नेहरा ने क्रिकेट को कहा अलविदा

बुधवार को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में खेला गया टी-20 मैच न्यूजीलैंड पर भारत की धमाकेदार जीत के साथ ही शानदार तेज गेंदबाज आशीष नेहरा के क्रिकेट को अलविदा कहने के कारण भी याद किया जाएगा। 38 वर्षीय नेहरा ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि न्यूजीलैंड के खिलाफ खिलाफ खेला जाने वाला यह मैच उनका आखिरी मैच होगा। नेहरा ने कहा था, “मेरे लिये यह अहम है कि ड्रेसिंग रुम में लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। सभी कह रहे हैं कि मैं एक-डेढ़ साल और खेल सकता था। मेरा हमेशा यह मानना रहा है कि ऐसे समय में संन्यास लेना चाहिए जब लोग ‘क्यों नहीं’ से ज्यादा यह कहें कि ‘क्यों’। मैं शिखर पर रहते हुए संन्यास लेना चाहता था।”

बहरहाल, अपने क्रिकेट करियर का समापन करने वाले इस तेज गेंदबाज को भारतीय टीम ने ट्रॉफी से नवाजा और उनके योगदान की सरहाना की। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने भी अनुभवी तेज गेंदबाज आशीष नेहरा को उनके आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच से पहले शुभकामनाएं दीं और कहा, “हर खिलाड़ी के लिए पहला और आखिरी मैच खास होता है। कई वर्षों तक भारतीय क्रिकेट में अपनी सेवाएं देने के बाद नेहरा अपने घर में विदाई के हकदार हैं।” नेहरा को खेल का महान दूत बताते हुए कपिल ने कहा, ‘आपने देश की सेवा काफी अच्छे से की।’

बता दें कि नेहरा की विदाई के मौके पर फिरोजशाह कोटला में साइट स्क्रीन के ऊपर ‘फेयरवेल आशीष नेहरा’ नाम का संदेश लिखा गया। यही नहीं, उनकी विदाई को यादगार बनाने के लिए फिरोजशाह कोटला स्टेडियम के एक छोर का नाम नेहरा के नाम पर रखा गया है। गौरतलब है कि नेहरा ने अपने 18 साल के लंबे करियर की शुरुआत फरवरी 1999 में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में की थी।

नेहरा का करियर चोटों से काफी प्रभावित रहा, लेकिन वह भारत के बेहतरीन गेंदबाजों में से एक रहे हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में उन्होंने कुल 117 टेस्ट, 120 वनडे और 26 टी-20 मैच खेले। टेस्ट में उनके नाम कुल 44, वनडे में 157 और टी-20 में 34 विकेट हैं। उन्हें डरबन में 2003 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 23 रन देकर छह विकेट लेने के लिए खास तौर पर याद किया जाता है। उन्होंने यह शानदार प्रदर्शन बीमार होने के बावजूद किया था। इस विश्व कप में जवागल श्रीनाथ, जहीर खान और नेहरा की तिकड़ी ने भारतीय टीम की सफलता में अहम रोल निभाया था। नेहरा 2011 में धोनी की कप्तानी में विश्व कप जीतने वाली टीम के भी सदस्य थे और सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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