मंडल विश्वविद्यालय में “उच्च शिक्षा के बदलते परिदृश्य और चुनौतियाँ” पर राष्ट्रीय सेमिनार

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में पूरे साल भर चलने वाले ‘रजत जयंती समारोह’ के प्रथम चरण में “उच्च शिक्षा के बदलते परिदृश्य और चुनौतियाँ” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया | इस राष्ट्रीय सेमिनार की अध्यक्षता एवं उद्घाटन किया कुलपति डॉ.अवध किशोर राय ने | इस अवसर पर मुख्य अतिथि रहे इसी विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति, साहित्यकार व पूर्व सांसद डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में तिलकामांझी विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति डॉ.के.के.मंडल एवं समाजसेवी-साहित्यकार व इसी विश्वविद्यालय के विभिन्न पदों पर कार्यरत रह चुके डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी |

बता दें कि विषय प्रवेश करते हुए प्रति कुलपति डॉ.फारूक अली ने कहा कि कभी हम विश्व गुरु थे आज क्यों पीछे हो गए हैं….. कमजोर बुनियाद पर बुलंद इमारत नहीं खड़ी की जा सकती | उन्होंने कहा कि शिक्षा को मानव संसाधन बनाने से नुकसान हुआ है |

Dr.A.K.Ray (Vice-Chancellor), Dr.R.K.Yadav Ravi (Founder Vice-Chancellor & Former MP), Pro-VC Dr.Farookh Ali, Samajsevi Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri, Dr.K.K.Mandal (Ex-Pro.VC) and BN Musta Secretary & Senator Dr.Naresh Kumar releasing Smarika on the occasion of National Seminar at BNMU Madhepura.
Dr.A.K.Ray (Vice-Chancellor), Dr.R.K.Yadav Ravi (Founder Vice-Chancellor & Former MP), Pro-VC Dr.Farookh Ali, Samajsevi Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri, Dr.K.K.Mandal (Ex-Pro.VC) and BN Musta Secretary & Senator Dr.Naresh Kumar releasing Smarika on the occasion of National Seminar at BNMU Madhepura.

आगे विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि जब पूरी दुनिया के देशों ने विद्यालय की भी कल्पना नहीं की थी तब हमारे यहाँ तीन-तीन विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय हुआ करता था- तक्षशिला, विक्रमशिला और नालंदा विश्वविद्यालय | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि सबसे ताकतवर हथियार है- शिक्षा , इल्म और हुनर….. जिससे आप दुनिया बदल सकते हैं | किसी भी देश की समृद्धि का स्तर उसकी शिक्षा के स्तर से आंका जाता है | हमारी सरकार ने शिक्षा मंत्रालय से शिक्षा को ही हटा दिया है जबकि ब्रिटेन में आजतक “Education & Skill Development” मंत्रालय बरकरार है | डॉ.के.के.मंडल ने कहा कि वैश्वीकरण के युग में रोजगार परक शिक्षा का बोलबाला है | गाँधी को उद्धृत करते हुए डॉ.मंडल ने कहा कि यदि चरित्र नहीं तो ज्ञान व्यर्थ है |

Dr.Bhupendra Madhepuri is being honoured at National Seminar, BNMU.
Former Controller of Exam Dr.Bhupendra Madhepuri is being honoured at National Seminar, BNMU.

मुख्य अतिथि के रूप में संस्थापक कुलपति डॉ.आर.के.यादव रवि ने कहा कि वर्तमान कुलपति के कार्याकाल में हमारा वर्तमान अतीत से बेहतर है | हम उज्जवल भविष्य के प्रति आशान्वित हैं | डॉ.रवि ने कहा कि यह विश्वविद्यालय जिस महामना के नाम पर है उनके व्यक्तित्व, कृतित्व एवं चरित्र के अनुरूप बने यही हमारी कामना है, शुभकामना है |

अंत में अपने विस्तृत अध्यक्षीय भाषण में कुलपति डॉ.ए.के.राय ने कहा कि फरवरी 2019 से फरवरी 2020 तक रजत जयंती कार्यक्रम विभिन्न महाविद्यालयों एवं स्नातकोत्तर विभागों में आयोजित किये जाएंगे | प्रत्येक तीन माह पर विशेष आयोजन होगा और अंत में अधिकारी, शिक्षक-कर्मचारी एवं छात्र-अभिभावक सभी मिलकर भव्य समापन समारोह में सम्मिलित होंगे | इस बीच हम सभी विश्वविद्यालय को माँ मानकर इसकी जबरदस्त सेवा करेंगे और अपने-अपने हिस्से का सर्वोत्तम योगदान देंगे |

उद्घाटन सत्र के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित किया गया…… स्मारिका का विमोचन किया गया और साथ ही आर.जे.एम. महिला कालेज की टीम द्वारा प्राचार्या डॉ.रेणु सिंह रचित कुलगीत की प्रस्तुति एवं कुलपति द्वारा प्राचार्या को विशेष रूप से सम्मानित किया गया | साथ ही रजत जयंती आयोजन समिति के संयोजक, बी.एन. मुस्टा के महासचिव व सीनेटर प्रो.(डॉ.) नरेश कुमार, मंच संचालक डॉ.अबुल फज़ल (खेल पदाधिकारी) ने किया | धन्यवाद ज्ञापन किया डीएसडब्ल्यू व डीन डॉ.शिव मुनि यादव | इस राष्ट्रीय सेमिनार में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, छात्र व विमर्श सत्र के प्रतिभागियों के अतिरिक्त भारी संख्या में शहर के गणमान्यों एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति अंत तक बनी रही |

चलते-चलते यह भी बता दें कि विमर्श सत्र में दर्जनों शोधपत्र प्रस्तुत किये गये जिसकी अध्यक्षता बी.एन.एम.वी. के पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव ने की | इस सत्र में डॉ.एम.आई.रहमान, डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ.आलोक कुमार आदि ने जहाँ अपने विचार व्यक्त किये वहीं रिपोर्टर की भूमिका में पी.आर.ओ. डॉ.सुधांशु शेखर निभाई |

Honorable Vice-Chancellor Prof(Dr.) A.K.Roy encouraging the artists of Srijan Darpan in presence of BN Musta Secretary, Senator & Convenor Prof. (Dr.) Naresh Kumar, Pro. - VC Dr.Farooque Ali, DSW Dr.Sheomuni Yadav & others.
Honorable Vice-Chancellor Prof(Dr.) A.K.Roy encouraging the artists of Srijan Darpan in presence of BN Musta Secretary, Senator & Convenor Prof. (Dr.) Naresh Kumar, Pro. – VC Dr.Farooque Ali, DSW Dr.Sheomuni Yadav & others.

अंतिम सत्र यानि सांस्कृतिक कार्यक्रम में सुर, ताल व लय की त्रिवेणी बहती रही | चोटी के कलाकारों रोशन-राजीव, आगा-तनुजा और चन्दा ने दी बेहतरीन प्रस्तुति | सृजन दर्पण द्वारा लोकनृत्य जट-जटिन की प्रस्तुति पर झूमते रहे दर्शक और कलाकार बटोरते रहे तालियों की गड़गड़ाहट | सृजन दर्पण के निदेशक विकास कुमार सहित अन्य कलाकारों को संयोजक डॉ.नरेश कुमार व डीन डॉ.शिव मुनि यादव की उपस्थिति में कुलपति व प्रतिकुलपति के द्वारा सम्मानित किया गया |

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मधेपुरा रविदास एकता मंच ने मनाई रविदास की 642वीं जयन्ती

