वित्तरहित शिक्षकों को गति देने में लगे हैं कोसी के MLC डॉ.संजीव

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह, तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी प्रो.संजय कुमार सिंह एवं गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी संजीव श्याम सिंह सरीखे त्रिमूर्ति ने शिक्षा विभाग के नये मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा एवं सचिवों के साथ शिक्षकों के हित में विभागीय समीक्षात्मक बैठक अंततः ‘शिक्षक दिवस’ के एक दिन बाद यानि 6-9-2017 को आयोजित करने की सहमति ले ही ली | जानकारी मिलते ही बिहार के विभिन्न कोटि के शिक्षकों एवं अप्रशिक्षित नियोजित शिक्षकों, मदरसा एवं संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों, प्रोजेक्ट विद्यालय के शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों के रूप में नियुक्त होने वाले शिक्षकों के बीच खुशी की लहर उठने लगी है |

यह भी बता दें कि अनुदानित माध्यमिक, उच्च माध्यमिक यानि इंटर महाविद्यालय एवं डिग्री महाविद्यालय में G.E.R बढ़ाने हेतु सीट वृद्धि का प्रावधान एवं ऐसे संस्थानों के लंबित सभी अनुदान एकमुस्त विमुक्त करने हेतु विशेष प्रावधान पर विचार किया जाना है | विद्यालयों के संयोजक के पद पर पूर्व के प्रावधान  को ही लागू किये जाने की व्यवस्था पर विचार किया जायेगा |

यह भी जानिये कि राज्य सरकार द्वारा सम्बद्ध डिग्री कॉलेजों को प्राप्त अनुदान की राशि शिक्षकों एवं कर्मियों के बीच वितरित नहीं करने पर विश्वविद्यालय द्वारा वैसे कालेजों के शासीनिकाय को भंग कर तदर्थ समिति गठित कर दी जायेगी | वर्षों से लंबित संबंधन एवं पदसृजन की प्रक्रिया भी शुरु होगी |

बता दें कि अधिनियमानुसार सम्बद्ध डिग्री महाविद्यालय में 19-4-2007 के बाद नियुक्त शिक्षकों को भी चयन समिति के माध्यम से सेवा नियमितीकरण के संबंध में 6 सितंबर की बैठक में कोसी के शिक्षक प्रतिनिधि डॉ.संजीव कुमार सिंह अपने सहयोगियों के साथ अपनी ही सरकार पर शिक्षकों के हित में जोर-शोर से दबाव डालेंगे तथा अमलीजामा पहनाकर ही दम लेंगे | इसी बैठक में 1128 मदरसा शिक्षकों एवं 531 संस्कृत शिक्षकों के वेतनमान की चर्चा भी की जायेगी |

कोसी शिक्षक प्रतिनिधि डॉ.संजीव कुमार सिंह ने अंत में बताया कि अल्पसंख्यक विद्यालय के शिक्षकों के अर्जित अवकाश, सेवानिवृत्त शिक्षकों के बकाये सेवान्त लाभ, कार्यरत शिक्षकों के कालबद्ध प्रोन्नति का लाभ, 1975 से पूर्व नियुक्त डिमोंस्ट्रेटर को छठे वेतन पुनरीक्षण का लाभ दिलाने के साथ-साथ 1966 के बाद पी-एच.डी. प्राप्त शिक्षकों को 3 वेतन वृद्धि का लाभ दिलाने के लिए पुरजोर कोशिश की जायेगी और इसके साथ-साथ BPSC द्वारा नियुक्त शिक्षकों के लिए वेतन विमुक्ति की चर्चा भी जमकर की जायेगी |

इन त्रिमूर्तियों के द्वारा ऐसे-ऐसे 19 विचारनीय बिंदुओं पर (25 अगस्त को ही) आगामी 6 सितंबर को बैठक आयोजित किये जाने के लिए सरकार से स्वीकृति प्राप्त कर ली गई है | अब देखना है कि हमें कितनी सफलता मिलती है…….!

