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जिले के किसानों को नि:शुल्क दिया जाएगा 1 लाख कीमती पौधा

केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय कृषि वानिकी योजना के तहत जिला वन विभाग जिले के प्रत्येक किसान को बारिश के मौसम में ऐसे-100 पौधे उपलब्ध कराएगी जो खेत व बागान के मेड़ पर भी लगाकर किसान कम समय में बेहतर आमदनी कर सकते हैं | इस योजना के तहत किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी |

इस बावत वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि पौधों के बड़े हो जाने पर उस पेड़ पर किसानों का ही पूर्ण रूप से अधिकार होगा | उससे होने वाली आय पर भी किसानों का ही हक होगा |

बता दें कि जिले के प्रत्येक किसान को महोगनी, सागवान, शीशम, यूकेलिप्टस जैसी कीमती सौ पौधे मुफ्त में दी जाएगी जिसके लिए किसानों को कुछ पात्रता पूरी करनी होगी- (a) आवेदक कृषक के नाम से भूमि होनी चाहिए | (b) या फिर जमीन उसके नाम से लीज पर हो | (c) इसके साथ ही आवेदन वन प्रमण्डल पदाधिकारी के नाम देकर पौधे प्राप्त कर सकते हैं |

यह भी जान लें कि वन विभाग रोपे गये पौधों की देख-रेख के लिए किसानों को अगले 3 वर्षों तक पैसा भी देगा | प्रोत्साहन के तौर पर उत्तर जीविता के अनुसार प्रथम वर्ष के अंत में ₹14 प्रति पौधा, दूसरे, तीसरे एवं चौथे वर्ष के अंत में 7-7 रु प्रति पौधा किसानों को दिया जाएगा |

चलते-चलते यह भी बता दें कि भारत सरकार की इस योजना से किसानों की दोहरी आय बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण व विस्तार में यह मील का पत्थर साबित होगा |

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि नियोजित शिक्षकों को 26 हज़ार ही क्यों ?

सूबे बिहार में 3 लाख 70 हज़ार नियोजित शिक्षक कार्यरत हैं जिन्हें 20-25 हज़ार रूपये वेतन मिलता है | यदि पटना उच्च न्यायालय के न्यायादेश को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान लिया जाता तो इन शिक्षकों को 35-44 हज़ार रु. वेतन हो जाता |

बता दें कि 2017 में पटना हाईकोर्ट ने इन समाज के सृजनहार शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश दिया था जिसके खिलाफ सूबे की सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई | सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई अब जुलाई के 31 तारीख को होगी |

यह भी जानिए कि शिक्षकों के वेतन का 70% केंद्र सरकार और 30% सूबे की सरकार देती है | इसलिए तो सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा भी है कि जब चपरासी को ₹36 हज़ार रूपये वेतन दे रहे हैं तो समाज के रक्षक और राष्ट्र निर्माता शिक्षकों को केवल 26 हज़ार क्यों ?

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा है कि केंद्र सरकार की रिपोर्ट का अध्ययन कर लें और 31 जुलाई के पहले अपना पक्ष काउंटर एफिडेविट के माध्यम से कोर्ट के सामने उपस्थित करें |

चलते-चलते यह भी बता दें कि बिहार के नियोजित शिक्षकों को केंद्र सरकार इसलिए समान वेतन नहीं देना चाहती क्योंकि बिहार के बाद अन्य राज्यों की ओर से भी इस तरह की मांग उठने लगेगी…………|

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शरद यादव की सदस्यता मामले पर अंतिम सुनवाई की तारीख तय

दिल्ली हाईकोर्ट ने जनता दल यूनाइटेड के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव की सदस्यता मामले पर सुनवाई के लिए अंतिम तारीख तय कर दी है। अंतिम सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख मुकर्रर की गई है। 25 सितंबर को दोनों पक्षों की मौजूदगी में कोर्ट की सुनवाई होगी। इससे पहले 11 सितंबर को कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल शरद यादव की तरफ से पक्ष रखेंगे। इसके बाद 18 सितंबर को जेडीयू के वकील को दिल्ली हाईकोर्ट ने पक्ष रखने का समय दिया है।
ध्यातव्य है कि इससे पूर्व बीते सात जून को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शरद यादव बतौर सांसद मिलने वाले वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधायें नहीं ले सकते, लेकिन वह सरकारी बंगले में रह सकते हैं। गौरतलब है कि शरद यादव को राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जा चुका है, जिसे उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
बता दें कि शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के पिछले साल 15 दिसंबर के आदेश में संशोधन कर दिया है। इसी आदेश में शरद यादव को उनकी याचिका लंबित रहने के दौरान वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधायें प्राप्त करने और सरकारी बंगले में रहने की अनुमति दी थी। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव एवं शरद यादव के स्थान पर राज्यसभा में दल के नेता बनाए गए सांसद आरसीपी सिंह ने हाईकोर्ट में शरद यादव और अली अनवर को अयोग्य करार देने का अनुरोध करते हुए कहा था कि उन्होंने पार्टी के निर्देश का उल्लंघन करते हुए पटना में विपक्षी दलों की सभा में शिरकत की थी।
याद दिला दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा गठबंधन छोड़ पुन: एनडीए के साथ सरकार बना लेने से शरद यादव नाखुश थे। उनकी नाराजगी इस कदर बढ़ गई थी कि उन्होंने बागी तेवर अपना लिए थे। इस दौरान लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी आरजेडी से उनके मधुर संबंध बने और अब अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) बनाकर वे तेजस्वी के साथ कदमताल करने की कोशिश में जुटे हैं।