जिला मुख्यालय मधेपुरा के वार्ड नं-13 स्थित जगजीवन आश्रम के संस्थापक व समाजसेवी स्मृतिशेष जनकराम के आवासीय परिसर में आयोजित संत शिरोमणि रविदास की 642वीं जयंती डॉ.धर्मेंद्र कुमार राम की अध्यक्षता में धूमधाम से मनाई गई। संत रविदास की जयंती में जिले के कोने-कोने से आए भक्तों ने भाग लिये।

बता दें कि जिला मुख्यालय के प्रखर समाजसेवी-साहित्यकार व विद्वान वक्ता प्रो.(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने सारगर्भित संबोधन के दरमियान दूर-दूर से आये सभी प्रखंडों के सुधी श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। आरंभ में कुछ वक्ताओं द्वारा मधेपुरा में संत रविदास को मंदिर में स्थापित किये जाने के सुझाव/प्रस्ताव पर डॉ.मधेपुरी ने डॉ.लोहिया को संदर्भित करते हुए कहा कि भारत के इतिहासकारों – साहित्यकारों ने संत कबीर एवं संत रविदास सरीखे पुरुषार्थियों को अनुकरणीय की जगह पूजनीय बनाकर समाज को भारी क्षति पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि रविदास को बनारस से मधेपुरा आने में 6 सौ वर्ष लग गए। डॉ.मधेपुरी ने रविदास एकता मंच के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष से यही कहा कि आने वाली पीढ़ी को जगाये रखने के लिए मधेपुरा के किसी चौक-चौराहे पर रविदास की प्रतिमा लगे तो वे भी सहयोग देंगे…. मंदिर में स्थापित करने के लिए नहीं।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष कमलदास ने कहा कि रविदास ने मानवतावादी नारा देकर देश को विखंडित होने से बचाया। अध्यक्षीय भाषण में डॉ.धर्मेंद्र कुमार राम ने कहा कि संत रविदास उन महान संतों में अग्रणी थे जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मौके पर मुख्य जनों- सरयू राम , युगेश्वर राम , अशोक राम, गोपाल यादव, संजय यादव, विजय कुमार विमल, जनार्दन यादव, विशाल कुमार, संतोष राम, शिवकुमार राम, सुरेंद्र राम, दिनेश ऋषिदेव आदि ने विचार रखे और श्रद्धांजलि अर्पित किया। सुधीश्रोता के रूप में प्रमुख थे- उत्तम यादव, मो. जुम्मन , पूजन राम , ललन राम, किशोर राम , नवीन कुमार राम आदि। मंच संचालन किया हरिश्चन्द्र राम ने।

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बिहार महागठबंधन में सीटों को लेकर घमासान

बिहार में कांग्रेस-आरजेडी के बीच सीट बंटवारा अभी अधर में ही है और इस बीच महागठबंधन के छोटे दल भी अपने तेवर कड़े कर रहे हैं। इससे सीट शेयरिंग के फॉर्मूले को लेकर दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। बिहार के महागठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस के अलावा रालोसपा, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), हम और लेफ्ट खेमा शामिल है। अब सभी की नजरें आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच हुई हालिया बातचीत के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी कथित तौर पर अपनी पार्टी के लिए पूर्व केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा की अगुआई वाली रालोसपा के बराबर सीटों की मांग कर रहे हैं। उधर लेफ्ट खेमा भी सीट शेयरिंग फॉर्मूले को लेकर सौदेबाजी कर रहा है। सीपीआई कम से कम तीन सीटें मांग रही है, जबकि सीपीआई (एम) की नजरें उजियारपुर सीट पर हैं। इस सीट से फिलहाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय सांसद हैं।

भाजपा के पूर्व सांसद कीर्ति आजाद के कांग्रेस में शामिल होने के बाद दरभंगा सीट को लेकर भी महागठबंधन सहयोगियों के बीच विवाद बढ़ गया है। आजाद पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर दरभंगा सीट से जीते थे और इस बार भी कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर उसी सीट से लड़ना चाहते हैं। लेकिन अब दिक्कत यह है कि वीआईपी नेता मुकेश सहनी भी दरभंगा सीट ही चाहते हैं। वीआईपी को आरजेडी महागठबंधन में इसी सीट का भरोसा देकर लाई थी।

