उपचुनावों का परिणाम: भाजपा के लिए खतरे की घंटी

भाजपा अभी कर्नाटक के झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि उसे एक और झटका लग गया। 11 विधानसभा और 4 लोकसभा सीटों पर हुए चुनाव में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। 4 में से केवल एक संसदीय सीट (महाराष्ट्र के पालघर) पर भाजपा उम्मीदवार की जीत हुई, जबकि 11 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में उसके खाते में केवल एक सीट आ पाई। शेष 10 सीटें विपक्षी दलों ने जीतीं। बिहार के जोकीहाट में भी एनडीए उम्मीदवार जदयू के मुर्शीद आलम को हार का सामना करना पड़ा। यहां से आरजेडी उम्मीदवार शाहनवाज आलम ने 41 हजार से भी ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की।
उधर देश की सियासत तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां की कैराना लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस सीट से विपक्ष समर्थित रालोद उम्मीदवार की जीत हुई। यहां की नूरपुर विधानसभा सीट भी भाजपा के खाते से निकलकर सपा के खाते में चली गई। इन चुनावी नतीजों के बाद सियासी चर्चा का बाजार खासा गर्म है। चर्चा हो रही है कि क्या भाजपा की लोकप्रियता और वोट प्रतिशत में गिरावट आई है? अगर हां तो क्या अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार होगी?
बहरहाल, इस संदर्भ में एबीपी न्यूज चैनल का आकलन है कि अगर वोटिंग का यही पैटर्न रहा तो भाजपा की आगे की राह मुश्किल हो सकती है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों को लें तो 2014 के आम चुनावों में एनडीए को यहां 73 सीटें मिली थीं, जबकि मात्र 5 सीट पर सपा और 2 सीट पर कांग्रेस की जीत हुई थी। बसपा और रालोद को एक भी सीट नहीं मिल सकी थी। तब एनडीए को कुल 43 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि सपा और बसपा के वोट प्रतिशत को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 42 प्रतिशत का था। उधर कांग्रेस को 12 प्रतिशत और शेष वोट अन्य के खाते में गए थे। पर हालिया चुनावों ने इस गणित को गड़बड़ा दिया है।
हाल में हुए चुनावों के पैटर्न को देख चैनल का अनुमान है कि अभी चुनाव हुए तो उत्तर प्रदेश में एनडीए के खाते में 35 प्रतिशत वोट जबकि सपा और बसपा गठजोड़ को 46 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। यानि चार सालों में भाजपा को कुल 8 प्रतिशत का नुकसान होते दिखाया गया है जबकि सपा-बसपा गठजोड़ को 4 प्रतिशत वोट का इजाफा होता दिखाया गया है। इतना ही नहीं, अगर सपा-बसपा और कांग्रेस तीनों का गठजोड़ यहां होता है तो इस गठबंधन को करीब 60 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं और 2014 में 73 सीटें जीतकर सनसनी फैला देने वाली भाजपा (एनडीए) महज 19 सीटों पर सिमट सकती है, जबकि शेष 61 सीटें विपक्षी दलों के खाते में होंगी।
सबसे अहम बात यह कि अगर विपक्षी दलों की अभी दिख रही एकता आगे भी बनी रहे तो कमोबेश यही स्थिति अन्य राज्यों में भी हो सकती है। ऐसे में भाजपा और एनडीए की आगे की रणनीति क्या होगी, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा और उससे भी अधिक उत्सुकता इस बात की रहेगी कि एनडीए में मोदी के बाद सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन परिस्थितियों में आगे क्या रुख अख्तियार करेंगे..?

