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खुद को संवारेंगे या संस्कृति को सहेजेंगे संसद सदस्य ?

भारत अपने आप में एक महत्वपूर्ण विश्व विरासत है | विश्व विरासत की सूची में सांस्कृतिक संपदा के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र है भारत | भारत के लिए अपनी संस्कृति को हर हाल में सहेजकर तथा सम्मान के साथ बचाकर रखना अपेक्षित है | परंतु, भारतीय संसद के सदस्यगण अपनी संस्कृति को सहेजने के बजाय खुद को नाना प्रकार की सुविधाओं से लैस करने एवं सँवारने में लगे रहते हैं |

तभी तो प्रेम व भाईचारे वाले त्यौहार जिसे आम लोगों द्वारा भी उमंग के साथ खुशियाँ बांटने वाला पर्व ‘होली’ कहकर संबोधित किया जाता है तथा मथुरा-वरसाने की वह ‘होली’ जो परम को भी प्रिय है | बावजूद इसके हमारे संसद सदस्यों की अवहेलना के चलते केंद्रीय डाक विभाग द्वारा आजादी के बाद से आज तक कोई डाक टिकट ‘होली’ को लेकर जारी नहीं किया गया | जबकि दक्षिण अमेरिका का ‘गुयाना’ दुनिया का एकलौता ऐसा देश है जिसने ‘होली’ पर लगभग 50 वर्ष पूर्व (26 जनवरी 1969) ही चार डाक टिकटो का खूबसूरत सेट जारी किया था जिसमें राधा-कृष्ण को होली खेलते हुए तथा रंग-गुलाल से बचते-बचाते हुए दिखाया गया है |

बता दें कि यह कितनी अफसोस की बात है कि जो भी त्यौहार यानी ‘होली, ईद….. आदि हमारे देश में इतना अहम हैं, उन पर संसद-सदस्यों द्वारा अभी तक ध्यान नहीं दिये गये हैं और ना ही डाक टिकटें जारी किये गये हैं  | अलबत्ता एक दो के अलाबे सभी सांसद सदस्यगण वेतन-भत्ता व अन्य सारी सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए सदैव ‘कागचेष्टा वकोध्यानंम….’ को भी मात देने में लगे रहते हैं बल्कि संस्कृति भांड़ में जाय तो जाय…… उसकी कभी चिंता नहीं करते |

हाँ ! 10 वर्षों की सतत मांग के बाद ही भारत में दीपावली पर 7 अक्टूबर 2008 को तीन डाक टिकट जारी किए गये | इसमें भी गुयाना हमें पीछे छोड़ दिया | क्योंकि , गुयाना लगभग 30 वर्ष पूर्व ही दिपावली पर चार टिकट जारी कर दिये थे जिसमें महालक्ष्मी के साथ दीप दान का चित्र बना है |

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तय होने लगे राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम

23 मार्च को निर्धारित राज्यसभा चुनाव के नामांकन की तारीख – 12 मार्च – के निकट आते ही पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित करने शुरू कर दिए हैं। जैसा कि तयप्राय था, सत्तारूढ़ भाजपा ने वित्तमंत्री अरुण जेटली व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद समेत अपने सभी बड़े नेताओं को पुन: उच्च सदन भेजने की घोषणा कर दी है। उधर सपा ने अपने हिस्से की एक सीट पर एक बार फिर जया बच्चन को भेजने का मन बना लिया है, जबकि संख्याबल के हिसाब से जीतने की संभावना क्षीण होने के बावजूद बसपा ने भी अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जेडीयू की बात करें तो पार्टी ने उम्मीदवारों को लेकर अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

भाजपा उम्मीदवारों की बात करें तो पार्टी ने उत्तर प्रदेश से वित्त मंत्री अरुण जेटली को उम्मीदवार बनाया है, जबकि मध्यप्रदेश की दो सीटों के लिए थावर चंद गहलोत और उर्जा मंत्री धर्मेद्र प्रधान के नाम का ऐलान किया गया है। गुजरात की बात करें तो वहां की दो सीटों के लिए मनसुख लाल मंडाविया और पुरुषोत्तम रुपाला को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है। हिमाचल प्रदेश से स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डा को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है। केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को बिहार के रास्ते राज्यसभा भेजना तय हुआ है, तो वहीं राजस्थान से भूपेन्द्र यादव को उम्मीदवार बनाया गया है।

