बकौल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन कोविड टीकाकरण अभियान के तहत फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाने का काम फरवरी तक पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। आधार कार्ड की मदद से टीके की पहली खुराक लेने वालों की पहचान की जाएगी ताकि ऐसे लोगों को दूसरी खुराक एक महीने के अंदर ससमय दिया जा सके।
बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जून-जुलाई तक 30 करोड़ लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को और दूसरे चरण में सुरक्षाकर्मियों जैसे अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगेगा। सभी राज्यों के ऐसे वर्कर्स के आंकड़ों को 26 जनवरी तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने को कहा गया है ताकि ससमय इसका टीकाकरण हो सके।
चलते-चलते यह भी जानिए कि टीकाकरण के मामले में पांच राज्यों में पहले दिन के आंकड़े इस प्रकार आए हैं- उत्तर प्रदेश में जहां 21 हजार से अधिक लोगों को टीके दिए गए वहीं आंध्र प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में 18 हजार से अधिक और उड़ीसा में 13 हजार से अधिक लोगों को बिना किसी विशेष परेशानी के टीके दिए गए। इस पर महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा कि भारत कोविड मुक्त होगा और वह क्षण भारतवासियों के लिए गर्व का क्षण होगा।
जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में बिहार में पहले दिन 301 केंद्रों पर 18 हजार 122 लोगों को कोरोना वैक्सीन के डोज दिए गए वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना से मरने वालों को याद कर भावुक हो गए और देश भर में 191181 स्वास्थ्य कर्मियों को टीके लगे।
पटना आईजीआईएमएस में मुख्यमंत्री नीतीश की मौजूदगी में पहला टीका सफाईकर्मी राम बाबू को दिया गया और दूसरे नंबर पर एंबुलेंस चालक अमित कुमार को कोरोना टीके का डोज पड़ा। साथ ही टीकाकरण आरंभ होते ही कहीं तालियां बजी तो कहीं मुस्कान खिली…. यही जानिए कि आज के दिन उत्तर से दक्षिण तक हर्ष….. और यही माननीय की पूरब से पश्चिम तक लोग टीके लेते रहे सहर्ष। मंत्रालय के अनुसार 16755 लोग टीकाकरण अभियान में लगे थे।
बता दें कि टीका लगवाने वाले किसी भी व्यक्ति को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं हुई जबकि 12 राज्यों में कोवैक्सीन का इस्तेमाल किया गया। कहीं भी किसी में गंभीर दुष्परिणाम देखने को नहीं मिले।
मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार अगले 24 घंटों तक प्रदेश में कड़ाके की ठंड रहेगी। पश्चिम से आ रही बर्फीली हवा के चलते यहां सीवियर कोल्ड डे एवं घने कोहरे के बीच न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा चुका है। जनजीवन प्रभावित होने लगा है।
मौके पर संवेदनशील-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा आसपास के अभावग्रस्त व निर्धन नर-नारियों के बीच दिन भर कंबलों का वितरण किया जाता रहा। सकारात्मक सामाजिक कार्यों में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाने वाले डॉ. मधेपुरी ने ठंड से ठिठुरते हुए जरूरतमंदों के बीच सौ कंबल बांटने के बावजूद लौटने वाले अत्यंत गरीबों का नाम नोट कर अगले दिन आने को कहा। वहीं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रेणु को मकर संक्रांति के अवसर पर चंद सर्वाधिक लाचारों को लाय-मुड़ी भी देते हुए देखा गया। इस दंपत्ति के लिए पीड़ित मानवता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। खासकर इस दंपत्ति की नजर में गरीबों की सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं है। वे दोनों इसे माता-पिता की सेवा ही मानते हैं।