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जी हाँ, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने अपने पोते का नाम ‘श्रीनरेन्द्र’ रखा है

इंडोनेशिया, मलयेशिया और सिंगापुर की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार शाम को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे, जहां स्वाभाविक तौर पर उनका भव्य स्वागत किया गया। बड़े ही आत्मीय माहौल में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो और प्रधानमंत्री मोदी के बीच परस्पर हित की कई बातें हुईं और कई यादगार पल बीते। पर इस दौरान दो बातें ऐसी हुईं जो प्रधानमंत्री मोदी के लिए शायद कल्पनातीत थीं। चलिए जानते हैं, क्या हैं वे दो बातें।

शुरू करते हैं उस बात से जिसे सुनकर प्रधानमंत्री मोदी का चकित होना स्वाभाविक था। हुआ यों कि स्वागत के उपरान्त अनौपचारिक बातचीत के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो ने प्रघानमंत्री मोदी को बताया कि उनके पोते का नाम प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही श्रीनरेन्द्र रखा गया है। उन्होंने कहा कि उके बड़े बेटे गिबरान राकाबुमिंग के बेटे यानि उनके पोते का का जन्म जनवरी 2016 में हुआ था, जिसका नाम उन्होंने श्रीनरेन्द्र रखा है। निश्चित तौर पर यह बात ना केवल प्रधानमंत्री मोदी के लिए बल्कि पूरे देश के लिए हर्ष और सम्मान की बात है।

यह तो हुई पहली बात। दूसरी बात भी कम चौंकाने वाली नहीं थी। दरअसल इंडोनेशिया के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित इस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए इंडोनेशिया की मशहूर सिंगर फ्रायडा लुसिआना का कार्यक्रम भी रखा गया था। लुसिआना को उनके सिंगिंग के साथ-साथ उनके चैरिटी वर्क के लिए भी जाना जाता है। लुसिआना ने इस दौरान 1954 में आई हिन्दी फिल्म ‘जागृति’ का गाना ‘साबरमति के संत’ गाया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित यह गाना वहां के कलाकार से कुछ अलग अंदाज में पर उसी सम्मान और समर्पण के साथ सुनना सचमुच एक अलग अनुभूति से भरने वाला था।

बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति से समुद्र, व्यापार और निवेश सहित विभिन्न मुद्दों पर द्विपक्षीय सहयोग के संबंध में चर्चा की। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य तीनों दक्षिण पूर्व एशियाई देशों – इंडोनेशिया, मलयेशिया और सिंगापुर – के साथ भारत के संबंध को बढ़ाना है। कहने की जरूरत नहीं कि यह उनकी एक्ट ईस्ट नीति का हिस्सा है।

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समाजवादी सोचवाले महामानव हैं मनीषी भूपेन्द्र !

आज 29 मई है ! वर्ष 2018 और दिन मंगलवार ! प्रखर समाजवादी, संत राजनीतिज्ञ एवं सुलझे सोच के नेक इंसान भूपेन्द्र नारायण मंडल की 44वीं पुण्यतिथि !

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी को इस समाजवादी सोच वाले महामानव के संग साया की तरह साथ रहने का अवसर खूब मिला | उस मनीषी के साथ डॉ.मधेपुरी बैलगाड़ी से रेलगाड़ी और सड़क से संसद तक निरंतर आते-जाते रहे….|

राज्यसभा सदस्य रहते हुए…. उनके निधन (29 मई 1975) के बाद देश जब ‘आपातकाल’ सरीखे उन्मत परिस्थितियों से गुजर रहा था तब जाकर डाॅ.मधेपुरी ने उस विकट परिस्थिति में उस मनीषी के नाम मधेपुरा में जनसहयोग से एक कॉलेज (भू.ना.मंडल वाणिज्य महाविद्यालय) का निर्माण कराया, जननायक कर्पूरी ठाकुर को मधेपुरा लाकर उस मनीषी की अंतिम इच्छा की पूर्ति की और तत्कालीन कॉलेज चौक (अब भूपेन्द्र चौक) पर जन सहयोग से उनकी प्रतिमा लगाई और 1991 में उनकी प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर त्रिमूर्ति लालू-शरद-नीतीश से अनुनय-विनय कर उसी दिन जन आकांक्षा के अनुरूप उनके नाम (भू.ना.मंडल) विश्वविद्यालय की घोषणा भी कराई…..|

बता दें कि अपरिहार्य कारणवश आज मधेपुरा से बाहर होने के कारण डॉ.मधेपुरी मधेपुरा के भूपेन्द्र चौक पर निर्मित मनीषी भूपेन्द्र की प्रतिमा पर पुष्पांजलि नहीं कर सकेंगे | इसलिए उन्होंने राजधानी पटना में ही उनके तैल-चित्र पर पुष्पांजलि करते हुए श्रद्धा के चन्द शब्दों के माध्यम से ‘श्रद्धांजलि’ अर्पित की है |

मनीषी भूपेन्द्र !
समाजवादी चिन्तक !!
समाजवादियों के प्रेरणा स्रोत !!!

