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आरजेडी स्थापना दिवस में लालू ने बताया भाजपा को हराने का फार्मूला

बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल ने धूमधाम से अपना 21वां स्थापना दिवस मनाया। पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भाजपा पर जमकर हमला बोलते हुए उसे 2019 में हराने का ‘फार्मूला’ भी बताया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव, वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह, प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे समेत पार्टी के अधिकांश मंत्री, सांसद और विधायक मौजूद रहे।

अपने संबोधन में लालू ने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात हैं। ऐसे में उन्होंने समान विचारधारा के लोगों को एक साथ आने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि “हर कोई अपनी विचारधारा के अनुरूप काम कर रहा है, चाहे वह मायावतीजी हों, अखिलेश हों, रॉबर्ट वाड्रा जी हों, प्रियंका गांधी जी हों, ममता दी हों या केजरीवाल हों, लालू यादव हों या उनका परिवार। बीजेपी हमें तोड़ना चाहती है, क्योंकि वह हमारी शक्ति के बारे में जानती है। और बीजेपी यह भी जानती है कि अगर सभी विपक्षी पार्टियां एक हो जाती हैं तो बीजेपी का 2019 में सरकार बनाने का सपना, सपना ही रह जाएगा।”

आरजेडी सुप्रीमो ने उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के एक होने को 2019 में भाजपा का गेम ओवर करने का फार्मूला बताया। बकौल लालू, अगर यूपी में पूर्व सीएम अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती एक हो जाते हैं तो बीजेपी के अगला चुनाव जीतने का कोई चांस नहीं होगा।

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद पर सवाल उठाते हुए लालू ने कहा कि वे दलित नहीं हैं। वे कोली जाति से आते हैं और गुजरात में कोली जाति ओबीसी है। दरअसल वहां चुनाव है इसलिए उन्हें उम्मीदवार बनाया गया है, ताकि गुजरात में 18 प्रतिशत कोलियों का मत हासिल किया जा सके। लालू ने कहा कि वे सिद्धांत से समझौता नहीं करते हैं। अगर कांग्रेस भी एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करती, इसके बावजूद वो उन्हें समर्थन नहीं करते।

इस मौके पर तेजस्वी ने सुशील मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ लोग अखबार में बने रहने के लिए हम पर आरोप लगाते हैं। हमारी तीन पीढियां साजिश की शिकार हुई हैं। माता-पिता के बाद अब हमलोग और हमारी बहनों के बच्चे सीबीआई रेड देख रहे हैं। हम डरने वाले नहीं हैं। 27 अगस्त को पता चलेगा कि कौन बेईमान है। बता दें कि इसी दिन आरजेडी ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ रैली’ आयोजित की है।

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अमेरिका और भारत दोनों के इतिहास में अहम है 4 जुलाई

4 जुलाई कहने को एक तारीख है, लेकिन इतिहास के पन्नों में इस दिन की अहमियत किस कदर है, यह जानकर चौंक जाएंगे आप। जी हां, यही वो दिन है जिसके बाद अमेरिका और भारत दोनों देशों की किस्मत बदल गई। दरअसल, ये दिन दोनों ही देशों की आज़ादी से जुड़ा है।

पहले बात अमेरिका की। वर्तमान पीढ़ी के लिए शायद सोचना भी कठिन हो, लेकिन सच है कि आज दुनिया का सबसे ताकतवर देश कहलाने वाला अमेरिका भी कभी गुलाम था और 1776 में 4 जुलाई को ही आजाद हुआ और जॉर्ज वाशिंगटन देश के पहले राष्ट्रपति बने। इस तरह अमेरिका को आज़ाद हुए पूरे 241 साल हो चुके हैं। बता दें कि अमेरिका के विश्वप्रसिद्ध स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी, जिसे 1876 में उसे फ्रांस ने तोहफे के रूप में दी थी, पर अमेरिका की स्वतंत्रता की तिथि 4 जुलाई 1776 ही अंकित है।