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डोकलाम पर भारत की कूटनीतिक विजय

भारत और चीन के बीच पिछले कुछ महीनों से डोकलाम में चल रहे विवाद को हल करने की दिशा में अहम सहमति बनी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देश डोकलाम से सेना हटाने को तैयार हो गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया, “हाल के हफ्तों में डोकलाम को लेकर भारत और चीन ने कूटनीतिक बातचीत जारी रखी है। इस बातचीत में हमने एक दूसरे की चिंताओं और हितों पर बात की। इस आधार पर डोकलाम पर जारी विवाद को लेकर हमने सीमा पर सेना हटाने का फैसला किया है और इस पर कार्रवाई शुरू हो गई है।”

 

हालांकि चीन यहां भी अपनी चालबाजी से बाज नहीं आया। चीन के विदेश मंत्रालय ने इसे अपनी जीत के रूप में पेश किया। उसके प्रवक्ता के मुताबिक भारतीय सैनिक अपने उपकरणों समेत अपनी सीमा में लौट गए हैं, जबकि चीनी पक्ष डोकलाम में अपनी गश्त जारी रखे हुए है। दूसरी ओर जीत-हार के दावों से अलग कूटनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए भारत ने कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को अपने हितों-चिंताओं और रुख से अवगत कराने में सफल रहे हैं। जहां तक सिर्फ भारतीय सेना की वापसी का प्रश्न है, ये सोचने का विषय है कि भारत के एकतरफा पीछे हट जाने के लिए चीन से सहमति की भला जरूरत ही क्या थी।

 

बहरहाल, चीन चाहे जो कहे, इसमें कोई दो राय नहीं कि डोकलाम पर भारत ने कूटनीतिक विजय पाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सितंबर में ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर चीन दौरे के पहले इस विवाद का सुलझना विशेष अर्थ रखता है। चीन लाख कोशिशों के बावजूद भारत और भूटान को अलग-थलग करने में विफल रहा। बड़े देशों में किसी ने उसके तर्क पर भरोसा नहीं जताया। उसके दुष्प्रचार, धमकियों और मनोवैज्ञानिक युद्ध का विश्व भर में गलत संदेश गया वो अलग। दूसरी ओर भारत लगातार मुद्दे के शांतिपूर्ण और कूटनीतिक तरीके से हल पर जोर देता रहा। कहने की जरूरत नहीं कि अगर इस समस्या का समाधान अभी नहीं निकलता तो प्रधानमंत्री मोदी शायद ही ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेते और अगर ऐसा होता तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चीन की और किरकिरी होती।

 

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बाढ़ पीड़ितों के लिए खुला राज्य का खजाना

बिहार सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए राज्य का खजाना खोल दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार शाम हुई कैबिनेट की बैठक में 18 जिलों के बाढ़ पीड़ितों में मुआवजा राशि बांटने के लिए 1935 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। गौरतलब है कि इसी राशि से 440 मृतकों के परिजन को भी 4-4 लाख रुपये दिए जाएंगे।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि दो से तीन दिनों में 30 लाख बाढ़पीड़ितों के खाते में तय मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित जिलाधिकारियों को दिया गया है। जिन परिवारों के बैंक खाते नहीं खुले हैं, उनके खाते तत्काल खुलवाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बता दें कि बाढ़ पीड़ितों को बड़ी राहत देने सहित कैबिनेट की बैठक में कुल 24 प्रस्तावों पर मुहर लगी। सरकार द्वारा लिए गए एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत अब राजस्व लगान और सेस की वसूली दस (10) के गुणक में की जाएगी। वर्तमान में यह राशि बहुत कम थी। इसके अलावा राजस्व लगान रुपये के साथ 25, 50 और 75 पैसे के गुणक में होने की वजह से लगान वसूली के दौरान कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था।

कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णयों में एक निर्णय राज्य के मान्यता प्राप्त गैर सरकारी अल्पसंख्यक माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक और शिक्षकेतत्तर कर्मियों को पहली जनवरी 1996 से पंचम और पहली जनवरी 2006 से छठा वेतनमान देने का भी है। इसी तरह एक अन्य निर्णय के तहत कैबिनेट ने एनसीसी अधिकारियों के भत्ते में बढ़ोतरी की है।

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बीपी मंडलमय हुआ मधेपुरा……!

