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सभी समुदाय सुप्रीम कोर्ट के फैसला को मानें… फासला न बढ़ावें

दशकों से चल रही “राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद” की न्यायिक प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति रंजन गोगोई सहित जस्टिस डीवाई चन्द्रचूर, एसए बाबरे, अशोक भूषण एवं अब्दुल नजीर नेे लगातार 40 दिनों तक 5-6 घंटे प्रतिदिन दोनों समुदायों के सभी पक्षों के तथ्यों को सुनकर आज 9 नवंबर को ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया जिसमें ना तो किसी पक्ष की हार हुई और ना किसी की जीत।

तभी तो मधेपुरा के डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क में संपूर्ण भारतीय डॉ.कलाम के करीबी माने जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी के नेतृत्व में दोनों समुदाय के लोग समस्त शांति व सद्भाव के साथ बेफिक्र होकर सफाई करने में लगे दिख रहे हैं। वै हैं- निर्मल तिवारी, राम पदारथ यादव, मो.इम्तियाज, मो.राशिद, मो.महताब, डॉ.अर्जुन यादव, मिस्टर मौलाना की पूरी टीम…..।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सांस्कृतिक, धार्मिक व सामाजिक न्याय को दृष्टिपथ में रखते हुए विधि संगत ऐतिहासिक न्याय दिया है। जहाँ राम जन्मभूमि के साक्ष्यों को आधार मानकर 2.77 एकड़ जमीन रामलला के मंदिर हेतु दिया गया वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय का सम्मान रखते हुए उन्हें लगभग दो गुनी यानी 5 एकड़ जमीन अयोध्या के अंदर ही देने का फैसला सुनाया। इस फैसले का सम्मान देशवासियों के लिए अग्नि परीक्षा है। जिसमें उन्हें उत्तीर्ण होने के लिए शांति, सद्भाव व सुरक्षा को बनाए रखने के साथ-साथ हिन्दू समुदाय को मस्जिद निर्माण में सहयोग देना होगा और मुस्लिम समुदाय को मंदिर निर्माण में। दोनों समुदाय अपने अहम एवं वहम का त्याग करे ! देश के सभी समुदायों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सम्मान किया है।

समाजसेवी डॉ.मधेपुरी से इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सभी समुदाय फैसला को मानें….. फासला ना बढ़ावें। उन्होंने कहा कि भाईचारा व शांति कायम रखने वाले सभी प्रयासों की भरपूर सराहना की जानी चाहिए क्योंकि यह विवाद देश को दीमक की तरह खाये जा रहा था… और खोखला बनाए जा रहा था।

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संगठन चुनाव के बाद बिहार जदयू की पहली बड़ी बैठक

पटना स्थित बिहार प्रदेश जदयू मुख्यालय में बुधवार 6 नवंबर 2019 को नवनियुक्त पार्टी पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह ने की। इस बैठक में पार्टी के सभी क्षेत्रीय संगठन प्रभारी, जिलों के संगठन प्रभारी, सभी जिलाध्यक्ष, सभी प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, प्रदेश प्रवक्ता व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक में विभिन्न स्तरों पर संगठन को और अधिक मजबूत, धारदार व चुस्त-दुरुस्त बनाने के मद्देनज़र आरसीपी सिंह ने पार्टी पदाधिकारियों को कई निर्देश दिए। संगठन चुनाव के बाद हुई इस पहली बड़ी बैठक में कई निर्णय लिए गए जिनमें सभी बूथों पर बूथ अध्यक्ष एवं बूथ सचिव का मनोनयन तथा सभी विधानसभा क्षेत्रों में सम्मेलन का आयोजन किया जाना शामिल है।
पार्टी की इस महत्वपूर्ण बैठक में विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, प्रो. रामवचन राय, ललन कुमार सर्राफ, डॉ. रणवीर नंदन, तनवीर अख्तर, डॉ. रंजू गीता, अभय कुशवाहा, राष्ट्रीय सचिव रविन्द्र सिंह, प्रदेश महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, परमहंस कुमार, चंदन कुमार सिंह, कामाख्या नारायण सिंह, राज्य निर्वाचन पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह, मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह, जदयू मीडिया सेल के अध्यक्ष व क्षेत्रीय संगठन प्रभारी डॉ. अमरदीप, महिला जदयू अध्यक्ष श्वेता विश्वास, अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संतोष महतो आदि मौजूद रहे।
इस मौके पर अपने संबोधन में आरसीपी सिंह ने पार्टी के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि हमलोग उस पार्टी के सिपाही हैं जिसका नेतृत्व नीतीश कुमार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने संगठन को बूथ स्तर तक पूरी मजबूती से स्थापित करना है और बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर श्री नीतीश कुमार ने जितने कार्य किए हैं, उन्हें जन-जन तक पहुँचा देना है; बिहार की महान जनता का आशीर्वाद हमें जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि कौन क्या कह रहा है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें केवल अपने काम पर ध्यान देना है। 2020 में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनेगी। श्री सिंह ने कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का परिणाम इस बार के लोकसभा चुनाव से भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि हर सीट पर हमें विजय हासिल हो, सभी साथियों को इस संकल्प के साथ चुनाव में जाना है।
इस बैठक में आरसीपी सिंह ने संगठन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। 15 नवंबर 2019 से 05 दिसंबर 2019 के बीच उन्होंने सभी बूथों पर बूथ अध्यक्ष एवं बूथ सचिव का चयन अनिवार्य रूप से कर लेने को कहा। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार 15 दिसंबर 2019 से 05 जनवरी 2020 तक सभी विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी का सम्मेलन किया जाना है। आरसीपी सिंह ने कहा कि इसके पूर्व प्रखंड व जिला कमिटियों का गठन अवश्य कर लें।

