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मधेपुरा में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 114वीं जयंती मनी

भारत में मार्च और अगस्त महीना को क्रांति के महीने के रूप में शुमार किया जाता है। खासकर 23 मार्च को विशेष रूप से याद किया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1931 को शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को एक साथ फांसी दी गई थी। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सबसे अधिक चर्चित घटना के रूप में इसे याद किया जाता है।

बता दें कि ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले के बंगा गांव में 28 सितंबर 1907 को भगत सिंह का जन्म हुआ था। भगत सिंह के पिता सरदार किशन सिंह एवं चाचा अजीत सिंह व स्वर्ण सिंह सभी अंग्रेज के कट्टर विरोधी थे, जिसके चलते उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा था।

बकौल साहित्यकार डॉ म.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी यह जानिए कि जलियांवाला कांड में जनरल डायर की क्रूरता की जानकारी पाते ही किशोरवय के भगत सिंह लाहौर से अमृतसर पहुंच गए और निर्दोष भारतीयों के रक्त से भींगी मिट्टी को एक बोतल में ले देशवासियों के अपमान का बदला लेने को मचलने लगे। जनरल डायर की क्रूरता का बदला लेने के लिए भगत सिंह ने “हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी” नामक क्रांतिकारी दल का गठन किया, जिससे चंद्रशेखर आजाद सरीखे अन्य बहुत से क्रांतिकारी जुड़ते चले गए।

अंत में यह भी कहा डॉ.मधेपुरी ने कहा कि 17 नवंबर, 1928 को साइमन कमीशन के विरोध करने के दरमियान हुई लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव आदि ने लाहौर से सांडर्स की हत्या कर दी। जेल में रहते ही इन लोगों पर मुकदमा चला। 23 मार्च 1931 को इन तीनों को अपराधी कह कर फांसी पर लटका दिया गया। रात के अंधेरे में ही सतलज नदी के किनारे इनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया, परंतु ऐसे-ऐसे क्रांतिकारियों के बलिदान को सम्मान देने में देश समुचित उत्साह नहीं दिखा पा रहा है।

 

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राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश ने मंत्री अशोक चौधरी को बनाया जेडीयू का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष

बिहार प्रदेश के 2020 आम चुनाव के पहले जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के जेडीयू अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह की बढ़ती उम्र और उनकी अस्वस्थता को देखते हुए पार्टी द्वारा वन एवं भवन निर्माण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाने का यह फैसला लिया गया है।

बता दें कि मंत्री अशोक चौधरी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति को लेकर मुख्यमंत्री सह जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ लगातार काम करते रहे हैं। जानिए कि मुख्यमंत्री आवास से लेकर जदयू के प्रदेश कार्यालय तक अशोक चौधरी सर्वाधिक सक्रिय भूमिका में नजर आते रहे हैं। तभी तो पार्टी ने उन्हें जदयू का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।

चलते-चलते यह भी याद कर लीजिए कि कांग्रेस से आने के बाद अशोक चौधरी को नीतीश सरकार में मंत्री बनाया गया। पुनः उन्हें यह नई जिम्मेदारी दी गई। जेडीयू में मंत्री अशोक चौधरी का कद लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अशोक चौधरी जाने-माने दलित नेता हैं और दलित तबके के ऐसे नेता को पार्टी में ऐसी बड़ी जिम्मेदारी देने से आगामी चुनाव पर भी बेहतर असर पड़ने की उम्मीद की जाती है।

 

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बिहार विधानसभा चुनाव के बाबत इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति

नई दिल्ली के अशोक रोड स्थित भारत निर्वाचन आयोग कार्यालय द्वारा 25 सितंबर को बिहार विधानसभा आम चुनाव- 2020 हेतु प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई। बिहार विधानसभा का कार्यकाल दिनांक 29 नवंबर 2020 को समाप्त हो जाएगा। यह कार्यकाल 30 नवंबर 2015 से 29 नवंबर 2020 तक के लिए है।

बता दें कि बिहार में विधानसभा की कुल सीटें हैं- 243, जिनमें 38 सीटें शेड्यूल कास्ट के लिए और 2 सीटें शेड्यूल ट्राइब्स के लिए सुरक्षित हैं। इन सभी सीटों पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग को भारतीय संविधान की धारा 324 के तहत अधिकार प्रदान किया गया है।