तुम आये यहाँ-
माटी का पूत बनकर
वंचितो-अछूतों का दूत बनकर

तुम आये यहाँ-
विकट परिस्थितियों में
उन्मत झंझावातों में
आंधी और तूफानों में
परंतु,
बिना रूके, बिना झुके, अविचलित रहकर
बेकशों के संसार को सजाते रहे जीवन भर
सखा और सहयोगी रहकर

बोलो, तुम कहाँ नहीं रहे-
बुद्ध, नानक व कबीर के विचारों-व्यवहारों से लेकर
मार्क्स, गांधी और सोशलिज्म के संस्कारों तक

तुझे क्या कहकर पुकारूँ मैं-
इस धरती का सपूत !
कोई फरिश्ता…… या फिर कोई अग्रदूत !!

चलो, तुझे मसीहा ही मान लेता हूँ
और तुम्हारे श्री चरणों में करता हूँ समर्पित
अपनी चार पंक्तियाँ
‘श्रद्धांजलि’ स्वरुप-

धन आदमी की नींद को हर पल हराम करता,
जो बाँटता दिल खोल उसे युग सलाम करता !
मरने के बाद मसीहा बनता वही मधेपुरी
जो जिंदगी में अपना सबकुछ नीलाम करता !!

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आनंद कुमार का सुपर 30 अब जापान में होगा शुरू !

संसार के सर्वाधिक बड़े शहरों में एक है जापान की राजधानी ‘टोकियो’ | टोकियो से प्रकाशित होने वाले जापान का सबसे प्रसिद्ध अखबार ‘योमिउरी शिमबन’ में भारत के सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार के ऊपर विस्तार से एक लेख छपी है | लेख में आनंद कुमार को छात्रों का रोल मॉडल बताया गया है |

बता दें कि जापानी अखबार के लेख में यह बताया गया है कि आनंद कुमार विगत 17 साल से निरंतर गरीब एवं जरूरतमंद छात्रों की हर तरह से मदद करते आ रहे हैं | आनंद सर के इस कृत्य को भारत ही नहीं देश-विदेश के लोग भी प्रशंसनीय कार्य बताते हैं | तभी तो जापानी अखबार में छपे लेख में आनंद कुमार के बारे में कहा गया है कि शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को सही-सही मार्गदर्शन देने तथा आईआईटी तक भेजने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं |

यह भी जानिए कि अखबार में छपे लेख में विज्ञान के रहस्यों का गहन अध्ययन करने वाले आनंद सर द्वारा बच्चों के भीतर की सोयी हुई ऊर्जा को जागृत कर दिया जाता है तथा उसे हाई एनर्जी लेवल तक पहुंचा दिया जाता है | बच्चों में संकल्प और जुनून के साथ आत्मविश्वास पैदा कर दिया जाता है | और दुनिया जानती है कि आत्मविश्वास किसी के भी जीवन में अद्भुत चमत्कार ला देता है |

बता दें कि आनंद सर द्वारा इन बातों को उन बच्चों में डालते ही वे सभी समय से आगे सोचने की शक्ति से भर जाते हैं, खासकर वैसे बच्चे जो अर्थ के अभाव में जीवन को अर्थहीन बनाने के रास्ते चल रहे होते हैं | वैसे ही 30 बच्चों को अपने साथ अपने घर पर रखते हैं आनंद सर और सबों को खाना बनाकर कर खिलाती थी आरंभ में उनकी माँ और अब उनकी पत्नी |

चलते-चलते यह भी बता दें कि टोकियो यूनिवर्सिटी में एक नहीं बल्कि अनेक बार सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार का व्याख्यान आयोजित किया जा चुका है | जापान के लिए आनंद सर नये नहीं रहे तभी तो उनकी सफलता की कहानी अब वहाँ की भिन्न-भिन्न मीडियाऔं द्वारा प्रकाशित किया जाने लगा है | सर्वाधिक गौरव की बात यह है कि अब जापान में भी सुपर-30 शुरू होने जा रहा है |

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देश में बनी मेघना तो बिहार में सुजल बने टॉपर !