उधर मधेपुरा के सांसद व जाप नेता पप्पू यादव भी कथित तौर पर महागठबंधन का हिस्सा बनने वाले हैं। हालांकि, कांग्रेस ने अभी पप्पू यादव की एंट्री के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है। आरजेडी के एक नेता ने बताया, ‘हमारी पार्टी पप्पू को महागठबंधन में शामिल नहीं करना चाहती। इसलिए कांग्रेस के लिए यह फैसला लेना मुश्किल होगा।‘ गौरतलब है कि पप्पू यादव ने 2014 लोकसभा चुनाव में शरद यादव को हराया था। शरद यादव जेडीयू से निकलने के बाद अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) बना चुके हैं और वह फिर से मधेपुरा से लड़ सकते हैं। हालांकि पेंच यहां भी फंसा हुआ है, सूत्रों की मानें तो आरजेडी इस बात पर अड़ी हुई है कि शरद उसके सिंबल पर लड़ें। अपने कद से समझौता कर शरद ये शर्त मानते हैं कि नहीं, ये देखने की बात होगी।

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बीएनएमयू सिल्वर जुबली समारोह के तहत राष्ट्रीय सेमिनार की तैयारी हुई तेज

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय द्वारा अपनी एक वर्षीय रजत जयंती मनाने के क्रम में 26 फरवरी को “उच्च शिक्षा का बदलता परिदृश्य एवं चुनौतियाँ” विषय पर होने वाले राष्ट्रीय सेमिनार की तैयारी तेज कर दी गयी है। कुलपति प्रो.(डॉ.)अवध किशोर राय की अध्यक्षता में शनिवार को संपन्न हुई बैठक में राष्ट्रीय सेमिनार की कार्य योजना तैयार की गई।

बता दें कि बैठक में सर्वसम्मति से लिए गये निर्णयानुसार राष्ट्रीय सेमिनार की अध्यक्षता एवं उद्घाटन कुलपति प्रो.(डॉ.) अवध किशोर राय करेंगे और विषय प्रवर्तन प्रतिकुलपति प्रो.(डॉ.) फारुख अली करेंगे।

इस राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन सत्र के अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति प्रो.(डॉ.)रमेन्द्र कुमार यादव रवि तथा इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि द्वय होंगे पूर्व प्रति कुलपति प्रो.(डॉ.) के.के.मंडल एवं कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव एवं समाजसेवी साहित्यकार प्रो. (डॉ.) भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी।

यह भी बता दें कि कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र के अलावा विमर्श सत्र का भी आयोजन किया गया है जिसमें उच्च शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विशेष रूप से चर्चाएं होंगी। अंत में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

चलते-चलते यह भी बता दे कि माननीय कुलपति डॉ.राय ने एक फरवरी 2019 से एक फरवरी 2020 तक रजत जयंती समारोह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन की घोषणा की है। यह राष्ट्रीय सेमिनार इसकी पहली कड़ी है।

इस रजत जयंती समारोह के संयोजक बीएन मुस्टा के महासचिव एवं सीनेटर प्रो.(डॉ.) नरेश कुमार ने बताया कि सेमिनार के अवसर पर एक स्मारिका भी प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए कुलाधिपति, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री , ऊर्जा मंत्री आदि गणमान्यों से संदेश प्राप्ति हेतु अनुरोध किया गया है।

बैठक में कार्यक्रम संयोजक डॉ.नरेश कुमार, कुलानुशासक डॉ.अशोक कुमार यादव, डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ.कपिल देव प्रसाद, विकास पदाधिकारी डॉ.ललन प्रसाद अद्री, डॉ.रीता सिंह (HOD Home Sc.) डॉ.अबुल फजल, डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.एस के मिश्र सहित पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर व पृथ्वीराज यदुवंशी (उद्घोषक) आदि की उपस्थिति देखी गई।