जानिए कि 2020 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव 3 चरणों में संपन्न किया जाएगा-

प्रथम चरण का मतदान दिनांक 28 अक्टूबर को होगा। इस प्रथम फेज में कुल 71 विधानसभा क्षेत्र में चुनाव होंगे। जिसके 16 जिले होंगे- भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, नवादा, गया, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, भोजपुर, रोहतास, बक्सर, कैमूर और पटना।

द्वितीय चरण का मतदान 3 नवंबर को होगा। इस द्वितीय फेज में कुल 94 विधानसभा क्षेत्र में चुनाव होगा। जिसके 17 जिले होंगे- भागलपुर, खगड़िया, बेगूसराय, समस्तीपुर, वैशाली, नालंदा, पटना, सारण, मुजफ्फरपुर, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी और सीतामढ़ी।

तृतीय चरण का मतदान 7 नवंबर को होगा। यह तृतीय यानि अंतिम फेज का चुनाव कुल 78 विधानसभा क्षेत्रों में  संपन्न होगा। जिसके 15 जिले होंगे- कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, मधुबनी, वैशाली, सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और दरभंगा।

ज्ञातव्य हो कि भागलपुर और पटना में पहले और दूसरे दोनों चरणों में चुनाव होंगे। दरभंगा, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और वैशाली में दूसरे एवं तीसरे चरण में भी वोट पड़ेंगे।

यह भी जान लें कि कुल 243 विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव नतीजे 10 नवंबर को घोषित कर दिए जाएंगे। चुनाव के दरमियान जनप्रतिनिधि, मतदातागण एवं चुनाव संपन्न कराने वाले कर्मियों को सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना, थर्मल स्क्रीनिंग एवं सैनिटाइजर का प्रयोग करना अनिवार्य होगा।

इस कोरोना काल के चुनाव में 1500 की जगह प्रत्येक मतदान केंद्र पर 1000 मतदाताओं द्वारा वोट डालने की व्यवस्था रहेगी। प्रत्येक मतदाता 6 फीट की दूरी पर खड़ा रहकर अपनी पारी का इंतजार करेंगे। अतिरिक्त इंतजार करने हेतु दरी, कुर्सी की व्यवस्था रहेगी। जहां सोशल डिस्टेंसिंग के नियमानुसार मतदाता इंतजार हेतु बैठेंगे। प्रत्येक मतदाता का थर्मल स्क्रीनिंग किया जाएगा। पानी-साबुन की व्यवस्था मतदान केंद्रों के प्रवेश एवं निकासी द्वार पर रहेगी जिससे मतदाता हाथ धोएंगे। सैनिटाइजर भी प्रवेश व निकासी द्वार पर उपलब्ध कराई जाएगी। हैंड-ग्लव्स की व्यवस्था रहेगी जिसे पहनकर मतदाता हस्ताक्षर करेंगे एवं ईवीएम का बटन दबाएंगे।

मतदान के अंतिम क्षणों में कोविड-19 के मरीज-वोटरों एवं कंटेंटमेंट जोन के वोटरों द्वारा पूरी सुरक्षात्मक व्यवस्था के साथ मतदान कराया जाएगा। निर्वाचन आयोग द्वारा कुल 59 पृष्ठों की अधिसूचना जारी की गई है, जिसे कोई भी सचेतन मतदाता पढ़ना चाहें तो ऑनलाइन पढ़ सकते हैं।

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राष्ट्रकवि दिनकर का मधेपुरा से गहरा लगाव- डॉ.मधेपुरी

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं में सत्ता को हिलाने की ताकत है। देश की राजनीति जब भी लड़खड़ाई तो दिनकर ने अपनी साहित्यिक क्षमता के माध्यम से उसे ऊर्जा प्रदान किया है। गांधी के चरखे को गलाकर तकली बनाने की सलाह देनेवाले राष्ट्रकवि दिनकर राजनीति और साहित्य के संबंधों के बीच हमेशा साहित्य के ही पक्ष में खड़े दिखे हैं।  उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से ताजिंदगी राष्ट्रीय चेतना का सृजन किया है।

