मांझी ने आरजेडी तो चौधरी ने थामा जेडीयू का हाथ

लोकसभा चुनाव से पहले ‘राजनीतिक सुविधा’ के लिए दल और प्रतिबद्धता बदलने का सिलसिला शुरू हो गया है और शुरुआत बिहार से हुई है। जी हां, बिहार की राजनीति के लिए फरवरी का अंतिम दिन उथल-पुथल भरा रहा। एक ओर जहां बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘हम’ (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने एनडीए का साथ छोड़ आरजेडी-कांग्रेस महागठबंधन का दामन थाम लिया है, वहीं पूर्व शिक्षामंत्री व बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी सहित कांग्रेस के चार विधानपार्षदों ने कांग्रेस छोड़ जेडीयू से जुड़ने की घोषणा की है।

ख़बरों के मुताबिक जीतन राम मांझी ने आरजेडी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से उनके घर पर बुधवार को मुलाकात कर एनडीए छोड़ने और आरजेडी के साथ महागठबंधन का हिस्सा बनने की घोषणा की। घोषणा के बाद तेजस्वी ने कहा कि मांझी उनके माता-पिता के पुराने दोस्त रहे हैं और वे मांझी का स्वागत करते हैं।

गौरतलब है कि मांझी और एनडीए के बीच तल्खी लंबे समय से चली आ रही थी। हाल में जहानाबाद उपचुनाव में टिकट न मिलने के कारण मांझी की नाराजगी और बढ़ गई थी। इसी कारण उन्होंने चुनाव के लिए प्रचार न करने का फैसला लिया था। यह भी किसी से छिपा नहीं कि मांझी के रिश्ते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ भी ‘मधुर’ नहीं रह गए थे।

उधर एक अन्य घटनाक्रम में बिहार कांग्रेस के चार विधानपार्षद अशोक चौधरी, दिलीप चौधरी, रामचंद्र भारती एवं तनवीर अख्तर ने कांग्रेस छोड़ जेडीयू के साथ जाने की घोषणा की। बता दें कि इन चारों को कांग्रेस ने सस्पेंड कर दिया था, जिसके बाद के इन चारों ने यह निर्णय लिया। बिहार काग्रेस और आरजेडी-कांग्रेस महागठबंधन के लिए यह एक बड़ा झटका है। वैसे देखा जाय तो ये नेता जिनकी अगुआई अशोक चौधरी कर रहे थे, कांग्रेस से पहले ही से असंतुष्ट चल रहे थे। अशोक चौधरी के बुधवार के ट्वीट से यह और भी स्पष्ट हो जाता है, जिसमें उन्होंने लिखा – “कई महीनों की मानसिक प्रताड़ना और लगातार मिल रहे अपमान के बाद आखिरकार आज मैंने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।”

बहरहाल, बिहार की राजनीति के लिए ये दोनों ही घटनाक्रम बहुत मायने रखते हैं। हालांकि राजनीति के जानकार बताते हैं कि ये तो अभी महज शुरुआत है। आने वाले दिनों में एनडीए और यूपीए दोनों ही ओर से पालाबदल के कई दृश्य अभी सामने आने हैं। खैर, आने वाले दिनों में जो भी हो, बिहार की राजनीति इतने ही से काफी गरमा गई है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।

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त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में भाजपा की बढ़त !

एग्जिट पोल की मानें तो त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में कमल खिलने की पूरी संभावना है। त्रिपुरा में जहां भाजपा 60 में से 35 सीटें जीतकर सीपीएम की 25 साल पुरानी सरकार को गिराती नजर आ रही है, वहीं नगालैंड और मेघालय में भी उसे बढ़त मिलती दिख रही है। गौरतलब है कि इन तीनों राज्यों में इस बार भारी मतदान हुआ था, जिसका फायदा संभवत: भाजपा को मिला है।

