‘बाहुबली-2’ के करिश्मा के आगे नतमस्तक हजार करोड़

‘बाहुबली-2’… एक फिल्म जिस पर बात करने के लिए पुराने शब्द, पुरानी भाषा, पुराने विशेषण, पुरानी उपमा, पुराने संदर्भ, पुरानी व्याख्या – सब अधूरे प्रतीत हो रहे हैं। भारतीय सिनेमा की नई परिभाषा तो ‘बाहुबली-1’ ने ही रच दी थी, अब ‘बाहुबली-2’ ने उसे अकल्पनीय विस्तार दे दिया है। निर्देशक एसएस राजामौली की ये फिल्म हर लिहाज से कितनी भव्य है, प्रभास, राणा दग्गुबाती, अनुष्का शेट्टी और तमन्ना भाटिया ने कैसा अभिनय किया है, कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा – ये सब तो आप बस हॉल जाकर देखें, फिलहाल बात करते हैं इसकी कमाई की।

गौरतलब है कि हिन्दी फिल्मों के सौ करोड़ी, दो सौ करोड़ी, तीन सौ करोड़ी क्लब की शुरुआत मूल रूप से तीनों खान – आमिर, सलमान, शाहरुख – की फिल्मों से हुई। इस क्लब में अक्षय कुमार, अजय देवगन, ऋतिक रोशन, रणबीर कपूर, रणबीर सिंह और बिग बी अमिताभ बच्चन की फिल्में भी समय-समय पर शामिल हुईँ। लेकिन हमें जानना चाहिए कि हिन्दी फिल्मों से भी पहले ऐसे क्लब की शुरुआत दक्षिण में हुई थी। 2007 में बनी तमिल फिल्म ‘शिवाजी’, जिसमें रजनीकांत की मुख्य भूमिका थी, ने 148 करोड़ की कमाई की थी। तब तक किसी हिन्दी फिल्म ने सौ करोड़ का स्वाद भी नहीं चखा था। हालांकि बाद के दिनों में ‘बाहुबली-1’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘सुल्तान’, ‘पीके’ और ‘दंगल’ जैसी फिल्मों ने पांच सौ, छह सौ, और सात सौ करोड़ तक के क्लब बना दिए। लेकिन ‘बाहुबली-2’ ने रिलीज के पहले दिन जैसी कमाई की है, उसे देखते हुए कहना गलत न होगा कि सौ करोड़ की तरह हजार करोड़ वाले क्लब की शुरुआत का श्रेय भी दक्षिण को ही मिलेगा। वैसे तेलुगु-तमिल-मलयालम और हिन्दी में एक साथ रिलीज हुई और सम्पूर्ण भारत में समान उत्सुकता और उत्साह से देखी जा रही ‘बाहुबली-2’ को पहली ‘भारतीय’ फिल्म भी बोलें तो गलत न होगा।

बहरहाल, ‘बाहुबली-2’ रिलीज के पहले दिन सौ करोड़ के क्लब में प्रवेश पाने वाली पहली फिल्म बन चुकी है। ‘बॉक्स ऑफिस इंडिया’ के मुताबिक ‘बाहुबली-2’ के पहले दिन का कलेक्शन 122.3 करोड़ रुपए का है। यहां तक कि इस बहुभाषी फिल्म ने हिन्दी मार्केट में पहले ही दिन 40.75 करोड़ का कारोबार किया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इससे पहले सुल्तान ने पहले दिन 36.54 करोड़ और दंगल ने 29.78 करोड़ का आंकड़ा छुआ था। बता दें कि ‘बाहुबली-2’ भारत में 6500 और दुनिया भर में करीब 9000 स्क्रीन पर रिलीज हुई है और खास बात यह कि रिलीज से पहले ही यह बकायदा 500 करोड़ की कमाई भी कर चुकी है। ऐसे में आप ही बताएं कि हजार करोड़ का आंकड़ा भला कितनी दूर है।

ट्रेड एनालिस्ट्स की मानें तो इस फिल्म के पहले दिन की कमाई को लेकर ऐसी उम्मीद पहले से ही थी। और हो भी क्यों न? जिस फिल्म की प्रतीक्षा उन्माद में तब्दील हो चुकी हो, रिलीज से पहले सिनेमाहॉल हाउसफुल हो चुके हों और पहले दिन पहले शो के लिए लोग कड़ी धूप में भी कतार में खड़े हों, तो ऐसा होना और इतिहास का रचा जाना स्वाभाविक ही था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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खत्म हो तीन तलाक, मोदी ने किया मुस्लिम समाज का आह्वान

