नेहरू युवा केन्द्र द्वारा आयोजित की गयी- एक दिवसीय जिला युवा सम्मेलन

नेहरू युवा केन्द्र की ओर से बुधवार को मधेपुरा महाविद्यालय के हॉल में समन्वयक अजय कुमार गुप्ता की टीम द्वारा एक दिवसीय जिला युवा सम्मेलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। समन्वयक श्री गुप्ता ने सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए एक ओर अतिथियों का स्वागत किया तो दूसरी ओर प्रतिभागियों को उत्साहित व प्रोत्साहित भी किया।

बता दें कि उद्घाटन समारोह का शुभारंभ सदर प्रखंड बीडीओ आर्य गौतम, मुख्य अतिथि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, विशिष्ट अतिथि अभिषद सदस्य डॉ.जवाहर पासवान, प्रो.संजय परमार, सोनी प्रिया आदि ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए बीडीओ ने कहा कि युवाओं को विशिष्ट पहचान बनाने के लिए बड़ी मेहनत आवश्यक है। उन्हें ऐसे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेना सर्वाधिक श्रेष्ठकर है।

मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने विस्तार से किये गये अपने संबोधन में यही कहा कि युवाओं को अनुशासित होकर अपनी मंजिल हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि जो कोई संकल्पशक्ति के साथ निरंतर आगे बढ़ता रहेगा वही मंजिल हासिल करेगा वैसे युवाओं को समाज व देश के उत्थान के लिए सामने आना होगा।

विशिष्ट अतिथि डॉ.जवाहर पासवान एवं प्रो.संजय परमार ने यही आह्वान किया कि युवा अपनी शक्ति को पहचाने और आगे बढ़ने के लिए उनके अंदर की छुपी प्रतिभा को उजागर करने के लिए यह नेहरू युवा केंद्र को एक सशक्त माध्यम है ही।

मंच संचालन किया सुधांशु कुमार ने। स्वागत गान रोशन कुमार के निदेशन में प्रस्तुत किया शिवाली…… चन्दा रानी ने। डॉ.भगवान कुमार मिश्रा, डॉ.वैजवश यादव, सांख्यिकी पदाधिकारी उपेंद्र कुमार , योग प्रशिक्षक राकेश भारती, गरिमा उर्विशा, राहुल यादव, जय कुमार , रोहित कुमार , पूजा कुमारी , वैभव विकास, आलोक कुमार सहित काफी संख्या में जिले के प्रायः सभी प्रखंडों के युवाजन उपस्थित थे।

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भारत अब अंतरिक्ष का चौथा स्पेस सुपर पावर बन गया

भारत आज अमेरिका, रूस और चीन की तरह ‘स्पेस पावर क्लब’ के चौथे पायदान पर शामिल हो गया है। अचूक निशाने के साथ धरती से 300 किलोमीटर ऊपर के टारगेट को तीन मिनट में ध्वस्त करने की क्षमता भारत ने अपने ‘एंटी-सैटेलाइट मिसाइल’ परीक्षण “मिशन शक्ति” के द्वारा पूरा कर लिया है।

बता दें कि भारतीय वैज्ञानिकों ने बंगाल की खाड़ी में (पूर्वी तट के समीप स्थित) डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम उपग्रह प्रक्षेपण परिसर से एंटी-सैटेलाइट मिसाइल को ‘हिट टू किल’ मोड में छोड़ा था- 27 मार्च की सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने परीक्षण के लिए भारत के ही जिस सैटेलाइट को निशाना बनाया था वह अभी लाइव सैटेलाइट था यानि फिलहाल सक्रिय था। उसे तीन मिनट में ही ‘हिट टू किल’ मोड में छोड़े गए एंटी-सैटेलाइट मिसाइल द्वारा बंगाल की खाड़ी में सफलता पूर्वक गिरा दिया गया।

यह भी बता दें कि जब ‘लाइव सैटेलाइट’ को मार गिराने की अभूतपूर्व तकनीकी क्षमता भारत ने हासिल की तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश वासियों को खुद से रेडियो, टेलीविज़न एवं सोशल मीडिया के जरिए जानकारी देने का काम किया। खुशी की बात तो यह है कि एंटी सैटेलाइट मिसाइल सिस्टम सौ फ़ीसदी भारत द्वारा ही विकसित किया गया है।

