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पांच करोड़ लोगों ने बनाई 13668 किलोमीटर लंबी मानव-श्रृंखला

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का साथ देने एक बार फिर पूरा बिहार उमड़ पड़ा और करोड़ों बिहारवासियों ने दहेज और बालविवाह से मुक्ति का पवित्र संकल्प लिया। रविवार को दोपहर 12 से 12.30 बजे के बीच राज्य के आम हों खास नागरिक, बच्चे हों या बूढ़े, पुरुष हों या महिलाएं, सभी एक समान उत्साह से भरे हुए नजर आए। दैनिक जागरण के मुताबिक श्री नीतीश कुमार के आह्वान पर इस बार 13668 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला में करीब पांच करोड़ लोग शामिल हुए और इस तरह बिहार विश्व की सबसे लंबी मानव श्रृंखला का साक्षी बना। बता दें कि इससे पहले भी यह कीर्तिमान बिहार के ही नाम था। शराबबंदी के लिए बनी मानव-श्रृंखला में 2016 में इसी 21 जनवरी के दिन लगभग 4 करोड़ लोग जुटे थे। ध्यातव्य है कि पिछली बार सड़कों पर ही श्रृंखला बनाई गई थी। इस बार यह लोगों पर छोड़ा गया था। लोगों ने गांव-कस्बे-मोहल्ले में जहां चाहा वहां श्रृंखला बनाई।

मानव-श्रृंखला की शुरुआत श्री नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान में गुब्बारा छोड़कर की। श्रृंखला बनाने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह और दहेज के खिलाफ पहले से ही कानून हैं, लेकिन ये कुरीतियां फैलती जा रही हैं। इसलिए हम बापू के जन्मदिवस 2 अक्टबूर से इसके विरोध में अनवरत अभियान चला रहे हैं। आगे भी यह कार्यक्रम जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि लोगों में बाल विवाह व दहेज के खिलाफ जागरुकता आ रही है। उनके संकल्प का प्रकटीकरण सार्वजनिक तौर पर भी होना चाहिए। इसलिए इस मानव-श्रृंखला का आयोजन किया गया।

जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष श्री बशिष्ठ नारायण सिंह ने मानव-श्रृंखला को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि श्री नीतीश कुमार ने राजनीति को जिस तरह समाज से जोड़ा है, वह अनोखा है और उसका असर मानव-श्रृंखला के लिए घर से बाहर निकलने वाली बिहार की करोड़ों जनता की आंखों में देखा जा सकता है। वर्तमान समय में पूरे देश में दूसरा कोई ऐसा राजनेता नहीं, जिसने समाज-सुधार को अपना एजेंडा बनाया हो। बिहार की जनता ने अपने नेता के आह्वान पर एक बार फिर जैसा उत्साह दिखाया है, उससे उनके संकल्प को और बल मिलेगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के साथ गांधी मैदान में विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी, पथनिर्माण मंत्री श्री नंदकिशोर यादव, कृषिमंत्री श्री प्रेम कुमार समेत कई वरिष्ठ नेता व नागरिक मानव-श्रृंखला का हिस्सा बने। वहीं ईको पार्क के निकट स्ट्रैंड रोड पर बनी मानव-श्रृंखला में जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष श्री बशिष्ठ नारायण सिंह के नेतृत्व में विधान परिषद के पूर्व सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह, विधानपार्षद व जेडीयू बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. रामवचन राय, विधानपार्षद व पार्टी के मुख्य सचेतक श्री संजय कुमार सिंह (गांधीजी), विधानपार्षद व कोषाध्यक्ष डॉ. रणवीर नंदन, विधानपार्षद व मुख्य प्रवक्ता श्री संजय सिंह, विधानपार्षद श्री ललन सर्राफ एवं जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप समेत हजारों कार्यकर्ता व नेता शामिल हुए।

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मधेपुरा में विश्व शांति दिवस के रूप में मनी ब्रह्मा बाबा की 49वीं पुण्यतिथि

विश्व के लगभग डेढ़ सौ देशों में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की श्रेष्ठ ब्रम्हाकुमारियों ने सभी श्रद्धालुओं को सामाजिक बुराइयों एवं कुरीतियों को मिटाने का संकल्प दिलाकर प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 49वीं पुण्यतिथि को विश्व शांति दिवस के रूप में समारोह पूर्वक मनाया |

