All posts by Admin

केवल क्रान्तिकारी नहीं थे सरदार भगत सिंह

23 वर्ष की अल्पायु में ही सरदार भगत सिंह ने अपने दो क्रान्तिकारी साथियों राजगुरु एवं सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फाँसी के फंदे को हंसते-हंसते चूम लिया। फाँसी के फंदों को चूमने के वक्त भी तीनों के चेहरे पर एक अलग किस्म की मुस्कान थी।

बता दें कि फाँसी की तिथि के चंद रोज कबल जेल के गेट पर मिलने आई अपनी माँ से भगत सिंह ने पूछे गये सवाल के जवाब में यही कहा था-

बेबे जी ! फाँसी के बाद मेरे शरीर को ले जाने के लिए तुम नहीं आना…… क्योंकि यदि ममतावश तुम्हारी आंखों से उस समय आँसू टपक पड़े और कोई उंगली उठाकर यह कहने लगे कि देखो…… भगत सिंह की माँ रो रही है….. तो मेरी आत्मा कलप उठेगी और मेरी देश भक्ति पर ऐसा दाग लग जायगा जिसे तेरे आँसू कभी नहीं धो पायेंगे ।

यह जान लें कि भगत सिंह पंजाब के जिस जिले एवं गाँव में जन्म लिए थे वह आजकल पाकिस्तान में है | यही कारण है कि भगत सिंह केवल भारत के ही नायक नहीं बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी वे समान रूप से आदर व सम्मान पाते रहे हैं।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri along with Shravan Kumar Sultania, Lallan Yadav and Kids paying homage to Martyrs on the occasion of Shahid Diwas at Shahid Park Madhepura.

आज शहीदे आजम भगत सिंह की शहादत के साथ सारे शहीदों तथा विशेषरूप से मधेपुरा जिले के शहीद बाजा साह, शहीद चुल्हाय, शहीद सदानंद, शहीद प्रमोद (फुलकाहा), शहीद प्रमोद (चामगढ़) व शहीद शंकर रजक को याद करते हुए एक वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम मो.सोहैल द्वारा उद्घाटित शहीद पार्क में सादगी के साथ पुष्पांजलि अर्पित की समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने। साथ में डॉ.मधेपुरी के शिष्य श्रवण कुमार सुल्तानियाँ, ललन कुमार यादव, पार्क का पहरेदार एवं खेल रहे बच्चों ने पुष्पांजलि अर्पित की। बाद में डॉ.मधेपुरी के साथ सबों ने भगत सिंह सहित सभी शहीदों के अमर रहे के नारे लगाये। अंत में डॉ.मधेपुरी ने शहीदों के नाम अपनी चार पंक्तियाँ समर्पित की-

अभिमन्यु सदृश आजाद वीर, खुद को गोली से भूंज लिया।

सिर उठा भगत सुखराज यहाँ, हँसकर शूली को चूम लिया।।

सम्बंधित खबरें


भाजपा की पहली सूची तैयार, क्या आडवाणी-जोशी होंगे बाहर ?

लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की पहली सूची कभी भी जारी हो सकती है। ख़बर है कि सत्ताधारी दल ने लगभग 250 नाम तय कर लिए हैं और इन नामों में जहां कई नाम चौंकाने वाले हो सकते हैं, वहीं कई नामों का ना होना हैरान कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा संसदीय समिति द्वारा तैयार की गई सूची में कई दिग्गजों का टिकट कटना तय है। ऐसे में अब सबकी नज़रें इस पर टिकी हैं कि लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस बार चुनावी मैदान में उतरेंगे या नहीं!

राजनीतिक गलियारे से मिल रही ख़बरों के मुताबिक उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी और बीएस कोश्यारी ने स्वयं ही चुनाव नहीं लड़ने का मन बनाया है। दोनों नेता चाहते हैं कि युवाओं को मौका दिया जाए। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र और झारखंड के करिया मुंडा भी चुनाव नहीं लड़ने के पक्ष में हैं। इससे इस बात की संभावना बढ़ गई है कि लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री शांता कुमार जैसे महारथियों को भी चुनावी दौड़ से बाहर कर दिया जाए या वे खुद अपना नाम आगे ना बढ़ाएं।