बहरहाल, सबसे पहले त्रिपुरा की बात। न्यूज एक्स के एग्जिट पोल के मुताबिक यहां पहली बार भाजपा, आईपीएफटी की मदद से सरकार बना सकती है। अनुमान है कि भाजपा और आईपीएफटी के गठजोड़ को 35 से 45 सीटें मिल सकती हैं। वहीं सीपीएम का आंकड़ा 50 सीटों से गिरकर 14-23 के बीच रह सकता है। एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में तो भाजपा को इससे कहीं ज्यादा 45-50 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि लेफ्ट को महज 9-10 सीटें मिलती नजर आ रही हैं। हालांकि सीवोटर के एग्जिट पोल में त्रिपुरा की तस्वीर इन दोनों एग्जिट पोल से अलग दिख रही है। इसके मुताबिक यहां भाजपा गठबंधन और लेफ्ट के बीच कांटे की टक्कर है। इस एग्जिट पोल में सीपीएम को 26 से 34 सीटें, भाजपा गठबंधन को 24 से 32 सीटें और कांग्रेस को 0 से 2 सीटें मिल सकती हैं।

नगालैंड की अगर बात करें तो यहां भी एग्जिट पोल में भाजपा को आगे बताया जा रहा है। यहां भाजपा ने नेफ्यू रियो की अगुवाई वाले एनडीपीपी के साथ गठबंधन किया है। न्यूज एक्स के एग्जिट पोल के मुताबिक भाजपा को सहयोगियों के साथ 27-32 सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा 60 सदस्यों वाली विधानसभा में एनपीएफ को 20-25 सीटें, जबकि कांग्रेस को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान है।

मेघालय की जहां तक बात है तो यहां भी भाजपा फायदे में दिख रही है। एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में अनुमान है कि 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा 30 सीटें जीत सकती है, वहीं कांग्रेस को केवल 20 सीटें मिलने जा रही हैं। दूसरी ओर न्यूज एक्स के एग्जिट पोल के मुताबिक मेघालय की तस्वीर कुछ अलग ही दिख रही है। इस एग्जिट पोल में कोनार्ड संगमा की अगुवाई वाली एनपीपी (नेशनल पीपुल्स पार्टी) को 23-27 सीटें दी गई हैं। जबकि कांग्रेस के हिस्से में 13-17 और भाजपा के खाते में 8-12 सीटें बताई गई हैं।

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घर प्रथम पाठशाला है और माँ से बड़ा कोई शिक्षक नहीं- डॉ.रवि

ज्ञानभूमि पर आयोजित स्कूली बच्चों के समारोह में उद्घाटनकर्ता के रूप में भू.ना.मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति व पूर्व सांसद डॉ.रमेंद्र कुमार यादव रवि, मुख्य अतिथि वर्तमान विद्वान कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल, परीक्षा नियंत्रक रहे डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, प्राचार्य डॉ.पी.एन.यादव, डॉ.बी राणा, डॉ.वाई.पी.यादव आदि ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया |

उद्घाटन के उपरांत मंच पर बच्चों के मनभावन स्वागत कार्यक्रम की समाप्ति के बाद सर्वप्रथम डॉ.मधेपुरी ने अपने 2 मिनट के संबोधन में तुलसी का बिरबा लगाने वाले संस्थापक कुलपति डॉ.रवि एवं उसी विश्वविद्यालय को नित नई ऊर्जा के साथ आगे ले जानेवाले वर्तमान कुलपति डॉ.ए.के.राय को भी बिना विस्तार से संबोधित किये ही ज्ञानभूमि पर उपस्थित सभी बुद्धिजीवियों को 1353 ई. के इतिहास की जानकारी देते हुए यही कहा कि डॉ.राणा नर्सिंग होम से पूरब रह रहे सूफी संत दौराम शाह मुस्तकिम के कारण यह ज्ञान भूमि तब से ऐतिहासिक एवं धार्मिक रूप से जाग्रत है | उन्होंने कहा कि उसी सूफी संत का नाम देकर स्टेशन का नाम “दौराम मधेपुरा” रखा गया है | डॉ.मधेपुरी ने तब और अब के गुरु-शिष्यों के बीच बढ़ते जा रहे फासले पर खेद प्रकट करते हुए अपनी चंद पंक्तियाँ सुनाकर खूब तालियाँ बटोरी- शिक्षक समाज का सृजनहार……. रे रक्षक रहवर रखवाला……..!

Honourable Vice-Chancellor Dr.Awadh Kishor Rai addressing at Gyanbhumi Samaroh.
Honourable Vice-Chancellor Dr.Awadh Kishor Rai addressing at Gyanbhumi Samaroh.