बता दें कि मधेपुरा शाखा की शक्तिस्वरूपा ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी रंजू दीदी ने इस अवसर पर कहा कि ब्रह्मा बाबा ने समस्त मानव जाति के लिए आंतरिक विकास व विश्वशांति के लिए कार्य किया | इतना ही नहीं, जब समाज में महिलाओं के अधिकारों की चर्चा तक नहीं होती, तब ब्रह्मा बाबा ने नारी को ससम्मान रहने की शक्ति दी | रंजू दीदी ने काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और आलस्य को दु:खों एवं समस्याओं का मुख्य कारण बताया |

समारोह की अध्यक्षता कर रही ब्रह्मा कुमारी रंजू दीदी एवं विशिष्ट अतिथि विजय कुमार सर्राफ, डॉ.गणेश प्रसाद, प्राणमोहन, विनय वर्धन एवं बी.के.किशोर आदि की उपस्थिति में मुख्य अतिथि समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने उद्घाटन कार्यक्रम सम्मिलित रुप से दीप प्रज्वलित कर किया |

बता दें कि सर्वप्रथम रंजू दीदी ने सभी श्रद्धालुओं को टीका लगाकर सम्मानित किया | तत्पश्चात सभी मौनावस्था में समाधिस्थ होकर प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के स्मरण के साथ-साथ ध्यान-साधना भी किया | फिर विश्व शांति के निमित्त सबों ने ब्रह्मा बाबा के तैल चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पार्पण भी किया |

अंत में भीषण ठंड के मद्देनजर मात्र मुख्य अतिथि डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने अति संक्षेप में उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए बस इतना ही कहा कि हीरे-मोती के श्रेष्ठ व्यापार करने वाले जो प्रजापिता ब्रह्मा बाबा सबकुछ को लोकहित के लिए न्योछावर कर विश्वशांति हेतु आजीवन क्रियाशील रहे उन्हें मैं अपनी चार पंक्तियां श्रद्धांजलि स्वरुप अर्पित करता हूँ-

कि मुट्ठी बांधकर आये जरा तुम ख्याल कर लो,

पसारे कर विदा होगे इसे भी याद कर लो |

अरे धन लूटने की लालसा तो व्यर्थ है सब,

न्योछावर लोकहित कर स्वयं को आबाद कर लो ||

 

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नया कीर्तिमान रचेगी इस बार की मानव-श्रृंखला

दहेज व बालविवाह के विरोध में बनने वाली मानव-श्रृंखला को लेकर जेडीयू की तैयारी और कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है। मानव-श्रृंखला की सफलता को लेकर राज्य के सभी 51 सांगठनिक जिलों में जिला अध्यक्ष व जिला प्रभारी और सभी प्रखंडों में प्रखंड अध्यक्ष व प्रखंड प्रभारी बैठक कर चुके हैं।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य श्री बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा है कि शराबबंदी के समर्थन में बुलाई गई मानव-श्रृंखला में पिछली बार 4 करोड़ से ज्यादा लोग जुटे थे, इस बार की मानव-श्रृंखला नया कीर्तिमान रचेगी और सामाजिक सुधार पूरे देश का मुद्दा बनेगा।
जेडीयू संसदीय दल के नेता व राष्ट्रीय महासचिव श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि 21 जनवरी को पूरा बिहार दहेजप्रथा और बालविवाह जैसी कुरीतियों के विरुद्ध शंखनाद करेगा। आधी आबादी की इसमें बढ़-चढ़कर भागीदारी हो, इसके लिए पार्टी ने ‘समाजसुधार वाहिनी’ का गठन किया है।
जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने बताया कि जिलों एवं प्रखंडों से प्राप्त सूचना के अनुसार पार्टी के 40 लाख से ज्यादा सदस्य एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू किए गए समाज सुधार अभियान में आस्था रखने वाले तमाम लोग 21 जनवरी को सपरिवार मानव-श्रृंखला में भाग लेंगे। इसके लिए पार्टी लगातार जागरुकता अभियान में जुटी है और हर जरूरी तैयारी की जा चुकी है। सभी जगहों पर इसका पूर्वाभ्यास भी किया जा चुका है। प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान पर मध्याह्न 12 बजे सभी बिहारवासी एक नया इतिहास रचने को एकत्र होंगे, इसका हमें पूर्ण विश्वास है।

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भारतरत्न डॉ.कलाम अब अंग्रेजी पाठ्यपुस्तकों में होंगे शामिल- सी.ए.बी.ई.

