बिहार में कोरोना से स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख सहित 10 लोगों की मौत

बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख डॉ.उमेश्वर प्रसाद वर्मा 67 वर्ष की उम्र में ही कोरोना की चपेट में आ गए और मौत को गले लगा लिए। डॉक्टर वर्मा सहित 10 कोरोना पीड़ितों का इलाज पटना के एम्स में चल रहा था। बिहार में कोरोना ने कई डॉक्टरों को इलाज करने के दरमियान अपनी चपेट में लेकर उन्हें मौत की नींद सुला चुका है।

बता दें कि 24 घंटे के अंदर पटना एम्स में इलाज हो रहे जिन 10 कोरोना संक्रमितों की मौत हुई उन 10 में से 4 पटना के ही निवासी थे। शेष 6 में दो भोजपुर, एक सारण, एक लखीसराय, एक सोनपुर और एक शेखपुरा जिले के कोरोना संक्रमित शामिल थे। निदेशक प्रमुख डॉक्टर वर्मा तो पटना फुलवारी स्थित मित्र मंडल कॉलोनी के ‘साकेत विहार’ में रह रहे थे।

यह भी जान लें कि कोरोना संक्रमण के कारण मौत को गले लगाने वालों में आरपीएस कॉलोनी के ललन प्रसाद, बाढ़ के पवन कुमार तथा मुगलपुरा-संपतचक के एहसान आलम सम्मिलित हैं। मंगलवार का पटना अपडेट- एक्टिव कोरोना मरीजों की संख्या 2145 है।। मंगलवार को कुल 170 संक्रमित मिले। केवल 12 कोरोना पॉजीटिव मरीज एम्स में भर्ती हुए और 10 डिस्चार्ज हुए। 10 की मौत हो गई।

 

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कोविड-19 को लेकर भारत दुनिया का दूसरा देश बन गया है

भारत में जब कोरोना संक्रमितों की संख्या प्रतिदिन 10 हजार के आस-पास थी और मरने वालों की संख्या 100 के आस-पास, तब भारत में सब कुछ बंद था… पूरा लाॅकडाउन था। परंतु, आज जब संक्रमितों की संख्या 1 लाख के लगभग है और मरने वालों की संख्या 1000 के आस-पास, तब सब कुछ खोल दिया गया है। विश्व में पहला स्थान पर अमेरिका है और अपना भारत कोरोना संक्रमण के बाबत 60 लाख मामले रिपोर्ट करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन गया है।

बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक (रविवार की सुबह से सोमवार की सुबह तक) 24 घंटों में 82 हजार के पार कोरोना के नए मामले आए। इसके साथ ही भारत में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 61 लाख 45 हजार 291 हो गई है, जबकि इस दौरान 1 दिन में 1039 लोगों की मौत कोरोना वायरस के कारण हुई है। अब तक कुल 95 हजार 542 यानि लगभग एक लाख कोरोना संक्रमितों ने मौत को गले लगाया है।

चलते-चलते यह भी जान लें कि भारत में 50 लाख से ज्यादा लोग कोरोना वायरस को मात देने में भी कामयाब हुए हैं। वर्तमान में यहाँ कोरोना के एक्टिव केसों की संख्या 9 लाख 62 हजार 640 है।

मौके पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि जिन कोरोना-वरियर्स के सम्मान में देश ने पुष्प-वर्षा की, उन्हीं वारियर्स यानि डॉक्टर्स से लेकर हजारों-हजार किलोमीटर पैदल चलने वाले शहीद मजदूरों की सूची तक सरकार के पास उपलब्ध नहीं होने की चर्चा, आए दिन चारों ओर होने लगी है….. यह शर्मनाक बात है !!

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मधेपुरा में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 114वीं जयंती मनी

भारत में मार्च और अगस्त महीना को क्रांति के महीने के रूप में शुमार किया जाता है। खासकर 23 मार्च को विशेष रूप से याद किया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1931 को शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को एक साथ फांसी दी गई थी। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सबसे अधिक चर्चित घटना के रूप में इसे याद किया जाता है।

बता दें कि ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले के बंगा गांव में 28 सितंबर 1907 को भगत सिंह का जन्म हुआ था। भगत सिंह के पिता सरदार किशन सिंह एवं चाचा अजीत सिंह व स्वर्ण सिंह सभी अंग्रेज के कट्टर विरोधी थे, जिसके चलते उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा था।