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शराबबंदी कानून में संशोधन

बिहार सरकार ने शराबबंदी कानून में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है। बुधवार को कैबिनेट ने इसमें कई बदलाव किए। अब राज्य सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में इसे पास कराएगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले महीने ही इस कानून में संशोधन के संकेत दिए थे। कानून में किए गए बदलाव के अनुसार शराब मिलने पर सजा को नरम किया गया है। संशोधन के तहत शराब मिलने पर घर, वाहन और खेत जब्त करने के प्रावधानों में नरमी बरती गई है। साथ ही इसके तहत सामूहिक जुर्माने को खत्म करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट की तरफ से मंजूरी मिल गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शराबबंदी से जुड़े पुराने कानून में सरकार ने आठ संशोधन किए हैं। नए कानून में जो प्रावधान किए जा रहे हैं उसके मुताबिक शराब पीकर पहली बार पकड़े जाने पर कम से कम पचास हजार रुपये जुर्माना देना होगा। इसके साथ ही तीन महीने की सजा का भी प्रावधान रहेगा। लेकिन, अपराध जमानती होगा। घर से शराब बरामद होने पर परिवार के सभी सदस्यों को अब सजा नहीं होगी। इस प्रावधान को हल्का कर दिया गया है। सजा पाया कोई व्यक्ति यदि दोबारा कानून का उल्लंघन करता है तो उसे दोगुनी सजा दी जाएगी, इस कानून को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

शराब को रखने और ट्रांसपोर्टेशन के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले परिसर अथवा वाहन जब्त किए जाएंगे। लेकिन यदि किसी परिसर में कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता पाया जाता है तो ऐसी स्थिति में उक्त परिसर को जब्त नहीं किया जाएगा। पुराने कानून में किसी गांव अथवा समूह में किसी व्यक्ति द्वारा शराब के सेवन पर समूह और गांव पर सामूहिक जुर्माने के प्रावधान थे। नए कानून में इस प्रावधान को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

नए कानून में परिसर को भी परिभाषित किया गया है। पहले के कानून में भवन, दुकान, होटल, रेस्टोरेंट और बार शामिल थे। नए कानून में परिसर की परिभाषा में बूथ, नौका, छोटी नाव और वाहनों को भी शामिल किया गया है। शराब की सूचना रहने पर पुलिस को जानकारी नहीं देने पर पूर्व में सजा के प्रावधान थे, जिन्हें नए कानून में पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आबकारी ऐक्ट के दुरुपयोग की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कानून में बदलाव का संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि “हमारा इरादा इस ऐक्ट में यथोचित संशोधन का है और हमने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में अपील की है, जिस पर अभी सुनवाई होनी है। हमें बताया गया है कि कानून के गलत इस्तेमाल को कम से कम करने के लिए बदलाव लाया जा सकता है। यह काम हम करेंगे। लेकिन शराब पर रोक जारी रहेगी। लोगों को अभी पता नहीं है कि इसका उनके जीवन खास तौर पर गरीब लोगों के जीवन पर कितना असर पड़ रहा है।”

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MLC डॉ.संजीव वित्तरहितों के बकाये सूद सहित दिलाने में लगे हैं

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के MLC डॉ.संजीव कुमार सिंह ने बिहार विधान परिषद के 188 वें सत्र में तारांकित प्रश्न संख्या-ता.ई.-04 (दिनांक 23-03-2018) के माध्यम से यही प्रश्न किया था-

वित्त अनुदानित शिक्षण संस्थानों का अनुदान वर्षों से बकाया रहने के कारण प्रभावित शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के अनुदान को सूद समेत भुगतान करने की तिथि सुनिश्चित की जाय |

बता दें कि संबंधित विषय पर डॉ.संजीव कुमार सिंह एम.एल.सी. द्वारा पूछे गये तारांकित प्रश्न का उत्तर तो सदन में दिया गया, परंतु उत्तरित जवाब से माननीय सदस्यों के असंतुष्ट रहने के कारण माननीय उप सभापति महोदय द्वारा यह निदेश देने की कृपा की गई –

“माननीय मंत्री- वित्तविभाग एवं शिक्षा विभाग तथा प्रधानसचिव- वित्त विभाग एवं शिक्षा विभाग के साथ एक बैठक बुलाई जाय !”

