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होली के बाद उम्मीदवारों की घोषणा: तेजस्वी

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को कहा कि बिहार में विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन बरकरार है और राज्य की सभी 40 सीटों के लिए इसके उम्मीदवारों की घोषणा होली के बाद की जाएगी। तेजस्वी ने दिल्ली से पटना हवाई अड्डे पहुंचने के बाद संवदादाताओं को बताया, “महागठबंधन में सब ठीक है। यह एकजुट एवं मजबूत है और हम चुनाव प्रचार में कड़ी टक्कर देंगे। सभी मतभेद सुलझा लिए गए हैं। हम होली के बाद अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे।”

गौरतलब है कि सीटों के बंटवारे पर चर्चा के लिए पिछले कुछ दिनों से तेजस्वी दिल्ली में थे। इधर सीटों के बंटवारे को लेकर कयासबाजी का दौर लगातार जारी है। कभी संभावित सीटों को लेकर तो कभी संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। खासकर एनडीए के तीनों दलों द्वारा सीट बंटवारे की विधिवत घोषणा के बाद पार्टियां और उनके समर्थक कुछ अधिक ही अधीर हो रहे हैं। इस चीज को भांपते हुए लोजद नेता शरद यादव ने दिल्ली में जोर देकर कहा कि 22 मार्च को पटना में होने वाले संवाददाता सम्मेलन में उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी। बता दें कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) भी महागठबंधन का हिस्सा है और ख़बर है कि उनके हिस्से में दो सीटें आ रही हैं।

इस बीच भाजपा सांसद उदय सिंह आज कांग्रेस में शामिल हो गए। कहा जा रहा है कि उन्हें कांग्रेस की टिकट पर पूर्णिया से लड़ाया जाएगा। यह भी लगभग तय माना जा रहा है कि अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस की टिकट पर पटना साहिब सीट से चुनाव लड़ेंगे। पहले उनके आरजेडी से लड़ने की संभावना बताई जा रही थी।

अंदरखाने ख़बर यह भी है कि एक-दो सीटों को लेकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच अभी भी जिच बरकरार है। ऐसी सीटों में दरभंगा अहम है। कांग्रेस यहां से कीर्ति आजाद को चुनावी मैदान में उतारना चाहती है जिन्होंने पांच साल पहले भाजपा की टिकट पर यह सीट जीती थी। वहीं आरजेडी मोहम्मद अली अशरफ फातमी के लिए यह सीट चाहती है। यहां उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है।

बहरहाल, अभी तक के तय फार्मूले के अनुसार आरजेडी 20 या 19 सीट पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कांग्रेस 9 से 10 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। शेष सीटों पर रालोसपा, हम, लोजद और वीआईपी पार्टी के उम्मीदवार किस्मत आजमाएंगे।

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पूर्णिया विश्वविद्यालय जन्म के साथ ही विश्वसनीयता खोने लगा है- एमएलसी डॉ.संजीव

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चयनित बिहार विधान परिषद सदस्य एवं अधिषद व अभिषद सदस्य (टीएमयू भागलपुर और बीएनएमयू मधेपुरा) डॉ.संजीव कुमार सिंह ने खेद प्रकट करते हुए मधेपुरा अबतक से विस्तार पूर्वक पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति के क्रियाकलापों, दोहरे मापदंडों एवं कर्मियों के प्रति अपमानजनक व्यवहारों की जमकर चर्चा की।

लोकप्रिय एवं कर्मठ एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह ने नवसृजित इस विश्वविद्यालय के बाबत जो भी कहा उसे उन्हीं के शब्दों में उद्धृत किया जा रहा है-

