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जदयू ने तेज की अल्पसंख्यकों को दल से जोड़ने की मुहिम

जदयू ने अल्पसंख्यकों को दल से जोड़ने और उनका विश्वास हासिल करने की मुहिम तेज करते हुए गुरुवार को सीवान, भागलपुर, रोहतास, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, बेगूसराय, दरभंगा एवं मुंगेर में जदयू अल्पसंख्यक जिला कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया। सीवान में जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व संसदीय दल के नेता श्री आरसीपी सिंह तथा मुंगेर में बिहार सरकार के मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह एवं मंत्री श्री शैलेश कुमार सिंह उपस्थित रहे। वहीं भागलपुर में श्रीमती कहकशां परवीन, सांसद, राज्यसभा, रोहतास में श्री गुलाम रसूल बलियावी, राष्ट्रीय महासचिव सह विधानपार्षद, पूर्वी चंपारण में मो. खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद, मंत्री, अल्पसंख्यक कल्याण एवं गन्ना उद्योग, पूर्णिया में श्री नौशाद आलम, विधायक एवं पूर्व मंत्री, खगड़िया में श्री गुलाम गौस, पूर्व विधानपार्षद, दरभंगा में प्रो. युनूस हकीम, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मुंगेर में मो. सलाम, प्रदेश अध्यक्ष, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने मौजूदगी दर्ज की।
श्री आरसीपी सिंह ने सीवान में आयोजित सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यकों के विकास की नई इबारत लिखी है। उन्हें वोट की नहीं हमेशा वोटरों की चिन्ता रही है। आज उनके नेतृत्व में बिहार सरकार ने अल्पसंख्यक समाज के सर्वांगीण विकास के लिए जितने कार्य किए हैं उतने पहले कभी नहीं हुए। 2005-06 की तुलना में अल्पसंख्यक कल्याण का बजट आज सौ गुना से भी ज्यादा है।
मुंगेर की सभा में श्री ललन सिंह ने बिहार सरकार द्वारा अल्पसंख्यक कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्री नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यकों को समाज की मुख्यधारा में लाने का काम किया है। वहीं श्री शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि श्री नीतीश कुमार की सरकार के कारण आज मुसलमानों के लिए आगे बढ़ने के जितने अवसर हैं, उतने पहले कभी नहीं थे।
श्रीमती कहकशां परवीन, श्री गुलाम रसूल बलियावी, मो. खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद, श्री नौशाद आलम, श्री गुलाम गौस, मो. युनूस हकीम एवं मो. सलाम ने अपनी-अपनी सभाओं में जोर देकर कहा कि बिहार की महान जनता अब फिरकापरस्तों की बातों में आने वाली नहीं है। उन्हें सही और गलत का फर्क पता है। 2019 और 2020 के चुनाव में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

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एनडीए से कुशवाहा की ‘विदाई’ तय, मिले शरद से

लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए में सीटों को लेकर मची खींचतान अब अपनी परिणति पर पहुंच रही है। जदयू और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों द्वारा बराबर-बराबर सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने की विधिवत घोषणा के बाद से लगातार ‘असहज’ चल रहे उपेन्द्र कुशवाहा एनडीए में अपनी मांग पूरी ना होते देख महागठबंधन की शरण में जाते दिख रहे हैं। इस सिलसिले में उन्होंने महागठबंधन के नेता शरद यादव से नई दिल्ली में बकायदा मुलाकात भी की है। उधर माना जा रहा है कि एनडीए ने सीट शेयरिंग का नया फॉर्मूला तय कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की एनडीए से छुट्टी होने की स्थिति में बिहार में भाजपा और जदयू 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा को छह सीटें दी जाएंगी।

