पृष्ठ : मधेपुरा अबतक

मनहरा गांव में शहीद चुल्हाय की 102वीं जयंती मनी

1942 के “अंग्रेजों भारत छोड़ो” आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले शहीद चुल्हाय मंडल की 102वीं जयंती उनके पैतृक गांव में मनहरा में समारोह पूर्वक मनाई गई। समारोह का शुभारंभ पूर्व मंत्री सह विधायक प्रोफेसर चंद्रशेखर, सिंहेश्वर विधायक श्री चंंद्रहास चौपाल, समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, प्रो.(डॉ.)नरेश कुमार, प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार सहित स्वागताध्यक्ष प्रो.जयकृष्ण यादव, सचिव नरेश कुमार व पूर्व मुखिया रविशंकर कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर बराही मुखिया श्रीमती गुंजन कुमारी की अध्यक्षता में किया गया। अतिथियों ने शहीद चुल्हाय की बहादुरी का बखान किया और आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को नमन किया।

102nd Shahid Chulhai Jayanti at Manahra.
102nd Shahid Chulhai Jayanti at Manahra.

डॉ.मधेपुरी ने शहीद चुल्हाय के नाम विश्वविद्यालय में बनाए गए शहीद चुल्हाय उद्यान मधेपुरा में शहीद चुल्हाय मार्ग एवं शहीद चुल्हाय चौक की चर्चा की और मनहरा सुखासन में शिक्षा सेनानी कीर्ति नारायण मंडल एवं स्वतंत्रता सेनानी कमलेश्वरी प्रसाद मंडल सहित शहीद चुल्हाय पर कविता का पाठ किया। डॉ.मधेपुरी सहित कर्पुरी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार यादव, मुखिया परमेश्वरी प्रसाद यादव, पूर्व मुखिया जनार्दन प्रसाद यादव व एडवोकेट सुधांशु रंजन ने इन महापुरुषों के नाम नगर, पथ एवं टूर्नामेंट का नामकरण करने का आह्वान किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम संक्षेप में किया गया।

सम्बंधित खबरें


मतदाता ही हैं श्रेष्ठ लोकतंत्र के निर्माता

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इसे सर्वश्रेष्ठ बनाना प्रत्येक भारतीय का परम धर्म है। आज हमें भारत को सर्वश्रेष्ठ बनाने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।

बता दें कि यूपी सहित पांच राज्यों में विधानसभा का चुनाव होने जा रहा है। राज्य के विकास की जिम्मेवारी नेता और जनता दोनों पर है। राजनीतिक दलों के नेताओं को वादे करते समय सोचना चाहिए कि वादों को लेकर विकास के स्तर पर राज्य को क्या लाभ होगा ?  दूसरी तरफ जनता भी वादों की व्यवहार्यता पर विचार करते हुए सही का चुनाव करना सीखें।

जानिए कि विकास को आर्थिक समृद्धि के अतिरिक्त सामाजिक उत्थान और मानवीय सुरक्षा के रूप में देखा जाता है। राजनीतिक दलों द्वारा ऐसी नीतियां अपनानी होगी जो समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से अपना लाभ पहुंचा सके।

चलते-चलते यह भी कि रोटी, कपड़ा और मकान के अतिरिक्त बिजली, पानी और सड़क तो चाहिए ही साथ ही अब इंटरनेट एवं डिजिटल कनेक्टिविटी भी चाहिए ताकि सभी का जीवन समृद्ध और सुखी हो सके। मतदाता सतर्क रहेंगे तभी श्रेष्ठ लोकतंत्र का निर्माण हो सकेगा।

सम्बंधित खबरें


युवाओं के प्रेरणा स्रोत हैं स्वामी विवेकानंद

शनैः शनैः स्वामी विवेकानंद की जयंती समस्त भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों ही नहीं बल्कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के युवाओं द्वारा भी मनाई जाने लगी है। कोरोना संक्रमण के कारण स्कूली बच्चे घर में ही स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाने को विवश हो गए हैं।

मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने अपने निवास ‘वृंदावन’ में चंद बच्चों की मौजूदगी में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर बच्चों से यही कहा-