नवसृजित पूर्णिया विश्वविद्यालय पूर्णिया आज शैशवावस्था में ही छात्रों, शिक्षकों एवं शिक्षाप्रेमियों के बीच अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है। स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो.राजेश सिंह की विवादास्पद कार्यशैली तथा अनियमित कार्यकलापों के साथ-साथ इनके द्वारा राजभवन एवं राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के विपरीत कार्य किये जाने से विश्वविद्यालय में धीरे-धीरे अकादमिक अस्थिरता का माहौल बनता जा रहा है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत विश्वविद्यालय की अतिमहत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्राधिकार ‘अभिषद’ (Syndicate) का गठन किया गया है। अन्य सभी महत्वपूर्ण परिनियमित समितियों का कार्य कुलपति स्वयं कर रहे हैं। वस्तुतः अपनी गलत अवधारणाओं पर गठित प्राधिकरों / निकायों / समितियों द्वारा लगातार कार्यकारी आदेशों के तहत वित्तीय एवं नीतिगत निर्णय दिये जा रहे हैं। किसी भी प्रकार के निर्णय में जल्दबाजी उनके प्रशासनिक अनुभवहीनता को दर्शाता है।

विदित है कि अपने अल्प कार्यकाल में ही विश्वविद्यालय के प्रथम प्रतिकुलपति एवं वित्त पदाधिकारी ने इनकी कार्यशैली से आहत होकर अपना इस्तीफा आपत्तियों के साथ राजभवन को सौंप दिया। इन पदाधिकारियों का दोष सिर्फ इतना ही था कि अन्य पदाधिकारियों की तरह कार्य नहीं कर बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम एवं बिहार राज्य वित्त नियमावली के आलोक में कार्य करना चाह रहे थे।

वर्तमानत: परीक्षा केंद्रों के गठन में अंगीभूत एवं संबद्ध इकाइयों के छात्र-छात्राओं के बीच दोहरा मापदण्ड अपनाना, शिक्षक संघ-संगठन की अनदेखी, शिक्षकों एवं कर्मियों के साथ अपमानजनक व्यवहार, विभिन्न कोटि के शिक्षकों को मिली प्रोन्नति के फलस्वरूप वेतन निर्धारण की प्रक्रिया में विलंब, नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों को ओरिऐंटेशन जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में भाग लेने से रोकना आदि कार्यों से विश्वविद्यालय का माहौल विस्फोटक होता जा रहा है। अतिशीघ्र ही संबंधित सारे तथ्यों से महामहिम कुलाधिपति महोदय के साथ-साथ माननीय मुख्यमंत्री जी को भी अवगत कराया जाएगा।

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जानिए, एनडीए में किस पार्टी को मिली कौन-कौन-सी सीटें

ज्यों-ज्यों लोकसभा चुनाव का प्रथम चरण सामने आ रहा है, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनडीए और महागठबंधन से जुड़ी पार्टियों के खाते में कौन-कौन-सी सीटें गई हैं और उन सीटों से उम्मीदवार कौन-कौन होंगे। महागठबंधन की बात करें तो वहां अभी भी घमासान की स्थिति है जबकि एनडीए में चीजें सुलझती नजर आ रही हैं। हालांकि कुछ सीटों को लेकर एनडीए में भी ‘इफ-बट’ की स्थिति थी लेकिन तीनों दलों के नेताओं ने समझदारी दिखाते हुए मामले को सुलझा लिया है।

सूत्रों के मुताबिक एनडीए में वाल्मीकिनगर, झंझारपुर, सीतामढ़ी, सुपौल, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, मधेपुरा, भागलपुर, गोपालगंज, सिवान, मुंगेर, नालंदा, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, और काराकाट की सीट जदयू के खाते में गई है, जबकि बेतिया, मोतिहारी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, उजियारपुर, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, अररिया, बांका, छपरा, महाराजगंज, आरा, बक्सर, सासाराम, पटना साहिब और पाटलिपुत्र की सीट पर भाजपा चुनाव लड़ेगी। जदयू दरभंगा सीट संजय झा के लिए चाहती थी लेकिन गठबंधन धर्म के तहत उसे यह सीट छोड़ना पड़ रहा है।

उधर लोजपा की बात करें तो उसे मुंगेर के बदले नवादा सीट दी गई है। जदयू ने जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को चुनाव लड़ाने के लिए लोजपा से मुंगेर सीट ली है। इसके अलावा हाजीपुर, वैशाली, समस्तीपुर, जमुई और खगडिय़ा उसकी सीटिंग सीटें हैं, जहां से उसके प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। उम्मीद है कि अगले 24 घंटों में सीटों की विधिवत घोषणा हो जाएगी।

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सीट शेयरिंग में देरी के कारण लालू कांग्रेस से खफा

