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धूप पर भी भारी पड़ा रोजेदारों का जज्बा

रमजान के महीने में रोजा रखना प्रत्येक मुसलमान का फर्ज करार दिया गया है , चाहे गर्मी, जाड़ा या बरसात का मौसम ही क्यों ना हो ! क्या गरीब, क्या अमीर बल्कि बच्चों से लेकर बूढ़े तक सभी ईद के चांद को देखने की आस में रमजान के पाक महीने को 10-10 दिनों के तीन आसरो में अपने-अपने ध्यान को बांट लेते हैं । पहले 10 दिनों तक रहमत व बरकत के लिए, दूसरे 10 दिनों तक मगफिरत के लिए और आखरी 10 दिनों तक जहन्नुम से छुटकारा पाने के लिए समर्पित रहते हैं ।
यह  भी  जानिये कि रोजा एक ऐसी   इबादत है कि अल्लाह  खुुुद उसके  बदले रोजेदारों को बहुत कुछ देता है । रमजान के महीने में  पाक  दिल से मांगी गई दुआएं भी अल्लाह द्वारा कबूल की जाती है ।
दूसरे जुमे की नमाज में इस शुक्रवार को मधेपुरा सहित जिले के  सिंहेश्वर, मुरलीगंज, कुमारखंड, बिहारीगंज …… आदि अन्य सभी मस्जिदों में काफी भीड़ उमड़ी । दोपहर के वक्त धूप इतनी कड़ी थी कि थोड़ी देर बाहर खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा था फिर भी बच्चे नमाजियों का जज्बा कम होते नहीं दिखा । कड़ी धूप में रोजेदार पसीने से तरबतर होने के बावजूद भी अपने रब की रजा के लिए इबादत करते रहे और अकीदत के साथ जुमे की नमाज भी अदा करते रहे ।
यह भी जानिये कि मस्जिदों में खुतबा पढ़ा रहे इमाम ने रमजान की फजीलत के बारे में भी बताया तथा रमजान के रोजे और इबादतों के शबाब का भी जिक्र किया । अपनी तकरीर में इमाम द्वारा यह भी बताया गया की रमजान मेंं रोजा , नमाज और कुरआन शरीफ की तिलावत से जो उदासीन रहता है वह खुदा की रहमतों से मरहूम रह जाता है । अंत में इमाम द्वारा हर किसी के लिए दुआ मांगी जाती है कि अल्लाहताला इस पाक रमजान के महीने में ज्यादा से ज्यादा  नेकियाँ कमाने की तौफीक अता फरमाएं ।

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पानी ज्यादा पीने से कम हो सकता है कैंसर का खतरा

यूँ तो प्रायः बुद्धिजीवियों द्वारा निरंतर पढ़ा , लिखा और बोला जाता है कि जल ही जीवन है , परंतु व्यवहार में जल का उपयोग लोग उतना नहीं करते जितना स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है | बाबा रामदेव भी सुबह सवेरे योग कक्षा में इतना तो हर रोज कहते ही हैं – सवेरे उठकर दो से तीन ग्लास पानी अवश्य पी लें…… गुनगुने पानी में नींबू का रस डालकर या फिर एक चम्मच मधु घोलकर |
वैज्ञानिकों ने रिसर्च करके इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि ज्यादा से ज्यादा पानी पीने से कैंसर का खतरा कम हो सकता है | गहन अध्ययन और शोध कार्यों से पता चला है कि अधिक पानी पीकर 40% कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है |
यूँ तो भारत में कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या ज्यादा है, परंतु मौत के मामले में पुरुष महिलाओं से आगे हैं  | क्योंकि महिलाओं में शुरुआती चरणों में ही कैंसर जैसी बीमारी का पता चल जाता है | विगत वर्षों में प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक भारत में जहां लगभग 6 लाख महिलाओं को कैंसर डिटेक्ट हुआ था वहीं कैंसर पीड़ित पुरुषों की संख्या लगभग 5 लाख थी |
यह भी जानिए कि भारत में कैंसर पीड़ित महिलाओं में मृत्यु दर 60% है वहीं पुरुषों में होने वाली मौत की दर 75% है | पुरुषों में जहां फेफड़े और मुंह का कैंसर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट और गर्भाशय का कैंसर |
आर्थिक रुप से कमजोर लोग भी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी प्रतिदिन अवश्य पीयें, जो कैंसर से बचने का सटीक और आसान उपाय है । साथ ही मीठी चीजों और नशीली चीजों का सेवन ना करना भी फायदेमंद है । जंक फूड और मांस खाने से परहेज करने के साथ-साथ घर का काम-काज करें…. बागवानी  भी करें तो और अच्छा हैै……!!

