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मधेपुरा के सुभाष चौक पर नेताजी की 125वीं जयंती मनी

नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत की आजादी के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को चकमा देकर जर्मनी पहुंचे और आजाद हिंद फौज का गठन किया। अंग्रेजो के खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने “जय हिंद” कोो राष्ट्रीय नारा बना दिया। नेताजी का व्यक्तित्व भारतीय युवजनों के जीवन को अर्थपूर्ण बनाने के लिए आज भी प्रेरित करता है। उक्त बातें समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने नेताजी की 125वीं जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि करने के बाद कहीं।

Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing youths along with senior RJD leader Bijendra Prasad Yadav, Shudhanshu Shekhar, AK Sinha, Damodar Pransukhka, Umesh Kumar Om and others on the 125th Jayanti Samaroh of Neta Jee Subhash Chandra Bose at Subhash Chowk, Madhepura.
Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing youths along with senior RJD leader Bijendra Prasad Yadav, Shudhanshu Shekhar, AK Sinha, Damodar Pransukhka, Umesh Kumar Om and others on the 125th Jayanti Samaroh of Neta Jee Subhash Chandra Bose at Subhash Chowk, Madhepura.

 

मौके पर अपने संबोधन में डॉ.मधेपुरी ने प्रखर पत्रकार रह चुके देवाशीष बोष एवं पटना हाई कोर्ट के जस्टिस रह चुके सुरेश चंद्र मुखर्जी के इस प्रतिमा निर्माण में योगदान की चर्चा करते हुए कहा- नेताजी की 125वीं जयंती को इस बार भारत सरकार ने “पराक्रम दिवस” के तौर पर मनाने हेतु 85 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

समिति के लोगों द्वारा यह जानकारी दी गई कि 23 जनवरी को कोलकाता में नेताजी की जयंती ‘पराक्रम दिवस’ कार्यक्रम में भाग लेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहीं पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान उड़ीसा के कटक में होने वाले कार्यक्रम में भाग लेंगे, जहां नेता जी का जन्म हुआ था और गुजरात के सूरत जिले के हरिपुरा गांव में भी भव्य जयंती मनाई जाएगी, जहाँ 1938 में नेताजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे।

मौके पर राजद के वरिष्ठ नेता व समाजसेवी बिजेंद्र प्रसाद यादव, उमेश कुमार ओम, एडवोकेट सुधांशु शेखर, अधिवक्ता अशोक कुमार सिन्हा, व्यापारी दामोदर प्राणसुखका, अक्षय दीप, आदित्य लल्लन यादव आदि ने भी विचार व्यक्त किए।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित जनों से यही कहा कि देश के प्रथम अस्थाई सरकार के राष्ट्राध्यक्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती समस्त भारत में 23 जनवरी को दिन भर समारोह पूर्वक मनाई जाएगी। ज्ञातव्य है कि उस अस्थाई सरकार को जर्मनी, जापान, चीन, कोरिया, इटली आदि कई देशों ने मान्यता भी दे दी थी। अपना बैंक और अपनी करेंसी भी नेता जी ने बना ली थी।

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जदयू को गति देने में जुटे आरसीपी और नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री व जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने साइकिल व पोशाक योजना लाकर लड़कियों को इस कदर जागरूक किया कि बिहार की बेटियां फाइटर विमान भी उड़ाने लगी और अब नए राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर जदयू मुख्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में में यह कहते हुए 151 महिलाओं को जदयू की सदस्यता ग्रहण कराई कि वे बिहार के नवनिर्माण में बड़ी भूमिका निभाएंगी।

Shri RCP Singh & other JDU Leaders in Swabhiman Diwas Samaroh organised by Shri Sanjay Singh.
Shri RCP Singh & other JDU Leaders in Swabhiman Diwas Samaroh organised by Shri Sanjay Singh.

