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ये हैं भारत के पहले आधुनिक पुरुष

ब्रिटेन के ब्रिस्टल शहर में आर्नोस वेल का बहुत पुराना कब्रिस्तान है । यहां सौ-दो साल से अपरिचित कब्रगाहों के बीच उस शख़्स की कब्र है जिन्हें भारत का प्रथम आधुनिक पुरुष कहा जाता है । वो कोई और नहीं ब्रह्म समाज संस्थापक राजा राम मोहन राय हैं ।

एक ब्राह्मण का कब्र वो भी इंग्लैंड में ! बात गुजरे ज़माने की है जब मुगलिया सल्तनत हिन्दुस्तान में अपने आखिरी दिन गिन रहा था । तब के मुग़ल बादशाह थे अक़बर द्वितीय जिन्होंने राजा राम मोहन राय को अपनी आर्थिक मदद की फ़रियाद लगाने के लिए इंग्लैंड भेजा था । वे वहां के राजा से मिले इसलिए उन्हें राजा का ख़िताब दिया गया । इसी बीच उनकी तबियत बिगड़ गयी और 27 सितंबर 1833 में 61 साल की उम्र में राजा राममोहन राय का देहांत हो गया , उस वक़्त इंग्लैंड में दाह-संस्कार की अनुमति नहीं थी । इसलिए उन्हें दफ़्न किया गया ।

यूँ तो आधुनिकता के इस दौर में हर कोई आधूनिकिकरण के चपेट में आ गया है । पर सच्चे अर्थों में भारत की आधुनिकता को परिभाषित किया राजा राम मोहन राय ने । राजा राम मोहन राय का जन्म आज के ही दिन 22 मई, 1772 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के राधानगर में हुआ था। उन्होंने भारत की सदियों से चली आ रही रुढ़िवादी सोच पर प्रहार किया और अंग्रेजों के साथ मिलकर भारत में अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार व प्रसार किया ।

करीब 200 साल पहले जब समाज में सती प्रथा जोरों पर थी, तब राजा राम मोहन राय ने इसे जड़ से खत्म करने में सबसे अहम भूमिका अदा किया। उन्होंने सती प्रथा का कड़ा विरोध किया। उन्होंने महिलाओं के लिए समान अधिकारों के लिए मुहिम चलाई और विधवा विवाह व संपत्ति के हक के लिए भी लोगों को जागरूक किया। 1828 में उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की। इसे भारत का पहला सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन कहा जाता है। राजा राममोहन राय मूर्तिपूजा और रूढ़िवादी हिन्दू परंपराओं के विरुद्ध थे । वे अंधविश्वास के खिलाफ थे । आज इस विशेष दिन पर मधेपुरा अबतक इस आधुनिक पुरुष को नमन करता है |

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विरह-वेदना युक्त ‘आहत मन के दोहे’ का लोकार्पण !

कोसी कमिश्नरी मुख्यालय की धरती पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ.जी.पी.शर्मा की अध्यक्षता में इन्हीं के द्वारा रचित विरह-वेदना से भरे “आहत मन के दोहे” के विमोचनकर्ता वरिष्ठ साहित्यकार व इतिहासकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने विरह को प्रेम की जाग्रत गति बताया और कहा कि डॉ.शर्मा के अन्तसतल की गहराई में ‘एकाबरी’ के लिए जो विरह पल रहा है वह जीवन का शाश्वत एवं सजीव प्रेम बनकर संसार को सुरभिमय बनाता रहेगा | उन्होंने विश्व वान्ग्मय में ‘विरह-काव्य’ को सबसे प्राचीन विधा बताया |

बता दें कि इस अवसर पर मुख्य अतिथि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विश्व की प्राचीनतम ग्रंथ ‘ऋग्वेद’ में वर्णित पुरुरवा एवं उर्वशी की विरह-वेदना के वर्णन को अद्भुत, अद्वितीय एवं अतुलनीय बताते हुए कहा कि विरह-वर्णन को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करना कठिन होता है बल्कि उसे केवल महसूसा जा सकता है |