बता दें कि समारोह के मुख्य अतिथि के रुप में वर्तमान विद्वान कुलपति डॉ.अवध किशोर राय ने संस्थापक कुलपति डॉ.रवि, प्रतिकुलपति रहे डॉ.के.के.मंडल व अन्य गणमान्यों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में शिक्षा का वही स्थान है जो स्थान शरीर में दिल का होता है | उन्होंने विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा मानव जीवन की ज्योति है जिसे निरन्तर जलाये रखने वाले लोग आज भी पूज्य हैं | डॉ.राय ने यह भी कहा कि जहाँ कहीं लोग नि:स्वार्थ भाव से शिक्षण संस्थान की स्थापना करते हैं वे पुण्य के भागी बनते हैं वहीं उन्होंने छात्रों के सर्वांगीन विकास यानि पठन-पाठन के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के खेलों, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों आदि में भाग लेने की प्रेरणा देते हुए यहाँ तक कह डाला कि हम और डॉ.मधेपुरी एक ही साथ टी.एन.बी. में पढ़ते थे | वे दो क्लास आगे थे, लेकिन मधेपुरा आने के बाद से मैं हमेशा यही महसूसता रहा हूँ कि डॉ.मधेपुरी में समाहित है मधेपुरा……|

यह भी जानिये कि टी एम बी यू के पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल ने अपने संबोधन में यही कहा कि शिक्षा दान करना सबसे पवित्र काम है | इसे व्यापार नहीं बनायें | शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले कई विद्वानों के साथ-साथ चिकित्सीय सेवा के लिए डॉ.बी.राणा एवं उनके छोटे पुत्र (कनाडा में कार्यरत) डॉ.विक्रम राणा को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया |

The Founder Vice-Chancellor & Former MP Dr.R.K.Yadav Ravi giving blessings to all.....
The Founder Vice-Chancellor & Former MP Dr.R.K.Yadav Ravi giving blessings to all…..

अंत में उद्घाटनकर्ता प्रखर साहित्यकार डॉ.रवि ने वसंतोत्सव व होलीकोत्सव को साहित्यिक रंग में रंगते हुए यही कहा कि न तो माँ से बढ़कर कोई शिक्षक है और न घर से बढ़कर कोई पाठशाला | उन्होंने कहा कि जहाँ की माताएं सर्वाधिक शिक्षित होंगी उस राष्ट्र को विकसित होने से कोई रोक नहीं सकता | डॉ.रवि ने यूँ उद्घृत करते हुए कहा कि भगवान सभी जगह एक समय नहीं रह सकते इसलिए ईश्वर ने माँ को बनाया | माँ की गोद में सीखी गई भाषा ही मातृभाषा है……. माँ एवं मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं है………|

कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार, डॉ.बी.राणा, प्रभारी प्राचार्य डॉ.परमानंद यादव, डॉ.अमोल राय, डॉ.विक्रम राणा, डॉ.अशोक श्रीवास्तव आदि ने भी संबोधित किया तथा अध्यक्षता की डॉ.उदय कृष्ण एवं मंच संचालन किया यू के इंटरनेशनल स्कूल के प्राचार्य व अन्य सहयोगी |

अन्त में सभी गणमान्यों द्वारा ‘ज्ञानरथ’ को हरी झंडी दिखाकर विदा किया गया | कार्यक्रम में मुख्यरूप से उपस्थित रहे सिंडिकेट सदस्य द्वय डॉ.जवाहर पासवान, डॉ.अजय कुमार, डॉ.अशोक कुमार अकेला सहित बच्चे-बच्चियाँ एवं उनके माता-पिता व अभिभावकगण आदि |

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तुम्हें यूं ना जाना था ‘चांदनी’!

25 फरवरी का दिन भारतीय सिनेमा के लिए एक सदमा लेकर आया। शनिवार देर रात दुबई में बॉलीवुड की पहली फीमेल सुपरस्टार श्रीदेवी की हृदय गति रुक जाने से मृत्यु हो गई। अपने भावपूर्ण अभिनय, शानदार नृत्य और चुलबुली मुस्कुराहट से लाखों दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री ने अचानक हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह दिया। हिन्दी सिनेमा में ‘लेडी अमिताभ’ कही जाने वाली श्रीदेवी 54 साल की थीं। उन्होंने 5 बार बेस्ट एक्ट्रेस का ‘फिल्म फेयर’ पुरस्कार जीता था और साल 2013 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से नवाजा गया था। गौरतलब है कि श्रीदेवी अपने पति बोनी कपूर के भांजे मोहित मारवाह की शादी में शामिल होने के लिए सपरिवार दुबई में थीं।

