समाज को नई दिशा देने वाले भूपेन्द्र बाबू की 45वीं पुण्यतिथि चारों ओर मनी

जहाँ गरीबों के हक की लड़ाई आजीवन लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी व समाजवादी चिंतक भूपेन्द्र नारायण मंडल की पुण्यतिथि उनके नाम वाले बीएन मंडल वाणिज्य महाविद्यालय, बालमुकुंद नगर, साहूगढ़ – मधेपुरा के प्राचार्य डॉ.के.एस.ओझा की अध्यक्षता में सभी प्राध्यापकों व कॉलेज कर्मियों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए मनाई वहीं दूसरी ओर उस महामना भूपेन्द्र के नाम वाले बीएन मंडल विश्वविद्यालय परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर अधिकारियों, पदाधिकारियों व विश्वविद्यालय कर्मियों की उपस्थिति में प्रतिकुलपति प्रो.(डॉ.)फारूक अली ने उन्हें प्रेरणा का स्रोत कहते हुए माल्यार्पण व पुष्पांजलि किया |

यह भी बता दें कि जहाँ एक ओर उनके पैतृक गांव रानीपट्टी में उनकी प्रतिमा पर समस्त ग्रामीणों ने डॉ.रमन कुमार की अध्यक्षता में पुष्पांजलि अर्पित करते हुए भूपेन्द्र बाबू को समाजवाद का प्रमुख स्तम्भ बताया वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय मधेपुरा में उनके नाम वाले भूपेन्द्र चौक स्थित प्रतिमा पर प्रो.श्यामल किशोर यादव की अध्यक्षता में विधायक व पूर्व मंत्री प्रो.चंद्रशेखर, प्रतिमा निर्माण समिति के संयोजक डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, वीमेन डिग्निटी फोरम की अध्यक्षा डॉ.शांति यादव, सिंडिकेट सदस्य डॉ.परमानन्द प्रसाद यादव, पूर्व प्राचार्य प्रो.सच्चीदानंद यादव, डॉ.सुरेश प्रसाद यादव , डॉ.इंद्र नारायण यादव, डॉ.अलोक कुमार, प्रमंडलीय उपाध्यक्ष परमेश्वर प्रसाद यादव सहित सभी दलों के युवाओं द्वारा माल्यार्पण व पुष्पांजलि किया गया | सबों ने मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल के समाजवाद की जमकर चर्चा की | मौके पर श्री कृष्ण मंदिर में कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल द्वारा किया गया | जहाँ सिंडिकेट सदस्य डॉ.जवाहर पासवान, जंतु विज्ञान के डॉ.अरुण कुमार , पूर्व एमएलसी विजय कुमार वर्मा, वर्तमान एमएलसी डॉ.एन.के.यादव सहित दर्जनों वक्ताओं ने अपना उद्गार व्यक्त किया……. डॉ.मधेपुरी ने डॉ.लोहिया को उद्धृत करते हुए समाज को नई दिशा देने वाले मनीषी भूपेंद्र मंडल के बाबत यही कहा-

“हे मधेपुरावासियों ! जानते हो मैं (डॉ.लोहिया) बार-बार मधेपुरा क्यों आता हूँ…… इसलिए कि मधेपुरा की धरती ने भूपेन्द्र नारायण मंडल सरीखे सच्चा हीरा को पैदा किया है जो भारतीय संसद में गरीबों….. पिछड़ों….  वंचितों…. अछूतों व अकलियतों की समस्याओं को निर्भीकतापूर्वक उठाता रहा है और आगे भी उठाता रहेगा |”

…..अपने महान व्यक्तित्व एवं उच्च विचारों के चलते देश के महापुरुषों में शामिल हुए भूपेन्द्र बाबू की पुण्यतिथि समारोह में धन्यवाद ज्ञापित किया भूपेन्द्र विचार मंच के सदस्य हर्षवर्धन सिंह राठौर ने |

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केन्द्र सरकार में जदयू की कारगर भूमिका चाहते हैं नीतीश

केन्द्र में नई सरकार के गठन से पूर्व जदयू की भूमिका और पार्टी की भावी रणनीति को लेकर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बहुत गंभीर हैं। इस संदर्भ में बुधवार को दिल्ली में के. कामराज लेन स्थित अपने सरकारी आवास पर उन्होंने जदयू के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ बैठक की और उससे पूर्व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिले।