यह भी जानिए कि जिस ऊँचाई पर भारतीय मिसाइल वैज्ञानिकों द्वारा वर्तमान परीक्षण के क्रम में अपने लाइव सैटेलाइट को मार गिराया गया उसी आर्बिट में आमतौर पर मोबाइल नेटवर्क प्रदान करने वाले स्पेस स्टेशन तैनात होते हैं। तभी तो डॉ.कलाम के करीबी समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि इस परीक्षण से अंतरिक्ष में हमारे सेटेलाइटों की सुरक्षा करने की क्षमता भी प्रदर्शित होती है…. जिसके लिए डॉ.मधेपुरी ने गांधीयन मिसाइल मैन भारत रत्न डॉ.कलाम को याद करते हुए वैज्ञानिकों को कोटि-कोटि साधुवाद दिया।

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तेजप्रताप ने राजद में अपने पद से दिया इस्तीफा

बिहार में महागठबंधन का सबसे बड़ा घटक दल राजद महापरेशानी में हैं। सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन के दलों खासकर कांग्रेस से चल रही राजद की तनातनी अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि सीटों को ही लेकर लालू परिवार का आंतरिक कलह सतह पर आ गया और सीट बंटवारे से नाराज राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने छात्र राजद के संरक्षक पद से इस्तीफा दे दिया। वो तो गनीमत रही कि मां राबड़ी देवी की पहल पर उन्होंने पार्टी लाइन से अलग हटकर कुछ उम्मीदवारों की घोषणा के लिए बुलाई गई प्रेस-कांफ्रेंस स्थगित कर दिया। नहीं तो स्थिति बद से बदतर हो गई होती।

बहरहाल, तेजप्रताप ने ट्वीट के माध्यम से अपने इस्तीफे को सार्वजनिक किया। साथ में यह भी कहा कि “नादान हैं वो लोग जो मुझे नादान समझते हैं। कौन कितना पानी में है सबकी है खबर मुझे।“ कहने की जरूरत नहीं कि तेजप्रताप के इन शब्दों के संकेत कुछ ठीक नहीं।

दरअसल तेजप्रताप अपनी बहन मीसा भारती को पाटलिपुत्र से लड़ाने को लेकर मुखर होकर बोलते रहे हैं। लेकिन राजद खेमे से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक तेजस्वी इस सीट से मनेर के विधायक भाई वीरेन्द्र को लड़ाने का मन बना चुके हैं और संभवत: लालू भी इसके लिए तैयार हो गए हैं। इसी तरह बताया जा रहा है कि तेजप्रताप अपने मामा साधु यादव के लिए वाल्मीकिनगर सीट चाहते थे, लेकिन इस पर न तो राजद में सहमति बनी और न ही घटक दलों ने इसके लिए हामी भरी। पार्टी के इस रुख से नाराज तेजप्रताप ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुला लिया। जानकारी के अनुसार वे पार्टी लाइन से हटकर जहानाबाद और शिवहर से अपनी पसंद का उम्मीदवार घोषित करना चाहते थे, लेकिन प्रेस कांफ्रेंस स्थगित कर दिया गया। इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को जमकर मशक्कत करनी पड़ी।

इससे पहले लोकसभा चुनाव को लेकर आरजेडी ने अपने स्टार प्रचारकों के नाम की घोषणा की थी लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सूची से राज्यसभा सांसद मीसा भारती का नाम नदारद था। इस बात को लेकर भी लालू परिवार और पार्टी में घमासान मचा है। इस घटना ने तेजस्वी-तेजप्रताप के बीच बढ़ी हुई दूरी को और बढ़ाने का काम किया था।

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मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र 13 में होगा त्रिकोणीय मुकाबला

हाई प्रोफाइल मधेपुरा संसदीय क्षेत्र में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होगा- शरद यादव, दिनेश यादव और पप्पू यादव के बीच। कोई किसी से कम नहीं है।

