उच्च शिक्षा में अब जर्मनी और जापान से आगे हैं भारतीय महिलाएं

इस बात पर दुनिया भर के विचारक और समाजशास्त्री अब एकमत हैं कि महिलाओं को मुख्य धारा में लाए बिना और उन्हें हर क्षेत्र में बराबरी का दर्जा दिए बिना हम विकास की मुकम्मल परिभाषा नहीं गढ़ सकते। और यह बात भी शीशे की तरह साफ है कि विकास का रास्ता शिक्षा से होकर गुजरता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि इस दिशा में हम और हमारी दुनिया कहां है। 35 देशों के संगठन आर्गनाइजेशन फॉर इकोनोमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) की लिंगभेद संबंधी हालिया वैश्विक रिपोर्ट इस पर पर्याप्त रोशनी डालती है।

ओईसीडी के अनुसार भारत समेत दुनिया भर के विकसित और बड़े विकासशील देशों में उच्च शिक्षा में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है ओईसीडी की इस रिपोर्ट के अनुसार भारतीय महिलाएं उच्च शिक्षा में जर्मनी और जापान की महिलाओं से आगे निकल गई हैं। हालांकि 35 देशों (दुनिया के सबसे विकसित और बड़े विकासशील देशों) की सूची में चीन समेत 22 देशों की महिलाएं भारत से आगे हैं।

शिक्षा में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी वाले पांच देशों की बात करें तो वे हैं- स्वीडन (69.1%) कोस्टा रिका (63.7%), स्लोवाक गणराज्य (63.5%), नार्वे (63.2%) और लातविया (63%)। वहीं, स्नातक में महिलाओं की हिस्सेदारी देखें तो वहां भले ही भारत (49.4%) चीन (51.5) से पीछे हो, लेकिन स्विट्जरलैंड (48.8), जर्मनी (48.5) और जापान (45.4) को उसने पीछे छोड़ दिया है।

ओईसीडी की रिपोर्ट नौकरी में महिलाओं के साथ बरते जा रहे लिंगभेद  को भी उजागर करती है। इस दिशा में भारत की स्थिति अत्यंत दयनीय है। आपको हैरानी होगी कि भारत के कार्यबल में 52.9 प्रतिशत जेंडर गैप है, जो दुनिया में सबसे बदतर स्थिति है। वहीं, फिनलैंड में जेंडर के आधार पर कार्यबल में सबसे कम यानि 3 प्रतिशत अंतर है। प्रबंधन स्तर की नौकरियों की बात करें तो इस स्तर पर भारत में 14.5 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी है, जबकि मध्यम आय वाली नौकरियों में जेंडर गैप 56 प्रतिशत का है।

नौकरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए हालांकि भारत में भी कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन इस क्षेत्र में अभी लंबा सफर तय करना है। विश्व-पटल पर देखें तो ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आइसलैंड, इटली, इजरायल और नॉर्वे जैसे देशों ने निजी व सरकारी नौकरियों में महिलाओं को अलग कोटा देने का प्रावधान कर रखा है। हमें भी इस दिशा ठोस कदम उठाने होंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप    

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