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कोसी के डॉ.अभिजीत झा इटली में सम्मानित होने वाले बिहार के प्रथम चिकित्सक

इटली के राइजिंग स्टार अवॉर्ड पाने वाले सहरसा निवासी व पीएमसीएच के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ.अभिजीत कुमार झा बिहार के प्रथम चिकित्सक होंगे। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अभिजीत ने डर्मोस्कोपी का प्रयोग आरंभ किया और इस विषय पर अबतक उनका लगभग 100 से अधिक आलेख दुनिया के अंतरराष्ट्रीय स्तर के विभिन्न मैगजीनों में प्रकाशित हो चुका है।

बता दें कि दुनिया के सर्वाधिक चर्चित मैगजीन “जर्नल ऑफ अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी” में भी डॉ.झा के कई आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। फिलहाल वर्ल्ड कांग्रेस के लिए भेजे गये इनके सभी 5 शोध-पत्रों को ना केवल स्वीकृत किया गया बल्कि इन पांचो शोध-पत्रों को सर्वाधिक जनउपयोगी करार देते हुए डॉ.अभिजीत झा को इस कार्यक्रम में डब्लू सी डी राइजिंग अवार्ड से सम्मानित भी करने का निर्णय लिया गया। आयोजन समिति की ओर से डॉ.अभिजीत को अवार्ड प्राप्त करने हेतु विधिवत सूचना प्राप्त हो चुका है। वे 15 जून 2019 को एपेथिक कास्मेटिक डर्मेटोलॉजी- 2 पर संसार के जाने-माने चिकित्सकों के बीच सम्मानित किये जाएंगे।

चलते-चलते बता दें कि डर्मोस्कोपी के क्षेत्र में डॉ.अभिजीत की ऊंचाई उन बातों से आंकी जा सकती है कि वे 2021 तक के लिए इंटरनेशनल डर्मोस्कोपी सोसायटी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर चुन लिए गए हैं। जिसमें संसार के 168 देशों के 14187 सदस्य हैं। इस सोसाइटी के बोर्ड आफ डायरेक्टर बनने वाले डॉ.अभिजीत अपने देश के पहले चिकित्सक हैं। डॉ.अभिजीत 2018 के 16 जून को ग्रीस में आयोजित वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ़ डर्मोस्कोपी के दरमियान भी अवार्ड प्राप्त किए थे। गत वर्ष भी तो सहरसा कोर्ट के वरीय अधिवक्ता वीरेंद्र कुमार झा अनिश व नंदा झा के सुपुत्र अभिजीत ने पीजीआई चंडीगढ़ में देश के जाने-माने चिकित्सकों के बीच डर्मोस्कोपी यंत्र के प्रयोग पर अपने व्याख्यान दिया था। डॉ.अभिजीत 2015 में कनाडा और 2017 में अमेरिका के फ्लोरिडा आदि कई देशों में अवार्ड प्राप्त कर अपने उत्कृष्ट शोध के जरिये प्रदेश एवं देश को सदैव गौरवान्वित करते रहेंगे।

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जवानों को अब होगी विमान से कश्मीर आने-जाने की सुविधा प्राप्त

पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। यह कि 7 लाख अस्सी हज़ार जवानों को दिल्ली-श्रीनगर एवं जम्मू-श्रीनगर रूट पर आने-जाने के लिए नियमित विमान सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।

बता दें कि कश्मीर में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की 65 बटालियनों में 65 हज़ार जवान तैनात हैं। यहाँ पर बीएसएफ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, सशस्त्र सीमा बल एवं राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की ईकाइयाँ भी आंतरिक सुरक्षा के विभिन्न मोर्चों पर तैनात किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा अर्धसैनिक बलों के जवानों की सुरक्षा के लिए घोषित इस फैसले को देशभक्त बुद्धिजीवियों ने सराहा है। साथ ही कुछ संवेदनशील साहित्यकारों ने यह भी कहने से बाज नहीं आया कि एक साथ 45 जवानों की कीमती जान जाने के बाद ही सरकार की आंखें खुली ?