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सूबे के 534 प्रखंडों में होगी मौसम की क्लोज मॉनिटरिंग !

फिलहाल बिहार के पाँच जिलों में प्रयोग के तौर पर ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि प्रत्येक 20 मिनट पर मौसम का डाटा चला जायेगा ISRO के पास | जिससे किसानों को मौसम की सही जानकारियाँ दी जाती रहेंगी और यदाकदा फसल की क्षति का मुआवजा देने में सरकार को भी आसानी होगी |

बता दें कि इन पाँचो जिले में खोले गये मौसम केंद्रों के सफल होने पर राज्य के 38 जिले के कुल 534 प्रखंडों एवं 8391 पंचायतों में भी इसका विस्तार किया जाएगा, क्योंकि राज्य के अधिकतर भागों में खेतीबारी पूर्णत: मौसम पर ही आधारित है | लिहाजा मौसम की सही जानकारियाँ नहीं रहने के कारण किसानों को सर्वाधिक परेशानी झेलनी पड़ती है |

यह भी जान लें कि गत वर्ष कोसी प्रमंडल के सुपौल जिला सहित नालंदा एवं पूर्वी चम्पारण के सभी प्रखंडों में ‘ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन’ एवं इन जिलों के सभी पंचायतों में ‘टेलीमैट्रिक रेनगेज’ की स्थापना हेतु स्वीकृति दी गई थी | चालू वर्ष में अरवल एवं गया जिले को भी इस व्यवस्था में जोड़ा गया है | सफलता मिलते ही शीघ्र ही सभी जिलों में इसका विस्तार कर लिया जाएगा |

यह भी बता दें कि कभी-कभी एक ही प्रखंड के कुछ पंचायतों में वर्षा की कमी हो जाती है और कुछ में अधिकता…….| फलस्वरूप क्लोज मॉनिटरिंग नहीं हो पाने के कारण वर्षा की कमी वाले पंचायतों के किसानों को भी मुआवजा नहीं मिल पाता है, क्योंकि सरकार के पास इसका सही-सही रिकॉर्ड नहीं होता | इस कठिनाई को दूर करने हेतु सरकार द्वारा सभी पंचायतों में ‘टेलीमैट्रिक रेनगेज’ लगाने का फैसला लिया गया है |

चलते-चलते यह भी जान लें कि उपलब्ध सारी जानकारियाँ सिस्टम द्वारा स्वतः ISRO को प्रत्येक 20 मिनट पर प्रेषित होता रहेगा और ISRO के डाटा विश्लेषण के आधार पर सरकार को अद्यतन जानकारियाँ मिलती रहेंगी और किसानों को नमी, तापमान एवं हवा की गति व दिशा की सही-सही जानकारीयाँ भी प्राप्त होती रहेंगी |

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बेटी बने स्वाभिमान बाप का, उस बेटी की जय हो !

भारतीय रेल की सवारी गाड़ी में ‘महिला डिब्बा’ को प्रायः पुरुष यात्रियों द्वारा ही कब्जा कर लिया जाता है | जब महिला यात्रीगण आती हैं तब भी पुरुष यात्रियों द्वारा जगह खाली नहीं किये जाते हैं | नतीजतन दर्जनों महिला यात्री ट्रेन पर सवार होने से वंचित रह जाती हैं | तुर्रा तो यह है कि पूर्व में महिलाओं के लिए सुरक्षित डिब्बे पर केवल ‘महिला’ अथवा ‘महिला डिब्बा’ ही अंकित कर देने से काम चल जाता था परंतु आज-कल तो “महिला डिब्बा, पुरुष प्रवेश निषेध” तक लिख डालने पर भी बात बनती नहीं है |

बता दें कि सूबे की राजधानी पटना में ही पटना-गया रेलखंड पर चलनेवाली सवारी रेलगाड़ी में कामकाजी महिलाओं के साथ-साथ गृहणियों का भी पटना आना-जाना लगा रहता है | मंगलवार को नदवां स्टेशन पर महिला के लिए आरक्षित डिब्बे पर “महिला डब्बा, पुरुष प्रवेश निषेध” अंकित रहने के बावजूद भी पुरुषों द्वारा पूरे डब्बे को दखल कर लिए जाने पर महिला यात्रियों ने पहले तो अनुरोध किया और नहीं मानने पर किया जमकर हंगामा | हंगामे के बावजूद भी पुरुष यात्रीयों ने बॉगी खाली करने का नाम नहीं लिया तो बातें आरपीएफ इंस्पेक्टर राकेश रंजन तक चली गई |

