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शाकाहारी भोजन कोरोना के लिए ज्यादा सुरक्षित

मानव शरीर के लिए ऐसा कोई पौष्टिक तत्व नहीं जो शाकाहारी भोजन यानि वनस्पतियों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। शाकाहारी भोजन हमें कठिन से कठिन रोगों से भी बचाता है। दुनिया के महानतम लोग शाकाहारी रहे हैं।

बता दें कि शाकाहारियों में हृदय को रक्त भेजने वाली धमनियों से संबंधित बीमारियों की संभावना कम होती है। मांसाहारियों की अपेक्षा शाकाहारियों में हाई ब्लड प्रेशर की संभावना भी कम होती है। स्वास्थ्य रक्षा एवं रोग अवरोधक शक्ति का संचय ही शाकाहार का लाभ है। शाकाहारियों द्वारा रेसा युक्त फल और सब्जियों का अधिक सेवन करने से इम्यूनिटी भी बढ़ता है और साथ ही फेफड़ों व बड़ी आँत कैंसर भी कम होता है। शाकाहारियों में एस्ट्रोजन की मात्रा कम पाए जाने के कारण विश्व भर के लिए गए आंकड़े यही बताते हैं कि शाकाहारी भोजन करने वालों में कैंसर (खासकर स्तन कैंसर) एवं गुर्दे से संबंधित रोगों की संभावना कम होती है।

जानिए कि भोजन दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है जो शरीर को ऊर्जावान व फुर्तीला बनाए रखता है। जहां मांसाहार को पचाने में बहुत समय लगता है वहीं शाकाहारी भोजन सुपाच्य होता है। शाकाहारी भोजन शरीर के ऐम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। जो कोरोना से अंत तक लड़ता है। भारत में 31% जनसंख्या शाकाहारी है जो दुनिया में सबसे अधिक है। रिसर्च के अनुसार शाकाहार से 50 लाख  लोगों की मौत को टाला जा सकता है। तभी तो लोग मांसाहार से किनारा करने लगे हैं। विश्व भर में शाकाहार का डंका बजने लगा है और अब संसार ‘शाकाहार दिवस’ भी मनाने लगा है।

डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी कहते हैं कि डॉ.कलाम ताजिंदगी संपूर्ण शाकाहारी बने रहे… जीवन पर्यन्त डॉ.कलाम ने चाय-कॉफी के साथ-साथ मांस-मछली भी नहीं ग्रहण किया। विश्व की चंद हस्तियों को जाने जिन्होंने शाकाहार को स्वीकारा और वे हैं- महात्मा गांधी, हिटलर, निकोला टेस्ला, सीवी रमन, रविंद्र नाथ टैगोर, डॉ.कलाम, नरेंद्र मोदी, अमिताभ बच्चन… आदि !!

 

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कोरोना वायरस से भयभीत है दुनिया !

विगत तीन-चार महीनों से समस्त संसार कोरोना वायरस से भयभीत है। दुनिया के विकसित देशों- अमेरिका, इटली, स्पेन… जैसे देश इस कोरोना के कहर के सामने घुटने टेक दिए हैं। इन देशों में कोरोना वायरस के कोहराम के चलते अमूमन 15 हजार से 50 हजार लोगों ने मौत को गले लगा लिया है।

बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समय से जगकर तथा 135 करोड़ देशवासियों का सहयोग प्राप्त कर कोरोना वायरस से सामना करने वाला विश्व का प्रथम राष्ट्र नायक बनने का गौरव प्राप्त कर लिया है। इस गौरव को प्रधानमंत्री ने देशवासियों के साथ-साथ कोरोना के समस्त वारियर्स को समर्पित किया है।

यह भी बता दें कि हमारे प्रधानमंत्री  अहर्निश देश और देशवासियों की चिंता में डूबे रहते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था से लेकर भारत में भी कोरोना के बैक गियर से उत्पन्न होने वाली खतरनाक स्थितियों व मुसीबतों से जूझते रहते हैं। इन्हीं कारणों से उनकी आंखों से नींद भी आजकल दूर होती जा रही है। भला क्यों नहीं, आजादी की जंग से अधिक कठिन है कोरोना से लड़ना और जीतना।

यह भी जानिए और मानिए कि कोरोना का कोई मजहब नहीं। यह तो चीन से निकला एक दानव है। इसे मजहबी चश्मे से कोई ना देखें तो यह दानव जल्द से जल्द हमारा पीछा छोड़ देगा। इस दानव को मिटाने में अपनी सारी ऊर्जा को लगाना है और कोरोना रूपी राक्षस से अपने संसार को बचाना है। आज हर जुबान से बस यही आवाज निकले- “कोरोना को हराओ और देश को बचाओ !!”