सीबीएसई के 12वीं में 14 साल में पहली बार 500 में 499 नंबर यानी 99.8% अंक प्राप्त कर नोएडा (यू.पी) की मेघना श्रीवास्तव ने जहाँ संपूर्ण भारत में टॉप किया वहीं बिहार में सुजल राज ने 98.4% अंक लाकर प्रथम स्थान प्राप्त किया | मेघना और सुजल दोनों आर्ट्स से टॉपर बने |

यह जानना बड़ा ही दिलचस्प होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर पहले नंबर पर मेघना (99.8%), दूसरे नंबर पर गाजियाबाद की अनुष्का (99.6%) दोनों ही आर्ट्स की हैं | तीसरे नंबर पर (99.4%) यानी 497 अंक ला-लाकर 7 स्टूडेंट्स आये जिसमें 5 लड़कियाँ हैं |

बता दें कि देश स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर कुल 9 स्टूडेंट्स आये हैं जिसमें मात्र 2 लड़के हैं और 7 लड़कियाँ | ये सातों बेटियां हैं- मेघना श्रीवास्तव, अनुष्का चंद्रा, चाहत बोधराज, तनुजा कापरी, अनन्या सिंह, आस्था बंबा और सुप्रिया कौशिक | बेटे का नाम बताने से पहले- जो बेटी बनी स्वाभिमान पिता का, उस बेटी की जय हो ! नौ में केवल दो बेटे हैं- नकुल गुप्ता और क्षैतिज आनंद |

यह भी जानिए कि भारत में लगभग 12 लाख छात्रों ने परीक्षा दी जिसमें लगभग 9 लाख पास हुए और लगभग तीन लाख के आस-पास फेल | जहाँ 12 हजार से अधिक छात्रों ने 95% से ज्यादा नंबर लाया, वहीं 72 हजार से अधिक छात्रों ने 90% से ज्यादा नंबर लाया है | इस वर्ष लड़कों से 9.32% अधिक लड़कियां ही परीक्षा में उत्तीर्ण हुई हैं | इस साल उत्तीर्ण होने वाले छात्रों का प्रतिशत है- 83.01% | निजी स्कूलों के मुकाबले में सरकारी स्कूलों के छात्रों का जलवा रहा | जहाँ सरकारी स्कूलों में 84% पास हुए वहीं निजी स्कूलों में 82% के लगभग |

चलते-चलते मेघना के बारे में- न ट्यूशन लिया, न पढ़ाई के घंटे गिने और न कोचिंग की भारत की इस बेटी ने | साल भर एक जैसी पढ़ाई की | स्टडी टेबल के सामने एक ड्रीम बोर्ड लगाया था जिसपर हररोज टारगेट लिखती और उसे पूरा करने तक पढ़ती |

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धूप पर भी भारी पड़ा रोजेदारों का जज्बा