नई उम्मीदों एवं नये संकल्पों के इस नये साल में जीवन की चुनौतियों से सामना करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को शिक्षा के क्षेत्र में विशेष सलाह देने वाली भारत की सर्वोच्च संस्था- “केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड” यानी सी.ए.बी.ई. द्वारा सरकार को यह सुझाव दिया जा रहा है कि भारत के मिसाइल मैन महामहिम भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की आत्मकथा ‘अग्नि की उड़ान’ के कुछ अंश को अंग्रेजी पाठ्य पुस्तकों में शामिल किये जा सकते हैं |

इस पर विचार व्यक्त करते हुए विज्ञानवेत्ता भारतरत्न डॉ.कलाम के निकटतम रह चुके डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि अंग्रेजी में ही नहीं बल्कि हिन्दी सहित अन्य सभी क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से डॉ.कलाम के प्रखर व्यक्तित्व एवं सराहनीय कृतित्व वाली आत्मकथा को प्रारंभिक वर्गों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए | डॉ.मधेपुरी ने इसी क्रम में जानकारी दी कि भारतरत्न डॉ.कलाम पर लिखी गई उनकी पुस्तक- “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” का सर्वाधिक अंश झारखंड सरकार ने वर्ग 6 के ‘हिंदी भाषा मंजरी’ के पाठ्यक्रम में शामिल कर बच्चों को सत्र 2017-18 से पढ़ाना भी शुरू कर दिया है |

यह भी जानिये कि केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य मो.लतीफ मकदूम एवं भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष बी.बी.कुमार ने जहाँ बैठक में चिकित्सा विज्ञान की एक ऐसी संस्था के गठन की वकालत की है जो प्राथमिक उपचार, अस्पताल प्रबंधन एवं वार्ड प्रबंधन में अल्प अवधि का सर्टिफिकेट कोर्स कराएगा वहीं डॉ.मधेपुरी राज्य के मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पत्र लिख-लिखकर माध्यमिक विद्यालयों के अंतिम 2 वर्षों में प्रत्येक शनिवार को फर्स्ट एड एवं माँस व नस में सूई देने की ट्रेनिंग (विशेषरुप से लड़कियों को) देने की सलाह को लागू कराने के प्रयास में लगे हैं | यदि इसे नीतीश सरकार स्वीकार कर लेती है तो साईकिल योजना एवं पोशाक योजना की तरह इस योजना को भी अन्य राज्यों में भी लागू करने का मार्ग प्रशस्त होने लगेगा और बिहार मॉडल भारत में अपना परचम लहराने लगेगा |

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शहीद चुल्हाय के खून का कुछ कर्ज चुकाया मधेपुरा ने

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के अगस्त क्रांति के अमर शहीद चुल्हाय मंडल की 98वीं जयंती के अवसर पर उनके पैतृक गाँव मनहरा-सुखासन में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया- बिहार सरकार के पूर्व आपदा प्रबंधन मंत्री सह वर्तमान लोकप्रिय विधायक प्रो.चन्द्रशेखर ने | इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शहीद चुल्हाय ने आजादी के लिए अपनी जान तक की कुर्बानी दी जिसे हम सबों को मिलकर अक्षुण्ण रखना होगा तथा उनके सपनों का भारत बनाना होगा |

मंचासीन होने के साथ उद्घाटनकर्ता विधायक प्रो.चन्द्रशेखर, मुख्यवक्ता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी , मुख्य अतिथि पूर्व विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा,  विशिष्ट अतिथि डॉ.नरेश कुमार तथा अध्यक्षता कर रहे प्रो.श्यामल किशोर यादव सहित ई.प्रभाष आदि ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का सम्मिलित रूप से उद्घाटन किया |

उद्घाटनकर्ता एवं मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि शहीद चुल्हाय वसूल के पक्के आदमी थे, उन्होंने जान गवां दी लेकिन अंग्रेजों से समझौता नहीं किया | उन्होंने यह भी कहा कि गरीबों एवं दलितों की आवाज को उठाने वाले राजद सुप्रीमो लालू यादव एवं मंडल मसीहा का प्रतीक शरद यादव को नीचे दिखाने के लिए एक से बढ़कर एक षड्यंत्र किया जा रहा है | विशिष्ट अतिथि सिनेट सदस्य डॉ.नरेश कुमार ने चुल्हाय मंडल एवं शिक्षा जगत के लोक नायक कीर्ति नारायण मंडल के अवदानों की भूरि-भूरि प्रसंशा की,सराहना की |