चलते-चलते यह भी बता दें कि फिलहाल दुनिया में 2 लाख से अधिक लोगों की मौत कोरोना के कारण हो चुकी है जबकि पूरी दुनिया में 30 लाख कोरोना संक्रमित हैं। वे जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं तथा उन्हें बचाने के लिए कोरोना वारियर्स के रूप में सरकारी तंत्र, सामाजिक संगठन और डॉक्टर्स व पुलिस प्रशासन के लोग लगे हैं।

जहां भारत में अब तक 26500 से अधिक लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं… और 6000 से अधिक लोग ठीक हो कर घर भी लौट गए हैं… तथा 824 लोगों की मौत हो चुकी है… वहीं बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या 238 है– जिसमें मधेपुरा (बिहारीगंज) की एकमात्र महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई है। इस पर मधेपुरा के संवेदनशील-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने लोगों से निवेदन किया–

सभी धैर्य और संयम के साथ घर में रहें…. सुरक्षित रहें तथा अक्षय तृतीया एवं रमजान के इस पाक महीने में- “इंसानियत की होती रहे बात… कोरोना को देने के लिए मात… सारा देश रहे एक साथ !!!”

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शुरू हुआ रमजान का पाक महीना

रमजान का पाक महीना शनिवार, 25 अप्रैल से शुरू हो गया। इस्लाम को मानने वाले लोग इस महीने का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से नौवां महीना रमजान का होता है। चांद दिखने के साथ ही रमजान का महीना शुरू हो जाता है और मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखना शुरू कर देते हैं। इस बार दुनिया के तमाम मुल्क कोरोना की त्रासदी झेल रहे हैं, इसलिए रमजान भी लॉकडाउन के साये में ही होगा और लोग घरों में रहकर ही इबादत करेंगे।
रमजान के महीने में सबसे ज्यादा महत्व रोजा रखने का होता है। रोजा अल्लाह की मतलब सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की इबादत करने का एक तरीका है। इसमें मन की शुद्धता भी उतनी ही जरूरी है। रोजा रखने के लिए सूर्योदय से पहले उठकर कुछ खाने-पीने का प्रावधान है। इसे सहरी कहा जाता है। सहरी का वक्त सूर्योदय से पहले का होता है और सुबह फज्र की नमाज के साथ खत्म हो जाता है। इस तरह रोजा फज्र की नमाज के साथ शुरू होता है और शाम के समय लोग मगरीब की नमाज के बाद सामूहिक रूप से इफ्तार करते हैं। इस बीच रोजा रखने वाले दिन भर रोजा रखने के साथ अपना दैनिक काम भी कर सकते हैं। साथ ही इस महीने विशेष नमाज भी की जाती है, जिसे तराबी कहते हैं।
इस बार लॉकडाउन की वजह से इफ्तार की रौनक गायब रहेगी और लोग मस्जिद की बजाय घरों में रहकर सजदा करेंगे। माना जाता है कि यह बरकतों और रहमतों का महीना होता है और सच्चे मन से की गई हर दुआ कबूल होती है। मधेपुरा अबतक आप सभी को इस पवित्र महीने की शुभकामनाएं देता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि कोरोना से संसार को जल्द मुक्ति मिले।

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कैसे सार्थक हो विश्व पुस्तक दिवस ?

किताबें झांकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
बड़ी हसरत से तकती हैं
महीनों अब मुलाकातें नहीं होतीं,
जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं,
अब अक्सर गुजर जाती हैं कम्प्यूटर के पर्दों पर..!

