All posts by Admin

मोदी कैबिनेट की संभावित तस्वीर

लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के बाद भाजपा ने केन्द्र में नई सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस चुनाव में भाजपा ने अकेले अपने दम पर 303 सीटें जीती हैं। एनडीए के बाकी सहयोगियों को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 352 तक पहुँच जाता है। वहीं, महज 52 सांसदों के साथ काग्रेस लगातार दूसरी बार नेता प्रतिपक्ष बना पाने लायक संख्या भी नहीं जुटा पाई। हालांकि यूपीए के बाकी सहयोगियों के साथ उसका आंकड़ा 87 का है। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुआई में नई सरकार के 30 मई को शपथ लेने की संभावना है। उससे पहले मोदी को नेता चुनने की औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी।

इस बीच मोदी कैबिनेट के नए चेहरों और उनके मंत्रालयों पर कयासबाजी तेज हो गई है। इनमें सबसे बड़ा नाम अमित शाह का है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उन्हें गृह, रक्षा या वित्त मंत्रालय सौंपा जा सकता है। अटकलें हैं कि उन्हें कैबिनेट में प्रधानमंत्री के बाद नंबर दो का दर्जा मिल सकता है। पिछली सरकार में यह दर्जा राजनाथ सिंह के पास रहा है। ऐसे में कैबिनेट में नंबर दो के दर्जे पर नए सिरे से सोचना होगा। चर्चा यह भी है कि अगर शाह गृह मंत्री बने तो राजनाथ रक्षा मंत्री हो सकते हैं और मौजूदा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को विदेश मंत्री बनाया जा सकता है।

बता दें कि पिछली सरकार में विदेश मंत्री रहीं सुषमा स्वराज ने इस बार चुनाव नहीं लड़ा था। फिर भी उनकी योग्यता और अनुभव को देखते हुए उन्हें फिलहाल कैबिनेट में लेकर बाद में राज्यसभा के रास्ते संसद में पहुँचाया जा सकता है। एक और वरिष्ठ मंत्री अरुण जेटली का स्वास्थ्य इन दिनों ठीक नहीं, लेकिन मोदी से उनकी निकटता और बेजोड़ कार्यक्षमता को देखते हुए बहुत संभव है कि उन्हें फिर से कैबिनेट में लिया जाए। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को शिकस्त देकर सनसनी फैला देने वाली स्मृति ईरानी का कद भी सरकार में बढ़ सकता है।

अब बात बिहार की। इस बार बिहार से रिकॉर्ड 39 सीटें एनडीए की झोली में गई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि यहां से 8 से 10 मंत्री तक मोदी कैबिनेट में जगह पा सकते हैं। चर्चा है कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल में बिहार से जदयू को भाजपा के बराबर जगह दी जा सकती है। वहीं लोजपा को एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री की जगह मिल सकती है।

चलते-चलते बता दें कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह पिछली बार से ज्यादा भव्य होने जा रहा है। ख़बर है कि इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग को भी न्योता देने की तैयारी है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी की छवि और मजबूत होगी। पिछली बार उनके शपथ ग्रहण में सार्क देशों के प्रमुख आए थे।

सम्बंधित खबरें


भारत के लोकतंत्रीय इतिहास में इस बार सर्वाधिक महिला सांसद

मोदी की महाविजय में इस बार कई रिकॉर्ड बने तो कई टूटे, पर जो सबसे दिलचस्प और स्वागतयोग्य रिकॉर्ड बना, वो है सत्रहवीं लोकसभा में 76 महिला सांसदों का पहुँचना। जी हाँ, इस बार 723 महिला उम्‍मीदवार चुनावी मैदान में थीं, जिनमें से 76 संसद के लिए चुनी गईं। आजाद भारत के लोकतंत्रीय इतिहास में भागीदारी के लिहाज से और अब तक आम चुनावों में महिलाओं को मिली जीत के लिहाज से यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। गौरतलब है कि 2014 में कुल 663 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था, जिनमें से 66 महिलाएं संसद पहुंची थीं। इन 66 महिला सांसदों में 28 इस बार भी चुनाव जीतने में सफल रहीं। वैसे आगे बढ़ने से पहले यह भी जानें कि हमारी पहली लोकसभा में कुल 22 महिला सांसद चुनकर आई थीं और 1977 में उनकी संख्या सबसे कम (19) थी।