जदयू समाज सुधार सेनानी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप किसी जाति नहीं बल्कि समाज के प्रणेता और उसके स्वाभिमान के रक्षक व नेतृत्वकर्ता थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बिहार का मान बढ़ाया और महाराणा प्रताप की तरह कभी बिहारियों के स्वाभिमान पर ठेस नहीं लगने दिया। नीतीश कुमार की नीति यही रही कि समावेशी विकास के जरिये बिहार की छवि बदलती जाय। एक ओर आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय तो दूसरी ओर जल-जीवन-हरियाली जैसे अभियान से सबके चेहरे पर खुशियां छाती जाय। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष जीतेन्द्र नीरज ने की।
महाराणा प्रताप पुण्यतिथि पर बिहार जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में जदयू के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने कहा कि जिसके पास स्वाभिमान नहीं रहेगा, वह कुछ नहीं कर सकेगा… बिहारी जहां भी रहते हैं, स्वाभिमान के साथ रहते हैं… बिहारी भैया कहलाते हैं। स्वाभिमान दिवस के रूप में मनाए गए इस समारोह में जदयू के कई दिग्गज जुटे, जिनमें बशिष्ठ नारायण सिंह, अशोक चौधरी, संजय झा, श्रवण कुमार, नरेन्द्र नारायण यादव, कृष्णनंदन वर्मा, नीरज कुमार, लेसी सिंह, जयकुमार सिंह आदि प्रमुख हैं। इस कार्यक्रम का संचालन राणा रणधीर सिंह चौहान ने किया।

 

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राष्ट्रपति बाइडेन के साथ भारतीय मूल की कमला देवी उपराष्ट्रपति बनी, गांव थुलेंद्रपुरम में मिठाइयां बंटी

अमेरिका के नवनिर्वाचित 46वें राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ भारतीय मूल की कमला देवी हैरिस ने पहली महिला उपराष्ट्रपति के रूप में कमान संभाली। कमला देवी पहली भारतीय महिला है जो अमेरिका जैसे सबसे ताकतवर देश के दूसरे सबसे ताकतवर पद पर बुधवार को आसीन हुई है।

बता दें कि कमला देवी हैरिस के मूल गांव का नाम है- थुलेंद्रपुरम। तमिलनाडु का यह गांव कमला देवी के अमेरिकी उपराष्ट्रपति बनने पर जमकर जश्न मनाया है। दिनभर लोग नाचते रहे, पटाखे छोड़ते रहे और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाते रहे। ऐसा इसलिए कि कमला हैरिस अमेरिका की सबसे ताकतवर उपराष्ट्रपति होंगी। अब महाशक्ति के हर अहम फैसले पर आखिरी मुहर कमला की होगी।

कमला हैरिस के ऑफिस द्वारा मीडिया को जानकारी दी गई कि अब तक राष्ट्रपति बाइडेन द्वारा विशेषज्ञों एवं कैबिनेट सदस्यों को चुनने तक जितने भी फैसले लिए गए हैं, उन सबमें कमला कि अहम भूमिका रही है।

चलते-चलते यह भी बता दे कि कमला हैरिस की छाप बाइडेन प्रशासन में साफ झलकने लगी है। तभी तो बाइडेन ने अबतक 25 से अधिक भारतीय-अमेरिकियों को हाई प्रोफाइल भूमिका दी है। अमेरिकी आबादी में 1% की हिस्सेदारी रखने वाले भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए यह ऐतिहासिक पल है, क्योंकि बाइडेन ने प्रेसिडेंट ऑफिस को स्पष्ट आदेश दे दिया है कि प्रमुख निर्णय में कमला देवी हैरिस “अंतिम स्वर” की भूमिका में हो। बाइडेन के द्धारा कमला हैरिस पर इस कदर अटूट विश्वास जताने को लेकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने भी जमकर राष्ट्रपति बाइडेन की सराहना की है।

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ब्रिसबेन में ऑस्ट्रेलिया पर टीम इंडिया की जीत, भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को ताजिंदगी याद रहेगी

भारतीय क्रिकेट टीम ने कंगारुओं के 32 साल का गुरूर चकनाचूर कर तिरंगा फहरा दिया। भारत ने पहली बार गाबा में 3 विकेट से जीत हासिल की और साथ ही ऑस्ट्रेलिया में लगातार दूसरी बार 2-1 से टेस्ट सीरीज जीतकर इतिहास रच दिया। यह भारत की सबसे बड़ी जीत में से एक है।

भला क्यों न यादगार रहेगी यह जीत…..!! जिस जीत में  टीम का विराट कोहली जैसा कप्तान पितृत्व अवकाश पर हो। टीम के सात खिलाड़ी चोटिल हो। बावजूद इसके ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों व दर्शकों की नस्ली टिप्पणियां झेलकर  कप्तान ए रहाणे की टीम ने कंगारुओं का किला ढा दिया…..। जोश से लबरेज भारतीय खिलाड़ियों ने कंगारू टीम को बल्लेबाजी-गेंदबाजी सहित हर क्षेत्र में मात दे दी।