23 अप्रैल, विश्व पुस्तक दिवस पर गुलजार की ये पंक्तियां कितनी प्रासंगिक लगती हैं। मानव सभ्यता के विकास में किताबों की कितनी बड़ी भूमिका रही है, कहने की जरूरत नहीं। लेकिन आज उन किताबों की जगह कम्प्यूटर, लैपटॉप और स्मार्टफोन लेते जा रहे हैं। आश्चर्य की बात तो ये कि इंटरनेट की सुविधा से लैस इन उपकरणों को किताबों की जगह रख हम स्वयं को अधिक विकसित समझने की भूल भी कर रहे हैं। लेकिन किताबों का कोई विकल्प नहीं हो सकता, इसमें जो तहजीब है, जो स्थायित्व है, जो अपनत्व है, मर्म को छूने की जो अद्भुत कला और अतीत और वर्तमान के बीच संवाद स्थापित करने की जो कारीगरी है वो किसी और चीज में संभव नहीं। आज के तमाम साधन ‘सूचना’ चाहे जितनी दे लें, ‘ज्ञान’ के लिए हमें हमेशा पुस्तकों की शरण में ही जाना होगा और इसे हमलोग जितनी जल्दी समझ लें हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए उतना ही बेहतर होगा।
बहरहाल, आज के अधिकांश बच्चे जो विश्व पुस्तक दिवस मना भी रहे होते हैं, उनमें से कई ये नहीं जानते होंगे कि 23 अप्रैल 1564 को विश्व के सार्वकालिक महानतम साहित्यकारों में एक विलियम शेक्सपियर का निधन हुआ था। अपने जीवनकाल में 35 नाटक और 200 से ज्यादा कविताओं की रचना कर विश्व साहित्य में उन्होंने अप्रतिम योगदान दिया था। उसी को देखते हुए यूनेस्को ने 1995 और भारत सरकार ने 2001 में 23 अप्रैल के दिन को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। लेकिन यह देखना अत्यंत पीड़ादायी है कि यह दिन अब रस्म अदायगी से ज्यादा कुछ नहीं।
आपको जानना चाहिए कि दुनियाभर की 285 यूनिवर्सिटी में ब्रिटेन और इटली की यूनिवर्सिटी ने संयुक्त अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला है कि जो छात्र डिजिटल तकनीक का अधिकतम उपयोग करते हैं, वे पढ़ाई के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ पाते और फिसड्डी साबित होते हैं। ज्यादा इंटरनेट के इस्तेमाल से उन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता और अंतत: उनमें अकेलेपन की भावना घर कर जाती है।  यही नहीं, मनोभावों पर नियंत्रण रखना भी वे नहीं सीख पाते और ना ही अपनी भावी योजना और शैक्षिक वातावरण में बेहतर तालमेल बना पाते हैं।
हम ये हरगिज ना भूलें कि किताबों की उपेक्षा हमारे पिछड़ जाने का संकेत है। किताबों से दिनोंदिन बढ़ती दूरी हमें भौतिकवाद, नैतिक पतन और आत्ममुग्ध आधुनिकता से ग्रसित कर रही है। अगर हमें अपने होने का सही अर्थ पाना है तो किताबों से जुड़ना ही होगा। हम ये समझें और उस अनुरूप कदम उठाने को संकल्पित हों, यही पुस्तक दिवस की सार्थकता होगी।

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अब राशन कार्ड के बिना भी मिलेगी सहायता राशि