गौरतलब है कि आडवाणी फिलहाल 91 साल के है और मुरली मनोहर जोशी के साथ उन्हें भी पार्टी नेतृत्व ने 2014 में ही मार्गदर्शक मंडल में शामिल कर दिया था। तब भाजपा ने संघ परिवार के साथ मिलकर तय किया था कि 75 साल से ऊपर के किसी शख्स को कार्यकारी जिम्मेदारियां नहीं दी जाएंगी। हालांकि इसके बावजूद दोनों नेता अभी तक सदन की शोभा बढ़ा रहे थे। पर इस बार 2014 जैसी स्थिति नहीं है। भाजपा को 2 सीटों से 180 सीटों तक पहुँचाने वाले इन नेताओं का आज की तारीख में सम्मान चाहे जितना हो, राजनीतिक निर्णयों में सहभागिता लगभग नगण्य है। बहरहाल, लंबे अरसे से हाशिए पर डाल दिए गए नेताओं की इस पीढ़ी का अबकी बार संसद में नहीं दिखना खलेगा जरूर। खैर, देखते हैं कि भाजपा की किसी भी क्षण आने वाली सूची इस बारे में अंतिम रूप से क्या कहती है!!

सम्बंधित खबरें


होली के बाद उम्मीदवारों की घोषणा: तेजस्वी

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को कहा कि बिहार में विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन बरकरार है और राज्य की सभी 40 सीटों के लिए इसके उम्मीदवारों की घोषणा होली के बाद की जाएगी। तेजस्वी ने दिल्ली से पटना हवाई अड्डे पहुंचने के बाद संवदादाताओं को बताया, “महागठबंधन में सब ठीक है। यह एकजुट एवं मजबूत है और हम चुनाव प्रचार में कड़ी टक्कर देंगे। सभी मतभेद सुलझा लिए गए हैं। हम होली के बाद अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे।”

गौरतलब है कि सीटों के बंटवारे पर चर्चा के लिए पिछले कुछ दिनों से तेजस्वी दिल्ली में थे। इधर सीटों के बंटवारे को लेकर कयासबाजी का दौर लगातार जारी है। कभी संभावित सीटों को लेकर तो कभी संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। खासकर एनडीए के तीनों दलों द्वारा सीट बंटवारे की विधिवत घोषणा के बाद पार्टियां और उनके समर्थक कुछ अधिक ही अधीर हो रहे हैं। इस चीज को भांपते हुए लोजद नेता शरद यादव ने दिल्ली में जोर देकर कहा कि 22 मार्च को पटना में होने वाले संवाददाता सम्मेलन में उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी। बता दें कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) भी महागठबंधन का हिस्सा है और ख़बर है कि उनके हिस्से में दो सीटें आ रही हैं।

इस बीच भाजपा सांसद उदय सिंह आज कांग्रेस में शामिल हो गए। कहा जा रहा है कि उन्हें कांग्रेस की टिकट पर पूर्णिया से लड़ाया जाएगा। यह भी लगभग तय माना जा रहा है कि अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस की टिकट पर पटना साहिब सीट से चुनाव लड़ेंगे। पहले उनके आरजेडी से लड़ने की संभावना बताई जा रही थी।

अंदरखाने ख़बर यह भी है कि एक-दो सीटों को लेकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच अभी भी जिच बरकरार है। ऐसी सीटों में दरभंगा अहम है। कांग्रेस यहां से कीर्ति आजाद को चुनावी मैदान में उतारना चाहती है जिन्होंने पांच साल पहले भाजपा की टिकट पर यह सीट जीती थी। वहीं आरजेडी मोहम्मद अली अशरफ फातमी के लिए यह सीट चाहती है। यहां उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है।

बहरहाल, अभी तक के तय फार्मूले के अनुसार आरजेडी 20 या 19 सीट पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कांग्रेस 9 से 10 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। शेष सीटों पर रालोसपा, हम, लोजद और वीआईपी पार्टी के उम्मीदवार किस्मत आजमाएंगे।

सम्बंधित खबरें


पूर्णिया विश्वविद्यालय जन्म के साथ ही विश्वसनीयता खोने लगा है- एमएलसी डॉ.संजीव

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चयनित बिहार विधान परिषद सदस्य एवं अधिषद व अभिषद सदस्य (टीएमयू भागलपुर और बीएनएमयू मधेपुरा) डॉ.संजीव कुमार सिंह ने खेद प्रकट करते हुए मधेपुरा अबतक से विस्तार पूर्वक पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति के क्रियाकलापों, दोहरे मापदंडों एवं कर्मियों के प्रति अपमानजनक व्यवहारों की जमकर चर्चा की।