जानिए कि डॉ. मधेपुरी ने माता पिता के निधन पर अंधविश्वास एवं कर्मकांड का पूर्णत: परित्याग कर दिया। बदले में अनेकानेक जनकल्याणकारी कार्यों का निष्पादन विगत 25 वर्षों से लगातार करते आ रहे हैं। वे पढ़ने वालों को पढ़ने में, खेलने वालों को खेलने में तथा संगीत सीखने वालों को भी आर्थिक मदद के अतिरिक्त अन्य प्रकार से मदद करते रहते हैं। यूं तो इस जिले को किसी न किसी रूप में गौरवान्वित करने वालों को डॉ.मधेपुरी सम्मानित करते आ रहे हैं, परंतु विगत 25 वर्षों से मकर संक्रांति के आसपास कड़ाके की ठंड में निर्धन व लाचारों के बीच लगातार कंबल बांटते चले आ रहे हैं। पूछने पर उन्होंने यही कहा कि ऐसे कार्य करने से अंतर्मन को सुकून मिलता है और लोगों के चेहरों पर मुस्कान देख कर खुशी मिलती है।
भारत की आजादी के लिए न जाने कितने किशोर अपने प्राण न्योछावर कर दिए, फिर भी उनका जिक्र युवाओं के बीच में खुदीराम बोस की तरह जमकर नहीं हो पाता है। वैसे ही नामों में एक नाम है कोसी अंचल के शहीद चुल्हाय यादव का, जो 15 जनवरी 1920 को जन्म लिए और 30 जनवरी 1943 को महज 23 वर्ष की उम्र में आजादी की खातिर शहीद हो गए। जिनके लिए क्रांति गाथा के कवि डाॅ.जीपी शर्मा की पंक्तियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्कूली बच्चों के बीच समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने यूं सुनाया-
प्रखर ग्राम मनहरा सुखासन फूलचंद थे एक किसान।
उनका पुत्र चुल्हाई यादव ने रखा धरती का मान।।
मधेपुरा में बीच सड़क पर सत्याग्रही युवक को मार।
गौरों ने सुरपुर पहुंचाया गई अहिंसा सचमुच हार।।
कंठ-कंठ में आज चुल्हाई की उज्जवल गौरव गाथा।
इस शहीद ने किया कौशिकी अंचल का ऊंचा माथा।।
डॉ.मधेपुरी ने कहा कि अपने अतीत को जाने बिना कोई भी आदमी ना तो अपने भविष्य को गढ़ सकता है और न वर्तमान में एक कदम आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि नेपाल के जंगल में जेपी-लोहिया ने तय किया कि 26 जनवरी को सभी क्रांतिकारी अपने-अपने मुख्यालयों में तिरंगा फहराएंगे। इसी क्रम में शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल, राम बहादुर सिंह….. सरीखे क्रांतिकारियों की बैठक 25 जनवरी, 1943 की रात में आयोजित की गई।
बैठक में जब चुल्हाय कहते हैं कि वे सबसे छोटे हैं, इसलिए उन्हें ही भारत माता की जयघोष के साथ तिरंगा फहराने का अवसर दिया जाए…. और वैसा ही हुआ। ब्रिटिश सिपाही उन्हें तिरंगा फहराते पकड़ लिया और घसीटते हुए ले जाकर वृक्ष से लटका कर इस कदर पीटा कि 30 जनवरी को 23 वर्षीय चुल्हाय शहीद हो गये। उनको सम्मानित करने के लिए समाजसेवी डॉ.मधेपुरी के प्रयास से 30 जनवरी, 2015 में डाक बंगला सड़क का नाम “शहीद चुल्हाय मार्ग” किया गया।
केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए गाय के गोबर से दीवार रंगने वाला पेंट बनाने की योजना सफल हुई। यह पेंट 1 दिन बाद बाजार में आ जाएगा। फिलहाल इसकी पैकिंग 2 लीटर से 30 लीटर तक तैयार की गई है। इस पेंट की बिक्री खादी और ग्रामोद्योग आयोग की मदद से की जाएगी। इसका नाम खादी प्राकृतिक पेंट है। आयोग का दावा है कि इस प्राकृतिक उत्पाद से गोबर की गंध बिल्कुल नहीं रहेगी।
बता दें कि इस गोबर पेंट को जयपुर की इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है। इस गोबर पेंट को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा भी प्रमाणित किया जा चुका है। यह गोबर पेंट नॉनटॉक्सिक है। आयोग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि गाय के गोबर से बनाया पेंट एंटी फंगल, एंटी बैक्टीरियल एवं इको फ्रेंडली है। दीवाल पर पेंट करने के बाद यह मात्र 4 घंटे में सूख जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इसमें जरूरत के हिसाब से रंग भी मिलाया जा सकता है और मनभावन रंग तैयार किया जा सकता है।
चलते-चलते यह भी बता दें कि सरकारी एजेंसियों द्वारा लगाए गए अनुमान के अनुसार किसानों एवं गौशालाओं के प्रति गाय के गोबर से 25 हजार से ₹30 हजार तक की आमदनी अवश्य होगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसको बाजार में बिकने हेतु लांच किया है।