बकौल साहित्यकार डॉ म.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी यह जानिए कि जलियांवाला कांड में जनरल डायर की क्रूरता की जानकारी पाते ही किशोरवय के भगत सिंह लाहौर से अमृतसर पहुंच गए और निर्दोष भारतीयों के रक्त से भींगी मिट्टी को एक बोतल में ले देशवासियों के अपमान का बदला लेने को मचलने लगे। जनरल डायर की क्रूरता का बदला लेने के लिए भगत सिंह ने “हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी” नामक क्रांतिकारी दल का गठन किया, जिससे चंद्रशेखर आजाद सरीखे अन्य बहुत से क्रांतिकारी जुड़ते चले गए।

अंत में यह भी कहा डॉ.मधेपुरी ने कहा कि 17 नवंबर, 1928 को साइमन कमीशन के विरोध करने के दरमियान हुई लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव आदि ने लाहौर से सांडर्स की हत्या कर दी। जेल में रहते ही इन लोगों पर मुकदमा चला। 23 मार्च 1931 को इन तीनों को अपराधी कह कर फांसी पर लटका दिया गया। रात के अंधेरे में ही सतलज नदी के किनारे इनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया, परंतु ऐसे-ऐसे क्रांतिकारियों के बलिदान को सम्मान देने में देश समुचित उत्साह नहीं दिखा पा रहा है।

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राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश ने मंत्री अशोक चौधरी को बनाया जेडीयू का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष

बिहार प्रदेश के 2020 आम चुनाव के पहले जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के जेडीयू अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह की बढ़ती उम्र और उनकी अस्वस्थता को देखते हुए पार्टी द्वारा वन एवं भवन निर्माण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाने का यह फैसला लिया गया है।

बता दें कि मंत्री अशोक चौधरी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति को लेकर मुख्यमंत्री सह जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ लगातार काम करते रहे हैं। जानिए कि मुख्यमंत्री आवास से लेकर जदयू के प्रदेश कार्यालय तक अशोक चौधरी सर्वाधिक सक्रिय भूमिका में नजर आते रहे हैं। तभी तो पार्टी ने उन्हें जदयू का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।

चलते-चलते यह भी याद कर लीजिए कि कांग्रेस से आने के बाद अशोक चौधरी को नीतीश सरकार में मंत्री बनाया गया। पुनः उन्हें यह नई जिम्मेदारी दी गई। जेडीयू में मंत्री अशोक चौधरी का कद लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अशोक चौधरी जाने-माने दलित नेता हैं और दलित तबके के ऐसे नेता को पार्टी में ऐसी बड़ी जिम्मेदारी देने से आगामी चुनाव पर भी बेहतर असर पड़ने की उम्मीद की जाती है।

 

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7 नवंबर को मधेपुरा जिले के चारो विधानसभा क्षेत्रों में होंगे मतदान- डीएम

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार विधान सभा निर्वाचन की घोषणा 25 सितंबर को किए जाने के साथ ही जिले के आलम नगर, बिहारीगंज, मधेपुरा और सिंहेश्वर चारो विधानसभा क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों के लगे पोस्टर व होर्डिंग आदि को हटाना आरंभ कर दिया गया। ये कार्य सभी प्रखंडों के बीडीओ को सौंपा गया है, जिसे प्रखंड विकास पदाधिकारियों ने 26 सितंबर से ही हटाना शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला (आईएएस) ने जिले भर में आचार संहिता लागू होने की घोषणा कर दी है।

बता दें कि जिले के नवनियुक्त आरक्षी अधीक्षक योगेंद्र प्रसाद (आईपीएस), डीडीसी विनोद कुमार सिंह एवं एडीएम उपेंद्र कुमार की उपस्थिति में प्रेस कान्फ्रेंस में चुनावी कार्यक्रमों की जानकारियाँ देते हुए जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम नवदीप शुक्ला ने बताया कि तीसरे चरण में मधेपुरा जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों- मधेपुरा, आलमनगर, बिहारीगंज और सिंहेश्वर का चुनाव 7 नवंबर को होगा। प्रत्येक क्षेत्र में 3 लाख से अधिक मतदाता हैं जिनमें आलमनगर शीर्ष पर है।

डीएम शुक्ला ने कहा कि 13 अक्टूबर को अधिसूचना के साथ नामांकन पत्र भरना आरंभ होगा जिसकी अंतिम तारीख 20 अक्टूबर निर्धारित है। 21 अक्टूबर को स्क्रूटनी और 23 अक्टूबर को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तय की गई है। जिले के चारों विधानसभा में 7 नवंबर को मतदान होगा और 10 नवंबर को मतगणना के साथ नतीजे घोषित किए जाएंगे।

