विश्व साहित्य का अमूल्य धरोहर है तुलसीदास- डॉ.रवि

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन संस्थान के अंबिका सभागार में समारोहपूर्वक तुलसी जयन्ती का आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ की अध्यक्षता में संपन्न हुआ |

सर्वप्रथम गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर कौशिकी के संरक्षक डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि ,पूर्व सांसद सह संस्थापक कुलपति, अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ, सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, उपसचिव श्यामल कुमार सुमित्र सहित सभी साहित्यानुरागियों एवं तुलसी पब्लिक स्कूल के छात्रों व गणमान्यों के द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई |

बता दें कि साहित्यकार शलभ ने विनयपत्रिका के एक गीत का सस्वर पाठ किया और अपने संबोधन में कहा कि जब हिन्दू धर्म में ही अनेक पंथ अवतरित होकर एक दूसरे पर प्रहार कर रहे थे तब अकेले तुलसी ने धर्म के रक्षार्थ ऐसे चरितनायक की रचना की जिन्होंने धरती को निशिचर विहीन कर धरती पर रामराज स्थापित किया |

इस अवसर पर जहाँ यशस्वी साहित्कार डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप ने तुलसी की समन्वय-साधना, उनकी प्रगतिशीलता एवं परिस्थितियों के अनुकूल नवीन दृष्टिकोण अपनाने की कुशलता के चलते उन्हें लोकनायक की संज्ञा दी वहीं मधेपुरा व्यापार मंडल के अध्यक्ष योगेंद्र प्राणसुखका  ने सुन्दरकाण्ड की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि जब समाज में विश्रृंखलता उत्पन्न होकर उसकी गति को अवरुद्ध करने लगी तब सौंदर्य, शील और शक्ति के साथ तुलसी के मर्यादा- पुरुषोत्तम राम का आविर्भाव होता है एवं सेवक हनुमान का पराक्रम  परिलक्षित होने लगता है |

यह भी बता दें कि तुलसी को शुरू में कामी और बाद में रामानुगामी कहने वाले हिन्दी साहित्य के कई दर्जन पुस्तकों के रचनाकार व डी.लिट. प्राप्त डॉ.विनय कुमार चौधरी ने जहां तुलसी की काव्य भाषा की अद्भुत एवं मनमोहक शास्त्रीय समीक्षा प्रस्तुत की वहीं सम्मेलन के सचिव डॉ.मधेपुरी ने काम और राम के अद्भुत एवं विपरीत ध्रुवों वाले संबंध को बताते हुए यही कहा-

         जहाँ काम तहाँ राम नहीं, जहाँ राम नहीं काम !

         तुलसी कबहूँ ना रहि सके, रवि रजनी एक ठाम !!      

इसी क्रम में जहाँ दशरथ प्रसाद सिंह कुलिश एवं पूर्व कुलसचिव शचीन्द्र महतो ने रामायण काल की आर्थिक समीक्षा करते हुए यही कहा कि तुलसी का काव्य इसलिए श्रेष्ठ है कि उनके हृदय से निकले हुए भाव सीधे उनकी रचना में प्रवेश पा लेता है वहीं अधिवक्ता संतोष सिन्हा ने कहा कि तुलसी ने तत्कालीन बौद्ध सिद्धों एवं नाथ योगियों की चमत्कारपूर्ण साधना करके राम के लोकसंग्रही स्वरुप की स्थापना की |

अंत में अपने आशीर्वचन में सम्मेलन के संरक्षक व संस्थापक कुलपति डॉ.रवि ने तुलसी के मानस को स्वान्तः सुखाय के साथ-साथ परजन हिताय का संयोग कहा और डॉ.सिद्धेश्वर एवं डॉ.विनय को विशेष आशीर्वचन देते हुए यही कहा कि इन्हें सुनकर सर्वाधिक प्रसन्नता इस बात की हुई कि मधेपुरा में अब साहित्य की धारा सदा गतिशील रहेगी । डॉ.रवि ने तुलसी को पूर्णतया समन्वयवादी संतकवि कहा |

इस अवसर पर अंततक उपस्थित अधिवक्ता भोला प्रसाद सिन्हा, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.अरविंद श्रीवास्तव, डॉ.श्यामल कुमार सुमित्र, उल्लास मुखर्जी, रघुनाथ यादव, शिवजी साह, बलभद्र यादव, कमलेश्वरी यादव, राकेश कुमार द्विजराज, किशोर श्रीवास्तव, विजय कुमार झा स्थापना आदि को सचिव डॉ.मधेपुरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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नीतीश: नई टीम, नई चुनौतियां