यह भी बता दें कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में यह कहा गया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के सभी जवानों को यह सुविधा मिलेगी। ड्यूटी ज्वाइन करने, ट्रांसफर पर जाने, टूर या छुट्टी पर जाने के लिए जवान अब विमान से यात्रा कर सकेंगे। यह सुविधा अब तक मिलती तो थी लेकिन इंस्पेक्टर रैंक से ऊपर के अधिकारियों को ही मिलती थी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहाँ गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार अर्धसैनिक बलों के सभी जवान व्यावसायिक उडान से कश्मीर आने-जाने की टिकट बुक करा कर यानी पॉकेट से पैसे लगाकर यात्रा करेंगे और बाद में अपने संगठन या बल के माध्यम से खर्च की गई राशि का पुनर्भुगतान प्राप्त कर सकेंगे। वहीं इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक सेवानिवृत्त सैनिक ने कहा कि यदि वह सैनिक शहीद हो जाए तो उसके तीन-चार वर्षीय इकलौते पुत्र को वह राशि वापस लेने में कितने वर्ष लगेंगे…..?

क्या सांसद एवं विधायकों की तरह उन सैनिकों को सरकार की ओर से कूपन मुहैया नहीं किया जा सकता ?

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त्रिवेणीगंज (सुपौल) की बहू डॉ.प्रियंका ने लंदन में भारत का तिरंगा फहराया

कोसी की मिट्टी में प्रतिभा की कमी नहीं है। कोसी और मिथिलांचल की प्रतिभा ने कई अवसर पर अपनी प्रतिभा का लोहा विश्व भर में मनवाया है।

बता दें कि सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज जैसे ग्रामीण परिवेश की बहू डॉ.प्रियंका बी.सर्राफ को Royal College of London से मेंबर ऑफ रॉयल कॉलेज ऑब्सट्रेटीशियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट की डिग्री मिली जिसके लिए आयोजित की गई परीक्षा में डॉ.प्रियंका बी.सर्राफ को विश्व के समस्त देशों में सातवां स्थान मिला है।

यह भी बता दें कि रॉयल कॉलेज ऑफ लंदन से यह डिग्री प्राप्त करने वाली डॉ.प्रियंका सर्राफ कोसी-मिथिलांचल की पहली महिला चिकित्सक बन गई है। सर्राफ परिवार में एक नहीं अनेक चिकित्सक हैं।

यह भी जानिए कि डॉ.प्रियंका बी.सर्राफ के ससुर डॉ.एसएन सर्राफ दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में ऑर्थोपेडिक विभाग में कार्यरत है। दूसरी पीढ़ी के चिकित्सक के रूप में प्रियंका के पति डॉ.अभिषेक सर्राफ भी हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं और फिलहाल डॉ.प्रियंका भी डीएमसीएच के स्त्री रोग व प्रसूति विभाग में कार्यरत  है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि डॉ.प्रियंका के ससुर डॉ.एसएन सर्राफ मूल रूप से सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज के निवासी हैं वहीं डॉ.प्रियंका का मायका झारखंड राज्य के हजारीबाग शहर के बड़ा बाजार में है। डॉ.प्रियंका के पिता विमल कुमार जैन भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं परंतु उनकी उपलब्धियों पर खुशियां मनाने वाली माताश्री पुष्पा सर्राफ अभी भी प्रियंका को जीवन के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करती रहती हैं।

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आलोचना को ऊँचाई देने वाले ‘नामवर’ नहीं रहे