समारोह के मुख्यवक्ता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने विस्तृत संबोधन में यहीं से आरंभ किया कि यूँ तो मधेपुरा सामाजिक परिवर्तन की धरती रही है लेकिन आज से क्रान्तिवीर शहीदों की धरती भी कही जायेगी | उन्होंने कहा कि अगस्त क्रांति में मधेपुरा-सहरसा के कुल 9 शहीदों में केवल दो शहीदों- चुल्हाय मंडल और धीरो राय का शव उनके परिवार को नहीं उपलब्ध कराया गया |

Former Minister Prof.Chandrashekhar, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, Former MLC Vijay Kumar Verma , Prof.S.K.Yadav, Dr.Naresh Kumar , Er.Prabhash & others inaugurating Shahid Chulhai Pratima Anawaran Samaroh.
Former Minister Prof.Chandrashekhar, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, Former MLC Vijay Kumar Verma , Prof.S.K.Yadav, Dr.Naresh Kumar , Er.Prabhash & others inaugurating Shahid Chulhai Pratima Anawaran Samaroh.

आगे डॉ.मधेपुरी ने कहा कि नेपाल के ‘बकरो के टापू’ पर डॉ.लोहिया और जयप्रकाश क्रमशः ट्रांसमीटर ऑपरेटर एवं आजाद दस्ते को ट्रेनिंग देने में लगे थे | इनसे निर्देश प्राप्त कर 25 जनवरी 1943 का मनहरा गांव आये प्रखर सेनानी कमलेश्वरी प्रसाद मंडल | उन्हीं के मशविरानुसार एक धोती ओढ़े-पहने 26 जनवरी को सवेरे मधेपुरा के ट्रेजरी बिल्डिंग परिसर में पहुंच गये क्रांतिवीर शहीद चुल्हाय और ज्योंहि तिरंगा लहराते हुए ‘भारत माता की जय’ बोले कि गोरे सिपाहियों ने उन्हें दबोच लिया | पहले तो रस्सी से पैरों को छान दिया और मार-मारकर लहू-लुहान कर दिया | फिर डाकबंगला रोड होकर घसीटते हुए डाकबंगला परिसर के ऊंचे दरख्त में उन्हें उल्टा लटका दिया गया और दो दिन-दो रात तक उस कड़ाके की ठंड में बिना वस्त्र के लाठियों की वर्षा में नहाता रहा चुल्हाय | उस क्रांतिवीर चुल्हाय की नाक-आँख-कान और मुँह से खून निकलता रहा……. और वह हमेशा बन्दे मातरम……. बोलता ही रह गया | अधमरा हो जाने पर जब चुल्हाय को 29 जनवरी को जेल ले जाया जा रहा था तब रास्ते में तीन जगह उसके मुंह से खून का ‘थक्का’ गिरा……..| 30 जनवरी की रात को कदाचित वह शहीद हो गया था फिर भी इलाज  कराने के बहाने बाहर लेकर चला गया | उसकी लाश भी घरवालों को नहीं मिली | जब देश 16 अगस्त को आजादी का जश्न मना रहा था तब मधेपुरावासियों ने वहाँ-वहाँ शहीद चुल्हाय द्वार बनाकर श्रद्धांजलि निवेदित किया, जहाँ-जहाँ खून का थक्का गिरा था………| और उसके बाद से लगभग चार दशक तक वह शहीद इतिहास के पन्नों से गायब हो गया | मधेपुरा उसकी शहादत को भी भूल गया |

