कृष्णाष्टमी के दिन टोक्यो पैरालिंपिक में 5 मेडल विजेता भारतीय खिलाड़ियों का सुनहरा रहा सोमवार

टोक्यो पैरालिंपिक- 2020 में भारत ने भगवान कृष्ण के 5247वें जन्मोत्सव पर सुनहरे सोमवार के दिन दो गोल्ड सहित रिकॉर्ड 5 पदक जीत लिया। इतिहास में भारत ने किसी भी टूर्नामेंट में उतने पदक नहीं जीते थे जितना एक दिन में जीतकर इतिहास रच दिया। अब तक 53 साल में भारत के 19 मेडल हुए हैं जिसमें- 6 गोल्ड हैं जबकि अभी भी 5 सितम्बर तक खेल बचे हुए हैं। मेडल बढ़ने की उम्मीद है।

बता दें कि पैरालिंपिक- 1960 में शुरू हुआ और भारत तीसरे पैरालंपिक यानि 1968 में शामिल हुआ। पहला सिल्वर मेडल दीपा मलिक ने जीता और भाविना ने दूसरा सिल्वर और अवनी लेखरा ने इस बार गोल्ड जीतकर टोक्यो के पोडियम में भारतीय राष्ट्रगान बजाने में सफलता पाई।

जानिए कि 2012 में महाशिवरात्रि पर हादसे में अवनी का आधा शरीर लकवा ग्रस्त हुआ। 2017 में महाशिवरात्रि पर ही वर्ल्ड कप में पहला मेडल जीता और 2020 में 19 साल की अवनी ने कृष्णाष्टमी के दिन देश को पहला गोल्ड दिला कर सभी भारतीयों के चेहरे पर स्वर्णिम मुस्कान ला दिया। कृष्णाष्टमी के दिन वाले चार और विजेताओं के नाम हैं- जैवलीन थ्रो में गोल्ड पदक विजेता सुमित अंतिल, सिल्वर विजेता देवेंद्र झांझरिया एवं ब्राँज विजेता सुंदर सिंह गुर्जर। डिस्कस थ्रो में सिल्वर विजेता योगेश कठुनिया हरियाणा के रहने वाले हैं।

चलते-चलते यह भी कि खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि जैवलीन थ्रो में स्वर्ण विजेता नीरज चोपड़ा के साथ जैवलीन थ्रो का अभ्यास करते-करते सुमित अंतिल भी पैरालिंपिक में गोल्ड जीतकर खेल प्रेमियों के दिलों में जगह बना ली है। उन्हें भी समस्त भारतीय खेल प्रेमियों की ओर से नमन और बंदन के साथ हरियाणा सरकार से गुजारिश है कि नीरज चोपड़ा की तरह सुमित अंतिल को भी वैसा ही सम्मान देकर समानता को कायम रखते हुए संविधान का सम्मान किया जाए।

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भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव “कृष्ण जन्माष्टमी” पर रहती है चतुर्दिक विशेष धूम

भगवान विष्णु के अवतारों में सबसे पहले नंबर पर आता है- कृष्ण जन्माष्टमी। द्वापर युग में अत्याचारी कंस से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने कृष्णावतार लिया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में भगवान कृष्ण का जन्म भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। जिसे भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में उनकी जन्मस्थली मथुरा में विशेष धूमधाम से मनाई जाती है। देश के सभी कृष्ण मंदिरों में भी यह जन्मोत्सव सर्वाधिक श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है।

बता दें कि इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त सोमवार को मध्य रात्रि में पूरे ब्रज क्षेत्र में धूमधाम से मनाई जाएगी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं व भक्तों द्वारा घरों से लेकर मंदिरों तक में झांकियां सजाई जाएंगी। घर में बाल गोपाल का जन्मोत्सव भी मनाते रहेंगे लोग।