मधेपुरा के विभिन्न प्रखंडों एवं सरकारी व प्राइवेट विद्यालयों के साथ-साथ अंगीभूत व संबद्ध महाविद्यालयों के आचार्यों, प्राचार्यों और प्रधानाचार्यों ने सामाजिक न्याय के पुरोधा बीपी मंडल की 99वीं जयंती पर सामाजिक परिवर्तन में उनके योगदानों को याद किया | बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज एवं कमलेश्वरी-बिंदेश्वरी वुमेन्स कॉलेज सहित अम्बेडकर छात्रावास के छात्रों द्वारा भी सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़ों के लिए किये गये उनके कामों को याद किया गया | धरती पर कोई धर्म नहीं जिनकी कुल 3743 जातियों में से ऐसे पिछड़ों को मंडल आयोग द्वारा लाभ न मिला हो जो सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े हों-चाहे वे ब्राह्मण…… क्षत्रिय ही क्यों ना हो |

बता दें कि जिले के विभिन्न विद्यालयों से प्रातः 6:00 बजे स्कूली छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह व उमंग के साथ प्रभात फेरी निकाल शहर का भ्रमण किया | जहां 8:00 बजे स्थानीय टीपी कॉलेजिएट उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य डॉ.सुरेश कुमार भूषण की अध्यक्षता में आयोजित बीपी मंडल की 99वीं जयंती के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि विस्तार से विचार व्यक्त करते हुए बीएन मंडल विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर रहे डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने मंडल मसीहा बीपी मंडल को महामानव कहा……….. वहीं 9:00 बजे डीएम मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला सहित अन्य पदाधिकारियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों एवं समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.अरुण कुमार मंडल, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, पूर्व विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा आदि ने उनकी आदम कद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित किया |

DM Md.Sohail (IAS), SP Vikas Kumar (IPS), Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, Dr.Arun Kumar Mandal, Freedom Fighter A.N.Yadav, Dr.A.Kumar, JDU President Prof.Bijendra Nr.Yadav after paying tribute to B.P.Mandal Statue at BP Mandal Chowk, Madhepura .
DM Md.Sohail (IAS), SP Vikas Kumar (IPS), Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, Dr.Arun Kumar Mandal, Freedom Fighter K.N.Yadav, Dr.A.Kumar, JDU President Prof.Bijendra Nr.Yadav after paying tribute to B.P.Mandal Statue at BP Mandal Chowk, Madhepura .

यह भी बता दें कि बीपी मंडल की 99वीं जयंती समारोह को लेकर उनके पैतृक गाँव मुरहो में राजकीय जयंती समारोह आयोजित की गई जिसमें डीएम मो.सोहैल को मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर सर्वप्रथम गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और फिर डीएम व एसपी ने बीपी मंडल की समाधि पर रखे गये तैल चित्र पर सर्वप्रथम माल्यार्पण व पुष्प अर्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी | उपस्थित बुद्धिजीवियों ने भी उन्हें बारी-बारी से पुष्पांजलि दी | एसडीएम संजय कुमार निराला की अध्यक्षता में राजकीय जयंती समारोह सभा का आयोजन किया गया |

इस अवसर पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने पूर्व की भांति बीपी मंडल को ‘भारतरत्न’ से सम्मानित करने की मांग दुहराई | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मंडल साहब को गुजरे लगभग 40 वर्ष बीत गये तथा एटॉमिक इनर्जी के क्षेत्र में भारत को बुलंदी तक ले जाने वाले डॉ.होमी जहांगीर भाभा को गुजरे लगभग 50 वर्ष | ऐसी हस्तियों को ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया जाना लाजमी है |