आगे डॉ.मधेपुरी ने इतने लम्बे अंतराल के बाद मधेपुरा जिला उद्घाटन की तिथि 9 मई 1981 को सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल के अध्यक्षीय भाषण में “शहीद चुल्हाय मंडल” का नाम पहली बार सुना और तब से इस शहीद के क्रिया-कलापों को बुद्धिजीवियों तक पहुंचाने हेतु उन्होंने कलम उठाई | भू .ना.मंडल विश्वविद्यालय में “शहीद चुल्हाय उद्यान” बनाकर एवं डाक बंगला रोड का नामकरण “शहीद चुल्हाय मार्ग” कराकर तत्कालीन कुलपति डॉ.आर.के.चौधरी एवं तत्कालीन  जिप अध्यक्षा श्रीमती मंजू देवी से उद्घाटित हो जाने के बाद ही उन्होंने चैन की सांस ली, परन्तु वे संतुष्ट नहीं हुए | डॉ.मधेपुरी की अभी भी बलवती इच्छा यही है कि शहीद चुल्हाय की भव्य प्रतिमा मधेपुरा डाक बंगला परिसर में वहाँ बने जहाँ उसके शरीर का बूंद-बूंद खून गिरा था तथा मकर संक्रांति के अवसर पर भव्य मेला उस मनहरा ग्राम में लगे जहाँ शहीद चुल्हाय ने जन्म ग्रहण किया था |

समारोह को संबोधित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में प्रमुख रहे हैं- ई.प्रभाष, डॉ.आलोक कुमार, परमेश्वरी प्रसाद यादव, तेज नारायण यादव, आलोक कुमार मुन्ना, राज किशोर यादव, डॉ.रवि शंकर, पंकज कुमार, योगेन्द्र यादव, वीरेंद्र यादव, डॉ.राजेश रतन मुन्ना, लड्डू कुमार एवं ग्रामीण आदि |

अंत में जहाँ अध्यक्षता कर रहे प्रो.श्यामल किशोर यादव ने बच्चों से कहा- सूरज की तरह तभी चमकोगे जब सूरज की तरह जलोगे, वहीं मंच संचालन किया प्रो.जय कृष्ण यादव और डॉ.नरेश कुमार ने अतिथियों एवं गणमान्यों को धन्यवाद ज्ञापित किया |

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सऊदी अरब ने दिया योग को खेल का दर्जा

एक ओर जहां भारत में योग और धर्म को लेकर अनावश्यक विवाद छिड़ा है, वहीं दूसरी ओर इस्लामिक देश सऊदी अरब में योग को एक खेल के तौर पर आधिकारिक मान्यता मिल गई है। जी हाँ, सऊदी अरब की ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने स्पोर्ट्स ऐक्टिविटीज के तौर योग सिखाने को आधिकारिक मान्यता दे दी है। सऊदी अरब में अब लाइसेंस लेकर योग सिखाया जा सकेगा।

इस संदर्भ में एक बेहद खास बात यह रही कि रूढ़िवादी माने जाने वाले सऊदी में योग को खेल के तौर पर मान्यता दिलाने का श्रेय नोफ मारवई नाम की महिला को जाता है। बता दें कि नोफ को सऊदी अरब की पहली योग प्रशिक्षक का दर्जा भी मिल गया है। देखा जाय तो वो इसकी सच्ची हकदार थीं। उन्होंने सऊदी में योग को खेल के तौर पर मान्यता दिलाने के लिए लंबे समय तक अभियान चलाया था।

अरब योगा फाउंडेशन की फाउंडर नोफ ने इस बाबत अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि “योग जिसका मतलब जोड़ होता है, यह शरीर से मन के मिलन, भावनाओं और आत्मा के मिलन का अभ्यास है। यह एक देश से होते हुए वैश्विक स्तर पर पहुंचते हुए सऊदी अरब भी पहुंच चुका है। इसने कट्टपंथी विचारधारा के बंधनों को तोड़ दिया है।” अपने पोस्ट में उन्होंने भारत सरकार और वाणिज्य दूतावास को ‘असीमित सहायता’ के लिए धन्यवाद भी दिया है।

चलते-चलते बता दें कि 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग को वैश्विक तौर पर स्वीकृति मिली थी और 21 जून को हर साल विश्व भर में योग दिवस मनाया जाता है। आज जरूरत इस बात की है कि हर देश में नोफ जैसे हौसले वाले लोग हों ताकि योग का परचम पूरे विश्व में एक समान फैले।

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मकर-संक्रान्ति: कड़ाके की ठंड में भोज की गरमाहट