मौके पर समाजसेवी-शिक्षाविद् डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि जिस तरह से सावन मास में भगवान शिव की भक्ति की धूम रहती है उसी तरह से भादो मास में श्री कृष्ण की आराधना की धूम मची होती है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि इस वर्ष भगवान श्री कृष्ण का 5247वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। भारत में मनाए जाने वाले सभी पर्व-त्योहार हमारी सांस्कृतिक विरासत व विविधता में एकता का प्रतीक माना जाता है।

 

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भाविना पैरालिंपिक टेटे फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी

भाविना शनिवार को वर्ल्ड नंबर- 3 चीन की मियाओ झेंग को सेमीफाइनल में हराकर फाइनल में पहुंच गई। परंतु, भारतीय राष्ट्रगान बजा नहीं पाई टोक्यो पैरालिंपिक- 2020 में यानि गुजरात की बेटी भाविना बेन पटेल आज वर्ल्ड नंबर- 1 चीन की यिंंग झोऊ से बाजी हार गई और उसे अब सभी भारतीय ‘सिल्वर गर्ल’ कह कर पुकारते रहेंगे 2024 तक।

बता दें कि गुजरात के मेहसाणा जिले में एक छोटी परचून की दुकान चलाने वाले हँसमुख भाई पटेल की बेटी भाविना ने अपने प्रदर्शन से इतिहास रच दिया। वह 12 वर्ष की उम्र में पोलियो की शिकार हो गई थी। उसने दृष्टि दोष वाले बच्चों को टेटे खेलते देखकर इसी खेल को अपनाने का फैसला किया था। आज भाविना के घर पर होली-दिवाली जैसा माहौल है।

महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, खेल मंत्री, दीपिका मलिक, राहुल गांधी आदि बड़ी-बड़ी हस्तियों ने भाविना की सराहना की। पीएम मोदी तो भाविना से फोन पर बातें की और कहा कि युवाओं में अब खेल के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा है। गुजरात सरकार ने भाविना को 3 करोड़ रुपये देकर सम्मानित किया है।

चलते-चलते यह भी कि खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने आज हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर उन्हें याद करते हुए भाविना के साथ-साथ आज ही हाई जंप में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले निषाद कुमार के जज्बे को भी सलाम किया है।

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मुखिया चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी की थोड़ी भी लापरवाही उनके सपने को तबाह कर सकती है

मधेपुरा जिला में 10 चरणों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हेतु मतदान कराया जाएगा। प्रथम चरण में चुनाव प्रक्रिया हेतु निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिले के डीएम श्याम बिहारी मीणा एवं एसपी योगेंद्र कुमार द्वारा तैयारियां पूरी की जाएगी। मुखिया, पंचायत सदस्य, समिति सदस्य एवं जिला परिषद सदस्य का निर्वाचन ‘ईवीएम’ द्वारा तथा ग्राम कचहरी के पंच एवं सरपंच का निर्वाचन ‘मतपत्र’ द्वारा कराया जाएगा। चुनाव कराने हेतु मतदान कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

बता दें कि दूसरे चरण में सदर प्रखंड मधेपुरा के मतदान की तिथि 29 सितंबर है, जबकि तीसरे चरण में घैलाढ़ व गम्हरिया के मतदान की तिथि 8 अक्टूबर है। चौथे चरण में  सिंहेश्वर व शंकरपुर में मतदान की तिथि 20 अक्टूबर वहीं पांचवें चरण में ग्वालपाड़ा में 24 अक्टूबर को मतदान होगा। जहां छठे चरण में कुमारखंड 3 नवंबर को वहीं सातवें चरण में बिहारीगंज 15 नवंबर को मतदान संपन्न कराएगा।

जानिए कि आठवें चरण में मुरलीगंज 24 नवंबर, नौवें चरण चरण में उदाकिशुनगंज 29 नवंबर, 10वें चरण में पुरैनी व चौसा 8 दिसंबर और 11वें चरण में आलमनगर प्रखंड में 12 दिसंबर को मतदान होगा। कुल मिलाकर 4762 पदों पर निर्वाचन होगा जिसके लिए 2161 मतदान केंद्र बनाया गया है। इस चुनाव में 23 जिप सदस्य, 160 मुखिया और 160 सरपंच सहित शेष सदस्यों के लिए मतदान होंगे।

