नरेन्द्र मोदी के विरोधी चाहे जो बोलें उनका जादू ना केवल दिन-ब-दिन बढ़ रहा है बल्कि अब तो लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। मोदी की विदेश नीति कितनी सफल है इस पर भले ही ‘विवाद’ की गुंजाइश हो लेकिन भारत समेत दुनिया भर में उनका कैसा ‘असर’ है ये देखने के लिए एक ही दृश्य काफी होगा। जी हाँ, कल्पना करें उस दृश्य की जब एक नहीं, दो नहीं पूरे 42 राष्ट्राध्यक्ष उनके परिधान में दिखेंगे।
दरअसल, 26 से 29 अक्टूबर तक नई दिल्ली में इंडो-अफ्रीकन फोरम समिट (आईएएफएस) – 2015 का आयोजन होने जा रहा है। इस समिट में शामिल होनेवाले सभी 42 राष्ट्राध्यक्षों को प्रधानमंत्री मोदी बहुत खास उपहार देने जा रहे हैं। ये उपहार है मोदी स्टाईल की बंडी (मोदी जैकेट) और ‘इक्कत’ कुर्ते का जिस पर अब उनकी छाप लग चुकी है।
जरा रुकिए, अभी ख़बर पूरी नहीं हुई। असली ख़बर तो ये है कि समिट के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा दिए जानेवाले भोज में सभी राष्ट्राध्यक्ष ‘मोदी जैकेट’ में दिखेंगे। यही नहीं, अपने प्रवास के दौरान सभी राष्ट्राध्यक्ष मोदी स्टाईल के कुर्ते में भी दिखाई देंगे। इसके लिए सभी राष्ट्राध्यक्षों की पसंद को देखते हुए अलग-अलग रंग के कुर्ते बनाए जा रहे हैं। इससे पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी अपनी भारत-यात्रा के दौरान मोदी जैकेट में दिखे थे। बताया जाता है कि अफ्रीकी देशों के कई राजनेता मोदी के इस डिप्लोमेसी स्टाईल के कायल हो गए हैं।
यह पहला मौका है जब अफ्रीकी देशों के राष्ट्राध्यक्ष इतनी बड़ी संख्या में यहाँ मौजूद होंगे। राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ इसमें अफ्रीकी देशों के 400 उद्योगपति भी शामिल हो रहे हैं। मोदी भविष्य की सम्भावनाओं के मद्देनज़र इस अवसर का महत्व जानते हैं। यही कारण है कि बिहार चुनाव को लेकर अपने अति व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद वो इस अवसर को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।
भारत और अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। भारत अफ्रीका में एक बड़ा निवेशक है और हाल के वर्षों में वहाँ इसका व्यापार बहुत तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में अफ्रीका के साथ भारत का कारोबार 75 अरब डॉलर का है और भारत ने पिछले चार सालों में अफ्रीकी महाद्वीप को 7.4 अरब डॉलर का कर्ज दिया है जिसका उपयोग 41 देशों की 137 परियोजनाओं मे हो रहा है।
यह भी जानें कि तंजानिया, सूडान, मोजांबिक, केन्या, युगांडा समेत कई अफ्रीकी देशों के पास बड़े पैमाने पर तेल और गैस के भंडार हैं। भारत अपने आर्थिक विकास के लिए ईंधन में विशेष रूप से निवेश चाहता है। इसके अलावा भारत समुद्र क्षेत्र से जुड़े कारोबार में भी अहम साझेदारी चाहता है। यही नहीं, भारत अफ्रीकी देशों के साथ कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य क्षेत्र, आधारभूत ढाँचे और तकनीक में विस्तार के लिए भी काम करने की इच्छा रखता है।
इन तमाम तथ्यों की पृष्ठभूमि में इंडो-अफ्रीकन फोरम समिट का महत्व सहज ही समझा जा सकता है। बहरहाल, कूटनीतिक सम्भावना अपनी जगह है, फिलहाल तो मोदी की ‘पर्सनल डिप्लोमेसी’ के कारण ये समिट पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप


