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जानें एग्जिट पोल में बिहार की चर्चित सीटों के परिणाम

लोकसभा चुनाव का शोर थमने के बाद अब हर जगह एग्जिट पोल की चर्चा है। एग्जिट पोल में ज्यादातर एजेंसियां एनडीए को बहुमत दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वापसी तयप्राय दिख रही है। बिहार की बात करें तो अधिकांश एग्जिट पोल में यहां की 40 सीटों में 30 से ज्यादा सीटें एनडीए को मिलती दिख रही हैं। चैनल आजतक ने तो 38 से 40 सीटें तक एनडीए के खाते में जाने की बात कही है। कुल मिलाकर मोदी-नीतीश-रामविलास की तिकड़ी यहां काम कर गई है, इसमें कोई दो राय नहीं। सीटें एग्जिट पोल से कुछ कम या ज्यादा भले रह जाएं पर इतना तय है कि आरजेडी, कांग्रेस, रालोसपा, हम और वीआईपी का गठबंधन बिहार की जनता को कुछ रास नहीं आया।

बहरहाल, यहां हम विभिन्न एग्जिट पोल के आधार पर बिहार की कुछ चर्चित सीटों के संभावित परिणाम से अवगत कराने जा रहे हैं। शुरू करते हैं मधेपुरा से जहां आरजेडी के टिकट पर लड़े लोजद नेता शरद यादव और एनडीए व यूपीए से गोटी बिठा पाने में नाकाम रहे जाप नेता और वर्तमान सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का मुकाबला बिहार सरकार के मंत्री और जदयू उम्मीदवार दिनेश चन्द्र यादव से है। एग्जिट पोल की मानें तो मधेपुरा की इस बहुचर्चित सीट से दिनेश चन्द्र यादव बाजी मार सकते हैं। जीत-हार का फासला चाहे जो हो, शरद और पप्पू की हार यहां तय मानी जा रही है। कोसी की दूसरी सीट सुपौल भी स्पष्ट तौर पर जदयू के खाते में जाती दिख रही है। यहां से वर्तमान सांसद और पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन को जदयू उम्मीदवार दिलेश्वर कामत मात देने जा रहे हैं।

अब रुख करते हैं बेगूसराय का जिसने इस चुनाव में देश भर का ध्यान आकृष्ट किया है। एग्जिट पोल के मुताबिक बेगूसराय में गिरिराज सिंह बाजी मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे कन्हैया कुमार और तनवीर हसन पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। एग्जिट पोल के अनुसार गिरिराज बेगूसराय पर भाजपा का विजय पताका फहरा सकते हैं और कन्हैया कुमार को मुंह की खानी पड़ सकती है।

राजधानी पटना से जुड़ी दोनों सीटें पटना साहिब और पाटलिपुत्र का मुकाबला भी कम दिलचस्प नहीं, लेकिन दोनों ही सीटें भाजपा को मिलती दिख रही हैं। पटना साहिब में जहां भाजपा के रविशंकर प्रसाद शत्रुघ्न सिन्हा को इस बार ‘खामोश’ करने जा रहे हैं, वहीं पाटलिपुत्र सीट पर आरजेडी की मीसा भारती पिता लालू प्रसाद यादव के नाम पर सहानुभूति जुटाने में विफल होती दिखाई पड़ रही हैं। यह सीट फिर भाजपा के राम कृपाल यादव के जीतने की पूरी संभावना है।

बिहार की जमुई लोकसभा सीट पर लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को मुश्किल मुकाबले में बताया जा रहा था, लेकिन एग्जिट पोल के अनुसार वे रालोसपा के भूदेव चौधरी पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। वहीं मुंगेर से जदयू के लिए अच्छी खबर है। वहां से राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी और कांग्रेस उम्मीदवार नीलम देवी को हराने जा रहे हैं।

वैशाली में आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह पार्टी के लिए जीत का सूखा खत्म करते दिख रहे हैं। एग्जिट पोल में वे लोजपा की वीणा देवी को हराते दिख रहे हैं। वहीं, आरजेडी के लिए प्रतिष्ठा की सीट सारण पर एक बार फिर भाजपा का परचम लहराने जा रहा है। यहां से राजीव प्रताप रूड़ी लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय को पटखनी देने जा रहे हैं।

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‘समान कार्य-समान वेतन’ पर कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह की बेबाक स्वीकारोक्ति !

