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बाहर से आए मजदूरों को अब घर में ही मिल रहा रोजगार

दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों से लौटे बिहार के मजदूरों को गांव फिर भाने लगे है। बिहार सरकार उन्हें घर में ही रोजगार देने को प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार 24 अप्रैल को ग्रामीण विकास विभाग एवं लघु जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि बाहर से आए जिन मजदूरों के पास जॉब कार्ड नहीं है, उन्हें भी जॉब कार्ड बनाकर काम दिया जाए। बैठक के दौरान दोनों विभागों के मंत्री एवं आला अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे।
इस मौके पर ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अरविन्द चौधरी ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि 24 अप्रैल तक 7,761 पंचायतों में 3 लाख 40 हजार 339 कार्य हुए हैं। इनमें 5 लाख 14 हजार 165 मजदूर कार्य कर रहे हैं। बाहर से आए लोगों की क्वारंटाइन अवधि पूर्ण होने के बाद जिन्होंने काम करने की इच्छा जताई, उन सभी लोगों को काम दिया जा रहा है। वहीं, लघु जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने बैठक में बताया कि पहले से विभाग के 1783 कार्य स्वीकृत थे, जिनमें से लॉकडाउन के पूर्व 1400 कार्य शुरू किए गए थे। 20 अप्रैल से 231 नए कार्य शुरू किए गए हैं। 15 जून तक 1783 कार्यों में से 1200 कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे।
ध्यातव्य है कि दोनों विभागों द्वारा कार्यस्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है और मजदूरों को साबुन, हैंडवाश, पेयजल और वाशेबल मास्क दिए जा रहे हैं।

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विश्व पृथ्वी दिवस को जानें

22 अप्रैल को दुनिया भर में ‘अर्थ डे’ यानि विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। साल 1970 में इसी दिन पहली बार अर्थ डे मनाया गया था। उस साल अमेरिकी सांसद और पर्यावरण संरक्षक गेलार्ड नेल्सन ने पर्यावरण की रक्षा और इसके लिए लोगों को शिक्षा देने के उद्देश्य से प्रतीक दिवस के रूप में 22 अप्रैल की स्थापना की थी, जिसके बाद से दुनिया के 192 देश हर साल 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाते आ रहे हैं और गेलार्ड नेल्सन ‘फादर ऑफ अर्थ डे’ के रूप में जाने जाते हैं। इस साल इसकी 50वीं वर्षगांठ है। अमेरिका में इस दिन को ‘ट्री डे’ यानि वृक्ष दिवस के रूप में भी मनाते हैं।
गौरतलब है कि पृथ्वी दिवस दो अलग-अलग दिन मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 21 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय पृथ्वी दिवस के रूप में मान्यता दे रखी है। दरअसल, यह दिन पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में वसंत ऋतु का पहला दिन है। इस तरह इस दिन का वैज्ञानिक और पर्यावरण संबंधी महत्व है, लेकिन 22 अप्रैल को सामाजिक तथा राजनीतिक महत्व  हासिल है। यह अपने आप में दुनिया का सबसे बड़ा जन जागरुकता अभियान है, जिसमें एक साथ अरबों नागरिक हिस्सा लेकर पृथ्वी की रक्षा का संकल्प लेते हैं। इस दिन पृथ्वी के दक्षिणी भाग में शरद ऋतु रहती है।
आज जरूरत इस बात की है कि हम पृथ्वी दिवस के मर्म को समझें। तकनीक और विज्ञान के इस युग में जिस तरह ग्लेशियर पिघल रहे हैं, औसत तापमान बढ़ रहा है, बेमौसम बारिश आम बात हो गई है, मिट्टी की गुणवत्ता घट रही है, प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है और कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं, यह हमें अवश्यंभावी विनाश की ओर ले जा रहा है। अगर हम पृथ्वी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अब भी जागरुक नहीं हुए तो हम अपने साथ-साथ करोड़ों प्रकार के जीवों और वनस्पतियों को भी खतरे में डालेंगे। हमें नहीं भूलना चाहिए कि यह पृथ्वी हमारे साथ-साथ उन जीवों और वनस्पतियों का भी घर है और उन्हें बचाना हम मानवों का ही दायित्व है।
बता दें कि पृथ्वी दिवस का थीम हर साल बदलता रहता है। इस साल इसका थीम है – “क्लाइमेट एक्शन”, जबकि 2019 में इसका थीम “अपनी प्रजातियों की रक्षा करें”, 2018 में “प्लास्टिक प्रदूषण का अंत”, 2017 में “पर्यावरण और जलवायु साक्षरता” तथा 2016 में “धरती के लिए पेड़” था।

