135वीं जयन्ती पर महर्षि मेंहीं मय हुआ मधेपुरा

समस्त समाज में शांति और सौहार्द कायम करने के लिए अहंकार को त्याग कर विनम्रता के मार्ग पर चलना सिखाने वाले महर्षि मेंहीं जी महाराज के जयकारे व जयघोष से शुक्रवार को सुबह-सवेरे से गुंजायमान होती रहीं मधेपुरा जिले की गलियाँ | प्रभातफेरी के दौरान वाहनों की लम्बी कतार वाली शोभायात्रा में पुरुषों से ज्यादे महिलाएं और बूढे से अधिक बच्चे शामिल थे | सत्संग, ध्यानाभ्यास व प्रवचन में शामिल हुए 50 हजार से कहीं ज्यादे भक्तजन !

बता दें कि जिले के सभी प्रखंडों में संतमत के संस्थापक ब्रह्मलीन संत महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की आकर्षक झांकियाँ गाजे-बाजे व बैंड-बाजे के साथ निकाली गईं | समाज को नई दिशा देने वाले महर्षि मेंहीं के तैलचित्र पर घर-परिवार से निकल-निकलकर जहाँ महिलाएं पुष्पांजलि करती एवं आरती उतारती देखी गईं वहीं बड़े-बुजुर्गों को चित्र पर माल्यार्पण करते देखा गया | प्रभातफेरी व शोभायात्रा या नगर-कीर्तन व मनोरम झांकी के दौरान संतो द्वारा श्रद्धालुओं को महर्षि मेंहीं के आदर्शों एवं उच्च विचारों को आत्मसात करने के लिए नारे लगाते देखे गये | इस दौरान पूरे जिले में भक्तिमय माहौल बना रहा क्योंकि महर्षि मेंहीं ने अपने उच्च सोच एवं विचारों से भटकते समाज को नई दिशा देने का काम किया था |

यह भी बता दें कि महर्षि मेंहीं की जयंती पर दिनभर सम्पूर्ण जिले में और जिले से बाहर भी उत्सवी माहौल बना रहा | कहीं दिल्ली व कोलकाता से आये श्रद्धालुओं व भक्तों को भजन-कीर्तन में मशगूल देखा गया तो कहीं चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों को जीवन में आत्मसात करने की शपथ लेते हुए कैमरे में कैद किया गया |

इस अवसर पर सामूहिक भंडारे के साथ-साथ जहाँ सभी आश्रमों में भजन-कीर्तन, प्रवचन-पुष्पांजलि, सत्संग व वेदपाठ की धूम मची रही वहीं कई प्रमुख जगहों पर अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के मंत्रियों व महामंत्रियों द्वारा महर्षि मेंहीं के व्यक्तित्व-कृतित्व, आदर्श-आचरण व उनके सद्विचारों पर प्रकाश डालते हुए यह भी कहा गया कि संत मेंहीं युग प्रवर्तक ही नहीं युगावतार थे, एक महान समन्वयकारी संत थे | उनके बताये रास्तों पर चलकर ही सद्ज्ञान और कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो पायेगा |

चलते-चलते यह भी कि महर्षि मेंहीं का जन्म मधेपुरा जिला अंतर्गत ग्वालपाड़ा प्रखंड के मझुआ श्याम गांव में उनके ननिहाल में हुआ था जो आज की तारीख में संतमत के लाखों अनुयायियों का प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है | फिलहाल परमहंस महर्षि मेंहीं की साधना स्थली भागलपुर के कुप्पाघाट के आचार्य स्वामी हरिनंदन बाबा द्वारा जयंती समारोह पर आयोजित प्रवचन के दौरान ये बातें कही गई-

श्रद्धालुजन ! संतों के बताये मार्ग को अपनाएं, क्योंकि संतों का अवतार भटके हुए लोगों के कल्याण के लिए ही होता है | गुरूवाणी उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि सबका ईश्वर एक है और उसकी प्राप्ति का रास्ता भी एक है जो बाहर नहीं…… मनुष्य के अंदर है |

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