यह भी बता दें कि मधेपुरा से दो बार एमपी रहे पप्पू यादव जहाँ 28 मार्च को इस बार अपना नामांकन दाखिल करेंगे वहीं एनडीए प्रत्याशी के रूप में बिहार सरकार के कई विभागों में मंत्री व तीन बार सांसद रहने का अनुभव लिए – जनता द्वारा दिए गये विकास पुत्र का तमगा पहनकर दिनेश चन्द्र यादव 29 मार्च को नामांकन का पर्चा भरेंगे और महागठबंधन प्रत्याशी बने शरद यादव चार बार मधेपुरा का एमपी रहकर इस बार 3 अप्रैल को नामजदगी का पर्चा दाखिल करेंगे। विडंबना यह है कि जो शरद यादव जदयू के तीर से लालू के लालटेन पर निशाना लगाता रहा वहीं इसबार लालू के लालटेन को राहुली हाथों में थामकर घर-घर घूमता और गली-गली फिरता नजर आयेगा।

मधेपुरा में सर्वप्रथम एनडीए उम्मीदवार दिनेश चंद्र यादव ने (26 मार्च को) नामांकन से पूर्व सभी घटकों के कार्यकर्ताओं की 8 घंटे की मैराथन बैठक में अपनी जानदार और शानदार उपस्थिति दी जिसमें विभिन्न विभागों के मंत्री रहे आलमनगर के लोकप्रिय विधायक नरेंद्र नारायण यादव, बिहारीगंज के जनप्रिय विधायक निरंजन कुमार मेहता सहित पूर्व विधायक अरुण कुमार व मणिन्द्र कुमार मंडल उर्फ ओम बाबू और जदयू के नेता डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी आदि अनगिनत सीनियर लीडर्स मौजूद दिखे।

बता दें कि अध्यक्ष मंडल की भूमिका में जदयू के जिलाध्यक्ष प्रो.बिजेन्द्र नारायण यादव, बीजेपी के स्वदेश कुमार एवं एलजेपी के दिनेश पासवान की भूमिका सराहनीय रही। व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त थी। तेरहो प्रखंड के तीनों दलों के सभी प्रकोष्ठों एवं समस्त महिला सेलों के पदाधिकारीगणों में से लगभग 80 लोगों ने दिनेश बाबू के प्रति आस्था और विश्वास जताते हुए हृदयोद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि अब कोसी के विकास में और भी तेजी आयेगी। बैठक के दौरान तीनों जिला अध्यक्षों की बेहतर साझीदारी दिखी। फिर भी पूर्व प्रमुख उपेंद्र प्रसाद यादव एवं सियाशरण यादव आदि को समय नहीं दे पाने के कारण संचालक को बार-बार माफी मांगते हुए देखा गया।

जहाँ दिनेश चन्द्र यादव ने कहा कि कभी विरान और टापू बना यह कोसी प्रक्षेत्र एक दशक से विकास की नित नई कहानी लिख रहा है- दो एनएच के अलावे फोरलेन, कोसी महासेतु और विजय घाट व बलुआहा घाट पर पुल आदि…. वहीं विधायक नरेन्द्र नारायण यादव, निरंजन मेहता, मनिंद्र म॔डल, अरुण कुमार सहित जिला प्रभारी मनोज सिंह व विजय शंकर चौधरी, नरेश पासवान, अशोक चौधरी, भगवान चौधरी, बीबी प्रभाकर, आनंद मंडल, प्रो.सुजीत मेहता, प्रो.गुलहसन एवं समस्त कार्यकर्ताओं ने यही कहा कि हमारा उम्मीदवार दिनेश चन्द्र यादव कोसी इलाके में विकास पुत्र के रूप में स्थापित हो चुका है। क्षेत्र की समस्त जनता एवं गरीबों का भी आशीर्वाद दिनेश यादव को प्राप्त है- जो धरती पुत्र दिनेश को संसद भवन तक पहुंचाने का बार-बार संकल्प लेता दिखता रहा तथा इतिहास रचने का नारा बार-बार दोहराता रहा।