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बिहार कैबिनेट ने दी 12 एजेंडों को मंजूरी

मंगलवार 21 अप्रैल 2020 को वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में कुल 12 एजेंडों पर मुहर लगी। इस बैठक के उपरान्त राज्य के हाइस्कूलों में 33,916 शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। कैबिनेट ने इसके लिए पदसृजन को मंजूरी दे दी।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत कैबिनेट ने लॉकडाउन की अवधि में संविदा कर्मियों व एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मियों की उपस्थिति और मानदेय भुगतान में कटौती नहीं करने का निर्णय लिया। इस अवधि में गैरहाजिर कर्मियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति मानी जाएगी।
इसके अलावा राज्य कैबिनेट ने इस साल मार्च में असामयिक बारिश और ओलावृष्टि के कारण हुए फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए 518.42 करोड़ रुपए मंजूर किए। इस राशि से पीड़ित किसानों को जल्द कृषि इनपुट दिया जाएगा।
इन निर्णयों के अलावा और भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए जिनमें बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम 2011 में संशोधन करते हुए राशन कार्ड के नए आवेदन को मंजूरी देना और आपातकालीन स्थिति में कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए सामानों की खरीदारी के लिए स्वास्थ्य सचिव को अधिकृत करना प्रमुख हैं।

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अब राशन कार्ड के बिना भी मिलेगी सहायता राशि

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मुख्य सचिव एवं अन्य वरीय अधिकारियों के साथ पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर डोर टू डोर कैंपेन की अद्यतन स्थिति, राशन कार्डधारियों को दी जा रही 1,000 रुपए की सहायता राशि एवं गेहूँ अधिप्राप्ति की स्थिति आदि के संबंध में गहन समीक्षा की।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्वीकृत, लंबित एवं त्रुटिपूर्ण राशन कार्डों के जांचोपरान्त सही पाए गए आवेदनों को पहले सहायता राशि एवं अन्य मदद उपलब्ध कराई जाए, तत्पश्चात् राशन कार्ड शीघ्र निर्गत करने की भी कार्रवाई करें। साथ ही उन्होंने कहा कि राशन कार्ड विहीन परिवारों को जीविका दीदी द्वारा चिह्नित सूची के अनुसार तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए, तत्पश्चात् राशन कार्ड निर्गत करने की भी कार्रवाई करें।
एक अन्य महत्पूर्ण निर्णय के तहत मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अंदर चल रहे आपदा राहत केन्द्रों में दिहाड़ी मजदूरों, ठेला वेंडरों, रिक्शा चालकों एवं अन्य जरूरतमंदों को गुणवत्तापूर्ण भोजन के साथ-साथ बाढ़ राहत शिविरों की तरह बर्तन, कपड़ा और दूध जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराएं। साथ ही शिविर में खाना बनाने वाले लोगों को अलग से पारिश्रमिक देने की व्यवस्था की जाए। आवश्यकता पड़ने पर राहत केन्द्रों की संख्या भी बढ़ाई जाए।
गेहूँ अधिप्राप्ति की समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूँ अधिप्राप्ति के कार्य में तेजी लाई जाए ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित लाभ मिल सके।
समीक्षा के क्रम में जानकारी दी गई कि पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर प्रभावित जिलो में डोर डोर स्क्रीनिंग के तहत अब तक 36 लाख 14 हजार घरों का सर्वे किया जा चुका है। राहत की बात है कि इतने घरों में से मात्र 1386 लोगों में सर्दी, खांसी एवं बुखार के सामान्य लक्षण हैं। मुख्यमंत्री ने इस दौरान डोर टू डोर स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाने का भी निर्देश दिया।

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भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ 19 अप्रैल को किया गया था लांच

भारत और दुनिया के इतिहास में 19 अप्रैल को एक से बढ़कर एक महत्वपूर्ण घटनाएं घटती रही और आज भी घट रही है- जिनमें अमेरिकी क्रांति की शुरुआत से लेकर भारतीय प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तात्या टोपे को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा दी गई फांसी भी शामिल है। आजाद भारत में पहला उपग्रह “आर्यभट्ट” का 19 अप्रैल 1975 को लांच किया जाना भी इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

बता दें कि यह सेटेलाइट आर्यभट्ट भारत के विश्व विख्यात एवं महान खगोल शास्त्री व गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर नामित किया गया है जिनका जन्म बिहार की राजधानी पटना में पांचवी शताब्दी 476 ईसवी में तब हुई थी जब पटना का नाम कुसुमपुर था।

Stamp in memory of 1st Satellite Aryabhatta released by Govt. Of India.
Stamp in memory of 1st Satellite Aryabhatta released by Govt. Of India.