बहरहाल, शरद यादव से मुलाकात के बाद रालोसपा ने नई रणनीति तैयार की है जिसके तहत अब कुशवाहा की पार्टी महागठबंधन का हिस्सा हो सकती है। बता दें कि एनडीए ने उपेंद्र कुशवाहा के सामने दो सीटों का प्रस्ताव रखा था, जिस पर कुशवाहा हरगिज तैयार ना थे। अपनी राजनीतिक ताकत को नीतीश कुमार से ज्‍यादा बताते हुए उन्होंने ज्यादा सीटें मांगी थीं और इस संबंध में वे लगातार अमित शाह से मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भाजपा अध्यक्ष ने उन्हें वक्त नहीं दिया। वहीं, दूसरी ओर कुशवाहा लगातार ट्विटर के माध्यम से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोल रहे थे। जुबानी जंग तथाकथित ‘नीच’ प्रकरण तक पहुँची और फिर इस स्तर तक बढ़ गई कि उन्होंने नीतीश पर रालोसपा विधायकों को तोड़ने का भी गंभीर आरोप लगा दिया। ऐसे में ये अटकलें तेज हो गई थीं कि उपेंद्र कुशवाहा एनडीए से अलग हो सकते हैं।

बहरहाल, इस बीच माना जा रहा है कि शरद से मुलाकात के दौरान कुशवाहा ने छह सीटों की मांग की है। इस संबंध में शरद अगले हफ्ते लालू से रांची में अपनी प्रस्तावित मुलाकात के दौरान बात कर सकते हैं। आरजेडी सुप्रीमो से हरी झंडी मिलने के बाद कुशवाहा से उनकी अगले चरण की बात होगी।

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कोसी फिल्म फेस्टिवल की वैश्विक पहचान आगे बनेगी भारतीय सिनेमा की शान

सहरसा के कला भवन में पहली बार आयोजित दो दिवसीय कोसी फिल्म फेस्टिवल का आयोजन कोसी, मिथिलांचल और सीमांचल के लिए बहुत बड़ा आयोजन साबित होने जा रहा है। करीब 1 दर्जन से अधिक हिन्दी, मैथिली फिल्मों का प्रदर्शन जहाँ कोसी क्षेत्र की वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है वहीं आये हुए कलाकारों, गीतकारों, संगीतकारों एवं निर्देशकों ने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे फिल्म फेस्टिवल का आयोजन एक क्रांतिकारी कदम है जिसका असर 5 साल बाद देखने को मिलेगा।
बता दें कि दो दिनों तक कोसी प्रमंडलीय मुख्यालय सहरसा शहर के मिजाज को फिल्मी बनाये रखनेवाले फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन जहाँ  प्रसिद्धि प्राप्त  बिहारी सिने अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र द्वारा सुपर बाजार स्थित कला भवन में किया गया वहीं उसी फिल्म फेस्टिवल में शामिल हुए सभी चेहरे पर्दे पर जाने-पहचाने परंतु कुछ एक  को छोड़कर अधिकतर आज भी अपनों के बीच अनजाने हैं।
जानिए कि कई फिल्मों में अपनी भूमिकाओं से सुर्खियां बटोरने वाले नवहट्टा-मुरादपुर निवासी पंकज झा, सुपौल-कोशलीपट्टी निवासी राम बहादुर रेणु, सिमरी बख्तियारपुर के  चकभारो  निवासी शाहनवाज हनीफ, बलवाहाट निवासी मनीष सिंह राजपूत, पतरघट-भागवत गांव के विपुल आनंद, सत्तर कटैया-  बारा  गांव के नवनीत झा सहित अनेक लघु चलचित्रों, वृत्तचित्रों के निर्माताओं और निर्देशकों- अमृत सिन्हा, राहुल वर्मा, संदीप कुमार, शंकर आनंद झा , अमलेश आनंद, अहमद जमाल , आशुतोष सागर , गौतम आजाद आदि को मिथिला के परंपरागत पाग के साथ चादर एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान 15 लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया और समीक्षा भी…. जिनमें प्रमुख लघु फिल्में हैं- आत्म-ग्लानि, महाकुंभ, नई राह, तिरंगा, गलीकूची, मातृभूमि, चरस, केसर-कस्तूरी…… आदि। इनमें से कुछ टेली फिल्में  कोसी के ऐसे कलाकारों की देन है जो कोसी की माटी में जन्मे तो सही, परन्तु अपनी प्रतिभा के दम पर मुंबई में स्थापित हो चुके हैं।
दो दिवसीय कोसी फिल्म फेस्टिवल के सफल संचालन के लिए दर्शकों नेे हृदय से सहरसा ग्रुप के इन कलानुरागियों को हृदय से साधुवाद दिया जिनकी उपस्थिति और मेहनत चर्चा का विषय बना रहा। वे  हैं- संचालक आनंद झा, डॉ.शशि शेखर झा एवं रवि शंकर सहित रजनीश रंजन, मनीष रंजन, मुक्तेश्वर सिंह मुकेश, प्रो.गौतम कुमार सिंह…… कोएंकर शैली मिश्र, साकेत आनंद, शालिनी सिंह, मृत्युंजय तिवारी, मोनू झा, अजय चौहान, बिपिन सिंह, अमर कुमार, अभिषेक वर्धन, विपिन कुमार आदि।