श्रीदेवी ने महज 4 साल की उम्र में तमिल फिल्म ‘थुनाइवन’ से अपनी आधी सदी लंबी अभिनय यात्रा शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में भी अभिनय किया लेकिन उन्हें देशभर में असली पहचान हिन्दी फिल्मों से मिली। हिन्दी फिल्मों में उन्होंने अपनी शुरुआत साल 1975 में आई फिल्म ‘जूली’ में बतौर बाल कलाकार की, लेकिन फिर उन्होंने दक्षिण का रुख कर लिया। इसके बाद उनकी वापसी ‘सोलहवां सावन’ से हुई। हिन्दी में बतौर लीड एक्ट्रेस यह उनकी पहली फिल्म थी। मगर सफलता उनको 1983 में जीतेन्द्र के साथ आई फिल्म ‘हिम्मतवाला’ से मिली। इस फिल्म ने उन्हें हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में ग्लैमरस अभिनेत्री के तौर पर स्थापित कर दिया। लेकिन इसी साल आई फिल्म ‘सदमा’ से उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का लोहा भी मनवा लिया। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसी लड़की की भूमिका निभाई थी, जो अपनी याद्दाश्त खो बैठती है।

80 और 90 के दशक में श्रीदेवी ने बॉलीवुड पर राज किया था। सच तो यह है कि उनके जैसी धाक और धमक किसी हीरोइन की नहीं रही। उनका जलवा कुछ ऐसा था कि उनका नाम ही फिल्म की सफलता की गारंटी होता था। ‘मवाली (1983)’, ‘तोहफा’ (1984), ‘नगीना’ (1986), ‘मिस्टर इंडिया (1987)’, ‘चांदनी’ (1989), ‘चालबाज’ (1989), ‘लम्हे’ (1991), ‘खुदा गवाह’ (1992), ‘गुमराह’ (1993), ‘जुदाई’ (1997) जैसी फिल्में इस बात का सबूत हैं। ये फिल्में ना केवल उनके करियर के लिए, बल्कि हिन्दी सिनेमा के लिए मील का पत्थर रही हैं।

श्रीदेवी ने हिन्दी फिल्मों में अपनी दूसरी पारी साल 2012 में आई फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ से शुरू की, जिसमें उनके काम को जबरदस्त सराहना मिली। पिछले साल आई फिल्म ‘मॉम’ में भी उनके काम की काफी तारीफ हुई थी। माना जाता है कि शाहरुख खान की आने वाली फिल्म ‘जीरो’ में भी उन्होंने बतौर मेहमान कलाकार काम किया है। ऐसे में यह उनकी आखिरी फिल्म होगी।

नियति का चक्र देखिए शून्य से शिखर की यात्रा करने वाली श्रीदेवी की आखिरी फिल्म का नाम ‘जीरो’ (यानि शून्य) था। हम चाहे लाख शिखर पर रहें, हमें जाना ‘शून्य’ में ही होता है। शून्य जो अनंत है, अटल है। पर श्रीदेवी का असामयिक निधन वाकई बेहद खलने वाला है। जीवन का अंतिम सत्य अपनी जगह है, पर हम तो यही कहेंगे… तुम्हें यूं ना जाना था ‘चांदनी’! बहरहाल, अभिनय-कला पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली श्रीदेवी को भावभीनी श्रद्धांजलि..!

‘मधेपुरा’ अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा जिले की बेटियों ने गौरवान्वित किया बिहार को

राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल प्रतियोगिता का 63वाँ आयोजन इसी माह फरवरी में हैदराबाद के लाल बहादुर स्टेडियम में आयोजित किया गया | फरवरी के द्वितीय सप्ताह में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल प्रतियोगिता में मधेपुरा जिला के सोनाय अनुप उच्च माध्यमिक विद्यालय, भान-टेकठी, मधेपुरा की तीन छात्राओं-जूली कुमारी, शबनम प्रवीन एवं नजीरन खातून ने पहली बार जिले से राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल प्रतियोगिता में भाग लेकर जिला मधेपुरा के साथ-साथ सूबे बिहार के लिए गोल्ड मेडल प्राप्त किया |
बता दें कि बिहार को पहली बार विद्यालय रग्बी फुटबॉल प्रतियोगिता में शामिल किया गया था | सोनाय अनुप विद्यालय के खेल शिक्षक श्री दिलीप कुमार एवं विद्यालय के प्राचार्य श्री रामचंद्र यादव ने मधेपुरा अबतक को बताया कि हैदराबाद में आयोजित होने वाले 63वें राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल प्रतियोगिता में पहली बार मधेपुरा जिले की मात्र तीन छात्राओं का चयन ( बिहार ) राज्य स्तर पर किया गया | ये तीनों चयनित छात्राएं वर्ग नौवीं में पढ़ती हैं |
यह भी बता दें कि ये तीनों प्रतिभागी वर्ग 9 की छात्राएं- जूली, शबनम व  नजीरन ने इस राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल में अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया तथा गोल्ड मेडल पर अपने प्रथम प्रयास में ही कब्जा जमा कर बिहार को गौरवान्वित किया |
जानिये कि जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) जिले के साथ-साथ सुबे बिहार को गौरवान्वित करने वाली इन तीनों धरती पुत्रियों की लगन व मेहनत पर प्रसन्नता व्यक्त की है और बधाइयाँ दी है | साथ ही इन्हें किसी युवा महोत्सव में पुरस्कृत कर उत्साहवर्धन करने का भी निश्चय किया है | संभव है कि आगामी 8 मार्च को आयोजित होने वाले अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर इन तीनों प्रतिभावान खिलाड़ियों को जिले के अलावे अन्य संगठनों द्वारा भी उत्साहवर्धन हेतु सम्मानित किया जाय |
मधेपुरा अबतक के पाठकों के लिए विशेष जानकारी के तौर पर यह जानना जरूरी है कि रग्बी लीग फुटबॉल आमतौर पर रग्बी लीग लिखा जाता है | यह 13 खिलाड़ियों की दो टीमों द्वारा खेला जाता है | इसे 330 फुट लंबा एवं 224 फुट चौड़ा अंडाकार घास के मैदान पर खेला जाता है |
यूँ तो रग्बी लीग इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फ्रांस….. आदि देशों में लोकप्रिय है परंतु वर्तमान में विश्वकप विजेता का परचम तो न्यूजीलैंड की लहरा रहा है |

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अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर बिहारी कलाकारों की मौजूदगी

हेमा देवी, सुधीरा देवी और धीरेन्द्र कुमार वर्तमान में तीनों बिहारी कलाकार मिथिला पेंटिंग एवं सिक्की कला (हेंडी क्राफ्ट) को दुनिया भर में लोकप्रिय बना रहे हैं | इन्हें केन्द्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने राष्ट्रीय पुरस्कार तथा नेशनल मेरिट अवार्ड के लिए चयनित किया है |

बता दें कि नेशनल अवार्ड के लिए चयनित होने वालों में मिथिला पेंटिंग की नामचीन मधुबनी जिले की 41 वर्षीय हेमा देवी और सिक्की कलाकार के रूप में मधुबनी जिले के ही 51 वर्षीय धीरेन्द्र कुमार शामिल हैं जबकि सिक्की कला में ही बेहतरीन योगदान के लिए 43 वर्षीय सुधीरा देवी का चयन नेशनल मेरिट अवार्ड के लिए हुआ है |

यह भी बता दें कि तीनों बिहार राज्य पुरस्कार प्राप्त कलाकार हैं तथा फिलहाल राजधानी पटना के उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान में प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हैं | इस संस्थान के डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर श्री अशोक कुमार सिन्हा ने पुरस्कृत होने वाले इन तीनों कलाकारों के चयन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बिहार के कलाकार लगातार राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कर रहे हैं |

यह भी जानिये कि श्री सिन्हा ने खुशी जाहिर करते हुए मधेपुरा अबतक से कहा कि इन तीनों के साथ मधुबनी जिले की एक बेटी ममता देवी को भी मिथिला पेंटिंग के लिए नेशनल अवार्ड मिलेगा जिसका चयन दिल्ली कोटे से हुआ है | उन्होंने कहा कि मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में सभी चयनित कलाकारों को केन्द्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय की ओर से राजधानी दिल्ली में ही पुरस्कृत किया जायगा |

चलते-चलते यह भी बता दें कि प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित हेमा देवी के पति जीतेन्द्र कुमार भी मिथिला चित्रकला के नामचीन कलाकार हैं और राज्य पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं | साथ ही हेमा की सास सुभद्रा देवी तो पहले ही राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है | हेमा कहती है कि उसे मिथिला पेंटिंग का ज्ञान विरासत में मिली है | अपनी माँ से ही हेमा ने आरंभ में मिथिला चित्रकला की बारीकियाँ सीखी है |

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22 से 27 फरवरी तक बिहार का सभी जिला मनायेगा- पुलिस सप्ताह ! जानिए कैसे ?