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “समान कार्य – समान वेतन” पर दिनांक 10 मार्च 2019 को पारित न्यायनिर्णय के बाबत कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षक प्रतिनिधि एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह ने मधेपुरा अबतक को दो दिन बाद यानि 13 मई 2019 को बेबाकी के साथ यही कहा- “शिक्षकों के सारे संगठनों की एकजुटता बनी रहे….. मैं शिक्षक संगठनों के द्वारा किये गये सभी संघर्षों की तरह इस संघर्ष में भी निष्ठापूर्वक साथ रहा हूँ…. और पूरी निष्ठा के साथ सदैव साथ रहूंगा….. शिक्षकों के हित के लिए सदा लड़ा हूँ और सदैव लडूंगा….. साथ दिया हूँ और सदा साथ दूंगा |”

सर्वोच्च न्यायालय के पारित न्यायनिर्णय के बाबत आप शिक्षकों के प्रिय प्रतिनिधि विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह द्वारा “जय शिक्षक, जय शिक्षक संघ” के प्रति अभिव्यक्त भावनाएं…. हू-ब-हू उन्हीं के शब्दों में-

“एक शिक्षक प्रतिनिधि के रूप में बेबाकी से स्वीकार करता हूँ कि ‘समान कार्य – समान वेतन’ के मामले में राज्य सरकार की बेरुखी के कारण ही विभिन्न शिक्षक संगठनों को अपेक्षित न्याय हेतु पटना उच्च न्यायालय जाना पड़ा | पुनः पटना उच्च न्यायालय द्वारा इसी मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ही पूर्व पारित न्यायनिर्णय के आलोक में पूर्ण सकारात्मक फैसला सुनाया गया….. लेकिन राज्य सरकार द्वारा मुख्यरूप से अपने वित्तीय संसाधनों के अभाव एवं अन्य कतिपय कारणों का हवाला देते हुए शिक्षक हित के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने….. दूसरी तरफ विभिन्न शिक्षक संगठनों के नेतृत्व द्वारा इस चुनौती को स्वीकारने के पश्चात् बड़े-बड़े विद्वान एवं नामी-गिरामी अधिवक्ताओं से तथ्यात्मक सार्थक बहस कराने के उपरांत 10.05.2019 को पारित न्यायनिर्णय से स्वयं सर्वोच्च न्यायालय आज अपनी ही न्यायिक निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर विरोधाभासी स्थिति में है |

सच तो यह है कि ‘न्याय के साथ विकास’ के क्रम में आज संपूर्ण शिक्षक वर्ग ही पीछे छूट गया है….. चाहे नियोजित शिक्षक हों, वित्तरहित शिक्षक संस्थानों के शिक्षक हों, अल्पसंख्यक विद्यालय के शिक्षक हों या फिर मदरसा-संस्कृत शिक्षक हों | ऐसी स्थिति में शिक्षकों को अपने शैक्षिक दायित्व पर कम और अपनी हकमारी की लड़ाई पर ज्यादा ध्यान देना स्वाभाविक है |

लगभग 10 वर्षों के अंतराल में तो राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दल मिलित में ही रहे लेकिन सफलता आंशिक ही मिली | इस मुद्दे पर आज राजनीति जितनी भी हो लेकिन जब तक शिक्षकों के विभिन्न सांगठनिक समूहों की कोई मिलित एवं कारगर रणनीति नहीं बनेगी तबतक संघर्ष भी सार्थक नहीं हो सकता | अपने संवैधानिक एवं मौलिक अधिकारों को हासिल करने हेतु अंततः हमें तरीके भी लोकतांत्रिक ही अपनाने होंगे ताकि सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति का झुकाव इस दिशा में हो |

इस आंदोलन में सभी कोटि के शिक्षकों द्वारा अपना हक प्राप्त करने की सामूहिक प्रतिबद्धता तथा उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण सभी संघ-संगठनों के साथ-साथ शिक्षकों की एकजुटता से ही सफलता संभव है | मैं भी इस संघर्ष में सदैव साथ रहा हूं और सदैव रहूंगा…… जय शिक्षक, जय शिक्षक संघ !!”