उक्त बातें साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने 23 सितम्बर (बुधवार) को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 112वीं जयंती के मौके पर कोरोना के चलते निज निवास ‘वृंदावन’ में वर्चुअल संगोष्ठि को संबोधित करते हुए कही।

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने यह भी बताया कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का मधेपुरा से गहरा लगाव रहा है। आरंभिक दिनों में दिनकर जी जब सहरसा के समीप बरियाही सब-रजिस्ट्री ऑफिस के रजिस्ट्रार हुआ करते थे तो मधेपुरा के अपने रजिस्ट्रार मित्र से प्रायः रविवार को मिलने आ जाते। यदा-कदा रात्रि भोजन और विश्राम भी किया करते।

कालांतर में पूर्णिया में रहकर “रश्मिरथी” की रचना करने के दरमियान टीपी कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य रतन चंद से भी मिलने आया करते, क्योंकि पटना कालेज में जब रतन चंद फोर्थ ईयर में पढ़ते थे तो दिनकर जी थर्ड ईयर में। दिनकर जी रतन बाबू को ताजिंदगी बड़े भाई ही कह कर पुकारते रहे।

अध्यक्षता कर रहे कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन मधेपुरा के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ जब दिनकर जी के गृह प्रखंड बरौनी में कल्याण विभाग में कार्यरत थे तो दिनकर जी से उनका ऐसा साहित्यिक संबंध बन गया था कि गांव के एक गरीब लोग को खाद्यान्न उपलब्ध कराने हेतु दिनकर जी ने उन्हें पत्र भी लिखा था।

विषय प्रवेश करते हुए अध्यक्ष शलभ ने कहा कि दिनकर उत्तर छायावाद के कवियों की पहली पीढ़ी के थे और उनकी कविता में ओज, विद्रोह, आक्रोश व क्रांति की पुकार है। दिनकर सौम्य व मृदुभाषी थे, परंतु देशहित में अपना विचार हमेशा बेबाकी से रखते रहे।

संस्थान के संरक्षक व पूर्व सांसद डॉ.आरके यादव रवि ने कहा कि ‘उर्वशी’ को छोड़कर दिनकर की अधिकतर रचनाएं वीर रस से ओत-प्रोत है। ‘भूषण’ के बाद उन्हें वीर रस का सर्वश्रेष्ठ कवि माना जाता है। प्रो.मणि भूषण वर्मा ने दिनकर की ‘हिमालय’ शीर्षक कविता का पाठ किया। कवि डॉ.अरविंद श्रीवास्तव ने अपने टेलीकास्ट में कहा कि दिनकर की रचनाएं संस्कृति के  उन्नयन का गौरवशाली इतिहास है।

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कोरोना के कोहराम के दरमियान बिहार के सभी स्कूलों में 28 सितंबर से खुलेंगी 9 से 12वीं तक की कक्षाएं

कोरोना एपिडेमिक के चलते विगत 7 महीने से ट्रेन से लेकर प्लेन तक को बंद करना पड़ा और विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय की कक्षाएं व परीक्षाएं भी बंद रही। आज बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने छात्र-छात्राओं की नियमित पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। महीनों से बंद चल रहे सभी सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों को खोलने के आदेश विभाग ने जारी कर दिए हैं।

बता दें कि आज सवेरे 11:00 बजे से राजधानी पटना में शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों की बैठक में स्कूल खोलने के बाबत यह बड़ा फैसला लिया गया। फैसलानुसार सभी सरकारी एवं गैर सरकारी स्कूलों को दिनांक 28 सितंबर से वर्ग 9 से 12 तक के छात्र-छात्राओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

चलते-चलते यह भी बता दें कि कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए विभाग की ओर से जारी निर्देश में यह कहा गया है कि बच्चे सप्ताह में सिर्फ दो ही दिन स्कूल जा सकेंगें। साथ ही यह भी कि शिक्षा विभाग के उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार छात्र-छात्राओं के स्कूल जाने का अंतिम फैसला बच्चों के अभिभावक पर निर्भर करेगा।