कांग्रेस की बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा और नखरे से खफा आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने सीटों के तालमेल और आखिरी दौर की बातचीत के लिए उसे तीन-चार दिनों का अल्टीमेटम दिया है। लालू ने साफ कहा है कि सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस हवा में दावा न करे। क्षेत्रीय दलों का सम्मान करते हुए हैसियत के हिसाब से बात करे। आरजेडी सुप्रीमो ने अपना संदेश कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तक पहुंचा दिया है। उम्मीद है कि लालू के इस कड़े रुख के बाद आज अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इस पर कोई निर्णय हो। इसमें भाग लेने बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल भी गए हुए हैं। लालू को आश्वस्त किया गया है कि इसके बाद आरजेडी एवं अन्य सहयोगी दलों के साथ बैठकर बिहार के मसले को सुलझा लिया जाएगा।

बिहार में पहले चरण में चार सीटों के लिए 18 मार्च से पर्चे भरे जाने हैं। ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए आरजेडी और कांग्रेस के लिए आने वाले दो-तीन दिन काफी महत्वपूर्ण हैं। बातचीत बनी तो ठीक, नहीं तो दूसरे विकल्पों पर भी दोनों दल बढ़ सकते हैं। दरअसल, महागठबंधन में सीट बंटवारे के मसले पर पिछले ढाई महीने से घटक दलों में लगातार बातचीत हो रही है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं निकल सका है, जबकि रांची के रिम्स में इलाज करा रहे लालू ने स्वयं इसके लिए कई बार पहल की है। इधर तेजस्वी यादव भी दिल्ली के कई दौरे कर चुके हैं। प्रदेश के नेताओं से भी बात हो रही है। किंतु नतीजा आज भी वही है, जो ढाई महीने पहले था। अब जबकि चुनाव की घोषणा हो चुकी है, आरजेडी की बेसब्री समझी जा सकती है। इन परिस्थितियों में महागठबंधन के छोटे घटक दल भी लालू पर दबाव बढ़ा रहे हैं। उधर एनडीए में सीटों की हिस्सेदारी तय हो जाने के कारण भी लालू पर दबाव बढ़ रहा है।

राजनीति के जानकार बताते हैं कि आरजेडी की परेशानी और चिढ़ की असली वजह कांग्रेस के बॉरो प्लेयर हैं। कांग्रेस ने दूसरे दलों से ‘प्लेयर’ बुलाकर आरजेडी के मजबूत आधार वाली सीटों पर दावेदारी ठोक रखी है। ऐसी सीटों में दरभंगा, मुंगेर, जहानाबाद, मोतिहारी, शिवहर, मधेपुरा, पूर्णिया और नवादा प्रमुख रूप से शामिल हैं। आरजेडी अपनी इन परंपरागत सीटों से समझौता करने के मूड में नहीं है। हो यह रहा है कि बातचीत के टेबल पर कांग्रेस कीर्ति झा आजाद, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, अनंत सिंह, अरुण कुमार, लवली आनंद, उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह समेत वैसे प्रत्याशियों की सूची थमा देती है, जिन्हें दूसरे दलों से टिकट देने के लिए बुलाया गया है। एक-दो अपवाद को छोड़ लालू इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं हो रहे।

बताया जा रहा है कि लालू ने कांग्रेस को बॉरो प्लेयर को साइड करके बात करने की सलाह दी है। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि कांग्रेस की देखादेखी रालोसपा भी कुछ वैसी सीटों के लिए मचल रही है, जहां आरजेडी का बढिय़ा आधार है। ऐसी सीटों में मोतिहारी और उजियारपुर शामिल हैं।

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जेल से ही एमपी उम्मीदवार चुनेंगे लालू और सिंबल भी बाटेंगे

राजद के राज्य एवं केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सभी लोकसभा एवं डेहरी सीट पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवारों के चयन से लेकर सिंबल बांटने का सारा काम राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ही करेंगे। साथ ही यह भी कि समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन की संभावनाओं को भी राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ही अंतिम रूप देंगे। यह जानकारी राज्यसभा सदस्य व पार्टी प्रवक्ता प्रो.मनोज झा द्वारा मीडिया को दी गयी।

