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भारत का यह प्रथम विमान जैव ईंधन ले भरी उड़ान…….!!

भारत की एक निजी विमानन कंपनी ‘स्पाइसजेट’ ने देश की पहली “जैव जेट ईंधन’ से चलने वाली फ्लाइट का सफल परिचालन किया | इस सफल परीक्षण उड़ान के साथ ही भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जहाँ विमानों को उड़ाने में जैव ईंधन का प्रयोग होने लगा है | अब भारत उन चुनिंदा देशों के ‘क्लब’ में शामिल हो गया जिसके पास यह क्षमता है |

बता दें कि इस कंपनी द्वारा निर्मित बंबार्डियर क्यू-400 विमान ने जैव ईंधन का इस्तेमाल करते हुए 43 मिनट में देहरादून से दिल्ली तक की उडान भरी | एयरलाइंस ने बताया कि इस उड़ान में भारत ने पहली बार जैव जेट ईंधन का आंशिक रूप से उपयोग किया- जिसमें 75% एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) तथा 25% ही जैव जेट ईंधन (JJF) का मिश्रण था |

यह भी जानिए कि इस क्यू-400 विमान में कुल 78 सीटें होने के बावजूद इस परीक्षण उड़ान में केवल 20 लोग ही सवार हुए थे जिसमें नागर विमानन महानिदेशालय एवं स्पाइसजेट के चेयरमैन एवं एम डी अजय सिंह के साथ IIP के कुछ वैज्ञानिक भी थे |

चलते-चलते यह भी बता दें कि उत्तराखंड राज्य के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जहाँ इस परीक्षण विमान को जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर फ्लैग ऑफ किया वहीं से दिल्ली पहुंचने पर अगवानी हेतु हवाई अड्डे पर पूर्व से पहुंचे हुए थे- भारत सरकार के मंत्री द्वय नितिन गडकरी एवं सुरेश प्रभु के अतिरिक्त कुछ वैज्ञानिक भी |

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‘सवर्ण सेना’ का भारत बंद और कुछ जरूरी सवाल

एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध और गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की मांग को लेकर गुरुवार को आहूत भारत बंद का असर बिहार समेत कई राज्यों में देखा गया। क्या आपने सोचा कि बिना किसी राजनीतिक समर्थन या प्रचार के बंद का इतना व्यापक असर कैसे हुआ? इसका आह्वान करने वाला संगठन ‘सवर्ण सेना’ असल में क्‍या है, उसका नेटवर्क कितना बड़ा है और वह कैसे काम करता है?
सबसे पहले तो यह जानें कि तथाकथित तौर पर सवर्ण हितों की रक्षा के लिए गठित ‘सवर्ण सेना’ का सीधा कनेक्शन बिहार से है। जी हाँ, इसका गठन बिहार के जहानाबाद के रहने वाले भागवत शर्मा ने किया है। भागवत फिलहाल अरुणाचल प्रदेश के सेंट्रल यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर हैं और गरीब सवर्णों के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि एससी-एसटी एक्ट में सुधार हो क्योंकि इस कानून के तहत बड़े पैमाने पर फर्जी मुकदमे होते हैं।
बकौल भागवत शर्मा उन्‍होंने सवर्णों के मुद्दों को उठाने के लिए 2017 में सवर्ण सेना बनाई। उनके दावे के मुताबिक आज दो साल बाद इस सेना में 50 हजार से अधिक सदस्य हैं। महज दो सालों में यह संगठन देश भर में फैल गया है और बड़ी बात यह कि इसका प्रचार-प्रसार केवल सोशल मीडिया के माध्‍यम से हो रहा है। भारत बंद का प्रचार भी सवर्ण सेना ने सोशल मीडिया पर ही किया। भागवत शर्मा कहते हैं कि आज के युग में वॉट्सएप और फेसबुक के माध्‍यम से कम समय में अधिक लोगों तक पहुंचना संभव है। साथ में यह भी कि आगे वे देश व समाज से जुड़े अन्‍य मुद्दे भी उठाएंगे।
बहरहाल, आगे वास्तव में क्या होगा यह तो समय बताएगा, फिलहाल यह प्रश्न विचारणीय जरूर है कि कल जो कुछ हुआ वो सोशल मीडिया की सफलता है या सूचना के नए माध्यमों की बेहिसाब बढ़ती ताकत का संकेत, जिसके अनियंत्रित होने से देश और समाज का बड़ा नुकसान संभव है? एक बात और, एक ‘व्यक्ति’ के विचार अगर व्यापक हित में हों तब भी क्या ‘संस्था’ के अभाव में उन विचारों को सही स्वरूप और सार्थक परिणति देना क्या संभव है?

