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बिहार चुनाव के महापर्व का प्रथम चरण शांतिपूर्ण तरीके से हुआ संपन्न

बिहार में प्रथम चरण के 71 विधानसभा सीटों पर औसत 53-54% मतदान हुआ। किसी-किसी मतदान केंद्र पर 50 से कम तो कहीं 60% के आसपास मतदान हुआ। विकलांगों के साथ-साथ अति वृद्धों ने भी बूथ पर जाकर ही वोट किए, जबकि उन्हें चुनाव आयोग द्वारा पोस्टल बैलट के माध्यम से मताधिकार करने की सुविधा दी गई है। कोरोना काल में इतना प्रतिशत मतदान होना मतदाताओं की जागरूकता तथा सुशासन के प्रति आस्था को दर्शाता है। आरंभ में, कोरोना काल में चुनाव कराना कुछ राजनीतिक दलों को गले से नीचे नहीं उतर रहा था।

बता दें कि जागरूक मतदातागण रोहतास में पुल के लिए आक्रोशित होकर मतदान करने नहीं आए। जमुई में ईवीएम मशीन खराब होने के कारण 4 घंटे तक वोट नहीं डाले गए। बूथ नंबर 125 एवं 230 पर ईवीएम मशीन में खराबी की रिपोर्ट दर्ज की गई। कहीं से कोई वारदात की रिपोर्ट नहीं मिली। मात्र एक जगह राजद एवं निर्दलीय कार्यकर्ताओं में झड़पें हुई और आधे दर्जन लोग घायल हुए।

जानिए कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी शांतिपूर्ण तरीके से हुआ मतदान यानि नक्सलियों के ‘गन-तंत्र’ पर भारी दिखा उत्साह भरा लोकतंत्र। तभी तो कोरोना की चुनौती के बीच जागरूक मतदाताओं ने बरसाया वोट।

चलते-चलते यह भी जान लें कि प्रथम चरण के मतदान के दरमियान 2400 बूथों से लाइव वेबकास्टिंग के जरिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और चुनाव आयोग- विधानसभा की तमाम गतिविधियों पर सीधी नजर रखे हुए थे। चुनाव के दौरान 71 सीटों को लेकर सभी प्रकार के कुल 2190 प्रेक्षकों की तैनाती की गई थी। साथ ही संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर कुल 1708 वीडियो कैमरों का उपयोग किया गया था। प्रथम चरण के 16 जिलों में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न कराए जाने पर जिला प्रशासन के सभी आलाधिकारियों व पदाधिकारियों को मधेपुरा अबतक का साधुवाद।

 

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बिहार में 71 विधानसभा सीटों पर प्रथम चरण की वोटिंग शुरू

आज जिन 71 विधान सभा सीटों के लिए वोटिंग की जा रही है उनमें 2 करोड़ 14 लाख 5 हजार से अधिक मतदाताओं द्वारा 1066 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। इनमें 114 महिलाएं चुनाव मैदान में हैं। प्रथम चरण में मतदाताओं की सुविधा के मद्देनजर 31 हजार 371 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां सुबह 7:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक ईवीएम द्वारा मतदान संचालित होगा।

बता दें कि इन 71 सीटों पर इस तरह से ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मतदाताओं की भीड़ देखी जा रही है। चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों का पालन किया जा रहा है। कोरोना के चलते प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या घटाकर 1000 कर दी गई है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि नक्सली संगठनों ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया है जिसके चलते भागलपुर, नवगछिया के दियारा क्षेत्रों एवं बांका के नक्सली क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर से हवाई गश्ती की जा रही है। इन क्षेत्रों के 4 सीटों पर सुबह 7:00 से 3:00 अपराह्न तक 26 सीटों पर शाम 4:00 बजे तक और 5 सीटों पर शाम 5:00 बजे तक वोटिंग होगी।

अंत में जानिए कि प्रथम चरण में पटना जिले के 5 एवं भागलपुर के 2 सीटों के अलावा रोहतास, बक्सर, भोजपुर, नवादा…… जमुई, जहानाबाद आदि 14 जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में आज शाम 6:00 बजे तक दर्जनों विधायकों एवं बिहार सरकार के आठ दिग्गज मंत्रियों के भाग्य के फैसले ईवीएम में बंद हो जाएंगे।

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कलम की ताकत सदैव तलवार से अधिक रही है- डॉ.मधेपुरी

