मधेपुरा में महाकवि विद्यापति की जयन्ती मनी

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन संस्थान के अंबिका सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार-इतिहासकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ की अध्यक्षता में मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति की भावभीनी जयन्ती मनाई गई, जिसमें टी.पी.कॉलेज के मैथिली विभागाध्यक्ष एवं हिन्दी-मैथिली में “लोक जीवन में संस्कार गीतक महत्व” के रचनाकार डॉ.अमोल राय द्वारा- भक्ति, सौंदर्य एवं प्रेम के महान गायक विद्यापति पर मनभावन आलेख का पाठ किया गया |

इस अवसर पर जहाँ तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल ने डॉ.अमोल राय के आलेख की भरपूर प्रशंसा की तथा आशीर्वचन देते हुए कहा कि उनकी इस रचना पर BHU में शोधकार्य की भूमिका तैयार हो रही है….. वहीं सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने बीएनएमयू के सी.सी.डी.सी. रह चुके डॉ.अमोल राय को अंगवस्त्रम-पाग-बुके आदि से सम्मानित करते हुए महाकवि विद्यापति की शिवभक्ति पर कई मार्मिक प्रसंगों की चर्चाएं की | चर्चा को बढ़ाते हुए विदुषी डॉ.शांति यादव ने डॉ.राय के आलेख पाठ की विस्तृत चर्चा एवं सराहना करते हुए कहा कि महाकवि विद्यापति का यश अंतर्राष्ट्रीय सीमा को पार कर चुका है | इनके गीत बिहार, बंगाल, उड़ीसा………. आदि में ही नहीं बल्कि नेपाल, फीजी, मॉरिशस……. आदि देशों में रहनेवाले भारतीय मूल के लोग नित्यप्रति गाया करते हैं | इसी कड़ी में डॉ.विनय कुमार चौधरी, प्रो.शचीन्द्र महतो, प्रो.मणिभूषण, त्रिवेणीगंज से आये सुरेन्द्र भारती आदि ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये |

Kaushiki Kshetra Hindi Sahitya Sammelan Sachiv Dr.Madhepuri felicitating Dr.Amol Rai with Angbastram-Bouquet-Paag at Ambika Sahitya Sabhagar, Madhepura.
Kaushiki Kshetra Hindi Sahitya Sammelan Sachiv Dr.Madhepuri felicitating Dr.Amol Rai with Angbastram-Bouquet-Paag at Ambika Sahitya Sabhagar, Madhepura.

अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्यकार शलभ ने कहा कि विद्यापति आदिकाल और वीरगाथा काल के प्रतिनिधि कवि थे | उन्होंने संस्कृत, अबहट और हिंदी साहित्य के आदिकाल पर वृहद प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यापति ने जहाँ आदिकाल के लिए ‘कीर्तिलता’, ‘कीर्तिपताका’ की रचना की वहीं भक्तिकाल के लिए ‘पदावली’ के अनेक भक्ति गीतों की, जहाँ उन्होंने रीतिकाल के लिए राधाकृष्ण के प्रेम-श्रृंगार के पद रचे वहीं आधुनिक काल के लिए उनकी सारी रचनाएं समीचीन हैं | कवि शलभ ने यहाँ तक कह डाला कि विद्यापति में संपूर्ण मिथिला की सांस्कृतिक विरासत सन्निहित है, जीवित है…….|

आयोजन के दूसरे सत्र में सुकवि तारानन्दन तरुण एवं गजलकार वसंत की स्मृति में कविगोष्ठी का सफल संचालन किया डॉ.विनय कुमार चौधरी ने और अपनी एक-एक प्रतिनिधि कविता का पाठ किया- डॉ.शांति यादव, सुरेन्द्र भारती (त्रिवेणीगंज), सम्मेलन के सचिव डॉ.मधेपुरी, अभिनंदन मंडल, आशीष मिश्रा, राकेश कुमार ‘द्विजराज’, संतोष सिन्हा, राजू भैया, मणिभूषण वर्मा, डॉ.आलोक कुमार, दशरथ प्रसाद सिंह ‘कुलिश’, डॉ.अरुण कुमार, सियाराम यादव ‘मयंक’, उल्लास मुखर्जी…….. आदि | सुधि श्रोता के रूप में भोला प्रसाद सिन्हा, बलभद्र यादव, प्राण मोहन, शिवजी साह, पारोजी, रघुनाथ प्रसाद यादव, तारा शरण……… आदि अंत तक रहे |