बता दें कि चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू अभी राँची के रिम्स अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं। लालू की गैरमौजूदगी में राबरी देवी की अध्यक्षता में शनिवार को 10, सर्कुलर रोड वाले सरकारी आवास पर हुई बैठक के बाद राजद के राष्ट्रीय महासचिव कमर आलम व प्रवक्ता मनोज झा ने बताया कि अलग-अलग राज्य इकाइयों के प्रस्तावों पर सम्यक विचार करते हुए संसदीय बोर्ड ने उक्त निर्णय लिया है।

यह भी बता दें कि जेल से बाहर नहीं निकलने की स्थिति में सभी राजद प्रत्याशियों को सिंबल देने का विधान राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ही करेंगे जबकि पार्टी के सिंबल पर हस्ताक्षर को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यूँ राजद की ओर से सुप्रीम कोर्ट से जमानत लेने की कोशिश की जा रही है। बैठक में प्रतिपक्ष नेता तेजस्वी यादव, अवध बिहारी चौधरी, जगदानंद सिंह, कांति सिंह, मीसा भारती, रामचंद्र पूर्वे, अब्दुलवारी सिद्धकी, शिवानंद तिवारी, मंगनी लाल मंडल, शिवचंद्र राम, आलोक मेहता, चंद्रिका राय आदि मौजूद थे।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले में हुए शहीदों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए राजद ने इस बार होली नहीं मनाने का फैसला किया है। साथ ही यह भी कि बैठक में तेज प्रताप यादव ने शिरकत नहीं की….. यहाँ तक कि उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय फिलहाल राबड़ी के आवास पर ही रह रही है और तेजप्रताप पिछले 4 महीने से अपनी माँ की आवास पर पैर नहीं रखा है….. अलग सरकारी आवास आवंटित कराकर रह रहे हैं।

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और पप्पू ने तेजस्वी को ‘बंदर’ कह दिया!

जाप (जन अधिकार पार्टी) के संरक्षक और मधेपुरा से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने आरजेडी नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर न केवल तीखा बल्कि अमर्यादित तंज कसा है। उन्होंने बिना नाम लिए इशारों में उन्हें बंदर की संज्ञा दे दी है। उन्होंने कहा कि बिहार में महागठबंधन का नेतृत्‍व बंदर के हाथों में है। यही नहीं, उनकी राय में इसका नेतृत्व कांग्रेस को करना चाहिए। इसके साथ ही उन्‍होंने महागठबंधन में शामिल होने पर दो सीटों की अपनी मांग भी स्‍पष्‍ट कर दी।

गौरतलब है कि पप्‍पू यादव समय-समय पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को अपना नेता बताते रहे हैं, जबकि उनके घोषित और अब बहुत हद तक सर्वमान्य उत्तराधिकारी तेजस्‍वी से उन्हें सख्त परहेज है। उधर तेजस्वी भी पप्पू को महागठबंधन में शामिल किए जाने के पक्ष में नहीं हैं। बता दें कि चारा घोटाले में सजा काट रहे और अस्वस्थ लालू की अनुपस्थिति में तेजस्‍वी ही पार्टी का काम देख रहे हैं।

बहरहाल, बकौल पप्पू यादव बिहार में महागठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस को करना चाहिए। उनकी मानें तो जिस प्रकार भाजपा ने बड़ा दिल दिखाते हुए महाराष्ट्र और बिहार में गठबंधन किया, उसी तरह का दिल कांग्रेस को दिखाना चाहिए। पप्पू ने यह भी बताया कि उन्होंने कांग्रेस को अपनी बात बता दी है। और हाँ, 2 सीटों के साथ महागठबंधन में अपनी जगह बनाने में जुटे पप्पू ने 2020 विधानसभा की योजना भी साझा की और कहा कि उनकी पार्टी 2020 का चुनाव विपक्ष के रूप में लड़ेगी।

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बिहार महागठबंधन में सीटों को लेकर घमासान