अब बात भारत की। जैसा कि सब जानते हैं, भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में 15 अगस्त और 26 जुलाई मील के पत्थर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी तरह 4 जुलाई का दिन भी भारत की स्वतंत्रता के लिए बेहद खास है। दरअसल 1947 में इसी दिन ब्रिटिश पार्लियामेंट के सामने भारत की स्वतंत्रता से संबंधित बिल का प्रस्ताव रखा गया था। और इसी बिल के तहत देश का भारत ओर पाकिस्तान के रूप में बंटवारा हुआ था।

4 जुलाई की बात चल ही रही है तो यह हमें यह भी जानना चाहिए कि 1963 में आज ही के दिन पिंगली वेंकैय्या, जिन्हें भारत का राष्ट्रध्वज बनाने का श्रेय दिया जाता है, का निधन हुआ था। और चलते-चलते यह भी जानें कि आज ही के दिन स्वामी विवेकानंद की भी पुण्यतिथि है। अध्यात्म की दुनिया को अपनी अप्रतिम आभा से जगमग कर देने वाले युवाओं के इस सबसे बड़े ‘आईकॉन’ ने 1902 में आज ही के दिन अंतिम सांस ली थी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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10वीं-12वीं के छात्रों के लिए किताब लिख रहे मोदी सर

फेसबुक और ट्विटर पर अपनी जबरदस्त सक्रियता और रेडियो पर ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम से युवाओं की दिनचर्या में उतर चुके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब उनसे एकदम अनोखे तरीके से संवाद करते दिखेंगे। जी हां, प्रधानमंत्री मोदी बहुत जल्द अपने युवा मित्रों से किताब के माध्यम से मुखातिब होंगे। खास बात यह कि पेंग्विन इंडिया से छपने जा रही यह किताब पूरी तरह इंटरएक्टिव होगी और इसे पढ़ने वाले युवा सीधे प्रधानमंत्री से संवाद कायम कर सकेंगे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री से जुड़ने का स्वरूप कैसा होगा।

10वीं और 12वीं के छात्रों को विशेष रूप से ध्यान में रखकर लिखी जा रही इस किताब में प्रधानमंत्री परीक्षा के तनाव को दूर करने, चित्त शांत रखने और परीक्षा के बाद किए जाने वाले कामों के बारे में बताएंगे। इसमें छात्रों से जुड़े कई आयामों पर प्रकाश डाला जाएगा जो विशेष तौर पर 10वीं और 12वीं की परीक्षा के संदर्भ में अहम होगा। कुल मिलाकर इस किताब का सार यह होगा कि अंक के ऊपर ज्ञान को क्यों महत्व दिया जाय और भविष्य में अपनी जिम्मेदारियों के वहन कैसे किया जाय।

बता दें कि इस किताब को लिखने का विचार प्रधानमंत्री का अपना है। दरअसल इस साल परीक्षाओं के दौरान उनका रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ पूरी तरह छात्रों पर केन्द्रित था। इस कार्यक्रम को मिली अपार सफलता और उसके बाद छात्रों ने जिस तरह सीधे उन्हें पत्र लिखे, वही इस विषय पर किताब लिखने की प्रेरणा और कारण बना। माना जा रहा है कि किताब इसी साल बाज़ार में आ जाएगी। चलते-चलते बता दें कि अभी तक भारत के किसी प्रधानमंत्री ने पद पर रहते हुए बच्चों के लिए किताब नहीं लिखी है। निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी इसके लिए साधुवाद के पात्र हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश ने कहा, मुझको लेकर कयास लगाना बंद करें

बिहार के मुख्यमंत्री व जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा कि मेरे लिए कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग कहते हैं कि लालू के दबाव में काम कर रहे हैं तो कुछ कहते हैं कि भाजपा के साथ चले जाएंगे। लेकिन ये सब बकवास है। रविवार को राजधानी स्थित जेडीयू कार्यालय में आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक में नीतीश ने कहा कि मैं बिहार में ही राजनीति करुंगा। बिहार के विकास के लिए काम करुंगा।

कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव, महागठबंधन व सरकार से संबंधित तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति चुनाव में जेडीयू द्वारा रामनाथ कोविंद को समर्थन की घोषणा के बाद जिस तरह लालू और कांग्रेस से नीतीश की बढ़ती ‘तल्खी’ और एनडीए से ‘मधुर’ होते संबंध की ख़बरें आ रही थीं, उस पर विराम लगाते हुए नीतीश ने कार्यकर्ताओं से संगठन की मजबूती के लिए काम करने को कहा। कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा कि संगठन ही आपकी पहचान है। संगठन की मजबूती की बदौलत ही आज भाजपा देश की सत्ता पर काबिज है।

कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने का आह्वान करते हुए नीतीश ने कहा कि आपलोगों की सबसे पहली प्राथमिकता यह है कि संगठन का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए और लोगों को इससे जोड़ा जाए। बैठक में पिछले वर्ष 5 जून को आरंभ हुए सदस्यता अभियान की समीक्षा भी की गई। बता दें कि पार्टी ने 50 लाख प्राथमिक एवं 2 लाख सक्रिय सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है।

इस बैठक में दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ शुरू हुई सरकार की मुहिम में जेडीयू के भागीदार बनने की रणनीति भी बनी। बिहार के राजनीतिक समीकरण के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील इस बैठक में पार्टी प्रमुख के अलावे प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह, आरसीपी सिंह, राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, श्याम रजक, मौलाना गुलाम रसूल बलियावी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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आज 12 बजे रात को संसद में बजेगा जीएसटी का घंटा !

जहाँ आजादी की उद्घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 14 अगस्त, 1947 की आधी रात को ऐतिहासिक भाषण के साथ की थी वहीं आजाद भारत के सबसे बड़े टैक्स सुधार ‘जीएसटी’ (Goods & Services Tax) की शुरुआत आजादी की उद्घोषणा कार्यक्रम की तर्ज पर आज 30 जून की आधी रात को संसद के केन्द्रीय कक्ष में होगी |

बता दें कि स्वतंत्र भारत में पहली बार ऐसा होगा कि ‘जीएसटी’ जैसे कानून को लागू करने के लिए आधी रात (यानी 12 बजे रात) को संसद का विशेष संयुक्त सत्र बुलाया जायेगा और 11 बजे से सत्र शुरू होकर 12 बजते ही घंटा बजना शुरू हो होगा जो इस बात का गवाह बनकर रेखांकित करेगा कि भारत में दिनांक 1 जुलाई 2017 से जीएसटी का नया कानून आ गया है |

यह भी जान लें कि इस कानून ‘जीएसटी’ को महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ही आधिकारिक रूप से लांच करेंगे और शनिवार यानी 1 जुलाई से यह कानून पूरे देशभर में लागू हो जायेगा- जो इनडायरेक्ट टैक्स के जरिये 2,000 अरब डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था को नया रूप देगी |

ऐसे ऐतिहासिक मौके पर महामहिम राष्ट्रपति के आजू-बाजू में रहेंगे उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, स्पीकर सुमित्रा महाजन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सहित केंद्रीय मंत्रीमंडल के सभी मंत्रीगण, सांसदगण एवं कई राज्यों के मुख्यमंत्रीगण |

यह भी जानिये कि इस मौके पर जीएसटी परिषद के सभी सदस्य अनिवार्य रुप से उपस्थित रहेंगे | आधी रात के बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बाबत देशवासियों के समक्ष अपनी बातें रखेंगे तथा सेंट्रल हॉल में उपस्थित गण्यमान्यों को जीएसटी से संबंधित दो छोटी फिल्में दिखायी जायेंगी जिसमें जीएसटी के प्रावधानों के साथ-साथ उसकी खूबियों को भी विस्तार से दर्शाया जायेगा |

