझने और उस पर जनमानस तैयार करने में मीडिया सेल ने सचमुच प्रशंसनीय कार्य किया है।
राष्ट्रीय सचिव व सदस्यता अभियान के प्रभारी रविन्द्र सिंह ने सदस्यता अभियान को लेकर विस्तार से अपनी बातें रखीं और कहा कि शहरों, कस्बों, गांवों से लेकर गली-मुहलों तक में कैंप लगाकर लोगों को ऑनलाइन सदस्यता दिलाने के लिए मीडिया सेल के साथियों को काम करना है। प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य ने कहा कि सदस्यता अभियान को लेकर किसी भी तरह की कठिनाई होने पर पार्टी मुख्यालय पूरी तत्परता से सहयोग करेगा।
जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने बैठक के दौरान सर्वप्रथम मीडिया सेल की अद्यतन रिपोर्ट पेश की। इसके उपरान्त ऑनलाइन सदस्यता अभियान को लेकर मीडिया सेल की तैयारियों की चर्चा करते हुए शीर्ष नेतृत्व को विश्वास दिलाया कि सदस्यता अभियान की ऐतिहासिक सफलता के लिए मीडिया सेल कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
बैठक में मीडिया सेल प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों, सभी प्रभारियों तथा जिला मीडिया संयोजकों को सम्मानित भी किया गया। विगत एक वर्ष के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने के लिए रोशन अग्रवाल (कटिहार), रवि कुमार (नवगछिया) एवं ललन कुमार दास को सर्वश्रेष्ठ संयोजक चुना गया। बैठक में कार्यक्रम प्रभारी राजीव रंजन पटेल, जनसंपर्क प्रभारी यादव उमेश कुमार, संवाद प्रभारी डॉ. धीरज सिन्हा, विधि प्रभारी प्रवीण तिवारी, सूचना प्रभारी विनीता स्टेफी पासवान, सोशल नेटवर्क प्रभारी संतोष अशर, पिंकी भारती, समन्वय प्रभारी डॉ. सुभाष चन्द्रशेखर, प्रभात कुमार आर्य, प्रमंडल प्रभारी सैयद नजम, अभय विश्वास भट्ट, अनितेश कुमार, अनुपम कुमार, नबीस कुमार नवेन्दु, मिथिलेश निराला समेत मीडिया सेल के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

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नेपाल में मानसून की सक्रियता के चलते बिहार में बाढ़ का कहर

बिहार राज्य की सीमा नेपाल से सटे होने के कारण बिहार का बाढ़ प्रभावित होना स्वाभाविक है | नेपाल में 24 घंटे में 311 मि.मी. बारिश हुई है तभी तो कोसी हुई विकराल….. सीमांचल के ढेर सारे गाँव हुए जलमग्न और पलायन शुरू |

बता दें कि बिहार के 9 जिले…..(शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा और मुजफ्फरपुर ) के लगभग 20 लाख लोग बाढ़ की चपेट में है | उत्तर बिहार की नदियों में जबरदस्त उफान आ गया है | कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है |

यह भी बता दें कि दरभंगा में कमला बलान तथा शिवहर में बागमती नदी का तटबंध कई स्थानों पर टूट गया है | लोगों के साथ-साथ जानवरों को भी भारी तबाही हो रही है | कोसी के जलस्तर में सर्वाधिक वृद्धि होने से अररिया के पांच प्रखंडों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट चुका है | अबतक बिहार में दर्जनों लोगों की जानें जा चुकी हैं |

यह भी जानिए कि इस भयावह स्थिति को कंट्रोल करने के लिए कदाचित पहली बार छप्पनों (56) फाटक (शनिवार रात 10:30 बजे से रविवार सुबह 6:00 बजे तक) खोल दिये गये | इसके बाद धीरे-धीरे 26 फाटकों को बन्द कर दिया गया….. बैरेज के 30 फाटक अभी भी खुले हैं |