बिहार की राजनीति में मकर संक्रान्ति खास मायने रखती है। इस दिन आयोजित चूड़ा-दही भोज में कड़ाके की ठंड के बावजूद राजनीतिक तापमान बढ़ा रहता है और आपसी संबधों को एक नया आयाम मिलता है। आप खुद ही देख लें। पिछले साल मकर संक्रान्ति में जेडीयू और आरजेडी महागठबंधन के साथी के तौर पर एक साथ थे। आरजेडी ने लगातार दो दिनों का भोज आयोजित किया था और उस भोज में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को दही का टीका लगाकर ‘राजतिलक’ लगाने की घोषणा की थी। लेकिन, आज के बदले हालात में लालू-नीतीश की राहें जुदा हैं। उधर 2013 के बाद जेडीयू और भाजपा एक बार फिर एक-दूसरे के भोज में मौजूद हैं।

बदले हालात में और अपने नेता के जेल में होने के कारण इस साल आरजेडी की ओर से कोई भोज नहीं था। दूसरी ओर जेडीयू, लोजपा और भाजपा के द्वारा भोज का आयोजन किया गया। 15 जनवरी को रालोसपा ने भी भोज का आयोजन किया है।

जेडीयू की ओर से हमेशा की तरह प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने भोज का आयोजन किया। इस भोज में लगभग 15 हजार लोग जुटे। एनडीए की तमाम बड़ी हस्तियों ने यहां अपनी उपस्थिति दर्ज की। इनमें जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, जेडीयू संसदीय दल के नेता व महासचिव आरसीपी सिंह, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान व उनके पुत्र चिराग पासवान, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मंगल पांडेय प्रमुख हैं। जेडीयू के भोज में शामिल प्रमुख लोगों में एक चौंकाने वाला नाम महागठबंधन सरकार में शिक्षामंत्री व कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी का है। हालांकि बकौल चौधरी वे बशिष्ठ नारायण सिंह से अपने ‘व्यक्तिगत’ संबंधों के कारण भोज में शामिल हुए, लेकिन ‘कयास’ लगाने वाले इससे सहमत होंगे, ऐसा नहीं लगता।

गौरतलब है कि हमेशा चर्चा में रहने वाले जेडीयू के भोज के लिए भागलपुर से कतरनी व पश्चिमी चंपारण से मर्चा चूड़ा मंगवाया गया था, जबकि तिलकुट की व्यवस्था गया से की गई थी। इनके साथ-साथ भूरा-चीनी तथा आलू-गोभी-मटर की लजीज सब्जी की व्‍यवस्‍था भी थी। दही का इंतजाम ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ सुधा डेयरी से किया गया था।

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन तीनों भोजों में शिरकत की। बशिष्ठ नारायण सिंह के आवास पर आयोजित भोज में शामिल होने के बाद वे लोजपा कार्यालय गए। वहां लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने पहली बार मकर संक्रांति भोज का आयोजन किया था। जबकि भाजपा की ओर से एमएलसी रजनीश कुमार के आवास पर भोज का आयोजन था। स्वाभाविक तौर पर इन दोनों जगहों पर भी नेताओं का जुटान हुआ।

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मधेपुरा अब तेजी से आगे बढ़ रहा है

मधेपुरा में जबकि 1992 में ही बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय की स्थापना हुई और कुलपति व कुलसचिव सहित केवल 8 पदों पर कार्य करने की अनुमति भी दी गई | तब से हाल तक पद सृजन से संबंधित कोई कार्य न तो सफलतापूर्वक किया गया और न पैतृक विश्वविद्यालय (LNMU) से किसी अधिकारी या कर्मचारी को भेजा या लाया जा सका | यह बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा 25 वर्षों तक फकत कारसेवकों द्वारा ही चलता रहा |

बता दें कि हाल ही में आये 23वाँ कुलपति डॉ.ए.के.राय के कार्यकाल में 86 कारसेवकों की विधिवत स्थायी नियुक्ति की गई और कारसेवक संस्कृति की सदा के लिए समाप्ति हो गई | विश्वविद्यालय अब कुपोषण मुक्त दिखने लगा है तथा शैक्षिक कार्य निरंतर पटरी पर आने लगा है |

दूसरी ओर नई उम्मीद एवं कलेवरों के साथ नये साल में मधेपुरा सँवरने लगा है | रेल इंजन कारखाना एवं मेडिकल कॉलेज ये दोनों मधेपुरा के विकासरथ को रफ्तार देने हेतु दो पहिए का काम करने लगा है | एक बार नव वर्ष के प्रथम माह में विकास की समीक्षा करने सीएम आते हैं तो दूसरे माह फरवरी में दो हजार करोड़ की लागत से बन रहे रेल इंजन कारखाने में बने इलेक्ट्रिक रेल इंजन का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री आने वाले हैं |

