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नेताजी सुभाष चन्द्र बोसमय हुआ मधेपुरा

आजादी के दीवाने सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिवस 23 जनवरी को मधेपुरा के बीचो-बीच अवस्थित उनकी प्रतिमा पर सर्वप्रथम नगरपालिका के प्रथम उपाध्यक्ष समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी सहित किसान मजदूर-शिक्षक-व्यापारी सभी मिलजुलकर आज सबेरे माल्यार्पण किये एवं शेष सबों ने पुष्पाञ्जलि की।

डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित बच्चों से नेताजी के बाबत यही कहा कि उनका जन्म 1897 ई. में उड़ीसा के कटक में अपने पिता जानकी बोस एवं माता प्रभावती की नौवीं संतान के रूप में हुई थी। कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर उन्होंने IAS की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने नौकरी नहीं की। देश सेवा में लग गये। 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया। लगे हाथ उन्होंने पूरी दुनिया का भ्रमण किया। रासबिहारी बोस के आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन किया। महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता कहकर सर्वप्रथम उन्होंने ही संबोधित किया था। अंत में डॉ.मधेपुरी ने अपनी ‘आजादी’ शीर्षक कविता की चन्द पंक्तियाँ बच्चों के साथ साझा किया।

गोखले तिलक गाँधी सुभाष, नेहरु लोहिया जयप्रकाश।

सभी दीवाने आजादी के, कर दिया एक क्षिति महाकाश।।

आओ सब मिलकर करें बंधु, आजादी का शत् अभिनंदन।

इनके ललाट पर करें नित्य, अपने अनंत श्रम का चंदन।।

DM Navdeep Shukla paying his tributes to Neta Jee Subhash Chandra Bose at Samaharnalaya Madhepura.
DM Navdeep Shukla paying his tributes to Neta Jee Subhash Chandra Bose at Samaharnalaya Madhepura.

पुनः दिन के 11 पूर्वाह्न में समाहरणालय सभाकक्ष में नेताजी सुभाष चंद्र की भव्य तस्वीर पर डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी संजय कुमार की टीम के सारे पदाधिकारी एडीएम शिवकुमार शैव, उपेंद्र कुमार झा, डीडीसी मुकेश कुमार, खेल पदाधिकारी मुकेश कुमार, एनडीसी रजनीश कुमार एवं कार्यालय कर्मियों सहित समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी द्वारा पुष्पांजलि की गई। दिनभर शहर के प्रायः सभी स्कूलों एवं कॉलेजों में छात्रों एवं शिक्षकों द्वारा नेताजी को श्रद्धांजलि दी गई, उन्हें याद किया गया।

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फरवरी में होगा सभी प्रमंडलों में सम्मेलन करेगी जदयू

फरवरी में जदयू सभी प्रमंडलों में भव्य सम्मेलन का आयोजन करेगी जिसमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल होंगे। जदयू के इस प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन में संबंधित प्रमंडल के पार्टी के सभी सांसद, मंत्री, विधायक, विधानपार्षद, प्रदेश पदाधिकारी, प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, सभी सक्रिय साथी एवं नीतीश कुमार की नीतियों एवं आदर्शों में आस्था रखने वाले लोग मौजूद रहेंगे।

बता दें कि जदयू के प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन की शुरुआत शनिवार 9 फरवरी 2019 को तिरहुत प्रमंडल से होगी। इसके उपरान्त रविवार 17 फरवरी को दरभंगा प्रमंडल, शनिवार 23 फरवरी को कोसी प्रमंडल, रविवार 24 फरवरी को पूर्णिया प्रमंडल, सोमवार 25 फरवरी को भागलपुर प्रमंडल, मंगलवार 26 फरवरी को मुंगेर प्रमंडल, बुधवार 27 फरवरी को मगध प्रमंडल एवं गुरुवार 28 फरवरी को सारण प्रमंडल में सम्मेलन का आयोजन होगा।