यह भी जानिए कि लोकार्पण समारोह में उपस्थित नामचीन साहित्यकारों उमेशचन्द्र आचार्य, सियाराम यादव मयंक, श्यामानंद लाल दास ‘सहर्ष’, मुर्तजा नरियारवी आदि ने भी अपनी कविताओं और गजलों की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम को विस्तार देते हुए चर्चित बना दिया | अंत में अध्यक्ष डॉ.शर्मा ने अवरुद्ध कंठ से चंद शब्दों में आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा कर दी |

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आरजेडी ने कहा, कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में भी बने सरकार

कर्नाटक की आंच बिहार तक भी आ पहुंची है। बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी के नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को अपने सहयोगी दलों के नेताओं के साथ राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलकर कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में भी सबसे बड़ा दल होने के नाते सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस दौरान राज्यपाल को 111 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा गया। तेजस्वी के साथ प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी एवं प्रेमचंद मिश्रा, हम के दानिश रिजवान एवं आरजेडी के तेजप्रताप यादव, आलोक मेहता एवं शिवचंद्र राम समेत कई विधायक मौजूद थे।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेजस्वी ने दावा किया कि अगर उन्हें सरकार बनाने का मौका मिलता है तो वह आसानी से फ्लोर टेस्ट पास कर लेंगे। तेजस्वी का दावा है कि उऩके साथ कुल 111 विधायक हैं और कुछ जेडीयू से नाखुश विधायक भी उनके संपर्क में हैं। इसके पहले कर्नाटक मुद्दे पर आरजेडी ने धरना-प्रदर्शन कर विरोध भी जताया। शुक्रवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए तेजस्वी ने ट्वीट भी किया और कहा, ‘देश संविधान के आधार पर दिल्ली से चलना चाहिए, न कि संघ के नागपुर मुख्यालय से। चलो लोकतंत्र बचाने के लिए सड़कों पर उतरें।’

वहीं दूसरी ओर जेडीयू ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए उन्हें ‘बबुआगिरी’ छोड़ राज्यपाल की शक्तियों को जानने की सलाह दी है। जेडीयू के प्रवक्ता और विधानपार्षद नीरज कुमार ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए उनके नाम एक खुला पत्र जारी कर उन्हें लोकतंत्र और सरकार बनाने के नियमों का ज्ञान नहीं होने की बात कही। पत्र में कहा गया है कि सरकार बनाने का दावा पेश करने के पूर्व विधानसभा में वर्तमान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर संख्याबल के द्वारा वर्तमान सरकार गिरानी पड़ती है और इसके बाद नई सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त होता है।

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‘साक्ष्य’ में मधेपुरा के पाँच कलमकारों के आलेख प्रकाशित

बिहार विधान परिषद द्वारा प्रकाशित ‘साक्ष्य’ पत्रिका में इसी वर्ष मार्च 2018 में लोहिया स्मरण से संबंधित लगभग साढे तीन दर्जन आलेख को जगह दी गई है । इस ताजा “लोहिया स्मरण अंक” में प्रधान संरक्षक मो.हारुण रशीद से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राम मनोहर लोहिया के आलेख से लेकर भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी तक की लेखनी को समाहित किया गया है ।

बता दें कि आज की तारीख में मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले विज्ञानवेत्ता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी जब भी डॉ.लोहिया पर कुछ लिखने हेतु कलम उठाते हैं तो उन्हें अपनी लघुता का अहसास होने लगता है जबकि वह लोहिया के सानिध्य में तब से रहे हैं जब लोहिया अपनी पत्रिका ‘जन’ का प्रधान संपादक हुआ करते और मधेपुरी रासबिहारी उच्च विद्यालय का छात्र । यह बात 1960 की है जब (डॉ.) मधेपुरी ‘जन’ में भी कुछ-कुछ लिखा करते थे जिसके चलते वे मनीषी भूपेंद्र नारायण मंडल के निकटतम होते चले गये ।

यह भी जानिये कि 1964 ई. में उसी रासबिहारी विद्यालय के ऐतिहासिक मैदान में डॉ.लोहिया क्या कहते हैं- ” हे मधेपुरा वासियों ! मैं बार-बार मधेपुरा क्यों आता हूँ  ?क्योंकि, इस समाजवादी धरती ने भूपेंद्र नारायण मंडल जैसे निडर और बहादुर सपूत को पैदा किया है जो बेझिझक एवं निडर होकर भारतीय संसद में महत्वपूर्ण सवाल उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे………!”