जहाँ सर्वप्रथम प्रो.श्यामल किशोर यादव ने बीपी मंडल की 100वीं जयंती पर ‘स्मृति-ग्रंथ’ तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया वहीं डॉ.शांति यादव ने मंडल आयोग की सिफारिशों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया |

जहां पूर्व विधायक ओमबाबू ने दुख: व्यक्त करते हुए यही कहा कि देश के नेता उनके पिता बीपी मंडल के नाम पर सिर्फ राजनीति करते रहे हैं वहीं पूर्व मुखिया सुभाषचंद्र यादव एवं डॉ.अरुण कुमार मंडल ने बीपी मंडल द्वारा ईमानदारी से किये गये सामाजिक परिवर्तन के योगदानों को याद करते देखे गये | साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों- जैसे जदयू के प्रो.विजेंद्र नारायण यादव, भाजपा के स्वदेश कुमार, राजद के रितेश कुमार, सीपीआईएम के प्रमोद प्रभाकर, लोजपा के दिनेश पासवान, हम के मो.शौकत अली, रालोसपा के डॉ.राजीव जोशी सहित अन्य ने बीपी मंडल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की जानदार एवं शानदार चर्चाएं की |

इस बार बाढ़ की विभीषिका के मद्देनजर डीएम मो.सोहैल की टीम ने सादगी के साथ मुरहो पंचायत को ‘मंडल-ग्राम’ पंचायत नामित कर स्वास्थ्य केंद्रों में बाढ़ पीड़ितों की भरपूर मदद की पूरी व्यवस्था की | सदर बीडीओ दिवाकर कुमार की व्यवस्था संतोषप्रद रही | उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पाण्डेय की पूरी टीम सहित कार्यक्रम पदाधिकारी संजीव कुमार, डीएसओ राजेश रोशन, डीपीआरओ कयूम अंसारी सहित ज्योति मंडल, निखिल मंडल, प्रो.रीता कुमारी, डॉ.आलोक कुमार एवं मंच संचालक जयकृष्ण यादव की सर्वधर्म प्रार्थना वाली टीम के सभी सदस्यों व उपस्थित जनों को हृदय से साधुवाद-धन्यवाद ज्ञापित किया | अंत में अध्यक्ष एसडीएम संजय कुमार निराला ने कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की |

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भीड़ से गदगद लालू ने भरी वापसी की हुंकार

पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान आज एक और बड़ी रैली का गवाह बना। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के आह्वान पर ‘भाजपा भगाओ देश बचाओ’ रैली में लगभग डेढ़ दर्जन विपक्षी दलों के नेता और राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हालांकि रैली में जुटी भीड़ को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। आरजेडी के अनुसार रैली में 25 लाख से ज्यादा लोग थे तो बकौल सुशील कुमार मोदी लालू द्वारा ही आयोजित गरीब रैला का दशांस भी आज की रैली में नहीं था। पर आज की रैली गांधी मैदान पर आयोजित अब तक की रैलियों से चाहे जितनी बड़ी या छोटी हो, यह एक सफल रैली थी और इस रैली से लालू और उनके परिवार व पार्टी का उत्साह बढ़ा होगा, इसमें कोई दो राय नहीं।

आरजेडी और उसके बहाने विपक्षी एकता के लिए आज की रैली प्रतिष्ठा का प्रश्न थी। लालू की साख दांव पर लगी थी और तेजस्वी, जिनमें पार्टी अपना भविष्य देख रही है, की पैठ जनमानस में कितनी बनी है, उसकी आजमाइश भी होनी थी। कहना गलत न होगा कि रैली ने इन तमाम प्रश्नों के सकारात्मक उत्तर दिए। रैली में कई राज्यों के नेता एक मंच पर साथ दिखे। लालू, राबड़ी, तेजस्वी, तेजप्रताप और मीसा समेत आरजेडी के तमाम बड़े चेहरों के अलावा रैली में जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष और अभी ‘असली जेडीयू’ के अपने साथ होने का दावा कर रहे शरद यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद व सीपी जोशी, झारखंड के दो पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी (जेवीएम) व हेमंत सोरेन (जेएमएम), सीपीआई के डी राजा, रालोद के जयंत चौधरी और एनसीपी के तारिक अनवर के अलावे डीएमके, जेडीएस, केरल कांग्रेस और एयूडीएफ के नेता मुख्य रूप से मौजूद थे।