अभी जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कुछ ही दिन शेष हैं, जदयू के इन सम्मेलनो का महत्व और भी बढ़ जाता है। प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने इन सम्मेलनों को ऐतिहासिक बनाने के लिए दल के सभी साथियों को अभी से जुट जाने को कहा है। उन्होंने इस संदर्भ में जारी अपने बयान में कहा है कि पार्टी की कोशिश है कि आगामी लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार की सभी 40 सीटों पर एनडीए की जीत हो।

गौरतलब है कि पिछले लगभग एक वर्ष से पंचायत, प्रखंड, जिला व प्रदेश स्तर पर लगातार कार्यक्रम कर जदयू ने जिस तरह जमीन से जुड़ने और आमलोगों के बीच जाने का प्रयास किया है वह अपने आप में अभूतपूर्व है। चाहे सभी जिलों में जदयू का अतिपिछड़ा सम्मेलन और रोड शो हो, जिला व प्रमंडल स्तर पर दलित-महादिलत सम्मेलन हो, सभी जिलों में अल्पसंख्यक कार्यकर्ता सम्मेलन एवं महिला समागम हो या फिर विभिन्न प्रकोष्ठों द्वारा चलाया जा रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम और सभी संगठन प्रभारियों का पंचायत, प्रखंड व जिला स्तर पर लगातार बैठकों का दौर, जदयू ने हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं और समाज-सुधार अभियानों को जन-जन तक पहुँचाने की प्रशंसनीय कोशिश की है।

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कोसी के महान कवि पं.यदुनाथ झा यदुवर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर व्याख्यान

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अंबिका सभागार में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान योद्धा एवं महाकवि पं.यदुनाथ झा यदुवर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य व्याख्यानकर्ता डॉ.ललितेश मिश्र, पूर्व विभागाध्यक्ष , स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग (बीएनएमयू) ने कोसी अंचल के कवियों के काव्य-कुसुमों की चर्चा करते हुए कहा कि महाकवि यदुवर राष्ट्रीय चेतना के काव्य सृजन में अग्रगण्य रहे हैं। इन्हें साहित्य एवं राष्ट्रप्रेम विरासत के रूप में प्राप्त हुआ था क्योंकि पं.यदुवर जी महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक बाबू रास बिहारी लाल मंडल के अभिन्नतम मित्र थे। उनकी भाव साधना के समान ही शब्द साधना भी विलक्षण रही है।

डॉ.मिश्र ने आगे कहा कि पं.यदुनाथ झा यदुवर की यशस्वी कृति ‘मिथिला गीतांजलि’ है जो उनकी राष्ट्रीय चेतना का सशक्त संवाहक है। यदुवर जी में राष्ट्रीयता की गंगा ताजिंदगी प्रवाहित होती रही। पूर्व में विषय प्रवेश करते हुए अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने ऐसी परिचर्चा की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाकवि यदुवर कोसी अंचल के काव्य मुकुटमणि हैं। यदि कहीं स्वर्ग है तो मिथिला की धरती पर ही है क्योंकि मिथिला की नदियों का तीर नंदन-कानन से कम रमणीक नहीं है। यह यदुवर जी की राष्ट्रीय भावना की उद्ददाम अभिव्यक्ति है। उनकी कविताओं में कालचक्र का स्वभाविक रूप से मौलिक चित्रण मिलता है जिस कारण पाठक देश पर मर मिटने को तत्पर हो उठते थे। वे काव्य जगत में नवीन चेतना लेकर प्रादुर्भूत हुए थे।

सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लोगों के अंतर्मन में राष्ट्रीयता का संचार करना ही राष्ट्रीय कविता का लक्ष्य है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि महाकवि यदुवर सामाजिक समस्याओं को लेकर ही राष्ट्रीय कविताओं का सृजन किया है। याद रहे कि सामाजिक सद्भाव एवं पारस्परिक एकता ही तत्कालीन भारत की सामायिक समस्याएं थी।