डीआरडीए के झल्लू बाबू सभागार में 12 जनवरी को डीएम श्याम बिहारी मीणा की अध्यक्षता में 72वें गणतंत्र दिवस की तैयारी बैठक में पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार, डीडीसी विनोद कुमार सिंह, सहित जिले के उप-समाहर्तागण व विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारी व प्रतिनिधिगण उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त शहर के समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, मो.शौकत अली, मनीष सर्राफ, डॉ.शांति यादव, कबड्डी किंग अरुण कुमार, स्काउट एंड गाइड के जयकृष्ण यादव, माध्यमिक विद्यालयों के प्रधान आदि उपस्थित थे।
कोविड-19 के मद्देनजर निर्णय लिया गया कि वर्ग 9 से ऊपर के छात्र-छात्राएं सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए मास्क लगाकर प्रभात फेरी निकालेंगे। विभिन्न विभागों द्वारा कोविड-19, जल-जीवन-हरियाली, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ….. आदि विषयों पर झांकियां निकाली जाएंगी।
डीएम मीणा ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी प्रवीण कुमार को शहर की सफाई का भार सौंपा, वहीं भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक को शहर में स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं की रंगाई व साफ-सफाई की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने सम्मान के साथ राष्ट्रीय आंदोलन करने एवं स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करने पर बल दिया।
मौके पर डॉ.मधेपुरी ने झंडोत्तोलन के नियमों की चर्चा के साथ-साथ जेकेटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में जल संकट दूर करने एवं मधेपुरा निवासी सीआई रविंद्र कुमार के एकलौते पुत्र (कुमार सोनू) मेडिकल छात्र के विदेश (यूक्रेन) में मृत्यु हो जाने पर डेड बॉडी को भारत (मधेपुरा) मंगवाने हेतु भारत व यूक्रेन दूतावास से पत्राचार करने की चर्चा की।
एसपी योगेंद्र कुमार ने जहां प्रभात फेरी के समय पुलिस व्यवस्था की बात कही, वहीं स्वास्थ्य विभाग एक एंबुलेंस देने की सहमति जताई। डीएम द्वारा जिले को गौरवान्वित करने वालों को सम्मान देने की चर्चा की गई। इस पर डॉ.मधेपुरी द्वारा पुरैनी प्रखंड के नितेश जैन के आईएएस करने की चर्चा करने पर डीएम मीणा ने डीसी को निर्देश दिया कि उनके माता-पिता के नाम “सम्मान-पत्र” भेजा जाए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा- आज ही के दिन यानि 12 जनवरी 1863 को नरेंद्रनाथ दत्त का जन्म कोलकाता में हुआ था। उनके गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें विवेकानंद नाम दिया, जो नाम आज भारत ही नहीं विश्व के युवाओं के लिए प्रेरणा-स्रोत बन गया है।
डॉ.मधेपुरी ने बच्चों से कहा कि आर्थिक तंगी से जूझते हुए अनेक वर्षों तक भारत भ्रमण किया स्वामी विवेकानंद ने। 1893 में उन्होंने शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सभा में सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया और भारत की मजबूत छवि दुनिया के सामने पेश की। शिकागो के उस मंच से जब उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत- “……..भाइयों ! और बहनों !!” संबोधन के साथ आरंभ किया तो वहां मौजूद लोग तल्लीन होकर बस उन्हें ही सुनते रह गए। बच्चों ! स्वामी विवेकानंद का भाषण आज भी प्रासंगिक है-
“…..मैं इस मंच से बोलने वाले उन वक्ताओं का भी धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार पूर्व के देशों से आया है….. और शिक्षा वही है जो अनुकरण की जगह अन्वेषण करना सिखाये और युवाओं के अंदर आत्मविश्वास जगाए।”
