मिस वर्ल्ड का जवाब उससे भी सुन्दर !

1966 में रीता फारिया… भारत ही नहीं, सम्पूर्ण एशिया से बनने वाली पहली मिस वर्ल्ड… फिर 28 साल के इंतजार के बाद 1994 में ऐश्वर्या राय… इसके बाद अगले छह सालों में तीन मिस वर्ल्ड – 1997 में डायना हेडन, 1999 में युक्ता मुखी और 2000 में प्रियंका चोपड़ा… फिर 17 साल का इंतजार और अब मानुषी छिल्लर… मिस वर्ल्ड 2017… 118 देशों की सुन्दरियों में सर्वश्रेष्ठ..! भारत की बेटी ने एक बार फिर पूरी दुनिया में अपनी सुन्दरता – सिर्फ चेहरे की नहीं, सम्पूर्ण व्यक्तित्व की सुन्दरता – का लोहा मनवा लिया। चीन के सनाया में आयोजित की गई मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली मिस इंडिया मानुषी छिल्लर को मिस वर्ल्ड 2017 घोषित किया गया। इस प्रतियोगिता में दूसरे नंबर पर मिस मेक्सिको रहीं जबकि तीसरे नंबर पर मिस इंग्लैंड।

20 वर्षीया मानुषी की जीत की सबसे अहम बात यह रही कि वो ‘हेड टू हेड चैलेंज’ और ‘ब्यूटी विद पर्पस सेगमेंट’ दोनों में अव्वल रहीं। खास तौर पर अंतिम सवाल के जवाब से तो उन्होंने न केवल ज्यूरी बल्कि पूरी दुनिया का दिल जीत लिया। मानुषी से पूछा गया अंतिम सवाल था कि दुनिया में किस पेशे की सेलरी सबसे ज़्यादा होनी चाहिए और क्यों? मानुषी ने इसका बेहद खूबसूरत जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मेरी मां मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। इसलिए मैं कह सकती हूं कि मां होने की जॉब सबसे बेहतरीन है। बात केवल पैसे की नहीं है, बल्कि प्यार और सम्मान के लिहाज से, कोई भी मां सबसे ज्यादा वेतन की हकदार होती है।”

67वीं मिस वर्ल्ड मानुषी के व्यक्तित्व के कई पहलू हैं। वो मेडिकल की स्टूडेंट हैं और कार्डिएक सर्जन बनना चाहती है। उन्हें पैराग्लाइडिंग, बंजी जंपिंग और स्कूबा डाइविंग जैसे स्पोर्ट्स पसंद हैं। इसके अलावा मानुषी ट्रेंड इंडियन क्लासिकल डांसर हैं और स्केचिंग और पेंटिंग भी बनाती हैं। यही नहीं, मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में जाने से पहले मानुषी समाजसेवा के कार्यों से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने महिलाओं के पीरियड के दौरान हाइजीन से संबंधित एक कैंपेन में करीब 5000 महिलाओं को जागरूक किया है।

मिस वर्ल्ड बनना मानुषी के बचपन का सपना था। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया। अब भारत की इस बेटी को अपने सपनों को विस्तार देना है। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन से उन्होंने जैसी उम्मीद बंधाई है, उसे देख कोई भी लक्ष्य उनके लिए असंभव नहीं लगता। उज्जवल भविष्य के निमित्त उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ढेर सारी शुभकामनाएं!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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