स्वामी विवेकानंद का जीवन आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा। मात्र 30 वर्ष की आयु में उन्होंने अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और उसे सार्वभौमिक पहचान दिलाई। उनका जीवन सदा सकारात्मकता से भरा मिला। डॉ.मधेपुरी ने बच्चों से यह भी कहा कि बकौल स्वामी विवेकानंद विवेक और वैराग्य से मनुष्य के विषय की अभिलाषा जा सकती है परंतु उसकी वासना निर्मूल नहीं होती जबकि एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि यदि व्यक्ति के आगे बहुत ऊंचा लक्ष्य हो और वह अपनी सारी ऊर्जा उसे पाने में लगा दे तो कुछ पल के लिए उसकी वासना भी ठहर जाती है। छोटा लक्ष्य को हमेशा वे अपराध मानते थे। स्वामी विवेकानंद और डॉ.कलाम भारतीय स्वाभिमान के अमर स्वर के रूप में सदा याद किए जाते रहेंगे।

सम्बंधित खबरें


नीतीश सरकार द्वारा प्रखंड स्तर पर होगी सुधा दूध की स्थापना

नीतीश सरकार पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने में जुटी है। दूध उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।

वर्तमान में लगभग 55 लाख लीटर दूध का उत्पादन पशुपालकों द्वारा प्रतिदिन किया जा रहा है। अगले 2 वर्षों में विभाग द्वारा 15 लाख लीटर दूध उत्पादन में वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार नई नीति लाने जा रही है।

बता दें कि इस नई नीति के तहत नीतीश सरकार द्वारा सभी प्रखंड मुख्यालयों व नगर पंचायतों में शीघ्र ही सुधा दूध बूथ खोलने की तैयारी है। परंतु, दूध की कमी दूर करना बड़ी चुनौती है। बिहार के प्रमुख गौशाला संचालकों के अनुसार इसके पीछे प्रमुख वजह दुधारू पशुओं की नस्ल सुधार को लेकर लचर कार्यप्रणाली अहम मुद्दा है।

सम्बंधित खबरें


आधुनिक सुविधाओं से लैस है विवाह-जन्मदिन आदि सामाजिक सरोकार के लिए बना- के.के.दरबार

नव वर्ष में साहुगढ़ निवासी कोल इंडिया के मुख्य अभियंता रह चुके स्मृतिशेष इंजीनियर कमलाकांत यादव के सुपुत्र लेफ्टिनेंट कर्नल शशि शेखर व पुत्रवधू डॉ.जूली ज्योति, प्राचार्या मधेपुरा विमेंस कॉलेज व सुपुत्री मधेपुरा कॉलेज के संस्थापक डॉ.अशोक कुमार व डॉ.पूनम कुमारी के सतत् प्रयास से उनकी स्मृति में बनाया गया है- के.के. दरबार जो आधुनिक सुविधाओं से लैस है और जहां जन्मदिन से लेकर इंगेजमेंट व वैवाहिक कार्यक्रमों को सकुशल संपन्न करने के लिए एक बड़ा हाॅल, 15 एसी और नॉन एसी कमरे व अन्य सुविधाएं सहित बहुत बड़ा पार्किंग स्पेस भी है। इसके अतिरिक्त और ढेर सारी सुविधाएं बढ़ाए जाने का सिलसिला भी जारी है।

कर्नल शशि शेखर की कार्य व्यस्तता के कारण 10 जनवरी, 2022 (सोमवार) को केके दरबार का उद्घाटन उनके गुरुवर वेदानंद बाबू, महेंद्र बाबू एवं भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक, कुलानुशासक व कुलसचिव रह चुके समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने सर्वप्रथम फीता काटकर किया।

Samajsevi Shikshavid Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri addressing guests at K.K. Darbar.
Samajsevi Shikshavid Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri addressing guests at K.K. Darbar.

पुनः केके दरबार हॉल के मंच पर सीनेट व सिंडिकेट के मेंबर सह केपी कॉलेज के प्राचार्य प्रो.(डॉ.)जवाहर पासवान, कुमार किशोर बाबू, चंद्रशेखर बाबू, डॉ.मधेपुरी, महेंद्र बाबू, राजद जिलाध्यक्ष जयकांत यादव, प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार, प्राचार्या डॉ.जूली ज्योति, उमेश मुखिया, कर्नल शशि शेखर, मनोज भटनागर आदि की उपस्थिति में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने सहयोग करते हुए 92 वर्षीय गुरुवर चंद्रशेखर बाबू उर्फ वेदानंद बाबू से दीप प्रज्जवलित कराकर उद्घाटन कार्यक्रम संपन्न कराया, जिन्होंने अपने संबोधन में अपने प्रिय छात्र के.के. को जहां आधुनिक विश्वकर्मा की संज्ञा दी वहीं गुरुवर महेंद्र बाबू ने कहा कि वे कमलाकांत को अंग्रेजी पढ़ाया करते थे।

