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डॉ. अमरदीप के अध्यक्ष बनने से मधेपुरा उत्साहित, बधाईयों का तांता

डॉ. अमरदीप को जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर मधेपुरा जिले के जेडीयू नेता व कार्यकर्ता खासे उत्साहित हैं। मधेपुरा के बेटे को जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इतनी बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने को यहां के लोग पूरे इलाके के लिए सम्मान की बात बताते हैं। गौरतलब है कि वर्तमान समय में मीडिया के बढ़ते महत्व को देखते हुए जेडीयू ने मीडिया प्रकोष्ठ का गठन किया और इसकी जिम्मेदारी मीडिया के सभी फॉर्मेट में दखल रखने वाले डॉ. अमरदीप को दी। बता दें कि पार्टी के आधुनिकीकरण में लगे डॉ. अमरदीप ने अभी हाल ही में 1, अणे मार्ग, पटना में सम्पन्न हुए जेडीयू के 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी भूमिका निभाई थी। बिहार के सभी 38 जिलों व पार्टी के 27 प्रकोष्ठों के लगभग 25 हजार कार्यकर्ताओं के वे आकर्षण के केन्द्र रहे थे।

डॉ. अमरदीप को अध्यक्ष बनाए जाने पर बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री डॉ. रमेश ऋषिदेव, बिहारीगंज के विधायक निरंजन मेहता, जिला उपाध्यक्ष डॉ. रत्नदीप, महासचिव यादव उमेश, प्रो. मनोज भटनागर, मुरलीगंज प्रखंड जेडीयू अध्यक्ष मिथिलेश कुमार, उपाध्यक्ष राजीव कुमार, महासचिव अमित कुमार, जिला जेडीयू के व्यावसायिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अशोक चौधरी, दलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष नरेश पासवान, वरिष्ठ नेता गोवर्द्धन मेहता, महेन्द्र पटेल, महासचिव मो. अनवारुल हक, वार्ड सदस्य रेशमा परवीन, मो. सलाहउद्दीन आदि ने बधाई दी है। इन नेताओं ने कहा कि दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य श्री बशिष्ठ नारायण सिंह एवं राष्ट्रीय महासचिव व जेडीयू संसदीय दल के नेता श्री आरसीपी सिंह ने डॉ. अमरदीप के युवा कंधों पर महती जिम्मेदारी देकर ना केवल उऩकी प्रतिभा का सम्मान किया है, बल्कि हम सबका मान भी बढ़ाया है। बता दें कि डॉ. अमरदीप मधेपुरा के पूर्व सांसद व बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. रवि के छोटे पुत्र हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ से बातचीत करते हुए डॉ. अमरदीप ने कहा कि मीडिया के सभी फॉर्मेट, चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो, प्रिंट मीडिया हो या सोशल मीडिया, जेडीयू को सभी दलों से आगे रखना है। उन्होंने बताया कि 21 जनवरी को माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के आह्वान पर दहेजप्रथा व बालविवाह के विरोध में आयोजित की जा रही मानव-श्रृंखला की सफलता के लिए उन्हें अभी से दिन-रात जुट जाना है। इसमें उनका प्रकोष्ठ बड़ी भूमिका निभाने को संकल्पित है।

बता दें कि इधर मधेपुरा में पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता अभी से उनके स्वागत की तैयारी में जुट गए हैं। जिला महासचिव प्रो. मनोज भटनागर ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप के आगमन पर यहां उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।

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मधेपुरा के डॉ. अमरदीप बने जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष

बिहार जेडीयू के अध्यक्ष श्री बशिष्ठ नारायण सिंह ने जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ का गठन करते हुए डॉ. अमरदीप को प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया। आज राजधानी पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित समारोह में डॉ. अमरदीप को मनोनयन का पत्र सौंपा गया। उनके साथ ही श्री सुनील कुमार को प्रशिक्षण प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इन दोनों प्रकोष्ठों के गठन को 2019 के लोकसभा व 2020 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

दोनों नेताओं के मनोनयन पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व संसदीय दल के नेता श्री आरसीपी सिंह, बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सह विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय, बिहार विधान परिषद में पार्टी के मुख्य सचेतक श्री संजय कुमार सिंह (गांधीजी), पार्टी के कोषाध्यक्ष सह विधानपार्षद डॉ. रणवीर नंदन, प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं श्री अनिल कुमार ने बधाई देते हुए कहा कि नेताद्वय के मनोनयन से पार्टी को नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी।

‘मधेपुरा अबतक’ के पाठकों को बता दें कि मीडिया विशेषज्ञ डॉ. अमरदीप की मातृभूमि मधेपुरा है। वे मधेपुरा के पूर्व सांसद, राज्यसभा के पूर्व सदस्य, जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव व मधेपुरा स्थित भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि के तीन बेटों में सबसे छोटे हैं। वहीं मधेपुरा के प्रसिद्द समाजसेवी व साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी उनके धर्मपिता हैं । दिल्ली विश्वविद्यालय के मेधावी छात्र रहे डॉ. अमरदीप मीडिया के क्षेत्र में बीस वर्षों से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। वे भारत सरकार समेत कई राज्य सरकारों, विभिन्न मंत्रालयों, बड़े कॉरपोरेट हाउसों एवं विभिन्न चैनलों को अपनी सेवा दे चुके हैं। धारावाहिक एवं वृत्तचित्र बनाने में महारत रखने के साथ ही उन्होंने विभिन्न विषयों पर एक दर्जन से ज्यादा महत्वपूर्ण किताबें भी लिखी हैं।