सपा की बात करें तो पार्टी ने यूपी से जया बच्चन को उम्मीदवार बनाया है। पहले चर्चा थी कि नरेश अग्रवाल को राज्यसभा का टिकट दिया जा सकता है। वहीं बसपा ने भीमराव अंबेडकर को अपना प्रत्याशी बनाया है। यहां कहा जा रहा था कि संभवत: पार्टी सुप्रीमो मायावती खुद को राज्यसभा भेजने की कोशिश कर सकती हैं। लेकिन कहा जा सकता है कि संख्याबल पर्याप्त ना होने से केवल अन्य पार्टियों के समर्थन के भरोसे उन्होंने ऐसा करना उचित नहीं समझा।

इधर बिहार से जेडीयू के राज्यसभा उम्मीदवारों की बात करें तो पार्टी ने अभी सस्पेंस बनाकर रखा हुआ है। वैसे राजनीति के जानकार बताते हैं कि दो में से एक सीट के लिए प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह का नाम तय है, जबकि दूसरी सीट के लिए हवा में कई नाम तैर रहे हैं।

बता दें कि चुनाव आयोग ने अलग-अलग राज्यों की 58 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीख 23 मार्च रखी है। वहीं नामांकन की आखिरी तारीख 12 मार्च तय की गई है। 15 मार्च तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। यह भी जानें कि उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है तो वहीं महाराष्ट्र और बिहार से 6-6 सदस्यों का चुनाव होना है। मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से 5-5 तो ओडिशा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से 3-3 सीटों के लिए चुनाव होना है।

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पाकिस्तान में भी मनाई जाती है होली

आमतौर पर जब पाकिस्तान की चर्चा होती है, तब हमारे जेहन में भारत के लिए वहां के सियासतदानों के कटुता भरे बयान, हाफिज सईद जैसे आतंकियों की नापाक हरकतें, सीमा पर आए दिन होने वाली गोलीबारी या फिर क्रिकेट के मैदान की प्रतिद्वंद्विता की तस्वीर उभरती है। ऐसे में क्या आप इस बात पर यकीन कर सकते हैं कि रंगों के त्योहार होली के दिन वहां भी जमकर अबीर-गुलाल उड़ता है, हिन्दी फिल्मों के गानों पर धमाल मचता है और वहां रह रहे अल्पसंख्यक हिन्दुओं के साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी इसमें शामिल होते हैं..!

जी हां, मुस्लिम मुल्क पाकिस्तान में हिंदू बिरादरी के लोग धूमधाम से होली मनाते हैं। इस दिन सारे रिश्तेदार बहन-भाई मंदिरों में इकट्ठा होते हैं और एक दूसरे पर रंग डालते हैं। वहां के लोग बताते हैं कि होली के जश्न में उनके मुस्लिम दोस्त भी शामिल होते हैं और होली भी खेलते हैं। होली के मौके पर हिंदुस्तान की तरह पाकिस्तान में भी विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं। आपको जानकर खुशी होगी कि कुछ साल पहले तक यहां होली की छुट्टी नहीं होती थी, लेकिन अब होली पर यहां सार्वजनिक अवकाश हुआ करता है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में 2 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी है। इनमें हिंदुओं के अलावा ईसाई और दूसरे सम्प्रदाय के लोग भी हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदुओं की आबादी ज्यादा है, इसलिए स्वाभाविक तौर पर यहां होली की धूम अधिक होती है। वैसे कराची भी इस मामले में पीछे नहीं। इस बार हिन्दुओं ने वहां धूमधाम से भव्य होली फेस्टिवल का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।

सच तो यह है कि दोनों देशों के बीच जो दूरी आज दिखती है, वो चंद स्वार्थी तत्वों के कारण। नहीं तो इंसानियत के रंग, खुशियों के रंग, मुहब्बत और उम्मीदों के रंग भारत हो या पाकिस्तान या फिर दुनिया का कोई और मुल्क, हर जगह एक है। रही बात होली की, तो ये त्योहार ही रंगों का है, इस दिन कोई ‘बेरंग’ या ‘बदरंग’ रहे भी तो कैसे..?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में भाजपा की बढ़त !