चलते-चलते यह भी कि 24 अगस्त को अधिसूचना जारी होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है जो रिजल्ट घोषित होने तक लागू रहेगी। थोड़ी भी लापरवाही मुखिया, सरपंच सब पर भारी पड़ सकती है। इस दरमियान कोई घोषणा नहीं कर सकते। किसी भी राजनीतिक दल का झंडा, बैनर या चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकते। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों/सदस्यों के साथ सभा या प्रचार करने पर भी कार्रवाई होगी।

अंत में यह भी याद कर लें कि वोट के लिए पैसा बांटने पर गिर सकती है गाज। आयोग द्वारा खर्च सीमा इस प्रकार निर्धारित किया गया है- जिप उम्मीदवार अधिकतम 1 लाख, मुखिया व सरपंच 40 हजार, समिति उम्मीदवार 30 हजार एवं पंचायत सदस्य व पंच 20 हजार रुपया खर्च करेंगे।

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जदयू के सभी संगठनों को कार्यकर्ताओं द्वारा ही पोषण मिलता है- जिलाध्यक्ष गुड्डी देवी

मधेपुरा जिला जदयू कार्यकारिणी की बैठक स्थानीय भूपेन्द्र कला भवन में जिलाध्यक्ष श्रीमती मंजू देवी उर्फ गुड्डी देवी की अध्यक्षता में पहली बार 26 अगस्त को आयोजित की गई। सवेरे में भारी वर्षा के बावजूद सुपौल से मधेपुरा जिला प्रभारी अमर कुमार चौधरी उर्फ भगवान चौधरी, आलमनगर से लोकसभा प्रभारी बुलबुल सिंह सहित पुरैनी, चौसा, बिहारीगंज, ग्वालपाड़ा जैसे दूरदराज के प्रखंडों से भी समर्पित कार्यकर्तागण इतनी संख्या में आए कि हाॅल के अंदर जगह कम पड़ गई।

बता दें कि कार्यक्रम का उद्घाटन बिहारीगंज के विधायक निरंजन कुमार मेहता, मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.अमरदीप, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, जिला प्रभारी भगवान चौधरी, लोकसभा प्रभारी बुलबुल सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष सियाराम यादव, महेन्द्र पटेेल, अशोक चौधरी आदि सहित जिलाध्यक्ष गुड्डी देवी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। तत्पश्चात तेरहो प्रखंड के अध्यक्ष, नव मनोनीत पदाधिकारियों सहित आगत अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्रम व पुष्पगुच्छ देकर जिला आयोजन समिति द्वारा बारी-बारी से किया गया।

Senoormost JDU Leader Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri addressing Karyakartagan on the occasion of JDU Karyakarini Meeting at Bhupendra Kala Bhawan, Madhepura.
Senior JDU Leader Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri addressing on the occasion of JDU Karyakarini Meeting at Bhupendra Kala Bhawan, Madhepura.

जदयू के वरिष्ठ नेता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने सर्वप्रथम अपने संबोधन में यही कहा कि संगठन को स्वस्थ रखने के लिए सकारात्मक सोच के समस्त कार्यकर्ताओं को सदैव सजग रहना है। बाद में सभी प्रखंड अध्यक्षों, अतिथियों एवं नव मनोनीत पदाधिकारियों द्वारा जदयू को मजबूती प्रदान करने का संकल्प दोहराया गया। उद्घाटनकर्ता जनप्रिय विधायक निरंजन मेहता एवं मुख्य अतिथि मीडिया सेल के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ.अमरदीप ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा किए गए विकास कार्यों एवं नारी सशक्तिकरण पर विस्तार से चर्चा की तथा कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता के बीच जाकर मुख्यमंत्री के कार्यों की चर्चा करें ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

