30 मार्च को बिहार में कोई नया कोरोना पॉजिटिव केस नहीं

कोरोना संकट के बीच बिहार के लिए सोमवार, 30 मार्च 2020 का दिन बहुत बड़ी राहत लेकर आया। जी हाँ, इस दिन बिहार में कोई नया कोरोना पॉजिटिव केस सामने नहीं आया। बता दें कि सोमवार देर शाम तक संभावित कोरोना मरीजों के टेस्ट सैंपल की कुल संख्या 1056 हैं। इनमें निगेटिव 1041 और पॉजिटिव 15 हैं। सोमवार को एक भी पॉजिटिव केस नहीं मिलना घने अंधेरे में उम्मीद की बहुत बड़ी किरण है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार जिस मजबूती से कोरोना का सामना कर रहा है उसे देख लगता है कि यह महामारी बिहार में अपने पांव नहीं पसार पाएगी।
ध्यातव्य है कि सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 1, अणे मार्ग, पटना में उच्चस्तरीय बैठक की और निर्देश दिया कि बिहार के जो लोग बाहर फंसे हुए हैं उनसे फीडबैक लेकर उनकी परेशानियों को अविलंब दूर करें, जो लोग बाहर से बिहार आ गए हैं उनकी स्क्रीनिंग, भोजन, आवासन की व्यवस्था के साथ-साथ उन्हें समुचित चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराएं तथा कोरोना के संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले संदिग्ध लोगों की गहन ट्रैकिंग करें एवं टेस्टिंग में तेजी लाएं।
पाठकों को बता दें कि अब तक मिली जानकारी के मुताबिक बिहार के बाहर से आए 13000 से अधिक लोगों को उनके गांव के विद्यालय तक पहुँचाने की कार्रवाई की गई है, जहां उन्हें 14 दिन क्वारंटाइन में रखा जाएगा। सीमा आपदा राहत केन्द्रों के अलावा राज्य के शहरी इलाकों में निर्धनों, निराश्रितों के लिए कुल 120 आपदा राहत केन्द्र खोले गए हैं। उधर नई दिल्ली स्थित बिहार भवन के नियंत्रण कक्ष से 207974 व्यक्तियों की समस्याओं पर कार्रवाई की गई है और मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरू, सिक्किम आदि स्थानों पर 5015 अप्रवासी बिहारियों को राहत पहुँचाई गई है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर राज्यवासियों से अपील की है कि कोरोना संक्रमण की गंभीरता को देखते हए प्रत्येक व्यक्ति सचेत रहें। जो जहाँ हैं, सोशल डिस्टेंसिंग अपनाएं। हम सब मिलकर इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम होंगे।

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लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए ‘आपदा सीमा राहत शिविर’

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार, 28 मार्च 2020 की शाम 1, अणे मार्ग, पटना में समीक्षा बैठक कर सीमावर्ती क्षेत्रों में लॉकडाउन में फंसे लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से ‘आपदा सीमा राहत शिविर’ की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इस शिविर में दूसरे राज्यों से आने वाले बिहार के लोगों अथवा अन्य राज्यों के फंसे लोगों को भोजन, आवासन एवं चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस व्यवस्था की समीक्षा एवं अनुश्रवण मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे हैं।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कोरोना संक्रमण के कारण लोगों के लॉकडाउन में फंसे होने की स्थिति को आपदा मान रही है और ऐसे लोगों की मदद उसी तरह की जाएगी जैसे अन्य आपदा पीड़ितों के लिए की जाती है।
मुख्यमंत्री के इस निर्देश के आलोक में मुख्य सचिव दीपक कुमार ने राज्य के सभी सीमावर्ती जिलों – पश्चिमी चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, औरंगाबाद, भोजपुर, कैमूर, बक्सर, छपरा, सीवान एवं गोपालगंज के जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को एक बार फिर कोरोना संक्रमण, एईएस, बर्ड फ्लू एवं स्वाइन फ्लू को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने आज एक बड़ी पहल करते हुए मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत कोरोना उन्मूलन कोष में 7 करोड़ रुपए भी दिए।

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ब्रह्माकुमारी दादी जानकी का माउंट आबू में 104 साल में परिनिर्वाण