जानिए कि नदवां स्टेशन पर महिला बॉगी में चढ़ने के लिए जद्दोजहद करती महिला यात्रियों की दशा देखकर इंस्पेक्टर ने यही कहा कि जागरूकता के अभाव में पुरुष यात्रीगण महिला बॉगी में सवार हो जाते हैं | कई बार अनेक स्टेशनों पर पुलिस द्वारा कार्यवाई कर महिला बॉगी से पुरुष यात्रियों को बाहर निकाला व उतारा जाता रहा है | यहाँ तो प्रवचनकर्ता रविशंकर की वाणी-

“बेटा बने सरताज बाप का, उस बेटे की जय हो” जहाँ प्रभावहीन हो रही है वहीं “बेटी बने स्वाभिमान बाप का, उस बेटी की जय हो” कारगर सिद्ध हो रही है | अब बेटियां हवाई जहाज उड़ाने के साथ-साथ हक की खातिर हंगामा करने से भी बाज नहीं आ रही है |

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ये हैं भारत के पहले आधुनिक पुरुष

ब्रिटेन के ब्रिस्टल शहर में आर्नोस वेल का बहुत पुराना कब्रिस्तान है । यहां सौ-दो साल से अपरिचित कब्रगाहों के बीच उस शख़्स की कब्र है जिन्हें भारत का प्रथम आधुनिक पुरुष कहा जाता है । वो कोई और नहीं ब्रह्म समाज संस्थापक राजा राम मोहन राय हैं ।

एक ब्राह्मण का कब्र वो भी इंग्लैंड में ! बात गुजरे ज़माने की है जब मुगलिया सल्तनत हिन्दुस्तान में अपने आखिरी दिन गिन रहा था । तब के मुग़ल बादशाह थे अक़बर द्वितीय जिन्होंने राजा राम मोहन राय को अपनी आर्थिक मदद की फ़रियाद लगाने के लिए इंग्लैंड भेजा था । वे वहां के राजा से मिले इसलिए उन्हें राजा का ख़िताब दिया गया । इसी बीच उनकी तबियत बिगड़ गयी और 27 सितंबर 1833 में 61 साल की उम्र में राजा राममोहन राय का देहांत हो गया , उस वक़्त इंग्लैंड में दाह-संस्कार की अनुमति नहीं थी । इसलिए उन्हें दफ़्न किया गया ।

यूँ तो आधुनिकता के इस दौर में हर कोई आधूनिकिकरण के चपेट में आ गया है । पर सच्चे अर्थों में भारत की आधुनिकता को परिभाषित किया राजा राम मोहन राय ने । राजा राम मोहन राय का जन्म आज के ही दिन 22 मई, 1772 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के राधानगर में हुआ था। उन्होंने भारत की सदियों से चली आ रही रुढ़िवादी सोच पर प्रहार किया और अंग्रेजों के साथ मिलकर भारत में अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार व प्रसार किया ।

करीब 200 साल पहले जब समाज में सती प्रथा जोरों पर थी, तब राजा राम मोहन राय ने इसे जड़ से खत्म करने में सबसे अहम भूमिका अदा किया। उन्होंने सती प्रथा का कड़ा विरोध किया। उन्होंने महिलाओं के लिए समान अधिकारों के लिए मुहिम चलाई और विधवा विवाह व संपत्ति के हक के लिए भी लोगों को जागरूक किया। 1828 में उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की। इसे भारत का पहला सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन कहा जाता है। राजा राममोहन राय मूर्तिपूजा और रूढ़िवादी हिन्दू परंपराओं के विरुद्ध थे । वे अंधविश्वास के खिलाफ थे । आज इस विशेष दिन पर मधेपुरा अबतक इस आधुनिक पुरुष को नमन करता है |

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विरह-वेदना युक्त ‘आहत मन के दोहे’ का लोकार्पण !

