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कॉमनवेल्थ गेम्स में बिहार की श्रेयसी को गोल्ड मेडल

ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत और खासकर यहां की बेटियों के शानदार प्रदर्शन में अब बिहार की बेटी का नाम भी जुड़ गया है। 11 करोड़ बिहारवासियों को गौरवान्वित करने वाली बिहार की ये बेटी है जमुई की श्रेयसी सिंह, जिन्होंने डबल ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल सत्यपाल मलिक और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बधाई दी है।

बता दें कि केन्द्रीय मंत्री रहे दिग्विजय सिंह और बांका की पूर्व सांसद पुतुल कुमारी की बेटी श्रेयसी ने इससे पहले नई दिल्ली में आयोजित 61वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में महिलाओं की डबल ट्रैप स्पर्द्धा में गोल्‍ड जीता था। अब एक बार फिर अपनी उपलब्धि से उन्होंने देश सहित बिहार का सिर ऊँचा किया है। यह भी जानें कि श्रेयसी राष्ट्रमंडल खेल में पदक जीतने वाली बिहार की अकेली खिलाड़ी हैं।

गौरतलब है कि श्रेयसी ने ऑस्ट्रेलिया की एम्मा कॉक्स को एक अंक से हराते हुए गोल्‍ड मेडल पर कब्जा जमाया। उन्‍होंने कुल 98 अंक हासिल कर भारत की झोली में 12वां गोल्‍ड डाला। कॉमनवेल्थ गेम्स में अब भारत के 23 मेडल हो गए हैं। इनमे 12 गोल्ड, चार सिल्वर और सात ब्रॉन्ज मेडल शामिल है। पदक तालिका में भारत तीसरे नंबर पर बना हुआ है।

श्रेयसी ने अपनी स्वर्णिम सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया है। उन्होंने कहा कि मेरी मां ने तमाम परेशानियों के बाद भी पूरे जीवन मुझे सपोर्ट किया, जिसके चलते मैं आज कामयाब हो पाई हूं। वहीं अपने कोच के योगदान की चर्चा करते हुए श्रेयसी ने कहा कि मेरे कोच ने कड़ी ट्रेनिंग दी थी, जिसके चलते मैं कॉमनवेल्थ में अच्छा परफॉर्म कर पाई। मैं पहले सिल्वर जीत चुकी थी। इस बार अधिक मेहनत की थी। कॉम्पिटिशन कठिन था। ऑस्ट्रेलिया की शूटर एम्मा काक्स का होम ग्राउंड होने के चलते मैं नर्वस थी, लेकिन मेरी ट्रेनिंग काम आई। ‘मधेपुरा अबतक’ बिहार की इस बेटी को सलाम करता है।

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2018: बेटियों को सलाम

भारतीय महिला खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की झोली में गोल्ड मेडल्स की बरसात कर दी है। इनमें से हालिया गोल्ड मेडल महिला टेबल टेनिस टीम ने जीता है। भारतीय टीम ने सिंगापुर को 3-1 से हराकर पहली बार इस इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया है। लड़कियों के शानदार प्रदर्शन के कारण आज हर भारतीय इन लड़कियों पर गर्व कर रहा है। देशभर से उनको शुभकामनाएं मिल रही हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में भारत के सुनहले सफर की शुरुआत वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने की। वेटलिफ्टर संजीता चानू ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया। वेटलिफ्टिंग में स्वर्ण का सफर यहीं नहीं रुका। सफलता की इस कहानी में अगला नाम जुड़ा वाराणसी शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर बसे दादूपुर गांव में रहने वाली पूनम यादव का। कभी अभ्यास के बाद भूखे पेट सोने वाली पूनम यादव ने 69 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। उधर निशानेबाजी में हरियाणा के झज्जर की बेटी मनु भाकर ने स्वर्णिम सफलता दिलाई तो महिला टेबल टेनिस के गोल्ड पर भी हमारी बेटियों ने कब्जा जमाया।