उद्घाटन के बाद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विस्तार से अपने साथ रासबिहारी उच्च विद्यालय में पढ़ने वाले इंद्रनारायण प्रधान, तेज नारायण, कमलाकांत, दिनेश कुमार, रघुनाथ यादव, नारायण यादव आदि को संदर्भित करते हुए आगे प्रभात कुमार एवं डॉ.पूनम कुमारी के पिताश्री स्मृतिशेष इंजीनियर सच्चिदानंद यादव के योगदान को याद कर भावुक होते दिखे। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि उन दिनों कोल इंडिया में एक वर्ष की कार्यतालिका बनाई जाती थी जिसमें इंजीनियर केके यादव की मेहनत और लगन के कारण घोषित कार्य 8 से 9 महीने में पूरा हो जाया करता था। इस कारण उन्हें विभाग द्वारा बराबर प्रमोशन पाने का अवसर मिल जाता। यह बात 1988 की है। एक बार केके के डिप्टी चीफ इंजीनियर में प्रमोशन के लिए फाइल बढ़कर कोल इंडिया लिमिटेड कोलकाता के टंडन साहब के पास अकारण 6 महीने से अधिक से पड़ी रह गई, तब केके के कहने पर डॉ.मधेपुरी ने  तत्कालीन सांसद डॉ.महावीर प्रसाद यादव सह प्राचार्य टीपी कॉलेज से कहकर टंडन साहब को पत्र प्रेषित करवाया था। एमपी डॉ.महावीर प्रसाद यादव उन दिनों कोल इंडिया लिमिटेड के सदस्य हुआ करते थे। एक सप्ताह के अंदर केके का प्रमोशन हुआ और उन्होंने जब डॉ.मधेपुरी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की तो उन्होंने यही कहा- “केके यानी कमाल के कर्मवीर हो यार”।

उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय समन्वयक डॉ.अभय कुमार, डॉ.रामदेव प्रसाद यादव, समाजसेवी ध्यानी यादव, डॉ.ललन कुमार, डॉ.मिथिलेश कुमार राणा आदि अतिथियों द्वारा अपने उद्गार में  केके के विचारों को परोसने का काम किया गया। साहुगढ़ के मुखिया मुकेश कुमार, पूर्व मुखिया अरविंद कुमार, राजेंद्र प्रसाद यादव, जय कुमार यादव, मुश्ताक मोहम्मद, मनोज भटनागर, योगी जनक आदि भी उद्घाटन समारोह में शामिल थे।

आरंभ में कर्नल शशि शेखर, प्राचार्या डॉ.जूली ज्योति, उमेश कुमार व बबीता कुमारी ने अंगवस्त्रम, पाग व शाॅल द्वारा सभी मंचासीन अतिथियों का सत्कार किया और स्वागत भाषण भी दिया। समारोह की अध्यक्षता मधेपुरा कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार ने की और मंच का सफल संचालन किया अंतरराष्ट्रीय उद्घोषक पृथ्वीराज यदुवंशी ने।

सम्बंधित खबरें


कोरोना का कहर, बरतें सावधानी- डॉ.मनीष

बकौल डॉ.मनीष मंडल अधीक्षक (आईजीआईएमएस) पटना, 32 सैंपल की जांच में 85% यानी 27 संक्रमितों में आॅमिक्रोन तथा 4 लोगों में डेल्टा वेरिएंट मिला है। इनमें पटना के 22 सैंपल थे जिसमें  20 में आॅमिक्रोन और 1 में डेल्टा वेरिएंट की पुष्टि हुई है।

डॉ.मंडल ने बताया कि ये सैंपल यात्रा इतिहास वाले मरीज का है। ये राज्य के बाहर कहीं घूमने या इलाज कराने गए थे। इन सैंपल की जांच आईजीआईएमएस के माइक्रोबायोलॉजी लैब में हुई है। रविवार को प्रथम 32 सैंपल की रिपोर्ट आई है।

चलते-चलते यह भी कि पटना समेत बिहार के 7 जिलों में आॅमिक्रोन की पुष्टि हो चुकी है। बिहार में कोरोना का आॅमिक्रोन वेरिएंट तेजी से पांव पसार रहा है। डेल्टा से 10 गुना ज्यादा संक्रमण। संक्रमितों में दक्षिण अफ्रीका वाले वेरिएंट ज्यादा हैं। इसलिए इसे सुपर स्प्रेडर कहा जाता है।

अतः विशेषज्ञों का कहना है कि इसके बचाव के लिए दो गज दूरी, मास्क है जरूरी का कड़ाई से पालन करना जरूरी है। यह भी कि भीड़ में जाने से बचने, अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क पहने या डबल मास्क पहनने के साथ-साथ साबुन से बीच-बीच में हाथ की सफाई करने में कभी भी कोताही नहीं करनी चाहिए।