बहरहाल, विस्तार में जाकर देखें तो इस आम चुनाव में कुल 7,928 महिला उम्मीदवार मैदान में उतरी थीं। कांग्रेस ने सर्वाधिक 54, जबकि भाजपा ने 53 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। अन्य राष्ट्रीय पार्टियों में बसपा ने 24 महिला उम्मीदवारों को, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने 23, माकपा ने 10, भाकपा ने चार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा था। 222 महिलाओं ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।

राज्यवार बात करें तो बंगाल ने इस बार गजब का उदाहरण पेश किया। यहां के 42 सीटों में से इस बार 14 पर महिलाएं जीती हैं जो 80 सीटों वाले सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से भी ज्यादा है, जहाँ से इस बार 10 महिलाएं चुनाव जीतने में सफल हुई हैं। अन्य राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र से 8, गुजरात और उड़ीसा से 5-5, आंध्रप्रदेश और मध्यप्रदेश से 4-4, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बिहार से 3-3 तथा पंजाब और झारखंड से 2-2 महिला सांसद चुनी गई हैं। संघशासित प्रदेशों में नई दिल्ली और चंडीगढ़ सीटों से महिला उम्मीदवारों ने बाजी मारी है। पार्टियों की बात करें तो इस बार तृणमूल कांग्रेस (पश्चिम बंगाल) ने सर्वाधिक 41% महिलाओं को टिकट दिया था। दूसरे नंबर पर बीजद (उड़ीसा) थी, जिसने 33% महिलाओं को मौका दिया था।

चलने से पहले इस बार के चुनावों में महिलाओं को लेकर एक बेहद दिलचस्प आंकड़ा यह भी कि देश के 13 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा है। ये 13 राज्य हैं: बिहार, उत्तराखंड, मणिपुर, मेघालय, गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुड्डूचेरी, दमन दीव, और लक्षद्वीप।

सम्बंधित खबरें


मोदी-नीतीश की बिहारी सुनामी, 40 में 39 जीते

जहाँ 17वीं लोकसभा चुनाव के दौरान संपूर्ण भारत में ये नारे गूंजते रहे- मोदी है तो मुमकिन है….. फिर एक बार मोदी सरकार…… 300 का आंकड़ा करेगा पार…. साथ दे रहा नीतीश कुमार….. वहीं मोदी का मुखड़ा लगाकर बेगूसराय संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी गिरिराज सिंह द्वारा चार लाख उन्नीस हज़ार छह सौ साठ मतों से पराजित हुए भाकपा के कन्हैया कुमार……. और मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से राजद के दिग्गज खिलाड़ी शरद यादव को पटकनी दिया तीन लाख छह सौ इकतलिस मतों से बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव जिन्हें उतारा था मैदान में जदयू से नीतीश कुमार |

बता दें कि बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं | एक ओर मोदी-नीतीश जब भी बिहार की जनता को संबोधित करते हुए यानि मंच साझा करते हुए अपने-अपने 5 वर्षों के अंतराल में किये गये कार्यों की जनता से मजदूरी मांगते तो चारों तरफ से आवाज आती- अबकी बार मोदी सरकार …. और दोनों नेता यही कहते कि 40 में 40 हम जीतेंगे और जीते भी 40 में 39……. केवल किशनगंज के जदयू प्रत्याशी मो.अशरफ मात्र 35000 के लगभग से हार गये…… वहीं जब दूसरी ओर महागठबंधन के नेता मंच से उतरते-उतरते उद्घोष करते कि हम 40 में 40 जीतेंगे….. उनका खाता तक नहीं खुला…..!