अपनी प्रगतिशील सोच से साहित्य को नया आयाम देने वाले नामवर सिंह नहीं रहे। डॉ. नामवर सिंह के रूप में न केवल हिन्दी साहित्य ने बल्कि सम्पूर्ण भारतीय साहित्य ने एक बहुत बड़ा और विश्वसनीय चेहरा खो दिया। मंगलवार देर रात 92 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली और इसके साथ ही हिन्दी साहित्य के ‘नामवर युग’ का अंत हो गया। एक चलती-फिरती ‘संस्था’ जिनसे कई पीढ़ियों ने साहित्य की सही और सच्ची समझ हासिल की, बहुत बड़ी रिक्तता छोड़ हमसे रुख़सत हो गई। पिछले दिनों नामवर जी दिल्ली के अपने घर में गिर गए थे जिसके बाद उनके सिर में चोट लगी और उनको एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया था।
नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1926 को वाराणसी के जीयनपुर गांव में हुआ था। उन्होंने अपने लेखन की शुरुआत कविता से की और 1941 में उनकी पहली कविता ‘क्षत्रिय मित्र’ में छपी। 1951 में उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एमए किया और फिर वहीं हिन्दी के व्याख्याता नियुक्त हुए। इसके बाद उन्होंने सागर विश्वविद्यालय में भी अध्यापन किया। लेकिन सबसे लंबे समय – 1974-1987 – तक वे दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रहे। यहां से सेवानिवृत्त होने के कुछ वर्षों बाद उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा का चांसलर बनाया गया।
डॉ. नामवर सिंह ने हिन्दी साहित्य खासकर आलोचना को कई कालजयी कृतियां दीं जिनमें ‘कविता के नए प्रतिमान’ विशेष रूप से चर्चित है। ‘हिन्दी के विकास में अपभ्रंश का योगदान’, ‘पृथ्वीराज रासो: भाषा और साहित्य’, ‘आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियां’, ‘छायावाद’, ‘इतिहास और आलोचना’, ‘कहानी: नई कहानी’, ‘दूसरी परंपरा की खोज’, ‘हिन्दी का गद्यपर्व’, ‘वाद विवाद संवाद’, ‘आलोचक के मुख से’, ‘बकलम खुद’ आदि उनकी अन्य महत्वपूर्ण कृतियां हैं। उनकी जितनी प्रतिष्ठा इन पुस्तकों को लेकर थी उतना ही सम्मान उन्हें प्रखर वक्ता के तौर पर हासिल था और इन सबके ऊपर थी उनकी बेबाकी और साफगोई। कुल मिलाकर, उन्होंने हिन्दी साहित्य, खासकर आलोचना की विधा को जो ऊँचाई दी और जैसा सम्मान दिलाया उसकी कोई सानी नहीं।
साहित्य अकादमी समेत कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित नामवर सिंह नि:संदेह हिन्दी के सार्वकालिक महान साहित्यकारों में अग्रगण्य हैं। उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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लिट्ल बर्ड्स स्कूल ने वार्षिकोत्सव को पुलवामा के शहीदों को किया समर्पित

मधेपुरा के शहीद चुल्हाय मार्ग स्थित बीपी मंडल नगर भवन में लिट्ल बर्ड्स स्कूल की निर्देशिका नंदिनी वर्णवाल की अध्यक्षता में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा स्कूल का 8वाँ वार्षिकोत्सव आयोजित किया गया। यूँ  तैयारी तो प्रशिक्षक आका द्वारा रंगारंग कार्यक्रमों का था, परंतु पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवानों की सबसे बड़ी शहादत सभी भारतीय को अंदर से हिला दिया। एक दिन में ही संपूर्ण देश आंसू और आक्रोश में डूब गया।

Little Birds School Kids Performance dedicated to Pulwama Shahids.
Little Birds School Kids Performance dedicated to Pulwama Shahids.