क्या आम और क्या खास, भारत की इन बेटियों ने सभी का सीना चौड़ा किया है और यही वजह है कि सभी इनको दिल खेलकर बधाइयां दे रहे हैं। सदी के महानायक बच्चन ‘यूनाइटेड नेशन्स गर्ल चाइल्ड’ के ब्रैंड ऐंबेसडर अमिताभ बच्चन ने भी ट्विटर पर इन विजयी लड़कियों की तस्वीर शेयर की है और बधाई दी है। उन्होंने लिखा है, ‘खेल की महानता और महिला ऐथलीट्स का गौरव कमाल कर रहा है। वेट लिफ्टिंग, शूटिंग, टेबल टेनिस, स्क्वैश… अद्भुत। आप हम भारतीयों का गौरव हैं।’

भारत की इन बेटियों को ‘मधेपुरा अबतक’ का सलाम..! आइये, हम सभी इन बेटियों को बधाई दें और प्रण करें कि अपनी बेटियों की नैसर्गिक प्रतिभा को निखारने में कोई कसर नहीं रखेंगे। याद रखें, हमारी आज की मेहनत ही कल सोना बनकर दमकेगी।

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शाह के ‘जानवर’ वाले बयान पर राहुल का करारा कटाक्ष

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के उस बयान को अपमानजनक बताया जिसमें उन्होंने विपक्ष की तुलना जानवरों से की थी। राहुल ने कहा कि शाह के बयान से उनकी मानसिकता का पता चलता है, जिसमें दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के नेताओं को ‘व्यर्थ’ समझा गया है। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि देश में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को छोड़कर सब जानवर हैं।

पत्रकारों से बात करते हुए राहुल ने कहा, ‘अमित शाह पूरे विपक्ष को जानवर कह रहे हैं। भाजपा-आरएसएस का बुनियादी दृष्टिकोण है कि इस देश में केवल दो गैर-जानवर हैं। एक श्री नरेंद्र मोदी और दूसरे श्री अमित शाह।’ राहुल ने आगे कहा कि वह शाह के बयान को अपमानजनक मानते हैं, लेकिन ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते।

शाह पर कटाक्ष करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘देश में केवल दो या तीन लोग हैं जो ‘सब कुछ करने योग्य हैं’ वे सब कुछ समझते हैं और बाकी सब लोग बेकार लोग हैं।’ राहुल ने आगे कहा, ‘इसमें न केवल दलित बल्कि आदिवासी, अल्पसंख्यक भी हैं। यह यहीं खत्म नहीं होता है। इसमें श्री आडवाणी, श्री मनोहर जोशी और यहां तक कि श्री गडकरी, हर व्यक्ति शामिल है।’

बता दें कि शाह ने भाजपा के स्थापना दिवस पर मुंबई में एक रैली में कहा था, ‘2019 (चुनाव) के लिए उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। विपक्षी एकजुटता की कोशिश हो रही है। जब भारी बाढ़ आती है तो सब कुछ बह जाता है। केवल एक वटवृक्ष बचता है और बढ़ते पानी से खुद को बचाने के लिए सांप, नेवला, कुत्ते और बिल्लियां और अन्य जानवर साथ आ जाते हैं। ’उन्होंने कहा था, ‘मोदी बाढ़ की वजह से सभी बिल्ली-कुत्ते, सांप और नेवला मुकाबला करने साथ आ रहे हैं।’

बहरहाल, भाजपा अध्यक्ष के बयान में ‘गोरखपुर’ और ‘फूलपुर’ गंवाने की टीस स्पष्ट तौर पर महसूसी जा सकती है। देखा जाय तो विजय रथ पर सवार भाजपा के लिए इन दो लोकसभा सीटों की हार सचमुच उसकी अगली-पिछली कई जीतों पर भारी है और अति आत्मविश्वास की शिकार हो चली पार्टी अपनी इस हार को पचा अब तक पचा नहीं पाई है। जो भी हो, कांग्रेस के ‘परिपक्व’ हो रहे युवा अध्यक्ष ने भाजपा के लिए कई ‘करिश्मा’ दिखा चुके अध्यक्ष को जवाब अच्छा दिया है। वैसे 2019 में अब ज्यादा दिन नहीं। ऐसे तमाम सवालों और जवाबों की असली परीक्षा तो तब ही होनी है।

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एक उम्मीदवार को दो सीटों से चुनाव लड़ने पर रोक