जिलाध्यक्ष गुड्डी देवी ने सबों का सम्मान करते हुए जदयू के मजबूती की कामना की और कहा कि जदयू के सभी संगठनों को कार्यकर्ताओं द्वारा ही पोषण मिलेगा।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में कोरोना काल में दिवंगत हुए जिले के सभी नर-नारियों सहित पूर्व सांसद व कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संरक्षक डॉ.आर.के.यादव रवि एवं उनकी धर्मपत्नी डॉ.मीरा, कौशिकी के अध्यक्ष डॉ.हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ आदि को श्रद्धांजलि दी गई। मौके पर मनोज भटनागर, सत्यजीत यादव, डॉ.शोभा कांत, राणा रामकृष्ण, नवीन कुमार मेहता सहित अन्य भी मौजूद थे।

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रासबिहारी बाबू थे उच्च कोटि के समाज सुधारक व स्वतंत्रता सेनानी- डॉ.मधेपुरी

स्थानीय रासबिहारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में समाज-सुधारक रासबिहारी लाल मंडल की 103वीं पुण्यतिथि मनाई गई। सर्वप्रथम उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि की- उनके पौत्र प्रो.प्रभाष चंद्र यादव, प्रपत्र डॉ.ए.के.मंडल विद्यालय के प्रधानाध्यापक, स्कूल की महिला व पुरुष सभी शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारी सहित उपस्थित छात्रगण।

Samajsevi & Author of "Rasbihari Lal Mandal : Paradhin Bharat Mein Swadhin Soch" Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri addressing people on the occasion of 103rd Punyatithi of Rasbihari Lal Mandal.
Samajsevi & Author of “Rasbihari Lal Mandal : Paradhin Bharat Mein Swadhin Soch” Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri addressing people on the occasion of 103rd Punyatithi of Rasbihari Lal Mandal.

मौके पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, एसएनपीएम के प्राचार्य डॉ.संतोष कुमार, टीपी कॉलेज के प्राचार्य डॉ.सुरेश भूषण, रामनरेश, गांधी आदि ने भी उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि किया।

प्रधानाध्यापक की अध्यक्षता में कार्यक्रम को सर्वप्रथम स्कूल के शिक्षकों ने संबोधित किया। प्रो.प्रभाष चंद्र ने अपने संबोधन में रासबिहारी बाबू का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में योगदान को प्रकाश में लाकर श्रोताओं को प्रभावित किया। डॉ.संतोष कुमार, डॉ.सुरेश भूषण ने भी श्रद्धांजलि के शब्द पुष्प अर्पित किया।

समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि रासबिहारी बाबू उच्च कोटि के समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। वे बने बनाए पद चिन्हों पर कभी नहीं चले बल्कि स्वयं के द्वारा पद चिन्हों को तैयार करते रहे। वे जीवन भर गरीबों और वंचितों की राह सजाते रहे। अंग्रेजों के सामने कभी नहीं झुके। उन्हें सभी मिथला का शेर भी कहा करते थे। समारोह का संचालन स्काउट एंड गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव ने किया।

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सामाजिक न्याय के पुरोधा बीपी मंडल की 103वीं जयंती राजकीय समारोह के तहत मनी

कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सामाजिक न्याय के प्रणेता एवं बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके बीपी मंडल की 103वीं जयंती राजकीय समारोह के रूप में मनाई गई।

सर्वप्रथम प्रातः 9:15 बजे पूर्वाहन में समाहरणालय मधेपुरा के सामने बीपी मंडल चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर डीएम श्याम बिहारी मीणा, एसपी योगेंद्र कुमार, डीडीसी विनोद कुमार सिंह, एडीएम शिव कुमार शैव, एसडीओ नीरज कुमार, नजारत डिप्टी कलेक्टर, डीटीओ व अन्य पदाधिकारीगण सहित समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.अरूण कुमार मंडल, समाजसेवी शौकत अली एवं जदयू जिलाध्यक्ष गुड्डी देवी की पूरी टीम द्वारा माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई।

103rd B.P.Mandal Jayanti Samaroh at Murho.
103rd B.P.Mandal Jayanti Samaroh at Murho.