मधेपुरा में वर्षों से ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के बैनर तले संचालिका राजयोगिनी रंजू दीदी द्वारा आध्यात्मिकता का पाठ पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा बाबू व उनके भाई विजय वर्धन के जयपाल पट्टी मोड़ स्थित आवासीय प्रभाग में लोगों को तन्मयता के साथ पढ़ाया जाता रहा। आज नए वर्ष 2021 के 10 जनवरी को वार्ड नंबर- 25 में तुनियाही रोड स्थित राधाकृष्ण मंदिर के समीप नवनिर्मित “सुख शांति भवन” के निर्माता व दानदाता राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के उप महाप्रबंधक (साहूगढ़ निवासी) नरेश कुमार द्वारा सहृदय होकर भव्य स्नेहमिलन व आध्यात्मिक प्रवचन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत एवं नेपाल के विभिन्न इलाकों से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की संचालिकाएं उपस्थित हुईं तथा उन्होंने आत्मा, परमात्मा एवं भौतिक विश्व के बीच परस्पर संबंध की समझ बढ़ाने हेतु विस्तार से उद्गार व्यक्त किया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए नेपाल राजविराज क्षेत्र की मुख्य संचालिका राजयोगिनी भगवती दीदी, वर्षों से सीमावर्ती क्षेत्र प्रभारी राजयोगिनी रंजू दीदी एवं सेवा केंद्र संचालिका बबीता दीदी ने आध्यात्मिक क्रियाकलापों की विस्तार से जानकारियां दी। इस अवसर पर उपस्थित तमाम अतिथियों को संस्था की ओर से पाग, प्रतीक व पुष्पादि देकर सम्मानित किया गया।
Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing the inaugural function of Brahma Kumari Ishwariya Vishwavidyalaya at Newly built “Sukh Shanti Bhawan” Madhepura.
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में विस्तार से उद्गार व्यक्त करते हुए सदर विधायक व पूर्व मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने जहां कहा कि यह ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय विश्व के 144 देशों में मानव कल्याण की दिशा में आध्यात्मिकता के फैलाव का सराहनीय प्रयास करता आ रहा है वहीं मुख्य वक्ता के रूप में भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने मानव शरीर को कंप्यूटर और मानव मन को कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर बताते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय मानव मन की असीमित शक्तियों के विस्तार की विधियां सिखाता है और उसे अपडेट रखता है।
प्रजापिता लेखराज कृपलानी के राह के राही उप महाप्रबंधक नरेश कुमार ने जहां कहा कि यह ईश्वरीय विश्वविद्यालय विश्व में व्याप्त धर्मों के सार को आत्मसात कर उन्हें मानव कल्याण की दिशा में उपयोग करने वाली एक संस्था है, वहीं समाज सेविका रागिनी रानी ने कहा कि जीवन से थके हुए लोग इसे अपनाकर शांति और उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।
अंत में ब्रह्मा कुमारी संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू राजस्थान के प्रमुख देवान, अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय के पीस ऑफ माइंड टेलीविजन से राजयोगिनी शिखा दीदी, नेपाल के ब्रह्मा कुमार दीपक भाई, पटना से आई राजयोगिनी संगीता दीदी सहित नेपाल ऑयल निगम के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर हरि प्रसाद सिंह उर्फ हरि बाबू ने आध्यात्मिकता की बौछार कर श्रोताओं को घंटों सराबोर करते रहे।
मौके पर ब्रह्मा कुमार व कुमारियाँ- जगदीश, शशि, शालु, जैन, हेमा, अनीता, कौशल्या, नीरा, माया, कमला सहित पतंजलि योग शिक्षक डॉ.एनके निराला, प्रो.अजय, प्रो.सतीश, अशोक यदुवंशी, प्रो.रामाशंकर, रविकांत आदि मौजूद रहे एवं सहयोग करते रहे। उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा दाता नरेश कुमार सहित उनके स्मृतिशेष पिता देव आनंद, माताश्री माया देवी, पुत्र नीलेश व पुत्री राधिका के इस महादान हेतु महाअभिनंदन किया गया। समस्त कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमार भाई किशोर ने किया।