इस फिल्म को नहीं देखनेवालों ने होंगे- कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सुप्रीमो सहित सभी सांसदगण जिन्होंने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया है | कुछ ने तो सरकार द्वारा जल्दबाजी दिखाये जाने के कारण बताया तो किसी ने कहा कि भाजपा द्वारा विपक्ष में रहने के दौरान इसी प्रणाली का जमकर विरोध किया गया था |

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1 जुलाई से बदल जाएगी आपकी दुनिया, जानिए कैसे

1 जुलाई 2017 से आपकी दुनिया वो नहीं रहेगी जो 30 जून तक होगी। ये दिन सभी भारतीयों के जीवन में एक साथ कई बदलावों को लेकर आने वाला है। आप शायद सोच रहे होंगे कि यहां जीएसटी से जुड़ी कोई बात कही जा रही होगी क्योंकि यह नया इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम 1 जुलाई से लागू होने जा रहा है और आजकल हर जगह इसी की चर्चा हो रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि जीएसटी हमारे जीवन में कई बदलावों का वाहक बनकर आ रहा है, लेकिन सच यह है कि 1 जुलाई के पिटारे में जीएसटी के साथ-साथ बदलावों की पूरी फेहरिस्त है। चलिए डालते हैं उन बदलावों पर एक नज़र।

सबसे पहले 1 जुलाई से आधार को लेकर होने वाले अहम बदलाव। बता दें कि सरकार ने आयकर रिटर्न के लिए अब आधार को अनिवार्य कर दिया है। आधार के बिना 1 जुलाई के बाद आप अपना रिटर्न फाईल नहीं कर पाएंगे। यही नहीं, सरकार ने टैक्स बचाने के लिए एक साथ कई पैन कार्ड का इस्तेमाल करने वाले लोगों पर शिकंजा कसने के लिए पैन को भी आधार से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है। आधार के बिना अब आप नए पैन कार्ड के लिए आवेदन भी नहीं कर पाएंगे। और तो और आधार के बिना 1 जुलाई से आपका पासपोर्ट भी नहीं बनेगा। इन सबके साथ-साथ 1 जुलाई से छात्रों का स्कॉलरशिप हो, जनवितरण प्रणाली हो या आपका पीएफ खाता, आधार हर जगह जरूरी होगा।

1 जुलाई से भारतीय रेल भी अपने कई नियमों में बदलाव करने जा रही है। अच्छी बात यह कि ये सभी बदलाव आपको राहत देंगे। मसलन, 1 जुलाई से तत्काल टिकट कैंसिल कराने पर 50 फीसदी रिफंड भी मिलेगा, जो अब तक नहीं मिलता था। 1 जुलाई से तत्काल टिकटों की बुकिंग का समय भी बदल जाएगा। अब सुबह 10 से 11 बजे तक एसी कोच के लिए और 11 से 12 बजे तक स्लीपर कोच के लिए तत्काल टिकट की बुकिंग होगी। 1 जुलाई से रेल मंत्रालय राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और मेल-एक्सप्रेस की तर्ज पर सुविधा ट्रेन चलाएगा, जिसमें यात्रियों को कन्फर्म टिकट की सुविधा दी जाएगी और वेटिंग लिस्ट का झंझट खत्म हो जाएगा। सुविधा ट्रेनों के टिकट को कैंसिल कराने पर भी आधा पैसा मिलेगा और कोच के हिसाब से चार्ज होगा। एक और बड़ा परिवर्तन यह कि 1 जुलाई से राजधानी और शताब्दी ट्रेनों में केवल मोबाईल टिकट ही वैद्य होगा।

1 जुलाई से भारतीय यात्रियों को विदेश यात्रा के लिए डिपार्चर फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार ने इमीग्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए यह कदम उठाया है।