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भारत के आई.पी.पी. बैंक का कारबार अहर्निश होगा आपके द्वार

मधेपुरा में भी आई.पी.पी बैंक (इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक) का शुभारंभ हो गया जिसका उद्घाटन 1 सितंबर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में किया और सारे देशवासियों ने टीवी पर उसका सीधा प्रसारण भी देखा।

मधेपुरा मुख्य डाकघर के डाकपाल राजेश कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि शहीद चुल्हाय मार्ग स्थित बी.पी.मंडल नगर भवन में IPPB (India Post Payment Bank) के पाँच ब्रांच का शुभारंभ बिहार सरकार के कला संस्कृति मंत्री श्री कृष्ण कुमार ऋषि, एससी-एसटी मंत्री डॉ.रमेश ऋषि देव, समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, डीडीसी मुकेश कुमार सहित जेडीयू के जिलाध्यक्ष प्रो.विजेंद्र नारायण यादव, भाजपा के स्वदेश कुमार, डॉ.अमोल राय, ध्यानी यादव आदि की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुई।

बता दें कि डाक सेवा के पदाधिकारीगण सर्वश्री शिवलेश सिंह, राजेश कुमार, जगदेव मंडल, संतोष कुमार चौधरी, विवेक कुमार एवं चंचल यादव आदि ने विभिन्न प्रकार की जानकारियाँ देने हेतु शुक्रवार को जागरूकता रैली निकालकर लोगों को बताया कि 31 दिसंबर तक जिले में आईपीपी बैंक की 204 शाखाएं शुरू करने की योजनाएं हैं।

ब्रांच मैनेजर शिवलेश सिंह ने कहा कि देश का सबसे बड़ा नेटवर्क होगा आईपीपी बैंक जिसका मुख्य लक्ष्य गांव के वंचितों एवं हासिये पर के लोगों को वित्तीय सुविधा से जोड़ना है। जिले में फिलहाल 500 खाते खोले जा चुके हैं जिसमें कुछ बचत खातेे हैं और कुछ चालूू खाता है।

समारोह को सर्वप्रथम मधेपुरा के भीष्म पितामह डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने संबोधित करते हुए यही कहा-

एक टाॅल फ्री फोन करने पर पोस्टमैन आपके द्वार पर दस्तक देगा। वह साथ में एक मशीन भी लाएगा जिससे वह किसी भी तरह की जमा या निकासी के लिए आपकी मदद करेगा। बिजली, गैस या पानी के बिल भुगतान करने के अलावे आप घर बैठे दूसरों के खाते में मनी ट्रांसफर भी कर सकते हैं। जीवन बीमा किस्त आदि का भी भुगतान कर सकते हैं।

जहां इस अवसर पर बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री श्री कृष्ण कुमार ऋषि ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में अब एक नई क्रांति का संचार होगा तथा यह मील का पत्थर साबित होगा वहीं एससी-एसटी मंत्री डॉ.रमेश ऋषिदेव ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से शुभारम्भ हो रही इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति भी डिजिटल मेनस्ट्रीम का हिस्सा बनेगा ही बनेगा। अनपढ़ व्यक्ति भी इस प्रणाली का उपयोग कर सकता है क्योंकि उसे खाता अथवा पिन नंबर भी याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