यही मधेपुरा है जहाँ 800 करोड़ का मेडिकल कॉलेज बन रहा है और लगभग 100 करोड़ का इंजीनियरिंग कॉलेज | एनएच 106 एवं एनएच 107 के साथ-साथ एएनएम ट्रेनिंग सेंटर, जीएनएम स्कूल, पॉलिटेक्निक कॉलेज, आई टी आई कॉलेज आदि जल्द ही बन रहा है | वस्तुतः मधेपुरा तकनीकी शिक्षा का हब बनने जा रहा है |

तो तीसरी ओर राज्य सरकार के सात निश्चयों को अमलीजामा पहनाने हेतु प्रखंड स्तर तक “समाज सुधार वाहिनी रथ” चंद दिनों में चालू होने वाला है जिसके माध्यम से विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शैक्षणिक जागरूकता हेतु संकल्प दिलाया जायेगा | कर्मकांड एवं धर्मांधता से मुक्ति दिलाने हेतु डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा गाँव-गाँव जा-जाकर किये जा रहे प्रयास से सामाजिक अंधविश्वासों में कमी आयेगी | मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल की टीम द्वारा नशाबंदी के तर्ज पर बालविवाह बन्दी व दहेज़ बन्दी हेतु मानव श्रृंखला की करिश्माई तैयारी पुनः मधेपुरा को पुरस्कृत कराने में सफल होगी | मधेपुरा तेजी से आगे बढ़ता नजर आयेगा और यह धरती वन्दनीय होती चली जायेगी |

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मधेपुरा में ऐतिहासिक मानव श्रृंखला होगी बाल विवाह व दहेज के खिलाफ

मधेपुरा जिला के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार, एसडीएम  द्वय संजय कुमार निराला व एस जेड हसन की पूरी टीम गत वर्ष के शराबबंदी के पक्ष में आयोजित मानव श्रृंखला के सारे रिकॉर्ड को ध्वस्त करने में लगी है | क्योंकि, नीतीश सरकार का यह आह्वान है कि बाल विवाह एवं दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों को दूर किये बिना प्रदेश और देश का विकास संभव नहीं | उन्होंने कहा कि इन कुरीतियों को दूर करने के लिए जन जागरण आवश्यक है | साथ ही समाज में जागरूकता लाने के लिए जनता की सहभागिता सर्वाधिक जरूरी भी |

यह भी जानिये कि बाल विवाह और दहेज जैसी कुरीतियाँ समाज का कोढ़ है जिससे सर्वाधिक प्रभावित होता है- शिक्षा | इन कुरीतियों से मुक्ति पाने तथा शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए इस धरती के शलाका पुरुष बाबू रास बिहारी लाल मंडल द्वारा 1911 ई. में ही दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें सारे भारत से 16000 जनप्रतिनिधि आये थे जिसकी अध्यक्षता नेपाल के तुलसी सिंह ने की थी |

उन दिनों 5 वर्ष की उम्र में ही लड़के की शादी हो जाती थी | इस उम्र सीमा को एक बारगी 10 वर्ष करने पर नेपाल से आये प्रतिनिधिगण विरोध में खड़े हो गये | तब जाकर 6 वर्ष की उम्र पर सहमति बनी | यह भी जान लीजिए कि स्थानीय टी.पी. कॉलेज के प्रधानाचार्य, विधायक, सांसद, उपकुलपति व कुलपति रह चुके डॉ.महावीर प्रसाद यादव की शादी मात्र 6 वर्ष की उम्र में हुई थी | उन दिनों छोटे लड़के को शादी कराने के लिए गोद में या पालकी में ले जाया जाता था और सबसे पहले बच्चे को दूध पिलाया जाता | आज 30 वर्ष के पार भी शादी करने वाले लड़के को ‘विद्य’ के रूप में दूध पिलाया जाता है | इस अंधविश्वास को भी हटाना होगा |

यह भी बता दें कि दहेज खत्म करने को लेकर भी कानून बने हैं, फिर भी पुलिस-हाकिम सभी असमर्थ हैं | कानून कोर्ट में रुके-पड़े हैं | अपनी बेटी के वर खातिर उनके भी सिर झुके हुए हैं | तब से आज तक प्रयास किया जा रहा है लेकिन समाज को सफलता नहीं मिल पाई है | सिक्ख समुदाय में तो कुछ सुधार नजर आता है लेकिन अन्य वर्गों के लोग तो शादियों में दहेज लेकर लाखों रुपये रोशनी एवं पटाखे में बर्बाद कर देते हैं | परंतु, बेटियों को अच्छी शिक्षा देने के समय उनका हाथ खाली रहता है |