संसार में कलम की ताकत सदैव तलवार से अधिक रही है और दुनिया में ऐसे कई पत्रकार हुए हैं जिन्होंने अपनी कलम की ताकत से सत्ता तक की राह बदल दी- ऐसे ही पत्रकारों में एक थे- निर्भीक जुझारू पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी। ये बातें कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने उनकी 131वीं जयंती ऑनलाइन मनाये जाने के क्रम में 26 अक्टूबर को कही। डॉ.मधेपुरी ने  कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण वे इंट्रेंस तक ही पढ़ सके, परंतु अच्छी जानकारी हासिल करने के कारण 16 वर्ष की उम्र में विद्यार्थी जी ने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर पहली पुस्तक “हमारी आत्मोत्सर्गता” लिखी थी।

सम्मेलन के संरक्षक साहित्यकार व पूर्व सांसद डाॅ.रमेन्द्र  कुमार यादव रवि ने कहा कि मात्र 23 वर्ष की उम्र में गणेश शंकर विद्यार्थी ने ‘प्रताप’ अखबार की शुरुआत की और स्वतंत्रता संग्राम के दरमियान विद्यार्थी जी के जेल जाने के बाद ‘प्रताप’ का संपादन माखनलाल चतुर्वेदी एवं बालकृष्ण शर्मा नवीन जैसे बड़े-बड़े साहित्यकार करने लगे। विद्यार्थी जी सात वर्षों में पाँच बार जेल गए। डॉ.रवि ने कहा कि रायबरेली के सरदार वीरपाल सिंह ने किसानों पर गोली चलवाई और उसका पूरा ब्योरा प्रताप में छापने के कारण विद्यार्थी जी सहित अन्य पर मानहानि का मुकदमा भी हो गया जिसमें गवाह के रूप में मोतीलाल नेहरू एवं जवाहरलाल नेहरू भी पेश हुए थे।

अंत में अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने अपने ऑनलाइन संबोधन में यही कहा कि विद्यार्थी जी के लिए जेल जैसे उनका घर ही हो। अंग्रेजों के कोपभाजन होने के कारण उन्होंने सरकारी नौकरी भी छोड़ दी। जेल में लिखी डायरी के आधार पर “जेल जीवन की झलक” नाम से सीरीज छपी जो सर्वाधिक हिट रही। इस कार्यक्रम से अनेकों साहित्यकार जुड़े रहे। प्रो.मणिभूषण वर्मा ने 1931 के कानपुर दंगे को रोकने के क्रम में शहीद हुए विद्यार्थी जी को नमन किया और कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

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आज शाम से थम जाएगा प्रथम चरण के 71 सीटों के चुनाव-प्रचार

बिहार विधानसभा- 2020 के पहले चरण की 71 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव-प्रचार आज 26 अक्टूबर की शाम से थम जाएगा। 28 अक्टूबर को 2 करोड़ 14 लाख 6 हजार 96 मतदातागण द्वारा कुल 1066 प्रत्याशियों के भाग्य के फैसले ईवीएम में बंद कर दिए जाएंगे।

बता दें कि प्रथम चरण में पटना जिले के 5 एवं भागलपुर के 2 क्षेत्रों सहित भभुआ, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, नवादा, गया, औरंगाबाद, जमुई, बांका, जहानाबाद, अरवल, शेखपुरा और नवादा जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होंगे।

यह भी जानिए कि चुनाव आयोग द्वारा निष्पक्ष चुनाव कराने हेतु प्रशासनिक स्तर पर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। हेलीकॉप्टर द्वारा शनिवार से ही भागलपुर एवं नवगछिया के दियारा तथा बांका के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एरिया डोमिनेशन एवं हवाई गश्ती भी की जा रही है।

चलते-चलते यह भी कि एनडीए एवं महागठबंधन के अन्य शीर्षस्थ नेताओं के अतिरिक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज 4 चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे वहीं प्रतिपक्ष के सीएम कैंडिडेट तेजस्वी यादव 4 जिले में 9 चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। इसी के साथ प्रथम चरण के चुनाव का प्रचार थम जाएगा और 28 अक्टूबर को दिनभर मतदान होगा।

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तब और अब के चुनावी युद्ध में उम्मीदवारों के व्यवहार में जमीन-आसमान का अंतर- डॉ.मधेपुरी

आजादी के बाद का चुनावी युद्ध महाभारत जैसे धर्म युद्ध की तरह हुआ करता था, बल्कि कभी-कभी तो उससे भी बेहतर प्रदर्शन नजर आ जाता।

प्रखर समाजवादी नेता भूपेन्द्र नारायण मंडल के करीबी रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी बताते हैं कि मधेपुरा संसदीय क्षेत्र में तबके सोशलिस्ट और कांग्रेस पार्टी के दो प्रखर उम्मीदवारों के बीच चुनावी संघर्ष शीर्ष पर था। समाजवादी उम्मीदवार भूपेन्द्र नारायण मंडल एक पुरानी जीप से किसी टोले के मतदाताओं से मिलकर मुख्य सड़क पर आते हैं कि दूसरी ओर से कांग्रेसी उम्मीदवार ललित नारायण मिश्र काफिले के साथ आ रहे होते हैं। देखते ही वे गाड़ी से उतरकर भूपेन्द्र बाबू के पास जा….. यही पूछते कि भाई साहब ! स्वस्थ है ना !!