यह भी बता दें कि आपने जिन को चुना है अपना प्रतिनिधि वे हैं –

  1. पटना साहिब से बीजेपी के रविशंकर प्रसाद
  2. पाटलिपुत्र से बीजेपी के रामकृपाल यादव
  3. बाल्मीकि नगर से जदयू के बैजनाथ प्रसाद महतो
  4. पश्चिम चंपारण से बीजेपी के डॉ.संजय जायसवाल
  5. पूर्वी चंपारण से बीजेपी के राधा मोहन सिंह
  6. शिवहर से बीजेपी के रमा देवी
  7. नालंदा से जदयू के कौशलेंद्र कुमार
  8. आरा से बीजेपी के आर.के.सिंह
  9. सीतामढ़ी से जदयू के सुनील कुमार पिंटू
  10. मधुबनी से बीजेपी के अशोक यादव
  11. झंझारपुर से जदयू के रामप्रीत मंडल
  12. सुपौल से जदयू के दिलेश्वर कामत
  13. अररिया से बीजेपी के प्रदीप सिंह
  14. किशनगंज से कांग्रेस के मो.जावेद
  15. कटिहार से जदयू के दुलाल चन्द गोस्वामी
  16. पूर्णिया से जदयू के संतोष कुशवाहा
  17. मधेपुरा से जदयू के दिनेश चंद्र यादव
  18. दरभंगा से बीजेपी के गोपाल जी ठाकुर
  19. मुजफ्फरपुर से बीजेपी के अजय निषाद
  20. वैशाली से एलजेपी के वीणा सिंह
  21. गोपालगंज से जदयू के डॉ.आलोक सुमन
  22. सिवान से जदयू के कविता सिंह
  23. महाराजगंज से बीजेपी के जनार्दन सिंह
  24. सारण से बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी
  25. हाजीपुर से एलजेपी के पशुपति कुमार
  26. उजियारपुर से बीजेपी के नित्यानंद राय
  27. समस्तीपुर से एलजेपी के रामचंद्र पासवान
  28. बेगूसराय से बीजेपी के गिरिराज सिंह
  29. खगरिया से एलजेपी महबूब अली केशर
  30. भागलपुर से जदयू के अजय कुमार मंडल
  31. बांका से जदयू के गिरधारी यादव
  32. मुंगेर से जदयू के ललन सिंह
  33. बक्सर से बीजेपी के अश्विनी कुमार चौबे
  34. सासाराम से बीजेपी के छेदी पासवान
  35. काराकाट से जदयू के महाबली सिंह
  36. जहानाबाद से जदयू के चन्देशवर चंद्रवंशी
  37. औरंगाबाद से बीजेपी के सुशील कुमार सिंह
  38. गया से जदयू के विजय माँझी
  39. नवादा से एलजेपी के चंदन कुमार
  40. जमुई से एलजेपी के चिराग पासवान

सम्बंधित खबरें


17वीं लोकसभा की मतगणना में होंगे कितने प्रकार के प्रतिबन्ध ?

17वीं लोकसभा की मतगणना को लेकर चुनाव आयोग से आये निर्देशों में पहला निर्देश यही है कि मतगणना कक्ष में कैमरा और मोबाइल आदि लेकर भ्रमण करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा | थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर प्रभारी पदाधिकारियों के नेतृत्व में छोटे-छोटे समूहों में पत्रकारों को मतगणना कक्ष का भ्रमण कराया जाएगा तथा आधिकारिक रूप से राउंडवार घोषित परिणामों की प्रतियाँ पत्रकारों को मुख्य द्वार के समीप बनाये गये मीडिया सेंटर पर उपलब्ध करा दी जाएगी |

बता दें कि निर्देशानुसार मतगणना से संबंधित आंकड़ों को कंप्यूटरीकृत करने के लिए मतगणना केंद्र पर कंप्यूटर सेल का गठन किया गया है | सीसीटीवी कैमरे और फायर ब्रिगेड आदि का इंतजाम किसी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश एवं धूम्रपान पर प्रतिबंध के लिए आवश्यक है |

जारी निर्देश/प्रतिबंध में कहा गया है कि मतगणना के पहले राउंड में पोस्टल बैलट पेपर की गिनती होगी जबकि पूर्व में पोस्टल बैलट की गिनती बाद में यानि अंत में की जाती थी | इस बार पोस्टल बैलट की गिनती के बाद ही ईवीएम से मतों की गिनती शुरु की जाएगी | पोस्ट ऑफिस से पोस्टल बैलट लाने के लिए एक विशेष पदाधिकारी प्रतिनियुक्त किया गया है तथा इन वैलेटों की गिनती यदि पहले राउंड में नहीं की गई तो उसे अपराध माना गया है |

जबकि चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रतिबंधों में यह भी कहा गया है कि यदि जीत का अंतर पोस्टल बैलट पेपर की कुल संख्या के अंदर ही होगी तो जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा दोबारा पोस्टल बैलट का सत्यापन किया जाएगा |