गणितीय ज्ञान के तत्कालीन खजांची खगोल विद आर्यभट्ट द्वारा मात्र 23 वर्ष की आयु में दो भागों में आर्यभट्टियम पुस्तक लिखी गई थी जिसके कुल 121  श्लोकों द्वारा ज्योतिषीय, बीज गणितीय एवं त्रिकोणमितीय विद्याओं व सूत्रों की व्याख्या की गई। आर्यभट्ट द्वारा शून्य का आविष्कार भी उसे दुनिया में  अमरत्व दे गया है। तभी तो भारत ने अपने प्रथम उपग्रह का नाम उन्हीं के नाम पर आर्यभट्ट रखा… जिसे 19 अप्रैल 1975 को सोवियत काॅसमाॅस- 3M द्वारा कपुस्तिन से लांच किया गया। भारत सरकार ने 1975 में आर्यभट्ट के सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया है।

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18 अप्रैल को घर में ही मनाया ‘विश्व धरोहर दिवस’ डॉ.मधेपुरी ने

सभी जानते हैं कि विश्व के समस्त देशों में मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। भारत के 37 स्थल विश्व धरोहर में शामिल किए गए हैं।

बता दें कि ताजमहल से लेकर अजंता की गुफाओं तक तथा लाल किला से लेकर कोणार्क मंदिर जैसी प्राचीन व ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जगह शामिल है। ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में एक है जिसके निर्माण में 22 वर्ष लगे थे। वर्ष 1632 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था जिस पर उन दिनों 3 करोड़ रुपए का खर्च हुए थे। प्रतिवर्ष ताजमहल को देखने के लिए 40 लाख लोग आते हैं जिसमें 30 फ़ीसदी लोग विदेशी होते हैं।

यह भी बता दें कि कोरोना वायरस के कारण फिलहाल ताजमहल बंद है और पर्यटकों के नहीं आने के कारण गरीबों व मजदूरों की रोजी-रोटी भी बंद हो गई है। कोरोना लाॅकडाउन के कारण घर में रहकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने वर्ल्ड हेरिटेज डे मनाने के क्रम में एकमात्र श्रोता अपनी धर्मपत्नी श्रीमती रेणु चौधरी से अब तक चार बार बंद किए जाने वाले ताजमहल की चर्चा करते हुए कहा-

पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) के दरमियान बंद किया गया था। दूसरी बार भारत-पाकिस्तान युद्ध के दरमियान 1971 में बंद किया गया था। तीसरी बार आगरा में बाढ़ आने के दरमियान 1978 में स्थानीय प्रशासन द्वारा 7 दिनों तक बंद रखा गया था और चौथी बार 2020 में कोरोना के अंतरराष्ट्रीय कहर के दरमियान अनचाहे दिनों के लिए ताजमहल को फिर बंद कर दिया गया है।

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बिहार के कोरोना योद्धा डॉ.जे.पी.यादव की दिल्ली में सड़क दुर्घटना से मौत

बिहार के सुपौल जिला अंतर्गत त्रिवेणीगंज अनुमंडल स्थित भूड़ा गांव के निवासी एवं कोरोना-योद्धा डॉ.जे.पी.यादव दिल्ली में कोरोना मरीजों का इलाज करने में अहर्निश लगे रहते थे कि दिल्ली में ही अचानक एक सड़क दुर्घटना में चार रोज कबल उनकी मृत्यु हो गई। डॉ.जे.पी.यादव का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव भूड़ा में गुरुवार को किया गया।

बता दें कि 52 वर्षीय डॉ.जे.पी.यादव के पार्थिव शरीर के साथ दिल्ली के दर्जनों डॉक्टर अंतिम संस्कार में शामिल होने आए। रास्ते में उत्तर प्रदेश के अधिकारियों एवं कोरोना योद्धाओं द्वारा उनके पार्थिव शरीर पर फूल मालाएं चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ.जय प्रकाश यादव दक्षिण एमसीडी में कोविड- 19 नोडल चिकित्सा पदाधिकारी थे। 1995 से वे दिल्ली को चिकित्सीय सेवा पूर्ण समर्पण के साथ दे रहे थे तथा वर्तमान में कोरोना वारियर्स के रूप में मरीजों का बेहतर इलाज कर रहे थे। उनकी कार जब स्टार्ट नहीं हुई तो बेटे की साईकिल से ही पॉलीक्लिनिक जाकर सीएमओ के रूप में डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) किट वितरण करने में लग गए। एक शाम को अपने फ्लैट ग्रेटर कैलाश-1 लौटते वक्त एक अज्ञात कार ने पीछे से टक्कर मार दी और उन्हें महरौली के पास अरविंदो रोड के पीटीसी चौक से उठाकर मैक्स हॉस्पिटल ले जाया गया परंतु लाख कोशिश के बावजूद बचाया नहीं जा सका।

Funeral of Dr.J.P.Yadav at his paternal village Bhura, Supaul.
The only son Kshitij near funeral of Dr.J.P.Yadav at his paternal village Bhura, Triveniganj (Supaul).

