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सूबे के 534 प्रखंडों में होगी मौसम की क्लोज मॉनिटरिंग !

फिलहाल बिहार के पाँच जिलों में प्रयोग के तौर पर ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि प्रत्येक 20 मिनट पर मौसम का डाटा चला जायेगा ISRO के पास | जिससे किसानों को मौसम की सही जानकारियाँ दी जाती रहेंगी और यदाकदा फसल की क्षति का मुआवजा देने में सरकार को भी आसानी होगी |

बता दें कि इन पाँचो जिले में खोले गये मौसम केंद्रों के सफल होने पर राज्य के 38 जिले के कुल 534 प्रखंडों एवं 8391 पंचायतों में भी इसका विस्तार किया जाएगा, क्योंकि राज्य के अधिकतर भागों में खेतीबारी पूर्णत: मौसम पर ही आधारित है | लिहाजा मौसम की सही जानकारियाँ नहीं रहने के कारण किसानों को सर्वाधिक परेशानी झेलनी पड़ती है |

यह भी जान लें कि गत वर्ष कोसी प्रमंडल के सुपौल जिला सहित नालंदा एवं पूर्वी चम्पारण के सभी प्रखंडों में ‘ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन’ एवं इन जिलों के सभी पंचायतों में ‘टेलीमैट्रिक रेनगेज’ की स्थापना हेतु स्वीकृति दी गई थी | चालू वर्ष में अरवल एवं गया जिले को भी इस व्यवस्था में जोड़ा गया है | सफलता मिलते ही शीघ्र ही सभी जिलों में इसका विस्तार कर लिया जाएगा |

यह भी बता दें कि कभी-कभी एक ही प्रखंड के कुछ पंचायतों में वर्षा की कमी हो जाती है और कुछ में अधिकता…….| फलस्वरूप क्लोज मॉनिटरिंग नहीं हो पाने के कारण वर्षा की कमी वाले पंचायतों के किसानों को भी मुआवजा नहीं मिल पाता है, क्योंकि सरकार के पास इसका सही-सही रिकॉर्ड नहीं होता | इस कठिनाई को दूर करने हेतु सरकार द्वारा सभी पंचायतों में ‘टेलीमैट्रिक रेनगेज’ लगाने का फैसला लिया गया है |

चलते-चलते यह भी जान लें कि उपलब्ध सारी जानकारियाँ सिस्टम द्वारा स्वतः ISRO को प्रत्येक 20 मिनट पर प्रेषित होता रहेगा और ISRO के डाटा विश्लेषण के आधार पर सरकार को अद्यतन जानकारियाँ मिलती रहेंगी और किसानों को नमी, तापमान एवं हवा की गति व दिशा की सही-सही जानकारीयाँ भी प्राप्त होती रहेंगी |

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बेटी बने स्वाभिमान बाप का, उस बेटी की जय हो !

भारतीय रेल की सवारी गाड़ी में ‘महिला डिब्बा’ को प्रायः पुरुष यात्रियों द्वारा ही कब्जा कर लिया जाता है | जब महिला यात्रीगण आती हैं तब भी पुरुष यात्रियों द्वारा जगह खाली नहीं किये जाते हैं | नतीजतन दर्जनों महिला यात्री ट्रेन पर सवार होने से वंचित रह जाती हैं | तुर्रा तो यह है कि पूर्व में महिलाओं के लिए सुरक्षित डिब्बे पर केवल ‘महिला’ अथवा ‘महिला डिब्बा’ ही अंकित कर देने से काम चल जाता था परंतु आज-कल तो “महिला डिब्बा, पुरुष प्रवेश निषेध” तक लिख डालने पर भी बात बनती नहीं है |

बता दें कि सूबे की राजधानी पटना में ही पटना-गया रेलखंड पर चलनेवाली सवारी रेलगाड़ी में कामकाजी महिलाओं के साथ-साथ गृहणियों का भी पटना आना-जाना लगा रहता है | मंगलवार को नदवां स्टेशन पर महिला के लिए आरक्षित डिब्बे पर “महिला डब्बा, पुरुष प्रवेश निषेध” अंकित रहने के बावजूद भी पुरुषों द्वारा पूरे डब्बे को दखल कर लिए जाने पर महिला यात्रियों ने पहले तो अनुरोध किया और नहीं मानने पर किया जमकर हंगामा | हंगामे के बावजूद भी पुरुष यात्रीयों ने बॉगी खाली करने का नाम नहीं लिया तो बातें आरपीएफ इंस्पेक्टर राकेश रंजन तक चली गई |