माना जा रहा है कि नीतीश कुमार जदयू कोटे से कम से कम दो कैबिनेट मंत्री और एक राज्यमंत्री चाहते हैं। कैबिनेट मंत्री पद के लिए जहां राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह और बिहार सरकार में मंत्री रहे राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के नाम चर्चा में हैं, वहीं संतोष कुशवाहा और कहकशां परवीन को राज्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है। वैसे राजनीतिक गलियारें में अलग-अलग स्रोतों से रामनाथ ठाकुर, दिनेशचंद्र यादव, चन्देश्वर चन्द्रवंशी और महाबली सिंह के नाम भी सामने आ रहे हैं।

बहरहाल, राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में केन्द्र के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश की सरकार में भी जदयू के शामिल होने की चर्चा हुई। बता दें कि सात विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करके जदयू वहां दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है और इस बात की प्रबल संभावना है कि भाजपा के साथ पार्टी वहां भी सरकार में शामिल हो। इसके साथ ही बैठक में 5 जून से पार्टी के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने और 9 जून को पटना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करने का निर्णय भी लिया गया।

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अब ग्राहक उसी टीवी चैनल के पैसे देंगे जिसे वे देखना चाहते हैं

वर्तमान में 27 करोड़ भारतीय परिवारों में से 17 करोड़ के पास टीवी है | इनमें से जहाँ 10 करोड़ के पास ‘केबल कनेक्शन’ है वहीं चार करोड़ भारतीय परिवार के लोग डीटीएच देखते हैं जबकि लगभग तीन करोड़ केबल ग्राहकों के पास डिजिटल का कनेक्शन है……. ये सूचनाएं आपको ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन द्वारा प्राप्त डाटा के आधार पर दिया जा रहा है |

बता दें कि समस्त टीवी दर्शकों यानी ग्राहकों को उन चैनलों के भी पैसे भुगतान करने पड़ते हैं जो वो देखना नहीं चाहते | अभी सारी ब्रॉडकास्टिंग कंपनियाँ अपने बुके में ‘फ्री’ और ‘पे’ दोनो तरह के चैनल रखती हैं | केबल ऑपरेटरों या डीटीएच वालों से भी पूरे बुके के पैसे लेती है….. तदनुसार ये ऑपरेटर भी ग्राहकों से उसी हिसाब से पैसे वसूलते हैं |

अब ग्राहकों के लिए खुशी की खबर है कि वे जो चैनल देखना चाहते हैं , सिर्फ उसी के पैसे देने पड़ेंगे | जल्द ही ग्राहकों को यह अधिकार मिलने वाला है | वर्तमान में ग्राहकों को ब्रॉडकास्टिंग कंपनी का पूरा बुके खरीदना पड़ता था जिसमें फ्री और पे दोनों चैनल होते हैं |

दरअसल में दूरसंचार नियामक ट्राई द्वारा इस बाबत आदेश जारी किया गया था, परंतु ब्रॉडकास्टिंग कंपनियाँ इस आदेश के खिलाफ थी जिस कारण स्टार इंडिया ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी | कोर्ट ने स्टार की याचिका खारिज कर दी | अब ट्राई के लिए आदेश पर अमल करवाने का रास्ता साफ हो गया …… इस बीच ट्राई द्वारा जारी आदेश के मुताबिक ब्रॉडकास्ट (यानी सोनी, स्टार आदि) को 60 दिनों के भीतर हर चैनल की अलग कीमत (MRP) घोषित करनी है | डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटरों को भी अपना-अपना रिटेल Price 180 दिनों में घोषित करने का निर्देश दिया गया है |

चलते-चलते बता दें कि इस फैसले से ऐसे चैनल जिनके दर्शक बहुत कम हैं वे बंद हो सकते हैं…… बड़े-बड़े ब्रॉडकास्टर अन्य छोटी-छोटी कंपनियों को अधिग्रहित भी कर सकती है….. यानि ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी |

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डॉ.मधेपुरी की सभी कृतियों में सर्वोत्तम है  रासबिहारी बाबू की जीवनी- डॉ.रवि