जहाँ आज राज्य के सभी जिले में मनाए जाने वाले ‘पुलिस सप्ताह’ का राज्य स्तरीय उद्घाटन सचिवालय परिसर स्थित ‘अधिवेशन भवन’ में बिहार के डीजीपी श्री.पी.के.ठाकुर करेंगे जिसमें बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ लोगों को जागरुक किया जायेगा वहीं एडीजीपी श्री.एस.के.सिंघल ने बताया कि 24 फरवरी को पुलिस सप्ताह के दौरान सीएम नीतीश कुमार द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को बीएमपी परिसर में पुरस्कृत किया जायगा |

बता दें कि सीएम द्वारा पुरस्कृत होने वाले पुलिस पदाधिकारियों व कर्मियों में विगत स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किये गये पुलिसकर्मी भी शामिल हैं |

यह भी बता दें कि मधेपुरा के पुलिस अधीक्षक श्री विकास कुमार (भा.पु.से) ने मधेपुरा अबतक को बताया कि 22 से 27 तक आयोजित किये जाने वाले पुलिस सप्ताह के दौरान जहाँ जिले में खेल-कूद प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम, यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा वहीं राज्यस्तर पर आइबी के संयुक्त निदेशक सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा साइबर क्राइम, विधि-व्यवस्था एवं आपराधिक मामलों की वैज्ञानिक जांच आदि विषय पर व्याख्यान दिया जाएगा |

बहरहाल पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने मधेपुरा अबतक को प्रतिदिन की जानकारी देते हुए यही कहा कि-

जहाँ 22 फरवरी को स्थानीय बी.एन.मंडल स्टेडियम में सुबह 6:30 बजे से मैराथन दौड़ का आयोजन किया जायेगा वहीं भूपेन्द्र कला भवन में 11:00 बजे दिन से चित्रकला एवं वाद-विवाद का आयोजन होगा  |

और जहाँ 23 फरवरी को शहीद चुल्हाय मार्ग पर स्थित माया विद्या निकेतन परिसर में 2:00 बजे से शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा वहीं 24 फरवरी को 12:00 बजे दिन से पुलिस केन्द्र सिंहेश्वर में बॉलीबॉल का आयोजन होगा |

इसके अलावे जहाँ 26 फरवरी को सिंहेश्वर पुलिस केंद्र में 10:00 बजे दिन से यातायात जागरूकता को लेकर एक भव्य कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा वहीं समापन के दिन 27 फरवरी को बी.एन.मंडल स्टेडियम में 1:00 बजे दिन से जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार की देख-रेख में कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा वहीं संध्या 6:00 बजे से ‘होली मिलन समारोह’ का भव्य आयोजन होगा जिसमें समस्त जिले के नर-नारी व बच्चे सादर-सस्नेह आमंत्रित हैं |

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कलाम का लेते हुए कमल ने की अपनी पार्टी की घोषणा

दक्षिण भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता कमल हासन ने एक नई राजनीतिक पार्टी बनाई, जिसका नाम उन्होंने ‘मक्कल नीति मय्यम’ रखा। दक्षिण भारत की राजनीति में फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों का कैसा दबदबा रहा है, यह छिपी हुई बात नहीं। उसे देखते हुए कमल का अपनी राजनीतिक पार्टी बनाना कोई अचंभे की बात नहीं। हां, उनकी पार्टी से जुड़ी दो बातें बेहद खास रहीं। पहली कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श बताया और अपनी पार्टी को ‘लोगों की पार्टी’ करार दिया और दूसरी कि उनकी पार्टी के लॉन्चिंग कार्यक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और आप के तमिलनाडु प्रभारी सोमनाथ प्रभारी मौजूद रहे। यह देश और खासकर दक्षिण भारत की राजनीति में एक नए तरह का संकेत है।

Kamal Haasan
Kamal Haasan waving his supporters .