डीएम के काफिले द्वारा मुरहो  स्थित उनकी समाधि पर माल्यार्पण करने के बाद सर्वधर्म प्रार्थनाएं और डॉ. भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा तैयार किए गए बीपी मंडल के संक्षिप्त जीवन वृत्त का श्रवण किया गया।

संध्या 7:00 बजे पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार समाजसेवी शौकत अली के निर्देशन में 103 दीये मधेपुरा स्थित बीपी मंडल की प्रतिमा पर नाजिर अनिल कुमार की मौजूदगी में स्कूली बच्चे-बच्चियों- ललन कुमार, कंचन कुमारी, अमलेश कुमार, भवेश यादव, गौरव कुमार, सौरभ कुमार और मोहम्मद रजा द्वारा सजाया गया। समाजसेवी शौकत अली के अनुरोध पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित किया गया और बच्चों के उत्साह को बनाए रखने के लिए समाजसेवी शौकत अली के अनुरोध पर डॉ.मधेपुरी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में सामाजिक वैज्ञानिक बीपी मंडल के लिए यही कहा-

“दुनिया में प्रतिदिन लाखों बच्चे जन्म लेते हैं और उन बच्चों में से कुछ ही बच्चे ऐसे होते हैं जो बड़े होकर अपनी प्रतिभा, पौरुष व पुरुषार्थ के बल पर दुनिया को ऐसा कुछ दे जाते हैं कि दुनिया हमेशा उन्हें याद करती है। ऐसे ही बच्चों में से एक हुए बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल जिन्हें दुनिया बीपी मंडल के नाम से जानती है।”

अंत में समाजसेवी शौकत अली एवं बच्चों ने बीपी मंडल अमर रहे के नारे लगाए। डाॅ.मधेपुरी को सुनकर बच्चों ने भी उन्हें भारत रत्न देने की मांग की।

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कुलपति ने बीएनएमवी कॉलेज में डॉ.एम.पी.यादव प्रातिभ पीठ का किया उद्घाटन

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के अंतर्गत अंगीभूत इकाई भूपेन्द्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय, बालमुकुंद नगर, साहूगढ़, मधेपुरा के परिसर में विधायक, शिक्षामंत्री, सांसद एवं प्रति कुलपति, कुलपति रह चुके टीपी कॉलेज के विश्वकर्मा कहे जाने वाले डॉ.महावीर प्रसाद यादव के नाम वाले प्रातिभ पीठ का उद्घाटन माननीय कुलपति प्रो.(डॉ.)आरकेपी रमण ने किया।

कुलपति डॉ.रमण ने अपने संबोधन में विस्तार से अनेकानेक संस्करणों के माध्यम से उन्हें स्मरण करते हुए कहा कि डॉ.महावीर प्रसाद यादव बिहार के सर्वपल्ली राधाकृष्णण हैं… वर्तमान शैक्षिक माहौल को रास्ते पर लाने में उनके विचारों को आत्मसात करने की आवश्यकता है। वे प्राय: विद्यार्थियों को नाम से ही पुकारते थे।

मुख्य अतिथि के रूप में प्रति कुलपति प्रो.आभा सिंह ने कहा कि मेरे परिवार में अक्सर महावीर बाबू की चर्चा होती रहने के कारण ही जान पाई कि टीपी कॉलेज को राज्य का सर्वोत्तम शैक्षिक संस्थान बनाने में उनका अहम योगदान रहा है। वे प्रखर शिक्षाविद, कुशल प्रशासक के साथ-साथ टीपी कॉलेज के विश्वकर्मा भी कहे जाते रहे। उनके विचारों को फैलाव देने की आवश्यकता है।

Samajsevi Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing on the occasion of Dr.Mahavir Pratibh Peeth Inauguration at Bhupendra Narayan Mandal Commerce College, Madhepura.
Samajsevi Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing on the occasion of Dr.Mahavir Pratibh Peeth Inauguration at Bhupendra Narayan Mandal Commerce College, Madhepura.