रमजान के महीने में रोजा रखना प्रत्येक मुसलमान का फर्ज करार दिया गया है , चाहे गर्मी, जाड़ा या बरसात का मौसम ही क्यों ना हो ! क्या गरीब, क्या अमीर बल्कि बच्चों से लेकर बूढ़े तक सभी ईद के चांद को देखने की आस में रमजान के पाक महीने को 10-10 दिनों के तीन आसरो में अपने-अपने ध्यान को बांट लेते हैं । पहले 10 दिनों तक रहमत व बरकत के लिए, दूसरे 10 दिनों तक मगफिरत के लिए और आखरी 10 दिनों तक जहन्नुम से छुटकारा पाने के लिए समर्पित रहते हैं ।
यह  भी  जानिये कि रोजा एक ऐसी   इबादत है कि अल्लाह  खुुुद उसके  बदले रोजेदारों को बहुत कुछ देता है । रमजान के महीने में  पाक  दिल से मांगी गई दुआएं भी अल्लाह द्वारा कबूल की जाती है ।
दूसरे जुमे की नमाज में इस शुक्रवार को मधेपुरा सहित जिले के  सिंहेश्वर, मुरलीगंज, कुमारखंड, बिहारीगंज …… आदि अन्य सभी मस्जिदों में काफी भीड़ उमड़ी । दोपहर के वक्त धूप इतनी कड़ी थी कि थोड़ी देर बाहर खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा था फिर भी बच्चे नमाजियों का जज्बा कम होते नहीं दिखा । कड़ी धूप में रोजेदार पसीने से तरबतर होने के बावजूद भी अपने रब की रजा के लिए इबादत करते रहे और अकीदत के साथ जुमे की नमाज भी अदा करते रहे ।
यह भी जानिये कि मस्जिदों में खुतबा पढ़ा रहे इमाम ने रमजान की फजीलत के बारे में भी बताया तथा रमजान के रोजे और इबादतों के शबाब का भी जिक्र किया । अपनी तकरीर में इमाम द्वारा यह भी बताया गया की रमजान मेंं रोजा , नमाज और कुरआन शरीफ की तिलावत से जो उदासीन रहता है वह खुदा की रहमतों से मरहूम रह जाता है । अंत में इमाम द्वारा हर किसी के लिए दुआ मांगी जाती है कि अल्लाहताला इस पाक रमजान के महीने में ज्यादा से ज्यादा  नेकियाँ कमाने की तौफीक अता फरमाएं ।

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पानी ज्यादा पीने से कम हो सकता है कैंसर का खतरा

यूँ तो प्रायः बुद्धिजीवियों द्वारा निरंतर पढ़ा , लिखा और बोला जाता है कि जल ही जीवन है , परंतु व्यवहार में जल का उपयोग लोग उतना नहीं करते जितना स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है | बाबा रामदेव भी सुबह सवेरे योग कक्षा में इतना तो हर रोज कहते ही हैं – सवेरे उठकर दो से तीन ग्लास पानी अवश्य पी लें…… गुनगुने पानी में नींबू का रस डालकर या फिर एक चम्मच मधु घोलकर |
वैज्ञानिकों ने रिसर्च करके इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि ज्यादा से ज्यादा पानी पीने से कैंसर का खतरा कम हो सकता है | गहन अध्ययन और शोध कार्यों से पता चला है कि अधिक पानी पीकर 40% कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है |
यूँ तो भारत में कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या ज्यादा है, परंतु मौत के मामले में पुरुष महिलाओं से आगे हैं  | क्योंकि महिलाओं में शुरुआती चरणों में ही कैंसर जैसी बीमारी का पता चल जाता है | विगत वर्षों में प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक भारत में जहां लगभग 6 लाख महिलाओं को कैंसर डिटेक्ट हुआ था वहीं कैंसर पीड़ित पुरुषों की संख्या लगभग 5 लाख थी |
यह भी जानिए कि भारत में कैंसर पीड़ित महिलाओं में मृत्यु दर 60% है वहीं पुरुषों में होने वाली मौत की दर 75% है | पुरुषों में जहां फेफड़े और मुंह का कैंसर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट और गर्भाशय का कैंसर |
आर्थिक रुप से कमजोर लोग भी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी प्रतिदिन अवश्य पीयें, जो कैंसर से बचने का सटीक और आसान उपाय है । साथ ही मीठी चीजों और नशीली चीजों का सेवन ना करना भी फायदेमंद है । जंक फूड और मांस खाने से परहेज करने के साथ-साथ घर का काम-काज करें…. बागवानी  भी करें तो और अच्छा हैै……!!

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सूबे के 534 प्रखंडों में होगी मौसम की क्लोज मॉनिटरिंग !