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय संचालिका रह चुकी 104 वर्षीय राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी दादी डॉ.जानकी का जन्म अविभाज्य भारत के सिंध प्रांत में 1 जनवरी 1916 को हुआ था। उन्हें बचपन में ही अपने माता-पिता से आध्यात्मिक संस्कार विरासत के रूप में मिला था।

बता दें कि ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय की संचालिका दादी जानकी ने 140 देशों में ब्रम्हाकुमारी की स्थापना पर विश्व की लगभग 20 लाख नर-नारियों को अपने संस्थानों से जोड़कर… सुगंधयुक्त प्रेम लुटाते हुए दिनांक 27 मार्च 2020 को माउंट आबू की एक निजी चिकित्सालय (ग्लोबल हॉस्पिटल) में अंतिम सांस ली।

जानिए कि मात्र चार क्लास तक पढ़ी एवं 14 साल की गुप्त तपस्या करने वाली दादी जानकी निरंतर आध्यात्मिक प्रेम प्रवाहित करती हुई आज अपनी दैहिक लीला समाप्त कर ली। वह हमें छोड़कर दूर भले हो गई लेकिन योग शक्ति की अद्भुत मिसाल बनकर दादी जानकी लाखों नर-नारियों के जीवन में उजाला भरकर आसमान का सर्वाधिक चमकता सितारा बन गई। तभी तो एक विश्वव्यापी संस्थान ने उनके नाम की है- “दुनिया की सबसे स्थिर मन की महिला” का विश्व कीर्तिमान।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, popularly known as Bhishma Pitamah of Madhepura along with Rajyogini Ranju Didi and others inaugurating the function at Brahmakumari Ishwariya Vishwavidyalaya at Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, popularly known as Bhishma Pitamah of Madhepura along with Rajyogini Ranju Didi and others inaugurating the 100th Birthday Celebration of Dadi Janki at Brahmakumari Ishwariya Vishwavidyalaya at Madhepura. (File Photo)

यह भी बता दें कि दादी जानकी के निधन की खबर ने कोरोना लाॅकडाउन के बावजूद देश और दुनिया में शोक की लहर पैदा कर दी। ध्यातव्य है कि दादी जानकी ने 91 वर्ष की उम्र में ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुखिया का पदभार संभाली और पूरी दुनिया को प्रेम, योग एवं ध्यान का संदेश दिया। वह 46 हजार ब्रम्हाकुमारियों की अलौकिक माँ होने के साथ-साथ 12 लाख साधकों की प्रेरणापुंज भी बनी रही… भला क्यों नहीं, उम्र के इस पड़ाव पर भी दादी माँ 12 घंटे जन की सेवा में सक्रिय रहती थी। 60 वर्ष की उम्र में वह लंदन गई और 37 वर्षों तक विदेशी जमीन पर आध्यात्मिकता के बीज बोती रही….. 140 देशों के लोग को मेडिटेशन सिखाती रही। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत स्वच्छता मिशन का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया था। आज उनके नहीं रहने पर देश-विदेश के सारे ब्रम्हाकुमारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। दादी जानकी के निधन पर भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष सहित सारे उच्चाधिकारियों व श्रद्धालुओं ने ट्वीट के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।

चलते-चलते यह भी कि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मधेपुरा शाखा की संचालिका राजयोगिनी रंजू दीदी बराबर दादी जानकी के शताब्दी जन्मोत्सव पर शिक्षाविद् व मधेपुरा के सुप्रसिद्ध समाजसेवी प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करती रही और डॉ.मधेपुरी ने विस्तार से दादी जानकी द्वारा किए गए जन की सेवा की विस्तृत व्याख्यान से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करते रहे। कोरोना के कारण दादी जानकी की पुण्यतिथि पर विश्व के सभी श्रद्धालुओं ने उन्हें सादगी के साथ अपने-अपने घरों में श्रद्धांजलि दी।

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कोरोना: विधायक और विधानपार्षद अपने फंड से देंगे 50 लाख रुपए