कार्यक्रम का श्रीगणेश अतिथियों को बुके देकर किया गया तथा मंत्रीद्वय ने दीप प्रज्वलित कर सम्मिलित रूप से उद्घाटन किया। आरंभ से अंत तक कार्यक्रम का सफल संचालन अंतर्राष्ट्रीय उद्घोषक पृथ्वीराज यदुवंशी ने किया तथा ब्रांच मैनेजर शिवलेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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एशियन गेम्स के इतिहास में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

जकार्ता में हो रहे एशियन गेम्स के 14वें दिन शनिवार को भारत ने 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक अपनी झोली में डाले। इसके साथ ही 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य पदक समेत भारत के पदकों की संख्या 69 हो गई। टूर्नामेंट में आठवें नंबर पर मौजूद भारत का एशियन गेम्स के इतिहास में अब तक का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले भारत ने 2010 में चीन के ग्वांगझू में हुए एशियन गेम्स में 65 पदकों के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। रविवार को एशियाड का आखिरी दिन है, लेकिन इस दिन भारत की किसी भी स्पर्धा में भागीदारी नहीं है।

गौरतलब है कि अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बराबरी भारत ने शुक्रवार को ही कर ली थी लेकिन शनिवार को बॉक्सर अमित पंघल और ब्रिज में शिवनाथ सरकार एवं प्रणव वर्धन की जोड़ी ने स्वर्ण, महिला स्कवैश टीम ने रजत और पुरुष हॉकी टीम ने पाकिस्तान को हराकर कांस्य पदक हासिल कर इस आंकड़े को 69 तक पहुंचा दिया। टूर्नमेंट में अब तक 129 गोल्ड मेडल के साथ कुल 283 पदक हासिल कर चीन पहले नंबर पर बना हुआ है। वहीं, जापान 72 गोल्ड मेडल जीतकर 200 पदकों के साथ दूसरे पायदान पर है। जबकि साउथ कोरिया 48 गोल्ड मेडल जीतकर 172 पदकों के साथ तीसरे नंबर पर है। पदक तालिका में इंडोनेशिया चौथे, उज्बेकिस्तान 5वें, ईरान छठे और चीनी ताइपे सातवें स्थान पर है।

इस बार भारत द्वारा जीते गए स्वर्ण पदकों की बात करें तो एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा ने जेवलिन थ्रो, मनजीत सिंह ने 800 और जिनसन जॉनसन ने 1,500 मीटर रेस, तेजिंदर पाल सिंह तूर ने शॉट पुट, अरपिंदर सिंह ने ट्रिपल जम्प, हिमा दास, पूवम्मा राजू मछेत्रिया, सरिताबेन लक्ष्मणभाई गायकवाड़, विस्मया कोरोत वेल्लुवा ने महिला 4×400 मीटर और स्वप्ना बर्मन ने महिला हेप्टाथलॉन में स्वर्ण पदक जीते। वहीं निशानेबाजी में सौरभ चौधरी ने पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल और राही जीवन सरनोबत ने महिला 25 मीटर पिस्टल में देश को स्वर्ण पदक दिलाया। कुश्ती में बजरंग पुनिया पुरुष 65 किग्रा और विनेश फोगाट महिला 50 किग्रा वर्ग में सोना जीतने में सफल रहे। टेनिस में रोहना बोपन्ना और दिविज शरण पुरुष युगल का स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे तो मुक्केबाजी में अमित पंघल ने 49 किग्रा वर्ग में पहली बार सोना दिलाया। रोइंग में स्वर्ण सिंह, ओम प्रकाश, सुखमीत सिंह और बब्बन दत्तू भोकानल की टीम ने देश को पहली बार क्वाड्रूपुल स्कल्स स्पर्द्धा में स्वर्ण दिलाया। ब्रिज, जिसे एशियाड में पहली बार शामिल किया गया था, में प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार मेन्स पेयर में चैम्पियन बने।

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करुणानिधि की घोषणा को परिणति दें स्टालिन: नीतीश कुमार

गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चेन्नई में स्व. एम करुणानिधि की स्मृति में आयोजित सभा में शामिल हुए। इस मौके पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि स्व. करुणानिधि ने कहा था कि अगर डीएमके सत्ता में वापस आई तो लोकहित में शराबबंदी को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। उनके उत्तराधिकारी के रूप में अब एमके स्टालिन का यह दायित्व बनता है कि वह करुणानिधि की घोषणा को तार्किक परिणति तक पहुंचाएं।

गौरतलब है कि डीएमके ने वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में शराबबंदी को प्रमुखता दी थी। बिहार में लागू शराबबंदी की प्रतिध्वनि उनकी घोषणा में परिलक्षित हुई थी। अपने एक इंटरव्यू में करुणानिधि ने कहा था कि जब बिहार में शराबबंदी हो सकती है तो फिर तमिलनाडु में क्यों नहीं? इस ओर इंगित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि देश महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने जा रहा है। राष्ट्रपिता के प्रति सबसे बड़ा सम्मान यह होगा कि इस मौके पर पूरे देश में शराबबंदी लागू की जाए। उन्होंने कहा कि बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी बापू के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. करुणानिधि को याद करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे सामाजिक न्याय एवं समानता के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे। उन्होंने जीवन भर गरीब एवं पिछड़ों के हक की लड़ाई लड़ी। सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए मंडल कमीशन की रिपोर्ट के अनुरूप आरक्षण नीति को लागू करने में उनकी अहम भूमिका रही। केन्द्र में सरकार के गठन में भी स्व. करुणानिधि ने कई बार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपनी राजनीतिक कुशलता का परिचय दिया। उनके नहीं रहने से तमिलनाडु के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में एक युग का अंत हो गया है।

बता दें कि स्मृति-सभा में भाजपा की ओर से केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भाग लिया, जबकि विपक्षी दलों में कांग्रेस की ओर से गुलाम नबी आजाद, सीपीएम की ओर से सीतारीम येचुरी, नेशनल कांफ्रेंस की ओर से फारूक अब्दुल्ला, टीएमसी की ओर से डेरेक ओ ब्रायन आदि नेताओं ने हिस्सा लिया।

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जकार्ता में जारी गेम्स में नीरज ने रचा नया इतिहास !

मात्र 20 वर्षीय हरियाणवी एथलीट नीरज चोपड़ा जकार्ता में जारी इस 18वें एशियन गेम्स के उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के ध्वजवाहक भी रहे हैं। सोमवार को एशियाई खेलों के नौवें दिन नीरज ने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम कर भारत का नाम रोशन किया है।

बता दें कि इस तरह भारत ने पहली बार एशियन गेम्स की भाला फेंक (Javelin Throw) स्पर्धा में सुनहरा तमगा अपने नाम किया है। जानिए कि नौ दिनों के खेल में भारत का आठवां और एथलेटिक्स में दूसरा स्वर्ण पदक है। भारत की तरफ से एशियन गेम्स में भाला फेंक पुरुष वर्ग में 36 वर्ष पूर्व 1982 ई. में नई दिल्ली में गुरतेज सिंह ने कांस्य पदक जीता था।

हरियाणा के पानीपत में जन्मे नीरज ने मधेपुरा अबतक को बताया कि उनके छह प्रयासों में से दो (दूसरे और छठे) को अयोग्य घोषित कर दिया गया…… लेकिन तीसरे प्रयास में ही नीरज ने अपनी सर्वश्रेष्ठ थ्रो 88.06 मीटर की इस कदर फेंकी कि एशियन गेम्स के भाला फेंक स्पर्धा वाले स्वर्ण पदक पर भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा का नाम अंकित करा लिया क्योंकि रजत पदक जीतने वाले चीन के लियु क्रिझन की जेवलिन नीरज के मुकाबले 5.84 मीटर पीछे रही और कांस्य पदक जीतने वाले पाकिस्तान के नदीम अरशद की जेवलिन 7.31 मीटर पीछे गिरी। नीरज के तीसरे थ्रो के बाद कोई भी खिलाड़ी उनके आस-पास तक नहीं पहुंच सका।