इधर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराबबंदी, दहेजबंदी और बालविवाह-उन्मूलन की बात कर रहे हैं तो उधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुस्लिम समाज में व्याप्त तीन तलाक जैसी बुराई को दूर करने की पहल कर रहे हैं। काश कि राजनीति में हमेशा ऐसी ही बयार चले और राजनीति समाज को बदलने का, बेहतर करने का जरिया बने। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की अपील करते हुए इसका हल तलाशने को मुस्लिम समाज का आह्वान किया है और साथ में उम्मीद जताई है कि मुस्लिम समाज से ही लोग आगे आएंगे और तीन तलाक के संकट से जूझ रही मुस्लिम महिलाओं के लिए रास्ता निकालेंगे।

शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 12वीं सदी के महान समाज सुधारक गुरु बसव की जयंती पर आयोजित समारोह में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समाज के अंदर के लोग ही परंपराओं को तोड़ आधुनिक व्यवस्थाओं को अपनाते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने हिन्दू समाज से विधवा विवाह को खत्म करने वाले महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय की चर्चा की और कहा कि उन्होंने जब विधवा विवाह खत्म करने की बात रखी होगी, उस समय उन्हें कितनी आलोचना का शिकार होना पड़ा होगा। फिर भी वे माता-बहनों के साथ समाज में हो रहे घोर अन्याय के खिलाफ लड़े और जीत कर दिखाया। मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए आज वास्तव ऐसी ही पहल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की महान परंपरा में ऐसे कई उदाहरण हैं जब लोगों ने आगे बढ़कर बुरी परंपराओं को तोड़ा और आधुनिक परंपराओं को विकसित किया। इसीलिए तीन तलाक की समस्या के समाधान को लेकर भी वे आशावान हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सदियों पहले से ही भारत में महिलाओं को अपनी बात कहने का हक रहा है। आज तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। देश के प्रबुद्ध मुस्लिम इसके लिए कदम उठाएं। आने वाली पीढ़ियों को इससे ताकत मिलेगी। मोदी ने विश्वास जताया कि भारत के प्रबुद्ध मुसलमान न केवल देश में बल्कि दुनिया को तीन तलाक से निपटने का रास्ता दिखाएंगे।

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर देश में छुआछूत, जातिप्रथा जैसी व्यवस्था खत्म करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की नींव तभी मजबूत रहेगी जब बिना भेदभाव के सभी का विकास हो। सबको साथ लेकर और सबके प्रयत्न से ही सबका विकास किया जा सकता है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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हे देव बहा दो अहंकार, मेरे ही आंसू जल में…………..!

चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह को समर्पित मधेपुरा का प्रथम आईएसओ प्रमाणित किरण पब्लिक स्कूल ने अपना ग्यारहवाँ स्थापना दिवस समारोह’ मनाने के लिए स्थानीय शहीद चुल्हाय मार्ग स्थित बी.पी.मंडल नगर भवन का चयन तो किया जरूर, लेकिन मात्र छात्रों एवं अभिभावकों को एंट्री देने के बावजूद भी जगह छोटी पड़ गई | फलस्वरूप, टाउन हॉल के बाहर बैठने की व्यवस्था के साथ दो पर्दों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रोजेक्टर के माध्यम से देर रात तक दिखाया जाता रहा और कार्यक्रम के अंत तक लोग टस-से-मस नहीं हुए |

The Massive presence of students, guardians and educated citizen enjoying the 11th Foundation Day celebration program of Kiran Public School Madhepura at BP Mandal Nagar Bhawan, Shaheed Chulahay Marg Madhepura
The Massive presence of students, guardians and educated citizen enjoying the 11th Foundation Day Celebration programme of Kiran Public School Madhepura at BP Mandal Nagar Bhawan, Shaheed Chulahay Marg Madhepura

जहाँ एक ओर स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत किये जा रहे तरह-तरह के मनमोहक कार्यक्रमों पर तालियां बजती रहीं वहीं दूसरी ओर स्कूल के प्राचार्य किशोर कुमार ठाकुर की नपी-तुली गायकी “किशोर दा” की यादें तरोताजा करती रहीं | बीच-बीच में मो.रफी की याद ताजा करने के लिए रोशन कुमार और शिक्षा में गिरावट को दर्शाने वाले ‘नाटक’ के निर्देशक के रूप में अमित कुमार अंशु की उपस्थिति देखी जाती रही |