जानिए कि नदवां स्टेशन पर महिला बॉगी में चढ़ने के लिए जद्दोजहद करती महिला यात्रियों की दशा देखकर इंस्पेक्टर ने यही कहा कि जागरूकता के अभाव में पुरुष यात्रीगण महिला बॉगी में सवार हो जाते हैं | कई बार अनेक स्टेशनों पर पुलिस द्वारा कार्यवाई कर महिला बॉगी से पुरुष यात्रियों को बाहर निकाला व उतारा जाता रहा है | यहाँ तो प्रवचनकर्ता रविशंकर की वाणी-

“बेटा बने सरताज बाप का, उस बेटे की जय हो” जहाँ प्रभावहीन हो रही है वहीं “बेटी बने स्वाभिमान बाप का, उस बेटी की जय हो” कारगर सिद्ध हो रही है | अब बेटियां हवाई जहाज उड़ाने के साथ-साथ हक की खातिर हंगामा करने से भी बाज नहीं आ रही है |

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ये हैं भारत के पहले आधुनिक पुरुष

ब्रिटेन के ब्रिस्टल शहर में आर्नोस वेल का बहुत पुराना कब्रिस्तान है । यहां सौ-दो साल से अपरिचित कब्रगाहों के बीच उस शख़्स की कब्र है जिन्हें भारत का प्रथम आधुनिक पुरुष कहा जाता है । वो कोई और नहीं ब्रह्म समाज संस्थापक राजा राम मोहन राय हैं ।

एक ब्राह्मण का कब्र वो भी इंग्लैंड में ! बात गुजरे ज़माने की है जब मुगलिया सल्तनत हिन्दुस्तान में अपने आखिरी दिन गिन रहा था । तब के मुग़ल बादशाह थे अक़बर द्वितीय जिन्होंने राजा राम मोहन राय को अपनी आर्थिक मदद की फ़रियाद लगाने के लिए इंग्लैंड भेजा था । वे वहां के राजा से मिले इसलिए उन्हें राजा का ख़िताब दिया गया । इसी बीच उनकी तबियत बिगड़ गयी और 27 सितंबर 1833 में 61 साल की उम्र में राजा राममोहन राय का देहांत हो गया , उस वक़्त इंग्लैंड में दाह-संस्कार की अनुमति नहीं थी । इसलिए उन्हें दफ़्न किया गया ।

यूँ तो आधुनिकता के इस दौर में हर कोई आधूनिकिकरण के चपेट में आ गया है । पर सच्चे अर्थों में भारत की आधुनिकता को परिभाषित किया राजा राम मोहन राय ने । राजा राम मोहन राय का जन्म आज के ही दिन 22 मई, 1772 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के राधानगर में हुआ था। उन्होंने भारत की सदियों से चली आ रही रुढ़िवादी सोच पर प्रहार किया और अंग्रेजों के साथ मिलकर भारत में अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार व प्रसार किया ।

करीब 200 साल पहले जब समाज में सती प्रथा जोरों पर थी, तब राजा राम मोहन राय ने इसे जड़ से खत्म करने में सबसे अहम भूमिका अदा किया। उन्होंने सती प्रथा का कड़ा विरोध किया। उन्होंने महिलाओं के लिए समान अधिकारों के लिए मुहिम चलाई और विधवा विवाह व संपत्ति के हक के लिए भी लोगों को जागरूक किया। 1828 में उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की। इसे भारत का पहला सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन कहा जाता है। राजा राममोहन राय मूर्तिपूजा और रूढ़िवादी हिन्दू परंपराओं के विरुद्ध थे । वे अंधविश्वास के खिलाफ थे । आज इस विशेष दिन पर मधेपुरा अबतक इस आधुनिक पुरुष को नमन करता है |

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आरजेडी ने कहा, कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में भी बने सरकार