दो दिन पहले माननीय सुप्रीम कोर्ट से मुख्य चुनाव आयोग ने यही कहा कि किसी भी चुनाव में एक उम्मीदवार को 2 सीटों से चुनाव लड़ने पर रोक लगनी चाहिए, क्योंकि इससे राष्ट्रीय संपत्ति और समय दोनों का अपव्यय होता है | चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि यदि कोई उम्मीदवार दोनों सीट जीतने के बाद एक सीट खाली करता है तो उस सीट के लिए होने वाले उपचुनाव का पूरा खर्च उससे वसूल किया जाना चाहिए |

बता दें कि चुनाव आयोग द्वारा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के विरुद्ध दाखिल किया गया यह हलफनामा (यह कि 2 सीटों से चुनाव लड़ने के प्रावधान को खत्म किया जाय) याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की मांग के समर्थन में किया गया है | इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा की जा रही है, जिसके अटॉर्नी जनरल हैं- के.के.वेणुगोपाल |

यह भी जानिए कि ऐसे ही उम्मीदवार जब चुनाव जीतने के बाद संसद की सदस्यता ग्रहण करते हैं तो 20-20 दिनों तक भ्रष्टाचार निवारण बिल को लेकर सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच उत्पन्न जबरदस्त टकराहट से संसद की कार्यवाही बार-बार ना जाने कितनी बार ठप्प करनी पड़ती है……. कभी-कभी तो दिन भर में 11 बार तक ओलंपिक खेल की तरह संसदीय इतिहास में भी नये-नये रिकॉर्ड बनते रहते हैं |

बता दें कि भारतीय संसद के बजट सत्र- 2018 का आज 6 अप्रैल को समापन हो रहा है | देश के बुद्धिजीवियों के बीच जहाँ विगत 2 महीनों से इन छह मुद्दों-

  • नीरव मोदी बैंक घोटाला
  • किसानों द्वारा आत्महत्या
  • SSC परीक्षा घोटाला
  • CBSE पेपर लीक
  • Facebook डाटा चोरी
  • SC/ST कानून आदि पर सबसे ज्यादा बहस चलती रही है वहीं लोकसभा में केवल SC/ST Act पर मात्र डेढ़ मिनट चर्चा हो पाई |

यह भी जानिये कि बजट सत्र के दूसरे हिस्से के 20 दिनों में मात्र 4 घंटे 52 मिनट लोकसभा चली और आज तक में देश का लगभग 216 करोड़ रुपये बेमतबल खर्च हो गये |

यह बात सबों को जान लेनी चाहिए कि जहाँ संसद सत्र के दरमियान प्रतिदिन 6 घंटे कामकाज के लिए निर्धारित हैं वहीं भारतीय संसद 20 दिनों में 292 मिनट ही चली यानि 5 घंटे से भी कम कामकाज हुए…….. हुआ केवल हंगामा……. जिसमें स्पीकर सुमित्रा महाजन को 44 बार सदन को स्थगित करना पड़ा और 42 बार कहना पड़ा- ‘I am Sorry !’ 15 बार तो एक,दो,तीन मिनट में ही सदन को स्थगित करने को मजबूर होना पड़ा स्पीकर को….. !

तभी तो विगत कई वर्षों से महामहिम भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा दोनों सदनों (विधानसभा एवं लोकसभा) में खासकर पिंजरे बनवाने की चर्चाए बार-बार की जाती रही हैं | डॉ.मधेपुरी के अनुसार प्रत्येक सदस्य की सीट के चारों तरफ 7 फीट ऊंचे लोहे का जंगला बने जिसमें माननीय बंद रहे और उसमें ऑटोमेटिक इलेक्ट्रॉनिक लॉक लगाने का प्रावधान हो जिसका रिमोट स्पीकर के पास रहे | तभी सदन में विकास की बातों पर भरपूर चर्चाएं हो पायेंगी |

ऐसा होगा तभी सदन में पक्ष-विपक्ष के सदस्यों के बीच न तो अभद्रतापूर्वक हाथापाई होंगी और न कभी कोई मंत्री किसी महिला विधायिका की साड़ी खींचेंगे और ना ही कोई महिला विधायिका  दूसरी दफा यह कहेगी- “सरकार मेरे शील को अक्षुण्ण रखने की जब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं करेगी तब तक मैं सदन में प्रवेश नहीं करूंगी !”