यह भी बता दें कि साक्ष्य में मधेपुरा के जिन पाँच कलमकारों की रचना को शामिल किया गया है उन में सर्वश्रेष्ठ व वरिष्ठ साहित्यकार एवं इतिहासकार श्री हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ हैं जिन्हें छात्र जीवन में डॉ.लोहिया और अच्युत पटवर्धन के साथ बैलगाड़ी से मधेपुरा से नेपाल बकरो के टापू तक जाने का अवसर मिला था….I

यह भी बता दें कि जहाँ शिक्षा और सामाजिक न्याय की लोहिया-दृष्टि के मर्मज्ञ एवं ख्याति प्राप्त विज्ञान वेत्ता डॉ.अवध किशोर राय (कुलपति बी.एन.एम.यू.) के शीलसंपन्न आलेख को साक्ष्य में सम्मानपूर्वक जगह दी गई वहीं डॉ.लोहिया को ताजिंदगी मार्गदर्शक के रुप में जीने वाले विधायक रह चुके राधाकांत यादव के लगभग डेढ़ दर्जन पृष्ठों वाले भीमकाय आलेख को भी साक्ष्य में शामिल किया गया है I  इसके अलावे डॉ.मधेपुरी सहित समकालीन कवि डॉ.अरविंद श्रीवास्तव को भी साक्ष्य में प्रमुखता से स्थान दिया गया है I

चलते-चलते यह भी जानिए कि कोशी क्षेत्र में डॉ.लोहिया के प्रति समर्पित क्रांतिवीरों की कमी नहीं रही, जिनमें प्रमुख रहे हैं- शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, कार्तिक प्रसाद सिंह, चुल्हाय यादव, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल, राम बहादुर सिंह, चित्र नारायण शर्मा, महताप लाल यादव, कुदरत उल्लाह, बैधनाथधर मजुमदार, गुणानंद झा, छेदी झा  द्विजवर, बुलाकी सुनार, ईश्वरी सिंह, भगवान चन्द्र विनोद आदि I

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प्रोविजनल बेल पर 42 दिनों के लिए बाहर आए लालू

चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव बुधवार को छह हफ्ते की औपबंधिक जमानत (प्रोविजनल बेल) पर रांची की होटवार जेल से बाहर आ गए। देर शाम उन्हें सेवा विमान से पटना लाया गया। पटना हवाई अड्डे से उन्हें व्हील चेयर पर बाहर निकाला गया। अब इलाज के लिए उन्हें मुंबई हार्ट हास्पिटल ले जाने की तैयारी की जाएगी। इससे पहले रांची जेल में उनकी जमानत की सारी जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई। जमानत की अवधि गुरुवार से गिनी जाएगी।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद को मेडिकल ग्राउंड पर छह हफ्तों की सशर्त जमानत दी है। इसके तहत लालू को जमानत अवधि के दौरान कोई राजनीतिक रैली नहीं करनी है। मीडिया से बात नहीं करनी है। साथ ही इलाज कहां-कहां कराएंगे, इसकी जानकारी अदालत को देने को कहा गया है। जमानत के दौरान उन्हें विदेश जाने की अनुमति नहीं रहेगी।

राजद के राष्ट्रीय महासचिव एवं लालू के बेहद करीबी विधायक भोला यादव के मुताबिक राजद प्रमुख को 16 तरह की बीमारियां हैं। उनका किडनी 40 प्रतिशत ही काम कर रहा है। हार्ट, शुगर, बैक पेन, चक्कर आना जैसी अन्य बीमारियां भी हैं। यह दिल्‍ली एम्स की रिपोर्ट है। सभी बीमारियों का इलाज बारी-बारी से होगा। पटना में लालू का तबतक इलाज होगा, जबतक कि बाहर के डॉक्टर का अप्वाइंटमेंट नहीं मिल जाता। एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट मुंबई के विशेषज्ञ डॉ. पांडा से समय लेकर उनसे जांच कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि तीन मेडिकल इंस्टीट्यूट में इलाज की जरूरत महसूस की गई है। अन्य जगह ले जाने की जरूरत पड़ी तो अदालत से अनुरोध किया जाएगा।