अपने संबोधन में पूर्व कुलसचिव शचीन्द्र, प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, सुबोध कुमार सुधाकर, सुरेंद्र भारती, ध्रुव नारायण सिंह राई, डॉ.अरविंद श्रीवास्तव, डॉ.विश्वनाथ विवेका, प्रो.मणि भूषण. डॉ.विनय कुमार चौधरी आदि ने प्रायः यही कहा कि महाकवि यदुवर की राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत कविताओं में स्थायित्व का समावेश है और समाजिकता का प्रतिबिंब भी। सबों ने यही कहा कि सुंदर, कोमल एवं भावाभिव्यंजक शब्दों के चयन करने में कविवर यदुवर सिद्धहस्त रहे तथा अपने हृदय का रस व रंग भरकर सहज ही राष्ट्रीय काव्य संस्कार को अलंकृत करते रहे।

द्वितीय सत्र में कविवर द्वय परमेश्वरी प्रसाद मंडल दिवाकर एवं त्रिवेणीगंज के तारा नंदन तरुण की स्मृति में आयोजित काव्यगोष्ठी का संचालन किया प्रो.मणि भूषण वर्मा ने और इस काव्य गोष्ठी में जिन कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं का मन मोह लिया तथा तालियां बटोर ली, वे हैं- सुबोध कुमार सुधाकर, डॉ.सिद्धेश्वर, राई,  सुरेंद्र भारती , उल्लास मुखर्जी , सियाराम यादव मयंक, राकेश कुमार द्विजराज, संतोष कुमार सिन्हा , डॉ.कौशल कुमार, डॉ.आलोक कुमार, विकास रंगकर्मी, डॉ.विश्वनाथ विवेका, मोहम्मद मुख्तार आलम, रघुनाथ प्रसाद यादव, श्यामल कुमार सुमित्र, डॉ.हरिनंदन यादव आदि। मौके पर बैजनाथ रजक, संजय भारती, तारा शरण, प्राण मोहन यादव, किशोर श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। अंत में सचिव डॉ.मधेपुरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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मुख्यमंत्री ने किया सहरसा विद्युत उपकेन्द्र का शिलान्यास

शनिवार, 19 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड के सिंहौल में 300 करोड़ की लागत से बनने वाले 400/220/132 केवी विद्युत उपकेंद्र का शिलान्यास किया। दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करने के बाद अपने संबोधन में सर्वप्रथम केन्द्रीय विद्युत और नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह को सहरसा में पावर ग्रिड निर्माण करवाने के लिए बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में बिजली के क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर काम किया गया है। जहां वर्ष 2005 में 24 लाख उपभोक्ता थे और मात्र सात सौ मेगावाट बिजली की खपत थी, वहीं वर्ष 2017 में 4,535 मेगावाट बिजली की खपत हुई और अभी 5,139 मेगावाट बिजली की खपत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 2012 के भाषण के दौरान मैंने कहा था कि अगर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कराउंगा तो वर्ष 2015 के चुनाव में वोट मांगने नहीं जाऊॅगा। तब से बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए। 2015 में सात निश्चय के अंतर्गत हर घर तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य को समय से पूर्व ही 25 अक्टूबर 2018 को प्राप्त कर लिया गया। अब हर इच्छुक व्यक्ति जिसने बिजली का कनेक्शन लेना चाहा, उन तक बिजली पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना पर काम कर रही है और केन्द्र सरकार के सहयोग से हमें इस लक्ष्य को प्राप्त करने में और सहुलियत हुई। समय से पूर्व लक्ष्य प्राप्ति के लिए उन्होंने राज्य सरकार के ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव के योगदान की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि 31 दिसंबर 2019 तक सभी जर्जर तारों को बदलने का नया लक्ष्य रखा गया है। हर किसान के खेतों तक सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये 31 दिसंबर 2019 तक अलग कृषि फीडर के निर्माण का भी लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगले तीन साल में बिहार में सभी बिजली कनेक्शन प्रीपेड हो जाएगा। इससे लोगों को बिल भुगतान में सुविधा होगी। बिजली बिल में गड़बड़ी संबंधी शिकायतों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक बिल आने पर लोक शिकायत निवारण कानून के तहत शिकायत करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम काम के आधार पर वोट मांगते हैं, न्याय के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। हर तबके और हर इलाके के विकास में लगे हैं। बिहार की जनता जब तक मौका देगी हमारी प्रतिबद्धता बिहार की जनता के प्रति एवं काम के प्रति रहेगी। उन्होंने कहा कि बिजली के आने से अंधेरा, भूत का डर खत्म हो गया है और ढिबरी और लालटेन की उपयोगिता समाप्त हो गयी है।