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहाँ मतगणना केंद्र के अंदर लोकसभा क्षेत्र के विधानसभावार गिनती के क्रम में 5 बूथों के रेंडम वीवीपैट स्लिप का मिलान होगा वहीं केंद्र से बाहर प्रत्याशियों के अंदर की धड़कने…… घबराहट….. थरथराहट और चरमराहट महसूसने के लायक होंगी |

सम्बंधित खबरें


मधेपुरा लोकसभा मतगणना केन्द्र टीपी कॉलेज में होगी एक साथ 14 टेबल पर मतों की गिनती

मधेपुरा लोकसभा चुनाव की मतगणना का कार्य सुबह 8:00 बजे से टीपी कॉलेज मतगणना केंद्र पर शुरू होगा तथा एक साथ 14 टेबल पर होगा मतों की गिनती | एक और जहाँ प्रत्येक विधानसभा चुनाव के 5-5 वीवीपैट मशीन के पर्ची का होगा मिलान वहीं दूसरी ओर निवर्तमान सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, चार बार मधेपुरा के सांसद रह चुके शरद यादव एवं तीन बार सांसद रहे बिहार सरकार के आपदा मंत्री दिनेश चन्द्र यादव के अंदर में उठ रहा होगा हार-जीत की सुनामी का तूफान !

बता दें कि प्रत्येक टेबल पर माइक्रो ऑब्जर्वर, मतगणना प्रेक्षक, मतगणना सहायक के साथ-साथ इन उम्मीदवारों के एजेंट भी रहेंगे मौजूद | सुविधा पोर्टल पर विधानसभा वार डाटा अपलोड होने के साथ-साथ क्यूआर स्कैनर के द्वारा ईटीपीबीएस को भी किया जाएगा स्कैन |

यह भी बता दें कि जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम मधेपुरा नवदीप शुक्ला ने कहा कि ड्राय रन के दौरान हर एक टेबल पर ईवीएम के मतों की काउंटिंग तथा डाटा अपलोड में लगभग 20 से 25 मिनट तक का समय लगता है | उन्होंने कहा कि दोपहर तक चले रिहर्सल में राउंडवार मतों की गिनती की प्रक्रिया को दोहरा लिया गया जिस दौरान सामान्य प्रेक्षक पुनीत गोयल की निगरानी में आयोजित ड्राय रन के कार्य में लगाये गए सभी सुपरवाईजार, कार्यपालक सहायक,आईट सहायक के अलावा माइक्रो ऑब्जर्वर, उपनिर्वाचन पदाधिकारी, सभी एआरओ समेत अन्य अधिकारी-पदाधिकारीगण मौजूद थे |

चलते-चलते यह भी बता दें कि मधेपुरा-सहरसा विधानसभा में जहाँ गिनती 25-25 राउंड चलेगा वहीं मेहिषी-बिहारीगंज में 22-22 राउंड चलेगा और सोनवर्षा में 23 राउंड तो आलम नगर में 24 राउंड में गिनती पूरी की जाएगी |

सम्बंधित खबरें


जानें एग्जिट पोल में बिहार की चर्चित सीटों के परिणाम

लोकसभा चुनाव का शोर थमने के बाद अब हर जगह एग्जिट पोल की चर्चा है। एग्जिट पोल में ज्यादातर एजेंसियां एनडीए को बहुमत दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वापसी तयप्राय दिख रही है। बिहार की बात करें तो अधिकांश एग्जिट पोल में यहां की 40 सीटों में 30 से ज्यादा सीटें एनडीए को मिलती दिख रही हैं। चैनल आजतक ने तो 38 से 40 सीटें तक एनडीए के खाते में जाने की बात कही है। कुल मिलाकर मोदी-नीतीश-रामविलास की तिकड़ी यहां काम कर गई है, इसमें कोई दो राय नहीं। सीटें एग्जिट पोल से कुछ कम या ज्यादा भले रह जाएं पर इतना तय है कि आरजेडी, कांग्रेस, रालोसपा, हम और वीआईपी का गठबंधन बिहार की जनता को कुछ रास नहीं आया।