यह भी जानिए कि भारत को जीत के लिए 328 रनों का लक्ष्य मिला था जिसे टीम इंडिया ने 3 विकेट रहते ही 329 बनाकर विजय हासिल कर ली। इस खेल में गिल और पंत हीरो रहे। गिल भले ही शतक से चूक गए, परंतु उन्होंने 91 रन की शानदार पारी खेली….. जबकि अपनी आक्रामकता और जनता की बेहतरीन मिसाल पेश करते हुए नाबाद 89 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया की धरती पर जीत का डंका बजा दिया। टीम इंडिया की जीत पर पीएम नमो, सीएम नीतीश और समाजसेवी डॉ.मधेपुरी सहित सभी भारतीय खेल प्रेमियों ने शुभकामनाएं दी।

 

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ब्रह्मा बाबा की 53वीं पुण्यतिथि पर उनके विचारों को आत्मसात करने का लें संकल्प

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय मधेपुरा के ‘सुख शांति भवन’ में प्रजापिता लेखराज कृपलानी की 53वीं पुण्यतिथि मनाई गई। यह ‘सुख शांति भवन’ हाल ही में इंजीनियर नरेश कुमार (साहुगढ़) द्वारा दान स्वरूप समर्पित व उद्घाटित किया गया है। 18 जनवरी सोमवार को बाबा की पुण्य तिथि को “विश्व शांति दिवस” के रूप में उनके समस्त श्रद्धालुओं द्वारा मनाई गई। सर्वप्रथम उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि किया गया, फिर उनके गुणों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया गया।

बता दें कि कार्यक्रम का उद्घाटन ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी रंजू दीदी, मुख्य अतिथि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, विशिष्ट अतिथि समाजसेवी राजद नेत्री रागिनी रानी सहित पूर्व प्रमुख विनय वर्धन, विजय वर्धन, प्रो.सतीश सिंह व ओमप्रकाश आदि द्वारा संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया गया।

उद्घाटन संबोधन में रंजू दीदी ने कहा कि ब्रह्मा बाबा को त्याग व तपस्या की प्रतिमूर्ति मानें। उनके द्वारा बताए गए अच्छे कार्यों को करते हुए संमार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाएं और इस विश्व शांति दिवस पर अपनी इंद्रियों पर संयम रखते हुए मनोबल को ऊंचाई प्रदान करें, वहीं मुख्य अतिथि डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि 84 लाख योनियों में सिर्फ एक मनुष्य योनि है जो केवल कल के लिए ही नहीं बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए धन संचय करने हेतु क्या-क्या नहीं करता है, जिसमें अपवाद स्वरूप- बुद्ध, नानक, कबीर, ब्रह्मा बाबा, ब्रम्हाकुमारियाँ, भूपेन्द्र-भीम-कर्पूरी….. और डाॅ.एपीजे अब्दुल कलाम आदि… के राह के राही बनें और सुखी रहें।

जहां विशिष्ट अतिथि नेत्री रागिनी उर्फ डोली दीदी ने विस्तार से बताया कि आध्यात्मिकता ही सद्गुणों का स्रोत है और युवाओं को आध्यात्मिकता द्वारा ही नई दिशाएं मिलेगा, वहीं पूर्व प्रमुख खोखा बाबू ने कहा कि अच्छे व पुण्य कर्मों को करते हुए सभी से दुआएं प्राप्त करते रहें…. वही आपके रास्ते का संबल बनेगा। मौके पर सर्वप्रथम बाबा के अनमोल रतन ओम प्रकाश जी ने कहा कि ब्रह्मा बाबा जीवन पर्यंत विश्व शांति के कार्य को आगे बढ़ाते हुए आज ही के दिन ब्रह्मलीन हुए थे। मौके पर आशा देवी, जानकी, दुर्गा, मौसम बहन, वीना, विभा व रेणु बहनें आदि का अमूल्य सहयोग सराहनीय रहा।

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कोरोना मुक्त होकर पूरा देश जीवन के सामान्य होने की प्रतीक्षा कर रहा है- डॉ.हर्षवर्धन

बकौल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन कोविड टीकाकरण अभियान के तहत फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाने का काम फरवरी तक पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। आधार कार्ड की मदद से टीके की पहली खुराक लेने वालों की पहचान की जाएगी ताकि ऐसे लोगों को दूसरी खुराक एक महीने के अंदर ससमय दिया जा सके।

बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जून-जुलाई तक 30 करोड़ लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को और दूसरे चरण में सुरक्षाकर्मियों जैसे अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगेगा। सभी राज्यों के ऐसे वर्कर्स के आंकड़ों को 26 जनवरी तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने को कहा गया है ताकि ससमय इसका टीकाकरण हो सके।

चलते-चलते यह भी जानिए कि टीकाकरण के मामले में पांच राज्यों में पहले दिन के आंकड़े इस प्रकार आए हैं- उत्तर प्रदेश में जहां 21 हजार से अधिक लोगों को टीके दिए गए वहीं आंध्र प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में 18 हजार से अधिक और उड़ीसा में 13 हजार से अधिक लोगों को बिना किसी विशेष परेशानी के टीके दिए गए। इस पर महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा कि भारत कोविड मुक्त होगा और वह क्षण भारतवासियों के लिए  गर्व का क्षण होगा।

 

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कोरोना से होगी जीत रखे सीएम नीतीश और पीएम नमो पर भरोसा

जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में बिहार में पहले दिन 301 केंद्रों पर 18 हजार 122 लोगों को कोरोना वैक्सीन के डोज दिए गए वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना से मरने वालों को याद कर भावुक हो गए और देश भर में 191181 स्वास्थ्य कर्मियों को टीके लगे।

पटना आईजीआईएमएस में मुख्यमंत्री नीतीश की मौजूदगी में पहला टीका सफाईकर्मी राम बाबू को दिया गया और दूसरे नंबर पर एंबुलेंस चालक अमित कुमार को कोरोना टीके का डोज पड़ा। साथ ही टीकाकरण आरंभ होते ही कहीं तालियां बजी तो कहीं मुस्कान खिली…. यही जानिए कि आज के दिन उत्तर से दक्षिण तक हर्ष….. और यही माननीय की पूरब से पश्चिम तक लोग टीके लेते रहे सहर्ष। मंत्रालय के अनुसार 16755 लोग टीकाकरण अभियान में लगे थे।

बता दें कि टीका लगवाने वाले किसी भी व्यक्ति को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं हुई जबकि 12 राज्यों में कोवैक्सीन का इस्तेमाल किया गया। कहीं भी किसी में गंभीर दुष्परिणाम देखने को नहीं मिले।

 

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हाड़ कंपाती ठंड में गरीबों के बीच दिनभर कंबलों का वितरण करते रहे डॉ.मधेपुरी

मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार अगले 24 घंटों तक प्रदेश में कड़ाके की ठंड रहेगी। पश्चिम से आ रही बर्फीली हवा के चलते यहां सीवियर कोल्ड डे एवं घने कोहरे के बीच न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा चुका है। जनजीवन प्रभावित होने लगा है।

मौके पर संवेदनशील-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा आसपास के अभावग्रस्त व निर्धन नर-नारियों के बीच दिन भर कंबलों का वितरण किया जाता रहा। सकारात्मक सामाजिक कार्यों में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाने वाले डॉ. मधेपुरी ने ठंड से ठिठुरते हुए जरूरतमंदों के बीच सौ कंबल बांटने के बावजूद लौटने वाले अत्यंत गरीबों का नाम नोट कर अगले दिन आने को कहा। वहीं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रेणु को मकर संक्रांति के अवसर पर चंद सर्वाधिक लाचारों को लाय-मुड़ी भी देते हुए देखा गया। इस दंपत्ति के लिए पीड़ित मानवता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। खासकर इस दंपत्ति की नजर में गरीबों की सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं है। वे दोनों इसे माता-पिता की सेवा ही मानते हैं।

जानिए कि डॉ. मधेपुरी ने माता पिता के निधन पर अंधविश्वास एवं कर्मकांड का पूर्णत: परित्याग कर दिया। बदले में अनेकानेक जनकल्याणकारी कार्यों का निष्पादन विगत 25 वर्षों से लगातार करते आ रहे हैं। वे पढ़ने वालों को पढ़ने में, खेलने वालों को खेलने में तथा संगीत सीखने वालों को भी आर्थिक मदद के अतिरिक्त अन्य प्रकार से मदद करते रहते हैं। यूं तो इस जिले को किसी न किसी रूप में गौरवान्वित करने वालों को डॉ.मधेपुरी सम्मानित करते आ रहे हैं, परंतु विगत 25 वर्षों से मकर संक्रांति के आसपास कड़ाके की ठंड में निर्धन व लाचारों के बीच लगातार कंबल बांटते चले आ रहे हैं। पूछने पर उन्होंने यही कहा कि ऐसे कार्य करने से अंतर्मन को सुकून मिलता है और लोगों के चेहरों पर मुस्कान देख कर खुशी मिलती है।