कार्यक्रम को केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, लघु जल संसाधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव, एससी-एसटी कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव, सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, प्रधान सचिव ऊर्जा प्रत्यय अमृत एवं अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक पावर ग्रिड आईएस झा ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू, विधायक डॉ. अब्दुल गफूर, विधायक रत्नेश सदा, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, नॉर्थ बिहार कॉरपोरेशन के एमडी संदीप कुमार, कोसी प्रमंडल की आयुक्त सफीना एन., मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, सहरसा की जिलाधिकारी शैलजा शर्मा, पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सहित अन्य अधिकारीगण, पावर ग्रिड इंडिया लिमिटेड के अधिकारीगण, अभियंतागण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

चलते-चलते बता दें कि सहरसा विद्युत उपकेन्द्र 300 करोड़ रूपये की लागत से 36 माह में बनकर तैयार होगा। इसके अलावा राज्य सरकार इसके संचरण के लिए रिंग नेटवर्क के निर्माण में 354 करोड़ 45 लाख रुपए खर्च करेगी। यह भी जानें कि केन्द्र सरकार द्वारा बिहार में तीन पावर ग्रिड का शिलान्यास किया गया है। बकौल मुख्यमंत्री इससे बिजली आपूर्ति में काफी सहूलियत होगी और बढ़ी हुई बिजली की आवश्कताओं को पूरा किया जा सकेगा। लोगों को पूरी गुणवत्ता के साथ बिजली मिलेगी। बात जहां तक कोसी की है, यह सुखद संयोग है कि केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री और राज्य सरकार के विद्युत मंत्री दोनों इसी कोसी क्षेत्र के हैं। इससे इस क्षेत्र में ऊर्जा संबंधी समस्याओं का समाधान और आसानी से हो सकेगा।

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मधेपुरा के वृद्धों एवं दिव्यांगों के लिए भूकम्प सुरक्षा सप्ताह !

मधेपुरा के बीपी मंडल इंडोर स्टेडियम में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला आपदा प्रबंधन के द्वारा 18 जनवरी को माॅक ड्रिल यानि State Disaster Response Force (SDRF) की टीम के नेतृत्व में मधेपुरा के डॉ.कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने खासकर जिले के प्रायः सभी प्रखंडों से आये हुए दिव्यांग बच्चों एवं उनके माता-पिता व वृद्धों से इंस्पेक्टर हंसलाल गुप्ता व एसआई राम लखन की टीम के विंध्याचल प्रसाद, सिकन्दर कुमार, प्रमोद राय, अशोक शर्मा, सुनील पाल, कुंदन भारती आदि की उपस्थिति में यही कहा –

हौसले बुलंद एवं इरादे मजबूत हो तो दुनिया में कुछ भी पाना आसान हो जाता है |

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri observing demonstrations given by State Disaster Response Force (S.D.R.F.) Team to the Divyangs and old age people during Bhukamp Shuraksha Saptaah at B.P.MANDAL Indoor Stadium Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri observing demonstrations given by State Disaster Response Force (S.D.R.F.) Team to the Divyangs and old age people during Bhukamp Shuraksha Saptaah at B.P.MANDAL Indoor Stadium Madhepura.

इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने दोनों पैरों से विकलांग विल्मा रूडोल्फ जैसी ओलंपिक में 4 गोल्ड मेडल जीतने वाली धाविका, कंचन गोवा जैसी नेत्रहीन पर्वतारोही जो दर्जनों अंतरराष्ट्रीय मेडल जीत चुकी है……. के साथ-साथ अन्य दिव्यांगों की कहानी को विस्तार पूर्वक सुना-सुनाकर खूब तालियां बटोरी और तमाम दिव्यांगों के चेहरे पर मुस्कान ला दिया | उन्होंने उपस्थित जनों से यही कहा कि भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के संदेश को आप तक पहुंचाने आया हूं- जैसा उन्होंने मुझसे कई बार कहा था-

ये आँखे दुनिया को दोबारा नहीं देख पायेगी…….