बहरहाल, यहां हम विभिन्न एग्जिट पोल के आधार पर बिहार की कुछ चर्चित सीटों के संभावित परिणाम से अवगत कराने जा रहे हैं। शुरू करते हैं मधेपुरा से जहां आरजेडी के टिकट पर लड़े लोजद नेता शरद यादव और एनडीए व यूपीए से गोटी बिठा पाने में नाकाम रहे जाप नेता और वर्तमान सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का मुकाबला बिहार सरकार के मंत्री और जदयू उम्मीदवार दिनेश चन्द्र यादव से है। एग्जिट पोल की मानें तो मधेपुरा की इस बहुचर्चित सीट से दिनेश चन्द्र यादव बाजी मार सकते हैं। जीत-हार का फासला चाहे जो हो, शरद और पप्पू की हार यहां तय मानी जा रही है। कोसी की दूसरी सीट सुपौल भी स्पष्ट तौर पर जदयू के खाते में जाती दिख रही है। यहां से वर्तमान सांसद और पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन को जदयू उम्मीदवार दिलेश्वर कामत मात देने जा रहे हैं।

अब रुख करते हैं बेगूसराय का जिसने इस चुनाव में देश भर का ध्यान आकृष्ट किया है। एग्जिट पोल के मुताबिक बेगूसराय में गिरिराज सिंह बाजी मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे कन्हैया कुमार और तनवीर हसन पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। एग्जिट पोल के अनुसार गिरिराज बेगूसराय पर भाजपा का विजय पताका फहरा सकते हैं और कन्हैया कुमार को मुंह की खानी पड़ सकती है।

राजधानी पटना से जुड़ी दोनों सीटें पटना साहिब और पाटलिपुत्र का मुकाबला भी कम दिलचस्प नहीं, लेकिन दोनों ही सीटें भाजपा को मिलती दिख रही हैं। पटना साहिब में जहां भाजपा के रविशंकर प्रसाद शत्रुघ्न सिन्हा को इस बार ‘खामोश’ करने जा रहे हैं, वहीं पाटलिपुत्र सीट पर आरजेडी की मीसा भारती पिता लालू प्रसाद यादव के नाम पर सहानुभूति जुटाने में विफल होती दिखाई पड़ रही हैं। यह सीट फिर भाजपा के राम कृपाल यादव के जीतने की पूरी संभावना है।

बिहार की जमुई लोकसभा सीट पर लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को मुश्किल मुकाबले में बताया जा रहा था, लेकिन एग्जिट पोल के अनुसार वे रालोसपा के भूदेव चौधरी पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। वहीं मुंगेर से जदयू के लिए अच्छी खबर है। वहां से राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी और कांग्रेस उम्मीदवार नीलम देवी को हराने जा रहे हैं।

वैशाली में आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह पार्टी के लिए जीत का सूखा खत्म करते दिख रहे हैं। एग्जिट पोल में वे लोजपा की वीणा देवी को हराते दिख रहे हैं। वहीं, आरजेडी के लिए प्रतिष्ठा की सीट सारण पर एक बार फिर भाजपा का परचम लहराने जा रहा है। यहां से राजीव प्रताप रूड़ी लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय को पटखनी देने जा रहे हैं।

सम्बंधित खबरें


सातवें चरण के साथ खत्म हुआ दुनिया का सबसे खर्चीला चुनाव

आज सातवें चरण की 59 सीटों पर मतदान के साथ भारतीय लोकतंत्र का यज्ञ पूरा हो गया। इस चरण में बिहार की आठ सीटों – नालंदा, काराकाट, जहानाबाद, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, बक्सर, आरा और सासाराम – के अलावा उत्तर प्रदेश की 13, पंजाब की 13, पश्चिम बंगाल की 9, मध्यप्रदेश की 8, हिमाचल प्रदेश की 4, झारखंड की 3 और चंडीगढ़ की 1 शामिल थी। इस चरण में प्रत्याशियों की कुल संख्या थी 918, जबकि मतदाताओं की संख्या थी 10.1 करोड़ और मतदान केन्द्रों की संख्या 1.02 लाख। अब सबकी निगाहें 23 मई की मतगणना पर जा टिकी है। हालांकि अपने-अपने एग्जिट पोल के साथ सारे टीवी चैनल शाम से ही आ डटे हैं।

