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बीएनएमयू पीजी सेकेंड एवं थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा 23 सितम्बर से

ज्योंही भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर के सेकेण्ड एवं थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा 23 सितंबर से शुरू करने की अधिसूचना जारी की गयी त्योंही राजभवन ने बीएनएमयू के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय को टीएमबीयू के कुलपति का अतिरिक्त जिम्मेदारी दिये जाने की अधिसूचना जारी कर दी | अधिसूचना की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय में हर्ष का माहौल बनता चला गया | कुछ शिक्षकों ने कहा कि कुलपति डॉ.राय के कार्यों को देखते हुए कुलाधिपति महामहिम फागू चौहान ने उन्हें अतिरिक्त प्रभाव दिया है |

बता दें कि बीएनएमयू ने पीजी सेकेण्ड सेमेस्टर (2017-19) व थर्ड सेमेस्टर (2016-18) की परीक्षा का कार्यक्रम एवं सेंटर लिस्ट जारी कर दिया है | बीएनएमयू के सभी कॉलेजों का एक ही परीक्षा केंद्र होगा- नॉर्थ कैंपस का परीक्षा भवन | सारी परीक्षाएं 23 सितंबर से 1 अक्टूबर तक आयोजित की जायेगी |

यह भी जानिये की पीजी के सभी विषयों को दो ग्रुपों A एवं B में बांटा गया है | ग्रुप-A में होगा- Physics, Chemistry, Botany, Zoology, Mathematics, Psychology, Geography, Home Science, Economics & Commerce.

ग्रुप B में होगा- English, Hindi, Urdu, Begali, Maithili, Sanskrit, History, Philosophy & Political Science.

यह भी जान लें कि ग्रुप A की परीक्षा 23, 25, 27 एवं 30 सितंबर को तथा ग्रुप B की परीक्षा 24,26, 28 सितंबर व 01 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी | यह भी याद रख लें कि प्रतिदिन प्रथम पाली में सेकेण्ड सेमेस्टर एवं द्वितीय पाली में थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित की जाएगी | चलते-चलते यह भी कि दोनों परीक्षा के लिए छात्र अब ₹200 विलम्ब शुल्क के साथ 18 सितंबर तक परीक्षा फार्म भर सकेंगे |

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केबीसी में करोड़पति बन सनोज ने किया बिहार को गौरवान्वित

बिहार के जहानाबाद निवासी सनोज राज कौन बनेगा करोड़पति सीजन 11 के पहले करोड़पति बन गए हैं। शनिवार को सनोज ने शानदार खेल दिखाते हुए 15 सवालों के सही जवाब दिए और 1 करोड़ की धनराशि अपने नाम कर ली। उन्होंने 7 करोड़ के लिए 16वां सवाल नहीं खेला, जिसका ग़लत उत्तर देने पर जीती हुई राशि घटकर 3 लाख 20 हजार रह जाती।

आपको सहज रूप से उत्सुकता हो रही होगी कि जिस सवाल ने सनोज को एक करोड़ रुपए का इनाम जिताया, वो क्या था? चलिए हम बताए देते हैं। वो सवाल था – भारत के किस मुख्य न्यायाधीश के पिता भारत के एक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे? इसका सही जवाब है – जस्टिस रंजन गोगोई। इस सवाल का जवाब देने के लिए सनोज ने अपनी आखिरी लाइफ “लाइन आस्क द एक्सपर्ट” का इस्तेमाल किया। वैसे जिस सवाल का जवाब देकर सनोज 7 करोड़ की धनराशि जीतकर इतिहास रच सकते थे, वो था – ऑस्ट्रेलियन दिग्गज बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने किस भारतीय गेंदबाज की बॉलिंग पर एक रन बनाकर सौंवा शतक पूरा किया था? इसका सही जवाब है – गोगुमल किशन चंद।

स्वभाव से सरल व मृदुभाषी और सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास रखने वाले सनोज ने हॉट सीट पर बेहद धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ एक के बाद एक सवाल का सामना किया। आईएएस बनने को इच्छुक सनोज दिल्ली में रहकर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि आईएएस के पद के साथ ही बदलाव लाने का मौका भी मिलता है। उनकी दिलचस्पी नीति निर्माण और उनके क्रियान्वयन में है। वे स्वास्थ्य और पर्यावरण के संबंध में नीतियां बनाना चाहते हैं। उनके विचारों ने महानायक अमिताभ बच्चन को खासा प्रभावित किया। उन्होंने सनोज को गले लगकर बधाई दी। उस क्षण सनोज के पिता भी उपस्थित थे। वे स्वाभाविक तौर पर गौरवान्वित और भावुक हो रहे थे।