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस फैसले के बाबत जब समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से पूछा गया तो डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि इस फैसले के खिलाफ सभी शिक्षक-संगठनों को एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका अवश्य दायर करनी चाहिए क्योंकि यह फैसला भारतीय संविधान की आत्मा की आवाज को अनसुनी करने जैसा है | डॉ.मधेपुरी ने विधायकों एवं सांसदों को ₹500 प्रतिमाह मोबाइल चार्ज की जगह ₹15,000 प्रतिमाह दिये जाने पर प्रश्न उठाते हुए यही कहा कि प्रतिनिधियों को ऐसे अनाप-सनाप रूपये भुगतान करने के लिए सरकारी खजाने में पैसे कहाँ से आते हैं…..?

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जदयू ने लॉन्च किया आधिकारिक वेब ऐप

जदयू ने मंगलवार को अपना आधिकारिक वेब ऐप लॉन्च किया। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने पार्टी मुख्यालय में इसका लोकार्पण किया। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं अनिल कुमार, प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन, डॉ. सुहेली मेहता, डॉ. सुनील कुमार, अंजुम आरा, निखिल मंडल एवं जदयू मीडिया सेल के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे जिनमें धनंजय शर्मा, डॉ. धीरज सिन्हा, प्रवीण तिवारी, सैयद नजम, अभय विश्वास भट्ट, विनीता स्टेफी, प्रिंस श्रीवास्तव, प्रभात कुमार आर्य, नबीस नवेन्दु, राहुल सिन्हा, आशुतोष सिंह राठौड़ एवं आदित्य राज प्रमुख हैं।

इस मौके पर बशिष्ठ नारायण सिंह ने जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और उनकी टीम को बधाई देते हुए जदयू ऐप को पार्टी के लिए बड़ी सूचना और उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि जदयू वैचारिक स्तर पर बाकी पार्टियों से अलग है और नीतीश कुमार के नेतृत्व में हमने ऐसे कई कार्य किए हैं जो पहले नहीं हुए और जिनसे न केवल बिहार बल्कि देश की राजनीति को नया आयाम मिला है। जदयू ऐप से हमारे इन विचारों और कार्यों को तकनीक की ताकत मिलेगी और हमारी पहुँच अधिक-से-अधिक लोगों तक हो पाएगी।

जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने ऐप की विशेषताओं के ऊपर प्रकाश डालते हुए इसे पार्टी का ऑनलाइन वर्जन बताया। उन्होंने कहा कि इस ऐप के माध्यम से हमने अगले तीन महीने में एक करोड़ लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा है और इस कार्य के लिए प्रखंड, जिला, प्रमंडल और प्रदेश स्तर को मिलाकर नीतीश कुमार की नीतियों और आदर्शों में आस्था रखने वाले 700 समर्पित लोगों की टीम तैयार की है।

ध्यातव्य है कि जदयू ऐप एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर एक साथ उपलब्ध है। इसके माध्यम से जदयू के वेब पोर्टल www.janatadalunited.online तक लोगों की पहुँच बेहद आसान हो जाएगी। इसे डाउनलोड करने के साथ दल के सभी कार्यक्रमों और सरकार की सारी उपलब्धियों से आप रू-ब-रू हो सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से सैकड़ों भाषण, वीडियो, फोटो गैलरी और न्यूज वॉल को एक्सेस किया जा सकता है। पार्टी की वेब पत्रिका ‘जदयू संदेश’ और पार्टी द्वारा प्रकाशित सारी अध्ययन-सामग्री यहां उपलब्ध है और साथ ही लोगों को पार्टी से संवाद करने की सुविधा भी यहां दी गई है।