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मुख्य सचिव एवं अन्य वरीय अधिकारियों के साथ पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर डोर टू डोर कैंपेन की अद्यतन स्थिति, राशन कार्डधारियों को दी जा रही 1,000 रुपए की सहायता राशि एवं गेहूँ अधिप्राप्ति की स्थिति आदि के संबंध में गहन समीक्षा की।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्वीकृत, लंबित एवं त्रुटिपूर्ण राशन कार्डों के जांचोपरान्त सही पाए गए आवेदनों को पहले सहायता राशि एवं अन्य मदद उपलब्ध कराई जाए, तत्पश्चात् राशन कार्ड शीघ्र निर्गत करने की भी कार्रवाई करें। साथ ही उन्होंने कहा कि राशन कार्ड विहीन परिवारों को जीविका दीदी द्वारा चिह्नित सूची के अनुसार तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए, तत्पश्चात् राशन कार्ड निर्गत करने की भी कार्रवाई करें।
एक अन्य महत्पूर्ण निर्णय के तहत मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अंदर चल रहे आपदा राहत केन्द्रों में दिहाड़ी मजदूरों, ठेला वेंडरों, रिक्शा चालकों एवं अन्य जरूरतमंदों को गुणवत्तापूर्ण भोजन के साथ-साथ बाढ़ राहत शिविरों की तरह बर्तन, कपड़ा और दूध जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराएं। साथ ही शिविर में खाना बनाने वाले लोगों को अलग से पारिश्रमिक देने की व्यवस्था की जाए। आवश्यकता पड़ने पर राहत केन्द्रों की संख्या भी बढ़ाई जाए।
गेहूँ अधिप्राप्ति की समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूँ अधिप्राप्ति के कार्य में तेजी लाई जाए ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित लाभ मिल सके।
समीक्षा के क्रम में जानकारी दी गई कि पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर प्रभावित जिलो में डोर डोर स्क्रीनिंग के तहत अब तक 36 लाख 14 हजार घरों का सर्वे किया जा चुका है। राहत की बात है कि इतने घरों में से मात्र 1386 लोगों में सर्दी, खांसी एवं बुखार के सामान्य लक्षण हैं। मुख्यमंत्री ने इस दौरान डोर टू डोर स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाने का भी निर्देश दिया।

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भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ 19 अप्रैल को किया गया था लांच

भारत और दुनिया के इतिहास में 19 अप्रैल को एक से बढ़कर एक महत्वपूर्ण घटनाएं घटती रही और आज भी घट रही है- जिनमें अमेरिकी क्रांति की शुरुआत से लेकर भारतीय प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तात्या टोपे को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा दी गई फांसी भी शामिल है। आजाद भारत में पहला उपग्रह “आर्यभट्ट” का 19 अप्रैल 1975 को लांच किया जाना भी इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

बता दें कि यह सेटेलाइट आर्यभट्ट भारत के विश्व विख्यात एवं महान खगोल शास्त्री व गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर नामित किया गया है जिनका जन्म बिहार की राजधानी पटना में पांचवी शताब्दी 476 ईसवी में तब हुई थी जब पटना का नाम कुसुमपुर था।

Stamp in memory of 1st Satellite Aryabhatta released by Govt. Of India.
Stamp in memory of 1st Satellite Aryabhatta released by Govt. Of India.

गणितीय ज्ञान के तत्कालीन खजांची खगोल विद आर्यभट्ट द्वारा मात्र 23 वर्ष की आयु में दो भागों में आर्यभट्टियम पुस्तक लिखी गई थी जिसके कुल 121  श्लोकों द्वारा ज्योतिषीय, बीज गणितीय एवं त्रिकोणमितीय विद्याओं व सूत्रों की व्याख्या की गई। आर्यभट्ट द्वारा शून्य का आविष्कार भी उसे दुनिया में  अमरत्व दे गया है। तभी तो भारत ने अपने प्रथम उपग्रह का नाम उन्हीं के नाम पर आर्यभट्ट रखा… जिसे 19 अप्रैल 1975 को सोवियत काॅसमाॅस- 3M द्वारा कपुस्तिन से लांच किया गया। भारत सरकार ने 1975 में आर्यभट्ट के सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया है।

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बिहार के कोरोना योद्धा डॉ.जे.पी.यादव की दिल्ली में सड़क दुर्घटना से मौत

बिहार के सुपौल जिला अंतर्गत त्रिवेणीगंज अनुमंडल स्थित भूड़ा गांव के निवासी एवं कोरोना-योद्धा डॉ.जे.पी.यादव दिल्ली में कोरोना मरीजों का इलाज करने में अहर्निश लगे रहते थे कि दिल्ली में ही अचानक एक सड़क दुर्घटना में चार रोज कबल उनकी मृत्यु हो गई। डॉ.जे.पी.यादव का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव भूड़ा में गुरुवार को किया गया।