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नीतीश सरकार द्वारा भूमि विवाद निबटाने हेतु पुलिसवालों को विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था

देशभर में भूमि विवाद से संबंधित मामले थाने से लेकर भिन्न-भिन्न स्तर के न्यायालयों में करोड़ों की संख्या में वर्षों से लंबित हैं | प्रतिदिन अखबार में जितनी भी हत्याओं के समाचार छपते हैं, उनमें आधे से अधिक भूमि विवाद से संबंधित हुआ करते हैं |

बता दें के सूबे बिहार में लंबित पड़े मुकदमों की संख्या करीब डेढ़ लाख है जिसमें 60% से अधिक मामले जमीन विवाद से जुड़े हैं | इन विवादों की संख्या को कम करने के लिए तथा सज्जन लोगों को सहज जीवन जीने के निमित्त नीतीश सरकार ने पुश्तैनी जमीन के लिए पारिवारिक बंटवारे हेतु रजिस्ट्री-फी लाख-करोड़ रुपये की जगह मात्र ₹100 कर दी | साथ ही यह भी नियम बना दिया कि बिना जमाबंदी अब जमीन की खरीद-बिक्री नहीं होगी, परन्तु हाईकोर्ट ने तत्काल इस नियम पर रोक लगा दी है |

यह भी बता दें कि भूमि विवादों को कम करने हेतु पुलिस मुख्यालय के स्तर से एक विशेष पहल की गई है | इसमें सहायक पुलिस निरीक्षक से लेकर पुलिस निरीक्षक स्तर के पदाधिकारियों को जमीन से जुड़े तमाम जरूरी कानून की ट्रेनिंग दी जाएगी | चरणबद्ध तरीके से दी जाने वाली ट्रेनिंग के लिए गृह विभाग ने 1 करोड़ 47 लाख 31 हज़ार रूपये की स्वीकृति भी दे दी है |

जानिए कि गृह विभाग के सभी उच्चाधिकारियों को हिदायत के साथ यह आदेश निर्गत किया है कि इन रुपये को एक महीने के अंतर्गत ट्रेनिंग पर खर्च करें, न कि रुपये की निकासी करके बैंक एकाउंट में रख दें | आदेश में इस बात की भी जानकारी दे दी गई है कि ट्रेनिंग स्थल ए.एन.सिन्हा शोध संस्थान प्रस्तावित है जहाँ पुलिस इंस्पेक्टर रैंक तक के सभी पदाधिकारियों को जमीन से जुड़े तमाम कानूनों की विस्तार से जानकारी दी जाएगी | यहाँ तक की जमीन रिफॉर्म से जुड़े कानूनों की भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी |

 

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सम्पूर्ण समाजवादी महापर्व है छठ