कोसी कमिश्नरी मुख्यालय की धरती पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ.जी.पी.शर्मा की अध्यक्षता में इन्हीं के द्वारा रचित विरह-वेदना से भरे “आहत मन के दोहे” के विमोचनकर्ता वरिष्ठ साहित्यकार व इतिहासकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने विरह को प्रेम की जाग्रत गति बताया और कहा कि डॉ.शर्मा के अन्तसतल की गहराई में ‘एकाबरी’ के लिए जो विरह पल रहा है वह जीवन का शाश्वत एवं सजीव प्रेम बनकर संसार को सुरभिमय बनाता रहेगा | उन्होंने विश्व वान्ग्मय में ‘विरह-काव्य’ को सबसे प्राचीन विधा बताया |

बता दें कि इस अवसर पर मुख्य अतिथि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विश्व की प्राचीनतम ग्रंथ ‘ऋग्वेद’ में वर्णित पुरुरवा एवं उर्वशी की विरह-वेदना के वर्णन को अद्भुत, अद्वितीय एवं अतुलनीय बताते हुए कहा कि विरह-वर्णन को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करना कठिन होता है बल्कि उसे केवल महसूसा जा सकता है |

यह भी जानिए कि लोकार्पण समारोह में उपस्थित नामचीन साहित्यकारों उमेशचन्द्र आचार्य, सियाराम यादव मयंक, श्यामानंद लाल दास ‘सहर्ष’, मुर्तजा नरियारवी आदि ने भी अपनी कविताओं और गजलों की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम को विस्तार देते हुए चर्चित बना दिया | अंत में अध्यक्ष डॉ.शर्मा ने अवरुद्ध कंठ से चंद शब्दों में आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा कर दी |

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आरजेडी ने कहा, कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में भी बने सरकार

कर्नाटक की आंच बिहार तक भी आ पहुंची है। बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी के नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को अपने सहयोगी दलों के नेताओं के साथ राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलकर कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में भी सबसे बड़ा दल होने के नाते सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस दौरान राज्यपाल को 111 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा गया। तेजस्वी के साथ प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी एवं प्रेमचंद मिश्रा, हम के दानिश रिजवान एवं आरजेडी के तेजप्रताप यादव, आलोक मेहता एवं शिवचंद्र राम समेत कई विधायक मौजूद थे।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेजस्वी ने दावा किया कि अगर उन्हें सरकार बनाने का मौका मिलता है तो वह आसानी से फ्लोर टेस्ट पास कर लेंगे। तेजस्वी का दावा है कि उऩके साथ कुल 111 विधायक हैं और कुछ जेडीयू से नाखुश विधायक भी उनके संपर्क में हैं। इसके पहले कर्नाटक मुद्दे पर आरजेडी ने धरना-प्रदर्शन कर विरोध भी जताया। शुक्रवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए तेजस्वी ने ट्वीट भी किया और कहा, ‘देश संविधान के आधार पर दिल्ली से चलना चाहिए, न कि संघ के नागपुर मुख्यालय से। चलो लोकतंत्र बचाने के लिए सड़कों पर उतरें।’

वहीं दूसरी ओर जेडीयू ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए उन्हें ‘बबुआगिरी’ छोड़ राज्यपाल की शक्तियों को जानने की सलाह दी है। जेडीयू के प्रवक्ता और विधानपार्षद नीरज कुमार ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए उनके नाम एक खुला पत्र जारी कर उन्हें लोकतंत्र और सरकार बनाने के नियमों का ज्ञान नहीं होने की बात कही। पत्र में कहा गया है कि सरकार बनाने का दावा पेश करने के पूर्व विधानसभा में वर्तमान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर संख्याबल के द्वारा वर्तमान सरकार गिरानी पड़ती है और इसके बाद नई सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त होता है।

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‘साक्ष्य’ में मधेपुरा के पाँच कलमकारों के आलेख प्रकाशित

बिहार विधान परिषद द्वारा प्रकाशित ‘साक्ष्य’ पत्रिका में इसी वर्ष मार्च 2018 में लोहिया स्मरण से संबंधित लगभग साढे तीन दर्जन आलेख को जगह दी गई है । इस ताजा “लोहिया स्मरण अंक” में प्रधान संरक्षक मो.हारुण रशीद से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राम मनोहर लोहिया के आलेख से लेकर भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी तक की लेखनी को समाहित किया गया है ।

बता दें कि आज की तारीख में मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले विज्ञानवेत्ता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी जब भी डॉ.लोहिया पर कुछ लिखने हेतु कलम उठाते हैं तो उन्हें अपनी लघुता का अहसास होने लगता है जबकि वह लोहिया के सानिध्य में तब से रहे हैं जब लोहिया अपनी पत्रिका ‘जन’ का प्रधान संपादक हुआ करते और मधेपुरी रासबिहारी उच्च विद्यालय का छात्र । यह बात 1960 की है जब (डॉ.) मधेपुरी ‘जन’ में भी कुछ-कुछ लिखा करते थे जिसके चलते वे मनीषी भूपेंद्र नारायण मंडल के निकटतम होते चले गये ।