एग्जिट पोल की मानें तो त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में कमल खिलने की पूरी संभावना है। त्रिपुरा में जहां भाजपा 60 में से 35 सीटें जीतकर सीपीएम की 25 साल पुरानी सरकार को गिराती नजर आ रही है, वहीं नगालैंड और मेघालय में भी उसे बढ़त मिलती दिख रही है। गौरतलब है कि इन तीनों राज्यों में इस बार भारी मतदान हुआ था, जिसका फायदा संभवत: भाजपा को मिला है।

बहरहाल, सबसे पहले त्रिपुरा की बात। न्यूज एक्स के एग्जिट पोल के मुताबिक यहां पहली बार भाजपा, आईपीएफटी की मदद से सरकार बना सकती है। अनुमान है कि भाजपा और आईपीएफटी के गठजोड़ को 35 से 45 सीटें मिल सकती हैं। वहीं सीपीएम का आंकड़ा 50 सीटों से गिरकर 14-23 के बीच रह सकता है। एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में तो भाजपा को इससे कहीं ज्यादा 45-50 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि लेफ्ट को महज 9-10 सीटें मिलती नजर आ रही हैं। हालांकि सीवोटर के एग्जिट पोल में त्रिपुरा की तस्वीर इन दोनों एग्जिट पोल से अलग दिख रही है। इसके मुताबिक यहां भाजपा गठबंधन और लेफ्ट के बीच कांटे की टक्कर है। इस एग्जिट पोल में सीपीएम को 26 से 34 सीटें, भाजपा गठबंधन को 24 से 32 सीटें और कांग्रेस को 0 से 2 सीटें मिल सकती हैं।

नगालैंड की अगर बात करें तो यहां भी एग्जिट पोल में भाजपा को आगे बताया जा रहा है। यहां भाजपा ने नेफ्यू रियो की अगुवाई वाले एनडीपीपी के साथ गठबंधन किया है। न्यूज एक्स के एग्जिट पोल के मुताबिक भाजपा को सहयोगियों के साथ 27-32 सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा 60 सदस्यों वाली विधानसभा में एनपीएफ को 20-25 सीटें, जबकि कांग्रेस को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान है।

मेघालय की जहां तक बात है तो यहां भी भाजपा फायदे में दिख रही है। एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में अनुमान है कि 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा 30 सीटें जीत सकती है, वहीं कांग्रेस को केवल 20 सीटें मिलने जा रही हैं। दूसरी ओर न्यूज एक्स के एग्जिट पोल के मुताबिक मेघालय की तस्वीर कुछ अलग ही दिख रही है। इस एग्जिट पोल में कोनार्ड संगमा की अगुवाई वाली एनपीपी (नेशनल पीपुल्स पार्टी) को 23-27 सीटें दी गई हैं। जबकि कांग्रेस के हिस्से में 13-17 और भाजपा के खाते में 8-12 सीटें बताई गई हैं।

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तुम्हें यूं ना जाना था ‘चांदनी’!

25 फरवरी का दिन भारतीय सिनेमा के लिए एक सदमा लेकर आया। शनिवार देर रात दुबई में बॉलीवुड की पहली फीमेल सुपरस्टार श्रीदेवी की हृदय गति रुक जाने से मृत्यु हो गई। अपने भावपूर्ण अभिनय, शानदार नृत्य और चुलबुली मुस्कुराहट से लाखों दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री ने अचानक हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह दिया। हिन्दी सिनेमा में ‘लेडी अमिताभ’ कही जाने वाली श्रीदेवी 54 साल की थीं। उन्होंने 5 बार बेस्ट एक्ट्रेस का ‘फिल्म फेयर’ पुरस्कार जीता था और साल 2013 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से नवाजा गया था। गौरतलब है कि श्रीदेवी अपने पति बोनी कपूर के भांजे मोहित मारवाह की शादी में शामिल होने के लिए सपरिवार दुबई में थीं।

