इस राजनीतिक मेलोड्रामा का अंत क्या है ?

बिहार की राजनीति का मेलोड्रामा अपने चरम पर है। सिर पर नीतीश कैबिनेट से बर्खास्तगी की तलवार झेल रहे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के सुरक्षाकर्मियों ने बुधवार को सचिवालय के बाहर पत्रकारों से बदसलूकी और मारपीट की। दरअसल तेजस्वी कैबिनेट की बैठक के बाद बाहर आ रहे थे और बाहर सवालों की बौछार लिए पत्रकारों की भीड़ जमा थी। पत्रकारों ने ज्योंहि तेजस्वी से सवाल पूछने की कोशिश की, उनके सुरक्षाकर्मियों ने तथाकथित रूप से उन पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेजस्वी के गार्डों ने पत्रकारों को दौड़ाया और उनसे हाथापाई की। सचिवालय के बाहर बहुत देर तक हंगामा होता रहा और अफरा-तफरी मची रही।

गौरतलब है कि आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण इन दिनों जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। इसके बाद से ही बिहार में महागठबंधन सरकार के भविष्य को लेकर कयासों का दौर चल रहा है। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी पर सीबीआई द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाए जाने की संभावना है। मंगलवार को अपनी पार्टी की बैठक के बाद नीतीश ने गेंद लालू के पाले में डालते हुए कहा था कि ये उनका और उनकी पार्टी का मामला है, इसीलिए इस पर वो स्वयं निर्णय लें। इस पर आरजेडी ने बिना देर किए टका सा जवाब दिया और कहा कि तेजस्वी किसी सूरत में इस्तीफा नहीं देंगे।

ऐसे में नीतीश की छवि और उनके ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए इस बात की संभावना जताई जा रही है कि लालू द्वारा इस समस्या का ‘समाधान’ नहीं निकाले जाने पर वो कोई कड़ा कदम उठा सकते हैं। उन्होंने अपनी पार्टी की अहम बैठक में स्पष्ट संकेत किया था कि भ्रष्टाचार के मामले में वो अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति से कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि जिन पर आरोप लग रहे हैं उन्हें तथ्यों के साथ जनता के बीच जाना चाहिए। साथ में उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी पार्टी के नेताओं पर जब भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।

बहरहाल, इस सारी रस्साकशी में एक बात मन को मथे जा रही है कि क्या आज की राजनीति में नैतिकता, मर्यादा और शुचिता जैसे शब्दों का कोई अर्थ नहीं रह गया है? क्या इन शब्दों में सुविधानुसार अपना अर्थ भरा जा सकता है? अगर नहीं, तो लालू सकारात्मक दिशा में क्यों नहीं सोच पा रहे? अगर उनके कहे मुताबिक वे और उनका परिवार निर्दोष हैं तो फिर सांच को आंच क्या? सच जो भी है, जहां भी है, आज नहीं तो कल सामने आना ही है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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