कार्यक्रम का उद्घाटन डीईओ शिवशंकर राय एवं मुख्य अतिथि के रुप में शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा संयुक्तरुप से, प्रबंध निदेशिका किरण प्रकाश, निदेशक अमन प्रकाश एवं प्राचार्य किशोर कुमार ठाकुर आदि की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया | लगे हाथ प्रबंध निदेशिका श्रीमती किरण प्रकाश द्वारा स्कूल के संस्थापक जय प्रकाश बाबू का स्मरण करते हुए एवं उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने का संकल्प लेते हुए उद्घाटनकर्ता और मुख्य अतिथि को मोमेंटो एवं पुष्प-गुच्छ  सहित सुमधुर गीत से स्वागत किया गया | साथ ही निदेशक अमन प्रकाश द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया |

Chief Guest Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri along with Managing Director Mrs.Kiran Prakash , Director Aman Prakash , Principal K.K.Thakur and CS Pandey and others congratulating the audience for enjoying the programme peacefully.
Chief Guest Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri along with Managing Director Mrs.Kiran Prakash , Director Aman Prakash , Principal K.K.Thakur and CS Pandey and others congratulating the audience for enjoying the programme peacefully.

बता दें कि उद्घाटनकर्ता डीईओ श्री एस.एस.राय ने अपने व्यस्त कार्यक्रमों में से कुछ समय निकालकर अपने संक्षिप्त संबोधन में शिक्षक समाज से यही कहा कि आज गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में कमी होती जा रही है जिसे रोकने हेतु सजग रहने की जरूरत है |

मुख्य अतिथि डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने “चंपारण सत्याग्रह शताब्दी को समर्पित केपीएस का ग्यारहवा दिवस” पर छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों की महती भीड़ को संबोधित करते हुए यही कहा कि बिहार ने ही मोहनदास………. को महात्मा बना दिया | महात्मा गांधी के जीवन में आये तीन बंदर, तीन औरत और तीन ‘झ’ (झंडा-झाड़ू-झोला) के अंदर की कहानियों के बारे में विस्तार से बताते हुए यही कहा-

“गांधी कुछ-न-कुछ हमेशा सीखते रहना चाहते थे | उनके अनुसार, सीखने की यात्रा अनंत होने के कारण ताजिंदगी चलती ही  रहती है और मंजिल हमें तब मिलती है जब हम ‘अहंकार शून्य’ हो जाते हैं…….!”

बता दें कि ऋषियों की तरह जीवन जीने वाले रवीन्द्रनाथ टैगोर ने गीतांजलि के प्रथम गीत की पहली पंक्ति में ही लिखा है-

 हे देव बहा दो अहंकार, मेरे ही आंसू जल में

समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने बच्चों से कहा कि तुम भी गाँधी बन सकते हो | गाँधी देशरत्न राजेंद्र प्रसाद जैसे प्रतिभावान नहीं थे | 50 छात्रों वाले वर्ग में 40वाँ स्थान प्राप्त करते थे | हाँ, वे संकल्प के धनी ही नहीं बल्कि महाधनी कुबेर थे | उन्होंने आजीवन ‘सत्य अहिंसा’ के व्रती होने का संकल्प लिया और पालन किया जिसके चलते उन्होंने ब्रिटिश शासन की जड़ें हिला दी………| डॉ.मधेपुरी ने बच्चों से कहा कि तुम डॉ.कलाम की तरह बड़े-बड़े सपने देखो और गांधी के ‘करो या मरो’ की तरह उसे पूरा करो |

अंत में समापन करते हुए डॉ.मधेपुरी ने दर्शकों का ध्यान आकृष्ट करते हुए मधेपुरा के पूर्व डीएम गोपाल मीणा (भा.प्र.से.) से हाल में मोबाइल पर हुई (मौन) बातचीत की चर्चा करते हुए यही कहा-

“शक्तिशाली बम या लंबी रेंजवाले मिसाइल के बिना ही किसी भी देश को धूल में मिलाया जा सकता है बशर्ते कि वहां की शिक्षा में लगातार गिरावट और परीक्षा में खुलेआम चीटिंग की मिलावट होती रहे |”                       

अंत में प्राचार्य किशोर कुमार ठाकुर ने स्कूल के टीचर सीएस पाण्डेय, विनोद कुमार, पवन कुमार, सुधीर कुमार, श्रीमती धर्मावती पाण्डेय, गोपाल कृष्णा, डॉ.सीमा श्रीवास्तव, संतोष कुमार आदि सहित मीडिया के संजय परमार, सुकेश राणा व अन्य उपस्थित सभी जनों को समारोह की संपूर्ण सफलता के लिए साधुवाद देते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की |