श्रीदेवी ने महज 4 साल की उम्र में तमिल फिल्म ‘थुनाइवन’ से अपनी आधी सदी लंबी अभिनय यात्रा शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में भी अभिनय किया लेकिन उन्हें देशभर में असली पहचान हिन्दी फिल्मों से मिली। हिन्दी फिल्मों में उन्होंने अपनी शुरुआत साल 1975 में आई फिल्म ‘जूली’ में बतौर बाल कलाकार की, लेकिन फिर उन्होंने दक्षिण का रुख कर लिया। इसके बाद उनकी वापसी ‘सोलहवां सावन’ से हुई। हिन्दी में बतौर लीड एक्ट्रेस यह उनकी पहली फिल्म थी। मगर सफलता उनको 1983 में जीतेन्द्र के साथ आई फिल्म ‘हिम्मतवाला’ से मिली। इस फिल्म ने उन्हें हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में ग्लैमरस अभिनेत्री के तौर पर स्थापित कर दिया। लेकिन इसी साल आई फिल्म ‘सदमा’ से उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का लोहा भी मनवा लिया। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसी लड़की की भूमिका निभाई थी, जो अपनी याद्दाश्त खो बैठती है।

80 और 90 के दशक में श्रीदेवी ने बॉलीवुड पर राज किया था। सच तो यह है कि उनके जैसी धाक और धमक किसी हीरोइन की नहीं रही। उनका जलवा कुछ ऐसा था कि उनका नाम ही फिल्म की सफलता की गारंटी होता था। ‘मवाली (1983)’, ‘तोहफा’ (1984), ‘नगीना’ (1986), ‘मिस्टर इंडिया (1987)’, ‘चांदनी’ (1989), ‘चालबाज’ (1989), ‘लम्हे’ (1991), ‘खुदा गवाह’ (1992), ‘गुमराह’ (1993), ‘जुदाई’ (1997) जैसी फिल्में इस बात का सबूत हैं। ये फिल्में ना केवल उनके करियर के लिए, बल्कि हिन्दी सिनेमा के लिए मील का पत्थर रही हैं।

श्रीदेवी ने हिन्दी फिल्मों में अपनी दूसरी पारी साल 2012 में आई फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ से शुरू की, जिसमें उनके काम को जबरदस्त सराहना मिली। पिछले साल आई फिल्म ‘मॉम’ में भी उनके काम की काफी तारीफ हुई थी। माना जाता है कि शाहरुख खान की आने वाली फिल्म ‘जीरो’ में भी उन्होंने बतौर मेहमान कलाकार काम किया है। ऐसे में यह उनकी आखिरी फिल्म होगी।

नियति का चक्र देखिए शून्य से शिखर की यात्रा करने वाली श्रीदेवी की आखिरी फिल्म का नाम ‘जीरो’ (यानि शून्य) था। हम चाहे लाख शिखर पर रहें, हमें जाना ‘शून्य’ में ही होता है। शून्य जो अनंत है, अटल है। पर श्रीदेवी का असामयिक निधन वाकई बेहद खलने वाला है। जीवन का अंतिम सत्य अपनी जगह है, पर हम तो यही कहेंगे… तुम्हें यूं ना जाना था ‘चांदनी’! बहरहाल, अभिनय-कला पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली श्रीदेवी को भावभीनी श्रद्धांजलि..!

‘मधेपुरा’ अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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कलाम का लेते हुए कमल ने की अपनी पार्टी की घोषणा

दक्षिण भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता कमल हासन ने एक नई राजनीतिक पार्टी बनाई, जिसका नाम उन्होंने ‘मक्कल नीति मय्यम’ रखा। दक्षिण भारत की राजनीति में फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों का कैसा दबदबा रहा है, यह छिपी हुई बात नहीं। उसे देखते हुए कमल का अपनी राजनीतिक पार्टी बनाना कोई अचंभे की बात नहीं। हां, उनकी पार्टी से जुड़ी दो बातें बेहद खास रहीं। पहली कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श बताया और अपनी पार्टी को ‘लोगों की पार्टी’ करार दिया और दूसरी कि उनकी पार्टी के लॉन्चिंग कार्यक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और आप के तमिलनाडु प्रभारी सोमनाथ प्रभारी मौजूद रहे। यह देश और खासकर दक्षिण भारत की राजनीति में एक नए तरह का संकेत है।

Kamal Haasan
Kamal Haasan waving his supporters .