विशिष्ट अतिथि के तौर पर सभा को संबोधित करते हुए समाजसेवी-साहित्यकार एवं इस कॉलेज के शुभारंभकर्ता डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने उनके साथ बिताए सड़क से संसद तक के संस्मरणों को विस्तार से सुनाते हुए कहा कि वे नि:संकोच होकर एक नहीं अनेक बार यह कहा करते-

“भूपेन्द्र ! मैं तो अपने गांव थरभिट्टा से राई बनकर आया था, मधेपुरा ने मुझे पहाड़ बना दिया… क्या नहीं दिया मधेपुरा ने। अंतिम सांस तक मधेपुरा का ॠण उतारता रहूंगा।”

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि उनके चारों पुत्र एमओ रहे इंदु भूषण, प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार, डीएसपी रहे मनोज कुमार और एनटीपीसी से अवकाश प्राप्त उमेश कुमार अपने पिता के प्रति समर्पित रहे हैं, परंतु श्रवण कुमार की भूमिका का सौ फिसदी निर्वहन बीएन मंडल के स्नातकोत्तर जंतु विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार को करते हुए देखा जा रहा है…।

विशिष्ट अतिथि के रुप में कुलसचिव प्रो.डॉ.मिहिर कुमार ठाकुर, सीनेटर व बीएन मुस्टा के महासचिव प्रो.(डॉ.)नरेश कुमार, कुलानुशासक डॉ.बीएन विवेका, बीएनएमवी के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ.अरुण कुमार एवं विकास पदाधिकारी डॉ.ललन अद्री द्वारा संबोधन में कहे गए कथनानुसार किसी को नियुक्ति पत्र डॉ.महावीर बाबू के कुलपति कार्यकाल में उनके हाथों प्राप्त हुआ तो किसी-किसी को उनके बीएनएमवी में शासी निकाय के सचिव के रूप में हस्तगत कराया गया। सबों ने अपनी बातें विस्तार से बताते हुए कहा कि यहां हर किसी को उनके बारे में कुछ कहने के लिए है, यही उनका बड़प्पन है।

कार्यक्रम को सीनेटर एवं जंतु विभागाध्यक्ष डॉ.अरविंद कुमार, डॉ.शेफालिका शेखर सहित कई गणमान्यों ने उनके विभिन्न गुणों की चर्चा करते हुए श्रद्धांजलि दी।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में  प्रधानाचार्य प्रो.(डॉ.)पीएन पीयूष ने स्वागताध्यक्ष की भूमिका में आगत अतिथियों के भरपूर स्वागत से मौसम बदल दिया। और जो शेष बचा उसे विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष एवं अंतर्राष्ट्रीय उद्घोषक पृथ्वीराज यदुवंशी ने अपनी कलात्मक शैली के माध्यम से पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा।

आरंभ में संगीत शिक्षिका शशि प्रभा जायसवाल की पूरी टीम ने स्वागत गीत गाया। बाद में आयोजन समिति, प्रधानाचार्य व एनएसएस इकाई की ओर से अतिथियों को अंगवस्त्रम, बुके, मोमेंटो से सम्मानित किया गया। अंत में अर्थपाल डॉ.नवीन कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

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अब सभी वर्गों की लड़कियों को आगे बढ़ने हेतु दी जाएगी सहायता राशि नीतीश

बोले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिलाएं शिक्षित होंगी तो प्रजनन दर अपने आप घटने लगेगा। उन्होंने कहा कि 2005 में कुल प्रजनन दर 4.3 प्रतिशत थी जो 2013 में 4% के करीब हो गई और आज की तारीख में घटकर 3% पर पहुंच गई है।