बता दें कि 52 वर्षीय डॉ.जे.पी.यादव के पार्थिव शरीर के साथ दिल्ली के दर्जनों डॉक्टर अंतिम संस्कार में शामिल होने आए। रास्ते में उत्तर प्रदेश के अधिकारियों एवं कोरोना योद्धाओं द्वारा उनके पार्थिव शरीर पर फूल मालाएं चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ.जय प्रकाश यादव दक्षिण एमसीडी में कोविड- 19 नोडल चिकित्सा पदाधिकारी थे। 1995 से वे दिल्ली को चिकित्सीय सेवा पूर्ण समर्पण के साथ दे रहे थे तथा वर्तमान में कोरोना वारियर्स के रूप में मरीजों का बेहतर इलाज कर रहे थे। उनकी कार जब स्टार्ट नहीं हुई तो बेटे की साईकिल से ही पॉलीक्लिनिक जाकर सीएमओ के रूप में डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) किट वितरण करने में लग गए। एक शाम को अपने फ्लैट ग्रेटर कैलाश-1 लौटते वक्त एक अज्ञात कार ने पीछे से टक्कर मार दी और उन्हें महरौली के पास अरविंदो रोड के पीटीसी चौक से उठाकर मैक्स हॉस्पिटल ले जाया गया परंतु लाख कोशिश के बावजूद बचाया नहीं जा सका।

Funeral of Dr.J.P.Yadav at his paternal village Bhura, Supaul.
The only son Kshitij near funeral of Dr.J.P.Yadav at his paternal village Bhura, Triveniganj (Supaul).

यह भी बता दें कि कोरोना वारियर्स डॉ.जे.पी.यादव को सारा देश संवेदना के साथ मौन श्रद्धांजलि दे रहा है तथा एक प्राइवेट हॉस्पिटल में रेडियोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत उनकी धर्मपत्नी डॉ.रश्मि एवं पुत्र क्षितिज व पुत्री दीक्षा सहित समस्त परिजनों को इस व्यथा को सहन करने की शक्ति प्रदान कर रहा है। परंतु, कृषक पिता महेश्वरी यादव व माता अमलेश्वरी देवी की आंखों के आंसू रुकने-थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और बहन मीना कुमारी होश में आते-आते बार-बार बेहोश हो जाती है। भाई सुभाष कुछ बोल भी नहीं पाता है। समस्त भूड़ा गांव ही शोक में डूबा है। यह कोरोना लाॅकडाउन तो महेश्वरी-अमलेश्वरी के संसार को प्रकाशित करने वाले सूरज को ही सदा के लिए लाॅकडाउन कर दिया है !

चलते-चलते यह भी बता दें कि कोरोना जैसे अंतरराष्ट्रीय आपदा की घड़ी में जब चतुर्दिक लाॅकडाउन विराजमान है तब भी नीतीश सरकार के वरिष्ठ ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के निर्देश पर बिहार की सीमा में प्रवेश करते ही गोपालगंज के डीएम एवं एसपी ने डॉ.जयप्रकाश यादव के पार्थिव शरीर को वीरगति प्राप्त एक नायक जैसा सम्मान दिया तथा फूलमाला अर्पित करते हुए कहा कि डॉ.जेपी ने कोरोना-जंग में लोगों की सेवा करते-करते अपनी शहादत दी है…। त्रिवेणीगंज सदर के एसडीएम बीके सिंह ने जहां डॉ.जेपी के गांव भूड़ा जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की… वहीं अति संवेदनशील समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने त्रिवेणीगंज भूड़ा की मिट्टी को (जिसकी सेवा उनकी बेटी व दामाद डॉ.रश्मि भारती एवं डॉ.वरुण कुमार वर्षों से करते आ रहे हैं) को नमन करते हुए कहा कि कोरोना योद्धा डॉ.जेपी जैसे यशस्वी पुत्र का माता-पिता होना भी परम सौभाग्य की बात है।

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एक के बाद चार दीये जलाकर अंबेडकर जयंती को यादगार बनाएं- डॉ.मधेपुरी

14 अप्रैल 1891 के दिन भारत के संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेदकर का जन्म हुआ था। विश्व धरोहर के रूप में विख्यात बाबा साहब सबके लिए पूज्य हैं और अति सम्माननीय भी। समस्त भारत के अलावा अन्य देशों में भी जहां सभी समुदाय के लोगों द्वारा सर्वाधिक उत्साह एवं उमंग के साथ बाबा साहब की जयंती आज तक मनाई जाती रही है- इस बार वैसा कैसे होगा ? सबको पता है कि संसार के लगभग समस्त देशों में “कोरोना के कहर” से मुक्ति पाने के लिए लाॅकडाउन लगाया हुआ है।

Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri.
Shikshavid Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri.