 

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घर से घाट तक….. लोक आस्था का (चार दिवसीय) महापर्व छठ !

महापर्व छठ देखकर बिहार की ऊँचाई को देश ही नहीं विदेश के लोग भी महसूसते रहे हैं। सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है छठ जिसमें मुस्लिम और अन्य धर्मावलंबी भी बढ़-चढ़कर लेते हैं भाग…..। कहीं कोई कलह-कोलाहल नहीं…. कई जगह पर तो मुस्लिम महिलाएं भी करती हैं छठ। इस पर्व के अवसर पर दूर देशों में रहने वाले लोगों को भी खींच लाती है अपनी सरजमीन…..।

बता दें कि देश में ही नहीं…… विदेशों में भी एक दिन कद्दू भात, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा की अद्भुत छटा विखेरते रहे हैं सात समंदर पार के लोग। सिंगापुर से लेकर बहरीन…… मॉरीशस से लेकर कैलिफोर्निया में बसे बिहारियों में छठ पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। सूर्योपासना के इस महापर्व छठ के साथ-साथ पद्मश्री शारदा सिन्हा के कर्णप्रिय छठि मैया के गीतों पर देशी महिलाऔं के साथ-साथ विदेशी महिलाएं भी झूम उठती हैं।

यह भी जानिए कि छठ ही एक ऐसा पर्व है, जिसकी पूरी सत्ता मातृ प्रधान है। इस पर्व में महिलाएं स्वामिनी की भूमिका में होती हैं और पुरुष सेवक भाव में खड़ा दिखता है। महिलाएं अर्घ्य – गीत गाती हुई घाटों की ओर जा रही होती हैं तो पुरुष अपने माथे पर पूजन सामग्रियों की टोकरी लिए हुए चलते दिखते हैं…… यानी घर से घाट तक यह पुरुष प्रकृति के सामने नतमस्तक दिखता है। तभी तो प्राचीन भारतीय समाज में पुत्र अपनी मां के नाम से जाना जाता था।

बच्चों को यह जानना जरूरी है कि यह छठ पर्व हमें देता है- प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश। सूर्योपासना का यह पर्व हमें प्रकृति के करीब तो लाता ही है साथ ही किसी भी प्रतिकूल परिणाम को अनुकूल बना देता है। जब लोग जल में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं तो हानिकारक पराबैंगनी किरणें अवशोषित होकर ऑक्सीजन में परिणत हो जाती है और लोग उन किरणों के कुप्रभावों से बचते हैं। यह भी सच है कि सूर्य ही जल के स्रोत को राह देता है।