चलते-चलते बता दें कि रांची में लालू के इंतजार में बड़ी संख्या में समर्थक व मीडियाकर्मी खड़े थे, लेकिन इनसे बचते हुए लालू को निकाला गया। कड़ी सुरक्षा के घेरे में उन्हें एयरपोर्ट ले जाया गया। जेल गेट के बाद बड़ी संख्या में समर्थक जश्न की तैयारी में थे लेकिन किसी को इसका मौका ही नहीं मिला। पटना में भी इस तरह के किसी भी प्रदर्शन से बचने की कोशिश की गई।

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कर्नाटक का जनमत अब राज्यपाल के हाथों

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि वह बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं छू सकी। बता दें कि यहां विधानसभा की कुल 224 सीटें हैं जिनमें से 222 सीटों पर चुनाव हुए थे, जिनमें भाजपा को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस प्लस को 38 सीटें मिली हैं। इस तरह सरकार बनाने के लिए 112 सीटों का आंकड़ा चाहिए था जहां तक भाजपा नहीं पहुंच पाई, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण उसका दावा है कि सरकार बनाने का पहला मौका उसे मिलना चाहिए। दूसरी ओर राज्य की सत्ता की दौड़ में पिछड़ी कांग्रेस ने वक्त की नजाकत को देखते हुए राजनीतिक परिपक्वता दिखाई और बिना देर किए पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस को समर्थन का ऐलान कर देवगौड़ा के पुत्र एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव दिया, जिसे जेडीएस ने बिना देर किए स्वीकार कर लिया और तत्काल चुनाव बाद बने गठबंधन के तौर पर सरकार बनाने का अधिकार जताया। अब गेंद राज्यपाल वजुभाई वाला के हाथों में है कि वो बहुमत में घट रहे 8 विधायकों का ‘जुगाड़’ कहां से होगा, ये बताने में फिलहाल असमर्थ भाजपा की महत्वाकांक्षा का पथ प्रशस्त करते हैं या प्रथम दृष्टया सही लग रही और 78+38=116 के आंकड़े, जो जरूरत से चार ज्यादा है, के साथ खड़ी कांग्रेस-कुमारस्वामी की सरकार को हरी झंडी दिखाते हैं।

बहरहाल, इस बीच ख़बर आई है कि कांग्रेस के कुछ लिंगायत विधायकों ने कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध कर दिया है। खबर यह भी आ रही है कि कांग्रेस अपने विधायकों को पार्टी छोड़ने के डर से आंध्र प्रदेश या पंजाब भेजने की योजना बना रही है। दूसरी ओर, भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येद्दयुरप्पा राज्यपाल से मिलकर महज 48 घंटे में बहुमत साबित करने का दावा कर रहे हैं। उधर भाजपा और कांग्रेस दोनों के केंद्रीय नेतृत्व ने स्थिति संभालने के लिए दिल्ली से अपने-अपने वरिष्ठ नेताओं को बेंगलुरु भेजा है। अब सबकी नजरें राज्यपाल के रुख पर हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि राज्यपाल पूरी तरह ठोक-बजाकर ही कोई निर्णय लेंगे।