रैली में शामिल तमाम नेताओं के निशाने पर स्वाभाविक रूप से बीजेपी और नीतीश कुमार रहे। आरजेडी सुप्रीमो लालू ने कहा नीतीश को तेजस्वी से जलन थी क्योंकि उन्हें तेजस्वी से खतरा था। मेरी संपत्ति सार्वजनिक है। वापसी की हुंकार भरते हुए उन्होंने कहा कि ये नीतीश कुमार की अंतिम पलटी है। संघमुक्त भारत का नारा देते थे, बीमारी का बहाना बनाकर हमसे दूरी बनाई और संघ की गोद में जा बैठे। वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने कहा, नीतीश हमारे चाचा थे, हैं और रहेंगे पर अब वो अच्छे चाचा नहीं रहे। उन्होंने कहा, तेजस्वी तो बहाना था, उन्हें सृजन घोटाला छुपाना था।

अपनी राज्यसभा सदस्यता को दांव पर लगाकर रैली में पहुंचे शरद यादव ने कहा कि बिहार के लोगों ने महागठबंधन को जनादेश दिया था। उन्होंने कहा, मुझे सत्ता का मोह नहीं है और अब यह महागठबंधन देश स्तर पर बनेगा। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा, बिहार की ऐतिहासिक धरती अगर रथ रोक सकती है, तो भाजपा को भी रोक सकती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, काम मन से होता है, भाषणों से नहीं। अच्छे दिन के नाम पर देश में दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है।

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद नीतीश कुमार पर विशेष रूप से हमलावर दिखे। उन्होंने उन पर बिहार की 11 करोड़ जनता को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये तो वैसी ही बात हुई कि शादी किसी और से हुई और भाग किसी और के साथ गए। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने देश से भाजपा और बिहार से नीतीश कुमार को भगाने की बात की। उन्होंने सृजन घोटाले को चारा घोटाला जैसा बताया और कहा नीतीश-मोदी खजाना चोर, गद्दी छोड़। उधर उनके बड़े बेटे तेजप्रताप ने अपने पिता के अंदाज में लोगों को संबोधित करते हुए बकायदा शंख फूंककर ‘युद्ध’ का ऐलान किया।

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मधेपुरा में ब्रह्माकुमारी दादी प्रकाशमणि की 11वीं पुण्यतिथि मनी

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुख्य प्रशासिका रही बाल ब्रह्मचारिणी राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि के नेतृत्व में यह संस्था सघन वटवृक्ष का स्वरुप ग्रहण कर विश्व के 137 देशों के लगभग नौ हज़ार सेवा केंद्रों के माध्यम से आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों के संवर्धन में लगी हुई है……. और चलते-चलते एक दिन 87 वर्षीया दादी का देहावसान आबू में ही दिनांक 24 अगस्त, 2007 को हो जाता है |

बता दें कि दादी प्रकाशमणि की 11वीं पुण्यतिथि बाढ़ की विभीषिका के मद्देनजर सादगीपूर्ण तरीके से ब्रह्माकुमारी रंजु दीदी की अध्यक्षता में मधेपुरा के गणमान्यों, समाजसेवियों एवं श्रद्धालु शिष्य-शिष्याओं की अच्छी खासी उपस्थिति में मनाई गई जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में समाजसेवी डॉ.भूपेंन्द्र मधेपुरी, एसडीएम संजय कुमार निराला, सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पाण्डेय तथा विशिष्ट अतिथि के रुप में डॉ.गणेश कुमार, उपेन्द्र रजक, प्राणमोहन आदि ने श्रद्धांजलि स्वरुप पुष्पांजलि अर्पित की | आरम्भ में समारोह का श्रीगणेश संयुक्तरुप से दीप प्रज्वलित कर किया गया |

