चुनावी महासमर की तीन सीटें तय करेंगी लालू की अहमियत

इस संसदीय चुनावी महासमर 2019 में बिहार प्रदेश की 3 सीटें- मधेपुरा, पाटलिपुत्र और सारण लालू प्रसाद की सियासी अस्तित्व की पैमाइश कर देंगी। भला क्यों नहीं, इन तीनों सीटों से लालू प्रसाद के राजनीतिक करियर का कोई-न-कोई सूत्र जुड़ा हुआ दिखता है। इन तीनों सीटों से लालू प्रसाद यादव चुनाव लड़ चुके हैं। मधेपुरा में राजनीति के सिद्धहस्त लालू को जिस शरद यादव ने राजग के उम्मीदवार के रूप में पटकनी दी थी उसी शरद को हाथ में लालटेन पकड़ा कर आज मझधार से निकालने में लगे हैं लालू।

बता दें कि 2014 के चुनाव में राजद के पप्पू यादव से जो शरद यादव शिकस्त खा चुके हैं….. वही दोनों इस बार आमने-सामने हैं। पप्पू यादव लोगों के बीच यही कहते हैं- “आपकी सेवा करने वाला इस माटी का बेटा पप्पू चाहिए या वोट लेकर दिल्ली में रहने वाला। लालू का विरोध करने वाला आज उनके नाम पर वोट मांग कर बैतरनी पार करने में लगा है। ……. लोगों को समझना होगा कि बाढ़ हो या सुखाड़ हर समय बेटे की तरह यह पप्पू आपलोगों की सहायता में तत्पर रहता है।…… फैसला आपको करना है….. निर्णय आप को लेना है। मधेपुरा की आजादी के लिए मतदान करेंगे और लालू के लिए जिस पप्पू ने गोली खाई उसे पुनः सेवक बनाने के लिए मतदान करेंगे।”

यह भी जान लें कि एनडीए की ओर से प्रत्याशी बनाये गये कोसी के विकास पुत्र के नाम से लोकप्रिय दिनेश चन्द्र यादव बिना किसी शिकवा-शिकायत में फंसे बस यही कहा करते हैं कि सीएम नीतीश कुमार के शासन में प्रदेश विकसित होगा और पीएम नरेंद्र मोदी के शासन में देश सुरक्षित रहेगा।

और हाँ ! पाटलिपुत्र में कभी लालू ने अपने ही सहयोगी रंजन यादव से पटकनी खाई थी जब प्रो.रंजन यादव जदयू के प्रत्याशी थे। बाद में लालू के अभिन्न रामकृपाल राजद छोड़ भाजपा में शामिल हो लालू की बेटी मीसा भारती को पराजित कर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो गये…. इस बार फिर दोनों आमने-सामने हैं। यह मुकाबला लालू बनाम रामकृपाल ही बोलने लगे हैं लोग।

अंत में बात आती है सारण की सीट। जब सारण को छपरा के नाम से जाना जाता था तब लालू छपरा से 4 बार सांसद चुने गए थे। पिछली बार राबडी देवी यहाँ से भाजपा के राजीव प्रताप रूडी से पराजित हो गई। इस बार वहीं से लालू के समधी चंद्रिका राय (पुत्र दरोगा राय पूर्व सीएम) को राजद का उम्मीदवार बनाया गया है। ये तीन सीटें लालू के अस्तित्व से जुड़ी है जो 10 अप्रैल को लालू की जमानत के बाबत सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद ही उसकी दशा और दिशा तय करेगी।

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