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नहीं रहे विनोद खन्ना

न केवल हिन्दी सिनेमा बल्कि सम्पूर्ण भारतीय सिनेमा के चंद अत्यंत हैंडसम अभिनेताओं में शुमार विनोद खन्ना नहीं रहे। अभी कुछ ही दिन पहले उनकी एक तस्वीर वायरल हुई थी जिसमें उनका शरीर अतंयंत जर्जर दिख रहा था। उस तस्वीर ने बॉलीवुड समेत पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। तब वो मुंबई के सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती थे और बताया गया था कि उनके शरीर में पानी की कमी हो गई है। और अब उनके नहीं रहने की ख़बर आई है। 70 वर्षीय विनोद ने गुरुवार सुबह अन्तिम सांस भी रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल अस्पताल में ही ली। उनका अन्तिम संस्कार मुंबई के वर्ली श्मशान घाट पर किया गया।

विनोद खन्ना को अंतिम विदाई देने उनके सैकड़ों प्रशंसकों के अतिरिक्त बॉलीवुड और राजनीति की कई दिग्गज हस्तियां पहुंचीं, जिनमें अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन, प्रफुल्ल पटेल, रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, सुभाष घई, गुलजार, रमेश सिप्पी, रंजीत, उदित नारायण, रणदीप हुडा, दिया मिर्जा आदि प्रमुख हैं। मुखाग्नि उनके छोटे बेटे साक्षी खन्ना ने दी। विनोद के दो अन्य बेटे अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना भी अभिनय के ही क्षेत्र में हैं।

विनोद खन्ना अभिनय के अलावा राजनीति में भी सक्रिय थे और वर्तमान में गुरुदासपुर से भाजपा के सांसद थे। उनकी मृत्यु पर ट्वीट कर श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ‘विनोद खन्ना को हम हमेशा एक प्रसिद्ध अभिनेता, समर्पित नेता और बहुत ही अच्छे इंसान के रूप में याद करेंगे। उनके परिवार को इस दुखद घड़ी में मेरी सहानुभूति।‘

विनोद खन्ना ने अभिनय की शुरुआत 1968 में फिल्म ‘मन का मीत’ से की और अपने करियर में 140 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। ‘मेरे अपने’, ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘इम्तिहान’, ‘इनकार’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘लहू के दो रंग’, ‘कुर्बानी’, ‘दयावान’, ‘जुर्म’ जैसी कई फिल्में उनके यादगार अभिनय के लिए याद की जाएंगी। हाल के दिनों में विनोद सलमान खान के पिता की भूमिका में फिल्म ‘दबंग’ में और आखिरी बार शाहरुख खान के पिता की भूमिका में फिल्म ‘दिलवाले’ में नज़र आए थे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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महिला आरक्षण की दिशा में नीतीश का क्रान्तिकारी कदम !

जहाँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं के लिए 50 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान कर क्रांतिकारी कदम उठाया है, वहीं तत्कालीन केंद्र सरकार की पहल पर 24 अप्रैल, 1992 को संविधान के 73 वें एवं 74 वें संसोधन द्वारा पंचायतों को सशक्त बनाने का प्रावधान भी तो किया गया था |

बता दें कि राज्य के 48 नगर परिषदों के अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण यूँ तय कर दिये गये हैं कि 48 में से 22 शीर्ष पदों पर सिर्फ महिलाओं का राज होगा | इतना ही नहीं, आधी आबादी के प्रदर्शन के मुताबिक चुनाव बाद यह संख्या और भी बढ़ सकती है | राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर अध्यक्ष पद पर महिलाओं को 50 फ़ीसदी आरक्षण दिया है |

अभी जिले के सदर नगर परिषद (मधेपुरा) एवं मुरलीगंज नगर पंचायत में क्रमशः 26 एवं 15 वार्डों में वार्ड सदस्यों के लिए पर्चे भरे जा रहे हैं | मंगलवार की शाम तक मधेपुरा नगर परिषद् में कुल 91 पर्चे दाखिल हुए और मुरलीगंज नगर पंचायत में कुल 45 पर्चे भरे गये |

यह भी बता दें कि जहाँ मधेपुरा नगर परिषद के निर्वाची पदाधिकारी सह एसडीएम संजय कुमार निराला द्वारा नामांकन के पर्चे लिए जा रहे थे वहीं सीओ मधेपुरा मिथिलेश कुमार व सीओ शंकरपुर ज्ञान प्रकाश सेराफिन दोनों सहायक निर्वाची पदाधिकारी के रुप में एवं लेडी सुपरवाइजर श्रीमती अलका कुमारी सहयोग करते देखे गये | और मुरलीगंज नगर पंचायत में निर्वाची पदाधिकारी डीएसओ राजेश रोशन सहायक निर्वाची पदाधिकारी सह बीडीओ अनुरंजन कुमार, सीओ जय प्रकाश स्वर्णकार एवं सांख्यिकी पदाधिकारी शिव कुमार सिंह को नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशियों से पर्चे लेते एवं सहयोग करते देखे गये |