यह भी जानिए कि सर्वप्रथम समारोह की अध्यक्षता ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी रंजु दीदी ने दादी प्रकाशमणि के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके ही कार्यकाल में संस्था के प्रयासों को सराहते हुए संयुक्त राष्ट्र द्वारा उन्हें “विश्व शांति दूत” पुरस्कार से नवाजा गया | 38 वर्षों तक संस्था को नेतृत्व देने वाली दादी प्रकाशमणि को विदेश यात्राओं के दौरान अनेक देशों में उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा दिया जाता रहा | भला क्यों नहीं, दादीजी में स्नेह-प्रेम और शक्ति का अद्भुत संतुलन जो था | जहां प्रेम होता है, वहां व्यक्ति सब कुछ न्योछावर करने को तैयार हो जाता है……|

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri addressing the devotees attending the 11th Punya Tithi Samaroh of Dadi Prakashmani at Madhepura .
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri addressing the devotees attending the 11th Punya Tithi Samaroh of Dadi Prakashmani at Madhepura .

अन्त में उपस्थित गणमान्यों, पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं की ओर से प्रतिनिधि वक्ता के रूप में समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने दादी प्रकाशमणि के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहा कि राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजी गई दादीमाँ प्रकाशमणि की आत्मा आने वाली पीढ़ी को सदैव प्रकाशित करती रहेंगी | डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में ईश्वरीय वि.वि. द्वारा श्रद्धालुओं के मन को नियंत्रित करने हेतु विभिन्न प्रयोगों के साथ विस्तार से चर्चा की और गीता के उद्धरणों को शामिल करते हुए मन-बुद्धि को स्थिर करने के उपायों की व्याख्या की | उन्होंने यह भी कहा कि दादी प्रकाशमणि अपने माता-पिता के घर प्रतिदिन नये आभूषण पहनते रही और ईश्वरीय विश्वविद्यालय को जीवनदान देने के साथ ही सबकुछ लुटाकर मसीहा बन गई | उस दादी प्रकाशमणि के लिए डॉ.मधेपुरी ने अपनी चंद पंक्तियां श्रद्धांजलि स्वरुप अर्पित की-

धन आदमी की नींद को हर पल हराम करता

जो बांटता दिल खोल उसे युग सलाम करता !

मरने के बाद मसीहा बनता वही मधेपुरी

जो जिंदगी में अपना सब कुछ नीलाम करता !!

अंत में राजयोगिनी रंजु दीदी ने सभी श्रद्धालुओं, गणमान्यों एवं कार्यक्रम को सफल बनाने वाले ब्रह्माकुमारियों सहित डॉ.एन.के.निराला, बीके किशोर, प्रो.अजय आदि को धन्यवाद देकर ‘प्रसाद’ पाने के अनुरोध के साथ ही समारोह समाप्ति की घोषणा की |

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पिता ने लगाया, पुत्र ने धोया सर्वोच्च अदालत का दाग

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ ने देश की सर्वोच्च अदालत के 67 साल के गौरवशाली इतिहास पर लगे एक दाग को धो दिया है। इस पीठ ने 1976 में आपातकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट के द्वारा लिए गए उस विवादास्पद फैसले को पलट दिया है जिसमें तत्कालीन केन्द्र सरकार द्वारा जीवन के अधिकार को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा गया था। इतिहास का चक्र देखिए, सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ का फैसला जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने लिखा, जिनके पिता वाईएस चंद्रचूड़ उस पीठ का हिस्सा थे जिससे ये ऐतिहासिक भूल हुई थी। कौन जानता था कि 41 साल पहले पिता के द्वारा लिए गए उस फैसले को स्वयं उनका पुत्र ही पलटेगा, जिसमें इंदिरा गांधी सरकार द्वारा आपातकाल के दौरान राइट टू लाइफ के अधिकार को निरस्त करने के फैसले का समर्थन किया गया था।