लोकप्रिय एवं कर्मठ एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह ने नवसृजित इस विश्वविद्यालय के बाबत जो भी कहा उसे उन्हीं के शब्दों में उद्धृत किया जा रहा है-

नवसृजित पूर्णिया विश्वविद्यालय पूर्णिया आज शैशवावस्था में ही छात्रों, शिक्षकों एवं शिक्षाप्रेमियों के बीच अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है। स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो.राजेश सिंह की विवादास्पद कार्यशैली तथा अनियमित कार्यकलापों के साथ-साथ इनके द्वारा राजभवन एवं राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के विपरीत कार्य किये जाने से विश्वविद्यालय में धीरे-धीरे अकादमिक अस्थिरता का माहौल बनता जा रहा है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत विश्वविद्यालय की अतिमहत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्राधिकार ‘अभिषद’ (Syndicate) का गठन किया गया है। अन्य सभी महत्वपूर्ण परिनियमित समितियों का कार्य कुलपति स्वयं कर रहे हैं। वस्तुतः अपनी गलत अवधारणाओं पर गठित प्राधिकरों / निकायों / समितियों द्वारा लगातार कार्यकारी आदेशों के तहत वित्तीय एवं नीतिगत निर्णय दिये जा रहे हैं। किसी भी प्रकार के निर्णय में जल्दबाजी उनके प्रशासनिक अनुभवहीनता को दर्शाता है।

विदित है कि अपने अल्प कार्यकाल में ही विश्वविद्यालय के प्रथम प्रतिकुलपति एवं वित्त पदाधिकारी ने इनकी कार्यशैली से आहत होकर अपना इस्तीफा आपत्तियों के साथ राजभवन को सौंप दिया। इन पदाधिकारियों का दोष सिर्फ इतना ही था कि अन्य पदाधिकारियों की तरह कार्य नहीं कर बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम एवं बिहार राज्य वित्त नियमावली के आलोक में कार्य करना चाह रहे थे।

वर्तमानत: परीक्षा केंद्रों के गठन में अंगीभूत एवं संबद्ध इकाइयों के छात्र-छात्राओं के बीच दोहरा मापदण्ड अपनाना, शिक्षक संघ-संगठन की अनदेखी, शिक्षकों एवं कर्मियों के साथ अपमानजनक व्यवहार, विभिन्न कोटि के शिक्षकों को मिली प्रोन्नति के फलस्वरूप वेतन निर्धारण की प्रक्रिया में विलंब, नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों को ओरिऐंटेशन जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में भाग लेने से रोकना आदि कार्यों से विश्वविद्यालय का माहौल विस्फोटक होता जा रहा है। अतिशीघ्र ही संबंधित सारे तथ्यों से महामहिम कुलाधिपति महोदय के साथ-साथ माननीय मुख्यमंत्री जी को भी अवगत कराया जाएगा।

सम्बंधित खबरें


मधेपुरा पतंजलि योग समिति ने मनाया होली मिलन समारोह

रासबिहारी उच्च विद्यालय परिसर में चल रहे स्वामी रामदेव बाबा के स्थायी योग कक्षा का संचालन श्रीमती माया जायसवाल, सुश्री रूबी कुमारी, श्री रितेश कुमार आदि योग शिक्षकों द्वारा नियमित रूप से योग को समर्पित डॉ.एन.के.निराला की देख-रेख में होता है।

बता दें कि 19 मार्च सोमवार को मधेपुरा पतंजलि समिति द्वारा “योग होली मिलन समारोह 2019” का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपनी चंद पंक्तियाँ शहीदों के नाम करते हुए कहा-

“होली ईद मनाओ मिलकर, कभी रंग को भंग करो मत।

भारत की सुन्दरतम छवि को, मधेपुरी बदरंग करो मत।।”

आगे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि होली सद्भाव एवं भाईचारे का पर्व है। शिकवे-शिकायत भूलकर एक दूसरे को गले लगाने का पर्व है। बुराइयों पर अच्छाइयों की जीत का पर्व है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि होली केवल रंग का ही नहीं बल्कि उत्साह और उमंग का भी पर्व है और योग मनुष्य की बाहरी समस्याओं के निदान ही नहीं बल्कि आंतरिक विचारों को साफ करने का भी महापर्व है। डॉ.अमोल राय, डॉ.नंदकिशोर आदि ने भी संक्षेप में उद्गार व्यक्त किये।

Dr.N.K.Nirala, Dr.Madhepuri and Post Master Rajesh Kumar celebrating Holi Mila Samaroh.
Dr.N.K.Nirala, Dr.Madhepuri, Post Master Rajesh Kumar and Ritesh Kumar celebrating Holi Milan Samaroh.