यह भी जानिए कि डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) द्वारा मधेपुरा नगर परिषद एवं मुरलीगंज नगर पंचायत के लिए जारी नामांकन के अंतिम दिन यानि 27 अप्रैल को पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था रखने का निर्देश दिया गया है | इतना ही नहीं, डीएम मो.सोहैल ने मधेपुरा नगर परिषद के लिए डीडीसी मिथिलेश कुमार और मुरलीगंज नगर पंचायत के लिए स्थापना के उपसमाहर्ता के.एम. प्रसाद को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी है | साथ ही डीएम ने थानाध्यक्षों को भी निर्देश दिया है कि वे सुरक्षाबल के साथ नामांकन स्थल पर मौजूद रहकर विधि व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम करेंगे |

आगे तिथियों की जानकारी प्राप्त कर लें और उन्हें याद भी कर लें | नामांकन के पर्चे दाखिल करने के लिए 19 अप्रैल से 27 अप्रैल तक निर्धारित है | अप्रैल 28 एवं 29 को संवीक्षा (स्क्रूटनी) और नाम वापिस लेने के लिए अंतिम तिथि 2 मई घोषित है |                       

प्रत्याशीगण यह भी जान लें कि चुनाव चिन्ह आवंटित किया जायेगा 3 मई को तथा मतदान की तिथि होगी 21 मई (रविवार) और मतदान की अवधि होगी सुबह 7:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक | मतगणना की तिथि निर्धारित की गई है 23 मई को | उसी दिन रिजल्ट भी होगा | जो जीतेंगे वे घूमने लगेंगे और जो हारेंगे वो एकान्तवासी बनने लगेंगे !!

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सुकमा के शहीदों के परिवार की मदद के लिए आगे आई बिहार सरकार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सली हमले में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों की शहादत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस हमले में बिहार के शहीद छह जवानों के परिजनों को राज्य सरकार की और से 5 लाख रुपये अनुग्रह राशि दिए जाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने शहीद हुए जवानों का अंतिम संस्कार राज्य सरकार की ओर से पूरे पुलिस सम्मान के साथ किए जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री कार्यालय से मंगलवार को जारी बयान में नीतीश ने कहा कि इन जवानों की शहादत को देश हमेशा याद रखेगा।

गौरतलब है कि सोमवार को छत्तीसगढ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस घटना में पच्चीस जवान शहीद हो गए थे, जिनमें छह जवान बिहार के थे। नक्सलियों से लड़ते हुए बिहार के जो लाल शहीद हुए, उनके नाम कृष्ण कुमार पांडेय (सासाराम), अभय कुमार लोमा (वैशाली), रंजीत कुमार (शेखपुरा), नरेश यादव (दरभंगा), सौरभ कुमार (दानापुर कैंट, पटना) और अभय मिश्र (भोजपुर) हैं।

उधर इस मामले को लेकर आरजेडी ने भाजपा को आड़े हाथों लिया है। पार्टी ने कहा कि केवल ट्विटर पर राष्ट्रवाद की बातों से काम नहीं चलने वाला है। एक्शन भी जरूरी है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार नक्सलियों और आतंकियों के खिलाफ एक्शन प्लान बनाए।

कांग्रेस ने इस घटना के लिए सीधे केन्द्रीय गृह मंत्रालय को जिम्मेदार बताया। पार्टी के नेता प्रेमचंद मिश्रा ने नक्सली हमले को लेकर गृहमंत्री को घेरा और इसे गृह मंत्रालय की बड़ी विफलता बताते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह से इस्तीफे की मांग की।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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‘नीतीश राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार’ – कर्नाटक मीडिया