बहरहाल, देश का निर्णय तो हम 23 मई को जान ही लेंगे। फिलहाल जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के 17वें लोकसभा चुनाव के संबंध में कुछ दिलचस्प बातें। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह चुनाव दुनिया का अब तक का सबसे खर्चीला चुनाव था। जी हाँ, नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमएस) के अनुसार सात चरणों में कराए गए इस चुनाव का कुल खर्च 50 हजार करोड़ रुपये (सात अरब डॉलर) है, जबकि 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का खर्च इससे कम करीब 6.5 अरब डॉलर था।

आपको बता दें कि सीएमएस के अनुमान के अनुसार 2014 के लोकसभा चुनाव का खर्च करीब 5 अरब डॉलर था। पांच साल बाद 2019 में हो रहे 17वें लोकसभा चुनाव में इस खर्च में 40 फीसद इजाफा हो चुका है। जरा सोच कर देखिए कि जिस देश की साठ प्रतिशत आबादी महज तीन डॉलर प्रतिदिन पर गुजारा करती है, उसमें प्रति मतदाता औसतन आठ डॉलर का खर्च क्या लोकतंत्र को मुंह नहीं चिढ़ाता।

अगर आपको उत्सुकता हो रही हो कि सबसे अधिक खर्च किस मद में होता है तो बता दें कि सर्वाधिक खर्च सोशल मीडिया, यात्राएं और विज्ञापन के मद में किया जाता है। इस बार यह खर्च कितना बेहिसाब बढ़ा उसका अनुमान इसी से हो जाएगा कि 2014 में सोशल मीडिया पर जहां महज 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, वहीं इस बार यह खर्च बढ़कर पांच हजार करोड़ रुपये जा पहुंचा।

आज की तारीख में शायद आपको अविश्वसनीय लगे, लेकिन बकौल चुनाव आयोग, देश के पहले तीन लोकसभा चुनावों का खर्च 10 करोड़ रुपये से कम या उसके बराबर था। इसके बाद 1984-85 में हुए आठवें लोकसभा चुनाव तक कुल खर्च सौ करोड़ रुपये से कम था। 1996 में 11वें लोकसभा चुनाव में पहली बार खर्च ने पांच सौ करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया। 2004 में 15वें लोकसभा चुनाव तक यह खर्च एक हजार करोड़ रुपये को पार कर गया। 2014 में खर्च 3870 करोड़ रुपये 2009 के खर्च से करीब तीन गुना अधिक था।

सम्बंधित खबरें


135वीं जयन्ती पर महर्षि मेंहीं मय हुआ मधेपुरा

समस्त समाज में शांति और सौहार्द कायम करने के लिए अहंकार को त्याग कर विनम्रता के मार्ग पर चलना सिखाने वाले महर्षि मेंहीं जी महाराज के जयकारे व जयघोष से शुक्रवार को सुबह-सवेरे से गुंजायमान होती रहीं मधेपुरा जिले की गलियाँ | प्रभातफेरी के दौरान वाहनों की लम्बी कतार वाली शोभायात्रा में पुरुषों से ज्यादे महिलाएं और बूढे से अधिक बच्चे शामिल थे | सत्संग, ध्यानाभ्यास व प्रवचन में शामिल हुए 50 हजार से कहीं ज्यादे भक्तजन !

बता दें कि जिले के सभी प्रखंडों में संतमत के संस्थापक ब्रह्मलीन संत महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की आकर्षक झांकियाँ गाजे-बाजे व बैंड-बाजे के साथ निकाली गईं | समाज को नई दिशा देने वाले महर्षि मेंहीं के तैलचित्र पर घर-परिवार से निकल-निकलकर जहाँ महिलाएं पुष्पांजलि करती एवं आरती उतारती देखी गईं वहीं बड़े-बुजुर्गों को चित्र पर माल्यार्पण करते देखा गया | प्रभातफेरी व शोभायात्रा या नगर-कीर्तन व मनोरम झांकी के दौरान संतो द्वारा श्रद्धालुओं को महर्षि मेंहीं के आदर्शों एवं उच्च विचारों को आत्मसात करने के लिए नारे लगाते देखे गये | इस दौरान पूरे जिले में भक्तिमय माहौल बना रहा क्योंकि महर्षि मेंहीं ने अपने उच्च सोच एवं विचारों से भटकते समाज को नई दिशा देने का काम किया था |