शुक्रवार, 27 मार्च 2020 को 1, अणे मार्ग, पटना स्थित ‘नेक संवाद’ में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने के लिए किए जा रहे उपायों के संबंध में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विधायक एवं विधानपार्षद अपने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना निधि से न्यूनतम 50 लाख रुपए की राशि कोरोना वायरस से निबटने के लिए सहयोग के रूप में स्वास्थ्य विभाग के कोरोना उन्मूलन कोष में अंशदान करेंगे।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत विधायकों एवं विधानपार्षदों को अपने क्षेत्र में एक वर्ष में तीन करोड़ रुपए खर्च करने का अधिकार है जो कि योजना एवं विकास विभाग के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। विधायक एवं विधानपार्षद इन्हीं तीन करोड़ रुपयों में से न्यूनतम 50 लाख रुपया कोरोना उन्मूलन कोष में देंगे। हालांकि अपनी इच्छा के अनुसार इससे अधिक राशि के अंशदान की भी अनुशंसा वे कर सकते हैं।
बता दें कि स्वास्थ्य विभाग को कोरोना संक्रमण से निबटने के लिए राज्य सरकार की तरफ से नोडल विभाग बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग अलग से कोरोना स्पेसिफिक अकाउंट खुलवाएगा जिसमें जल्द से जल्द उक्त राशि को हस्तांतरित किया जाएगा। इस राशि से विभाग कोरोना संक्रमण से निबटने के लिए जरूरी इक्यूपमेंट, दवा, मास्क, पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट आदि की व्यवस्था करेगा। राज्य सरकार ने कोरोना वायरस से निबटने के लिए लॉकडाउन से पूर्व 13 मार्च को ही सौ वेंटीलेटर खरीदने की इजाजत दी थी। अगर इससे ज्यादा वेंटीलेटर मिल पाता है तो स्वास्थ्य विभाग और वेंटीलेटर की खरीद भी कर सकता है।
बैठक के दौरान लॉकडाउन के कारण जो लोग बिहार के बाहर फंसे हुए हैं उनको दी जाने वाली राहतों के संबंध में भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री को सभी जिलों में बनने वाले आपदा राहत केन्द्रों के संबंध में भी जानकारी दी गई। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि सभी जिलों में आपदा राहत केन्द्र फंक्शनल हो गया है। जल्द ही सभी अनुमंडल में भी आपदा राहत केन्द्र फंक्शनल हो जाएगा।
बैठक में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारुण रशीद, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, जल संसाधन मंत्री संजय झा, योजना एवं विकास मंत्री महेश्वर हजारी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय एवं अन्य वरिष्ठ पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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कोरोना से जंग, 14 अप्रैल तक कोई भी शिक्षक रोड पर ना निकले- एमएलसी डॉ.संजीव

कोरोना महामारी से निपटने हेतु सभी कोटि के विद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षकों व कर्मियों के बकाये वेतनानुदान के बाबत कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षक प्रतिनिधि डॉ.संजीव कुमार सिंह ने आज ही बिहार के माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र प्रेषित किया है।

बता दें कि पत्र में डॉ.संजीव ने सूबे के प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के हड़ताली शिक्षकों के कार्यरत अवधि के वेतन के साथ-साथ वित्त अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों एवं इंटरमीडिएट महाविद्यालयों के दो शैक्षणिक वर्षों के वेतनानुदान की राशि के भुगतान करने हेतु विभाग को निर्देशित करने की मांग की है ताकि सभी कोरोना सरीखे वैश्विक आपदा से जंग जारी रख सके।

पुनश्च इस विकट वैश्विक आपदा की घड़ी में कोरोना से लड़ने के लिए समस्त वित्त अनुदानित डिग्री कालेजों को प्रदत्त 624 करोड़ की राशि संबंधित महाविद्यालयों को भेजे जाने हेतु विभाग को निदेशित करने का अनुरोध भी पत्र में किया गया है।

चलते-चलते यह भी कि सूबे के मदरसा शिक्षकों के वेतन मद के लगभग 67 करोड़ की राशि का निष्पादन भी वित्तीय वर्ष 2019-20 के अंतर्गत ही किए जाने का अनुरोध सूबे के सीएम से शिक्षक प्रतिनिधि ने करते हुए सभी शिक्षकों से यही कहा कि 14 अप्रैल तक कोई रोड पर ना निकलें।

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कोरोना वायरस से लड़ने में करुणा है हथियार: नरेन्द्र मोदी