कर्नाटक की आंच बिहार तक भी आ पहुंची है। बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी के नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को अपने सहयोगी दलों के नेताओं के साथ राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलकर कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में भी सबसे बड़ा दल होने के नाते सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस दौरान राज्यपाल को 111 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा गया। तेजस्वी के साथ प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी एवं प्रेमचंद मिश्रा, हम के दानिश रिजवान एवं आरजेडी के तेजप्रताप यादव, आलोक मेहता एवं शिवचंद्र राम समेत कई विधायक मौजूद थे।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेजस्वी ने दावा किया कि अगर उन्हें सरकार बनाने का मौका मिलता है तो वह आसानी से फ्लोर टेस्ट पास कर लेंगे। तेजस्वी का दावा है कि उऩके साथ कुल 111 विधायक हैं और कुछ जेडीयू से नाखुश विधायक भी उनके संपर्क में हैं। इसके पहले कर्नाटक मुद्दे पर आरजेडी ने धरना-प्रदर्शन कर विरोध भी जताया। शुक्रवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए तेजस्वी ने ट्वीट भी किया और कहा, ‘देश संविधान के आधार पर दिल्ली से चलना चाहिए, न कि संघ के नागपुर मुख्यालय से। चलो लोकतंत्र बचाने के लिए सड़कों पर उतरें।’

वहीं दूसरी ओर जेडीयू ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए उन्हें ‘बबुआगिरी’ छोड़ राज्यपाल की शक्तियों को जानने की सलाह दी है। जेडीयू के प्रवक्ता और विधानपार्षद नीरज कुमार ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए उनके नाम एक खुला पत्र जारी कर उन्हें लोकतंत्र और सरकार बनाने के नियमों का ज्ञान नहीं होने की बात कही। पत्र में कहा गया है कि सरकार बनाने का दावा पेश करने के पूर्व विधानसभा में वर्तमान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर संख्याबल के द्वारा वर्तमान सरकार गिरानी पड़ती है और इसके बाद नई सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त होता है।

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कर्नाटक का जनमत अब राज्यपाल के हाथों

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि वह बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं छू सकी। बता दें कि यहां विधानसभा की कुल 224 सीटें हैं जिनमें से 222 सीटों पर चुनाव हुए थे, जिनमें भाजपा को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस प्लस को 38 सीटें मिली हैं। इस तरह सरकार बनाने के लिए 112 सीटों का आंकड़ा चाहिए था जहां तक भाजपा नहीं पहुंच पाई, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण उसका दावा है कि सरकार बनाने का पहला मौका उसे मिलना चाहिए। दूसरी ओर राज्य की सत्ता की दौड़ में पिछड़ी कांग्रेस ने वक्त की नजाकत को देखते हुए राजनीतिक परिपक्वता दिखाई और बिना देर किए पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस को समर्थन का ऐलान कर देवगौड़ा के पुत्र एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव दिया, जिसे जेडीएस ने बिना देर किए स्वीकार कर लिया और तत्काल चुनाव बाद बने गठबंधन के तौर पर सरकार बनाने का अधिकार जताया। अब गेंद राज्यपाल वजुभाई वाला के हाथों में है कि वो बहुमत में घट रहे 8 विधायकों का ‘जुगाड़’ कहां से होगा, ये बताने में फिलहाल असमर्थ भाजपा की महत्वाकांक्षा का पथ प्रशस्त करते हैं या प्रथम दृष्टया सही लग रही और 78+38=116 के आंकड़े, जो जरूरत से चार ज्यादा है, के साथ खड़ी कांग्रेस-कुमारस्वामी की सरकार को हरी झंडी दिखाते हैं।

बहरहाल, इस बीच ख़बर आई है कि कांग्रेस के कुछ लिंगायत विधायकों ने कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध कर दिया है। खबर यह भी आ रही है कि कांग्रेस अपने विधायकों को पार्टी छोड़ने के डर से आंध्र प्रदेश या पंजाब भेजने की योजना बना रही है। दूसरी ओर, भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येद्दयुरप्पा राज्यपाल से मिलकर महज 48 घंटे में बहुमत साबित करने का दावा कर रहे हैं। उधर भाजपा और कांग्रेस दोनों के केंद्रीय नेतृत्व ने स्थिति संभालने के लिए दिल्ली से अपने-अपने वरिष्ठ नेताओं को बेंगलुरु भेजा है। अब सबकी नजरें राज्यपाल के रुख पर हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि राज्यपाल पूरी तरह ठोक-बजाकर ही कोई निर्णय लेंगे।