अतः तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वह दुनिया को

देकर जाना…… बच्चों को देकर जाना |

भला क्यों नहीं, सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक व वरीय उपसमाहर्ता एवं खेल पदाधिकारी मुकेश कुमार एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार के अनुरोध पर तीनों जिले (मधेपुरा-सहरसा-सुपौल) के लिए आये हुए SDRF के 40 सदस्यों वाली कंपनी की एक टुकड़ी के सदस्यों द्वारा दिव्यांगों को भूकंप आने पर घर के अंदर छिपने की जानकारियां दी गई और सबों को यह भी बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को उठाने के तरीके क्या होंगे…… जिसमें एक व्यक्ति, दो व्यक्ति या तीन व्यक्ति द्वारा उठाने के तरीकों को भी डिमोंस्ट्रेट कर दिखाया गया | अन्त में डॉ.मधेपुरी ने दिव्यांगों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील डॉ.कलाम के बाबत यही कहा-

वह गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.कलाम अंतिम सांस तक दिव्यांग बच्चों के जीवन संवारने में, वृद्धों एवं रोगियों के चेहरों पर मुस्कान लाने में लगे रहे | उन्हें सर्वाधिक प्रसन्नता तब होती जब भी हृदय रोगियों की धमनियों में “कलाम- राजू कोरोनरी स्टेंट” तथा विकलांग बच्चों को “लाइटवेट फ्लोर रिएक्शन ऑर्थोसिस कैलिपर्स” लगाने के पश्चात उनकी तकलीफों को कुछ हल्का होते देखा करते | उनकी मान्यता रही कि विज्ञान के दरवाजे ऐसे हरेक व्यक्ति के लिए खुले रहेंगे जो मानवता की भलाई के लिए कार्यरत हैं | कार्यक्रम के अंत में सचिव अरुण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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दुनिया की पहली ड्राइवरलेस बुलेट ट्रेन सर्वप्रथम चीन में शुरू

350 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बिना ड्राइवर के चलने वाली दुनिया की पहली बुलेट ट्रेन शनिवार से चीन में शुरू हो गई है जिसका नाम “फुकिंग्स बुलेट ट्रेन” रखा गया है |

यह भी बता दें कि पहले दिन यह बुलेट ट्रेन बीजिंग-शंघाई रेलवे लाइन पर 17 डिब्बों के साथ 350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली | चायना एकेडमी ऑफ़ रेलवे साइंसेज के शोधकर्ताओं के अनुसार इस बुलेट ट्रेन की लंबाई 439 मीटर है जिसमें 1283 (एक हज़ार दो सौ तेरासी) लोग एक बार में बैठकर सफर कर सकेंगे |

उक्त एकेडमी के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह बुलेट ट्रेन ऑटोमेटिक ही रवाना होगी तथा भिन्न-भिन्न स्टेशनों के बीच ऑटोमेटिक ऑपरेट भी होती रहेगी | शोधकर्ताओं ने बताया कि चीन में बना यह बुलेट ट्रेन ‘फुक्सिंग’ विगत 1 वर्ष से ट्रायल किया जाता रहा है | तभी तो चीन के एक्सपर्टों का मानना है कि सेफ्टी के ख्याल से यह बुलेट ट्रेन सर्वाधिक सही है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस बुलेट ट्रेन में एक अटेंडेंट तैनात किये गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस बुलेट ट्रेन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी तो नहीं है | ट्रेन में बेहतर सुधार हेतु एक अटेंडेंट दिया जाना आवश्यक भी माना गया है |

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अमर शहीद चुल्हाय की 99वीं जयन्ती उत्साहपूर्वक मनी