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रघुवंश का दावा, महागठबंधन में शामिल होंगे रामविलास !

अपने बेबाक बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने दावा किया है कि लोक जनशक्ति पार्टी मुखिया रामविलास पासवान महागठबंधन में शामिल होंगे। बकौल रघुवंश राम विलास पासवान आरजेडी के संपर्क में हैं और शीघ्र ही महागठबंधन का हिस्सा बनेंगे। उनके इस बयान ने स्वाभाविक तौर पर बिहार के सियासी गलियारों की सरगर्मी बढ़ा दी है।

बहरहाल रघुवंश प्रसाद सिंह ने आगे कहा कि जब जीतनराम मांझी के एनडीए छोड़कर महागठबंधन में आने की बात मैं करता था तब लोग खिल्ली उड़ाते थे, आज मांझी महागठबंधन के साथ हैं। वैसे ही आज जो लोग रामविलास पासवान के महागठबंधन में आने की बात पर हंसी उड़ा रहे हैं, कल उन्हें जवाब देते नहीं बनेगा। पासवान के इस तरह पाला बदलने के पक्ष में तर्क देते हुए रघुवंश ने कहा कि राम विलास पासवान एनडीए सरकार में घुटन महसूस कर रहे हैं। भले ही वे केंद्र में मंत्री हैं, मगर उन्हें मनमुताबिक फैसले लेने की आजादी नहीं है। इसके साथ ही उन्हें यह भी लगने लगा है कि भाजपा का प्रदर्शन आने वाले चुनाव में शायद बेहतर ना हो। इस नाते वे सरकार में कुछ समय मंत्री रहने के बाद चुनाव के समय महागठबंधन के पाले में आ जाएंगे। रघुवंश प्रसाद सिंह ने दावा किया कि 2019 के आम चुनाव में समूचा विपक्ष एकजुट होकर विभाजनकारी भाजपा को परास्त करेगा।

वैसे चलते-चलते बता दें कि इससे पहले भी राजनीति के ‘मौसम वैज्ञानिक’ कहे जाने वाले रामविलास पासवान के एनडीए से अलग होने की खबरें उड़ीं थीं और उन्होंने खंडन करते हुए कहा था कि वे एनडीए का हिस्सा बने रहेंगे।

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योगी के यूपी में बाबा साहब का नया नाम

यूपी के सभी राजकीय अभिलेखों में अब संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम के साथ ‘राम जी’ जोड़ दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉ. भीमराव आंबेडकर का नाम बदलकर डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर करने के लिए बुधवार को सभी विभागों और इलाहाबाद-लखनऊ हाई कोर्ट की सभी बेंचों को आदेश दिया है। बता दें कि इसके लिए संविधान की आठवीं अनुसूची की मूल प्रति को आधार बनाया गया जहां डॉ. भीमराव आंबेडकर के डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के रूप में हस्ताक्षर सम्मिलित हैं।

गौरतलब है कि संविधान के पन्ने में बाबा साहब का हस्ताक्षर ‘डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर’ के नाम से शामिल है। इस संदर्भ में बाबासाहब डॉ. भीमराव आंबेडकर महासभा के निदेशक डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल का कहना है कि इस कैंपेन को राज्यपाल राम नाईक ने दिसंबर 2017 में शुरू किया था। राम नाईक ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और महासभा को पत्र लिखकर आंबेडकर के नाम का सही उच्चारण और सही नाम लिखने के लिए ध्यान आकृष्ट कराया था।

आगे लालजी प्रसाद कहते हैं, ‘मुख्य बिंदु यह है कि उनके नाम का सही उच्चारण होना चाहिए। अंग्रेजी में उनके नाम की स्पेलिंग सही है लेकिन हिंदी में उनके नाम की स्पेलिंग बदलनी होगी और इसे अंबेडकर न लिखकर ‘आंबेडकर’ लिखा जाना चाहिए। वहीं रामजी उनके पिता का नाम था। महाराष्ट्र में पुरानी परंपरा के आधार पर पिता का नाम बेटे मध्य नाम के लिए इस्तेमाल करते आए हैं।