कर्नाटक के चुनाव-परिणाम पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भाजपा के विकास के एजेंडे को लगातार समर्थन देने और भाजपा को राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनाने के लिए मैं कर्नाटक के बहनों और भाइयों को धन्यवाद देता हूं। उधर विजय-रथ पर सवार भाजपा के सारथि अमित शाह ने पार्टी की जीत पर अपने उद्गार में कहा कि बाकी देश की तरह कर्नाटक की महान भूमि ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ, पारदर्शी और विकासोन्मुख शासन पर दृढ़ विश्वास व्यक्त किया है। इस जनादेश से साफ है कि कर्नाटक ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार, वंशवादी राजनीति और विभाजनकारी जातिवाद को खारिज कर दिया है। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मौके पर बड़ी सधी हुई प्रतिक्रिया दी और कहा कि इन चुनावों में जिन्होंने भी कांग्रेस को वोट दिया, उन सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद। हम आपके समर्थन की सराहना करते हैं और हम आपके लिए लड़ेंगे।

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मदर्स डे: कुछ अनुभूतियां

मां से छोटा
और ताकतवर
शब्द कोई और हो… तो बताना..!

गम को छिपाकर
वो कहां रखती है
गर तुम्हें मालूम हो… तो दिखाना..!

मौत के रास्ते हैं बहुत
ये मैंने, तुमने, सबने जाना
पर बात जब सृजन की हो
मां की कोख में ही होता है आना..!

मां अनपढ़ हो तब भी
गणित में बड़ी दिलदार होती है
दो रोटी मांग कर देखो
वो हरदम चार देती है..!

साल में एक दिन
मदर्स डे आता है
सब कहते हैं आज
मां का दिन है
कोई तो बतलाए
दिन कौन-सा मां के बिन है..!

ईश्वर ने सृष्टि को रचकर
उसे करीने से सजाया
पर हर बच्चे को पालने में
स्वयं को सक्षम नहीं पाया
तब हारकर उसने मां को बनाया..!

मां वो है
जो बच्चों के पथ में फूल बिछा
स्वयं कांटों पर चल लेती है
मां वो है
जो बच्चों के आज की खातिर
अपना सारा कल देती है..!

सोचो किस कदर वही मां
खून के आंसू रोती होगी
जब घर के बंटवारे में
छाती के टुकड़े ढोती होगी..!

धरा-आसमां बंट जाए सब
मां कब-कहां बंटती है
गोद इतनी विशाल उसकी
पूरी कायनात उसमें अंटती है..!

[डॉ. मधेपुरी की कविता]

 

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बेटे की शादी पर मिले और खूब मिले लालू-नीतीश

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप और पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या की शादी ने यह बात एक बार फिर स्पष्ट कर दी कि सियासत अपनी जगह है और व्यक्तिगत संबंध और भारतीय संस्कार अपनी जगह। यह बात खासकर यहां लालू और नीतीश के संदर्भ में है। इस हाई प्रोफाईल शादी में जुटे तो देश भर के कई दिग्गज थे लेकिन सबकी निगाहें टिकी थीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर। महागठबंधन टूटने के बाद पहली बार उन्हें और लालू प्रसाद यादव को एक साथ किसी मंच पर होना था। इस बीच इनके संबंधों में जिस तरह की कड़वाहट देखने को मिली थी और खासकर महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे तेजस्वी जिस तरह सोशल मीडिया पर हमलावर थे, उससे उत्सुकता और बढ़ गई थी। पर हुआ वही जो असल में होना चाहिए था।

नीतीश कुमार ना केवल तेजप्रताप की शादी में शामिल हुए, बल्कि पूरी आत्मीयता और सहजता के साथ वरमाला की पूरी रस्म के दौरान मंच पर ही मौजूद रहे। लालू ने भी गर्मजोशी दिखाने में कोई कसर ना छोड़ी। उन्होंने उठकर नीतीश का स्वागत किया और देर तक उनसे हाथ मिलाए रहे। यही नहीं, उनके सभी बच्चे बारी-बारी से चाचा नीतीश से मिले। जो नहीं मिले थे उन्हें राबड़ी ने बुला-बुला कर मिलाया। नीतीश और राबड़ी एक साथ एक सोफे पर बैठे थे, बिल्कुल देवर-भाभी की तरह। मीसा से लेकर तेजस्वी तक आए और मां और चाचा नीतीश के बीच बैठ कर तस्वीर खिंचवाई। बगल के सोफे पर लालू राज्यपाल सत्यपाल मलिक के साथ बैठे थे। अद्भुत दृश्य था ये।