बिहार में कांग्रेस-आरजेडी के बीच सीट बंटवारा अभी अधर में ही है और इस बीच महागठबंधन के छोटे दल भी अपने तेवर कड़े कर रहे हैं। इससे सीट शेयरिंग के फॉर्मूले को लेकर दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। बिहार के महागठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस के अलावा रालोसपा, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), हम और लेफ्ट खेमा शामिल है। अब सभी की नजरें आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच हुई हालिया बातचीत के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी कथित तौर पर अपनी पार्टी के लिए पूर्व केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा की अगुआई वाली रालोसपा के बराबर सीटों की मांग कर रहे हैं। उधर लेफ्ट खेमा भी सीट शेयरिंग फॉर्मूले को लेकर सौदेबाजी कर रहा है। सीपीआई कम से कम तीन सीटें मांग रही है, जबकि सीपीआई (एम) की नजरें उजियारपुर सीट पर हैं। इस सीट से फिलहाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय सांसद हैं।

भाजपा के पूर्व सांसद कीर्ति आजाद के कांग्रेस में शामिल होने के बाद दरभंगा सीट को लेकर भी महागठबंधन सहयोगियों के बीच विवाद बढ़ गया है। आजाद पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर दरभंगा सीट से जीते थे और इस बार भी कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर उसी सीट से लड़ना चाहते हैं। लेकिन अब दिक्कत यह है कि वीआईपी नेता मुकेश सहनी भी दरभंगा सीट ही चाहते हैं। वीआईपी को आरजेडी महागठबंधन में इसी सीट का भरोसा देकर लाई थी।

उधर मधेपुरा के सांसद व जाप नेता पप्पू यादव भी कथित तौर पर महागठबंधन का हिस्सा बनने वाले हैं। हालांकि, कांग्रेस ने अभी पप्पू यादव की एंट्री के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है। आरजेडी के एक नेता ने बताया, ‘हमारी पार्टी पप्पू को महागठबंधन में शामिल नहीं करना चाहती। इसलिए कांग्रेस के लिए यह फैसला लेना मुश्किल होगा।‘ गौरतलब है कि पप्पू यादव ने 2014 लोकसभा चुनाव में शरद यादव को हराया था। शरद यादव जेडीयू से निकलने के बाद अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) बना चुके हैं और वह फिर से मधेपुरा से लड़ सकते हैं। हालांकि पेंच यहां भी फंसा हुआ है, सूत्रों की मानें तो आरजेडी इस बात पर अड़ी हुई है कि शरद उसके सिंबल पर लड़ें। अपने कद से समझौता कर शरद ये शर्त मानते हैं कि नहीं, ये देखने की बात होगी।

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बिहार विधानसभा में सवर्ण आरक्षण बिल पारित

बिहार विधानसभा में सोमवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सवर्ण आरक्षण बिल पारित हो गया। बिल के पास होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस बिल को सर्वसम्मति से पारित होना चाहिए था, लेकिन विपक्ष को हंगामा करने के अलावा कुछ सूझता नहीं। विपक्ष का काम है हंगामा करना। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि रांची से मिले आदेश के बाद राजद हंगामा मचा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि केन्द्र द्वारा सवर्ण आरक्षण का ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। अब हमलोग कानून बनाकर राज्य की सेवाओं में इसे लागू कर रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व से जारी 50% आरक्षण पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। ये अतिरिक्त आरक्षण है।

बिहार विधानसभा ने सोमवार को ही 2021 में जाति आधारित जनगणना कराए जाने और विश्वविद्यालयों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू लागू की गई रोस्टर प्रणाली को समाप्त करते हुए पूर्ववत विश्वविद्यालय स्तरीय रोस्टर के आधार पर नियुक्ति करने से संबंधित प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित किया। संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार द्वारा पेश उक्त दोनों प्रस्ताव के पारित होने के बाद अब उन्हें केन्द्र को भेजा जाएगा।

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शहीदों को अंतिम विदाई देने उमड़ा देश !

शहीदों को अंतिम विदाई देने उमड़ा देश !

यादों का संदेश…. फिर भी….. रह गया कुछ शेष !!