करीब 10 महीने से मधेपुरा में जननायक कर्पुरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज शुरू है। ओपीडी एवं इमरजेंसी में इलाज कराने के लिए दूसरे जिले के मरीज भी पहुंच रहे हैं। उनमें ज्यादातर मरीज गरीब तबके के होते हैं। परंतु, अस्पताल में मरीजों एवं सेवादारों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सूखे गले को गीले करने के लिए मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। प्यास बुझाने के लिए दुकानों से पानी खरीदना उनकी मजबूरी बन गई है।
बकौल सुरक्षा गार्ड, यह जानिए कि कैंपस में एक चापाकल था लेकिन आजकल उसे भी उखाड़ दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन कैंपस में पानी की समुचित व्यवस्था करने के प्रति उदासीन बना है। फिलहाल पूरे कैंपस में आम लोगों के लिए कहीं भी पानी की व्यवस्था नहीं है। पानी के लिए मरीज और उनके परिजन अस्पताल कैंपस में भटकते रहते हैं। गरीब मरीज को दिन भर में ₹100 पानी खरीदने में खर्च करना पड़ता है।
जानिए कि करोड़ों की लागत से लगाया गया जलापूर्ति प्लाट लगते-लगते बंद हो गए। सारा पाइप क्षतिग्रस्त हो गया। जिस कैंपस में प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही बनी रहती हो उसमें एक भी चापाकल नहीं…..! संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि पीएचइडी विभाग को निर्देश देकर एक दर्जन चापाकल फिलहाल गड़वा दिए जाएं ताकि लोग पानी की परेशानी से निजात पा सके और लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ सके।
भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के पांचवें कुलपति डॉ.महावीर प्रसाद यादव के नाम भूपेन्द्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय, बालमुकुंद नगर, साहूगढ़, मधेपुरा में विद्वानों को बैठने के लिए ‘डॉ.महावीर प्रातिभ पीठ’ का निर्माण किया जाएगा। विद्वानों को बैठने की इस भव्य प्रातिभ पीठ के निर्माण में लगभग 10 लाख की लागत लगेगी, जो उनके पुत्र डॉ.अरुण कुमार एवं परिजनों द्वारा की जाएगी। ये बातें प्रधानाचार्य डॉ.महावीर प्रसाद यादव के अत्यंत प्रिय भौतिकी के प्रोफसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कही।
बता दें कि लोग उन्हें आज भी टीपी कॉलेज के विश्वकर्मा कहते हैं। उनके कार्यों की सराहना भी करते हैं। कई विश्वविद्यालयों में प्रति कुलपति, कुलपति, सांसद, विधायक, शिक्षा मंत्री एवं लंबे अर्से तक टीपी कॉलेज में प्राचार्य रहे महावीर बाबू के पुत्र प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार, स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष के मार्गदर्शक प्रो.डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उन्हें बीएनएमभी में पिताश्री के नाम एक भव्य प्रातिभ पीठ निर्माण की नेक सलाह दी….. क्योंकि इस महाविद्यालय से डॉ.मधेपुुुरी का रिश्ता अत्यंत गहरा रहा है। जब आपातकाल में लोग भयाक्रांत थे तब उस अवधि में डॉ.मधेपुुुरी ने निर्भीक होकर कॉलेज की स्थापना का संकल्प लिया था।
जानिए कि चंद रोज कबल बीएनएमयू के सीनेटर व बीएन मुस्टा के महासचिव प्रो.(डॉ.)नरेश कुमार, प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार और इन दोनों के शिक्षक व मार्गदर्शक रहे डॉ.मधेपुुुरी ने बीएनएमभी कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो.(डॉ.)केएसओझा एवं अन्य काॅॅलेज कर्मियों के साथ परिसर में घूम-घूम कर स्थल चयन पर विचार-विमर्श किया। डॉ.महावीर प्रातिभ पीठ निर्माण हेतु प्रधानाचार्य के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति मांगी गई है। मौके पर डॉ.गजेंद्र कुमार, डॉ.नवीन कुमार सिंह, डॉ.पीएन पीयूष, बड़ा बाबू व अन्य कालेज कर्मी भी विचारों का आदान-प्रदान कर इस पवित्र कार्य में सहयोग कर रहे थे तथा महावीर बाबू के परिजनों के प्रति कृतज्ञता भी ज्ञापित कर रहे थे।