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देश के टॉप टेन सीटों में होगी पटना साहिब की सीट: रविशंकर प्रसाद

रविवार, 5 मई को वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री एवं पटना साहिब से एनडीए समर्थित भाजपा उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद दीघा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुर्जी पहुंचे जहां जदयू के प्रदेश प्रवक्ता एवं दीघा विधानसभा से जदयू के पूर्व प्रत्याशी राजीव रंजन के नेतृत्व में चुनावी सभा रखी गई थी। इस मौके पर बड़ी संख्या में मौजूद जदयू कार्यकर्ताओं ने रविशंकर प्रसाद का भव्य स्वागत किया। सभा में उपस्थित लोगों में भाजपा विधायक संजीव चौरसिया, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप, जदयू तकनीकी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रामचरित्र प्रसाद, जदयू के वरीय नेता शबीउद्दीन अहमद ‘शीफू’, जदयू की वरीय नेत्री प्रतिभा सिन्हा, कंचनमाला चौधरी, पूनम दास, शोभा देवी, दीघा विधानसभा के संगठन प्रभारी नागेन्द्र कुमार, जदयू मीडिया सेल के मुख्यालय प्रभारी धनंजय शर्मा, पटना महानगर युवा जदयू के अध्यक्ष राहुल खंडेलवाल एवं जदयू दलित प्रकोष्ठ की प्रवक्ता विनीता स्टेफी प्रमुख हैं। सभा की अध्यक्षता कुर्जी सेक्टर जदयू के अध्यक्ष अरुण सिंह ने की, जबकि संचालन पटना महानगर जदयू के अध्यक्ष अवधेश सिंह ने किया।
कुर्जी में जदयू कार्यकर्ताओं के अभिनंदन और समर्थन से अभिभूत पटना साहिब से एनडीए उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि लोगों से मिल रहे अपार स्नेह की बदौलत मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि पटना साहिब की सीट सर्वाधिक मतों से जीती गई सीटों में देश भर में टॉप टेन में होगी। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा से बड़ा सोचने और करने में यकीन रखता आया हूँ। पटना साहिब के वर्तमान सांसद का नाम लिए बिना बस इतना कहूँगा कि यहां लड़ाई प्रतिबद्धता और अवसरवादिता की है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में जहां एनडीए ने हर मंच से अपनी निष्ठा और एकजुटता का परिचय दिया है, वहीं महागठबंधन केवल अवसरवादियों के जमावड़ा के रूप में दिखा है और वो भी बिखरा हुआ।
जदयू के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि आज देश बड़ी उम्मीद से नरेन्द्र मोदी की ओर देख रहा है और हमें बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बड़ी जीत हासिल कर उनके हाथों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद के मतों का अंतर कम-से-कम चार लाख वोटों का होगा और उसमें दीघा विधानसभा की बड़ी सहभागिता होगी। उन्होंने कहा कि अगली सरकार के कैबिनेट में रविशंकर प्रसाद पटना साहिब के सांसद के रूप में बैठेंगे, यह हम सबके लिए गौरव की बात होगी।
जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने कहा कि पटना साहिब को अब अभिनेता नहीं असली जीवन का नायक चाहिए और वो रविशंकर प्रसाद हैं। उन्होंने कहा कि चाहे विजन हो या वैचारिक प्रतिबद्धता, पटना साहिब का प्रतिनिधि रविशंकर प्रसाद से बेहतर नहीं हो सकता। हमें इस बार पटना साहिब से मतों के अंतर का रिकॉर्ड बनाना है।

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सावधान! बिहार में भी रहेगा ‘फानी’ का असर!!