पुलवामा आतंकी हमले में हुए भारत माता के सभी 44 शहीद सपूतों के सजदे में झुके संपूर्ण देश के आक्रोश में होने के बावजूद भी जहाँ पीएम नरेन्द्र मोदी ने उन बहादुर सैनिकों और उन्हें जन्म देने वाली माताओं को सलाम करते हुए यही कहा- “आज उन शहीदों के परिवार के साथ संपूर्ण देश खड़ा है….” वहीं इस हमले में सीआरपीएफ के जवान बिहार निवासी हवलदार संजय कुमार सिन्हा एवं सिपाही रतन कुमार ठाकुर द्वारा देश की सुरक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वालों के परिजनों को बिहार सरकार की ओर से सीएम नीतीश कुमार ने 36-36 लाख रुपए देने की घोषणा की है।

बता दें कि शहीदों की विदाई में उमड़ा जनसैलाब ! पूरा देश एकजुट ! आतंक पर वार के लिए सभी दल तैयार ! सारा देश सीआरपीएफ जवानों की शहादत से दु:खी और कुछ भी कर गुजरने को तैयार…. !!

Dr.Madhepuri
Dr. Bhupendra Madhepuri .

दु:ख की इस घड़ी में यह भी जान लें कि संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उद्घोषणा- “शहीदों के परिजनों के साथ आज सारा देश खड़ा है” पर मधेपुरा अबतक से गंभीरतापूर्वक चर्चा की और इसके माध्यम से देश के गृहमंत्री एवं रक्षामंत्री से उन्होंने विनम्र अनुरोध किया है कि वे पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सभी शहीदों के परिजनों के बैंक खाते का नंबर देश के करोड़ों-करोड़ संवेदनशील देशवासियों की जानकारी में दें ताकि भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम सरीखे करोड़ों संवेदनशील भारतीय 44 शहीदों के परिजनों के खाते में 1-1 रूपये डाल सकें तो करोड़ों रुपये हो जाएंगे….. उन्हें बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर शादी-विवाह या अन्य जरूरतों के लिए कभी विवश नहीं होना पड़ेगा…… और तभी सही मायने में दुनिया को “शहीदों के परिजनों के साथ संपूर्ण भारत खड़ा” दिखेगा।

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प्रधानमंत्री ने की परिक्रमा तो गृहमंत्री ने दिया कंधा

पुलवामा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों के पार्थिव शरीर शुक्रवार को श्रीनगर से दिल्ली लाए गए। इस दौरान पालम एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और तीनों सेना के प्रमुखों के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान केन्द्रीय राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने इस दौरान हाथ जोड़कर शहीदों के शवों की परिक्रमा भी की। परिक्रमा का ये क्षण बड़ा ही भावुक कर देने वाला था। पूरा देश उस समय मानो परिक्रमारत था।

Home Minister Rajnath Singh carrying coffin of slain CRPF Soldier killed in Pulwama Attack.
Home Minister Rajnath Singh carrying coffin of slain CRPF Soldier killed in Pulwama Attack.

बहरहाल, खबर है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सभी केन्द्रीय मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मंत्रियों को निर्देश दिया है वे अपने राज्यों के शहीदों के अंतिम संस्कार में हिस्सा लें और उनके परिवारों की हर संभव मदद करें। इससे पहले शहीद जवानों को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़गाम में श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने शहीद के शव को कंधा भी दिया। यह एक तरह से सवा सौ करोड़ भारतीयों की भावना की अभिव्यक्ति थी।
बता दें कि केन्द्र सरकार ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे से संसद की लाइब्रेरी में होगी। माना जा रहा है कि सरकार सभी राजनीतिक दलों को हमले के बारे में पूरी जानकारी देगी और आगे की रणनीति पर भी चर्चा की जा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी (सीसीएस) की बैठक में सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला लिया गया था।
सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार इस हमले के बाद उठाए जाने वाले किसी भी कदम से पहले विपक्षी दलों को भी विश्वास में लेना चाहती है। इसके अलावा यह संदेश देने की भी कोशिश की जाएगी कि संकट की इस घड़ी में सभी पार्टियां साथ हैं। सरकार की कोशिश है कि विपक्ष को विश्वास में लेने के बाद कोई भी कदम उठाना आसान होगा। वैसे चलते-चलते बता दें कि केन्द्र में सरकार की सहयोगी पार्टी शिवसेना इस मुद्दे पर संसद का संयुक्त सत्र बुलाने की मांग कर चुकी है।

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