केबीसी 11 के पहले करोड़पति बनने पर सनोज ने कहा, “मैं इस जीत पर खुश हूँ। यह मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण पल है और मैं यहां से और आगे बढ़ने का इरादा रखता हूँ। मेरा मानना है कि अपने लक्ष्यों के प्रति कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण उन्हें हासिल करने की प्रक्रिया को बहुत अधिक सुखद बना देगा। वर्तमान में मेरी खुशी अल्पकालिक है क्योंकि मैं अपनी यूपीएससी परीक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर रहा हूँ जो अगले सप्ताह शुरू हो रही है।“ बिहार को गौरवान्वित करने वाले इस मेधावी युवा को ‘मधेपुरा अबतक’ की शुभकामनाएं।

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हिन्दी दिवस पर ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ की गृह मंत्री ने की वकालत

हिन्दी दिवस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्र को शुभकामनाएं देते हुए “एक राष्ट्र: एक भाषा” की जमकर वकालत की। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं का देश है तथा प्रत्येक भाषा का अपना महत्व है, परंतु संपूर्ण राष्ट्र की भाषा एक होना अत्यंत आवश्यक है जिससे विश्व में भारत की पहचान बनेगी।

बता दें कि गृह मंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि आज देश को एकता की डोर में बांधने का काम यदि कोई एक भाषा कर सकती है तो वह हिन्दी ही है। उन्होंने कहा कि दुनिया में जो देश अपनी भाषा खो देता है वह अपना अस्तित्व भी खो देता है।

Students attending Hindi Diwas Function at B.P.Mandal Engineering, Madhepura.
Students attending Hindi Diwas as well as Annual Function Day at B.P.Mandal Engineering College, Madhepura.

वहीं बी.पी.मंडल अभियंत्रण महाविद्यालय मधेपुरा के वार्षिकोत्सव पर हिन्दी दिवस के दिन संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित किया बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, मुख्यअतिथि के रूप में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, प्राचार्य ई.अरविन्द कुमार अमर, डॉ.एस.डी.सिंह, पीआरओ सुधांशु शेखर आदि ने। कुलपति डॉ.राय ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप जीवन में ऊँचा लक्ष्य निर्धारित करें और उसे सफल बनाने हेतु स्मार्टफोन एवं मोबाइल का दुरुपयोग कदापि नहीं करें। इंटरनेट के ज्ञान पक्ष से समुचित मित्रता बनाये रखें।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी ने हिन्दी दिवस पर अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि देश की एकता और अखंडता के पांच तत्वों में एक है हिन्दी और शेष चार हैं- रेल, खेल, सिनेमा और गांधी। उन्होंने हिन्दी को राष्ट्र की भाषा बनाने की वकालत करते हुए कहा कि भारतीय शीर्ष नेतृत्व में तुर्की के मुस्तफा कमाल पाशा (अतातुर्क) का संकल्प जब गूंजने लगेगा तब हिन्दी राष्ट्र की भाषा बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने लगेगी। डॉ.मधेपुरी ने अभियंत्रण छात्र-छात्राओं से यही कहा-

हिन्दी भारत की भाषा है।

हिन्दी हम सब की आशा है।।

हिन्दी भारत की शान है।

हिन्दी हम सब की पहचान है।।

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डॉ. संजय जायसवाल होंगे बिहार भाजपा के नए अध्यक्ष