नीतीश की नई टीम के शपथ-ग्रहण के साथ बिहार में चल रही राजनीतिक अनिश्चितता और नाटकीय घटना-क्रम का पहला दौर पूरा हो गया दिखता है। पॉलिटिकल ड्रामा के दूसरे चरण की बात करें तो वह ‘विश्वासघात’ का आरोप लगा रही आरजेडी की रणनीति, मंत्रिमंडल में हम और रालोसपा को जगह न मिल पाने के कारण जीतन राम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा की नाराजगी और नीतीश द्वारा ‘विश्वास’ में न लिए जाने के कारण शरद यादव की चुप्पी पर निर्भर कर रहा है।

बहरहाल, नीतीश की नई टीम में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के अतिरिक्त कुल 27 मंत्रियों को जगह मिली है, जिनमें कोशी कमिश्नरी के तीन चेहरे – बिजेन्द्र प्रसाद यादव (सुपौल), दिनेश चन्द्र यादव (सिमरी बख्तियारपुर) और रमेश ऋषिदेव (सिंहेश्वर) – शामिल हैं। ये तीनों मंत्री जेडीयू कोटे से हैं, जबकि इस इलाके से भाजपा के एकमात्र विधायक नीरज कुमार बबलू (छातापुर) की दावेदारी को नज़रअंदाज कर दिया गया। कल शपथ लेने वाले 27 मंत्रियों में 14 जेडीयू के, 12 भाजपा के और 1 लोजपा के हैं। गौरतलब है कि लोजपा से शपथ लेने वाले पशुपति कुमार पारस फिलहाल विधायक नहीं हैं, लेकिन रामविलास पासवान उनके लिए जगह बनवाने में सफल रहे, जबकि मांझी और कुशवाहा की अपनी-अपनी पार्टी के लिए यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई।

बता दें कि मधेपुरा जिला से नीतीश मंत्रिमंडल में जगह पाने वाले रमेश ऋषिदेव पहली बार मंत्री बने हैं। जेडीयू से लगातार तीसरी बार विधायक ऋषिदेव वर्तमान में विधानसभा की अनुसूचित जाति-जनजाति समिति के सभापति थे। अब वे इसी विभाग के मंत्री होंगे। मंत्रिमंडल में सहरसा का प्रतिनिधित्व करने वाले दिनेश चन्द्र यादव दूसरी बार मंत्री बने हैं। इससे पूर्व वे 2005-2010 के बीच नीतीश मंत्रिमंडल के ही सदस्य रहे थे। उन्हें लघु सिंचाई एवं आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी मिली है। महागठबंधन सरकार में मधेपुरा के प्रो. चन्द्रशेखर (आरजेडी) आपदा प्रबंधन मंत्री थे। लगातार 27 वर्षों से सुपौल से चुनाव जीत रहे और तब से लगभग हर सरकार में मंत्री रहे बिजेन्द्र प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के बाद मंत्रिमंडल के वरीयता क्रम में तीसरी जगह मिली है। उन्हें पूर्व की तरह ऊर्जा के साथ-साथ उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की जिम्मेदारी मिली है।

चलिए एक नज़र डालते हैं सारे मंत्रियों और उनके विभागों पर –  1. नीतीश कुमार – गृह, सामान्य प्रशासन, निगरानी, 2. सुशील कुमार मोदी – वित्त, वाणिज्य कर, वन एवं पर्यावरण, आईटी, 3. बिजेन्द्र प्रसाद यादव – ऊर्जा, उत्पाद व मध्य निषेध, 4. प्रेम कुमार- कृषि, 5. नंदकिशोर यादव – पथ निर्माण, 6. राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह – जल संसाधन,  योजना विकास, 7. श्रवण कुमार – ग्रामीण विकास, संसदीय कार्य, 8. राम नारायण मंडल – राजस्व व भूमि सुधार, 9. जय कुमार सिंह – उद्योग व विज्ञान प्रौद्योगिकी, 10. मंगल पांडेय – स्वास्थ्य, 11. प्रमोद कुमार – पर्यटन, 12. कृष्ण नंदन वर्मा – शिक्षा, 13. महेश्वर हजारी – भवन निर्माण,  14. विनोद नारायण झा – पीएचईडी, 15. शैलेश कुमार – ग्रामीण कार्य, 16. सुरेश शर्मा – नगर विकास एवं आवास, 17. मंजू वर्मा – समाज कल्याण, 18. विजय कुमार सिन्हा – श्रम संसाधन, 19. संतोष कुमार निराला – परिवहन,  20. राणा रंधीर सिंह – सहकारिता, 21. खुर्शीद आलम उर्फ फिरोज अहमद – अल्पसंख्यक कल्याण व गन्ना उद्योग, 22. विनोद कुमार सिंह – खान व भूतत्व, 23. मदन सहनी – खाद्य एवं उपभोक्ता मामले, 24. कपिल देव कामत – पंचायती राज, 25. दिनेश चन्द्र यादव – लघु सिंचाई, आपदा प्रबंधन, 26. रमेश ऋषिदेव – अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग, 27. पशुपति कुमार पारस – पशु एवं मत्स्य पालन विभाग,  28. कृष्ण कुमार ऋषि – कला-संस्कृति,  29. ब्रिजकिशोर बिंद – पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा विभाग।