गौरतलब है कि 1976 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए फैसले को जस्टिस एचएस बेग ने लिखा था, जिससे तत्कालीन चीफ जस्टिस एएन रॉय, जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएन भगवती सहमत थे। जबकि जस्टिस एचआर खन्ना इस फैसले से पूरी तरह असहमत थे। उनका मानना था कि जीवन का अधिकार छीना नहीं जा सकता। 41 साल पहले की गई उस गलती को सुधारते हुए, जिसका हिस्सा उनके पिता भी थे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने साफ कहा कि चार जजों का बहुमत वाला फैसला खामियों भरा था, जबकि जस्टिस खन्ना बिलकुल सही थे। एडीएम जबलपुर जजमेंट के मामले पर बोलते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘जब देशों का इतिहास लिखा जाता है और उसकी समीक्षा होती है तो न्यायिक फैसले ही स्वाधीनता के ध्वजवाहक होते हैं।’

चलते-चलते बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की जिस नौ सदस्यीय पीठ ने ये ऐतिहासकि फैसला सुनाने की हिम्मत दिखाई उसमें चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस जे चेल्मेश्वर, जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस आर के अग्रवाल, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम सप्रे, जस्टिस डीवीई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल थे।

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अब आपके हाथों में होगा 200 रुपये का नोट

2000 के बाद अब आपके हाथों में 200 रुपये का नोट आने जा रहा है। जी हां, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया शुक्रवार को 200 रुपये का नोट जारी करेगा। फिलहाल ये नोट आरबीआई के कार्यालयों और कुछ चुनिंदा बैंकों में ही उपलब्ध होंगे। एटीएम तक पहुंचने में इन्हें थोड़ा वक्त लगेगा क्योंकि इस नये नोट के लिए एटीएम के रीकैलिब्रेशन की जरूरत होगी।

बहरहाल, गुरुवार को इस बाबत घोषणा करते हुए आरबीआई ने कहा कि आम आदमी के लिए लेनदेन में सुविधा, फटे-पुराने नोटों की बदली, मुद्रास्फिति और जालसाजी रोकने जैसे कई उद्देश्य से नये मूल्य की करंसी जारी की जा रही है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने 200 रुपये के नोट को ‘मिसिंग मिडल’ की संज्ञा देते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद 500 और 2000 के बीच कोई दूसरा नोट नहीं था, इसलिए 200 रुपये का यह नोट उपयोगी होगा और लेन-देन की दिक्कतों को दूर करेगा। सबसे महत्वपूर्ण यह कि छोटे नोटों की जमाखोरी मुश्किल है और इससे उस पर भी लगाम लगेगी।

गौरतलब है कि नोटबंदी से पहले 87 प्रतिशत करंसी 500 और 1000 रुपये के नोटों के रूप में थी। कालेधन पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा नोटबंदी का साहसिक निर्णय लिए जाने के बाद वर्तमान में 70 प्रतिशत करंसी ही अधिक मूल्य के नोटों के रूप में चलन में हैं। कहने की जरूरत नहीं कि 200 रुपये के नोट के आने के बाद ये अनुपात और बेहतर हो सकेगा।

चलते-चलते यह भी बता दें कि 200 रुपये का नोट लाने के अलावे सरकार 500 रुपये के नोटों को भी नए डिजायन में ला रही है। यही नहीं, 50, 20 और 1 रुपये के नए नोट भी बहुत जल्द आपके हाथों में होंगे।

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बीएनएमयू मधेपुरा के 16 सीनेटरों में 5 निर्विरोध निर्वाचित