फिलहाल बिहार के पाँच जिलों में प्रयोग के तौर पर ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि प्रत्येक 20 मिनट पर मौसम का डाटा चला जायेगा ISRO के पास | जिससे किसानों को मौसम की सही जानकारियाँ दी जाती रहेंगी और यदाकदा फसल की क्षति का मुआवजा देने में सरकार को भी आसानी होगी |

बता दें कि इन पाँचो जिले में खोले गये मौसम केंद्रों के सफल होने पर राज्य के 38 जिले के कुल 534 प्रखंडों एवं 8391 पंचायतों में भी इसका विस्तार किया जाएगा, क्योंकि राज्य के अधिकतर भागों में खेतीबारी पूर्णत: मौसम पर ही आधारित है | लिहाजा मौसम की सही जानकारियाँ नहीं रहने के कारण किसानों को सर्वाधिक परेशानी झेलनी पड़ती है |

यह भी जान लें कि गत वर्ष कोसी प्रमंडल के सुपौल जिला सहित नालंदा एवं पूर्वी चम्पारण के सभी प्रखंडों में ‘ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन’ एवं इन जिलों के सभी पंचायतों में ‘टेलीमैट्रिक रेनगेज’ की स्थापना हेतु स्वीकृति दी गई थी | चालू वर्ष में अरवल एवं गया जिले को भी इस व्यवस्था में जोड़ा गया है | सफलता मिलते ही शीघ्र ही सभी जिलों में इसका विस्तार कर लिया जाएगा |

यह भी बता दें कि कभी-कभी एक ही प्रखंड के कुछ पंचायतों में वर्षा की कमी हो जाती है और कुछ में अधिकता…….| फलस्वरूप क्लोज मॉनिटरिंग नहीं हो पाने के कारण वर्षा की कमी वाले पंचायतों के किसानों को भी मुआवजा नहीं मिल पाता है, क्योंकि सरकार के पास इसका सही-सही रिकॉर्ड नहीं होता | इस कठिनाई को दूर करने हेतु सरकार द्वारा सभी पंचायतों में ‘टेलीमैट्रिक रेनगेज’ लगाने का फैसला लिया गया है |

चलते-चलते यह भी जान लें कि उपलब्ध सारी जानकारियाँ सिस्टम द्वारा स्वतः ISRO को प्रत्येक 20 मिनट पर प्रेषित होता रहेगा और ISRO के डाटा विश्लेषण के आधार पर सरकार को अद्यतन जानकारियाँ मिलती रहेंगी और किसानों को नमी, तापमान एवं हवा की गति व दिशा की सही-सही जानकारीयाँ भी प्राप्त होती रहेंगी |

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बेटी बने स्वाभिमान बाप का, उस बेटी की जय हो !

भारतीय रेल की सवारी गाड़ी में ‘महिला डिब्बा’ को प्रायः पुरुष यात्रियों द्वारा ही कब्जा कर लिया जाता है | जब महिला यात्रीगण आती हैं तब भी पुरुष यात्रियों द्वारा जगह खाली नहीं किये जाते हैं | नतीजतन दर्जनों महिला यात्री ट्रेन पर सवार होने से वंचित रह जाती हैं | तुर्रा तो यह है कि पूर्व में महिलाओं के लिए सुरक्षित डिब्बे पर केवल ‘महिला’ अथवा ‘महिला डिब्बा’ ही अंकित कर देने से काम चल जाता था परंतु आज-कल तो “महिला डिब्बा, पुरुष प्रवेश निषेध” तक लिख डालने पर भी बात बनती नहीं है |

बता दें कि सूबे की राजधानी पटना में ही पटना-गया रेलखंड पर चलनेवाली सवारी रेलगाड़ी में कामकाजी महिलाओं के साथ-साथ गृहणियों का भी पटना आना-जाना लगा रहता है | मंगलवार को नदवां स्टेशन पर महिला के लिए आरक्षित डिब्बे पर “महिला डब्बा, पुरुष प्रवेश निषेध” अंकित रहने के बावजूद भी पुरुषों द्वारा पूरे डब्बे को दखल कर लिए जाने पर महिला यात्रियों ने पहले तो अनुरोध किया और नहीं मानने पर किया जमकर हंगामा | हंगामे के बावजूद भी पुरुष यात्रीयों ने बॉगी खाली करने का नाम नहीं लिया तो बातें आरपीएफ इंस्पेक्टर राकेश रंजन तक चली गई |