सभी मंत्रियों को ‘मधेपुरा अबतक’ की शुभकामनाएं। हमें उम्मीद है कि नीतीश कुमार अपनी नई टीम के साथ सात निश्चय समेत अपने सभी निश्चयों को पूरा करेंगे, जिनमें बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाना भी शामिल है। अब जबकि राज्य और केन्द्र का ‘दिल-दिमाग’ एक है, इसमें किसी व्यवधान या विलम्ब का प्रश्न नहीं उठना चाहिए।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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पुण्यतिथि पर भारतरत्न डॉ.कलाम याद किये गये

तुलसी पब्लिक स्कूल मधेपुरा के हॉल में कल गुरुवार को गाँधीयन मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की तीसरी पुण्यतिथि प्राचार्य डॉ.हरिनंदन प्रसाद यादव की अध्यक्षता में स्कूली बच्चों एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं के बीच श्रद्धापूर्वक मनाई गई |

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में डॉ.कलाम के सानिध्य प्राप्त समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी को आमंत्रित किया गया था | वही डॉ.मधेपुरी जिन्होंने कलाम साहब की जीवनी “स्वप्न ! स्वप्न !! और स्वप्न !!! एवं “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” की रचना की है | हाल ही में झारखंड सरकार ने डॉ.मधेपुरी की पुस्तक “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” के सर्वाधिक अंशों को वर्ग छः के पाठ्यक्रम में शामिल कर पढ़ाने की स्वीकृति प्रदान कर दी है |

Samajsevi Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute to Dr.Kalam on the occasion of his 3rd Punya Tithi in the Hall of Tulsi Public School Madhepura .
Samajsevi Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute to Dr.Kalam on the occasion of his 3rd Punya Tithi in the Hall of Tulsi Public School Madhepura .

यह भी बता दें कि पुण्य तिथि के अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने भारतरत्न डॉ.कलाम के जीवन वृत्त से अवगत कराते हुए बच्चों से यही कहा कि सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह जलना पड़ता है | आगे डॉ.मधेपुरी ने बच्चों के आत्मविश्वास को जगाने हेतु नेत्रहीन कंचन गावा एवं पोलियो ग्रस्त विल्मा की कहानी विस्तार से सुनाई और यह भी कहा कि आत्मविश्वास दुनिया में कोई भी चमत्कार कर सकता है, उन्होंने कहा कि जो औरों के लिए जीता है, जो देश के लिए जीता है वह कभी नहीं मरता |

डॉ.कलाम सरीखे विश्व विख्यात गांधीयन मिसाइलमैन के लिए भारत जैसे देश ही नहीं बल्कि विश्वस्तरीय संगठन यूएनओ द्वारा उनके जन्मदिन को वर्ल्ड स्टूडेंट डे के रुप में मनाये जाने की घोषणा की गई है | देश के प्रधानमंत्री और तमिलनाडु के महामहिम राज्यपाल जैसी हस्तियां उनकी पुण्यतिथि पर भव्य कार्यक्रमों में सिरकत करते हैं |

बता दें कि सर्वप्रथम डॉ.कलाम के चित्र पर पुष्पांजलि किया बच्चों ने, शिक्षकों एवं गणमान्यों ने | छात्र-छात्राएँ- आस्था प्रिया, प्रियांशु, शाहिल, अमन कुमार, सत्यमेव आदि ने भाषण देकर शब्दों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की | शिक्षक समुदाय से वरुण कुमार, विभीषण, नरेश, पूजा, रेणु, रिया, शिवानी, मुन्नू, निर्मल, आशुतोष झा, राहुल कुमार, मनीषा, उत्सव, गौरव, रोजी आदि ने अपना-अपना उद्गार व्यक्त किया |