बिहार भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया। शनिवार को सारे कयासों पर विराम लगाते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बेतिया के सांसद डॉ. संजय जायसवाल को बिहार प्रदेश भाजपा का नया अघ्यक्ष नियुक्त किया। डॉ. जायसवाल नित्यानंद राय की जगह बनेंगे। बता दें कि राय के गृह राज्य मंत्री बनते ही नए अध्यक्ष की तलाश शुरू हो गई थी, जो अब जाकर पूरी हुई।
गौरतलब है कि डॉ. संजय जायसवाल बेतिया से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए हैं। वे 2009 से ही इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके पिता मदन मोहन जायसवाल भी बेतिया से सांसद रहे हैं। डॉ. जायसवाल भाजपा के कोर वोट बैंक माने जाने वाले वैश्य समुदाय से आते हैं। इस तरह इनको अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने पिछ़ड़ा कार्ड भी खेला है। वैसे भी डॉ. जायसवाल की गिनती साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं में होती है। इनका नाम कभी किसी विवाद में नहीं रहा।
कहने की जरूरत नहीं कि डॉ. संजय जायसवाल को बड़े नाजुक समय पर ये अहम जिम्मेवारी मिली है। एक तो 2020 में विधानसभा चुनाव होने हैं, दूसरे सहयोगी पार्टी जदयू से भाजपा के रिश्ते इन दिनों बहुत ‘मधुर’ नहीं कहे जा सकते। ऐसे में डॉ. जायसवाल के अनुभव की कठिन परीक्षा होनी तय है। देखना दिलचस्प होगा कि शीर्ष नेतृत्व के विश्वास पर वे कितना खरा उतरते हैं।

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पद्म पुरस्कारों के लिए खेल मंत्रालय के भेजे सभी 9 नाम बेटियों के

भारतीय खेल मंत्रालय ने पद्म पुरस्कारों के लिए 9 नाम प्रस्तावित किए हैं और दिलचस्प बात यह कि ये सभी नाम बेटियों के हैं। देश को गौरवान्वित करने वाली इन 9 महिला खिलाड़ियों में बॉक्सर मैरी कॉम और और बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के नाम शामिल हैं। मैरी कॉम का नाम पद्म विभूषण के लिए जबकि पीवी सिंधु का नाम पद्म भूषण के लिए भेजा गया है। शेष 7 नाम पद्म श्री के लिए भेजे गए हैं।

गौरतलब है भारतीय खेल इतिहास में पहली बार किसी महिला एथलीट को देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण देने की सिफारिश की गई है। वैसे भी इस सम्मान के लिए छह बार की वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर एमसी मैरीकॉम से बेहतर नाम हो भी क्या सकता था। वर्तमान में राज्यसभा की सदस्य मैरी कॉम 2012 के लंदन ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुकी हैं। उन्हें 2013 में पद्म भूषण और 2006 में पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है।

इसी तरह वर्ल्ड चैंपियन बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु का नाम पद्म भूषण के प्रस्तावित किया गया है, जो कि देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। सिंधु का नाम इस सम्मान के लिए 2017 में भी भेजा गया था, लेकिन वह फाइनल सूची में जगह नहीं बना पाईं। उन्हें 2015 में पद्म श्री मिला था। रियो ओलिंपिक्स में सिल्वर मेडल जीतने वालीं सिंधु ने हाल ही में वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया है, वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।

मैरी कॉम और सिंधु के अलावा अन्य 7 महिला खिलाड़ियों के नाम पद्म श्री के लिए प्रस्तावित है। ये खिलाड़ी हैं – कुश्ती खिलाड़ी विनेश फोगाट, टेबल टेनिस स्टार मनिका बत्रा, महिला क्रिकेट टीम की टी20 कप्तान हरमनप्रीत कौर, हॉकी कैप्टन रानी रामपाल, पूर्व शूटर सुमा शिरुर और पर्वातारोही जुड़वा बहनें ताशी और नुंगशी मलिक।

प्रस्तावित सभी नामों को गृह मंत्रालय के पद्म अवार्ड कमिटी को भेजा गया है। अवार्ड के लिए चयनित नामों की घोषणा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी 2020 को की जाएगी।

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आस्था की न कोई जाति होती और न कोई मजहब होता…

सद्भावना की ऐसी मिसाल भारत के अलावे दुनिया के किसी दूसरे मुल्क में देखने को नहीं मिलेगी….. मुहर्रम के अवसर पर 106 ताजिये के लाइसेंस में 57 हिंदुओं के नाम हो- इसे बेमिसाल नहीं तो क्या कहेंगे आप | जहाँ ताजिया का निर्माण भी हिन्दू ही करते हैं |

बता दें कि बिहार के नवादा जिले के सिरदला में जहाँ 49 ताजिये का निर्माण एवं लाइसेंस मुस्लिम परिवार के लोगों के नाम है वहीं 57 हिंदुओं के नाम। सिरदला के कुशाहन निवासी सचिन कुमार रेलवे में कर्मचारी हैं और विगत 10 दिनों से वे मुहर्रम की छुट्टी लेकर गाँव आये हैं | जहाँ ग्रामीणों के साथ में मिलकर ताजिये का पहलाम किया उन्होंने |