कर्नाटक मीडिया ने बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बताकर राजनीति के गलियारों में सनसनी पैदा कर दी है। अप्रत्याशित रूप से आई इस ख़बर ने तमाम दलों को संशय में डाल दिया है। हालांकि जेडीयू ने इसका खंडन किया है। पार्टी के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि दूर-दूर तक ऐसी कोई बात नहीं है। नीतीश कुमार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार नहीं हैं। नीतीश राष्ट्रपति पद के लिए एक संयुक्त उम्मीदवार खड़ा किए जाने की वकालत कर रहे हैं और इसके लिए विभिन्न दलों से लगातार संवादरत हैं। इस बाबत उनकी सक्रियता का कोई और अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए। वे कहीं से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार नहीं हैं।
गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने कोच्चि जाने के क्रम में गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए विरोधी सभी दलों द्वारा एकजुट होकर एक संयुक्त उम्मीदवार खड़ा करने पर चर्चा की थी। इसी चर्चा को कर्नाटक मीडिया ने अलग रूप दे दिया और वहां छपी ख़बर जंगल में आग की तरह फैल गई।
इस संदर्भ में केसी त्यागी ने आगे कहा, जेडीयू का मानना है कि विपक्ष को मिलकर राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की घोषणा करनी चाहिए। विपक्ष की सबसे वरिष्ठ नेता होने के कारण सोनिया गांधी को आगे आकर राजनीतिक दलों से बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार ने इस संबंध में एनसीपी और वामदलों से भी बात की है।

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सिविल सेवा दिवस पर देश भर में ‘बिहार’ विद्युतीकरण में अव्वल घोषित   

ग्यारहवाँ सिविल सेवा दिवस 2017 पर जहाँ एक ओर दिल्ली के विज्ञान भवन में शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा विद्युतीकरण में बिहार के नालंदा जिला को अव्वल घोषित करते हुए साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन के एमडी श्री आर लक्ष्मण एवं नालंदा के डीएम  डॉ. त्यागराजन को उत्कृष्ट कार्यों के लिए पुरस्कृत किया जा रहा था वहीं दूसरी ओर मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल व एसपी विकास कुमार द्वारा अपनी टीम के सिविल सेवकों एवं शिक्षाविद-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी , प्रो.श्यामल किशोर यादव व अन्य के साथ समाहरणालय सभा भवन में लाइव टेलीकास्ट देखते हुए बिहार के सीएम नीतीश कुमार एवं ऊर्जा सह मधेपुरा जिला प्रभारी मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बधाइयां दी जा रही थी |

बता दें कि सिविल सेवा दिवस तो 2006 से मनाया जाना शुरू हुआ लेकिन इस वर्ष सर्वोत्कृष्ट ढंग से नई रूप रेखा के साथ नए स्वरूप में दो दिनों तक समारोहपूर्वक मनाया गया तथा 12 व्यक्तियों को पुरस्कृत किया गया- पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों | विज्ञान भवन समारोह में बिहार सहित गुजरात, छत्तीसगढ़, मिजोरम, महाराष्ट्र….. आदि राज्यों के जिलाधिकारियों को सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिए अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन दिए गये | ऊर्जा के अलावा पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में सर्वोत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिवर्ष पुरस्कार दिया जाता है | केंद्र सरकार की टीम जांचोपरांत नालंदा को देश का सर्वोच्च जिला चुना जहाँ  2014-15 में एक लाख 76 हजार बिजली उपभोक्ता थे वहीं मार्च 2017 तक तीन लाख 34 हजार हो गये | इसके साथ ही वहां के गांवों में औसतन 16 से 18 घंटे और शहरों में औसतन 22 से 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है |

DM Md.Sohail , SP Vikas Kumar , NDC Mukesh Kumar , SDM Sanjay Kumar Nirala , Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri , Prof. SK Yadav and others attending live telecast from Vigyan Bhawan, New Delhi on Civil Service Day at Samaharnalay Sabhagar Madhepura .
DM Md.Sohail , SP Vikas Kumar , NDC Mukesh Kumar , SDM Sanjay Kumar Nirala , Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri , Prof. SK Yadav and others attending live telecast from Vigyan Bhawan, New Delhi on Civil Service Day at Samaharnalay Sabhagar Madhepura .

लाइव टेलीकास्ट समाप्ति के बाद डीएम  मो.सोहैल ने यही कहा कि सिविल सर्विसेज के श्रेष्ठ पदाधिकारी वही माने जायेंगे जिनमें निर्णय लेने की क्षमता व दृढ़ता हो, परंतु असमंजस नहीं ! उन्होंने यह भी कहा कि जो पदाधिकारी अंतिम व्यक्ति को सामने रखकर निर्णय लेंगे उनसे कभी गलती नहीं होगी….. वह अंतिम व्यक्ति आपकी आत्मा की आवाज होगी | डीएम मो.सोहैल ने अंत में यही कहा कि सिविल सर्विसेज के लोगों की नियुक्ति ही निर्णय लेने के लिए की जाती है |