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज बुधवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जनता से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये रूबरू हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने काशी की जनता के सवालों को सुनकर उन्हे जवाब भी दिए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश इस समय संकट की घड़ी से गुजर रहा है और ऐसे में काशी सबको मार्गदर्शन दे सकती है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से लोगों को घरों में ही रहने के लिए कहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बातचीत के दौरान महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि महाभारत का युद्ध 18 दिनों में जीता गया था, अब कोरोना से यह युद्ध 21 दिनों में जीतने की कोशिश है। पूरे विश्व में करीब एक लाख से अधिक लोग इस वायरस के शिकंजे से बाहर आ चुके हैं, वहीं भारत में भी दर्जनों लोग कोरोना वायरस को मात दे चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बातचीत के दौरान कोरोना वायरस से जुड़े एक हेल्पलाइन नंबर का भी जिक्र किया। इस हेल्पडेस्क को सरकार ने व्हाट्सऐप के साथ मिलकर तैयार किया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि लोग 9013151515 पर ‘नमस्ते’ लिखकर व्हाट्सऐप की हेल्पडेस्क से जुड़ सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी ने इस मौके पर सभी से गलतफहमी और अंधविश्वास से दूर रहने की अपील की। अपनी बातचीत में उन्होंने डॉक्टरों को भगवान बताया। इसी के साथ उन्होने यह भी कहा कि चिकित्साकर्मियों के साथ भेदभाव करने वालों के ऊपर सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
कोरोना वायरस से लड़ने में प्रधानमंत्री ने करुणा को हथियार बताया। एक व्यापारी के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इस नवरात्रि के मौके को देखते हुए हम 21 दिनों में नौ परिवारों की मदद कर इस नवरात्रि को सफल बना सकते हैं।
ध्यातव्य है कि कल मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित करते हुए 14 अप्रैल तक पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा करते हुए देशवासियों से सोशल डिस्टेन्सिंग पर अमल करने की अपील की थी।

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प्रधानमंत्री ने की पूरे देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। देश के नाम अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज रात 12 बजे से पूरे देश में, ध्यान से सुनिएगा, पूरे देश में, आज रात 12 बजे से पूरे देश में, संपूर्ण लॉकडाउन होने जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरान सिर्फ और सिर्फ एक काम करें कि बस अपने घर में रहें। किसी सूरत में बाहर न निकलें। देश के हर राज्य को, हर केन्द्रशासित प्रदेश को, हर जिले, हर गांव, हर कस्बे, हर गली-मोहल्ले को अब लॉकडाउन किया जा रहा है। हिन्दुस्तान को बचाने के लिए, हिन्दुस्तान के हर नागरिक को बचाने के लिए आज रात 12 बजे से, घरों से बाहर निकलने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई जा रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि साथियों, पिछले दो दिनों से देश के अनेक भागों में लॉकडाउन कर दिया गया है। राज्य सरकारों के इन प्रयासों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। कुछ लोगों की लापरवाही, कुछ लोगों की गलत सोच, आपको, आपके बच्चों को, आपके माता-पिता को, आपके परिवार को, आपके दोस्तों को, पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी। कुछ लोग इस गलतफहमी में हैं कि सोशल डिस्‍टेंसिंग केवल बीमार लोगों के लिए आवश्यक है। ये सोचना सही नहीं। सोशल डिस्‍टेंसिंग हर नागरिक के लिए है, हर परिवार के लिए है, परिवार के हर सदस्य के लिए है। कोरोना से बचने का इसके अलावा कोई तरीका नहीं है, कोई रास्ता नहीं है। कोरोना को फैलने से रोकना है, तो इसके संक्रमण की सायकिल को तोड़ना ही होगा।
कोरोना से प्रभावित रहे चीन, अमेरिका, इटली, ईरान आदि देशों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सभी देशों के दो महीनों के अध्ययन से जो निष्कर्ष निकल रहा है, और एक्सपर्ट्स भी यही कह रहे हैं कि कोरोना से प्रभावी मुकाबले के लिए एकमात्र विकल्प है सामजिक दूरी। समाज के लोग एक-दूसरे से अलग-थलग रहेंगे तो यह बीमारी भी उनसे दूर रहेगी। प्रधानमंत्री की गौर करने वाली एक बात यह भी थी कि उन्होंने कहा, यह लॉकडाउन कर्फ्यू नहीं है लेकिन इसे कर्फ्यू की तरह ही लें। जरूरत पड़ी तो सख्ती भी बरती जाएगी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि साथियो, आप कोरोना वैश्विक महामारी पर पूरी दुनिया की स्थिति को समाचारों के माध्यम से सुन भी रहे हैं और देख भी रहे हैं। आप ये भी देख रहे हैं कि दुनिया के समर्थ से समर्थ देशों को भी कैसे इस महामारी ने बिल्कुल बेबस कर दिया है। एक दिन के जनता कर्फ्यू से भारत ने दिखा दिया कि जब देश पर संकट आता है, जब मानवता पर संकट आता है तो किस प्रकार से हम सभी भारतीय मिलकर, एकजुट होकर उसका मुकाबला करते हैं। बच्चे-बुजुर्ग, छोटे-बड़े, गरीब, मध्यम वर्ग, उच्च वर्ग – हर कोई परीक्षा की इस घड़ी में साथ आया। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का जो संकल्प हमने लिया था, एक राष्ट्र के नाते उसकी सिद्धि के लिए हर भारतवासी ने पूरी संवेदनशीलता के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना योगदान दिया। अब आगे भी पूरे देश में लागू किए जा रहे लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करें। हम जल्‍द ही कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी से निपटने में सफल होंगे।