कर्नाटक के चुनाव-परिणाम पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भाजपा के विकास के एजेंडे को लगातार समर्थन देने और भाजपा को राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनाने के लिए मैं कर्नाटक के बहनों और भाइयों को धन्यवाद देता हूं। उधर विजय-रथ पर सवार भाजपा के सारथि अमित शाह ने पार्टी की जीत पर अपने उद्गार में कहा कि बाकी देश की तरह कर्नाटक की महान भूमि ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ, पारदर्शी और विकासोन्मुख शासन पर दृढ़ विश्वास व्यक्त किया है। इस जनादेश से साफ है कि कर्नाटक ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार, वंशवादी राजनीति और विभाजनकारी जातिवाद को खारिज कर दिया है। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मौके पर बड़ी सधी हुई प्रतिक्रिया दी और कहा कि इन चुनावों में जिन्होंने भी कांग्रेस को वोट दिया, उन सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद। हम आपके समर्थन की सराहना करते हैं और हम आपके लिए लड़ेंगे।

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एक शादी ऐसी भी…….!

आयुष्मती किरण कुमारी के संग चिरंजीव सचिन कुमार सादा की शादी हुई विगत सप्ताह | मधेपुरा जिले के सिगिऔन गांव की बेटी किरण (सुपुत्री-पानो देवी व युगेश्वर ऋषिदेव) के साथ सुपौल जिले के कटैया गांव के बेटे सचिन कुमार सादा (सुपुत्र-दुलारी देवी व सूर्यनारायण सादा) का पाणिग्रहण आजू-बाजू के गांवों के सभी जाति-बिरादरी के नर-नारियों, बच्चे एवं बूढ़ों की उपस्थिति में सिगिऔन के रुकमा देवी ठाकुरबाडी मंदिर में संपन्न हुआ |

बता दें कि मंदिर के संस्थापक व पूर्व प्राचार्य सह कुलानुशासक (बी.एन.एम.यू.) डॉ.शिवनारायण यादव सरीखे इस शादी के सूत्रधार की देख-रेख में स्वागत संबंधी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा गया । दो साधारण ऋषिदेव कुल की शादी इतनी संपन्नता के साथ होते देख समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने उपस्थित समाज को संदेश देने के क्रम में उस विशाल भीड़ को माईक के सहारे संबोधित करते हुए कहा-

कोसी अंचल के समाजवादी चिंतक द्वय मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल एवं अंबिका दादा प्रायः मेरे समक्ष इस बात की चर्चा किया करते कि दलितों में खासकर ऋषिदेव (यानि मुशहर) अबतक जग क्यों नहीं रहा है, आगे बढ़ क्यों नहीं रहा है और पढ़ क्यों नहीं रहा है ? आज ये दोनों जन इस नजारे को ऊपर से देखकर शिवनारायण बाबू को शुभाशीष देते होंगे |

यह जानिए कि उपस्थित नर-नारियों एवं शिव परिवार के सदस्यों की खुशियों को देख-देख कर अभिभूत हुए डॉ.मधेपुरी ने डॉ.अरुण कुमार, डॉ.सुरेश प्रसाद यादव एवं मो.मिराज सहित उपस्थित जनसमूह के समक्ष यह खुलासा किया कि मैंने भी इस शादी में सहयोग करने की चर्चा की थी, परंतु बिना किसी से आर्थिक सहयोग स्वीकार किए डॉ.शिवनारायण ने अपनी पुत्री की शादी की तरह किरण की शादी में जो कुछ किया वह ग्रामीणों द्वारा स्मरण किया जाता रहेगा |

बता दें कि यह किरण डॉ.शिवनारायण यादव की धर्मपत्नी सत्यभामा देवी की सेवा सर्वाधिक मनोयोग से करती रही | जब सत्यभामा देवी कैंसर से पीड़ित हुई तो सिगिऔन से मधेपुरा, सहरसा-पटना और मुंबई तक किरण सेवारत रही | अंतिम सांस लेते समय सत्यभामा ने अपने पति डॉ.शिवनारायण बाबू से यही कहा कि जिस तरह अपनी बेटियों की शादी हुई थी उसी तरह किरण की भी शादी होगी तो मेरी आत्मा को शांति मिलेगी……….!

जानिए कि धर्मपत्नी सत्यभामा की बातों को निभाने और अंततः सच साबित करने में लगे डॉ.शिवनारायण यादव और मामाश्री डॉ.मधेपुरी भी उन्हें हर कदम पर सहयोग करने के लिए आश्वस्त करते रहे और उपस्थित वर-वधु के पक्ष के ऋषिदेवों को बारंबार यही कहते रहे- आप जगिए, आगे बढ़िए और बच्चों को पढ़ाइए व पढ़ने दीजिए….!