अंत में डॉ.प्राचार्य डॉ.हरिनन्दन प्रसाद यादव द्वारा जहाँ धन्यवाद ज्ञापित किया गया वहीं रंगकर्मी विकास द्वारा कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रशंसनीय भूमिका अदा की गई |

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बिहार में हुई साकार नीतीश-‘मोदी’ सरकार

अभी चौबीस घंटे भी नहीं हुए और बिहार की सियासत ने नई करवट ले ली। कल सुबह 10 बजे नीतीश कुमार महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री थे, शाम 5 बजे अपनी पार्टी की बैठक करते हुए भी वे महागठबंधन सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, पर अभी घंटा भी नहीं बीता कि आबोहवा बदलनी शुरू हो गई और शाम के 7 बजते-बजते वे राज्यपाल को बतौर मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा सौंप कर मीडिया के सामने मुखातिब थे और आज सुबह 10 बजे वे एनडीए विधायक दल के नेता के तौर पर छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले रहे थे और उसके कुछ ही मिनटों बाद उनकी बगल की कुर्सी पर बतौर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी बैठे थे। जी हां, तेजस्वी-प्रकरण का पटाक्षेप चार साल बाद जेडीयू-भाजपा के दुबारा हाथ मिलाने और सत्ता में साथ वापस आने से हुआ।

बता दें कि आरजेडी के साथ चल रही तनातनी में अपनी ‘नाक’ झुकाने से इनकार करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार शाम जेडीयू की बैठक के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब है कि जेडीयू उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर सीबीआई के एफआईआर मामले में लगातार ‘बिन्दुवार स्पष्टीकरण’ और प्रकारांतर से इस्तीफे की बात कह रही थी, लेकिन आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने न केवल इस्तीफे से साफ इंकार किया बल्कि पूरे मामले पर न तो उन्होंने और न ही तेजस्वी ने ‘स्पष्टीकरण’ ही दिया। बकौल नीतीश कुमार ऐसी परिस्थिति में उनके लिए महागठबंधन सरकार को चलाना संभव नहीं रह गया था।

बहरहाल, नीतीश कुमार के इस्तीफे के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जुड़ने के लिए’ बधाई दी। इसके बाद लालू और उनकी पार्टी अभी ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाते हुए अपनी भड़ास ही निकाल रहे थे कि घटनाक्रम तेजी से बदला और भाजपा ने बिना देर किए नीतीश को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। फिर ये ख़बर भी आते देर न लगी कि 1 अणे मार्ग पर भाजपा और जेडीयू विधायकों की संयुक्त बैठक हो रही है और नीतीश कुमार को एनडीए का नेता चुन लिया गया है। महज चंद घंटों में बिहार की सियासत की तस्वीर पूरी तरह बदल गई और ये स्पष्ट हो गया कि मानसून सत्र से पहले नीतीश सरकार अपने नए अवतार में होगी।

नीतीश कुमार ने ये साबित किया कि अगर आपके पास अपनी ‘छवि’ की पूंजी हो और आप धुन के पक्के हों तो सितारे भी आपके मुताबिक चलने लगते हैं और आप एक ही दिन में मुख्यमंत्री का पद छोड़कर फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं। जहां तक लालू की बात है, उन्होंने जरा भी राजनीतिक परिपक्वता नहीं दिखाई। अगर उन्होंने समय रहते तेजस्वी से इस्तीफा दिलवा दिया होता तो न केवल उनका और तेजस्वी का कद बढ़ता और जनता की सहानुभूति उन्हें मिलती, बल्कि उनकी पार्टी सरकार में भी बनी रहती और महागठबंधन भी अटूट रहता। एक बात और, ऐसी स्थिति में वे वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी को उपमुख्यमंत्री बनवा कर अपने ‘माय’ समीकरण को भी मजबूत कर सकते थे। दूसरी ओर नीतीश कुमार हैं, उन्होंने समय की नब्ज को समझा और नैतिकता के साथ अपनी सरकार भी बचा ली। रही बात बेचारी कांग्रेस की, बिहार के इन दो बड़े दलों के बीच वो पिस कर रह गई है। जेडीयू-भाजपा के साथ आने के बाद अब उसके पास अधिक विकल्प ही नहीं हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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समाज सुधारक डॉ.विन्देश्वर पाठक ने किया कोसी के सत्यम को सम्मानित