बहरहाल, तेजप्रताप की शादी में देश के कई दलों के दिग्गज शामिल हुए। इन नेताओं में फारूक अब्दुल्लाह, अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव, अजीत सिंह, शरद यादव, प्रफुल्ल पटेल, शत्रुघ्न सिन्हा, दिग्विजय सिंह, हेमंत सोरेन, सीताराम येचुरी एवं डी. राजा प्रमुख थे। इन नेताओं ने भले ही कोई सियासी बयान नहीं दिया, मगर समारोह में एकसाथ इनकी मौजूदगी बहुत कुछ कह गई।

इस बेहद खास शादी में बाबा रामदेव और रामजेठ मलानी ने भी उपस्थिति दर्ज की। बिहार के सभी प्रमुख नेता – रामविलास पासवान, जीतनराम मांझी, उपेन्द्र कुशवाहा आदि – मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पोलैंड अपनी यात्रा के कारण समारोह में नहीं आ सके।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ आईं उनकी पत्नी डिंपल यादव ने इस मौके पर बड़ी अच्छी बात कही कि “दुख और सुख जीवन का हिस्सा हैं। आते-जाते रहेंगे। हम लालू परिवार की खुशियों में शामिल होने आए हैं।” देश भर के दिग्गजों और राज्य के कोने-कोने से आए बीस हजार से ज्यादा मेहमानों की मौजूदगी यही तो बता और जता रही थी।

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शरद यादव की राज्यसभा सीट पर शीघ्र होगा चुनाव !

जदयू के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को चुनाव आयोग से मिलकर शरद यादव की राज्यसभा सीट पर जल्द चुनाव कराने की अपील की। प्रतिनिधिमंडल में जदयू नेता केसी त्यागी, आरसीपी सिंह, ललन सिंह और संजय झा शामिल थे। माना जा रहा है कि शरद यादव की राज्यसभा सीट पर चुनाव आयोग शीघ्र चुनाव कराने का निर्णय ले सकता है।

जदयू नेता केसी त्यागी ने इस संदर्भ में कहा कि संविधान के मुताबिक छह महीने के भीतर रिक्त सीट पर चुनाव कराना जरूरी है और राज्यसभा के सभापति के फैसले के मद्देनजर शरद यादव की सीट को छह जून तक भरना जरूरी है। जदयू का तर्क है कि कोर्ट ने राज्यसभा के सभापति के फैसले को कोई स्थगन आदेश जारी नहीं किया है बल्कि राज्यसभा सदस्य के रुप में उन्हें दी जाने वाली सुविधाओं को बरकरार रखने की बात कही है।

वहीं, जदयू नेताओं की चुनाव आयोग से मुलाकात पर शरद यादव ने कहा कि कोर्ट-मुकदमों में हमारा दिमाग नहीं चलता है। यह कोर्ट को तय करना है कि राज्यसभा के सभापति का फैसला कितना जायज और नाजायज है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में मजा नहीं आता है। मैं पहले भी लोकसभा का चुनाव लड़ चुका हूं और फिर चुनाव लडूंगा। देशभर में विपक्ष को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश भी जारी है।

बता दें कि पार्टी लाइन से अलग कार्य करने व पार्टी विरोधी बयान देने के मुद्दे पर जदयू ने राज्यसभा के सभापति से शरद यादव की सदस्यता खत्म करने की अपील की थी और बाद में दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद शरद यादव की सदस्यता खत्म कर दी गई थी। उनकी सदस्यता खत्म होने के अब छह महीने पूरे होने वाले हैं, लिहाजा खाली सीट शीघ्र चुनाव हो जाना चाहिए। वैसे बताते चलें कि शरद यादव की सदस्यता मामले में 23 मई को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होने वाली है।

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कोरी अफवाह है राहुल-अदिति की शादी की ख़बर

क्या पिछले एक-दो दिन में फेसबुक या व्हाट्सएप पर आपने भी ये ख़बर पढ़ी कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की शादी रायबरेली की कांग्रेस विधायक अदिति सिंह से होने जा रही है? अगर हाँ, तो आपको बता दें कि ये ख़बर कोरी अफवाह है! जी हाँ, इन सभी अफवाहों को किसी और ने नही, स्वयं अदिति सिंह ने ये कहते हुए नकारा कि राहुल गांधी उनके बड़े भाई जैसे हैं।