एसपी योगेंद्र ने चुनाव हेतु अतिरिक्त पुलिस बल की मांग के साथ-साथ शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए विशेष प्लानिंग सहित पुलिस पदाधिकारियों को टास्क भी दिया है, जिसकी मॉनिटरिंग भी की जा रही है।

मौके पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने छुटे हुए लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने को लेकर जिला प्रशासन द्वारा विशेष कैंप आयोजित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि 2015 के चुनाव में प्रत्येक विधानसभा में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं द्वारा 10% से अधिक मतदान किया गया, फिर भी राजनीतिक पार्टियों द्वारा महिलाओं को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व करने का अवसर तक नहीं दिया जाना सर्वथा अनुचित है।

 

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बिहार विधानसभा चुनाव के बाबत इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति

नई दिल्ली के अशोक रोड स्थित भारत निर्वाचन आयोग कार्यालय द्वारा 25 सितंबर को बिहार विधानसभा आम चुनाव- 2020 हेतु प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई। बिहार विधानसभा का कार्यकाल दिनांक 29 नवंबर 2020 को समाप्त हो जाएगा। यह कार्यकाल 30 नवंबर 2015 से 29 नवंबर 2020 तक के लिए है।

बता दें कि बिहार में विधानसभा की कुल सीटें हैं- 243, जिनमें 38 सीटें शेड्यूल कास्ट के लिए और 2 सीटें शेड्यूल ट्राइब्स के लिए सुरक्षित हैं। इन सभी सीटों पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग को भारतीय संविधान की धारा 324 के तहत अधिकार प्रदान किया गया है।

जानिए कि 2020 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव 3 चरणों में संपन्न किया जाएगा-

प्रथम चरण का मतदान दिनांक 28 अक्टूबर को होगा। इस प्रथम फेज में कुल 71 विधानसभा क्षेत्र में चुनाव होंगे। जिसके 16 जिले होंगे- भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, नवादा, गया, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, भोजपुर, रोहतास, बक्सर, कैमूर और पटना।

द्वितीय चरण का मतदान 3 नवंबर को होगा। इस द्वितीय फेज में कुल 94 विधानसभा क्षेत्र में चुनाव होगा। जिसके 17 जिले होंगे- भागलपुर, खगड़िया, बेगूसराय, समस्तीपुर, वैशाली, नालंदा, पटना, सारण, मुजफ्फरपुर, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी और सीतामढ़ी।

तृतीय चरण का मतदान 7 नवंबर को होगा। यह तृतीय यानि अंतिम फेज का चुनाव कुल 78 विधानसभा क्षेत्रों में  संपन्न होगा। जिसके 15 जिले होंगे- कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, मधुबनी, वैशाली, सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और दरभंगा।

ज्ञातव्य हो कि भागलपुर और पटना में पहले और दूसरे दोनों चरणों में चुनाव होंगे। दरभंगा, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और वैशाली में दूसरे एवं तीसरे चरण में भी वोट पड़ेंगे।

यह भी जान लें कि कुल 243 विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव नतीजे 10 नवंबर को घोषित कर दिए जाएंगे। चुनाव के दरमियान जनप्रतिनिधि, मतदातागण एवं चुनाव संपन्न कराने वाले कर्मियों को सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना, थर्मल स्क्रीनिंग एवं सैनिटाइजर का प्रयोग करना अनिवार्य होगा।

इस कोरोना काल के चुनाव में 1500 की जगह प्रत्येक मतदान केंद्र पर 1000 मतदाताओं द्वारा वोट डालने की व्यवस्था रहेगी। प्रत्येक मतदाता 6 फीट की दूरी पर खड़ा रहकर अपनी पारी का इंतजार करेंगे। अतिरिक्त इंतजार करने हेतु दरी, कुर्सी की व्यवस्था रहेगी। जहां सोशल डिस्टेंसिंग के नियमानुसार मतदाता इंतजार हेतु बैठेंगे। प्रत्येक मतदाता का थर्मल स्क्रीनिंग किया जाएगा। पानी-साबुन की व्यवस्था मतदान केंद्रों के प्रवेश एवं निकासी द्वार पर रहेगी जिससे मतदाता हाथ धोएंगे। सैनिटाइजर भी प्रवेश व निकासी द्वार पर उपलब्ध कराई जाएगी। हैंड-ग्लव्स की व्यवस्था रहेगी जिसे पहनकर मतदाता हस्ताक्षर करेंगे एवं ईवीएम का बटन दबाएंगे।