चलते-चलते यह भी बता दें कि नीरज ने एशियन गेम्स के 67 साल के इतिहास में पहली बार भारत के लिए जेवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। यह भी जान लें कि 1951 ई. से ये एशियन गेम्स आयोजित हो रहे हैं, तब से मात्र एक ‘कास्य’ ही नसीब हुआ था।

यह भी कि नीरज खुद के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ते जा रहे हैं। गत मई महीने में दोहा में आयोजित ‘डायमंड लीग सीरीज’ के पहले चरण में नीरज ने 87.43 मीटर के साथ रिकॉर्ड बनाया था। नीरज के नाम पर 86.48 मीटर का जूनियर विश्व रिकॉर्ड अभी भी कायम है।

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चलो, कुछ यूँ मनाएं रक्षाबंधन

नेता और स्टेट्समैन में क्या फर्क होता है, ये जानना हो तो तो कोई नीतीश कुमार के कार्यों को देखे। एक अच्छा नेता वर्तमान को संवार सकता है, लेकिन एक स्टेट्समैन आने वाली पीढ़ियों के लिए सोचता है। विज़न दोनों के पास होता है, लेकिन दोनों के फैलाव और प्रभाव में बहुत फर्क होता है। अब रक्षाबंधन को ही लें। इस दिन अपनी बहनों के अलावे अपने जिले या राज्य की अन्य बच्चियों या महिलाओं से राखी बंधवाते कई नेता देखे जा सकते हैं, लेकिन पिछले छह वर्षों से इस दिन पेड़ों को राखी बांधते किसी राज्य का मुखिया देखा जाता है तो वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं।

जी हाँ, यह बिहार के इस अनोखे रक्षाबंधन का सिलसिला आज से छह साल पहले शुरू हुआ। वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रक्षाबंधन पर राजधानी वाटिका में वृक्षों को रक्षा-सूत्र से बांधकर इनकी हिफाजत करने तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। आज भी रक्षाबंधन के मौके पर नीतीश कुमार ने राजधानी वाटिका स्थित अपने लगाए हुए पाटलि के वृक्षों को राखी बांधी। इस मौके पर भव्य समारोह आयोजित हुआ जिसमें उपमुख्यमंत्री एवं वन व पर्यावरण मंत्री सुशील कुमार मोदी, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा, पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, मुख्य वन संरक्षक डीके शुक्ला सहित कई गणमान्य ने वृक्षों को रक्षा-सूत्र से बांधा।

इस बेहद खास मौके पर मुख्यमंत्री ने वृक्षारोपण भी किया। उन्होंने आह्वान किया कि रक्षाबंधन के दिन सभी लोग वृक्ष को रक्षा सूत्र से बांधें। बिहार में यह एक नई परम्परा शुरू हुई है जिसे आप सब आगे बढ़ाएं। मुख्यमंत्री के आह्वान पर लोगों ने इको पार्क के वृक्षों को राखी बांधी। विभिन्न स्कूलों की बच्चियों का उत्साह इस अवसर पर देखने लायक था। क्या हम यह संकल्प नहीं ले सकते कि पहले बिहार का, फिर देश का हर व्यक्ति इस दिन एक पेड़ को जरूर राखी बांधे? नीतीश कुमार के विज़न को सही विस्तार मिले, इसके लिए क्या इतनी-सी जहमत नहीं उठा सकते हमलोग?