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पीएम मोदी ने दी बिहार को कोसी रेल महासेतु की सौगात

आज शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने बिहार में ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु के साथ अन्य 12 परियोजनाओं का उद्घाटन किया जिसमें सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, रेल मंत्री पीयूष गोयल एवं अन्य केंद्रीय मंत्रीगण रविशंकर प्रसाद, गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, महामहिम राज्यपाल फागू चौहान सहित बड़ी-बड़ी हस्तियां भी जुड़ी हुई थीं।

उद्घाटनोपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिहार में आज रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा गया है। पीएम ने कहा कि कोसी रेल महासेतु और किऊल ब्रिज के साथ ही संपूर्ण बिहार में रेल यातायात को बढ़ावा मिलेगा और नए रोजगार पैदा करने वाले दर्जनों प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ होगा।

इस कार्यक्रम से जुड़े केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों से आज पृथक हुए इन दोनों क्षेत्रों को फिर जोड़ा जा रहा है….. इसकी जितनी भी सराहना की जाय वह कम होगी। जनता आने वाले दिनों में इसकी उपयोगिता व महत्ता को महसूसेगी।

जानिए कि पराधीन भारत में वर्ष 1934 के महाभूकंप ने बिहार को क्षत-विक्षत कर दिया था, जिसे देखने के लिए महात्मा गांधी, दीप नारायण सिंह, ध्वजा प्रसाद साहू आदि आए थे। इस भूकंप ने बिहार के कोसी अंचल से मिथिलांचल को अलग कर दिया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी एवं ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस कार्यक्रम में कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में कोसी मिथिलांचल की दूरी को पाटने की शुरुआत हुई थी। यूपीए सरकार में काम रुक गया था, पुनः प्रधानमंत्री जी आपने इसे चालू किया है तो आपसे विनम्र अपील होगी कि इस रेल लाइन को जनहित में और आगे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि यह मेन-लाइन का रूप धारण कर ले और ये दोनों क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाय।

कोसीअंचल और मिथिलांचल के विकास को मुख्यधारा से जुड़ने को लेकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कोसी के विकास के लिए ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव हमेशा प्रयत्नशील रहा करते हैं, उनके कार्यों को कोसी की जनता सदा सराहती रही है।

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पेरियार ई वी रामासामी की 142वीं जयंती डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा में मनाई

कोरोना के कोहराम के दरमियान ‘घर में रहें, सुरक्षित रहें’ के संदेश को जीवन का संबल बनाते हुए डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी सरीखे समाजसेवी-साहित्यकार द्वारा निज निवास ‘वृंदावन’ में पेरियार ई वी रामासामी की 142वीं जयंती मनाई गई।

डॉ.मधेपुरी ने आॅनलाइन श्रोताओं को अपने संबोधन में यही कहा कि पेरियार को हिंदू धर्म का ‘वाल्टेयर’ तथा एशिया महाद्वीप का ‘सुकरात’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि पेरियार ई वी रामासामी का जन्म 17 सितंबर, 1879 ईसवी को हुआ था एवं उनकी मृत्यु 24 दिसंबर, 1973 को हुई थी। बहुजनों का वह अप्रतिम योद्धा, त्यागी एवं संघर्षशील मसीहा ताजिंदगी ब्राह्मणवादी व्यवस्था के विरुद्ध विद्रोही चेतना के प्रखर नायक बने रहे।

पेरियार रामासामी का मानना था कि ईश्वरवाद से ही पुरोहितवाद का जन्म होता है और पुरोहित ईश्वर की आड़ में समाज का शोषण करता है। पेरियार की मान्यता थी कि जाति व्यवस्था जहां ब्राह्मणों की सबसे बड़ी ताकत है वहीं शूद्रों की सबसे बड़ी कमजोरी। पेरियार की इसी सोच ने मरते दम तक ब्राह्मणों की मान्यताओं एवं परंपराओं से समाज को दूर रहने की सलाहियत दी।