मतदान के अंतिम क्षणों में कोविड-19 के मरीज-वोटरों एवं कंटेंटमेंट जोन के वोटरों द्वारा पूरी सुरक्षात्मक व्यवस्था के साथ मतदान कराया जाएगा। निर्वाचन आयोग द्वारा कुल 59 पृष्ठों की अधिसूचना जारी की गई है, जिसे कोई भी सचेतन मतदाता पढ़ना चाहें तो ऑनलाइन पढ़ सकते हैं।

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राष्ट्रकवि दिनकर का मधेपुरा से गहरा लगाव- डॉ.मधेपुरी

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं में सत्ता को हिलाने की ताकत है। देश की राजनीति जब भी लड़खड़ाई तो दिनकर ने अपनी साहित्यिक क्षमता के माध्यम से उसे ऊर्जा प्रदान किया है। गांधी के चरखे को गलाकर तकली बनाने की सलाह देनेवाले राष्ट्रकवि दिनकर राजनीति और साहित्य के संबंधों के बीच हमेशा साहित्य के ही पक्ष में खड़े दिखे हैं।  उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से ताजिंदगी राष्ट्रीय चेतना का सृजन किया है।

उक्त बातें साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने 23 सितम्बर (बुधवार) को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 112वीं जयंती के मौके पर कोरोना के चलते निज निवास ‘वृंदावन’ में वर्चुअल संगोष्ठि को संबोधित करते हुए कही।

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने यह भी बताया कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का मधेपुरा से गहरा लगाव रहा है। आरंभिक दिनों में दिनकर जी जब सहरसा के समीप बरियाही सब-रजिस्ट्री ऑफिस के रजिस्ट्रार हुआ करते थे तो मधेपुरा के अपने रजिस्ट्रार मित्र से प्रायः रविवार को मिलने आ जाते। यदा-कदा रात्रि भोजन और विश्राम भी किया करते।

कालांतर में पूर्णिया में रहकर “रश्मिरथी” की रचना करने के दरमियान टीपी कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य रतन चंद से भी मिलने आया करते, क्योंकि पटना कालेज में जब रतन चंद फोर्थ ईयर में पढ़ते थे तो दिनकर जी थर्ड ईयर में। दिनकर जी रतन बाबू को ताजिंदगी बड़े भाई ही कह कर पुकारते रहे।

अध्यक्षता कर रहे कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन मधेपुरा के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ जब दिनकर जी के गृह प्रखंड बरौनी में कल्याण विभाग में कार्यरत थे तो दिनकर जी से उनका ऐसा साहित्यिक संबंध बन गया था कि गांव के एक गरीब लोग को खाद्यान्न उपलब्ध कराने हेतु दिनकर जी ने उन्हें पत्र भी लिखा था।

विषय प्रवेश करते हुए अध्यक्ष शलभ ने कहा कि दिनकर उत्तर छायावाद के कवियों की पहली पीढ़ी के थे और उनकी कविता में ओज, विद्रोह, आक्रोश व क्रांति की पुकार है। दिनकर सौम्य व मृदुभाषी थे, परंतु देशहित में अपना विचार हमेशा बेबाकी से रखते रहे।

संस्थान के संरक्षक व पूर्व सांसद डॉ.आरके यादव रवि ने कहा कि ‘उर्वशी’ को छोड़कर दिनकर की अधिकतर रचनाएं वीर रस से ओत-प्रोत है। ‘भूषण’ के बाद उन्हें वीर रस का सर्वश्रेष्ठ कवि माना जाता है। प्रो.मणि भूषण वर्मा ने दिनकर की ‘हिमालय’ शीर्षक कविता का पाठ किया। कवि डॉ.अरविंद श्रीवास्तव ने अपने टेलीकास्ट में कहा कि दिनकर की रचनाएं संस्कृति के  उन्नयन का गौरवशाली इतिहास है।

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कोरोना के कोहराम के दरमियान बिहार के सभी स्कूलों में 28 सितंबर से खुलेंगी 9 से 12वीं तक की कक्षाएं

कोरोना एपिडेमिक के चलते विगत 7 महीने से ट्रेन से लेकर प्लेन तक को बंद करना पड़ा और विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय की कक्षाएं व परीक्षाएं भी बंद रही। आज बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने छात्र-छात्राओं की नियमित पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। महीनों से बंद चल रहे सभी सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों को खोलने के आदेश विभाग ने जारी कर दिए हैं।