जवाब में वे ललित बाबू से टोले की ओर इशारा करते हुए यही कहते-

 “ललित ! कुछ लोग तोहर शिकायत कैयलक जे ललित बाबू अखैन तक नय आयल छै….  वोकरा सबहक शिकायत तोरा जल्दी दूर करैक चाहि….. अखने चैल जा…।”

परंतु, आजादी के सातवें दशक आते-आते लगभग सभी चुनावी योद्धाओं की वाणी, व्यवहार व आचरण की चर्चाएं किसी भी रूप में करने, सुनने व सुनाने योग्य नहीं रहा। उन्हें ना किसी की उम्र का लिहाज है और ना शब्दों के चयन एवं उसके व्यवहार का ख्याल। उन्हें यह मालूम भी नहीं कि व्यवहार ही उनकी पहचान है।

अंत में डॉ.मधेपुरी बताते हैं कि जब समाज में शिक्षित लोगों की संख्या कम थी, उस समय ना तो बूथ पर बक्से लूटे जाते थे और ना पुलिस, बीएसएफ या सीआरपीएफ की भारी संख्या में प्रदर्शन या फ्लैग मार्च की जरूरत होती थी। आज जब शिक्षितों की संख्या बढ़ी है तो हम अपने-अपने व्यवहारों एवं संस्कारों से शिक्षा को बदनाम करने से बाज नहीं आ रहे हैं।

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पद्मश्री फूलबासन बाई यादव ने केबीसी कर्मवीर में जीती 50 लाख

पढ़ा-लिखा या कम पढ़ा-लिखा या फिर अनपढ़ व्यक्ति ही क्यों ना हो, यदि वह कुछ करने की ठान लेता है तो उसे किसी भी ऊंचाई तक जाने में पहाड़ भी नहीं रोक सकता। पांचवी पास महिला फूलबासन बाई यादव की यह कहानी किसी मिसाल से कम नहीं है।

बता दें कि कभी छत्तीसगढ़ के अपने गांव में भूखे-प्यासे बकरी चराने वाली फूलबासन अपनी लगन, मेहनत और  संकल्प के बल पर “मां बमलेश्वरी स्व सहायता समूह” संस्थान का अध्यक्ष बन 10 महिलाओं से 2001 में कार्य आरंभ करती है और आज उसी महिला समूह में 2 लाख से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं। वह नारी सशक्तिकरण का एक अच्छा मिसाल पेश कर रही है। दो मुट्ठी चावल से शुरू किया गया यह महिला समूह आज करोड़ों में कमाई कर रही है।

जानिए कि उसी फूलबासन यादव को भारत सरकार ने 2012 में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया, छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘जनाना सुरक्षा योजना’ का ब्रांड एंबेस्डर बनाया और 2014 में श्रीमती यादव को ‘महावीर फाउंडेशन पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया। फिलहाल फूलबासन बाई यादव ‘पहरेदारी’, ‘नशा मुक्ति’ व ‘खुले में शौच बन्दी’ के ऊपर तूफानी अभियान चला रही है।

ऐसी संकल्पयुक्त फूलबासन को सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने केबीसी कर्मवीर में एक्ट्रेस रेणुका शहाणे को सहयोगी बनाकर मौका दिया और दोनों ने अपनी बुद्धिमत्ता से वो कर दिखाया कि फूलबासन यादव 50 लाख जीतने वाली इस सीजन की पहली कंटेस्टेंट बनी। छत्तीसगढ़ के जिला राजनंदगांव के छोटे कस्बे सुकुलदैहान की अद्भुत संकल्पी फूलबासन ने केबीसी के महानायक से कहा कि 13 साल की उम्र में वह ससुराल आ गई और कई दिनों तक ससुराल में भी भूखे सोना पड़ा। गरीबी के बीच होते हुए भी कुछ करने की इच्छा मन में जागी और महिला समूह की शुरुआत की। सबसे पहला काम यही किया फुलबासन ने कि सभी महिलाओं के अंदर से भय के भूत को भगाया और काम करने की लगन पैदा की। उसी मेहनत और लगन के चलते फूलबासन अपने स्व सहायता समूह द्वारा आज डेयरी, बकरी पालन, मछली पालन एवं खाद् कंपनी आदि चला रही है और लाखों महिलाओं को रोजगार दे रही है।