कार्यक्रम की सफलता के लिए तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक एवं सम्मेलन के उपसचिव श्यामल कुमार ‘सुमित्र’ सहित उपस्थित विद्वान एवं साहित्यनुरागियों को सचिव डॉ.मधेपुरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित कर अध्यक्ष के निदेशानुसार समारोह की समाप्ति की घोषणा की गई |

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फिर चुनाव आयोग पहुंचा जेडीयू का प्रतिनिधिमंडल

जेडीयू का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को चुनाव आयोग से मिला और शरद खेमे द्वारा दायर याचिका को जल्द खारिज करने का आग्रह किया। राज्यसभा में जेडीयू के नेता आरसीपी सिंह, प्रधान महासचिव केसी त्यागी, महासचिव संजय झा एवं बिहार सरकार में मंत्री ललन सिंह वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात चुनाव के मद्देनजर शरद खेमे की याचिका पर जल्द फैसला लेकर उसे खारिज करने का चुनाव आयोग से आग्रह किया। गौरतलब है कि शरद खेमे ने जदयू और उसके चुनाव चिह्न पर दावा करते हुए चुनाव आयोग में ज्ञापन सौंप रखा है।

प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि गुजरात में 9 नवंबर से नामांकन शुरू है और उससे पहले हमें पार्टी के प्रत्याशी तय करने हैं और उन्हें पार्टी सिंबल आवंटित करना है। जबकि शरद यादव केवल चुनाव आयोग का समय बर्बाद करना चाहते हैं।

बकौल प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है जेडीयू नीतीश कुमार की है। नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर राजगीर में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मुहर लगी थी। उस बैठक में शरद यादव भी मौजूद थे। अब शरद यादव कुछ अलग ही दावा कर रहे हैं।

चलते-चलते बता दें कि इस बीच शरद खेमे द्वारा ज्ञापन के साथ दिए गए तीन सौ से अधिक शपथ पत्रों की जांच चुनाव आयोग ने शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग ने 31 अक्टूबर तक इन शपथ पत्रों की मूल प्रति जमा करने कहा है।

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न्यूजीलैंड को हरा भारत ने जीती लगातार सातवीं वनडे सीरीज

कानपुर में खेले गए तीसरे और अंतिम एकदिवसीय मैच में रोहित शर्मा और विराट कोहली के धमाकेदार शतकों और दोनों के बीच रिकॉर्ड साझेदारी के बाद अंतिम ओवरों में गेंदबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत न्यूजीलैंड को 6 रन से हराकर भारत ने 2-1 से सीरीज अपने नाम कर ली। एकदिवसीय मैचों में यह भारतीय टीम की लगातार सातवीं सीरीज जीत है, जो कि उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यही नहीं, उसने न्यूजीलैंड के खिलाफ स्वदेश में द्विपक्षीय सीरीज कभी नहीं गंवाने का रिकॉर्ड भी बरकरार रखा।

अब मैच की बात थोड़े विस्तार से। भारत के 338 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड की टीम सलामी बल्लेबाज कोलिन मुनरो (75), कप्तान केन विलियमसन (64) और टाम लैथम (65) के अर्द्धशतकों के बावजूद सात विकेट पर 331 रन ही बना सकी। अंतिम ओवरों में भारत की जीत के सूत्रधार रहे जसप्रीत बुमराह ने 47 रन देकर तीन विकेट चटकाए। यजुवेन्द्र चहल ने भी 47 रन देकर दो विकेट हासिल किए। जबकि भुवनेश्वर कुमार 92 रन लुटाकर एक विकेट ही ले पाए।

