शादी में समाजवाद की एक अनूठी परम्परा

भारत विविधताओं का देश है। विविध जातियों एवं भिन्न-भिन्न धर्मों के लोग…… अद्भुत परंपराएं….. न जाने कितने प्रकार की विचित्रताओं से भरा है यह भारत देश हमारा।

बता दें कि भारत का एक राज्य है छत्तीसगढ़- जहाँ के सुदूर वनांचल जशपुर जिले में बसी उरांव जनजाति में विवाह की एक अनूठी परंपरा है। यूँ तो संपूर्ण संसार में शादी और श्राद्ध के सैकड़ों तरीके हैं जिनमें एक अद्भुत तरीके वाली शादी यह भी है-

छत्तीसगढ़ के उरांव जनजाति में विवाह के समय दूल्हा और दुल्हन दोनों एक-दूसरे की मांग में सिंदूर भरते हैं जिसमें दंपति को वैवाहिक रिश्तों में बराबरी का एहसास होता है…… जिसे लोग शादी में समाजवाद की संज्ञा देने लगे हैं।

यह भी बता दें कि शादी का रस्म इस तरह पूरा किया जाता है- शादी के दौरान घर के आसपास स्थित बगीचे में दूल्हा आमंत्रण का इंतजार करता है और जब दुल्हन के रिश्तेदार दूल्हे को कंधे पर बैठाकर मंडप में लाते हैं तो यह रश्म पूरी की जाती है जिसमें दुल्हन के भाई की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वह बहन की अंगुली पकड़ता है और दुल्हन उसके सहारे दूल्हे को बिना देखे यानी पीछे की ओर हाथ करके सिंदूर भरती है। यदि दुल्हन का कोई भाई नहीं तो यह रस्म बहन पूरा करती है।

यह भी जानिए कि दूल्हा-दुल्हन दोनों तीन-तीन बार एक-दूसरे की मांग पर सिंदूर भरते हैं। ऐसा करते समय पंच के रूप में गांव के पांच वरिष्ठ सदस्य चादर से एक घेरा बनाते हैं। जिसमें बतौर गवाह कुछ खास रिश्तेदार बार-बार आवाज देते हैं कि एक बार और अच्छे से एक दूसरे को देख लो….. फिर सिंदूर भरना।

चलते-चलते यह भी बता दें कि हाल ही में उच्च शिक्षा प्राप्त कर विवाह बंधन में बंधे मोना प्रधान और विनय निकुंज ने बताया कि यह परंपरा उनके लिए महत्वपूर्ण है और बराबरी का रिश्ता होने का एहसास भी उन्हें होता है। इसमें अतिमहत्वपूर्ण बात यह भी है कि दूल्हा और दुल्हन दोनों साथ में सिंदूर खरीदने जाते हैं।

 

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