यह भी बता दें कि सचिन के लिए यह कोई पहला अवसर नहीं है बल्कि 35 वर्षीय सचिन कुमार विगत कई वर्षों से इमाम हुसैन-हसन की शहादत की याद में मोहर्रम के अवसर पर हर बार घर आते रहे हैं | सचिन के परिवार वालों की आस्था वर्षों से मोहर्रम से जुड़ी है |

सचिन कहते हैं कि तीन पीढ़ियों से उसके परिवार वाले ताजिया बनाते आ रहे हैं | इसे सचिन के पूर्वज जेठू राजवंशी ने शुरुआत की थी | सचिन के अनुसार इमाम साहब की इबादत से जेठू राजवंशी को संतान हुआ था | तब से ही इमाम साहब की याद में वह परिवार ताजिये बनाते आ रहे हैं…… प्रार्थना करते हैं तथा परिवार की सलामती की दुआ मांगते हैं | ग्रामीण लोग आपस में सहयोग कर इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं |

चलते-चलते बता दें कि नारदीगंज में हिन्दू महिला ही ताजियेदार हैं | ताजिये के समीप औरत-मर्द सभी बैठकर मातम मनाते हैं……. मर्सिया गाते हैं | हजार से अधिक आबादी वाली भटविगहा गाँव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं फिर भी वहां इमाम साहब की इबादत की जाती है | वहाँ के लोग कहते हैं कि इमाम साहब से हमारी आस्था जुड़ी है……. आस्था की कोई जाति और मजहब नहीं होता |

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सिंहेश्वर प्रमुख चन्द्रकला देवी जिले के गुड सॅमैरिटन के रूप में हुई सम्मानित

दुनिया के देशों में सबसे अधिक भारत में लगभग 15 लोग रोड एक्सीडेंट में प्रति घंटे मरते हैं तथा प्रतिदिन 60 से अधिक लोग घायल होते हैं | परंतु घायलों को मदद करने या हॉस्पिटल तक पहुंचाने में प्रायः नेक आदमी कतराते रहे…… क्योंकि होम करते हाथ जलने का भय हमेशा उन्हें बना रहता | यहाँ तक कि घायलों के खून लग जाने पर सॅमैरिटन (नेक व्यक्ति) को कभी-कभी 302 दफा के तहत जेल जाना पड़ता था |
बता दें कि मार्च 2016 में भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा समैरिटन को सुरक्षा देने के साथ-साथ सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने वाले कानून को सबल बनाए जाने के फलस्वरूप लोग अब घायलों की मदद करने में मुस्तैदी से लग जाते हैं |
यह भी बता दें कि उक्त आशय का पत्र परिवहन सचिव द्वारा भी जारी किया गया है | तब से जिले के विभिन्न थानों के सहयोग से सात गुड सॅमैरिटन की सूची बनाई गई है जिसमें छह मुरलीगंज थाने से हैं और एक अकेली महिला सिंहेश्वर थाना से- सिंहेश्वर प्रमुख चंद्रकला देवी | सबों को परिवहन विभाग द्वारा 4 सितंबर को सम्मानित किया गया |
जिला परिवहन पदाधिकारी रजनीश लाल ने बताया कि सम्मानित होने वाले सात सॅमैरिटन है- (1) चंद्रकला देवी (2) शिवनंदन यादव (3) मिथिलेश कुमार (4) टुनटुन यादव (5) विनोद पासवान (6) मनोज कुमार यादव और (7) अंकेश कुमार …… जिन्हें 4 सितंबर को शाल, प्रमाणपत्र एवं एक-एक हज़ार रूपये देकर सम्मानित किया गया जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला द्वारा |

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सचमुच बेमिसाल थे राम जेठमलानी