भू.ना.मंडल विश्वविद्यालय के सीनेट चुनाव की तिथि 22 सितम्बर 2017 को निर्धारित की गई है | तीन ग्रुपों ए-बी-सी के सामान्य, ओबीसी और एससी-एसटी कोटियों से कुल 16 सीटों पर चुनाव होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है | उक्त चुनाव हेतु 22 अगस्त को उम्मीदवारों की संवीक्षा(स्क्रूटनी) की गई | जिसमें एक उम्मीदवार विमल कुमार यादव (डिग्री कॉलेज, सुपौल) द्वारा गलत सुचना देने के कारण उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई | फलस्वरूप ग्रुप सी से ओबीसी कोटे के दुसरे प्रत्याशी हेमकांत यादव का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है |

बता दें कि जिन पाँच सीनेटरों का निर्विरोध चयन होना तय है, वे हैं – डॉ.नरेश कुमार, डॉ.जवाहर पासवान, गणेश प्रसाद यादव, बेगम नूरजहाँ और हेमकांत यादव |

यह भी जानिये कि चुनाव संचालन समिति के सदस्य डॉ.अशोक कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि ग्रुप ए के एससी और एसटी कोटे से दो सीट एवं ग्रुप बी के एसटी कोटे की एक सीट के लिए एक भी उम्मीदवार नहीं होने से इन तीनों सीटों पर चुनाव नहीं होगा | ये तीनों सीट रिक्त रहेगा |

अब आगे 22 सितम्बर को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निष्पक्ष चुनाव की तयारी कर ली गई  है जिस दिन

  1. ग्रुप बी की सामान्य कोटि की पाँच सीट हेतु 11 प्रत्याशियों
  2. ग्रुप बी की ओबीसी कोटि की दो सीट हेतु सात प्रत्याशियों तथा
  3. कर्मचारी कोटे की एक सीट हेतु दो प्रत्याशियों के बीच संघर्षपूर्ण चुनाव होना है |

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सर्वोच्च अदालत ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया

भारत के लिए बड़ा दिन। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर। मुस्लिम महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत। जी हां, देश के सबसे जटिल सामाजिक मुद्दों में से एक तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों की संविधान पीठ ने मंगलवार को अपना फैसला सुना दिया। पांच में से तीन जजों जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस फली नरीमन और जस्टिस यूयू ललित ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। वहीं चीफ जस्टिस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने छह महीने के लिए एक साथ तीन तलाक पर रोक लगाने और तमाम राजनीतिक दलों को साथ बैठकर कानून बनाने की सलाह दी।

बहरहाल, पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 395 पेज के अपने आदेश में कहा कि पीठ तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत को 3-2 के बहुमत से खारिज करती है। कोर्ट ने तीन तलाक को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है, जबकि तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन करता है। यह प्रथा बिना कोई मौका दिए शादी को खत्म कर देती है। कोर्ट ने मुस्लिम देशों में तीन तलाक पर लगे बैन का जिक्र किया और पूछा कि भारत इससे आजाद क्यों नहीं हो सकता?

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए तीन तलाक पर छह महीने के लिए रोक लगाते हुए केन्द्र सरकार से कहा कि वह तीन तलाक पर कानून बनाए। इस अवधि में देश भर में कहीं भी तीन तलाक मान्य नहीं होगा। सर्वोच्च अदालत ने उम्मीद जताई कि राजनीतिक दलों को विश्वास में लेते हुए केन्द्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिन्ताओं का ख्याल रखा जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर छह महीने में कानून नहीं बनाया जाता है तब भी तीन तलाक पर शीर्ष अदालत का आदेश जारी रहेगा।

बता दें कि इससे पूर्व 11 से 18 मई तक रोजाना सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए 22 अगस्त का दिन तय किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है। ये गैर-जरूरी है। कोर्ट ने सवाल किया था कि जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है, वह कानून के तहत कैसे वैध ठहराया जा सकता है? सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया था कि कैसे कोई पापी प्रथा आस्था का विषय हो सकती है?

चलते चलते ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर इस ऐतिहासिक फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट का साधुवाद। ऐसे फैसलों के कारण ही अदालत के प्रति लोगों की आस्था अब तक बनी हुई है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप  

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