बता दें कि कार्यक्रम आरंभ करने से पहले ही सभी नन्ने बच्चे, उनके माता-पिता व अभिभावकगण सहित एसडीएम वृन्दा लाल, एसडीपीओ वसी अहमद, मधेपुरा के अभिभावक डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, डॉ.आर.के.पप्पू , डीपीओ गिरीश कुमार, किशोर कुमार आदि सबों ने जहां शहीदों को 2 मिनट का मौन श्रद्धांजलि समर्पित किया वहीं कार्यक्रम का विधिवत शुरुआत छोटी बच्ची ‘नायसा’ की टीम द्वारा तिरंगे को लहराते हुए- I love my India……. गीत से किया गया। आगे एक से बढ़कर एक राष्ट्रीय गीतों की प्रस्तुति होती रही।

Dr.Madhepuri addressing Students, Teachers and Parents during 8th annual day function of Little Birds School at BP Mandal Nagar Bhawan,Shahid Chulhai Marg Madhepura  .
Dr.Madhepuri addressing Students, Teachers and Parents during 8th annual day function of Little Birds School at BP Mandal Nagar Bhawan,Shahid Chulhai Marg Madhepura  .

यह भी बता दें कि मंच संचालक मानव सिंह की ओजपूर्व वाणी जहाँ एक ओर जवानों की शहादत और परिजनों के दुख से सराबोर होकर निकल रही थी वहीं बच्चे-बच्चियों की एक टोली गीत लेकर आती है- देश रंगीला…. रंगीला …!! बीच-बीच में एसडीएम एवं एसडीपीओ सरीखे विशिष्ट अतिथियों के दो-दो शब्दों से बच्चे उत्साहित व प्रोत्साहित होते रहे।

डॉ.कलाम के करीबी रह चुके समाजसेवी साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने दीप प्रज्जवलित करने के बाद कलाम द्वारा आकाश में उड़ रहे पंछियों की विस्तृत चर्चा करते हुए यही कहा कि दुनिया का सबसे पहला वैज्ञानिक कोई बच्चा ही रहा होगा….! उन्होंने मौजूद अभिभावकों से विनम्रता पूर्वक यही कहा कि आप अपने बच्चों को कभी हतोत्साहित नहीं करें और न कभी निराश होने दें। उन्हें हमेशा यही कहते रहें कि तुम जो चाहोगे वही बनोगे।

लिट्ल बर्ड्स स्कूल का यह वार्षिकोत्सव समारोह पूरा का पूरा पुलवामा हमले में शहीद हुए सभी शहीदों एवं उनके परिजनों को ही समर्पित रहा।

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बिहार विधानसभा में सवर्ण आरक्षण बिल पारित

बिहार विधानसभा में सोमवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सवर्ण आरक्षण बिल पारित हो गया। बिल के पास होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस बिल को सर्वसम्मति से पारित होना चाहिए था, लेकिन विपक्ष को हंगामा करने के अलावा कुछ सूझता नहीं। विपक्ष का काम है हंगामा करना। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि रांची से मिले आदेश के बाद राजद हंगामा मचा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि केन्द्र द्वारा सवर्ण आरक्षण का ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। अब हमलोग कानून बनाकर राज्य की सेवाओं में इसे लागू कर रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व से जारी 50% आरक्षण पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। ये अतिरिक्त आरक्षण है।

बिहार विधानसभा ने सोमवार को ही 2021 में जाति आधारित जनगणना कराए जाने और विश्वविद्यालयों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू लागू की गई रोस्टर प्रणाली को समाप्त करते हुए पूर्ववत विश्वविद्यालय स्तरीय रोस्टर के आधार पर नियुक्ति करने से संबंधित प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित किया। संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार द्वारा पेश उक्त दोनों प्रस्ताव के पारित होने के बाद अब उन्हें केन्द्र को भेजा जाएगा।

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