जीवन जो कुछ नहीं दे सका, मौत उसे वह दे जाती है- डॉ.मधेपुरी

वर्ष 2009 से अब तक यानि 11 वर्षों तक सुशांत सिंह राजपूत फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड (मुंबई) में कठिन परिश्रम करने के बावजूद एक भी फिल्म फेयर अवार्ड नहीं पा सका, जबकि सुशांत के लाखों चाहने वाले आज भी हैं।

बता दें कि अवार्ड और पुरस्कार के नाम पर एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को वर्ष 2014 में बेस्ट मेल डेब्यू के लिए सर्वप्रथम प्रोड्यूसर गिल्ड फिल्म अवार्ड और बाद में स्क्रीन अवार्ड से नवाजा गया था।

यह भी जानिए कि 3 वर्ष बीतने के बाद 2017 में फिल्म एम एस धोनी यानि भारतीय क्रिकेट कप्तान धोनी का बेहतरीन किरदार निभाने के लिए सुशांत सिंह राजपूत को बेस्ट ऐक्टर का स्क्रीन अवार्ड तथा उसी वर्ष इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबोर्न में बेस्ट एक्टर अवार्ड से नवाजा गया था।

बता दें कि दुनिया को हम कब अलविदा कहेंगे, यह कोई नहीं जानता। वह प्रतिभा संपन्न सुशांत 14 जून 2020 को दुनिया से चला जाएगा, इसे कोई नहीं जानता था। परंतु बॉलीवुड सितारों की तरह सुशांत सिंह राजपूत ने भी एक सपना देखा था-” दादा साहब फाल्के पुरस्कार” पाने का, जो उसके मरणोपरांत पूरा होने जा रहा है। सचमुच, सच्चे दिल से देखा जाए गया सपना पूरा होने में कायनात की पूरी मदद मिल जाती है। जानिए कि दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड्स 2021 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को मरणोपरांत दिया जाएगा। अवार्ड कमेटी ने अपनी ऑफिशल इंस्टाग्राम पेज पर घोषित कर इसकी जानकारी दुनिया को दी है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि 14 जून को मुंबई स्थित बांद्रा वाले अपार्टमेंट में बिहार का बेटा, पूर्णिया जिला निवासी एक्टर सुशांत को का शव मिला था। पिता ने पटना में एक एफआईआर दर्ज कराया। पुलिस ने केस की जांच शुरू की और लगे हाथ दूसरे ही दिन पूर्णिया के पूर्व लोकप्रिय सांसद पप्पू यादव और मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने नीतीश सरकार से इस केस की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। फिलहाल सीबीआई द्वारा की जा रही जांच प्रगति पर है।

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