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि इतिहास रचने से पहले यहाँ का इतिहास तो जान लें सभी। उन्होंने कहा कि 1952 से आज तक लोगों ने 20 बार एमपी चुना है जिसमें पहला एमपी जेबी कृपलानी और किराय मुशहर। फिर ललित नारायण मिश्र और भोला सरदार-भूपेन्द्र नारायण मंडल-लहटन चौधरी…. तीन बार बीपी मंडल…. 4 बार शरद यादव , दो-दो बार आरपी यादव, लालू प्रसाद और पप्पू यादव और एक-एक बार डॉ.आर.के.यादव रवि एवं डॉ.महावीर प्रसाद यादव। अंत में डॉ.मधेपुरी ने डॉ.कलाम को उद्घृत करते हुए कहा कि सूरज की तरह चमकने के लिए पहले सूरज की तरह जलना पड़ता है। बोलिए ! आप अपने प्रत्याशी दिनेश यानि सूरज को चमकाने हेतु क्षेत्र में सूरज की तरह जलने के लिए तैयार हैं ? सबों ने हाथ उठाकर “हाँ” कहा….. संकल्प लिया। 7:00 बजे से पूर्व ही चुनाव आयोग के निर्देशानुसार अध्यक्ष प्रो.बिजेन्द्र नारायण यादव द्वारा सभा समाप्ति की घोषणा कर दी गयी।

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मधेपुरा में मनी डॉ.लोहिया की 110वीं जयन्ती

मधेपुरा के सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालय टी.पी. कॉलेज के प्राचार्य डॉ.के.पी.यादव की उपस्थिति में छात्र जिला अध्यक्ष सोनू की अध्यक्षता में विश्व के महान समाजवादी चिंतक डॉ.राम मनोहर लोहिया की 110 वीं जयंती मनाई गई। संसदीय चुनावी आचार संहिता के चलते सादे समारोह के रूप डॉ.लोहिया की जयंती मनाई गयी। अपने अध्यक्षीय भाषण में छात्रनेता सोनू ने कहा कि 17 मई 1939 को आचार्य नरेंद्र देव की अध्यक्षता में समस्त समाजवादियों की उपस्थिति में अंजुमन-ए-इस्लामिया हॉल में यानि पाटलिपुत्र की धरती पर सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना हुई थी। छात्र प्रतिनिधि माधव, नवीन, प्रवीण, जापानी आदि ने भी उद्गार व्यक्त किया।

बता दे कि प्राचार्य डॉ.के.पी.यादव ने कहा कि जब भी डॉ.लोहिया के पिताश्री महात्मा गांधी से मिलने जाया करते तो बालक राम मनोहर को भी साथ ले जाते। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि गांधी जी के विराट व्यक्तित्व का लोहिया जी पर व्यापक असर पड़ा।

यह भी जानिए कि जब डॉ.लोहिया के करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से डॉ.राम मनोहर लोहिया के मधेपुरा आने की चर्चा की गई तो डॉ.मधेपुरी ने समाजवादी चिंतक भूपेन्द्र नारायण मंडल की चर्चा करते हुए यही कहा-

वर्ष 1964 में रासबिहारी विद्यालय के ऐतिहासिक मैदान में डॉ.लोहिया ने खुद यही कहा था….. हे मधेपुरा वासियों जानते हो मैं बार-बार मधेपुरा क्यों आता हूं……. इसीलिए कि मधेपुरा की धरती ने एक ऐसे सपूत को पैदा किया है जो भारतीय संसद में गरीबों के सवाल को निर्भीकता पूर्वक उठाता रहा है और आगे भी उठाता रहेगा……. तुम्हारा यह भूपेन्द्र नारायण मंडल सच्चा हीरा है…… यह हमेशा गरीबों के घर में दिया जलाता रहेगा और अंधकार मिटाता रहेगा…….।

डॉ.मधेपुरी ने आगे यही कहा कि डॉ.लोहिया देश की आजादी के लिए जीवन न्योछावर करने वाला महान योद्धा रहा है। देश की राजनीति में बदलाव लाने वाला शलाका पुरुष का नाम है डॉ.लोहिया। वर्ष 1967 में आधे दर्जन राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकार बनाने वाले डॉ.लोहिया के नेतृत्व की चर्चा आज भी हर जगह होती है।

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तो अब मुलायम स्टार प्रचारक भी नहीं ?