बिहार में तूफान की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार दो मई से अगले तीन दिनों तक चक्रवाती तूफान ‘फानी’ का असर बिहार में भी रहेगा। बताया गया है कि बंगाल की खाड़ी से उठा यह तूफान गंगा के तटीय क्षेत्रों में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से प्रवेश करेगा और इसका असर दो से चार मई तक पूर्वी बिहार और गंगा के तटीय क्षेत्रों में रहेगा। वैसे मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ‘फानी’ का सबसे अधिक असर ओडिशा में होगा।

गौरतलब है कि ‘फानी’ के कारण कुछ जगहों पर तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। इसके कारण पटना, गया, भागलपुर, पूर्णिया, फारबिसगंज, किशनगंज, अररिया और छपरा में तापमान में आठ डिग्री सेल्सियस तक कमी आएगी। अनुमान है कि इसका असर तूफान के बाद भी रहेगा और छह मई तक अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच सकता है। इस दौरान बिहार में बादल छाए रहने के कारण गर्मी से राहत मिलेगी। मई के प्रथम सप्ताह के बाद मौसम सामान्य हो जाने की संभावना है।

चलते-चलते बता दें कि चक्रवाती तूफान ‘फानी’ को लेकर पूरा देश पहले से ही अलर्ट है। किसी बड़े संकट से बचने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने ओडिशा में ‘यलो वार्निंग’ जारी की है। पुरी प्रशासन ने पर्यटकों को दो मई तक पुरी छोड़ने का निर्देश दिया है। वहां सरकारी डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। तूफान से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने भी अपनी कमर कस ली है।

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मुजफ्फरपुर में मोदी की हुंकार: विपक्ष चार चरण में ही चित्त

मंगलवार को मुजफ्फरपुर के पताही हवाई अड्डा मैदान में एनडीए की विजय संकल्प रैली का भव्य आयोजन हुआ जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी समेत एनडीए के कई बड़े नेता शामिल हुए। तेज धूप में भी भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी निश्चित रूप से एनडीए के हौसले को बढ़ाने वाली थी। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत तमाम नेताओं के संबोधन में इसकी स्पष्ट झलक दिखी भी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि चार चरणों के चुनाव के बाद विपक्षी दल चारों खाने चित्त हो चुके हैं। अब अगले चरणों में यह तय होना है कि विपक्ष की हार कितनी बड़ी होगी और एनडीए की जीत कितनी भव्य। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और राजद नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग जेल में हैं तो कुछ जेल के दरवाजे पर। जो बेल पर हैं और जो बेल के लिए कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगा रहे हैं, वे एक मिनट भी केन्द्र में मजबूत सरकार को बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश में हिंसा फैलाने वाली हर ताकत को उखाड़ फेंकने का संकल्प भी दोहराया और भीड़ से पूछा – आतंकवाद को कौन खत्म कर सकता है? जवाब आया – मोदी। प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे देश के भीतर हो या सीमा के उस पार, आतंकवाद की फैक्ट्री जहां भी होगी, हम घर में घुसकर मारेंगे। किसी हाल में छोड़ेंगे नहीं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने देश का मान बढ़ाया है। आतंकवाद के बाद त्वरित कार्रवाई कर उन्होंने देश में ही नहीं विदेशों में भी भारत के नाम को शीर्ष पर रखा है। राज्य में हुए विकास में केन्द्र के योगदान की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र ने बिहार को सड़क और पुल-पुलिया बनाने के लिए पचास हजार करोड़ रुपए दिए हैं। अगर केन्द्र में फिर से एनडीए सरकार आती है तो बिहार के विकास को और गति मिलगी।
केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने इस मौके पर कहा कि कांग्रेस आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों को डरा रही है। धर्म के नाम पर समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है। मगर जनता कांग्रेस की चाल समझ चुकी है। कांग्रेस ने किसी भी धर्म और समाज के लिए कभी कुछ नहीं किया। मोदी सरकार ने पांच साल में देश की दिशा बदल दी है।
उधर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि यह आरोप हास्यास्पद और गलत है कि लालू यादव को फंसाया गया है। सरकार ने नहीं, न्यायालय ने उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी बताया है। एक नहीं कई बार सुप्रीम कोर्ट से भी उनकी बेल अर्जी खारिज हो चुकी है।
इस मौके पर सभी नेताओं ने मुजफ्फरपुर से भाजपा प्रत्याशी अजय निषाद, वैशाली से लोजपा प्रत्याशी वीणा देवी और सीतामढ़ी से जदयू उम्मीदवार सुनील कुमार पिन्टू को जिताने की अपील की।