दूसरे सत्र में बच्चे-बच्चियों द्वारा चम्मच-गोली दौड, फैंसी ड्रेस…… जैसे कई कार्यक्रमों में प्रथम – द्वितीय – तृतीय आये प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी, डॉ.अमोल राय , डॉ.गणेश प्रसाद, डॉ.नंदकिशोर, डॉ.एनके निराला……. पोस्ट मास्टर राजेश कुमार आदि द्वारा पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार पाने के बाद बच्चों ने सबों को जहाँ लाल-पीला गुलाल लगाया वहीं बड़ों ने अतिथियों को रंग-बिरंगी टोपियां पहनाई। योग कक्षा की योगी बहनों को पुआ-दहीबड़ा और रामानंद सागर को जलेबी परोसते हुए देखा गया। अंत में डॉ.एन.के. निराला ने जोगीरा गाकर कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

सम्बंधित खबरें


चुनावी माहौल में भी मधेपुरा का नेहरू युवा केन्द्र है गतिशील

नेहरू युवा केंद्र मधेपुरा द्वारा स्थानीय शिवनंदन प्रसाद मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय के मैदान में फुटबॉल मैच का आयोजन रविवार को किया गया जिसका विधिवत उद्घाटन मधेपुरा के प्रखर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने दोनों टीमों- लायंस क्लब एवं न्यू टाउन क्लब मधेपुरा के खिलाड़ियों के बीच इस खेल के रेफरी अनिल राज की उपस्थिति में गेंद को उछाल कर किया। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि भारत की एकता व अखंडता के लिए खेल अहम भूमिका निभाता रहा है।

बता दें कि फुटबॉल प्रेमी दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच रोमांचक मुकाबले में लायंस क्लब ने तीन गोल दागे जबकि मधेपुरा न्यू टाउन क्लब द्वारा काफी मशक्कत के बावजूद भी 90 मिनट में दो गोल ही किया जा सका। जहाँ खेल को समर्पित जिला वॉलीबॉल संघ के सचिव अनिल राज सहित प्रदीप सिंह, रोहित कुमार इस रोमांचक मैच के निर्णायक रहे वहीं उद्घोषक के रूप में सूरज कुमार ने ध्वनि विस्तारक यंत्र से ऐसा मनभावन कमेंट्री किया कि दर्शक अंत तक डटे रहे।

यह भी बता दें कि जिलास्तरीय कबड्डी खेल को समर्पित अध्यक्ष जयकांत यादव व सचिव अरुण कुमार, डीसीए के अध्यक्ष भारत भूषण, एमसीए के सचिव अमित कुमार मोनी एवं जिला टे.टे. सचिव प्रदीप कुमार श्रीवास्तव सहित विभिन्न  खेलों में गहरी अभिरुचि रखने वाले गोदई जैसे बुजुर्ग खिलाड़ियों एवं अतिथियों का स्वागत किया नेहरू युवा केंद्र के युवा एवं कर्मठ समन्वयक अजय कुमार गुप्ता ने।

चलते-चलते… जहाँ समन्वयक अजय कुमार गुप्ता ने बताया कि इसी मैदान पर आगामी सोमवार को महिला व पुरुष का वॉलीबॉल मैच होगा वहीं उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सवेरे में बच्चों के बीच दौर एवं साइकिल रेस प्रतियोगिता भी आयोजित की गई थी। समन्वयक श्री गुप्ता ने अंत में उदघोषणा की कि प्रखंड से लेकर पंचायत स्तर तक खिलाड़ी क्लब की स्थापना करें ताकि उस क्लब को नेहरू युवा केंद्र द्वारा खेल सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी।

सम्बंधित खबरें


मुफलिसी में शहीदों की ‘शहादत’ को मिले ‘सम्मान’ का सौदा करना पड़ता है परिजनों को

दो-दो हजार में ही बिक गये भारतीय शहीदों के वीरता पदक ! सैनिकों के वीरता पदकों का सौदा देश के लिए किसी विडंबना से कम है क्या ? इन पदकों को बेचने वाले कोई और नहीं बल्कि शहीदों के लाचार माता-पिता या फिर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए बेबस उनकी पत्नी या परिजन इस शर्त पर मेडल बेचते हैं कि खरीदने वाले कभी किसी को उनका नाम नहीं बताएंगे।