यह भी बता दें कि महर्षि मेंहीं की जयंती पर दिनभर सम्पूर्ण जिले में और जिले से बाहर भी उत्सवी माहौल बना रहा | कहीं दिल्ली व कोलकाता से आये श्रद्धालुओं व भक्तों को भजन-कीर्तन में मशगूल देखा गया तो कहीं चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों को जीवन में आत्मसात करने की शपथ लेते हुए कैमरे में कैद किया गया |

इस अवसर पर सामूहिक भंडारे के साथ-साथ जहाँ सभी आश्रमों में भजन-कीर्तन, प्रवचन-पुष्पांजलि, सत्संग व वेदपाठ की धूम मची रही वहीं कई प्रमुख जगहों पर अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के मंत्रियों व महामंत्रियों द्वारा महर्षि मेंहीं के व्यक्तित्व-कृतित्व, आदर्श-आचरण व उनके सद्विचारों पर प्रकाश डालते हुए यह भी कहा गया कि संत मेंहीं युग प्रवर्तक ही नहीं युगावतार थे, एक महान समन्वयकारी संत थे | उनके बताये रास्तों पर चलकर ही सद्ज्ञान और कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो पायेगा |

चलते-चलते यह भी कि महर्षि मेंहीं का जन्म मधेपुरा जिला अंतर्गत ग्वालपाड़ा प्रखंड के मझुआ श्याम गांव में उनके ननिहाल में हुआ था जो आज की तारीख में संतमत के लाखों अनुयायियों का प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है | फिलहाल परमहंस महर्षि मेंहीं की साधना स्थली भागलपुर के कुप्पाघाट के आचार्य स्वामी हरिनंदन बाबा द्वारा जयंती समारोह पर आयोजित प्रवचन के दौरान ये बातें कही गई-

श्रद्धालुजन ! संतों के बताये मार्ग को अपनाएं, क्योंकि संतों का अवतार भटके हुए लोगों के कल्याण के लिए ही होता है | गुरूवाणी उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि सबका ईश्वर एक है और उसकी प्राप्ति का रास्ता भी एक है जो बाहर नहीं…… मनुष्य के अंदर है |

सम्बंधित खबरें


‘वर्ल्ड हाइपरटेंशन दिवस’ पर भी तो हों अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हम

भारत में हाइपरटेंशन के कारण प्रतिवर्ष लगभग ढाई लाख लोगों की मौत हो जाती है | आखिर है क्या यह हाइपरटेंशन ?

बता दें कि हाइपरटेंशन किडनी के लिए तो खतरनाक है ही…… यह हाइपरटेंशन प्रत्येक व्यक्ति की आंखों से लेकर हार्ट तक को भी बुरी तरह प्रभावित कर डालता है | हाइपरटेंशन को समझना इसलिए बहुत आसान है कि इसके दर्जनों लक्षण हैं |

यदि आपको नींद में कमी होने लगे….. साँसों की गति तेज होने लगे….. ब्लड प्रेशर बढ़ने लगे…… मांस पेशियों में दर्द होने लगे….. भूख में कमी होने लगे……. चिड़चिड़ापन बढ़ने लगे और कमजोरी के अतिरिक्त बदन दर्द….. सिर दर्द….. और थकान के साथ-साथ पाचन की समस्याएं भी होने लगे तो समझ लें कि आप हाइपरटेंसिव हो रहे हैं जबकि अधिकांश लोग इन सब चीजों को जीवनशैली से जोड़कर नजरअंदाज करते रहते हैं |

वर्ल्ड हाइपरटेंशन दिवस (17 मई) के दिन आम लोगों को भी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना होगा | सबों को यह जानना होगा कि ब्लड प्रेशर एक साइलेंट किलर के तौर पर आम लोगों के जीवन में जहर घोल रहा है | ये सारे लक्षण बीमारियों की सीढ़ियाँ जैसी है…. इसे समझना होगा तभी हम अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाये रख सकेंगे |

स्थानीय वृंदावन नर्सिंग होम के चिकित्सक दंपति सर्जन डॉ.वरुण कुमार एवं डॉ.रश्मि भारती ने मधेपुरा अबतक द्वारा हाइपरटेंशन के बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में यही कहा- भले ही लोग तनाव को कोई बीमारी ना माने लेकिन यह किसी बड़ी बीमारी से कम भी नहीं है | यह रात की नींद छीन लेता है और दिन की भूख-प्यास | झूठी प्रतिष्ठा और धन संचय की होड़ में लोगों की खुशियां गायब होने लगी है | नकली खुशी और हंसी के लिए लोग लाफ्टर शो की शरण में जाने लगे हैं | ऐसा लगता है कि कुछ दिनों में लोग हंसना भी भूल जायेगा…..|