सूबे बिहार के अति संवेदनशील सीएम नीतीश कुमार ने बाढ़ के मसलों पर एक हाई लेवल मीटिंग की और तुरंत हेलीकॉप्टर से दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी व मोतिहारी में बाढ़ से संघर्ष कर रहे लोगों की स्थिति का जायजा लेने हेतु हवाई सर्वेक्षण किया | बाढ़ की विभीषिका को देखकर मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य तेज करने, राहत कैंप लगाने तथा कम्युनिटी किचेन की व्यवस्था करने को कहा |

चलते-चलते यह भी बता दें कि सीएम ने उच्चाधिकारियों से आदमी व पशुओं की दवा से लेकर पर्याप्त मात्रा में चारा का भी इंतजाम करने को कहा | साथ ही कम्युनिटी कैंप के भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ साफ-सफाई पर भी ध्यान दिये जाने की बात कही | सीएम ने राहत व बचाव हेतु एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीम तैनात रखने को कहा जो अपनी ड्यूटी के प्रति हमेशा चौकन्ना रहे |

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नीतीश सरकार द्वारा किसानों को दी जाएगी मौसम के अनुरूप खेती की ट्रेनिंग

सूबे बिहार के 10 हज़ार किसानों को प्रथम चरण में किया जाएगा प्रशिक्षित | बतौर पायलट प्रोजेक्ट अभी फिलहाल राज्य के आठ जिलों के 100 गाँवों से चयनित कर 10 हज़ार किसानों को मौसम के अनुरूप खेती की ट्रेनिंग दी जाएगी |

बता दें कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर के लिए जहाँ राज्य के किसान भी अब तैयार हो रहे हैं वहीं कृषि मंत्री डॉ.प्रेम कुमार के अनुसार अब जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ही किसानों को खेती करना आवश्यक हो गया है | कृषि मंत्री बिहार डॉ.कुमार ने कहा कि बाढ़-सुखाड़, तूफान-ओलावृष्टि पर सम्यक विचार करते हुए चार एजेंसियाँ इस योजना को मूल रूप देगी |

यह भी जानिए कि इन चयनित गाँवों को “क्लाइमेट स्मार्ट गाँव” नाम दिया गया है | इन क्लाइमेट स्मार्ट गाँवों के 10 हज़ार किसानों को मौसम अनुरूप खेती की ट्रेनिंग दिये जाने वाली योजना पर फिलहाल 23 करोड़ से अधिक रुपये खर्च करने का मन बना लिया है बिहार सरकार ने | यदि यह प्रयोग सफल हुआ तो आगे इस योजना को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा |

यह भी बता दें कि इस योजना के कार्यान्वयन के लिए हाईवे नाम देकर पूरे बिहार में चार कॉरिडोर बनाया गया है | ये हाईवे कोरिडोर हैं – (1) पटना-नालंदा हाईवे (2) भागलपुर-मुंगेर हाईवे (3) पूर्णिया-कटिहार हाईवे और (4) दरभंगा-समस्तीपुर हाईवे |

प्रथम चरण में उपर्युक्त इन चारों कोरिडोर के आठों जिलों से 100 गाँवों का चयन किया गया है | साथ ही प्रत्येक गाँवों से सौ-सौ किसानों यानि 10 हज़ार किसानों को प्रथम चरण में प्रशिक्षित किया जाएगा | प्रथम किस्त में इन किसानों को मौसम के अनुरूप धान, गेहूं, मक्का, अरहर, मसूर आदि की खेती कैसे की जाएगी….. उसकी ट्रेनिंग दी जाएगी | फिलहाल ये भी याद कर लें कि यह योजना तत्काल 3 साल के लिए चलेगी |

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शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खाँ के नाम बिहार में बनेगा संगीत विश्वविद्यालय

सूबे बिहार की नीतीश सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा मंत्री प्रमोद कुमार ने बिहार विधानसभा में कहा है कि भारतरत्न शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खाँ के नाम बिहार में संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना जल्द ही की जाएगी | इस सिलसिले में विभागीय स्तर पर कार्यवाही आरंभ कर दी गई है |