कितनी विडंबना है ! जो पिता अपने इकलौता सैनिक बेटे को बचपन में कंधे पर घुमाया करता वही लाचार बाप आज उस शहीद हुए सैनिक बेटे को कंधा देता है और 3 साल का शहीद-पुत्र अपने पिता को मुखाग्नि ! उसी लाचार बाप और अबोध सैनिक-पुत्र की परवरिश के लिए सैनिक की विधवा पत्नी लाचार होकर पति की ‘शहादत’ को मिले ‘सम्मान’ का सौदा करने, दुनिया की नजर से बचकर, किसी दुकान में जाती है। कोई रोटी के लिए तो कोई बच्चे की फीस के लिए सीने पर पत्थर का टुकड़ा रखकर उस अनमोल निशानी को बेमोल बेच देती है। देश कब जगेगा और सोचेगा उन शहीदों के लिए…..।

बता दें कि लुधियाना, पंजाब का एक शख्स है इंजीनियर नरिन्दर पाल सिंह। वह एक गैरतमंद इंसान है जो लुधियाना में ‘अकाली सहाय म्यूजियम’ चलाते हैं। वहीं विगत 5 साल में सैनिकों के 300 और स्वतंत्रता सेनानियों के लगभग 200 अनमोल मेडल 2-2 हजार तक में खरीदते और सहेजते आये हैं। वे ऐसे नेक दिल और प्रतिष्ठित इंसान हैं कि बेचने वालों का नाम किसी को नहीं बताते हैं।

यह भी बता दें कि सैन्य परिवारों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव  मधेपुरी ने हाल ही में पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए 44 शहीदों के परिजनों के बैंक एकाउंट को सार्वजनिक करने हेतु प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को पत्र लिखा है ताकि बुद्ध – नानक – कबीर…. से लेकर भूपेन्द्र-भीम-कर्पूरी…. डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम सरीखे दानवीरों से प्रेरित भारतवासी यदि उनके खाते में एक-एक रुपए भी डालें तो करोड़ों रुपए… होंगे और शहीदों के परिजनों को ये दिन नहीं देखना पड़ेगा।

सम्बंधित खबरें


जानिए, एनडीए में किस पार्टी को मिली कौन-कौन-सी सीटें

ज्यों-ज्यों लोकसभा चुनाव का प्रथम चरण सामने आ रहा है, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनडीए और महागठबंधन से जुड़ी पार्टियों के खाते में कौन-कौन-सी सीटें गई हैं और उन सीटों से उम्मीदवार कौन-कौन होंगे। महागठबंधन की बात करें तो वहां अभी भी घमासान की स्थिति है जबकि एनडीए में चीजें सुलझती नजर आ रही हैं। हालांकि कुछ सीटों को लेकर एनडीए में भी ‘इफ-बट’ की स्थिति थी लेकिन तीनों दलों के नेताओं ने समझदारी दिखाते हुए मामले को सुलझा लिया है।

सूत्रों के मुताबिक एनडीए में वाल्मीकिनगर, झंझारपुर, सीतामढ़ी, सुपौल, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, मधेपुरा, भागलपुर, गोपालगंज, सिवान, मुंगेर, नालंदा, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, और काराकाट की सीट जदयू के खाते में गई है, जबकि बेतिया, मोतिहारी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, उजियारपुर, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, अररिया, बांका, छपरा, महाराजगंज, आरा, बक्सर, सासाराम, पटना साहिब और पाटलिपुत्र की सीट पर भाजपा चुनाव लड़ेगी। जदयू दरभंगा सीट संजय झा के लिए चाहती थी लेकिन गठबंधन धर्म के तहत उसे यह सीट छोड़ना पड़ रहा है।

उधर लोजपा की बात करें तो उसे मुंगेर के बदले नवादा सीट दी गई है। जदयू ने जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को चुनाव लड़ाने के लिए लोजपा से मुंगेर सीट ली है। इसके अलावा हाजीपुर, वैशाली, समस्तीपुर, जमुई और खगडिय़ा उसकी सीटिंग सीटें हैं, जहां से उसके प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। उम्मीद है कि अगले 24 घंटों में सीटों की विधिवत घोषणा हो जाएगी।

