कोसी की बेटी कोमल चली…… कलाम की राह

कुछ करने का संकल्प और अंतर्मन में आत्मविश्वास- ये दोनों जीवन में अद्भुत चमत्कार ला सकता है | जैसा कि भारती-मंडन की ज्ञान भूमि महिषी की बेटी कोमल ने एक बार फिर खुद को प्रमाणित कर दिखा दिया | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में बतौर वैज्ञानिक बनकर कोमल ने डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के ‘समृद्ध विचार’ को पंख लगाने में अद्भुत सफलता पाई है-

भारत के कई कोटि युवजनों को कभी छोटा या

असहाय महसूस नहीं करना चाहिए | हम सब अपने

भीतर दैवीय शक्ति लेकर जन्मे हैं | हम सबके

भीतर ईश्वर का तेज छिपा है | हमारी कोशिश

हो इस तेजपुंज को पंख देते रहने की, जिससे यह

चारों ओर अच्छाइयों का प्रकाश फैला सके…!

बता दें कि मंडन-भारती की ज्ञानभूमि महिषी से लेकर सुबे बिहार के गौरव में चार चांद लगाने वाली कोमल इसरो केंद्रीयकृत भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित वैज्ञानिक CS अभियंता की वार्षिक परीक्षा में हाल ही में शामिल हुई | सम्मिलित होने वाले लगभग 50 हजार परीक्षार्थियों को कठिन जांच परीक्षण की दौर से गुजरना पड़ा | 13वें नंबर पर अंतिम रुप से मुहर लगवा ली |

यह भी जानिये कि बतौर वैज्ञानिक इसरो में कोमल को इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन सेक्शन मिला है जहाँ बनने वाले सेटेलाइट एंड रॉकेट के निर्माण में कोमल भी कलाम की तरह ही अपना योगदान देती रहेगी | कोमल निरंतर एक से बढ़कर एक परिणाम लाती रहेगी और माताश्री पूनम को पूनम की चाँद बनकर तथा पिताश्री मनोरंजन को नई-नई उपलब्धियों के साथ भरपूर मनोरंजन करती रहेगी | तभी तो दिल्ली आईआईटी से एमटेक कर रही कोमल कहती है कि ISRO राष्ट्रसेवा करने का बहुत बड़ा जरिया है | इससे जुड़ना ही अपने आप में गौरव की बात है |

जहाँ एक ओर देवघर में सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कोमल के माता-पिता अपनी बेटी की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए इसे बाबा वैद्नाथ बासुकीनाथ का आशीर्वाद एवं कोमल के गहरे अध्ययन व लगन का फल मानते हैं वहीं सहरसा आर.झा महिला कॉलेज की डॉ.रेणु सिंह, आर.एम.कॉलेज के समाजशास्त्री डॉ.विनय कुमार चौधरी, सुपौल के बुद्धिजीवी विश्वकर्मा जी एवं मधेपुरा के डॉ.कलाम कहे जानेवाले डॉ.मधेपुरी ने कोमल की इस कामयाबी को राष्ट्रीय स्तर पर कोसी कमिश्नरी को पहचान दिलाने की संज्ञा दी है |

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