अंत में डॉ.मधेपुरी  ने सुनाया पेरियार का यह संदेश- “सभी मनुष्य समान रूप से पैदा होते हैं तो फिर अकेले ब्राह्मण ऊँच और अन्यों को नीच कैसे ठहराया जा सकता है। धार्मिक ग्रंथों को यह कहकर नकार दिया कि ये सारे काल्पनिक ग्रंथ हैं जो एक वर्ग को श्रेष्ठ एवं शेष समाज को नीच साबित करने के लिए लिखे गए हैं।”

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बिहार चुनाव की तैयारियों का केंद्रीय चुनाव आयोग की टीम ने लिया जायजा

केंद्रीय चुनाव आयोग की टीम में शामिल उप चुनाव आयुक्त ने पहले दिन पटना और मुजफ्फरपुर में, दूसरे दिन भागलपुर एवं बोधगया में कुल 19 जिलों के निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी तथा जिला पुलिस अधीक्षक के साथ बैठक की।

बता दें कि अपने दो दिवसीय बिहार दौरे पर आई केंद्रीय चुनाव आयोग की यह उच्च स्तरीय टीम ने कोरोना संकट के बीच स्थानीय प्रशासन द्वारा किए जा रहे चुनाव की तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया। उम्मीद है कि बिहार चुनाव से संबंधित कार्यक्रम की घोषणा शीघ्र ही की जा सकती है।

आयोग के अधिकारियों ने 2 दिनों के इस दौरे के क्रम में कोरोना महामारी की चुनौतियों के बीच प्रशासन द्वारा चुनाव की तैयारी पर संतुष्ट दिखे। सचिवालय सभागार में बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार एवं विभिन्न विभागों के प्रधान सचिवों के साथ उप चुनाव आयुक्त की टीम ने उच्च स्तरीय बैठक की।

अंत में बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कोरोना के बढ़ते खतरे के मद्देनजर बिना मास्क लगाए कोई भी प्रक्रिया नहीं की जाएगी। कोरोना के संदर्भ में राज्य व केंद्र सरकारों के दिशा निर्देशों का पालन हर स्तर पर सुनिश्चित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अमृत प्रत्यय ने कोरोना बचाव के बाबत  प्रेजेंटेशन भी दिया। बूथ की संख्या बढ़ाने एवं पर्याप्त महिला कर्मियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया गया। बैठक में असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी निर्देश दिए गए।

 

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महान अभियंता भारतरत्न विश्वेश्वरैया की 160वीं जयंती मधेपुरा में मनी

साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने कोरोना काल में निज निवास ‘वृंदावन’ में मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती मनाई और बच्चों से कहा कि भारत के महान अभियंता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1860 और मृत्यु 12 अप्रैल 1962 को हुई। वे एक महान अभियंता ही नहीं एक ख्याति प्राप्त राजनयिक भी थे। भारत के मोकामा ब्रिज जैसे बड़े-बड़े पुलों एवं पंजाब, हरियाणा के डैम आदि के डिजाइन निर्माता डॉ.विश्वेश्वरैया को 1955 में भारत रत्न सरीखे सर्वोच्च सम्मान से विभूषित किया गया था। भारत उनके जन्मदिन को अभियंता दिवस के रुप में मनाता है। बिहार सरकार ने तो उनकी याद में तकनीकी कार्यालय वाले विभागीय सचिवालय भवन का नाम ही विश्वेश्वरैया भवन रख दिया है। इस सचिवालय परिसर में उनकी आदमकद प्रतिमा भी लगी है।

जानिए कि आरंभ में उन्हें ट्यूशन करके अपनी पढ़ाई करनी पड़ी थी। शुरू में इन्होंने बीए की परीक्षा में अव्वल स्थान प्राप्त किया और बाद में मैसूर सरकार की मदद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की, जिसमें भी वे अव्वल रहे। इंजीनियर बन कर उन्होंने मैसूर और कर्नाटक को विकसित व समृद्धशाली बनाने में अभूतपूर्व योगदान दिया।  डॉ.विश्वेश्वरैया को लोग कर्नाटक का भागीरथ कहते हैं। उनके विकास के सारे सिस्टमों की प्रशंसा उन दिनों ब्रिटिश अधिकारियों ने भी खूब की, जिन्हें आज सारे विश्व में प्रयोग में लाई जा रही हैं।