 

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मदर्स डे: कुछ अनुभूतियां

मां से छोटा
और ताकतवर
शब्द कोई और हो… तो बताना..!

गम को छिपाकर
वो कहां रखती है
गर तुम्हें मालूम हो… तो दिखाना..!

मौत के रास्ते हैं बहुत
ये मैंने, तुमने, सबने जाना
पर बात जब सृजन की हो
मां की कोख में ही होता है आना..!

मां अनपढ़ हो तब भी
गणित में बड़ी दिलदार होती है
दो रोटी मांग कर देखो
वो हरदम चार देती है..!

साल में एक दिन
मदर्स डे आता है
सब कहते हैं आज
मां का दिन है
कोई तो बतलाए
दिन कौन-सा मां के बिन है..!

ईश्वर ने सृष्टि को रचकर
उसे करीने से सजाया
पर हर बच्चे को पालने में
स्वयं को सक्षम नहीं पाया
तब हारकर उसने मां को बनाया..!

मां वो है
जो बच्चों के पथ में फूल बिछा
स्वयं कांटों पर चल लेती है
मां वो है
जो बच्चों के आज की खातिर
अपना सारा कल देती है..!

सोचो किस कदर वही मां
खून के आंसू रोती होगी
जब घर के बंटवारे में
छाती के टुकड़े ढोती होगी..!

धरा-आसमां बंट जाए सब
मां कब-कहां बंटती है
गोद इतनी विशाल उसकी
पूरी कायनात उसमें अंटती है..!

[डॉ. मधेपुरी की कविता]

 

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बेटे की शादी पर मिले और खूब मिले लालू-नीतीश

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप और पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या की शादी ने यह बात एक बार फिर स्पष्ट कर दी कि सियासत अपनी जगह है और व्यक्तिगत संबंध और भारतीय संस्कार अपनी जगह। यह बात खासकर यहां लालू और नीतीश के संदर्भ में है। इस हाई प्रोफाईल शादी में जुटे तो देश भर के कई दिग्गज थे लेकिन सबकी निगाहें टिकी थीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर। महागठबंधन टूटने के बाद पहली बार उन्हें और लालू प्रसाद यादव को एक साथ किसी मंच पर होना था। इस बीच इनके संबंधों में जिस तरह की कड़वाहट देखने को मिली थी और खासकर महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे तेजस्वी जिस तरह सोशल मीडिया पर हमलावर थे, उससे उत्सुकता और बढ़ गई थी। पर हुआ वही जो असल में होना चाहिए था।

नीतीश कुमार ना केवल तेजप्रताप की शादी में शामिल हुए, बल्कि पूरी आत्मीयता और सहजता के साथ वरमाला की पूरी रस्म के दौरान मंच पर ही मौजूद रहे। लालू ने भी गर्मजोशी दिखाने में कोई कसर ना छोड़ी। उन्होंने उठकर नीतीश का स्वागत किया और देर तक उनसे हाथ मिलाए रहे। यही नहीं, उनके सभी बच्चे बारी-बारी से चाचा नीतीश से मिले। जो नहीं मिले थे उन्हें राबड़ी ने बुला-बुला कर मिलाया। नीतीश और राबड़ी एक साथ एक सोफे पर बैठे थे, बिल्कुल देवर-भाभी की तरह। मीसा से लेकर तेजस्वी तक आए और मां और चाचा नीतीश के बीच बैठ कर तस्वीर खिंचवाई। बगल के सोफे पर लालू राज्यपाल सत्यपाल मलिक के साथ बैठे थे। अद्भुत दृश्य था ये।