‘वॉयस ऑफ़ बिहार’ के सुनहरे बैनर तले दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित बिहार प्रतिभा सम्मान समारोह में 2017 के सिविल सर्विसेज (UPSC) में चयनित कोसी अंचल के सहरसा जिले के सफल प्रतिभागी छात्र सत्यम ठाकुर को ‘बिहार गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया ख्याति प्राप्त समाज सुधारक एवं सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ.विन्देश्वर पाठक ने |

इस कार्यक्रम में बिहार में डीजीपी रहे, सुपर-30 के ख्याति प्राप्त शिक्षक अभयानन्द(IPS) जिन्होंने जिंदगी को कभी पीछे मुड़कर अफसोस की दृष्टि से नहीं देखा के साथ-साथ ‘वॉयस ऑफ़ बिहार’ के संस्थापक ब्रजेश ठाकुर और दिल्ली के डिप्टी मेयर सहित अन्य गणमान्यों के बीच सहरसा जिले के चैनपुर निवासी सत्यम ठाकुर को डॉ.बिंदेश्वर पाठक ने मोमेंटो देकर सम्मानित किया |

यह भी बता दें कि वर्ष 2017 के सिविल सेवा में बिहार से चयनित सत्यम सहित सोलह सफल प्रतियोगियों को तो सम्मानित किया ही गया साथ ही संगीत, साहित्य, खेल एवं उद्यम के क्षेत्र में बिहार का नाम रौशन करने वाले युवाओं को भी सम्मानित किया गया |

इस अवसर पर भारत के जूनियर हॉकी टीम को विश्वकप जिताने वाले कोच श्री हरेन्द्र सिंह, प्रसिद्ध लोकगीत गायिका वंदना भारद्वाज, लेखिका पल्लवी प्रकाश, युवा साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल आदि को भी सम्मानित किया गया |

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बिहार में कांग्रेस के साथ जेडीयू-आरजेडी वाला गठबंधन अब नग्नता की ओर…….!    

आज 25 जुलाई है और ऐतिहासिक दिन भी ! चयनित 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के महामहिम राष्ट्रपति के पदासीन होने वाले शपथ-ग्रहण समारोह का मंगल दिन |

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गठबंधन के बंधन से दबाव में आकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने एवं अन्य आवश्यक कार्यों को लेकर 4 दिनों की दिल्ली यात्रा पर हैं | वे महामहिम के शपथ ग्रहण समारोह में भी शरीक होंगे | सीएम नीतीश कुमार को रामनाथ कोविंद द्वारा विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है | भला क्यों नहीं, राष्ट्रपति चुनाव में नीतीश अपने तत्कालीन महामहिम राज्यपाल श्री कोविंद को भाजपा उम्मीदवार होने के बावजूद हर छोटे-बड़े नेता की बातें अनसुनी करते हुए आगे बढ़-चढ़कर मदद जो करते रहे थे |

हां ! जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से सीबीआई के फेरे में फंसने के बाद ‘बिन्दुबार स्पष्टीकरण’ देने को कहा गया वहीं दूसरी और दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने के दरमियान जीरो टॉलरेंस वाले सीएम नीतीश कुमार द्वारा पुनः यही कहा जा रहा है कि इतने आरोपों के साथ सरकार में बने रहने की स्वीकृति किसी को नहीं दी जा सकती है- सोचिए तो सही, अब कहने को शेष रह ही क्या जाता है |

यह भी बता दें कि जहाँ एक ओर नीतीश सरकार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी फिलहाल दिल्ली से दौलताबाद करते हुए अपने बचाव के रास्ते तलाशने में लगे हैं यानि बड़े-बड़े वकीलों से सलाह ले रहे हैं तो कभी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर जदयू-राजद के बीच मध्यस्थता करने हेतु अनुरोध पर अनुरोध कर रहे हैं- वहीं दूसरी ओर एनडीए गठबंधन के शीर्ष नेताओं के बीच इस बात की चर्चा भी कल शाम से दिल्ली में जोर पकडने लगी है कि नीतीश कुमार को पार्टनर ट्रीट किया जाय या अपोजीशन……..!