यह संकल्प तो ले लें आज इस वर्ल्ड हाइपरटेंशन दिवस के दिन कि तनाव को खुद से दूर रखना है | हर हाल में खुश रहना है | क्योंकि, तनाव का खामियाजा पूरे परिवार को झेलना पड़ता है | वैवाहिक जिंदगी तबाह हो जाती है | बच्चों पर बुरा असर पड़ने लगता है | पारिवारिक कलह वाले घरों में तनाव एवं मानसिक रोगों की अधिकता देखी जाती है |

चलते-चलते यह भी जान लें कि तनाव मुक्त स्वस्थ जीवन जीने के लिए आहार, विहार के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में अश्वगंधा, अर्जुना, ब्राह्मी, आवला व एलोवेरा जैसी प्रमुख वनस्पतियों का सेवन सर्वाधिक सहायक है | जहाँ दूध, संतरा और सूखे मेवे में पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है जो तनाव दूर करने में सहायक है वहीं हरी साग, सोयाबीन, मूंगफली तथा आम में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होने के कारण ये हमारे शरीर को हाइपरटेंशन से लड़ने में सहायता करती है |

सम्बंधित खबरें


कुलाधिपति करेंगे कार्यशाला का उद्घाटन

सूबे बिहार के विश्वविद्यालयों में शोध कार्यों की गुणवत्ता के विकास को लेकर पटना के होटल लेमन ट्री में 29 मई 2019 को एक कार्यशाला का वृहत आयोजन किया गया है | शोध गुणवत्ता को लेकर आयोजित इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति लालजी टंडन करेंगे |

बता दें कि इस अवसर पर ‘Key Notes’ देंगे स्पीकर भारतीय सामाजिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ.बी.बी.कुमार एवं यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन के सेक्रेटरी रजनीश जैन | यूजीसी के वाइस चेयरमैन डॉ.बी.पटवर्धन एवं काउंसिल आफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के हेड डॉ.ए.के.चक्रवर्ती दोनों उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे |

यह भी बता दें कि मौके पर जहाँ गेस्ट आफ ऑनर होंगे- राजभवन के उच्च शिक्षा परामर्शी प्रो.आरसी सोबती एवं महामहिम के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह वहीं भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय विश्वविद्यालय के 20 प्रतिभा संपन्न शिक्षकों की टीम के साथ कार्यशाला में शिरकत करेंगे | जहाँ शोध-गुणवत्ता के विकास हेतु आवश्यक नीति निर्धारण, आधारभूत संरचना एवं व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु विचार-विमर्श किया जाएगा |

उद्घाटन सत्र के समापन के कुछ देर बाद तकनीकी सत्र को संबोधित करेंगे- सीएसआईआर के डॉ.हरिओम यादव, विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के परामर्शी डॉ.अखिलेश गुप्ता, अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.जे.कृष्णास्वामी, रिसर्च सेल के इंचार्ज डॉ.अखिलेश मिश्रा आदि अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक |

चलते-चलते यह भी बता दें कि बीएनएमयू के नामित 20 शिक्षकों में होंगे- स्नातकोत्तर रसायन के डॉ.ए.के.यादव एवं सीनेटर डॉ.नरेश कुमार, वनस्पति पीजी के डॉ.बीके दयाल एवं डॉ.अबुल फजल, पीजी जूलॉजी के डॉ.नरेंद्र श्रीवास्तव एवं डॉ.राजकुमार, मनोविज्ञान विभाग के डॉ.एम.आई.रहमान एवं डॉ.आनंद कुमार सिंह, दर्शनशास्त्र के धनंजय द्विवेदी एवं पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर सहित गृह विज्ञान की डॉ.प्रियंका, राजनीति विज्ञान के डॉ.आरके सिंह तथा वाणिज्य विभाग के डॉ.पी.एन.सिंह | इसके अलावा बीएसएस कॉलेज सुपौल से डॉ.संजीव, डॉ.नरेश….. MLT से डॉ.संयुक्ता- डॉ.संजीव आदि |

सम्बंधित खबरें