इस पावन अवसर पर डॉ.भीमराव अंबेडकर साहब की 129वीं जयंती के दिन मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए सबों से यही अनुरोध किया-

राष्ट्र कल्याण एवं राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए देशवासी लाॅकडाउन केे  नियमों का पालन करते हुए अपने-अपने घरों में “एक के बाद चार दीये” जलाकर 14 अप्रैल को सदा के लिए यादगार बनाएं तथा संकल्प के साथ “जयभीम” का उद्घोष करते हुए इस  “भीमवाणी” को आत्मसात करने में लग जाएं-

शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पियेगा वो दहाड़़ेगा !

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उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को तीन महीने बिना शुल्क के गैस

केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए तीन महीने नि:शुल्क गैस रिफिल की घोषणा की है। आधिकारिक बयान के अनुसार, अब तक तेल कंपनियों के द्वारा इस मद में उज्ज्वला योजना के करीब 7.15 करोड़ लाभार्थियों के खाते में 5606 करोड़ हस्तांतरित किए गए हैं।
ध्यातव्य है कि यह योजना 01 अप्रैल से 30 जून तक के लिए प्रभावी है। इसके तहत कंपनियां लाभार्थी के खाते में उसके पैकेज के हिसाब से 14.2 किलो या 05 किलो के सिलेंडर की कीमत के बराबर का एडवांस जमा करा रही हैं। ग्राहक इस पैसे से सिलंडर रिफिल करा सकेंगे।
कोराना संकट को देखते हुए सभी कंपनियां हर लिहाज से कमर कस चुकी हैं। कंपनियां सुनिश्चित कर रही हैं कि डिलीवरी के लिए किसी ग्राहक को दो दिन से ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़े। लॉकडाउन के बाद से देश में हर दिन रोजाना करीब 60 लाख सिलेंडर रिफिल किए जा रहे हैं।
यह भी जानें कि आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियां पहले ही डिलीवरी ब्वाय समेत सप्लाई चेन के विभिन्न चरणों में कार्यरत अपने कर्मचारियों के लिए 05 लाख की अनुग्रह राशि की घोषणा कर चुकी हैं। किसी भी कर्मचारी की कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु की स्थिति में यह राशि उनके परिजनों को दी जाएगी।

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महात्मा जोतीबा फुले की 193वीं जयन्ती अकेले मनाई डॉ.मधेपुरी ने

महात्मा जोतीबा फुले की 193वीं जयंती पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने शनिवार को मधेपुरा स्थित अपने वृंदावन निवास में कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग के तहत श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहा-

मानवता के कल्याण के लिए हमें जितना भी कष्ट उठाना पड़े….. सभी कार्यों का परित्याग कर घर के अंदर ही रहना पड़े….. हम सभी वैसा ही करें। प्रशासन एवं चिकित्सकों द्वारा निर्धारित जो भी नियम बताए गए हैं उसका पालन करें। इसके अतिरिक्त हम जितना दान कर सकते हैं- देश के लिए… देश में रहने वाले गरीब मजदूर-किसान के लिए तथा पशु-पक्षी के लिए… उतना भर दान हर कोई अवश्य करें। पर सेवा और पर उपकार में हम सब प्रतिदिन लगे रहें।

Samajsevi-Shikshavid Prof.(Dr.)Bhupendra Narayan Madhepuri.
Samajsevi-Shikshavid Prof.(Dr.)Bhupendra Narayan Madhepuri.

यह भी ध्यान देंगे कि हमारे आस-पास कोई भूखा नहीं सोये… यही आज की तारीख में जोतीबा फुले के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी तथा कोरोना वायरस को परास्त करने का सच्चा मार्ग भी।

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