यह भी बता दें कि कोरोना वारियर्स डॉ.जे.पी.यादव को सारा देश संवेदना के साथ मौन श्रद्धांजलि दे रहा है तथा एक प्राइवेट हॉस्पिटल में रेडियोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत उनकी धर्मपत्नी डॉ.रश्मि एवं पुत्र क्षितिज व पुत्री दीक्षा सहित समस्त परिजनों को इस व्यथा को सहन करने की शक्ति प्रदान कर रहा है। परंतु, कृषक पिता महेश्वरी यादव व माता अमलेश्वरी देवी की आंखों के आंसू रुकने-थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और बहन मीना कुमारी होश में आते-आते बार-बार बेहोश हो जाती है। भाई सुभाष कुछ बोल भी नहीं पाता है। समस्त भूड़ा गांव ही शोक में डूबा है। यह कोरोना लाॅकडाउन तो महेश्वरी-अमलेश्वरी के संसार को प्रकाशित करने वाले सूरज को ही सदा के लिए लाॅकडाउन कर दिया है !

चलते-चलते यह भी बता दें कि कोरोना जैसे अंतरराष्ट्रीय आपदा की घड़ी में जब चतुर्दिक लाॅकडाउन विराजमान है तब भी नीतीश सरकार के वरिष्ठ ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के निर्देश पर बिहार की सीमा में प्रवेश करते ही गोपालगंज के डीएम एवं एसपी ने डॉ.जयप्रकाश यादव के पार्थिव शरीर को वीरगति प्राप्त एक नायक जैसा सम्मान दिया तथा फूलमाला अर्पित करते हुए कहा कि डॉ.जेपी ने कोरोना-जंग में लोगों की सेवा करते-करते अपनी शहादत दी है…। त्रिवेणीगंज सदर के एसडीएम बीके सिंह ने जहां डॉ.जेपी के गांव भूड़ा जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की… वहीं अति संवेदनशील समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने त्रिवेणीगंज भूड़ा की मिट्टी को (जिसकी सेवा उनकी बेटी व दामाद डॉ.रश्मि भारती एवं डॉ.वरुण कुमार वर्षों से करते आ रहे हैं) को नमन करते हुए कहा कि कोरोना योद्धा डॉ.जेपी जैसे यशस्वी पुत्र का माता-पिता होना भी परम सौभाग्य की बात है।

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लालू पैरोल पर जल्द आएंगे बाहर

कोरोना संकट के बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए सुकून देने वाली खबर। ये खबर आ रही है कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे की आहट सुन रहे झारखंड से। इस वैश्विक महामारी के बाद बदली परिस्थितियों में लालू प्रसाद यादव को राहत मिलनी तय हो गई है। चारा घोटाला मामले में सजा भुगत रहे आरजेडी सुप्रीमो पैरोल की सारी शर्तों को पूरा कर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि एक-दो दिन में उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया जाएगा। हेमंत सरकार ने भी इस ओर कदम बढ़ा दिए हैं। सरकार ने इस मामले पर विधि विभाग से मंतव्य मांगा था। विधि विभाग ने अपना मंतव्य राज्य सरकार को भेज दिया है।

गौरतलब है कि किसी भी सजायाफ्ता को कुछ शर्तों के साथ पैरोल की सुविधा मिलती है। पैरोल एक्ट के अनुसार सजायाफ्ता व्यक्ति तभी जेल से बाहर निकल सकता है, जब उसने अपनी सजा का एक तिहाई समय जेल में बिताया हो या फिर वह एक साल से जेल में बंद हो। एक्ट के अनुसार सिर्फ उन्हीं व्यक्तियों को पैरोल मिलता है, जिनके घर में शादी हो या किसी का निधन हुआ हो। स्वास्थ्य की स्थिति ठीक नहीं रहने पर भी पैरोल मिलता है। इसके लिए राज्य सरकार एक बोर्ड का गठन करती है, जिसमें संबंधित व्यक्ति का आवेदन भेजा जाता है। उसके बाद कमेटी जेल में उसके व्यवहार, स्वास्थ्य की स्थिति और स्पष्ट कारण को देखते हुए ही पैरोल देने पर सहमति जताती है।