भारत ने इससे पहले रोहित शर्मा (147) और विराट कोहली (113) के बीच दूसरे विकेट की 230 रन की साझेदारी की बदौलत छह विकेट पर 337 रन बनाए जो कि ग्रीन पार्क पर बनाया गया सर्वाधिक स्कोर है। यह भी जानें कि शर्मा-कोहली की जोड़ी वनडे क्रिकेट में चार दोहरी शतकीय साझेदारी करने वाली दुनिया की पहली जोड़ी है। रोहित ने 138 गेंद का सामना करते हुए 18 चौके और दो छक्के जड़े जबकि कोहली ने 106 गेंद का सामना करते हुए नौ चौके और एक छक्का मारा। महेंद्र सिंह धोनी (25) और केदार जाधव (18) ने अंत में कुछ अच्छे शॉट खेले।

गौरतलब है कि अपनी पारी के दौरान 83 रन पूरे करते ही कोहली सबसे तेजी से 9000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज बन गए। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे छठे भारतीय बल्लेबाज हैं। उन्होंने 194वीं पारी में यह उपलब्धि हासिल करते हुए साउथ अफ्रीका के एबी डिविलियर्स (205 पारी) का रिकॉर्ड तोड़ा। चलते-चलते बता दें कि इस पारी के दौरान ही कोहली 2017 में 2000 अंतरराष्ट्रीय रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज भी बने।

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छठ महापर्व स्वच्छ एवं सुगंधमय बना देता है सम्पूर्ण बिहार को……..!

आस्था एवं विश्वास के इस महापर्व छठ में उत्साह व उमंग की ऊंचाई इतनी होती है कि श्रद्धापूर्ण माहौल में सम्पूर्ण बिहार स्वच्छ एवं सुगंधमय बन जाता है | नदी से लेकर नाले तक एवं पोखर से लेकर पनघट तक की सफाई हो जाती है |

बता दें कि चार दिवसीय इस महापर्व में जहाँ उगते सूरज से पहले ढलते सूरज को ही नमन किया जाता है, उसी तर्ज पर प्रशासन द्वारा भी दिल्ली-मुंबई-हरियाणा….. से गाँवों तक आने के लिए (पद्मश्री संतोष यादव (मुंगेर) , गीतकार राजशेखर (मधेपुरा) सहित अन्य आम लोगों  व  मजदूरों के वास्ते) विशेष ट्रेन की व्यवस्था जिस तरह छठ से पूर्व की गई थी उसी तरह उन्हें छठ के बाद पुनः कार्यस्थल तक पहूँचाने के लिए और अधिक सुविधाओं के साथ व्यस्था की जा रही है | भारतीय रेल के समस्तीपुर मंडल के सीनियर डीसीएम वीरेन्द्र कुमार के निर्देश पर छठ पर्व के बाद लौट रहे रेल यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सहरसा स्टेशन पर अतिरिक्त चार टिकट काउंटर खोलने के संबंध में पत्र भी जारी कर दिया गया है और तदनुरूप डीसीआई रमण झा टिकट काउंटर चालू करवाने में जुट गये हैं |

यह भी बता दें कि मुख्यमंत्री-आपदा प्रबंधन मंत्री से लेकर जिला प्रशासन की चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था के बावजूद राज्य में कुल 63 लोगों की मौत छठ पर्व के दौरान डूबने से हुई जिसमें मधेपुरा से एक के डूबने की पुष्टि की गई है, जबकि जिले में 192 घाटों पर डीएम मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार और एसडीएम संजय कुमार निराला की टीम एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, मोटरबोट व गोताखोरों सहित अन्य सतर्कताओं के साथ तैनात दिखे | डीएम मो.सोहैल ने तो यहां तक हिदायत दे डाली थी कि अभिभावक अपने बच्चों के पाँकेट में पूरा पता लिखकर ‘कागज’ डाल दें ताकि भीड़ में खो जाने पर उसे उनके परिजनों को आसानी से हस्तगत करा दिये जायेंगे |

