दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों से लौटे बिहार के मजदूरों को गांव फिर भाने लगे है। बिहार सरकार उन्हें घर में ही रोजगार देने को प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार 24 अप्रैल को ग्रामीण विकास विभाग एवं लघु जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि बाहर से आए जिन मजदूरों के पास जॉब कार्ड नहीं है, उन्हें भी जॉब कार्ड बनाकर काम दिया जाए। बैठक के दौरान दोनों विभागों के मंत्री एवं आला अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे।
इस मौके पर ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अरविन्द चौधरी ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि 24 अप्रैल तक 7,761 पंचायतों में 3 लाख 40 हजार 339 कार्य हुए हैं। इनमें 5 लाख 14 हजार 165 मजदूर कार्य कर रहे हैं। बाहर से आए लोगों की क्वारंटाइन अवधि पूर्ण होने के बाद जिन्होंने काम करने की इच्छा जताई, उन सभी लोगों को काम दिया जा रहा है। वहीं, लघु जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने बैठक में बताया कि पहले से विभाग के 1783 कार्य स्वीकृत थे, जिनमें से लॉकडाउन के पूर्व 1400 कार्य शुरू किए गए थे। 20 अप्रैल से 231 नए कार्य शुरू किए गए हैं। 15 जून तक 1783 कार्यों में से 1200 कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे।
ध्यातव्य है कि दोनों विभागों द्वारा कार्यस्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है और मजदूरों को साबुन, हैंडवाश, पेयजल और वाशेबल मास्क दिए जा रहे हैं।