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अब मनचलों की खैर नहीं, दाँत खट्टे कर देंगी छात्राएँ

बिहार में विशेष रूप से छात्राओं के स्कूल आने-जाने के दौरान मनचलों द्वारा बढ़ रहे हमले एवं छेड़छाड़ की घटनाओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए प्रदेश मुख्यालय के पटना जिला प्रशासन द्वारा इस साल से उच्च माध्यमिक विद्यालयों की 9वीं एवं 10वीं वर्ग की छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दिलवाना आरंभ कर दिया गया है।

बता दें कि इस साल शुरू किये गए छात्राओं द्वारा इस सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम के तहत पटना जिले के 120 माध्यमिक विद्यालयों की 4600 छात्राओं को ट्रेंड किया गया है। प्रशासन के कुछ उत्साहित एवं समर्पित अफसरों द्वारा इस कार्यक्रम को और अधिक विस्तार दिये जा रहे हैं।

यह भी जानिए कि छात्राओं को 46 मास्टर ट्रेनर्स द्वारा इस सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग में जूडो-कराटे व ताइक्वांडो आदि विधाओं की ट्रेनिंग दी जा रही है जिससे सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। ट्रेनिंग प्राप्त छात्राएं अब अपने स्कूल की दूसरी लड़कियों को सिखायेंगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार नए वित्तीय वर्ष में अलग से बजट स्वीकृत होते ही सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग का दूसरा शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। तब मनचलों की खैर नहीं रहेगी…. दाँत खट्टे कर देगी यह सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग प्राप्त छात्राएं।

मधेपुरा अबतक द्वारा समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से जूडो-कराटे के बाबत विशेष जानकारी हेतु पूछे जाने पर उन्होंने इतिहास को संदर्भित करते हुए कहा कि वर्ष 1932 में जापान ने चीन पर हमला कर कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। युद्ध में चीनी सैनिकों के हाथ से हथियार छूट जाने पर हाथ (यानी ‘कर’) से ही अपनी सुरक्षा करने की विधियों की ईज़ाद की गई जिसे ‘कराटे’ नाम दिया गया। तभी से उस ‘कराटे’ शब्द को चायनीज हैंड एवं जापानी भाषा में ‘Empty Hand’ कहा जाने लगा। संक्षेप में उसी निहत्थे युद्ध प्रणाली को कराटे कहा जाता है जिसे ओलंपिक खेल में शामिल किये जाने हेतु डाॅ.मधेपुरी का प्रयास जारी है। यदि इस प्रयास में डाॅ.मधेपुरी को सफलता मिली तो मधेपुरा की कराटे-क्वीन सोनीराज एक-न-एक दिन ओलंपिक मेडल जीतकर मधेपुरा की शान बनेगी एवं परचम लहरायेगी….।

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विश्व धरोहर दिवस की शुरुआत कब से और क्यों जरूरी है ?

सर्वप्रथम ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल आफ माउंटेंस एंड साइट द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में 18 अप्रैल 1982 को विश्व धरोहर दिवस मनाने का सुझाव दिया गया, जिसे कार्यकारी समिति द्वारा सर्वसम्मति से मान लिया गया। अगले वर्ष 1983 के नवंबर में यूनेस्को सम्मेलन के 22वें सत्र में यह प्रस्ताव पारित कर दिया गया कि अब प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जायेगा यानी 18 अप्रैल 1984 से अब तक प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को World Heritage Day मनाया जाता है।