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप’

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बजरंग पूनिया ने भारत को दिलाया पहला गोल्ड

भारतीय रेसलर बजरंग पूनिया ने 18 वें एशियाई खेलों में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलवाया। ये मेडल पुनिया ने जापान के रेसलर ताकातिनी दायची को हराकर जीता। हरियाणा के 24 वर्षीय इस लाल ने पुरुषों के 65 किलोग्राम भारवर्ग फ्रीस्टाइल स्पर्द्धा में ये मेडल जीता। जापानी पहलवान ने बजरंग को अच्छी टक्कर दी लेकिन उन्होंने फाइनल मुकाबला 11-8 से अपने नाम कर लिया। बजरंग की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी। सबसे खास और दिल को छूने वाली बात यह कि पदक जीतने के बाद बजरंग ने ट्वीट किया कि “मैं अपना ये मेडल पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित करता हूं। नमन।”

गौरतलब है कि बजरंग ने इससे पहले अपने तीनों मुकाबले एकतरफा अंदाज में जीते हैं। उन्होंने सेमीफाइनल में मंगोलिया के बातचुलून को 10-0 से, क्वार्टर फाइनल में ताजिकिस्तान के फेजेव अब्दुल कासिम को 12-2 से और पहले मुकाबले में उज्बेकिस्तान के सिरोजिद्दीन खासानोव को 13-3 के बड़े अंतर से मात दी थी।

बता दें कि बजरंग ने चार महीने में दूसरी बार मल्टी नेशनल टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने इससे पहले अप्रैल में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। यही नहीं, उन्होंने चार साल पहले इंचियोन एशियन गेम्स और ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल (61 किग्रा.) अपने नाम किया था। इसके अलावे बजरंग 2013 में बुडापेस्ट वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुके हैं।

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पंचतत्व में विलीन हुए अटल

भारतरत्न, कविहृदय जननेता, देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शुक्रवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गए। दिल्ली के स्मृति स्थल पर राष्ट्र ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। उनकी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने उन्हें मुखाग्नि दी। उससे पहले नातिन निहारिका ने उनके पार्थिव शरीर पर से तिरंगा ग्रहण किया। बेटी, नातिन और परिवार के लोग ही नहीं स्मृति स्थल पर मौजूद ऐसा कोई नहीं था जिसकी आंखों में आंसू ना हो। अटल थे ही कुछ ऐसे। सियासत की दुनिया का उन्हें ‘अजातशत्रु’ कहा जाता था क्योंकि उन्होंने हमेशा दोस्त बनाए, दुश्मन उनका कोई नहीं था।

Leaders at Smriti-Sthal
Leaders at Smriti-Sthal

मुखाग्नि देने से पूर्व स्मृति स्थल पर तीनों सेनाओं की ओर से अटल जी को अंतिम सलामी दी गई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वाजपेयी के पुराने साथी रहे लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, संघ प्रमुख मोहन भागवत, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सपा नेता मुलायम सिंह यादव समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं सभी विपक्षी दलों के नेता अंतिम विदाई देने मौजूद रहे। पड़ोसी देशों की ओर से भूटान नरेश जिग्मे नामग्याल वांग्चुक, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और वाजपेयी के मित्र रहे हामिद करजई भी श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के विदेश मंत्री और पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने भी इस मौके पर उपस्थिति दर्ज की।

इससे पहले वाजपेयी की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। वाजपेयी की अंतिम यात्रा में भाजपा मुख्यालय से उनके पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे वाहन के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पैदल चल रहे थे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और विजय रूपाणी, शिवराज चौहान, योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडणवीस समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी वाहन के पीछे चल रहे थे। अटल जी के अंतिम दर्शन के लिए 7 किलोमीटर लंबे मार्ग पर उमस भरी गर्मी के बावजूद हजारों हजार की संख्या में लोग उमड़े चले आ रहे थे। ‘अटल बिहारी अमर रहे’ जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।

अटल जी का शरीर भले ही अब इस दुनिया में नहीं है पर उनके अटल विचार, सिद्धांत और नैतिक मूल्य हमेशा देशवासियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। अटल ने कविता के जरिए पहले ही अपने अंतिम सफर का जिक्र करते हुए कहा था, ‘मौत की उम्र क्या है? दो पल भी नहीं, जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?’ अपनी ऐसी ही पंक्तियों, सम्मोहित कर देने वाले भाषणों और अनगिनत अवदानों की बदौलत युगों-युगों तक याद किए जाते रहेंगे हम सबके अटल जी। उन्हें हृदय की सम्पूर्ण श्रद्धा अर्पित करते हुए सादर नमन..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप’

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लौटकर आइएगा अटलजी..!