भारतीय कानून जगत के ‘भीष्म पितामह’ कहे जाने वाले दिग्गज वकील, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और मौजूदा समय में बिहार से राजद के राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में निधन हो गया। जेठमलानी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और इलाजरत थे। उनके परिवार में उनके बेटे महेश जेठमलानी हैं, जो स्वयं जाने-माने वकील हैं, और एक बेटी हैं जो अमेरिका में रहती हैं।
अपने बेबाक बयानों और दिलचस्प शख्सियत के कारण जेठमलानी कोर्ट में ही नहीं, राजनीतिक गलियारों में भी खासे लोकप्रिय रहे। वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 14 सितंबर 1923 को जन्मे जेठमलानी ने महज 17 साल की उम्र में एलएलबी की डिग्री ली और पाकिस्तान में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। बॉम्बे वे एक शरणार्थी के तौर पर पहुँचे और फिर वहां नए सिरे से अपनी ज़िन्दगी शुरू की। यहां पहली बार वे नानावटी केस से चर्चा में आए और इसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
विलक्षण प्रतिभा के धनी और बेहद परिश्रमी राम जेठमलानी हमेशा जीतने के लिए लड़ते थे और उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि लोग क्या कहेंगे। उनकी ऊर्जा युवा वकीलों को भी शर्माने के लिए मजबूर कर दिया करती। उनमें यह अद्भुत साहस था कि वे बहुत अलोकप्रिय केस को भी हाथ में लिया करते। उन्होंने इन्दिरा गांधी और आगे चलकर राजीव गांधी के हत्यारे का केस लड़ा और संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु का बचाव किया जबकि आम जन की भावना इसके खिलाफ थी। इसी तरह उन्होंने जेसिका लाल मर्डर केस में मनु शर्मा का बचाव किया, स्टॉक मार्केट केस में हर्षद मेहता और केतन पारेख का बचाव किया और अपनी आलोचनाओं से बिल्कुल बेपरवाह रहे। उन्होंने अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान, जयललिता, लालू प्रसाद यादव, अमित शाह, अरविन्द केजरीवाल, जगनमोहन रेड्डी, बीएस येदियुरप्पा, कनिमोई, संजय दत्त, बाबा रामदेव और आसाराम बापू के केस भी लड़े।
जेठमलानी के नाम देश में सबसे कम और सबसे अधिक उम्र के वकील होने का नायाब रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने 19 साल की उम्र में वकालत शुरू की और लगातार 77 साल तक इस पेशे में रहे। ज़िन्दगी उन्होंने अपनी शर्तों पर जी और अपने बनाए उसूलों पर चले। 2017 में अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि 76 साल से प्रैक्टिस कर रहा हूँ, पर कोई आदर्श नहीं मिला। वे दूसरों का मूल्यांकन भी उसी आधार पर किया करते जिन मूल्यों में वे खुद यकीन रखते। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने जनता की भलाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम किए।
बता दें कि साल 2010 में राम जेठमलानी को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था। छठी और सातवीं लोकसभा में उन्होंने भाजपा के टिकट पर मुंबई से चुनाव जीता था। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे कानून मंत्री और शहरी विकास मंत्री रहे और साल 2004 में वाजपेयी के ही खिलाफ उन्होंने लखनऊ सीट से चुनाव भी लड़ा था।
कुल मिलाकर, इस बेमिसाल शख्सियत को किसी एक लेख से या महज कुछ पन्नों में जान लेना और जानकर समझ लेना मुमकिन नहीं। उन्हें समझने के लिए कई-कई बार और कई-कई तरीके से देखना होगा। फिलहाल इतना ही। उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।

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लैंडर विक्रम से संपर्क टूटा है, हमारी उम्मीदें नहीं

चंद्रमा की सतह से महज 2.1 किलोमीटर या कहें दो कदम दूर लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया, लेकिन सवा सौ करोड़ भारतीयों की उम्मीदें नहीं टूटी हैं। मून मिशन में भले ही शत प्रतिशत सफलता नहीं मिल पाई हो, लेकिन जितनी मिली है, इतिहास रच देने के लिए वो भी कम नहीं। इस अभियान के जरिये इसरो ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

बहरहाल, इसरो ने कई प्रयास के बाद मध्य रात्रि करीब दो बजे बताया कि लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया है। इसके बाद वैज्ञानिक लैंडर से दोबारा संपर्क नहीं साध पाए। इसरो का कहना है कि लैंडिंग के अंतिम क्षणों में जो डाटा मिला है, उसके अध्ययन के बाद ही संपर्क टूटने का कारण पता चल सकेगा।