15 जनवरी 2019 (मंगलवार) को अमर शहीद चुल्हाय यादव की 99वीं जयंती समारोह पूर्वक प्रो.श्यामल किशोर यादव की अध्यक्षता में मनाई गई। समारोह के उद्घाटनकर्ता बिहार सरकार के पूर्व आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चंद्रशेखर एवं मुख्यवक्ता के रूप में बीएनएमयू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के अतिरिक्त सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र की हस्तियों के रूप में बिजेंद्र प्रसाद यादव, कृष्ण कुमार यादव, राजकिशोर यादव….. सहित शहीद चुल्हाय स्मारक समिति मनहरा-बराही-सुखासन के पूर्व मुखिया जनार्दन प्रसाद यादव, सचिव डॉ.नरेश कुमार, अध्यक्ष प्रो.जयकृष्ण यादव व अन्य क्रांतिकारी युवाओं की उपस्थिति देखी गई।

Dr.Madhepuri and others paying their tributes to Shahid Chulhai.
Dr.Madhepuri and others paying their tributes to Shahid Chulhai.

बता दें कि मनहरा चौक पर गत वर्ष स्थापित शहीद चुल्हाय की प्रतिमा पर मंगलवार को माल्यार्पण व पुष्पांजलि के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। शहीद चुल्हाय के स्मारक के निकट अवस्थित प्राथमिक विद्यालय मनहरा के परिसर में शहीद चुल्हाय के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया- उद्घाटनकर्ता पूर्व मंत्री एवं मधेपुरा विधान सभा के वर्तमान विधायक प्रो.चंद्रशेखर ने। अपने संबोधन में उन्होंने आसपास के ग्रामीणों, बच्चों एवं युवाओं से यही कहा कि शहीद चुल्हाय ने अपनी शहादत देकर हमें आजादी दिलाई परन्तु सरकारी हाथों से शहीदों के सपनों को चकनाचूर किया जा रहा है और अब भी लोग चुप हैं….. उन्हें गुस्सा क्यों नहीं आता है ?

मुख्यवक्ता के रूप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में लोहिया, जयप्रकाश, रास बिहारी लाल मंडल, शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, राम बहादुर सिंह (पंचगछिया), परमेश्वर कुंवर, कार्तिक प्रसाद सिंह, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल (सुखासन), मो.कुदरतउल्लाह सहित सभी क्रांतिकारियों की विस्तार से चर्चा करते हुए 26 जनवरी 1943 को आजादी के दीवाने चुल्हाय द्वारा मधेपुरा के ट्रेजरी बिल्डिंग पर तिरंगा फहराने से लेकर गोरों द्वारा पकड़े जाने व पीट-पीटकर मौत के घाट उतारने तक की संवेदनायुक्त चर्चा की। कोसी के साहित्य में हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ, डॉ.मधेपुरी एवं क्रांति गाथा के कवि डाॅ.जीपी शर्मा द्वारा शहीद चुल्हाय की विस्तृत चर्चा की गई है। डॉ.मधेपुरी ने क्रांतिगाथाा की इन पंक्तियों को सुना कर सबको भावुक कर दिया-

प्रखर ग्राम मनहरा-सुखासन फूलचन्द थे एक किसान।

जिनका पुत्र चुल्हाई यादव ने रखा धरती का मान।।

मधेपुरा में बीच सड़क पर सत्याग्रही युवक को मार।

गोरों ने सूरपुर पहुंचाया गई है अहिंसा सचमुच हार।।

कंठ-कंठ में आज चुल्हाई की उज्जवल गौरव गाथा।

इस शहीद ने किया कौशिकी अंचल का ऊंचा माथा।।

अंत में अपने संबोधन में डॉ.मधेपुरी ने मनहरा-सुखासन की त्रिमूर्ति बाबू कीर्ति नारायण मंडल को कोसी के मदन मोहन मालवीय, शहीद चुल्हाय को भगत सिंह एवं सुखासन के कमलेश्वरी प्रसाद मंडल को कबीर कह कर सम्मानित किया। साथ ही मधेपुरा में जो डॉ.मधेपुरी ने शहीद चुल्हाय के नाम-  शहीद चुल्हाय मार्ग, शहीद चुल्हाय उद्यान एवं शहीद पार्क बनवाया है उसकी जानकारी उपस्थित दर्शकों को दी और दो जगहों पर उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने की भी चर्चाएं की। इन घोषणाओं पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाई।