जहाँ मधेपुरा अबतक द्वारा दूरभाष पर बिहार के ऊर्जा मंत्री एवं मधेपुरा जिले के प्रभारी मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव से बिहार में बिजली के बाबत हुए काम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बस इतना ही कहा कि ग्रामीण विद्युतीकरण बिहार में लक्ष्य से अधिक काम कर नंबर वन स्थान हासिल किया है वहीं डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा के जिलाधिकारी के रेल फैक्ट्री, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज आदि को रफ्तार देने के साथ-साथ गांव में एएनएम कॉलेज एवं आईटीआई आदि निर्माण कराने की चर्चा करते हुए यही कहा कि प्रधानमंत्री के हाथों पुरस्कृत होने में देर जो भी हो, अंधेर नहीं होगा |

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अनर्थ होने से पहले चलिए ‘अर्थ डे’ को अर्थ दें

22 अप्रैल को दुनिया ‘अर्थ डे’ के रूप में जानती है। ‘अर्थ डे’ यानि हम सबकी मां पृथ्वी का दिन, जो आज कराह रही है। शायद इस दिन की प्रासंगिकता यही है कि हम उसके कराहने को सुन सकें, समझ सकें, महसूस कर सकें। बहरहाल, पृथ्वी पर मौजूद पेड़-पौधों और दुनिया भर में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ 22 अप्रैल 1970 को पहली बार अमेरिका में ‘अर्थ डे’ मनाया गया। इस दिन को मनाने का मकसद था राजनीतिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण संबंधी नीतियों को अमल में लाने के लिए दबाव बनाना। बीस वर्षों के बाद यानि 22 अप्रैल 1990 को ‘अर्थ डे’ के बीसवें जन्मदिन पर 141 देशों में दो करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था। तब से आज तक हर साल इस दिन दुनिया भर में पर्यावरण प्रेमी और सरकारें धरती को बचाने की प्रतिबद्धता दोहराते हैं और एकजुट होते हैं।

जीवन और पर्यावरण को हमेशा से ही एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। पर्यावरण के बगैर जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। मानव-जाति के लिए यह पृथ्वी ही सबसे सुरक्षित ठिकाना है लेकिन दुर्भाग्यवश आज इसका अस्तित्व ही संकट में है। अगर समय रहते इसकी रक्षा के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए तो इसे बचाना मुश्किल हो जाएगा। प्रश्न उठता है, आखिर ऐसी क्या समस्याएं हैं जिनके कारण आज ‘पृथ्वी दिवस’ मनाने की जरूरत आ पड़ी है। चलिए, जानने की कोशिश करते हैं।

A Drawing on Earth Day By Akshay Deep, Student of class 4th'B', Litera Valley School, Patna
A Drawing on Earth Day By Akshay Deep, Student of class 4th’B’, Litera Valley School, Patna .

सबसे पहले ग्लोबल वार्मिंग। आज ग्लोबल वार्मिंग पूरे विश्व के लिए एक बड़ा और सामाजिक मुद्दा है। सूरज की रोशनी को लगातार ग्रहण करते हुए हमारी पृथ्वी दिनों-दिन गर्म होती जा रही है, जिससे वातावरण में कार्बन-डाई-ऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा है। पृथ्वी के तापमान में पिछले सौ सालों में 0.18 डिग्री सेंटीग्रेड की वृद्धि हो चुकी है। माना जाता है कि अगर ऐसे ही तापमान में बढ़ोतरी हुई तो 21वीं सदी के अंत तक 1.1-6.4 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान बढ़ जाएगा। ऐसा होने पर सूखा बढ़ेगा, बाढ़ की घटनाएं बढेंगी और मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ जाएगा।

दूसरी बड़ी वजह है ग्रीन हाउस गैसें। ग्रीन हाउस गैसें वातावरण या जलवायु में परिवर्तन और अंतत: ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदायी होती हैं। जिन ग्रीन हाउस गैसों का सबसे ज्यादा उत्सर्जन होता है उनमें कार्बन-डाई-ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, मीथेन, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन आदि शामिल हैं। कार्बन-डाई-ऑक्साईड की ही बात करें तो पिछले 15 सालों में ही इसका उत्सर्जन 40 गुना और औद्योगिकीकरण के बाद से 100 गुना बढ़ गया है। ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन आम प्रयोग के उपकरणों, जैसे फ्रिज, कंप्यूटर, स्कूटर, कार आदि से होता है। कार्बन-डाई-ऑक्साइड के उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत पेट्रोलियम ईंधन और परंपरागत चूल्हे हैं।

