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‘शत्रु’ का कहा ‘सच’ है या ‘शत्रुता’..?

बिहार में दो चरण के मतदान के बाद क्या सचमुच भाजपा नेताओं के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही हैं..? पहले और दूसरे चरण की वोटिंग के बाद कोई ‘स्पष्ट रुझान’ ना देख क्या भाजपा के तमाम रणनीतिकारों को ‘दिल्ली’ जैसी कोई सम्भावना दिखने लगी है..? क्या उम्मीद के विपरीत परिणाम की आशंका से प्रधानमंत्री मोदी की बिहार की कई प्रस्तावित रैलियां रद्द की गई हैं..? इन सारे सवालों के जवाब तो खैर समय आने पर मिलेंगे लेकिन भाजपा के अपने ही ‘घर’ के भीतर से जो बयान सामने आया है वो ‘समय’ से पहले ‘समय’ को आमंत्रित करने जैसा है।

भाजपा के घर के भीतर से ये बयान बीच चुनाव में ‘शत्रु’ के अलावे कौन दे सकता है भला। जी हाँ, ‘शत्रु’ यानि शत्रुघन सिन्हा। बीते 17 अक्टूबर को चैनल न्यूज़ 18 के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि “बिहार में पहले दो चरण के मतदान के बाद प्रदेश बीजेपी नेताओं के चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि अन्तिम समय में प्रधानमंत्री की जनसभाओं की संख्या कम करने से क्या नकारात्मक संदेश नहीं जा रहा है..? ‘शत्रु’ ने बिना रुके यह भी कहा कि भाजपा के नेता “हम तो डूबे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे” वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं।

पहले सिनेमा, फिर राजनीति में अलग पहचान रखने वाले और अब अलग-थलग पड़ गए भाजपा सांसद शत्रुघन सिन्हा की नाराज़गी कोई नई बात नहीं। अपनी पार्टी के निर्णयों और नेताओं को लेकर आए दिन अपने बयानों से वो पार्टी को असहज स्थितियों में डालते रहे हैं। लेकिन इस बार उन्होंने जो कहा है और वो भी बिहार के बीच चुनाव में, भाजपा को उससे बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बहरहाल, शत्रुघन सिन्हा ने क्या कहा उसे भूल भी जाएं तो भी इस ‘थ्योरी’ को सिरे से नकारना मुश्किल है कि अगर ‘धुआँ’ है तो कम या ज्यादा कहीं ‘आग’ भी होगी ही। और फिर ‘शत्रु’ की बात की पुष्टि करते दिख रहे कुछ घटनाक्रम भी हैं जिन पर निगाह डालनी होगी। सबसे पहले तो ये कि ‘द वीक’ की ख़बर के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बिहार में प्रस्तावित रैलियों मे से छह रैलियाँ रद्द कर दी गई हैं। यही नहीं, प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बिहार में लगे बड़े-बड़े पोस्टरों को उतारा जा रहा है। माना जा रहा है कि ऐसा उम्मीद के विपरीत नतीजे आने की स्थिति में बड़े नेताओं को ‘बचाने’ के लिए किया जा रहा है। मोदी और शाह की जगह सुशील कुमार मोदी, नंदकिशोर यादव, मंगल पांडेय, सीपी ठाकुर, हुकुमदेव नारायण यादव, अश्विनी चौबे जैसे स्थानीय नेताओं के पोस्टर लगाए जा रहे हैं। और तो और पार्टी ने अपना चुनावी नारा तक बदल दिया है। पहसे नारा था “अबकी बार, मोदी सरकार”, फिर इसे बदलकर किया गया “बदलिए सरकार, बदलिए बिहार” और अब कहा जा रहा है “विकास की होगी तेज रफ्तार, जब केन्द्र-राज्य में एक सरकार।”

हालांकि चुनावी मामलों के कई जानकार इसे भाजपा की सोची-समझी रणनीति बता रहे हैं। दूसरे चरण के मतदान के ठीक पहले भाजपा ने एक नए तरीके का विज्ञापन दिया जिसमें किसी नेता का फोटो नहीं, सिर्फ 11 वादे थे और शीर्षक था “भाजपा का साथ, सबका विकास।”  इसके अलावे एक और पोस्टर है जिस पर एक ओर रामविलास-मांझी-कुशवाहा और दूसरी ओर सुशील कुमार मोदी-नंदकिशोर यादव-मंगल पांडेय की तस्वीरें हैं। कहा जा सकता है कि भाजपा प्रचार में अपने केन्द्रीय और स्थानीय नेताओं के बीच ‘संतुलन’ बनाए रखने के लिए ऐसा कर रही है। जहाँ तक रैलियों की बात है, तो कुछ रैलियां अगर रद्द भी कर दी गई हों, फिर भी अभी प्रधानमंत्री की लगभग 40 सभाएं होनी हैं।

राजनीति का तकाजा है कि शत्रुघन के बयान की व्याख्या भाजपा के विरोधी अपनी तरह से करेंगे और भाजपा उसका जवाब अपने तरीके से देगी। लेकिन ‘शत्रु’ ने जो कहा वो ‘सच’ था या ‘शत्रुता’ थी उनकी, ये देखने की बात होगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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