 

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शहीद चुल्हाय की 101वीं जयंती मनाई डॉ.मधेपुरी ने

भारत की आजादी के लिए न जाने कितने किशोर अपने प्राण न्योछावर कर दिए, फिर भी उनका जिक्र युवाओं के बीच में खुदीराम बोस की तरह जमकर नहीं हो पाता है। वैसे ही नामों में एक नाम है कोसी अंचल के शहीद चुल्हाय यादव का, जो 15 जनवरी 1920 को जन्म लिए और 30 जनवरी 1943 को महज 23 वर्ष की उम्र में आजादी की खातिर शहीद हो गए। जिनके लिए क्रांति गाथा के कवि डाॅ.जीपी शर्मा की पंक्तियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्कूली बच्चों के बीच समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने यूं सुनाया-

प्रखर ग्राम मनहरा सुखासन फूलचंद थे एक किसान।

उनका पुत्र चुल्हाई यादव ने रखा धरती का मान।।

मधेपुरा में बीच सड़क पर सत्याग्रही युवक को मार।

गौरों ने सुरपुर पहुंचाया गई अहिंसा सचमुच हार।।

कंठ-कंठ में आज चुल्हाई की उज्जवल गौरव गाथा।

इस शहीद ने किया कौशिकी अंचल का ऊंचा माथा।।

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि अपने अतीत को जाने बिना कोई भी आदमी ना तो अपने भविष्य को गढ़ सकता है और न वर्तमान में एक कदम आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि नेपाल के जंगल में जेपी-लोहिया ने तय किया कि 26 जनवरी को सभी क्रांतिकारी अपने-अपने मुख्यालयों में तिरंगा फहराएंगे। इसी क्रम में शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल, राम बहादुर सिंह….. सरीखे क्रांतिकारियों की बैठक 25 जनवरी, 1943 की रात में आयोजित की गई।

बैठक में जब चुल्हाय कहते हैं कि वे सबसे छोटे हैं, इसलिए उन्हें ही भारत माता की जयघोष के साथ तिरंगा फहराने का अवसर दिया जाए…. और वैसा ही हुआ। ब्रिटिश सिपाही उन्हें तिरंगा फहराते पकड़ लिया और घसीटते हुए ले जाकर वृक्ष से लटका कर इस कदर पीटा कि 30 जनवरी को 23 वर्षीय चुल्हाय शहीद हो गये। उनको सम्मानित करने के लिए समाजसेवी डॉ.मधेपुरी के प्रयास से 30 जनवरी, 2015 में डाक बंगला सड़क का नाम “शहीद चुल्हाय मार्ग” किया गया।

 

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एक गाय के गोबर से बनी पेंट से किसान को होगी 30000 तक की आमदनी

केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए गाय के गोबर से दीवार रंगने वाला पेंट बनाने की योजना सफल हुई। यह पेंट 1 दिन बाद बाजार में आ जाएगा। फिलहाल इसकी पैकिंग 2 लीटर से 30 लीटर तक तैयार की गई है। इस पेंट की बिक्री खादी और ग्रामोद्योग आयोग की मदद से की जाएगी। इसका नाम खादी प्राकृतिक पेंट है। आयोग का दावा है कि इस प्राकृतिक उत्पाद से गोबर की गंध बिल्कुल नहीं रहेगी।

बता दें कि इस गोबर पेंट को जयपुर की इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है। इस गोबर पेंट को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा भी प्रमाणित किया जा चुका है। यह गोबर पेंट नॉनटॉक्सिक है। आयोग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि गाय के गोबर से बनाया पेंट एंटी फंगल, एंटी बैक्टीरियल एवं इको फ्रेंडली है। दीवाल पर पेंट करने के बाद यह मात्र 4 घंटे में सूख जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इसमें जरूरत के हिसाब से रंग भी मिलाया जा सकता है और मनभावन रंग तैयार किया जा सकता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि सरकारी एजेंसियों द्वारा लगाए गए अनुमान के अनुसार किसानों एवं गौशालाओं के प्रति गाय के गोबर से 25 हजार  से ₹30 हजार तक की आमदनी अवश्य होगी।  केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसको बाजार में बिकने हेतु लांच किया है।

 

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