चलते-चलते, फूलबासन बारंबार यह कहती रही कि गुलाबी साड़ी वाली इन महिलाओं की जिंदगी आरंभ में गुलाब की ही तरह कांटो के बीच पल रही थी। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के ‘केबीसी कर्मवीर’ को अनिवार्य रूप से देखने वाले समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने फूलबासन बाई की बातों को सुनकर उनकी सराहना की और उनके फैन हो गए। मधेपुरा के महानायक डॉ.मधेपुरी, जो जिले के कर्मवीरों को सदा सम्मानित करते रहे हैं, द्वारा लगे हाथ 107 वर्षीया वृक्ष माता पद्मश्री एस.थिमक्का की चर्चाएं भी बच्चों के बीच विस्तार से की गई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की थिमक्का संतानहीन होने के कारण वृक्षों के साथ मां-बेटे की तरह अटूट रिश्ता कायम करने में आज भी लगी है।

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क्या चुनाव बाद कोरोना फिर कहर ढायेगा ?

बिहार में चुनाव की तैयारी के दरमियान कोरोना पर दी जा रही लापरवाही किसी बड़ी आफत को दावत तो नहीं दे रही ! सीनियर सिटीजन घर में रहें, सुरक्षित रहें। बाहर निकलना जरूरी हो तो मास्क लगाकर निकले और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अवश्य करें।

बता दें कि विधानसभा चुनाव के दरमियान कोरोना को लेकर ना तो जनता को फिक्र है और ना नेता को…… ऐसा लगता है कि चुनाव के बाद कोरोना फिर कहर ढायेगा तथा बड़ी महामारी की चपेट में आएगा बिहार। चुनाव की सरगर्मी के बीच चारों तरफ सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही है, जबकि यह कहावत बड़े ही नहीं, बच्चे भी जानते हैं कि जान है तो जहान है।

जानिए कि कोरोना बिहार में चुनावी मुद्दा भी बनता जा रहा है। बिहार में दो मंत्रियों सहित एक सीनियर पुलिस पदाधिकारी, 9 नेता एवं एक दर्जन के लगभग कोरोना वरियर्स यानि डाॅक्टर्स मौत को गले लगा चुके हैं। अभी भी देश में फैलता जा रहा है। बिहार में मरने वालों की संख्या 1000 के पार चली गई है।

चलते-चलते यह बता दें कि फिलहाल बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे, पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी सहित कई अन्य बड़ी-बड़ी हस्तियां की चपेट में आने के कारण क्वारनटीन में हैं। प्रधानमंत्री भी कहते रहे हैं कि लाॅकडाउन भले ही चला गया परंतु अभी तक कोरोना वायरस नहीं गया है। हालात अभी भी नाजुक बनी हुई है। लापरवाही बरतने वाले अपने परिवार को संकट में डाल रहे हैं।

अंत में यह भी कि विदेशों में कोरोना घटने के बाद फिर से बढ़ने लगा है। संसार के न जाने कितने देश वैक्सीन बनाने में जुटे हैं परंतु सफलता नहीं मिल रही है। अतः जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं।

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23 अक्टूबर को पीएम-सीएम की पहली रैली भागलपुर में, कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से होगा पालन

भागलपुर में 23 अक्टूबर को पीएम नरेंद्र मोदी एवं सीएम नीतीश कुमार की पहली रैली में शामिल होने वाले नेताओं का कोरोना टेस्ट होगा। कोरोना निगेटिव आने पर ही मंच पर जा सकेंगे मंत्री या कोई वरिष्ठ नेता और उन्हें पीएम और सीएम के साथ मंच पर बैठने का मिलेगा मौका।

बता दें कि राज्य के प्रधान सचिव ने निर्देश जारी किया है कि रैली स्थल वीवीआईपी एरिया में तैनात सभी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों एवं पीएम-सीएम संग मंच साझा करने वाले लोगों को दो बार कोरोना संक्रमण जांच से गुजरना होगा। प्रत्यय अमृत ने संबंधित सिविल सर्जनों को पत्र द्वारा सूचित किया है कि मंच पर बैठने वालों का 22 अक्टूबर को आरटी-पीसीआर मशीन से कोरोना जांच होना आवश्यक है। निर्देश यह भी जारी किया गया कि रैली के दिन इस वीआईपी एरिया में प्रवेश करने से पहले रैपिड टेस्ट किट से जांच कराई जाए ताकि एरिया में कोई भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति प्रवेश नहीं कर पाए।