बहरहाल, लॉन्चिंग कार्यक्रम के दौरान कमल हासन ने कहा कि आज की राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक उदाहरण होना चाहिए और मैं भाषण देने की बजाय लोगों के सुझावों की मांग करूंगा। इस दौरान उन्होंने अपनी पार्टी के झंडे का भी अनावरण किया। एक और महत्वपूर्ण बात यह रही कि लॉन्चिंग के दौरान केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने रिकॉर्डेड मैसेज के माध्यम से कमल हासन को पार्टी की स्थापना के लिए बधाई दी।

गौरतलब है कि इससे पहले कमल हासन ने बुधवार सुबह रामेश्वरम में डॉ. कलाम के घर जाकर उनके भाई मुहम्मद मुथुमीरन लेब्बाई मराईक्कायार से आशीर्वाद लिया। इस दौरान कलाम के परिजनों ने उन्हें पूर्व राष्ट्रपति के चित्र वाला स्मृति चिह्न भेंट किया। कमल हासन ने पीकारुंबु में मिसाइलमैन के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी थी।

जो भी हो, कमल हासन की अभिनय क्षमता पर शायद ही किसी को कोई संदेह हो, लेकिन राजनीति में वे कितने सफल होंगे यह देखने की बात होगी। सबसे अहम यह कि कलाम जैसी शख्सियत का नाम लेते हुए कमल और केजरीवाल क्या कमाल करते हैं, यह देखना अपने आप में बेहद दिलचस्प बात होगी..!

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जापान दौरे से बिहार की संभावनाओं को नई उड़ान दे रहे नीतीश

मंगलवार को अपने जापान दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहार राज्य प्रोत्साहन संगोष्ठी को संबोधित किया, एम्बेसी ऑफ इंडिया, टोक्यो में मिथिला पेंटिंग की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और इंडियन पार्लियामेंट्रियन फ्रेंडशिप लीग की बैठक में अध्यक्ष श्री होसादा हिरोयूकी के हाथों सम्मानित हुए। इससे पूर्व सोमवार को वे जापान के प्रधानमंत्री श्री शिंजो अवे, विदेश मंत्री श्री तारो कोनो, विदेश राज्य मंत्री श्री कजायुकी नकाने और जापान में भारत के राजदूत श्री सुजान चिनौय से मिले और वहां के बिहारी प्रवासियों के साथ भी थोड़ा वक्त बिताया।

जापान के प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान नीतीश कुमार ने बिहार में मिनी बुलेट ट्रेन के साथ ही कई अन्य बिन्दुओं पर भी चर्चा की, जिनमें पर्यटन, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण आदि प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने जापान सरकार से बिहार में हाई स्पीड रेल लिंक के निर्माण के संबंध में तकनीकी सहयोग देने की अपेक्षा भी जताई।

बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान इंटरनैशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीके) के माध्यम से पटना को गया, बोधगया, राजगीर और नालंदा से जोड़ने का काम चल रहा है, जिसे वैशाली तक बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इससे इसकी प्रासंगिकता और बढ़ेगी और लोगों को सभी बौद्ध स्थलों की यात्रा करने में सुविधा होगी। साथ ही दोनों देशों के बीच पर्यटन की संभावना को और बल मिलेगा।

नीतीश कुमार ने जापान के विदेश मंत्री तारो कोनो से भी मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने विदेश मंत्री से बिहार से जापान के बीच सीधी विमान सेवा के संचालन के संबंध में विस्तृत बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे जापान और बिहार के आपसी संबंध और मजबूत होंगे एवं दोनों देशों के पर्यटक यात्रा कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त उन्होंने बिहार को औद्योगिक केन्द्र बनाने की बात की और कहा कि इससे बिहार के मेधावी और मेहनती युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। कहने की जरूरत नहीं कि अपने जापान दौरे से बिहार की संभावनाओं को नई उड़ान दे रहे हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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सिंहेश्वर महोत्सव का जानदार-शानदार समापन बना यादगार……!