अंत में यह भी जान लें कि नीतीश-तेजस्वी प्रकरण में तल्ख हो चुके रिश्तों को मुलायम किये जाने वाली कोशिशों का सफल नहीं होना, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद द्वारा बेटे उप मुख्यमंत्री तेजस्वी के इस्तीफा देने से साफ-साफ इंकार करना और जीरो टॉलरेंस वाले मुख्यमंत्री व आरोपों से घिरे उप मुख्यमंत्री द्वारा दिल्ली दरबार में हाजिरी पर हाजिरी लगाना- कुल मिलाकर बिहार की राजनीति में कांग्रेस के साथ जदयू व आरजेडी वाला गठबंधन नग्नता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है……….|

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प्रणब दा ने दिलाई सहिष्णुता, बहुलतावाद और अहिंसा की याद

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बतौर राष्ट्रपति आज देश को आखिरी बार संबोधित किया। विचार, विद्वता और विनम्रता से ओतप्रोत इस संबोधन में उन्होंने कहा कि पिछले पचास वर्षों के सार्वजनिक जीवन के दौरान, भारत का संविधान मेरा पवित्र ग्रंथ रहा है, भारत की संसद मेरा मंदिर रही है और भारत की जनता की सेवा मेरी अभिलाषा रही है। उन्होंने कहा, जैसे-जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है, उसकी उपदेश देने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, परंतु मेरे पास देने के लिए कोई उपदेश नहीं है। मैंने देश को जितना दिया, उससे कहीं अधिक पाया है। इसके लिए, मैं भारत के लोगों के प्रति सदैव ऋणी रहूंगा।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने विदाई भाषण में देश की सहिष्णुता, बहुलतावाद और अहिंसा की शक्ति को खास तौर पर रेखांकित किया। उन्होंने कहा, हम एक-दूसरे से तर्क-वितर्क कर सकते हैं, सहमत-असहमत हो सकते हैं, लेकिन विविध विचारों की मौजूदगी को हम नकार नहीं सकते हैं। अनेकता में एकता को देश की पहचान बताते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न विचारों को ग्रहण करके हमारे समाज में बहुलतावाद का निर्माण हुआ है। हमें सहिष्णुता से शक्ति प्राप्त होती है। प्रतिदिन हम आसपास बढ़ती हुई हिंसा को देखते हैं तो दुख होता है। हमें इसकी निंदा करनी चाहिए। हमें अहिंसा की शक्ति को जगाना होगा। महात्मा गांधी भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में देखते थे जहां समावेशी माहौल हो। हमें ऐसा ही राष्ट्र बनाना होगा।

देश के 13वें राष्ट्रपति ने अपने अंतिम संबोधन में जलवायु परिवर्तन पर भी चिन्ता जताई। उन्होंने कहा, पर्यावरण में बदलाव के कारण कृषि पर असर पड़ा है। इसके लिए हमलोगों को मिलकर काम करना होगा। तरक्की हासिल करने के लिए महामहिम मुखर्जी ने शिक्षा और शिक्षण-संस्थानों को विश्वस्तर बनाने की बात कही। बकौल मुखर्जी हमारे विश्वविद्यालय केवल नोट्स बनाने के केन्द्र नहीं बनने चाहिएं, बल्कि यहां रचनात्मकता और शोध को जगह मिलनी चाहिए।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, मैंने पिछले पांच वर्षों में अच्छा माहौल बनाने की कोशिश की। अब मैं विदा हो रहा हूं। कल मैं जब आपसे बात कर रहा होऊंगा तो मैं भारत का राष्ट्रपति नहीं बल्कि एक आम नागरिक रहूंगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा सम्मान मातृभूमि का नागरिक होने में है। हम सभी भारत मां के बच्चे हैं। हमें जो भी जिम्मेदारी मिले, हम सब उसको पूरी निष्ठा से निभाएं। देश की उन्नति ही हमारा ध्येय होना चाहिए।

गौरतलब है कि 81 वर्षीय प्रणब मुखर्जी अब 340 कमरों वाला राष्ट्रपति भवन छोड़कर 10 राजाजी मार्ग पर रहेंगे। इस दोमंजिला बंगले में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी अपनी सेवानिवृत्ति के बाद से निधन होने तक रहे थे। देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मंगलवार को दोपहर 12 बजे शपथ लेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

 

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कर्नाटक को अलग झंडा क्यों चाहिए ?

