मधेपुरा के वृद्धों एवं दिव्यांगों के लिए भूकम्प सुरक्षा सप्ताह !

मधेपुरा के बीपी मंडल इंडोर स्टेडियम में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला आपदा प्रबंधन के द्वारा 18 जनवरी को माॅक ड्रिल यानि State Disaster Response Force (SDRF) की टीम के नेतृत्व में मधेपुरा के डॉ.कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने खासकर जिले के प्रायः सभी प्रखंडों से आये हुए दिव्यांग बच्चों एवं उनके माता-पिता व वृद्धों से इंस्पेक्टर हंसलाल गुप्ता व एसआई राम लखन की टीम के विंध्याचल प्रसाद, सिकन्दर कुमार, प्रमोद राय, अशोक शर्मा, सुनील पाल, कुंदन भारती आदि की उपस्थिति में यही कहा –

हौसले बुलंद एवं इरादे मजबूत हो तो दुनिया में कुछ भी पाना आसान हो जाता है |

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri observing demonstrations given by State Disaster Response Force (S.D.R.F.) Team to the Divyangs and old age people during Bhukamp Shuraksha Saptaah at B.P.MANDAL Indoor Stadium Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri observing demonstrations given by State Disaster Response Force (S.D.R.F.) Team to the Divyangs and old age people during Bhukamp Shuraksha Saptaah at B.P.MANDAL Indoor Stadium Madhepura.

इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने दोनों पैरों से विकलांग विल्मा रूडोल्फ जैसी ओलंपिक में 4 गोल्ड मेडल जीतने वाली धाविका, कंचन गोवा जैसी नेत्रहीन पर्वतारोही जो दर्जनों अंतरराष्ट्रीय मेडल जीत चुकी है……. के साथ-साथ अन्य दिव्यांगों की कहानी को विस्तार पूर्वक सुना-सुनाकर खूब तालियां बटोरी और तमाम दिव्यांगों के चेहरे पर मुस्कान ला दिया | उन्होंने उपस्थित जनों से यही कहा कि भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के संदेश को आप तक पहुंचाने आया हूं- जैसा उन्होंने मुझसे कई बार कहा था-

ये आँखे दुनिया को दोबारा नहीं देख पायेगी…….

अतः तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वह दुनिया को

देकर जाना…… बच्चों को देकर जाना |

भला क्यों नहीं, सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक व वरीय उपसमाहर्ता एवं खेल पदाधिकारी मुकेश कुमार एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार के अनुरोध पर तीनों जिले (मधेपुरा-सहरसा-सुपौल) के लिए आये हुए SDRF के 40 सदस्यों वाली कंपनी की एक टुकड़ी के सदस्यों द्वारा दिव्यांगों को भूकंप आने पर घर के अंदर छिपने की जानकारियां दी गई और सबों को यह भी बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को उठाने के तरीके क्या होंगे…… जिसमें एक व्यक्ति, दो व्यक्ति या तीन व्यक्ति द्वारा उठाने के तरीकों को भी डिमोंस्ट्रेट कर दिखाया गया | अन्त में डॉ.मधेपुरी ने दिव्यांगों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील डॉ.कलाम के बाबत यही कहा-

वह गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.कलाम अंतिम सांस तक दिव्यांग बच्चों के जीवन संवारने में, वृद्धों एवं रोगियों के चेहरों पर मुस्कान लाने में लगे रहे | उन्हें सर्वाधिक प्रसन्नता तब होती जब भी हृदय रोगियों की धमनियों में “कलाम- राजू कोरोनरी स्टेंट” तथा विकलांग बच्चों को “लाइटवेट फ्लोर रिएक्शन ऑर्थोसिस कैलिपर्स” लगाने के पश्चात उनकी तकलीफों को कुछ हल्का होते देखा करते | उनकी मान्यता रही कि विज्ञान के दरवाजे ऐसे हरेक व्यक्ति के लिए खुले रहेंगे जो मानवता की भलाई के लिए कार्यरत हैं | कार्यक्रम के अंत में सचिव अरुण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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