तीन दिवसीय पाँचवे सिंहेश्वर महोत्सव-2018 के दूसरे दिन हुए कार्यक्रमों में “शिव और शक्ति” की महिमा के गीत प्रस्तुत करते हुए जहाँ मुंबई के सूफी गायक विनोद गवार की आवाज का जादू सर चढ़कर बोला और मंत्रमुग्ध होकर दर्शकों ने उनके शिव तांडव, राधा कृष्ण रासलीला एवं भस्मावतार आरती का भरपूर आनंद उठाया…… वहीं सजदा तेरा सजदा…… से लेकर…… बाबा भोलेनाथ को मनाऊँ कैसे…… आदि गीतों ने खूब तालियाँ बटोरी और संपूर्ण माहौल को भक्ति रस में डुबो दिया | साथ ही इलाहाबाद की झाँकी टीम एवं आसाम की बीहू नृत्य आकर्षण का मुख्य केन्द्र बना रहा |

Rising Star Playback Singer Amitabh Narayan along with Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri , BDO Ajit Kumar and others at Singheshwar Mahotsav 2018.
Rising Star Playback Singer Amitabh Narayan along with Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri , BDO Ajit Kumar and others at Singheshwar Mahotsav 2018.

समापन की शाम को युवा गायक अमिताभ नारायण एवं मैथिली ठाकुर की जोड़ी ने यादगार बना दिया | हिन्दी, मैथिली एवं भोजपुरी गीतों के जलवे पर थिरकने लगे युवावर्ग और झूमने लगे बच्चे…..! इस जोड़ी की दिलकश मखमली गायकी ने दर्शकों को खूब नचाया, गवाया और बाँध सा लिया | यह महफिल तब और दिलकश हो गयी जब अमिताभ ने मैथिली के संग सुर में सुर मिलाया |

बता दें कि दर्शकों से खचाखच भरे विशाल पंडाल में अमिताभ-मैथिली के स्वरों के साथ बच्चों की माताएं भी गाती हुई नजर आई | जहाँ मधुबनी-बेनीपट्टी की राइजिंग स्टार मैथिली ने ‘अंगनवा में भवनवा में….’ से लेकर ‘दिगम्बर खेले मसाने में होरी……’ पर दर्शकों को झुमाती रही वहीं प्लेबैक सिंगर मुजफ्फरपुर के इंडियन आइडल शो विजेता अमिताभ दर्शकों को भिन्न-भिन्न स्वाद के गानों के साथ झुमाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी……|

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri , President Awardee Prof.Y.N.Yadav and DDC Mukesh Kumar giving momento to NDC Rajneesh Roy for the best arrangements of Singheshwar Mahotsav 2018.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri , President Awardee Prof.Y.N.Yadav and DDC Mukesh Kumar giving momento to NDC Rajneesh Roy for the best arrangements of Singheshwar Mahotsav 2018.

यह भी जानिये कि पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय सिंहेश्वर महोत्सव- 2018 में पटना दूरदर्शन की रूपम त्रिविक्रम एवं भागलपुर आकाशवाणी के मिलिंद गुंजन ने मधेपुरा जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बेहतरीन व्यवस्था की सराहना करते हुए तथा अपनी खूबसूरत कला एवं मधुर आवाज का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को राज्यस्तरीय प्रदर्शन जैसा आनन्द अंततक देते रहे |

जहाँ स्थानीय कलाकारों में स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय की हेमा के निर्देशन में बच्चों ने बेहतरीन प्रस्तुति दी वहीं कलामंदिर, ओंकार म्यूजिक एवं सृजन दर्पण के निर्देशक विकास कुमार के ‘डोमकच’ के प्रदर्शन पर दर्शकों ने खूब तालियाँ बजायी |

अंत में सभी कलाकारों सहित राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत तबला वादक प्रो.योगेन्द्र नारायण यादव को प्रभारी डीएम सह डीडीसी मुकेश कुमार, एनडीसी रजनीश, समाजसेवी डॉ.मधेपुरी आदि ने सिंहेश्वर नाथ की स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया | बेहतरीन कार्यक्रम संयोजन के लिए एनडीसी रजनीश राय को भी समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी व डीडीसी द्वारा प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया | इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने कहा- यह पाँचवाँ महोत्सव है | सर्वप्रथम 2014 में डीएम गोपाल मीणा के कार्यकाल में आयोजित हुआ था | तब से आजतक प्रत्येक वर्ष मुझे आने का अवसर मिलता रहा परन्तु इस बार की मंचीय व्यवस्था राज्य स्तरीय मंच जैसा महसूसता रहा हूँ | इसके लिए जिला प्रशासन की जितनी सराहना की जाय वह कम ही होगी |

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