बता दें कि अबतक संसार में लगभग 1052 स्थलों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया जा चुका है। इनमें इटली की 49, चीन की 45, स्पेन की 44, फ्रांस व जर्मनी की 38 और भारत की 35 धरोहरें शामिल हैं- जिनमें प्रमुख भारतीय धरोहरें हैं- ताजमहल, आगरा का किला, अजंता की गुफाएं, सांची का बौद्ध स्मारक, एलोरा की गुफाएं, खजुराहो, हुमायूं का मकबरा, बोध गया मंदिर, लालकिला, नालंदा विश्वविद्यालय आदि।

यह भी बता दें कि जब 15 जुलाई 2016 को यूनेस्को ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया तो विश्व के प्रथम विश्वविद्यालय नालंदा की खोई प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई मिल गयी। विश्व धरोहर में शामिल होने वाली यह भारत की 33वीं धरोहर है।

जानिए कि इस नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. के आस-पास गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी…… 12वीं शताब्दी तक यह दुनिया का पहला आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बना रहा और इसमें दुनिया भर के 10 हज़ार छात्र रहकर शिक्षा ग्रहण करते रहे।

800 वर्षों तक शिक्षा दान का केन्द्र बना यह विश्वविद्यालय नालंदा जिसे तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी द्वारा जला दिया गया। वहाँ के पुस्तकालयों में इतनी पुस्तकें थी कि 6 महीने तक आग सुलगती रही, बुझ नहीं पायी। पांचवी से बारहवीं शताब्दी में नालंदा बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना रहा। लाल ईंट से बनी प्रार्थनालय वाली इमारतें आज भी सुरक्षित हैं | परंतु, वहाँ एक अदद अच्छा सा होटल तक पर्यटकों के लिए उपलब्ध नहीं है….. और आगे………।

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विश्व होम्योपैथी दिवस पर नीतीश ने लहराया ऐतिहासिक परचम

आज एक नहीं….. बिहार के दो-दो नीतीश का परचम चतुर्दिक लहरा रहा है। एक हैं डॉ.नीतीश जिसने मुंगेर केे  एक साधारण परिवार व ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर दुनिया के होम्योपैथी चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है और दूसरे हैं इंजीनियर नीतीश जो बिहार में न्याय के साथ विकास की गंगा बहाने में लगे हैं और अपना बेशकीमती जीवन बिना किसी चाहत के दलितों-शोषितों के सेवार्थ न्योछावर करने में लगे हैं।

बता दें कि जर्मनी से….. बंगाल के रास्ते भारत पहूँची होम्योपैथी की सालाना ग्रोथ 22% है जो जल्द ही चिकित्सा का प्रमुख विकल्प होने जा रहा है। भला क्यों नहीं, फ्रांस में तो 47.5 प्रतिशत होम्योपैथी की दवा खपत होती है। दुनिया के लगभग 100 देशों में लोग होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का लाभ ले रहे हैं तथा लगभग 50 देशों में होम्योपैथी को अलग औषधीय प्रणाली के रूप में मान्यता प्राप्त हो चुकी है।

आज मुंगेर जिले के कल्याणपुर गांव की गलियों से निकलकर होम्योपैथी के सरताज डॉ.नीतीश चंद्र दुबे का परचम दुनिया में लहरा रहा है। इस यात्रा के पीछे डॉ.नीतीश का अथक परिश्रम है। ये दोनों नीतीश- मुख्यमंत्री ई.नीतीश और डॉ.नीतीश द्वारा जन सेवा को ही सर्वोपरि समझा जाता है। एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा के दौरान ही इनकी नींद पूरी होती है। भारत रत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरित होने के चलते ये दोनों नीतीश यही कहते हैं….. आपके पास एक बड़ा उद्देश्य हो और सपना हो तो वो सोने नहीं देता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि संपूर्ण विश्व के बड़े-बड़े मंचों पर दोनों नीतीश को बुलाया जाता है…… मुख्यमंत्री ई.नीतीश को पीएम मटेरियल कह कर नवाजा जाता है तो डॉ.नीतीश को लंदन में मेडिकल के छात्रों को होम्योपैथ के महत्व को बताने के लिए आमंत्रित किया जाता है। कभी डॉ.नीतीश को जर्मनी तो कभी स्विट्जरलैंड में अवार्ड देकर सम्मानित किया जाता है। हाल ही में  डेलहाइट्स की ओर से डॉ.नितीश को डॉ.त्रेहान के साथ सम्मानित किया जा चुका है। और तो और विगत नवंबर में ब्रिटिश पार्लियामेंट में आयोजित भारत कांक्लेव के दौरान भी डॉ.नीतीश को सम्मानित किया गया था।