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लॉकडाउन: नीतीश कुमार ने की सहायता पैकेज की घोषणा

आज 1, अणे मार्ग स्थित संकल्प में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस से उत्पन्न संक्रमण की गंभीर स्थिति की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा तथा मुख्य सचिव दीपक कुमार समेत वरीय अधिकारीगण मौजूद थे।
इस उच्चस्तरीय बैठक में लॉकडाउन के परिप्रेक्ष्य में लोगों को सहायता पैकेज देने के संबंध में पांच महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो इस प्रकार हैं – पहला, सभी राशन कार्डधारी परिवारों को एक माह का राशन मुफ्त में दिया जाएगा। दूसरा, सभी प्रकार के पेंशनधारियों (मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन) को अगले तीन माह की पेंशन राशि अग्रिम तौर पर तत्काल दी जाएगी। यह राशि उनके खाते में सीधे अंतरित की जाएगी। तीसरा, लॉकडाउन क्षेत्र के सभी नगर निकाय क्षेत्रों एवं प्रखंड मुख्यालय की पंचायत में अवस्थित सभी राशन कार्डधारी परिवारों को एक हजार रुपए प्रति परिवार दिया जाएगा। यह राशि डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में अंतरित की जाएगी। चौथा, वर्ग 1 से 12 तक के सभी छात्र/छात्राओं को देय छात्रवृत्ति 31 मार्च 2020 तक उनके खाते में दे दी जाएगी तथा पांचवां, सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को एक माह के वेतन के समतुल्य प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर लोगों से अनुरोध करते हुए कहा कि लॉकडाउन के संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी की गई सलाह का अनुपालन करें। आपके सहयोग से ही इस महामारी से निपटने में सहायता मिलेगी।