मधेपुरा जिला मुख्यालय वार्ड नं.-1 के डॉ.मधेपुरी मार्ग पर अवस्थित भारतीय जन लेखक संघ के केन्द्रीय कार्यालय में बीजेएलएस के राष्ट्रीय महासचिव महेंद्र नारायण पंकज की टीम द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए डॉ.मधेपुरी द्वारा लिखित पुस्तक ‘रास बिहारी लाल मंडल: पराधीन भारत में स्वाधीन सोच’ के बाबत पूर्व सांसद व मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति रह चुके कोसी के प्रखर साहित्यकार डॉ.रमेंद्र कुमार यादव रवि ने यही कहा-

बिहार के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी समाज-सुधारक नेता, कई भाषाओं के जानकार , प्रखर वक्ता तथा सामाजिक व बौद्धिक रूप से मधेपुरा ही नहीं बल्कि संपूर्ण बिहार व भारत की धरती को उर्वर बनाने वाले बाबू रास बिहारी लाल मंडल के कार्यकाल को भले ही एक शतक गुजर गया किंतु आज भी उनके सारे विचार समसामयिक हैं | डॉ.रवि ने युवाओं को संदेश देते हुए यही कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी उन्हें रास बिहारी बाबू की जीवनी का अध्ययन अवश्य करना चाहिए ताकि समाज में उनके आदर्शों का अनुपालन हो सके | उन्होंने कहा कि डॉ.मधेपुरी की अन्य सारी रचनाओं में यह सर्वोत्तम रचना है |

बता दें कि जहाँ उदाकिशुनगंज के लोकप्रिय डीसीएलआर ललित कुमार सिंह ने डॉ.मधेपुरी की लेखनी की सराहना करते हुए यही कहा कि हमें समाज के उत्थान के लिए अपनी लेखनी को जारी रखना चाहिए | वहीं रेडक्रॉस सहित कई महिला संगठनों की अध्यक्षा विदुषी डॉ.शान्ति यादव ने कहा कि 100 वर्ष पूर्व रास बिहारी लाल मंडल ने समाज की जिन कुरीतियों को समाप्त करने की आवाज बुलंद की थी | उसे अभी तक समाप्त नहीं किया जा सका है…..  इसे समाप्त करने के लिए डॉ.मधेपुरी की तरह साहित्य की रचना आवश्यक है |

यह भी बता दें कि समारोह की अध्यक्षता डॉ.इन्द्र नारायण यादव ने की एवं मंच संचालन व अतिथियों के साथ-साथ बाहर से आये साहित्यकारों को भी अंगवस्त्रम से सम्मानित किया महासचिव महेंद्र नारायण पंकज ने | सहरसा-सुपौल एवं पूर्णिया से आए सारे साहित्यकारों सहित ज्योत्सना कुमारी ने डॉ.मधेपुरी लिखित पुस्तक की सराहना करते हुए रास बिहारी बाबू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर जमकर प्रकाश डाला |

मौके पर डॉ.मधेपुरी, पूर्व कुलसचिव प्रो.सचिंद्र, पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, यमुना प्रसाद बसाक, गोपाल चंद्र घोष, डॉ.राजेंद्र पोद्दार, शंभू शरण भारतीय, डॉ.सीताराम शर्मा , डॉ.जवाहर पासवान, डॉ.अरुण कुमार, डॉ.नरेंद्र प्रसाद यादव, उमेश पंडित, राकेश कुमार द्विजराज, शशिकांत शशि, सुधाकर, सुपौल से विश्वकर्मा जी, कामेश्वर राय आदि ने कहा कि समाज के उत्थान में बाबू रास बिहारी लाल मंडल की भूमिका सराहनीय रही है | ज्योत्सना कुमारी एवं शंभू शरण भारतीय की कविता सर्वाधिक तालियां बटोरी | अंत में धन्यवाद ज्ञापन मंच संचालक सचिव डॉ.गजेंद्र कुमार ने किया |

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मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय को इतिहास विषय में मिले 29 नये असिस्टेंट प्रोफेसर

बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन से इतिहास विषय में 261 असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली की गई है | इस संबंध में कमिशन ने अंतिम परीक्षाफल जारी कर दिया है |

बता दें कि बिहार पब्लिक सर्विस कमिशन द्वारा जारी सूची के अनुसार भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय को इतिहास विषय में 29 सहायक प्रोफेसर दिये गये हैं | कुलपति डॉ.ए.के.राय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब छात्रों की समस्याओं का समाधान काफी हद तक हो जाएगा |