आगे यह भी जानिए कि इस पर्व के केंद्र में कृषि, किसान और मिट्टी है। हर फल व सब्जी इस पर्व का प्रसाद है। मिट्टी के बने चूल्हे पर हर तरह का प्रसाद बनाया जाता है तथा बांस से बनी सूप में पूजन सामग्री रखकर अर्घ्य दिया जाता है। बाट से लेकर घाट तक की सफाई की जाती है। आपदा प्रबंधन व सुरक्षा व्यवस्था हेतु प्रशासन एवं पब्लिक दोनों सचेत दिखते हैं।

छठ पर्व पर गाए जाने वाले गीतों में एक गीत बेटी मांगने वाला भी है। हमारे बिहार के  ग्राम्य जीवन में ‘कुंवारे आंगन’ जैसे शब्द भी हैं यानी जिस आंगन में बेटी के विवाह के फेरे नहीं पड़े तो वह आंगन कुंवारा रह गया…. ऐसा माना जाता है। परंतु सरकार द्वारा प्रायोजित ‘बेटी बचाओ…… बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम अब इस महापर्व के जरिये प्रखरता से ऊंचाई ग्रहण करता जा रहा है…..!

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नीतीश को ब्रिटिश पार्लियामेंट करेगा सम्मानित

बिहार राज्य के मुंगेर जिले के छोटे से गाँव कल्याणपुर से निकलकर भारत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले डॉ.नीतीश दुबे को होम्योपैथ चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं किये गये शोध के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा सम्मानित किया जाएगा। भारत से पहली बार किसी होम्योपैथ चिकित्सक को सम्मानित करने के लिए डॉ.नीतीश को 24-26 नवंबर के बीच आयोजित होने वाले भारत कॉन्क्लेव में आमंत्रित किया गया है।
बता दें कि इस प्रकार का आयोजन भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसदों द्वारा किया जा रहा है जिसमें वैसी हस्तियों को आमंत्रित किया गया है जो भारतीय संस्कृति, फैशन, वेद और आयुष जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले भारतीयों में शुमार किये जाते हैं।
जानिए कि होम्योपैथ क्षेत्र से पहली बार ब्रिटिश पार्लियामेंट में किसी डॉक्टर को सम्मानित किया जाएगा। यूँ तो इस सम्मान के लिए चयनित डॉ.दुबे को पहले भी जर्मनी में दुनिया के सबसे बड़े होम्योपैथ रिसर्च संस्थान (DHU) जैसी बड़ी संस्था ने  सम्मानित किया है। जेनेवा में WHO के कार्यक्रम में भी सम्मानित हुए हैं।
यह भी बता दें कि डॉ.नीतीश दुबे हरि ओम होमियो (कल्याणपुर) के मैनेजिंग डायरेक्टर तो हैं ही , साथ ही बर्नेट होम्योपैथी प्राइवेट लिमिटेड नामक दवा कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। हरिओम होमियो की शाखाएं बेगूसराय , भागलपुर , पटना और दिल्ली में भी है।
चलते-चलते बता दें कि डॉ.नीतीश दुबे के साथ-साथ प्रसिद्ध अभिनेता मनोज वाजपेयी, फिल्म निर्माता बोनी कपूर, पद्मश्री शाहनवाज हुसैन , ग्रीन मैन ऑफ़ इंडिया अब्दुल गनी एवं अनुराधा गोयल जैसी हस्तियों को भी ब्रिटिश पार्लियामेंट के इस कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।

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मधेपुरा में ब्रम्हाकुमारियों ने धूमधाम से मनाया भैया दूज

प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व दीपावली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है जो भाई के प्रति बहन के अगाध स्नेह को अभिव्यक्त करता है।  बहनें अपने भाई की खुशहाली व सुख की प्राप्ति के साथ-साथ लंबी आयु एवं ऐश्वर्य की कामना करती हैं।