शुचिता, स्वच्छता और समर्पण का महापर्व है छठ। घर-घर में महिलाएं अपने परिवार व बच्चों की कुशलता की कामना लेकर पूरी निष्ठा से करती हैं इस व्रत को। कुछ घरों में तो पुरुष भी रखते हैं यह व्रत। गौर करने की बात है कि छठ ही एकमात्र पर्व है जिसमें बिना किसी कर्मकांड या पंडितों की सहायता के ही श्रद्धालु व्रती चार दिनों तक चलने वाला व्रत करते हैं।
लोकआस्था का यह महापर्व छठ सामाजिक एकता का अद्वितीय प्रतीक है। तभी तो बिहार के कटिहार, नालंदा आदि जिलों के कुछ मुस्लिम परिवार भी वर्षों से इस व्रत को करते आ रहे हैं। भला क्यों नहीं, सूर्यदेव सबसे जुड़े जो हैं और साथ ही जोड़ते भी हैं सबको। बिना किसी भेद-भाव के विभिन्न घाटों पर सभी एक साथ मिलकर सूर्य देव को प्रणाम करते हैं। सभी जानते और मानते हैं कि सूर्य से ही जीवन है और सूर्य से ही प्रकृति और पर्यावरण का अस्तित्व संभव है। तभी तो इस महापर्व में डूबते सूर्य की भी पूजा समान श्रद्धा से होती है।
धार्मिक आस्था से जुड़े महापर्व छठ का आर्थिक पक्ष भी है। जी हाँ, हमें जानना चाहिए कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जीवित रखने में इस पर्व का बड़ा योगदान रहा है। यदि बाजार में इस पर्व में उपयोग में लाई जाने वाली चीजों पर नज़र डालें तो 90 से 95 प्रतिशत सामान गांवों के छोटे-छोटे किसानों के खेत से या फिर कास्तकारों के हाथों के हुनर से बनकर आते हैं। इस पर्व में इस्तेमाल होने वाली चीजों – हल्दी, अदरख, केला, अमरूद, अल्हुआ, सुथनी आदि – का करोड़ों का कारोबार हो जाता है। मधेपुरा की ही बात करें तो केवल इस जिले में ही हल्दी-अदरख का कारोबार तीन से चार करोड़ तक पहुँच जाता है। छठ पूजन की अन्य सामग्रियों को जोड़ दें तो जिले का कुल कारोबार 90 से 95 करोड़ तक पहुँच जाता है। कहने की जरूरत नहीं कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कितनी मजबूती मिलती है।
कुल मिलाकर कहना गलत न होगा कि समाज के हर वर्ग को एक समान लाभ और महत्व देने वाला यह पर्व समाजवाद की सच्ची परिभाषा प्रस्तुत करता है। इस तरह से सम्पूर्ण समाजवादी महापर्व है छठ।

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जीवनदायी सूर्यदेव के प्रति श्रद्धा का पर्व है छठ

पृथ्वी पर जीवन का आधार है सूर्य क्योंकि सूर्य, को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य के आलोक से पृथ्वी पर जीवन प्रकाशित हो उठता है। छठ व्रत इसी जीवनदायी सूर्य देव को आभार प्रकट करने का महापर्व है। ऐसा महापर्व जिसमें बिना किसी भेदभाव के समस्त समाज सामूहिक रूप से डूबते एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देता है।

बता दें कि छठ एक अति प्राचीन महोत्सव है जिसे दिवाली के बाद छठे दिन मनाया जाता है। बिहार झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश… सहित देश के विभिन्न महानगरों में श्रद्धालुओं द्वारा इस प्रकृति प्रेम के प्रतीक छठ पर्व को सर्वाधिक निष्ठा पूर्वक मनाया जाता है। छठ में सभी श्रद्धालु नर-नारी जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। जल तो प्रेम का प्रतीक है चाहे नदी का हो या तालाब का या घर का ही क्यों ना हो।

यह भी जानिए कि यह पर्व सूर्य को आभार व्यक्त करने की परंपरा है। इस पर्व का उद्देश्य सूर्यदेव से अपनेपन को महसूस करना है। सूर्य देव को दूध या जल का अर्घ्य अर्पित किया जाना इस तथ्य को दर्शाता है कि श्रद्धालुओं का मन और हृदय दोनों पवित्र और स्वच्छ बना रहे। फिलहाल पद्मश्री शारदा सिन्हा का छठ गीत वातावरण को सरस बनाने में लग गया है।

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बिहार प्रदेश जदयू की नई कार्यकारिणी का गठन