यह भी जानिए कि सूबे की सरकार के अधीन राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में इतिहास विषय में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भिन्न-भिन्न तिथियों को कुल 1207 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था जिसमें कुल 868 उम्मीदवार सम्मिलित हुए | प्रमाणपत्रों आदि की जांच के बाद 827 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया | अंतिम रूप से 261 उम्मीदवारों का इतिहास के  असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में चयन किया गया जिसमें से बीएनएमयू को निम्नांकित 29 असिस्टेंट प्रोफेसर की सूची प्रेषित की गई।

चलते-चलते बीएनएमयू के लिए इतिहास विषय में चयनित सहायक प्राचार्यों यानि असिस्टेंट प्रोफेसरों की सूची इस प्रकार है-

  1. मनीष कुमार सिंह
  2. छाया कुमारी
  3. विवेक कुमार
  4. संतोष कुमार
  5. राजीव कुमार सिंह
  6. अनिल कुमार
  7. रामजी द्विवेदी
  8. सुरेश कुमार मीणा
  9. प्रीति कुमारी
  10. मनीष कुमार
  11. अर्चना चौधरी
  12. कुमार देवेश
  13. प्रभाकर कुमार
  14. स्वर्णमणि
  15. मिलन कुमार
  16. मधुलिका सिंह
  17. रतन कुमार दास
  18. राकेश रोशन सिंह
  19. अमित कुमार
  20. अमरेंद्र कुमार
  21. राकेश कुमार
  22. संजीव कुमार
  23. कुमारी मंजरी
  24. मो.तकरीर हाशमी
  25. दीपक कुमार
  26. अश्विनी कुमार व
  27. अरुण कुमार महतो

सहित अन्य के नाम शामिल हैं….।

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मोदी कैबिनेट की संभावित तस्वीर

लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के बाद भाजपा ने केन्द्र में नई सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस चुनाव में भाजपा ने अकेले अपने दम पर 303 सीटें जीती हैं। एनडीए के बाकी सहयोगियों को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 352 तक पहुँच जाता है। वहीं, महज 52 सांसदों के साथ काग्रेस लगातार दूसरी बार नेता प्रतिपक्ष बना पाने लायक संख्या भी नहीं जुटा पाई। हालांकि यूपीए के बाकी सहयोगियों के साथ उसका आंकड़ा 87 का है। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुआई में नई सरकार के 30 मई को शपथ लेने की संभावना है। उससे पहले मोदी को नेता चुनने की औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी।

इस बीच मोदी कैबिनेट के नए चेहरों और उनके मंत्रालयों पर कयासबाजी तेज हो गई है। इनमें सबसे बड़ा नाम अमित शाह का है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उन्हें गृह, रक्षा या वित्त मंत्रालय सौंपा जा सकता है। अटकलें हैं कि उन्हें कैबिनेट में प्रधानमंत्री के बाद नंबर दो का दर्जा मिल सकता है। पिछली सरकार में यह दर्जा राजनाथ सिंह के पास रहा है। ऐसे में कैबिनेट में नंबर दो के दर्जे पर नए सिरे से सोचना होगा। चर्चा यह भी है कि अगर शाह गृह मंत्री बने तो राजनाथ रक्षा मंत्री हो सकते हैं और मौजूदा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को विदेश मंत्री बनाया जा सकता है।

बता दें कि पिछली सरकार में विदेश मंत्री रहीं सुषमा स्वराज ने इस बार चुनाव नहीं लड़ा था। फिर भी उनकी योग्यता और अनुभव को देखते हुए उन्हें फिलहाल कैबिनेट में लेकर बाद में राज्यसभा के रास्ते संसद में पहुँचाया जा सकता है। एक और वरिष्ठ मंत्री अरुण जेटली का स्वास्थ्य इन दिनों ठीक नहीं, लेकिन मोदी से उनकी निकटता और बेजोड़ कार्यक्षमता को देखते हुए बहुत संभव है कि उन्हें फिर से कैबिनेट में लिया जाए। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को शिकस्त देकर सनसनी फैला देने वाली स्मृति ईरानी का कद भी सरकार में बढ़ सकता है।

अब बात बिहार की। इस बार बिहार से रिकॉर्ड 39 सीटें एनडीए की झोली में गई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि यहां से 8 से 10 मंत्री तक मोदी कैबिनेट में जगह पा सकते हैं। चर्चा है कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल में बिहार से जदयू को भाजपा के बराबर जगह दी जा सकती है। वहीं लोजपा को एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री की जगह मिल सकती है।