सम्बंधित खबरें


‘हिन्दी दिवस’ और ‘विश्व हिन्दी दिवस’

आज दुनिया भर में भारत की पहचान जितनी अपनी सांस्कृतिक विविधताओं और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए है, उतना ही इसे हिन्दी के लिए भी पहचाना जाता है। किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष भारत आएं और उन्हें भारत से निकटता प्रदर्शित करने के लिए कोई एक शब्द या वाक्य बोलना हो तो वो हिन्दी का होता है और दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनी के लिए भारत के बाजार में अपनी पैठ बनाने के लिए हिन्दी का सहारा लेना अनिवार्य-सा है। कारण स्पष्ट है कि हमारे देश में 77% लोग हिन्दी लिखते, पढ़ते, बोलते और समझते हैं।

भारत की अनेकता में एकता का स्वर हिन्दी के माध्यम से जैसे आज गूंजता है वैसे ही 1947 से पहले भी गूंजा करता था। यही कारण है कि 1946 में स्वतंत्र भारत के संविधान के लिए बनी समिति के सामने जब राष्ट्र की भाषा का सवाल खड़ा हुआ तब संविधान निर्माताओं के लिए हिन्दी ही सबसे बेहतर विकल्प थी। यह अलग बात है कि हिन्दी को सम्पूर्ण राष्ट्र की भाषा बनाए जाने को लेकर कुछ लोग विरोध में भी थे। इसलिए हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा दे दिया गया। खैर, जिस दिन देश को राजभाषा का दर्जा दिया गया था वो 14 सितंबर 1949 का था और इस दिन को हम आज हिन्दी दिवस के रूप में मनाते हैं।

गौरतलब है कि पहली बार राजभाषा घोषित किए जाने के 4 साल बाद यानि 14 सितंबर 1953 को हिन्दी दिवस मनाया गया था। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यह फैसला किया था। इस दिन विभिन्न सरकारी संस्थानों में हिन्दी को लेकर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लेकिन यहां यह जानना दिलचस्प होगा कि भारत में जहां 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है वहीं दुनिया भर में हिन्दी दिवस मनाने की तारीख अलग है और वो तारीख है 10 जनवरी।

दरअसल, दुनिया भर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित किया गया था जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के तत्वाधान में हुआ था, उद्घाटन किया था तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने, मुख्य अतिथि थे मॉरीशस के प्रधानमंत्री सर शिवसागर रामगुलाम और सम्मेलन से संबंधित राष्ट्रीय आयोजन समिति के अध्यक्ष थे तत्कालीन उपराष्ट्रपति बी.डी. जत्ती। तब से अब तक कुल 11 विश्व हिन्दी सम्मेलन हो चुके हैं। भारत और मॉरीशस ने तीन-तीन बार इस सम्मेलन की मेजबानी की है, जबकि त्रिनिदाद और टोबैगो, यूनाइटेड किंगडम, सूरीनाम, संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका में इस सम्मेलन का आयोजन एक-एक बार हुआ है। ध्यातव्य है कि पहले दो सम्मेलनों का आयोजन पूर्णत: गैरसरकारी था, जबकि तीसरे सम्मेलन का आयोजन मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने किया और उसके बाद से इस सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार का विदेश मंत्रालय करता आ रहा है। कहने की जरूरत नहीं कि यह अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन हिन्दी का सबसे बड़ा सम्मेलन है और चूंकि इस सफर की शुरुआत 10 जनवरी को हुई थी, इसलिए इस दिन के खास महत्व को ध्यान में रखते हुए 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दुनिया भर में 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाने की घोषणा की थी। तब से इस दिन विदेशों में भारतीय दूतावास विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इस तरह पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन की वर्षगांठ को रेखांकित करने और हिन्दी को वैश्विक भाषा के रूप में प्रचारित करने के लिए हर साल 10 जनवरी को हम ‘विश्व हिन्दी दिवस’ मनाते हैं।

– डॉ. अमरदीप
10 जनवरी 2022

सम्बंधित खबरें


सूबे बिहार में एक दिन में नए कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 5 हजार पार

बिहार में कोरोना की तीसरी लहर में पहली बार 24 घंटे में संक्रमितों की संख्या 5000 के पार पहुंच गई। राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या जोर पकड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटे में राज्य में नए मरीजों की संख्या में करीब 11% की बढ़ोतरी हुई है।