सम्बंधित खबरें


बीएनएमयू के 6 शिक्षक शरीक होंगे यूजीसी के इंडक्शन प्रोग्राम में – कुलपति

यूजीसी द्वारा आयोजित किये जा रहे इंडक्शन प्रोग्राम से शिक्षा का बेहतर माहौल बनेगा। शिक्षा की ज्ञान भूमि में प्रेरणा का बीज चतुर्दिक सृजन का काम करेगा। ऐसे शिक्षोन्मुखी कार्यक्रमों में विषय विशेषज्ञ के रुप में भाग लेने के लिए बीएन मंडल विश्वविद्यालय के 6 शिक्षकों का नाम कुलपति डॉ.अवध किशोर राय के निर्देशानुसार कुलसचिव कर्नल नीरज कुमार ने यूजीसी के अपर सचिव को पत्र के माध्यम से भेजा है।

बता दें कि कुलसचिव कर्नल नीरज ने बताया कि प्रेषित पत्र में जिन तीन वरिष्ठ प्राध्यापकों का नाम शिक्षक उन्मुखीकरण के लिए प्रस्तावित किया गया है- वे हैं- विश्वविद्यालय जंतु विज्ञान विभाग के प्रो.(डॉ.) नरेन्द्र श्रीवास्तव, मनोविज्ञान स्नातकोत्तर विभाग के प्रोफेसर सह डिप्टी रजिस्ट्रार एकेडमी प्रो.(डॉ.) एम आई रहमान एवं रसायन स्नातकोत्तर विभाग के प्रोफेसर, सीनेटर  सह बीएन मुस्टा के महासचिव प्रो.(डॉ) नरेश कुमार।

कुलसचिव कर्नल नीरज ने यह भी कहा कि यूजीसी द्वारा छात्रों के लिए आयोजित होने वाले इंडक्शन प्रोग्राम के लिए जिन तीन युवा शिक्षकों का नाम प्रस्तावित किया गया है , वे हैं- मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सह संयुक्त सचिव क्रीड़ा एवं संस्कृति परिषद डॉ.शंकर कुमार मिश्र , दर्शनशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सह विश्वविद्यालय पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर एवं विश्वविद्यालय भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अमित विश्वकर्मा।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस बाबत विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से पूछे जाने पर उन्होंने यही कहा कि कुलपति द्वारा वर्गों में छात्रों- शिक्षकों को पढ़ते-पढ़ाते हुए देखने का सपना अब यूजीसी द्वारा “शिक्षकों और छात्रों के उत्थान को लेकर आयोजित प्रशिक्षण” के माध्यम से पूरा होता दिखने लगा है। डॉ.मधेपुरी ने यूजीसी के इंडक्शन प्रोग्राम की खूब सराहना की।

सम्बंधित खबरें


बीएनएमयू के डीन डॉ.शिवमुनि को मिला ‘राष्ट्रीय शिक्षा रत्न’ अवॉर्ड

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू एवं सोशल साइंस के डीन प्रो.(डॉ.) शिवमुनि यादव को राष्ट्रीय शिक्षारत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया-विगत सोमवार को नई दिल्ली में। उन्हें यह सम्मान राजधानी दिल्ली में आयोजित “ओरिएंटल हेरिटल हेरिटेज” पर भव्यरूप से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में दिया गया।

बता दें कि प्रो.(डॉ.) शिवमुनि यादव ने बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर से भूगोल स्नातकोत्तर में स्वर्ण पदक प्राप्त करने के बाद वहीं से भूगोल में ही पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। फिर कई महाविद्यालयों में भूगोल के विभगाध्यक्ष रहे। वे प्रतिभा संपन्न , लोकप्रिय व चर्चित प्राध्यापक बन कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं। उन्होंने छात्रहित में तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना भी की है। वे देश के कई अन्य बड़े-बड़े नामवर विश्वविद्यालयों की विभिन्न ज्योग्राफीकल कमिटियों के सदस्य भी रहे हैं। फ़िलहाल वे “एसोसिएशन ऑफ़ ज्योग्राफर्स आफ बिहार एंड झारखंड” के अध्यक्ष भी हैं।

यह भी जानिये कि शिक्षा के प्रति समर्पित डॉ.शिवमुनी यादव के मार्गदर्शन में लगभग ढाई दर्जन शोधार्थियों ने ज्योग्राफी के भिन्न-भिन्न टॉपिक्स पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। डॉ.यादव को ‘राष्ट्रीय शिक्षा रत्न अवार्ड’ से नवाजे जाने पर इन शोधार्थियों के अतिरिक्त स्नातकोत्तर विभागाध्यक्षों, प्राचार्यों, प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं के साथ-साथ विद्वान कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, प्रति कुलपति डॉ.फारूक अली, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी आदि ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है।

सम्बंधित खबरें