पृथ्वी के संकट का तीसरा बड़ा कारण है पॉलीथीन। सुविधा के लिए बनाई गई पॉलीथीन आज बहुत बड़ा सिरदर्द बन गई है। पॉलीथीन नष्ट नहीं हो सकती और इसके कारण यह धरती की उर्वरक क्षमता को खत्म कर रही है। साथ ही भूगर्मीय जल दूषित हो रहा है। इसको जलाने पर निकलने वाला धुआं ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचाता है, जो कि ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण है। एक आंकड़े के मुताबिक सिर्फ भारत में ही हर साल 500 मीट्रिक टन पॉलीथीन का निर्माण होता है और रीसाइकलिंग एक प्रतिशत से भी कम की हो पाती है।

पृथ्वी के संकट की एक और वजह है हमारी खेती का असंतुलन। आजकल आमतौर पर भूमिविशेष पर एक ही फसल की खेती की जाती है, जो कि अस्थिर पर्यावरण तंत्र को बढ़ावा देती है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई किसान सिर्फ मक्का उपजाता है तो वहां विनाशकारी कीटों को खाने वाले परभक्षियों के लिए कोई स्थान नहीं होगा, जिसकी वजह से कीटनाशकों की जरूरत होगी। इस कारण दुनिया भर में करोड़ों एकड़ कृषि भूमि बेकार हो रही है और हमारी भावी पीढ़ियों के पेट भरने पर भी संकट आ रहा है।

पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और जंगलों को खत्म कर हमने पृथ्वी के संकट को और भी गहरा कर दिया है। आज इस वजह से हमारा मौसम चक्र ही अनियमित हो गया है। पूरी दुनिया में गर्मियां लंबी होती जा रही हैं और सर्दियां छोटी। जलवायु में इस परिवर्तन का असर मनुष्यों के साथ-साथ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं पर भी हो रहा है। पेड़-पौधों पर फूल और फल अब समय से पहले लग सकते हैं और पशु-पक्षी अपने क्षेत्रों से पलायन कर दूसरी जगह जा सकते हैं। हर दिन धटती हरियाली और बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण नई समस्याओं को जन्म दे रहा है।

तो ये थी ‘अर्थ डे’ मनाने की चंद बड़ी वजहें। क्या आप पल भर की भी देरी करना चाहेंगे पृथ्वी को बचाने की मुहिम से जुड़ने में। ‘अर्थ डे’ पर केवल रस्म अदायगी न करें। आईये, कुछ सार्थक करें। तभी बच पाएगी हमारी मां पृथ्वी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

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नीतीश के बाद अब लालू मिलेंगे सोनिया से

अभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बीते गुरुवार को सोनिया गांधी से हुई मुलाकात की चर्चा थमी भी नहीं थी कि अब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की भी कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि उनकी मुलाकात की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

बताया जाता है कि नीतीश ने देश भर में भाजपा विरोधी अभियान की शुरुआत को लेकर सोनिया से मुलाकात की थी। साथ ही इस बैठक में दोनों के बीच राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा हुई। जेडीयू का मानना है कि विपक्ष को मिलकर राष्ट्रपति पद के लिए एक ही उम्मीदवार की घोषणा करनी चाहिए और विपक्ष की सबसे वरिष्ठ नेता होने की वजह से सोनिया गांधी को आगे आकर राजनीतिक दलों से बातचीत करनी चाहिए।

हालांकि नीतीश इससे पूर्व भी कई बार कह चुके हैं कि बिहार की तरह राष्ट्रीय स्तर पर गैर भाजपा दलों के महागठबंधन को ले कांग्रेस पहल करे। लेकिन यहां ध्यान देने की बात यह है कि महज चार दिन पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के सिलसिले में पटना में थे। इस दौरान वे नीतीश और लालू दोनों के साथ एक ही मंच पर थे। चूंकि राहुल गांधी से हुई इस मुलाकात के तुरंत बाद नीतीश ने सोनिया से मुलाकात की है, इसीलिए इसके अलग मायने भी निकाले जा रहे हैं। भाजपा खेमे के लोग इसे लालू पर दबाव बनाने की नीतीश की राजनीति बता रहे हैं।

बहरहाल, देखा जाय तो लालू की कांग्रेस के प्रति ‘निष्ठा’ पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं उठाया जा सकता। लेकिन महागठबंधन बनने के पूर्व कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने उन से ज्यादा नीतीश को तवज्जो दी थी। अब जबकि नीतीश और लालू दोनों अलग-अलग कांग्रेस अध्यक्ष से मिल रहे हैं, जाहिर है कुछ तो नया बिहार की राजनीति में भी देखने को मिलेगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

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