बता दें कि संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए कम से कम 5 एकड़ जमीन की आवश्यकता बतायी गई है | इस हेतू मुजफ्फरपुर के जिला पदाधिकारी द्वारा कढ़नी में 2.80 एकड़ उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है | बकौल विभागीय मंत्री जमीन की उपलब्धता हेतु अन्य जिलाधिकारी से भी संपर्क साधा जा रहा है….. जहाँ जमीन मिल जाएगी वहीं बनेगा संगीत विश्वविद्यालय |

यह भी बता दें कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना का हक तो बनता है मधेपुरा जिला का….. क्योंकि शहनाई वादक बिस्मिल्ला ख़ाँ को 20वीं सदी में कई बार मधेपुरा के रासबिहारी उच्च विद्यालय के मंच पर दशहरे के अवसर पर संगीत के प्रति गहरी अभिरुचि रखने वाले तबलावादक प्रो.योगेन्द्र नारायण यादव, समाजसेवी रमेश चंद्र यादव, गिरिधर प्रसाद श्रीवास्तव, प्रो.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी आदि द्वारा बुलाया गया था | बिस्मिल्लाह खाँ की शहनाई सुनकर लोगों को मंत्रमुग्ध होते देख आयोजकगण बेहद खुश होते थे |

चलते-चलते अंत में बकौल डॉ.मधेपुरी यह भी जान लें कि विदेशों में जब बिस्मिल्लाह खाँ शहनाई बजाया करते तथा श्रोतागण तालियाँ बजाकर उन्हें सम्मानित किया करते तो कार्यक्रम समाप्ति के तुरंत बाद पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि तालियों की गड़गड़ाहट सुनकर आपको कैसा लगता है- के जवाब में बिस्मिल्ला खाँ बस इतना ही कहते-

“तालियों की गड़गड़ाहट से मुझे कोई फर्क इसलिए नहीं पड़ता है कि वहाँ बिस्मिल्लाह खाँ तो शहनाई बजाता नहीं…. वहाँ तो भारत शहनाई बजा रहा होता है।”

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बिहार में 75 प्रतिशत संवेदनशील कब्रिस्तानों की घेराबंदी का काम पूरा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कब्रिस्तान की घेराबंदी के संबंध में विधानसभा में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि राज्य के 75 प्रतिशत संवेदनशील कब्रिस्तानों की घेराबंदी कराई जा चुकी है। बाकी 25 प्रतिशत का काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। आरजेडी विधायक रघुवंश कुमार यादव के तारांकित प्रश्न के जवाब के दौरान हस्तक्षेप करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बिहार के सभी कब्रिस्तानों का सर्वेक्षण कराया है और इनमें से 8064 कब्रिस्तानों को संवेदनशील मानते हुए घेराबंदी कराने का फैसला लिया गया है।

मुख्यमंत्री के जवाब का विपक्षी दलों ने विरोध किया और आरोप लगाया कि कब्रिस्तानों के सर्वेक्षण की सूची गलत है। विपक्ष के विरोध पर मुख्यमंत्री ने बताया कि यह 2006 की सूची है। अगर सूची में किसी विवादित या संवेदनशील कब्रिस्तान का नाम छूट गया है तो क्षेत्रीय विधायक भी संशोधित करवा सकते हैं। उनका सुझाव आमंत्रित है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश में वैसे कब्रिस्तानों की घेराबंदी का फैसला लिया गया है, जहां विवाद है या होने की आशंका है। संबंधित जिलों के डीएम एवं एसपी को विवादित और संवेदनशील कब्रिस्तानों को चिह्नित करने का जिम्मा दिया गया है। उन्हें घेराबंदी की प्राथमिकता तय करने के लिए भी अधिकृत किया गया है। प्राथमिकता वाले अबतक 8064 कब्रिस्तानों की सूची बनाई गई है।

गौरतलब है कि घेराबंदी के लिए बजट का भी प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कब्रिस्तानों की घेराबंदी के लिए राज्य सरकार की कोई कमिटी नहीं है। विधायक और विधानपार्षद भी चाहें तो वह मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना से कब्रिस्तानों की घेराबंदी करा सकते हैं।