चलते-चलते यह भी जानिए कि डॉ.विश्वेश्वरैया अशिक्षा, गरीबी, बीमारी एवं बेरोजगारी को लेकर भी चिंतित रहा करते थे और इन्हें दूर करने हेतु चिंतन भी करते रहते थे। इन्हें मैसूर का चीफ इंजीनियर नियुक्त किया गया था और बाद में मैसूर के महाराजा ने इन्हें मैसूर का मुख्यमंत्री भी नियुक्त कर दिया। गरीबी और बीमारी का मुख्य कारण वे अशिक्षा को मानते थे। ऐसे मौलिक चिंतक की कोटि में खड़े वैसे दो नाम हैं- हरित क्रांति के जनक  एमएस स्वामीनाथन  और एटॉमिक एनर्जी के जनक  होमी जहांगीर भाभा जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में भारत को नई-नई ऊंचाइयाँ दी…. उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने हेतु समाजसेवी-साहित्यकार डॉ भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा निरंतर भारत सरकार से अनुनय-विनय किया जाता रहा है। और आगे भी अर्जे तमन्ना का इजहार किया जाता रहेगा….।

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राष्ट्रीय एकता के लिए भारतीय रेल, खेल, सरदार पटेल और हिन्दी जरूरी- डॉ.मधेपुरी

विगत वर्षों में प्रत्येक 14 सितंबर को हिन्दी दिवस विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के साथ-साथ समाहरणालयों में समारोह पूर्वक मनाया जाता रहा, परंतु 2020 का हिन्दी दिवस समारोह कोरोना के कहर के कारण फीका रहा। 70 वर्ष पुराने कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कोरोना के कारण इस बार निज निवास ‘वृंदावन’ में ही ऑनलाइन हिन्दी दिवस समारोह मनाया।

बता दें कि डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने संक्षेप में हिन्दी एवं हिन्दी दिवस के संबंध में विभिन्न प्रकार की जानकारियां देते हुए कहा-।

भारत को समेट कर रखने में भारतीय रेल, भारतीय खेल और सरदार पटेल का विशेष योगदान है, परंतु इससे भी अधिक योगदान है हिन्दी की, जिसमें भारत की एकता और अखंडता को बरकरार रखने की शक्ति है। यदि हिन्दी नहीं होती तो भारत एक नहीं होता…। अब हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा का गौरव पाने में अधिक देर नहीं लगेगी बशर्ते कि हम भारतीय को अंग्रेजी के प्रति बढ़ रहे मोह-भ्रम को भंग करना होगा। मोह-भ्रम को भंग करना इसलिए जरूरी है कि चीन, जापान और जर्मनी आदि जैसे उन्नत देशों को अपनी-अपनी राष्ट्रभाषा है। वे अंग्रेजी के मोह-भ्रम में कभी नहीं पड़े। डॉ.लोहिया जर्मन भाषा सीखने के बाद ही जर्मनी में पीएच.डी. की डिग्री ली थी।

आगे डॉ.मधेपुरी ने समाजवादी चिंतक व मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल द्वारा हिन्दी के संबंध में भारतीय संसद में व्यक्त किए गए विचार को संदेश स्वरूप उद्धृत करते हुए कहा-

अध्यक्ष महोदय ! मैं हिन्दी के लिए पागल नहीं हूं, परंतु भारत में अंग्रेजी को बनाए रखने की कोशिश भारतीय जनक्रांति के साथ विश्वासघात है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि हिन्दी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। दुनिया भर में 65 करोड़ लोगों की मातृ भाषा है हिन्दी। दुनिया में हर पांच में से एक आदमी हिन्दी में इंटरनेट का उपयोग करता है। विश्व में हिन्दी ही वैसी समृद्ध भाषा है जिसमें शब्दों का वही उच्चारण होता है, जो लिखा जाता है। वर्ष 1953 में पहली बार 14 सितंबर को “हिन्दी दिवस” का आयोजन हुआ था। तभी से यह सिलसिला बना हुआ है। इस दिन हिन्दी भाषा की स्थिति और विकास पर मंथन-चिंतन किया जाता है। भारत में फिलहाल 77% से भी ज्यादा लोग हिन्दी बोलते हैं

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