चलते-चलते यह भी कि वीवीआईपी जोन में शामिल होने वाले हर वाहन को सैनिटाइज कराया जाए और रैली में शामिल होने वाले हर व्यक्ति को प्रवेश द्वार पर हैंड सैनिटाइज कराया जाएगा। साथ ही यह भी कि बिना मास्क का रैली में किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। वीवीआईपी जोन के नजदीक मंच व रिसेप्शन लाइन में आने वाले हर व्यक्ति के लिए मास्क अनिवार्य होगा। यहां तक कि मंच निर्माण में लगे मजदूरों की भी जांच कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

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भारत के हिमाचल प्रदेश में बनी ‘अटल सुरंग’ संसार की सबसे लंबी सुरंग

बिहार के गहलौत में पहाड़ काटकर रास्ता बनाने वाले दशरथ मांझी के संकल्प की तरह 10 हजार फीट की ऊंचाई पर 9 किलोमीटर लंबी ‘अटल सुरंग’ बनाकर भारत ने यह साबित कर दिया कि संकल्प यदि सबल हो तो पहाड़ भी रास्ता छोड़ देता है। भले ही इस सुरंग को तैयार होने में 10 वर्ष ही क्यों न लगे हों, परंतु इस अटल सुरंग के बनने से हिमाचल प्रदेश के मनाली से लद्दाख के लेह के बीच के सफर की 46 किलोमीटर घट गई और यात्रियों को 4 घंटे की बचत भी हो गई।

बता दें कि इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर कर्नल परीक्षित मेहरा ने कहा कि इस सुरंग को बनने हेतु 6 वर्ष के समय निर्धारित किए गए थे, परंतु समय-समय पर मौसम की गड़बड़ी से उत्पन्न बाधाओं के कारण लगभग 4 वर्ष अधिक यानि कुल 10 वर्ष का समय लग गया।ज्ञातव्य हो कि 1 साल में सिर्फ 5 महीने ही काम हो पाता था।

श्री मेहरा ने कहा कि मनाली और लेह को जोड़ने के लिए जो सपना देखा था वह पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि यह कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में पहला कदम था जिसे भारत सरकार ने भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी सरीखे संकल्पी प्रधानमंत्री के नाम पर ‘अटल सुरंग’ रखा है।

चलते-चलते यह भी जान लें कि इस अटल सुरंग को बनाने में 2 हजार 9 सौ 58 करोड़ रुपये  खर्च हुए। इस सुरंग की विशेषता यह है कि इसमें प्रत्येक 500 मीटर की दूरी पर इमरजेंसी एग्जिट बनाया गया है। प्रत्येक 150 सौ मीटर की दूरी पर 4-जी की सुविधा भी है। प्रत्येक 60 मीटर की दूरी पर सीसीटीवी लगाए गए हैं।

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केरल देश का पहला राज्य बना, जहाँ के सभी सरकारी स्कूल बने डिजिटल

केरल भारत का प्रथम राज्य बन गया है शिक्षा के आधुनिकीकरण के क्षेत्र में। भारत में पढ़ाई में सर्वाधिक शिक्षित राज्य केरल सदा नंबर वन पर रहा। आज की तारीख में केरल अब शिक्षा का पूरा पैटर्न बदल रहा है। केरल नया प्रयोग किया है-

यह कि केरल में सभी सरकारी प्राइमरी स्कूल तथा सेकेंडरी स्कूल पूरी तरह से डिजिटल हो गए हैं। केरल सरकार ने सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बना-बनाकर डिजिटल उपकरण भी दिए और पढ़ाई भी आरंभ कर दी है। जानिए कि केरल में 16 हजार सेकेंडरी और प्राइमरी स्कूलों में हाईटेक क्लासरूम और लाभ होगा। इन स्कूलों को पूरी तरह से डिजिटल करने पर केरल सरकार ने 595 करोड रुपए खर्च भी किए हैं।

चलते-चलते यह भी जान लें कि स्मार्ट क्लास अब वक्त की जरूरत बन रही है। स्लेट-पेंसिल की तो बात पीछे छूट चुकी है, अब तो ब्लैकबोर्ड का वक्त भी खत्म होता जा रहा है। अब बच्चे को ऑडियो-वीडियो माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। फिलहाल लैपटॉप, प्रिंटर, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और वेबकैम के जरिए पढ़ाई होने लगी है। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई शैक्षणिक जीवन का हिस्सा बन चुका है। केरल सरकार का यह कदम देश के कई अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बन सकता है।

 

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