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ट्विटर पर प्रकट हुए तेजस्वी

पिछले कई दिनों से बिहार के राजनीतिक गलियारे में ये कौतूहल का विषय था कि पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कहाँ लापता हो गए? इस दौरान आश्चर्यजनक रूप से न तो उनका कोई बयान आ रहा था और न ही सोशल मीडिया पर ही उनकी कोई जानकारी मिल पा रही थी। यहां तक कि आरजेडी के नेताओं को भी पता नहीं था कि वो कहां हैं? इसे लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से कई तरह की बयानबाजी हो रही थी। इन सबके बीच तेजस्वी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि वो अपनी पुरानी बीमारी का इलाज करा रहे थे, कहीं भागे नहीं थे और वो जल्द बिहार लौट रहे हैं।

तेजस्वी ने अपने ट्वीट में लिखा कि दोस्तों! पिछले कुछ हफ्तों से मैं अपनी लिगामेंट और एसीएल की चोट से परेशान था और उसी के इलाज में व्यस्त था। हालांकि, मैं राजनीतिक विरोधियों के साथ-साथ मसालेदार कहानियों को पकाने वाले मीडिया की कहानियों को सुनने के लिए जानने के लिए उत्सुक हूं और जल्द ही आ रहा हूं।

इसके साथ ही तेजस्वी ने एक के बाद एक कई ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि लोकसभा में मिली हार से हमने सीख ली है और अब हम नए सिरे से अपनी शुरुआत करेंगे। आगे उन्होंने लिखा लिखा कि एईएस से सौ से अधिक गरीब बच्चों की मौत हो गई है और इस घटना ने मुझे बहुत तकलीफ पहुंचाई है।

बता दें कि लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद से तेजस्वी अचानक लापता हो गए थे, वो कहां हैं? इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। आरजेडी का कोई नेता कह रहा था कि वो क्रिकेट वर्ल्ड कप देखने गए हैं तो कोई कह रहा था कि वो दिल्ली में हैं। इसके साथ ही सत्ता पक्ष को भी मुद्दा मिल गया था और वो इसे लेकर लगातार हमलावर था।

गौरतलब है कि शुक्रवार से बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र शुरू हो चुका है और उस दिन भी सदन में तेजस्वी की अनुपस्थिति की बात उठी थी। राबड़ी देवी को कहना पड़ा था कि तेजस्वी किसी काम में लगे हुए हैं और जल्द पटना लौटेंगे। हालांकि जब मीडियाकर्मियों ने इस बाबत सवाल किया तब वो भड़क गईं और गुस्से में जवाब देते हुए पत्रकारों से कहा कि तेजस्वी आपके घर में है।

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राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए रामविलास

शुक्रवार, 28 जून को केन्द्रीय मंत्री व लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान को बिहार से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिया गया। किसी और उम्मीदवार की अनुपस्थिति में शुक्रवार की शाम नामांकन पत्रों की वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद उन्हें निर्विरोध सांसद निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

गौरतलब है कि बीते लोकसभा चुनाव में बिहार में एनडीए के घटक दलों जदयू, भाजपा और लोजपा के बीच सीट बंटवारे के तहत इन दलों को क्रमश: 17, 17 और 6 सीटें मिली थीं और लोजपा से वादा किया गया था कि पासवान के लिए उसे एक राज्यसभा की सीट भी दी जाएगी। इस तरह रविशंकर प्रसाद के पटना साहिब से सांसद चुने जाने के बाद राज्यसभा की खाली हुई सीट पर पासवान का जाना तय-सा माना जा रहा था।

बहरहाल, केन्द्र सरकार में उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण विभाग में मंत्री रामविलास पासवान ने 21 जून को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया था। मैदान में अकेले होने के कारण उनका चुना जाना औपचारिकता मात्र था। पासवान पहले ही अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे। ऐसे में शुक्रवार को शाम 3 बजे पर्चा वापस लेने की समय-सीमा खत्म होते ही एलजेपी प्रमुख को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिया गया।

बता दें कि पासवान बिहार की अपनी पारंपरिक हाजीपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ते थे। 10 बार संसदीय चुनाव में उतरने वाले पासवान ने इस सीट से आठ बार जीत हासिल की है। इस बार वे चुनाव मैदान में नहीं उतरे। उनकी जगह उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस यहां से सांसद चुने गए।

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