बता दें कि लालू प्रसाद यादव इन दिनों चारा घोटाले के दुमका और चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सजायाफ्ता हैं। वे 23 दिसंबर 2017 से जेल में बंद हैं। जेल में उनके रहने की अवधि करीब 28 माह हो चुकी है, जो पैरोल की शर्तों को पूरा करता है। इसके अलावा उन्हें 15 से अधिक बीमारियां हैं, जिनका इलाज रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में चल रहा है। साथ ही, लालू उसी भवन में भर्ती हैं, जहां पर रिम्स प्रशासन ने कोरोना के संदिग्ध मरीजों के लिए आइशोलेशन वार्ड बनाया है। बहरहाल, यह भी देखना होगा कि पैरोल के बाद उन्हें लॉकडाउन में पटना भेजने की क्या व्यवस्था की जाती है।

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एक के बाद चार दीये जलाकर अंबेडकर जयंती को यादगार बनाएं- डॉ.मधेपुरी

14 अप्रैल 1891 के दिन भारत के संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेदकर का जन्म हुआ था। विश्व धरोहर के रूप में विख्यात बाबा साहब सबके लिए पूज्य हैं और अति सम्माननीय भी। समस्त भारत के अलावा अन्य देशों में भी जहां सभी समुदाय के लोगों द्वारा सर्वाधिक उत्साह एवं उमंग के साथ बाबा साहब की जयंती आज तक मनाई जाती रही है- इस बार वैसा कैसे होगा ? सबको पता है कि संसार के लगभग समस्त देशों में “कोरोना के कहर” से मुक्ति पाने के लिए लाॅकडाउन लगाया हुआ है।

Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri.
Shikshavid Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri.

इस पावन अवसर पर डॉ.भीमराव अंबेडकर साहब की 129वीं जयंती के दिन मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए सबों से यही अनुरोध किया-

राष्ट्र कल्याण एवं राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए देशवासी लाॅकडाउन केे  नियमों का पालन करते हुए अपने-अपने घरों में “एक के बाद चार दीये” जलाकर 14 अप्रैल को सदा के लिए यादगार बनाएं तथा संकल्प के साथ “जयभीम” का उद्घोष करते हुए इस  “भीमवाणी” को आत्मसात करने में लग जाएं-

शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पियेगा वो दहाड़़ेगा !

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बीपी मंडल व फणीश्वर नाथ रेणु को याद किया डॉ.मधेपुरी ने

जिन महापुरुषों ने देश व समाज के उन्नयन के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है वही देश एक छोटे से कीटाणु कोरोना वायरस के कारण आज घर के अंदर बंद है। समस्त राजकीय समारोह पर ब्रेक लग गया है। चाह कर भी सोशल डिस्टेंसिंग  के कारण हम सम्मिलित रूप से समारोह नहीं कर सकते। अस्तु बीपी मंडल की पुण्यतिथि (13 अप्रैल) के दिन उन्हें एवं कथा सम्राट फणीश्वर नाथ रेणु (जिन दोनों महापुरुषों के नाम भारत सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया है) को याद करते हुए समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने मधेपुरा वार्ड नं- 20 स्थित निवास वृदावन में सोशल डिस्टेंस मेंटेन करते हुए समस्त संसार वासियों से यही कहा-

आज कोरोना के कहर के खिलाफ जंग में जूझ रहे भारत को ही नहीं बल्कि संसार के समस्त देशों को मदद करने की बारी है आपकी। मौत की आहटों को आप ध्यान से सुनिए और जो जहां हैं वहीं रहिए… जान है तो जहान है। आपके खुद की हिफाजत से ही आपका संसार महफूज रहेगा। आप सफाई से ज्यादा स्वच्छता पर ध्यान दीजिए। लगातार हाथों को साबुन से साफ कीजिए और हाथों से मुंह-नाक-आंख को नहीं छुईए। हर हाल में सोशल डिस्टेंस मेंटेन कीजिए। एयर कंडीशनर मशीन का इस्तेमाल नहीं कीजिए। मन को संकल्प और संयम से ओत-प्रोत करते रहिए।

Fanishwar Nath Renu.
Fanishwarnath Renu.

लॉकडाउन के दरमियान अपने रहनुमाओं को अवश्य स्मरण कीजिए तथा कोरोना वायरस से लड़ने एवं जीतने के सभी उपायों का डटकर अनुसरण करते रहिए- आज के दिन इन दोनों हस्तियों के प्रति हमारी यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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