बता दें कि मिथिलांचल का अति महत्वपूर्ण भाई-बहन के अटूट प्रेम पर आधारित यह भैया दूज पर्व जिले के मुरलीगंज, उदाकिशुनगंज, आलमनगर, पुरैनी, शंकरपुर, घैलाढ़ आदि अन्य सभी प्रखंडों में सर्वाधिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। हर आंगन में भैया दूज पर्व को लेकर काफी चहल-पहल देखी गई। रंगोली बना-बनाकर एवं नए-नए वस्त्र धारण कर अपने भाई के लिए अक्षत, चंदन, चांदी का सिक्का आदि-आदि के साथ इंतजार करती बहनों को भी बांट जोहती खड़ी देखी गईं।

यह भी जानिए कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय मधेपुरा के सेवा केंद्र पर केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके रंजू दीदी की टीम द्वारा लोक आस्था के इस पर्व “भैया दूज” के आध्यात्मिक रहस्य को विस्तार से बताया गया तथा शुक्रवार को धूमधाम से सभी भाइयों को आमंत्रित कर श्रद्धा पूर्वक यह पर्व मनाया गया। सत्कार पूर्वक भोजन भी कराया गया ……।

बता दें कि जहां सर्वप्रथम ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने अपने संबोधन में यही कहा कि इस पर्व के अवसर पर बहन भाई के माथे पर सात रंग का टीका लगाती है जो आत्मा के सात गुणों को धारण करने की ओर इशारा करता है….. वहीं मुख्यवक्ता के रूप में मधेपुरा के भीष्म पितामह समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र  मधेपुरी ने कहा कि भौतिक संपन्नता के बावजूद आज मनुष्य दु:ख के रास्ते पर चल पड़े हैं तथा दु:खी होकर भय के वातावरण में जी रहे हैं। डॉ.मधेपुरी ने अंत में यही कहा कि जबसे ब्रम्हाकुमारी रंजू दीदी का मधेपुरा में आगमन हुआ है तब से इन्होंने कैंची की संस्कृति को नकारा है और सूई की संस्कृति को घर-घर फैलाया है।

मौके पर पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा यादव, डॉ.गणेश प्रसाद यादव, डॉ.अजय कुमार, डॉ.एन.के.निराला, विजय वर्धन, दिनेश प्रसाद यादव, बीके जानकी, दुर्गा, संगीता आदि मौजूद थे।

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बहुत खास है पटना के गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी की चित्रगुप्त पूजा

पटना के गर्दनीबाग स्थित ठाकुरबाड़ी की परंपरा सामाजिक समरसता की रही है। श्रीचित्रगुप्त पूजा का अवसर यहां सबके लिए बड़ा आयोजन है। इस दिन यहां हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं और भगवान चित्रगुप्त से आशीर्वाद लेते हैं। खास बात यह कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस दिन यहां हर साल आते हैं और सभी श्रद्धालुओं के साथ प्रसाद और भोजन ग्रहण करते हैं। इस बार भी वे यहां के चित्रगुप्त पूजनोत्सव में केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, विधानपार्षद प्रो. रणवीर नंदन, पूर्व मंत्री रंजीत सिन्हा एवं जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप के साथ शामिल हुए और बिहार की सुख, समृद्धि, विकास एवं खुशहाली की कामना की।

CM Nitish Kumar worshipping at Gardanibagh Thakurbari, Patna
CM Nitish Kumar worshipping at Gardanibagh Thakurbari, Patna.

मुख्यमंत्री एवं उनके साथ समारोह में शामिल हुए विशिष्ट लोगों के अलावे भी इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की, जिनमें सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद, विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, विधानपार्षद सूरजनंदन मेहता, विधायक अरुण सिन्हा एवं विधायक नितिन नवीन शामिल हैं। बिहार सरकार के मुख्य सचिव दीपक कुमार, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर राजेश वर्मा, सूचना आयुक्त अरुण कुमार वर्मा सहित कई बड़े अधिकारी भी इस खास मौके पर मौजूद रहे।