बहरहाल, लॉन्चिंग कार्यक्रम के दौरान कमल हासन ने कहा कि आज की राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक उदाहरण होना चाहिए और मैं भाषण देने की बजाय लोगों के सुझावों की मांग करूंगा। इस दौरान उन्होंने अपनी पार्टी के झंडे का भी अनावरण किया। एक और महत्वपूर्ण बात यह रही कि लॉन्चिंग के दौरान केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने रिकॉर्डेड मैसेज के माध्यम से कमल हासन को पार्टी की स्थापना के लिए बधाई दी।

गौरतलब है कि इससे पहले कमल हासन ने बुधवार सुबह रामेश्वरम में डॉ. कलाम के घर जाकर उनके भाई मुहम्मद मुथुमीरन लेब्बाई मराईक्कायार से आशीर्वाद लिया। इस दौरान कलाम के परिजनों ने उन्हें पूर्व राष्ट्रपति के चित्र वाला स्मृति चिह्न भेंट किया। कमल हासन ने पीकारुंबु में मिसाइलमैन के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी थी।

जो भी हो, कमल हासन की अभिनय क्षमता पर शायद ही किसी को कोई संदेह हो, लेकिन राजनीति में वे कितने सफल होंगे यह देखने की बात होगी। सबसे अहम यह कि कलाम जैसी शख्सियत का नाम लेते हुए कमल और केजरीवाल क्या कमाल करते हैं, यह देखना अपने आप में बेहद दिलचस्प बात होगी..!

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जानें, नीरव मोदी का ये घोटाला कितना बड़ा है!

इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया – जरिया जो भी रहा हो, नीरव मोदी को आप जान जरूर गए होंगे। अरबपति हीरा व्यापारी नीरव मोदी, जिसने देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर 11 हजार 300 करोड़ का घोटाला कर डाला। यह देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला बताया जा रहा है।

बहरहाल, 11 हजार 300 करोड़ बहुत बड़ी रकम है, इतनी बड़ी कि एक सामान्य क्या विशिष्ट कोटि में आने वाला भारतीय भी अपनी पूरी उम्र में ऐसी रकम के बारे में सोचने या लिखने तक की हिमाकत नहीं कर सकता। धनपतियों की किंवदंती बन चुके टाटा, बिड़ला या अंबानी भी इस रकम के बारे में बहुत सोच-संभल कर कुछ बोलेंगे। ऐसे में ये जानना सचमुच दिलचस्प होगा कि असल में ये रकम कितनी बड़ी है? चलिए, जानने की कोशिश करते हैं।

जैसा कि आप जानते हैं, इसी महीने संसद में पेश हुए मोदी सरकार के आखिरी पूर्ण बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश के लिए एक बड़े तोहफे की घोषणा की। यह तोहफा ‘मोदी केयर’ के नाम से चर्चा में है। इसके तहत सरकार देश के 10 करोड़ परिवार यानि 50 करोड़ लोगों को 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा देगी। इसे दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम कहा जा रहा है और बजट में इसके लिए 2 हजार करोड़ रुपये का आवंटन भी किया गया है।

आपको बता दें कि आर्थिक मामलों के जानकारों ने जब यह संदेह जताया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 2 हजार करोड़ रुपये का फंड पर्याप्त नहीं है तो सरकार की ओर से कहा गया कि यह आरंभिक आवंटन है और जरूरत के हिसाब से और फंड की व्यवस्था की जाएगी। ‘मोदीकेयर’ पर कुल खर्च कितना आएगा, यह आंकड़ा हालांकि अभी स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन बकौल नीति आयोग 50 करोड़ लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस देने में करीब 11 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसका वहन केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे। इसका मतलब यह है कि नीरव मोदी के घोटाले की रकम और सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना ‘मोदीकेयर’ पर संभावित खर्च की राशि बराबर है। वैसे पीएनबी घोटाले का मोदी सरकार की इस योजना पर शायद ही कोई असर पड़े, लेकिन यह तुलना घोटाले की गंभीरता को तो जाहिर करता ही है।