1 जुलाई से ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए एक नए पाठ्यक्रम को लॉन्च करेंगे, जो कि अंतर्राष्ट्रीय एडुकेशन स्टैंडर्ड के अनुरूप होगा। इसमें नए टैक्सेशन सिस्टम जीएसटी को भी शामिल किया गया है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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ओबामा ही नहीं ट्रंप के अमेरिका में भी छा गए मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अमेरिका दौरा संपन्न हुआ। उनके इस दौरे पर करोड़ों भारतवासियों समेत पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। इसका पहला कारण यह था कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद यह अमेरिका का उनका पहला दौरा था और ट्रंप अपने स्वभाव और शैली में ओबामा से कितने अलग हैं, ये छिपी बात नहीं। दूसरा, चीन द्वारा अपनी बढ़ती महत्वाकांक्षाओं के कारण पाकिस्तान को शह देने और इस कारण पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद में हो रहे इजाफे के मद्देनज़र भारत-अमेरिका संबंधों और आपसी हितों को नए सिरे से परिभाषित करना बेहद जरूरी था। इन दोनों ही कसौटियों पर मोदी की यह यात्रा अत्यंत सफल कही जाएगी। हालांकि एच-1 बी वीजा और पेरिस जलवायु समझौता जैसे मुद्दे भी थे, लेकिन इस यात्रा में इन पर बात संभव न हो सकी।

कहना गलत न होगा कि मोदी-ट्रंप की इस मुलाकात से भारत और अमेरिका के आपसी संबंधों को और मजबूती मिली। इस मुलाकात में सबसे ज्यादा आतंकवाद का मुद्दा छाया रहा। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने की प्रतिबद्धता जताते हुए पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद पर कड़े तेवर दिखाए। अपने साझा बयान में दोनों देशों ने पाकिस्तान से कहा कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद को प्रश्रय देने के लिए न करे। यही नहीं, दोनों देशों ने पाकिस्तान को अपनी जमीन पर सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा। साथ ही, भारत पर हुए 26/11 के आतंकी हमलों और पठानकोट एयरबेस पर हुए अटैक में शामिल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की हिदायत भी पाकिस्तान को दी गई।

आतंकवाद के अलावे मोदी और ट्रंप के बीच व्यापार, सुरक्षा, द्विपक्षीय सहयोग और अफगानिस्तान में स्थिरता कायम करने के प्रयासों पर भी बातचीत हुई। इसके अलावा ट्रंप ने जीएसटी की तारीफ करते हुए इसे भारत का सबसे बड़ा टैक्स सुधार बताया। उन्होंने भ्रष्टाचार से लड़ने के मोदी सरकार के प्रयासों की भी तारीफ की। साथ ही उन्होंने माना कि भारत-अमेरिका के संबंध इतने मधुर कभी नहीं थे। इससे पहले मोदी का स्वागत करते हुए ट्रंप ने कहा कि “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता का व्हाइट हाउस में स्वागत करना सम्मान की बात है।“

चलते-चलते सारी बातों का सार यह कि अपने साझा बयान में ट्रंप ने जहां इस बात का खास तौर पर उल्लेख किया कि भारत और अमेरिका के संविधान के पहले तीन शब्द – ‘We the People’ – एक जैसे हैं और इसमें जोड़ा कि प्रधानंमत्री मोदी और मैं इन शब्दों का महत्व बहुत अच्छी तरह जानते हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के नए राष्ट्रपति को आज के संदर्भ में यह एहसास कराने में सफल रहे कि “न्यू इंडिया और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन एक जैसे हैं।”

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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दो हजार करोड़ की कमाई करने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी ‘दंगल’

आमिर खान के लिए इससे यादगार ईद भला क्या हो सकती है! ईद के दिन 2.5 करोड़ की कमाई कर उनकी फिल्म ‘दंगल’ दुनिया भर में 2000 करोड़ की कमाई करने वाली पहली भारतीय फिल्म बन गई है। वैसे तो प्रभास अभिनीत व एसएस राजामौली द्वारा निर्देशित ‘बाहुबली-2’ भी इस आंकड़े की ओर तेजी से बढ़ रही है, लेकिन 2000 करोड़ के क्लब में शामिल होने वाली पहली भारतीय फिल्म कहलाने का सौभाग्य ‘दंगल’ को मिला।