इस पुनीत आयोजन का एक बड़ा आकर्षण यह भी रहा कि आज यहां समाज के कई वैसे लोगों को सम्मानित भी किया गया, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। यही नहीं, गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी चित्रगुप्त पूजा समिति द्वारा महादलित समाज के 25 बच्चों को एक साल के खर्च के रूप में छात्रवृत्ति भी दी गयी। इसके साथ ही, इस दौरान लगभग पांच हजार लोगों ने सामाजिक समरसता भोज में हिस्सा लिया जो निश्चित तौर पर समिति के सभी सहयोगियों की बड़ी उपलब्धि है।

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अब देश में मिट्टी से बनेगी बिहार मॉडल की पक्की सड़कें

बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग और विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से पटना एनआईटी में चल रहा है मिट्टी से पक्की सड़क बनाने पर काम जिसमें सीमेंट, चूना-पत्थर और फ्लाई-ऐश को मिट्टी में मिलाकर पत्थर जैसी मजबूती वाली सड़क (प्रति किलोमीटर ₹50 लाख रूपये  बचत के साथ) वरदान साबित हो रही है। क्योंकि, पिछले एक दशक में गिट्टी की कीमत में 3 गुने की वृद्धि हुई है।
बता दें कि प्रथम चरण में भागलपुर, पूर्णिया आदि जिलों की ग्रामीण सड़कों में प्रायोगिक तौर पर इसका प्रयोग सफल रहा है। इस प्रकार की सड़कों में बाढ़ और बहाव में भी टिके रहने की क्षमता प्रायोगिक रूप से देखी गई है।
जानिए कि कंकड़-पत्थर और अलकतरे से बनने वाली सड़कें अब पुरानी हुई। फिलहाल मिट्टी में सीमेंट, चूना-पत्थर और थर्मल पावर प्लांट से निकली फ्लाई-ऐश (राख़) मिलाकर पत्थर जैसी मजबूत सड़क पटना के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी द्वारा बनाने की तैयारी चल रही है। इससे मिट्टी की भार सहन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। साथ ही धूप, नमी, पानी आदि का प्रभाव भी बहुत कम हो जाता है।
यह भी बता दें कि पटना एनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच के प्रोफेसर संजीव सिन्हा के नेतृत्व में विभागीय शिक्षकों एवं छात्रों के सहयोग से सड़क बनाने की जिस तकनीक पर काम चल रहा है उसे टिकाऊ एवं सस्ती बताई जा रही है। यह भी कि इसमें सड़कों की लागत लगभग आधी हो जाएगी यानी एक करोड़ में बनने वाली सड़क इस विधि से मात्र ₹50 लाख़ में ही तैयार हो जाएगी।
चलते-चलते यह भी बता दें कि दक्षिण बिहार के 10 जिलों में 20 स्थानों की मिट्टी की जाँच एनआईटी द्वारा की जा रही है। अधिकांश जिले बाढ़ प्रभावित होने के कारण यहाँ की सड़कें पानी में डूब जाने के बाद भी टिकी रहे- ऐसी क्षमता विकसित की जा रही है। कौन सी मिट्टी इस नई तकनीक के लिए बेहतर होगी, इसकी पड़ताल भी पिछले 6 माह से की जा रही है।

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दीपावली पर भी नहीं माने तेजप्रताप

आरजेडी सुप्रीमो के परिवार का इंतजार दीपावली जैसे मौके पर भी पूरा नहीं हुआ। तेजप्रताप नहीं माने। उनके परिवार को पूरी उम्मीद थी कि वे पत्नी ऐश्वर्या और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दीपावली मनाने घर आएंगे। पर तेजप्रताप हैं कि कभी बनारस तो कभी वृंदावन का रुख कर रहे हैं, पर घर लौटने का नाम नहीं ले रहे।