यह भी जानिये कि 1964 ई. में उसी रासबिहारी विद्यालय के ऐतिहासिक मैदान में डॉ.लोहिया क्या कहते हैं- ” हे मधेपुरा वासियों ! मैं बार-बार मधेपुरा क्यों आता हूँ  ?क्योंकि, इस समाजवादी धरती ने भूपेंद्र नारायण मंडल जैसे निडर और बहादुर सपूत को पैदा किया है जो बेझिझक एवं निडर होकर भारतीय संसद में महत्वपूर्ण सवाल उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे………!”

यह भी बता दें कि साक्ष्य में मधेपुरा के जिन पाँच कलमकारों की रचना को शामिल किया गया है उन में सर्वश्रेष्ठ व वरिष्ठ साहित्यकार एवं इतिहासकार श्री हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ हैं जिन्हें छात्र जीवन में डॉ.लोहिया और अच्युत पटवर्धन के साथ बैलगाड़ी से मधेपुरा से नेपाल बकरो के टापू तक जाने का अवसर मिला था….I

यह भी बता दें कि जहाँ शिक्षा और सामाजिक न्याय की लोहिया-दृष्टि के मर्मज्ञ एवं ख्याति प्राप्त विज्ञान वेत्ता डॉ.अवध किशोर राय (कुलपति बी.एन.एम.यू.) के शीलसंपन्न आलेख को साक्ष्य में सम्मानपूर्वक जगह दी गई वहीं डॉ.लोहिया को ताजिंदगी मार्गदर्शक के रुप में जीने वाले विधायक रह चुके राधाकांत यादव के लगभग डेढ़ दर्जन पृष्ठों वाले भीमकाय आलेख को भी साक्ष्य में शामिल किया गया है I  इसके अलावे डॉ.मधेपुरी सहित समकालीन कवि डॉ.अरविंद श्रीवास्तव को भी साक्ष्य में प्रमुखता से स्थान दिया गया है I

चलते-चलते यह भी जानिए कि कोशी क्षेत्र में डॉ.लोहिया के प्रति समर्पित क्रांतिवीरों की कमी नहीं रही, जिनमें प्रमुख रहे हैं- शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, कार्तिक प्रसाद सिंह, चुल्हाय यादव, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल, राम बहादुर सिंह, चित्र नारायण शर्मा, महताप लाल यादव, कुदरत उल्लाह, बैधनाथधर मजुमदार, गुणानंद झा, छेदी झा  द्विजवर, बुलाकी सुनार, ईश्वरी सिंह, भगवान चन्द्र विनोद आदि I

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प्रोविजनल बेल पर 42 दिनों के लिए बाहर आए लालू

चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव बुधवार को छह हफ्ते की औपबंधिक जमानत (प्रोविजनल बेल) पर रांची की होटवार जेल से बाहर आ गए। देर शाम उन्हें सेवा विमान से पटना लाया गया। पटना हवाई अड्डे से उन्हें व्हील चेयर पर बाहर निकाला गया। अब इलाज के लिए उन्हें मुंबई हार्ट हास्पिटल ले जाने की तैयारी की जाएगी। इससे पहले रांची जेल में उनकी जमानत की सारी जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई। जमानत की अवधि गुरुवार से गिनी जाएगी।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद को मेडिकल ग्राउंड पर छह हफ्तों की सशर्त जमानत दी है। इसके तहत लालू को जमानत अवधि के दौरान कोई राजनीतिक रैली नहीं करनी है। मीडिया से बात नहीं करनी है। साथ ही इलाज कहां-कहां कराएंगे, इसकी जानकारी अदालत को देने को कहा गया है। जमानत के दौरान उन्हें विदेश जाने की अनुमति नहीं रहेगी।

राजद के राष्ट्रीय महासचिव एवं लालू के बेहद करीबी विधायक भोला यादव के मुताबिक राजद प्रमुख को 16 तरह की बीमारियां हैं। उनका किडनी 40 प्रतिशत ही काम कर रहा है। हार्ट, शुगर, बैक पेन, चक्कर आना जैसी अन्य बीमारियां भी हैं। यह दिल्‍ली एम्स की रिपोर्ट है। सभी बीमारियों का इलाज बारी-बारी से होगा। पटना में लालू का तबतक इलाज होगा, जबतक कि बाहर के डॉक्टर का अप्वाइंटमेंट नहीं मिल जाता। एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट मुंबई के विशेषज्ञ डॉ. पांडा से समय लेकर उनसे जांच कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि तीन मेडिकल इंस्टीट्यूट में इलाज की जरूरत महसूस की गई है। अन्य जगह ले जाने की जरूरत पड़ी तो अदालत से अनुरोध किया जाएगा।