23 दिसंबर 2016 को रिलीज हुई ‘दंगल’ की इस रिकॉर्डतोड़ सफलता का सबसे अहम पहलू यह है कि इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी चीन की है। वहां इस साल 5 मई को रिलीज होने वाली ‘दंगल’ अब तक कुल 1154 करोड़ रुपए की कमाई कर चुकी है। बड़ी बात यह कि इसका प्रभाव वहां अब भी बरकरार है। बता दें कि आमिर की फिल्म पीके ने भी चीन में काफी अच्छी कमाई की थी। इससे साफ है कि वहां बॉलीवुड के इस खान की खासी फैन फॉलोइंग है।

चीन के अलावा बाकी मुल्कों में भी ‘दंगल’ ने अच्छी कमाई की है, वहीं भारत में इसने अब तक 387 करोड़ रुपए कमाए हैं। बात जहां तक पड़ोसी पाकिस्तान की है, वहां इसे रिलीज ही नहीं किया गया, क्योंकि आमिर किसी भी सूरत में इस फिल्म से राष्ट्रगान वाला हिस्सा हटाने को तैयार नहीं थे।

बहरहाल, आमिर की सफलता ने साबित कर दिया है कि संजीदगी और शिद्दत से कोई काम किया जाय तो देश की सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं। आमिर से पहले विदेशों में अगर किसी भारतीय अभिनेता के लिए इस तरह का क्रेज देखा गया था तो वे राज कपूर थे। लेकिन तब सौ, दो सौ, पांच सौ, हजार और दो हजार करोड़ के क्लब कल्पना से परे थे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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अमेरिका में इन 21 कंपनियों के सीईओ से मिल रहे हैं मोदी

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली अमेरिका यात्रा पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाशिंगटन पहुंच गए हैं। ट्रंप से उनकी मुलाकात सोमवार को होगी, लेकिन उससे पहले ही ट्रंप ने अपने आधिकारिक वेबसाईट से मोदी का स्वागत किया। मोदी को सच्चा दोस्त बताते हुए उन्होंने ट्वीट किया कि भारतीय प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए व्हाइट हाउस तैयार है। अहम रणनीतिक मुद्दों पर अपने सच्चे दोस्त से चर्चा होगी।

गौरतलब है कि सोमवार को होनेवाली ट्रंप-मोदी मुलाकात में दोनों देशों के बीच कई अहम करार होने की उम्मीद है। इस दौरान द्विपक्षीय हितों के अतिरिक्त दोनों नेताओं के बीच जिन मुद्दों पर बातचीत संभावित है, उनमें एच-1बी वीजा, पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं।

बहरहाल, सोमवार की इस बहुप्रतीक्षित मुलाकात पर जहां भारत समेत पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी की रविवार को दुनिया के टॉप 21 सीईओ से हो रही मुलाकात भी कम महत्वपूर्ण नहीं। इस समय जब ये पोस्ट लिखा जा रहा है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दुनिया के शीर्ष बिजनेस लीडर्स के साथ संवादरत हैं।

भारतीय प्रधानमंत्री के बातचीत में मौजूद बिजनेस वर्ल्ड के 21 बड़े नाम इस प्रकार हैं – शांतनु नारायण (एडोब), जेफ बेजोस (अमेजन), जिम टैक्लेट (अमेरिकन टावर कार्पोरेशन), टिम कुक (एप्पल), जिम उम्प्लेबाई (कैटरपिलर), जॉन चैंबर्स (सिस्को), पुनित रेंजेन (डेलॉइट ग्लोबल), डेविड फार (इमर्सन), मार्क वेनबर्गर (अर्नेस्ट एंड यंग), सुंदर पिचाई (गूगल), एलेक्स गोरस्की (जॉनसन एंड जॉनसन), जेमी डिमोन (जेपी मॉर्गन चेज एंड कंपनी), मेरिलिन ए ह्यूसन (लॉकहीड मॉर्टिन), आर्ने सोरेनसन (मैरियट इंटरनेशनल), अजय बंगा (मास्टरकार्ड), इरेन रोसेनफील्ड (मोंडेलेज इंटरनेशनल), डेविड रुबेन्स्टेन (द कार्लाइल ग्रुप), डग मैकमिलन (वॉलमॉर्ट), चार्ल्स काये (वारबर्ग पिनकस), डेनियल यार्गिन (आईएचएस मार्किट) और मुकेश आघी (यूएसआईसीबी)।