इस मौके पर इसरो के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय में दम साधकर इस अभियान को लाइव देख रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भावुक कर देने वाले उन क्षणों में वैज्ञानिकों की भरपूर हौसला आफजाई की और उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “देश को अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है। वे देश की सेवा कर रहे हैं। आगे भी हमारी यात्रा जारी रहेगी। मैं पूरी तरह वैज्ञानिकों के साथ हूँ। हिम्मत बनाए रखें, जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।”

गौरतलब है कि इसरो प्रमुख के. सिवन ने 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान की लांचिंग के मौके पर कहा था कि हमारे लिए आखिरी के 15 मिनट आतंक के पल होंगे। उनकी चिंता सही साबित हुई। मंजिल बस दो कदम दूर थी, लेकिन आखिरी मौके पर जीत हाथ से फिसल गई। वैसे बता दें कि लैंडर-रोवर से संपर्क भले ही टूट गया है, लेकिन ऑर्बिटर से उम्मीदें अभी भी कायम हैं। लैंडर-रोवर को दो सितंबर को ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग किया गया था। ऑर्बिटर अब भी चांद से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर कक्षा में सफलतापूर्वक चक्कर लगा रहा है। इसरो को उससे संकेत और जरूरी डाटा प्राप्त हो रहे हैं।

चलते-चलते बस इतना कि मून मिशन में कामयाबी जल्द ही भारत के कदम चूमेगी। इस विश्वास के पीछे पहली वजह यह कि इसरो के साथ यह ख्याति जुड़ी है कि उसके लिए हर चुनौती एक अवसर होती है और दूसरी यह कि करोड़ों हाथ इस मिशन के लिए एक साथ उठकर दिन-रात दुआ कर रहे हैं।

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शिक्षक दिवस पर सम्मानित हुए बिहार के 20 शिक्षक

गुरुवार, 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में मुख्य राजकीय समारोह का आयोजन हुआ। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रिमोट के माध्यम से बिहार उन्नयन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर को और यादगार बनाते हुए मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले बिहार के विभिन्न जिलों के 20 शिक्षकों तथा वर्ष 2018 में शिक्षक कल्याण कोष में अधिकतम राशि जमा करने वाले नालंदा, पश्चिम चंपारण एवं पटना के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, मुख्य सचिव श्री दीपक कुमार एवं शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आरके महाजन समेत कई गणमान्य मौजूद रहे।

CM Nitish Kumar in Shikshak Diwas Samaroh_012
CM Nitish Kumar in Shikshak Diwas Samaroh.

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आज शिक्षकों के सम्मान का दिन है। शिक्षकों को पूरा देश सम्मान की दृष्टि से देखता है, यह बात शिक्षकों को भी याद रखनी चाहिए। बिहार के नियोजित शिक्षकों द्वारा मांगों के समर्थन में शिक्षक दिवस नहीं मनाने तथा पटना में प्रदर्शन करने को लेकर उन्होंने कहा कि वे मांग जरूर करें, लेकिन अपने मूल दायित्व को भी नहीं भूलें। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षक अपने दायित्व का निर्वहण करेंगे, पढ़ाते रहेंगे तो उनकी मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे ही उनकी मांगों को पूरा करेंगे।
अब चलिए एक नज़र उन शिक्षकों पर डालें जिन्हें शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किया गया। उनके नाम इस प्रकार हैं: डॉ. नम्रता आनंद (पटना), शालिनी सिन्हा (पटना), कुमारी खुशबू कुशवाहा (मधुबनी), सुनैना कुमारी (नालंदा), सबीहा फैज (भागलपुर), डॉ. अभय कुमार रमण (पूर्वी चंपारण), डॉ. गणेश शंकर पांडेय (नालंदा), संत कुमार सहनी (बेगूसराय), मनोज कुमार यादव (सीतामढ़ी), अवधेश पासवान (भागलपुर), डॉ. देवेन्द्र सिंह (गया), जितेन्द्र सिंह (पश्चिम चंपारण), ललिता कुमारी (पूर्णिया), सत्यनारायण राय (सीतामढ़ी), संगीता कुमारी (सीतामढ़ी), अमरनाथ त्रिवेदी (मुजफ्फरपुर), मो. सनाउल्लाह शाह (पश्चिमी चंपारण), बबीता कुमारी (सुपौल), सुमन सिंह (बांका) एवं कविता प्रवीण (नालंदा)। सभी सम्मानित शिक्षकों को ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं।

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