चलते-चलते बता दें कि रांची में लालू के इंतजार में बड़ी संख्या में समर्थक व मीडियाकर्मी खड़े थे, लेकिन इनसे बचते हुए लालू को निकाला गया। कड़ी सुरक्षा के घेरे में उन्हें एयरपोर्ट ले जाया गया। जेल गेट के बाद बड़ी संख्या में समर्थक जश्न की तैयारी में थे लेकिन किसी को इसका मौका ही नहीं मिला। पटना में भी इस तरह के किसी भी प्रदर्शन से बचने की कोशिश की गई।

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कर्नाटक का जनमत अब राज्यपाल के हाथों

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि वह बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं छू सकी। बता दें कि यहां विधानसभा की कुल 224 सीटें हैं जिनमें से 222 सीटों पर चुनाव हुए थे, जिनमें भाजपा को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस प्लस को 38 सीटें मिली हैं। इस तरह सरकार बनाने के लिए 112 सीटों का आंकड़ा चाहिए था जहां तक भाजपा नहीं पहुंच पाई, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण उसका दावा है कि सरकार बनाने का पहला मौका उसे मिलना चाहिए। दूसरी ओर राज्य की सत्ता की दौड़ में पिछड़ी कांग्रेस ने वक्त की नजाकत को देखते हुए राजनीतिक परिपक्वता दिखाई और बिना देर किए पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस को समर्थन का ऐलान कर देवगौड़ा के पुत्र एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव दिया, जिसे जेडीएस ने बिना देर किए स्वीकार कर लिया और तत्काल चुनाव बाद बने गठबंधन के तौर पर सरकार बनाने का अधिकार जताया। अब गेंद राज्यपाल वजुभाई वाला के हाथों में है कि वो बहुमत में घट रहे 8 विधायकों का ‘जुगाड़’ कहां से होगा, ये बताने में फिलहाल असमर्थ भाजपा की महत्वाकांक्षा का पथ प्रशस्त करते हैं या प्रथम दृष्टया सही लग रही और 78+38=116 के आंकड़े, जो जरूरत से चार ज्यादा है, के साथ खड़ी कांग्रेस-कुमारस्वामी की सरकार को हरी झंडी दिखाते हैं।

बहरहाल, इस बीच ख़बर आई है कि कांग्रेस के कुछ लिंगायत विधायकों ने कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध कर दिया है। खबर यह भी आ रही है कि कांग्रेस अपने विधायकों को पार्टी छोड़ने के डर से आंध्र प्रदेश या पंजाब भेजने की योजना बना रही है। दूसरी ओर, भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येद्दयुरप्पा राज्यपाल से मिलकर महज 48 घंटे में बहुमत साबित करने का दावा कर रहे हैं। उधर भाजपा और कांग्रेस दोनों के केंद्रीय नेतृत्व ने स्थिति संभालने के लिए दिल्ली से अपने-अपने वरिष्ठ नेताओं को बेंगलुरु भेजा है। अब सबकी नजरें राज्यपाल के रुख पर हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि राज्यपाल पूरी तरह ठोक-बजाकर ही कोई निर्णय लेंगे।

कर्नाटक के चुनाव-परिणाम पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भाजपा के विकास के एजेंडे को लगातार समर्थन देने और भाजपा को राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनाने के लिए मैं कर्नाटक के बहनों और भाइयों को धन्यवाद देता हूं। उधर विजय-रथ पर सवार भाजपा के सारथि अमित शाह ने पार्टी की जीत पर अपने उद्गार में कहा कि बाकी देश की तरह कर्नाटक की महान भूमि ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ, पारदर्शी और विकासोन्मुख शासन पर दृढ़ विश्वास व्यक्त किया है। इस जनादेश से साफ है कि कर्नाटक ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार, वंशवादी राजनीति और विभाजनकारी जातिवाद को खारिज कर दिया है। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मौके पर बड़ी सधी हुई प्रतिक्रिया दी और कहा कि इन चुनावों में जिन्होंने भी कांग्रेस को वोट दिया, उन सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद। हम आपके समर्थन की सराहना करते हैं और हम आपके लिए लड़ेंगे।

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