राहुल से होने वाली अपनी तथाकथित शादी का पुरजोर खंडन करते हुए अदिति सिंह ने कहा, ‘पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर जो अफवाह फैलाई जा रही है, उससे हैरान हूं। राहुल जी न सिर्फ हमारी पार्टी के अध्यक्ष हैं, बल्कि मेरे बड़े भाई जैसे हैं। मैं उनका बेहद सम्मान करती हूं। आप सब से निवेदन है कि शादी से संबंधित किसी अफवाह पर ध्यान न दें।’

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे थे कि जल्द ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और रायबरेली की कांग्रेस विधायक अदिति सिंह की शादी होने वाली है। यह दावा राहुल गांधी और अदिति सिंह की तस्वीरों के आधार पर किया जा रहा था, जिसमें राहुल गांधी, अदिति सिंह और उनके परिवार के कुछ लोग दिख रहे हैं। जल्द ही ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं और इन  तस्वीरों को लेकर कई दावे किए जाने लगे।

बहरहाल, मीडिया से बातचीत में अदिति सिंह ने यह आशंका भी जताई है कि इन अफवाहों के पीछे राजनीतिक साजिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सियासी तौर पर उन्हें कमजोर करना चाहते हैं और उन्हीं लोगों ने इस तरह की अफवाह फैलाई होगी। साथ ही अदिति ने साफ किया कि वह इन चीजों से डरने वाली नहीं है और अफवाहें उन्हें तोड़ नहीं सकती हैं।

चलते-चलते बता दें कि अदिति सिंह ने 90 हजार से अधिक मतों के अंतर के साथ अपना पहला चुनाव जीता है और वह ड्यूक यूनिवर्सिटी, यूएसए से मैनेजमेंट स्टडीज में मास्टर्स हैं। वह रायबरेली विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रह चुके अपने पिता अखिलेश की जगह लेने के लिए भारत लौट आईं। 29 वर्षीया विधायक को प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता है।

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अब राष्ट्रपति के वाहनों पर भी लगेंगे नम्बर प्लेट

सात दशकों से देश के राष्ट्रपति एवं राज्यपालों की गाड़ियों/कारों पर नंबर प्लेट की जगह चार सिंह वाले राजकीय प्रतीक (अशोक स्तंभ) लगे रहे जो अब नहीं रहेंगे | ऋषितुल्य जीवन जीने वाले राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम ने तो ‘महामहिम’ को भी हटाने की इच्छा व्यक्त करते हुए………….. हम भारत के लोग यानी….We the people of India समूह में समा जाना चाहते थे |माला का एक फूल बनकर “कौन नीचे, कौन ऊपर” के भेद को मिटा देना चाहते थे |यहां यह बता देना अनुचित नहीं होगा कि समाजसेवी साहित्यकार व डॉ.कलाम के करीबी रहे डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के प्रयास को यदि देश मान लिया होता और डॉ.कलाम को दोबारा राष्ट्रपति बना दिया होता तो ये सब कुछ होता ही, बल्कि 2020 तक भारत विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में भी खड़ा हो जाता…..|

बता दें कि अब देश के शीर्ष संवैधानिक प्राधिकारियों यथा- महामहिम राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति, राज्यपाल-उपराज्यपाल समेत विदेश मंत्रालय के वीवीआईपी सचिवों के वाहनों (कारों) पर रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करते हुए नंबर प्लेट शीघ्र ही लगने लगेंगे |

यह भी जानिये कि एक गैर-सरकारी संगठन ‘न्याय भूमि’ के द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल एवं न्यायमूर्ति सी.हरिशंकर की खंडपीठ से कहा कि संवैधानिक प्राधिकारियों एवं माननीयोँ की कारों का पंजीकरण कराने के लिए संबंधित प्राधिकरणों को पत्र लिखा जा चुका है |

बता दें कि सभी संबंधित प्राधिकरणों को पत्र देकर यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उनके यहां इस्तेमाल में लाए जा रहे सभी वाहनों का पंजीकरण कराया जाए तथा नियमानुसार पंजीकरण नंबर प्रदर्शित किया जाए |

ज्ञातव्य हो कि केंद्र सरकार द्वारा कोर्ट में प्रतिनियुक्त वकील ने कोर्ट को विधिवत यह जानकारी दे दी है कि महामहिम उपराष्ट्रपति और उनकी धर्मपत्नी के इस्तेमाल वाली कारों सहित सचिवालय के सभी वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करा लिया गया है | इस आशय का जवाब भी उपराष्ट्रपति कार्यालय से प्रेषित किया जा चुका है|

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