चलते-चलते बता दें कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह पिछली बार से ज्यादा भव्य होने जा रहा है। ख़बर है कि इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग को भी न्योता देने की तैयारी है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी की छवि और मजबूत होगी। पिछली बार उनके शपथ ग्रहण में सार्क देशों के प्रमुख आए थे।

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भारत के लोकतंत्रीय इतिहास में इस बार सर्वाधिक महिला सांसद

मोदी की महाविजय में इस बार कई रिकॉर्ड बने तो कई टूटे, पर जो सबसे दिलचस्प और स्वागतयोग्य रिकॉर्ड बना, वो है सत्रहवीं लोकसभा में 76 महिला सांसदों का पहुँचना। जी हाँ, इस बार 723 महिला उम्‍मीदवार चुनावी मैदान में थीं, जिनमें से 76 संसद के लिए चुनी गईं। आजाद भारत के लोकतंत्रीय इतिहास में भागीदारी के लिहाज से और अब तक आम चुनावों में महिलाओं को मिली जीत के लिहाज से यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। गौरतलब है कि 2014 में कुल 663 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था, जिनमें से 66 महिलाएं संसद पहुंची थीं। इन 66 महिला सांसदों में 28 इस बार भी चुनाव जीतने में सफल रहीं। वैसे आगे बढ़ने से पहले यह भी जानें कि हमारी पहली लोकसभा में कुल 22 महिला सांसद चुनकर आई थीं और 1977 में उनकी संख्या सबसे कम (19) थी।

बहरहाल, विस्तार में जाकर देखें तो इस आम चुनाव में कुल 7,928 महिला उम्मीदवार मैदान में उतरी थीं। कांग्रेस ने सर्वाधिक 54, जबकि भाजपा ने 53 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। अन्य राष्ट्रीय पार्टियों में बसपा ने 24 महिला उम्मीदवारों को, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने 23, माकपा ने 10, भाकपा ने चार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा था। 222 महिलाओं ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।

राज्यवार बात करें तो बंगाल ने इस बार गजब का उदाहरण पेश किया। यहां के 42 सीटों में से इस बार 14 पर महिलाएं जीती हैं जो 80 सीटों वाले सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से भी ज्यादा है, जहाँ से इस बार 10 महिलाएं चुनाव जीतने में सफल हुई हैं। अन्य राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र से 8, गुजरात और उड़ीसा से 5-5, आंध्रप्रदेश और मध्यप्रदेश से 4-4, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बिहार से 3-3 तथा पंजाब और झारखंड से 2-2 महिला सांसद चुनी गई हैं। संघशासित प्रदेशों में नई दिल्ली और चंडीगढ़ सीटों से महिला उम्मीदवारों ने बाजी मारी है। पार्टियों की बात करें तो इस बार तृणमूल कांग्रेस (पश्चिम बंगाल) ने सर्वाधिक 41% महिलाओं को टिकट दिया था। दूसरे नंबर पर बीजद (उड़ीसा) थी, जिसने 33% महिलाओं को मौका दिया था।

चलने से पहले इस बार के चुनावों में महिलाओं को लेकर एक बेहद दिलचस्प आंकड़ा यह भी कि देश के 13 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा है। ये 13 राज्य हैं: बिहार, उत्तराखंड, मणिपुर, मेघालय, गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुड्डूचेरी, दमन दीव, और लक्षद्वीप।

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मोदी-नीतीश की बिहारी सुनामी, 40 में 39 जीते

जहाँ 17वीं लोकसभा चुनाव के दौरान संपूर्ण भारत में ये नारे गूंजते रहे- मोदी है तो मुमकिन है….. फिर एक बार मोदी सरकार…… 300 का आंकड़ा करेगा पार…. साथ दे रहा नीतीश कुमार….. वहीं मोदी का मुखड़ा लगाकर बेगूसराय संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी गिरिराज सिंह द्वारा चार लाख उन्नीस हज़ार छह सौ साठ मतों से पराजित हुए भाकपा के कन्हैया कुमार……. और मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से राजद के दिग्गज खिलाड़ी शरद यादव को पटकनी दिया तीन लाख छह सौ इकतलिस मतों से बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव जिन्हें उतारा था मैदान में जदयू से नीतीश कुमार |