नई भूमिका में उनकी प्राथमिकताओं को लेकर ‘मधेपुरा अबतक’ द्वारा पूछे जाने पर डॉ. अमरदीप ने कहा कि मीडिया की अहमियत हमेशा से रही है लेकिन सोशल मीडिया ने इसके दायरे, विस्तार व गति को बेहिसाब बढ़ा दिया है। उनकी प्राथमिकता होगी कि सभी आधुनिक संचार माध्यमों पर जेडीयू की दमदार मौजूदगी हो। डॉ. अमरदीप ने कहा कि पार्टी, पॉलिटिक्स और लीडर, हर मायने में जेडीयू बाकी दलों से कोसों आगे है, अब बारी तकनीक की है।

बकौल डॉ. अमरदीप पार्टी के आधुनिकीकरण व मीडिया के हर फॉर्मेट पर काम करने के साथ ही उन्हें जमीनी स्तर पर कई कार्यों को अंजाम देना है। दहेजबंदी और बालविवाहबंदी के समर्थन में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के आह्वान पर आगामी 21 जनवरी को बनने जा रही मानव-श्रृंखला की सफलता ऐसा ही एक कार्य है, जिस पर उन्हें तत्काल लगना है।

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पति-पत्नी ने शुरू किया था भाई-बहन का त्योहार

यह संसार रिश्तों से बना है और हर रिश्ते की अपनी अहमियत होती है, लेकिन भाई-बहन का रिश्ता अपने आप में अद्भुत है। यही एक रिश्ता है, जिसकी कोई एक परिभाषा गढ़ पाना मुश्किल है। सोच कर देखिए, अगर आपकी बहन आपसे बड़ी है तो उसमें मां की झलक पाएंगे आप, छोटी है तो बेटी लगेगी वह। दोस्त तो वो हर हाल में है ही। आप जो सुख-दुख कई बार माता-पिता से नहीं बांट पाते वो अपनी बहन से बांट लेते हैं। एक बहन ही है जो आपकी कमियों के लिए आपको डांटती नहीं और अपना ऐसा कोई सुख नहीं जो आपसे बांटती नहीं। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के इसी अटूट प्यार की निशानी है, जिसे सदियों से मनाया जाता रहा है। भाई-बहन के विश्वास को बनाए रखने वाला यह त्योहार श्रावण मास में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। लेकिन इसकी शुरुआत कब और क्यों हुई, इसके पीछे कई दिलचस्प कहानियां हैं। चलिए जानने की कोशिश करते हैं।

आपको जानकर हैरत होगी कि भाई-बहन के इस त्योहार की शुरुआत पति-पत्नी ने की थी। पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे। देवराज इंद्र की पत्नी शुचि ने देवताओं की हो रही हार से घबरा कर उनकी विजय के लिए तप करना शुरू कर दिया। तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने श्रावण मास में पूर्णिमा के दिन अपने पति इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इस रक्षासूत्र से देवताओं की शक्ति बढ़ गई और उन्होंने दानवों पर जीत प्राप्त की। उसी दिन से यह परंपरा शुरू हुई कि आप जिसकी भी रक्षा व उन्नति की इच्छा रखते हैं, उसे रक्षासूत्र यानि राखी बांध सकते हैं, चाहे वह किसी भी रिश्ते में क्यों न हो।

वैसे हमारे इतिहास, खासकर पौराणिक इतिहास में ऐसी कई कहानियां दर्ज हैं जो रक्षाबंधन या राखी के महत्व को दर्शाती हैं। इनमें एक कहानी महाभारत काल से भी जुड़ी है। इस कहानी के अनुसार श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध अपने चक्र से किया था। शिशुपाल का सिर काटने के बाद जब चक्र वापस लौटा तब उसे पुन: धारण करने के क्रम में कृष्ण की उंगली थोड़ी कट गई। उंगली से रक्त बहता देख पांडवों की पत्नी द्रौपदी से रहा नहीं गया और उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर कृष्ण की उंगली में बांध दिया। इस पर भावुक होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वचन दिया कि वे आजीवन उनकी साड़ी की लाज रखेंगे। आगे चलकर दु:शासन ने जब द्रौपदी का चीरहरण करना चाहा तो उन्होंने पूरी तत्परता से अपना कहा पूरा किया।

रक्षाबंधन से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी का ताल्लुक हमारे मध्यकालीन इतिहास से है। यह कहानी रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं से संबंधित है और उस दौर को दर्शाती है जब राजपूत शासकों और मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था। रानी कर्णावती चित्तौड़ के राजा की विधवा थीं। राजा की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने उनके राज्य पर आक्रमण कर दिया। अपने राज्य व प्रजा की रक्षा की खातिर चिन्तित रानी ने हुमायूं से मदद मांगी। उन्होंने हुमायूं को एक राखी भेजी और उनसे रक्षा की प्रार्थना की। हुमायूं ने उस राखी की मर्यादा रखी और रानी को बहन का दर्जा देते हुए उनके राज्य को सुरक्षित कर अपना दायित्व पूरा किया।

रक्षाबंधन से जुड़ी बाकी कहानियां फिर कभी। फिलहाल हमें इजाजत दें और हमारी मंगलकामनाएं स्वीकार करें। शुभ रक्षाबंधन।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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