अमेरिका में दिख रहे नए और परिपक्व राहुल

चाहे राजनीतिक दलों के रणनीतिकार हों, डिप्लौमैट हों या पॉलिसी मेकर्स – अपनी अमेरिका यात्रा से राहुल गांधी ने सबका ध्यान खींचा है। कांग्रेस उपाध्यक्ष को हल्के में लेने वाले भी अब उन्हें गंभीरता से लेने को बाध्य दिखने लगे हैं। अपने ऊपर बने चुटकुलों में अक्सर ‘पप्पू’ कहे जाने वाले इस शख्स से देश की सत्ता पर निहायत मजबूती से काबिज भारतीय जनता पार्टी भी इधर परेशान दिख रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जब आप अपनी कमियां भी बेबाकी से स्वीकार कर रहे हों तब सामने वाले के लिए कही गई बात को भी नज़रअंदाज करना मुश्किल होता है। भाजपा को ठीक यही बात परेशान कर रही है क्योंकि राहुल ने कांग्रेस की कमियों की बात करते हुए भाजपा की दुखती रगों पर भी ऊंगली रखी है, और खास बात यह कि बड़ी संजीदगी से रखी है।

अमेरिका के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ संवाद करते हुए राहुल ने कहा कि केन्द्र की सरकार नौकरियां पैदा नहीं कर पा रही हैं, लिहाजा धीरे-धीरे लोगों के बीच सरकार के खिलाफ गुस्सा पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि हर दिन रोजगार बाजार में 30,000 नए युवा शामिल हो रहे हैं और इसके बावजूद सरकार प्रतिदिन केवल 500 नौकरियां पैदा कर रही है। वर्तमान सरकार की आलोचना करते हुए राहुल ने पूर्व की कांग्रेस सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया और कहा, सच कहा जाए तो कांग्रेस पार्टी भी इस मोर्चे पर फेल रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी भी यहां फेल हो रहे हैं। यह एक ऐसी समस्या है जिसकी जड़ें गहरी हैं। इसके समाधान के लिए पहले हमें स्वीकार करना होगा कि यह एक समस्या है लेकिन इस समय कोई यह स्वीकार ही नहीं कर रहा।

राहुल के मुताबिक मोदी के उभार और ट्रंप के सत्ता में आने की वजह भारत और अमेरिका में रोजगार का प्रश्न होना है। उन्होंने कहा, हमारी बड़ी आबादी के पास कोई नौकरी नहीं है, वे अपना भविष्य नहीं देख सकते और इसलिए परेशान हैं। इन्हीं लोगों ने इस तरह के नेताओं का समर्थन किया। उन्होंने आगे कहा, मैं ट्रंप को नहीं जानता, मैं उस बारे में ज्यादा बात नहीं करुंगा। लेकिन, निश्चित ही हमारे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में वही लोग जो एक दिन में 30,000 नौकरियां पैदा नहीं कर पाने से हमसे नाराज थे, वे मोदी से भी नाराज होंगे।

मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम पर बात करते हुए राहुल गाधी ने कहा कि उनकी तमन्ना थी कि ऐसे प्रोग्राम को कांग्रेस अपने कार्यकाल में लॉन्च की होती। हालांकि राहुल इसमें थोड़े बदलाव के हिमायती हैं। उन्होंने कहा, मुझे मेक इन इंडिया का कॉन्सेप्ट पसंद है, लेकिन ये प्रोग्राम जिन लक्ष्यों को लेकर चलना चाहिए उसे लेकर नहीं चल रहा है। अगर कांग्रेस इस प्रोग्राम को लागू करती तो उनका फोकस कुछ अलग होता। बकौल राहुल, प्रधानमंत्री मोदी इस प्रोग्राम के तहत बड़े कारखाने और फैक्ट्रियों को टारगेट कर रहे हैं, जबकि हमारा फोकस मध्यम और छोटे उद्योगों पर होना चाहिए। ये वो क्षेत्र हैं, जहां से नौकरियां आने वाली हैं।

राहुल ने छात्रों से बात करते हुए स्वीकार किया कि मोदी उनसे ‘बहुत अच्छे’ वक्ता हैं और वे समझते हैं कि एक भीड़ में अलग-अलग लोगों के समूहों से कैसे संवाद स्थापित करना है। छात्रों से उनके संवाद की बड़ी बात यह रही कि उन्होंने छात्रों के किसी प्रश्न का ‘टालू’ और ‘चालू’ जवाब नहीं दिया। अपने दो सप्ताह के अमेरिका प्रवास पर वो जहां भी जा रहे हैं, इसी तरह खुलकर और बेबाकी से बात कर रहे हैं और उनकी तटस्थता लोगों को भा रही है। कुल मिलाकर यह कि आगे की लड़ाई के लिए राहुल अमेरिका से तैयार होकर लौट रहे हैं, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

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