भारत के अनमोल रत्न, देश के सार्वकालिक महान व्यक्तित्वों में एक, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। देश भर की दुआएं काम ना आईं। कल हमलोगों ने राष्ट्रीय उत्सव मनाया और आज नियति ने सवा सौ करोड़ भारतवासियों को राष्ट्रीय शोक दे दिया। अटल जी पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे और 11 जून को तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें एम्स लाया गया था। दो दिनों से वे वेंटिलेटर पर थे और आज 94 वर्ष की उम्र में शाम 5 बजकर 5 मिनट पर यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।

किसी बड़े व्यक्ति के जाने पर आमतौर कहने का चलन है कि ये ‘अपूरणीय क्षति’ है, पर अटल बिहारी वाजपेयी नाम के शख्स के जाने से बनी रिक्तता सचमुच कभी नहीं भरी जा सकती। भारत के मानचित्र पर जैसे हिमालय जैसा दूसरा संबल नहीं हो सकता, हमारी अंजुलि में जैसे गंगा जैसा दूसरा जल नहीं हो सकता, वैसे ही इस वसुंधरा पर दूसरा अटल नहीं हो सकता। संवेदना से ओतप्रोत कवि, विचारों से लबालब बेजोड़ वक्ता, विनम्रता और शालीनता की प्रतिमूर्ति, नेताओं की भीड़ में अद्वितीय स्टेट्समैन जिसकी भव्यता ना तो किसी पार्टी में समा सकती थी ना प्रधानमंत्री जैसे पद में – काजल की कोठरी कही जाने वाली राजनीति में जैसे तमाम अच्छी चीजें उन्होंने समेट रखी हो अपने भीतर।

आज जबकि राजनीति पर विश्वसनीयता का संकट आन पड़ा है, ‘सांकेतिक’ ही सही अटलजी की मौजूदगी की बेहद जरूरत थी हमें। बहरहाल, पूरा देश शोकाकुल है आज। राजनेताओं से लेकर तमाम क्षेत्रों के दिग्गज उन्हें भाव-विह्वल श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “उनका जाना पिता का साया सिर से उठने जैसा है।” बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “देश ने सबसे बड़े राजनीतिक शख्सियत, प्रखर वक्ता, लेखक, चिंतक, अभिभावक एवं करिश्माई व्यक्तित्व को खो दिया।” उनके निधन को लेकर सात दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। कई राज्यों ने भी राजकीय शोक और अवकाश की घोषणा की है। बिहार में सात दिनों के राजकीय शोक और शुक्रवार 16 अगस्त के अवकाश की घोषणा की गई है।

अटलजी का पार्थिव शरीर कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर रातभर रखा जाएगा। सुबह 9 बजे पार्थिव देह भाजपा मुख्यालय ले जाई जाएगी। दोपहर 1 बजे अंतिम यात्रा शुरू होगी, जो राजघाट तक जाएगी। वहां महात्मा गांधी के स्मृति स्थल के नजदीक 4 बजे अटलजी का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटलजी की अस्थियां प्रदेश की सभी नदियों में प्रवाहित की जाएंगी।

25 दिसंबर 1924 को जन्मे अटलजी 10 बार लोकसभा के सदस्य, दो बार राज्यसभा के सदस्य और तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। उनके प्रशंसक भारत ही नहीं दुनिया के हर कोने में मिल जाएंगे। उन जैसे नेता सदियों में होते हैं और इतिहास के पन्नों पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। अटलजी, श्रद्धांजलि शब्द छोटा है आपके लिए, श्रद्धा का पूरा घट ही अर्पित करता हूँ आपको… बस अपना कहा पूरा करिएगा – मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं? – लौटकर आइएगा अटलजी..!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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