यह भी जानिए कि कर्मकांड की जटिलता से मुक्त………..  इस महापर्व छठ में समानता की सर्वाधिक विशालता नजर आती है- ना आडंबर, ना पैसे, ना स्टेटस………. और ना पूजा कराने के वास्ते पंडित-पुरोहित की जरूरत | मरिक जाति द्वारा तैयार सभी के सूप में वही अल्हुआ, सुथनी, मूली, गाजर, हल्दी-अदरक-ईख……..  नारियल-बद्दी-जायफल आदि | सभी अपने-अपने माथे पर दउरा उठाते हैं | घाट पर सभी व्रती होते हैं चाहे अपने निजी आवासीय परिसर वाले निर्मित घाटों पर वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का परिवार हो या पूर्व मुख्यमंत्री लालू-राबड़ी का या फिर मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी का ही परिवार क्यों ना हो | ऊर्जा के अनंत स्रोतवाले सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना ही तो छठ महापर्व का सार है, जो हमारे अस्तित्व को कायम रखने में सहायक है |

बिहारी समाज देश से लेकर विदेश तक में जहाँ भी होते हैं- छठ की थाली में एकता का दीप जलाने के वास्ते ट्रेन या प्लेन से घर आने की कोशिश में जुटे रहते हैं………|

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जी हां, आइंस्टीन के एक नोट की कीमत दस करोड़ से ज्यादा

कुछ लोग मशहूर होते हैं, कुछ महान होते हैं और जिन्हें ईश्वर ये दोनों नेमत देते हैं उनके लिए माना जाना चाहिए कि वे इस धरती पर कोई विशेष कार्य करने आए हैं और उनके जीवन का हर क्षण, उनसे जुड़ी हर चीज मानव-सभ्यता की थाती है। बुद्ध, गांधी, मार्क्स, आइंस्टीन आदि ऐसे ही बिरले लोगों में शुमार हैं, जिन्होंने हमारी सभ्यता की दिशा और दशा बदली। यही कारण है कि उनसे जुड़ी छोटी-सी-छोटी चीज भी अनमोल हो जाती है और अगर उनकी बोली लगा दी जाए तो करोड़ों भी कम पड़ जाते हैं।

ऊपर कही बात के विस्तार में जाएं उससे पहले एक सवाल। जरा सोच कर बताएं, एक पन्ने की कीमत क्या हो सकती है, जिस पर महज एक नोट लिखा हुआ हो। आप चाहे जितनी उदारता से सोच लें, कुछ सौ या हजार से आगे शायद ही बढ़ पाएं। अब अगर आपसे कहा जाए कि एक नोट वाले एक पन्ने की कीमत दस करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है तो क्या आप यकीन कर पाएंगे? नहीं ना? लेकिन जनाब जब उस पन्ने पर अल्बर्ट आइंस्टीन का स्पर्श हो और लिखा हुआ नोट उनका हो तो यह भी मुमकिन है।

जी हां, महान वैज्ञानिक आइंस्टीन के लिखे नोट वाला पन्ना येरूशलम में हुई एक नीलामी में दस करोड़ से भी ज्यादा (दस करोड़ तेईस लाख) में बिका। आपको बता दें कि आइंस्टीन ने यह नोट 1922 ई. में टोक्यो के इंपीरियल होटल में एक वेटर को बतौर इनाम लिखकर दिया था क्योंकि उस वक्त उनके पास उसे देने के लिए कैश नहीं था। आपको उत्सुकता हो रही होगी कि आखिर आइंस्टीन उस वेटर को इनाम क्यों देना चाह रहे थे? तो यह भी जान लें। दरअसल एक लेक्चर देने जापान आए आइंस्टीन को उस वेटर ने ही आकर संदेश दिया था कि उन्हें नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। इस संदेश के बाद इनाम देना तो बनता ही था।

अब आपको यह भी बता बता दें कि आइंस्टीन ने उस पन्ने पर लिखा क्या था। उन्होंने उस पन्ने पर जीवन की खुशी का राज बताते हुए लिखा था कि “जीवन में मंजिल हासिल करने के बाद भी खुशी मिल जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है।” जर्मन भाषा में लिखे अपने नोट में उन्होंने आगे लिखा – “कामयाबी और उसके साथ आने वाली बेचैनी के बजाय एक शांत और विनम्र जीवन आपको अधिक खुशी देगा।”