बता दें कि आज सवेरे 11:00 बजे से राजधानी पटना में शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों की बैठक में स्कूल खोलने के बाबत यह बड़ा फैसला लिया गया। फैसलानुसार सभी सरकारी एवं गैर सरकारी स्कूलों को दिनांक 28 सितंबर से वर्ग 9 से 12 तक के छात्र-छात्राओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

चलते-चलते यह भी बता दें कि कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए विभाग की ओर से जारी निर्देश में यह कहा गया है कि बच्चे सप्ताह में सिर्फ दो ही दिन स्कूल जा सकेंगें। साथ ही यह भी कि शिक्षा विभाग के उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार छात्र-छात्राओं के स्कूल जाने का अंतिम फैसला बच्चों के अभिभावक पर निर्भर करेगा।

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बीएनएमयू के 25वाँ कुलपति बने प्रो.आरकेपी रमण

महामहिम कुलाधिपति सह राज्यपाल बिहार के आदेशानुसार व प्रधान सचिव, राज्यपाल सचिवालय द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना दिनांक 19 सितंबर को ही विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं प्रति कुलपतियों के नाम जारी कर दी गई। इस आशय की सूचनाएं सभी संबंधित सचिवालयों के सचिवों को भी प्रेषित की गई। उसी दिन शाम में प्रो.आरकेपी रमण को मधेपुरा वार्ड नंबर 1 के डॉ.मधेपुरी मार्ग स्थित उनके निवास पर ऑनलाइन अधिसूचना प्राप्त हो गई।

आज 21 सितंबर सोमवार को दिन के 12:00 बजे उन्होंने 25वें कुलपति के रूप में पदभार ग्रहण किया। योगदान करने से पूर्व उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर स्थित मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व कुलपति-शिक्षा मंत्री डाॅ.महावीर प्रसाद यादव की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर नमन किया। मौके पर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि मुझे आज सर्वाधिक प्रसन्नता हो रही है कि नवनियुक्त कुलपति डॉ.आरकेपी रमण टीपी कॉलेज में मेरे छात्र रहे, पढ़े और कालांतर में वहीं के प्रधानाचार्य भी बने। आज बीएनएमयू के नए कुलपति बने अपने शिष्य को शुभाशीष देते हुए कहा कि अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालय को “नैक” से मान्यता दिलायें, वही विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। डॉ.मधेपुरी ने  प्रतिकुलपति के रूप में प्रो.आभा सिंह की  नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त की।

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पीएम मोदी ने दी बिहार को कोसी रेल महासेतु की सौगात

आज शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने बिहार में ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु के साथ अन्य 12 परियोजनाओं का उद्घाटन किया जिसमें सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, रेल मंत्री पीयूष गोयल एवं अन्य केंद्रीय मंत्रीगण रविशंकर प्रसाद, गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, महामहिम राज्यपाल फागू चौहान सहित बड़ी-बड़ी हस्तियां भी जुड़ी हुई थीं।

उद्घाटनोपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिहार में आज रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा गया है। पीएम ने कहा कि कोसी रेल महासेतु और किऊल ब्रिज के साथ ही संपूर्ण बिहार में रेल यातायात को बढ़ावा मिलेगा और नए रोजगार पैदा करने वाले दर्जनों प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ होगा।

इस कार्यक्रम से जुड़े केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों से आज पृथक हुए इन दोनों क्षेत्रों को फिर जोड़ा जा रहा है….. इसकी जितनी भी सराहना की जाय वह कम होगी। जनता आने वाले दिनों में इसकी उपयोगिता व महत्ता को महसूसेगी।

जानिए कि पराधीन भारत में वर्ष 1934 के महाभूकंप ने बिहार को क्षत-विक्षत कर दिया था, जिसे देखने के लिए महात्मा गांधी, दीप नारायण सिंह, ध्वजा प्रसाद साहू आदि आए थे। इस भूकंप ने बिहार के कोसी अंचल से मिथिलांचल को अलग कर दिया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी एवं ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस कार्यक्रम में कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में कोसी मिथिलांचल की दूरी को पाटने की शुरुआत हुई थी। यूपीए सरकार में काम रुक गया था, पुनः प्रधानमंत्री जी आपने इसे चालू किया है तो आपसे विनम्र अपील होगी कि इस रेल लाइन को जनहित में और आगे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि यह मेन-लाइन का रूप धारण कर ले और ये दोनों क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाय।

कोसीअंचल और मिथिलांचल के विकास को मुख्यधारा से जुड़ने को लेकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कोसी के विकास के लिए ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव हमेशा प्रयत्नशील रहा करते हैं, उनके कार्यों को कोसी की जनता सदा सराहती रही है।

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