बिहार प्रदेश जदयू अध्यक्ष व सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह ने राज्य कार्यकारिणी का गठन किया। कार्यकारिणी में 12 उपाध्यक्ष, 19 महासचिव, 11 सचिव, 01 कोषाध्यक्ष, 38 संगठन प्रभारी और 59 सदस्य शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 30 प्रकोष्ठों के अध्यक्षों का भी मनोनयन किया।
प्रदेश जदयू के 12 उपाध्यक्ष हैं: नवल किशोर राय, विश्वनाथ सिंह, एनएन शाही, लखन ठाकुर, रंजीत सिन्हा, श्यामबिहारी राम, रुदय राय, राजन मिश्रा, अंजली सिन्हा, मौलाना उमर नूरानी, प्रो. महेन्द्र प्रसाद सिंह और नरेन्द्र सिंह। जिन 19 नेताओं को महासचिव का दायित्व सौंपा गया है, वे हैं: डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, परमहंस कुमार, चन्दन कुमार सिंह, कामाख्या नारायण सिंह, मंजीत सिंह, अजय पासवान, प्रदीप सिंह, अरुण कुशवाहा, निहोरा प्रसाद यादव, अशोक कुमार बादल, अशोक कुमार सिंह, डॉ. सुहेली मेहता, डॉ. आसमां परवीन, दुर्गेश राय, विभूति गोस्वामी, आसिफ कमाल, डॉ. विपिन कुमार यादव और रामगुलाम राम। विधानपार्षद ललन कुमार सर्राफ को एक बार फिर कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
बशिष्ठ नारायण सिंह ने राज्य कार्यकारिणी का गठन करते हुए पार्टी के 30 प्रकोष्ठों के अध्यक्ष का भी मनोनयन किया। अभय कुशवाहा को एक बार फिर युवा प्रकोष्ठ, तन्वीर अख्तर को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, प्रो. रामवचन राय को बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ, डॉ. अमरदीप को मीडिया प्रकोष्ठ एवं सुनील कुमार को प्रशिक्षण प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूसरी ओर आधे से अधिक प्रकोष्ठों के अध्यक्ष बदले गए हैं। जिन प्रकोष्ठों में नए चेहरे सामने लाए गए हैं, उनमें महिला प्रकोष्ठ (श्वेता विश्वास), व्यावसायिक प्रकोष्ठ (मूलचन्द गोलछा), दलित प्रकोष्ठ (रामप्रवेश पासवान), महादलित प्रकोष्ठ (रुबेल रविदास) और शिक्षा प्रकोष्ठ (डॉ. कन्हैया सिंह) प्रमुख हैं।
चार जिलों में नए जिलाध्यक्ष भी मनोनीत किए गए हैं। सोनेलाल मेहता को खगड़िया, दामोदर रावत को जमुई, सलमान रागिब को नवादा और राकेश कुमार उर्फ पुतुल को आरा (नगर) की जिम्मेदारी दी गई है।

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क्या कहते हैं बिहार में उपचुनाव के परिणाम ?

बिहार में हुए उपचुनाव में एनडीए की अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं आए। उसे उम्मीद थी कि इस बार भी लोकसभा चुनाव जैसे परिणाम ही मिलेंगे, लेकिन स्पष्ट तौर पर इन चुनावों में बड़े नेता और बड़े नारों की जगह स्थानीय मुद्दे और समीकरण अधिक हावी रहे। विधानसभा की पांच सीटों में से जदयू ने चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सफलता केवल नाथनगर में मिली। आरजेडी ने भी चार सीटों पर अपने उम्मीदवार दिए थे, जिनमें बेलहर और सिमरी बख्तियारपुर के रूप में दो सीटें जीतने में वह सफल रही। वहीं, एक-एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार करणजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह और हैदराबाद के सांसद ओवैसी की पार्टी एमआईएमआईएम के कमरूल होदा ने जीत हासिल की। उधर समस्तीपुर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में लोजपा उम्मीदवार प्रिंस राज ने कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार को 1,02,090 वोटों से मात दी।
नाथनगर विधानसभा क्षेत्र में जदयू के लक्ष्मीकांत मंडल ने आरजेडी की राबिया खातून को 5131 वोट से हराया। वहीं, सिमरी बख्तियारपुर सीट से आरजेडी के जफर आलम ने जदयू के डॉ. अरुण कुमार को 15505 वोट से और बेलहर में आरजेडी के रामदेव यादव ने जदयू के लालधारी यादव को 19231 वोट से हराया। उधर दरौंदा में भाजपा के बागी उम्मीदवार करणजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह ने जदयू के अजय कुमार सिंह को 27279 वोट से शिकस्त दी, जबकि किशनगंज में एमआईएमआईएम के कमरूल होदा ने भाजपा की स्वीटी सिंह को 10204 वोट से मात दी। ओवैसी की पार्टी का बिहार में सीट हासिल करना बिहार में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है।
बहरहाल, इन चुनावों में आए परिणाम भले ही एनडीए के अनुकूल न रहे हों, लेकिन बिहार में एनडीए के सर्वमान्य और सबसे बड़े चेहरे नीतीश कुमार के मनोबल पर कोई असर पड़ता नहीं दिखता। इन नतीजों के बाद उन्होंने कहा कि “जनता मालिक होती है। मैं पहले भी कह चुका हूँ। जब भी उपचुनाव में हम कम सीटों पर जीतते हैं तो चुनाव में ज्यादा सीटें जीतते हैं। यह पहले से होता रहा है। अगले चुनाव में हमारी बड़ी जीत होगी।”
नीतीश कुमार के आत्मविश्वास की दाद देनी होगी। लेकिन 2020 के लिए उन्हें अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करना होगा और बाकी दल भी उपचुनाव के नतीजों के आधार पर जोड़-तोड़ में लग चुके होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं।