करीब इसी दौरान के एक दूसरे नोट में उन्होंने लिखा -“जहां चाह, वहां राह।” ये नोट करीब दो करोड़ रूपयों में नीलाम हुआ। नीलामी करने वाली कंपनी का कहना है कि इन दोनों नोट्स की कीमत अनुमान से कहीं अधिक है। हो भी क्यों ना? आइंस्टीन अनुमान में आने वाली शख्सियत भी नहीं। चलते–चलते बता दें कि आइंस्टीन के बेशकीमती नोट को बेचने वाला साल 1922 में आइंस्टीन तक संदेश पहुंचाने वाले व्यक्ति का भतीजा है और नोट को खरीदने वाला एक यूरोपीय।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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छठ के अर्घ्य के मूल में हैं भगवान श्रीकृष्ण

आस्था का महापर्व है छठ। इस छठ से न जाने कितनी ही कथाएं जुड़ी हुई हैं। सच तो यह है कि कोई पर्व ‘महापर्व’ बनता ही तब है जब उससे हमारी, आपकी, गांव की, शहर की, पुराण की, इतिहास की अनगिनत स्मृतियां-अनुभूतियां कथाओं के रूप में जुड़ जाएं। आपको सुखद आश्चर्य होगा कि महापर्व छठ की एक कथा भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है और उस कथा का विशेष महत्व है क्योंकि वो हमारा परिचय उस बिन्दु से कराती है जहां सूर्य को अर्घ्य देने की पवित्र परिपाटी का उद्गम है। चलिए, आपको ले चलें बिहार के नालंदा जिला स्थित बड़गांव जहां स्वयं श्रीकृष्ण पधारे थे और जिनकी प्रेरणा से यहां भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा शुरू हुई थी।

बड़गांव वैदिक काल से ही सूर्योपासना का प्रमुख केन्द्र रहा है। यहां का सूर्यमंदिर दुनिया के 12 अर्कों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यहां छठ करने पर हर मुराद पूरी होती है। तत्कालीन मगध में छठ की महिमा इतनी उत्कर्ष पर थी कि युद्ध के लिए राजगीर आए भगवान कृष्ण ने भी बड़गांव पहुंच कर भगवान सूर्य की अराधना की थी। इसकी चर्चा सूर्य पुराण में भी है। आज भी हजारों श्रद्धालु चैत और कार्तिक माह में यहां छठ का व्रत करने आते हैं।

बहरहाल, यहां से आगे चलते हैं। ऐसी मान्यता है कि महर्षि दुर्वासा एक बार श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका गए थे। उस समय भगवान कृष्ण रुक्मिणी के साथ विहार कर रहे थे। उसी दौरान किसी बात पर श्रीकृष्ण के पौत्र राजा साम्ब को हंसी आ गई। महर्षि दुर्वासा ने उनकी हंसी को अपना उपहास समझ लिया और उन्हें कुष्ठ होने का श्राप दे दिया। श्रीकृष्ण ने इस कष्टदायी श्राप से मुक्ति के लिए अपने पौत्र को सूर्य की अराधना करने को कहा। तब राजा साम्ब ने 49 दिनों तक बर्राक (वर्तमान बड़गांव) में रहकर भगवान सूर्य की उपासना की। कहते हैं उन्होंने वहां स्थित एक गड्ढ़े के जल का सेवन किया और उसी से सूर्य को अर्घ्य दिया, जिससे वे रोग व श्राप से मुक्त हो सके। आगे चलकर राजा साम्ब ने अपने पितामह श्रीकृष्ण की आज्ञा से उस गड्ढे वाले स्थान की खुदाई करके तालाब का निर्माण कराया। इसमें स्नान करके आज भी कुष्ठ जैसे असाध्य रोग से लोगों को मुक्ति मिलती है।

आपको बता दें कि कालांतर में तालाब की खुदाई के दौरान भगवान सूर्य, कल्प विष्णु, लक्ष्मी, सरस्वती, आदित्य माता, जिन्हें छठी मैया भी कहते है, सहित नवग्रह देवता की प्रतिमाएं इस स्थान से निकलीं। तालाब के पास ही एक सूर्यमंदिर भी था, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसकी स्थापना अपने पितामह के कहने पर राजा साम्ब ने ही कराई थी। आगे चलकर 1934 के भूकंप में यह मंदिर ध्वस्त हो गया। बाद में ग्रामीणों ने तालाब से कुछ दूर पर मंदिर का निर्माण कर सभी प्रतिमाओं को स्थापित किया।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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सूर्योपासना का चार दिवसीय महाछठ पर्व शुरू………..!