जानिए कि नदवां स्टेशन पर महिला बॉगी में चढ़ने के लिए जद्दोजहद करती महिला यात्रियों की दशा देखकर इंस्पेक्टर ने यही कहा कि जागरूकता के अभाव में पुरुष यात्रीगण महिला बॉगी में सवार हो जाते हैं | कई बार अनेक स्टेशनों पर पुलिस द्वारा कार्यवाई कर महिला बॉगी से पुरुष यात्रियों को बाहर निकाला व उतारा जाता रहा है | यहाँ तो प्रवचनकर्ता रविशंकर की वाणी-

“बेटा बने सरताज बाप का, उस बेटे की जय हो” जहाँ प्रभावहीन हो रही है वहीं “बेटी बने स्वाभिमान बाप का, उस बेटी की जय हो” कारगर सिद्ध हो रही है | अब बेटियां हवाई जहाज उड़ाने के साथ-साथ हक की खातिर हंगामा करने से भी बाज नहीं आ रही है |

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ये हैं भारत के पहले आधुनिक पुरुष

ब्रिटेन के ब्रिस्टल शहर में आर्नोस वेल का बहुत पुराना कब्रिस्तान है । यहां सौ-दो साल से अपरिचित कब्रगाहों के बीच उस शख़्स की कब्र है जिन्हें भारत का प्रथम आधुनिक पुरुष कहा जाता है । वो कोई और नहीं ब्रह्म समाज संस्थापक राजा राम मोहन राय हैं ।

एक ब्राह्मण का कब्र वो भी इंग्लैंड में ! बात गुजरे ज़माने की है जब मुगलिया सल्तनत हिन्दुस्तान में अपने आखिरी दिन गिन रहा था । तब के मुग़ल बादशाह थे अक़बर द्वितीय जिन्होंने राजा राम मोहन राय को अपनी आर्थिक मदद की फ़रियाद लगाने के लिए इंग्लैंड भेजा था । वे वहां के राजा से मिले इसलिए उन्हें राजा का ख़िताब दिया गया । इसी बीच उनकी तबियत बिगड़ गयी और 27 सितंबर 1833 में 61 साल की उम्र में राजा राममोहन राय का देहांत हो गया , उस वक़्त इंग्लैंड में दाह-संस्कार की अनुमति नहीं थी । इसलिए उन्हें दफ़्न किया गया ।

यूँ तो आधुनिकता के इस दौर में हर कोई आधूनिकिकरण के चपेट में आ गया है । पर सच्चे अर्थों में भारत की आधुनिकता को परिभाषित किया राजा राम मोहन राय ने । राजा राम मोहन राय का जन्म आज के ही दिन 22 मई, 1772 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के राधानगर में हुआ था। उन्होंने भारत की सदियों से चली आ रही रुढ़िवादी सोच पर प्रहार किया और अंग्रेजों के साथ मिलकर भारत में अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार व प्रसार किया ।

करीब 200 साल पहले जब समाज में सती प्रथा जोरों पर थी, तब राजा राम मोहन राय ने इसे जड़ से खत्म करने में सबसे अहम भूमिका अदा किया। उन्होंने सती प्रथा का कड़ा विरोध किया। उन्होंने महिलाओं के लिए समान अधिकारों के लिए मुहिम चलाई और विधवा विवाह व संपत्ति के हक के लिए भी लोगों को जागरूक किया। 1828 में उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की। इसे भारत का पहला सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन कहा जाता है। राजा राममोहन राय मूर्तिपूजा और रूढ़िवादी हिन्दू परंपराओं के विरुद्ध थे । वे अंधविश्वास के खिलाफ थे । आज इस विशेष दिन पर मधेपुरा अबतक इस आधुनिक पुरुष को नमन करता है |

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