वोट की राजनीति के लिए दलों और नेताओं ने देश को धर्म, सम्प्रदाय, वर्ण, नस्ल, जाति, उपजाति, भाषा, बोली, क्षेत्र जैसी न जाने कितनी ही चीजों में बांट दिया। बंटने और बांटने की ये प्रक्रिया इतिहास के हर दौर में चली है, लेकिन अब इस प्रक्रिया ने वीभत्स रूप ले लिया है। अलगाववादी मानसिकता का इसे चरम ही कहा जाएगा कि अब भारत के किसी राज्य में अलग झंडे की मांग उठी है। हद तो इस बात की है कि यह मांग वहां के मुख्यमंत्री ने उठाई और इसके लिए बकायदा कमिटी बनाकर केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा। आजादी के बाद से अब तक एक कश्मीर के अलग झंडे की कितनी कीमत हमें चुकानी पड़ी है, यह किसी से छिपा नहीं, ऐसे में कर्नाटक से उठी ये आवाज कितनी खतरनाक हो सकती है, यह बताने की जरूरत नहीं।

बहरहाल, कर्नाटक के अपने अलग झंडे के प्रस्ताव को वहां की मौजूदा कांग्रेस सरकार के मुखिया सिद्धारमैया की अगले साल विधानसभा चुनावों की जमीन तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि यह प्रस्ताव फिलहाल शुरुआती स्तर पर ही है।

गौरतलब है कि याचिकाकर्ताओं के एक समूह के सवालों के जवाब में राज्य सरकार ने राज्य के लिए “कानूनी तौर पर मान्य झंडे का डियाइन” तैयार करने के लिए अधिकारियों की एक समिति तैयार की थी। दिलचस्प बात यह है कि याचिका 2008-09 के बीच उस वक्त तैयार की गई थी जब कर्नाटक में भाजपा की सरकार थी। उस वक्त भाजपा सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट को बताया था कि राज्य का अलग झंडा होना देश की एकता और अखंडता के खिलाफ है।

अब जबकि कर्नाटक में 2018 में विधानसभा चुनाव होने हैं, कर्नाटक कांग्रेस की कोशिश है कि झंडे के बहाने ‘कन्नड़ अस्मिता’ को हवा दी जाए। वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मामले को उस समय तूल दे दिया जब उन्होंने राज्य के अलग झंडे की मांग का विरोध करने वाली भाजपा की आलोचना की और सवाल उठाया कि क्या संविधान में कोई ऐसा प्रावधान है जो राज्य को अलग झंडे को अपनाने से रोकता है? हालांकि बता दें कि कर्नाटक सरकार की इस मांग को केन्द्रीय गृह मंत्रालय ठुकरा चुका है। कांग्रेस हाईकमान भी इससे पल्ला झाड़ चुका है। यहां तक कि कांग्रेस आलाकमान ने बकायदा कर्नाटक कांग्रेस को इसके लिए फटकार भी लगाई है।

इस मामले के चर्चा में आने के बाद स्वाभाविक तौर पर नेताओं और दलों की प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। अपने नेतृत्व की राय से अलग कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि “राज्य के लिए अलग झंडे का कदम एक अच्छी पहल होगी।” वैसे उन्होंने आगे यह जरूर कहा कि “बशर्ते यह देश में अलगाव का प्रतीक न बने।” बकौल थरूर अगर राज्य का झंडा राज्य से जुड़ाव का प्रतीक है तो देश के सभी राज्यों के पास अपना झंडा होना चाहिए।

उधर शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कर्नाटक सरकार के राज्य के लिए अलग झंडे की मांग की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को बर्खास्त कर देना चाहिए क्योंकि यह कदम इतिहास और पार्टी के आदर्शों के उलट है। शिवसेना ने इसे ‘राजद्रोह’ की संज्ञा देते हुए केन्द्र से कर्नाटक सरकार को भंग करने या राज्य को मिलने वाली सभी सहायताओं को तत्काल बंद करने की भी मांग की।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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दिल्ली दौरे पर नीतीश

बीते मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने जिस तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की और तथाकथित तौर पर अपनी बातें रखीं, उसके बाद लगा कि बिहार की राजनीतिक अनिश्चितता खत्म हो गई है। लेकिन एक बार फिर जेडीयू द्वारा तेजस्वी से ‘बिन्दुवार स्पष्टीकरण’ देने की बात कहने और इसी दौरान जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के चार दिनों की यात्रा पर दिल्ली जाने से माहौल एक बार फिर गर्म होता दिख रहा है। मजे की बात यह कि इस दौरान उनकी मुलाकात कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दोनों के साथ होनी है।

ख़बरों के मुताबिक शनिवार शाम नीतीश टी पार्टी पर राहुल गांधी से मिलेंगे और फिर हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सम्मान में आयोजित डिनर पार्टी में शिरकत करेंगे। इसके बाद 25 जुलाई को वे नव निर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। स्वाभाविक तौर पर कोविंद ने उन्हें खास तौर पर न्योता भेजा है।