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महाराष्ट्र की पहली नेत्रहीन महिला प्रांजल पाटिल बनी आईएएस

जब 2016 में प्रांजल ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में 773वीं रैंक हासिल की तो उन्हें भारतीय रेल सर्विस में नौकरी करने का प्रस्ताव मिला, परंतु दृष्टि बाधित होने पर उन्हें नौकरी नहीं मिला भारतीय रेल में |

बता दें कि प्रांजल रेल विभाग के इस निर्णय से बेहद निराश हुई, परंतु वह हार मानने की जगह दोबारा संघर्षपूर्ण प्रयास करने लगी | प्रांजल पुनः UPSC की परीक्षा की तैयारी में जुट गई | अपने लक्ष्य के साथ वह प्रांजल खड़ी रही और अड़़ी रही | इस बार वह 124वीं रैंक लेकर प्रशिक्षणोंपरांत एर्नाकुलम सहायक कलेक्टर के पद पर नियुक्त हुई |

केरल कैडर की प्रांजल पाटिल उपजिलाधिकारी के पदभार संभालते हुए घोषणा की कि वह एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करना चाहती है जिसमें हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के अवसर मिले | महाराष्ट्र के उल्लास नगर  में जन्मी 28 वर्षीया प्रांजल ने एक वाक्य में अपना संदेश दुनिया को यूँ दिया-

बिना किसी विराम के और बिना किसी थकान के मैं चलती रही…..मैंने कभी हार नहीं मानी …. बल्कि यही महसूसती रही कि जो गहराई में उतरता है…. वही मोती पाता है |

अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हुई आईएएस प्रांजल पाटिल ने यही कहा कि मुझे हरदम माता-पिता से प्रेरणाएं मिलती रही | उन्हीं की प्रेरणा से वह जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय से एमए करने के बाद एमफिल और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की | यद्यपि प्रांजल मात्र 6 साल की उम्र में नेत्रहीन हो गई जब खेल-खेल में ही प्रांजल की एक आंख में पेंसिल लग गई | यह हादसा इतना गंभीर रूप ले लिया कि कुछ ही दिनों बाद प्रांजल की दोनों आंखों की रोशनी चली गई | अचानक उजाले से अंधेरे में चली गई इस दुनिया से जूझना…… अब प्रांजल के लिए नेत्रहीन पर्वतारोही कंचन गाबा की तरह सबसे बड़ी चुनौती बन गई है |

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शिवानंद तिवारी: राजनीति से या आरजेडी से ‘छुट्टी’

भीतरी-बाहरी परेशानियों से एक साथ जूझ रही आरजेडी को मंगलवार को एक और झटका लगा। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाने वाले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने मंगलवार को राजनीति से ‘छुट्टी’ पर जाने की घोषणा कर दी। शिवानंद ने खुद को थका हुआ बताते हुए कहा कि अब थकान अनुभव कर रहा हूं और साथ ही स्पष्ट किया कि शरीर से ज्यादा मन की थकान है। उन्होंने संस्मरण लिखने की भी इच्छा जताई है।