लोकसभा चुनाव के लिए बसपा के बाद अब समाजवादी पार्टी ने भी स्टार चुनाव प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कुल 40 स्टार प्रचारक हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस सूची में सपा संरक्षक और अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव का नाम नदारद है। 90 के दशक में सपा की नींव रखने से लेकर उसे सत्ता के शिखर तक पहुँचाने वाले मुलायम के हाथ से पार्टी की कमान तो पहले ही निकल चुकी थी और अब 40 प्रचारकों की सूची में भी उनकी अनुपस्थिति है। इस बात को लेकर सियासी गलियारे में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
गौरतलब है कि सपा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के हस्ताक्षर वाली स्टार प्रचारकों की सूची में अखिलेश यादव के अलावा उनकी पत्नी डिंपल यादव भी हैं। इसके अलावा स्वयं रामगोपाल यादव, वरिष्ठ नेता आजम खान और जया बच्चन के भी नाम सूची में शामिल हैं। सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी और नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री अहमद हसन, जावेद अली खान, तेज प्रताप यादव और प्रदेश अध्यक्ष नरेश पटेल को भी इस सूची में जगह मिली है।
बहरहाल, इस बीच समाजवादी पार्टी ने दो अन्य सीटों से अपने कैंडिडेट घोषित किए हैं। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव आजमगढ़ से और आजम खान रामपुर सीट से चुनाव लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही एसपी ने अपने कोटे की 37 में से 19 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।

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केवल क्रान्तिकारी नहीं थे सरदार भगत सिंह

23 वर्ष की अल्पायु में ही सरदार भगत सिंह ने अपने दो क्रान्तिकारी साथियों राजगुरु एवं सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फाँसी के फंदे को हंसते-हंसते चूम लिया। फाँसी के फंदों को चूमने के वक्त भी तीनों के चेहरे पर एक अलग किस्म की मुस्कान थी।

बता दें कि फाँसी की तिथि के चंद रोज कबल जेल के गेट पर मिलने आई अपनी माँ से भगत सिंह ने पूछे गये सवाल के जवाब में यही कहा था-

बेबे जी ! फाँसी के बाद मेरे शरीर को ले जाने के लिए तुम नहीं आना…… क्योंकि यदि ममतावश तुम्हारी आंखों से उस समय आँसू टपक पड़े और कोई उंगली उठाकर यह कहने लगे कि देखो…… भगत सिंह की माँ रो रही है….. तो मेरी आत्मा कलप उठेगी और मेरी देश भक्ति पर ऐसा दाग लग जायगा जिसे तेरे आँसू कभी नहीं धो पायेंगे ।

यह जान लें कि भगत सिंह पंजाब के जिस जिले एवं गाँव में जन्म लिए थे वह आजकल पाकिस्तान में है | यही कारण है कि भगत सिंह केवल भारत के ही नायक नहीं बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी वे समान रूप से आदर व सम्मान पाते रहे हैं।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri along with Shravan Kumar Sultania, Lallan Yadav and Kids paying homage to Martyrs on the occasion of Shahid Diwas at Shahid Park Madhepura.

आज शहीदे आजम भगत सिंह की शहादत के साथ सारे शहीदों तथा विशेषरूप से मधेपुरा जिले के शहीद बाजा साह, शहीद चुल्हाय, शहीद सदानंद, शहीद प्रमोद (फुलकाहा), शहीद प्रमोद (चामगढ़) व शहीद शंकर रजक को याद करते हुए एक वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम मो.सोहैल द्वारा उद्घाटित शहीद पार्क में सादगी के साथ पुष्पांजलि अर्पित की समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने। साथ में डॉ.मधेपुरी के शिष्य श्रवण कुमार सुल्तानियाँ, ललन कुमार यादव, पार्क का पहरेदार एवं खेल रहे बच्चों ने पुष्पांजलि अर्पित की। बाद में डॉ.मधेपुरी के साथ सबों ने भगत सिंह सहित सभी शहीदों के अमर रहे के नारे लगाये। अंत में डॉ.मधेपुरी ने शहीदों के नाम अपनी चार पंक्तियाँ समर्पित की-

अभिमन्यु सदृश आजाद वीर, खुद को गोली से भूंज लिया।

सिर उठा भगत सुखराज यहाँ, हँसकर शूली को चूम लिया।।

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भाजपा की पहली सूची तैयार, क्या आडवाणी-जोशी होंगे बाहर ?

लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की पहली सूची कभी भी जारी हो सकती है। ख़बर है कि सत्ताधारी दल ने लगभग 250 नाम तय कर लिए हैं और इन नामों में जहां कई नाम चौंकाने वाले हो सकते हैं, वहीं कई नामों का ना होना हैरान कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा संसदीय समिति द्वारा तैयार की गई सूची में कई दिग्गजों का टिकट कटना तय है। ऐसे में अब सबकी नज़रें इस पर टिकी हैं कि लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस बार चुनावी मैदान में उतरेंगे या नहीं!

राजनीतिक गलियारे से मिल रही ख़बरों के मुताबिक उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी और बीएस कोश्यारी ने स्वयं ही चुनाव नहीं लड़ने का मन बनाया है। दोनों नेता चाहते हैं कि युवाओं को मौका दिया जाए। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र और झारखंड के करिया मुंडा भी चुनाव नहीं लड़ने के पक्ष में हैं। इससे इस बात की संभावना बढ़ गई है कि लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री शांता कुमार जैसे महारथियों को भी चुनावी दौड़ से बाहर कर दिया जाए या वे खुद अपना नाम आगे ना बढ़ाएं।

गौरतलब है कि आडवाणी फिलहाल 91 साल के है और मुरली मनोहर जोशी के साथ उन्हें भी पार्टी नेतृत्व ने 2014 में ही मार्गदर्शक मंडल में शामिल कर दिया था। तब भाजपा ने संघ परिवार के साथ मिलकर तय किया था कि 75 साल से ऊपर के किसी शख्स को कार्यकारी जिम्मेदारियां नहीं दी जाएंगी। हालांकि इसके बावजूद दोनों नेता अभी तक सदन की शोभा बढ़ा रहे थे। पर इस बार 2014 जैसी स्थिति नहीं है। भाजपा को 2 सीटों से 180 सीटों तक पहुँचाने वाले इन नेताओं का आज की तारीख में सम्मान चाहे जितना हो, राजनीतिक निर्णयों में सहभागिता लगभग नगण्य है। बहरहाल, लंबे अरसे से हाशिए पर डाल दिए गए नेताओं की इस पीढ़ी का अबकी बार संसद में नहीं दिखना खलेगा जरूर। खैर, देखते हैं कि भाजपा की किसी भी क्षण आने वाली सूची इस बारे में अंतिम रूप से क्या कहती है!!

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होली के बाद उम्मीदवारों की घोषणा: तेजस्वी

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को कहा कि बिहार में विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन बरकरार है और राज्य की सभी 40 सीटों के लिए इसके उम्मीदवारों की घोषणा होली के बाद की जाएगी। तेजस्वी ने दिल्ली से पटना हवाई अड्डे पहुंचने के बाद संवदादाताओं को बताया, “महागठबंधन में सब ठीक है। यह एकजुट एवं मजबूत है और हम चुनाव प्रचार में कड़ी टक्कर देंगे। सभी मतभेद सुलझा लिए गए हैं। हम होली के बाद अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे।”

गौरतलब है कि सीटों के बंटवारे पर चर्चा के लिए पिछले कुछ दिनों से तेजस्वी दिल्ली में थे। इधर सीटों के बंटवारे को लेकर कयासबाजी का दौर लगातार जारी है। कभी संभावित सीटों को लेकर तो कभी संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। खासकर एनडीए के तीनों दलों द्वारा सीट बंटवारे की विधिवत घोषणा के बाद पार्टियां और उनके समर्थक कुछ अधिक ही अधीर हो रहे हैं। इस चीज को भांपते हुए लोजद नेता शरद यादव ने दिल्ली में जोर देकर कहा कि 22 मार्च को पटना में होने वाले संवाददाता सम्मेलन में उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी। बता दें कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) भी महागठबंधन का हिस्सा है और ख़बर है कि उनके हिस्से में दो सीटें आ रही हैं।

इस बीच भाजपा सांसद उदय सिंह आज कांग्रेस में शामिल हो गए। कहा जा रहा है कि उन्हें कांग्रेस की टिकट पर पूर्णिया से लड़ाया जाएगा। यह भी लगभग तय माना जा रहा है कि अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस की टिकट पर पटना साहिब सीट से चुनाव लड़ेंगे। पहले उनके आरजेडी से लड़ने की संभावना बताई जा रही थी।