मधेपुरा के साथ-साथ मुंगेर, लखीसराय, भागलपुर, मधुबनी, सहरसा जिले में भी 50 से 100 नए मरीज मिले हैं।

सुपौल सहित बक्सर शेखपुरा, खगरिया, शिवहर, किशनगंज, कैमूर, गोपालगंज, अररिया, अरवल में जिलों में 50 से कम कोरोना संक्रमित मरीज मिले है। शेष सभी जिलों में 50 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं।

चलते-चलते यह भी कि प्रत्येक जिले में 24 घंटे सातों दिन मेडिकल हेल्पलाइन शुरू कर दी गई है। राज्य में 60 से अधिक उम्र वालों को प्रिकॉशनरी टीके की बूस्टर डोज भी शुरू कर दी गई है। संसद के 400 कर्मचारी कोरोना संक्रमित पाए गए। बजट सत्र पर भी संकट के बादल मंडराने लगा है। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए संसद के अंदर सेक्रेटरी स्तर से नीचे के करीब 50% कर्मियों को घर से ही काम करने को कहा गया है।

सम्बंधित खबरें


यूरिया की किल्लत से परेशान है कोसी के किसान

कोसी के तीनों जिले- मधेपुरा, सुपौल और सहरसा के किसानों को आरंभ में डीएपी की कमी और अब यूरिया की कमी से जूझना पड़ रहा है। लंबी-लंबी कतारों में दिन-दिन भर किसान भूखे-प्यासे यूरिया के लिए खड़े देखे जा रहे हैं।

दिन भर खड़े रहने के बावजूद जिन किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है, तब वे दूसरे दिन सम्मिलित होकर किसी पुल की खोज कर उसे जाम करते हैं और तब तक नहीं हटते जब तक उस जिले के आलाधिकारी या जिलाधिकारी वहां आकर उन्हें आश्वासन नहीं देते। बीडीओ या एसडीओ के समझाने बुझाने पर किसान अपनी मांग पर अड़े रहते हैं। जब किसान को तसल्ली हो जाती है कि उनको कल खाद मिलेगा। तभी तीन-चार घंटों का जाम समाप्त होता है और सड़क पर यातायात बहाल हो पाता है।

चलते-चलते यह भी कि खाद की किल्लत कुछ तो है, परंतु विक्रेताओं की मनमानी भी किसानों की परेशानी को ज्यादा बढ़ाती रहती है और किसानों को प्रदर्शन और सड़क जाम करने हेतु विवश कर देती है।

सम्बंधित खबरें


नव वर्ष में मधेपुरा की एक शाम : भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क के नाम

जो भारत की तरक्की के लिए व्यक्तिगत सुख-सुविधाएं एवं पारिवारिक हितों की निरंतर कुर्बानी अर्पित करता रहा, जो विदेश जाकर अथाह पैसा कमाने की क्षमता रखने के बावजूद भारत की सेवा में अपना जीवन समर्पित करता रहा और जो सीमित संसाधनों के बीच रहकर भी भारत को वैज्ञानिक बुलंदियों तक ले जाने के लिए सदैव जोखिम उठाता रहा-

इन्हीं खूबियों के कारण जो आम आदमी की निष्ठा, आशा और विश्वास का केंद्र बन गया, वह कौन है ? वही तो है- विराट विजन और पारदर्शी व्यक्तित्व का मालिक संपूर्ण भारतीय डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम !

The then DM Md.Sohail along with Dr.Bhupendra Madhepuri, Manju Devi and other officers during the inauguration of Dr.APJ Abdul Kalam Park on the occasion of 106th Bihar Diwas Day.
The then DM Md.Sohail along with Dr.Bhupendra Madhepuri, Manju Devi and other officers during the inauguration of Dr.APJ Abdul Kalam Park on the occasion of 106th Bihar Diwas Day.

मधेपुरा में उन्हीं के नाम डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित अन्य प्रबुद्ध जनों के अनुरोध पर तत्कालीन डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने नगर परिषद के इस अनाम पार्क का नाम कर दिया डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के नाम।

इस कलाम पार्क में आने-जाने वाले बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए नए वर्ष के प्रथम सप्ताह में नव हर्षोल्लास मनाते हुए भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी के माध्यम से प्रसारित या संदेश मधेपुरा को ही नहीं बल्कि देश और दुनिया को भी राह दिखाता रहेगा-

“ये आँखे दुनिया को दोबारा नहीं देख पायेंगी, इसलिए आप के अंदर जो बेहतरीन है उसे दुनिया को देकर जाना, बच्चों को लेकर जाना…।।”

 

 

सम्बंधित खबरें