बहरहाल, शिवानंद ने मंगलवार को अपने फेसबुक वॉल पर लिखा, ‘अब थकान अनुभव कर रहा हूं। शरीर से ज्यादा मन की थकान है। संस्मरण लिखना चाहता था, वह भी नहीं कर पा रहा हूं, इसलिए जो कर रहा हूं, उससे छुट्टी पाना चाहता हूं। संस्मरण लिखने का प्रयास करूंगा, लिख ही दूंगा, ऐसा भरोसा भी नहीं है लेकिन प्रयास करूंगा। इसलिए आरजेडी की ओर से जिस भूमिका का निर्वहन अब तक मैं कर रहा था, उससे छुट्टी ले रहा हूं।’

हालांकि, शिवानंद तिवारी ने आरजेडी छोड़ने से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि वे पार्टी नहीं छोड़ रहे, केवल राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहेंगे। लेकिन सूत्रों का कहना है कि शिवानंद तिवारी इन दिनों आरजेडी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। पार्टी के कई फैसलों को लेकर उनसे पूछा तक नहीं गया और कई मौकों पर उनकी सलाह को नेतृत्व द्वारा नजरअंदाज किया गया, जिससे वे नाराज चल रहे हैं। बहरहाल, वे अपने निर्णय पर कायम रहेंगे या उनकी राजनीति कोई नया मोड़ लेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

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बिहार में उपचुनाव के लिए प्रचार थमा, 21 अक्टूबर को होगा मतदान

बिहार में विधानसभा की पांच सीटों – सिमरी बख्तियारपुर, नाथनगर, बेलहर, दरौंदा और किशनगंज – तथा एक लोकसभा सीट समस्तीपुर के लिए उपचुनाव के प्रचार का शोर शनिवार शाम को थम गया। इसके बाद रविवार को उम्मीदवार घर-घर जाकर वोट मांगेंगे। इन सभी सीटों के लिए 21 अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव आयोग ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान के लिए सुरक्षा बलों का पुख्ता इंतजाम किया गया है। बता दें कि विधानसभा की इन पांच और लोकसभा की एक सीट के लिए कुल 51 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और इन सभी सीटों के लिए कुल 3258 बूथों पर वोट डाले जाएंगे।

बिहार के इस उपचुनाव में एनडीए ने जहां इसी साल संपन्न हुए लोकसभा चुनावों की तरह एक बार फिर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है और पूरे उत्साह में दिख रहा है, वहीं महागठबंधन पिछले चुनावी सदमे से अभी तक पूरी तरह उबरा नहीं दिख रहा। 24 अक्टूबर को आने वाले परिणामों में 2020 के संकेत छिपे होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं।

बहरहाल, इन उपचुनावों में नाथनगर से जदयू के प्रत्याशी लक्ष्मीकांत मंडल हैं। उनका मुकाबला राजद की राबिया खातून और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हम के अजय कुमार राय से है। वहीं, सिमरी बख्तियारपुर से जदयू के डॉ. अरुण कुमार उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला राजद के जफर आलम और महागठबंधन में रहे मुकेश सहनी की पार्टी वीआइपी के उम्मीदवार से है। बेलहर से जदयू के उम्मीदवार लालधारी यादव हैं। उनका मुकाबला राजद के रामदेव यादव से है। दरौंदा से जदयू के उम्मीदवार अजय सिंह हैं। उनका मुकाबला राजद के उमेश सिंह से है। वहीं, किशनगंज सीट पर भाजपा उम्मीदवार स्वीटी सिंह का मुकाबला कांग्रेस की शाइदा बानो से है। समस्तीपुर लोकसभा सीट पर एनडीए की ओर से लोजपा के प्रिंसराज चुनाव मैदान में हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार से है।

चलते-चलते बता दें कि समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में सुबह सात से शाम पांच बजे तक वोटिंग होगी, जबकि एक विधानसभा कुशेश्वरस्थान में सुबह सात से शाम चार बजे तक मतदान का समय तय किया गया है। वहीं, विधानसभा उपचुनाव वाले क्षेत्रों में किशनगंज, दरौंदा, नाथनगर में सुबह सात से शाम पांच बजे तक वोटिंग होगी, जबकि, सिमरी बख्तियारपुर और बेलहर में सुबह सात से शाम चार बजे तक मतदान का समय चुनाव आयोग तय किया है।

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