बहरहाल, तेजप्रताप की शादी में देश के कई दलों के दिग्गज शामिल हुए। इन नेताओं में फारूक अब्दुल्लाह, अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव, अजीत सिंह, शरद यादव, प्रफुल्ल पटेल, शत्रुघ्न सिन्हा, दिग्विजय सिंह, हेमंत सोरेन, सीताराम येचुरी एवं डी. राजा प्रमुख थे। इन नेताओं ने भले ही कोई सियासी बयान नहीं दिया, मगर समारोह में एकसाथ इनकी मौजूदगी बहुत कुछ कह गई।

इस बेहद खास शादी में बाबा रामदेव और रामजेठ मलानी ने भी उपस्थिति दर्ज की। बिहार के सभी प्रमुख नेता – रामविलास पासवान, जीतनराम मांझी, उपेन्द्र कुशवाहा आदि – मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पोलैंड अपनी यात्रा के कारण समारोह में नहीं आ सके।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ आईं उनकी पत्नी डिंपल यादव ने इस मौके पर बड़ी अच्छी बात कही कि “दुख और सुख जीवन का हिस्सा हैं। आते-जाते रहेंगे। हम लालू परिवार की खुशियों में शामिल होने आए हैं।” देश भर के दिग्गजों और राज्य के कोने-कोने से आए बीस हजार से ज्यादा मेहमानों की मौजूदगी यही तो बता और जता रही थी।

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सचमुच लकी हैं लालू की बहू

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की होने वाली बहू उनके और उनके परिवार के लिए भाग्यशाली साबित हुई हैं। जी हाँ, तीन दिन के पैरोल पर बेटे तेजप्रताप की शादी में शामिल होने पटना आए आरजेडी सुप्रीमो को आज मेडिकल ग्राउंड पर झारखंड हाईकोर्ट से छह हफ्ते की जमानत भी मिल गई है। इससे उनके घर में होने जा रही शादी की खुशी में जैसे चार चांद लग गए हों। बता दें कि हाईकोर्ट ने यह जमानत उनके बेहतर इलाज के लिए दी है। अब वे जहां चाहें अपना इलाज करा सकेंगे। निश्चित तौर इससे ना केवल उनका परिवार बल्कि उनके तमाम चाहने वाले बेहद सुकून की सांस ले रहे होंगे।

बहरहाल, गौरतलब है कि शनिवार 12 मई को लालू के बड़े बेटे व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव की शादी पूर्व मुख्यमंत्री स्व. दारोगा राय की पोती व पूर्व मंत्री श्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या से होने जा रही है। शादी समारोह में शामिल होने को लेकर इससे पहले पूरा लालू परिवार उन्हें मिले महज तीन दिन के पैरोल से ही संतोष कर रहा था, ऐसे में छह हफ्ते की जमानत से होने वाली खुशी का अंदाजा लगाया जा सकता है। स्वाभाविक तौर पर इसे बहू के पैर पड़ने से पहले ही उसके शुभ लक्षण के तौर पर देखा जा रहा है।

वैसे बहू के पैर के लक्षण की बात करें तो इसे लोग घर के अन्य सदस्यों से जोड़ कर भी देख रहे हैं। ऐश्वर्या के आने से पहले घर के अन्य सदस्यों के मामले में खुशी ने दस्तक दी है। उदाहरण के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री व लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव को ही लें। अपने पिता की तरह तेजस्वी को भी कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने तेजस्वी यादव सहित चार नेताओं को जारी सीबीआई कोर्ट के नोटिस को खारिज कर दिया है। यह नोटिस बेतुका बयान के लिए जारी किया गया था, जिसके बाद सीबीआई कोर्ट के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका डाली गई थी।

खुशियों का सिलसिला यहीं नहीं रुकता। यहां यह भी स्मरणीय है कि इससे पहले लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती और उनके पति को दिल्ली की सीबीआई कोर्ट से जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने उन्हें बिना इजाजत के विदेश ना जाने की शर्त पर जमानत दी थी।

चलते-चलते बता दें कि योगगुरु बाबा रामदेव ने भी ऐश्वर्या को भाग्यशाली बताया है। उन्होंने तेजप्रताप की दुल्हन और उसके परिवारवालों से मुलाकात की थी और कहा था कि वो लालू परिवार के लिए लकी साबित होंगी।

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