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चुनावी महासमर की तीन सीटें तय करेंगी लालू की अहमियत

इस संसदीय चुनावी महासमर 2019 में बिहार प्रदेश की 3 सीटें- मधेपुरा, पाटलिपुत्र और सारण लालू प्रसाद की सियासी अस्तित्व की पैमाइश कर देंगी। भला क्यों नहीं, इन तीनों सीटों से लालू प्रसाद के राजनीतिक करियर का कोई-न-कोई सूत्र जुड़ा हुआ दिखता है। इन तीनों सीटों से लालू प्रसाद यादव चुनाव लड़ चुके हैं। मधेपुरा में राजनीति के सिद्धहस्त लालू को जिस शरद यादव ने राजग के उम्मीदवार के रूप में पटकनी दी थी उसी शरद को हाथ में लालटेन पकड़ा कर आज मझधार से निकालने में लगे हैं लालू।

बता दें कि 2014 के चुनाव में राजद के पप्पू यादव से जो शरद यादव शिकस्त खा चुके हैं….. वही दोनों इस बार आमने-सामने हैं। पप्पू यादव लोगों के बीच यही कहते हैं- “आपकी सेवा करने वाला इस माटी का बेटा पप्पू चाहिए या वोट लेकर दिल्ली में रहने वाला। लालू का विरोध करने वाला आज उनके नाम पर वोट मांग कर बैतरनी पार करने में लगा है। ……. लोगों को समझना होगा कि बाढ़ हो या सुखाड़ हर समय बेटे की तरह यह पप्पू आपलोगों की सहायता में तत्पर रहता है।…… फैसला आपको करना है….. निर्णय आप को लेना है। मधेपुरा की आजादी के लिए मतदान करेंगे और लालू के लिए जिस पप्पू ने गोली खाई उसे पुनः सेवक बनाने के लिए मतदान करेंगे।”

यह भी जान लें कि एनडीए की ओर से प्रत्याशी बनाये गये कोसी के विकास पुत्र के नाम से लोकप्रिय दिनेश चन्द्र यादव बिना किसी शिकवा-शिकायत में फंसे बस यही कहा करते हैं कि सीएम नीतीश कुमार के शासन में प्रदेश विकसित होगा और पीएम नरेंद्र मोदी के शासन में देश सुरक्षित रहेगा।

और हाँ ! पाटलिपुत्र में कभी लालू ने अपने ही सहयोगी रंजन यादव से पटकनी खाई थी जब प्रो.रंजन यादव जदयू के प्रत्याशी थे। बाद में लालू के अभिन्न रामकृपाल राजद छोड़ भाजपा में शामिल हो लालू की बेटी मीसा भारती को पराजित कर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो गये…. इस बार फिर दोनों आमने-सामने हैं। यह मुकाबला लालू बनाम रामकृपाल ही बोलने लगे हैं लोग।

अंत में बात आती है सारण की सीट। जब सारण को छपरा के नाम से जाना जाता था तब लालू छपरा से 4 बार सांसद चुने गए थे। पिछली बार राबडी देवी यहाँ से भाजपा के राजीव प्रताप रूडी से पराजित हो गई। इस बार वहीं से लालू के समधी चंद्रिका राय (पुत्र दरोगा राय पूर्व सीएम) को राजद का उम्मीदवार बनाया गया है। ये तीन सीटें लालू के अस्तित्व से जुड़ी है जो 10 अप्रैल को लालू की जमानत के बाबत सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद ही उसकी दशा और दिशा तय करेगी।

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