समारोह को शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव एवं बाहर से आए अतिथि बिजेंद्र प्रसाद यादव, कृष्ण कुमार यादव, राजकिशोर यादव, जनार्दन प्रसाद यादव, जगदीश प्रसाद यादव आदि ने भी संबोधित किया। नीतेश कुमार, अमित कुमार…….. व सारे युवाओं की टीम अंत तक लगे रहे। अध्यक्षीय संबोधन में बी एन मंडल वाणिज्य महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव ने समिति के समक्ष यह प्रस्ताव रखा कि आगामी वर्ष शहीद चुल्हाय की शताब्दी जन्मशती जयंती को यादगार जयंती के रूप में मनाने की तैयारी के लिए तैयार रहें। इसी के साथ धन्यवाद ज्ञापित करते हुए समापन की घोषणा कर दी गई।

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मुकेश अंबानी ग्लोबल थिंकर्स 2019 की सूची में शामिल

उद्योगपति मुकेश अंबानी के नाम एक गौरवपूर्ण उपलब्धि। उन्हें प्रतिष्ठित अमेरिकी पत्रिका ‘फॉरेन पॉलिसी’ ने थिंकर्स 2019 की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया है। इस सूची में अलीबाबा के संस्थापक जैक मा, अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस और आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टिन लेगार्ड जैसे नाम मौजूद हैं। गौरतलब है कि पत्रिका ने अपनी वेबसाइट पर 2019 की सूची के 100 नामों में से कुछ का ऐलान किया है। पूरी सूची 22 जनवरी को जारी की जाएगी।
बता दें कि सबसे धनी भारतीय मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक हैं और रिलायंस जिओ उनकी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ही अनुषंगी है। ‘फॉरेन पॉलिसी’ ने उनके लिए कहा, “44.3 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ मुकेश अंबानी 2018 में जैक मा को पीछे छोड़ते हुए एशिया के सबसे धनी व्यक्ति बन गए। तेल, गैस और खुदरा क्षेत्र में वर्चस्व से उन्होंने यह संपत्ति अर्जित की है लेकिन उम्मीद है कि दूरसंचार क्षेत्र की कंपनी जिओ के जरिए वह भारत पर सबसे अधिक प्रभाव डालेंगे।”
पत्रिका ने आगे कहा, “जिओ की शुरुआत के बाद छह महीने तक सेल्यूलर डाटा और वॉयस सेवा की पेशकश कर उन्होंने 10 करोड़ से अधिक ग्राहक जोड़े और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में स्मार्टफोन इंटरनेट के जरिए क्रांति कर दी।” पत्रिका में कहा गया है कि अंबानी की योजना अगले चरण में अपने डिजिटल स्पेस का इस्तेमाल करते हुए सामग्री और जीवन-शैली से जुड़ी चीजें बेचना है और अंतत: गूगल और फेसबुक को टक्कर देनी है।
चलते-चलते बता दें कि 2019 में ‘फॉरेन पॉलिसी’ पत्रिका के ग्लोबल थिंकर्स की सूची को 10 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए उसने सूची को 10 अलग-अलग श्रेणियों में बांटने का निश्चय किया है। मुकेश अंबानी को प्रौद्योगिकी से जुड़ी 10 शीर्ष शख्सियतों में स्थान दिया गया है।

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तो इस बात पर रामविलास का घेराव करेंगे तेजप्रताप ?