जब बात चली ही है तो कुछ अन्य खर्चों को भी जानें, जिनसे इस घोटाले की तुलना दिलचस्प होगी। मसलन, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी को बजट भाषण में 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को जोड़ने वाले भारत नेट प्रॉजेक्ट की चर्चा करते हुए ऐलान किया था कि सरकार टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए 10,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसी तरह लाखों लोगों को रोजगार देने वाले मछली पालन और पशुपालन व्यवसाय के लिए भी केन्द्रीय बजट में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उधर उत्तर प्रदेश में गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना तहत पक्का मकान दिलाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्ष 2018-19 के बजट में 11,500 करोड रुपये का प्रावधान किया है।

अब शायद आपको अंदाजा हो रहा होगा कि नीरव मोदी के घोटाले की रकम वास्तव में कितनी बड़ी है। लेकिन हद तो यह है कि यहां भारत में उसको लेकर हाहाकार मचा हुआ है, और उधर वो मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक न्यूयॉर्क में दुनिया के सबसे बड़े होटलों में शुमार एक होटल के आरामगाह में ऐश कर रहा है..! आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी, कुछ करें ऐसे ‘मोदियों’ का..!!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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शिवलिंग का वैज्ञानिक रहस्य

क्या आप शिवलिंग का वैज्ञानिक रहस्य जानते हैं? या आप बता सकते हैं कि शिवलिंग पर जल और बेलपत्र क्यों चढ़ाते हैं? चलिए, जानने की कोशिश करते हैं। आप शिवलिंग के वैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारंभ में ही चौंक जाएंगे जब ये जानेंगे कि वास्तव में शिवलिंग एक प्रकार के न्यूक्लियर रिएक्टर हैं। जी हाँ, शिवलिंग और न्यूक्लियर रिएक्टर में काफी समानताएं हैं। आप गौर से देखें तो दोनों की संरचनाएं एक-सी हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो दोनों ही कहीं-न-कहीं उर्जा से संबंधित हैं। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि शिवलिंग पर लगातार जल प्रवाहित करने का नियम है। देश में, ज्यादातर शिवलिंग वहीं पाए जाते हैं जहां जल का भंडार हो, जैसे नदी, तालाब, झील इत्यादि। आप खंगाल कर देख लें, विश्व के सारे न्यूक्लियर प्लांट भी पानी (समुद्र) के पास ही हैं।

अब आगे बढ़ें। शिवलिंग की संरचना बेलनाकार होती है और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के रिएक्टर की संरचना भी बेलनाकार ही है। अगली खास बात यह कि न्यूक्लियर रिएक्टर को ठंडा रखने के लिये जो जल का इस्तेमाल किया जाता है उस जल को किसी और प्रयोग में नहीं लाया जाता। उसी तरह शिवलिंग पर जो जल चढ़ाया जाता है उसको भी प्रसाद के रूप में ग्रहण नहीं किया जाता है।

अरे रुकिए, बात अभी पूरी हुई कहाँ है! आगे सुनें। जैसा कि हम सभी जानते हैं, शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है। जहां से जल निष्कासित हो रहा है, उसको लांघा भी नहीं जाता है। ऐसी मान्यता है कि वह जल आवेशित (चार्ज) होता है। उसी तरह से जिस तरह से न्यूक्लियर रिएक्टर से निकले हुए जल को भी दूर ऱखा जाता है।

अब यह भी जानें कि शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और आक क्यों चढ़ाते हैं। ऐसा इसलिए कि सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है। शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्यूक्लियर रिएक्टर ही हैं तभी उनपर जल चढ़ाया जाता है, ताकि वो शांत रहे। महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे बिल्वपत्र, आक, धतूरा, गुड़हल आदि सभी न्यूक्लियर एनर्जी सोखने वाले हैं। एक बात और, शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है तभी जल निकासी नलिका को लांघने का नियम आप कहीं नहीं पाएंगे।

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उमा ने ‘असमय’ क्यों की ये घोषणा?