बता दें कि लालू के बड़े लाल व बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय को तलाक देने के लिए पटना परिवार न्यायालय में अर्जी दाखिल करने के बाद से लगातार घर से गायब रह रहे हैं। उन्हें इस मामले में अपने परिवार से भी समर्थन नहीं मिल रहा। बल्कि सभी उनकी पत्नी के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि पत्‍नी से तलाक की अर्जी दाखिल करने के बाद तेजप्रताप शुक्रवार को घर से निकले। शनिवार को वे रांची में पिता लालू प्रसाद यादव से मिले, जहां आरजेडी सुप्रीमो ने उन्हें समझाने की भरपूर कोशिश की। उसके बाद पटना आने के बदले वे बोधगया में ठहर गए। फिर वहां से चुपचाप बनारस चले गए। इसके बाद अब उनके वृंदावन जाने की बात कही जा रही है।

बनारस में तेजप्रताप ने कहा कि वे गायब नहीं हुए हैं, पूजा करने आए हैं। पूजा के बाद उन्होंने कहा कि जल्द ही बहुत कुछ अच्छा होने वाला है। हालांकि ये ‘अच्छा’ क्या है, इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया। बहरहाल, इस बीच उन्‍हें समझाने की कोशिशें लगातार जारी है। उधर पार्टी के स्‍तर पर भी डैमेज कंट्रेाल की कवायद जारी है।

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कर्नाटक में भाजपा की उम्मीदों पर फिरा पानी

कर्नाटक की 3 लोकसभा और 2 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों में कांग्रेस-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन मजबूत होकर उभरा है। दो विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने भाजपा को तगड़ा झटका दिया है। भाजपा के हाथ केवल शिमोगा लोकसभा सीट आई है जबकि कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन ने मांड्या और बेल्लारी लोकसभा सीटें अपने नाम की हैं। वहीं, रामनगर और जामखंडी विधानसभा सीट भी गठबंधन के खाते में गई हैं। इसी के साथ भाजपा की विधानसभा में ताकत बढ़ाने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

गौरतलब है कि जिन पांच सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए हैं, उनमें चार सीटें इस्तीफे की वजह से और एक सीट विधायक के निधन की वजह से खाली हुई थी। शिमोगा लोकसभा सीट बीएस येदियुरप्पा (बीजेपी), बेल्लारी लोकसभा सीट श्रीमुलु (बीजेपी) और मांड्या संसदीय सीट सीएस पुट्टाराजू (कांग्रेस) के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। वहीं रामनगर सीट से सीएम कुमारस्वामी (जेडीएस) के इस्तीफे और जामखंडी सीट कांग्रेस विधायक सिद्धू न्यामगौड़ा (कांग्रेस) के निधन के बाद खाली हुई थी। अब नतीजों के बाद बेल्लारी और मांड्या कांग्रेस के खाते में गई तो बीजेपी को सिर्फ शिमोगा से संतोष करना पड़ा। बाकी दो विधानसभा सीटों पर भी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को ही जीत मिली। कुल मिलाकर बीजेपी को एक लोकसभा सीट का नुकसान उठाना पड़ा।

इन उपचुनावों पर सभी की निगाहें इसलिए टिकी थीं क्योंकि इनके नतीजों का असर कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन पर पड़ना तय था। मई में हुए चुनावों के दौरान दोनों पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ लड़ी थीं लेकिन नतीजे आने के बाद गठबंधन कर लिया था। पांच सीटों में कांग्रेस ने जामखंडी और बेल्लारी और जेडीएस ने शिमोगा, रामनगर और मांड्या में प्रत्याशी उतारे। ऐसे में 2019 चुनाव से पहले गठबंधन की ताकत, आपसी तालमेल और जनता पर असर की परख इन चुनावों में देखने को मिली।

कहना गलत ना होगा कि कर्नाटक में गठबंधन के प्रदर्शन से भाजपा के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। इन नतीजों से गठबंधन की राजनीति को ताकत मिलने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और अगले साल लोकसभा चुनाव होंगे। इन राज्यों के चुनावों पर कमोबेश कर्नाटक उपचुनाव का असर जरूर पड़ेगा। ऐसे में कर्नाटक में मिली जीत गठबंधन की राजनीति के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

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