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कोरोना: बिहार में लॉकडाउन

कोरोना वायरस से आज पूरी मानव जाति संकट में है। हम सब इस महामारी का डटकर मुकाबला कर रहे हैं। आवश्यक सावधानियां भी बरती जा रही हैं, किन्तु इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति का सचेत रहना नितांत आवश्यक है और इसका सबसे अच्छा उपाय सोशल डिस्टेंसिंग है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने आज तत्काल प्रभाव से 31 मार्च तक के लिए सभी जिला मुख्यालयों, अनुमंडल मुख्यालयों, प्रखंड मुख्यालयों एवं नगर निकायों में लॉकडाउन का निर्णय लिया। राज्यवासियों के नाम जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने और आमलोगों की सुरक्षा के लिए इसे आवश्यक बताया।
ध्यातव्य है कि लॉकडाउन के दौरान निजी प्रतिष्ठान, निजी कार्यालय एवं सार्वजनिक परिवहन पूर्णत: बंद रहेंगे परंतु आवश्यक एवं अनिवार्य सेवाओं से संबंधित प्रतिष्ठान जैसे चिकित्सा सेवाओं, खाद्यान्न एवं किराने के प्रतिष्ठान, दवा की दुकानों, डेयरी एवं डेयरी से संबंधित प्रतिष्ठान, पेट्रोल पम्प एवं सीएनजी स्टेशन, बैंकिंग एवं एटीएम, पोस्ट ऑफिस तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आदि सेवाओं एवं इन सेवाओं के लिए उपयोग किए जा रहे वाहनों को इस आदेश की परिधि से बाहर रखा गया है।
मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहारवासियों से अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही इस मुहिम में अपना पूरा सहयोग दें। उन्होंने कहा कि जब भी संकट का समय आया है हमने सभी लोगों के सहयोग से उस पर विजय पाई है। संकट की इस घड़ी में सरकार सभी लोगों के साथ है। मुझे पूरा विश्वास है कि हम सब साथ मिलकर इस चुनौती का सामना करने में सक्षम होंगे। मैं सब लोगों से अपील करूंगा कि आप सब अपने घर के अंदर रहें, इधर-उधर अनावश्यक आने-जाने की जरूरत नहीं है। कोरोना से संबंधित सारी चीजों की जानकारी दी जा रही है। हम सब मिलकर इस परिस्थिति का मुकाबला कर सकते हैं और इसमें हम कामयाब होंगे।

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निर्भया के मामले में उसकी माँ को क्यों मिला मुश्किल से न्याय

निर्भया कांड के चारों गुनहगारों को जोड़कर आजाद भारत में फांसी के फंदे पर लटकने वालों की कुल संख्या 724 हो गई। देश में पहली फांसी महात्मा गांधी के हत्यारों गोडसे एवं आप्टे को 15 नवंबर 1949 को अंबाला सेंट्रल जेल में दी गई थी तथा अंतिम फांसी निर्भया के चारों दुष्कर्मियों को 20 मार्च 2020 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में दी गई।

बता दें कि निर्भया के माता-पिता के अटूट संकल्प व संयम के चलते और कोर्ट के कानूनी दांव-पेंच के बीच लगे व जगे रहने के कारण ही… लगभग 7 वर्ष 3 महीने से अधिक समय तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार छह दुष्कर्मियों में से चार को ही फांसी पर लटकाया गया। एक तो जेल में ही खुदकुशी कर ली थी और दूसरे को नाबालिग का लाभ मिल गया।

यह भी बता दें कि जब 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली की सर्द रात में छह  दुष्कर्मियों ने निर्भया को अपना शिकार बनाया था तो ऐसा लगा कि सारा देश ठहर सा गया। निर्भया द्वारा अंतिम सांस लेने के बाद उसकी माँ “आशा” भारत की सारी माँओं की आशा बनकर कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाती रही और न्याय पाने के लिए बिलबिलाती रही। इस दरमियान यदा-कदा थक जाने के चलते हलचल काफी कम हो जाया करती तथा घर में अकेले निर्भया की तस्वीर के सामने बैठना उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया था। मार्च 20 (शुक्रवार) को सवेरे 5:30 बजे फांसी की जानकारी के साथ निर्भया के माता-पिता को सुकून मिला और भारत की समस्त महिलाओं को खुशी मिली।

यह भी बता दें कि कई बार डेथ वारंट निकलने और फांसी की तिथि तय होने के बावजूद कोई ना कोई कानूनी पेच फंस ही जाता। महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अंतिम तिथि 17 जनवरी को दया याचिका ठुकराई, फिर भी फांसी पर लटकने में दोषियों के वकील ने 70 दिन से अधिक समय जाया कर दिया।

चलते-चलते यह भी जानिए कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से जब निर्भया के मामले वाले दुष्कर्मियों को फांसी दिए जाने के बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे अपराध की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए समाजसेवियों, शिक्षाविदों, कानूनी विशेषज्ञों एवं भारतीय सांसदों को गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है। केवल फांसी से ऐसे अपराध की पुनरावृति रुकने वाली नहीं है। परन्तु, हमारी कोशिश हो कि इस तरह के क्रूरतम अपराध फिर नहीं हो…. क्योंकि कोशिश का दुनिया में कोई विकल्प नहीं है…।

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