महाशिवरात्रि पर संपूर्ण शिवलोक ही जिले की धरती पर उतर आया

महाशिवरात्रि के अवसर पर मधेपुरा जिले का कण-कण शिवमय हो गया। हर-हर महादेव के गगनभेदी स्वरों से आकाश गूंजता रहा। पड़ोसी देश नेपाल के अलावा पूर्वांचल, सीमांचल और मिथिलांचल के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के लोग भी एक दिन पहले ऋष्यश्रृंग की देवनगरी सिंहेश्वरस्थान पहुंच गये थे तथा कांवर लिए और लोग पहुंच रहे थे।

District Judge Manmohan Lal Sharan, SP Sanjay Singh, Trust Member Dr.Bhupendra Madhepuri and others attending inaugural ceremony of Singheshwar Mela.
District & Session Judge Manmohan Lal Sharan, SP Sanjay Kumar, Trust Member Dr.Bhupendra Madhepuri and others attending inaugural ceremony of Singheshwar Mela.

बता दें कि सरकारी घोषणा के अनुसार एक महीना तक चलने वाला यह मेला चार चरणों में- उद्घाटन, शाम में भोलेनाथ का व्याह, 8 से 10 मार्च तक सिंहेश्वर महोत्सव और 11 से 15 मार्च तक रामलीला कार्यक्रम में बाँटकर जाना जा सकता है। सर्वप्रथम धन्यवाद गेट पर जवाहर नवोदय एवं किरण पब्लिक स्कूल सहित स्काउट एंड गाईड के छात्रों द्वारा बाजे-गाजे व झंडे के साथ बेहतरीन प्रस्तुति के बीच जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश मनमोहन लाल शरण ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फीता काटकर उद्घाटन किया तथा डीआरडीए मंच पर जिला जज ने दीप प्रज्जवलित करने के बाद कहा कि सौभाग्य है हमारा कि इस पावन धरती पर आने का अवसर मिला। उन्होंने सिंहेश्वर की जमकर तारीफ की।

यह भी बता दें कि इस उद्घाटन समारोह में जिले के जांवाज एसपी संजय सिंह, एडीएम उपेन्द्र कुमार, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, बीडीओ अजीत कुमार, सीओ के.के.सिंह, एसडीपीओ वशी अहमद, थानाध्यक्ष एसके गुप्ता , पीआरओ रजनीश कुमार , प्रमुख चंद्रकला देवी व डॉ.शांति यादव आदि की उपस्थिति बनी रही।

इस अवसर पर ट्रस्ट के सदस्य एवं समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने सर्वप्रथम आयोजन में उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए देवाधिदेव महादेव एवं श्रृंगी ऋषि के हजारों वर्ष पूर्व के इतिहास से उन्हें अवगत कराया। डॉ.मधेपुरी ने शिव को समन्वयकारी बताते हुए डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम और निवर्तमान डीएम मो.सोहैल की भी चर्चा की। उन्होंने ट्रस्ट कार्यालय में एक पुस्तकालय आरंभ करने की मांग करते हुए अध्यक्ष सह सचिव एसडीएम वृंदालाल  से कहा कि उसमें वेद-पुराण व अन्य समस्त गवेषनात्मक धार्मिक ग्रंथों के अतिरिक्त स्थानीय साहित्यकार-इतिहासकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ सरीखे लेखक की सिंहेश्वर स्थान का संपूर्ण इतिहास एवं मंत्रद्रर्ष्टा ऋष्यश्रृंग….. आदि भी क्रय कर रखनी चाहिए। डॉ.मधेपुरी ने अंत में शौर्ययुक्त शहीदों को याद करते हुए वायुवीर अभिनंदन का अभिनंदन हर-हर महादेव के जयकारे के साथ सम्मिलित रूप से किया।

जहाँ जिले के एसपी संजय कुमार ने उपस्थित शिव भक्तों को 50 पुलिस पदाधिकारी तथा 200 पुलिस बल की तैनाती के साथ सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए यही कहा कि बाबा सिंहेश्वर नाथ अनादि काल से पूजनीय हैं एवं यहां के लोग सौभाग्यशाली हैं कि वे इस धरती के निवासी हैं वहीं एडीएम उपेंद्र कुमार झा ने स्थानीय श्रद्धालुओं से साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की बात इसलिए कही कि बाहर से आये लोग उनकी तारीफ करें और उन्होंने सिंहेश्वर महोत्सव 8 से 10 मार्च तक होने की जानकारी भी दी। आरम्भ में जहाँ नवोदय की छात्राओं ने स्वागत गान एवं अंत में धन्यवाद ज्ञापन ट्रस्ट के सचिव वृंदालाल ने किया वहीं मंच संचालन जिला कब्बडी संघ के सचिव अरुण कुमार ने किया।

मंचीय उद्घाटन के बाद डीजे, एसपी, एडीएम एवं डॉ.मधेपुरी आदि द्वारा दर्जनों स्टॉल का उद्घाटन फीता काटकर किया गया जिसमें स्काउट एंड गाईड के आयुक्त जय कृष्ण यादव की आपात कालीन प्रदर्शनी, कृषि प्रदर्शनी, उद्योग विभाग, नारियल विकास वोर्ड, रेडक्रास, प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय…… आदि प्रमुख हैं।

Singheshwar Mandir Trust Chairman - Secretary SDM Vrindalal, Trust Member Dr.Bhupendra Madhepuri and others attending Bararat of Lord Shiva on the occasion of Mahashivratri.
Singheshwar Mandir Trust Chairman – Secretary SDM Vrindalal, Trust Member Dr.Bhupendra Madhepuri and others attending Bararat of Lord Shiva on the occasion of Mahashivratri.

शाम 4:00 बजे से 8:00 बजे तक दुल्हा भोलेनाथ के रथ पर सजधज कर लोकनिया- सचिव वृंदालाल, सीओ के.के.सिंह, ट्रस्ट के सदस्य डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी , उपेन्द्र रजक, मनोज कुमार दास, सरोज सिंह एवं स्थानीय सदस्य अधिकारी-पदाधिकारी हजारों-हजार बारातीगण के साथ बाजे-गाजे बजाते हुए गौरीपुर पहुंचे। गौरीपुर के लोग अपने-अपने घरों पर दिवाली की तरह दीप जलाये और भोलेनाथ के दर्शन हेतु महिलाएं थाली में पान-अक्षत व दीप-अगरबत्ती जलाये हर दरवाजे पर खड़ी देखी गई। भोलेनाथ को गौरी के पास चार दिनों के लिए छोड़कर सभी बाराती मंदिर लौट आये।

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