अंदरखाने ख़बर यह भी है कि एक-दो सीटों को लेकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच अभी भी जिच बरकरार है। ऐसी सीटों में दरभंगा अहम है। कांग्रेस यहां से कीर्ति आजाद को चुनावी मैदान में उतारना चाहती है जिन्होंने पांच साल पहले भाजपा की टिकट पर यह सीट जीती थी। वहीं आरजेडी मोहम्मद अली अशरफ फातमी के लिए यह सीट चाहती है। यहां उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है।

बहरहाल, अभी तक के तय फार्मूले के अनुसार आरजेडी 20 या 19 सीट पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कांग्रेस 9 से 10 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। शेष सीटों पर रालोसपा, हम, लोजद और वीआईपी पार्टी के उम्मीदवार किस्मत आजमाएंगे।

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पूर्णिया विश्वविद्यालय जन्म के साथ ही विश्वसनीयता खोने लगा है- एमएलसी डॉ.संजीव

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चयनित बिहार विधान परिषद सदस्य एवं अधिषद व अभिषद सदस्य (टीएमयू भागलपुर और बीएनएमयू मधेपुरा) डॉ.संजीव कुमार सिंह ने खेद प्रकट करते हुए मधेपुरा अबतक से विस्तार पूर्वक पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति के क्रियाकलापों, दोहरे मापदंडों एवं कर्मियों के प्रति अपमानजनक व्यवहारों की जमकर चर्चा की।

लोकप्रिय एवं कर्मठ एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह ने नवसृजित इस विश्वविद्यालय के बाबत जो भी कहा उसे उन्हीं के शब्दों में उद्धृत किया जा रहा है-

नवसृजित पूर्णिया विश्वविद्यालय पूर्णिया आज शैशवावस्था में ही छात्रों, शिक्षकों एवं शिक्षाप्रेमियों के बीच अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है। स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो.राजेश सिंह की विवादास्पद कार्यशैली तथा अनियमित कार्यकलापों के साथ-साथ इनके द्वारा राजभवन एवं राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के विपरीत कार्य किये जाने से विश्वविद्यालय में धीरे-धीरे अकादमिक अस्थिरता का माहौल बनता जा रहा है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत विश्वविद्यालय की अतिमहत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्राधिकार ‘अभिषद’ (Syndicate) का गठन किया गया है। अन्य सभी महत्वपूर्ण परिनियमित समितियों का कार्य कुलपति स्वयं कर रहे हैं। वस्तुतः अपनी गलत अवधारणाओं पर गठित प्राधिकरों / निकायों / समितियों द्वारा लगातार कार्यकारी आदेशों के तहत वित्तीय एवं नीतिगत निर्णय दिये जा रहे हैं। किसी भी प्रकार के निर्णय में जल्दबाजी उनके प्रशासनिक अनुभवहीनता को दर्शाता है।

विदित है कि अपने अल्प कार्यकाल में ही विश्वविद्यालय के प्रथम प्रतिकुलपति एवं वित्त पदाधिकारी ने इनकी कार्यशैली से आहत होकर अपना इस्तीफा आपत्तियों के साथ राजभवन को सौंप दिया। इन पदाधिकारियों का दोष सिर्फ इतना ही था कि अन्य पदाधिकारियों की तरह कार्य नहीं कर बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम एवं बिहार राज्य वित्त नियमावली के आलोक में कार्य करना चाह रहे थे।

वर्तमानत: परीक्षा केंद्रों के गठन में अंगीभूत एवं संबद्ध इकाइयों के छात्र-छात्राओं के बीच दोहरा मापदण्ड अपनाना, शिक्षक संघ-संगठन की अनदेखी, शिक्षकों एवं कर्मियों के साथ अपमानजनक व्यवहार, विभिन्न कोटि के शिक्षकों को मिली प्रोन्नति के फलस्वरूप वेतन निर्धारण की प्रक्रिया में विलंब, नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों को ओरिऐंटेशन जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में भाग लेने से रोकना आदि कार्यों से विश्वविद्यालय का माहौल विस्फोटक होता जा रहा है। अतिशीघ्र ही संबंधित सारे तथ्यों से महामहिम कुलाधिपति महोदय के साथ-साथ माननीय मुख्यमंत्री जी को भी अवगत कराया जाएगा।

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