गौरतलब है कि मोदी ने 2015 में भी कई कंपनियों के सीईओ के साथ राउंड टेबल मीटिंग की थी और कई संभावनाओं का बीजारोपण किया था। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार की मुलाकात के बाद वे संभावनाएं ठोस आकार लेंगी। मोदी दुनिया की इन दिग्गज कंपनियों को जीएसटी जैसे ऐतिहासिक सुधार के बाद बनी भारत की माकूल स्थिति से अवगत कराना चाहेंगे। साथ ही उन्हें ‘मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस’ का भरोसा देंगे। मोदी ये अच्छी तरह जानते हैं कि उनके कार्यकाल के तीन वर्ष बीत चुके हैं और उनका देश उन्हें बड़ी उम्मीदों से देख रहा है। जाहिर है, अपनी कोशिशों में वे कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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पासवान ने कहा, बिहार के भले के लिए एनडीए में आएं नीतीश

केन्द्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री व लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन करने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए उन्हें एनडीए में आने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के निर्णय का हम स्वागत करते हैं और उनसे आग्रह करते हैं कि दो नाव पर पांव नहीं रखें। जल्दी से एनडीए में आ जाएं। उनके आने से एनडीए भी मजबूत होगा, वे भी मजबूत होंगे और बिहार का भला हो जाएगा।

पासवान ने आगे कहा कि नीतीश महागठबंधन में असहज महसूस कर रहे हैं। हाल के दिनों में ऐसे कई मौके आए हैं जब उनकी असहजता सामने आई है। नोटबंदी पर साथ देने और कोविंद को समर्थन देने का उल्लेख करते हुए पासवान ने कहा कि ऐसे फैसलों से पता चलता है कि उनके और लालू के रास्ते अलग हैं। ऐसे में नीतीशजी को अब एनडीए में आ जाना चाहिए।

नीतीश की कल की टिप्पणी कि “विपक्षी दलों ने बिहार की बेटी (मीरा कुमार) को हारने के लिए उम्मीदवार बनाया” को सही ठहराते हुए पासवान ने कहा कि “नीतीशजी ने सही ही कहा है कि विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए मीरा कुमार को जानबूझकर चुना है, क्योंकि इसमें विपक्ष की हार निश्चित है। यूपीए के 10 वर्षों के शासनकाल में जब सत्ता कांग्रेस के हाथों में थी, तब उन्हें बिहार की बेटी की याद क्यों नहीं आई?” उन्होंने कहा कि इस बार भी जब रामनाथ कोविंद का नाम आया है तब मीरा कुमार का नाम इन लोगों ने आगे किया है।

बहरहाल, इस बीच नीतीश शनिवार को लालू द्वारा दी गई इफ्तार पार्टी में शामिल जरूर हुए, पर उनकी लाख कोशिशों के बावजूद कोविंद को समर्थन देने से पीछे नहीं हटे। बल्कि लालू की इफ्तार पार्टी से निकलने के बाद उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष ने जीत की बजाय हार की रणनीति बना ली है। अपने निर्णय का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि पहली बार बिहार के राज्यपाल को सीधे राष्ट्रपति बनाया जा रहा है। साथ में यह भी कि कोविंद आरएसएस की पृष्ठभूमि के नहीं हैं। उन्होंने मोरारजी देसाई के साथ अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। नीतीश ने यह भी दोहराया कि यह चुनाव राष्ट्रीय स्तर का है और हमारा गठबंधन बिहार में है। इससे सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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