उधर भाजपा सरकार के इस फैसले से बसपा प्रमुख मायावती सख्त नाराज हैं। उनका कहना है कि बाबा साहब दलितों की चिन्ता करते थे जबकि भाजपा उनके नाम पर नाटक करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सस्ती लोकप्रियता के लिए नाम में बदलाव किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम भी पूरा लिखा जाता है। बकौल मायावती, बाबा साहब खुद भी अपना नाम बीआर आंबेडकर ही लिखते थे।

बहरहाल, 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती भी है, ऐसे में योगी सरकार के इस शासनादेश की टाइमिंग के विशेषार्थ निकाले जा रहे हैं, तो आश्चर्य की कोई बात नहीं।

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दिल्ली में ममता बनर्जी से मिले शत्रुघ्न सिन्हा

भाजपा के ‘शत्रु’ शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी के दो अन्‍य वरिष्‍ठ नेताओं यशवंत सिन्‍हा और अरुण शौरी के साथ दिल्ली में पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी से मिले। बता दें कि इन दिनों ममता नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिए दिल्‍ली आई हुई हैं। भाजपा के ये तीनों नेता नरेंद्र मोदी सरकार की कई मौकों पर आलोचना कर चुके हैं। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए ममता से उनकी इस मुलाकात को महत्‍वपूर्ण माना जा रहा है।

गौरतलब है कि शत्रुघ्‍न सिन्‍हा ने 2019 में अपने लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर बड़ी बेबाकी से बयान दिया है। कुछ इस तरह कि उसके कई मतलब निकल रहे हैं। उन्होंने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकेशन वही होगा, सिचुएशन कुछ भी हो। उन्‍होंने कहा कि 2014 में भी मुझे टिकट न मिलने की बात कही जा रही थी, लेकिन मुझे मिला था। इस बार भी कुछ ऐसा ही कहा जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि उनकी जीत का मार्जिन बहुत ज्‍यादा था तो ऐसे में मुझे टिकट क्‍यों नहीं देंगे? अपने चुनाव-क्षेत्र – पटना साहिब – की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ की जनता उन पर बहुत भरोसा करती है।

ममता बनर्जी से अपनी मुलाकात पर टिप्पणी करते हुए शत्रुघ्न ने कहा कि ‘वह (ममता बनर्जी) मेरा बहुत सम्‍मान करती हैं। राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर ममता दीदी के नाम से जानी जाती हैं तो ऐसे में दीदी से मिलने में क्‍या हर्ज है?’ यहां बता दें कि बुधवार को ही ममता बनर्जी ने 10 जनपथ जाकर यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी से भी मुलाकात की।

बहरहाल, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से रांची जाकर मिलने के बाद ममता बनर्जी से दिल्ली में शत्रु की इस मुलाकात को हल्के में कतई नहीं दिया जा सकता। इसमें स्पष्ट तौर पर भविष्य की राजनीति के कई संकेत छिपे हैं।

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भारतीय नववर्ष को आप कितना जानते हैं ?

आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम क्या-क्या छोड़े चल रहे हैं क्या इसके बारे में कभी सोचा है आपने? शहरों में रहने की हवस या जरूरत की खातिर हम अपने गांव की मिट्टी की सोंधी सुगंध भूल गए। कम्प्यूटर और स्मार्टफोन ने हमारे बच्चों की मासूमियत छीन ली। अंग्रेजी स्कूल स्टेटस का पैमाना क्या हुए हमारे बच्चे हिन्दी की गिनती तक बिसरा गए। ऐसे में हिन्दी नववर्ष और हिन्दी महीनों से वे अनजान रहें तो क्या आश्चर्य! बहरहाल, आज हिन्दी नववर्ष यानि भारतीय नववर्ष है… विक्रम संवत् 2075 का पहला दिन और साथ ही चैत्र नवरात्रि का पहला दिन भी। इसलिए पहले इस दिन के निमित्त मंगलकामनाएं और फिर कुछ जरूरी और दिलतचस्प बातें।

चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि से आरंभ होता है हमारा भारतीय नववर्ष। इसे सृष्टि-दिवस, नवसंवत्सर या हिन्दू नववर्ष भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी दिन यानि आज से एक अरब, 97 करोड़, 39 लाख, 49 हजार व 115 वर्ष पूर्व सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। लंका पर विजय हासिल करने के पश्चात् प्रभु राम का और 5120 वर्ष पूर्व धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ था। यही विक्रम संवत् का प्रथम दिन है। 2073 वर्ष पूर्व सम्राट् विक्रमादित्य ने इसी दिन अपना अखंड राज्य स्थापित किया था। यही नहीं, भारत सरकार का पंचांग शक संवत् भी आज ही के दिन से शुरू होता है।

अब आगे चलें। विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त करके दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना था। सिंध प्रांत के प्रसिद्ध समाज-रक्षक वरुणावतार माने जाने वाले संत झूलेलाल इसी दिन प्रकट हुए थे। महान बलिदानी सिक्ख परंपरा के द्वितीय गुरु श्री अंगद देव का प्रगटोत्सव इसी दिन हुआ था और समाज को श्रेष्ठ मार्ग पर ले जाने हेतु स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन को आर्यसमाज की स्थापना के लिए चुना था।

मां आदि शक्ति के नवरात्र यानि बासंतिक नवरात्र का पहला दिन भी यही है। किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिए इस दिन का मुहूर्त अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय प्रकृति की ओर देखें तो वह नया श्रृंगार करती दिखेगी। नए रंग-बिरंगे फूलों से पौधे लदे हुए मिलेंगे। यही समय फसल काटने का होता है और किसानों को उनकी मेहनत का फल मिलता है। अर्थात् हमारा भारतीय नववर्ष वैज्ञानिक दृष्टि के साथ-साथ प्राकृतिक एवं सामाजिक संरचना को भी प्रस्तुत करता है।

भारतीय संस्कृति में वर्ष का ऐसा कोई दिन नहीं जिसके भीतर हमारे संस्कारों के कुछ बीज ना मिल जाएं। फिर यह तो वर्ष का पहला दिन है। इस दिन आप सुधी पाठकों से एक विनम्र निवेदन कि हम ‘आधुनिक’ जरूर बनें पर अपनी जड़ों को ना भूलें… अपने बच्चों को हम हिन्दी नववर्ष, हिन्दी महीनों और इनसे जुड़ी संस्कृति का ज्ञान जरूर दें..!! ये हर भारतीय का सांस्कारिक दायित्व है… इसके अभाव में हम भले ही चांद पर घर बना लें, मंगल को छूकर आ जाएं, ‘विश्वगुरु’ दुबारा कभी ना बन पाएंगे..!!!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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अब बसों में भी ट्रेन की तरह बायो टॉयलेट होगा

लंबी दूरी की बसों में ट्रेनों की तरह जरूरी है टॉयलेट | यूँ आरंभ में तो ट्रेनों में भी टॉयलेट नहीं हुआ करता था  | अर्धशतक बीत गया ट्रेन में टॉयलेट लगते-लगते |

बता दें कि अंग्रेजों द्वारा 16 अप्रैल 1853 को भाप के इंजन के जरिये पहली ट्रेन चलाई गई थी जिसमें लगभग 400 यात्रियों ने बम्बई यानी मुंबई शहर के बोरीबंदर (वर्तमान छत्रपति शिवाजी टर्मिनल) से ठाणे स्टेशन तक की यात्रा बिना टॉयलेट वाली ट्रेन में पूरी की थी |

यह भी जानिये कि आगे 55 वर्षों तक यानी 1908 ई. तक ट्रेनों में यात्रियों के लिए टॉयलेट की सुविधा नहीं थी | बसों की तरह ही जब अनिवार्य एवं अपरिहार्य स्थिति हो जाती तब ट्रेन को भी बस की तरह रोकवाकर यात्री द्वारा मल-मूत्र का परित्याग कर लिया जाता था और फिर उसे बैठाकर ट्रेन खुलती थी |