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नाम लिये बगैर उन्हें कथित रूप से अंगूठाछाप करार देने संबंधी केन्द्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के बयान पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व लालू-राबड़ी के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने उन्हें आड़े हाथों लिया और इस मामले में उनका घेराव करने की बात कही।
गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी सरकार के सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने के निर्णय को आरजेडी ने गलत करार दिया था, जिसके बाद पासवान ने शुक्रवार को राबड़ी देवी का नाम लिए बिना कथित रूप से कहा था कि बिहार में कोई भी अनपढ़ (अंगूठाछाप) मुख्यमंत्री बन जाता है। इस पर तेजप्रताप ने कहा, “रामविलासजी को इस तरह का अपशब्द एक महिला को लेकर बोलना शोभा नहीं देता।”
तेजप्रताप ने नाराजगी जाहिर करते हुए ट्वीट के जरिए भी रामविलास पर प्रहार किया और कहा, ‘‘नारी जन्म देती है, ममता देती है और माफ भी कर देती है लेकिन इतिहास साक्षी है कि नारी का अपमान करने वाले बड़े-बड़े रावण और दुर्योधन भी नहीं बचे तो इन मौकापरस्त नेताओं की क्या औकात है।’’
बहरहाल, एक पुत्र के रूप में तेजप्रताप की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन क्या राबड़ी देवी अनपढ़ नहीं थीं? और क्या उनका मुख्यमंत्री बनना लोकतंत्र के साथ मजाक नहीं था? उसी लोकतंत्र के साथ जिसकी आरजोडी वाले इन दिनों दुहाई दे रहे हैं?

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चूड़ा-दही भोज के बहाने मीठी और मजबूत राजनीति

बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा-दही भोज के बहाने एनडीए ने अपनी एकजुटता का परिचय दिया। गौरतलब है कि इस दिन एनडीए के तीनों घटक दलों के द्वारा चूड़ा-दही भोज का आयोजन होता है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह पिछले 21 वर्षों से मकर संक्रांति के दिन चूड़ा-दही भोज देते आ रहे हैं और धीरे-धीरे यह पूरी पार्टी का आयोजन हो गया है। अब तो आलम यह है कि इस दिन भोज में दस हजार से भी ज्यादा लोग जुटते हैं। वहीं, लोजपा की ओर से उसके प्रदेश कार्यालय में चूड़ा-दही भोज का आयोजन होता है तो भाजपा की ओर से विधानपार्षद रजनीश कुमार भोज देते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन तीनों आयोजनों में शामिल होते हैं और स्वाभाविक तौर पर शुरुआत जदयू के भोज से करते हैं।

सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोपहर लगभग एक बजे बशिष्ठ नारायण सिंह के हार्डिंग रोड स्थित आवास पहुँचे जहां बिहार के हर कोने से आए हजारों कार्यकर्ता और नेता उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। उनके आगमन पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने सर्वप्रथम बुके से उनका स्वागत किया। नीतीश कुमार ने इस मौके पर केवल तिलकुट का स्वाद लिया। जदयू के इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केन्द्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह, विधानसभा अध्य़क्ष विजय चौधरी, विधान परिषद के उपाध्यक्ष हारून रशीद, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद नित्यानंद राय, सांसद रामनाथ ठाकुर, कहकशां परवीन, कौशलेन्द्र कुमार, चिराग पासवान, राष्ट्रीय महासचिव व विधायक श्याम रजक, विधानपार्षद व पूर्व मंत्री अशोक चौधरी, विधानपार्षद संजय गांधी, नीरज कुमार, रणवीर नंदन, विधायक दुलाल चंद्र गोस्वामी, मुख्य प्रवक्ता संजय कुमार सिंह, प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य व अनिल कुमार, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

लोजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित दही चूड़ा के भोज में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष एवं एनडीए के अन्य नेताओं के साथ ही राज्यपाल लालजी टंडन भी शामिल हुए। लोजपा प्रमुख व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने वहां मुख्यमंत्री को गले लगाकर मकर संक्रांति की बधाई दी। लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष व मंत्री पशुपति कुमार पारस एवं सांसद व लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान समेत पार्टी के तमाम नेता मौजूद रहे। उधर भाजपा के विधानपार्षद रजनीश कुमार के जवाहरलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर भी चूड़ा-दही भोज का आयोजन हुआ जिसमें मुख्यमंत्री समेत कई नेता सम्मिलित हुए। मेजबान रजनीश कुमार ने बुके भेंटकर मुख्यमंत्री का अभिनन्दन किया। नीतीश कुमार तीनों आयोजनों में एक समान गर्मजोशी से शामिल हुए और बिहार व देश के सभी लोगों के लिए अपनी मंगलकामना व्यक्त की।

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