बता दें कि बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं | एक ओर मोदी-नीतीश जब भी बिहार की जनता को संबोधित करते हुए यानि मंच साझा करते हुए अपने-अपने 5 वर्षों के अंतराल में किये गये कार्यों की जनता से मजदूरी मांगते तो चारों तरफ से आवाज आती- अबकी बार मोदी सरकार …. और दोनों नेता यही कहते कि 40 में 40 हम जीतेंगे और जीते भी 40 में 39……. केवल किशनगंज के जदयू प्रत्याशी मो.अशरफ मात्र 35000 के लगभग से हार गये…… वहीं जब दूसरी ओर महागठबंधन के नेता मंच से उतरते-उतरते उद्घोष करते कि हम 40 में 40 जीतेंगे….. उनका खाता तक नहीं खुला…..!

यह भी बता दें कि आपने जिन को चुना है अपना प्रतिनिधि वे हैं –

  1. पटना साहिब से बीजेपी के रविशंकर प्रसाद
  2. पाटलिपुत्र से बीजेपी के रामकृपाल यादव
  3. बाल्मीकि नगर से जदयू के बैजनाथ प्रसाद महतो
  4. पश्चिम चंपारण से बीजेपी के डॉ.संजय जायसवाल
  5. पूर्वी चंपारण से बीजेपी के राधा मोहन सिंह
  6. शिवहर से बीजेपी के रमा देवी
  7. नालंदा से जदयू के कौशलेंद्र कुमार
  8. आरा से बीजेपी के आर.के.सिंह
  9. सीतामढ़ी से जदयू के सुनील कुमार पिंटू
  10. मधुबनी से बीजेपी के अशोक यादव
  11. झंझारपुर से जदयू के रामप्रीत मंडल
  12. सुपौल से जदयू के दिलेश्वर कामत
  13. अररिया से बीजेपी के प्रदीप सिंह
  14. किशनगंज से कांग्रेस के मो.जावेद
  15. कटिहार से जदयू के दुलाल चन्द गोस्वामी
  16. पूर्णिया से जदयू के संतोष कुशवाहा
  17. मधेपुरा से जदयू के दिनेश चंद्र यादव
  18. दरभंगा से बीजेपी के गोपाल जी ठाकुर
  19. मुजफ्फरपुर से बीजेपी के अजय निषाद
  20. वैशाली से एलजेपी के वीणा सिंह
  21. गोपालगंज से जदयू के डॉ.आलोक सुमन
  22. सिवान से जदयू के कविता सिंह
  23. महाराजगंज से बीजेपी के जनार्दन सिंह
  24. सारण से बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी
  25. हाजीपुर से एलजेपी के पशुपति कुमार
  26. उजियारपुर से बीजेपी के नित्यानंद राय
  27. समस्तीपुर से एलजेपी के रामचंद्र पासवान
  28. बेगूसराय से बीजेपी के गिरिराज सिंह
  29. खगरिया से एलजेपी महबूब अली केशर
  30. भागलपुर से जदयू के अजय कुमार मंडल
  31. बांका से जदयू के गिरधारी यादव
  32. मुंगेर से जदयू के ललन सिंह
  33. बक्सर से बीजेपी के अश्विनी कुमार चौबे
  34. सासाराम से बीजेपी के छेदी पासवान
  35. काराकाट से जदयू के महाबली सिंह
  36. जहानाबाद से जदयू के चन्देशवर चंद्रवंशी
  37. औरंगाबाद से बीजेपी के सुशील कुमार सिंह
  38. गया से जदयू के विजय माँझी
  39. नवादा से एलजेपी के चंदन कुमार
  40. जमुई से एलजेपी के चिराग पासवान

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17वीं लोकसभा की मतगणना में होंगे कितने प्रकार के प्रतिबन्ध ?