यह भी बता दें कि अखिलेश चन्द्र सेन नामक यात्री को 1891  ई. में शौच/लघुशंखा करते छोड़कर ट्रेन खुल गई | श्री सेन द्वारा इसके विरोध में संघर्ष करते हुए दिये गये एक आवेदन के आलोक में अंततः 1909 ई. में जाकर फर्स्ट क्लास के डब्बे में सर्वप्रथम टॉयलेट बनाया गया और वह आवेदन पत्र आज भी दिल्ली के रेल संग्रहालय में सुरक्षित है जिसे कोई भी देख सकता है |

जानिए कि अब ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगाया जाना शुरू हो गया है ताकि रेलवे स्टेशनों पर गाड़ी खड़ी होने पर भी गंदगी नहीं फैलेगी- क्योंकि मल-मूत्र को बायोलॉजिकल पद्धति से नष्ट कर दिया जाता है तथा हानिकारक पानी को क्लोरीन चेंबर होकर बाहर निकाल दिया जाता है |
जो भी हो ट्रेन के सभी कंपार्टमेंट में तो टॉयलेट बन गया फिर भी इंजन के ड्राइवर को स्टेशन के टॉयलेट में ही जाना पड़ता है | बाहरहाल केंद्र सरकार के रेल बजट में अब इंजन में भी बायो टॉयलेट बनाने की स्वीकृति के साथ-साथ बजट में भी प्रावधान कर दिया गया है |
अंत में यह कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है | अस्तु आने वाले समय में लंबी दूरी की बसों में जरूरी लगता है टॉयलेट का होना | मोटर संशोधन विधेयक की समीक्षा के लिए सांसद  वी.पी.सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली 24 सदस्यीय संसदीय समिति ने “स्वच्छ भारत अभियान” के तहत इस पर सरकार से गंभीरता पूर्वक विचार करने को कहा है | फिलहाल भारत में बहुत कम बसों में टॉयलेट की व्यवस्था की गई है |

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भारत ने निशानेबाजी में अमेरिका और चीन को धूल चटाया

पहली बार भारत ने मेक्सिको में आयोजित आईएसएसएफ निशानेबाजी वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर चीन व अमेरिका के दबदबे को धता बता दिया | बता दें कि जहाँ वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में 4 स्वर्ण सहित कुल 9 पदकों के साथ भारत प्रथम स्थान पर रहा वहीं 3 स्वर्ण समेत 6 पदकों के संग अमेरिका को दूसरे स्थान पर और 2 स्वर्ण समेत 5 पदकों के साथ चीन को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा |

यह भी बता दें कि हरियाणा के झज्जर की 16 वर्षीय मनु भाकर के दूसरे गोल्ड मेडल के साथ ही भारत शीर्ष पर पहुंच गया | मनु ने लगातार स्वर्ण जीतकर निशाने-बाजी जगत को हैरान कर दिया | और तो और भारत के लिए नंबर एक जोड़ी के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे- मनु भाकर और ओमप्रकाश की जोड़ी ने क्वालीफिकेशन में अद्भुत अंक जुटाये |

जानिये कि ग्यारहवीं कक्षा की निशानेबाज छात्रा मनु भाकर को विश्ववास नहीं हो रहा है कि वह विश्वकप जैसी प्रतियोगिता में 2 दिन के अंदर दो स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही | ऐसा शानदार प्रदर्शन कि समस्त निशानेबाजी जगत को हैरान होना पड़ा |

संक्षेप में यह भी जान लीजिए कि जिन भारतीय निशानेबाजों ने इतिहास रचा वे हैं- 4 स्वर्ण पदक विजेता : शहजार रिजवी, मनुभाकर, अखिल श्योरण एवं मनु-ओमप्रकाश की जोड़ी | रजत पदक पदक विजेता में मात्र एक नाम दर्ज कराया है- अंजुम मुद्दगल ने | कांस्य पदक (4) के लिए जिन्होंने संघर्ष किया वे हैं- मेहुली घोष, जीतू राय, रवि कुमार और मेहुली-दीपक की जोड़ी |

मेडल जीतकर भारत को शीर्ष पर ले जाने के बाद भारतीय निशानेबाजों में अग्रणी मनु भाकर ने कहा कि अब हमारी जिम्मेदारी बढ़ गयी है | आगे इसे बरकरार रखते हुए भारतीय खेल प्रेमियों की उम्मीदों पर हमें अब खड़ा उतरना होगा |

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