बता दें कि एक ओर जहाँ दहेज एवं बाल विवाह बन्दी को लेकर मधेपुरा के डीएम,एसपी, एसडीएम द्वय एवं तेरहो प्रखंडों के बीडीओ, सी.ओ. से लेकर शिक्षा विभाग के सभी संस्थानों व समस्त पदाधिकारियों, शिक्षकों सहित सभी मिलकर मानव श्रृंखला हेतु रूट चार्ट तैयार कर रहे हैं | तैयारी यह भी की जा रही है कि गत वर्ष 21 जनवरी को शराब बन्दी को लेकर बनी मानव श्रृंखला में प्रदर्शन करने वाले 11 लाख 34 हजार की संख्या को इस बार बहुत पीछे छोड़ देना है और सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रौशन करना है |

वहीं दूसरी और राज्य के मुखिया नीतीश कुमार में आस्था-विश्वास रखने वाले जदयू, युवा जदयू एवं सभी प्रकोष्ठों से जुड़े सारे सदस्यगण 21 जनवरी 2018 को इन कुरीतियों द्वय के विरुद्ध आयोजित की जाने वाली मानव श्रृंखला को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्राइवेट एवं सरकारी-प्राइमरी, मिडिल स्कूलों से लेकर उच्च विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों के छात्रों को इस अभियान में जोड़ने हेतु जगाने में अहर्निश लगे हैं |

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BNMU से कट कर अगले सत्र 2018-19 से चालू होगा पूर्णिया विश्वविद्यालय

जहाँ मधेपुरा का भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय स्थापना काल से वीसी, प्रोवीसी, रजिस्ट्रार सहित मात्र 8 स्वीकृत पदों के साथ 25 वर्षों तक पदहीनता का अभिशाप झेलता रहा वहीं इससे अलग होकर बन रहे नये पूर्णिया विश्वविद्यालय को नीतीश सरकार ने दिया 68 पदों का तोहफा |

बता दें कि नये बने पूर्णिया विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र 2018-19 से आरंभ हो जायेगा | महामहिम कुलाधिपति द्वारा 16 अगस्त 2016 को इसकी मंजूरी प्रदान कर दी गयी है तथा 21 नवंबर तक वीसी, प्रोवीसी पद के लिए आवेदन देने की तिथि भी निर्धारित कर दी गयी है | अभ्यर्थियों के साक्षात्कार के लिए सर्चकमिटी भी गठित कर दी गई है |

जानिये कि इतनी तेजी से पूर्णिया विश्वविद्यालय के लिए सारे कार्यों का निष्पादन बिहार के शिक्षा विभाग, माननीय मुख्यमंत्री एवं महामहिम राज्यपाल के राज भवन द्वारा किया जा रहा है, परंतु कुछ महीने पूर्व ही मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा इस विश्वविद्यालय का नाम महान आंचलिक साहित्यकार, पद्मश्री फणीश्वर नाथ रेणु के नाम करने वाले ‘अनुरोध’ पर अबतक विचार नहीं किया जाना- राज्य के समस्त कलमजीवी साहित्यकारों के लिए दु:ख की बात है |

यह भी बता दे कि हिन्दी के आंचलिक कथाकार एवं प्रख्यात साहित्यकार ‘रेणु’ पूर्व में भी प्रासंगिक रहे हैं और आगे भी रहेंगे | तभी तो 51 वर्ष पूर्व उनकी कहानी पर “तीसरी कसम” फिल्म बनी थी और पुनः इतने दिनों बाद उनकी कहानी पर एक फिल्म बनकर तैयार है जो आगामी 17 नवंबर को रिलीज होने वाली है जिसका नाम है- “पंचलैट”| रेणुजी की यह कहानी भी गांव-गंवई, जात-पात तथा तत्कालीन सामाजिक वर्जनाओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित एवं प्रतिध्वनित करता है | रेणु जी की यह कहानी आज भी हमारे समाज में विद्यमान है- अतः यह फिल्म हिंदी सिनेमा जगत में फिर से एक नये युग की शुरुआत होगी |

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