17वीं लोकसभा की मतगणना को लेकर चुनाव आयोग से आये निर्देशों में पहला निर्देश यही है कि मतगणना कक्ष में कैमरा और मोबाइल आदि लेकर भ्रमण करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा | थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर प्रभारी पदाधिकारियों के नेतृत्व में छोटे-छोटे समूहों में पत्रकारों को मतगणना कक्ष का भ्रमण कराया जाएगा तथा आधिकारिक रूप से राउंडवार घोषित परिणामों की प्रतियाँ पत्रकारों को मुख्य द्वार के समीप बनाये गये मीडिया सेंटर पर उपलब्ध करा दी जाएगी |

बता दें कि निर्देशानुसार मतगणना से संबंधित आंकड़ों को कंप्यूटरीकृत करने के लिए मतगणना केंद्र पर कंप्यूटर सेल का गठन किया गया है | सीसीटीवी कैमरे और फायर ब्रिगेड आदि का इंतजाम किसी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश एवं धूम्रपान पर प्रतिबंध के लिए आवश्यक है |

जारी निर्देश/प्रतिबंध में कहा गया है कि मतगणना के पहले राउंड में पोस्टल बैलट पेपर की गिनती होगी जबकि पूर्व में पोस्टल बैलट की गिनती बाद में यानि अंत में की जाती थी | इस बार पोस्टल बैलट की गिनती के बाद ही ईवीएम से मतों की गिनती शुरु की जाएगी | पोस्ट ऑफिस से पोस्टल बैलट लाने के लिए एक विशेष पदाधिकारी प्रतिनियुक्त किया गया है तथा इन वैलेटों की गिनती यदि पहले राउंड में नहीं की गई तो उसे अपराध माना गया है |

जबकि चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रतिबंधों में यह भी कहा गया है कि यदि जीत का अंतर पोस्टल बैलट पेपर की कुल संख्या के अंदर ही होगी तो जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा दोबारा पोस्टल बैलट का सत्यापन किया जाएगा |

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहाँ मतगणना केंद्र के अंदर लोकसभा क्षेत्र के विधानसभावार गिनती के क्रम में 5 बूथों के रेंडम वीवीपैट स्लिप का मिलान होगा वहीं केंद्र से बाहर प्रत्याशियों के अंदर की धड़कने…… घबराहट….. थरथराहट और चरमराहट महसूसने के लायक होंगी |

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मधेपुरा लोकसभा मतगणना केन्द्र टीपी कॉलेज में होगी एक साथ 14 टेबल पर मतों की गिनती

मधेपुरा लोकसभा चुनाव की मतगणना का कार्य सुबह 8:00 बजे से टीपी कॉलेज मतगणना केंद्र पर शुरू होगा तथा एक साथ 14 टेबल पर होगा मतों की गिनती | एक और जहाँ प्रत्येक विधानसभा चुनाव के 5-5 वीवीपैट मशीन के पर्ची का होगा मिलान वहीं दूसरी ओर निवर्तमान सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, चार बार मधेपुरा के सांसद रह चुके शरद यादव एवं तीन बार सांसद रहे बिहार सरकार के आपदा मंत्री दिनेश चन्द्र यादव के अंदर में उठ रहा होगा हार-जीत की सुनामी का तूफान !

बता दें कि प्रत्येक टेबल पर माइक्रो ऑब्जर्वर, मतगणना प्रेक्षक, मतगणना सहायक के साथ-साथ इन उम्मीदवारों के एजेंट भी रहेंगे मौजूद | सुविधा पोर्टल पर विधानसभा वार डाटा अपलोड होने के साथ-साथ क्यूआर स्कैनर के द्वारा ईटीपीबीएस को भी किया जाएगा स्कैन |

यह भी बता दें कि जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम मधेपुरा नवदीप शुक्ला ने कहा कि ड्राय रन के दौरान हर एक टेबल पर ईवीएम के मतों की काउंटिंग तथा डाटा अपलोड में लगभग 20 से 25 मिनट तक का समय लगता है | उन्होंने कहा कि दोपहर तक चले रिहर्सल में राउंडवार मतों की गिनती की प्रक्रिया को दोहरा लिया गया जिस दौरान सामान्य प्रेक्षक पुनीत गोयल की निगरानी में आयोजित ड्राय रन के कार्य में लगाये गए सभी सुपरवाईजार, कार्यपालक सहायक,आईट सहायक के अलावा माइक्रो ऑब्जर्वर, उपनिर्वाचन पदाधिकारी, सभी एआरओ समेत अन्य अधिकारी-पदाधिकारीगण मौजूद थे |

चलते-चलते यह भी बता दें कि मधेपुरा-सहरसा विधानसभा में जहाँ गिनती 25-25 राउंड चलेगा वहीं मेहिषी-बिहारीगंज में 22-22 राउंड चलेगा और सोनवर्षा में 23 राउंड तो आलम नगर में 24 राउंड में गिनती पूरी की जाएगी |

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