मधेपुरा सहित जिले के सभी प्रखंडों के मुख्यालय से लेकर सुदूर गाँवों तक सभी समुदाय के लोग सप्ताह भर से इस लोक आस्था के छठ महापर्व को लेकर जहाँ जोर-शोर से घर से घाट तक की सफाई व सजावट करने में लगे नजर आते रहे वहीं प्रदेश के मंत्री-मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन के आलाधिकारी डीएम मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला की पूरी टीम विधि व्यवस्था से लेकर आपात स्थिति से निपटने तक के लिए नदी में गोताखोरों तथा तटों पर दमकल सहित एंबुलेंसों तक की व्यवस्था में जुटे रहे | इस बार घाटों पर सादे लिवास में पुलिस तैनात की जा रही है विस्फोटक पदार्थों पर भी नजर रखी जा रही है |

बता दें कि जहाँ नदी में खतरे के निशान को चिन्हित कर रस्सी से घेरा जा रहा है वहीं प्रत्येक घाट पर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है | यहाँ तक कि एंटी सबोटेज चेकिंग भी सुनिश्चित की गई है |

यह भी बता दें कि प्रशासन द्वारा छठ घाटों पर यदाकदा अगलगी की घटनाओं को रोकने के लिए इस वर्ष आतिशबाजी व पटाखे छोड़ने पर रोक लगा दी गई है | साथ ही मिलावटी खाद्य पदार्थों की सघन जांच एवं विधि संगत कार्रवाई करने हेतु निदेश भी दिया गया है |

छठ को लेकर सदर अस्पताल प्रशासन भी मुस्तैद है | सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पांडे द्वारा अस्पताल में चौबीसो घंटे इमरजेंसी वार्ड को तैनात रहने का आदेश जारी कर दिया गया है | जीवन रक्षक दवाइयाँ भी उपलब्ध करा ली गई है | प्रखंड स्तर पर भी चाक-चौबंद व्यवस्था पूरी कर ली गई है | थानाध्यक्षों द्वारा शांति समिति की बैठकें की जा चुकी हैं | यहाँ तक कि सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम-कचहरी के न्याय सचिव, पंचायत सचिव तथा राजस्व कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि सभी कर्मचारी अपने-अपने पंचायत में छठ की शाम और सुबह में घाटों पर तैनात रहेंगे ताकि व्रतियों को कोई कठिनाई न हो | यदि कोई कमी नजर आये तो उसकी सूचना वरीय पदाधिकारी को तुरंत दें | शराबी या जुआरी कहीं भी नजर आये तो अविलम्ब उच्चाधिकारी को सूचित करें | डीएम मो.सोहैल ने कहा कि इस महाव्रत के दरमियान किसी भी कर्मचारी की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जायेगी |

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मधेपुरा में चित्रगुप्त पूजा उल्लास पूर्वक मनाया गया

न केवल मधेपुरा जिला मुख्यालय के लक्ष्मीपुर मुहल्ला के सामुदायिक चित्रगुप्त भवन में बल्कि बिहारीगंज, बभनगामा, गमैल……. सिंहेश्वर सहित अन्य जगहों पर भी विभिन्न लिपियों के आविष्कारक भगवान चित्रगुप्त की पूजा-अर्चना सर्वाधिक श्रद्धाभाव से उन बच्चों एवं बड़ों द्वारा कलम और दावात रखकर मन्नतें माँगते हुए की गई जिनकी आजीविका का माध्यम मूलरूप से उनकी कलम ही होती है |

बता दें कि अंग्रेजी एवं हिन्दी साहित्य के कलमजीवी विद्वानद्वय वयोवृद्ध राय बसंत कुमार सिन्हा एवं हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने आनेवाली पीढ़ी को यह जानकारी दी-