पिछले तीन दशकों में जिन कुछ नेताओं ने भाजपा की पहचान और स्थान बनने में बड़ी भूमिका निभाई है, उनमें एक नाम अत्यंत मुखर फायर ब्रांड नेता और वर्तमान केन्द्रीय मंत्री उमा भारती का भी है, इसमें कोई दो राय नहीं। पर ना जाने अचनाक क्या हुआ कि उमा भारती ने अपनी उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा, ‘अब मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगी, मगर पार्टी के लिए काम करती रहूंगी।’ ‘संन्यासिन’ का सक्रिय राजनीति से अचानक इस तरह ‘संन्यास’ समझ से परे है! खास तौर पर तब जबकि मध्यप्रदेश के चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। कहीं ये पश्चिम बंगाल और राजस्थान के उपचुनावों में भाजपा को मिली हार का आफ्टर इफेक्ट तो नहीं?

बहरहाल, उमा का कहना है कि वह दो बार सांसद रही हैं और पार्टी के लिए काफी काम किया है, उसी के चलते इतनी कम उम्र में उनका शरीर जवाब देने लगा है। कमर और घुटनों में दर्द के चलते चलने-फिरने में परेशानी होती है। हालांकि पार्टी के लिए वह प्रचार करती रहेंगी। राम मंदिर के सवाल पर उन्होंने कहा कि न्यायालय अपना फैसला सुना चुका है, लिहाजा आपसी सहमति से राम मंदिर का निर्माण हो जाना चाहिए।

बता दें कि उमा भारती खजुराहो, भोपाल के बाद वर्तमान में झांसी से सांसद हैं। वह बड़ा मलेहरा और चरखारी से विधायक रह चुकी हैं। उमा भारती बुंदेलखंड की बड़ी प्रभावशाली नेता और पूरे देश में हिंदूवादी नेता के तौर पर अपनी पहचान रखती हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उमा भारती के इस ऐलान को लेकर राजनीति के गलियारे में कई तरह के कयास लगने लगे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस स्थिति से कैसे निबटती है!

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“भारत के अंदर कोई भी बाबर की औलाद नहीं”: गिरिराज

अपने बयानों के कारण विवादों में, विवादों के कारण चर्चा में और चर्चा के कारण केन्द्र में बड़ा पद पाने और मंत्रिमंडल में फेरबदल के बावजूद उस पद को बनाए रखने में सफल रहने वाले गिरिराज सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस बार उन्होंने कहा है, भारत में सभी राम की संतानें हैं, यहां कोई बाबर की औलाद नहीं है। जी हाँ, राम मंदिर के संदर्भ में सवाल पूछे जाने पर केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “भारत के अंदर कोई भी बाबर की औलाद नहीं है। यहां सभी राम की संतानें हैं, राम के खानदान से हैं। अगर मैं धर्म परिवर्तन कर लूं तो क्या मेरे बच्चों के, आने वाली पीढ़ियों के पूर्वज बदल जाएंगे। वे तो हिंदू ही रहेंगे।”

गिरिराज ने आगे कहा, “राम मंदिर भारत में नहीं बनेगा तो क्या पाकिस्तान में बनेगा? राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में ही होगा और इसके लिए हिंदू-मुस्लिमों को साथ आना होगा।” यही नहीं, इसके बाद उन्होंने कहा, “मुसलमानों में भी शिया समुदाय के लोग तैयार हैं, लेकिन सुन्नी नहीं तैयार हैं। सुन्नियों को भी शिया समुदाय की तरह मान लेना चाहिए।”

गौरतलब है कि बिहार के नवादा से सांसद गिरिराज 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान नरेंद्र मोदी के विरोधियों के पाकिस्तान चले जाने संबंधी बयान के बाद खासतौर से चर्चा में आए थे। इसके बाद तो उनके विवादित बयान का जैसे सिलसिला ही चल पड़ा। कहना गलत ना होगा कि ऐसे बयान या तो वे चर्चा में बने रहने के लिए देते हैं या फिर उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता ही कुछ ऐसी है। दोनों ही लिहाज से भारत की ‘सत्याग्रही’ राजनीति और ‘समावेशी’ समाज के लिए ये चिन्ता की बात है।

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