यह भी बता दें कि उक्त निदेश के आलोक में माननीय उप सभापति महोदय ने 16 जुलाई 2018 (सोमवार) को 3:00 बजे अपराहन से परिषद के नवनिर्मित भवन के कमरा नंबर- F-27 में वित्त विभाग एवं शिक्षा विभाग के माननीय मंत्रीगण सहित दोनों विभाग के प्रधान सचिवों व पदाधिकारियों सहित इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने हेतु एक बैठक आहुत करने की कृपा की है | जिसमें विचार-विमर्श हेतु परिषद के एक दर्जन विधान पार्षदों को भी आमंत्रित किया गया है |

मौके पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र ना.यादव मधेपुरी ने विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह को नियोजित शिक्षकों के बाबत ‘समान कार्य – समान वेतन’ दिलाने के लिए संघर्षरत रहने के साथ-साथ वित्तरहित कॉलेज शिक्षकों एवं कर्मियों के बकाये राशि को सूद सहित भुगतान करने हेतु जूझते रहने के लिए कोटि-कोटि साधुवाद दिया तथा हृदय से आशीर्वाद देते हुए यही कहा कि ताजिंदगी एमएलसी रहे अपने पिताश्री शारदा बाबू की तरह शिक्षकों के हित के लिए अहर्निश संघर्ष करते रहें ……!

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अब मजदूर की दो बेटियों को विवाह में मिलेगा 50-50 हज़ार रु

बिहार की नीतीश सरकार का श्रम विभाग अब मजदूरों की दो बेटियों के हाथ पीले कराने का काम करेगा | सूबे के भवन एवं निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा मजदूरों की अधिकतम दो बेटियों की शादी के लिए 50-50 हज़ार रूपये दिये जाने का प्रावधान राज्य सरकार ने किया है |

बता दें कि यह राशि मजदूरों के खाते में सूबे के श्रम विभाग द्वारा सीधे आरटीजीएस के माध्यम से भेज दिया जायेगा | हाँ ! यह याद रहे कि श्रम विभाग में रजिस्टर्ड मजदूरों के लिए ही राज्य सरकार की ओर से उनकी दो बेटियों की शादी के लिए 50-50 हज़ार रु. की यह राशि दी जा रही है | राज्य में पहली बार नीतीश सरकार द्वारा विवाह सहायता योजना की शुरुआत की गई है | इसके लिए ऑनलाइन जानकारी देनी होगी |

चलते-चलते बता दें कि यदि किसी रजिस्टर्ड मजदूर को 2 से अधिक बेटियां हैं तो इस योजना का लाभ केवल दो ही बेटियों को मिलेगा, सभी को नहीं | ध्यातव्य है कि मजदूर किसी भी वर्ग का हो उसके रजिस्ट्रेशन के लिए श्रम विभाग को ही अधिकृत किया गया है |

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राष्ट्रीय कार्यकारिणी: जदयू ने बेबाकी से रखी बात

दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक में जदयू ने कई मुद्दों पर बड़ी बेबाकी से अपना स्टैंड स्पष्ट किया। पार्टी ने जहां एक ओर क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म पर जीरो टॉलरेंस की नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, वहीं दूसरी ओर यह भी साफ-साफ कहा कि जदयू 2019 का चुनाव एनडीए के साथ लड़ेगी। बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने एनडीए में सीट शेयरिंग पर किसी टकराव से भी इनकार किया। साथ ही बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की लड़ाई जारी रखने की बात भी उन्होंने कही।

गौरतलब है कि आज की इस बैठक में जदयू ने सैद्धांतिक तौर पर एक देश एक चुनाव का प्रस्ताव भी पारित किया। इस मुद्दे पर भाजपा के रूख का समर्थन करते हुए पार्टी ने कहा कि इससे चुनाव के खर्चे कम होंगे। साथ ही काला धन पर भी लगाम लगेगा। लेकिन वहीं असम में नागरिकता संशोधन बिल पर भाजपा से अलग राय जाहिर करते हुए पार्टी ने इसका विरोध करने का फैसला किया। बकौल त्‍यागी इस बिल का असम में विरोध है और इससे संवैधानिक संकट भी खड़ा हो जाएगा।

राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मणिपुर में होने जा रहे चुनाव के संदर्भ में केसी त्यागी ने कहा कि इन राज्यों में हम अपने दम पर कुछ सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। त्यागी ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि हम बीजेपी की मदद कर रहे हैं, लेकिन हम न तो उनका सपोर्ट कर रहे हैं और न ही उनका विरोध कर रहे हैं। हम उनकी कोई मदद नहीं कर रहे हैं। वहीं पार्टी के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव के बाहर होने और नई पार्टी बनाए जाने के बाद असली जदयू को लेकर चली रही बहस को लेकर केसी त्यागी ने कहा है कि जदयू एक ही है, जिसका नेतृत्व नीतीश जी कर रहे हैं।

केसी त्‍यागी ने बिहार भाजपा के नेता व केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को आड़े हाथों लिया। बिहार में नवादा की सांप्रदायिक घटना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मंत्री जेल जाकर दंगे के आरोपितों से मिलते हैं। किसी मंत्री का बिहार की व्‍यवस्‍था पर सवाल उठाना, आरोपितों से सहानुभूति दिखाना और उनसे मिलना सर्वथा अनुचित है।

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बेहद अहम है जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

बिहार के मुख्यमंत्री व जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार रविवार को दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव समेत विभिन्न मुद्दों पर अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं। भाजपा के साथ संबंधों में तनाव की खबरों के बीच नीतीश ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले शनिवार को पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की।

जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार की सुबह 10 बजे से जंतर-मंतर स्थित पार्टी मुख्यालय में होनी है। नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की ये पहली बैठक है। पार्टी की इस बैठक को हालिया राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में काफी अहम माना जा रहा है।

2019 में तय लोकसभा चुनाव और 2020 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जदयू के कई नेताओं ने एनडीए में अपनी पहले की प्रभावशाली स्थिति बहाल करने की मांग की है, जैसा 2013 में गठबंधन से नाता तोड़ने से पहले तक उसका प्रभाव था। उधर 2014 के लोकसभा चुनावों में मिली बड़ी सफलता के बाद बिहार में भाजपा स्वयं को पहले से बेहतर स्थिति में पा रही है और बदले हुए परिदृश्य में वह जदयू को बड़ी पार्टी का दर्जा नहीं मिलने देना चाहेगी।

राजनीतिक गलियारे में खबर है कि नीतीश 2019 में 15 लोकसभा सीटें हासिल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। बता दें कि 2014 के आम चुनावों में बीजेपी ने राज्य में 40 लोकसभा सीटों में से 22 पर जीत हासिल की थी और उसके गठबंधन सहयोगियों एलजेपी और आरएलएसपी ने क्रमश: 6 और 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जेडीयू तब केवल 2 सीटें जीत सकी थी।

बहरहाल, जदयू की इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद भविष्य की राजनीति पर उसका रुख सामने आएगा। यह भी खबर है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बिहार दौरे पर आ रहे हैं और सीट शेयरिंग के मुद्दे पर उनकी और नीतीश की मुलाकात होनी है। उससे ठीक पहले हो रही इस बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से हो रही अनावश्यक बयानबाजी का सिलसिला भी थम जाना चाहिए। आगे जो भी हो, राजनीतिक परिस्थिति और समझदारी का तकाजा है कि दोनों पक्षों को अपने-अपने अहं से ऊपर उठकर सीटों को लेकर कोई सम्मानजनक हल निकाल लेना चाहिए। महागठबंधन की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए इससे बेहतर कोई और विकल्प दोनों दलों के पास है भी नहीं।

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जिले के विद्यालयों में एथलेटिक्स को मिलेगा स्तरीय बढ़ावा !

जहाँ एक ओर दिल्ली में 34 साल बाद ‘भारतीय खेल प्राधिकरण’ का नाम बदलकर ‘स्पोर्ट्स इंडिया’ रखने की घोषणा की गई है वहीं राष्ट्रीय विद्यालय एथलेटिक्स खेल प्रतियोगिता-2018 को बिहार में ही माह नवंबर में आयोजित किये जाने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है | मधेपुरा जिला तो कबड्डी एवं टेबुल टेनिस के क्षेत्र में ऊंचाई को प्राप्त कर चुका है परंतु एथलेटिक्स के क्षेत्र में थोड़ा पीछे है ।