बहरहाल, सियासी तौर पर नीतीश के इस दिल्ली दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। खास तौर पर राहुल से उनकी मुलाकात में कुछ नए समीकरण के सामने आने की संभावना है, क्योंकि नीतीश के सामने एक ओर भ्रष्टाचार को लेकर उनकी जीरो टॉलरेंस की नीति है तो दूसरी ओर 2019 की संभावनाओं के मद्देनज़र महागठबंधन को बचाने की चुनौती। ऐसे में कांग्रेस का रुख महत्वपूर्ण हो जाता है। गौरतलब है कि तेजस्वी प्रकरण पर मचे घमासान में कांग्रेस मध्यस्थ की भूमिका निभा रही है।

बता दें कि उधर तेजस्वी भी इन दिनों दिल्ली में हैं और 28 जुलाई से बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र शुरू होने से पहले अपने ‘बचाव’ की तैयारी में जोरशोर से लगे हैं। बताया जाता है कि इस दौरान वकीलों से राय लेने के साथ-साथ मौजूदा स्थिति पर वे राहुल गांधी से भी ‘सलाह’ लेंगे।

कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति के लिए अगले कुछ दिन बेहद अहम हैं। देखें सियासत कब कौन सी करवट लेती है!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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‘इंसान के खाने लायक नहीं भारतीय रेलवे का खाना’: सीएजी

एक आम भारतीय की ज़िन्दगी का अभिन्न हिस्सा है भारतीय रेलवे। रेल न हो तो ज़िन्दगी रुक सी जाएगी हमारी। 2015-16 के एक आंकड़े के अनुसार हमारे देश में हर दिन 13,313 पैंसेजर ट्रेन लगभग 7000 स्टेशनों के बीच पटरी पर दौड़ती है, जिनमें लगभग दो करोड़ बीस लाख लोग सफर करते हैं। हमें इस बात का गौरव हासिल है कि भारतीय रेलवे दुनिया में चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। ऐसे में अगर आपके सामने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी – Comptroller & Auditor General of India) की यह रिपोर्ट आए कि भारतीय रेलवे के खाने का स्तर लगातार गिर रहा है और इस हद तक कि कहीं-कहीं यह इंसान के खाने लायक नहीं है, तो आप भीतर से हिल से जाते हैं।

जी हां, देश के 74 रेलवे स्टेशनों और 80 ट्रेनों की जांच के बाद संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने कहा है कि ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को परोसी जा रही चीजें खाने लायक नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एक ओर ट्रेन के भीतर और स्टेशनों पर परोसी जा रही चीजें प्रदूषित हैं तो दूसरी ओर डिब्बाबंद और बोतलबंद वस्तुएं एक्सपायरी डेट के बाद भी बेची जा रही हैं।

रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि ट्रेनों और स्टेशनों पर साफ-सफाई का बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखा जाता है। कूड़ेदानों को न तो ढक कर रखा जाता है और न ही इनकी नियमित सफाई होती है। रिपोर्ट के मुताबिक पेय पदार्थों में साफ पानी का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है और खाने-पीने की चीजों को धूल-मक्खी से बचाने के लिए ढकने की व्यवस्था नहीं है। साथ ही रिपोर्ट के अनुसार ट्रेनों के अंदर चूहे और तेलचट्टों का पाया जाना भी एकदम आम बात है।

इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रेलवे लंबी दूरी की कई ट्रेनों में पैंट्री कार उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक जिन ट्रेनों में पैंट्री कार उपलब्ध हैं उनमें जहां एक ओर बेची जा रही चीजों का रेट कार्ड उपलब्ध नहीं है, वहीं दूसरी ओर चीजें ऊंची कीमतों पर बेची जा रही हैं।

2014 में रेलवे जैसा बड़ा मंत्रालय मिलने के बाद सुरेश प्रभु ने जोरशोर के साथ अपना काम शुरू किया था। ट्विटर के जरिए उन्होंने ‘चमत्कृत’ करने वाले कई कार्य किए। रेलवे के कामकाज के तरीकों में वे जिस तरह सुधार का प्रयास करते दिखे, उसे देखकर लगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन पर सही ही भरोसा जताया है। लेकिन सीएजी की इस रिपोर्ट ने उनकी तमाम कोशिशों को नाकाफी साबित कर दिया। खासकर ट्रेनों में कैटरिंग की व्यवस्था में सुधार होने के उनके दावों की पोल बुरी तरह खुल गई है। अब सीएजी के सवालों से मोदी सरकार कैसे निबटती है, यह देखने की बात होगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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