“दीपावली के पाँच दिवसीय त्योहार का आखिरी दिन ‘यम द्वितीया’ के नाम से प्रचलित है | इस दिन भाई-बहन के प्रेम का पर्व ‘भैया दूज’ मनाने के साथ-साथ कलमजीवी कायस्थ समाज के लोग ब्रह्माजी के पुत्र भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा के समक्ष कलम-दावात रखकर उनकी पूजा करते हैं, मन्नतें मांगते हैं…..|”

मौके पर उपस्थित मधेपुरा के जांबाज एसपी विकास कुमार, डॉ.के.एन.दास, डॉ.अरविंद श्रीवास्तव सहित वार्ड पार्षद अशोक सिन्हा…… आदि ने विचार व्यक्त करते हुए इस बात की पुष्टि की-

“धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी चित्रगुप्त भगवान की पूजा की थी, जिससे प्रसन्न होकर चित्रगुप्त ने भीष्म पितामह को ‘इच्छामृत्यु’ का वरदान दिया था…….|”

Madhepura Hindustan Bureau Chief Shri Saroj Kumar giving the award of excellence to Miss Anushka and Kajal from Shashi Sarojini Saharsa in Kathak and Jat-Jatin Dance respectively.
Madhepura Hindustan Bureau Chief Shri Saroj Kumar giving the award of excellence to Miss Anushka and Kajal from Shashi Sarojini Saharsa in Kathak and Jat-Jatin Dance respectively.

यह भी जानिए कि चित्रगुप्त पूजनोत्सव के मौके पर मधेपुरा चित्रांश समिति के बैनर तले सुकवि सूरज की सरस्वती वंदना के साथ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में पधारे झारखंड से सुशील साहिल, सुपौल से अरविंद ठाकुर, सहरसा से स्वाति शाकंभरी, भागलपुर से फ़ैज़ रहमान फ़ैज़, रामनाथ शोधार्थी, समीर परिमल, अंजनी कुमार सुमन, रामावतार राही, संतोष सिन्हा आदि…… एवं बंदन ब्रदर्स द्वारा स्थापित शशि सरोजनी सांस्कृतिक रंगमंच के प्रभावी कलाकार द्वय काजल एवं अनुष्का ने देर रात तक दर्शकों की तालियां बटोरी |

अंत में कवि-शायर एवं शशि सरोजिनी के कलाकार द्वय को पूर्व मुख्य पार्षद डॉ.विशाल कुमार बबलू, उपाध्यक्ष अशोक यदुवंशी, पूर्व पार्षद ध्यानी यादव, गोपाल श्रीवास्तव, आशा श्रीवास्तव, लाला भूपेन्द्र, जनार्दन लाल दास, के.के.सिन्हा, प्रदीप श्रीवास्तव, निर्भय सिन्हा, नरेश सिन्हा……. आदि की उपस्थिति में संस्था की ओर से सम्मानित कर सहभोज सम्पन्नोपरांत सादर विदा किया गया |

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“जीएसटी का मतलब गब्बर सिंह टैक्स”: राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों गुजरात में खासे सक्रिय हैं। देखा जाय तो राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की जीत के बाद से गुजरात को लेकर कांग्रेस के हौसले में काफी इजाफा हुआ है। फिर हार्दिक पटेल और उनके सहयोगियों की नजदीकी और एंटी इनकम्बेंसी आदि वजहों से भी कांग्रेस वहां अपनी संभावनाओं को लेकर आश्वस्त दिख रही है। इन सबके बीच राहुल भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध रोज नए-नए ‘पंच’ लेकर सामने आ रहे हैं ताकि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का जोश बना रहे। उदाहरण के तौर पर राहुल का ताजा ‘पंच’ ही लें जो कि मोदी सरकार के आर्थिक एजेंडे पर है।

राहुल गांधी ने गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक एजेंडे पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जीएसटी का मतलब ‘गब्बर सिंह टैक्स’ है, जिसका नोटबंदी के जख्मों से उबर रहे देश पर बुरा असर पड़ा है। राहुल ने कहा कि “मोदी ने पिछले साल नोटबंदी अपनी मनमर्जी से लागू कर लाखों लोगों को परेशानी में डाल दिया। ये जो इनका जीएसटी है, ये आम आदमी पर बोझ है… ये जीएसटी नहीं गब्बर सिंह टैक्स है। इसको जल्दबाजी में लाया गया है।”