बता दें कि 10-12 स्कूलों को मिलाकर एक संकुल केंद्र बनाया जायेगा ताकि स्कूलों में एथलेटिक्स को बढ़ावा मिल सके तथा एथलेटिक्स के प्रति बच्चे-बच्चियों में रुचि पैदा हो सके क्योंकि आजकल खेल करियर का विकल्प बनता जा रहा है जो जीवन के लिए महत्वपूर्ण है |

यह भी जानिए कि बिहार के मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग के सहयोग से इस दिशा में योजना बनाने एवं कला संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया है | मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्तर के कुछ खेलों को भी इसमें शामिल करने की सहमति प्रदान की है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में ही यह प्रतियोगिता आगामी माह नवंबर-2018 में होनी है | इस प्रतियोगिता में बिहार के स्कूलों के चुनिंदा बच्चे-बच्चियाँ ही भाग ले सकेंगे | नवंबर से पहले जिला व राज्यस्तर पर प्रतियोगिता कराकर ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बच्चों का चयन किया जाएगा | प्रत्येक स्कूल के खेल शिक्षक, एचएम एवं अभिभावक खेल में रुचि रखने वाले बच्चों को अभी से प्रोत्साहित करने में अभिरुचि दिखाएं |

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12वीं पास लड़कियों को जुलाई में दे दिए जाएंगे 10 हजार रुपये

बिहार में अविवाहित लड़कियों के लिए इस साल अप्रैल में शुरू की गई मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत इसके लाभार्थियों की पहचान शुरू कर दी गई है। इस योजना के तहत इस साल इंटरमीडिएट परीक्षा पास कर चुकी छात्राओं को दस हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना का लक्ष्य बालिकाओं को शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाना, सम्मानपूर्वक जीवन यापन करने के अवसर प्रदान करना तथा परिवार एवं समाज में उनका आर्थिक योगदान बढ़ाना है।

शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन के अनुसार, ‘शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के उन लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने छह जून को घोषित परिणामों में 12वीं की परीक्षा पास कर ली है।’ महाजन ने बताया कि योग्य उाम्मीदवारों की पहचान के बाद जुलाई में उनके बैंक खाते में धनराशि भेज दी जाएगी।

मुख्यमंत्री कन्या उत्थान के तहत राज्य की सभी बालिकाओं को जन्म से लेकर स्नातक होने तक उम्र व शिक्षा के विभिन्न पड़ावों पर कुल 54, 100 रुपये दिए जाने का प्रावधान है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट ने विगत 19 अप्रैल को इस योजना को मंजूरी दी थी। बालिकाओं के संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वावलंबन पर आधारित इस योजना का उद्देश्य कन्या भ्रूणहत्या को रोकना, कन्याओं के जन्म, निबंधन एवं संपूर्ण टीकाकरण को प्रोत्साहित करना, लिंग अनुपात में वृद्धि लाना, बालिका शिशु मृत्यु दर को कम करना, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना, बाल-विवाह पर अंकुश लागना तथा कुल प्रजनन दर में कमी लाना भी है।

गौरतलब है कि इस योजना के तहत जहां 12वीं पास करने पर प्रत्येक लड़की को 10 हजार रुपये दिए जाएंगे, वहीं स्नातक करने पर 25 हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है। इस योजना का लाभ कन्या के जन्म के साथ ही मिलना शुरू हो जाएगा। इसके तहत कन्या शिशु के जन्म पर माता/पिता/अभिभावक के बैंक खाते में रूपये 2000 तथा 1 वर्ष पूरा होने व आधार पंजीयन कराने पर माता/पिता/अभिभावक के बैंक खाते में रूपये 1000 देने का प्रावधान है। यही नहीं, इस योजना के अंतर्गात स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर कन्या के सम्पूर्ण टीकाकरण कराने पर माता/पिता/अभिभावक के बैंक खाते में रूपये 2000 देने का प्रावधान भी है। इन सबके अतिरिक्त इसके अंतर्गत शिक्षा प्रारंभ होने से लेकर अलग-अलग कक्षाओं में जाने तक पोशाक आदि के लिए भी राशि दिए जाने का प्रावधान है। यहां तक कि इस योजना के तहत वर्ग 7 से 12 तक की कन्याओं को सैनेटरी नैपकीन के लिए भी राशि दिए जाने की व्यवस्था सरकार ने की है।

इस प्रकार समेकित रूप से एक कन्या को जन्म से स्नातक होने तक कुल 54,100 रूपये तक मिल सकेंगे। इस योजना पर प्रति वर्ष 2,221 करोड़ रूपये से अधिक राशि व्यय कर लगभग 1 करोड़ 60 लाख कन्याओं को लाभान्वित करने का अनुमान है।

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