George Washigton-Mahatma Gandhi

अमेरिका और भारत दोनों के इतिहास में अहम है 4 जुलाई

4 जुलाई कहने को एक तारीख है, लेकिन इतिहास के पन्नों में इस दिन की अहमियत किस कदर है, यह जानकर चौंक जाएंगे आप। जी हां, यही वो दिन है जिसके बाद अमेरिका और भारत दोनों देशों की किस्मत बदल गई। दरअसल, ये दिन दोनों ही देशों की आज़ादी से जुड़ा है।

पहले बात अमेरिका की। वर्तमान पीढ़ी के लिए शायद सोचना भी कठिन हो, लेकिन सच है कि आज दुनिया का सबसे ताकतवर देश कहलाने वाला अमेरिका भी कभी गुलाम था और 1776 में 4 जुलाई को ही आजाद हुआ और जॉर्ज वाशिंगटन देश के पहले राष्ट्रपति बने। इस तरह अमेरिका को आज़ाद हुए पूरे 241 साल हो चुके हैं। बता दें कि अमेरिका के विश्वप्रसिद्ध स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी, जिसे 1876 में उसे फ्रांस ने तोहफे के रूप में दी थी, पर अमेरिका की स्वतंत्रता की तिथि 4 जुलाई 1776 ही अंकित है।

अब बात भारत की। जैसा कि सब जानते हैं, भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में 15 अगस्त और 26 जुलाई मील के पत्थर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी तरह 4 जुलाई का दिन भी भारत की स्वतंत्रता के लिए बेहद खास है। दरअसल 1947 में इसी दिन ब्रिटिश पार्लियामेंट के सामने भारत की स्वतंत्रता से संबंधित बिल का प्रस्ताव रखा गया था। और इसी बिल के तहत देश का भारत ओर पाकिस्तान के रूप में बंटवारा हुआ था।

4 जुलाई की बात चल ही रही है तो यह हमें यह भी जानना चाहिए कि 1963 में आज ही के दिन पिंगली वेंकैय्या, जिन्हें भारत का राष्ट्रध्वज बनाने का श्रेय दिया जाता है, का निधन हुआ था। और चलते-चलते यह भी जानें कि आज ही के दिन स्वामी विवेकानंद की भी पुण्यतिथि है। अध्यात्म की दुनिया को अपनी अप्रतिम आभा से जगमग कर देने वाले युवाओं के इस सबसे बड़े ‘आईकॉन’ ने 1902 में आज ही के दिन अंतिम सांस ली थी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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