बिहार में दो विश्व धरोहर हैं- नालंदा विश्वविद्यालय और बोधगया मंदिर

यूँ तो बिहार में विरासतों की भरमार है…. आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया द्वारा सूचीबद्ध 110 साइटें हैं बिहार में…. जिनमें से दो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है… वे दोनों हैं- बोधगया का महाबोधि मंदिर और नालंदा विश्वविद्यालय का भग्नावशेष। इन दोनों के अतिरिक्त बिहार में दर्जनों ऐसी साइटें हैं जिन्हें विश्व विरासत स्थलों में शामिल किया जा सकता है।

बता दें कि महाबोधि मंदिर 27 जून 2002 को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में सूचीबद्ध किया गया था। जानिए कि विश्व धरोहर के रूप में सूचीबद्ध होने के बाद से बोधगया आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है…… क्योंकि महाबोधि मंदिर का प्राचीन स्वरूप अशोक कालीन माना जाता है जिसके जीर्णोद्धार के समय गर्भगृह में अशोक कालीन ईंटे मिली थी। कहा जाता है कि वर्तमान मंदिर चीनी यात्री ह्वेनसांग के भारत आगमन से पूर्व ही बन चुका था।

यह भी जानिए कि बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय 15 जुलाई 2016 को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है। विश्व धरोहर में शामिल होने वाला यह बिहार का दूसरा और भारत का 33वां धरोहर है। बता दें कि इसके विकास,सुरक्षा व संरक्षण की जिम्मेवारी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और बिहार सरकार की है।

पुरातात्विक और साहित्यिक साक्ष्यों के आधार पर माना जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. के आसपास हुई…. जिसकी स्थापना गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी। पाल शासकों ने इसे संरक्षण दिया था। 476 ई. में बिहार में ही जन्मे विश्व विख्यात खगोलविद् एवं गणितज्ञ आर्यभट्ट विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। इतना ही नहीं, जब संसार अज्ञानता के समंदर में भटक रहा था तब आर्यभट्ट का गणितीय विमल ज्ञान प्रकाश सात समंदर पार रोशनी बिखेरता हुआ पहुुँच गया था। आर्यभट्ट भी हमारा विश्व धरोहर ही है जिनके बाबत आइंस्टाइन ने टिप्पणी की है- “दुनिया आर्यभट्ट का आभारी है जिन्होंने संसार को गणितीय ज्ञान दिया जिसके बगैर कोई भी वैज्ञानिक खोज नामुमकिन होता।”

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