बता दें कि शिक्षा पर दूसरे राज्यों से अधिक राशि खर्च कर रहा है बिहार। बिहार देश का पहला राज्य है जहां प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए “आनंद शाला” नाम से योजना लांच किया गया है।

स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर गांधी मैदान में ध्वजारोहण के बाद बोले नीतीश- “अब सभी वर्गों की लड़कियों को सहायता राशि दी जाएगी जो पूर्व में केवल एससी-एसटी तथा अति पिछड़ा वर्ग के युवक-युवतियों को दी जाती थी।”

चलते-चलते यह भी बता दें कि पूर्व में सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत एससी-एसटी तथा अति पिछड़ा वर्ग के युवक-युवतियों को बीपीएससी व यूपीएससी की पीटी पास करने पर मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए क्रमशः 50 हजार एवं 1 लाख रुपया मिलता रहा है अब अन्य सभी वर्गों की युवतियों के लिए भी यही प्रोत्साहन योजना शुरू होगी तो।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इस योजना के लागू किए जाने एवं बिहार में खेल विश्वविद्यालय खोले जाने पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने सूबे के मुख्यमंत्री को साधुवाद देते हुए कहा कि बिहार की बेटियों को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या खेल का। डाॅ.मधेपुरी ने मुख्यमंत्री की इस सोच को सलाम किया है।

 

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ब्रम्हाकुमारी रंजू दीदी ने मधेपुरा के ‘सुख शांति भवन’ में मनाया रक्षाबंधन का पर्व

प्रातः 8:30 बजे समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा बाबू, ओम बाबू, बैजनाथ बाबू सहित ब्रम्हाकुमारियों व श्रद्धालुओं के बीच राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने रक्षाबंधन पर्व का श्रीगणेश करते हुए ये बातें कहीं-

“श्रावणी पूर्णिमा के दिन रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। उन दिनों शिष्य अपने गुरुओं को रक्षा सूत्र बाँधते थे और पुरोहित राजा और समाज के वरिष्ठ जनों को।”

बकौल रंजू दीदी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजसूय यज्ञ के समय भगवान श्री कृष्ण को द्रोपदी ने रक्षा सूत्र के रूप में अपने आंचल का टुकड़ा बांधा था। उसी के बाद से बहनों द्वारा भाई को राखी बांधने की परंपरा शुरू हो गई। आज के दिन भाई बहन को उपहार देता है और देता है जीवन भर बहन की रक्षा करने का वचन भी।

Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing devotees on the occasion of Raksha Bandhan celebration at Sukh Shanti Bhawan Madhepura.
Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing devotees on the occasion of Raksha Bandhan celebration at Sukh Shanti Bhawan Madhepura.

बता दें कि रक्षाबंधन के बाबत अपने संबोधन में शिक्षाविद् डॉ.भूपेंन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि बात 1905 की है। लॉर्ड कर्जन ने 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा कर दी थी। उसके विरोध में रविन्द्र नाथ टैगोर, रास बिहारी लाल मंडल…… आदि द्वारा 2 महीने तक ‘राखी दिवस’ मनाते रहने के चलते अंग्रेजों को बंग विभाजन रोकने पर मजबूर होना पड़ा था। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि अंततः ज्ञान ही हमारी रक्षा करता है और ज्ञान से ही पुरुषार्थ का उदय होता है। मौके पर ओम प्रकाश यादव, खोखा यादव एवं ब्रह्मा कुमारी वीणा दीदी आदि ने भी विस्तार से रक्षाबंधन पर्व पर प्रकाश डाला।

अंत में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने डॉ.मधेपुरी, ओम बाबू, खोखा बाबू, बैजनाथ बाबू सहित अन्य सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को राखी बांधकर एवं प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का चरणामृत व लड्डू बांटकर लोगों का मुंह मीठा किया।

 

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