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आगे कहा, “जीएसटी कांग्रेस लाई थी लेकिन उसमें 18 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स नहीं था और अभी की तरह पांच स्लैब्स भी नहीं थे। हमने सरकार से धीरे-धीरे कानून लागू करने की गुजारिश भी की, लेकिन उन्होंने हमारी नहीं सुनी।… मोदी सरकार गरीबों के खिलाफ है और आम लोगों की भलाई के लिए काम नहीं कर रही है।”

राहुल ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री पर जमकर चुटकी ली और उनकी नकल भी उतारी। उन्होंने कहा, ‘8 नवंबर को क्या हुआ? मोदीजी टीवी पर आए और बोले कि मुझे 500 और 1000 के नोट नहीं पसंद हैं। तो मैंने फैसला किया है कि आज रात से मैं उन्हें बंद कर दूंगा। ऐसा कर के उन्होने एक ही कदम से पूरे देश को झटका दे दिया। पहले दो या तीन दिन उन्हें ही पता नहीं चला कि क्या हुआ। प्रधानमंत्री को 5-6 दिन बाद समझ आया कि उनसे गलती हुई है और वे फिर टीवी पर आए कहा कि 30 दिसंबर तक अगर मैंने काला धन खत्म नहीं किया तो मुझे सूली पर चढ़ा देना।” राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था को खत्म कर दिया है। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ पर भी तंज कसा और कहा कि यह पूरी तरह से फेल हो चुका है और चीनी उत्पाद भारत में भर गए हैं।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि राहुल ने ख़बरों में रहने की कला सीख ली है। अब मंच पर वे पहले से अधिक परिपक्व दिखते हैं और आत्मविश्वास से लबरेज नज़र आते हैं। हालांकि ये तो गुजरात का परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा कि उनके ‘पंच’ में असल में दम कितना था?

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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तेजस्वी ने कुछ इस तरह दी अमित शाह को जन्मदिन की बधाई

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर भारतीय जनता पार्टी प्राय: रोज हमले करती है। सुशील कुमार मोदी समेत बिहार भाजपा के अन्य नेता ही नहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी ऐसा कोई मौका नहीं चूकते। दूसरी तरफ लालू और उनके बेटे भी जवाब देने में कोई कसर नहीं रखते। आज आरजेडी के ‘युवराज’ को भाजपा पर तंज कसने का जबरदस्त मौका मिला और उन्होंने इसे बेहद खास तरीके से भुनाया।

जी हां, मौका था भाजपा के ‘करिश्माई’ अध्यक्ष अमित शाह के जन्मदिन का। रविवार को वे 53 साल के हो गए। देश भर से बधाईयों का तांता लगा था। ऐसे में भला तेजस्वी क्यों पीछे रहते? उन्होंने भी शाह को बधाई दी पर कुछ इस अंदाज में कि वो देखते ही देखते वायरल हो गई।

दरअसल यह बधाई कम, तंज ज्यादा था। बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए बधाई दी और लिखा, “अमित शाह जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। ईश्वर उन्हें अच्छी सेहत, सफलता दे और उनकी दौलत 256000000 (16000×16000) गुना बढ़ जाए।“ तेजस्वी के इस ट्वीट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आईं। पर इससे पहले लोगों की बधाईयों का शुक्रिया अदा कर रहे शाह खामोश रहे। उन्होंने शायद ही अपने जन्मदिन पर ऐसी बधाई का अनुमान किया होगा!

गौरतलब है कि कुछ वक्त पहले अमित शाह पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगे थे और अब उनके बेटे जय शाह पर भी ऐसे ही आरोप लगे हैं। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक ‘मोदी-राज’ में भाजपा अध्यक्ष के बेटे की कमाई 50 हजार से 80 करोड़ जा पहुंची। जी हां, इन ख़बरों पर यकीन करें तो पिछले एक साल में जय शाह की कंपनी का टर्नओवर 16 हजार गुना बढ़ा। तेजस्वी ने अपने ट्वीट में इसी 16000 को निशाना बनाते हुए उसके 16000 गुना बढ़ने की बात कही।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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