उमा ने ‘असमय’ क्यों की ये घोषणा?

पिछले तीन दशकों में जिन कुछ नेताओं ने भाजपा की पहचान और स्थान बनने में बड़ी भूमिका निभाई है, उनमें एक नाम अत्यंत मुखर फायर ब्रांड नेता और वर्तमान केन्द्रीय मंत्री उमा भारती का भी है, इसमें कोई दो राय नहीं। पर ना जाने अचनाक क्या हुआ कि उमा भारती ने अपनी उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा, ‘अब मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगी, मगर पार्टी के लिए काम करती रहूंगी।’ ‘संन्यासिन’ का सक्रिय राजनीति से अचानक इस तरह ‘संन्यास’ समझ से परे है! खास तौर पर तब जबकि मध्यप्रदेश के चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। कहीं ये पश्चिम बंगाल और राजस्थान के उपचुनावों में भाजपा को मिली हार का आफ्टर इफेक्ट तो नहीं?

बहरहाल, उमा का कहना है कि वह दो बार सांसद रही हैं और पार्टी के लिए काफी काम किया है, उसी के चलते इतनी कम उम्र में उनका शरीर जवाब देने लगा है। कमर और घुटनों में दर्द के चलते चलने-फिरने में परेशानी होती है। हालांकि पार्टी के लिए वह प्रचार करती रहेंगी। राम मंदिर के सवाल पर उन्होंने कहा कि न्यायालय अपना फैसला सुना चुका है, लिहाजा आपसी सहमति से राम मंदिर का निर्माण हो जाना चाहिए।

बता दें कि उमा भारती खजुराहो, भोपाल के बाद वर्तमान में झांसी से सांसद हैं। वह बड़ा मलेहरा और चरखारी से विधायक रह चुकी हैं। उमा भारती बुंदेलखंड की बड़ी प्रभावशाली नेता और पूरे देश में हिंदूवादी नेता के तौर पर अपनी पहचान रखती हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उमा भारती के इस ऐलान को लेकर राजनीति के गलियारे में कई तरह के कयास लगने लगे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस स्थिति से कैसे निबटती है!

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